अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले महीने तुर्किये से ब्रिटेन जाने के लिए सीक्रेट रूप से एक छोटे मिलिट्री विमान का इस्तेमाल किया था। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से ट्रम्प की हत्या की धमकी मिलने के बाद उनकी यात्रा का पूरा प्लान बदला गया था। तुर्किये की राजधानी अंकारा से निकलते समय ट्रम्प कैमरों के सामने पुराने एयरफोर्स वन में सवार हुए। इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी से चुपचाप छोटे मिलिट्री विमान C-32A तक पहुंचाया गया। पहले बड़े विमान में बैठे, फिर चुपचाप बाहर निकले ट्रम्प 8 जुलाई को नाटो समिट में शामिल होने के लिए अंकारा में थे। वे तुर्किये नए बोइंग 747-8 विमान से पहुंचे थे, जो कतर के शाही परिवार ने अमेरिका को दिया है। वापसी के समय ट्रम्प पुराने, हल्के नीले रंग के एयरफोर्स वन की सीढ़ियां चढ़ते हुए कैमरों में दिखाई दिए। उस समय यही माना गया कि वे इसी विमान से ब्रिटेन जाएंगे। ट्रम्प ने खुद कहा था कि वे नए विमान की जगह पुराने एयरफोर्स वन से ब्रिटेन जाएंगे। नया विमान भी ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस जाना था, जहां अमेरिकी सैनिक उसे देख सकते थे। लेकिन पुराने विमान में बैठने के बाद ट्रम्प उसी से ब्रिटेन नहीं गए। सामान वाली गाड़ी से दूसरे विमान तक पहुंचाया वॉशिंगटन पोस्ट ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि ट्रम्प के पुराने एयरफोर्स वन में सवार होने के कुछ देर बाद एक केटरिंग गाड़ी वहां से निकली। इस गाड़ी के जरिए ट्रम्प को एयरपोर्ट पर खड़े छोटे C-32A विमान तक पहुंचाया गया। यह बोइंग 757 का मिलिट्री वर्जन है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में सामने आए वीडियो में भी केटरिंग गाड़ी को पुराने एयरफोर्स वन से निकलकर छोटे विमान की तरफ जाते देखा जा सकता है। इसके बाद C-32A ट्रम्प को लेकर ब्रिटेन के लिए रवाना हो गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प विमान में नहीं हैं पुराने एयरफोर्स वन में यात्रा कर रहे पत्रकारों को लगा कि राष्ट्रपति उनके साथ ही विमान में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के कुछ कर्मचारियों को भी इसकी जानकारी नहीं थी। इस विमान में मौजूद पत्रकारों को उड़ान के दौरान प्रेस केबिन की खिड़कियों के शेड बंद रखने को कहा गया। ऐसी सावधानी आमतौर पर युद्ध वाले इलाकों में उड़ान के दौरान बरती जाती है। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने जवाब दिया, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे।” ट्रम्प वाला विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर C-32A रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया, जिसमें पत्रकार सवार थे। यह साफ नहीं है कि ट्रम्प C-32A से उतरने के बाद पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। हालांकि, ट्रम्प के साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल के मुताबिक, वे रात 10:56 बजे पुराने एयरफोर्स वन की सीढ़ियों से नीचे उतरते दिखाई दिए। उन्होंने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद अमेरिकी सैनिकों से मुलाकात की और कतर से मिले नए विमान की तरफ चले गए। ईरान से खतरे के कारण बदला गया था पूरा प्लान वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ट्रम्प को निशाना बनाए जाने की विश्वसनीय धमकी के बाद उनकी तुर्किये से वापसी को सीक्रेट रखा गया। अमेरिकी मीडिया में पहले भी रिपोर्ट आई थी कि ईरान से जुड़े खतरे के कारण ट्रम्प ने तुर्किये से कतर के नए विमान में वापस जाने के बजाय पुराने एयरफोर्स वन का इस्तेमाल किया। यानी जिस विमान में ट्रम्प को जाते हुए दिखाया गया, वह असल में लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल हुआ था। ट्रम्प को दूसरे विमान से ब्रिटेन भेजा गया। ऐसा तरीका पहले भी इस्तेमाल हो चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए दूसरे विमान का इस्तेमाल करने का ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है। साल 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब क्लिंटन एक बिना पहचान वाले सरकारी विमान से पाकिस्तान पहुंचे थे, जबकि उनका आधिकारिक एयरफोर्स वन डिकॉय के तौर पर भेजा गया था। कतर का नया विमान भी सवालों में रहा ट्रम्प जिस नए बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, उसे कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीस ने इसे राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। इसके कुछ दिन बाद यह उन्हें लेकर पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचा। नए विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में मौजूद कुछ सुरक्षा सुविधाएं नए विमान में नहीं हैं या अलग तरह से काम करती हैं। इनमें मिसाइल हमले से बचाने वाली सुरक्षा भी शामिल है। व्हाइट हाउस ने कहा- राष्ट्रपति की सुरक्षा सबसे जरूरी सीक्रेट उड़ान की खबर सामने आने के बाद व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीव चेउंग ने नए विमान की सुरक्षा का बचाव किया। उन्होंने कहा कि नए एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति और उनके स्टाफ की सुरक्षा के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की गई है। चेउंग ने कहा, “अमेरिका के कई दुश्मन हैं जो राष्ट्रपति को निशाना बनाना चाहते हैं। इन खतरों से निपटने के लिए हम अपने पास मौजूद हर तरीके का इस्तेमाल करते हैं।” पेंटागन ने इस मामले पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
Crude Oil Price: कल कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन उछाल आया। मंगलवार, 11 अगस्त को एशिया में शुरुआती कारोबार में भी ये बढ़त बनी रही। ऐसा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ कड़ी मांगें रखने के बाद हुआ, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की किसी भी संभावित डील की उम्मीदें धुंधली हो गई।
ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों में रात भर में 5% की बढ़ोतरी हुई। WTI आज सुबह $82 प्रति बैरल के स्तर पर बना रहा। ब्रेंट $87 प्रति बैरल से ऊपर बंद होने के बाद $90 प्रति बैरल के निशान की ओर बढ़ा।
ट्रंप ने आगे लिखा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे भविष्य की सभी बातचीत में इन नई मांगों को मजबूती से रखें। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पिछली किसी भी बैठक में मुआवजे का मुद्दा कभी नहीं उठा। हालांकि, ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए $300 बिलियन का फंड उस 14-सूत्रीय MoU (समझौता ज्ञापन) का हिस्सा है, जिस पर ट्रंप ने खुद जून में फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए थे।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि हालांकि ईरान और ओमान इस महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग (chokepoint) के भविष्य के प्रशासन पर द्विपक्षीय बातचीत में लगे हुए हैं, लेकिन जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक यह जलडमरूमध्य फिर से नहीं खुलेगा।
ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में ‘एनर्जी एस्पेक्ट्स’ की फाउंडर और मार्केट इंटेलिजेंस डायरेक्टर अमृता सेन ने बताया कि अभी होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल पांच जहाज गुजर रहे हैं। यह संख्या जून में MoU पर हस्ताक्षर के बाद ट्रैफिक के 14 के दैनिक औसत तक पहुंचने की तुलना में काफी कम है।
TD सिक्योरिटीज में कमोडिटी स्ट्रैटेजी के ग्लोबल हेड बार्ट मेलेक ने कहा, “यह देखते हुए कि जलडमरूमध्य अभी भी बंद है, ग्लोबल इन्वेंट्री में भारी कमी आई है और फ्लो सामान्य स्तर के आसपास भी नहीं है, हम ‘शॉर्ट्स कवर’ (short covering) में आक्रामक तेजी देख सकते हैं।” उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि ब्रेंट मौजूदा स्तर से $10-15 ऊपर ट्रेड करेगा।”
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Colombia Earthquake: सोमवार को आए 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने कोलंबिया के पश्चिमी हिस्से में भारी तबाही मचाई है। देश का सबसे गरीब विभाग चोको और मशहूर कॉफी एक्सिस इलाके इस भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बता दें कि इस भयानक आपदा से अब तक कम से कम 132 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 570 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
वहीं, भूकंप के तेज झटकों से दर्जनों इमारतें ढह गई हैं और मलबे में अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। फिलहाल, राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
कोलंबिया की जियोलॉजिकल सर्विस के मुताबिक, यह 21वीं सदी में देश में दर्ज किया गया अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप है।
1. कोलंबिया का सबसे गरीब इलाका चोको, एक बड़ी बचाव चुनौती का सामना कर रहा है
भूकंप का केंद्र चोको विभाग के सैन जोस डेल पालमार के पास था। चोको कोलंबिया के सबसे गरीब इलाकों में से एक है, जहां दो-तिहाई से ज्यादा आबादी गरीबी में रहती है। इस इलाके में सड़क संपर्क बेहद सीमित है और कई गांव दूर-दराज के क्षेत्रों में बसे हैं। ऐसे में राहत और बचाव टीमों को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में काफी मुश्किल हो रही है। संचार व्यवस्था प्रभावित होने से रेस्क्यू और राहत अभियान की परेशानी और बढ़ गई है।
2. कॉफी उत्पादन वाले इलाके में भारी तबाही
कोलंबिया के कॉफी उत्पादन वाले इलाके के बीचों-बीच स्थित रिसराल्डा (Risaralda) सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक है। यहां के परेरा (Pereira) में सबसे ज्यादा 60 लोगों की मौत हुई है, जबकि डॉस्क्यूब्राडास (Dosquebradas) में भी भारी तबाही हुई है। अधिकारी तबाही के पैमाने का आकलन कर रहे हैं और बचाव टीमें गिरी हुई और क्षतिग्रस्त इमारतों के बीच काम कर रही हैं।
3. 1,500 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त
राष्ट्रपति अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला ने बताया कि 1,577 रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिनमें से 37 पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। 60 से ज्यादा इमारतें ढह गई हैं, जबकि 18 स्वास्थ्य केंद्र और 52 स्कूल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा, पांच राजधानी शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।
4. बचावकर्मी बचे हुए लोगों की तलाश कर रहे हैं, अस्पतालों को भी नुकसान
भूकंप ने कई शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। कैली में यूनिवर्सिटी अस्पताल का एक हिस्सा ढह गया, जिससे मरीज अंदर फंस गए। अस्पताल के बुनियादी ढांचे का लगभग 30% हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ, जिसमें बच्चों के इलाज (पीडियाट्रिक्स), इंटरनल मेडिसिन और नवजात शिशु इकाई (नियोनेटल यूनिट) वाले हिस्से शामिल हैं। मलबे से कम से कम चार लोगों को बचाया गया, जबकि अन्य मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
5. बचाव दल ने तेज किया रेस्क्यू ऑपरेशन
गिरी हुई इमारतों के मलबे में दबे लोगों को खोजने के लिए प्रभावित इलाकों में पुलिस, फायरफाइटर, सैनिक और वॉलंटियर्स को तैनात किया गया है। कैली में, बचावकर्मियों ने गिरी हुई एक इमारत से दो महिलाओं और दो बच्चों को जिंदा बाहर निकाला है। अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए लोगों को ढूंढना और उन्हें बचाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
6. तबाही से जूझ रहे कोलंबिया की मदद के लिए आगे आए कई देश
भूकंप से हुई भारी तबाही के बीच कई देशों ने कोलंबिया की मदद के लिए रेस्क्यू टीम, मेडिकल स्टाफ और जरूरी उपकरण भेजने की पेशकश की है। इक्वाडोर ने 47 बचावकर्मियों, खोजी कुत्तों और ऐसे उपकरणों की पेशकश की है, जो करीब सात दिनों तक बिना बाहरी मदद के काम कर सकते हैं। इसके अलावा, अल साल्वाडोर और मैक्सिको ने भी सहायता की पेशकश की है। जबकि अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे कोलंबिया की मदद के लिए तैयार हैं।
बता दें कि यह भूकंप सोमवार को स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 7:34 बजे आया। US जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, इसका केंद्र चोको (Chocó) में सैन होज़े डेल पालमार के पास ज़मीन से 107 किलोमीटर की गहराई में था। बचाव कार्य जारी रहने के साथ ही, अधिकारी पश्चिमी और मध्य कोलंबिया में हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं और साथ ही टूटी हुई सड़कों, ठप पड़े संचार और ज़रूरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं से भी निपट रहे हैं।
Donald Trump Iran News: अमेरिका-ईरान पर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। जब से युद्ध की शुरुआत हुई है, पूरी दुनिया में गैस और ईंधन की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। तेल की चढ़ती कीमत ने दुनिया भर में महंगाई बढ़ा दी है और इसका सबसे बड़ा कारण है होर्मुज से जहाजों का नियमित रूप से नहीं
Share Market News: एशियाई बाजारों में रौनक के बीच घरेलू स्टॉक मार्केट में आज बिकवाली का दबाव दिख रहा है। शुरुआती कारोबार में ग्रीन जोन में खुलने के बाद सेंसेक्स और निफ्टी 50 लाल हो गए। डे-हाई से सेंसेक्स 300 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24500 के काफी करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर मिला-जुला रुझान है। निफ्टी मिडकैप स्मॉलकैप 100 में फिलहाल हल्की गिरावट है तो निफ्टी मिडकैप 100 में बढ़त दिख रही है।
घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:07 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 61.28 प्वाइंट्स यानी 0.08% की गिरावट के साथ 78,437.89 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 24.60 प्वाइंट्स यानी 0.10% की फिसलन के साथ 24,546.05 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 177.81 प्वाइंट्स उछलकर 78,676.98 तक जाने के बाद 378.06 प्वाइंट्स टूटकर 78,298.92 और निफ्टी भी 50.30 प्वाइंट्स चढ़कर 24,620.95 तक पहुंचने के बाद 109.85 प्वाइंट्स फिसलकर 24,511.10 तक आ गया।
Share Market Fall: इस कारण दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने कई बड़ी मांगें रख दीं। इनमें अरबों डॉलर का अमेरिकी भुगतान, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल है। इससे मार्केट पर दबाव बढ़ा है।
कच्चे तेल में उबाल: ईरान की नई शर्तों ने कच्चे तेल में उबाल लाया तो मार्केट को झटका लगा। फिलहाल ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1% से अधिक उछलकर प्रति बैरल $84 के पार पहुंच गया।
India VIX में उछाल: मार्केट की घबराहट मापने वाले इंडिया विक्स की उछाल ने मार्केट पर दबाव बनाया है। फिलहाल यह 4.64% की गिरावट के साथ 12.72 पर है। इसके अधिक होने से अगले 30 दिनों में मार्केट में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका होती है तो कम होने से इसके कम होने के आसार दिखते हैं।
सरकारी बैंक और एफएमसीजी स्टॉक्स डाल रहे दबाव: मार्केट को सरकारी बैंक और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर नीचे लाने की कोशिश कर रहे हैं। इनके निफ्टी इंडेक्स में करीब आधे फीसदी की गिरावट है।
Share Market Rise: इन बातों से मिल रहा सपोर्ट
IT-Auto खींच रहे ऊपर: मार्केट को आईटी और ऑटो सेक्टर ऊपर खींचने का पूरा जोर लगा रहे हैं। इनके निफ्टी इंडेक्स में फिलहाल करीब आधे फीसदी की बढ़त है।
अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने के आसार फीके: जुलाई की उम्मीद से कमजोर जॉब रिपोर्ट के बाद सितंबर में ब्याज बढ़ने की आशंका कम होने से अमेरिकी बाजारों में जोरदार तेजी आई। इससे भारतीय मार्केट को भी सपोर्ट मिला।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी: शुक्रवार 7 अगस्त को विदेशी निवेशकों ने बिकवाली से अधिक खरीदारी की जिससे मार्केट को सपोर्ट मिल रहा है। लगातार दो दिनों की नेट बिकवाली के बाद शुक्रवार को FIIs (फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स) ने ₹480.24 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी की।
स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें
‘ईरानी जमीन पर कदम रखा तो हाथ काट देंगे…’, अमेरिका को तेहरान की खुली चेतावनी
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Ethanol-Petrol Controversy: देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर जारी विवाद के बीच मध्य प्रदेश के रीवा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद जनार्दन मिश्रा ने रविवार (9 अगस्त) को इस पॉलिसी के बचाव में विरोधियों पर निशाना साधते हुए एक विवादित टिप्पणी की। रीवा से भोपाल और कोलकाता के लिए ‘नई उड़ान’ सेवाओं के उद्घाटन के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते मिश्रा ने कहा कि भारत में केवल 20 प्रतिशत कच्चे तेल का उत्पादन होता है। जबकि 80 प्रतिशत तेल विदेश से आयात करना पड़ता है। इस दौरान एथेनॉल-ब्लेंडिंग नीति का बचाव करते हुए बीजेपी सांसद ने विवादित बयान देते हुए कहा कि शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के यहां से आएगा जब देश में शुद्ध पेट्रोल है ही नहीं…।
वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए बीजेपी सांसद मिश्रा ने कहा कि तेल आपूर्ति के लिए जहाजों को 18,000 किलोमीटर के करीब अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। उन्होंने कहा, “ऐसी परिस्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की बात करते हैं तो कुछ लोग विरोध में आंदोलन करने लगते हैं।” उन्होंने आक्रामक अंदाज में बघेली भाषा में कहा, “आंदोलन हो रहा है एथेनॉल नहीं चलेगा, शुद्ध पेट्रोल चलेगा। शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा? शुद्ध पेट्रोल है ही नहीं देश में तो कहां से आएगा?”
एथेनॉल से चलने वाले वाहनों का समर्थन किया
मिश्रा ने कहा कि भारत में वाहन एथेनॉल-ब्लेंडिंग ईंधन से चल सकते हैं। लेकिन कुछ लोग एथेनॉल के इस्तेमाल का विरोध करते हुए इसे पेट्रोल में नहीं मिलाने की बात कह रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “एथेनॉल नहीं बनेगा तो पेट्रोल कहां से आएगा, डीजल कहां से आएगा?” पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राजील में तो गाडियां 100 प्रतिशत एथेनॉल से चल रहीं। लेकिन इसके बावजूद वहां वाहनों में ऐसी कोई समस्या नहीं है। मिश्रा पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने के सरकार के लक्ष्य का बचाव कर रहे थे।
उन्होंने जनता को याद दिलाया कि ब्राजील दुनिया में सबसे ज्यादा एथेनॉल का उत्पादन करता है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि वहां 100 फीसदी एथेनॉल से गाड़ियां चल रही हैं। अक्सर अपनी विवादित टिप्पणियों के लिए सुर्खियों में रहने वाले मिश्रा ने कहा कि भारत में भी विशेषज्ञों की राय है कि एथेनॉल से गाड़ियों के इंजन को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। लेकिन इसके बावजूद बेवजह विरोध किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया में सबसे कम महंगाई और सबसे अधिक रोजगार कहीं है तो वह भारत में है।
एथेनॉल पर बहस तेज
मिश्रा की ये बातें केंद्र के इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम पर चल रही बहस के बीच आई हैं। इस बहस में मुख्य रूप से गाड़ियों की कम्पैटिबिलिटी, फ्यूल एफिशिएंसी और ग्राहकों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। सरकार E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। इसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल होता है। यह कदम कच्चे तेल के आयात को कम करने और देश में बने वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की कोशिशों का हिस्सा है।
केंद्र का कहना है कि E20 की टेस्टिंग और फील्ड अनुभव से इंजन में असामान्य टूट-फूट, जंग लगने या गाड़ी की उम्र कम होने का कोई सबूत नहीं मिला है। मिश्रा ने बायोगैस और CNG जैसे वैकल्पिक ईंधन के लिए सरकार की व्यापक कोशिशों का भी समर्थन किया। साथ ही हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों पर भी जोर दिया। फिलहाल, उनका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। विपक्षी पार्टियां भगवा पार्टी पर हमलावर हैं।
पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने पर आंदोलन हो रहा, शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा, शुद्ध पेट्रोल देश में है हीं नहीं – जनार्दन मिश्रा… रीवा सांसद pic.twitter.com/e3xsks0cIJ
— Brajesh Rajput (@drbrajeshrajput) August 9, 2026
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इप्सॉस-एएपीआई सर्वे के मुताबिक, चुनाव में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के हारने की आशंका 65% तक है। नवंबर में मिडटर्म के लिए वोटिंग होनी है। मिडटर्म चुनाव ट्रम्प के चार साल के कार्यकाल के बीच होने वाला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान है। इसमें अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के साथ राज्यों और स्थानीय सरकारों के कई अहम पदों के लिए वोटिंग होगी। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के करीब 80% उम्मीदवार पहले ही तय हो चुके हैं। मिडटर्म में रिपब्लिकन पार्टी हारती है तो ट्रम्प राष्ट्रपति बने रहेंगे। लेकिन कांग्रेस में बहुमत खोने पर उनके फैसलों पर रोक-टोक बढ़ सकती है। टैरिफ, वीजा और दूसरे बड़े नीतिगत फैसलों को लागू करने में ट्रम्प को डेमोक्रेट्स के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। कार्यकाल के बाकी दो साल में उन्हें कांग्रेस के साथ ज्यादा तालमेल बनाकर चलना होगा। मिडटर्म में ट्रम्प की तीन सबसे बड़ी चुनौती… महंगाई, इमिग्रेशन और ईरान युद्ध 1. महंगाई: ट्रम्प की आर्थिक रेटिंग 32% पर फिसल गई अमेरिकी वोटरों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई है। इप्सोस सर्वे में 54% लोगों ने महंगाई और अर्थव्यवस्था को वोट का बड़ा मुद्दा बताया। वहीं, एपी-एनओआरसी सर्वे में सिर्फ 32% लोगों ने माना कि ट्रम्प अर्थव्यवस्था अच्छी तरह संभाल रहे हैं। 69% अमेरिकियों को मौजूदा आर्थिक हालात खराब लगते हैं। इप्सोस सर्वे में 65% लोगों ने कहा कि रोजमर्रा का किराना महंगा पड़ रहा है, जबकि 48% को डर है कि अगले साल आर्थिक हालात और खराब हो सकते हैं। ईरान युद्ध: 20% वोटरों के लिए बड़ा मुद्दा ईरान युद्ध अब सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं है। इसका असर सीधे अमेरिकी लोगों की जेब पर पड़ रहा है। इप्सोस सर्वे में 20% वोटरों ने ईरान युद्ध को वोट का अहम मुद्दा बताया। अगर जंग लंबी खिंची और तेल महंगा हुआ तो पेट्रोल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं। यानी ट्रम्प के सामने चुनौती है ईरान पर सख्ती भी दिखानी है और अमेरिकी लोगों को महंगाई से राहत का भरोसा भी देना है। इमिग्रेशन: 61% अमेरिकी ट्रम्प की नीति से नाराज 2024 में इमिग्रेशन ट्रम्प की बड़ी ताकत था, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। हालिया सर्वे में 61% अमेरिकियों ने ट्रम्प की इमिग्रेशन नीति का विरोध किया, जबकि समर्थन सिर्फ 39% रहा। दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ट्रम्प की इस नीति को 49% लोगों का समर्थन था। रिपब्लिकन वोटरों में भी समर्थन घटकर 80% रह गया है। सख्त डिपोर्टेशन और इमिग्रेशन कार्रवाई के बीच बढ़ती नाराजगी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प के लिए बड़ा नुकसान बन सकती है। ट्रम्प पर महाभियोग का खतरा बढ़ेगा अगर रिपब्लिकन कांग्रेस में बहुमत खो देते हैं, तो ट्रम्प पर महाभियोग की कार्रवाई का खतरा बढ़ सकता है। डेमोक्रेट्स दोनों सदनों में मजबूत होते हैं तो वे ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। कांग्रेस के पास टैरिफ और इमिग्रेशन से जुड़े कानूनों पर बड़ा अधिकार है। वह ट्रम्प के फैसलों पर कानून बनाकर रोक लगा सकती है और वीजा नीति को भी चुनौती दे सकती है। ईरान युद्ध में भी कांग्रेस सैन्य कार्रवाई और युद्ध के लिए फंडिंग पर ट्रम्प पर दबाव बना सकती है। यानी कांग्रेस का बहुमत गया तो ट्रम्प की मनमानी पर लगाम लग सकती है।
GIFT Nifty indicator: सोमवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty के स्थिर या थोड़ी बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। GIFT Nifty से सीमित बढ़त के संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि मजबूत एशियाई बाजार और शुक्रवार को Wall Street में आई तेज़ी से बाज़ार का मूड बेहतर हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने को लेकर बनी अनिश्चितता निवेशकों को सतर्क रख सकती है।
सुबह करीब 8 बजे GIFT Nifty 18.5 अंक या 0.08 फीसदी बढ़कर 24,660 पर ट्रेड कर रहा था। इससे शुक्रवार को 24,570.65 पर बंद हुए Nifty 50 के लिए काफी हद तक सपाट या सकारात्मक शुरुआत के संकेत मिलते हैं। पिछले सत्र में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए थे, क्योंकि ऑटो और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी शेयरों में मजबूत बढ़त के मुकाबले फाइनेंशियल शेयरों में कमजोरी हावी रही। Sensex 455.59 अंक या 0.58 प्रतिशत गिरकर 78,499.17 पर आ गया, जबकि Nifty 65.35 अंक या 0.27 प्रतिशत गिरकर 24,570.65 पर बंद हुआ।
एशियाई बाज़ार चढ़े
सोमवार को एशियाई इक्विटी में बढ़त देखी गई। शुक्रवार को Wall Street में आई तेज़ी से संकेत लेते हुए ये बाज़ार ऊपर चढ़े। कमज़ोर अमेरिकी रोज़गार डेटा के कारण फेडरल रिज़र्व द्वारा सितंबर की बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो गई थीं। जापान का Nikkei 225 0.6 प्रतिशत चढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क इंडेक्स 0.5 प्रतिशत बढ़ा। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे व्यापक इंडेक्स 0.3 प्रतिशत बढ़ा।
पिछले हफ़्ते की मज़बूत बढ़त के बाद अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में सुस्ती रही। S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 प्रतिशत गिरे और Nasdaq फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।
शुक्रवार को अमेरिकी इक्विटी में बढ़त हुई, जब डेटा से पता चला कि अर्थव्यवस्था में उम्मीद के विपरीत नौकरियों में कमी आई है। इससे निवेशकों ने निकट भविष्य में उधार लेने की लागत बढ़ने की उम्मीदें कम कर दीं। S&P 500 0.62 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ, जबकि Nasdaq Composite 1.30 प्रतिशत और Dow Jones Industrial Average 0.28 प्रतिशत चढ़ा। इस हफ़्ते नैस्डैक में 5.19% की तेज़ी आई, S&P 500 में 3.58% की बढ़त हुई और डॉव 2.96% ऊपर चढ़ा। इसकी वजह कंपनियों की अच्छी कमाई और ब्याज दरों को लेकर कम होती चिंताएं थीं। अब निवेशक फ़ेडरल रिज़र्व की पॉलिसी की दिशा के बारे में और संकेत पाने के लिए इस हफ़्ते आने वाले US महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखेंगे।
होर्मुज़ को लेकर अनिश्चितता के बीच तेल की कीमतों में सुधार
सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त हुई क्योंकि इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) कितनी जल्दी पूरी तरह से फिर से खुल पाएगा। ब्रेंट क्रूड फ़्यूचर्स 1.09% बढ़कर $84.46 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.78% बढ़कर $78.79 हो गया।
ईरान ने रविवार को कहा कि होर्मुज से होकर नए शिपिंग रूट तय करने के लिए ओमान के साथ समझौता अंतिम चरण में है, लेकिन उसने यह भी कहा कि जलमार्ग के फिर से खुलने से पहले अमेरिका को कुछ अन्य शर्तों को पूरा करना होगा।
इंडेक्स पर क्या बनाए रणनीति
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान समझौते की दिशा में हुई प्रगति से बाज़ार की धारणा (sentiment) को मदद मिली है, हालांकि बातचीत अभी भी शर्तों पर आधारित है। जब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हो जाता, तब तक मध्य पूर्व को लेकर बनी अनिश्चितता बड़े जोखिम लेने की क्षमता को सीमित कर सकती है। पोनमुडी ने आगे कहा कि WTI क्रूड का $78-79 प्रति बैरल के आसपास बने रहना यह बताता है कि बाज़ार अभी भी कुछ जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम (भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम) को ध्यान में रख रहे हैं।
पोनमुडी ने कहा कि निफ़्टी का टेक्निकल स्ट्रक्चर सकारात्मक बना हुआ है। 24,600-24,700 का ज़ोन मुख्य रेजिस्टेंस एरिया बना हुआ है। इसके ऊपर लगातार बने रहने से तेज़ी का मोमेंटम मज़बूत हो सकता है और 24,800-25,000 के स्तर तक पहुंचने का रास्ता साफ हो सकता है। नीचे की तरफ, 24,500 तुरंत सपोर्ट का काम कर रहा है, और उसके बाद 24,400-24,300 का ज़ोन सपोर्ट के तौर पर है।
Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Market news : GIFT Nifty से मिल रहे संकेतों को देखते हुए लगता है कि 10 अगस्त को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स बढ़त के साथ खुल सकते हैं। GIFT Nifty शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ 24,660 के आसपास ट्रेड कर रहा था। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।
मार्केट ओवरव्यू
शुक्रवार को सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए थे। ऑटो और IT शेयरों में अच्छी बढ़त के बावजूद बाजार पर फाइनेंशियल शेयरों में आई गिरावट का असर ज्यादा रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 455.59 अंक या 0.58 प्रतिशत गिरकर 78,499.17 पर और निफ्टी 65.35 अंक या 0.27 प्रतिशत गिरकर 24,570.65 पर बंद हुआ। निफ्टी ऑटो और IT इंडेक्स में 1.84 प्रतिशत और 1.42 प्रतिशत की बढ़त हुई,जबकि प्राइवेट बैंकों के शेयरों में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई।
गिफ्ट निफ्टी
सुबह 07:25 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी करीब 40 अंक यानी 0.16 फीसदी की बढ़त के साथ 24,680 के आसपास कारोबार कर रहा था।
एशियाई बाजार
एशियाई शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिल रही है। जापान के निक्केई में 2.09 फीसदी की बढ़त देखने को मिल रही है। स्ट्रेट टाइम्स में 1.04 फीसदी की तेजी दिख रही है। हैंग सेंग में 0.80 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है। ताइवानी बाजार में 1.89 फीसदी की तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। कोस्पी में 0.69 फीसदी की मजबूती दिख रही है। शांघाई कंपोजिट में भी 0.59 फीसदी की तेजी नजर आ रही है।
अमेरिकी बाजार
शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में बढ़त देखने को मिली। S&P रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 151.83 अंक या 0.28% बढ़कर 54,036.93 पर पहुंच गया। S&P 500 इंडेक्स में 47.68 अंक या 0.62% की बढ़त हुई और यह 7,757.64 पर बंद हुआ। वहीं, नैस्डैक कम्पोजिट 342.26 अंक या 1.30% बढ़कर 26,690.62 पर पहुंच गया।
डॉलर इंडेक्स
शुरुआती कारोबार में दुनिया की अधिकांश बड़ी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में थोड़ी बढ़त देखने को मिल रही थी। ईरान और ओमान स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को फिर से खोलने के लिए किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं। जोखिम के प्रति संवेदनशील मुद्राओं का प्रदर्शन कमजोर नजर आ रहा है। डॉलर इंडेक्स 99.63 के लेवल पर दिख रहा है।
US बॉन्ड यील्ड
अमेरिका में 10 ईयर और 2 ईयर के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 4.66% और 4.20% पर ऊपर ट्रेड कर रही है।
एशियाई करेंसी
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसीज में मिला-जुला रुख नजर आ रहा है। इंडोनेशियाई रुपिया (+0.15%),फिलीपींस पेसो (+0.21%),थाई बाहत (+0.17%), ताइवान डॉलर (+0.16%),चीनी रेनमिनबी (+0.06%) और मलेशियाई रिंगित (+0.06%) मजबूत दिख रहे हैं। जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन (-0.50%),जापानी येन (-0.18%)और सिंगापुर डॉलर (-0.09%) कमजोर कारोबार कर रहे हैं। दक्षिण कोरियाई वॉन में सबसे ज्यादा गिरावट नजर आ रही है।
FII और DII फंड फ्लो
7 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹480 करोड़ के शेयर खरीदे। जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs)ने लगातार तीसरे दिन भी खरीदारी जारी रखते हुए ₹235 करोड़ के शेयर खरीदे।
Stock Market Live Update: ग्लोबल मार्केट में बढ़त के बाद, सोमवार को भारतीय शेयर बाजार के हल्की बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बाजार के मूड पर असर डाल सकती हैं। गिफ्ट निफ्टी के संकेत भी बताते हैं कि आज भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स – निफ्टी 50 और सेंसेक्स – की शुरुआत हल्की बढ़त के साथ हो सकती है।
गिफ्ट निफ्टी 24,678 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स की पिछली क्लोजिंग से लगभग 37 पॉइंट ऊपर (प्रीमियम पर) था।
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के कारण गिरावट देखी गई, क्योंकि अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कोई ठोस जियोपॉलिटिकल समाधान न निकलने से बाजार का मूड कमजोर बना रहा।
सेंसेक्स 455.59 पॉइंट या 0.58% गिरकर 78,499.17 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 65.35 पॉइंट या 0.27% गिरकर 24,570.65 पर बंद हुआ।

