VB-G RAM G के तहत रोजगार में 50 फीसदी गिरावट, जानिए क्या है इसकी वजह

ग्रामीण इलाकों में रोजगार की नई गारंटी स्कीम ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (VB-G RAM-G) के तहत रोजगार में गिरावट आई है। केंद्र सरकार ने 1 जुलाई, 2026 से मनरेगा की जगह वीबी-जी-राम-जी स्कीम लागू की है। इस स्कीम के फंडिंग सिस्टम में भी बदलाव किया गया है।

इन वजहों से घटा स्कीम में रोजगार

VB-G RAM-G में रोजगार घटने की कई वजहें हैं। मानसून के सीजन में इस स्कीम के तहत होने वाले काम रुक जाते हैं। मनरेगा की जगह नई योजना लागू करने के दौरान कुछ दिक्कतें आई होंगी। इसके अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से मजदूरों के पलायन की रफ्तार सुस्त हुई है। केंद्र सरकार के दो सूत्रों ने यह जानकारी दी।

नई स्कीम में फंडिंग का तरीका बदला

राज्य सरकार के एक सूत्र ने कहा कि राज्यों की खराब वित्तीय हालत भी इस स्कीम में रोजगार में कमी की वजह हो सकती है। नई स्कीम में फंडिंग का तरीका बदला है। ज्यादातर राज्यों को इस स्कीम पर आने वाले खर्च का 40 फीसदी बोझ उठाना पड़ता है। बाकी 60 फीसदी बोझ केंद्र सरकार उठाती है।

ज्यादातर राज्यों की वित्तीय स्थिति खराब

एक राज्य सरकार के प्रतिनिधि ने मनीकंट्रोल को बताया कि ज्यादातर राज्यों की वित्तीय स्थिति खराब है। कई राज्यों ने ऐसे कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिन पर काफी ज्यादा पैसे खर्च होते हैं। इस वजह से उनके पास VB-G RAM-G पर खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे नहीं बचते हैं। आरबीआई की रिपोर्ट बताती है कि राज्यों पर कर्ज का बोझ बढ़ा है।

VB-G RAM-G में 125 दिन रोजगार की गारंटी

RBI की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यों का कंसॉलिडेटेड फिस्कल डेफिसिट बढ़कर FY25 में जीडीपी का 3.3 फीसदी हो गया। 2021-22 से 2023-24 के बीच यह जीडीपी के 3 फीसदी से कम था। VB-G RAM-G में रोजगार की गारंटी वाले दिन की संख्या बढ़ाकर 125 दिन कर दी दी गई है। मनरेगा में यह 100 दिन थी।

बुआई और कटाई के पीक सीजन में काम रुक जाता है

गारंटी वाले रोजगार के दिन की संख्या बढ़ाने से भी राज्य सरकारों पर वित्तीय बोझ बढ़ा है। इस स्कीम में बुआई और कटाई के पीक सीजन में कुल 60 दिन तक काम रुक जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कृषि कार्य के लिए मजदूरों की कमी नहीं हो।

यह भी पढ़ें: जीडीपी में दिल्ली की हिस्सेदारी घटी, नोएडा – गाजियाबाद ने मारी बाजी! NCR में बदल रही है आर्थिक ताकत की तस्वीर

जुलाई 2025 के मुकाबले रोजगार में 50 फीसदी कमी

केंद्र सरकार के VB-G RAM-G डैशबोर्ड (10 अगस्त को अपडेटेड) के मुताबिक, जुलाई 2026 में पर्सन-डेज गारंटीड की संख्या जुलाई 2025 में मनरेगा के मुकाबले 50 फीसदी से ज्यादा कम रही। केंद्र सरकार के एक सीनियर अफसर ने बताया कि पर्सन-डेज की संख्या कम होने का मतलब यह नहीं है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव है।

Balochistan Independence Day: 11 अगस्त को ही आजादी सेलिब्रेट करने वाला था बलूचिस्तान, जानिए आज ही के दिन वहां क्या क्या हुआ

Balochistan Independence Day: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में आज यानी 11 अगस्त को ‘आजादी दिवस’ मनाए जाने को लेकर एक बार फिर अलग देश की मांग तेज हो गई है। बलूचिस्तान में आज यानी 11 अगस्त को ‘स्वतंत्रता दिवस’ मनाया जा रहा है। इस मौके पर ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के तौर पर कानूनी, राजनीतिक और कूटनीतिक मान्यता दी जाए।

बलोच नेता मीर यार बलोच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी जाए। इस मौके पर बलूच नेता ने पाकिस्तान पर दमन और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान के छह करोड़ लोग हर साल 11 अगस्त को अपना राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। आज हम उस मुकाम पर पहंच गए हैं जहां हम सिर्फ अपनी आजादी का जश्न ही नहीं मनाते। बल्कि दुनिया से यह मांग भी करते हैं कि बलूचिस्तान की आजादी को कानूनी, राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक रूप से मान्यता दी जाए। आजादी के इस पवित्र अवसर पर बलूचिस्तान में रहने वाले बलोच, पश्तून, हिंदू, सिख, ईसाई और सभी धर्मों के भाइयों और बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।”

भारत का किया जिक्र

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान गणराज्य दुनिया के और खासकर भारत के बहादुर मुख्यधारा के मीडिया, थिंक टैंक, शोधकर्ताओं, कवियों, लेखकों, छात्रों, वकीलों, नागरिक समाज, व्यापारिक समुदाय, धार्मिक नेताओं, सांसदों और उन सभी भाइयों और बहनों का दिल से आभार व्यक्त करता है जिन्होंने बलोचिस्तान की आवाज को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया और हमारे लोगों की आवाज बने। बलूचिस्तान के लोगों को नैतिक समर्थन मिलना जारी रहना चाहिए ताकि हम अपनी जमीन, बलूचिस्तान से पाकिस्तान रूपी कैंसर को हटा सकें।”

50 हजार बलोच पाकिस्तान में कैद

बलूचिस्तान में आजादी को दबाने के पाकिस्तान के प्रयासों की कड़ी निंदा करते हुए मीर यार बलोच ने दावा किया कि 50 हजार से ज्यादा बलोच अभी भी पाकिस्तान की यातना कोठरियों में अमानवीय अत्याचार सह रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे। आज की आजादी की सफलता हमारे महान शहीदों, हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं और कैदियों के अमर बलिदानों की वजह से मिली है।”

बलूचिस्तान में कुर्बानियों के मजबूत इतिहास को याद करते हुए उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान के लोगों ने हमेशा विदेशी हमलावरों को रोका है। उन्हें बलूचिस्तान से पीछे हटने पर मजबूर किया है। पाकिस्तान के पास भले ही हजारों टैंक, सैकड़ों लड़ाकू विमान, तोपखाने और एक बड़ी सेना हो, फिर भी शारीरिक, मानसिक और लड़ने की क्षमता के मामले में बलूचिस्तान की सेना पाकिस्तान की सेना से 10 गुना ज्यादा ताकतवर और सफल है।

बलूचिस्तान की सेना एक मजबूत फोर्स है जो हर स्थिति का सामना करने में सक्षम है। दुनिया की पेशेवर सेनाओं से मुकाबला करने के लिए तैयार है। बलूचिस्तान के इलाके को देखते हुए एक बड़ी सेना की जरूरत है। इसलिए बलूचिस्तान गणराज्य ने पांच लाख सैनिकों की सेना तैयार की है।”

11 अगस्त को ही क्यों चुना अपनी ‘आजादी’ का दिन?

जब बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस घोषित किया, तो ‘वर्ल्ड पीस यूनाइटेड’ के एम्बेसडर डॉ. परविंदर सिंह ने कहा, “1947 में जब अंग्रेज भारत से गए, तो पाकिस्तान और बांग्लादेश अपने मौजूदा रूप में मौजूद नहीं थे। लेकिन बलूचिस्तान मौजूद था। उसने 11 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से अपनी आजादी का ऐलान किया था। अगर बलूचिस्तान के लोग अपनी आजादी का जश्न मनाना चाहते हैं, तो उन्हें इसकी इजाजत मिलनी चाहिए। इसे विश्व शांति की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जाना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान की ज़मीन खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों, जैसे सोना और कीमती पत्थरों से बहुत समृद्ध है। अगर बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग हो जाता है, तो पाकिस्तान को अपने आर्थिक आधार का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा गंवाना पड़ सकता है, क्योंकि यह इलाका चीन और दूसरे देशों को खनिजों के निर्यात का मुख्य स्रोत है।”

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान का हाथ से निकलना पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा। यही वजह है कि पाकिस्तान उस पर से अपना नियंत्रण नहीं छोड़ना चाहता। आज 56 से ज्यादा देश बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन करते हैं। हम 21वीं सदी में जी रहे हैं। एक ऐसा दौर जिसमें टकराव और जबरदस्ती से अब कोई नतीजा नहीं निकलता।”

दुनिया भर में मनाया गया आजादी का जश्न

मंगलवार को बलूचिस्तान ने अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। यह एक वार्षिक परंपरा का हिस्सा है, जिसे कई बलूच मानवाधिकार संगठन पाकिस्तान की ओर से क्षेत्र के ‘अवैध कब्जे’ के विरोध के रूप में देखते हैं। बलूच स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक जड़ें 1947 तक जाती हैं, जब ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद कलात रियासत ने कुछ समय के लिए खुद को स्वतंत्र घोषित किया था। हालांकि, 1948 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र का विलय कर लिया, जिसका बलूच राष्ट्रवादी समूह लगातार विरोध करते रहे हैं।

सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म X पर मीर यार बलूच ने आरोप लगाया कि ‘कब्जा करने वाली’ पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं। उनके अनुसार, राष्ट्रीय आयोजनों को रोकने के लिए 7 अगस्त से 30 अगस्त तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखने का फैसला किया है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती, सैन्य संसाधनों या हवाई शक्ति के इस्तेमाल के बावजूद पाकिस्तान बलूचिस्तान में अपनी मौजूदगी को अनिश्चित समय तक बनाए नहीं रख सकता, क्योंकि बलूच जनता का संकल्प मजबूत है।

मीर ने कहा, “बलूचिस्तान गणराज्य बलूच लोगों को उग्रवादी या अलगाववादी बताने की कोशिशों को खारिज करता है। बलूच स्वतंत्रता सेनानी बलूचिस्तान की रक्षा, सुरक्षा और सैन्य ताकत का हिस्सा हैं और उन्हें छह करोड़ बलूच लोगों का समर्थन प्राप्त है। लोग उन पर भरोसा करते हैं क्योंकि वे इसी मिट्टी के बेटे-बेटियां हैं और अपने राष्ट्र के हित में काम करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “ये बल किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं लड़ रहे हैं और न ही अशांति या हिंसा फैलाने के लिए काम कर रहे हैं। वे अपना राष्ट्रीय कर्तव्य निभा रहे हैं, जिसमें शांति और सुरक्षा बनाए रखना, लोगों की रक्षा करना और एक शांतिपूर्ण, समृद्ध तथा विकसित बलूचिस्तान की नींव रखना शामिल है।”

ये भी पढ़ें- होटल का फ्री Wi-Fi यूज करने वाले सावधान! Microsoft ने दी बड़ी चेतावनी, आपके डिवाइस में घुस रहे हैं हैकर्स, अकाउंट हो जाएगा खाली

मीर ने दावा किया कि बलूच सशस्त्र समूहों की कार्रवाइयों का उद्देश्य उन नेटवर्कों को खत्म करना और बाहर निकालना है, जिन्हें वे पाकिस्तान से जुड़ा मानते हैं और जो उनके अनुसार बलूचिस्तान में अस्थिरता, असुरक्षा और हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं।

UP Scholarship 2026-27: यूपी में कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए स्कॉलरशिप आवेदन शुरू, नए और रिन्यूवल के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर करें अप्लाई

UP Scholarship 2026-27: उत्तर प्रदेश में शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए स्कॉलरशिप प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत कक्षा 9 से 12 में पढ़ने वाले छात्र उत्तर प्रदेश सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट के आधिकारिक स्कॉलरशिप पोर्टल scholarship.up.gov.in के जरिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। इसके एक मैंडेट में कक्षा 9 से 12 के छात्र के लिए मैट्रिक पूर्व और मैट्रिक (इंटरमीडिएट) के बाद की स्कॉलरशिप शामिल हैं। वहीं, दूसरे मैंडेट में कक्षा 12 के बाद उच्च शिक्षा वाले छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप शामिल हैं।

यह स्कॉलरशिप जनरल, शेड्यूल्ड कास्ट (SC), शेड्यूल्ड ट्राइब (ST), अदर बैकवर्ड क्लास (OBC), और अल्पसंख्य समुदाय के योग्य छात्रों के लिए बहुत अहम मानी जाती है। इस स्कॉलरशिप प्रक्रिया के तहत पहले से चल रही छात्रवृत्ति को रिन्यू कराने या नई छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं।

कक्षा 10 और 12 के रिन्यूअल छात्र : ऑनलाइन आवेदन 11 अगस्त से 25 अगस्त, 2026 तक जमा किए जा सकते हैं। जरूरी हार्ड कॉपी भी तय समय के अंदर जमा करनी होगी।

कक्षा 9 और 11 में नए आवेदक : ऑनलाइन एप्लीकेशन 11 अगस्त से 21 सितंबर, 2026 तक खुले रहेंगे।

जिन स्टूडेंट्स ने 12वीं कक्षा पूरी कर ली है और ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन, डिप्लोमा, ITI, या दूसरे मैट्रिक के बाद वाले पाठ्यक्रम कर रहे हैं, उनके लिए अलग एप्लीकेशन शेड्यूल होगा।

ऑनलाइन करें आवेदन

ऑनलाइन आवेदन जमा करना सिर्फ पहला स्टेप है। स्कॉलरशिप आवेदन कई चरण की स्क्रूटनी और सत्यापन प्रक्रिया है। सबसे पहले, स्कूल या शैक्षिक संस्थान योग्य छात्रों के आवेदन को सत्यापित करता है और उन्हें आगे की प्रक्रिया के लिए फॉरवर्ड करता है। फिर जिला स्कूल इंस्पेक्टर छात्रों से जुड़ी जानकारी सत्यापित करता है, जिसमें योग्य छात्रों की संख्या भी शामिल है।

इसके बाद, नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) की टेक्निकल टीम आवेदन के आंकड़ों की जांच करती है और संभावित गलतियों या अंतरों की पहचान करती है। जरूरी वेरिफिकेशन स्टेज पूरे होने के बाद, जिला समिति सत्यापित सूची को फाइनल करती है। इसके बाद स्कॉलरशिप की रकम सीधे योग्य छात्रों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है।

रिन्यूअल छात्रों को अक्टूबर में स्कॉलरशिप मिलने की उम्मीद

कक्षा 9 से 12 के रिन्यूअल छात्रों के लिए सत्यापन प्रक्रिया नए आवेदकों के मुकाबले पहले पूरा होने की उम्मीद है। बताए गए शेड्यूल के मुताबिक, योग्य रिन्यूअल छात्रों के लिए स्कॉलरशिप फंड 25 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 के बीच ट्रांसफर होने की उम्मीद है।

नए आवेदकों के लिए, वेरिफिकेशन प्रोसेस में ज्यादा समय लगने की उम्मीद है। एलिजिबल नए स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप पेमेंट 25 जनवरी से 31 जनवरी, 2027 के बीच ट्रांसफर होने की उम्मीद है।

आधार से लिंक्ड बैंक अकाउंट जरूरी

आवेदकों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनका बैंक अकाउंट उनके अपने नाम पर हो और स्कीम के तहत जहां भी जरूरी हो, आधार से लिंक हो। दरअसल, स्कॉलरशिप की रकम सीधे स्टूडेंट के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाती है। छात्रों को आवेदन जमा करने से पहले अपने बैंक अकाउंट की डिटेल्स ध्यान से डालनी चाहिए और उन्हें वेरिफाई करना चाहिए। बैंक डिटेल्स में कोई भी गलती पेमेंट प्रोसेस के दौरान दिक्कतें पैदा कर सकती है।

स्नातक छात्रों के लिए अलग शेड्यूल

कक्षा 12 पास कर चुके छात्र और ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन, डिप्लोमा, ITI, या दूसरे पाठ्यक्रम कर रहे हैं, वे पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम के तहत अप्लाई करेंगे। इन छात्रों के लिए आवेदन कार्यक्रम कक्षा 9 से 12 के शेड्यूल से अलग है।

पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप रिन्यूअल आवेदकों के लिए, ऑनलाइन पंजीकरण और हार्ड-कॉपी सबमिशन 15 सितंबर से 15 अक्टूबर, 2026 तक होगा।

नए आवेदकों के लिए, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 15 सितंबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक खुला रहेगा।

इंस्टीट्यूशनल मास्टर डेटा तैयार करने का काम 22 जुलाई से 15 अगस्त, 2026 तक तय है। इसके बाद कोर्स-फीस सत्यापन होगा, जो 23 जुलाई से 30 अगस्त, 2026 तक संबंधित यूनिवर्सिटी या उससे जुड़ी एजेंसी के जरिए होगा।

शेड्यूल के मुताबिक, पोस्ट-मैट्रिक रिन्यूअल वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप पेमेंट 16 जनवरी से 25 जनवरी, 2027 के बीच मिलने की उम्मीद है। नए पोस्ट-मैट्रिक आवेदकों को स्कॉलरशिप पेमेंट 27 जनवरी से 31 जनवरी, 2027 के बीच मिलने की उम्मीद है।

International Linguistics Olympiad 2026: लिंग्विस्टिक ओलंपियाड में भारतीय छात्रों ने झटका सोना, पाणिनी लिंग्विस्टक ओलंपियाड से हुआ था चयन

Tata Sierra vs Kia Seltos diesel AT performance comparison

Tata Sierra vs Kia Seltos diesel AT performance comparison

The Tata Sierra and Kia Seltos are among the few mid-size SUVs available with a diesel engine option. We have already compared their fuel efficiency figures, but this time we are looking at how the two perform in terms of acceleration. It should be noted that the Seltos diesel AT was tested in slightly wet conditions at a temperature of 27deg C. Here is how the two SUVs compare.

Tata Sierra vs Kia Seltos diesel AT: Specifications

SUVSierraSeltos
Cylinder count44
Displacement1497cc1493cc
Power118hp at 4000rpm 116hp at 4000rpm
Torque280Nm at 1500-2750rpm250Nm at 1500-2750rpm
Automatic transmission6-speed torque converter6-speed torque converter
Tyre size19 inch18 inch

The Tata Sierra and Kia Seltos use four-cylinder diesel engines with nearly the same displacement, at 1,497cc and 1,493cc, respectively. The Sierra makes 118hp, which is 2hp more than the Seltos’ 116hp. Its bigger advantage is torque, with 280Nm compared with 250Nm for the Seltos. Notably, the Sierra AT diesel makes 20Nm more torque than the manual version.

Both SUVs get a six-speed torque-converter automatic gearbox and are also equipped with a variable-geometry turbocharger, which helps improve power delivery and reduce turbo lag. In terms of wheel size, the Sierra gets 19-inch tyres, while the Seltos is equipped with 18-inch units.

Tata Sierra vs Kia Seltos diesel AT: 0-100kph sprint

SUVSierraSeltos
20kph (s)1.441.36
40kph (s)3.533.11
60kph (s)5.935.81
80kph (s)9.319
100kph (s)13.3713.17

In our tests, the Kia Seltos is quicker than the Tata Sierra in accelerating from a standstill to the 100kph mark. From 0-20kph, the Seltos takes 1.36 seconds, 0.08 seconds quicker than the Sierra’s 1.44 seconds figure. The gap increases to 0.42 seconds at 40kph, with the Seltos taking 3.11 seconds versus 3.53 seconds for the Sierra.

Tata Sierra vs Kia Seltos diesel AT 0-100kph sprint

At 60kph, the Seltos takes 5.81 seconds, just 0.12 seconds quicker than the Sierra’s 5.93 seconds. The difference is even smaller at 80kph, where the Seltos takes 9 seconds compared with 9.31 seconds for the Tata SUV. At 100kph, the Kia SUV completes the run in 13.17 seconds, while the Sierra takes 13.37 seconds, making it 0.20 seconds quicker.

Tata Sierra vs Kia Seltos diesel AT: Rolling acceleration

In the 20-80kph run, with the cars in third gear and using kickdown, the Seltos is quicker than the Sierra. It takes 7.72 seconds to complete the run, compared with 7.97 seconds for the Sierra, giving it a 0.25 second advantage.

The result reverses in the 40-100kph fourth-gear kickdown test. Here, the Sierra takes 9.42 seconds, making it 0.62 seconds quicker than the Seltos, which completes the run in 10.04 seconds.

Tata Sierra vs Kia Seltos diesel AT: Prices

SUVSierraSeltos
Price range (Rs lakh)15.99-21.2915.32-21.82

The Kia Seltos has a lower starting price at Rs 15.32 lakh, compared with Rs 15.99 lakh for the Tata Sierra, making it Rs 67,000 cheaper at the base end. However, the Sierra has a lower top-spec price of Rs 21.29 lakh, while the Seltos goes up to Rs 21.82 lakh, making the Sierra Rs 53,000 cheaper at the top end.

Autocar India’s performance testing standards

Before we conduct our performance tests, we check and maintain tyre pressures based on the manufacturer’s recommendations and ensure the car has a full tank of fuel. The car is then tested in a controlled environment with two people on board, and the data is collected via highly accurate GPS-based timing equipment.

Ex-showroom prices are as of August 11, 2026.

Balrampur Chini Q1 Results: चीनी कंपनी का मुनाफा 14% घटा, रेवेन्यू बढ़ा; नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की नियुक्ति

Balrampur Chini Q1 Results: चीनी कंपनी Balrampur Chini Mills का जून तिमाही प्रदर्शन मिला-जुला रहा। कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 14.5% घटकर 44.1 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा 51.6 करोड़ रुपये था।

रेवेन्यू बढ़ा, लेकिन EBITDA घटा

बलरामपुर चीनी मिल्स का रेवेन्यू 6% बढ़कर 1,636.8 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 1,542.3 करोड़ रुपये था। हालांकि, ऑपरेशनल कमाई पर दबाव रहा। EBITDA 15% घटकर 114 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल यह 134.3 करोड़ रुपये था।

EBITDA मार्जिन भी 8.71% से घटकर 6.96% हो गया। यानी बिक्री बढ़ने के बावजूद कंपनी की कमाई का मार्जिन कमजोर हुआ।

वर्तिका शुक्ला बनीं इंडिपेंडेंट डायरेक्टर

बलरामपुर चीनी मिल्स ने वर्तिका शुक्ला को एडिशनल डायरेक्टर और नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल 11 अगस्त 2026 से 10 अगस्त 2031 तक पांच साल का होगा। कंपनी के मुताबिक, शुक्ला को इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, बिजनेस स्ट्रैटेजी और एनर्जी सेक्टर में 38 साल से ज्यादा का अनुभव है।

उन्होंने अपने करियर के 38 साल Engineers India Limited (EIL) में बिताए हैं। यह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत काम करने वाली कंपनी है। उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स, बिजनेस डायवर्सिफिकेशन और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े काम का भी अनुभव है।

बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयरों का हाल

बलरामपुर चीनी मिल्स का शेयर 4.62% गिरकर 625 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 35.52% दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 12.72 हजार करोड़ रुपये है।

Balrampur Chini Mills एक प्रमुख चीनी और एथेनॉल बनाने वाली कंपनी है। इसका मुख्य कारोबार गन्ने की पेराई करके चीनी बनाना है। इसके अलावा कंपनी गन्ने के रस और शीरे से एथेनॉल तैयार करती है, जिसका इस्तेमाल पेट्रोल में मिलाने के लिए होता है। कंपनी बिजली उत्पादन के कारोबार में भी है। गन्ने की पेराई से निकलने वाले बगास का इस्तेमाल कर यह को-जनरेशन प्लांट से बिजली बनाती है।

Vedanta Group: इन कंपनियों में हिस्सेदारी खरीद-बेच सकते हैं प्रमोटर, ₹3000 करोड़ तक जुटाने की तैयारी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Plastic Banknotes: ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोटों पर बड़ा अपडेट! RBI को एक अरब के फील्ड ट्रायल को मिली हरी झंडी

Polymer Banknotes Field Trial in India: क्या आपने कभी पानी में नहीं भीगने वाले या जेब में रखे-रखे न फटने वाले नोटों के बारे में सुना है? जल्द ही आपके हाथ में ऐसे प्लास्टिक या पॉलिमर वाले ₹10 और ₹20 के नोट दिख सकते हैं। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि उसने फील्ड ट्रायल के लिए ₹10 और ₹20 के 1 अरब पॉलिमर बैंकनोट्स पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश के आधार पर, RBI अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत यह मंजूरी दी गई है।

कागज के नोटों के साथ ही चलेंगे पॉलिमर नोट

सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, ये नए पॉलिमर नोट अचानक से पुराने नोटों को बंद नहीं करेंगे। ये पॉलिमर बैंकनोट्स बाजार में वर्तमान में चल रहे कागज पर आधारित नोटों के साथ ही सर्कुलेशन में रहेंगे। फील्ड ट्रायल के सफल समापन के बाद ही इन दोनों मूल्यवर्गों में पॉलिमर नोटों को नियमित रूप से जारी किया जाएगा।

RBI ने सूचित किया है कि इन नोटों की छपाई की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए, अभी इसके जारी होने की सटीक तारीख या इस पर होने वाले संभावित खर्च का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

क्यों खास होते हैं प्लास्टिक वाले नोट?

छोटे मूल्यवर्ग के नोट (जैसे- ₹10 और ₹20) लोगों के हाथों में बहुत तेजी से घूमते हैं, जिससे वे जल्दी गंदे हो जाते हैं, फट जाते हैं या पानी में भीगकर खराब हो जाते हैं। पॉलिमर नोट सामान्य कागज के नोटों की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक लंबे समय तक चलते हैं। पानी या पसीने में भीगने पर ये नोट खराब नहीं होते। इन नोटों में सुरक्षा के ऐसे फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी नकल करना बेहद मुश्किल होता है।

Gold Silver Price: 10 हफ्ते के हाई पर सोना, 1 हफ्ते में 11% चढ़ी चांदी, जानिए इस तेजी के पीछे क्या है वजह

Gold – Silver Price: सोने और चांदी की कीमतों में हालिया तेजी जारी है। सोना 10 हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है जबकि चांदी में पिछले हफ्ते 11% से ज़्यादा की बढ़त हुई है। इस हफ्ते स्पॉट गोल्ड की कीमत लगभग USD 4,435 प्रति औंस तक पहुंच गई, जो जून के मध्य के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। खबर लिखे जाने के समय USD 4,375 के आसपास थी।

Comex सिल्वर में इस हफ्ते 11% से ज्याजा की तेजी आई। स्पॉट सिल्वर की कीमत लगभग USD 64 प्रति औंस हो गई। भारत में, सोना 10 ग्राम के लिए लगभग 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था, जबकि MCX सिल्वर में हफ्ते भर में लगभग 6.58% की बढ़त हुई और यह प्रति किलोग्राम लगभग 2,31,804 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था।

सोने-चांदी की कीमतों के पीछे तेजी के एक नहीं बल्कि कई वजह है। इनमें से US में कमजोर रोजगार डेटा, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की कम होती उम्मीदें, सेंट्रल बैंक द्वारा लगातार सोने की खरीद, ETF में फिर से निवेश आना और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता – इन सभी ने मिलकर कीमती धातुओं की मांग को मजबूत किया है।

US में कमजोर जॉब्स डेटा से कम हुई ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें

हालिया तेजी की एक मुख्य वजह US जॉब मार्केट से आई। US ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स ने 7 अगस्त, 2026 को रिपोर्ट दी कि जुलाई में नॉन-फ़ार्म पेरोल में 23,000 की गिरावट आई, जबकि बाजार को लगभग 80,000 नई नौकरियों की उम्मीद थी। जून के आंकड़ों को भी नीचे की ओर संशोधित किया गया, जबकि मई और जून के संयुक्त संशोधनों से पहले के अनुमानों में लगभग 103,000 नौकरियों की कमी आई।

इस रिपोर्ट के आने के बाद, स्पॉट गोल्ड 2.67% बढ़कर USD 4,352.60 हो गया, जबकि चांदी 4.20% बढ़कर USD 63.97 हो गई, क्योंकि ट्रेडर्स ने सितंबर में फ़ेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम कर दीं।

बाजार अब सितंबर में 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना लगभग 44% मान रहा है, जबकि एक हफ्ते पहले यह संभावना 67% थी। सोने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है, इसलिए ब्याज दरें कम रहने की उम्मीद से इस मेटल को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ कम हो सकती है और इसकी मांग को बढ़ावा मिल सकता है।

फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर फैसले पर नजर

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने 29 जुलाई को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50% से 3.75% के दायरे में बनाए रखने के लिए 9-3 से वोट किया। हालांकि फेडरल रिजर्व ने पॉलिसी में किसी बड़े बदलाव का साफ संकेत नहीं दिया है, लेकिन कमजोर रोजगार डेटा और दरों को स्थिर रखने के फैसले ने निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों को कम कर दिया है।

कीमती धातुओं के लिए अगला बड़ा ट्रिगर इस सप्ताह के आखिर में आने वाला अमेरिकी महंगाई का डेटा है। कमजोर पेरोल रिपोर्ट से सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने के लिए फेडरल रिजर्व पर दबाव कम हो सकता है, हालांकि उम्मीद से ज्यादा महंगाई दर बढ़ने की उम्मीदों को फिर से जगा सकती है और सोने-चांदी पर दबाव डाल सकती है।

सेंट्रल बैंक की रिकॉर्ड खरीदारी से सोने को मिला सहारा

कीमतों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के अलावा, सेंट्रल बैंक की मजबूत मांग ने सोने को एक मजबूत आधार दिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ‘गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स Q2 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सेंट्रल बैंकों की शुद्ध सोने की खरीदारी 289 टन ​​तक पहुंच गई। यह Q1 2026 के स्तर से पांच गुना अधिक और रिकॉर्ड पर दूसरी तिमाही का सबसे अधिक आंकड़ा था।

सेंट्रल बैंक की खरीदारी एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में 62% अधिक थी। पोलैंड के नेशनल बैंक ने Q2 के दौरान 51 टन सोना जोड़ा, जिससे उसका भंडार 632 टन हो गया, जबकि पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने 33 टन सोना जोड़ा, जो Q4 2023 के बाद से उसकी सबसे बड़ी तिमाही खरीदारी थी।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के नवीनतम सर्वेक्षण में भी सेंट्रल बैंक की मांग जारी रहने की मजबूत उम्मीदें दिखाई दीं। लगभग 89% उत्तरदाताओं को उम्मीद थी कि अगले वर्ष वैश्विक स्वर्ण भंडार में वृद्धि होगी, जबकि रिकॉर्ड 45% लोगों को उम्मीद थी कि वे अपने स्वयं के स्वर्ण भंडार में वृद्धि करेंगे।

ETF में फिर से निवेश बढ़ा

सोने को ETF की खरीदारी से भी सहारा मिला है। 20 जुलाई के बाद से एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में कुल बुलियन होल्डिंग में 24 टन की वृद्धि हुई है, जो अप्रैल की शुरुआत के बाद से निवेश के प्रवाह की सबसे तेज गति है।

ETF की मांग में यह वापसी ऐसे समय में हुई है जब सेंट्रल बैंक की खरीदारी अधिक बनी हुई है, जिससे इस पीली धातु के लिए निवेश की मांग का एक और स्रोत मिल रहा है। संस्थागत खरीदारी और ETF में फिर से निवेश बढ़ने से कीमतों को सहारा मिला है, भले ही ऊंची कीमतों के कारण गहनों की मांग पर दबाव बना हुआ है।

ब्रोकरेज हाउस क्या दे रहे अनुमान

जेपी मॉर्गन को उम्मीद है कि सोने की कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि इस साल के आखिर तक कीमते $5,400 के स्तर पर पहुंच सकती है। वहीं मेटल फोकस का अनुमान है कि कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वहीं डॉयचे बैंक, एचएसबीसी और ING जैसे कई बैंक इस कैलेंडर साल की चौथी तिमाही तक सोने की कीमत $4,600 से $4,900 के बीच रहने का अनुमान लगा रहे है।

 

MCX पर सोना ₹1.53 लाख के पार, चांदी ₹2.36 के नीचे फिसली, जानें किस कारण बढ़ी मांग

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Samsung Galaxy S26 FE के फीचर्स लॉन्च से पहले लीक! मिलेगा 120Hz AMOLED, 50MP कैमरा और 4,900mAh बैटरी

Samsung Galaxy S26 FE के सितंबर में लॉन्च होने की उम्मीद है और इससे पहले ही इसके सभी स्पेसिफिकेशन्स लीक हो गए हैं। उम्मीद है कि इस ‘फैन एडिशन’ मॉडल का डिजाइन Galaxy S26 सीरीज जैसा ही होगा, लेकिन इसमें पिछले साल के Galaxy S25 वाला Exynos 2500 चिपसेट इस्तेमाल किया जाएगा। WinFuture.de की एक नई रिपोर्ट में फोन के डिस्प्ले, कैमरे, बैटरी, कनेक्टिविटी, साइज और स्टोरेज ऑप्शन के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। उम्मीद है कि इस फोन में 6.7-इंच का AMOLED डिस्प्ले, 4,900mAh की बैटरी, 45W चार्जिंग और Samsung के One UI के साथ Android 17 होगा।

Samsung Galaxy S26 FE स्पेसिफिकेशन्स (अनुमानित)

WinFuture.de की रिपोर्ट के अनुसार, Samsung के आने वाले Galaxy S26 FE में 6.7-इंच का Dynamic AMOLED 2X पैनल होगा, जिसका रिजॉल्यूशन 2,340×1,080 पिक्सल और रिफ्रेश रेट 120Hz तक हो सकता है। जबकि सामान्य स्थितियों में ब्राइटनेस 1,200 निट्स और हाई-ब्राइटनेस मोड में 1,900 निट्स तक पहुंचने की उम्मीद है।

उम्मीद है कि इस हैंडसेट में Exynos 2500 चिपसेट का इस्तेमाल किया जाएगा। Samsung ने Galaxy S25 में भी इसी चिपसेट का इस्तेमाल किया था। इसमें 10 CPU कोर हैं और यह 3.3GHz तक की स्पीड दे सकता है। खबरों के मुताबिक, इस प्रोसेसर के साथ 8GB RAM होगी और 128GB व 256GB स्टोरेज के ऑप्शन भी होंगे। इसके अलावा, यह फोन Android 17 पर आधारित One UI 9 के साथ आ सकता है।

Galaxy S26 FE में फोटोग्राफी के लिए मुख्य रूप से 50MP का प्राइमरी कैमरा होने की उम्मीद है, जिसमें f/1.8 अपर्चर और हार्डवेयर इमेज स्टेबलाइजेशन की सुविधा होगी। इसके रियर कैमरा सेटअप में f/2.2 अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 3x ऑप्टिकल जूम व f/2.4 अपर्चर वाला 8MP का टेलीफ़ोटो सेंसर भी शामिल हो सकता है। वहीं, सेल्फी के लिए सामने की तरफ 12MP का f/2.2 कैमरा होने की उम्मीद है, हालांकि इसमें ऑटोफोकस की सुविधा नहीं होगी। वीडियो रिकॉर्डिंग की बात करें तो रियर कैमरों से 30fps पर 8K वीडियो रिकॉर्ड किया जा सकता है। वहीं, 4K वीडियो 60fps तक रिकॉर्ड करने का विकल्प मिल सकता है।

कनेक्टिविटी के लिए, Galaxy S26 FE फोन में Bluetooth 5.4, Wi-Fi 6 और NFC का सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। Samsung इसमें दो नैनो-सिम स्लॉट के साथ-साथ एक या दो eSIM का सपोर्ट भी दे सकता है। इसके अलावा, इस हैंडसेट में धूल और पानी से बचाव के लिए IP68 रेटिंग भी होने की उम्मीद है।

Samsung Galaxy S26 FE में 45W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट के साथ 4,900mAh की बैटरी हो सकती है। आम इस्तेमाल में इसका बैटरी बैकअप 50 घंटे तक का बताया जा रहा है, जबकि EPREL क्लासिफिकेशन के तहत इसकी बैटरी को 1,200 चार्जिंग साइकल के लिए रेट किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Samsung इसमें सिलिकॉन-कार्बन सेल का इस्तेमाल कर सकता है।

फोन के वजन की बात करें तो Galaxy S26 FE का वजन करीब 193 ग्राम हो सकता है, जबकि इसकी मोटाई 7.4mm रहने की उम्मीद है। Samsung इस फोन को Graphite, Pistachio और Blueberry कलर ऑप्शन में पेश कर सकता है। इनमें Graphite को डार्क ग्रे, Pistachio को हल्का हरा और Blueberry को हल्का नीला रंग बताया गया है।

इसका डिजाइन देखें तो Galaxy S26 FE का लुक Galaxy S26 सीरीज के बाकी मॉडल्स जैसा ही रहने की उम्मीद है।

बता दें कि Samsung सितंबर की शुरुआत में Galaxy S26 FE लॉन्च कर सकता है। पहले आई लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूरोप में इसकी कीमत EUR 799 (लगभग 88,000 रुपये) हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा कीमत पर Galaxy S26 Plus एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यह मॉडल लगभग EUR 700 (लगभग 77,100 रुपये) में मिल सकता है और इसमें ज्यादा स्टोरेज, बेहतर डिस्प्ले और ज्यादा दमदार कैमरे जैसे फीचर्स मिल सकते हैं।

SIP for Child: 18 साल का होने से पहले बच्चा बन जाएगा करोड़पति! समझिए कितना निवेश करना होगा और कैसे करें प्लानिंग

SIP for Child: इस वित्तीय अनिश्चितता के दौर में अपने बच्चों को आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनाना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि बहुत से लोग बच्चे के पैदा होने के साथ निवेश की प्लानिंग शुरु कर देते हैं। इसके लिए जरूरी नहीं कि शुरुआत से ही बहुत बड़ी रकम लगाई जाए। सही निवेश, लंबी अवधि और कंपाउंडिंग की ताकत से छोटी-छोटी रकम भी बड़ा फंड बना सकती है। सवाल है कि हर महीने कितना निवेश करना होगा और अलग-अलग रिटर्न पर कितना पैसा बनेगा?

मान लीजिए आपका बच्चा अभी पैदा हुआ है। आपके पास पूरे 18 साल हैं। अगर आप हर महीने एक तय रकम SIP में लगाते हैं और औसतन 10%, 12% या 15% सालाना रिटर्न मिलता है, तो कितना पैसा बन सकता है, इसे समझते हैं।

1 करोड़ के लिए हर महीने कितना निवेश?

18 साल में कुल 216 महीने होते हैं। 1 करोड़ रुपये का लक्ष्य पाने के लिए अनुमानित मंथली SIP इस तरह होगी।

अनुमानित सालाना रिटर्न18 साल में 1 करोड़ के लिए मंथली SIPकुल निवेशअनुमानित फायदा
10%₹17,487₹37.77 लाख₹62.23 लाख
12%₹14,184₹30.64 लाख₹69.36 लाख
15%₹10,298₹22.24 लाख₹77.76 लाख

यहां एक बात समझना जरूरी है। 15% रिटर्न मानकर चलना ज्यादा आक्रामक अनुमान है। शेयर बाजार आधारित निवेश में रिटर्न तय नहीं होता। इसलिए प्लान बनाते समय बहुत ज्यादा रिटर्न मानकर चलना ठीक नहीं है।

12% रिटर्न पर ₹10,000 की SIP से कितना पैसा बनेगा?

अब दूसरा उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए आप बच्चे के जन्म से हर महीने 10,000 रुपये निवेश करते हैं। 18 साल तक निवेश जारी रखते हैं।

अगर औसत रिटर्न 10% रहा तो करीब 57.2 लाख रुपये बनेंगे। 12% रिटर्न पर यही रकम करीब 70.5 लाख रुपये हो जाएगी। वहीं, 15% औसत रिटर्न मिला तो फंड करीब 97.1 लाख रुपये पहुंच सकता है। यानी सिर्फ 10,000 रुपये की मासिक SIP से भी 18 साल में 1 करोड़ के काफी करीब पहुंचा जा सकता है।

अलग-अलग SIP से कितना फंड बनेगा?

12% सालाना औसत रिटर्न मानकर देखें तो तस्वीर और साफ हो जाती है।

मासिक SIP18 साल में कुल निवेशअनुमानित फंड
₹5,000₹10.80 लाख₹35.3 लाख
₹10,000₹21.60 लाख₹70.5 लाख
₹15,000₹32.40 लाख₹1.06 करोड़
₹20,000₹43.20 लाख₹1.41 करोड़

इस हिसाब से 15,000 रुपये की मासिक SIP 12% औसत रिटर्न पर 18 साल में करीब 1 करोड़ रुपये का फंड बना सकती है।

बच्चा 5 साल का हो चुका है तो?

मान लीजिए आपने निवेश जन्म के समय शुरू नहीं किया और बच्चा अब 5 साल का है। आपके पास 18 साल की उम्र तक सिर्फ 13 साल बचे हैं।

12% सालाना औसत रिटर्न मानें तो 1 करोड़ रुपये के लिए करीब 28,200 रुपये हर महीने निवेश करना होगा। समय कम होने की वजह से मासिक निवेश काफी बढ़ जाता है।

अगर बच्चा 10 साल का हो चुका है तो सिर्फ 8 साल बचेंगे। ऐसे में इसी अनुमानित रिटर्न पर करीब 64,300 रुपये महीने की SIP चाहिए होगी। यही वजह है कि बच्चे के लिए निवेश में जल्दी शुरुआत सबसे बड़ा फायदा देती है।

₹1,000 या ₹2,000 की SIP करें तो?

अगर शुरुआत में बड़ी रकम निवेश करना संभव नहीं है, तो ₹1,000 या ₹2,000 की SIP से भी शुरुआत की जा सकती है। मान लीजिए 18 साल तक हर महीने ₹1,000 निवेश करते हैं और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो करीब ₹7.6 लाख का फंड बन सकता है।

वहीं, ₹2,000 की SIP से करीब ₹15.2 लाख हो सकते हैं। 15% औसत रिटर्न मिलने पर यही रकम क्रमशः करीब ₹10.9 लाख और ₹21.8 लाख हो सकती है। शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन कम उम्र से निवेश शुरू करने का फायदा यह है कि समय के साथ SIP बढ़ाई जा सकती है।

पैसा कहां निवेश करें?

लंबे समय का लक्ष्य है तो निवेश का तरीका भी उसी हिसाब से चुनना चाहिए। 18 साल का समय होने पर इक्विटी म्यूचुअल फंड की SIP एक विकल्प हो सकती है। लेकिन इसमें बाजार का जोखिम रहता है।

जैसे-जैसे बच्चा 18 साल के करीब पहुंचे, पूरे पैसे को इक्विटी में रखना सही नहीं होगा। लक्ष्य से कुछ साल पहले धीरे-धीरे रकम को कम जोखिम वाले विकल्पों में शिफ्ट किया जा सकता है।

एक और तरीका हर साल SIP बढ़ाना है। उदाहरण के लिए शुरुआत 10,000 रुपये महीने से करें और हर साल इसे 10% बढ़ाते जाएं। इससे शुरुआती वर्षों में कम रकम से शुरुआत होगी और समय के साथ निवेश बढ़ता जाएगा।

SIP Calculator: सिर्फ ₹500 और ₹1,000 की मंथली SIP से बना सकते हैं लाखों का फंड! जानिए 10, 15 और 25 सालों का पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

इन दो असोसिएट देशों ने विश्वकप फॉर्मेट को लेकर खोला ICC के खिलाफ मोर्चा

क्रिकेट स्कॉटलैंड और रॉयल डच क्रिकेट एसोसिएशन ने पुरुषों के वनडे वर्ल्ड कप के फ़ॉर्मेट में आईसीसी के हालिया बदलावों पर गहरी निराशा जताते हुए एक कड़ा संयुक्त बयान जारी किया है।बयान के अनुसार, दोनों बोर्डों ने अन्य एसोसिएट सदस्यों के साथ मिलकर आईसीसी से दो बार मुलाक़ात की और बदलावों के बारे में आधिकारिक लिखित जानकारी और इस प्रक्रिया के बारे में ज़्यादा स्पष्टता की मांग की।

हालाँकि, उन्होंने दावा किया कि दूसरी बैठक के दो हफ़्ते से ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी आईसीसी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है, जिसे उन्होंने “निराशाजनक” और “अनादरपूर्ण” बताया। इन बदलावों को एसोसिएट सदस्यों के लिए एक झटका मानते हुए, बयान में कहा गया है कि नया फ़ॉर्मेट “हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर खेल को आगे बढ़ाने में हुई प्रगति को कमज़ोर करने का जोखिम पैदा करेगा”।

बयान में कहा गया, “ऐसे समय में जब क्रिकेट अपनी पहुँच बढ़ाना चाहता है, नए दर्शकों को आकर्षित करना चाहता है और अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में अपनी स्थिति मज़बूत करना चाहता है, उभरते देशों के लिए सार्थक मौकों को कम करना पूरी तरह से गलत संदेश देता है।”

बोर्डों ने यह भी कहा कि महत्वपूर्ण फ़ैसले, खासकर वे जो सीधे एसोसिएट सदस्यों को प्रभावित करते हैं, उनसे सलाह लेने और “पर्याप्त सूचना” देने के बाद ही लिए जाने चाहिए ताकि उनके असर को अच्छी तरह समझा जा सके। “इन बदलावों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की अखंडता और विश्वसनीयता कमज़ोर होने का जोखिम है, और यह मज़बूत गवर्नेंस, पारदर्शी फ़ैसला लेने की प्रक्रिया और सदस्यों के साथ प्रभावी जुड़ाव के महत्व को उजागर करता है। सदस्य और उनके खिलाड़ी वर्ल्ड कप की तैयारी में सालों लगाते हैं, और उन रास्तों पर भरोसा इस बात पर निर्भर करता है कि बिना सलाह-मशविरे के क्वालिफ़िकेशन साइकल के बीच में उन्हें बदला न जाए।”

बयान में कहा गया, “कम समय में उन ढांचों को बदलने से काफी अनिश्चितता पैदा होती है, प्लानिंग में रुकावट आती है और उन संगठनों पर अतिरिक्त ऑपरेशनल और फाइनेंशियल दबाव पड़ता है जो पहले से ही सीमित संसाधनों के साथ काम कर रहे हैं।”

पिछले महीने शुरू किए गए वनडे वर्ल्ड कप के नए फॉर्मेट में टीमों की संख्या 10 से बढ़ाकर 14 कर दी गई है, लेकिन इसमें चार राउंड भी शामिल हैं, जिसमें ग्रुप स्टेज से पहले राउंड-रॉबिन “सुपर सीरीज़” होगी। 12, 13 और 14 नंबर की टीमों में से दो टीमें राउंड 2 में आगे बढ़ेंगी और एक टीम तुरंत बाहर हो जाएगी।

नीदरलैंड और स्कॉटलैंड दोनों ही वर्ल्ड कप क्वालीफायर में पहुंच गए हैं, जो फरवरी 2027 में खेला जाएगा। इसके लिए जगह अभी तय नहीं हुई है। वनडे वर्ल्ड कप के फॉर्मेट में बदलाव से तुरंत चिंताएं पैदा हो गई हैं, खासकर इसलिए क्योंकि अगला एडिशन अगले साल अक्टूबर में शुरू होने वाला है।

बयान में आगे कहा गया, “टूर्नामेंट में अठारह महीने से भी कम समय बचा है, ऐसे में इन बदलावों के समय ने प्रभावित सदस्यों को इस प्रक्रिया में योगदान देने या उसके अनुसार ढलने का बहुत कम मौका दिया है। हमारा मानना है कि एसोसिएट सदस्यों के साथ बेहतर जुड़ाव से एक अधिक प्रभावी और सहयोगी दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलता और क्वालिफिकेशन प्रक्रिया में भरोसा बनाए रखने में मदद मिलती।”