Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने में 100 रुपये की तेजी, चांदी अपरिवर्तित

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 4 अगस्त को बुलियन की कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं दिखा। सोने की कीमतें 100 रुपये चढ़कर 1,47,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गईं। चांदी की कीमतें बगैर बदलाव के 2,26,500 रुपये प्रति किलोग्राम रहीं। उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में अच्छी तेजी दिखी।

इनवेस्टर्स मध्यपूर्व के हालात को देख बरत रहे सावधानी

ट्रेडर्स ने बताया कि सोने में सामान्य खरीदारी दिखी, जबकि चांदी की कीमतें सीमित दायरे में बनी रहीं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच जारी बातचीत के मद्देनजर इनवेस्टर्स सावधानी बरत रहे हैं। इनवेस्टर्स जियोपॉलिटिकल स्थिति को लेकर तस्वीर साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में अच्छी तेजी 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.6 फीसदी चढ़कर 4,078 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 1.1 फीसदी चढ़कर 4,134.60 डॉलर प्रति औंस था। चांदी में तेजी दिखी। यह 2.6 फीसदी चढ़कर 59.7 डॉलर प्रति औंस थी। कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की एवीबी कायनात चेनवाला ने कहा कि इनवेस्टर्स को अमेरिकी इकोनॉमी से जुड़े डेटा का इंतजार है।

क्रूड में उछाल से सोने की कीमतों पर बढ़ा दबाव 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड अब भी लड़ाई से पहले के लेवल से काफी ज्यादा है। अगर यह लंबे समय तक हाई लेवल पर बना रहता है तो अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ सकता है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व लंबे समय तक इंटरेस्ट रेट को हाई बनाए रख सकता है। इसका सोने पर खराब असर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक घट जाती है।

रिकॉर्ड हाई लेवल से करीब 28 फीसदी गिरा है सोना

28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू हुई थी। इसका बुलियन की कीमतों पर खराब असर पड़ा। तब से सोने और चांदी की कीमतें दबाव में रही हैं। इस साल जनवरी के आखिर में सोने और चांदी कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। तब से सोना करीब 28 फीसदी गिर चुका है।

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अमेरिका-ईरान में जल्द समझौते की उम्मीद

अमेरिकी वित्तमंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ईरान के साथ जल्द समझौते की उम्मीद है। उन्होंने कहा है कि दोनों देशों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर बातचीत चल रही है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जल्द खुल जाता है तो इससे क्रूड की कीमतों में तेज गिरावट आएगी। यह सोने के लिए अच्छी खबर होगी।

Crude Oil Price: क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट, अचानक प्राइस गिरने की वजह क्या है?

क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक तेज गिरावट आई। भारतीय समय के मुताबिक, 4 बजे के करीब ब्रेंट क्रूड 2.23 फीसदी गिरकर 81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड तो एक समय 3 फीसदी से ज्यादा गिर गया था। शाम करीब 6 बजे यह 2.84 फीसदी की गिरावट के साथ 78 डॉलर प्रति बैरल था।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर जल्द समझौते की उम्मीद

क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक गिरावट की वजह अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का बयान है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर बहुत जल्द यहां तक कि मंगलवार या बुधवार को समझौता हो सकता है। अगर दोनों देशों के बीच यह समझौता हो जाता है तो क्रूड की कीमतों पर इसका बड़ा असर पड़ेगा।

अमेरिका और ईरान में समझौते के लिए बातचीत जारी

सीएनबीसी से बातचीत में बेसेंट ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही जल्द शुरू हो जाने की उम्मीद जताई। यह पूछने पर कि क्या प्रस्तावित समझौते से ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का इस्तेमाल करने वाले जहाजों से टोल वसूलने का अधिकार मिल जाएगा, उन्होंने कहा कि अमेरिका का भरोसा आवाजाही की आजादी में है।

पहले भी अमेरिका और ईरान में समझौते की कोशिशें हो चुकी हैं

बेसेंट के इस बयान से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार कहा है कि दोनों देशों के बीच मामले के हल के लिए कूटनीतिक स्तर पर कोशिशें जारी हैं। हालांकि, ईरान ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका से किसी तरह की सीधी बातचीत से इनकार किया है। इससे पहले भी दोनों देशों के बीच समझौते की कई कोशिशें हो चुकी हैं। लेकिन, उनका कोई नतीजा नहीं निकला।

छह महीने मध्यपूर्व में जारी लड़ाई से क्रूड की कीमतों में उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई 28 फरवरी को हुई थी। इसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान में पहुंच गईं। हालांकि, 120 डॉलर प्रति बैरल तक जाने के बाद कीमतों में नरमी आई हैं। इसके बावजूद ये लड़ाई से पहले के अपने लेवल से काफी ऊपर हैं। क्रूड की ऊंची कीमतें भारत के लिए अच्छा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड में उछाल से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा चुकी हैं।

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहने से ऑयल की सप्लाई पर पड़ सकता है असर

भारत क्रूड की अपनी 90 फीसदी जरूरत इंपोर्ट करता है। क्रूड महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ जाता है। लंबे समय तक क्रूड के हाई लेवल पर रहने का काफी खराब असर सरकार की सेहत पर पड़ेगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मजु के रास्ते जहाजों की आवाजाही नहीं होने से भारत में क्रूड की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है।

Silver Price Outlook: चांदी इस साल ₹65000 सस्ती हुई, एक्सपर्ट्स से जानिए अब दाम घटेंगे या बढ़ेंगे

Silver Price Outlook: इस साल चांदी ने निवेशकों को निराश किया है। साल की शुरुआत से अब तक इसकी कीमत करीब 23% गिर चुकी है। सिर्फ जून महीने में ही इसमें 22% की बड़ी गिरावट आई। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब 58 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है। भारत में इसका भाव करीब ₹2.20 लाख प्रति किलो है। इसका मतलब है कि इस साल चांदी ₹65,000 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है।

हालांकि, पिछले एक साल में चांदी ने 50% से ज्यादा का रिटर्न दिया था। लेकिन अब कीमतें दिसंबर 2025 के स्तर के आसपास लौट आई हैं। सवाल यह है कि आखिर चांदी पर दबाव क्यों बना हुआ है?

तेल की कीमतें बनी सबसे बड़ी वजह

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ईरान युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ा है। इससे तेल की सप्लाई पर असर पड़ा और कीमतें चढ़ गईं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 86 डॉलर प्रति बैरल पर है, जो युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले करीब 20% ज्यादा है। अगर तनाव और बढ़ता है, तो तेल महंगा हो सकता है। इससे महंगाई बढ़ेगी और दुनिया भर के बाजारों पर दबाव आएगा।

फेड की ब्याज दरें क्यों हैं अहम?

तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ती है। ऐसे में अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बनता है। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो डॉलर मजबूत होता है। ऐसे समय में निवेशक सोना और चांदी जैसे बिना ब्याज वाले एसेट छोड़कर डॉलर आधारित निवेश की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि चांदी की कीमतों पर दबाव बना रहता है।

चांदी सोने से ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली

चांदी की कीमतें सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं। इसकी वजह यह है कि चांदी सिर्फ निवेश का जरिया नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डेटा सेंटर और पावर ग्रिड जैसे सेक्टरों में होता है। इसलिए औद्योगिक मांग में थोड़ा भी बदलाव कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता है।

गोल्ड सिल्वर रेशियो क्या होता है

जून 2026 में जब सोना 4,000-4,060 डॉलर प्रति औंस के बीच था, तब चांदी 60-61 डॉलर प्रति औंस पर थी। उस समय गोल्ड-सिल्वर रेशियो करीब 67 था। इससे पहले मई में यह 55 और जनवरी में 50 तक आ गया था।

गोल्ड-सिल्वर रेशियो बताता है कि 1 औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी चाहिए। इसे सोने की कीमत को चांदी की कीमत से भाग देकर निकाला जाता है। अगर रेशियो 75 या उससे ज्यादा हो, तो इसका मतलब माना जाता है कि चांदी सोने के मुकाबले सस्ती है। वहीं, अगर यह 50-60 या उससे नीचे हो, तो सोना सस्ता माना जाता है।

क्या अभी चांदी सस्ती है?

Bonanza के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेन्द्र यादव का कहना है कि 70 का रेशियो अपने लंबे समय के औसत के करीब है। यह बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन फिर भी चांदी सोने के मुकाबले थोड़ी सस्ती नजर आती है। खासकर तब, जब औद्योगिक मांग मजबूत बनी रहे। भारत में दिसंबर 2025 से चांदी की कीमत लगातार ₹2 लाख प्रति किलो से ऊपर बनी हुई है।

आगे किस धातु में ज्यादा दम?

निरपेन्द्र यादव का मानना है कि फिलहाल गोल्ड-सिल्वर रेशियो 65 से 75 के बीच रह सकता है। यह काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और वैश्विक आर्थिक स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर फेड ब्याज दरें घटाता है, डॉलर कमजोर पड़ता है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार आता है, तो चांदी सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इससे Gold-Silver Ratio घटकर 60-65 तक आ सकता है।

वहीं, अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, मंदी का खतरा गहराता है या निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ भागते हैं, तो सोना चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। ऐसे में यह रेशियो 70 से ऊपर बना रह सकता है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा समय में सिर्फ सोना या सिर्फ चांदी चुनने के बजाय दोनों में संतुलित निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

अगर आपका लक्ष्य पूंजी की सुरक्षा है और आप कम जोखिम लेना चाहते हैं, तो सोना बेहतर विकल्प माना जा सकता है। लेकिन अगर आप थोड़ा ज्यादा जोखिम उठा सकते हैं और लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो धीरे-धीरे चांदी में हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। क्योंकि मौजूदा वैल्यूएशन के हिसाब से चांदी में आगे बेहतर प्रदर्शन की संभावना बनी हुई है।

Gold Price Today: अगस्त के पहले दिन सोना हुआ और महंगा, 24 और 22 कैरेट दोनों का बढ़ गया भाव

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Stocks to Watch: 30 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 16 स्टॉक्स, मिल सकता तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: गुरुवार के कारोबारी सत्र में कई बड़े शेयर फोकस में रह सकते हैं। कुछ कंपनियों ने जून तिमाही के मजबूत नतीजे जारी किए हैं। कुछ के प्रदर्शन ने निवेशकों को निराश किया है। इसके अलावा एक सरकारी कंपनी में बड़ा मैनेजमेंट बदलाव भी हुआ है। आइए जानते हैं 30 जुलाई को किन 16 शेयरों पर बाजार की सबसे ज्यादा नजर रहेगी।

Eicher Motors

दोपहिया और कमर्शियल व्हीकल बनाने वाली कंपनी आयशर मोटर्स का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 21.4% बढ़कर 1,462 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 31.5% बढ़कर 6,632 करोड़ रुपये हो गया। मुनाफा और रेवेन्यू दोनों ही CNBC-TV18 के अनुमान से बेहतर रहे।

Dabur

एफएमसीजी कंपनी डाबर का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 15.3% बढ़कर 586 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 10.6% बढ़कर 3,764.3 करोड़ रुपये और EBITDA 11% बढ़कर 741.2 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 19.6% से बढ़कर 19.7% रहा। मुनाफा अनुमान से बेहतर रहा, जबकि बाकी आंकड़े अनुमान के मुताबिक रहे।

MOIL

सरकारी मैंगनीज माइनिंग कंपनी MOIL का जून तिमाही का नेट प्रॉफिट 70.1% बढ़कर 87.6 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल यह 51.5 करोड़ रुपये था। रेवेन्यू 6.6% बढ़कर 370.9 करोड़ रुपये और EBITDA 72.3% बढ़कर 135.8 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 22.6% से बढ़कर 36.6% हो गया।

Bajaj Housing Finance

बजाज ग्रुप की कंपनी बजाज हाउसिंग फाइनेंस का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 22.6% बढ़कर 715 करोड़ रुपये रहा। NII 9% बढ़कर 968 करोड़ रुपये और कुल आय 17.2% बढ़कर 3,063 करोड़ रुपये हो गई। कंपनी की एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ। ग्रॉस NPA 0.30% से घटकर 0.29% और नेट NPA 0.13% से घटकर 0.12% रहा।

Vedanta Oil & Gas

ऑयल एंड गैस कंपनी वेदांता ऑयल एंड गैस ने जून तिमाही में 945 करोड़ रुपये का प्रॉफिट दर्ज किया। पिछली तिमाही में कंपनी को 476 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। रेवेन्यू 3.1% घटकर 2,507 करोड़ रुपये और EBITDA 7.7% घटकर 814 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 34.1% से घटकर 32.5% पर आ गया।

Vedanta Iron & Steel

स्टील कंपनी वेदांता आयरन एंड स्टील ने जून तिमाही में 121 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया। पिछली तिमाही में कंपनी को 1,939 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। रेवेन्यू 5.2% घटकर 3,662 करोड़ रुपये और EBITDA 8.1% घटकर 508 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 14.3% से घटकर 14% रह गया।

Vedanta Power

बिजली कंपनी वेदांता पावर को जून तिमाही में 423 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। पिछली तिमाही में कंपनी ने 139 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। 487 करोड़ रुपये के एक्सेप्शनल लॉस का असर नतीजों पर दिखा, जबकि रेवेन्यू 31% बढ़कर 2,607 करोड़ रुपये रहा।

Waaree Energies

रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी वारी एनर्जीज का जून तिमाही का नेट प्रॉफिट 14.1% बढ़कर 850 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 79.2% बढ़कर 7,932 करोड़ रुपये और EBITDA 44.4% बढ़कर 1,440 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन 22.5% से घटकर 18.2% पर आ गया।

Cochin Shipyard

सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी कोचीन शिपयार्ड के डायरेक्टर (फाइनेंस) जोस वी. जे. अगले सात महीने तक CMD का अतिरिक्त प्रभार संभालते रहेंगे। उनकी नियुक्ति 1 अगस्त 2026 से बढ़ाई गई है। इस विस्तार को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने मंजूरी दी है।

Star Health

हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी स्टार हेल्थ का जून तिमाही का मुनाफा 438 करोड़ रुपये से बढ़कर 550 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी की आय भी बढ़कर 4,917 करोड़ रुपये पहुंच गई। पिछले साल की समान तिमाही में यह 4,336 करोड़ रुपये थी।

MTAR Tech

इंजीनियरिंग कंपनी MTAR Tech का जून तिमाही का नेट प्रॉफिट 10.8 करोड़ रुपये से बढ़कर 50.2 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 157 करोड़ रुपये से बढ़कर 360 करोड़ रुपये और EBITDA 28 करोड़ रुपये से बढ़कर 85 करोड़ रुपये पहुंच गया। EBITDA मार्जिन 18.1% से बढ़कर 23.5% हो गया।

Balkrishna Industries

टायर कंपनी बालकृष्ण इंडस्ट्रीज का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 287 करोड़ रुपये से बढ़कर 432 करोड़ रुपये हो गया। आय बढ़कर 3,445 करोड़ रुपये और EBITDA 724 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 18.2% से बढ़कर 21.01% हो गया। कंपनी ने 4 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है।

TBO Tek

ट्रैवल टेक कंपनी TBO Tek का जून तिमाही का प्रॉफिट 32.4% बढ़कर 83.3 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 81.1% बढ़कर 925.7 करोड़ रुपये और EBITDA 86.6% बढ़कर 138 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 14.4% से बढ़कर 14.9% रहा।

TeamLease

स्टाफिंग और एचआर सर्विसेज कंपनी TeamLease का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 31.4% बढ़कर 34.9 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 5.8% बढ़कर 3,034.7 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA 2.7% बढ़कर 31.5 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 1% पर स्थिर बना रहा।

Triveni Engineering

इंजीनियरिंग और शुगर सेक्टर की कंपनी त्रिवेणी इंजीनियरिंग का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 2.1 करोड़ रुपये से बढ़कर 3.65 करोड़ रुपये हो गया। कंसोलिडेटेड आय 1,950 करोड़ रुपये और EBITDA 52.9 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 1.96% से बढ़कर 2.71% हो गया।

Redington

आईटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी रेडिंग्टन का जून तिमाही का मुनाफा 76.6% बढ़कर 486 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 34.6% बढ़कर 34,922 करोड़ रुपये और EBITDA 76.8% बढ़कर 708 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 1.5% से बढ़कर 2% रहा।

कल ये कंपनियां तिमाही नतीजे जारी करेंगी

गुरुवार को कई बड़ी कंपनियां जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी करेंगी। इनमें आर्कियन केमिकल इंडस्ट्रीज, अजंता फार्मा, अपोलो पाइप्स, AWL एग्री बिजनेस, बजाज फाइनेंस, बेस्ट एग्रोलाइफ, एक्साइड इंडस्ट्रीज, ICRA और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजों पर निवेशकों की नजर रहेगी।

Crude Oil Price: कच्चे तेल में तूफानी तेजी, ट्रंप की धमकी के बाद 7% उछलकर 90 डॉलर के पार पहुंचा भाव

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Crude Oil Price: कच्चे तेल में तूफानी तेजी, ट्रंप की धमकी के बाद 7% उछलकर 90 डॉलर के पार पहुंचा भाव

Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर बिगड़ते दिख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को नई सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रहे तो अमेरिका जोरदार जवाब देगा। इसके चलते कच्चे तेल के दामों में जोरदार तेजी आई और वो 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए।

ट्रंप बोले- ईरान पर करेंगे जोरदार हमला

ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया है। वहीं, अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित गुटों पर संयुक्त हवाई हमले किए हैं। इन घटनाओं से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

Fox News से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा, “हम ईरान पर जोरदार हमला करेंगे।” ट्रंप ने साफ कहा कि जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों का जवाब सीधे ईरान को दिया जाएगा। उनके बयान से संकेत मिला है कि दोनों देशों के बीच तनाव फिर से तेजी से बढ़ सकता है।

100 डॉलर तक जा सकता है कच्चा तेल

बुधवार को रात 8.20 बजे तक क्रूड 7.68% चढ़कर 90.54 डॉलर प्रति बैरल पर था। DBS बैंक का अनुमान है कि आने वाले दिनों में ब्रेंट क्रूड 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकता है। वहीं, OPEC+ भी अक्टूबर से कुछ समय के लिए उत्पादन बढ़ाने की योजना टाल सकता है।

DBS बैंक के एनर्जी रिसर्च हेड सुव्रो सरकार का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के संकेत जरूर दिए हैं, लेकिन इससे हॉर्मुज का संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगर तनाव कम भी होता है, तब भी कच्चे तेल की कीमतों के 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे जाने की संभावना फिलहाल कम दिखती है।

हूती विद्रोही वसूल सकते हैं शुल्क

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन का हूती समूह अब दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों से शुल्क लेने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने हूती विद्रोहियों से सीधे बातचीत की है। मकसद यह है कि उसके तेल टैंकरों को इस रास्ते से सुरक्षित गुजरने दिया जाए।

अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 24 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में अमेरिका का कच्चे तेल का भंडार करीब 33 लाख बैरल घटा है।

OPEC+ भी ले सकता है बड़ा फैसला

रॉयटर्स के मुताबिक, OPEC+ अक्टूबर से अगले तीन महीने तक उत्पादन बढ़ाने की योजना रोक सकता है। अगर ऐसा होता है तो बाजार में सप्लाई सीमित रह सकती है। इससे कच्चे तेल की कीमतों को और सहारा मिल सकता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर उत्पादन में कटौती के साथ ईरान युद्ध का संकट गहराता है, तो कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं।

Waaree Energies Q1 Results: सोलर कंपनी को ₹850 करोड़ का मुनाफा, अमेरिका में मिली बड़ी राहत

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Commodity Outlook: कच्चे तेल से सोना-चांदी तक, अगले हफ्ते कैसी रहेगी चाल? एक्सपर्ट कायनात चैनवाला से जानिए

Commodity Outlook: पिछला हफ्ता कमोडिटी बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। ऐसे में अगले हफ्ते भी बाजार की नजर भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर रहेगी।

कोटक सिक्योरिटीज की कमोडिटी रिसर्च एक्सपर्ट कायनात चैनवाला के मुताबिक, आने वाले दिनों में कमोडिटी बाजार की दिशा तीन बड़े फैक्टर तय करेंगे। इनमें पश्चिम एशिया का तनाव, अमेरिकी फेड की नीति और वैश्विक सप्लाई की स्थिति सबसे अहम होगी।

कच्चे तेल में क्यों आया उछाल?

पिछले हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10% की तेजी आई। ब्रेंट क्रूड एक समय 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि, हफ्ते के आखिर में मुनाफावसूली से इसमें कुछ गिरावट आई।

कायनात चैनवाला के मुताबिक, इस तेजी की सबसे बड़ी वजह लाल सागर (Red Sea) में बढ़ा तनाव रहा। हूती विद्रोहियों ने दो सऊदी टैंकरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले का दावा किया। इसके बाद कई जहाजों ने अपना रास्ता बदल दिया। दूसरी ओर, ड्रोन हमले के बाद कजाकिस्तान की पाइपलाइन क्षमता भी करीब 80% प्रभावित हुई। इससे सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई।

सोना-चांदी में कैसी रही चाल?

स्पॉट गोल्ड पिछले हफ्ते करीब 1% चढ़कर 4,050 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बंद हुआ। वहीं, चांदी में करीब 4% की तेजी आई और यह 58 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई।

कायनात चैनवाला का कहना है कि सोना-चांदी में आई तेजी की बड़ी वजह नई खरीदारी नहीं, बल्कि गिरावट के बाद हुई खरीदारी (Dip Buying) और शॉर्ट कवरिंग रही। मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड अभी भी इन धातुओं पर दबाव बनाए हुए हैं।

MCX गोल्ड के लिए कौन से स्तर अहम?

MCX गोल्ड पिछले हफ्ते ₹1,43,106 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। बाजार फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है।

कायनात चैनवाला के मुताबिक, ऊपर की ओर ₹1,46,000 पहला रेजिस्टेंस है। इसके बाद ₹1,48,000 अहम स्तर होगा। नीचे की ओर ₹1,41,000 पहला सपोर्ट है। अगर ₹1,39,800 का स्तर टूटता है, तो गिरावट और बढ़ सकती है।

बेस मेटल्स में भी रही मजबूती

कॉपर, एल्युमिनियम, जिंक और लेड में भी पिछले हफ्ते तेजी रही। चीन में कॉपर का स्टॉक घटने और रिफाइंड मेटल्स पर संभावित टैरिफ को लेकर अनिश्चितता की वजह से कॉपर एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया।

फेड की बैठक पर रहेगी नजर

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 28-29 जुलाई की बैठक अगले हफ्ते बाजार के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर होगी।

कायनात चैनवाला का मानना है कि सिर्फ तेल की कीमतों में आई तेजी के आधार पर फेड अगले हफ्ते ब्याज दर बढ़ाने का फैसला शायद ही ले। हालांकि, सितंबर की बैठक को लेकर जोखिम पहले के मुकाबले ज्यादा बना हुआ है।

अगले हफ्ते किन बातों पर रहेगी नजर?

कायनात चैनवाला के मुताबिक, अगले हफ्ते कमोडिटी बाजार की दिशा तीन बातें तय करेंगी। पहली, लाल सागर और पश्चिम एशिया में तनाव का घटनाक्रम।

दूसरी, फेड की बैठक और ब्याज दरों को लेकर उसके संकेत। तीसरी, ईरान की ओर से आने वाले किसी भी कूटनीतिक संकेत। इन तीनों का असर कच्चे तेल, सोना, चांदी और दूसरे कमोडिटी बाजारों की चाल पर साफ दिख सकता है।

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दिल्ली में सोना 400 रुपये गिरा, चांदी में भी कमजोरी, क्रूड 100 डॉलर पार करने का असर

दिल्ली में गुरुवार यानी 23 जुलाई को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट आई। सोना 400 रुपये गिरकर 1,49,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी 300 रुपये गिरकर 2,29,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन ने यह जानकारी दी।

क्रूड में उछाल से महंगाई बढ़ने का डर 

ट्रेडर्स ने कहा कि क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से बुलियन में मुनाफावसूली हो रही है। क्रूड में उछाल से महंगाई बढ़ने का डर है। इससे दुनियाभर में केंद्रीय बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी में सख्ती दिख सकती है। खासकर अमेरिका में फेडरल रिजर्व महंगाई को काबू में करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।

केंद्रीय बैंक बढ़ा सकते हैं इंटरेस्ट रेट 

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “बुलियन पर दबाव बढ़ने की वजह मिडिलईस्ट में चल रही लड़ाई है, जिससे क्रूड की कीमतें चढ़ रही हैं। इससे माना जा रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में सख्ती बरत सकता है।” इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक घटती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में गिरावट 

गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में गिरावट देखने को मिली। यह 38.92 डॉलर यानी 1 फीसदी गिरकर 4,091.17 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। सिल्वर भी करीब 2 फीसदी गिरकर 58.65 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। ब्रेंट क्रूड का प्राइस बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। यह बीते छह हफ्तों में क्रूड का सबसे ज्यादा प्राइस है।

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क्रूड में तेजी जारी रहने पर सोना दबाव में रहेगा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रहती हैं या और ऊपर जाती है तो गोल्ड दबाव में रहेगा। इस साल सोने की कीमत जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। उसके बाद कीमतों में तेज गिरावट आई। अपने पीक से यह करीब 30 फीसदी गिर चुका है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला।

Gold Silver Prices Today: देश और विदेश में सोने और चांदी में गिरावट, क्रूड 98 डॉलर के पार जाने का असर

Gold Silver Prices Today: सोने और चांदी की कीमतों में 23 जुलाई को देश और विदेश में गिरावट दिखी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.6 फीसदी गिरकर 4,103.39 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स (अगस्त डिलीवरी) 1.1 फीसदी की कमजोरी के साथ 4,106.40 डॉलर प्रति औंस चल रहा था। स्पॉट सिल्वर 1.3 फीसदी की गिरावट के साथ 58.90 डॉलर प्रति औंस था।

भारत में भी गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट आई। कमोडिटी एक्सचेंज MCX में गोल्ड फ्यूचर्स दोपहर में 0.95 फीसदी यानी 1,329 रुपये गिरकर 1,44,351 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 2.03 फीसदी यानी 4,598 रुपये की गिरावट के साथ 2,22,220 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा था।

सोने की कीमतें 22 जुलाई को 2 हफ्ते की उंचाई पर पहुंच गई थी। सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट की वजह क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी है। 23 जुलाई को ब्रेंट क्रूड में बड़ी तेजी दिखी। यह 4.35 फीसदी यानी 4 डॉलर से ज्यादा तेजी के साथ 98 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 3 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 89 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया।

इंडसइंड सिक्योरिटीज में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी ने कहा, “ऑयल की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं। इससे इनफ्लेशन पर दबाव बढ़ रहा है। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की संभावना बढ़ गई है। इससे डॉलर में कमजोरी का फायदा सोना को नहीं मिल रहा।” क्रूड ऑयल की कीमतें बीते छह हफ्तों के सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गई हैं।

दो साल की की मैच्योरिटी अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 17 महीनों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई है। इसकी वजह क्रूड की कीमतों में उछाल है। महंगा क्रूड इनफ्लेशन बढ़ाएगा, जिससे फेड के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की संभावना बढ़ेगी। हालांकि, डॉलर में 0.1 फीसदी कमजोरी आई है। लेकिन, सोने की कीमतों को इसका फायदा नहीं मिला है। डॉलर में कमजोरी से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना सस्ता हो जाता है। इसलिए डॉलर में कमजोरी आने पर सोने की कीमतें चढ़ती हैं।

फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने पर सोने की चमक घटती है। हालांकि, अगले हफ्ते फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करने की उम्मीद है। लेकिन, फ्यूचर्स मार्केट का मानना है कि इस साल के अंत फेडरल रिजर्व कम से कम एक बार इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद का असर सोने की कीमतों पर दबाव बनाएगा।

दिल्ली में सोना 2 हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंचा, चांदी एक दिन में 8500 रुपये उछली

दिल्ली सर्राफा बाजार में 22 जुलाई को सोने और चांदी में तेजी देखने को मिली। सोने का भाव 1,900 रुपये के उछाल के साथ दो हफ्ते की ऊंचाई यानी 1,49,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। ग्लोबल मार्केट से पॉजिटिव संकेतों और स्ट्रॉन्ग डिमांड की वजह से कीमतों को सपोर्ट मिला। चांदी में भी जबर्दस्त तेजी दिखी।

चांदी एक दिन में 8500 रुपये चढ़ी

दिल्ली सर्राफा बाजार में 22 जुलाई को चांदी 8,500 रुपये की तेजी के साथ 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। चांदी में यह तेजी का लगातार छठा सत्र था। ट्रेडर्स ने कहा कि सोने में भी यह तेजी का लगातार तीसरा सत्र था। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के पॉजिटिव संकेतों के साथ ही स्ट्रॉन्ग लोकल डिमांड और पिछले हफ्ते कीमतों में गिरावट के बाद अच्छी खरीदारी का असर कीमतों पर पड़ा।

फिजिकल सोने की डिमांड में रिकवरी

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “बुधवार को सोने में तेजी रही। इससे कीमतें दो हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गई। इसमें फिजिकल सोने की डिमांड में रिकवरी का भी हाथ है।” उन्होंने कहा कि गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में भी निवेश बढ़ा है। इससे यह संकेत मिलता है कि हालिया गिरावट के बाद सोने को लेकर सेंटिमेंट बदल रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में तेजी दिखी। स्पॉट गोल्ड 1.16 फीसदी यानी 47 डॉलर के उछाल के साथ 4,125 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। चांदी में भी करीब 1 फीसदी की तेजी रही, जिससे यह 59.32 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। बीते कुछ हफ्तों में सोने और चांदी पर काफी दबाव देखने को मिला था।

क्रूड ऑयल 5 हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंचा

कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च के एवीपी कायनात चेनवाला ने कहा कि पश्चिम एशिया में टेंशन और क्रूड ऑयल की कीमतें पांच हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच जाने के बावजूद सोने और चांदी में तेजी है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कूटनीति से मामले के समाधान के संकेत दिए हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका बातचीत शुरू करना चाहता है लेकिन चीन इसके लिए तैयार नहीं है। इससे इनवेस्टर्स ‘इंतजार करो और देखो’ की पॉलिसी अपना रहे हैं।

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क्रूड में तेजी जारी रहने पर बढ़ेगी महंगाई

22 जुलाई को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 94 डॉलर प्रति बैरल को पार गई। अगर क्रूड में तेजी जारी रहती है या लंबे समय तक कीमतें इस लेवल पर बनी रहती हैं तो दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा होगा। अमेरिका में फेडरल रिजर्व उम्मीद से पहले इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक घट जाती है।

क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से लगी आग, आपकी जेब पर भी पड़ेगा महंगे क्रूड का असर

क्रूड ऑयल की कीमतों में 22 जुलाई को बड़ी तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 2.76 फीसदी चढ़कर 93.54 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 2.83 फीसदी की तेजी के साथ 86.74 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार और भारत की करेंसी रुपये पर भी पड़ा। निफ्टी में 0.76 फीसदी यानी 186 अंक की गिरावट दिखी, जबकि सेंसेक्स करीब 700 अंक क्रैश कर गया।

क्रूड में उछाल का असर रुपये पर भी पड़ा। डॉलर के मुकाबले यह 11 पैसे गिरकर 96.36 के लेवल पर आ गया। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल की वजह अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती लड़ाई है। अमेरिकी ने लगातार 11वें दिन ईरान पर हमला जारी रखा। ईरान भी जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशान बना रहा है। टेंशन बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऑयल टैंकर्स की आवाजाही बाधित है। इससे क्रूड की कीमतें चढ़ रही हैं।

इस साल फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू हुई थी। उसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया था। एक समय ब्रेट क्रूड का प्राइस 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर के ऐलान से क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी। लेकिन, मध्यपूर्व में टेंशन फिर बढ़ने से क्रूड की कीमतें चढ़ने लगी हैं। क्रूड की कीमतों में उछाल भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है।

पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के डेटा के मुताबिक, क्रूड की कीमतों में उछाल की वजह से जून तिमाही में भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 60 फीसदी ज्यादा रहा। भारत अपनी जरूरत के 88 फीसदी क्रूड ऑयल का इंपोर्ट करता है। इस वजह से क्रूड की कीमतों में उछाल से सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ जाता है।

पहले ही क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने पर भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ा चुकी हैं। इससे दिल्ली में पेट्रोल का प्राइस प्रति लीटर 102.12 रुपये और मुंबई में 111.21 रुपये पहुंच गया है। दिल्ली में डीजल की कीमतें भी 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। अगर क्रूड में तेजी जारी रहती है तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां फिर से पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो सकती है। इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा।

महंगे पेट्रोल और डीजल से महंगाई बढ़ने का डर है। मई और जून में रिटेल इनफ्लेशन बढ़ा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईंधन खासकर डीजल महंगा होने से कई चीजों की कीमतें बढ़ती हैं। इसकी वजह यह है कि डीजल का इस्तेमाल ट्रांसपोर्टेशन के लिए होता है। ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से फल-सब्जी सहित रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी बढ़ जाती है। पहले से ही प्याज सहित कई चीजों की कीमतों में उछाल दिख रहा है। इससे परिवारों के बजट पर बोझ बढ़ गया है।