पंजाब में भाजपा-अकाली का बराबर समझौता

एक तरफ उत्तर प्रदेश में भाजपा की सहयोगी पार्टियां ज्यादा सीटों के लिए दबाव बना रही हैं तो दूसरी ओर पंजाब में भारतीय जनता पार्टी अपनी सहयोगी अकाली दल के ऊपर ज्यादा सीटों के लिए दबाव बना रही है। भाजपा का दबाव बराबरी का समझौता करने के लिए है। भाजपा के नेता पंजाब में बिहार मॉडल पर समझौता चाहते हैं। उनका कहना है कि बिहार में नीतीश कुमार बहुत लोकप्रिय नेता थे और उनका सामाजिक आधार भी बड़ा था फिर भी भाजपा ने उनके साथ बराबरी का समझौता किया क्योंकि राज्य में हालात बदल गए थे और भाजपा एक बड़ी ताकत के तौर पर स्थापित हो गई थी। उसी तरह से भाजपा के नेता पंजाब में समझौता चाहते हैं।

गौरतलब है कि भाजपा और अकाली दल आखिरी बार 2017 के विधानसभा चुनाव और फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में एक साथ लड़े थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में पंजाब की 117 में सिर्फ 23 सीटों पर भाजपा लड़ी थी। बाकी सीटों पर अकाली दल लड़ी थी। 2022 का विधानसभा चुनाव दोनों ने अलग अलग लड़ा और पूरी तरह से साफ हो गए। उस चुनाव में अकाली दल को 18 फीसदी से थोड़ा ज्यादा और भाजपा को 13 फीसदी से थोड़ा ज्यादा वोट मिला। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में तस्वीर पूरी तरह से बदल गई। भाजपा को 18 फीसदी और अकाली दल को साढ़े छह फीसदी के करीब वोट मिले। इसी आधार पर भाजपा चाहती है कि वह 59 सीट लड़े और अकाली दल 58 सीटों पर लड़े। दूसरी ओर अकाली दल का कहना है कि विधानसभा में उसे ज्यादा सीट लड़ना चाहिए। भाजपा इस बार बहुकोणीय मुकाबले में 38 फीसदी हिंदू वोट और शहरी सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद कर रही है।

वंदे मातरम पर कोर्ट ने मांगा जवाब

नई दिल्ली। वंदे मातरम के सम्मान को लेकर केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति धार्मिक कारण से वंदे मातरम नहीं गाता है तो उस व्यक्ति के ऊपर आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को इससे जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की और केंद्र सरकार से इस पर जवाब भी मांगा है।

इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस पर विचार करने की सहमति दी कि वंदे मातरम नहीं गाने को दंडनीय अपराध बनाया जा सकता है या नहीं। हालांकि कोर्ट ने यह तय करने से इनकार कर दिया कि राष्ट्रगीत केवल दो अंतरों तक सीमित रहेगा या छह अंतरों तक होगा। गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र में पास किए गए कानून के मुताबिक छह अंतरे गाने की अनिवार्यता की गई है और वंदे मातरम के गायन को रोकने या गायन में जान बूझकर बाधा डालने को अपराध बनाया गया है।

बहरहाल, इस मामले को लेकर गायक टीएम कृष्णा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि वंदे मातरम के अंतिम चार अंतरे हिंदू देवताओं के प्रति भक्ति का आह्वान करते हैं। उनका कहना है कि इन अंतरों का गायन अनिवार्य बनाना देश के धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन है। गौरतलब है कि वंदे मातरम को कानून के दायरे में लाने वाला संशोधन बिल 29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को लोकसभा से पास हुआ था। इसके बाद छह अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर यह कानून बन गया।

टीम कृष्णा की अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि वंदे मातरम से जुड़े कानून की व्याख्या करते समय 1986 के ‘बिजो इमैनुअल’ फैसले में तय सिद्धांतों को लागू किया जाएगा। गौरतलब है कि, 1986 के बिजो इमैनुअल बनाम केरल सरकार मामले में तीन छात्रों ने धार्मिक विश्वास के कारण राष्ट्रगान नहीं गाया था। हालांकि वे राष्ट्रगान के दौरान सम्मानपूर्वक खड़े रहते थे। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा था कि केवल राष्ट्रगान न गाने के आधार पर उन्हें सजा नहीं दी जा सकती।

गरबे के दौरान भाग जाती थीं 4.5 लाख हिंदू लड़कियां, एमपी की BJP विधायक का अजब बयान

एमपी में नवरात्रि से पहले गरबा पंडालों में प्रवेश को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच भाजपा विधायक उषा ठाकुर का एक अजब बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि हर साल गरबे के दौरान करीब 4.5 लाख हिंदू लड़कियां गैर-हिंदुओं के साथ चली जाती हैं।

Hanuman Statue In US Row: टेक्सास में हनुमान जी की 90 फुट ऊंची मूर्ति को लेकर क्यों छिड़ा विवाद? अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में बना बड़ा मुद्दा

Hanuman Statue In Texas Row: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बीच टेक्सास में स्थित भगवान हनुमान जी की 90 फुट ऊंची प्रतिमा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। एक कंजर्वेटिव YouTuber द्वारा प्रतिमा को हटाने की मांग किए जाने के बाद हिंदू संगठनों और उनसे मिलती-जुलती सोच रखने वाले लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया है। शुगर लैंड स्थित ‘अष्टलक्ष्मी मंदिर’ में स्थापित इस प्रतिमा की अगस्त 2024 में प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी। इसके बाद से ही यह विवाद के केंद्र में है। ईसाई रूढ़िवादी समुदाय के एक वर्ग ने इसे ‘ईसाई विरोधी’ बताया है।

यूट्यूबर जेसी ह्यूज ने मूर्ति की एक तस्वीर शेयर करते हुए कहा, “वैसे, जब हम जीतेंगे, तो हम इसे गिरा देंगे…।” अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी ने ह्यूज की टिप्पणी को ‘हिंदू धर्म के खिलाफ धमकी’ करार दिया। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मूर्ति को ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कहा जाता है। अगस्त 2024 में इस मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा समारोह हुआ था। PTI के मुताबिक, कुछ ईसाई कंजर्वेटिव समूहों ने उस समय भी प्रतिमा को लेकर आपत्ति जताते हुए इसे ‘अनक्रिश्चियन’ बताया था।

YouTuber के बयान पर विवाद

जेसी ह्यूज ने हाल ही में हनुमान जी की प्रतिमा की एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “जब हम जीतेंगे, तो इसे गिरा देंगे।” उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक और भारतीय-अमेरिकी रुचिर बख्शी ने ह्यूजेस की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे हिंदू धर्म के खिलाफ धमकी बताया। बख्शी ने कहा कि किसी धार्मिक समुदाय के पूजा स्थल को सिर्फ इसलिए निशाना बनाना कि वहां अलग धर्म की आस्था का पालन किया जाता है, गंभीर चिंता का विषय है। बख्शी ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका में जीतने का मतलब हिंदू मंदिरों को गिराना है, तो यह वह अमेरिका नहीं है जिसके लिए उन्होंने सेवा की थी।

हिंदू संगठन ने किया समर्थन

बख्शी के बयान को कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (CoHNA) और टेक्सास में रहने वाले अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक एवं राजनीतिक टिप्पणीकार कार्ल व्हील्स का समर्थन मिला। CoHNA ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह इस प्लेटफॉर्म पर धार्मिक कट्टरता को मुख्यधारा में आते देखकर चिंतित है। इसके खिलाफ वह बख्शी के साथ खड़ा है।

टेक्सास की राजनीति से भी जुड़ा विवाद

हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब 2026 के अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले टेक्सास में आव्रजन और नस्लीय पहचान जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज है। टेक्सास में बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी रहते हैं। हाल के दिनों में भारतीय समुदाय को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी चर्चा में रही है।

Bo French की पोस्ट पर भी विवाद

टेक्सास के रेलरोड कमिश्नर पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार बो फ्रेंच ने टेक्सास यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा फुटबॉल मैच की जीत का जश्न मनाने की एक तस्वीर शेयर की थी। इसके साथ उन्होंने लिखा कि उन्होंने सुना है कि इस साल UT का ग्रेजुएशन ऐसा दिखता था। साथ ही दावा किया कि समस्या अब पहले से कहीं ज्यादा गंभीर है। इस पोस्ट की काफी आलोचना हुई। हाउस डेमोक्रेटिक लीडर हकीम जेफ्रीज ने कहा कि दक्षिणपंथी रिपब्लिकन बार-बार अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्निन ने भी फ्रेंच की टिप्पणी की आलोचना करते हुए पूछा कि क्या अन्य रिपब्लिकन नेता ऐसी असहिष्णुता और नस्लवाद की निंदा करेंगे। टेक्सास के रिपब्लिकन विधायक लेसी हल और जारेड पैटरसन ने भी फ्रेंच की पोस्ट की आलोचना की। हालांकि, फ्रेंच ने बाद में अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि टेक्सास यूनिवर्सिटी की एडमिशन नीतियां राज्य के छात्रों को नुकसान पहुंचा रही हैं।

चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं जब टेक्सास में नवंबर में होने वाले अमेरिकी सीनेट चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। टेक्सास में लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहा है। जबकि डेमोक्रेट्स सीनेट सीट पर बदलाव की कोशिश कर रहे हैं। हनुमान जी की प्रतिमा पर विवाद ने इस चुनावी माहौल में धर्म, धार्मिक स्वतंत्रता, आव्रजन और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।

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दलाई लामा की लंबी उम्र के लिए धर्मशाला में यज्ञ:हनुमान मंदिर में हवन हुआ; हिंदू, सिख, तिब्बती, थाई बौद्ध और ब्रह्माकुमारी प्रतिनिधि शामिल

धर्मशाला के कचहरी अड्डा स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर में रविवार को तिब्बती आध्यात्मिक गुरु परम पावन दलाई लामा की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए ‘धर्मशाला हिंदू चैप्टर—धार्मिक सद्भाव एवं विश्व शांति’ के तत्वावधान में विशेष हवन-यज्ञ एवं सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में हिंदू, सिख, तिब्बती बौद्ध, थाई बौद्ध और प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने एक साथ मंच साझा करते हुए अपनी-अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार प्रार्थना की।
समारोह में थाईलैंड और स्वीडन से आए बौद्ध भिक्षुओं सहित विभिन्न मठों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। तिब्बती बौद्ध परंपरा से नामग्याल मठ के लोबसांग डाक्पा, डायलेक्टिक्स स्कूल के भिक्षु, गाडेन चोलिंग ननरी व तिलोकरपुर ननरी की भिक्षुणियां, किर्ति मठ के प्रतिनिधि तथा स्वीडन से आईं भिक्षुणी तेनजिन डोलकर शामिल हुईं। वहीं थाई बौद्ध परंपरा की ओर से जोगीवाड़ा स्थित वाट मठ से रायनू विचैदित, माई ची पट्चराना सहित कई थाई भिक्षुओं ने पारंपरिक प्रार्थना संपन्न कराई।
सामाजिक व धार्मिक संगठनों की उपस्थिति इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी श्यामनगर केंद्र से कमलेश बहन, गुरु सिंह सभा धर्मशाला के प्रतिनिधि और गायत्री परिवार से तपेंद्र शर्मा, विजय कटोच व कमलेंद्र प्रताप सिंह उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त जिला परिषद चेयरमैन सीमा चौधरी सहित अनेक गणमान्य सामाजिक व धार्मिक हस्तियों ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
वसुधैव कुटुम्बकम् और विश्व शांति का संदेश
कार्यक्रम के मुख्य यजमान एवं हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि परम पावन दलाई लामा का संपूर्ण जीवन प्रेम, करुणा और अहिंसा का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के विचार पर टिकी है, पूजा पद्धतियां भिन्न हो सकती हैं, किंतु करुणा का भाव सभी को एक सूत्र में बांधता है। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि ‘धर्मशाला हिंदू चैप्टर’ का मुख्य उद्देश्य विभिन्न आस्थाओं के बीच संवाद और आपसी सम्मान को बढ़ावा देना है। हवन-यज्ञ के समापन पर सभी समुदायों ने सामूहिक रूप से विश्व शांति व मानव कल्याण का संकल्प लिया।

झूठ की गूंज में कांग्रेस के युवराज का आचरण नारी शक्ति का अपमान : योगी आदित्यनाथ

झूठ की गूंज में कांग्रेस के युवराज का आचरण नारी शक्ति का अपमान : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi Adityanath targeted Rahul Gandhi in Greater Noida

– ग्रेटर नोएडा में दो दिवसीय ‘प्रेरणा विमर्श-2026’ के समापन समारोह को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित

– मुख्यमंत्री योगी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, बोले- देश को उनसे उम्मीद करना छोड़ देना चाहिए, ये पथभ्रष्ट और मार्ग से भटके हुए लोग

– मुख्यमंत्री योगी ने कहा- समाज में भ्रम पैदा कर अव्यवस्था और अराजकता फैलाना इनका एकमात्र लक्ष्य

– मुख्यमंत्री योगी ने हामिद अंसारी पर भी साधा निशाना, बोले- भारत की समदृष्टि समझते तो हिंदू दृष्टि को नहीं कोसते

– मुख्यमंत्री योगी बोले- बीमारू राज्य से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बना यूपी, अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और बजट हुआ तीन गुना

– मुख्यमंत्री योगी ने कहा- 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी, 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में सवा तीन करोड़ को काम

– मुख्यमंत्री योगी बोले- यूपी में 24 हजार से अधिक स्टार्टअप, इनमें आधे महिलाओं के हाथ, महिला वर्कफोर्स 12 से बढ़कर 36-37 फीसदी

– मुख्यमंत्री योगी ने कहा- अगले तीन-चार महीने में यूपी पुलिस में 50 हजार से अधिक होगी महिलाओं की संख्या

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर निशाना साधा। राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन्हें ‘कांग्रेस का युवराज’ बताते हुए कहा कि अपने झूठ की गूंज में उन्होंने जिस प्रकार का आचरण किया, वह पूरी नारी शक्ति का अपमान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को ऐसे लोगों से उम्मीद करना छोड़ देना चाहिए। ये पथभ्रष्ट और मार्ग से भटके हुए लोग हैं, जिनका लक्ष्य समाज में भ्रम पैदा कर अव्यवस्था और अराजकता फैलाना है।

 

ग्रेटर नोएडा में दो दिवसीय ‘प्रेरणा विमर्श-2026’ के समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के वक्तव्य को दुर्भाग्यपूर्ण और डरावना बताया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर रहे व्यक्ति से पद की गरिमा के अनुरूप आचरण की अपेक्षा होती है। काश वह भारत की समदृष्टि को समझ पाते तो भारत, भारतीयता और हिंदू दृष्टि को नहीं कोसते। मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तीकरण, युवाओं को रोजगार, स्टार्टअप और प्रदेश की अर्थव्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि बीमारू कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश अब रेवेन्यू सरप्लस स्टेट और देश का ग्रोथ इंजन बन चुका है।

 

नारी सशक्तीकरण भाषण से नहीं, काम से होगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी गरिमा की रक्षा और महिला सशक्तीकरण केवल भाषणों से नहीं होगा। सरकार ने योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता दी है। देश में तीन करोड़ परिवारों को घरौनी के माध्यम से मकान का मालिकाना अधिकार दिया गया, जिसमें पहला अधिकार महिलाओं का है। 12 करोड़ परिवारों को एलपीजी कनेक्शन और 12 करोड़ घरों में शौचालय की सुविधा दी गई। यूपी में 54 हजार बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी गांवों में बैंकिंग सेवाएं दे रही हैं।

 

उन्होंने झांसी के बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर का उदाहरण देते हुए कहा कि 2019 में पांच महिलाओं से शुरू समूह से आज 62 हजार महिलाएं जुड़ी हैं। इसका टर्नओवर 115 करोड़ रुपए है और प्रत्येक महिला आठ से 10 हजार रुपए महीने कमा रही है। आगरा, काशी, गोरखपुर और लखनऊ में भी मिल्क प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। इनसे करीब चार लाख महिलाएं जुड़ी हैं।

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महिला पुलिस 10 हजार से बढ़कर 44 हजार

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में यूपी पुलिस में केवल 10 हजार महिलाएं थीं, जिनकी संख्या अब 44 हजार हो गई है। अगले तीन-चार महीने में यह आंकड़ा 50 हजार के पार होगा। प्रदेश में महिला वर्कफोर्स की भागीदारी भी 12 प्रतिशत से बढ़कर 36-37 प्रतिशत हो गई है। डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप की नई योजना के तहत आठ हजार न्याय पंचायतों में से चार हजार में महिला उद्यमियों को जोड़कर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

 

9.5 लाख सरकारी नौकरियां, सवा तीन करोड़ को एमएसएमई में काम

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में सबसे बड़ी युवा शक्ति उत्तर प्रदेश के पास है और प्रदेश में 56 प्रतिशत युवा हैं। पिछले साढ़े नौ वर्ष में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई। 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में सवा तीन करोड़ युवा काम कर रहे हैं। बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के कारण प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले। इनमें 15 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश धरातल पर उतरा और इससे 65 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी मिली।

 

अब यूपी को कोई बीमारू राज्य नहीं कहता

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और बजट तीन गुना हुआ है। नौ-दस वर्ष पहले बीमारू कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश आज रेवेन्यू सरप्लस स्टेट और भारत का ग्रोथ इंजन है। अब प्रदेश के सामने पहचान का संकट नहीं है। यह बदलाव विरासत के सम्मान और अपराध व भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से आया है।

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विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग पहले यूपी के सामने पहचान का संकट खड़ा करते थे, वे फिर दंगा, कर्फ्यू, समाज को बांटने, भेदभाव, अव्यवस्था और अराजकता का दौर लाना चाहते हैं।

 

120 से कम थे स्टार्टअप, अब 24 हजार से अधिक

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में 120 से भी कम स्टार्टअप थे, जबकि आज इनकी संख्या 24 हजार से अधिक है। इनमें करीब आधे महिलाओं द्वारा संचालित हैं। उन्होंने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर का उल्लेख करते हुए युवाओं से राष्ट्रीय नायकों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए राष्ट्र प्रथम है। देश सुरक्षित है तो धर्म, उपासना पद्धति, जाति, परिवार और व्यक्ति भी सुरक्षित हैं। नारी और युवा शक्ति का स्वावलंबन ही उत्तर प्रदेश और भारत के स्वावलंबन का आधार बनेगा।

 

भूतकाल जानेंगे तभी भविष्य के सपने गढ़ेंगे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने महर्षि अरविंद का उल्लेख करते हुए कहा कि जो समाज अपने भूतकाल के गौरव, वर्तमान की पीड़ा और भविष्य के सपनों को समझता है, वही उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ता है। आचार्य धर्मपाल की पुस्तक ‘द ब्यूटीफुल ट्री’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने देश, संस्कृति और उपलब्धियों को जानकर भविष्य के सपने गढ़ने चाहिए।

 

2020 में शुरू हुई प्रेरणा विमर्श की यात्रा

संसद टीवी के संपादक श्याम किशोर ने कहा कि कृपा शंकर के मार्गदर्शन में 2020 में प्रेरणा विमर्श की यात्रा शुरू हुई। इसके तहत स्मारिका, पुस्तकें और ‘केशव संवाद’ प्रकाशित होते हैं। विषय आधारित प्रदर्शनी भी इसका प्रमुख हिस्सा है। समाज और राष्ट्रहित में सकारात्मक पत्रकारिता करने वाली एक महिला को हर वर्ष सम्मानित किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्रेरणा विमर्श-2026 का विषय ‘उत्कर्ष नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान’ है।

 

दीप प्रज्ज्वलन से हुआ समापन समारोह का शुभारंभ

मुख्यमंत्री योगी ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में ‘केशव संवाद’ और ‘प्रेरणा विचार’ की वैचारिक यात्रा पर वीडियो दिखाया गया और मुख्यमंत्री को दोनों पत्रिकाओं की प्रतियां सौंपी गईं। एक अन्य वीडियो में प्रदेश की नारी और युवा शक्ति की बदलती तस्वीर प्रस्तुत की गई।

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कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह, प्रेरणा विमर्श के कार्यकारी अध्यक्ष वीके गुप्ता, अध्यक्ष अनिल त्यागी, डॉ. मनमोहन सिंह सिसोदिया, प्रेरणा शोध संस्थान की अध्यक्ष प्रीति दादू, सचिव मोनिका चौहान, गौतम बुद्ध नगर के जनप्रतिनिधि और स्वयंसेवक मौजूद रहे।

Ajit Agarkar: अजीत अगरकर की विदाई तय? जानें क्यों छोड़ रहे चीफ सिलेक्टर का पद

पिछले कुछ समय से अजीत अगरकर के कार्यकाल को लेकर काफी चर्चा हो रही है। अजीत अगरकर का कार्यकाल 4 अक्टूबर को खत्म होने वाला है। वहीं बीसीसीआई उनका कार्यकाल आगे बढ़ाएगी या नहीं इसको लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है। इसी बीच खबर है कि अजीत अगरकर ने बीसीसीआई की सीनियर पुरुष सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन पद से हटने का फैसला किया है। वहीं अभी तक इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

अजीत अगरकर को 2023 में भारत की सीनियर पुरुष क्रिकेट टीम का मुख्य चयनकर्ता बनाया गया था। चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई बड़े फैसले लिए। अब खबर है कि पूर्व भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल अगरकर की जगह लेने वाले संभावित नामों में शामिल हैं।

खत्म हो रहा अजीत अगरकर का कार्यकाल

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, अगरकर ने बीसीसीआई को बता दिया है कि 4 अक्टूबर को उनका मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद वह चयनकर्ता के पद पर आगे काम नहीं करना चाहते हैं। बीसीसीआई के एक अधिकारी ने बताया, “अजीत अगरकर ने एजीएम से ठीक पहले बीसीसीआई को आधिकारिक तौर पर बता दिया है कि 4 अक्टूबर को उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद वह सिलेक्टर के तौर पर आगे काम नहीं करना चाहते हैं।”

नए सिलेक्टर की तलाश में बीसीसीआई

बीसीसीआई के एक अधिकारी ने HT को बताया, अजीत अगरकर से बातचीत के बाद बीसीसीआई अब नए चीफ सिलेक्टर की तलाश कर रहा है। अधिकारी ने बताया, “बातचीत के दौरान अगरकर ने फरवरी में बोर्ड के साथ हुई अपनी पिछली चर्चा का जिक्र किया। उस समय उन्होंने पहली बार बोर्ड के बड़े अधिकारियों से कहा था कि उनके मौजूदा कार्यकाल के खत्म होने के बाद किसी दूसरे विकल्प पर विचार किया जाए।” बीसीसीआई की सदस्य यूनिट्स ने अधिकारियों को अजीत अगरकर के भविष्य पर फैसला लेने की जिम्मेदारी दी है।

बढ़ेगा अगरकर का कार्यकाल

पीटीआई के मुताबिक, बीसीसीआई को तय करना है कि अगरकर का कार्यकाल बढ़ाया जाए या नया चीफ सिलेक्टर चुना जाए। यह खबर अगरकर और बोर्ड अधिकारियों की बातचीत के कुछ घंटे बाद आई। मौजूदा चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर का कार्यकाल 4 अक्टूबर को खत्म होने वाला है। ऐसे में बीसीसीआई उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने या उनकी जगह नया चीफ सिलेक्टर नियुक्त करने पर विचार कर सकता है। बीसीसीआई सीनियर सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन के भविष्य के साथ-साथ जूनियर सिलेक्शन कमिटी के पांचों पदों को भरने पर भी विचार कर रहा है।

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Swara Bhasker: ‘इतनी दुखी थी कि सारे मुस्लिम दोस्तों से मांगी थी माफी’, राम जन्मभूमि पर आए फैसले पर स्वरा भास्कर ने दिया विवादित बयान

Swara Bhasker: एक्टर स्वरा भास्कर ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के 2019 के राम जन्मभूमि फैसले पर बात करते हुए कहा कि एक हिंदू होने के नाते उन्हें “बहुत शर्म” महसूस हुई। एक्ट्रेस ने आगे कहा कि उन्होंने तुरंत आमिर खान, शाहरुख खान और सलमान खान जैसे मुस्लिम दोस्तों से संपर्क किया और “माफी मांगी।”

स्वरा भास्कर ने 2019 के अयोध्या फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया के बारे में बताया

‘द मिडनाइट आवर’ पॉडकास्ट पर फ़ैसले के बारे में बात करते हुए, स्वरा ने बताया कि फैसले के बाद उन्होंने अपनी फोन बुक में मौजूद “सभी मुसलमानों” को मैसेज किया। उन्होंने कहा, “जब फैसला आया तो मैं बहुत परेशान थी, क्योंकि मुझे लगा कि यह बहुत अन्यायपूर्ण था। मैंने अपनी फोनबुक में मौजूद सभी मुसलमानों को मैसेज किया। आमिर खान, शाहरुख खान और सलमान खान से लेकर फहद अहमद तक।”

“मैं इतनी परेशान थी कि मैं उन सभी मुसलमानों से संपर्क करना चाहती थी, जिन्हें मैं जानती हूं और उनसे कहना चाहती थी कि ‘एक हिंदू होने के नाते, मैं बस इतना बताना चाहती हूं कि मुझे सच में अफसोस है, मुझे सच में शर्म आ रही है। मैं इससे सहमत नहीं हूं’।” स्वरा की इन बातों पर सोशल मीडिया पर एक बार फिर तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। कई लोगों ने अयोध्या फैसले पर उनके रुख की आलोचना की है।

अयोध्या फैसले के बारे में

जानकारी के लिए बता दें कि अयोध्या विवाद उस जगह को लेकर था जहां 1992 में गिराए जाने से पहले बाबरी मस्जिद थी। 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश में विवादित जमीन राम मंदिर के निर्माण के लिए दे दी गई। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन दी जाए। इस तरह सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद को खत्म कर दिया।

उनकी बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए X पर एक यूजर ने लिखा, “स्वरा भास्कर राम मंदिर फैसले से परेशान थीं। कभी-कभी मुझे सच में उनके लिए बुरा लगता है; वह काम पाने की उम्मीद में दिन-रात बॉलीवुड की तारीफ करती रहती हैं, लेकिन किसी तरह काम कभी नहीं मिलता।”

एक और यूजर ने लिखा, “बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर राम मंदिर फैसले से परेशान थीं। लाखों लोगों ने ऐतिहासिक अयोध्या फैसले का जश्न मनाया। लेकिन स्वरा भास्कर? राम मंदिर का मुद्दा बॉलीवुड की सबसे बड़ी बहस का कारण बना हुआ है।” यह तब हुआ है जब स्वरा को ‘पद्मावत’ पर अपनी टिप्पणियों के कारण पहले भी भारी आलोचना का सामना करना पड़ा था, जिसमें उन्होंने जौहर वाले सीन की कड़ी आलोचना की थी। कई लोगों ने उनकी इन टिप्पणियों के लिए उनकी आलोचना की थी।

Who is Bushra Bano: इंशाअल्लाह-जजाकअल्लाह कहने को लेकर क्यों घेरा जा रहा है? IPS बुशरा बानो कौन हैं, जानिए इनकी पूरी कहानी

Who is Bushra Bano: भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित पश्चिम बंगाल में एक IPS अधिकारी के ट्रांसफर को लेकर राज्य में राजनीतिक और सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया है। ‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक ‘हिंदू अधिकार समूह’ ने कॉम्पिटिटिव एग्जाम के लिए कोचिंग प्लेटफॉर्म को प्रमोट करने वाले एक वीडियो में उनके इस्लामिक अभिवादन के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। खड़गपुर में एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) और 2021 बैच की IPS अधिकारी बुशरा बानो को 14 सितंबर को राज्य सशस्त्र पुलिस की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट के पद पर ट्रांसफर कर दिया गया। उनकी जगह पार्थ घोष को खड़गपुर का नया ASP बनाया गया है।

दबाव में हुआ ट्रांसफर या रूटीन प्रक्रिया है?

विवाद के बीच बंगाल सरकार ने इस ट्रांसफर को रूटीन प्रक्रिया बताया है। हलांकि, यह फेरबदल बुशरा बानो द्वारा एक दिन पहले यानी 13 सितंबर को X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो पर हुई आलोचना के समय ही हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में वह पुलिस की वर्दी में थीं। इस दौरान वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी में बिताए अपने समय के बारे में बात कर रही थीं। यहां उन्होंने UPSC परीक्षाओं की तैयारी की थी।

वीडियो में क्या है?

वीडियो में बुशरा बानो ने बताया कि UPSC की तैयारी के लिए सऊदी अरब में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम करने के बाद वह भारत लौटी थीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कोचिंग एकेडमी की किताबों, लाइब्रेरी और मॉक टेस्ट को दिया। साथ ही छात्रों को वहां एडमिशन लेने के लिए प्रोत्साहित किया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि और छात्र एकेडमी में दाखिला लेंगे और इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे ताकि मेरे जैसे और लोग आगे आ सकें।”

विवाद उनके संदेश से नहीं। बल्कि उसे देते समय उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए धार्मिक शब्दों से पैदा हुआ। रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्होंने वीडियो की शुरुआत ‘अस्सलाम-अलैकुम’ से की। फिर अपनी बातचीत के दौरान ‘इंशाल्लाह’ का इस्तेमाल किया। साथ ही इसका अंत ‘जजाकल्लाह खैर’ से किया।

हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

‘हिंदू नेटवर्क फाउंडेशन’ की एक यूनिट के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले ‘हिंदू लीगल फंड’ ने उनके शब्दों के चयन को लेकर पश्चिम बंगाल के गृह सचिव के पास शिकायत दर्ज कराई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में संगठन ने तर्क दिया कि भारतीय राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले एक कार्यरत अधिकारी को इसके बजाय ‘वंदे मातरम’ या ‘जय हिंद’ जैसे राष्ट्रीय अभिवादनों का इस्तेमाल करना चाहिए था।

उन्होंने मामले की समीक्षा करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप की शिकायत में यह सवाल उठाया गया कि एक सरकारी अधिकारी, जो अपनी रैंक बता रही थी और यूनिफॉर्म में थी, वह आधिकारिक दिखने वाले सार्वजनिक संदेश में ऐसी भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकती है।

सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह विवाद बढ़ गया। रिपोर्ट में बताया गया कि यूज़र्स के बीच इसे लेकर मतभेद था। कछ लोग धार्मिक बातों का जिक्र करने के लिए बुशरा बानो की आलोचना कर रहे थे। जबकि दूसरे यह सवाल उठा रहे थे कि क्या सभी सरकारी अधिकारियों के लिए निष्पक्षता का नियम एक जैसा लागू किया जा रहा है।

किसने क्या कहा?

पूर्व सिविल सर्वेंट आशीष जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन किया है। उन्होंने लिखा, “भारत की असली ताकत विविधता में एकता है। बुशरा बानो IPS की तारीफ़ होनी चाहिए। उन्होंने दो बार UPSC पास किया,।सऊदी अरब में एक आरामदायक नौकरी छोड़ी और अब पूरी लगन से देश की सेवा कर रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “उनके शब्दों का चुनाव उनके निजी विश्वास को दिखाता है, न कि उस देश के प्रति अनादर को जिसकी वह रक्षा करती हैं। भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश में यह सह-अस्तित्व कोई कमजोरी नहीं, बल्कि हमारा गर्व है। आपकी सेवा के लिए धन्यवाद, बुशरा! जजाकल्लाह खैर!”

अन्य यूजर्स ने सार्वजनिक जीवन में वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं द्वारा हिंदू धार्मिक नारों के इस्तेमाल से इसकी तुलना की। वहीं, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक सोशल मीडिया ग्रुप ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी संगठन बुशरा बानो को इसलिए निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वह अल्पसंख्यक समुदाय से हैं।

बुशरा बानो!

इस विवाद ने उनके अनोखे करियर सफर पर भी असर डाला है। उत्तर प्रदेश के कन्नौज की रहने वाली बुशरा बानो ने सऊदी अरब में काम करने से पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी PhD पूरी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत लौटने पर उन्होंने UPSC की तैयारी जारी रखते हुए कोल इंडिया में नौकरी की।

उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और शुरू में इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस के लिए चुनी गईं। बाद में उन्होंने सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट बनने के लिए उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास की। फिर दूसरी बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करके IPS में जगह बनाई। उनकी उपलब्धि ने पहले भी लोगों का ध्यान खींचा था क्योंकि उन्होंने दो बच्चों की परवरिश करते हुए दो बार UPSC पास किया था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की प्रतिस्पर्धी सिविल सेवा प्रणाली में दृढ़ता के उदाहरण के तौर पर अक्सर इस बात का ज़िक्र किया जाता है। ट्रांसफर और वीडियो विवाद ने अब एक खास सवाल को सामने ला दिया है। क्या आधिकारिक संदेश में किसी अधिकारी का निजी धार्मिक इजहार सरकारी सेवकों से अपेक्षित निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है? सुवेंदु अधिकारी सरकार अपने इस रुख पर कायम है कि तबादला एक सामान्य प्रक्रिया थी, जबकि धर्म, सार्वजनिक पद और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति को लेकर बहस जारी है।

Vishwakarma Puja Kab Hai 2026: सिद्ध योग आज की जाएगी देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

Vishwakarma Puja Kab Hai 2026: विश्वकर्मा पूजा को विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है। यह हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है। भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला शिल्पकार, वास्तुकार और इंजीनियर माना जाता है। यह पर्व हर साल मुख्य रूप से 17 सितंबर कन्या संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिन निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, औजारों, गाड़ियों, कारखानों और इलेक्ट्रॉनिक्स की साफ-सफाई की जाती है और उनकी पूजा की जाती है। माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में उन्नति होती है, मशीनों में खराबी नहीं आती और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।

विश्वकर्मा पूजा 2026 सही तारीख

विश्वकर्मा की पूजा कन्या संक्रांति के दिन की जाती है। सूर्य देव जब कन्या राशि में प्रवेश करते हैं तो उस समय कन्या संक्रांति होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 17 सितंबर को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। कन्या में सूर्य का गोचर 17 सितंबर को सुबह 7:58 बजे होगा और इसी दिन कन्या संक्रांति मनाई जाएगी। इसलिए विश्वकर्मा पूजा भी 17 सितंबर गुरुवार को ही मनाई जाएगी।

विश्वकर्मा पूजा 2026 मुहूर्त

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7:58 बजे से होगा क्योंकि इस समय ही कन्या संक्रांति का क्षण है। सुबह 10:43 ए एम से लेकर दोपहर 01:48 पी एम के बीच भी पूजा कर सकते हैं।

इसमें आपको चर-सामान्य मुहूर्त 10:43 ए एम से 12:15 पी एम और लाभ-उन्नति मुहूर्त दोपहर 12:15 पी एम से 01:48 पी एम प्राप्त हो जाएगा। शाम के समय में शुभ-उत्तम मुहूर्त 04:52 पी एम से 06:24 पी एम तक रहेगा। कन्या संक्रांति का पुण्य काल भी सुबह 7:58 बजे से लेकर दोपहर 02:31 बजे तक रहेगा।

पंचांग के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा के दिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:33 ए एम से 05:20 ए एम तक है, वहीं दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11:51 ए एम से 12:40 पी एम तक है। विश्वकर्मा पूजा के दिन राहुकाल दोपहर में 01 बजकर 48 मिनट से दोपहर 03 बजकर 20 मिनट तक है।

विश्वकर्मा पूजा पर रहेंगे दो शुभ योग

इस साल विश्वकर्मा पूजा पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग विराजमान रहेंगे। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:07 ए एम से बनेगा और शाम 07:53 पी एम तक रहेगा। इस समय में ही रवि योग भी बन रहा है। ये दोनों ही शुभ योग फलदायी हैं।

विश्वकर्मा पूजा को प्रात:काल में विष्कम्भ योग बनेगा, जो दोपहर 12:50 पी एम तक है, उसके बाद से प्रीति योग का निर्माण होगा, जो रात्रि तक है। इस दिन अनुराधा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम 07:53 पी एम तक है, फिर ज्येष्ठा नक्षत्र है।

Kanya Sankranti 2026 Date: सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश पर होगी कन्या संक्रांति कल, सूर्य दोष और करियर में उड़ान के लिए महापुण्यकाल में करें ये 4 उपाय