कांग्रेस के लिए उपचुनाव का संदेश

पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों और असम की एक लोकसभा सीट के नतीजों का संदेश यह है कि अब मुस्लिम भी भाजपा को वोट दे रहे हैं और साथ ही अपने नेता की तलाश भी कर रहे हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो भाजपा किसी स्थिति में रेजीनगर विधानसभा सीट नहीं जीत सकती थी और नगांव लोकसभा सीट पर भी उसका जीतना मुमकिन नहीं था। लेकिन नगांव सीट पर भाजपा न सिर्फ जीती, बल्कि दूसरे स्थान पर रहे एआईयूडीएफ के नेता बदरूद्दीन अजमल और कांग्रेस की शिबोमणी बोरा दोनों को मिला कर जीतने वोट मिले उससे ज्यादा वोट भाजपा के देबाशीष शर्मा को मिले। इसी तरह की स्थिति रेजीनगर सीट पर भी रही। वहां तो सभी विपक्षी पार्टियां मिल कर भी भाजपा उम्मीदवार को मिले वोट से बहुत पीछे रहीं। यह बहुत दिलचस्प परिघटना है, जिस पर विचार करने की जरुरत है।

गौरतलब है कि असम में मुस्लिम मतदाताओं ने पहले कांग्रेस को छोड़ कर अजमल की पार्टी का साथ दिया था लेकिन पिछले दो चुनावों में उसने अजमल को छोड़ा और कांग्रेस के साथ खड़े हुए तभी इस बार कांग्रेस के 19 में से 18 विधायक मुस्लिम जीते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में धुबरी सीट पर कांग्रेस के हाथ अजमल 10 लाख से ज्यादा वोट से हारे थे। लेकिन अब फिर ऐसा लग रहा है कि मुस्लिम अजमल के साथ जा रहे हैं। अजमल साढ़े पांच लाख से ज्यादा वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस सवा लाख वोट के साथ बहुत पीछे तीसरे स्थान पर रही।

ध्यान रहे कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस या लेफ्ट किसी ने भी यह नहीं कहा है कि असम की नगांव या पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम सीट पर वोट चोरी करके भाजपा जीती है। दबी जुबान में कुछ नेता बोल रहे हैं लेकिन पार्टियों ने नतीजे को स्वीकार किया है। असम की नगांव सीट कांग्रेस के प्रद्योत बोरदोलोई के इस्तीफे से खाली हुई थी। वहां से भाजपा ने पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा को टिकट दिया। वे नगांव के कलेक्टर रह चुके हैं और निजी तौर पर बहुत लोकप्रिय हैं। कहा जा रहा है कि इस वजह से मुस्लिम वोट उनको मिले। ध्यान रहे नगांव में मुस्लिम आबादी 60 फीसदी के करीब है। वहां से असम के सबसे बड़े मुस्लिम नेता बदरूद्दीन अजमल खुद लड़ने पहुंचे थे। लेकिन वे जीत नही सके। उन्होंने कांग्रेस को तो तीसरे स्थान पर पहुंचा दिया पर देबाशीष शर्मा को हरा नहीं पाए। शर्मा डेढ़ लाख वोट से जीते। उनको 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिली। जाहिर है मुस्लिम समर्थन के बगैर वे इतना वोट नहीं ले सकते थे।

जहां तक रेजीनगर की बात है तो वहां हिंदू आबादी 30 फीसदी के करीब है। लेकिन भाजपा के उम्मीदवार को 50 फीसदी के करीब वोट मिले। अगर यह मान लिया जाए कि एक एक हिंदू वोट उन्हीं को मिला तब भी कम से कम 20 फीसदी मुस्लिम वोट उनको मिला है। यह बहुत दिलचस्प परिघटना है। यह मुर्शिदाबाद जिला है, जहां बेलडांगा में हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की नींव रखी और मई के चुनाव में रेजीनगर सीट पर 65 हजार वोट से जीते, उस सीट पर उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को भाजपा ने 75 हजार वोट से हराया। हुमायूं कबीर की पार्टी दूसरे स्थान पर रही। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और लेफ्ट तीनों के लिए यह बहुत ज्यादा चिंता की बात होनी चाहिए। तीनों को मिला कर भी 10 हजार वोट नहीं आए। असम की नगांव और पश्चिम बंगाल की रेजिनगर सीट का मैसेज कांग्रेस और दूसरी सेकुलर पार्टियों के लिए बहुत खराब है। कट्टरपंथी मुस्लिम नेताओं की पार्टियों को अब मुस्लिम बहुल इलाकों में ज्यादा समर्थन मिलेगा। पहले मुस्लिम सेकुलर पार्टियों को इसलिए वोट देता था क्योंकि उसको लगता था कि ये पार्टियां कुछ हिंदू वोट लेकर भाजपा को हरा सकती हैं। लेकिन अगर हिंदू इन पार्टियों को वोट नहीं दे रहा है तो फिर मुस्लिम भी अपनी पार्टी और अपना नेता खोज कर उसे वोट देंगे।

सुवेंदु सरकार को शत प्रतिशत अंक

नंदीग्राम से ज्यादा महत्वपूर्ण चुनाव नतीजा रेजिनगर विधानसभा सीट का है, जहां से भाजपा के सखारव सरकार ने आम जनता उन्नयन पार्टी यानी एजेयूपी के उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद को 75 हजार से अधिक वोट से हराया। रेजिनगर का परिणाम पश्चिम बंगाल के साथ साथ देश की राजनीति पर गंभीर असर डालने वाला है। यह चुनाव परिणाम विपक्ष की राजनीति को भी नए सिरे से व्याख्यायित करेगा।

यदि नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीट के उपचुनाव को पांच महीने पुरानी सुवेंदु अधिकारी सरकार की परीक्षा मानें तो कह सकते हैं कि सुवेंदु शत प्रतिशत अंक के साथ उतीर्ण हुए हैं। नंदीग्राम सीट जीतने का जो रिकॉर्ड उन्होंने खुद बनाया था वह रिकॉर्ड उनकी उम्मीदवार हसीरानी रथ ने तोड़ दिया। इस रिकॉर्ड का टूटना सुवेंदु अधिकारी की अपनी उपलब्धि में शुमार होगा। सुवेंदु ने 2016 के चुनाव में एक रिकॉड बनाया था, जब उन्होंने सीपीआई के अब्दुल कबीर शेख को 81 हजार से ज्यादा वोट से हराया था। उसके 10 साल बाद 2026 के उपचुनाव में उनकी चुनी हुई उम्मीदवार हसीरानी रथ ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के साझा उम्मीदवार मिलन प्रधान को एक लाख 22 हजार से ज्यादा वोट से हराया। यह निजी तौर पर सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व और उनकी सरकार के कामकाज पर सिर्फ नंदीग्राम की जनता की नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की जनता की स्वीकृति की मुहर है।

नंदीग्राम से ज्यादा महत्वपूर्ण चुनाव नतीजा रेजिनगर विधानसभा सीट का है, जहां से भाजपा के सखारव सरकार ने आम जनता उन्नयन पार्टी यानी एजेयूपी के उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद को 75 हजार से अधिक वोट से हराया। रेजिनगर का परिणाम पश्चिम बंगाल के साथ साथ देश की राजनीति पर गंभीर असर डालने वाला है। यह चुनाव परिणाम विपक्ष की राजनीति को भी नए सिरे से व्याख्यायित करेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह चुनाव परिणाम दशकों से स्थापित कई राजनीतिक मान्यताओं और धारणाओं को तोड़ने वाला है।

रेजिनगर विधानसभा सीट मुर्शिदाबाद जिले में आती है, जहां पूरे जिले में औसत मुस्लिम आबादी 55 से 60 फीसदी के करीब है। उसमें भी रेजिनगर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 70 फीसदी है। मुर्शिदाबाद जिले के ही बेलडांगा में हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की नींव रखी है। बाबरी मस्जिद की नींव रखने के बाद उन्होंने एजेयूपी नाम से पार्टी का गठन किया और दो सीटों से चुनाव लड़े। तमाम निगेटिव प्रचार के बावजूद वे दोनों सीटों से जीते। रेजिनगर सीट पर हुमायूं कबीर 58 हजार से ज्यादा वोट से जीते थे। लेकिन उनके इस्तीफे से खाली हुई इस सीट पर उनके बेटे गुलाम नबी आजाद 75 हजार से ज्यादा वोट से हारे। हुमायूं कबीर जितने वोट से जीते थे उतना वोट भी उनके बेटे को नहीं मिला। रेजिनगर सीट के चुनाव परिणाम की एक विशेष बात यह भी रही कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की पारंपरिक प्रतिद्वंद्री पार्टियों यानी कांग्रेस, तृणमूल और वामपंथी तीनों को मिला कर सिर्फ 13 हजार वोट मिले। लगातार 15 साल पश्चिम बंगाल में राज करने वाली ममता बनर्जी की पार्टी के उम्मीदवार और पूर्व विधायक रबीउल आलम चौधरी को सिर्फ 3,797 वोट मिले।

जिस विधानसभा सीट पर 70 फीसदी मुस्लिम आबादी हो उस सीट पर भाजपा के हिंदू उम्मीदवार को 63 फीसदी से ज्यादा वोट मिले। अगर तर्क के लिए यह मान लिया जाए कि सभी 30 फीसदी हिंदुओं ने भाजपा उम्मीदवार को वोट किया तब भी कम से कम 33 फीसदी मुस्लिम वोट भाजपा को मिले हैं। हर तीन में से एक मुस्लिम मतदाता ने भाजपा को वोट किया है। यह बहुत बड़ा और पश्चिम बंगाल के साथ साथ देश की राजनीति को प्रभावित करने वाला घटनाक्रम इसलिए है क्योंकि पांच महीने पहले के चुनाव में इसी सीट पर भाजपा के हिंदू उम्मीदवार को सिर्फ 27 प्रतिशत वोट मिले थे। पांच महीने के अंदर 36 फीसदी वोट का स्विंग अभूतपूर्व है। यह मुस्लिम मतदाताओं के मतदान व्यवहार में आए एक बड़े बदलाव का संकेत है।

इस चुनाव परिणाम के अलग अलग आयामों को समझने की आवश्यकता है। सबसे पहला और स्पष्ट आय़ाम यह है कि सुवेंदु अधिकारी ने अपने पांच महीने के छोटे से कार्यकाल में जो काम किया है उससे उन्होंने समाज के सभी वर्गों का भरोसा जीता है। इसमें समान रूप से मुस्लिम भी शामिल हैं। आंकड़े इसकी कहानी खुद बता रहे हैं। रेजिनगर में भाजपा के उम्मीदवार को जितना वोट हिंदुओं का मिला है उससे ज्यादा वोट मुसलमानों का मिला है। यह किसी भय या दबाव का नतीजा नहीं है। यह इस बात का संकेत है कि मुसलमानों ने सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व को स्वीकार किया है। यह उनके व्यक्तित्व का कमाल है कि उन्होंने मुस्लिमों का आह्वान किया और दोस्ती का मौका दिया तो मुस्लिम समाज ने इसे दिल खोल कर स्वीकार किया। उन्होंने भाजपा के प्रति अपने पूर्वाग्रह को छोड़ दिया। सुवेंदु अधिकारी उनको यह भरोसा दिलाने में सफल रहे हैं कि उनका हिंदुत्व किसी दूसरे धर्म को मानने वाले को नुकसान पहुंचाने या प्रताड़ित करने वाला नहीं है। उनका हिंदुत्व समावेशी है। मुसलमानों के मन में यह भरोसा इसलिए भी बना क्योंकि सुवेंदु सरकार ने सरकार की समस्त लोक कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से जारी रखा, किसी के साथ भेदभाव नहीं किया।

ऐसे ही कानून व्यवस्था बहाल करने और राज्य में हिंसा, वसूली, तोलाबाजी, कट-मनी आदि की संस्कृति को समाप्त करने के लिए भी सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने जो काम किया वह किसी जाति या धर्म को ध्यान में रख कर नहीं किया। असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई हुई, जिससे समाज में शांति बहाल हुई है। समाज में शांति बहाली का लाभ हर धर्म व जाति के लोगों को मिलता है। दशकों तक लेफ्ट और फिर डेढ़ दशक तक तृणमूल कांग्रेस के शासन में अराजकता, हिंसा और लूट से हर जाति व धर्म के लोग त्रस्त थे। उनको लेफ्ट व तृणमूल शासन में हुए शोषण का अहसास हुआ है। तभी उनके लिए सुवेंदु का शासन ताजा हवा के झोंके की तरह है। कह सकते हैं कि सरकार ने पांच महीने की छोटी सी अवधि में जिस तरह से शांति और सौहार्द्र स्थापित किया है उसी का परिणाम है कि भाजपा रेजिनगर जैसी सीट पर जीती और नंदीग्राम में जीत का रिकॉर्ड स्थापित किया।

यहां इस बात का जिक्र करना भी आवश्यक है कि रेजिनगर जैसी ही सामाजिक संरचना वाली असम की नगांव लोकसभा सीट पर भी भारतीय जनता पार्टी जीती है। नगांव में लगभग 60 फीसदी आबादी मुस्लिम है। इसके बावजूद इस सीट पर भाजपा के देबाशीष शर्मा डेढ़ लाख वोट से चुनाव जीते। असम में मुसलमानों के मसीहा माने जाने वाले जमात और एआईयूडीएफ के नेता बदरूद्दीन अजमल खुद उस सीट पर चुनाव लड़े थे। इसके बावजूद 40 फीसदी हिंदू आबादी वाली सीट पर भाजपा उम्मीदवार को 50 प्रतिशत वोट मिले। कांग्रेस की शिबोमणी बसु को सवा लाख से भी कम वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहीं। नगांव सीट की जीत भी समावेशी और लोक कल्याण की राजनीति की जीत है। यह भी मुस्लिम मतदाताओं के बदलते व्यवहार का संकेत है। ध्यान रहे जब बदरूद्दीन अजमल ने पार्टी बनाई थी, तब राज्य के बड़े हिस्से में मुस्लिम कांग्रेस को छोड़ कर उनके साथ गए थे। पिछले दो चुनावों में दिखा कि मुस्लिम अजमल को छोड़ कर कांग्रेस की ओर लौटे। लेकिन इस साल मई में आए विधानसभा चुनाव नतीजों से सबक लेकर मुस्लिम मतदाता अब अपनी नई पोजिशनिंग करते दिख रहे हैं। कुछ मुस्लिम मतदाता कांग्रेस और एआईयूडीएफ की बाइनरी से निकल कर भाजपा को भी एक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। यह दोनों की राजनीति के लिए चिंता की बात होगी।

अगर रेजिनगर व नंदीग्राम विधानसभा और नगांव लोकसभा सीट के चुनाव परिणामों के व्यापक असर की बात करें तो राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी इसका एक बड़ा संदेश है। इससे यह धारणा निर्णायक रूप से टूटी है कि मुस्लिम किसी हाल में भाजपा को वोट दे ही नहीं सकता है। अगर सरकार समावेशी हो, लोक कल्याणकारी हो और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने वाली हो तो मुस्लिम भी उसको वोट कर सकते हैं। वैसे भी तीन तलाक समाप्त होने और उसे अवैध बनाए जाने के बाद से मुस्लिम महिलाओं का एक हिस्सा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का समर्थन करता है और उनकी पार्टी को वोट करता है। चुनाव बाद जुटाए गए कई राज्यों के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं। धीरे धीरे ही सही लेकिन इस तरह का बदलाव अगर मुस्लिम मतदाताओं के व्यवहार में दिखता है तो उससे सामाजिक व राजनीतिक विभाजन कम होगा। भारत का समाज भी समावेशी बनेगा और तुष्टिकरण की राजनीति भी समाप्त होगी।

जहां तक विपक्ष की बात है तो मुख्य विपक्षी कांग्रेस और उसकी सहयोगी तृणमूल कांग्रेस के लिए इन नतीजों में दो बड़े संकेत छिपे हैं। पहला, मुसलमानों के मन में भाजपा के प्रति नफरत का भाव भरने के तमाम प्रयासों के बावजूद मुसलमान पूर्वाग्रह छोड़ कर भाजपा के साथ जा सकते हैं। दूसरा, तुष्टिकरण के तमाम प्रयासों के बावजूद कांग्रेस और तृणमूल जैसी पार्टियों से मुसलमानों का मोहभंग हो रहा है। कम से कम पश्चिम बंगाल और असम जैसी 30 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले राज्यों में मुस्लिम अब पारंपरिक सेकुलर पार्टियों की बजाय मुस्लिम नेताओं वाली पार्टियों की ओर देख रहे हैं। तभी नगांव में बदरूद्दीन अजमल और रेजिनगर में गुलाम नबी आजाद दूसरे स्थान पर रहे। दोनों सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस को ठुकराया।  (लेखक दिल्ली में सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामंग (गोले) के कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त विशेष कार्यवाहक अधिकारी हैं।)

Shardiya Navratri 2026 Muhurat: कल गज वाहन पर वैधृति योग और चित्रा नक्षत्र में होगा मां दुर्गा का आगमन, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त

Shardiya Navratri 2026 Muhurat: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह हिंदू कैलेंडर में आने वाली चार नवरात्रि पर्वों में से एक है, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। चार में से दो नवरात्रि, माघ और आषाढ़ में साधक गुप्त रूप से नौ सिद्धियों की उपासना करते हैं। जबकि चैत्र और शारदीय नवरात्रि का पर्व गृहस्थ भक्तों समेत सभी अन्य विशेष उत्साह और धूमधाम से मनाते हैं। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है और दशमी तिथि को इस पर्व का समापन होता है।

इस साल शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर दिन रविवार से हो रहा है। रविवार को मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर आएंगी। हाथी पर माता की सवारी भक्तों के लिए सुख, समृद्धि और उन्नति देने वाली मानी जाती है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना से नवदुर्गा की पूजा शुरू होती है। इस बार कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं। पंचांग के अनुसार, पहले दिन यानी प्रतिपदा पर वैधृति योग और द्विपुष्कर योग बन रहा है। इसके साथ ही चित्रा नक्षत्र भी विद्यमान रहेगा। आइए जानें प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?

शारदीय नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि मुहूर्त

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ : 10 अक्टूबर, शनिवार, रात 9:19 बजे

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि का समापन : 11 अक्टूबर, रविवार, रात 9:30 बजे

कलश स्थापना मुहूर्त 2026

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह में 06:19 ए एम से है और सुबह 10:12 ए एम तक रहेगा। दोपहर में कलश स्थापना मुहूर्त 11:44 ए एम से लेकर 12:31 पी एम तक है।

नवरात्रि के पहले दिन के मुहूर्त और योग

ब्रह्म मुहूर्त : प्रात: 04:40 बजे से लेकर 05:30 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : 11:44 ए एम से दोपहर 12:31 बजे तक

द्विपुष्कर योग : रात 09:30 बजे से लेकर रात 10:32 बजे तक

वैधृति योग : प्रात:काल से लेकर रात 09:05 बजे तक

चित्रा नक्षत्र : प्रात:काल से लेकर रात 10:32 बजे तक

उदया तिथि के आधार पर 11 अक्तूबर यानी रविवार को नवरात्र का प्रथम दिवस मान्य होगा। इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है।

शारदीय नवरात्रि 2026 कलश स्थापना सामग्री

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के स्वागत और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए घटस्थापना का विशेष विधान है। यह पूजा का सबसे महत्वपूर्ण आरंभिक चरण है। यहाँ कलश स्थापना के लिए जरूरी सामग्री दी गई है :

सामग्री सूची

मिट्टी का बर्तन/छोटा घड़ा या कलश : तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश

शुद्ध जल : गंगा जल मिला हुआ साफ पानी

पंचरत्न या सिक्के : कलश में डालने के लिए

आम या अशोक के पत्ते : 5 या 7 पत्ते कलश के मुख पर रखने के लिए

जटा वाला नारियल : जिस पर लाल कपड़ा या कलावा बंधा हो

बुआई के लिए सामग्री : एक चौड़ा मिट्टी का पात्र और उसमें बोने के लिए साफ जौ या गेहूं, तथा शुद्ध मिट्टी

पूजन सामग्री : रोली, कलावा, अक्षत, सुपारी, और पुष्प

अब आयुष डॉक्टरों को मिलेगी इमरजेंसी और वेलनेस की स्पेशल ट्रेनिंग, भारत-UK मिलकर जानिए क्या करेंगे

ये ध्रुव राठी… इनको ठीक करेंगे; हिन्दू रक्षा दल के पिंकी भैया के घर पुलिस, खूब बरसे

हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी भैया ने जंतर-मंतर पर लट्ठ लेकर विरोध जताने की घोषणा की थी। इसके बाद उन्होंने एक पोस्ट में दावा किया कि पुलिस उनके घर पहुंच गई है। उनका एक और वीडियो वायरल हो रहा है।

राहुल के रॉल खाने पर विवाद

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार, छह अक्टूबर को बड़ा प्रदर्शन किया। करीब 12 घंटे के इस प्रदर्शन के दौरान वे आठ घंटे तक ‘सत्याग्रह’ पर भी बैठे, दो घंटे तक हिरासत में रहे और दो घंटे तक सड़क पर खूब ऑप्टिक्स भी बनवाए। वे पुलिस के लगाए बैरिकेड्स के ऊपर चढ़ गए है, जिसकी वीडियो और तस्वीरें खूब वायरल हुई हैं। उनके प्रदर्शन का यह असर रहा कि मंगलवार को भाजपा को चार बार प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी। भाजपा के अलग अलग प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनाव आयोग का बचाव किया।

इस पूरे प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया में सक्रिय भाजपा के इकोसिस्टम के लोगों को जब कोई और मुद्दा नहीं मिला तो उन्होंने राहुल गांधी के ‘खान चचा’ दुकान से मंगा कर रॉल खाने को मुद्दा बनाया। यह माना गया कि दुकान का मुस्लिम नाम है तो इससे एक नैरेटिव बनेगा। हालांकि दुकान एक हिंदू कारोबारी की ही है। हो सकता है कि रील वायरल करने वाले भी इस बात को जानते हों। उन्होंने नैरेटिव बनाने के लिए यह भी प्रचार किया कि राहुल चिकन रॉल खा रहे थे। तस्वीर जूम करके लाल निशान दिखाया जा रहा था। किसी को इस बात पर आपत्ति थी कि राहुल मंगलवार को नॉनवेज खा रहे थे तो किसी को इस पर परेशानी थी कि पितृपक्ष का समय चल रहा है और राहल नॉनवेज खा रहे थे। सोचें, कितने बड़े आरोपों को लेकर प्रदर्शन हो रहा था और भाजपा का इकोसिस्टम उसके किस स्तर पर ला रहा है!

Maha Ashtami & Maha Navami 2026: शारदीय नवरात्रि में कब होगी महा अष्टमी और महा नवमी? जानें तारीख, पूजा मुहूर्त और पारण का समय

Maha Ashtami & Maha Navami 2026: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्री के पर्व का विशेष स्थान है। यह पव हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व के आठवें दिन यानी अश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि को महा अष्टमी और अश्विन शुक्ल नवमी तिथि को महा नवमी का पर्व मनाया जाता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा की उपासना करने वाले सभी भक्त इन दिनों में कन्या पूजन, उपवास और विशेष अनुष्ठान आदि का आयोजन करते हैं। शारदीय नवरात्री के नौ दिन मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। आइए जानें इस साल महा अष्टमी और महा नवमी का पर्व किस दिन मनाया जाएगा? इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगी।

19 अक्टूबर को होगी महाष्टमी की पूजा

इस वर्ष अष्टमी तिथि का आरंभ 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:27 बजे होगा और इसका समापन 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार 19 अक्टूबर को अष्टमी मानी जाएगी। इसलिए जिन लोगों के यहां अष्टमी के दिन विशेष पूजा, हवन या कन्या पूजन की परंपरा है, वे 19 अक्टूबर को यह अनुष्ठान कर सकते हैं। अगर आप अष्टमी का व्रत रखते हैं तो 19 अक्टूबर को व्रत रखें और विधि-विधान से मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा करें।

महा अष्टमी 2026 कन्या पूजन समय

कन्या पूजन या कन्या भोजन कराने वाले लोग भी 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि के दौरान यह अनुष्ठान कर सकते हैं। कोशिश करें कि अष्टमी से जुड़े पूजा-पाठ और कन्या पूजन सुबह 10:51 बजे से पहले कर लिया जाए। कुछ परिवारों में महाष्टमी के दिन कुलदेवी या मां चामुंडा की पूजा रात के समय की जाती है। ऐसे परिवार 18 अक्टूबर की रात को अष्टमी तिथि लगने के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।

महानवमी 2026 कब है?

19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे अष्टमी तिथि समाप्त होगी और इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। इसलिए 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद महानवमी की पूजा, हवन और कन्या पूजन किया जा सकता है। अगर आपके परिवार में नवमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा है, तो आप 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद कन्या पूजन और हवन कर सकते हैं। 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी दोनों का कन्या पूजन किया जा सकता है।

20 अक्टूबर को भी कर सकते हैं नवमी का कन्या पूजन

जो श्रद्धा उदया तिथि को विशेष महत्व देते हैं, वे 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं। हालांकि, इस दिन नवमी तिथि दोपहर 12:50 बजे तक ही रहेगी। इसलिए 20 अक्टूबर को नवमी के अनुसार पूजा, हवन और कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को दोपहर 12:50 बजे से पहले यह अनुष्ठान पूरा कर लेना चाहिए। इस तरह, जो लोग उदया तिथि को मानते हैं, वे 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं।

महानवमी का व्रत कब रखें और पारण कब करें?

महानवमी का व्रत 19 अक्टूबर को व्रत रख सकते हैं। नवमी के दिन मां दुर्गा की पूजा करें और पूरे दिन व्रत रखें। व्रत का पारण अगले दिन यानी विजयादशमी के दिन करना उचित माना जाता है।

संधि पूजा का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष संधि पूजा का मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक रहेगा। यह कुल 48 मिनट का समय होगा। अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट को मिलाकर कुल 48 मिनट का यह समय संधि काल कहलाता है। इसी दौरान संधि पूजा की जाती है। शास्त्रों में संधि काल को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी समय मां दुर्गा ने चामुंडा स्वरूप धारण करके चंड और मुंड नामक असुरों का संहार किया था। इसी वजह से संधि पूजा में मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की विशेष आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस विशेष समय में मां चामुंडा की पूजा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है।

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प्रधानमंत्री मोदी का 25 अक्टूबर को काशी में जेन-जी संवाद प्रस्तावित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 25 अक्टूबर को काशी में हजारों युवाओं के साथ जेन-जी संवाद कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) अथवा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के परिसर में आयोजित किए जाने की तैयारी है।

प्रस्तावित कार्यक्रम में 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के करीब 30 हजार युवाओं के शामिल होने की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जिला और महानगर इकाइयों के साथ ही क्षेत्रीय संगठन भी आयोजन की तैयारियों में जुटे हैं। काशी में 22, 24 और 25 अक्टूबर को भव्य एयर शो भी प्रस्तावित है।

नमो घाट पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई गणमान्य लोगों के शामिल होने की संभावना है। एयर शो की तैयारियों के तहत नमो घाट पर छह बेड का अस्थायी अस्पताल बनाया जा रहा है, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत डोमरी में वॉच टावर भी बनाया जा रहा है।

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एसपीजी और एटीएस समेत विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां तैयारियों में जुटी हैं। प्रस्तावित एयर शो में सेना के विभिन्न प्रकार के विमान और एयरक्राफ्ट करीब 90 मिनट तक हवाई करतब प्रस्तुत करेंगे। गंगा के दोनों तटों से इस भव्य आयोजन को देखने के लिए करीब 30 लाख दर्शकों के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने अधिकारियों को भीड़ के दबाव वाले संभावित स्थानों को चिह्नित कर विस्तृत क्राउड मैनेजमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस आयुक्त ने सभी प्रमुख घाटों और दर्शक स्थलों पर प्रवेश एवं निकास के लिए अलग-अलग मार्ग, बैरिकेडिंग, होल्डिंग एरिया, क्यू मैनेजमेंट तथा पैदल आवागमन के लिए निर्धारित मार्ग बनाने के निर्देश दिए हैं।

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पंजाब में सिर्फ हिंदू वोट के सहारे

राजनीति में कई बार किसी जाति या धर्म के व्यक्ति को आगे करके मैसेज दिया जाता है और कई बार किसी धर्म के व्यक्ति को हटा कर मैसेज दिया जाता है। भाजपा ने किसी मुस्लिम को लोकसभा या राज्यसभा की टिकट नहीं देने की नीति पर चल कर देश के 80 फीसदी के करीब हिंदुओं को एक मैसेज दिया। क्या ऐसा ही मैसेज रवनीत सिंह बिट्टू और हरदीप सिंह पुरी को राज्यसभा की टिकट नहीं देकर भाजपा ने पंजाब के हिंदू मतदाताओं को दिया है? ध्यान रहे पंजाब में 38 फीसदी के करीब हिंदू मतदाता हैं। गुरदासपुर जैसे एकाध जिलों के ग्रामीण इलाकों को छोड़ दें तो हिंदू वोट का कंसोलिडेशन आमतौर पर शहरी इलाकों में है, जहां भाजपा को मजबूती से चुनाव लड़ना है।

ऐसा लग रहा है कि दोनों सिख मंत्रियों को बारी बारी से राज्यसभा की टिकट रिन्यू नहीं करके भाजपा ने पंजाब के हिंदू मतदाताओं को एक मैसेज दिया है। हालांकि भाजपा ने जाट सिख समुदाय के केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। लेकिन वह भी प्रतीकात्मक है। भाजपा के जानकार नेताओं का कहना है कि राज्य की 55 के करीब सीटें ऐसी हैं, जहां हिंदू मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। भाजपा अगर अकाली दल से तालमेल करती है तो वह इन सीटों पर दावा करेगी। ध्यान रहे राज्य की सभी पार्टियां जाट सिख या मजहबी दलित वोट पर नजर गड़ाए हुए हैं। भाजपा उससे अलग अपना एक समीकरण बना रही है। इससे राज्य का चुनाव दिलचस्प होगा।

Sarva Pitru Amavasya 2026: सर्व पितृ अमावस्या कब है? जानें कुतुप और रौहिण मुहूर्त का समय और गजच्छाया योग का संयोग

Sarva Pitru Amavasya 2026: हिंदू कैलेंडर में हर साल अश्विन माह के कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष मनाया जाता है। 15-16 दिनों की यह अवधि स्वर्गवासी हो चुके परिजनों की आत्मा की शांति के पूजा, पाठ, हवन, श्राद्ध और तर्पण के लिए निश्चित होती है। इस अवधि का समापन अश्विन अमावस्या के दिन सर्व पितृ विसर्जन के साथ होता है। सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करते हैं। जिन पितरों का निधन किसी भी माह की अमावस्या तिथि को हुआ है, उन सभी का श्राद्ध इस दिन किया जाता है। साथ ही, जिन पितरों के निधन की तिथि नहीं पता है, उनके लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म सर्व पितृ अमावस्या को होगा। इस साल सर्व पितृ अमावस्या के दिन शनि अमावस्या और गजच्छाया योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

सर्व पितृ अमावस्या 2026 कब है?

आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर दिन शुक्रवार को रात 9:35 बजे से शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन 10 अक्टूबर रविवार को रात 09:19 बजे तक उपस्थित रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को होगी। उस दिन सूर्योदय सुबह में 06:19 ए एम पर है। पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म दिन के समय में करते हैं। उसके लिए कुतुप मुहूर्त और रौहिण मुहूर्त होता है।

सर्व पितृ अमावस्या 2026 तर्पण-श्राद्ध मुहूर्त

सर्व पितृ अमावस्या के दिन तर्पण और श्राद्ध दिन में किया जाएगा। इस साल कुतुप मुहूर्त और रौहिण मुहूर्त 47-47 मिनट का होगा, वहीं अपराह्न काल 2 घंटे 20 मिनट का होगा।

कुतुप मुहूर्त : दिन में 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक

रौहिण मुहूर्त : दोपहर 12:31 बजे से लेकर दोपहर 01:18 बजे तक

अपराह्न काल : दोपहर 01:18 बजे से लेकर दोपहर 03:37 बजे तक

शनिश्चरी अमावस्या का संयोग

सर्व पितृ अमावस्या के दिन शनिश्चरी अमावस्या का संयोग बना है। इस दिन स्नान और दान के बाद शनिदेव की पूजा करने से साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट दूर होते हैं।

आश्विन अमावस्या 2026 स्नान-दान मुहूर्त

आश्विन अमावस्या पर स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे अच्छा माना जाता है। उस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 04:40 ए एम से 05:29 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:45 ए एम से दोपहर 12:31 पी एम तक है। जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान न कर पाएं, वे सूर्योदय के बाद कर सकते हैं।

सर्व पितृ अमावस्या 2026 गजच्छया योग

गजच्छाया योग हर साल नहीं मिलता है। लेकिन इस योग का निर्माण आमतौर से पितृ पक्ष के समय ही होता है। इसे श्राद्ध कर्म, दान-पुण्य आदि गतिविधियों के लिये अत्यधिक शुभ माना जाता है। पितृ पक्ष की अमावस्या तिथि पर, जब सूर्य और चंद्रमा हस्त नक्षत्र में होते हैं, तो इस संयोग को गजच्छया योग के रूप में जाना जाता है। इसीलिये, पितृ पक्ष की समयावधि में एक अथवा दो गजच्छया योग भी हो सकते हैं। यह शुभ संयोग त्रयोदशी तिथि या अमावस्या तिथि को निर्मित होता है।

10 अक्टूबर गजच्छाया योग समय

गजच्छाया योग प्रारंभ : अक्टूबर 9, 2026, शुक्रवार को 21:35 बजे

गजच्छाया योग समाप्त : अक्टूबर 10, 2026, शनिवार को 21:19 बजे

अवधि – 23 घण्टे 44 मिनट

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उपचुनाव नए मुख्यमंत्रियों की परीक्षा

मंगलवार, छह अक्टूबर को एक लोकसभा और सात विधानसभा सीटों के उपचुनाव हैं। हालांकि इनके नतीजों से किसी भी सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन कम से कम दो राज्यों के उपचुनावों के नतीजे मुख्यमंत्रियों के लिए बहुत अहम होंगे। पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और तमिलनाडु के सी जोसेफ विजय की परीक्षा उपचुनावों में होने वाली है। दोनों राज्यों में दो दो सीटों के उपचुनाव हो रहे हैं। बंगाल में एक सीट तो मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अपनी है। वे नंदीग्राम और भबानीपुर दोनों सीटों से जीते थे और नंदीग्राम खाली कर दी थी। दूसरी सीट रेजिनगर की है। एजेपी नाम से पार्टी बना कर चुनाव लड़े हुमायूं कबीर रेजिनगर और नौदा से जीते थे। उन्होंने रेजीनगर सीट पर अपने बेटे को लड़ाया है। वहां एजेपी, कांग्रेस, तृणमूल के दोनों गुट और लेफ्ट से पांच मुस्लिम उम्मीदवार लड़ रहे हैं।

हालांकि फिर भी भाजपा के हिंदू उम्मीदवार के जीतने के चांस कम हैं। तभी शुभेंदु अधिकारी का पूरा फोकस नंदीग्राम पर है। वे बड़े अंतर से इस सीट को जीतना चाहते हैं। उधर तमिलनाडु की दो सीटों मदुरंतकम और धारापुरम में उपचुनाव हो रहा है। दोनों सीटें पिछले चुनाव में अन्ना डीएमके ने जीती थी। उसके विधायक पाला बदल कर विजय की पार्टी टीवीके में शामिल हो गए विजय ने दोनों को टिकट देकर मैदान में उतारा है। गौरतलब है कि विजय की पार्टी के पास अकेले बहुमत नहीं है। वे दूसरी पार्टियों के विधायकों के इस्तीफे करा कर उन्हें अपनी पार्टी से लड़ा रहे हैं और बहुमत हासिल करना चाहते हैं। अगर ये दोनों सीटें उनकी पार्टी जीतती है तो विजय की स्थिति मजबूत होगी। दिलचस्प यह है कि विजय की सरकार को समर्थन देने वाली लेफ्ट पार्टियों के उम्मीदवार इन दोनों सीटों पर लड़ रहे हैं।