Vande Mataram: ‘सोनिया गांधी को जनता माफ नहीं करेगी’; अमित शाह ने कांग्रेस पर लगाया ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने का आरोप, बंकिम चंद्र के वंशज भी नाराज

Vande Mataram Row: कांग्रेस पर राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने का आरोप लगाते हुये केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मांग की है कि विपक्षी दल इसके लिए देश की जनता एवं गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर आत्मा से माफी मांगे। शाह ने रविवार (16 अगस्त) को आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने वोट बैंक की लालच में कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम’ को भुला दिया। शाह चित्तौड़गढ़ में ‘अटल गौरव स्मृति समारोह’ में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे।

शनिवार को दिल्ली के लालकिले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि इस समारोह में इस साल एक बड़ा बदलाव यह था कि आजादी के 80 साल के बाद लाल किले की प्राचीर पर और देश भर में जहां ध्वज वंदन हुआ वहां पर वंदे मातरम का गायन 80 साल में पहली बार हुआ है।

‘कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया’

अमित शाह ने आरोप लगाते हुए कहा, “कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया है।” उन्होंने कहा, “बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की वह अमर कृति, एक गान के दो शब्द वंदेमातरम… भारत माता की मैं वंदना करता हूं.. यह बोलते-बोलते हजारों लाखों लोग फांसी के फंदे पर चढ़ गए थे, गोलियां खाई थीं, लाठियां खाईं, कई साल जेल में रहे।”

शाह ने आगे कहा, “वोट बैंक की लालच में कांग्रेस ने वंदे मातरम को बुला दिया था।” उन्होंने कहा कि यह 150वां साल है वंदेमातरम के प्राकट्य का… लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने वंदेमातरम् को फिर से एक नया आयुष्य देने का काम किया है।

सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष को वंदे मातरम रोकने की बात कही?

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “इनकी (कांग्रेस) निर्लज्जता देखिए। कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय पर वंदे मातरम का गान हो रहा था। चालू गान में कांग्रेस की नेत्री, सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष को गान रोकने की बात कही। हम सब टी.वी. पर देखते रह गए। 80 साल के बाद बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का ये अमर गान, जब फिर से सम्मान प्राप्त कर रहा है, वो भी सोनिया गांधी को रास नहीं आता है। सोनिया जी, 140 करोड़ जनता आपको देख रही है।”

शाह ने कहा, “आपके द्वारा किया गया ये पाप इस देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। कोई स्वप्न में भी कैसे सोच सकता है कि वंदे मातरम का गान अधूरा छोड़ दिया जाए? कांग्रेस के लोगों को शर्म आनी चाहिए और थोड़ी भी शर्म बची है तो दोनों हाथ जोड़कर बंकिम बाबू और देश की जनता से उन्हें माफी मांगनी चाहिए।”

बंकिम चंद्र के वंशज नाराज

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी से मांग की है कि वह स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में हुई ‘वंदे मातरम’ के गायन से जुड़ी कथित घटना को लेकर बिना शर्त माफी मांगें। चटर्जी ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर असहजता नजर आई।से रोकने के बार-बार प्रयास किए गए। चटर्जी ने गांधी को लिखे पत्र में कहा कि 15 अगस्त को जब देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब हुई कथित घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि एक ऐतिहासिक भूल का शर्मनाक दोहराव भी है।

नैहाटी से विधायक चटर्जी ने कहा कि वह एक सामान्य नागरिक, देशभक्त और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज के रूप में यह पत्र लिख रहे हैं। उन्होंने इस घटना को लेकर गहरा दुख, खालीपन और आक्रोश व्यक्त किया। चटर्जी ने श्री अरविंद के इस कथन का उल्लेख किया कि इस मंत्र ने राष्ट्र को देशभक्ति के धर्म की दीक्षा दी थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की धरती पर ‘वंदे मातरम’ को पूरा गाने में कथित हिचक खुदीराम बोस जैसे शहीदों के बलिदान का अपमान है।

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरला देवी चौधरानी ने 1905 में कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में इसे गाया था। बाल गंगाधर तिलक के समर्थकों ने 1909 में उन पर राजद्रोह के मुकदमे के दौरान इसका गायन किया था। हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में राष्ट्रवादी छात्रों ने 1938 में निजाम की पाबंदियों के बावजूद इसे अपने आंदोलन का नारा बनाया था।

‘जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुक गई थी कांग्रेस’

चटर्जी ने 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा इस गीत की प्रस्तुति का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की कथित दोहरी नीति नई नहीं है। चटर्जी ने कहा कि 1937 में पार्टी मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुक गई थी और उसी वर्ष अक्टूबर में गीत को छोटा कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि उस ‘‘समझौते’’ की छाया पार्टी के मौजूदा आचरण में फिर दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की अपनी छात्र इकाई छात्र परिषद जब मंत्र मोदेर संजीवन-वंदे मातरम नारे का इस्तेमाल करती है तो फिर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसी गीत को लेकर असहज क्यों है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि देश की सामूहिक स्मृति, बंकिम चंद्र की अमर विरासत और शहीदों के खून एवं बलिदान से प्राप्त पवित्र राष्ट्रीय प्रतीक है।

चटर्जी ने कहा कि इस गीत का सम्मान करना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का सम्मान करने के समान है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इतिहास किसी को माफ नहीं करता। जो नेतृत्व स्वतंत्रता के अपने ही मंत्र का सम्मान नहीं करता, उसे इतिहास गुमनामी के अंधकार में धकेल देगा। चटर्जी ने कहा कि इस घटना से पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने गांधी से पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना किसी शर्त के माफी मांगने की अपील की है।

क्या है पूरा विवाद?

BJP ने दावा किया है कि कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने पर सोनिया गांधी समेत पार्टी के कुछ नेताओं ने आपत्ति जताई थी। 15 अगस्त को कांग्रेस के कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आया है जिसमें जब ‘वंदे मातरम’ बजाया जा रहा था, तब सोनिया गांधी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से बात कर रही थीं। इसके बाद गांधी और खड़गे को कथित तौर पर गाना रोकने का इशारा करते हुए देखा जा सकता है।

हालांकि, कांग्रेस ने इस बात से इनकार किया कि ‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण को गाने से रोकने की कोई कोशिश की गई थी। पार्टी ने कहा कि गांधी सिर्फ़ खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं। पिछले महीने संसद ने एक विधेयक पारित किया था जिसमें राष्ट्रगीत के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान किया गया है। कानून में ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा दिया गया है।

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अंग्रेजों ने भारत से लूटे 200 ट्रिलियन डॉलर! कभी दुनिया की 27% GDP था भारत, जानिए यहां से कितना लेकर गए

भारत और 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। देश को 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से आजादी मिली थी। लेकिन आजादी मिलने के बाद देश को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था। आजादी के बाद देश की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर स्थिति में थी। अंग्रेजों ने करीब 200 साल तक भारत के संसाधनों का भरपूर इस्तेमाल अपने लिए किया। वहीं करीब 200 साल के ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के संसाधनों और संपदा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल ब्रिटेन के हितों के लिए किया गया।

न्यूज 18 के मुताबिक, अर्थशास्त्रियों के पुराने आकलनों के मुताबिक, 1765 से 1938 के बीच ब्रिटिश क्राउन और ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत से करीब 45 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति बाहर ले गई। लंबे समय तक चले इस आर्थिक शोषण का असर भारत की आर्थिक स्थिति पर पड़ा और आजादी के समय देश को कई बड़ी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

नेहरू के सामने बड़ी समस्या

1947 के बाद पीएम जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कमजोर अर्थव्यवस्था को संभालना, उद्योगों को बढ़ावा देना और देश में बुनियादी ढांचे का विकास करना था। लगभग दो शताब्दियों के औपनिवेशिक शासन के बाद भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार को लंबे समय तक बड़े स्तर पर काम करना पड़ा।

करीब 200 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति गई बाहर

पुराने अनुमानों को अगर आज की आर्थिक स्थिति के हिसाब से देखा जाए और उनमें महंगाई, निवेश पर मिलने वाले रिटर्न और मौजूदा बाजार मूल्य को शामिल किया जाए, तो भारत से बाहर गई संपत्ति की अनुमानित कीमत 2026 में करीब 200 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। ये आंकड़ा बताते हैं कि ब्रिटिश शासन में भारत की संपदा बाहर जाती रही, जिससे आजादी के समय देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई।

‘काउंसिल बिल्स’ बड़ा तरीका

भारत से पैसा बाहर ले जाने का एक बड़ा तरीका ‘काउंसिल बिल्स’ व्यवस्था थी। 1765 से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी भारत से कपड़ा, मसाले और शोरा खरीदने के लिए ब्रिटेन से लाया गया सोना-चांदी इस्तेमाल करती थी। लेकिन बंगाल में टैक्स वसूलने का अधिकार मिलने के बाद कंपनी ने तरीका बदल दिया। इसके बाद भारत से मिले टैक्स के पैसे से ही भारतीय सामान खरीदा जाने लगा और इस तरह भारत की कमाई का बड़ा हिस्सा ब्रिटेन पहुंचने लगा।

  1. टैक्स वसूली: भारतीय किसानों और व्यापारियों से सीधे टैक्स लिया जाता था।
  2. टैक्स से खरीदारी: ब्रिटिश सरकार टैक्स से जुटाए गए राजस्व का करीब एक-तिहाई हिस्सा भारतीय सामान खरीदने में इस्तेमाल करती थी, जिसे बाद में ब्रिटेन भेज दिया जाता था।
  3. बिना असली भुगतान: भारतीयों को उनके ही टैक्स के पैसे से भुगतान किया जाता था, जिससे ब्रिटेन को भारत का कीमती सामान लगभग मुफ्त में मिलता था।

GDP में आई गिरावट

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया। 1700 के आसपास भारत का वैश्विक GDP में हिस्सा करीब 27% बताया जाता है, लेकिन 1947 तक यह घटकर 3% से भी कम रह गया। ब्रिटिश नीतियों का असर भारत के कपड़ा उद्योग पर भी पड़ा। भारतीय कपड़ों पर ब्रिटेन में भारी टैक्स लगाया गया, जबकि ब्रिटिश सामान भारत में आसानी से बिकने लगा। इससे ढाका, मुर्शिदाबाद और सूरत जैसे पुराने औद्योगिक केंद्रों को बड़ा नुकसान हुआ। काम कम होने के बाद कई कारीगर और बुनकर खेती पर निर्भर हो गए और भारत धीरे-धीरे तैयार सामान के बजाय कपास, अफीम और नील जैसी कच्ची उपज के निर्यातक देश के रूप में बदल गया।

दूसरे विश्व युद्ध में हुआ नुकसान

1858 के बाद भी भारत की कमाई का बड़ा हिस्सा ब्रिटिश सरकार से जुड़े खर्चों पर ही लगाया जाता रहा। ‘होम चार्ज’ के तहत भारतीय करदाताओं के पैसों से ब्रिटिश अधिकारियों की पेंशन, रेलवे निवेश पर ब्याज और विदेशों में ब्रिटिश सेना के अभियानों का खर्च उठाया जाता था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यह आर्थिक दबाव और बढ़ गया। युद्ध के खर्च और कर्ज का असर भारत में महंगाई और खाद्य संकट के रूप में दिखाई दिया। लंबे समय तक चले इस आर्थिक बोझ के कारण 1947 में आजादी मिलने तक भारत की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी थी।

आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत

आजादी के समय भारत की नई सरकार के सामने पैसों और संसाधनों की बड़ी कमी थी। देश में गरीबी और खाद्य संकट गंभीर था, उद्योग कमजोर हो चुके थे और विभाजन के बाद बड़ी संख्या में आए शरणार्थियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी भी सरकार पर थी। सीमित सरकारी खजाने के बावजूद सड़कों, बिजली, सिंचाई और दूसरी जरूरी सुविधाओं के विकास पर काम शुरू करना पड़ा। लेकिन, आजादी के बाद के दशकों में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रगति की और आज वह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। देश अब लंबे समय के विकास लक्ष्यों पर ध्यान देते हुए अपनी आर्थिक ताकत को और बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

शासन प्रमुख के तौर पर लगातार तिरंगा फहराने का नया रिकॉर्ड बना गये मोदी!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से आज तेरहवीं बार झंडा फहराया। इसी के साथ मोदी ने शासन प्रमुख के तौर पर झंडा फहराने का एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया, लगातार 25 बार झंडोत्तोलन करने का। गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी पहले ही बारह बार राष्ट्र ध्वज राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में फहरा चुके हैं और देश के प्रधानमंत्री के तौर पर आज तेरहवीं बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराकर वो सिल्वर जुबली का ऐसा रिकॉर्ड बना गये, जो जल्दी टूटने वाला नहीं है।

इससे पहले सबसे अधिक झंडोत्तोलन का रिकॉर्ड राज्य स्तर पर तीन मुख्यमंत्रियों के नाम था, ज्योति बसु, पवन कुमार चामलिंग और नवीन पटनायक ने लगातार चौबीस बार झंडोत्तोलन करने का रिकॉर्ड बनाया था। उन तीनों में सबसे पहले ये कीर्तिमान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर ज्योति बसु ने जून 1977 से लेकर नवंबर 2000 के बीच बनाया था। आगे चलकर सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने दिसंबर 1994 से मई 2019 के बीच और ओडीशा के मुख्यमंत्री के तौर पर के नवीन पटनायक ने मार्च 2000 से जून 2024 के बीच इसकी बराबरी की। मोदी इन तीनों से अब आगे निकल गये हैं। न सिर्फ सीएम से लेकर पीएम तक सबसे अधिक समय तक प्रशासनिक प्रमुख बने रहने का, बल्कि सबसे अधिक बार झंडा फहराने का, जो रिकॉर्ड उन्होंने देश के अस्सीवें स्वतंत्रता दिवस समारोह के मौके पर बनाया।

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राष्ट्र ध्वज फहराने के मामले में आज सिल्वर जुबली मनाने वाले मोदी अगले दो महीने के अंदर अपने प्रशासनिक कैरियर की भी सिल्वर जुबली मनाने जा रहे हैं। सात अक्टूबर के दिन उन्हें प्रशासन के शीर्ष पर रहते हुए 25 साल हो जाएंगे, सात अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात का सीएम बनने वाले मोदी लगातार मिले जनसमर्थन के कारण सीएम से पीएम तक की अपनी प्रशासनिक यात्रा की निरंतरता को बनाए हुए हैं।

मोदी से पहले लगातार शासन के अगुआ बने रहने का रिकॉर्ड पवन कुमार चामलिंग के नाम था, जो सिक्किम के मुख्यमंत्री 24 साल 165 दिन लगातार रहे थे, 12 दिसंबर 1994 से लेकर 26 मई 2019 तक। मोदी चामलिंग का ये रिकॉर्ड पहले ही तोड़ चुके हैं, सिर्फ सीएम के तौर पर कौन कहे, सीएम- पीएम के तौर कुल मिलाकर सबसे लंबे समय तक प्रशासन के शीर्ष पर बने हुए हैं मोदी।

लेकिन अगर स्वतंत्रता दिवस समारोह की ही बात की जाए, तो मोदी ने इसे सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़कर जन उत्सव में बदल दिया है पिछले 25 वर्षों में। यही नहीं, इसे बड़े संकल्प लेने और अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करने का भी अवसर बना दिया है मोदी ने। आखिर प्रजातंत्र में जन प्रतिनिधि को अपना हिसाब देने और शासन की दशा- दिशा और बड़े लक्ष्यों को तय करने का स्वतंत्रता दिवस समारोह से बड़ा अवसर क्या हो सकता है।

बहुत कम लोगों को ध्यान में होगा कि सात अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री की कमान संभालने वाले मोदी को पहली बार शासन प्रमुख के तौर पर झंडा फहराने का अवसर 15 अगस्त 2002 को मिला था। ये वो समय था, जब मोदी गंभीर चुनौतियों से गुजर रहे थे। 27 फरवरी 2002 को गोधरा कांड में 59 कारसेवकों को साजिशन जलाकर मार देने की घटना की वजह से गुजरात के कई हिस्सों में दंगे भड़क उठे थे और इसे लेकर मोदी पर विपक्ष हमलावर था।

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मोदी ने इसके सामने जनता की अदालत में जाने का फैसला किया था और 19 जुलाई 2002 को गुजरात विधानसभा को भंग करने की सिफारिश राज्यपाल से करते हुए जल्दी चुनाव कराने की मांग की थी। लेकिन तब के मुख्य चुनाव आयुक्त जेम्स माइकल लिंगदोह ने गुजरात में शीघ्र चुनाव कराने से मना कर दिया था।

ऐसे में राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी ने पहली बार अगस्त 2002 में झंडोत्तोलन किया था। राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम गुजरात की राजधानी गांधीनगर की जगह अहमदाबाद में हुआ था। दरअसल ये किसी नई परंपरा की शुरूआत नहीं थी, बल्कि गुजरात की स्थापना के बाद से ही ये हो रहा था।

एक मई 1960 को अलग राज्य के तौर पर अस्तित्व में आये गुजरात की पहली राजधानी होने का गौरव राज्य के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद को ही हासिल हुआ था और इसलिए यहां के पुलिस स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य कार्यक्रम आयोजित होने लगा, जो 1961-62 के साल में बना था। बाद में गांधीनगर में राजधानी शिफ्ट हो जाने के बावजूद स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह अहमदाबाद में ही होता रहा, उसी पुलिस स्टेडियम में।

अहमदाबाद के पुलिस स्टेडियम में ही 15 अगस्त 2002 की सुबह जब मोदी ने सीएम के तौर पर पहली बार झंडोत्तोलन किया, तो इस अवसर को गुजरात को लेकर अपने बड़े सपने सामने रखने का अवसर बना दिया। गुरूवार की उस सुबह मोदी ने शिक्षा पर बल देते हुए ग्रामीण इलाकों में रहने वाले छात्रों के लिए इंटरनेट के जरिये आधुनिक शिक्षा मुहैया कराने की बात की। यही नहीं, अपनी नई शिक्षा नीति को सामने रखते हए मदरसों के आधुनिकीकरण के साथ ही सीमावर्ती इलाको के सैनिक स्कूलों को भी उन्नत करने की बात की।

मोदी ने तब राज्य में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की संख्या भी बढ़ाने की बात की, ताकि गुजराती और हिंदी के साथ ही अंग्रेजी सिखकर भी राज्य के बच्चे राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकें, अपनी जगह बना सकें। जिस राज्य की स्थापना के साथ ही गुजराती भाषा के स्कूलों पर जोर था, वहां के लिए ये एक क्रांतिकारी, आधुनिक सोच थी, ‘त्रिभाषा फार्मूले’ को पूरी ईमानदारी के साथ लागू करने की शुरूआत थी।

मोदी ने 15 अगस्त 2002 की उस सुबह शिक्षा से आगे बढ़कर सुशासन पर भी जोर दिया। मोदी का कहना था कि गुजरात के दो प्रमुख सपूतों- गांधी और सरदार की अगुआई में आजादी हासिल करने वाले भारत में ‘सुराज’ के बाद ‘सुशासन’ भी उतना ही जरूरी है, और इस मामले में गुजरात को पहल लेनी होगी।

मोदी ने 15 अगस्त 2002 की उस सुबह जिस सुशासन का संकल्प लिया था, अगले एक दशक में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर वही उनके शासन का मूल मंत्र रहा, जिसके आधार पर गुजरात मॉडल विकसित हुआ और पूरे देश में उनकी शोहरत हुई। इसी सुशासन के बल पर जनता के हृदय में अपनी जगह बनाकर मई 2014 में मोदी देश के प्रधानमंत्री बने।

लेकिन देश का प्रधानमंत्री बनने से पहले करीब पौने तेरह साल लंबे अपने सीएम कैरियर में मोदी ने जो दर्जन भर अवसरों पर गुजरात में राष्ट्र ध्वज फहराया, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर, मोदी ने उन अवसरों को फटाफट जन उत्सव में बदल दिया।

दिसंबर 2002 में राज्य विधानसभा का चुनाव अपनी अगुआई में जीताने के बाद स्वतंत्रता दिवस समारोह का जो पहला मौका मोदी को मिला, उन्होंने उस मौके को राज्य की जनता के लिए अनूठा बना दिया। गुजरात की स्थापना के बाद पहली बार हुआ, जब स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह अहमदाबाद की जगह पाटण में मना, जिस पाटण को गुजरात की प्राचीन राजधानी रहने का गौरव भी हासिल रहा है।

पाटण में तब पूरे शहर को सजाया- संवारा गया, भांति- भांति के कार्यक्रम किये गये।

पूरे शहर में लाइटिंग ऐसी, मानो पूरा पाटण दीपावली मना रहा हो। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी धूम रही। न सिर्फ पाटण शहर के लोग, बल्कि राज्य के कई हिस्सो से यहां लोग पहुंचे। सबके लिए ये सुखद आश्चर्य था, किसी ने कल्पना नहीं की थी कि जिले स्तर पर कभी राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह होगा, अमूमन होता तो ये था कि ऐसे कार्यक्रम या तो राज्य की राजधानी में होते थे या फिर सबसे बड़े शहर में। लेकिन मोदी तो लीक से हटकर चलने के आदी रहे हैं, उन्हें कहां रूटीन चीजों में भरोसा।

15 अगस्त 2003 से पाटण में जो सिलसिला शुरु हुआ, वो मोदी के कार्यकाल के दौरान तो रहा ही, उनके राज्य छोड़ने के बाद भी कोविड की महामारी से आए व्यवधान को छोड़ दें, तो ये सिलसिला अब भी जारी है। मोदी जब आज लाल किले से झंडा फहरा रहे थे, उनके गृह राज्य गुजरात में उनकी शुरू की गई परंपरा के तहत ही राज्य स्तरीय 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह अहमदाबाद या गांधीनगर की जगह अमरेली में मनाया जा रहा था।

खुद मोदी ने गुजरात में राज्य सरकार के मुखिया के तौर पर जो आखिरी झंडोत्तोलन किया था, वो कच्छ जिले के मुख्यालय भुज में। भुज के लालन कॉलेज से ही 15 अगस्त 2013 के दिन मोदी ने लाल किले की तरफ बढ़ने की हुंकार भरी थी। यहां तक कि कार्यक्रम स्थल के चारों तरफ भी लालन कॉलेज से लाल किले की तरफ बढ़ते मोदी के ढेरों पोस्टर- बैनर और होर्डिंग्स लगे थे।

हुआ भी वही, अगले साल मोदी लालन कॉलेज की जगह लाल किले से झंडोत्तोलन करते नजर आए। 15 अगस्त 2014 की सुबह जब देश के प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी ने पहली बार तिरंगा फहराया, लगे हाथों अपनी प्राथमिकताओं का जिक्र किया, जिसमें स्वच्छ भारत अभियान की बात की थी, सबके लिए शौचालय की बात थी। तब ज्यादातर लोगों को आश्चर्य हुआ था, एक तो लाल किले से कभी किसी प्रधानमंत्री ने इस तरह की बात नहीं की थी, विपक्ष ने माखौल भी उड़ाया था। लेकिन ये मोदी की प्राथमिकताओं का संकेत था, जिसके केंद्र में देश का आम आदमी रहा है।

वहां से मोदी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा है, हर बार लाल किले की प्राचीर से बड़े लक्ष्य का ऐलान करते हुए और उसे पाने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ने की योजना और उसका रोड मैप रखते आए हैं वो। बतौर पीएम तेरहवीं बार भी लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी आज ऐसा ही करते नजर आए। वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए शक्ति की सप्तधारा बहाने की बात की, एक सौ चालीस करोड़ देशवासियों की सामूहिक ताकत के साथ इस सपने को हकीकत में बदलने की बात की।

मोदी खुली आंखों से सपने देखते हैं, ऐसा वो खुद बार- बार कहते हैं, गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब भी ये बात कहते थे, 2014 से देश के प्रधानमंत्री हैं, तब भी ये बात करते हैं। मोदी का मानना है कि खुली आंखों से देखे हुए सपने पूरे होते हैं, जरूरत होती है इसके लिए तनतोड़ मेहनत की और अहर्निश प्रयासों की। मोदी को इन दोनों चीजों से कभी परहेज नहीं रहा है, तभी बिना रूके, बिना थके, पचीस वर्षों की प्रशासनिक यात्रा को जल्दी ही पूरा करने जा रहे हैं, विकसित भारत की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहे हैं, Gen-Z से लेकर नौजवानों, किसानों और महिलाओं को भी इस लक्ष्य को पाने में योगदान देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

Independence Day 2026: तेरी मिट्टी से लेकर संदेशे आते हैं तक…, देशभक्ति से भरपूर हैं हिंदी सिनेमा के ये गाने

Independence Day 2026: भारत इस साल अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। और इस मौके को मनाने का देशभक्ति गीतों से बेहतर तरीका क्या हो सकता है? आज़ादी के बाद के इतिहास में, देश ने ऐसे शानदार गाने दिए हैं जो हर भारतीय के अपने देश के प्रति प्यार और सम्मान को ज़ाहिर करते हैं।

अपनी देशभक्ति की भावना को जगाने के लिए इन गानों के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाएं। ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ जैसे क्लासिक गानों से लेकर ए.आर. रहमान और सुखविंदर सिंह के दिल को छू लेने वाले गाने ‘देश मेरे देश’ तक, ये गाने देश के प्रति आपके प्यार को ज़ाहिर करने के लिए एकदम सही हैं।

ऐ मेरे वतन के लोगों

भारतीय देशभक्ति गीतों की कोई भी प्लेलिस्ट लता मंगेशकर के इस क्लासिक गाने के बिना पूरी नहीं हो सकती। 1962 के भारत-चीन युद्ध में अपनी जान गंवाने वाले सैनिकों के सम्मान में लता मंगेशकर ने इसे पहली बार 1963 में लाइव गाया था। ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ को सी. रामचंद्र ने कंपोज़ किया था और कवि प्रदीप ने लिखा था।

देश मेरे देश

जब हम ‘द लेजेंड ऑफ़ भगत सिंह’ फ़िल्म की बात करते हैं, तो सबसे पहले यही गाना याद आता है। ए.आर. रहमान का बनाया यह दिल को छू लेने वाला गाना सुखविंदर सिंह ने गाया है। ए.आर. रहमान ने ‘माँ तुझे सलाम’ जैसे कई देशभक्ति वाले गाने बनाए हैं, लेकिन देश की आज़ादी के लिए अपनी जान देने वालों को सम्मान देने के लिए ‘देश मेरे देश’ एक बेहतरीन गाना है।

ऐ वतन

आलिया भट्ट की फ़िल्म ‘राज़ी’ में पाकिस्तान में मौजूद एक भारतीय जासूस की कहानी दिखाई गई थी। ‘ऐ वतन’ गाने ने फ़िल्म के मुख्य विषयों—देश के लिए त्याग और प्रेम—को बखूबी दर्शाया है।

तेरी मिट्टी

मनोज मुंतशिर के लिखे और बी प्राक के संगीतबद्ध किए गए गाने ‘तेरी मिट्टी’ को सुनकर इस स्वतंत्रता दिवस पर आपकी आँखों में ज़रूर आँसू आ जाएँगे। यह गाना उन सैनिकों को श्रद्धांजलि देता है जिन्होंने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। यह गाना 2019 की फ़िल्म ‘केसरी’ का हिस्सा था।

‘ये जो देश है तेरा’

फिल्म ‘स्वदेश’ के इस गाने में ए.आर. रहमान की आवाज़ और जावेद अख्तर के बोलों ने लोगों के अपने देश के लिए प्यार और लगाव को बखूबी दिखाया है। बैकग्राउंड में बजती शहनाई गाने में पुरानी यादों का एहसास जगाती है। ‘ये जो देश है तेरा’ गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस की प्लेलिस्ट का एक ज़रूरी हिस्सा बन गया है।

संदेशे आते हैं – बॉर्डर

फिल्म ‘बॉर्डर’ का ‘संदेशे आते हैं’ आज भी लोगों के दिलों में बसा है। ये देशभक्ति गानों की लिस्ट में खास जगह रखता है। गाने में सैनिकों और उनके परिवारों के बीच की भावनाओं को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। इसे बॉर्डर 2 में रीक्रिएट भी किया गया है।

तो, इस स्वतंत्रता दिवस पर आप अपनी प्लेलिस्ट में कौन से गाने शामिल कर रहे हैं?

मुक्त व्यापार समझौतों से बने हैं बड़े मौके, MSME उठाएं फायदा: PM मोदी

भारत ने 2014 से अब तक लगभग 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) को अंतिम रूप दिया है। इससे देश के सूक्ष्म, लघु और मंझोले उद्यमों (MSMEs) के लिए एक बड़ा अवसर तैयार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छोटे उद्यमों से इन अवसरों का लाभ उठाने और इस मौके को हाथ से न जाने देने की अपील की है। उन्होंने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच का विस्तार करने और यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि कपड़ा, मशीनरी और दवाओं जैसे सामान अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी जगह बनाएं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें वैश्विक मानकों (ग्लोबल स्टैंडर्ड्स) पर खरा उतरना होगा।

भारत ने हाल में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, EFTA समूह और ओमान के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं। यूरोपीय संघ (EU) और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौतों को भी अंतिम रूप दिया जा चुका है। इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस समारोह ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय गीत को विशेष रूप से समर्पित है। लाल किले के समारोह में आज, शनिवार को पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गाया गया।

देश की मैन्युफैक्चरिंग में MSME सेक्टर का हिस्सा लगभग 35.4 प्रतिशत है। वहीं एक्सपोर्ट में लगभग 48.58 प्रतिशत और GDP में 31.1 प्रतिशत का योगदान है। MSME सेक्टर में 7.47 करोड़ से ज्यादा उद्यम हैं और यह 32.82 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। यह खेती के बाद रोजगार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर है। दुनिया भर में कुल कारोबारों में MSMEs का हिस्सा लगभग 90 प्रतिशत है। ये कुल वैश्विक रोजगार में 50 प्रतिशत से ज्यादा का योगदान देते हैं।

अवसर को गंवाने का जोखिम नहीं उठा सकते

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, ”भारत की वैश्विक साख बढ़ रही है। आज यह विश्व मंच पर एक सम्मानित राष्ट्र बन रहा है। भारत के पास एक स्थिर राजनीतिक जनादेश और सरकार, एक जीवंत लोकतंत्र और एक मजबूत न्याय व्यवस्था है। ये सभी भारतीय संविधान द्वारा निर्देशित हैं। दुनिया हमारी क्षमताओं को पहचान रही है, यही वजह है कि 2014 से हमने लगभग 40 देशों के साथ FTA किया है।”

उन्होंने आगे कहा, ”इन व्यापार समझौतों से तैयार हुए विशाल अवसर को देखिए। मैं अपने MSME क्षेत्र से आग्रह करना चाहता हूं कि वे इस मौके को हाथ से न जाने दें। हमें वैश्विक मंच तक पहुंचना है। भारतीय उत्पाद, चाहे वे कपड़ा हों, मशीनरी हों या दवाएं, उन्हें वैश्विक बाजारों में जगह बनाने की जरूरत है। हम इस अवसर को गंवाने का जोखिम नहीं उठा सकते।”

प्रधानमंत्री ने कहा, ”हमें वैश्विक स्तर पर उत्पादों की मौजूदा उपलब्ध गुणवत्ता से बेहतर गुणवत्ता और कम कीमत की पेशकश करनी चाहिए। पंजाब के लुधियाना से लेकर तमिलनाडु के तिरुप्पुर तक फैले हमारे कपड़ों में वैश्विक बाजार तक पहुंचने की क्षमता है।”

कभी ‘फ्रेजाइल फाइव’ में था भारत, 12 साल में इस कैटेगरी से निकलकर बना सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था: PM मोदी

घरेलू समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए भी भारी अवसर

पीएम ने यह भी कहा कि इन समझौतों ने घरेलू समुद्री खाद्य (seafood) क्षेत्र के लिए भी भारी अवसर खोले हैं। केरल से लेकर गुजरात और तमिलनाडु से लेकर बंगाल तक, ये FTA घरेलू झींगा निर्यात को बढ़ावा दे रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा, ”मैं चाहूंगा कि हम इस स्थिति का पूरा फायदा उठाएं।” पीएम ने हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी और ड्रोन प्रणाली जैसी एडवांस्ड क्षमताओं में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर देते हुए भारत को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाने की भी वकालत की। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के घरेलू रक्षा उत्पादन की मात्रा वित्त वर्ष 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई।

कभी ‘फ्रेजाइल फाइव’ में था भारत, 12 साल में इस कैटेगरी से निकलकर बना सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था: PM मोदी

भारत को कभी ‘फ्रेजाइल फाइव’ में गिना जाता था। लेकिन पिछले 12 वर्षों में देश ‘फ्रेजाइल फाइव’ से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था में बदल गया है। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कही। ‘फ्रेजाइल फाइव’ वैश्विक वित्तीय और आर्थिक जगत में इस्तेमाल किया जाने वाला एक शब्द है, जिसका अर्थ है ”5 नाजुक या कमजोर अर्थव्यवस्थाएं।” इनमें भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्किये को रखा गया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1947 में आजादी के बाद भारत के बड़े सपने थे, लेकिन प्रगति अक्सर उस गति से कम रही, जिसे हासिल करने की देश की आकांक्षा थी। आज भारत अभूतपूर्व गति और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और अब कोई भी ताकत 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प को नहीं रोक सकती। भारत का 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने का बड़ा सपना है, जो 140 करोड़ भारतीयों की ताकत और संकल्प से साकार होगा।

उन्होंने कहा, ”जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला राष्ट्र एक विकसित देश बनने का लक्ष्य निर्धारित करता है, तो यह दुनिया को एक शक्तिशाली संदेश देता है और इससे दुनिया का भारत को देखने का नजरिया भी बदल रहा है।” यह भी कहा कि कोई भी देश तब महान बनता है जब वह अपनी उपलब्धियां हासिल करता है। भारत को अब छोटे सपनों के साथ आगे बढ़ने के बजाय बड़े सपने देखने होंगे और ऊंचे संकल्प लेने होंगे। बड़े सपने सोच का विस्तार करते हैं और संकल्प दृढ़ होने पर कठिनाइयों व आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप सामने आता है।

रक्षा उत्पादन 4 गुना, डिजिटल लेनदेन 100 गुना बढ़ा

पिछले 12 वर्षों में अपनी सरकार की उपलब्धियों पर रोशनी डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि रक्षा उत्पादन 4 गुना बढ़ गया है, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग 7 गुना बढ़ गई है, आधुनिक रेलवे कोच के उत्पादन में 21 गुना वृद्धि हुई है, इंटरनेट यूजर्स की संख्या 4 गुना बढ़ गई है और डिजिटल लेनदेन 100 गुना बढ़ा है। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के करोड़ों नागरिकों ने, चाहे वे दलित हों, पीड़ित हों, वंचित हों, आदिवासी हों, गांव या शहर में रहने वाले हों, गरीब या मध्यम वर्ग के हों और देश के किसी भी हिस्से से आते हों, एक संकल्प और समर्पण के साथ देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए योगदान दिया है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि इतने कम समय में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं।

80th Independence Day: कॉम्पिटीटिव एग्जाम्स की तैयारी करने वाले छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग, PM मोदी ने किया ऐलान

दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं जीना

प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प पर जोर देते हुए कहा कि भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं जीना है। दुनिया में बहुत कुछ सस्ता और जल्दी मिल सकता है, लेकिन इससे देश की अपनी क्षमता विकसित नहीं होती। अपने हितों की सुरक्षा भारत को खुद करनी होगी और इसी उद्देश्य से ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों को आगे बढ़ाया जा रहा है। पीएम ने यह भी कहा कि देश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत ने पहले ही 3 सेमीकंडक्टर प्लांट्स में उत्पादन शुरू कर दिया है, और आने वाले वर्षों में 5 से 8 और प्लांट स्थापित होने की उम्मीद है।

80th Independence Day: PM मोदी का मैरून बंधनी साफा क्यों है खास? जानें 13 साल की पगड़ी की पूरी कहानी

PM Modi Turban: पिछले 13 सालों से आजादी के दिन एक चीज हमेशा एक जैसी रही है: पीएम मोदी की शानदार पगड़ी। उन्होंने इस साल भी राजघाट से शुरुआत की और फिर लाल किले पर अपना 13वां भाषण देने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पीले, हरे और सफेद बंधनी पैटर्न वाली गहरे मैरून रंग की पगड़ी पहनी थी, जिसके साथ सफेद कुर्ता-पायजामा और भूरे रंग की नेहरू जैकेट थी।

2014 में पहली बार पहनने के बाद से उनकी पगड़ियों में राजस्थान की लहरिया से लेकर गुजरात की बंधनी तक की झलक दिखी है। उनकी हर पगड़ी उस साल के माहौल का एक खास संकेत मानी जाती है।

पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में पगड़ी या राजस्थान में जिसे ‘साफा’ कहा जाता है, सम्मान और क्षेत्रीय पहचान का प्रतीक मानी जाती है। इसके कपड़े, प्रिंट और पहनने के तरीके में भी खास मायने छिपे होते हैं। इससे पता चलता है कि यह किस समुदाय की परंपरा से जुड़ी है, किस राज्य से आई है और कभी-कभी इसके रंगों में राजनीतिक संदेश भी देखा जाता है।

पिछले एक दशक में जो चीज पहले सिर्फ पीएम मोदी की व्यक्तिगत पसंद और स्टाइल मानी जाती थी, वह अब स्वतंत्रता दिवस की तस्वीरों और कवरेज का एक खास हिस्सा बन गई है। हर साल फैशन लेखक, कपड़ा और कला के जानकार और राजनीतिक विश्लेषक उनकी पगड़ी के रंग और डिजाइन को अपने-अपने नजरिए से समझते हैं।

असल में पगड़ी का क्या मतलब है?

सिर्फ दिखावे से कहीं ज्यादा, भारत में पगड़ी का गहरा सांस्कृतिक महत्व है। ऐतिहासिक रूप से यह सिख समुदाय से जुड़ी रही है। उनके गुरुओं ने इसे इस बात के प्रतीक के तौर पर अपनाया कि सभी इंसान आजाद और बराबर हैं – साथ ही, इससे बालों की सुरक्षा भी होती है, जिनका इस धर्म में धार्मिक महत्व है।

कई हिंदू परंपराओं में पगड़ी ताकत और रुतबे की निशानी भी मानी जाती है, और शादियों जैसे खुशी के मौकों पर इसे पहनना आम बात है।

प्रधानमंत्री मोदी के मामले में, जानकारों का कहना है कि उनकी पसंद – जैसे राजस्थानी बंधनी, गुजराती लहरिया, और तिरंगे वाले डिजाइन – भारत की क्षेत्रीय बुनाई परंपराओं को सम्मान देने का भी काम करती हैं।

क्या उनके रंग चुनने के तरीके में कभी कोई राजनीतिक संदेश छिपा होता है?

उनके हाल के भाषणों की कवरेज के अनुसार, अक्सर ऐसा होता है। 2025 में, उनके पूरी तरह से केसरिया रंग के साफे को साहस, त्याग और “विकसित भारत” के संदेश से जोड़कर देखा गया। 2022 में, केसरिया और हरे रंग की धारियों वाली सफेद पगड़ी सीधे तौर पर तिरंगे की झलक देती थी, जिसे “हर घर तिरंगा” अभियान के समय पहना गया था।

अब तक की कहानी क्या है, साल-दर-साल?

पीएम मोदी की स्वतंत्रता दिवस वाली पगड़ी 2014 से ही समारोह का एक खास हिस्सा रही है। हर साल इसके रंग, डिजाइन और कपड़े में बदलाव देखने को मिला है। 2026 तक की तस्वीर कुछ ऐसी रही:

  • 2014: पहली बार लाल किले से संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने लाल रंग की जोधपुरी बंधेज साफा पहना था, जिसमें हरे रंग का लंबा सिरा था।
  • 2015: पीले रंग की राजस्थानी पगड़ी पहनी, जिस पर लाल और हरे रंग का क्रॉस पैटर्न था।
  • 2016: गुलाबी और पीले रंग की बंधेज पगड़ी में नजर आए।
  • 2017: चटख पीले रंग की पगड़ी पहनी, जिसमें लाल और पीले रंग के पारंपरिक पैटर्न थे।
  • 2018: भगवा और लाल रंग की पगड़ी पहनी, जिसका लंबा सिरा काफी चर्चा में रहा।
  • 2019: राजस्थान की पारंपरिक लहरिया डिजाइन वाली बहुरंगी साफा पहनी।
  • 2020: कोरोना महामारी के दौरान भगवा-और-क्रीम रंग की साफा के साथ ऐसा स्टोल पहना, जिसे चेहरे को ढकने के लिए भी इस्तेमाल किया गया।
  • 2021: भगवा और लाल रंग की पगड़ी पहनी, जिसके पीछे गुलाबी रंग का लंबा सिरा था।
  • 2022: तिरंगे से प्रेरित सफेद पगड़ी, जिसमें भगवा और हरे रंग की धारियां थीं। यह ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के दौरान खास तौर पर चर्चा में रही।
  • 2023: राजस्थान की बहुरंगी बंधनी पगड़ी में नजर आए, जिसमें पीला, हरा और लाल रंग प्रमुख था।
  • 2024: राजस्थानी लहरिया को चुना। पगड़ी में नारंगी, गहरे हरे और पीले रंग की लहरदार धारियां थीं।
  • 2025: पूरी तरह भगवा साफा पहना, जिसे साहस, त्याग और ‘विकसित भारत’ के संदेश से जोड़कर देखा गया।
  • 2026: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल रंग की बंधनी प्रिंट वाली राजस्थानी साफा पहनी, जिसके पीछे लंबा सिरा था। इसे सफेद कुर्ता-पायजामा, भूरे रंग की नेहरू जैकेट और तिरंगे पॉकेट स्क्वायर के साथ पहना गया।

इस तरह 2014 से 2026 तक पीएम मोदी की पगड़ियां सिर्फ पहनावे का हिस्सा नहीं रहीं, बल्कि राजस्थान और गुजरात की कपड़ा परंपराओं, भारतीय कारीगरी और राष्ट्रीय प्रतीकों को सामने लाने का एक खास माध्यम भी बनी हैं।

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80th Independence Day: कॉम्पिटीटिव एग्जाम्स की तैयारी करने वाले छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग, PM मोदी ने किया ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को घोषणा की कि कॉम्पिटीटिव एग्जाम्स (प्रतियोगी परीक्षा) की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। ऐसा छात्रों के परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए किया जा रहा है। 15 अगस्त 2026 को देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस मौके पर दिल्ली में ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कोचिंग क्लास से गरीब और मध्यम वर्ग पर बोझ पड़ता है। हम अलग-अलग परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराएंगे।”

पीएम ने कहा कि हर माता-पिता को लगता है कि अगर वे अपने बच्चे को कोचिंग क्लास नहीं भेजेंगे तो वे प्रतिष्ठित परिवार नहीं कहलाएंगे। प्रधानमंत्री ने इन परिवारों को भरोसा दिलाया कि वे कोचिंग पर खर्च होने वाले हजारों करोड़ रुपये बचा सकते हैं, अपने बच्चों के करीब रह सकते हैं और उनकी देखभाल कर सकते हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “इसलिए, हमने युवाओं के लिए अलग-अलग परीक्षाओं की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने का फैसला किया है। हमारे पास डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है, हमारे पास बेहतरीन टैलेंट और शिक्षक हैं। इन संसाधनों को एक साथ लाकर, हम देश के युवाओं को मुफ्त कोचिंग देने के लिए एक पूरा नेटवर्क बनाने जा रहे हैं।”

एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि हमने तय किया है कि अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) कौशल की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह भी कहा कि युवाओं की क्षमताओं का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण में किया जाएगा। इसके साथ ही पीएम मोदी ने युवाओं से अपील की कि वे देश में जारी जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें। साथ ही जनगणना को त्रुटिरहित (जिसमें कोई गलती न हो) बनाने के लिए अपने परिवार की सही डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग करें।

इस वर्ष का समारोह ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय गीत को विशेष रूप से समर्पित है। लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में आज, शनिवार को पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गाया गया।

80th Independence Day: देश में 3 सेमीकंडक्टर प्लांट्स में उत्पादन शुरू, अगले 7-8 वर्षों में 5 से 8 और प्लांट शुरू होने की उम्मीद- PM मोदी

5,000 विशेष अतिथियों ने लिया हिस्सा

लाल किले पर शनिवार को आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगभग 5,000 विशेष अतिथियों ने हिस्सा लिया। इनमें महिला उद्यमी, युवा इनोवेटर्स, किसान और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों सहित समाज के कई क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल रहे। समारोह में सांस्कृतिक रंग भरने के लिए विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पारंपरिक वेशभूषा में सजे 1,500 से अधिक लोग भी उपस्थित रहे।

80th Independence Day: देश में 3 सेमीकंडक्टर प्लांट्स में उत्पादन शुरू, अगले 7-8 वर्षों में 5 से 8 और प्लांट शुरू होने की उम्मीद- PM मोदी

भारत ने 3 सेमीकंडक्टर प्लांट्स में उत्पादन शुरू कर दिया है और आने वाले वर्षों में 5 से 8 और प्लांट लगने की उम्मीद है। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कही है। 15 अगस्त 2026 को देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस मौके पर दिल्ली में ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा उसकी बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाती है। सेमीकंडक्टर चिप्स इलेक्ट्रॉनिक्स, हेल्थकेयर, ट्रांसपोर्ट और हर आधुनिक तकनीक के लिए आवश्यक हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्षों तक देश में सेमीकंडक्टर पर चर्चा तो हुई, लेकिन बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स का अभाव रहा। इन चिप्स के रणनीतिक महत्व को स्वीकार करते हुए, पीएम ने कहा कि भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम उठाए हैं। 3 सेमीकंडक्टर प्लांट्स में उत्पादन पहले ही शुरू हो चुका है और निर्यात भी जारी है।

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि अगले 7-8 वर्षों में 5 से 8 और प्लांट शुरू होने की उम्मीद है, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ की दिशा में देश की यात्रा और मजबूत होगी।

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में 200 गीगावाट का लक्ष्य, लग रहे हैं 5 नए रिएक्टर

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है। तमिलनाडु के कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने इस वर्ष ‘क्रिटिकैलिटी’ हासिल कर ली है। ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण साधन है। पीएम ने कहा कि देश ने 200 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य रखा है और 5 नए परमाणु रिएक्टर लगाए जा रहे हैं।

पीएम मोदी के मुताबिक, ‘‘ऊर्जा सुरक्षा आज की जरूरत है और इसलिए हमने इस दिशा में पहले ही कदम उठाए हैं। हमने संसद में ‘शांति’ अधिनियम पारित किया है और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

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PM Modi Independence Day Speech: ‘Fortune 500 में भारत की 50 कंपनियां क्यों नहीं?’ PM मोदी ने कॉरपोरेट सेक्टर के सामने रखा बड़ा लक्ष्य

PM Modi Independence Day Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के कारोबार जगत के सामने एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि आने वाले 10 साल में Fortune 500 की 50 कंपनियां भारत की क्यों नहीं हो सकतीं? पीएम मोदी ने भारतीय कंपनियों से बैंकिंग, फार्मास्यूटिकल्स, कंसल्टिंग, टेक्नोलॉजी समेत कई क्षेत्रों में दुनिया की अग्रणी कंपनियां बनने का आह्वान किया।

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत को छोटी-छोटी उपलब्धियों से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि दुनिया में नेतृत्व करने का लक्ष्य रखना चाहिए।

‘Fortune 500 में शामिल हो भारत की 50 कंपनियां’

उन्होंने कहा, “हम अक्सर Fortune 500 कंपनियों के बारे में सुनते हैं। आने वाले दशक में Fortune 500 की 50 कंपनियां भारत की क्यों नहीं हो सकतीं? क्या यह हमारा लक्ष्य नहीं होना चाहिए?”

प्रधानमंत्री ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर फल-फूल रहा है और सवाल किया कि कोई भारतीय बैंक दुनिया के टॉप पांच बैंकों में क्यों शामिल नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, “भारत का कोई एक बैंक दुनिया के टॉप पांच बैंकों में शामिल होना चाहिए।”

फार्मास्युटिकल और बैंकिग सेक्टर भी आगे बढ़ें 

पीएम मोदी ने फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के लिए भी एक बड़ा लक्ष्य तय किया और कहा कि भारत को अपनी मौजूदा खूबियों को ग्लोबल लीडरशिप में बदलना होगा। उन्होंने कहा, “भारत ने फार्मास्युटिकल सेक्टर में बहुत काम किया है। लेकिन अभी जरूरत इस बात की है कि भारत की कोई फार्मास्युटिकल कंपनी दुनिया की पांच सबसे बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियों में शामिल हो। भारत को वहां अपनी जगह बनानी होगी।”

प्रधानमंत्री का ग्लोबल लीडर बनने का विजन सिर्फ बैंकिंग और फार्मा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय लॉ फर्म, रेटिंग एजेंसियां, कंसल्टिंग कंपनियां और अकाउंटिंग फर्म भी दुनिया में अपनी पहचान बनाएं। उन्होंने भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों को भी वैश्विक स्तर पर नंबर-1 बनने का लक्ष्य रखने की बात कही।

उन्होंने कहा, “हमारी कंसल्टिंग या अकाउंटिंग फर्मों में से कोई एक दुनिया की टॉप फर्मों में शामिल होनी चाहिए। भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों को दुनिया में लीडर बनना चाहिए। यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।”

ऐसे ब्रांड बनाएं जो दुनिया में भारत की पहचान बनें

उन्होंने भारतीय कंपनियों से ऐसे ब्रांड बनाने का भी आह्वान किया जो दुनिया भर में देश की पहचान बन सकें। उन्होंने कहा, “हमें ऐसे ब्रांड बनाने चाहिए जो दुनिया को आकर्षित करें। हमारे ब्रांड हमारे देश की पहचान बनें और भारत को दुनिया के लिए एक खास डेस्टिनेशन बनाएं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने इस चुनौती को 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने के बड़े लक्ष्य से जोड़ा। उन्होंने कहा कि इसे हासिल करने के लिए तेजी से सुधार करने और केंद्र, राज्यों, स्थानीय सरकारों और इंडस्ट्री के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, “हमें अपने सुधारों की रफ्तार बढ़ानी होगी। हमें 2047 के लक्ष्य के हिसाब से अपने सिस्टम को विकसित करना होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब “पुरानी नीतियों और नियमों” के आधार पर नहीं चल सकता।

प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि सुधार मजबूरी के बजाय महत्वाकांक्षा से प्रेरित होने चाहिए। उन्होंने कहा, “हम सुधार मजबूरी में नहीं, बल्कि पूरे विश्वास के साथ कर रहे हैं। हम अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए ये सुधार कर रहे हैं।”

पीएम मोदी ने इस चुनौती को एक सामूहिक राष्ट्रीय परियोजना के तौर पर भी पेश किया और कहा कि भारत की तरक्की सिर्फ सरकार के दम पर नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, “राष्ट्र का मतलब सिर्फ सरकार नहीं है। राष्ट्र में हर नागरिक शामिल होता है।”

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