Ekadashi October 2026: अक्टूबर में आएंगी इंदिरा और पापांकुशा एकादशी, जानें तारीख, मुहूर्त और पारण समय

Ekadashi October 2026: हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल की एकादशी तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए इसे श्री हरि की कृपा पाने का सबसे सरल उपाय भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे साल में आने वाली 24 एकादशी तिथियों का व्रत करने वाले भक्तों पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा होती है। उनके आशीर्वाद से व्रतियों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें बैकुंठ में स्थान प्राप्त होता है।

हर माह की तरह अश्विन माह में भी दो एकादशी व्रत किए जाते हैं इंदिरा एकादशी और पापांकुशा एकादशी। इस साल यह दोनों उपवास अक्टूबर माह में किए जाएंगे। इंदिरा एकादशी का खास महत्व है क्योंकि यह पितृ पक्ष के दौरान आती है, जब पुरखों के लिए प्रार्थना और पूजा-पाठ किए जाते हैं। यहां इंदिरा एकादशी की तारीखें, तिथि का समय और पारण की जानकारी दी गई है, साथ ही अश्विन में पापांकुशा एकादशी की तारीख भी दी गई है।

इंदिरा एकादशी 

अश्विन कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष मनाया जाता है और यह पुरखों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे रीति-रिवाजों से जुड़ा है। इंदिरा एकादशी इसी समय पड़ती है। माना जाता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत रखने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है।

इंदिरा एकादशी 2026 तारीख और समय

इस साल इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को सुबह 2:07 बजे शुरू होगी और 7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे खत्म होगी। हिंदू त्योहारों की तारीखें आमतौर पर सूर्योदय के समय की तिथि से तय होती हैं, इसलिए व्रत 6 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

इंदिरा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

वैदिक कैलेंडर के अनुसार, अश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को सुबह 2:07 बजे शुरू होगी और 7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे खत्म होगी। भक्त 6 अक्टूबर तक पूरे दिन व्रत रख सकते हैं और दिन में भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं।

पंचांग के अनुसार सूर्योदय सुबह 6:17 बजे और सूर्यास्त शाम 6:01 बजे होगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:39 बजे से 5:28 बजे तक रहेगा, जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 2:06 बजे से 2:53 बजे तक रहेगा। गोधूलि बेला शाम 6:01 बजे से 6:26 बजे तक और निशिता मुहूर्त रात 11:45 बजे से 12:34 बजे तक रहेगा।

इंदिरा एकादशी 2026 पारण समय

इंदिरा एकादशी का व्रत बुधवार, 7 अक्टूबर को तोड़ा जाएगा। दिए गए समय के अनुसार, भक्त सुबह की रस्में, प्रार्थना और शास्त्रों का पाठ पूरा करने के बाद सुबह 6:17 बजे से 8:38 बजे के बीच पारण कर सकते हैं।

पापांकुशा एकादशी 2026: यह कब मनाई जाएगी?

पापांकुशा एकादशी आश्विन शुक्ल पक्ष में आती है और गुरुवार, 22 अक्टूबर, 2026 को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे शुरू होगी और 22 अक्टूबर को दोपहर 2:47 बजे खत्म होगी। इसलिए व्रत की तारीख 22 अक्टूबर है।

पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने वाले भक्तों के लिए, पारण 23 अक्टूबर को किया जाता है। पारण का सही समय जगह के हिसाब से अलग हो सकता है क्योंकि एकादशी मनाने और पारण समय की गणना स्थानीय सूर्योदय और तिथि के हिसाब से होती है।

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सर्वे- ट्रम्प के कामकाज से 70% अमेरिकी संतुष्ट नहीं:मिडटर्म में हार का खतरा; राष्ट्रपति के खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी में बगावत तेज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी में बगावत के संकेत दिखने लगे हैं। ट्रम्प की लोकप्रियता घट रही है। पार्टी नेताओं को डर है कि मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प का साथ उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। नवंबर में होने वाले चुनाव से पहले कई रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प से दूरी बना रहे हैं। कुछ ने अपनी चुनावी वेबसाइट से ट्रम्प और उनके ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे का जिक्र हटा दिया है। कुछ नेता उनके साथ मंच साझा करने से भी बच रहे हैं। एपी-एनओआरसी सर्वे के मुताबिक, सिर्फ 30% अमेरिकी ट्रम्प के कामकाज से खुश हैं। अर्थव्यवस्था पर उनकी अप्रूवल रेटिंग 26% है। महंगाई से निपटने के मामले में यह सिर्फ 17% है। 65% से ज्यादा अमेरिकी बढ़ती कीमतों के लिए ट्रम्प की नीतियों को जिम्मेदार मानते हैं। ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ कई रिपब्लिकंस आयोवा से सांसद और सीनेट उम्मीदवार एश्ले हिंसन और मिशिगन के सीनेट उम्मीदवार माइक रोजर्स ने ईरान युद्ध जल्द खत्म करने की मांग की है। दोनों पहले ट्रम्प की सैन्य कार्रवाई के समर्थक थे। आयोवा के सांसद जैक नन और मैरियानेट मिलर-मीक्स ने ट्रम्प की युद्ध शक्तियां सीमित करने के लिए डेमोक्रेट्स के साथ वोट किया। फ्लोरिडा की सांसद मारिया ने ट्रम्प की सख्त इमिग्रेशन नीति पर सवाल उठाए हैं। कई उम्मीदवारों ने कहा है कि वे ट्रम्प का प्रचार नहीं चाहते। अर्थव्यवस्था बड़ी कमजोरी, ट्रम्प को 26% सपोर्ट ट्रम्प से दूरी वाले खेमे में बड़े नाम; गवर्नर से सांसदों तक का विरोध सर्वे: ट्रम्प के गढ़ ओहायो से गवर्नर की रेस में भारतवंशी रामास्वामी भी 6 पॉइंट पीछे ओहायो गवर्नर चुनाव में भारतवंशी विवेक रामास्वामी के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है। ट्रम्प ने 2024 में यह राज्य 11 पॉइंट से जीता था, लेकिन 24 से 27 सितंबर के मैरिस्ट सर्वे में डेमोक्रेट एमी एक्टन 50% समर्थन के साथ रामास्वामी से 44% से आगे हैं। इसी सर्वे में ट्रम्प का अप्रूवल 42% रहा। 41% वोटर्स ने कहा कि चुनाव में उनका वोट मुख्य रूप से ट्रम्प के खिलाफ होगा। विपक्षी डेमोक्रेट्स 9 अंक आगे, हाउस में इतनी बढ़त रिपब्लिकन के लिए बड़ा खतरा रिपब्लिकन पार्टी की चिंता राष्ट्रीय चुनावी आंकड़ों से भी बढ़ रही है। नेट सिल्वर के औसत के मुताबिक सितंबर की शुरुआत में कांग्रेस के जेनेरिक बैलट में डेमोक्रेट्स की बढ़त 6.7 अंक थी, जो अब 9 अंक हो गई। हाउस में इतनी बढ़त रिपब्लिकन के लिए गंभीर खतरा है। सीनेट में भी तस्वीर पहले के मुकाबले कठिन हुई है। रिपब्लिकन फिलहाल 53-47 की बढ़त रखते हैं, लेकिन कुछ ऐसी सीटें भी प्रतिस्पर्धी हो गई हैं जिन्हें पहले सुरक्षित माना जा रहा था। ————————- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमला, खिड़कियां टूटीं:पुजारी समेत श्रद्धालु अंदर मौजूद थे अमेरिका के ओहायो में शुक्रवार को हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला किया गया। इसमें मंदिर को काफी नुकसान हुआ। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन के मुताबिक, दोपहर 1:30 बजे श्री स्वामीनारायण वडताल धाम हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया। पूरी खबर पढ़ें…

प्रधानमंत्री जीत तय मानता है, जनता धोखा देती है!

यह दिल्ली की सत्ता की पुरानी बीमारी है। सत्ता में बैठ कर प्रधानमंत्री को धीरे-धीरे विश्वास होने लगता है कि उसने भारत को समझ लिया है। जनता को पढ़ लिया है। किसे राशन चाहिए, किसे आरक्षण, किस जाति को क्या चाहिए, किस धर्म को किससे डराना है, किस लाभार्थी को कितने रुपये देने हैं और किस नारे से चुनाव जीतना है, इसका हिंसाब लगातार पकाया जाता है। नरेंद्र मोदी-अमित शाह तो यों भी चौबीसों घंटे हिसाब बनाते है। इनकी सर्वे टीम, लगातार काम करती है। पार्टी, संघ संगठन अलग से सर्वे, फीडबैक देते है। दरबारी पूजा करते ही है तो प्रचारतंत्र से पूरे देश को मीडिया, सोशल मीडिया, इंस्टाग्राम चौबीसों घंटे, सातों दिन खुद मोदी बताते है कि वे लोगों की भलाई के लिए कैसे दीन-रात अपना खून सूखा रहे है!

जवाहरलाल नेहरू को छोडकर हर प्रधानमंत्री भारत के मतदाताओं के साथ इसी विश्वास में जीया है कि जब इतना कर रहे है तो लोग उन्हे बदले में उन्हे ही वोट देंगे। न कि लोहिया की भीड, जनसंघ के नारों और समाजवाद को कोसने वाले स्वतंत्र पार्टी के उधमियों को। बावजूद इसके नेहरू के बाद हर प्रधानमंत्री को जनता ने तब भी सत्ता से बेदखल किया जब वे शाईनिंग इंडिया जैसी बातों में झूमते-झूमाते हुए थे।

ऐसा इंदिरा गांधी के साथ हुआ। राजीव गांधी, नरसिंह राव के साथ हुआ तो अटलबिहारी वाजपेयी के साथ भी हुआ। फिर दस वर्ष की मनमोहन सिंह सरकार के साथ हुआ। वजह हर बार एक नहीं थी। कहीं आंदोलन था, कहीं भ्रष्टाचार मुद्दा था, कहीं विपक्ष एक हुआ, कहीं महंगाई और स्थानीय असंतोष था। लेकिन हर बड़ी चुनावी हार में एक समानता जरूर थी। सत्ता को अपने बनाए गणित पर चुनावी मतगणना तक भरोसा था कि वे जीत रहे है। और मुझे पता है सरकारी खुफिया एजेंसियां भी ऐसे ही हिसाब, ऐसे मुगालतों में रही है।

सोचें, इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी में क्या बाकी छोड़ा था? विपक्ष जेल में, प्रेस पर सेंसरशिप, प्रशासन सरकार के हाथ और प्रधानमंत्री की सत्ता अपने चरम पर। मगर 1977 में जब चुनाव हुआ तो कांग्रेस 154 सीटों पर रह गई। वही लावारिस जनता पार्टी ने 295 सीटें जीती। स्वयं इंदिरा गांधी रायबरेली, संजय गांधी अमेठी हार गए। जिस सत्ता के सामने देश खामोश दिखाई देता था, उसी खामोशी ने मतपेटी में उसका फैसला किया।

और राजीव गांधी! दिसंबर 1984 में किसे कल्पना थी कि नौजवान प्रधानमंत्री का चक्रवर्ती जनादेश पांच वर्ष भी नहीं टिकेगा? उन्होने 1984-85 में 414 सीटें जीती थीं। 1989 में उनकी कांग्रेस 197 सीटों पर रह गई।

भारत में हर बडी चुनावी हार सरकार, सत्ता के हर तरह के दुरूपयोग, आंतक, चुनावी धांधलियों, शाईनिंग इंडिया जैसे ढिढोरों के बावजूद हुई है। सोचे, किसने सोचा शाईनिंग नेतृत्व, शाईनिंग इंडिया के बावजूद प्रधानमंत्री वाजपेयी 2004 में सोनिया गांधी के आगे हारेंगे? कोई माने या न माने अन्ना, केजरीवाल के आंदोलनों, अपनी भारी-भरकम वर्चुअल कैंपेनिंग के बावजूद नरेंद्र मोदी को भी भरोसा नहीं था कि हिंदीभाषी इलाके में उनकी आंधी जैसे चुनाव परिणाम होंगे!

आगे 2024 के चुनाव में जो हुआ वह सामान्य नहीं था। ध्यान रहे ये चुनाव अयोध्या में राममंदिर की प्राणप्रतिष्ठा के बाद हुए थे। बावजूद इसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उस उत्तरप्रदेश में भी कम सीटे मिली जहां रामजी का नगाड़ा घर-घर गूंजा था। भाजपा 303 से घटकर 240 सीटों पर सिमटी। गठबंधन से जरूर बहुमत बचा, लेकिन भाजपा अपना अकेला बहुमत तो खो बैठी थी।

तभी से नरेंद्र मोदी- अमित शाह मतदाताओं की सूचियों को सुधारने के नाम पर उन्हे कैसे मनमाफिक बनवाने के अभियान में जुटे है, इसके ढेरों किस्से, साक्ष्य अब जगजाहिर है। जीतने की ऐसी हठ से स्वभाविक सवाल है कि मोदी के रहते कुल मतदाताओं की संख्या में क्या संघ परिवार-भाजपा पचास प्रतिशत से ऊपर की संख्या वफादार वोटों, भक्तों की बनवा लेगै? आखिर इसके बिना तो लगातार चुनाव को गारंटीनुमा जीतना संभव नहीं है? क्या लोग ऐसा होने देंगे? गली-गली, घऱ-घर में किसी के नाम होने, किसी के कटे होने की वासत्विकताओं में क्या लोगों को जाहिर नहीं होगा कि वोटर लिस्ट की ऐसी गडबडी किसलिए? नतीजतन वही वही मौन सत्ता पलट क्रांति होगी जैसे इमरजेंसी के बाद इंदिरा गांधी के खिलाफ हुई थी।

मगर प्रधानमंत्री ऐसे नहीं सोचता। वह सत्ता है तो मुमकिन के विश्वास में जीता होता है।

ऐसा आत्मविश्वास मैंने लालू यादव के समय के बिहार में देखा था तो एनटी रामराव, वीपीसिंह (राजा ने बांधी गांठ, पिछड़ा पावे सौ में साठ)। या कांसीराम-मायावती का हुंकारा-जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। सोचे वीपीसिंह, मायवती, लालू-राबडी यादव का गणित आधारित चक्रवर्तीय शासन कितनी पीड़ी फला-फूंला?

पुराने नेताओं और नरेंद्र मोदी की गणित में एक बुनियादी फर्क है। नरेंद्र मोदी ने अजैविक, दैवीय जन्म के विश्वास में हिंदुओं में अपना भक्ति आंदोलन बनाया है। बावजूद इसके जरा गौर करे कि इन कथित भगवानजी को भी चुनाव आयोग के जरिए वोटरलिस्ट का पुर्नलेखन करवाना पड रहा है। उसी बूते तो भगवानजी को विश्वास है, संघ-भाजपा के सत्ताभोगियों की तैयारियां है कि 2047 तक तो उनका राज पक्का है। 2034 तक मोदी, 2034 से 2043 तक अमित शाह और 2043 -2047 के सौ वर्षीय भारत के युगप्रवर्तक प्रधानमंत्री होंगे योगी आदित्यनाथ! कल्पना करें तब तक एक नंबर बन चुके चीन के आगे भारत के नेतृत्वकर्ता के चेहरे पर।

हां, गांठ बांधे रखे मोदी है तो सब संभव है। दरअसल हजार साला गुलामी में जीया हुआ, धड़कता हुआ भक्त हिंदू ऐसे ही सोचा करता है। यही हिंदू राष्ट्र का सत्य है और भविष्य की खामोख्याली है।

इसलिए उन बातों, उन वीडियों को नहीं देखे जो दो अक्टूबर को मुंबई में नौजवानों के विशाल हूजुम में मौजूद है या दिल्ली में मौजूद था। नौजवान जंतर-मंतर पर बैठ कर भले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले या ज्ञानेश कुमार का। प्रदर्शन कॉकरोचों का हो, आम आदमी-वामपंथियों का हो या कांग्रेस-ममता बनर्जी और विपक्षी गठजोड़ का, इन सबका नमोदी- शाह पर रत्ती भर असर नहीं होना है!

नोट रखे भारत में सत्ता प्रदर्शन नहीं देखती। स़डक का गुस्सा नहीं समझती। सत्ता हमेशा अपने आंकड़े देखती होती है। दिल्ली की सत्ता की खूबी है जो प्रधानमंत्री और उसके अनुचरों को सौ टका विश्वास दिलाए रहती है कि आप प्रधानमंत्री नहीं, भारत भाग्य विधाता हैं। हम जनता के लिए इतना कुछ तो कर रहे हैं। भारत अब शाइनिंग इंडिया है। आप माईबाप, हुजूर सभी को रोटी खिला रहे हैं। राशन दे रहे है। घर दिया। शौचालय दिया। गैस दी। राशन दिया। खाते में पैसा दिया। रामजी की ऊंगली पकड़ उन्हे राममंदिर में प्रतिष्ठित किया। भारत का दुनिया में डंका बजा हुआ है। औरतें भी कह रही हैं, हमने नमक खाया है तो मोदीजी को ही वोट देंगे। इं

दिरा गांधी ने भी सब किया था। वाजपेयी, उनके साथी धुरंधरों, प्रमोद महाजन, वेंकेया, जेतली, सुषमा जैसे ढेरों नाम शाईनिंग इंडिया से देश गुंजाते हुए थे। ध्यान रहे दंगों के बाद की हिंदू राजनीति के पीक के बावजूद मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने प्रदेश गुजरात में 26 सीटों में से 14 सीटे ही भाजपा को जीता पाए थे।

और हर बार वही कहानी। चुनावी मतगणना के दिन ही सत्ता को मालूम होता है अरे यह क्या! सो नोट रखे भारत का मतदाता भी कभी किसी प्रधानमंत्री की स्थायी संपत्ति नहीं हुआ। भक्तों की भी आस्था के भगवान समय अनुसार चुपचाप बदलते रहते है!

सीमा पर गोलीबारी के बाद पाकिस्तान में भारतीय राजनयिक तलब:कहा- मारे गए लोग PAK नागरिक थे; BSF ने घुसपैठ के शक में गोली मारी थी

पाकिस्तान ने शनिवार को भारतीय राजनयिक को तलब किया है। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने पंजाब के तरनतारन में भारत-पाक सीमा पर दो लोगों की मौत पर विरोध जताया है। पाकिस्तान का दावा है कि दोनों पाकिस्तानी नागरिक थे और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की गोलीबारी में मारे गए। यह घटना शुक्रवार को हुई थी। वहीं भारतीय अधिकारियों के मुताबिक ये लोग भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे थे। चेतावनी देने के बाद BSF ने गोली चलाई। BSF ने चेतावनी दी थी, नहीं रुके तो गोली चलाई भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, तीन संदिग्ध लोग पाकिस्तान की तरफ से भारतीय सीमा की ओर बढ़ रहे थे। BSF जवानों ने उन्हें रुकने की चेतावनी दी। इनमें से एक वापस पाकिस्तान की तरफ चला गया, जबकि दो लोग आगे बढ़ते रहे। इसके बाद BSF ने फायरिंग की, जिसमें दोनों की मौत हो गई। तरनतारन में 7 महीने में घुसपैठ की यह दूसरी घटना है। पाकिस्तान ने जांच की मांग की है पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मारे गए दोनों लोग निहत्थे नागरिक थे। पाकिस्तान के मुताबिक, वे सीमा के पास गए थे और अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर गए। पाकिस्तान ने कहा है कि उसके नागरिकों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई सही नहीं है। पाकिस्तान ने मामले की तुरंत, पारदर्शी और विश्वसनीय जांच की मांग की है। साथ ही उसने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और जांच के नतीजे पाकिस्तान सरकार को बताने को कहा है। पाकिस्तानी वेबसाइट डॉन के मुताबिक मारे गए लोगों की पहचान आजमत रसूल और मोहसिन जट्ट के रूप में हुई है। दोनों लाधर के जट्टां वाली हवेली इलाके के रहने वाले थे। तीसरा व्यक्ति घायल है और अस्पताल में भर्ती है। इससे पहले भी 5 घुसपैठिए मारे गए मार्च 2026: तरनतारन के खेमकरण सेक्टर में BSF ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को मार गिराया था। वह चेतावनी के बाद भी आगे बढ़ रहा था। अगस्त 2024: तरनतारन के दल गांव के पास एक पाकिस्तानी घुसपैठिया मारा गया था। अगस्त 2023: तरनतारन के थेकालन गांव के पास एक घुसपैठिए की गोलीबारी में मौत हुई। मई 2021: खालड़ा गांव के पास एक पाकिस्तानी घुसपैठिया मारा गया। BSF ने उसके पास से पाकिस्तानी सामान बरामद किया था। फरवरी 2021: फिरोजपुर सेक्टर में एक पाकिस्तानी घुसपैठिया मारा गया। उसके पास से 14.8 किलो हेरोइन और हथियारों से जुड़ा सामान मिला था। ——————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमला, खिड़कियां टूटीं:पुजारी समेत श्रद्धालु अंदर मौजूद थे अमेरिका के ओहायो में शुक्रवार को हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला किया गया। इसमें मंदिर को काफी नुकसान हुआ। पूरी खबर पढ़ें…

3 बार रहे विधायक, मिला पद्म श्री और ओलंपिक में की भारत की कप्तानी, जानिए पंजाब कांग्रेस के नए बॉस परगट सिंह की पूरी कहानी

पंजाब में कांग्रेस की कमान अब परगट सिंह के हाथ में होगी। ये वही परगट सिंह हैं जिन्होंने हॉकी के मैदान में कई बार भारत का प्रतिनिधित्व किया है। अपनी हॉकी से विरोधी टीम को धूल चटाने वाले परगट सिंह तीन बार विधायक रह चुके हैं। पूर्व ओलंपियन और भारतीय हॉकी कप्तान अब राज्य की राजनीति में सबसे आगे हैं।

पद्मश्री से सम्मानित परगट सिंह जालंधर कैंटोनमेंट सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं। 61 साल के परगट सिंह को शुक्रवार को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले लुधियाना के सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग की जगह ली है। पंजाब के दोआबा इलाके के जाट सिख नेता सिंह की यह पदोन्नति राज्य इकाई के नेतृत्व को लेकर कई हफ्तों की अंदरूनी खींचतान के बाद हुई है, जिससे विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के कैंपेन को नुकसान पहुंचने का खतरा था।

विजय इंदर सिंगला थे दौड़ में सबसे आगे

पंजाब के पूर्व मंत्री और हिंदू चेहरा विजय इंदर सिंगला को पंजाब कांग्रेस प्रमुख के पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था। लेकिन पार्टी हाईकमान ने आखिरकार खिलाड़ी से नेता बने परगट सिंह को चुना क्योंकि वह 2027 के चुनावों से पहले राज्य इकाई के झगड़ते गुटों को साथ लेना चाहता है। लेकिन, सिंह का राजनीतिक करियर हॉकी के मैदान से शुरू हुए सफर का सिर्फ एक हिस्सा है।

खेल से राजनीति का सफर

मार्च 1965 में जालंधर के मीठापुर में जन्मे सिंह ने बतौर हॉकी खिलाड़ी 1992 बार्सिलोना और 1996 अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने नेशनल हॉकी टीम की कप्तानी की। देश बेहतरीन हॉकी डिफेंडर रहे सिंह के योगदान के लिए उन्हें 1989 में अर्जुन अवॉर्ड और 1998 में पद्म श्री मिला। अंतरराष्ट्रीय हॉकी से रिटायर होने के बाद, सिंह स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े, और चुनावी पॉलिटिक्स में आने से पहले उन्होंने पंजाब में डायरेक्टर ऑफ स्पोर्ट और सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के तौर पर काम किया।

शिरोमणि अकाली दल के साथ शुरू हुआ राजनीतिक सफर

परगट सिंह का राजनीतिक सफर शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ शुरू हुआ जब उन्होंने 2012 के पंजाब विधान सभा चुनाव में जालंधर कैंटोनमेंट सीट से चुनाव लड़ा। उन्होंने कांग्रेस कैंडिडेट को 6,000 से ज्यादा वोटों के मार्जिन से हराया। 2016 में, उन्हें एसएडी से सस्पेंड कर दिया गया था। 2017 के विधान सभा चुनाव में वह नवजोत सिंह सिद्धू के फ्रंट ‘आवाज-ए-पंजाब’ का हिस्सा बने। वर्तमान में कांग्रेस से जुड़े सिद्धू को जब पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया, तो सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया। उनकी चुनावी सफलता 2017 के विधानसभा चुनावों में भी जारी रही। उन्होंने अकाली दल के सरबजीत सिंह मक्कड़ को 29,000 से ज्यादा वोटों से हराया। 2022 के चुनावों में भी उन्होंने अपनी विधायकी बरकरार रखी। इस चुनाव में कांग्रेस 117 सदस्यों वाली विधानसभा में 18 सीटों पर सिमट गई थी।

राजनीति में भी कायम है मैदान की आक्रामकता

चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में, सिंह के पास शिक्षा और खेल जैसे अहम मंत्रालय थे। पंजाब से जुड़े मामलों पर अपने विचार साझा करने के लिए जाने जाने वाले सिंह, लॉ एंड ऑर्डर, स्पोर्ट्स, एजुकेशन और अपने चुनाव क्षेत्र से जुड़े मामलों सहित कई मुद्दों पर वर्तमान सरकार पर आक्रामक रहे हैं। 1 जुलाई को, सिंह को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की मैनिफेस्टो कमेटी का सह अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। अभी, वह जम्मू और कश्मीर के इंचार्ज AICC सेक्रेटरी भी हैं।

क्षेत्रीय समीकरणों पर आधारित है पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष का पद

पंजाब में कांग्रेस अध्यक्ष पद पर उनकी तरक्की पार्टी के क्षेत्रीय समीकरण में भी फिट बैठती है। जाट सिख प्रताप सिंह बाजवा पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। वहीं, जालंधर के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, जो दलित चेहरा हैं, पार्टी की कैंपेन कमेटी के प्रमुख हैं। गुरदासपुर के एमपी सुखजिंदर सिंह रंधावा भी जाट सिख हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस की पंजाब यूनिट के प्रेसिडेंट के तौर पर वारिंग की जगह लेने का फैसला पार्टी के पंजाब के इंचार्ज जनरल सेक्रेटरी सचिन पायलट से मिले ऑर्गेनाइज़ेशनल फीडबैक के बाद लिया गया।

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अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमला, खिड़कियां टूटीं:पुजारी समेत श्रद्धालु अंदर मौजूद थे; 5 साल में 15 से ज्यादा बार मंदिरों को निशाना बनाया

अमेरिका के ओहायो में शुक्रवार को हिंदू मंदिर पर हमला किया गया। हमले में मंदिर को काफी नुकसान हुआ। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन के मुताबिक, दोपहर 1:30 बजे रिचमंड हाइट्स स्थित श्री स्वामीनारायण वडताल धाम हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया। हमलावरों ने मंदिर की इमारत पर ईंटें फेंकीं। कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका ने बताया कि ईंटों से मंदिर की खिड़कियां टूट गईं। घटना के समय पुजारी और कई श्रद्धालु मंदिर के अंदर मौजूद थे। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने कहा कि घटना के CCTV फुटेज मौजूद हैं। अधिकारी इनकी जांच कर रहे हैं। संगठन ने FBI और सिविल राइट्स को जानकारी देने की बात कही है। हिंदू स्वयंसेवक संघ USA के मुताबिक पिछले 5 साल में अमेरिका में हिंदू मंदिरों को निशाना बनाकर 15 से ज्यादा तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। इनमें 6 BAPS मंदिर शामिल थे। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने इसे हेट क्राइम बताया फाउंडेशन ने कहा कि यह संभावित हेट क्राइम हो सकता है। संगठन के मुताबिक, यह घटना ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका में हिंदू-अमेरिकी समुदाय के खिलाफ नफरत और हिंसा से भरी बयानबाजी बढ़ी है। संगठन ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों से हमलावरों को जल्द पकड़ने को कहा है। साथ ही अमेरिकी नेताओं और सरकारी एजेंसियों से भारतीय और हिंदू-अमेरिकी समुदायों के खिलाफ नफरत भरी बयानबाजी की साफ तौर पर निंदा करने की अपील की है। अब तक कोई आरोपी सामने नहीं आया ANI के मुताबिक, हमले के मामले में अब तक किसी संदिग्ध की सार्वजनिक पहचान नहीं हुई है और किसी गिरफ्तारी की भी तत्काल पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों ने अभी तक हमले के पीछे धार्मिक मकसद होने की पुष्टि नहीं की है। यह घटना ऐसे समय हुई, जब अमेरिका के ओहायो समेत कई हिस्सों में हिंदू संगठन हिंदू हेरिटेज मंथ मना रहे हैं। घटना नवरात्रि से ठीक पहले भी हुई है। हिंदू हेरिटेज मंथ अमेरिका में हर साल अक्टूबर में मनाया जाता है। इस दौरान हिंदू संगठन और समुदाय के लोग हिंदू धर्म, संस्कृति, त्योहारों और परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम करते हैं। इसका मकसद लोगों को हिंदू संस्कृति के बारे में बताना और अमेरिका में रहने वाले हिंदू समुदाय की पहचान और परंपराओं को सामने लाना है। अमेरिका में पहले भी मंदिरों पर हमले हुए कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका पहले भी अमेरिका में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और मंदिरों में तोड़फोड़ को लेकर चिंता जताता रहा है। संगठन ने ऐसे मामलों की एक टाइमलाइन भी तैयार की है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… भारतीय पायलट पर हमले के आरोपी का नाम हमाम अल-हमामी:दावा- अलकायदा से प्रभावित था, कट्टरपंथी सोच के चलते ओमान एयर से निकाला गया दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला करने वाले को-पायलट की पहचान हमाम अल-हमामी के तौर पर हुई है। पूरी खबर पढ़ें…

Diwali 2026 Dates: कब मनाया जाएगा दिवाली का त्योहार? जानें दिवाली से लेकर चित्रगुप्त पूजा तक की सही तारीख और पूजा मुहूर्त

Diwali 2026 Dates: हिंदू धर्म में दिवाली का पर्व विशेष स्थान रखता है। यह पूरे साल में आने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। लोग इसके लिए काफी पहले से तैयारियां करते हैं। दिवाली का पर्व हर साल कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है। यह पांच दिनों का त्योहार है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और चित्रगुप्त पूजा या भाई दूज के साथ संपन्न होता है। घर, बाजार, आस-पड़ोस हर तरफ इस त्योहार की तैयारियों की धूम रहती है। आइए जानें इस साल ये पंच दिवसीय पर्व कब से शुरू होगा और किस दिन मनाई जाएगी दिवाली? दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?

दिवाली 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक अमावस्या तिथि का प्रारंभ 8 नवंबर को दिन में 11 बजकर 27 मिनट पर होगा और यह तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक मान्य रहेगी। उदयातिथि और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त के आधार पर दिवाली का त्योहार 8 नवंबर दिन रविवार को है।

दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

8 नवंबर को दिवाली की लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त 1 घंटा 56 मिनट का रहेगा। आप शाम में 05 बजकर 54 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 50 मिनट के बीच लक्ष्मी पूजा विधि विधान से कर सकते हैं।

आयुष्मान योग में मनेगी दिवाली

इस बार की दिवाली पर आयुष्मान् योग बन रहा है, जो पूरे दिन रहेगा। दिवाली पर आयुष्मान् योग प्रात:काल से लेकर 9 नवंबर को 03:03 ए एम तक मान्य है। उसके बाद से सौभाग्य का प्रारंभ होगा। आयुष्मान् योग व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है। दिवाली पर स्वाति नक्षत्र है, जो प्रात:काल से लेकर पूरी रात तक है।

धनतेरस 2026 तारीख

पंचांग के अनुसार, धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को मनाते हैं। इस साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो रही है और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक है। उदयातिथि के आधार पर त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर को है, लेकिन धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। उस दिन ही प्रदोष व्रत की पूजा भी होगी। 6 नवंबर को धनतेरस पूजा का मुहूर्त शाम में 6 बजकर 02 मिनट से शाम 7 बजकर 57 मिनट तक है।

दिवाली कैलेंडर 2026

6 नवंबर, शुक्रवार : धनतेरस, धन त्रयोदशी

7 नवंबर, शनिवार : काली चौदस, हनुमान पूजा

8 नवंबर, रविवार : दिवाली, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजा, काली पूजा

10 नवंबर, मंगलवार : गोवर्धन पूजा, अन्नकूट

11 नवंबर, बुधवार : भाई दूज, यम द्वितीया, चित्रगुप्त पूजा

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पंजाब में गलती दोहरा रही है कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी पंजाब में वही गलती दोहरा रही है, जो उसने 2022 में की थी या 2025 में बिहार में की थी। ऐन चुनाव से पहले भाजपा पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग को बदल रही है। बताया जा रहा है कि वारिंग को इस बात की जानकारी दे दी गई है। यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने नया प्रदेश अध्यक्ष तय कर लिया है, जिसके नाम की घोषणा बहुत जल्दी हो जाएगी। इंदरजीत सिंगला के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है। लेकिन साथ ही सुखजिंदर सिंह रंधावा, अमर सिंह, गुरजीत सिंह औजला आदि के नाम की भी चर्चा है। पहले चरणजीत सिंह चन्नी के नाम की भी चर्चा थी।

गौरतलब है कि 2022 के चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने कैप्टेन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाया था और चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया था। इतना ही नहीं सीएम के साथ साथ उनको अगले चुनाव के लिए सीएम फेस के तौर पर भी पेश किया गया था। वे दो सीटों से चुनाव लड़े और दोनों से हार गए। कांग्रेस बुरी तरह से हारी। अब फिर जाट सिख को हटा कर किसी दलित या अन्य हिंदू को बनाना वैसी ही गलती होगी, जैसी 2022 में हुई थी। इस साल अप्रैल के चुनाव में केरल सीपीएम ने हिंदू वोट लुभाने की कोशिश और इस चक्कर में मुस्लिम व ईसाई वोट गंवा बैठी। हिंदू व्यापक रूप से भाजपा के साथ गए। ऐसे ही पंजाब में हिंदू लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ गए थे। इस बार भी जाएंगे। कुछ आम आदमी पार्टी के साथ भी जाएंगे। वैसे वारिंग चार साल से अध्यक्ष हैं। चुनाव से ठीक पहले उनको बदलना नुकसान का फैसला हो सकता है।

राजा वडिंग की अध्यक्ष पद से विदाई!

नई दिल्ली। पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के पद से इस्तीफा देने की खबरें आ रही हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इस बीच गुरुवार को पंजाब कांग्रेस को लेकर चंडीगड़ से दिल्ली तक बड़ी हलचल रही। राजा वड़िंग के अलावा प्रदेश कांग्रेस के तमाम बड़े नेता दिल्ली पहुंच गए हैं। बताया गया है कि वड़िंग शुक्रवार को राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे।

दिल्ली रवाना होने से पहले चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर उन्होंने कहा कि वे दिल्ली जा रहे हैं और फिलहाल उनके पास बताने के लिए कुछ नहीं है। बताया जा रहा है कि बुधवार को ही राजा वड़िंग को पद छोड़ने के लिए कह दिया गया था। खबर है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सह कोषाध्यक्ष विजय इंदर सिंगला को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। जाट सिख की बजाय कांग्रेस इस बार हिंदू वोटों पर दांव खेलना चाह रही है।

हालांकि, अभी तक कांग्रेस हाईकमान की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पत्र या निर्देश जारी नहीं किया गया है। न ही किसी बड़े कांग्रेस नेता ने इसकी औपचारिक पुष्टि की है। लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राजा वड़िंग ने  अपना प्रोफाइल अपडेट किया है और उसमें अपने को पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष लिखा है। इससे भी अंदाजा लग रहा है कि उनको बदला जा रहा है और इसका औपचारिक फैसला हो गया है।

इस बीच पंजाब कांग्रेस में के अनेक वरिष्ठ नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं। सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी दिल्ली में हैं। ये दोनों प्रदेश अध्यक्ष पद के दावेदार हैं। खुद वड़िंग भी दिल्ली पहुंच गए हैं। पंजाब विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के भी दिल्ली पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा चन्नी समर्थक कुछ अन्य नेताओं के भी दिल्ली पहुंचने की चर्चा है।

Shardiya Navratri 2026 Date: अक्टूबर में इस दिन से शुरू होगी मां दुर्गा की अराधना, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त और शारदीय नवरात्रि का पूरा कैलेंडर

Shardiya Navratri 2026 Date: शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक है। यह अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक मनाई जाती है। यह पर्व मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस पर्व के 10वें दिन दुर्गा विसर्जन करते हैं और शाम के समय में रावण के पुतलों का दहन करके दशहरा का त्योहार मनाते हैं। इस पर्व को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। माता के भक्त नवरात्रि पर्व के नौ दिन उपवास करते हैं और कड़े नियमों का पालन करते हैं। इस पर्व की शुरुआत प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ होती है। आइए जानें इस साल शारदीय नवरात्रि कब से शुरू हो रही है ? अक्टूबर नवरात्रि के कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है?

शारदीय नवरात्रि 2026 कब से है?

इस साल 10 अक्टूबर रविवार को आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि रात 9:19 बजे से शुरू हो रही है और अगले दिन 11 अक्टूबर रविवार को रात 9:30 बजे तक खत्म होगी। प्रतिपदा तिथि में सूर्योदय 11 अक्टूबर को प्राप्त हो रहा है, इस आधार पर अक्टूबर नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर रविवार से होगा।

कलश स्थापना का मुहूर्त

अक्टूबर नवरात्रि के पहले दिन 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए 2 शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं। एक सुबह में और दूसरा दोपहर के समय।

पहला मुहूर्त : सुबह 6:19 बजे से लेकर सुबह 10:12 बजे तक

दूसरा मुहूर्त : 11:44 बजे से लेकर दोपहर 12:31 बजे तक

प्रतिपदा के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:40 ए एम से 05:30 ए एम तक है, वहीं उस दिन का निशिता मुहूर्त रात 11:43 बजे से लेकर मध्य रात्रि 12:33 ए एम तक है।

अक्टूबर नवरात्रि कैलेंडर 2026

नवरात्रि का पहला दिन: 11 अक्टूबर, रविवार- प्रतिपदा तिथि, कलश स्थापना, मां शैलपुत्री पूजा

नवरात्रि का दूसरा दिन: 12 अक्टूबर, सोमवार- द्वितीया तिथि, मां ब्रह्मचारिणी पूजा

नवरात्रि का तीसरा दिन: 13 अक्टूबर, मंगलवार- तृतीया तिथि, मां चंद्रघण्टा पूजा

नवरात्रि का चौथा दिन: 14 अक्टूबर, बुधवार- चतुर्थी तिथि, मरं कूष्माण्डा पूजा

नवरात्रि का पांचवा दिन: 15 अक्टूबर, गुरुवार- पंचमी तिथि, देवी स्कन्दमाता पूजा

नवरात्रि का छठा दिन: 16 अक्टूबर, शुक्रवार- षष्ठी तिथि, मां कात्यायनी पूजा

नवरात्रि का सातवां दिन: 17 अक्टूबर, शनिवार- सप्तमी तिथि, मां कालरात्रि पूजा

नवरात्रि का आठवां दिन: 18 अक्टूबर, रविवार- सप्तमी तिथि

नवरात्रि का नौवां दिन: 19 अक्टूबर, सोमवार- दुर्गा अष्टमी और महानवमी, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा, कन्या पूजा, नवरात्रि हवन

नवरात्रि का पारण: 20 अक्टूबर, मंगलवार

दशहरा कब है?

नवरात्रि 9 दिनों की होती है। इसके अगले दिन विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है, जिसे दशहरा भी कहते हैं। इसमें विजय मुहूर्त में शस्त्र पूजा करते हैं। शाम को प्रदोष काल में रावण के पुतले का दहन होता है। इस साल दशहरा 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को है।

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