Amazon दे रहा Galaxy S26 Ultra पर शानदार छूट, मिलेगा ₹37,000 से ज्यादा का फायदा! जानें कीमत

अगर आप एक ऐसा फोन खरीदने की सोच रहे हैं, जो प्रीमियम भी हो और आपके बजट में भी हो तो यह आर्टिकल आपको जरूर पढ़नी चाहिए। दरअसल, Amazon पर Samsung Galaxy S26 Ultra 5G (12GB RAM + 256GB स्टोरेज) को ऑफर के तहत 87,400 रुपये की प्रभावी कीमत में खरीदा जा सकता है। इसमें मौजूदा डिस्काउंट के साथ योग्य स्मार्टफोन एक्सचेंज और कैशबैक ऑफर का फायदा शामिल है। फिलहाल यह स्मार्टफोन Amazon पर 1,24,999 रुपये में लिस्टेड है, जबकि इसकी MRP 1,69,999 रुपये है।

₹87,400 की कीमत कैसे पाएं

Samsung Galaxy S26 Ultra 5G की कीमत 87,400 रुपये तक लाने के लिए आपको Amazon पर मिल रहे अलग-अलग ऑफर्स का फायदा एक साथ उठाना होगा।

अगर आपके पास अच्छी कंडीशन में Apple iPhone 16 (128GB) है, तो उसे एक्सचेंज करने पर 31,350 रुपये तक का एक्सचेंज वैल्यू मिल सकता है। इसके अलावा, एलिजिबल क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर 6,249 रुपये तक का Amazon Pay Balance कैशबैक भी मिल सकता है।

इन दोनों ऑफर्स का फायदा लेने के बाद Samsung Galaxy S26 Ultra 5G की प्रभावी कीमत 87,400 रुपये तक आ जाती है।

EMI और दूसरे ऑफर

ग्राहक एलिजिबल कार्ड पर 18 महीने के लिए ₹6,944 प्रति महीने से शुरू होने वाली ‘नो कॉस्ट EMI’ का विकल्प भी चुन सकते हैं। चुने गए बैंक और पेमेंट के तरीके के आधार पर पेमेंट से जुड़े अतिरिक्त ऑफर भी मिल सकते हैं।

Samsung Galaxy S26 Ultra के फीचर्स

Samsung Galaxy S26 Ultra में 200MP का प्राइमरी कैमरा दिया गया है। फोन में Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर, 5,000mAh की बैटरी, 12GB RAM और 256GB स्टोरेज मिलती है। इसके अलावा, फोन में Samsung के AI-powered फीचर्स भी दिए गए हैं। इनमें Photo Assist, Creative Studio और Built-in Privacy Display जैसे फीचर्स शामिल हैं।

ध्यान रखने वाली बातें

₹87,400 की कीमत एक ‘इफेक्टिव प्राइस’ (असरदार कीमत) है और यह ज्यादा से ज्यादा एक्सचेंज वैल्यू और कैशबैक ऑफर का फायदा उठाने के बाद ही मिलती है। एक्सचेंज की रकम पुराने डिवाइस की हालत और पिकअप के समय सफल वेरिफिकेशन पर निर्भर करती है, जबकि कैशबैक के लिए संबंधित कार्ड की शर्तें और नियम लागू होते हैं।

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अमीर बनने का सीक्रेट फॉर्मूला! आज ही अपनाएं ये 5 मनी हैबिट्स, तेजी से बढ़ेगी आपकी वेल्थ

फाइनेंशियल सिक्योरिटी हासिल करना और प्रॉपर्टी या वेल्थ क्रिएट करने के लिए जरूरी नहीं कि सिर्फ आपकी कमाई ज्यादा हो। यह इस बात पर भी डिपेंड करता है कि आप अपने कमाए हुए पैसे को कितने बेहतर तरीके से मैनेज करते हैं, बचाते हैं और इन्वेस्ट करते हैं। लंबे समय में वेल्थ क्रिएशन करने और अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने के लिए सही फाइनेंशियल हैबिट्स को अपनाना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं पैसे की बचत और निवेश से जुड़े उन व्यावहारिक नियमों के बारे में जो आपकी वित्तीय स्थिति को एक मजबूत रास्ते पर ला सकते हैं।

इमरजेंसी फंड बनाएं

नौकरी छूटने, मेडिकल बिल या अचानक आए किसी भी खर्च जैसी स्थिति में इमरजेंसी फंड वित्तीय सपोर्ट देता है। फाइनेंशियल प्लानर आमतौर पर सलाह देते हैं कि आपको बेसिक खर्चों के करीब तीन से छह महीने के बराबर की राशि किसी ऐसे खाते में रखनी चाहिए जहां से उसे आसानी से निकाला जा सके।

बचत को प्राथमिकता दें

सैलरी आते ही सबसे पहले बचत की आदत डालें। इसके लिए अपने वेतन में से एक निश्चित राशि को बचत या निवेश खातों में तुरंत ऑटोमैटिक ट्रांसफर करने की व्यवस्था करें। नियमित रूप से पैसे को सेविंग्स अकाउंट में ट्रांसफर करने से बचत में निरंतरता बनी रहती है और पैसे खर्च करने का ऑप्शन भी कम होता है।

खर्चों पर नजर रखें

अपने रोजाना के खर्चों को ट्रैक करने से यह स्पष्ट हो जाता है कि आपका पैसा वास्तव में कहां जा रहा है। गैर-जरूरी सब्सक्रिप्शन, बार-बार किए जाने वाले छोटे-छोटे खर्चों और दूसरे ऐसे पैटर्न की पहचान करने के लिए बजटिंग ऐप, स्प्रेडशीट या सिंपल एक्सपेंस ट्रैकर का इस्तेमाल करें।

क्रेडिट कार्ड का समझदारी से इस्तेमाल करें

सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने पर क्रेडिट कार्ड काफी मददगार साबित हो सकते हैं। अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने से बचें और ड्यू डेट तक पूरे बिल का भुगतान करने का लक्ष्य रखें। जिम्मेदारी से क्रेडिट का इस्तेमाल करने से एक स्वस्थ क्रेडिट हिस्ट्री बनाए रखने में मदद मिलती है और भारी लेट फीस या इंटरेस्ट से बचा जा सकता है।

जल्दी निवेश शुरू करें

कम उम्र में या जल्दी निवेश शुरू करने से आपके पैसे को कम्पाउंडिंग के जरिए बढ़ने का अधिक समय मिलता है। लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए निवेशक जिन विकल्पों पर विचार करते हैं उनमें कम लागत वाले इंडेक्स फंड भी शामिल हैं। हालांकि निवेश के विकल्पों का चयन हमेशा पर्सनल फाइनेंस टारगेट, जोखिम लेने की क्षमता और समय अवधि के अनुसार ही होना चाहिए।

स्किल्स बढ़ाएं और सैलरी नेगोशिएट करें

अपनी व्यावसायिक योग्यताओं और स्किल्स को सुधारने से समय के साथ आपकी कमाने की क्षमता बढ़ सकती है। सर्टिफिकेट्स, स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग और वर्कशॉप आपको बेहतर अवसरों के काबिल बनाने में मदद करते हैं।

इसके अलावा आपकी सैलरी आपके भविष्य के बोनस, बचत और रिटायरमेंट योगदान को प्रभावित करती है। इसलिए जॉब ऑफर या अप्रेजल के दौरान अपनी इंडस्ट्री के सैलरी लेबल का रिसर्च करें। अपने लिए उचित सैलरी को मैनेजमेंट के साथ हमेशा कॉन्फिडेंस से डिस्कस करें।

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SBI Cards के शेयर में आएगी 34% तक गिरावट! बर्नस्टीन ने घटाया टारगेट प्राइस

SBI कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज लिमिटेड के शेयरों में 21 अगस्त को गिरावट है। दिन में शेयर की कीमत बीएसई पर पिछले बंद भाव से 1.4 प्रतिशत तक टूटकर 637 रुपये के लो तक गई। दरअसल ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने शेयर के लिए प्राइस टारगेट 610 रुपये से घटाकर 430 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। हालांकि ‘अंडरपरफॉर्म’ रेटिंग को बरकरार रखा है। नया टारगेट शेयर के पिछले क्लोजिंग प्राइस से 33 प्रतिशत कम है।

बर्नस्टीन का कहना है कि रिवॉल्वर्स लेड क्रेडिट कार्ड मॉडल में बड़ा ढांचागत बदलाव हो रहा है, और इस दबाव के कम होने या पलटने के बहुत कम संकेत हैं। इस मॉडल से अर्थ है एक ऐसा कार्ड बिजनेस, जिसमें ग्राहक बिल का कुछ हिस्सा चुकाकर बाकी रकम को आगे बढ़ाते रहते हैं और कंपनी को उस बकाया रकम पर ब्याज से कमाई होती है। चूंकि SBI Cards पूरी तरह से क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनी है, इसलिए उसे इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ा है।

बर्नस्टीन को अभी भी रिवॉल्वर्स-टू-स्पेंड्स रेश्यो में और गिरावट से नुकसान का जोखिम दिख रहा है। इसके कारण क्रेडिट कॉस्ट में सुधार के बावजूद नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) और कमाई में बढ़ोतरी पर दबाव बना रह सकता है। ब्रोकरेज ने SBI कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज के लिए अर्निंग्स-प्रति-शेयर (EPS) अनुमानों को घटा दिया है।

SBI Cards का रिवॉल्वर्स-टू-स्पेंड्स रेश्यो घटकर 2.8 प्रतिशत

SBI कार्ड्स के मामले में रिवॉल्वर्स-टू-स्पेंड्स रेश्यो जून 2026 तिमाही में घटकर 2.8 प्रतिशत रह गया। बर्नस्टीन का कहना है कि इस गिरावट के कारण प्रति यूनिट खर्च पर होने वाले मुनाफे में भारी कमी आई है। अहम बात यह है कि रिवॉल्वर्स में आई गिरावट की भरपाई EMI लोन में बढ़ोतरी से नहीं हो पाई है। हालांकि SBI कार्ड्स ने कम ऑपरेटिंग खर्चों के जरिए कमाई पर पड़ने वाले असर को कुछ हद तक कम किया है, लेकिन बर्नस्टीन का कहना है कि अब इसका असर फीस/नॉन-इंटरेस्ट इनकम-टू-स्पेंड्स रेश्यो पर पड़ने लगा है।

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शेयर 6 महीनों में 18 प्रतिशत कमजोर

SBI Cards का मार्केट कैप 61400 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर 6 महीनों में 18 प्रतिशत और साल 2026 में अब तक 25 प्रतिशत नीचे आया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 68.86 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। कंपनी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 5,040.55 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 664.44 करोड़ रुपये रहा। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान स्टैंडअलोन रेवेन्यू 19,899.63 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 2,166.71 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

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Samsung Galaxy S26 Ultra पर बंपर ऑफर, मिल रहा ₹37,000 से ज्यादा का डिस्काउंट, जानें कीमत

Samsung Galaxy S26 Ultra: Samsung Galaxy S26 Ultra को Amazon पर ₹87,400 की प्रभावी कीमत में खरीदा जा सकता है। इसमें फोन की कीमत के साथ एक्सचेंज वैल्यू और अधिकतम मिलने वाला कैशबैक शामिल है। फिलहाल Galaxy S26 Ultra Amazon पर ₹1,24,999 में लिस्टेड है, जबकि इसकी लिस्टेड MRP ₹1,69,999 है।

हालांकि, ₹87,400 की प्रभावी कीमत तभी आपको मिल पाएगी, जब आपको एक्सचेंज पर बताई गई पूरी वैल्यू मिले और आप अधिकतम कैशबैक ऑफर के लिए पात्र हों।

Samsung Galaxy S26 Ultra: एक्सचेंज ऑफर

Amazon पर Samsung Galaxy S26 Ultra खरीदते समय Apple iPhone 16 (8GB+128GB) को एक्सचेंज करने पर ₹31,350 तक की एक्सचेंज वैल्यू मिल रही है। यह वैल्यू Amazon के एक्सचेंज पेज पर दिखाई गई खास कंडीशन और कॉन्फिगरेशन वाले फोन के लिए है।

हालांकि, यह एक्सचेंज वैल्यू तभी मिलेगी जब पुराना फोन बताई गई कंडीशन में हो। डिलीवरी के समय फोन की जांच और वेरिफिकेशन किया जाएगा, जिसके बाद एक्सचेंज की फाइनल वैल्यू तय होगी।

चुने गए एक्सचेंज ऑफर के लिए गणना इस प्रकार है:

ऑफररकम
Galaxy S26 Ultra की कीमत₹1,24,999
iPhone 16 की एक्सचेंज वैल्यू₹31,350
एक्सचेंज के बाद कीमत₹93,649
अधिकतम कैशबैक₹6,249 तक
प्रभावी कीमत₹87,400

Amazon यह भी बताता है कि अगर डिलीवरी के समय पुराना फोन बताई गई कंडीशन के मुताबिक नहीं मिलता है, तो भी कुछ मामलों में ग्राहक आंशिक एक्सचेंज डिस्काउंट का फायदा ले सकते हैं। इसके लिए उन्हें बची हुई रकम डिलीवरी एजेंट को देनी होगी।

वहीं, अगर पुराना फोन वेरिफिकेशन में पूरी तरह फेल हो जाता है, तो तय शर्तों के तहत ग्राहक कैश या कार्ड से एक्सचेंज डिस्काउंट की रकम चुकाकर नया फोन अपने पास रख सकते हैं।

6,249 रुपये तक का कैशबैक

Galaxy S26 Ultra की लिस्टिंग पर ₹6,249 तक का कैशबैक भी दिया जा रहा है। यह कैशबैक Amazon Pay Balance के रूप में मिलेगा और इसके लिए चुनिंदा क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करना होगा। हालांकि, आपको मिलने वाला कैशबैक कितना होगा, यह आपके कार्ड और ऑफर की लागू शर्तों पर निर्भर करेगा।

प्रोडक्ट पेज पर नो-कॉस्ट EMI और बैंक डिस्काउंट जैसे कुछ अन्य ऑफर्स भी दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इन ऑफर्स को ₹87,400 की प्रभावी कीमत में अपने आप शामिल नहीं किया जा सकता, क्योंकि इनका लाभ तभी मिलेगा जब आपका पेमेंट संबंधित ऑफर की शर्तों के तहत योग्य होगा।

Samsung Galaxy S26 Ultra: स्पेसिफिकेशन्स

यह ऑफर Galaxy S26 Ultra के 12GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट के लिए है। इस फोन में 200MP कैमरा, 5,000mAh की बैटरी और Snapdragon 8 Elite Gen 5 Galaxy प्रोसेसर दिया गया है।

Samsung ने इसमें बिल्ट-इन प्राइवेसी डिस्प्ले, Androi 16, One UI 8.5 और AI-पावर्ड फीचर्स जैसे नाउ Now Nudge, Finder, Photo Assist और Creative Studio भी शामिल किए हैं।

यह फोन 60W तक की चार्जिंग और 25W तक की वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करता है।

क्या-क्या Galaxy S26 Ultra की यह डील खरीदने लायक है?

₹1,24,999 की कीमत पर Galaxy S26 Ultra अभी भी एक प्रीमियम स्मार्टफोन है। हालांकि, अगर आपके पास पहले से iPhone 16 है, तो एक्सचेंज ऑफर आपकी शुरुआती लागत को काफी कम कर सकता है। अगर iPhone 16 पर ₹31,350 की पूरी एक्सचेंज वैल्यू और ₹6,249 का अधिकतम कैशबैक मिलता है, तो Galaxy S26 Ultra की प्रभावी कीमत ₹87,400 रह जाती है।

हालांकि, अंतिम बचत एक्सचेंज किए गए फोन की स्थिति और वेरिफिकेशन के साथ-साथ कैशबैक ऑफर की पात्रता पर निर्भर करेगी।

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46 पैसे का बिल चुकाना भूला शख्स, बैंक ने ठोक दिया ₹1200 का जुर्माना! भड़के यूजर ने X पर सुनाई खरी-खोटी

Credit Card Bill Viral News: क्रेडिट कार्ड बिल का पेमेंट करते समय अगर आप एक रुपये से भी कम की चूक करते हैं, तो यह आपको कितना भारी पड़ सकता है? इसका एक ताजा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक शख्स ने अपने क्रेडिट कार्ड बिल में से महज 46 पैसे कम चुकाए, जिसके बदले बैंक ने उस पर ₹1200 से अधिक का जुर्माना और अन्य फीस लगा दी।

पीड़ित ग्राहक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए एचडीएफसी बैंक के कस्टमर केयर अधिकारियों को ‘अज्ञानी और घमंडी’ तक कह दिया। यह पोस्ट देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गई और लोग बैंक के इस रवैये पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देने लगे।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित ग्राहक को बैंक की तरफ से ₹10,649.46 का क्रेडिट कार्ड बिल मिला था। भुगतान करते समय गलती से ग्राहक ने दशमलव के बाद के पैसे छोड़ दिए और सिर्फ ₹10,649 का ही पेमेंट किया। यानी कुल बिल में से महज 46 पैसे बकाया रह गए। इस 46 पैसे के मामूली शॉर्टफॉल की वजह से बैंक ने ग्राहक पर ₹1200 से ज्यादा का लेट पेमेंट चार्ज और पेनल्टी ठोक दी।

इस पर ग्राहक ने X पर HDFC Bank को टैग करते हुए लिखा, ‘प्रिय HDFC बैंक, आपने मुझे ₹10,649.46 का क्रेडिट कार्ड बिल भेजा था। गलती से मैंने ₹10,649.00 का भुगतान किया, 46 पैसे छूट गए और आपने 46 पैसे की इस चूक के लिए मुझ पर ₹1200 से ज्यादा का लेट पेमेंट चार्ज लगा दिया? क्या आप इसे जल्द से जल्द रिवर्स करेंगे?

यूजर बैंक के कस्टमर सपोर्ट पर भी भड़ास निकाली और लिखा कि वहां के प्रतिनिधि जितने अज्ञानी हैं, उतने ही घमंडी भी हैं।

सोशल मीडिया पर भड़के लोग, मिली तरह-तरह की सलाह

यह पोस्ट सामने आते ही यूजर्स बैंक के इस एक्शन की आलोचना करने लगे और अपने पुराने अनुभव शेयर करने लगे। एक यूजर ने लिखा, ‘क्रेडिट कार्ड कैंसल करो, उसके 4 टुकड़े करके कचरे के डिब्बे में फेंक दो। उन्हें कोर्ट में साबित करने दो कि 0.46 रुपये का ब्याज ₹1200 कैसे बन गया।’

एक अन्य यूजर ने सुझाव दिया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, ₹10,649.46 जैसे आंकड़े को राउंड ऑफ करके ₹10,649 किया जाना चाहिए, क्योंकि 50 पैसे से कम की किसी भी भिन्न को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

कुछ यूजर्स ने HDFC बैंक के साथ अपने बुरे अनुभवों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भी बैंक के खराब व्यवहार के कारण अपने अकाउंट्स और एफडी बंद करवा दिए थे।

हालांकि, एक वर्ग ऐसा भी था जिसने ग्राहक को ही जिम्मेदार ठहराया। एक यूजर ने लिखा, ‘यह आपकी गलती है, भाई। इसे बैंक पर मत डालो। यह उन लोगों के लिए एक बहुत अच्छा सबक है जो हर चीज को हल्के में लेते हैं।’

क्रेडिट कार्ड पेनल्टी और भारी-भरकम चार्ज से कैसे बचें?

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही बड़ा नुकसान करा सकती है। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए इन बातों का खास ध्यान रखें:

Auto-Debit ऑन रखें: अपने बैंक अकाउंट से क्रेडिट कार्ड बिल का ‘Total Amount Due’ ऑटो-डेबिट मोड पर सेट करें, ताकि दशमलव के पैसे भी अपने आप सही समय पर कट जाएं।

राउंड ऑफ न करें: जब भी खुद से मैनुअल पेमेंट करें, बिल में लिखी दशमलव वाली सटीक रकम ही ट्रांसफर करें, खुद से कोई आंकड़ा न घटाएं।

गलती होने पर तुरंत नोडल अधिकारी से संपर्क करें: अगर गलती से ऐसा लेट चार्ज लग भी जाए, तो कस्टमर केयर के अलावा बैंक के Grievance Redressal Officer / Nodal Officer को ईमेल करें और चार्जेस रिवर्स करने की रिक्वेस्ट करें।

RBI Ombudsman में शिकायत करें: अगर बैंक आपकी जायज बात नहीं सुनता है और पैसे वापस नहीं करता है, तो आप आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल के पास ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

डिजिटल दौर में ऑटोमेटेड बैंकिंग सिस्टम बिल का पूरा भुगतान न होने पर अपने आप लेट फीस और पेनल्टी जनरेट कर देते हैं, फिर चाहे बकाया राशि 1 रुपये से भी कम क्यों न हो। ऐसे में समझदारी इसी में है कि बिल की पाई-पाई का भुगतान करें ताकि बैंकों के इन कड़े पेनल्टी रूल्स से बचा जा सके।

Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया (X) पर वायरल यूजर पोस्ट पर आधारित है। यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। मनीकंट्रोल इसकी पुष्टि नहीं करता है।

10 लाख रुपये की FD पर कहां होगी सबसे ज्यादा कमाई? जानें कौन-कौन से बैंक दे रहे 8% से ज्यादा ब्याज

Best return on FDs: अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखते हुए उस पर बेहतर रिटर्न पाने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) हमेशा से भारतीय निवेशकों की पहली पसंद रहा है। अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक अगर आप 10 लाख रुपये की बड़ी रकम एफडी में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो स्मॉल फाइनेंस बैंक आपको सबसे ज्यादा ब्याज दे रहे हैं। एफडी इंट्रेस्ट रेट में एक छोटा सा अंतर भी लंबे समय में आपकी कुल कमाई को काफी बढ़ा सकता है। खासकर ज्यादा अमाउंट इन्वेस्ट करने वाले सीनियर सिटिजंस के लिए ये काफी फायदेमंद साबित होता है। बिना कोई एक्स्ट्रा जोखिम लिए अपनी इंट्रेस्ट इनकम को मैक्सिमाइज करने के लिए जरूरी है कि आपको अलग अलग बैंकों की ओर से ऑफर किए जा रहे इंट्रेस्ट रेट की पूरी जानकारी हो।

स्मॉल फाइनेंस बैंक दे रहे 8.10% तक का सबसे ज्यादा ब्याज

10 लाख रुपये के निवेश पर सबसे अधिक रिटर्न देने के मामले में स्मॉल फाइनेंस बैंक सबसे आगे हैं। अगस्त 2026 तक स्मॉल फाइनेंस बैंकों में 8.10 फीसदी तक के इंट्रेस्ट रेट ऑफर किए जा रहे हैं। इसकी पूरी लिस्ट यहां नीचे देखी जा सकती है-

सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक (Suryoday Small Finance Bank): 8,10 फीसदी तक की ब्याज दर।

उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक (Utkarsh Small Finance Bank): 8.10 फीसदी तक की ब्याज दर।

शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक (Shivalik Small Finance Bank): 8 फीसदी तक की ब्याज दर।

जन स्मॉल फाइनेंस बैंक (Jana Small Finance Bank): 8 फीसदी तक की ब्याज दर।

इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक (Equitas Small Finance Bank): 8 फीसदी तक की ब्याज दर।

उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक (Ujjivan Small Finance Bank): 7.80 फीसदी तक की ब्याज दर।

स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक (Slice Small Finance Bank): 7.75 फीसदी तक की ब्याज दर।

प्राइवेट बैंक ऑफर कर रहे 7.50% तक इंट्रेस्ट

निजी क्षेत्र के बैंक भी अलग अलग टेन्योर के लिए आकर्षक एफडी इंट्रेस्ट रेट ऑफर कर रहे हैं।

डीसीबी बैंक (DCB Bank): 7.50 फीसदी तक की ब्याज दर।

बंधन बैंक (Bandhan Bank): 7.45 फीसदी तक की ब्याज दर।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC FIRST Bank): 7.25 फीसदी तक की ब्याज दर।

कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank): 6.80 फीसदी तक की ब्याज दर।

एक्सिस बैंक (Axis Bank): 6.50 फीसदी तक की ब्याज दर।

एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank): 6.50 फीसदी तक की ब्याज दर।

आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank): 6.50 फीसदी तक की ब्याज दर।

सरकारी बैंक ऑफर कर रहे स्टेबल और सेफ रिटर्न

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पंजाब एंड सिंध बैंक और बैंक ऑफ इंडिया अपने ग्राहकों को एफडी पर सबसे अधिक ब्याज दे रहे हैं:

पंजाब एंड सिंध बैंक (Punjab & Sind Bank): 6.85 फीसदी तक की ब्याज दर।

बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India): 6.85 फीसदी तक की ब्याज दर।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India): 6.75 फीसदी तक की ब्याज दर।

बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda): 6.75 फीसदी तक की ब्याज दर।

इंडियन बैंक (Indian Bank): 6.65 फीसदी तक की ब्याज दर।

पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank): 6.60 फीसदी तक की ब्याज दर।

भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India): 6.45 फीसदी तक की ब्याज दर।

विदेशी बैंक कितना इंट्रेस्ट दे रहे?

भारत में काम कर रहे विदेशी बैंकों में डॉयचे बैंक सबसे बेहतर इंट्रेस्ट रेट ऑफर कर रहा है-

डॉयचे बैंक (Deutsche Bank): 7 फीसदी तक की ब्याज दर।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक (Standard Chartered Bank): 6.60 फीसदी तक की ब्याज दर।

एचएसबीसी बैंक (HSBC Bank): 5.50 फीसदी तक की ब्याज दर।

एक्सपर्ट्स की सलाह: कैसे करें 10 लाख रुपये का सुरक्षित निवेश?

मार्केट एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि अगर आप 10 लाख रुपये का निवेश कर रहे हैं तो पूरी रकम एक ही बैंक में रखने के बजाय इसे कई बैंकों में बांटकर जमा करें। ऐसा करने से आप हर बैंक में मिलने वाले 5 लाख रुपये के जमा बीमा कवर के दायरे में सुरक्षित रहते हैं। हाई रिटर्न पाने के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंकों का चयन समझदारी से करें और एफडी की समयावधि का चुनाव अपनी लिक्विडिटी यानी पैसे की जरूरत के हिसाब से करें। जमा बीमा सुरक्षा और स्थिर रिटर्न के चलते रिटायर लोगों के लिए एफडी आज भी एक बेहद भरोसेमंद निवेश माध्यम बनी हुई है।

15 अगस्त सेल में मची लूट! Amazon, Flipkart या Vijay Sales, जानें कहां क्रेडिट कार्ड से खरीदारी पर होगी सबसे ज्यादा बचत

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

7,000mAh बैटरी वाला Realme 16x 5G भारत में बिक्री के लिए उपलब्ध, देखें कीमत और ऑफर

अगर आप नया स्मार्टफोन लेने की सोच रहे हैं, तो Realme का Realme 16x 5G फोन में भारत में अब खरीदने के लिए उपलब्ध है। इस हैंडसेट में MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट, 6.8-इंच की डिस्प्ले, 50MP रियर कैमरा और 8MP सेल्फी कैमरा दिया गया है। इसके अलावा, Realme 16x 5G में 7,000mAh की बैटरी दी गई है, जो 45W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।

Realme 16x 5G की भारत में कीमत और ऑफर

भारत में Realme 16x 5G के बेस वेरिएंट (4GB RAM और 128GB स्टोरेज) की कीमत ₹25,999 से शुरू होती है। जबकि यह 6GB + 128GB और 6GB + 256GB RAM और स्टोरेज कॉन्फ़िगरेशन में भी उपलब्ध है, जिनकी कीमत क्रमशः ₹27,999 और ₹30,999 है।

बता दें कि Realme 16x 5G को Endurance Brown और Glory White कलर ऑप्शन में लॉन्च किया गया है। इसे Flipkart और Realme India की वेबसाइट के जरिए खरीदा जा सकता है।

Realme 16x 5G पर मिल रहे ऑफर्स

पहली सेल के तहत, ग्राहक ₹2,000 की सीधी छूट का फायदा उठा सकते हैं। इससे तीनों वेरिएंट की असल कीमत घटकर क्रमशः ₹23,999, ₹25,999 और ₹28,999 हो जाती है। इसके अलावा, खरीदार क्रेडिट कार्ड EMI ट्रांजैक्शन पर ₹1,000 की छूट या ₹3,000 तक का एक्सचेंज ऑफर भी पा सकते हैं।

इसके साथ ही, कंपनी उन लोगों को 10 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI की सुविधा दे रहा है, जो स्मार्टफोन की पूरी कीमत एक बार में नहीं चुकाना चाहते।

Realme 16x 5G के फीचर्स और स्पेसिफिकेशन्स

डुअल-सिम (नैनो) वाला Realme 16x 5G, Android 16 पर आधारित Realme UI 7.0 पर चलता है। इसमें 6.8-इंच की HD+ (720×1,570 पिक्सल) LCD स्क्रीन है, जिसका रिफ्रेश रेट 144Hz तक, टच सैंपलिंग रेट 180Hz और ब्राइटनेस 1200 निट्स (HBM) तक है।

इस हैंडसेट में MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट दिया गया है, साथ ही इसमें 6GB तक RAM और 256GB तक ऑनबोर्ड स्टोरेज मिलती है। Realme ने इसमें 5,300 sq mm का AirFlow वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम और GT Boost गेमिंग ऑप्टिमाइजेशन इंजन भी दिया है।

कैमरे की बात करें तो Realme 16x 5G में f/1.8 अपर्चर वाला 50MP का रियर कैमरा है। इसमें सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए f/2.0 अपर्चर वाला 8MP का फ्रंट कैमरा भी दिया गया है।

इसके अलावा, इस हैंडसेट में कनेक्टिविटी के लिए Wi-Fi, 5G, Bluetooth 5.3 और USB Type-C पोर्ट जैसे ऑप्शन मिलते हैं। पावर की बात करें तो, Realme 16x 5G में 7,000mAh की बैटरी है दी गई है, जो 45W फास्ट चार्जिंग, बायपास चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करती है। इसका साइज 166.47 x 78.23 x 8.88mm और वजन 217g है।

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ITR Notice: टाइम पर ITR भर दिया? फिर भी आ सकता है इनकम टैक्स का नोटिस! जानिए बचाव का सही तरीका

Income Tax Notice After Filing ITR: अगर आपने 31 जुलाई या तय समयसीमा के भीतर अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर दिया है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपकी जिम्मेदारी खत्म हो गई। समय पर ITR फाइल करने से सिर्फ डेडलाइन पूरी होती है, लेकिन यह इस बात की गारंटी नहीं है कि आपका रिटर्न पूरी तरह सही और सटीक है।

इनकम टैक्स विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों (AIS/फॉर्म 26AS) और आपके द्वारा दी गई जानकारी में जरा सी भी गड़बड़ी पाई जाने पर आपको इनकम टैक्स का नोटिस आ सकता है।

समय पर ITR भरने के बाद भी क्यों आता है टैक्स नोटिस?

विशेषज्ञों के मुताबिक, टैक्स रिटर्न दाखिल करना पहला कदम है। नोटिस आने के ये कुछ प्रमुख कारण हैं:

  • TDS और टैक्स क्रेडिट मिसमैच: फॉर्म 26AS या AIS में दिख रहा TDS/TCS और रिटर्न में क्लेम किया गया TDS आपस में मेल न खाना।
  • छूटी हुई आय: सेविंग्स अकाउंट का ब्याज, FD का ब्याज, शेयर या म्यूचुअल फंड से मिला डिविडेंड और कैपिटल गेंस को ITR में न दर्शाना।
  • हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन: जमीन-जायदाद की खरीद-बिक्री, क्रेडिट कार्ड का भारी बिल या बड़े कैश डिपॉजिट का ब्योरा रिटर्न से अलग होना।
  • गलत ITR फॉर्म चुनना: अपनी आय के स्रोतों के हिसाब से सही फॉर्म (ITR-1, 2, 3 या 4) की जगह गलत फॉर्म चुनना।
  • गलत डिडक्शन या क्लेम: बिना किसी पक्के सबूत के फर्जी HRA, 80C या अन्य टैक्स छूट का क्लेम करना।

इनकम टैक्स नोटिस के प्रकार

विभाग अलग-अलग कारणों से अलग-अलग धाराओं के तहत नोटिस भेजता है:

सेक्शन 143(1) इंटिमेशन नोटिस: यह रिटर्न प्रोसेस होने के बाद आता है। अगर विभाग को आपकी आय, टैक्स क्रेडिट या डिडक्शन की गणना में कोई गणितीय गलती मिलती है, तो यह इंटिमेशन जारी किया जाता है।

सेक्शन 139(9) डिफेक्टिव रिटर्न: रिटर्न में कोई जानकारी अधूरी रहने या गलत फॉर्म चुनने पर ‘डिफेक्टिव रिटर्न’ का नोटिस मिलता है।

धारा 142(1) इंक्वायरी नोटिस: जब असेसिंग ऑफिसर (AO) को आपके रिटर्न के संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज चाहिए होते हैं।

धारा 143(2) स्क्रूटनी नोटिस: जब आपका रिटर्न विस्तृत जांच के लिए चुना जाता है। इसमें आपको अपने दावों के समर्थन में सबूत देने होते हैं।

धारा 148 – Income Escaped असेसमेंट: जब टैक्स अधिकारी के पास यह मानने की वजह हो कि आपकी कोई आय टैक्स के दायरे से छूट गई है।

धारा 156 – डिमांड नोटिस: अगर जांच के बाद विभाग यह पाता है कि आप पर टैक्स, ब्याज या पेनल्टी की कोई देनदारी बनती है, तो यह नोटिस भेजा जाता है।

नोटीस मिलने पर क्या करें? अपनाएं ये स्टेप्स

अगर आपको इनकम टैक्स विभाग से कोई नोटिस मिलता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ये स्टेप्स को फॉलो करें:

सबसे पहले इनकम टैक्स के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल (incometax.gov.in) पर लॉगिन करें। नोटिस का DIN, असेसमेंट ईयर और PAN नंबर जरूर वेरीफाई करें। नोटिस में उठाए गए मुद्दे की तुलना अपने ITR, Form 26AS, AIS/TIS और बैंक स्टेटमेंट्स से करें।

अगर गलती आपकी तरफ से हुई है, तो तय समय में रिवाइज्ड रिटर्न या अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) दाखिल करें। अगर आपका रिटर्न बिल्कुल सही है, तो पोर्टल पर ही मांगे गए कागजात और सबूत अपलोड करके अपना पक्ष रखें।

नोटिस में दी गई डेडलाइन को कभी नजरअंदाज न करें। क्योंकि नोटिस का जवाब न देने पर भारी पेनल्टी, अतिरिक्त ब्याज या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

800 का क्रेडिट स्कोर कैसे हासिल करें?

800 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर हासिल करना कोई छोटी बात नहीं है, और ये आपको बॉरोअर्स की टॉप कैटेगरी में ला खड़ा करता है. इतना हाई क्रेडिट स्कोर लेंडर्स को बताता है कि आप बहुत भरोसेमंद बॉरोअर हैं, जिससे न्यू क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स अप्लाई करने पर आपको बेस्ट टर्म्स मिलने की संभावना बढ़ जाती है. आप सबसे कम इंटरेस्ट रेट्स, प्रीमियम क्रेडिट कार्ड्स और कई तरह के फाइनेंशियल बेनिफिट्स के लिए क्वालिफाई कर सकते हैं.

अगर आप अपने क्रेडिट स्कोर को इम्प्रूव करना चाहते हैं, तो 800 के इस खास माइलस्टोन तक पहुंचने के लिए कुछ जरूरी स्टेप्स यहां दिए गए हैं.

लेकिन पहले, आइए जानें कि गुड क्रेडिट स्कोर क्या होता है.

क्रेडिट स्कोर रेंज

ट्रांसयूनियन CIBIL की अगस्त 2024 में पब्लिश्ड एक रिपोर्ट, ‘एम्पावरिंग फाइनेंशियल फ्रीडम: द राइज ऑफ क्रेडिट सेल्फ-मॉनिटरिंग इन इंडिया’, के मुताबिक भारत में क्रेडिट स्कोर 300 से 900 के बीच होता है. इन्हें कई टियर्स में बांटा गया है:

  • सबप्राइम: 300 से 680
  • नियर प्राइम: 681 से 730
  • प्राइम: 731 से 770
  • प्राइम प्लस: 771 से 790
  • सुपर प्राइम: 791 से 900

इस क्लासिफिकेशन के हिसाब से, 800 का स्कोर आपको सुपर प्राइम कैटेगरी में डालता है, जो लेंडर्स के लिए बहुत अट्रैक्टिव होता है.

800 या उससे ज्यादा क्रेडिट स्कोर के फायदे

800 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर कई फाइनेंशियल बेनिफिट्स का रास्ता खोलता है:

हायर अप्रूवल रेट्स: हाई क्रेडिट स्कोर से क्रेडिट कार्ड्स या लोन अप्रूव होने की संभावना बढ़ जाती है. लेंडर्स आपको लोअर-रिस्क बॉरोअर मानते हैं, जिससे वो आपको क्रेडिट देने के लिए ज्यादा इच्छुक होते हैं.

लोअर इंटरेस्ट रेट्स और हायर क्रेडिट लिमिट्स: 800 से ज्यादा स्कोर के साथ आपको मॉरगेज, कार लोन और क्रेडिट कार्ड्स पर बेहतर इंटरेस्ट रेट्स मिल सकते हैं. उदाहरण के लिए, 800 स्कोर वाला बॉरोअर होम लोन पर 8.5% इंटरेस्ट रेट पा सकता है, जबकि कम स्कोर वाले को 8.8% या उससे ज्यादा रेट मिल सकता है, जिससे लोन की पूरी लाइफ में इंटरेस्ट कॉस्ट काफी बढ़ जाता है.

बेहतर लोन टर्म्स: अगर आपका क्रेडिट स्कोर एक्सीलेंट है, तो लेंडर्स आपको कार लोन और मॉरगेज पर बेहतर टर्म्स ऑफर कर सकते हैं, जिससे आपके सपने पूरे करना आसान हो जाता है.

क्रेडिट रिपोर्ट और क्रेडिट स्कोर कैसे मॉनिटर करें

आप मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फ्री में क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड क्रेडिट रिपोर्ट आसानी से चेक कर सकते हैं. इससे आप इंस्टैंटली अपना स्कोर चेक कर सकते हैं और रेगुलरली मॉनिटर कर सकते हैं.

ट्रांसयूनियन CIBIL की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 44% लोग जो अपने स्कोर को एक्टिवली चेक करते हैं, उन्होंने साल में कम से कम चार बार स्कोर चेक किया, और 46% ने छह महीने में अपने स्कोर में इम्प्रूवमेंट देखा. इससे पता चलता है कि रेगुलर मॉनिटरिंग आपके क्रेडिट स्कोर और ओवरऑल फाइनेंशियल वेलबीइंग पर बड़ा असर डाल सकती है.

800 क्रेडिट स्कोर हासिल करने के स्टेप्स

800 का क्रेडिट स्कोर हासिल करना मुश्किल लग सकता है, लेकिन लगातार कोशिश से ये पूरी तरह मुमकिन है. ये रहे स्टेप्स:

हर बार टाइम पर बिल्स चुकाएं: पेमेंट हिस्ट्री आपके CIBIL स्कोर का सबसे जरूरी फैक्टर है. टाइम पर बिल्स चुकाने से लेंडर्स को आपकी रिलायबिलिटी दिखती है. मिस्ड पेमेंट्स को ठीक करना और स्कोर को डैमेज से बचाना मुमकिन है, लेकिन बेस्ट स्ट्रैटेजी है कि लेट पेमेंट्स से पूरी तरह बचा जाए. अभी क्रेडिट इंस्टीट्यूशंस (CIs) यानी लेंडर्स को हर महीने क्रेडिट इन्फॉर्मेशन क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनीज (CICs) को देना होता है. लेकिन 1 जनवरी 2025 से बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस क्रेडिट रिकॉर्ड्स को और बार-बार अपडेट करेंगे. 8 अगस्त को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) गवर्नर शक्तिकांत दास ने सुझाव दिया कि क्रेडिट डेटा हर 15 दिन में, यानी महीने की 15 तारीख और आखिरी दिन, या इससे भी कम समय में अपडेट हो. इसका मतलब है कि टाइमली पेमेंट्स और भी जरूरी हो जाएंगे.

क्रेडिट कार्ड बैलेंस कम रखें: क्रेडिट स्कोर तय करने में क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो एक बड़ा फैक्टर है, जो आपके क्रेडिट कार्ड बैलेंस को टोटल क्रेडिट लिमिट्स से कम्पेयर करता है. 30% से कम क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेट आइडियल माना जाता है. बैलेंस कम रखना रिस्पॉन्सिबल क्रेडिट मैनेजमेंट दिखाता है और आपके स्कोर को पॉजिटिवली इम्पैक्ट करता है.

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क्रेडिट हिस्ट्री का ध्यान रखें: क्रेडिट हिस्ट्री की लेंथ भी आपके स्कोर में अहम रोल प्ले करती है. आमतौर पर लंबी क्रेडिट हिस्ट्री से हायर स्कोर मिलता है. क्रेडिट स्कोरिंग मॉडल्स आपके सबसे पुराने अकाउंट की उम्र, सबसे नए अकाउंट और सभी अकाउंट्स की एवरेज उम्र देखते हैं. अच्छी स्टैंडिंग वाला क्रेडिट अकाउंट क्लोज करने से पहले इसके कॉन्सिक्वेंसेस पर विचार करें. अकाउंट क्लोज करने से क्रेडिट हिस्ट्री छोटी हो सकती है और ओवरऑल क्रेडिट लिमिट कम हो सकती है, जो आपके स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है. अकाउंट क्लोज करने की बजाय, अगर आप फीस से बचना चाहते हैं, तो नो एनुअल फी वाले क्रेडिट कार्ड पर स्विच करने पर विचार करें.

क्रेडिट मिक्स बेहतर करें: अलग-अलग तरह के क्रेडिट अकाउंट्स आपके स्कोर को पॉजिटिवली प्रभावित कर सकते हैं. अगर आपके पास ज्यादातर इंस्टॉलमेंट लोन (जैसे पर्सनल लोन या कार लोन) हैं, तो क्रेडिट कार्ड जोड़ने से क्रेडिट मिक्स बेहतर हो सकता है. डायवर्स क्रेडिट प्रोफाइल ये दिखाता है कि आप अलग-अलग टाइप्स के क्रेडिट को मैनेज कर सकते हैं, जिससे आपका स्कोर इम्प्रूव हो सकता है.

क्रेडिट रिपोर्ट्स रिव्यू करें: कभी-कभी कम क्रेडिट स्कोर आपकी गलती की वजह से नहीं होता. क्रेडिट रिपोर्ट में गलतियां आपके स्कोर को नुकसान पहुंचा सकती हैं. रेगुलरली क्रेडिट रिपोर्ट्स चेक करने से गलत इन्फॉर्मेशन को पकड़ा और डिस्प्यूट किया जा सकता है. अगर आपको कोई गड़बड़ दिखे, तो उस लेंडर से कॉन्टैक्ट करें जिसने इन्फॉर्मेशन दी या क्रेडिट ब्यूरो से गलती ठीक करवाएं.

कुल मिलाकर, गुड क्रेडिट स्कोर हासिल करना या 800 की टियर में पहुंचना समय ले सकता है, लेकिन ये कोशिश वर्थवाइल है. आपका क्रेडिट स्कोर क्रेडिट लेने की आपकी एबिलिटी और लेंडर्स के ऑफर किए टर्म्स, जैसे मॉरगेज पर इंटरेस्ट रेट्स, को प्रभावित करता है.

800 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर दिखाता है कि आप एक एक्सीलेंट बॉरोअर हैं. इससे बेहतर लोन टर्म्स और बेस्ट रिवॉर्ड्स व परक्स वाले क्रेडिट कार्ड्स मिल सकते हैं. इस गोल को अचीव करने के लिए याद रखें कि ये एक लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल कमिटमेंट है और इसके लिए सालों तक डिसिप्लिंड मनी मैनेजमेंट की जरूरत होती है. अपने प्रोग्रेस को मॉनिटर करने के लिए, मनीकंट्रोल ऐप पर फ्री में इंस्टैंटली क्रेडिट स्कोर चेक करें, ताकि आप अपनी क्रेडिट हेल्थ को मैनेज करने में प्रोएक्टिव रहें.

Retirement Planning: क्या रिटायरमेंट के बाद आपकी बचत 30 साल तक साथ दे पाएगी? पूरा कैलकुलेशन समझिए

Retirement Planning: पहले रिटायरमेंट का मतलब थोड़ा आसान था। 58-60 साल की उम्र में नौकरी छोड़ी और अगले 10-15 साल तक बचत के सहारे जिंदगी चल गई। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।

आज भारतीय पहले से कहीं ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं। 1960 में औसत उम्र सिर्फ 41 साल थी। अब यह 70 साल से ऊपर पहुंच चुकी है। इसका मतलब है कि 60 साल में रिटायर होने वाला व्यक्ति 85-90 साल तक जी सकता है। यानी रिटायरमेंट अब 10 साल नहीं, 25-30 साल का सफर बन चुका है।

यही वजह है कि अब सिर्फ बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना काफी नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या वही पैसा पूरे रिटायरमेंट में आपका साथ देगा?

क्या 1 करोड़ रुपये काफी होंगे?

मान लीजिए आपके पास रिटायरमेंट के समय 1 करोड़ रुपये हैं। इस पर हर साल 8% रिटर्न मिलता है। आप पहले साल 3.5 लाख रुपये निकालते हैं और हर साल महंगाई के हिसाब से निकासी 5% बढ़ाते हैं।

ऐसे में 30 साल बाद भी आपका फंड खत्म नहीं होता। उल्टा यह करीब 3.37 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वजह यह है कि शुरुआती वर्षों में निवेश का रिटर्न निकाली गई रकम से ज्यादा रहता है। इसलिए बाकी पैसा लगातार बढ़ता रहता है।

सालशुरुआत में फंडसालाना निकासीसाल के अंत में फंड
1₹1.00 करोड़₹3.50 लाख₹1.05 करोड़
5₹1.19 करोड़₹4.25 लाख₹1.24 करोड़
10₹1.48 करोड़₹5.43 लाख₹1.54 करोड़
15₹1.82 करोड़₹6.93 लाख₹1.90 करोड़
20₹2.23 करोड़₹8.84 लाख₹2.33 करोड़
25₹2.71 करोड़₹11.29 लाख₹2.82 करोड़
30₹3.25 करोड़₹14.41 लाख₹3.37 करोड़

सबसे बड़ा खतरा क्या है?

आज सबसे बड़ा जोखिम लॉन्गेविटी रिस्क है। यानी आपकी बचत खत्म हो जाए, लेकिन जिंदगी बाकी रहे।

एक सर्वे के मुताबिक, औसत भारतीय ने रिटायरमेंट के लिए सिर्फ 28 लाख रुपये जोड़े हैं। जबकि आराम से रिटायर होने के लिए उसे करीब 1 करोड़ रुपये चाहिए। यानी जरूरत और बचत के बीच बड़ा अंतर है, औसतन करीब 72 लाख का।

महंगाई और इलाज का खर्च

रिटायरमेंट में सबसे बड़ा दुश्मन महंगाई है। आज 50,000 रुपये महीने का खर्च है, तो 30 साल बाद यही खर्च 2 लाख रुपये से भी ज्यादा हो सकता है।

इसके ऊपर मेडिकल खर्च तेजी से बढ़ रहा है। उम्र बढ़ने के साथ दवाइयां, टेस्ट और अस्पताल का खर्च भी बढ़ता जाता है। इसलिए रिटायरमेंट का बड़ा हिस्सा इलाज पर खर्च हो सकता है।

जल्दी शुरुआत करना जरूरी

रिटायरमेंट की प्लानिंग जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना बेहतर रहेगा। कंपाउंडिंग को ज्यादा समय मिलेगा और छोटी-छोटी बचत भी बड़ा फंड बन सकती है।

अब रिटायरमेंट को सिर्फ नौकरी खत्म होने का दिन मत समझिए। यह 25-30 साल की लंबी वित्तीय यात्रा है। अगर इस सफर को आराम से बिताना है, तो तैयारी भी समय रहते शुरू करनी होगी।

इन 5 बातों का भी ध्यान रखें

  • रिटायरमेंट की तैयारी जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना कम बोझ पड़ेगा।
  • अपना सारा पैसा एक ही जगह मत लगाइए। अलग-अलग विकल्पों में बांटकर निवेश करें।
  • हर साल महंगाई को ध्यान में रखकर अपने निवेश और खर्च का हिसाब जरूर देखें।
  • इलाज का खर्च तेजी से बढ़ता है। इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल इमरजेंसी के लिए अलग पैसा रखें।
  • रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित आमदनी कैसे आएगी, इसकी योजना पहले से बना लें। SWP, SCSS और दूसरे विकल्प इसमें मदद कर सकते हैं।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।