योगी सरकार में अब तक अनुसूचित जाति/जनजाति के 1.39 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को मिली आर्थिक सहायता

  • बीते नौ साल में पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना से छात्र-छात्राओं को किया गया सशक्त 
  • योगी सरकार का लगातार प्रयास, आर्थिक अभाव किसी भी मेधावी विद्यार्थी की शिक्षा में न बने बाधा

 

लखनऊ, 27 जुलाई। शिक्षा को सामाजिक सशक्तीकरण का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए योगी सरकार ने अनुसूचित जाति/जनजाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति व्यवस्था को लगातार मजबूत किया है। पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से बीते नौ वर्षों में 1.39 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव किसी भी मेधावी विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बने और वह विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षा तक अपनी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रख सके।

 

तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता, समय पर मिली सहायता 

 

योगी सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में कई सुधार किए हैं। ओटीआर, बायोमेट्रिक सत्यापन, एस-कोड वैलिडेशन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) जैसी व्यवस्थाओं से छात्रवृत्ति सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और पात्र विद्यार्थियों तक समय पर सहायता पहुंचाना आसान हुआ है।

 

हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक पहुंचा लाभ

 

पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के तहत वर्ष 2017-18 में 4,16,860 अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को लाभ मिला। इसके बाद 2018-19 में 5,24,426, 2019-20 में 5,41,386, 2020-21 में 3,62,511, 2021-22 में 3,20,390, 2022-23 में 3,86,139, 2023-24 में 3,74,963, 2024-25 में 4,11,797 तथा 2025-26 में 4,39,647 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई। वहीं दशमोत्तर स्तर पर 2017-18 में 12,80,515, 2018-19 में 11,43,804, 2019-20 में 13,60,376, 2020-21 में 8,02,648, 2021-22 में 12,29,471, 2022-23 में 9,42,939, 2023-24 में 10,35,766, 2024-25 में 11,76,281 तथा 2025-26 में 11,54,567 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है।

 

 

शिक्षा के जरिए सामाजिक बदलाव की पहल

 

योगी सरकार का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का सबसे मजबूत आधार है। छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है, जिससे वे उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के बेहतर अवसरों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। समाज कल्याण विभाग उप निदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि, बीते नौ वर्षों में छात्रवृत्ति व्यवस्था में हुए सुधारों ने विद्यार्थियों के बीच शिक्षा के प्रति विश्वास को मजबूत किया है। सरकार की कोशिश है कि पात्र विद्यार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता मिले और वे बिना किसी आर्थिक बाधा के अपने सपनों को साकार कर सकें।

Gold Silver Price Today: सोना ₹2440 महंगा हुआ, चांदी का भाव ₹5300 उछला

Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सोना ₹2,440 चढ़कर ₹1,49,640 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, चांदी ₹5,300 की तेजी के साथ ₹2,30,000 प्रति किलो हो गई।

सोने-चांदी के दाम क्यों बढ़े?

लगातार दो दिन की गिरावट के बाद बाजार में खरीदारी लौटी है। इसकी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है। इससे महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई। निवेशकों का रुख फिर से सोने और चांदी की तरफ बढ़ा।

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से कच्चे तेल के दाम गिरे हैं। इसका फायदा सोने को मिला। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ है और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी घटी है। इससे भी सोने की कीमतों को सहारा मिला। हालांकि, रुपये की मजबूती की वजह से घरेलू बाजार में तेजी कुछ सीमित रही।

विदेशी बाजार में भी तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 42.13 डॉलर बढ़कर 4,095.30 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर 1.47% चढ़कर 59.04 डॉलर प्रति औंस हो गई।

Kotak Securities की एवीपी (कमोडिटी रिसर्च) कायनात चैनवाला ने कहा कि कच्चे तेल के दाम घटने से महंगाई का दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है। इसी वजह से सोने और चांदी में खरीदारी बढ़ी।

अब किस पर रहेगी नजर?

JM Financial Services के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर के मुताबिक, अब बाजार की नजर पश्चिम एशिया के हालात पर रहेगी। इसके अलावा, यूरोजोन, जापान और अमेरिका के महंगाई के आंकड़े भी अहम रहेंगे।

उन्होंने बताया कि अमेरिका के GDP के आंकड़े आएंगे। कंज्यूमर कॉन्फिडेंस का डेटा भी जारी होगा। साप्ताहिक जॉबलेस क्लेम्स के आंकड़े भी अहम रहेंगे। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की ब्याज दरों पर होने वाले फैसले भी सोने-चांदी की दिशा तय कर सकते हैं।

MCX गोल्ड पर एक्सपर्ट की राय

LKP Securities के वीपी रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी ने कहा कि सोमवार को एमसीएक्स पर सोना करीब 0.50% की तेजी के साथ ₹1,43,675 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं, COMEX Gold करीब 37 डॉलर चढ़कर 4,090 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। हालांकि, रुपये की मजबूती की वजह से घरेलू बाजार में सोने की तेजी वैश्विक बाजार के मुकाबले थोड़ी कम रही।

उनका कहना है कि अब बाजार की नजर इस सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक पर है। इस बैठक से ब्याज दरों के संकेत मिल सकते हैं। इसका असर आगे सोने की कीमतों पर भी दिख सकता है। तकनीकी तौर पर एमसीएक्स गोल्ड के ₹1,42,000 से ₹1,45,500 के दायरे में कारोबार करने की उम्मीद है।

*पीटीआई से इनपुट के साथ

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HDFC Bank News: CEO समेत तीन बड़े अधिकारियों पर ₹1-1 लाख का जुर्माना, बोर्ड ने दी चेतावनी

HDFC Bank News: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर HDFC Bank ने बताया कि उसके बोर्ड ने MD और CEO शशिधर जगदीशन, CFO श्रीनिवासन वैद्यनाथन और ग्रुप हेड (रिटेल एसेट्स) अरविंद वोहरा पर ₹1-1 लाख का जुर्माना लगाया है। तीनों को चेतावनी पत्र भी जारी किया गया है।

MSRDC मामले की हुई जांच

यह फैसला महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSRDC) के साथ 2017 और 2021 में हुए डिपॉजिट समझौते की आंतरिक जांच के बाद लिया गया।

बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि स्वतंत्र निदेशकों की विशेष समिति ने पूरे मामले की समीक्षा की। जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि किसी अधिकारी ने गलत नीयत से काम किया हो या निजी फायदा उठाया हो। हालांकि, बोर्ड का मानना है कि इस मामले में कुछ अधिकारियों ने कारोबार बढ़ाने के चक्कर में तय सीमा से आगे बढ़कर काम किया।

RBI को भी भेजी जाएगी रिपोर्ट

बैंक ने कहा कि RBI के नियमों से संभावित अंतर को देखते हुए बोर्ड ने तीनों वरिष्ठ अधिकारियों पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। साथ ही उन्हें चेतावनी पत्र भी दिया गया है। मामले से जुड़े बाकी कर्मचारियों को भी चेतावनी पत्र जारी किए जाएंगे। बोर्ड ने यह भी तय किया है कि पूरे मामले की जानकारी RBI को भेजी जाएगी।

₹45 करोड़ के भुगतान पर उठा था विवाद

मई 2026 में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि HDFC Bank ने बड़े डिपॉजिट जुटाने के लिए MSRDC को ₹45 करोड़ का भुगतान किया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि इस रकम को मार्केटिंग खर्च के तौर पर दिखाया गया और CEO को इसकी जानकारी थी।

उस समय बैंक ने सभी आरोपों से इनकार किया था। बैंक का कहना था कि उसके यहां मजबूत ऑडिट और निगरानी व्यवस्था है। सभी फैसले तय नियमों के मुताबिक लिए जाते हैं।

पहले भी नहीं मिले थे सबूत

इससे पहले एक स्वतंत्र कानूनी जांच भी हुई थी। उसमें भी पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती की ओर से कॉरपोरेट गवर्नेंस और नैतिकता को लेकर उठाए गए सवालों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं मिला था।

HDFC Bank का शेयर NSE पर 0.4% गिरकर ₹740 पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में इसमें करीब 7.34% की गिरावट आई है। एक साल में यह 26.29% टूट चुका है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Income Tax भरने के लिए कौन-सा क्रेडिट कार्ड सबसे बेहतर? जानिए कौन देता है सबसे ज्यादा रिवॉर्ड

Best Credit Cards for Income Tax Payment: क्रेडिट कार्ड के जरिए इनकम टैक्स का भुगतान करना अब सिर्फ एक सुविधा मात्र ही नहीं रह गया है। अगर सही क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया जाए, तो टैक्स भरते समय लगने वाले कन्वीनियंस फीस की भरपाई के साथ-साथ शानदार रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक और माइलस्टोन बेनिफिट्स भी कमाए जा सकते हैं।

हालांकि, सभी बैंक सरकारी या टैक्स भुगतानों पर रिवॉर्ड नहीं देते। कई बैंक टैक्स पेमेंट को रिवॉर्ड कैटेगरी से बाहर रखते हैं या उस पर रिवॉर्ड पॉइंट्स की लिमिट लगा देते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन-से क्रेडिट कार्ड्स टैक्स भुगतान के लिए सबसे बेहतरीन साबित हो सकते हैं।

कौन-सा क्रेडिट कार्ड है सबसे बेस्ट?

टैक्स भुगतान पर मिलने वाले रिवॉर्ड्स के आधार पर कुछ प्रमुख क्रेडिट कार्ड्स की तुलना नीचे दी गई है:

कौन-सा क्रेडिट कार्ड है सबसे बेस्ट?

HDFC Biz Black Metal क्यों है सबसे आगे?

अगर आप भारी-भरकम इनकम टैक्स भरते हैं, तो HDFC Biz Black Metal कार्ड सबसे ज्यादा फायदेमंद है। इसकी बेस रिवॉर्ड दर 3.3% है। एक्सीलरेटेड रिवॉर्ड्स के तहत यह 16.66% तक जा सकती है और माइलस्टोन जोड़ने पर कुल वैल्यू 20% से भी अधिक हो जाती है। ज्यादातर कार्ड्स पर रिवॉर्ड की सीमा खत्म होते ही रिवॉर्ड बंद हो जाते हैं, लेकिन यह कार्ड कैपिंग खत्म होने के बाद भी बेस रिवॉर्ड देता रहता है।

ये कार्ड्स भी हैं आपकी रडार में रखने लायक

Kotak Solitaire: टैक्स भुगतानों पर कोई कैपिंग (सीमा) नहीं है। यह ICICI Times Black से बेहतर हो सकता है, लेकिन यह केवल ‘इन्विटेशन-ओनली’ कार्ड है।

HDFC BizPower: जो लोग Biz Black के लिए पात्र नहीं हैं, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प है। हालांकि, इसमें 5X रिवॉर्ड्स अनलॉक करने के लिए आवश्यक ₹25,000 के मासिक खर्च में टैक्स पेमेंट नहीं गिना जाता।

YES Bank Private: टैक्स पेमेंट पर बिना किसी कैपिंग के 2.5% वैल्यू बैक देता है, लेकिन इस प्रीमियम कार्ड को हासिल करना थोड़ा मुश्किल है।

HDFC Marriott Bonvoy: इसकी रिवॉर्ड दर थोड़ी कम है, लेकिन पात्रता की शर्तें आसान हैं और बड़े टैक्स पेमेंट के लिए काम आ सकता है।

क्रेडिट कार्ड से टैक्स भरने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

केवल कार्ड का प्रचार में रिवॉर्ड रेट देखकर फैसला न लें। टैक्स पेमेंट करने से पहले ये बातें जरूर चेक करें:

  • एलिजिबिलिटी और कैपिंग: जांचें कि क्या टैक्स भुगतान पर रिवॉर्ड मिल रहे हैं या नहीं और प्रति माह कितने रिवॉर्ड पॉइंट्स की लिमिट तय की गई है।
  • कन्वीनियंस फीस का हिसाब: टैक्स पेमेंट पर लगने वाले सर्विस चार्ज या कन्वीनियंस फीस की तुलना अपने मिलने वाले रिवॉर्ड वैल्यू से करें।
  • रिडेम्प्शन वैल्यू: रिवॉर्ड पॉइंट्स को कैश, वाउचर या होटल/एयरलाइन माइल्स में रिडीम करने पर असली वैल्यू अलग-अलग हो सकती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Delhi protest: NEET आंदोलन से फिर करीब आए राहुल-अखिलेश? यूपी चुनाव से पहले युवाओं के मुद्दों पर BJP को घेरने की तैयारी

NEET protest: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब लगभग छह महीने का समय बचा है। ऐसे में NEET परीक्षा विवाद ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ एक नया और मजबूत राजनीतिक मुद्दा दे दिया है। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब एक बड़े विपक्षी अभियान का रूप ले चुका है। इसमें पेपर लीक, बेरोजगारी और सरकारी भर्तियों में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।

दोनों दलों का मानना है कि ये ऐसे मुद्दे हैं, जिनका असर उत्तर प्रदेश के करोड़ों युवा मतदाताओं पर पड़ सकता है। आगामी चुनाव में यह बड़ा चुनावी हथियार साबित हो सकता है।

राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच फिर दिखा तालमेल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच बढ़ता तालमेल ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश की राजनीति निर्णायक दौर में एंट्री  कर रही है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों का चर्चित ‘दो लड़के’ अभियान मतदाताओं को प्रभावित करने में विफल रहा था। गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा था।

लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। कांग्रेस-सपा गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी को बड़ा झटका दिया। इससे दोनों दलों का आत्मविश्वास बढ़ा और गठबंधन को नई राजनीतिक ऊर्जा मिली।

डिंपल यादव ने आंदोलन में निभाई सक्रिय भूमिका

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद समाजवादी पार्टी की सांसद और अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव जंतर-मंतर पहुंचीं। अपनी पहचान बन चुकी गुलाबी साड़ी में पहुंचीं डिंपल कई घंटों तक घायल छात्रों के बीच रहीं। उन्होंने घायल छात्रों का हौसला बढ़ाया। बेहोश हुए एक छात्र की मदद की की। योगत्यता उपलब्ध कराने में सहयोग किया और प्रदर्शनकारियों के साथ लगातार मौजूद रहीं।

सोशल मीडिया पर उनके पुलिस बैरिकेड पर चढ़ने, घायल छात्रों की मदद करने और प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े रहने के वीडियो तेजी से वायरल हुए। सरकार के रवैये को असंवेदनशील बताते हुए उन्होंने कहा, “यह NEET नहीं, CHEAT है।” उनकी लगातार मौजूदगी ने समाजवादी पार्टी को युवाओं और छात्रों के प्रति संवेदनशील दल के रूप में पेश करने में मदद की।

युवाओं के जरिए बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने पिछले कुछ वर्षों में कल्याणकारी योजनाओं, रोजगार पहलों और राष्ट्रवादी राजनीति के जरिए पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के बीच मजबूत आधार बनाया है। विपक्ष का मानना है कि NEET विवाद बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के आरोप और बढ़ती बेरोजगारी युवाओं में असंतोष पैदा कर रहे हैं। कांग्रेस और सपा इसी नाराजगी को राजनीतिक समर्थन में बदलना चाहती हैं। दोनों दल खुद को छात्रों और युवाओं की आवाज के रूप में स्थापित कर इस आंदोलन को चुनावी मुद्दे में बदलने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ जॉइंट आंदोलन

NEET आंदोलन का असर उत्तर प्रदेश में भी तेजी से दिखाई दिया। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने लखनऊ सहित कई जिला मुख्यालयों पर संयुक्त प्रदर्शन किए। दोनों दलों के छात्र संगठनों ने आंदोलन का नेतृत्व किया। कई जगह पुलिस के साथ झड़पें हुईं। विपक्षी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी भी हुई, जिससे यह आंदोलन लगातार सुर्खियों में बना रहा। अब दोनों दलों ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भी संयुक्त विरोध प्रदर्शन जारी रखने की योजना बनाई है।

सिर्फ NEET नहीं, कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

दोनों दलों के सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी अब अपने अभियान को केवल NEET तक सीमित नहीं रखेंगी।

गठबंधन की योजना में शामिल प्रमुख मुद्दे हैं:-

कथित पेपर लीक

बेरोजगारी

सरकारी भर्तियों में देरी

राम मंदिर दान चोरी विवाद

किसानों के लिए खाद की कमी

नकली दवाओं का मुद्दा

बढ़ते बिजली बिल और बिजली दरें

विपक्ष की रणनीति है कि चुनाव तक जनता का ध्यान इन मुद्दों पर केंद्रित रखा जाए, ताकि बीजेपी पहचान की राजनीति और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए चुनावी एजेंडा तय न कर सके।

फिलहाल सीट बंटवारे का विवाद भी पड़ा ठंडा

कुछ समय पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बराबर सीटों की हिस्सेदारी चाहेगी। गौतम ने कांग्रेस को गठबंधन का ‘बड़ा भाई’ तक बताया था।

इन बयानों से दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए थे। हालांकि, छात्र आंदोलन के बाद फिलहाल बातचीत का केंद्र सीटों की बजाय संयुक्त राजनीतिक अभियान बन गया है। इससे दोनों दल एकजुटता का संदेश देने में सफल रहे हैं।

युवा वोट बना सबसे बड़ा चुनावी रणक्षेत्र

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में युवा मतदाताओं को सबसे बड़ा चुनावी मैदान मान रही हैं। सपा का पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक अभी भी उसके साथ माना जाता है। जबकि कांग्रेस ऊंची जातियों, दलितों, शहरी मतदाताओं और पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दे जाति और धर्म से ऊपर उठकर लगभग हर वर्ग के छात्रों को प्रभावित करते हैं। इसलिए इन्हें राजनीतिक रूप से बेहद प्रभावी माना जा रहा है।

बीजेपी भी करेगी कड़ा मुकाबला

हालांकि बीजेपी इस चुनौती को आसानी से स्वीकार करने वाली नहीं है। 2024 लोकसभा चुनाव में झटका लगने के बावजूद भगवा पार्टी ने बाद के विधानसभा उपचुनावों में अपनी संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन किया है। बीजेपी आगामी चुनाव में अपनी कल्याणकारी योजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी भर्ती अभियानों और सुशासन के रिकॉर्ड को प्रमुखता से जनता के सामने रखेगी। पार्टी को भरोसा है कि उत्तर प्रदेश में उसका बूथ स्तर तक फैला मजबूत संगठन विपक्ष पर बढ़त बनाए रखेगा।

क्या NEET आंदोलन बनेगा चुनावी गेम चेंजर?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या NEET आंदोलन 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की दिशा बदल पाएगा। यदि राहुल गांधी और अखिलेश यादव युवाओं के गुस्से को चुनाव तक बनाए रखने और पेपर लीक, बेरोजगारी तथा छात्रों की आकांक्षाओं को चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनाने में सफल रहते हैं, तो कांग्रेस-सपा गठबंधन 2024 के बाद बीजेपी के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।

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वहीं यदि बीजेपी बहस का केंद्र फिर से विकास, सुशासन, कल्याणकारी योजनाओं और नेतृत्व पर ले जाने में सफल हो जाती है, तो जंतर-मंतर से उठी यह भावनात्मक लहर चुनाव तक पहुंचने से पहले कमजोर भी पड़ सकती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य के करोड़ों युवा मतदाता आखिर किस राजनीतिक दल पर सबसे अधिक भरोसा जताते हैं।

Stock Market : शेयर बाजार में लौटी रौनक, 5 दिन की गिरावट थमी, सेंसेक्स 776 अंक उछला, निवेशकों को बड़ी राहत

share market 19 march

भारतीय शेयर बाजार में पिछले पांच कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला सोमवार को आखिरकार थम गया। वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के बाद घरेलू बाजार में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। इस तेजी के चलते BSE सेंसेक्स 776 अंक चढ़कर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 228 अंक की मजबूत बढ़त के साथ समाप्त हुआ।

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बाजार क्यों चढ़ा?

विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में तनाव कम होना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट रही। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई पर रोक लगने से वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।

 

सेंसेक्स और निफ्टी का प्रदर्शन

BSE सेंसेक्स : 76,835.78 पर बंद

तेजी : 776.01 अंक (1.02%)

दिन का उच्च स्तर : 76,901.51

 

वहीं, NSE निफ्टी 228 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार के दौरान बैंकिंग, आईटी, ऑटो और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

 

निवेशकों को क्या राहत मिली?

पिछले पांच दिनों की लगातार गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई थी। सोमवार की तेजी ने बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया और यह संकेत दिया कि यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं तो आने वाले सत्रों में भी बाजार में मजबूती बनी रह सकती है।

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आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों (FII) के निवेश रुझान पर रहेगी। ये तीनों कारक अगले कुछ दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

Plastic Currency: ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोटों को केंद्र सरकार से मिली मंजूरी, जल्द मार्केट में होगी एंट्री

₹10 and ₹20 Polymer Banknotes Trial: केंद्र सरकार ने 27 जुलाई 2026 को संसद में जानकारी दी कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलीमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। वित्त मंत्रालय ने संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया कि आरबीआई का उद्देश्य कागज के नोटों के मुकाबले ज्यादा टिकाऊ पॉलीमर नोटों की उपयोगिता और जीवनकाल को परखना है।

100-100 करोड़ पीस पॉलीमर नोटों का होगा परीक्षण

वित्त मंत्रालय के अनुसार, आरबीआई ने अपने केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश के बाद ₹10 और ₹20 के 1-1 अरब पीस पॉलीमर नोट जारी कर ट्रायल करने का प्रस्ताव रखा था।अगर यह फील्ड ट्रायल सफल रहता है, तो इसके बाद इन दोनों मूल्यवर्गों में पॉलीमर बैंक नोटों का नियमित रूप से जारी किया जाना शुरू कर दिया जाएगा। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि पॉलीमर नोटों की शुरुआत अभी शुरुआती चरण में है।

क्यों पड़े पॉलीमर नोटों की जरूरत?

कागज के नोटों की तुलना में पॉलीमर नोटों के कई फायदे होते हैं। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, पॉलीमर यानी प्लास्टिक से बने नोट कागज वाले नोटों की तुलना में काफी लंबे समय तक चलते हैं। ये नोट पानी से खराब नहीं होते, आसानी से फटते नहीं हैं और पसीने या गंदगी से जल्दी मैले नहीं होते। ₹10 और ₹20 जैसे छोटे नोटों का इस्तेमाल बहुत ज्यादा होता है, इसलिए कागज के नोट जल्दी खराब हो जाते हैं।

क्या बंद हो जाएंगे पुराने कागज वाले नोट?

सरकार ने इस बात पर पूरी स्थिति साफ कर दी है। आरबीआई इन नए पॉलीमर नोटों को मौजूदा कागज के नोटों के साथ ही सर्कुलेशन में लाएगा। कागज की करेंसी को पूरी तरह बंद करने या उसे पॉलीमर नोटों से बदलने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।

डिजिटल पेमेंट पर क्या पड़ेगा असर?

यह पूछे जाने पर कि क्या प्लास्टिक नोट आने से यूपीआई और डिजिटल भुगतानों पर असर पड़ेगा, वित्त मंत्रालय ने कहा, इसका कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं, इसका सही आकलन पॉलीमर नोटों के नियमित रूप से जारी होने के बाद ही किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि कागजी/पॉलीमर बैंक नोट और डिजिटल पेमेंट सिस्टम एक-दूसरे के पूरक हैं और जनता की सुविधा के लिए दोनों विकल्प मौजूद रहेंगे।

Market Outlook : लगातार पांच दिनों की गिरावट का सिलसिला टूटा, जानिए 28 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : भारतीय इक्विटी इंडेक्स ने 27 जुलाई को लगातार पांच दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए बढ़त के साथ कारोबार खत्म किया और निफ्टी 24,000 के स्तर के करीब पहुंच गया। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 776.01 अंक या 1.02 प्रतिशत बढ़कर 76,835.78 पर और निफ्टी 228.50 अंक या 0.96 प्रतिशत बढ़कर 23,995.95 पर बंद हुआ। लगभग 2646 शेयरों में बढ़त देखी गई,1530 शेयरों में गिरावट आई और 176 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में एटरनल,इंटरग्लोब एविएशन,इंफोसिस,बजाज फाइनेंस और श्रीराम फाइनेंस शामिल रहे। जबकि गिरावट वाले शेयरों में ONGC,सिप्ला,HDFC लाइफ,HDFC बैंक और डॉ.रेड्डीज लैब्स शामिल रहे।

सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी मीडिया सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा,जिसमें 2.4% की बढ़त हुई। इसके बाद निफ्टी IT का नंबर रहा,जिसमें 2.3% की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी रियल्टी में 2.2% की तेजी आई,जबकि निफ्टी ऑटो और निफ्टी फार्मा में 1.6% और 1.5% की बढ़त हुई।

अन्य सेक्टरों में निफ्टी FMCG में 1%,निफ्टी बैंक में 0.7%,निफ्टी इंफ्रा में 0.66%,निफ्टी मेटल में 0.6%,निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.45%,निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.42% और निफ्टी PSU बैंक में 0.22% की बढ़त हुई।

ब्रॉडर मार्केट ने भी बेंचमार्क इंडेक्स की तरह ही बढ़त के साथ कारोबार खत्म किया। निफ्टी मिडकैप 100 में 1% की बढ़त हुई,जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.3% की तेजी आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि वेस्ट एशिया में हमलों के रुकने से इंपोर्ट की बढ़ती लागत और महंगाई को लेकर चिंताएं कम हुई हैं,जिससे बाजार में रिलीफ रैली आई है। कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और लॉन्ग-टर्म बॉन्ड यील्ड में कमी से भी उम्मीदें बढ़ी हैं। इस हफ्ते यूएस फेड,बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान जैसे बड़े सेंट्रल बैंकों की पॉलिसी मीटिंग्स में ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने के लिए ज्यादा लचीलापन मिल सकता है। घरेलू मोर्चे पर,बारिश की कमी में सुधार से महंगाई के हालात को लेकर राहत मिली है,साथ ही उम्मीद से बेहतर Q1 नतीजों और पॉज़िटिव बिजनेस आउटलुक से भी मदद मिली है।

निफ्टी व्यू

रेलिगेयर ब्रोकिंग में एसवीपी,रिसर्च अजीत मिश्रा का कहना है कि तकनीकी तौर पर, निफ्टी ने 23,600 के जोन के आस-पास अहम ट्रेंडलाइन सपोर्ट को बचाते हुए अच्छी रिकवरी की है। हालांकि,इंडेक्स अभी भी 24,000–24,150 के तत्काल रेजिस्टेंस बैंड के नीचे ट्रेड कर रहा है। यह रेंज इसके 20-डे और 100-डे के DEMA के साथ मेल खाती है,जिससे यह जोन बुल्स के लिए एक बड़ी रुकावट बन गया है। अगर इंडेक्स मजबूती से इस रेंज के ऊपर बंद होता है तो यह 24,400 के स्तर तक और रिकवरी का रास्ता खोल सकता है।

प्रॉफिट बुकिंग होने पर नीचे की तरफ 23,600–23,800 का जोन तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता। मौजूदा उतार-चढ़ाव को देखते हुए,हम स्टॉक स्पेसिफिक अप्रोच अपनाने की सलाह देते हैं। इसमें अलग-अलग सेक्टर के तुलनात्क रूप मजबूत शेयरों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और साथ ही रिस्क और पोजीशन मैनेजमेंट में अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से इक्विटी मार्केट का सेंटीमेंट बेहतर हुआ है, जिससे इंडेक्स में रिकवरी आई है। लगातार दूसरे दिन रिकवरी के साथ इंडेक्स ने 50EMA का लेवल फिर से हासिल कर लिया है। ऑवरली चार्ट पर RSI बुलिश क्रॉसओवर दिखा रहा है।

मंगलवार को NSE F&O कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव रह सकता है। अगर निफ्टी 24,000 के ऊपर जाता है और वहां बना रहता है तो हम 24,250–24,300 की ओर अपट्रेंड जारी रहने की उम्मीद कर सकते हैं। हालांकि,अगर यह 24,000 के ऊपर नहीं टिक पाता है तो 23,800 की ओर करेक्शन देखने को मिल सकता है।

Stocks Of The Day : नतीजों के बाद लॉरेस लैब्स लाइफ हाई पर, कॉनकॉल के बाद KFIN टेक को भी लगे पंख

बैंक निफ्टी व्यू

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी का सेशन एक छोटी’डोजी कैंडलस्टिक’के साथ खत्म हुआ। यह बाजार में अनिश्चितता का संकेत है। वहीं,आवरली चार्ट पर पॉजिटिव RSI डाइवर्जेंस शॉर्ट-टर्म मोमेंटम में सुधार का संकेत दे रहा है। हालांकि,इंडेक्स को अभी भी 57,400 के आसपास एक बड़े रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है,जहां इसका 200-DMA भी है।

अगर बैंक निफ्टी मजबूती से इस लेवल के ऊपर बंद होता है तो 58,500 की ओर रिकवरी आ सकती है। जब तक इंडेक्स अपने 200-DMA के ऊपर वापस नहीं आता और वहां नहीं पाता तब तक सावधानी बरतने की सलाह होगी। बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56,800 पर है। जबकि रेजिस्टेंस लेवल 57,500 और 58,000 पर दिख रहे हैं।

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Bank Holidays in August 2026: अगस्त में 14 दिन बंद रहेंगे बैंक! स्वतंत्रता दिवस, ओणम और ईद-ए-मिलाद पर छुट्टियों की पूरी लिस्ट

August 2026 Bank Holidays List: अगर अगस्त के महीने में आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी अगस्त 2026 के हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार, अगले महीने देश के अलग-अलग राज्यों में कुल 14 दिन बैंक शाखाएं बंद रहेंगी।

इन छुट्टियों में स्वतंत्रता दिवस, ईद-ए-मिलाद, ओणम और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख त्योहारों के अलावा रविवार, दूसरा शनिवार और चौथा शनिवार की वीकली छुट्टियां शामिल हैं। इसलिए बैंक जाने से पहले अपने राज्य में छुट्टियों की लिस्ट जरूर चेक कर लें।

अगस्त 2026 में बैंक छुट्टियों की तारीखवार सूची

रिजर्व बैंक की लिस्ट के अनुसार, अगस्त महीने की छुट्टियों का ब्योरा इस प्रकार है:

  • 2 अगस्त, रविवार – साप्ताहिक छुट्टी, देशभर में बंद रहेंगे
  • 4 अगस्त, मंगलवार – केर पूजा, अगरतला में बंद रहेंगे
  • 8 अगस्त, शनिवार – दूसरा शनिवार / तेंडोंग लो रूम फाट, देशभर में बंद रहेंगे (गंगटोक में विशेष त्योहार)
  • 9 अगस्त, रविवार – साप्ताहिक छुट्टी, देशभर में बंद रहेंगे
  • 13 अगस्त, गुरुवार – पेट्रियट्स डे, इम्फाल में बंद रहेंगे
  • 15 अगस्त, शनिवार – स्वतंत्रता दिवस, देशभर में सभी बैंक बंद रहेंगे
  • 16 अगस्त, रविवार – साप्ताहिक छुट्टी, देशभर में बंद रहेंगे
  • 19 अगस्त, बुधवार – महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर जयंती, अगरतला में बंद रहेंगे
  • 22 अगस्त, शनिवार – चौथा शनिवार, देशभर में बंद रहेंगे
  • 23 अगस्त, रविवार – साप्ताहिक छुट्टी, देशभर में बंद रहेंगे
  • 25 अगस्त, मंगलवार – मिलाद-उन-नबी / पहला ओणम, कोच्चि, तिरुवनंतपुरम और विजयवाड़ा में बंद रहेंगे
  • 26 अगस्त, बुधवार – ईद-ए-मिलाद / तिरुवोनम, नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, लखनऊ, पटना आदि में बंद रहेंगे
  • 28 अगस्त, शुक्रवार – रक्षाबंधन / पांग-ल्हाबसोल / श्री नारायण गुरु जयंती, जयपुर, अहमदाबाद, भोपाल, लखनऊ, शिमला, देहरादून आदि में बंद रहेंगे
  • 30 अगस्त, रविवार – साप्ताहिक छुट्टी, देशभर में बंद रहेंगे

अगस्त 2026 में बैंक छुट्टियों की तारीखवार सूची

बैंक बंद होने पर कैसे निपटाएं अपने काम?

बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। डिजिटल युग में अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन चालू रहेंगी। नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और UPI सेवाएं 24×7 सामान्य रूप से काम करेंगी। कैश निकालने या जमा करने के लिए एटीएम सर्विस उपलब्ध रहेगी। NEFT/RTGS के लिए ऑनलाइन रिक्वेस्ट, चेकबुक आवेदन और क्रेडिट/डेबिट कार्ड से जुड़ी सेवाएं बैंक ऐप/वेबसाइट के जरिए ली जा सकती हैं।

Stocks Of The Day : नतीजों के बाद लॉरेस लैब्स लाइफ हाई पर, कॉनकॉल के बाद KFIN टेक को भी लगे पंख

Stock Of The Day : नतीजों के बाद लॉरेस लैब्स के शेयर आज अपने लाइफ हाई पर जाते दिखें हैं। नतीजों और कॉनकॉल के बाद KFIN टेक का शेयर भी जोर से दौड़ा है। फार्मा सेक्टर में आज सबसे ज्यादा फोकस लॉरेस लैब्स पर है। जिसमें जोरदार तेजी आई है। लॉरेस लैब्स की बात करें तो 1 महीने में इस शेयर ने 11 फीसदी रिटर्न दिया है। वहीं, इस साल अब तक इसने 50 फीसदी रिटर्न दिया है। वहीं, निफ्टी फार्मा इंडेक्स ने 1 महीने में 1 फीसदी और इस साल अब तक 15 फीसदी रिटर्न दिया है।

लॉरेस लैब्स में तेजी क्यों?

कंपनी ने लगातार शानदार नतीजे पेश किए हैं। अब तक का सबसे ज्यादा रेवेन्यू और EBITDA ग्रोथ देखने को मिली है। कंपनी के CDMO और फॉर्मूलेशन बिजनेस ने दम दिखाया है। सिंथेसिस (SYNTHESIS) बिजनेस में 69% की तगड़ी ग्रोथ देखने को मिली है।

लॉरेस लैब्स: कमेंट्री

कंपनी की मैनेजमेंट कमेंट्री में कहा गया है कि कैपेक्स बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपए किया गया। यह पहले 1500 करोड़ रुपए था। विशाखापत्तनम का बड़ा पेप्टाइड प्लांट ट्रैक पर है।

लॉरेस लैब्स: वैल्युएशन

यह स्टॉक FY27 के EPS के 65 गुना वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। FY26-28 में 24% CAGR अर्निंग संभव है।

लॉरेस लैब्स:शेयर प्राइस हिस्ट्री

3 बजे के आसपास एनएसई पर यह शेयर 121.90 रुपए यानी 7.61% फीसदी की बढ़त के साथ 1725 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का हाई 1,734.50 रुपए और दिन का लो 1,617.10 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 1,734.50 रुपए और 52 वीक लो 810.05 रुपए है। 1 हफ्ते में इस शेयर ने 10.49 फीसदी और 1 महीने में 18.76 फीसदी रिटर्न दिया है। 1 साल में इसने 105.42 फीसदी और 3 साल में 400.29 फीसदी रिटर्न दिया है।

KFIN (KFin Technologies) में भी रफ्तार

नतीजों और कॉनकॉल के बाद KFIN टेक भी दौड़ा है। कंपनी ने कॉनकॉल में बताया है कि बैंक बेस्ड वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म डील जल्द संभव है। NPS बिजनेस ब्रेकइवेन पर पहुंच गया है। MF मार्केट शेयर 37% से बढ़ाकर 40% करने का लक्ष्य है। पहली तिमाही में कंपनी के साथ 10 करोड़ डॉलर से ज्यादा AUM वाले 6 नए फंड मैनेजर्स जुड़े है। FY27 के अंत तक 40% EBITDA मार्जिन का लक्ष्य है। इंटरनेशनल बिजनेस से मार्जिन में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

शेयर की चाल पर एक नजर

3 बजे के आसपास एनएसई पर यह शेयर 92.25 रुपए यानी 10.75% की तेजी के साथ 950 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का हाई 955.30 रुपए और दिन का लो 862 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 1,215 रुपए है। 1 हफ्ते में इसने 7.51 फीसदी रिटर्न दिया है। वहीं, 1 महीने में इसने 8.40 फीसदी तेजी दिखाई है। 1 साल में शेयर 18.56 फीसदी टूटा है। वहीं, 3 साल में इसने 140.17 फीसदी रिटर्न दिया है।

 

 

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