शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है। इस्तीफे के बाद BBC ने लिखा कि मोदी सरकार को छात्रों के आगे झुकना पड़ा है। वहीं गार्डियन ने लिखा कि मोदी सरकार के 12 साल में पहली बार जनता के दबाव में किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को न्यूयॉर्क टाइम्स, CNN, अल जजीरा और डॉन समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी टॉप स्टोरीज में जगह दी है। BBC: सरकार ने छात्रों के गुस्से का सही अंदाजा नहीं लगाया 2014 में सत्ता में आने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी सरकार आम तौर पर विरोध प्रदर्शनों के प्रति सख्त रुख अपनाती रही है और शायद ही कभी किसी बड़े आंदोलन के आगे झुकी हो। इससे पहले मोदी सरकार ने सिर्फ एक बड़े मामले में अपना फैसला वापस लिया था, जब करीब एक साल तक चले किसान आंदोलन के बाद तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना पड़ा था। इस बार सरकार को अंदाजा नहीं था कि छात्र आंदोलन इतना बड़ा और लंबा चलेगा। शुरुआत में कई हफ्तों तक आंदोलन को नजरअंदाज किया गया, लेकिन इस सप्ताह संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की सख्ती के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई और सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया। धर्मेंद्र प्रधान जैसे वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री वास्तव में इस्तीफा देंगे या नहीं, इसे लेकर आखिरी समय तक कुछ पता नहीं चल पा रहा था। उनके इस्तीफे के बाद आंदोलन में शामिल छात्रों, खासकर पहली बार किसी बड़े प्रदर्शन का हिस्सा बने युवाओं को अपनी जीत का अहसास हो रहा है। द गार्डियन: मोदी के सबसे करीबी मंत्रियों में से एक का इस्तीफा भाजपा के 12 साल के शासन में यह पहली बार है, जब प्रधानमंत्री मोदी के सबसे करीबी और भरोसेमंद मंत्रियों में से एक को सार्वजनिक दबाव के कारण इस्तीफा देना पड़ा है। इनका नेतृत्व नए बने युवा राजनीतिक संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया। इस सप्ताह यह आंदोलन देशभर में युवाओं के बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गया। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही दिल्ली में जुटे हजारों सीजेपी समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाया और इसे सरकार से जवाबदेही की अपनी मांग की बड़ी जीत बताया। NYT: प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकियों की बी-टीम’ कहा था, अब इस्तीफा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। भारत में चल रहा छात्र आंदोलन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया था। इस आंदोलन की अगुआई खुद को ‘कॉकरोच’ कहने वाले छात्र समूह कर रहे थे। यह नाम भारत के चीफ जस्टिस की कथित अपमानजनक टिप्पणी से प्रेरित था। यह संगठन शुरुआत से ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा मांग रहा था। इस महीने प्रदर्शनकारियों पर हुए बल प्रयोग ने इस आंदोलन को भारत के कई शहरों तक फैला दिया। धर्मेंद्र प्रधान पहले इन प्रदर्शनों को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर विपक्षी दलों पर छात्रों का इस्तेमाल कर अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया था। जून में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकवादियों की बी-टीम’ तक कह दिया था। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन को और बल मिल सकता है और छात्र अपनी दूसरी मांगों को लेकर भी सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं। अल जजीरा: भारत में छात्र आंदोलन की बड़ी जीत हुई छात्रों के आंदोलन के दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। हाल के वर्षों में यह मोदी सरकार के खिलाफ सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक रहा। इस आंदोलन के जरिए युवाओं ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर अपना गुस्सा जाहिर किया। CNN- एक मीम से शुरू हुए आंदोलन ने शिक्षा मंत्री की कुर्सी छीनी भारत में लगातार बढ़ते छात्र आंदोलन के दबाव में धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। पिछले कई दिनों से हजारों छात्र उनके इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। जो आंदोलन शुरुआत में एक मीम के रूप में शुरू हुआ था, वह धीरे-धीरे देशभर में फैल गया। इसने छात्रों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को जवाबदेही, बेहतर अवसर और व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर एकजुट कर दिया। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आमतौर पर आंदोलनों के दबाव में फैसले नहीं बदलते। वहीं, विपक्ष और सरकार के आलोचक लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती से कार्रवाई करती है। यह आंदोलन देश में बढ़ती युवा बेरोजगारी के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठा रहा है। बेंगलुरु स्थित अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है। देश में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 36 करोड़ से अधिक युवा हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 25 वर्ष या उससे कम उम्र के करीब 40% ग्रेजुएट बेरोजगार हैं। वहीं, 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 20% युवा नौकरी से वंचित हैं। रिपोर्ट में पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार न मिल पाने को देश की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। द डॉन: ‘कॉकरोच’ की जीत, छात्र आंदोलन के दबाव में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। परीक्षा पेपर लीक मामलों की जिम्मेदारी तय करने की मांग को लेकर देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच इसे प्रदर्शनकारियों की बड़ी जीत माना जा रहा है। हाल के वर्षों में यह आंदोलन भारत के सबसे बड़े जनआंदोलनों में शामिल हो गया था। विपक्षी दलों के समर्थन और संसद के भीतर विरोध के कारण यह सरकार के सामने एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। इसी स्थान पर सोमवार को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया था। प्रदर्शनकारियों ने जय हिंद के नारे लगाए। मौके पर लाउडस्पीकर पर राष्ट्रीय गान बजाया गया और एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर जश्न मनाया गया। ———————————- प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा:दीपके बोले- वे कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते; लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
नौकरी जाने का दर्द तब और बढ़ जाता है जब कर्मचारी को लगे कि उसे अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिला। ऐसा ही दावा एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने किया है, जिसने एक भारतीय IT कंपनी में कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी शुरू करने के सिर्फ छह महीने बाद अचानक बाहर किए जाने की बात कही है।इंजीनियर के मुताबिक कंपनी ने खराब प्रदर्शन को कारण बताया, लेकिन न तो कोई ठोस सबूत दिखाया गया और न ही पहले कोई चेतावनी या फीडबैक दिया गया। अब यह मामला Reddit पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां कई लोगों ने वर्कप्लेस में परफॉर्मेंस रिव्यू सिस्टम को लेकर सवाल उठाए हैं।
इंजीनियर ने मांगा जवाब
Reddit पोस्ट में इंजीनियर ने बताया कि उसे अचानक जानकारी दी गई कि उसका कॉन्ट्रैक्ट परफॉर्मेंस से जुड़ी चिंताओं के कारण खत्म किया जा रहा है। हालांकि, वह यह समझ नहीं पाया कि कंपनी ने यह फैसला किस आधार पर लिया। उसने सवाल उठाया कि रोजाना उसके साथ काम करने वाली क्लाइंट टीम से कोई फीडबैक क्यों नहीं लिया गया। इंजीनियर ने बताया कि सात लोगों की टीम में उसने पिछले 90 रिलीज किए गए स्टोरी पॉइंट्स में से 40 पर काम किया था।
बग्स और देरी के आरोपों पर भी जताई आपत्ति
इंजीनियर ने अपने ऊपर लगाए गए ज्यादा बग्स के आरोपों पर भी सफाई दी। उसका कहना था कि कई प्रोडक्शन इश्यू बाद में उसके पास इसलिए भेजे गए क्योंकि वे लाइव सिस्टम से जुड़े थे और उन्हें तुरंत ठीक करना जरूरी था। उसने यह भी बताया कि कुछ मिनट देर से होने वाली डेली स्टैंडअप मीटिंग को भी बाद में परफॉर्मेंस इश्यू के तौर पर देखा गया, जबकि टीम और मैनेजर को उसकी मेडिकल अपॉइंटमेंट की जानकारी पहले से थी।
AI ट्रेनिंग और ऑनलाइन स्टेटस मॉनिटरिंग पर भी सवाल
इंजीनियर ने कंपनी की कुछ नीतियों पर भी नाराजगी जताई। उसका कहना था कि अनिवार्य AI ट्रेनिंग सेशन उसके वास्तविक काम से ज्यादा जुड़े हुए नहीं थे। इसके अलावा, रिमोट कर्मचारियों से पूरे दिन Slack और Microsoft Teams पर एक्टिव स्टेटस बनाए रखने की उम्मीद को लेकर भी उसने सवाल उठाए। अपना अनुभव बताते हुए उसने लिखा कि सबसे ज्यादा निराशा इस बात से हुई कि उसे कोई चेतावनी, फीडबैक, पारदर्शिता या सुधार का मौका नहीं मिला।

Reddit यूजर्स ने बताया अपना अनुभव
पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इंजीनियर का समर्थन किया। कुछ लोगों ने कहा कि कंपनियों को नौकरी खत्म करने से पहले स्पष्ट फीडबैक और सुधार का अवसर देना चाहिए। एक यूजर ने लिखा कि ऐसी वर्क कल्चर में बदलाव की जरूरत है, जबकि कुछ अन्य लोगों ने कहा कि रिमोट कर्मचारियों के साथ कई जगह इसी तरह का व्यवहार देखने को मिलता है।
क्या परफॉर्मेंस रिव्यू सिस्टम में बदलाव की जरूरत है?
हालांकि कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि पूरी कहानी का सिर्फ एक पक्ष सामने आया है, लेकिन ज्यादातर लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि कर्मचारियों को किसी भी बड़े फैसले से पहले स्पष्ट संवाद, सही फीडबैक और अपनी स्थिति सुधारने का मौका मिलना चाहिए।
Video: बेंगलुरु में ₹60 हजार किराया देकर मिला ऐसा व्यू, महिला ने पूछा, ‘क्या इतनी कीमत सही है’
बेंगलुरु में बढ़ते किराए अक्सर लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। खासकर आईटी हब कहे जाने वाले इस शहर में लोग यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि महंगे किराए के बदले उन्हें वास्तव में क्या मिल रहा है। अब एक महिला ने अपने किराए के घर से दिखने वाले शानदार नजारे का वीडियो साझा किया है, जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। महिला ने अपने कमरे से दिखने वाले व्यू को दिखाते हुए लोगों से पूछा कि क्या हर महीने ₹60,000 किराया देना इस लोकेशन और नजारे के लिए सही फैसला है?
वीडियो सामने आने के बाद कुछ लोगों ने इसे महंगे किराए का उदाहरण बताया, तो कुछ ने खूबसूरत माहौल और शांति को इसकी बड़ी खासियत माना। इस वीडियो ने एक बार फिर बेंगलुरु के रेंट कल्चर और घर की कीमत तय करने वाले फैक्टर्स पर चर्चा शुरू कर दी है।
घर नहीं, व्यू ने खींचा लोगों का ध्यान
आमतौर पर लोग अपने घर की सजावट या सुविधाएं दिखाते हैं, लेकिन बेंगलुरु की करिश्मा नाम की महिला ने अपने कमरे से दिखने वाले नजारे को सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या उनके घर से मिलने वाला यह शानदार व्यू हर महीने दिए जा रहे ₹60,000 किराए को सही ठहराता है?
महिला ने लोगों से मांगी राय
करिश्मा ने वीडियो में बताया कि उन्होंने पहले भी अपने घर के किराए के बारे में जानकारी दी थी। इस बार उन्होंने अपने कमरे से बाहर का नजारा दिखाते हुए दर्शकों से पूछा कि क्या यह जगह ₹60 हजार महीने के किराए के लायक है या फिर वह ज्यादा पैसे चुका रही हैं।
उन्होंने वीडियो के कैप्शन में भी लिखा, “बताइए आपको यह व्यू कैसा लगा।”
खुला आसमान और शांत नजारा बना चर्चा का विषय
वीडियो में कमरे से आसपास का बड़ा और खुला इलाका दिखाई देता है। हरियाली, खुली जगह और शांत माहौल देखकर कई लोगों को यह व्यू पसंद आया। करिश्मा ने खुद कोई फैसला नहीं सुनाया, बल्कि यह जिम्मेदारी सोशल मीडिया यूजर्स पर छोड़ दी कि वे तय करें कि यह नजारा किराए की कीमत के हिसाब से सही है या नहीं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी किराए को लेकर बहस
वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की अलग-अलग राय सामने आई। कुछ यूजर्स का कहना था कि ₹60,000 हर महीने सिर्फ किराए के लिए बहुत ज्यादा हैं, चाहे व्यू कितना भी अच्छा क्यों न हो। वहीं कुछ लोगों ने घर के आसपास के शांत माहौल और खूबसूरत नजारे की तारीफ की। एक यूजर ने लिखा कि यह व्यू शानदार है, जबकि कई अन्य लोगों ने भी इसे पसंद किया।
₹60 हजार का किराया या खूबसूरत नजारे की कीमत?
करिश्मा का वीडियो एक बार फिर दिखाता है कि बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में किराए की कीमत सिर्फ घर के आकार से नहीं, बल्कि लोकेशन, सुविधाओं और मिलने वाले अनुभव से भी तय होती है। अब फैसला लोगों के हाथ में है कि यह व्यू ₹60 हजार महीने के किराए के लायक है या नहीं।
700 बार रिजेक्ट हुआ, फिर भी नहीं मानी हार… आज 22 LPA की नौकरी कर रहा है ये युवक
Priyank Kharge news: कर्नाटक के गृह, आईटी और बीटी मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा है कि राज्य सरकार विजिलेंटिज्म के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और कानूनी प्रावधान हर किसी पर समान रूप से लागू होते हैं। न्यूज 18 के राइजिंग भारत समिट के दौरान मनीकंट्रोल के मैनेजिंग एडिटर नलिन मेहता के साथ आयोजित ‘फायरसाइड चैट – हाउ कर्नाटक इज बिल्डिंग द इनोवेशन इकोनॉमी ऑफ भारत? में बोलते हुए खड़गे ने कहा कि राज्य में किसी भी तरह के विजिलेंटिज्म की इजाजत नहीं है। उन्होंने आगे जोड़ा कि कोई भी कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। कानून सबके लिए एक बराबर है।
पुलिसिंग और प्रशासन में टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल
कर्नाटक में गवर्नेंस और कानून-व्यवस्था के क्रियान्वयन पर बात करते हुए खड़गे ने बताया कि राज्य ने पुलिसिंग और सार्वजनिक प्रशासन में तकनीक को तेजी से इंटिग्रेट किया है। ट्रैफिक मैनेजमेंट, साइबर सिक्योरिटी और पुलिसिंग के क्षेत्रों में डिजिटल टूल्स का काफी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रियांक खड़गे ने कहा कि हम ट्रैफिक, साइबर सुरक्षा और पुलिसिंग आदि में तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। गवर्नेंस में तकनीक के उपयोग के हमारे प्रयासों की केंद्र सरकार ने भी सराहना की है।
पुलिस की उपस्थिति और निगरानी में सुधार के लिए सरकार ने एक नया एप्लिकेशन पेश किया है। खड़गे ने कहा कि अब पुलिस की मौजूदगी पर नजर रखने के लिए ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कड़ा एक्शन: ₹2700 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना
राज्य में सड़क सुरक्षा और प्रवर्तन उपायों को उजागर करते हुए खड़गे ने ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के खिलाफ की गई बड़े पैमाने की कार्रवाई के आंकड़े साझा किए। पूरे राज्य में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के 7.7 करोड़ से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों से राज्य भर में ₹2700 करोड़ से अधिक का जुर्माना लिया गया है।
क्विक कॉमर्स और गिग वर्कर्स पर क्या बोले मंत्री?
तेजी से बढ़ती ऐप-बेस्ड डिलीवरी सर्विस पर बात करते हुए खड़गे ने माना कि क्विक कॉमर्स के आने से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन बढ़ा है लेकिन उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस कार्रवाई में सिर्फ डिलीवरी कर्मचारियों को गलत तरीके से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। खड़गे ने कहा कि 10 मिनट की डिलीवरी के इस दौर में कई तरह के उल्लंघन हो रहे हैं। हम अब उन्हें चार घंटे के लेक्चर दे रहे हैं। ट्रैफिक अपराधों को एक गंभीर मुद्दा बताते हुए उन्होंने कहा कि लेकिन हम सिर्फ गिग वर्कर्स को दोष नहीं दे सकते।
बेंगलुरु के ट्रैफिक को सुचारू बनाने के लिए ‘अर्बन मोबिलिटी मिशन’
प्रियांक खड़गे ने बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम को कम करने के प्रयासों पर भी बात की। उन्होंने बेंगलुरु को भारत का इनोवेशन हब होने के साथ-साथ इसकी ट्रैफिक कैपिटल के रूप में भी परिभाषित किया। उन्होंने बताया कि भीड़भाड़ की समस्या से निपटने और परिवहन योजना में सुधार के लिए राज्य सरकार ने एक अर्बन मोबिलिटी मिशन की स्थापना की है।
खड़गे ने कहा कि, ‘हम अधिक से अधिक लोगों को मास ट्रांजिट सिस्टम का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। हम ई-कॉमर्स कंपनियों, फ्लीट मैनेजर्स, ट्रैफिक पुलिस, जीबीए (GBA) और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर एक मिशन मोड कमेटी बना रहे हैं।’
शहर के परिवहन परिदृश्य पर विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ महीनों में ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। गवर्नेंस, पुलिसिंग और शहरी बुनियादी ढांचे पर हुई इस व्यापक चर्चा के दौरान प्रियांक खड़गे ने जोर देकर दोहराया कि कर्नाटक की सरकार इस सिद्धांत पर चल रही है कि कानून सबके लिए समान है।
News18 Rising Bharat Summit: बेंगलुरु में आयोजित न्यूज 18 राइजिंग भारत समिट में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य के लिए ज्यादा आर्थिक मदद देने की मांग की है। उनका कहना है कि कर्नाटक देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है, इसलिए उसे केंद्र से भी बेहतर आर्थिक सहयोग मिलना चाहिए। ‘राइजिंग भारत’ समिट में डी.के. शिवकुमार ने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हुई थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भर के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) बेंगलुरु पर नजर बनाए हुए हैं।
जब पीएम मोदी ने सीएम शिवकुमार से कही ये बात
सीएम शिवकुमार ने कहा, “जब भी मेरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होती है, मैं उनसे कहता हूं कि हम देश की तरक्की में पूरा सहयोग दे रहे हैं, इसलिए केंद्र को भी हमारी मदद करनी चाहिए। हमारे हिस्से के पैसे को दूसरे राज्यों में ज्यादा न बांटा जाए।” उन्होंने कहा कि कर्नाटक समेत दक्षिण भारत के कई राज्यों की लंबे समय से मांग रही है कि उन्हें केंद्रीय संसाधनों में उचित हिस्सा मिले।
डी.के. शिवकुमार ने आगे कहा कि यह केंद्र सरकार की नीति से जुड़ा मामला है और वह इस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हाल ही में हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। शिवकुमार के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने उनसे कहा, “डी.के., सावधान रहिए। दुनिया भर के सभी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) बेंगलुरु पर नजर रखे हुए हैं।”
बेंगलुरु के आर्थिक विकास पर फोकस
बेंगलुरु की आर्थिक अहमियत पर बात करते हुए डी.के. शिवकुमार ने कहा कि यह शहर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) से लेकर एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों तक बेंगलुरु का बड़ा योगदान है और इसी वजह से दुनिया भर के निवेशक यहां निवेश करना चाहते हैं। उन्होंने माना कि बेंगलुरु शुरू से योजनाबद्ध तरीके से नहीं बसाया गया था, लेकिन समय-समय पर अलग-अलग सरकारों ने शहर के बुनियादी ढांचे और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। शिवकुमार ने कहा, “जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे, तब मैं बेंगलुरु के शहरी विकास मंत्री के रूप में काम कर रहा था। उस दौरान हमने शहर के विकास और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं तैयार की थीं। मैं मानता हूं कि बेंगलुरु पूरी तरह योजनाबद्ध शहर नहीं है, लेकिन अब हमें इसे उसी तरह विकसित करना होगा, क्योंकि यह आईटी से लेकर एयरोस्पेस तक कई क्षेत्रों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को बड़ी ताकत देता है।”
कर्नाटक को निवेश के लिए सबसे बेहतर राज्यों में से एक बताते हुए डी.के. शिवकुमार ने कहा कि राज्य कई क्षेत्रों में देश की अगुवाई कर रहा है। उन्होंने बताया कि खेती, डेयरी, रेशम उत्पादन और हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) जैसे क्षेत्रों में कर्नाटक लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। शिवकुमार ने बेंगलुरु की खासियतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यहां का सुहावना मौसम, बेहतर जीवनशैली और लोकप्रिय पब संस्कृति लोगों को आकर्षित करती है। इसके साथ ही राज्य सरकार कारोबार शुरू करने और चलाने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी लगातार काम कर रही है, ताकि देश-विदेश के निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सके।
Rising Bharat Summit: शुक्रवार को बेंगलुरु में हुए News18 राइजिंग भारत समिट में रकुल प्रीत सिंह ने प्रोड्यूसर-एक्टर जैकी भगनानी से शादी के बाद की ज़िंदगी के बारे में बात की। एक्ट्रेस ने कहा कि उनका रिश्ता शादीशुदा जिंदगी में इतनी आसानी से बदल गया है कि उन्हें कोई खास फर्क महसूस नहीं होता।
इस इवेंट में बातचीत के दौरान, रकुल ने पिछले कुछ सालों के अपने सफर को याद किया और बताया कि कैसे शादी ने उनके रिश्ते की नींव को बदले बिना उनकी ज़िंदगी में एक नया अध्याय जोड़ा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह सिर्फ़ एक एक्टर से एंटरप्रेन्योर और अब एक पत्नी बनने के सफ़र से गुज़री हैं, तो रकुल हंसीं और बोलीं, “मैं सोच रही थी कि एंटरप्रेन्योर के बाद क्या आता है! ओह हां, पत्नी।”
यह पूछे जाने पर कि शादीशुदा ज़िंदगी अब तक कैसी रही है, एक्ट्रेस ने कहा कि वह और जैकी इस नए दौर में आसानी से ढल गए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है – नो नजर -अभी सिर्फ़ ढाई साल ही हुए हैं, लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि हमें कोई फ़र्क महसूस नहीं होता। हम दोनों ज़िंदगी के इस दौर में बहुत आसानी से ढल गए हैं। यह बहुत अच्छा लग रहा है।”
बातचीत के दौरान, रकुल से यह भी पूछा गया कि क्या किसी फ़िल्मी परिवार में शादी करने से उनके क्रिएटिव फ़ैसलों या एक एक्टर के तौर पर चुने गए प्रोजेक्ट्स पर कोई असर पड़ा है। एक्ट्रेस ने तुरंत साफ़ किया कि उनका रिश्ता हमेशा दो लोगों के बीच रहा है, न कि उनके प्रोफेशन के आधार पर। शुरू में, जब हमने डेटिंग शुरू की, तो बात हमेशा दो लोगों के बीच की थी। ऐसा नहीं था कि ‘अरे, वह फ़िल्म इंडस्ट्री से हैं, इसलिए वह अपने-आप मेरे प्रोफेशन को समझ लेंगे।
उन्होंने कहा कि यह कपल अपने करियर की वजह से नहीं, बल्कि ज़िंदगी के प्रति एक जैसी सोच की वजह से एक-दूसरे से जुड़ा। “हम सच में एक-दूसरे के साथ घुल-मिल गए क्योंकि हम अंदर से काफ़ी एक जैसे हैं, खासकर जब बात हमारे लाइफ़स्टाइल और वैल्यूज़ की आती है।”
रकुल ने आगे बताया कि वह और जैकी दोनों ही अपने प्रोफेशनल फ़ैसले आज़ादी से लेते हैं और एक-दूसरे के करियर से जुड़े मामलों में दखल नहीं देते।
देश में सोने की कीमत में लगातार आ रही तेजी शुक्रवार, 24 जुलाई को थम गई। आज सुबह ज्यादातर शहरों में कीमत गिरी है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत फिसलकर 146320 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। मुंबई में भाव 146170 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 400 रुपये घटकर 1,49,200 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।
रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने की कीमत कम होकर 4,042.77 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। अगस्त में डिलीवरी वाला यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 4,045.60 डॉलर प्रति औंस पर है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े तनाव ने ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दी है। इससे महंगाई बढ़ने की चिंता फिर से बढ़ गई है। इसके चलते अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा बेंचमार्क ब्याज दरों में इजाफा किए जाने के अनुमानों को बल मिला है। ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक अन्य स्त्रोतों से बेहतर रिटर्न कमा सकते हैं। इसलिए ब्याज दरों का बढ़ना सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए एक निगेटिव फैक्टर होता है।
CME FedWatch टूल के अनुसार, ऐसी उम्मीद है कि U.S. फेडरल रिजर्व अगले हफ्ते यानि कि 28-29 जुलाई की मीटिंग में दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन ट्रेडर्स सितंबर की मीटिंग में दरों में बढ़ोतरी की लगभग 81% संभावना मानकर चल रहे हैं।
देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट
दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 146320 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 134140 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 133990 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 146170 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 147290 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 146170 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 133990 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
| शहर | 22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹) | 24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹) |
| दिल्ली | 134140 | 146320 |
| मुंबई | 133990 | 146170 |
| अहमदाबाद | 134040 | 146220 |
| चेन्नई | 135010 | 147290 |
| कोलकाता | 133990 | 146170 |
| हैदराबाद | 133990 | 146170 |
| जयपुर | 134140 | 146320 |
| भोपाल | 134040 | 146220 |
| लखनऊ | 134140 | 146320 |
| चंडीगढ़ | 134140 | 146320 |
चांदी की कीमत
सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में भी गिरावट है। 24 जुलाई की सुबह चांदी 239900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत घटकर 57.56 डॉलर प्रति औंस हो गई है। प्लेटिनम का भाव 1,592.97 डॉलर प्रति औंस पर है।
Stocks to Buy: पिछले कुछ समय से शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव दिख रहा है। ऐसे में अच्छी ग्रोथ वाली कंपनियां ढूंढना आसान नहीं होता। लेकिन Motilal Oswal ने अपनी ताजा रिपोर्ट में तीन ऐसे शेयर चुने हैं, जिनमें उसे मजबूत ग्रोथ की उम्मीद दिख रही है। इनमें Eternal, Sunteck Realty और Arvind Fashions शामिल हैं। ब्रोकरेज के मुताबिक इन शेयरों में मौजूदा स्तर से 31% से 69% तक तेजी आ सकती है।
Eternal
मोतीलाल ओसवाल ने Eternal पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 400 रुपये रखा है। यानी मौजूदा भाव से करीब 41% की तेजी की संभावना।
ब्रोकरेज का कहना है कि क्विक कॉमर्स में मुकाबला अभी भी कड़ा है। लेकिन अब बाजार पहले से ज्यादा स्थिर और अनुमानित हो गया है। Blinkit का बिजनेस मॉडल लगातार मजबूत हो रहा है। कंपनी ने लॉन्ग टर्म EBITDA मार्जिन का लक्ष्य बढ़ाकर करीब 6% कर दिया है। FY29 तक 1 अरब डॉलर EBITDA हासिल करने का लक्ष्य भी बरकरार है। वेयरहाउस पर खर्च बढ़ा है, लेकिन ब्रोकरेज इसे भविष्य की ग्रोथ के लिए जरूरी निवेश मानता है। वहीं फूड डिलीवरी कारोबार भी धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है।
Sobha Ltd
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने Sobha को भी खरीदने की सलाह दी है। टारगेट प्राइस 1,820 रुपये रखा है। मौजूदा भाव 1,384.40 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 31% की तेजी की संभावना है।
जून तिमाही में कंपनी की प्री-सेल्स 36% बढ़कर 2,006 करोड़ रुपये पहुंच गई। इसकी सबसे बड़ी वजह बेंगलुरु में मजबूत मांग और नए प्रोजेक्ट लॉन्च रहे। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी की लॉन्च पाइपलाइन मजबूत है और इस वित्त वर्ष में 30% प्री-सेल्स ग्रोथ का लक्ष्य बरकरार है। मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक कलेक्शन में कुछ नरमी जरूर रही, लेकिन यह अस्थायी है। वहीं कॉन्ट्रैक्ट्स और मैन्युफैक्चरिंग कारोबार का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है, जिससे आगे ग्रोथ को सहारा मिलेगा।
Arvind Fashions
मोतीलाल ओसवाल ने Arvind Fashions पर भी Buy रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 620 रुपये है। इसमें करीब 31% की तेजी की संभावना है।
जून तिमाही में रिटेल कारोबार अच्छा रहा। D2C चैनलों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। बेहतर सोर्सिंग, कम डिस्काउंट और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बिक्री से मार्जिन सुधरे हैं। ब्रोकरेज को FY26 से FY28 के बीच 13% रेवेन्यू CAGR, 18% EBITDA CAGR और करीब 30% PAT CAGR की उम्मीद है। इसके बावजूद कंपनी का वैल्यूएशन कई दूसरी कंपनियों के मुकाबले अभी भी सस्ता माना जा रहा है।
Sagility India
Motilal Oswal से Sagility को भी Buy रेटिंग मिली है। टारगेट प्राइस 57 रुपये रखा है। मौजूदा भाव 41.43 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 38% की तेजी की संभावना है।
जून तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन अनुमान से बेहतर रहा। रेवेन्यू 15.2%, EBITDA 27.6% और PAT 31.3% बढ़ा। EBITDA मार्जिन भी बढ़कर 22.3% पर पहुंच गया। ब्रोकरेज का कहना है कि अमेरिकी हेल्थकेयर कंपनियों पर लागत घटाने का दबाव Sagility के लिए बड़ा अवसर बन रहा है। CareSeeds के अधिग्रहण से नए क्लाइंट, क्रॉस-सेलिंग और ग्रोथ को भी सहारा मिलेगा।
Sunteck Realty
मोतीलाल ओसवाल ने Sunteck Realty पर भी Buy रेटिंग बरकरार रखी है। नया टारगेट 490 रुपये है। यानी करीब 62% की संभावित तेजी।
जून तिमाही में कंपनी की प्री-सेल्स 20% बढ़ी। इसकी वजह प्रीमियम और लग्जरी घरों की मजबूत मांग रही। कंपनी के पास करीब 7,100 करोड़ रुपये की लॉन्च पाइपलाइन है। मैनेजमेंट इस साल 25-30% प्री-सेल्स ग्रोथ का लक्ष्य लेकर चल रहा है। ब्रोकरेज को FY26 से FY28 के बीच 25% CAGR की उम्मीद है। मजबूत कैश फ्लो और कम कर्ज कंपनी की बड़ी ताकत हैं।
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पैसों को सही तरीके से मैनेज करना हर परिवार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। कई लोग अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा महंगे सामान, लग्जरी लाइफस्टाइल और दूसरों को प्रभावित करने में खर्च कर देते हैं। वहीं, बेंगलुरु के एक कपल ने पैसों को लेकर एक अलग सोच पेश की है। मेघा और शुभम का मानना है कि पैसा सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने अपनी आर्थिक आदतों से जुड़े 5 ऐसे नियम साझा किए हैं, जिनमें अनुभवों, स्वास्थ्य, बचत और भविष्य की सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है।
कपल की यह सोच सोशल मीडिया पर लोगों को काफी पसंद आ रही है। उनका कहना है कि सही वित्तीय फैसले महंगी चीजें खरीदने से नहीं, बल्कि समझदारी से खर्च और निवेश करने से बनते हैं।
1. दिखावे पर नहीं, जिंदगी को बेहतर बनाने पर खर्च
मेघा और शुभम का पहला नियम है कि पैसे सिर्फ दूसरों को प्रभावित करने के लिए खर्च नहीं करने चाहिए। उनका कहना है कि वे महंगी कार, डिजाइनर कपड़े या ऐसी चीजों पर खर्च नहीं करते जो सिर्फ स्टेटस दिखाने के काम आएं। इसके बजाय वे अपने घर, आराम और ऐसी चीजों पर खर्च करते हैं, जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाती हैं। उनके लिए अच्छा घर और बेहतर माहौल ज्यादा मायने रखता है।
2. सामान से ज्यादा यादों को देते हैं महत्व
कपल का मानना है कि चीजें कुछ समय बाद पुरानी हो जाती हैं, लेकिन अनुभव हमेशा याद रहते हैं। इसी सोच के चलते वे हर साल एक इंटरनेशनल ट्रिप प्लान करते हैं और सालभर में कई छोटे वेकेशन या स्टेकेशन का आनंद लेते हैं। इसके अलावा वे त्योहारों और खास मौकों पर अपने माता-पिता से मिलने को भी प्राथमिकता देते हैं।
3. फिटनेस और हेल्थ को मानते हैं सबसे बड़ा निवेश
इस कपल के लिए स्वास्थ्य पर खर्च करना कोई अतिरिक्त खर्च नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारी है। वे अच्छी डाइट, फिटनेस, जिम और हेल्थ से जुड़ी चीजों पर बिना झिझक खर्च करते हैं। उनका मानना है कि आज शरीर का ध्यान रखने से भविष्य में बड़े मेडिकल खर्चों से बचा जा सकता है।
4. हर साल बढ़ाते हैं निवेश का आंकड़ा
कपल का चौथा नियम है कि हर साल अपने निवेश को पहले से बेहतर बनाना। वे शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल गोल्स को ध्यान में रखकर पैसे मैनेज करते हैं। उनके अनुसार, घर के बाहर खड़ी कार से ज्यादा जरूरी वह रकम है, जो उनके निवेश पोर्टफोलियो में बढ़ रही है।
5. पैसों की जिम्मेदारी मिलकर संभालते हैं
मेघा और शुभम का मानना है कि परिवार में आर्थिक जिम्मेदारियां बांटना जरूरी है। मेघा घर के फिक्स खर्च जैसे किराया, बिल और घरेलू स्टाफ की सैलरी संभालती हैं, जबकि शुभम ग्रॉसरी, ट्रैवल खर्च और क्रेडिट कार्ड से जुड़े भुगतान देखते हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों ने की तारीफ
कपल ने अपने ये नियम सोशल मीडिया पर शेयर किए, जिसके बाद कई लोगों ने उनकी सोच की सराहना की। उनका कहना है कि ये कोई परफेक्ट फॉर्मूला नहीं है, बल्कि उनकी फैमिली के लिए काम करने वाली आदतें हैं। उनकी कहानी एक बात साफ बताती है कि अच्छी आर्थिक जिंदगी सिर्फ ज्यादा कमाने से नहीं, बल्कि समझदारी से खर्च और निवेश करने से बनती है।
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Bengaluru (बेंगलुरु)

बेंगलुरु को भारत की IT केपिटल कहा जाता है। यहां देश-विदेश की बड़ी टेक कंपनियां (tech companies) मौजूद हैं, जिससे नौकरी के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। बढ़ती आबादी और किराये के घरों की मांग के कारण NRI इस शहर को लंबे समय के इन्वेस्टमेंट के लिए अच्छा ऑप्शन मानते हैं।
Hyderabad (हैदराबाद)

हैदराबाद तेजी से आगे बढ़ता हुआ रियल एस्टेट (real estate) बाजार है। यहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी सेक्टर (IT sector) का विस्तार और दूसरे बड़े शहरों की तुलना में किफायती प्रॉपर्टी कीमतें इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट करती हैं। यही कारण है कि हाल के वर्षों में NRI का रुझान इस शहर की ओर तेजी से बढ़ा है।
Mumbai (मुंबई)

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी होने के साथ-साथ NRI इन्वेस्टर्स की सबसे पसंदीदा रियल एस्टेट मार्केट भी है। यहां लग्जरी अपार्टमेंट, प्रीमियम प्रोजेक्ट्स और ऊंची प्रॉपर्टी वैल्यू (property value) इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट करती है। 2024 में भारतीय रियल एस्टेट के प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टमेंट का लगभग 50% हिस्सा मुंबई को मिला, जिससे इसकी पॉपुलैरिटी और मजबूत हुई।
अच्छे रिटर्न (Good Returns) की उम्मीद

भारत के कई शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में NRI मानते हैं कि आज किया गया इन्वेस्टमेंट आने वाले वर्षों में अच्छा प्रॉफिट दे सकता है। इसी वजह से वे रियल एस्टेट को सिक्योर और फायदेमंद इन्वेस्टमेंट मानते हैं।
किराये से कमाई (Rental Income) का मौका

कई NRI भारत में घर खरीदकर उसे किराये पर दे देते हैं। इससे उन्हें हर महीने रेगुलर इनकम होती है और साथ ही समय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत (property’s value) बढ़ने का भी फायदा मिलता है।
निवेश (Investment) करना हुआ आसान

सरकार ने NRI के लिए प्रॉपर्टी खरीदने की प्रोसेस पहले से ज्यादा आसान बना दी है। डिजिटल बैंकिंग (digital banking), ऑनलाइन डॉक्यूमेंटेशन (documentation) और सिंपल रेगुलेशन की वजह से अब विदेश में रहकर भी भारत में इन्वेस्टमेंट करना आसान हो गया है।
परिवार (Family) और भविष्य (Future) की जरूरत

कई NRI अपने माता-पिता या परिवार के रहने के लिए भारत में घर खरीदते हैं। वहीं कुछ लोग रिटायरमेंट (retirement) के बाद भारत लौटने की प्लानिंग बनाकर पहले से ही प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं।

