Brain Stroke के बाद 60 की उम्र में Rahul Roy ने की नई शुरुआत | Aashiqui Star’s Inspiring Story

Brain Stroke के बाद 60 की उम्र में Rahul Roy ने की नई शुरुआत | Aashiqui Star's Inspiring Story

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1990, जब एक फिल्म ने राहुल रॉय को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया था। फिर Career का Downfall आया, Bigg Boss 1 जीता लेकिन उम्मीद के मुताबिक Comeback नहीं हुआ। और 2020 में Brain Stroke ने उनकी जिंदगी को एक और मुश्किल मोड़ पर ला दिया। बोलने और चलने में दिक्कत के बावजूद राहुल रॉय ने हार नहीं मानी। Therapy, Recovery और लगातार कोशिशों के बाद आज 60 की उम्र में वो फिर से काम कर रहे हैं, फिल्मों में वापसी की कोशिश के साथ Weddings में भी Perform कर रहे हैं। क्योंकि हर Comeback का मतलब वहीं लौटना नहीं होता जहां से आप गिरे थे। कभी-कभी Comeback का मतलब बस दोबारा शुरुआत करने की हिम्मत रखना होता है।

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Ary Bansal to make Formula Regional European Championship debut

Ary Bansal to make Formula Regional European Championship debut
Ary Bansal Formula Regional European Championship

India’s Ary Bansal will race at the 2026 Formula Regional European Champion (FREC) finale at Hockenheim this weekend (September 11-13). 

The 16-year-old from Bengaluru is currently competing in the Italian Formula 4 Championship, where he stands third overall. His FREC outing is a one-off for now, giving him the chance to drive the Tatuus T-326 single-seater for the very first time

Bansal is the first Indian driver to win the GB4 championship

Currently third overall in the Italian F4 Championship

Following a successful karting career, Bansal has built an impressive record since making the step up to single-seater racing. Last year, he became the first Indian driver to win the GB4 Championship, finishing the season with four wins and 11 podiums. He also competed in six rounds of the FIA British F4 Championship last year and even represented India at the inaugural FIA F4 World Cup. 

Ary Bansal Italian F4

This year, Bansal has been racing in the Italian F4 Championship, and has already secured a win and four further podium finishes after five rounds. His FREC outing with team CL Motorsport represents another step up the single-seater ladder for the young Indian racer.

“I’m pleased to be joining CL Motorsport at Hockenheim. It’s a valuable opportunity to gain experience at the Formula Regional level and step into a new car. I’m looking forward to getting on track, building throughout the weekend and maximising every session,” said Bansal.

Hockenheim will host the final round of the 2026 FREC, that has seen five different drivers leads the standings. It’s set to be a four-way showdown, with Emanuele Olivieri leading by 20 points from Sebastian Wheldon. Kean Nakamura-Berta is third overall, just five points behind Wheldon, while Rashid Al Dhaheri is fourth overall, another 10 points adrift.
 

शादी के बाद छोड़ी एक्टिंग,47 की उम्र में बनीं Stand-Up Comedian| Surabhi Vanzara| India’s Got Latent

शादी के बाद छोड़ी एक्टिंग,47 की उम्र में बनीं Stand-Up Comedian| Surabhi Vanzara| India's Got Latent

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शादी के बाद एक्टिंग छोड़कर घर संभालने लगीं थी अभिनेत्री सुरभि वंजारा। सालों तक उनका मंच कोई फिल्म सेट नहीं, उनका घर था। फिर सालों बाद उन्होंने एक नई पारी की शुरुवात की, माइक उठाया और स्टैंड-अप कॉमेडी शुरू की।

आज India’s Got Latent पर उनका बेबाक अंदाज़ वायरल है।
लेकिन उनकी असली कहानी वायरल होने से कहीं बड़ी है। ये कहानी है खुद को दोबारा खोजने और दूसरी पारी शुरू करने की।
क्योंकि सपनों की कोई उम्र नहीं होती।

@therealsurabhivanzara

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शादी के बाद छोड़ी एक्टिंग, 47 की उम्र में बनीं Stand-Up Comedian | Surabhi Vanzara | India’s Got Latent |

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3 लाख की नौकरी, रिजेक्शन और ताना… 5 साल में इस लड़के ने कैसे हासिल किया 29 लाख का पैकेज?

कभी नौकरी के लिए दर-दर भटकने वाला एक इंजीनियर आज लाखों रुपये के पैकेज पर काम कर रहा है। 2019 में B.Tech करने के बाद इस युवक के पास न अच्छी नौकरी थी और न ही करियर को लेकर कोई स्पष्ट दिशा। कई बार रिजेक्शन और मुश्किलों का सामना करने के बावजूद उसने कोशिश जारी रखी। Reddit के r/Indian_flex पर शेयर की गई उसकी कहानी बताती है कि करियर की शुरुआत भले ही कमजोर हो, लेकिन आगे की राह बदली जा सकती है।

इंजीनियरिंग के बाद भी नहीं थी नौकरी की तैयारी

युवक ने बताया कि कॉलेज के दौरान उसका पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था। इंजीनियरिंग उसके लिए पसंद का करियर नहीं था। वह गेमिंग में काफी दिलचस्पी रखता था और दोस्तों के साथ वक्त बिताने में ज्यादा सहज महसूस करता था।

2019 में B.Tech पूरी करने के बाद उसका प्लेसमेंट नहीं हुआ। परिवार की उम्मीदें अलग थीं। पिता चाहते थे कि वह IT सेक्टर में अच्छी नौकरी हासिल करे। नौकरी नहीं मिलने की वजह से घर में तनाव बढ़ने लगा और युवक ने बेंगलुरु जाने का फैसला किया।

बेंगलुरु में भी नहीं बदली तस्वीर

नौकरी की तलाश में बेंगलुरु पहुंचने के बाद भी उसके सामने सबसे बड़ी परेशानी स्किल की कमी थी। कुछ दोस्तों के साथ रहते हुए शुरुआती दिन किसी नए कॉलेज लाइफ जैसे ही गुजरते रहे। इसी बीच एक रेफरेंस के जरिए उसे यूरोप बेस्ड स्टार्टअप में करीब ₹12,000 महीने की नौकरी मिली। लेकिन काम में जरूरी तकनीकी पकड़ नहीं होने के कारण वह वहां ज्यादा समय नहीं टिक पाया। करीब 20 दिन बाद उसकी नौकरी चली गई।

कोविड ने और बढ़ाई परेशानी

नौकरी जाने के कुछ ही समय बाद कोरोना महामारी आ गई। लॉकडाउन के कारण हालात और मुश्किल हो गए। आखिरकार जून 2020 में वह घर लौट आया। उस समय परिवार को लगता था कि वह नौकरी कर रहा है, जबकि वह कई महीनों से बेरोजगार था। माता-पिता के सवालों से बचने के लिए उसे अपनी नौकरी और सैलरी को लेकर झूठ तक बोलना पड़ा। करीब नौ महीने बाद आखिरकार उसे एक सर्विस बेस्ड कंपनी में नौकरी मिल गई। पैकेज था सिर्फ ₹3.37 LPA, लेकिन उसके लिए यह नौकरी किसी बड़ी राहत से कम नहीं थी।

यहीं से लौटा आत्मविश्वास

कम सैलरी के बावजूद इस नौकरी ने उसके अंदर एक बड़ा बदलाव किया। प्रोजेक्ट में उसका प्रदर्शन अच्छा रहा और वह टीम के प्रमुख परफॉर्मर्स में शामिल होने लगा। यहीं उसे महसूस हुआ कि शायद उसमें उतनी कमी नहीं है, जितना वह खुद समझता था। इसके बाद उसने बेहतर अवसरों के लिए इंटरव्यू देना शुरू किया।

कई बार ऑफर मिला, लेकिन किस्मत ने रोका

2022 में उसने ₹7.72 LPA के एक अवसर के लिए इंटरव्यू के सभी जरूरी राउंड पार कर लिए, लेकिन HR राउंड में कुल अनुभव से जुड़ी शर्त के कारण चयन नहीं हो पाया।

बाद में उसे Big4 कंपनी में ₹8.75 LPA का ऑफर मिला। नौकरी शुरू करने के कुछ ही समय बाद उसने ₹16.5 LPA का इंटरव्यू भी क्लियर किया, लेकिन करियर के शुरुआती गैप की वजह से HR राउंड में फिर रिजेक्शन हो गया।

यह उसके लिए बेहद निराशाजनक दौर था, क्योंकि तकनीकी और इंटरव्यू प्रक्रिया पार करने के बावजूद अंतिम चरण में मौका हाथ से निकल गया।

शादी से पहले बदली कमाई की तस्वीर

कुछ समय बाद उसकी शादी तय हुई। शादी से करीब 20 दिन पहले उसे एक नई कंपनी से ऑफर मिला और पैकेज बढ़कर ₹15.8 LPA हो गया। इसके बाद भी उसने ग्रोथ की तलाश जारी रखी। करीब एक साल बाद उसने फिर स्विच करने का फैसला किया और एक Big4 कंपनी से शुरुआत में ₹25.3 LPA का ऑफर मिला।

My Career Journey from Unemployed to Good Pay with heartbreaks

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नेगोशिएशन के बाद पहुंचा ₹29.05 LPA

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। दूसरी तरफ से काउंटर ऑफर मिलने के बाद पैकेज में और बदलाव हुआ। बातचीत के बाद Big4 कंपनी का ऑफर बढ़कर ₹29.05 LPA हो गया, जिसमें वैरिएबल और जॉइनिंग बोनस शामिल था। यानी जिस शख्स ने अपने करियर की शुरुआत ₹12 हजार महीने की नौकरी और फिर ₹3.37 LPA के पैकेज से की थी, वह कुछ वर्षों में करीब 29 लाख रुपये के पैकेज तक पहुंच गया।

‘मैं एक्सपर्ट नहीं, लेकिन कोशिश करता हूं’

युवक ने अपनी कहानी में खुद को प्रोग्रामिंग का बहुत बड़ा एक्सपर्ट नहीं बताया। उसका कहना है कि वह चीजों को समझने, काम पूरा करने और लगातार प्रयास करने पर भरोसा करता है। उसकी कहानी की खास बात यही है कि करियर में कई बार दरवाजे बंद हुए, लेकिन उसने कोशिश करना नहीं छोड़ा। नौकरी छूटने से लेकर रिजेक्शन और कम पैकेज तक, हर मुश्किल के बाद उसने अगला मौका तलाशा।

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90 लाख की नौकरी छोड़ी, माइक्रोग्रीन्स की खेती शुरू की, आज खड़ा कर दिया 1.44 करोड़ का बिजनेस

हर महीने लाखों रुपये की सैलरी, शानदार कॉर्पोरेट करियर और सुरक्षित नौकरी छोड़कर खेती की राह चुनना आसान नहीं होता। लेकिन चंडीगढ़ के मोहित निजहावन ने इसी चुनौती को स्वीकार किया। करीब 90 लाख रुपये सालाना की नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने माइक्रोग्रीन्स की खेती को अपना नया करियर बनाया। खास बात यह है कि उन्होंने इस बिजनेस की शुरुआत किसी बड़े निवेश या बड़ी जमीन से नहीं की थी। महज 30,000 रुपये और करीब 100 वर्ग फुट की जगह से शुरू हुआ उनका प्रयोग धीरे-धीरे एक कारोबार में बदल गया। मोहित ने इंडोर फार्मिंग के जरिए माइक्रोग्रीन्स उगाए और समय के साथ ग्राहकों, उत्पादन और बिक्री को समझते हुए अपने काम को आगे बढ़ाया।

आज सार्वजनिक रूप से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, उनके कारोबार का सालाना रेवेन्यू करीब 1.44 करोड़ रुपये बताया जाता है। उनकी यह कहानी नौकरी से बिजनेस तक के अनोखे सफर और जोखिम उठाने की मिसाल बन गई है।

B.Tech के बाद शुरू हुआ कॉर्पोरेट सफर

मोहित निजहावन कंप्यूटर साइंस में B.Tech ग्रेजुएट हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर में शानदार करियर बनाया और अच्छी खासी सैलरी वाली नौकरी हासिल की।

हालांकि, दिसंबर 2020 में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने एक ऐसा रास्ता चुना, जो उनकी पुरानी कॉर्पोरेट जिंदगी से बिल्कुल अलग था।

सिर्फ 30 हजार रुपये से शुरू किया काम

माइक्रोग्रीन्स की खेती का आइडिया मोहित के लिए शुरुआत में एक प्रयोग जैसा था। उन्होंने बड़े निवेश के बजाय सिर्फ 30,000 रुपये से अपना काम दोबारा शुरू किया।

इसके लिए चंडीगढ़ में करीब 100 वर्ग फुट की छोटी-सी जगह ली गई। इसी सीमित जगह में उन्होंने इंडोर माइक्रोग्रीन्स उगाना शुरू किया और धीरे-धीरे खेती के साथ-साथ मार्केटिंग और ग्राहकों की जरूरतों को समझना शुरू किया।

छोटे कमरे से बना Greenu Microgreens

शुरुआती प्रयोग धीरे-धीरे एक बिजनेस मॉडल में बदल गया। मोहित ने उत्पादन बढ़ाने, ग्राहकों तक पहुंच बनाने और माइक्रोग्रीन्स की बिक्री को बेहतर तरीके से मैनेज करने पर काम किया।

इसी सफर से Greenu Microgreens का कारोबार खड़ा हुआ। छोटी जगह और कम पूंजी से शुरू हुआ यह वेंचर आज काफी बड़ा बिजनेस बन चुका है।

हर महीने 12 लाख रुपये का रेवेन्यू!

सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के मुताबिक, Greenu Microgreens का कारोबार अब करीब 12 लाख रुपये प्रति महीने का रेवेन्यू जेनरेट करता है। यानी सालाना कारोबार लगभग 1.44 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है।

रिपोर्ट्स में कंपनी का सालाना मुनाफा करीब 60 लाख रुपये बताया गया है। हालांकि, बिजनेस का रेवेन्यू और किसी व्यक्ति की नौकरी की सैलरी अलग-अलग चीजें हैं, इसलिए दोनों की सीधी तुलना करना सही नहीं होगा।

सिर्फ अपना बिजनेस नहीं, दूसरों को भी दे रहे ट्रेनिंग

मोहित की कहानी सिर्फ अपना फार्म चलाने तक सीमित नहीं है। Greenu Microgreens के जरिए वह किसानों और उन लोगों को भी माइक्रोग्रीन्स फार्मिंग की ट्रेनिंग देते हैं, जो इसे बिजनेस के तौर पर शुरू करना चाहते हैं। इस तरह उनका लक्ष्य केवल माइक्रोग्रीन्स उगाना ही नहीं, बल्कि दूसरे लोगों को भी इस क्षेत्र में अवसर तलाशने में मदद करना है।

90 लाख की नौकरी से 30 हजार की खेती तक का सफर

मोहित की कहानी इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने करीब 90 लाख रुपये सालाना की नौकरी छोड़कर सिर्फ 30,000 रुपये से अपना नया सफर शुरू किया। एक तरफ कॉर्पोरेट नौकरी की बड़ी सैलरी थी, तो दूसरी तरफ छोटी जगह में खेती का अनिश्चित रास्ता। इसके बावजूद उन्होंने अपने नए आइडिया पर भरोसा किया और धीरे-धीरे इसे बिजनेस में बदल दिया।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

मोहित की कहानी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों के बीच अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे नौकरी से अलग रास्ता चुनने और अपने दम पर बिजनेस खड़ा करने की प्रेरणादायक कहानी बताया। वहीं, कुछ यूजर्स ने 90 लाख रुपये की सैलरी और 1.44 करोड़ रुपये के बिजनेस रेवेन्यू की तुलना पर सवाल उठाए। एक यूजर ने इसे भ्रामक तुलना बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की सालाना सैलरी और बिजनेस का टर्नओवर एक जैसी चीजें नहीं हैं।

दूसरी ओर, कुछ लोगों ने मोहित के फैसले को जिंदगी और सफलता को अलग नजरिए से देखने वाली कहानी बताया। एक यूजर ने इसे “वास्तव में प्रेरणादायक सफर” कहा, जबकि दूसरे ने उनकी यात्रा की तारीफ की।

क्या सीख देती है मोहित की कहानी?

मोहित की कहानी दिखाती है कि सफलता का रास्ता हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता। बड़ी नौकरी और अच्छी सैलरी के बावजूद कोई व्यक्ति अपना अलग रास्ता चुन सकता है। हालांकि, किसी भी बिजनेस की सफलता को समझने के लिए सिर्फ रेवेन्यू नहीं, बल्कि निवेश, खर्च, मुनाफा और कारोबार की स्थिरता जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

12 साल की कॉरपोरेट नौकरी और फिर बड़ा फैसला, गुरजोत ने बताया क्यों छोड़ दी लाखों की सैलरी वाली जॉब

दो साल का अनुभव लेकर 600 जगह भेजा आवेदन, फिर भी नहीं मिली नौकरी, Reddit पर छिड़ी बहस

भारत के तकनीकी क्षेत्र में नौकरी पाना इन दिनों कई युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी बीच रेडिट पर एक नौकरी तलाश रहे शख्स की पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा है। करीब दो साल के अनुभव वाले इस व्यक्ति ने दावा किया कि वह सैकड़ों नौकरियों के लिए आवेदन कर चुका है, लेकिन उसे बहुत कम जगहों से जवाब मिला। शख्स ने बताया कि करीब 500-600 आवेदन भेजने के बावजूद उसकी स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ। इसके उलट, सोशल मीडिया और रेडिट पर उसे लगातार ऐसी कहानियां दिखाई दे रही थीं, जिनमें लोगों को नौकरी से निकाले जाने के कुछ ही महीनों बाद बड़ी तकनीकी कंपनियों से नए प्रस्ताव मिल रहे थे।

किसी को अमेजन के बाद गूगल, तो किसी को मेटा के बाद कई ऑफर

रेडिट उपयोगकर्ता ने कुछ ऐसी पोस्ट का जिक्र किया, जिन्हें देखकर वह खुद को दूसरों से बिल्कुल अलग स्थिति में महसूस करने लगा। एक व्यक्ति ने दावा किया कि अमेजन से नौकरी जाने के करीब पांच महीने बाद उसे गूगल में नौकरी मिल गई। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि नौकरी जाने के सिर्फ तीन महीने के भीतर उसे 25 प्रतिशत अधिक वेतन वाली नई नौकरी मिल गई। इतना ही नहीं, नौकरी की तलाश के दौरान वह विदेश यात्रा पर भी गया।

सबसे ज्यादा हैरानी एक अन्य दावे से हुई, जिसमें एक व्यक्ति ने बताया कि मेटा से नौकरी जाने के बाद उसने गूगल, एप्पल और ओपनएआई में साक्षात्कार दिए और तीनों जगह से उसे नौकरी के प्रस्ताव मिले। आखिर में उसने गूगल को चुना।

दूसरी तरफ 500-600 आवेदन के बाद भी इंतजार

इन कहानियों की तुलना करते हुए मूल पोस्ट लिखने वाले शख्स ने सवाल किया कि क्या वह किसी अलग ही दुनिया में रह रहा है। उसके मुताबिक, जहां कुछ लोग बड़ी तकनीकी कंपनियों के प्रस्ताव आसानी से हासिल कर रहे हैं, वहीं उसे सैकड़ों आवेदन भेजने के बाद भी मुश्किल से कोई प्रतिक्रिया मिल रही है। उसने बताया कि अब तक उसका सबसे अच्छा नतीजा एक अस्थायी छह महीने की नौकरी के लिए बातचीत तक पहुंचना रहा है।

क्या बड़ी कंपनियों का अनुभव ही सबसे बड़ा फर्क है?

पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक उपयोगकर्ता ने सवाल उठाया कि क्या नौकरी तलाश रहे व्यक्ति का दो साल का अनुभव भी मेटा या अमेजन जैसी कंपनियों में रहा है। उसका तर्क था कि बड़ी तकनीकी कंपनियों में पहले से काम कर चुके लोगों के लिए नई नौकरी पाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, क्योंकि ऐसी कंपनियों में चयन अपने आप में कठिन माना जाता है। एक अन्य व्यक्ति ने इसी चर्चा के बीच नौकरी के लिए मदद और संदर्भ की मांग भी कर दी।

कुछ लोगों ने सोशल मीडिया की सफलता की कहानियों पर उठाए सवाल

हर किसी ने इन सफलता की कहानियों को सच नहीं माना। कुछ रेडिट उपयोगकर्ताओं ने कहा कि इंटरनेट पर दिखाई जाने वाली ऐसी पोस्ट पूरी तस्वीर नहीं दिखातीं। एक टिप्पणी में इन्हें प्रभावशाली लोगों द्वारा लोगों को झूठी उम्मीद देने वाला प्रचार तक बताया गया। यानी ऑनलाइन कुछ लोगों की तेज सफलता देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर तकनीकी पेशेवर के लिए नौकरी का बाजार एक जैसा है।

एक जवाब ने कहा- समस्या औसत होने की भी हो सकती है

चर्चा में एक टिप्पणी ने सबसे सीधा जवाब दिया। उपयोगकर्ता ने तर्क दिया कि अत्यधिक कुशल लोग अक्सर कई कंपनियों के लिए आकर्षक उम्मीदवार होते हैं। ऐसे लोग कम समय में जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता रखते हैं, इसलिए उन्हें नौकरी के ज्यादा अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, उस टिप्पणी में यह भी कहा गया कि औसत होना कोई बुरी बात नहीं है। कौशल को लगातार मेहनत और सीखने के जरिए बेहतर बनाया जा सकता है। यही वजह है कि इस पूरी चर्चा ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है क्या तकनीकी क्षेत्र में नौकरी पाने के लिए सिर्फ अनुभव काफी है, या सही कौशल और क्षमता भी उतनी ही जरूरी है?

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दिल्ली मेट्रो में खड़े दिखे पूर्व तेज गेंदबाज मैसूर एक्सप्रेस जवागल श्रीनाथ ने दिया सादगी का संदेश

दिल्ली मेट्रो में जब भारत के पूर्व तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ  खड़े दिखे तो उन्हें मैट्रो में सफर करते देश कई लोग आशचर्यचकित हो गए। 90 के दशक में भारत के प्रमुख गेंदबाज एक सूटकेस लेकर कहीं जा रहे थे। उनका यह फोटो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हुआ।

जवागल श्रीनाथ जब 90 के दशक में टीम इंडिया से जुड़े तो भारतीय टीम में तेज तर्रार गेंदबाज की कमी थी।उनकी तेज गेंदो के कारण उनको मैसूर एक्सप्रेस कहा जाने लगा। उनका गेंदबाजी एक्शन एक दम किताबी था। कर्नाटक के गेंदबाज श्रीनाथ ने 4 विश्वकप खेले।

नहीं मिला वह सम्मान जिसके वह हकदार थे

पोलॉक ने वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज माइकल होल्डिंग और इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड के साथ एक कार्यक्रम पर कहा था, ‘मुझे लगता है कि भारत के जवागल श्रीनाथ को वह श्रेय नहीं मिला जिसके वह हकदार थे।’

पोलॉक की बात से कई लोग इत्तेफाक रखते हैं। हालांकि इसका एक कारण प्रतियोगिता भी हो सकता है। श्रीनाथ के दौर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तेज गेंदबाजों की शानदार जोड़िया थी। पाकिस्तान के वसीम अकरम और वकार यूनुस, वेस्टइंडीज के लिए कर्टली एम्ब्रोस और कर्टनी वाल्श, ऑस्ट्रेलिया के ग्लेन मैक्ग्रा और ब्रेट ली शामिल थे। न्यूजीलैंड की ओर से डियोन नैश और क्रिस क्रेन्स की जोड़ी थी। दक्षिण अफ्रीका टीम में खुद शॉन पॉलोक और एलेन डॉनाल्ड बहुत घातक थे।

इस कारण जवगल श्रीनाथ भारतीय फैंस के बीच तुलना के शिकार हो गए। उनकी वेंकटेश प्रसाद के साथ जोड़ी थी, इस जोड़ी ने भारत को बीच बीच में सफलता तो दिलाई लेकिन विदेशी गेंदबाजों जितनी प्रभावी यह जोड़ी नहीं थी।

ऐसा रहा करियर

जवागल श्रीनाथ 90 के दशक में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के अगुवा रहे। श्रीनाथ ने 1991 से 2003 के बीच 67 टेस्ट और 229 एकदिवसीय खेले है, जिसमें उन्होंने क्रमशः 236 और 315 विकेट लिए हैं।

Highest Paying Jobs: सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं, ये लोग कमा रहे लाखों! PG मालिक से चायवाले तक की लिस्ट वायरल

भारत में अक्सर युवाओं को बताया जाता है कि IIT की पढ़ाई, FAANG जैसी बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी या Data Structures and Algorithms (DSA) में महारत हासिल करना अच्छी कमाई का सबसे आसान रास्ता है। लेकिन टेक और AI कमेंटेटर साक्षी ने सोशल मीडिया पर एक मजेदार लिस्ट शेयर कर इस सोच को ही उलट दिया। उन्होंने भारत में इस समय सबसे ज्यादा कमाई करने वाले लोगों की एक मजाकिया रैंकिंग साझा की, जिसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर टॉप पर नहीं, बल्कि काफी पीछे नजर आए। इस लिस्ट में PG मालिक, मकान मालिक, पानी के टैंकर वाले और चाय-सिगरेट की दुकान चलाने वाले शामिल हैं।

नंबर-1 पर PG मालिक, एक कमरे से लाखों की कमाई

साक्षी की इस मजेदार रैंकिंग में सबसे ऊपर PG मालिक को रखा गया। उन्होंने बताया कि शहरों में बढ़ती नौकरी और किराए की मांग का फायदा PG के मालिकों को मिल रहा है। उनके मुताबिक, एक कमरे में तीन लोगों को रखा जाता है और हर व्यक्ति से करीब ₹10,000 से ₹15,000 तक किराया लिया जाता है। इस हिसाब से कुछ PG मालिक किराया और दूसरे खर्च निकालने के बाद भी ₹1 लाख से ₹1.5 लाख महीने तक कमा सकते हैं। यही वजह है कि पोस्ट में PG बिजनेस को आज के दौर के सबसे कमाई वाले कामों में से एक बताया गया।

बेंगलुरु के मकान मालिक भी पीछे नहीं

लिस्ट में तीसरे नंबर पर बेंगलुरु के मकान मालिक का जिक्र किया गया। टेक सिटी में किराए की बढ़ती मांग को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चाएं होती रहती हैं। पोस्ट में मजाकिया अंदाज में बताया गया कि दो बेडरूम का फ्लैट खरीदकर उसे करीब ₹50,000 महीने के किराए पर देना, हर साल किराया बढ़ाना और WhatsApp पर सिर्फ ‘last price’ लिखकर बातचीत खत्म करना भी कमाई का शानदार तरीका बन गया है।

पानी के टैंकर वाले भी बने ‘बिजनेस किंग’

बेंगलुरु में पानी की समस्या किसी से छिपी नहीं है। इसी को लेकर साक्षी ने पानी के टैंकर संचालकों को भी अपनी लिस्ट में जगह दी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा कि ये लोग बेंगलुरु का ही पानी वापस बेंगलुरु के लोगों को बेचते हैं। पानी की कमी के समय टैंकरों की मांग बढ़ने से इस कारोबार की कमाई भी बढ़ जाती है।

ब्रोकरों की कमाई का भी किया जिक्र

रैंकिंग में प्रॉपर्टी ब्रोकर भी शामिल हैं। पोस्ट के मुताबिक, कुछ ब्रोकर किरायेदारों को कई ऐसे घर दिखाते हैं जो उनकी जरूरत के मुताबिक नहीं होते और आखिर में डील होने पर किरायेदार और मकान मालिक, दोनों से करीब एक महीने के किराए के बराबर कमीशन ले लेते हैं। बेंगलुरु जैसे शहरों में लगातार घर बदलने वाले किरायेदारों की बड़ी संख्या के कारण यह काम भी अच्छी कमाई वाला बताया गया।

टेक पार्क के बाहर चाय-सिगरेट वाला भी हिट

इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर जिस शख्स को रखा गया, वह शायद सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम है टेक पार्क के बाहर चाय, सिगरेट और स्नैक्स बेचने वाला दुकानदार। साक्षी ने उसे टेक इंडस्ट्री का ‘अनसंग हीरो’ बताया। उनके अनुसार, हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोजाना चाय, सिगरेट और स्नैक्स के लिए ऐसी दुकानों पर निर्भर रहते हैं। पोस्ट में अनुमान लगाया गया कि अच्छी लोकेशन वाली ऐसी दुकान से कुछ दुकानदार ₹30,000 से ₹50,000 महीने तक कमा सकते हैं।

न MBA, न फंडिंग, फिर भी कमाई!

इस पूरी पोस्ट का सबसे मजेदार हिस्सा यही था। चाय-सिगरेट की दुकान के लिए न किसी MBA की जरूरत है, न pitch deck की और न ही startup funding की। साक्षी ने इसी अंदाज में टेक इंडस्ट्री पर तंज कसते हुए बताया कि जहां इंजीनियर नौकरी और प्रमोशन के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं, वहीं कुछ छोटे कारोबारी रोजमर्रा की जरूरतों के दम पर अच्छी कमाई कर रहे हैं।

सॉफ्टवेयर इंजीनियरों पर आया सबसे बड़ा तंज

पोस्ट के अंत में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को लेकर सबसे मजेदार टिप्पणी की गई। साक्षी ने लिखा कि जब बाकी लोग अलग-अलग तरीकों से कमाई कर रहे हैं, तब सॉफ्टवेयर इंजीनियर रात 2 बजे तक DSA के सवाल हल कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि अगली salary hike अच्छी होगी।

सोशल मीडिया यूजर्स ने भी लिए मजे

साक्षी की पोस्ट को सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और इसे खबर लिखने तक 1.5 लाख से ज्यादा व्यूज मिले। यूजर्स ने भी अपने-अपने अंदाज में इस रैंकिंग पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने मजाक करते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने कमाई का सबसे मुश्किल रास्ता चुना है और उन्हें DSA की तैयारी के बजाय पानी का टैंकर खरीद लेना चाहिए था। एक अन्य यूजर ने बेंगलुरु का असली ‘product-market fit’ AI या सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि चाय, प्रॉपर्टी और मेट्रो से दूरी का गणित बताया। एक यूजर ने टैक्स को लेकर भी तंज कसा और कहा कि इन कामों में कमाई करने वालों में शायद सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही ऐसा व्यक्ति है जो नियमित रूप से इनकम टैक्स और ITR जैसी चीजों से जूझता है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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Verstappen commits to Red Bull F1 till 2030

Verstappen commits to Red Bull F1 till 2030
Max Verstappen Red Bull F1

Max Verstappen has signed a multi-year contract extension with Red Bull Racing, ending long-standing speculation about his future in Formula 1. The four-time F1 world champion’s current contract already ran until 2028, albeit with performance-related clauses. The new deal will see him stay with Red Bull Racing until at least the end of the 2030 season.

“I am really pleased with the contract extension. We have the best people and I’m excited to keep working together with everyone to get back to the top again. This remains the ultimate goal that all of us have been working towards and will continue to pursue,” Verstappen said.

  1. Verstappen extends Red Bull contract by two years
  2. Dutchman has won 4 F1 drivers’ titles and 71 races with the team so far
Max Verstappen Laurent Mekies Red Bull F1

The Verstappen-Red Bull partnership has been one of the most successful in F1 history. Verstappen first joined the team back in 2026, following a mid-season promotion from the sister Toro Rosso team. Since then, he’s won four drivers’ titles and 71 races with Red Bull Racing. 

However, Verstappen has been a vocal critic of the new power unit regulations. Red Bull has also had its fair share of reliability and balance concerns this season, and the team’s management has changed significantly in the recent months. All of this has further fuelled speculation linking Verstappen to a potential switch to Mercedes or McLaren. But he’s put that speculation to rest on the eve of his home race at Zandvoort.

“I have always said it: The team [Red Bull Racing] is like a second family for me and I feel very at home. I came to the team hoping to be able to win races. What we went on to achieve together has been simply lovely and we have shared many incredible moments and won four World Championships. To continue this journey with the same team that I have been with my whole career is really special and something I have always wanted to do,” Verstappen stated.

“Getting to work with Laurent now for over a year has also been great, I see a clear vision he has for the team. Everyone in Milton Keynes believes in what we are building and I am looking forward to the next chapter, fighting for more victories and competing for championships as we continue to shape the future of this Team. To make this announcement during the last Grand Prix at Zandvoort is a great moment for me as well. Hopefully we can give the fans a special send-off for the final race.”

Red Bull Racing F1 team principal Laurent Mekies added, “Having Max continue with us and retaining the best driver on the grid is fantastic news for everyone at Red Bull, Oracle Red Bull Racing, as well as F1 and motorsport as a whole.”
 

Google में भर्ती करने वाली एक्सपर्ट ने बताया ऐसा सवाल, जो आपको बाकी उम्मीदवारों से बना देगा अलग

कई लोग नौकरी के इंटरव्यू की तैयारी करते समय अपने रिज्यूमे, अनुभव और संभावित सवालों पर पूरा ध्यान देते हैं। वहीं, इंटरव्यू के अंत में जब उम्मीदवार से पूछा जाता है कि “क्या आपके मन में कोई सवाल है?”, तो अधिकतर लोग इसे सिर्फ एक औपचारिकता मानते हैं। ऐसे में वे सैलरी, छुट्टियों, प्रमोशन या ऑफिस की सुविधाओं से जुड़े सामान्य सवाल पूछकर इंटरव्यू खत्म कर देते हैं। हालांकि, करियर विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरव्यू का यह आखिरी हिस्सा आपकी सोच, काम के प्रति नजरिया और प्रोफेशनल एटीट्यूड दिखाने का बेहतरीन मौका होता है।

सही सवाल न केवल इंटरव्यूअर पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, बल्कि ये भी दिखाता है कि आप केवल नौकरी पाने के लिए नहीं, बल्कि कंपनी की जरूरतों और अपनी भूमिका को समझने में भी रुचि रखते हैं। कई बार एक अच्छा सवाल आपकी छवि को अन्य उम्मीदवारों से अलग बना सकता है और चयन की संभावनाएं भी बढ़ा सकता है।

10 साल का भर्ती का अनुभव

फराह शारगी ने पिछले एक दशक में Google, Uber और The New York Times जैसी बड़ी कंपनियों में भर्ती की है। उनका कहना है कि इंटरव्यू के अंतिम मिनटों में उम्मीदवारों के सवाल ये बताते हैं कि वो सिर्फ नौकरी चाहते हैं या वास्तव में कंपनी की जरूरत को भी समझना चाहते हैं। उनके मुताबिक, इंटरव्यू के अंत तक रिक्रूटर उम्मीदवार की तकनीकी क्षमता का काफी हद तक आकलन कर चुका होता है। इसके बाद वह उम्मीदवार की सोच और काम करने के नजरिए को समझना चाहता है।

वह एक सवाल जो बना सकता है आपको सबसे अलग

फराह शारगी के अनुसार, सबसे प्रभावशाली सवाल यह है:

“इस समय सबसे बड़ी समस्या क्या है, जिसे हल करने के लिए आप इस पद पर किसी को नियुक्त करना चाहते हैं?” उनका कहना है कि कंपनियां सिर्फ पद भरने के लिए भर्ती नहीं करतीं। हर नई भर्ती के पीछे कोई न कोई समस्या होती है, जिसे कंपनी हल करना चाहती है। जो उम्मीदवार इस नजरिए से सवाल पूछता है, वह दिखाता है कि वो पहले से ही खुद को उस भूमिका में सोच रहा है।

क्यों पसंद आता है यह सवाल?

शारगी के मुताबिक, जब उम्मीदवार इस तरह का सवाल ईमानदारी से पूछता है, तो वह भीड़ से अलग नजर आता है। इससे रिक्रूटर को लगता है कि यह व्यक्ति सिर्फ नौकरी पाने के लिए नहीं, बल्कि कंपनी की समस्या सुलझाने के लिए भी तैयार है।

ये 3 सवाल भी छोड़ते हैं अच्छा प्रभाव

फराह शारगी ने इंटरव्यू के दौरान पूछे जाने वाले तीन और उपयोगी सवाल बताए हैं:

एक साल बाद आपको कैसे लगेगा कि इस पद के लिए सही व्यक्ति चुना गया?

आपकी टीम में ऐसा कौन-सा कर्मचारी है, जिसकी तरह आप एक और व्यक्ति चाहते हैं?

इस नौकरी का कौन-सा हिस्सा है, जिसे लोग अक्सर कम आंकते हैं?

इन सवालों से क्या फायदा होगा?

इन सवालों के जरिए उम्मीदवार यह समझ सकता है कि:

कंपनी सफलता को कैसे मापती है।

टीम में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले लोगों की क्या खासियत होती है।

इस भूमिका में सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं।

इंटरव्यू को सिर्फ परीक्षा नहीं, सीखने का मौका समझें

फराह शारगी का कहना है कि इंटरव्यू केवल खुद को साबित करने का मंच नहीं है। इसे कंपनी की जरूरतों और उस समस्या को समझने का अवसर भी मानना चाहिए, जिसे हल करने के लिए आपको नियुक्त किया जा सकता है। यही सोच उम्मीदवार को दूसरों से अलग और अधिक प्रभावशाली बनाती है।