IndiaMART Shares: 7% टूटकर शेयर एक साल के निचले स्तर पर, इन दो वजहों से धड़ाम, अब आगे ये है रुझान

IndiaMART Share Price: कमजोर मार्केट सेंटिमेंट में आज इंडियामार्ट इंटरमेश के शेयर धड़ाम हो गए। जून तिमाही के कारोबारी नतीजे उम्मीद के मुताबिक रही लेकिन लगातार तीसरी तिमाही में पेइंग सब्सक्राइबर्स में गिरावट और कलेक्शन ग्रोथ में सुस्ती से सेंटिमेंट प्रभावित हुआ और शेयर फिसल गए। शेयर 7% से अधिक टूटकर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि निचले स्तर पर खरीदारी के बावजूद शेयर संभल नहीं पाए और अब भी यह काफी कमजोर स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 4.63% की गिरावट के साथ ₹1830.35 पर है। इंट्रा-डे में यह 7.51% फिसलकर एक साल के निचले स्तर ₹1,775.00 पर आ गया था। पिछले साल 25 अगस्त 2025 को यह एक साल के हाई ₹2686.55 पर था।

IndiaMART के शेयरों को क्यों लगा झटका

जून 2026 तिमाही में ऑनलाइन बी2बी मार्केटप्लेस इंडियामार्ट का कंसालिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 12.2% बढ़कर ₹172.2 करोड़ और ऑपरेशनल रेवेन्यू 11.4% बढ़कर ₹414.4 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर बात करें तो इस दौरान कंपनी का ईबीआईटीडीए 9.4% बढ़कर ₹145.9 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन ईबीआईटीडीए मार्जिन 35.8% से 35.4% पर आ गया। सालाना आधार पर कंपनी का कस्टमर कलेक्शंस 8% बढ़ गया जोकि पांच तिमाहियों में सबसे सुस्त ग्रोथ। इससे पहले चार तिमाहियों में यह हर तिमाही 10%-17.5% की रफ्तार से बढ़ा था। जून तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी ने ₹163 करोड़ का कैश जेनेरेट किया।

निवेशकों के लिए एक मुख्य चिंता पेइंग सब्सक्राइबर्स की संख्या में लगातार गिरावट है। मार्च तिमाही में इसके 2.20 लाख सब्सक्राइबर्स थे, जो घटकर जून तिमाही के आखिरी तक 2.18 लाख रह गए। यह लगातार दूसरी तिमाही है जब इसमें गिरावट आई। हालांकि पेइंग सप्लायर्स में बेहतर कमाई के चलते ARPU (औसतन रेवेन्यू प्रति यूजर) सालाना आधार पर 7.8% बढ़कर ₹69,000 पर पहुंच गया। इसके अलावा बोर्ड ने रेगुलेटरी मंजूरी मिलने पर एक पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडरी इंडियामार्ट फाइनेंस बनाने को मंजूरी दी है जो बिजनेस यूजर्स को शॉर्ट-टर्म वर्किंग कैपिटल को लेकर मदद करेगी।

इंडियामार्ट पर ब्रोकरेजेज क्यों है बेयरेश?

नए पेइंग सब्सक्राइबर्स में गिरावट के चलते नोमुरा ने इंडियामार्ट को रिड्यूस रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹1,810 फिक्स किया है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि मीडियम से लॉन्ग टर्म में इन्हें आकर्षित करने के लिए प्रोडक्ट इवॉल्यूशन बहुत ज़रूरी है। नोमुरा का कहना है कि शेयरों में जोरदार तेजी के जरूरी है कि नए सब्सक्राइबर्स की संख्या में अच्छी-खासी बढ़ोतरी होनी चाहिए।

एक और ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इंडियामार्ट पर बेयरेश रुझान अपनाया है और इसे ₹1650 के टारगेट प्राइस के साथ अंडरपरफॉर्म रेटिंग दी है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि पेड सप्लायर बेस में गिरावट कंपनी के लिए बहुत बड़ा झटका है। जेफरीज का कहना है कि सब्सक्राइबर जोड़ने में लगातार कमजोरी से इसके नेटवर्क इफेक्ट पर असर पड़ सकता है जिसका फ़ायदा इस प्लेटफॉर्म को पहले मिलता रहा है।

18% टूटे Medplus के शेयर, निवेश के दो तगड़े ऐलान के बावजूद यह बात पड़ी भारी

Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

18% टूटे Medplus Health के शेयर, निवेश के दो तगड़े ऐलान के बावजूद कमजोर रिजल्ट पड़ा भारी

Medplus Health Share Price: देश की सबसे बड़ी रिटेल फार्मेसी ओमनी चैनल मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज के शेयरों को जून तिमाही के रिजल्ट से तगड़ा शॉक लगा है। इसके झटके से मेडप्लस के शेयर करीब 18% टूट गए और फिसलकर एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गए। शेयरों को निवेश के दो बड़े ऐलान से भी सपोर्ट नहीं मिल पाया। अभी की बात करें तो फिलहाल 14.95% की गिरावट के साथ मेडप्लस का शेयर ₹676.45 के भाव पर है। इंट्रा-डे में यह 17.80% टूटकर ₹653.80 तक आ गया था।

Medplus Health Services Q1 Results: खास बातें

चालू वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज के लिए किसी झटके से कम नहीं रही। जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 21.7% गिरकर ₹33.17 करोड़ पर आ गया। मुनाफे में यह गिरावट ऐसे समय में आई, जब कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू इस दौरान 21.84% बढ़कर ₹1879.60 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी का ईबीआईटीडीए इस दौरान 1.9% बढ़कर ₹130.7 करोड़ पर पहुंचा लेकिन ईबीआईटीडीए मार्जिन 8.5% से फिसलकर 7.1% पर आ गया। जून तिमाही में कंपनी ने 146 नए स्टोर खोले जिसमें 131 फ्रेंचाइजी स्टोर्स थीं।

कहां निवेश कर रही मेडप्लस?

एक्सचेंज फाइलिंनग में नतीजे के साथ-साथ कंपनी ने बताया कि इसकी मुख्य सब्सिडियरी ऑप्टिवल हेल्थ सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड तेलंगाना के हैदराबाद में एक फूड पार्क बनाने की योजना बना रही है। इसमें कोल्ड प्रेस ऑयल निकालने वाली यूनिट भी शामिल होगी। इसमें करीब ₹40 करोड़ की पूंजी लगेगी। इसके अलावा कंपनी की योजना हैदराबाद में एक कॉन्सिअर्ज हेल्थ एंड वेलनेस सर्विसेज फैसिलिटी शुरू करने की भी है। इसमें करीब ₹115 करोड़ का निवेश होगा जिसमें ₹90 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

मे़डप्लस हेल्थ सर्विसेज के शेयरों ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को कुछ ही महीने में बीमार कर दिया। 21 मई 2026 को बीएसई पर यह ₹1,020.35 के भाव पर था जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से दो ही महीने में यह 35.92% फिसलकर आज 22 जुलाई 2026 को ₹653.80 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार 22 जुलाई को 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने की नई टाइमलाइन का ऐलान किया है। इस ऐलान के बाद अब सन फार्मा (Sun Pharma), ल्यूपिन (Lupin), सिप्ला (Cipla) समेत देश की कई दवा कंपनियां निवेशकों के रडार पर आ गई हैं। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका में आयात होने वाली दवाईयों पर सभी जेनेरेकि दवाओं पर अब दो साल तक कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। ट्रंप के ऐलान के मुताबिक इसके बाद 1 अगस्त 2028 से इन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा और 1 अगस्त 2029 से इसे बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा।

Trump Tariffs: अमेरिका के लिए कितना अहम है जेनेरिक्स?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मुकाबिक जेनेरिक दवाओं का उत्पादन अमेरिका में करने के लिए टैरिफ पॉलिसी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां तय समय के भीतर अमेरिका में अपने प्लांट और इक्विपमेंट नहीं लगाएंगी, उन्हें टैरिफ झेलना पड़ेगा। इससे पहले ट्रंप ने जो टैरिफ लगाए थे, उसके दायरे में ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाईयां थीं, जिसमें अभी भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले वाली पॉलिसी में जेनेरिक्स दवाईयां शामिल नहीं थीं क्योंकि अमेरिका में डॉक्टर्स करीब 90% जेनेरिक्स दवाईयां ही लिखते हैं। ट्रंप सरकार ने ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट के सेक्शन 232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर फार्मा इंडस्ट्री की जांच भी शुरू की थी। इसके अलावा आम लोगों सीधे सस्ती दवाओं की बिक्री के लिए Trump RX नाम से एक प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया।

भारतीय फार्मा कंपनियों पर क्या असर?

जेनेरिक्स पर अमेरिकी टैरिफ का भारतीय कंपनियों पर बहुत असर पड़ सकता है। इसकी वजह ये है कि भारतीय दवा कंपनियों का अमेरिका में जितना सेल्स वॉल्यूम है, उसका करीब 90% तो जेनेरिक्स दवाईयों का है तो अमेरिका जितना जेनेरिक्स आयात करता है, उसमें 40% भारत से है। भारत से अमेरिका को करीब $1 हजार करोड़ का फार्मा एक्सपोर्ट है। इसके अलावा भारत के बाहर अमेरिकी दवा नियामक एफडीए से मंजूरी मिली हुई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में सबसे अधिक भारतीय कंपनियों की ही हैं, जिनकी संख्या लगभग 670 है।

अमेरिका की तुलना में भारत में क्यों बनती हैं अधिक दवाईयां

भारत में दवा बनाने की लागत अमेरिका की तुलना में 30-50% तक सस्ती पड़ती है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री के कई जानकारों का मानना है कि अभी यह देखना बाकी है कि इस नीति को वास्तव में कैसे लागू किया जाएगा और ट्रंप के कार्यकाल के बाद इस पर क्या होगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक लगातार कीमतों में गिरावट, तगड़े कॉम्पटीशन , अलग-अलग प्रकार की डोजेज और सख्त मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी के चलते अमेरिका में बड़े पैमाने पर जेनेरिक दवाओं का उत्पादन आसान नहीं है। एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि अमेरिका में बड़े वॉल्यूम में प्रोडक्शन कैपेसिटी डेवलप करने में कई दशक लग सकते हैं, क्योंकि कम लागत वाली जेनेरिक दवाइयां बनाने को लेकर अमेरिका की क्षमता काफी हद तक कम हो चुकी है।

अमेरिका में किन भारतीय कंपनियों की है मौजूदगी

कई भारतीय कंपनियों की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। अरबिंदो फार्मा की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग में अच्छी मौजूदगी है तो डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज, ल्यूपिन, सिप्ला और जाइडस लाइफ जैसी कंपनियों का भी अमेरिका में कारोबार फैला हुआ है। वहीं एल्केम लैब्स और टोरेंट फार्मा जैसी कंपनियां पूरी तरह से भारत में मौजूद मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर निर्भर हैं और अमेरिका से उनकी कमाई बहुत अधिक नहीं होती है। बायोकॉन जैसी कंपनियां बायोसिमिलर और जेनेरिक दवाओं के प्रोडक्शन के लिए भारत और मलेशिया की यूनिट्स पर निर्भर हैं, जबकि सेनोरेस फार्मा की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग मौजूदगी है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Share Market Crash: खास वजहों से IT-Pharma Sector में बिकवाली की आंधी, 500 प्वाइंट्स टूट गया Sensex

Share Market Crash: अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आंच में घरेलू बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स और निफ्टी फिसल गए। फार्मा सेक्टर में जेनेरिक्स दवाईयों पर अमेरिकी टैरिफ और एआई से जुड़े शेयरों में तेजी के चलते भारतीय आईटी स्टॉक्स पर दबाव में सेंसेक्स 500 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी 50 भी फिसलकर 24000 के एकदम करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का दबाव दिख रहा है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब आधे फीसदी तक की गिरावट है।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:34 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 564.77 प्वाइंट्स यानी 0.73% की गिरावट के साथ 76,905.34 और निफ्टी (Nifty) 158.00 प्वाइंट्स यानी 0.65% की फिसलन के साथ 24,029.70 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 581.61 प्वाइंट्स टूटकर 76,888.50 और निफ्टी 168.30 प्वाइंट्स गिरकर 24,019.40 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

US-Iran War

अमेरिका ने ईरान पर लगातार 11वीं रात हवाई हमले किए। इन हमलों में मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, एयरक्राफ्ट हैंगर और ड्रोन स्टोरेज साइट्स को निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम होने के फिलहाल कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। इसने मार्केट में सेंटिमेंट कमजोर किया है।

आईटी-फार्मा सेक्टर में तेज बिकवाली

मार्केट पर आज सबसे अधिक दबाव फार्मा सेक्टर ने बनाया है। ट्रंप ने अपनी पॉलिसी में जेनेरिक्स दवाईयों को भी शामिल किया तो इस सेक्टर की कंपनियों को झटका लगा और निफ्टी फार्मा 1% से अधिक फिसल गया। इसके अलावा एआई से जुड़े स्टॉक्स में तेजी के चलते भारतीय मार्केट में आईटी कंपनियों पर दबाव पड़ा और निफ्टी आईटी 1% से अधिक टूट गया। इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर में भी बिकवाली का तेज दबाव है और सरकारी और प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे-आधे फीसदी से अधिक की गिरावट है।

India VIX में उछाल

मार्केट की घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में गिरावट ने मार्केट पर दबाव बनाया। फिलहाल यह 3.25% की गिरावट के साथ 13.01 पर है। इसके अधिक होने का मतलब वोलैटिलिटी अधिक होने की आशंका है तो कम होने का मतलब वोलैटिलिटी कम होने की संभावना है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bajaj Finance पहुंचा आठ महीने के हाई पर, लगातार पांचवे दिन उछले शेयर, अब ये है अगला ट्रिगर

Bajaj Finance Share Price: बजाज ग्रुप की बजाज फाइनेंस के शेयर लगातार पांचवे कारोबारी दिन ऊपर चढ़ा है। इन पांच दिनों की तेजी के साथ आठ कारोबारी दिनों में यह 14 जुलाई को डेढ़ फीसदी से अधिक की गिरावट को छोड़ बाकी सात दिन यह मजबूत हुआ। आज की बात करें तो यह करीब 1% उछलकर आठ महीने के हाई पर पहुंच गया और अब रिकॉर्ड हाई से काफी करीब आ चुका है। अभी की बात करें तो बजाज फाइनेंस के शेयर बीएसई पर फिलहाल 0.29% की बढ़त के साथ ₹1067.00 पर है। इंट्रा-डे में यह 0.98% उछलकर ₹1,074.40 तक पहुंचा था।

जून में 11% से अधिक की बढ़त के बाद इस महीने अब तक यह 6% से अधिक उछल चुका है। इसके साथ ही पिछले साल सितंबर-अक्टूबर के बाद पहली बार लगातार दूसरे महीने यह मजबूती दिखा रहा है। हालांकि इस तेजी के साथ बजाज फाइनेंस का RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) 71 हो गया यानी कि यह ओवरबॉट कैटेगरी में पहुंच गया। आरएसआई के 70 के ऊपर होने का मतलब स्टॉक का ओवरबॉट होना है।

क्यों चढ़ रहा Bajaj Finance का शेयर और अब आगे क्या है ट्रिगर?

बजाज फाइनेंस ने इस महीने की शुरुआत में जून 2026 तिमाही का बिजनेस अपडेट पेश किया था जिससे शेयरों को सपोर्ट मिल रहा है। इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बजाज फाइनेंस का AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) 23.9% बढ़कर ₹5.46 लाख करोड़ पर पहुंच गया तो डिपॉजिट्स भी करीब 15% उछलकर ₹72,109 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी ने जून तिमाही में रिकॉर्ड 51 लाख नए ग्राहक जोड़े और अब इसकी कस्टमर फ्रेंचाइजी 12.44 करोड़ पर पहुंच गई। जून तिमाही के आखिरी में कंपनी का डिपॉजिट बुक ₹68,500 करोड़ था।

बजाज फाइनेंस के लिए अब अगला ट्रिगर 30 जुलाई को आने वाला है, जिस दिन पूरी तिमाही के कारोबारी नतीजे पेश करेगी। नतीजे के साथ-साथ इस वित्त वर्ष 2027 के लिए गाइडेंस पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। अपनी एसेट क्वालिटी पर ध्यान देने के लिए बजाज फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने ग्रोथ अनुमान को कम कर दिया था। कंपनी ने ग्रोथ के मामले में इस अनुमान को पहले के 25%-30% से घटाकर 22%-24% और नए कस्टमर जोड़ने के मामले में 1.5 करोड़-1.7 करोड़ कर दिया था।

एक साल में कैसी रही बजाज फाइनेंस की चाल

बजाज फाइनेंस के शेयरों ने निवेशकों को करारा झटका दिया। पिछले साल बीएसई पर 23 अक्टूबर 2025 को यह ₹1,102.45 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 5 ही महीने में यह 28.49% फिसलकर 23 मार्च 2026 को ₹788.40 पर आ गया था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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Alpine Texworld IPO Listing: लिस्ट होते ही लोअर सर्किट, फ्लैट एंट्री के बाद शेयर धड़ाम

Alpine Texworld IPO Listing: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के साथ-साथ मार्केट में अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का भी आईपाओ लॉन्च हुआ था। एक तरफ एसबीआई फंड्स के आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और इसे 41 गुना से अधिक बोली मिली थी तो दूसरी तरफ अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के आईपीओ को ओवरऑल 1.40 गुना बोली मिली थी। अब दोनों के शेयर आज लिस्ट हुए हैं। एसबीआई फंड्स के शेयर तो 6% से अधिक प्रीमियम पर लिस्ट हुए तो अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के शेयर एकदम फ्लैट।

अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के शेयर आईपीओ के तहत ₹105 के भाव पर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹105.00 और NSE पर ₹105.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला। आईपीओ निवेशकों को और झटका तब लगा, जब शेयर फिसल गए। टूटकर BSE पर यह ₹99.75 (Alpine Texworld Share Price) के लोअर सर्किट पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 5% घाटे में हैं।

Alpine Texworld IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का ₹126 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 14-16 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का सुस्त रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 1.40 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.09 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 1.09 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.54 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 1,20,24,000 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹32.08 करोड़ प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने के लिए एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में नई वीविंग यूनिट लगाने, ₹52.20 करोड़ कर्ज हल्का करने और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Alpine Texworld के बारे में

अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड कपड़ों की डाईंग और प्रोसेसिंग के बिजनेस में है। इसके पास दो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। इसकी सालाना इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 6 हजार टन के कॉटन और ब्लेंडेड यार्न की है। इसके पास 112 हाई-स्पीड लूम हैं जो डेनिम, सूटिंग शर्टिंग, और RFD (रेडी-फॉर-डाईंग) फैब्रिक बनाते हैं। कंपनी को फिलहाल फोकस ग्रीन एनर्जी पर है और रिन्यूएबल एनर्जी सेगमेंट पर भी ध्यान दे रही है। अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के वित्तीय सेहत की बात करें तो पिछले वित्त वर्ष 2026 में इसका शुद्ध 151.68% बढ़कर ₹21.72 करोड़ और टोटल इनकम 47.34% उछलकर ₹350.18 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी पर ₹177.60 करोड़ का कर्ज था तो रिजर्व और सरप्लस में ₹46.32 करोड़ पड़े थे।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Funds IPO Listing: 6% प्रीमियम पर शेयर लिस्ट, आईपीओ को तगड़ी बोली के बाद प्रीमियम लिस्टिंग

SBI Funds IPO Listing: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को भी निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 41 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹574 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹610.00 और NSE पर ₹613.30 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 6% से अधिक लिस्टिंग गेन (SBI Funds Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर BSE पर यह ₹622.80 (SBI Funds Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 8.50% मुनाफे में हैं। एंप्लॉयीज अधिक फायदे में हैं क्योंकि उन्हें हर शेयर ₹54 के डिस्काउंट पर मिला है।

SBI Funds IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

एसबीआई फंड्स का ₹9813 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 14-16 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 41.73 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 140.11 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 22.51 गुना खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.76 गुना, एंप्लॉयीज का हिस्सा 4.65 गुना और शेयरहोल्डर्स का हिस्सा 9.52 गुना भरा था।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ के तहत कोई नया शेयर नहीं जारी हुआ हैं बल्कि ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत ₹1 की फेस वैल्यू वाले 17,09,56,631 शेयरों की बिक्री हुई है। इसमें से 12,83,34,397 शेयर एसबीआई और 7,53,74,842 शेयर एमुंडी इंडिया होल्डिंग ने बेचे हैं। चूंकि यह इश्यू पीरी तरह से ऑफर फॉर सेल का था तो आईपीओ का पैसा कंपनी को नहीं मिला बल्कि शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स एसबीआई और एमुंडी इंडिया को मिला।

SBI Funds Management के बारे में

AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) के हिसाब से देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट एसबीआई म्यूचुअल फंड को मैनेज करती है। यह एसबीआई और एमुंडी का ज्वाइंट वेंचर है। यह इक्विटी फंड्स, डेट फंड्स, हाइब्रिड फंड्स, ईटीएफ और PMS (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज) जैसे निवेश प्रोडक्ट्स ऑफर करती है। 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक यह र्16.32 लाख करोड़ के एसेट्स मैनेज कर रही है जोकि म्यूचुअल फंड्स को कुल एयूएम का करीब 15.5% है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के हिसाब से इंडिविजुअल और इंस्टीट्यूशनल मिलाकर इसके 1.60 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। इसके पोर्टफोलियो में 126 म्यूचुअल फंड स्कीम्स हैं।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 21% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹3,067.38 करोड़ और टोटल इनकम भी इस दौरान 20% के सीएजीआर से उछलकर ₹4,976.11 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में ₹326.73 करोड़ पड़े थे।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: Nifty की एक्सपायरी, तीन लिस्टिंग, इंट्रा-डे में Indigo-Bajaj Healthcare समेत इन शेयरों पर फोकस

Stocks to Watch: अधिकतर एशियाई बाजारों से कमजोर रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 117 प्वाइंट्स यानी 0.48% की गिरावट के साथ 24,166 पर है। चूंकि आज निफ्टी की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 20 जुलाई को सेंसेक्स (Sensex) 442.93 प्वाइंट्स यानी 0.57% की कमजोरी के साथ 77,708.52 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 95.80 प्वाइंट्स यानी 0.39% की गिरावट के साथ 24,238.50 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

आज इन कंपनियों के आएंगे कारोबारी नतीजे

बजाज ऑटो, बंधन बैंक, जेएसडब्ल्यू इंफ्रा, महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज, आवास फाइनेंशियर्स, आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस, एंथम बायोसाइंसेज, अदाणी टोटल गैस, केनरा रोबेको एसेट मैनेजमेंट कंपनी, क्रिसिल, इंडियन होटल्स कंपनी, मास्टेक, मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज, ट्राइडेंट, टीवीएस मोटर कंपनी और वेल्सपन स्पेशलिटी सॉल्यूशंस आज कारोबारी नतीजे पेश करेगी।

इन कंपनियों के तिमाही नतीजे पेश

Bajaj Healthcare Q1 (YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर बजाज हेल्थकेयर का प्रॉफिट 14.1% बढ़कर ₹13.9 करोड़ और रेवेन्यू 11.3% उछलकर ₹165.6 करोड़ पर पहुंच गया।

SML Mahindra Q1 (YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर एसएमएल महिंद्रा का प्रॉफिट 5% गिरकर ₹63.6 करोड़ पर आ गया लेकिन रेवेन्यू 13.2% उछलकर ₹957.5 करोड़ पर पहुंच गया।

Sobha Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर सोभा का प्रॉफिट करीब 4 गुना बढ़कर ₹13.6 करोड़ से ₹50.8 करोड़ और रेवेन्यू 50% उछलकर ₹1,278.2 करोड़ पर पहुंच गया।

Canara HSBC Life Insurance Company Q1 (YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर केनरा एचएसबीसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का प्रॉफिट 20.2% बढ़कर ₹28.1 करोड़, नेट प्रीमियम इनकम 23.8% उछलकर ₹2,407.5 करोड़ और नेट कमीशन 21.8% चढ़कर ₹117.2 करोड़ पर पहुंच गया।

Rallis India Q1 (YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर रैलिस इंडिया का प्रॉफिट 31.6% बढ़कर ₹125 करोड़ और रेवेन्यू 6.8% उछलकर ₹1,022 करोड़ पर पहुंच गया।

Bluestone Jewellery and Lifestyle Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर ब्लूस्टोन ज्वैलरी ₹34.5 करोड़ के घाटे से ₹6.96 करोड़ के कंसालिडेटेड प्रॉफिट में आ गई तो इस दौरान रेवेन्यू भी 49.6% उछलकर ₹736.8 करोड़ पर पहुंच गया।

Stocks to Watch: इन स्टॉक्स पर भी रहेगी नजर

Wanbury

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने 13 जुलाई से 17 जुलाई, 2026 तक वानबरी की आंध्र प्रदेश में स्थित फैसिलिटी में cGMP (करंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) की नियमित जांच की और इस जांच के बाद छह ऑब्ज़र्वेशन के साथ फॉर्म 483 जारी किया।

Redington

रेडिंगटन ने रियल-टाइम ऑडियंस एंगेजमेंट सॉल्यूशंस में ग्लोबल लीडर रिजल्टिक्स के साथ पांच साल के लिए एक स्ट्रैटेजिक डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनरशिप का ऐलान किया है।

InterGlobe Aviation (Indigo)

इंडिगो ने एयरबस ए320 नियो फैमिली के 510 जहाजों के लिए 1 हजार से अधिक लीप-1ए इंजन्स के लिए सीएफएम इंटरनेशनल के साथ एमओयू किया है। लीप इंजन्स के लिए यह अब तक सबसे बड़ा सिंगल ऑर्डर होगा और सीएफएम इंटरनेशनल के लिए एक रिकॉर्ड होगा। इसमें इंजन MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) को लेकर भी लॉन्ग-टर्म मैटेरियल सर्विसेज एग्रीमेंट के तहत बात बनी है।

बल्क डील्स

Sparc Electrex

दिग्गज निवेशक आशीष चुघ ने स्पार्क इलेक्ट्रेक्स में 0.33% हिस्सेदारी वाले 66,001 इक्विटी शेयर ₹3.04 लाख में प्रति शेयर ₹4.61 के भाव पर बेचे हैं।

Accent Microcell

प्रमोटर घनश्याम अर्जनभाई पटेल ने एक्सेंट माइक्रोसेल के 3.9 लाख शेयर (1.62% हिस्सेदारी) ₹20.3 करोड़ में प्रति शेयर ₹521.01 के भाव पर बेचे हैं।

Gandhar Oil Refinery India

नियोमाइल ग्रोथ फंड-सीरीज I ने गांधार ऑयल रिफाइनरी इंडिया के 8.64 लाख शेयर (0.88% हिस्सेदारी) ₹19.4 करोड़ में प्रति शेयर ₹224.8 के भाव पर खरीदे हैं।

Horizon Reclaim

फिनएवेन्यू ग्रोथ फंड ने होरिजोन रिक्लेम (इंडिया) के 1.93 लाख शेयर (0.99% हिस्सेदारी) ₹2.99 करोड़ में प्रति शेयर ₹155 के भाव पर खरीदे हैं।

लिस्टिंग

आज एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट और अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड की बीएसई और एनएसई पर एंट्री होगी तो मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज के शेयर बीएसई एसएमई पर लिस्ट होंगे।

एक्स-डेट

आज एंजेल वन, चोलमंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी, इंडो बोराक्स एंड केमिकल्स, जारो इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एंड रिसर्च, केसॉल्व्स इंडिया, लक्ष्मी ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज, पंजाब एंड सिंध बैंक, और रेनबो चिल्ड्रन्स मेडिकेयर के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे तो पोंडी ऑक्साइड्स एंड केमिकल्स और होरीजोन रीक्लेम के स्प्लिट की भी आज एक्स-डेट है।

F&O Ban

आज कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया में एफएंडओ की नई पोजिशन नहीं ले पाएंगे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Silver Gold Price:चढ़ गया सोने-चांदी का भाव, क्या अब भी कर रहे है सही मौके की तलाश, जानें क्या है एक्सपर्ट की राय की राय

Silver Gold Price: हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार, 21 जुलाई को सुबह के कारोबार में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। दरअसल, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता से सोने-चांदी की कीमतों को सपोर्ट मिला। हालांकि भले ही US में ज़्यादा ब्याज दरों की उम्मीदों ने बढ़त को सीमित रखा। COMEX सोना $4,041 प्रति औंस के इंट्राडे हाई को छूने के बाद 0.34% बढ़कर $4,029.60 प्रति औंस हो गया, जबकि COMEX चांदी 0.13% बढ़कर $57.145 प्रति औंस हो गई।

कीमती धातुओं का बाजार 2 अलग-अलग वजहों को बैलेंस कर रहा है। एक तरफ, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव से सोने जैसे सेफ़-हेवन एसेट्स की मांग को सपोर्ट मिल रहा है। दूसरी तरफ, कच्चे तेल की ज़्यादा कीमतें महंगाई की चिंताओं को बढ़ा रही हैं, जिससे यह उम्मीद मज़बूत हो रही है कि US फ़ेडरल रिज़र्व इस साल के आखिर में फिर से ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

सोने के लिए तेल क्यों ज़रूरी है

US और ईरान के बीच बीच-बचाव की कोशिशों की खबरों से कुछ समय के लिए सीज़फ़ायर की उम्मीद बढ़ने के बाद मंगलवार (21 जुलाई) को तेल की कीमतों में थोड़ी कमी आई। ब्रेंट क्रूड 0.4% गिरकर $88.87 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US WTI क्रूड $82.47 के करीब ट्रेड कर रहा था।

हालांकि, यमन के ईरान-समर्थित हूतियों द्वारा सऊदी अरब पर नेवल ब्लॉकेड की धमकी देने के बाद जियोपॉलिटिकल रिस्क अभी भी बढ़े हुए हैं, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में संभावित रुकावटों की चिंता बढ़ गई है। US और ईरान के बीच नए मिलिट्री हमलों ने भी बाज़ारों को किनारे पर रखा है।

कच्चे तेल की ज़्यादा कीमतों से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। अगर महंगाई ज़्यादा बनी रहती है, तो फ़ेडरल रिज़र्व ब्याज़ दरों को ज़्यादा समय तक बनाए रख सकता है या फिर से दरें बढ़ा सकता है, यह एक ऐसी स्थिति है जिसका असर आमतौर पर सोने जैसे बिना ब्याज़ वाले एसेट्स पर पड़ता है।

फेड की उम्मीदों ने बुलियन की बढ़त को रोका

कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की AVP, कायनात चैनवाला के अनुसार, स्पॉट गोल्ड $4,020 प्रति औंस के करीब है, जबकि सिल्वर $57 प्रति औंस से ऊपर रिकवर हो गया है, लेकिन बढ़त सीमित है क्योंकि मार्केट ने साल के आखिर तक कम से कम एक और फेडरल रिजर्व रेट हाइक को काफी हद तक तय कर लिया है।

उन्होंने कहा कि US पॉलिसीमेकर्स के सख्त कमेंट्स और तेल की कीमतों में हालिया तेजी ने सितंबर में रेट हाइक की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है, जिससे जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स से बीच-बीच में मिल रहे सपोर्ट के बावजूद बुलियन की अपील कम हो गई है।

आखिर कहां तक जाएगी कीमतें

LKP सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी के VP रिसर्च एनालिस्ट, जतीन त्रिवेदी ने कहा कि US में नरम महंगाई के आंकड़ों से गोल्ड में रिकवरी हुई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, मजबूत US डॉलर और फेड रेट में एक और बढ़ोतरी की उम्मीदों को लेकर चिंताएं बढ़त को रोक रही हैं। घरेलू बाज़ार में, उन्हें MCX गोल्ड के लिए तुरंत सपोर्ट के तौर पर ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम दिख रहा है, जबकि आने वाले सेशन में ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम एक अहम रेजिस्टेंस लेवल हो सकता है।

इस बीच, चांदी ने हाल के निचले स्तरों से उबरने के बाद ज़्यादा मज़बूती दिखाई है, हालांकि दोनों कीमती धातुएं ग्लोबल तेल बाज़ारों में हो रहे बदलावों, पश्चिम एशिया संघर्ष और US मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर उम्मीदों के प्रति सेंसिटिव बनी हुई हैं।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Sensex में 443 अंकों की गिरावट, Nifty लाल बंद, फिर भी इस कारण ₹1.83 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

Stock Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आंच में कच्चा तेल उबल पड़ा। इसकी उबाल में आज घरेलू बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम हो गए। एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) समेत दो और दिग्गज प्राइवेट बैंकों की गिरावट पर सेंसेक्स 700 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी 50 भी फिसलकर 24150 के नीचे आ गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर रौनक दिखी और मिडकैप स्पेस में अधिक। निफ्टी मिडकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक बढ़त आई तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी तेजी आई।

सेक्टरवाइज आज प्राइवेट बैंकों ने मार्केट पर तगड़ा दबाव बनाया। सेंसेक्स के टॉप 4 लूजर में मारुति को छोड़ बाकी तीन प्राइवेट सेक्टर के बैंक हैं तो इसका निफ्टी इंडेक्स 2% से अधिक कमजोर हुआ है। हालांकि मार्केट को इस गिरावट से उबारने के लिए सरकारी बैंकों और फार्मा सेक्टर ने काफी कोशिश की। निफ्टी पीएसयू बैंक आज ढाई फीसदी से अधिक तो निफ्टी फार्मा करीब डेढ़ फीसदी मजबूत हुआ है। इस मिले-जुले माहौल में ओवरऑल आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक की तेजी आई है।

इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो हफ्ते के पहले कारोबारी दिन आज सेंसेक्स (Sensex) 442.93 प्वाइंट्स यानी 0.57% की कमजोरी के साथ 77,708.52 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 95.80 प्वाइंट्स यानी 0.39% की गिरावट के साथ 24,238.50 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 783.16 प्वाइंट्स गिरकर 77,368.29 और निफ्टी 198.45 प्वाइंट्स फिसलकर 24,135.8 तक आ गया था।

₹1.83 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 17 जुलाई 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,80,82,764.50 करोड़ था। आज यानी 20 जुलाई 2026 को यह बढ़कर ₹4,82,66,717.85 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹1,83,953.35 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 19 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें से 19 आज ग्रीन जोन में बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज ट्रेंट, पावरग्रिड और एनटीपीसी में रही। वहीं दूसरी तरफ सबसे अधिक गिरावट आज एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और मारुति में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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124 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4514 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2226 शेयर आज मजबूत हुए तो 2039 में गिरावट रही जबकि 249 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 124 शेयर एक साल के हाई और 107 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 13 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 15 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

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