₹12 करोड़ से बने ₹700 करोड़, जानिए Myntra के मुकेश बंसल ने 8 साल में कैसे 60 गुना रिटर्न कमाया

18 जुलाई 2026 को श्रीहरिकोटा से Vikram-1 रॉकेट ने उड़ान भरी। यह सिर्फ एक लॉन्च नहीं था, बल्कि भारत की पहली निजी कंपनी का सफल ऑर्बिटल लॉन्च था। इसके साथ ही Skyroot Aerospace ने इतिहास रच दिया। लेकिन इस सफलता की कहानी करोड़ों की लैब से नहीं, बल्कि हैदराबाद के एक छोटे से ऑफिस से शुरू हुई थी।

सरकारी नौकरी छोड़कर लगा दिया दांव

साल 2017 में पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ISRO में वैज्ञानिक थे। इसी दौरान उन्होंने Space Activities Bill का ड्राफ्ट पढ़ा। उन्हें लगा कि आने वाले समय में निजी कंपनियों को भी रॉकेट बनाने और लॉन्च करने का मौका मिल सकता है। दोनों ने जोखिम उठाया, सरकारी नौकरी छोड़ी और 2018 में Skyroot Aerospace की शुरुआत कर दी।

उस समय भारत का स्पेस सेक्टर लगभग पूरी तरह सरकार के हाथ में था। इसलिए निवेशकों को भी इस आइडिया पर भरोसा नहीं था। ज्यादातर लोगों को लगता था कि किसी भारतीय स्टार्टअप के लिए रॉकेट लॉन्च करना सिर्फ सपना है।

जब किसी ने भरोसा नहीं किया

ऐसे समय में Myntra और Cult.fit के फाउंडर मुकेश बंसल कंपनी के साथ खड़े हुए। उन्होंने 2018 में Skyroot में पहला निवेश किया। उस समय कोई बड़ा वेंचर कैपिटल फंड कंपनी में पैसा लगाने को तैयार नहीं था।

Tracxn के मुताबिक, मुकेश बंसल ने अलग-अलग फंडिंग राउंड में करीब 13 लाख डॉलर, यानी लगभग ₹12 करोड़ लगाए। लंबे समय तक वही कंपनी के इकलौते एंजेल निवेशक रहे। उन्होंने उस स्टार्टअप पर दांव लगाया, जिसके भविष्य को लेकर किसी के पास भरोसेमंद जवाब नहीं था।

2020 में बदल गई तस्वीर

साल 2020 में सरकार ने स्पेस सेक्टर निजी कंपनियों के लिए खोल दिया। इसके बाद Skyroot की रफ्तार बदल गई। बड़े निवेशक जुड़ने लगे और कंपनी को तेजी से फंडिंग मिलने लगी।

नवंबर 2022 में कंपनी ने Vikram-S लॉन्च किया। यह अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला भारत का पहला निजी रॉकेट बना। इसके बाद मई 2026 में Skyroot ने करीब 570 करोड़ रुपये जुटाए और 1.1 अरब डॉलर के वैल्यूएशन के साथ भारत की पहली स्पेसटेक यूनिकॉर्न बन गई।

₹12 करोड़ से बन गए ₹700 करोड़

मुकेश बंसल का शुरुआती भरोसा अब बड़ी कमाई में बदल चुका है। Tracxn के मुताबिक, उनके पास अभी भी Skyroot में 5.7% हिस्सेदारी है, जिसकी मौजूदा कीमत 600 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसके अलावा वह अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचकर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा पहले ही निकाल चुके हैं।

यानी उनकी बची हिस्सेदारी और अब तक की कमाई को जोड़ दें तो उनकी कुल वैल्यू 700 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है। दूसरे शब्दों में कहें तो करीब ₹12 करोड़ का निवेश लगभग 60 गुना बढ़ गया।

सिर्फ एक कंपनी नहीं, पूरे सेक्टर की कहानी

Skyroot की सफलता सिर्फ एक स्टार्टअप की सफलता नहीं है। यह भारत के स्पेस सेक्टर में आए बड़े बदलाव की भी कहानी है। सरकार के दरवाजे खोलने के बाद देश में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में सिर्फ एक से बढ़कर 2026 में 400 से ज्यादा हो गई है।

सरकार का लक्ष्य 2033 तक भारत की स्पेस इकोनॉमी को 8.4 अरब डॉलर से बढ़ाकर 44 अरब डॉलर तक पहुंचाने का है। Skyroot की उड़ान इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल बन चुकी है।

मुकेश बंसल का सबसे बड़ा दांव

मुकेश बंसल पहले Myntra के जरिए फैशन ई-कॉमर्स और फिर Cult.fit के जरिए फिटनेस सेक्टर में अपनी पहचान बना चुके थे। लेकिन Skyroot में किया गया निवेश अलग था।

यह सिर्फ किसी स्टार्टअप में पैसा लगाना नहीं था, बल्कि भारत के निजी अंतरिक्ष कार्यक्रम के भविष्य पर जताया गया भरोसा था। आज वही भरोसा भारतीय स्पेस सेक्टर की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में गिना जा रहा है।

नौकरी 10 साल से पहले छोड़ने पर आपके EPS का क्या होगा? जानिए ईपीएफओ का नियम क्या है

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 22 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 16 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: बुधवार 22 जुलाई को शेयर बाजार में 15 कंपनियों के शेयर फोकस में रह सकते हैं। कुछ कंपनियों ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जबकि कुछ ने कारोबार से जुड़े बड़े ऐलान किए हैं। वहीं, कई दिग्गज कंपनियां आज अपने Q1 नतीजे पेश करेंगी। ऐसे में इन शेयरों में पूरे कारोबारी सत्र के दौरान अच्छी-खासी हलचल देखने को मिल सकती है।

Aurobindo Pharma

फार्मा कंपनी Aurobindo Pharma की सहयोगी कंपनी CuraTeQ को हैदराबाद स्थित बायोसिमिलर्स मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के लिए ब्राजील की हेल्थ रेगुलेटर ANVISA से मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी से कंपनी को ब्राजील के बाजार में कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी।

JSW Infrastructure

पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनी JSW Infrastructure का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 8.2% घटकर ₹357.6 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 18.1% बढ़कर ₹1,444.8 करोड़ हो गया। EBITDA 15.9% बढ़कर ₹673.7 करोड़ रहा। वहीं, EBITDA मार्जिन 47.5% से घटकर 46.6% पर आ गया।

Aditya Birla Capital

फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी Aditya Birla Capital ने अपनी सहयोगी कंपनी Aditya Birla Health Insurance में राइट्स इश्यू के जरिए ₹123.89 करोड़ का निवेश किया है। कंपनी ने यह निवेश कारोबार बढ़ाने और पूंजी आधार मजबूत करने के लिए किया है।

Trident Ltd

टेक्सटाइल और पेपर सेक्टर की कंपनी Trident Ltd का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 12.9% बढ़कर ₹158 करोड़ रहा। इस दौरान ऑपरेशंस से रेवेन्यू 4.7% बढ़कर ₹1,786.8 करोड़ और EBITDA 2.7% बढ़कर ₹299.6 करोड़ हो गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन पिछले साल की तरह 17% पर स्थिर रहा।

Bandhan Bank

प्राइवेट सेक्टर के Bandhan Bank का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 34.8% बढ़कर ₹501.6 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 6% बढ़ी। बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ। ग्रॉस NPA 3.15% और नेट NPA 0.93% पर आ गया। तिमाही के दौरान बैंक ने ₹682.5 करोड़ का प्रावधान किया।

IndiaMART InterMESH

ऑनलाइन B2B ई-कॉमर्स कंपनी IndiaMART InterMESH ने जून तिमाही में अच्छे नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 12.18% बढ़कर ₹172.20 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹153.50 करोड़ था। तिमाही आधार पर कंपनी का मुनाफा 243.03% उछला है।

TVS Holdings

ऑटो सेक्टर की कंपनी TVS Holdings का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 73.8% बढ़कर ₹1,173.5 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 34% बढ़कर ₹17,076.1 करोड़ रहा। EBITDA 38.6% बढ़ा। वहीं, EBITDA मार्जिन बढ़कर 16.3% हो गया।

Welspun Specialty

मेटल सेक्टर की कंपनी Welspun Specialty जून तिमाही में घाटे से मुनाफे में लौट आई। कंपनी ने ₹5.16 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। पिछले साल इसी अवधि में ₹0.75 करोड़ का घाटा हुआ था। हालांकि, रेवेन्यू 3.8% घटकर ₹194 करोड़ रहा। EBITDA बढ़कर ₹10.54 करोड़ और मार्जिन 5.4% पर पहुंच गया।

Cyient DLM

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Cyient DLM का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा बढ़कर ₹16.2 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹7.4 करोड़ था। रेवेन्यू 34.3% बढ़कर ₹373.8 करोड़ रहा। EBITDA 56.4% बढ़कर ₹39 करोड़ हो गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 10.5% पर पहुंच गया।

Indian Hotels

टाटा ग्रुप की हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की कंपनी Indian Hotels का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 20.8% बढ़कर ₹358 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 14.6% बढ़कर ₹2,339 करोड़ रहा। EBITDA 16.8% बढ़कर ₹672 करोड़ पहुंच गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 28.8% रहा।

MedPlus Health Services

फार्मेसी रिटेल चेन MedPlus Health Services का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 21.8% घटकर ₹33 करोड़ रह गया। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 21.8% बढ़कर ₹1,879.6 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹1,542.6 करोड़ था।

Aavas Financiers

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी Aavas Financiers की जून तिमाही में नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 16.6% बढ़कर ₹324 करोड़ हो गई। शुद्ध मुनाफा 23% बढ़कर ₹171 करोड़ रहा। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹139 करोड़ था।

Sagility India

हेल्थकेयर BPO कंपनी Sagility India का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 46% बढ़कर ₹217 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 27.6% बढ़कर ₹1,963 करोड़ रहा। EBITDA 26.6% बढ़कर ₹438 करोड़ पहुंच गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन 23% से घटकर 22.3% रह गया।

Mastek

आईटी सेक्टर की कंपनी Mastek का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 15% बढ़कर ₹106 करोड़ हो गया। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 7.7% बढ़कर ₹985.3 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹914.7 करोड़ था।

Sunteck Realty

रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी Sunteck Realty का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 26.4% बढ़कर ₹42.3 करोड़ हो गया। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 1.7% बढ़कर ₹191.6 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹181.3 करोड़ था।

Hatsun Agro

डेयरी कंपनी Hatsun Agro का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 1.1% घटकर ₹133.6 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 19.3% बढ़कर ₹3,090 करोड़ हो गया। EBITDA 5.1% घटकर ₹350.5 करोड़ रहा। वहीं, EBITDA मार्जिन घटकर 11.3% पर आ गया।

22 जुलाई को आने वाले तिमाही नतीजे

बुधवार को जून तिमाही के नतीजों पर बाजार की नजर रहेगी। कई बड़ी कंपनियां अपने Q1 रिजल्ट जारी करेंगी। इनमें Adani Green Energy, Adani Power, Aye Finance, Dr. Reddy’s Laboratories, Bharat Petroleum Corporation (BPCL) और CSB Bank जैसी कंपनियां शामिल हैं। इनके नतीजों के बाद इन शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है।

SBI Funds Management Shares: ₹750 तक जा सकता है स्टॉक, Emkay ने खरीदने की सलाह दी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Aastha Spintex: 23 जुलाई को बोर्ड मीटिंग होगी, 1:1 बोनस शेयर के साथ डिविडेंड देने के प्रस्ताव पर विचार करेगा बोर्ड

Aastha Spintex: गुजरात की इंटीग्रेटेड कॉटन यार्न निर्माता Aastha Spintex Ltd अपने कारोबार के अगले चरण की तैयारी में जुट गई है। कंपनी का बोर्ड 23 जुलाई 2026 को होने वाली बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर विचार करेगा। इनमें 1:1 बोनस शेयर, 100% तक फाइनल डिविडेंड और वैल्यू-एडेड टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स में विस्तार शामिल है।

बोनस शेयर और डिविडेंड पर फैसला

Aastha Spintex के बोर्ड के सामने 1:1 बोनस इश्यू का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके तहत हर एक इक्विटी शेयर पर एक अतिरिक्त बोनस शेयर मिलेगा। इसके अलावा, ₹10 फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर ₹10 तक के फाइनल डिविडेंड पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि, इन प्रस्तावों को शेयरधारकों की मंजूरी मिलना जरूरी होगा।

टेक्सटाइल वैल्यू चेन में आगे बढ़ने की तैयारी

Aastha Spintex के मुताबिक, वह अब सिर्फ कॉटन यार्न तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी अपने ब्रांड के तहत ग्रे फैब्रिक और दूसरे वैल्यू-एडेड फैब्रिक प्रोडक्ट्स के कारोबार में उतरने की योजना बना रही है। इस कदम से कंपनी टेक्सटाइल वैल्यू चेन में अपनी मौजूदगी और मजबूत करना चाहती है। साथ ही मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का बेहतर इस्तेमाल भी हो सकेगा।

मैनेजिंग डायरेक्टर क्या बोले?

Aastha Spintex के मैनेजिंग डायरेक्टर दिव्यांग जसवंत पटेल ने कहा कि कंपनी लंबे समय से एक मजबूत और इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल बिजनेस बनाने की दिशा में काम कर रही है। उनके मुताबिक, अब टेक्सटाइल वैल्यू चेन में आगे बढ़ने का सही समय है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बोनस इश्यू और डिविडेंड शेयरधारकों के साथ कंपनी की बनाई गई वैल्यू साझा करने की प्रतिबद्धता को भी दिखाते हैं।

हाल में बढ़ी उत्पादन क्षमता

हाल ही में NSE और BSE के मेन बोर्ड पर लिस्टिंग के बाद कंपनी ने Falcon Yarns Pvt Ltd का अधिग्रहण पूरा किया है। कंपनी का दावा है कि अब उसकी सालाना स्पिनिंग क्षमता 7,700 मीट्रिक टन से बढ़कर 17,457 मीट्रिक टन हो गई। वहीं, स्पिंडल क्षमता 25,920 से बढ़कर 61,824 तक पहुंच गई। कंपनी का मानना है कि वैल्यू-एडेड फैब्रिक सेगमेंट में विस्तार इस बढ़ी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद करेगा।

वित्तीय प्रदर्शन कैसा रहा

पिछले दो वित्त वर्षों में कंपनी की वित्तीय स्थिति में भी सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2023 में ₹240 करोड़ रहा रेवेन्यू बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में ₹352 करोड़ हो गया। इस दौरान कंपनी ने 21.2% की CAGR दर्ज की। ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 5.87% से बढ़कर 14.16% हो गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 6.05% से बढ़कर 14.45% पहुंच गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Guru Purnima 2026 Date: कब है गुरु पूर्णिमा? कुंडली से गुरु दोष दूर करने के लिए इस दिन कर सकते हैं 5 उपाय

Guru Purnima 2026 Date: हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह में आने वाली पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह पूर्णिमा सभी पूर्णिमा में महत्वपूर्ण मानी गई है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर किए गए दान-पुण्य द्वारा व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु का आदर-सत्कार करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। गुरु पूर्णिमा यानि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन महाभारत और वेदों के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। इस वजह से इस दिन वेद व्यास जयंती मनाते हैं। यह दिन कुंडली के गुरु दोष को दूर करने का भी एक अच्छा अवसर है। इस साल आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 6:18 बजे से शुरू होगी और यह 29 जुलाई को रात 8:05 बजे तक मान्य होगी। उदयातिथि के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई बुधवार को मनाया जाएगा।

गुरु पूर्णिमा 2026 मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : प्रात: 04:17 बजे से लेकर प्रात: 04:59 बजे तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त : सुबह 05:41 बजे से सुबह 07:22 बजे तक

अमृत-सर्वोत्तम : मुहूर्त सुबह 07:22 बजे से सुबह 09:04 बजे तक

शुभ-उत्तम मुहूर्त : सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक

चर-सामान्य मुहूर्त : दोपहर 03:51 बजे से शाम 05:32 बजे तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त : शाम 05:32 बजे से शाम 07:14 बजे तक

प्रीति योग और उत्तराषाढा नक्षत्र में गुरु पूर्णिमा

इस साल की गुरु पूर्णिमा प्रीति योग और उत्तराषाढा नक्षत्र में है। प्रीति योग प्रात:काल से लेकर रात के 11 बजकर 58 मिनट तक है, उसके बाद से आयुष्मान योग बनेगा। प्रीति योग के स्वामी ग्रह बुध और देवता भगवान विष्णु हैं। यह योग नए रिश्तों की शुरुआत और विवादों के निपटारे के लिए उत्तम माना जाता है। इस दिन उत्तराषाढा नक्षत्र सुबह से लेकर दोपहर 03:37 पी एम तक है, उसके बाद से श्रवण नक्षत्र है।

कुंडली से गुरु दोष दूर करने के अचूक उपाय

कुंडली में गुरु कमजोर या पीड़ित हो, तो व्यक्ति के विवाह, करियर, शिक्षा और मान-सम्मान में बाधाएं आने लगती हैं। गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन आप निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:

  • गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की संयुक्त पूजा करें। पूजा में पीले फूल, पीले फल, चंदन, पंचामृत और बेसन के लड्डू अर्पित करें। इस दिन घर पर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है।
  • पूजा के समय पीले हकीक या तुलसी की माला से `ॐ बृं बृहस्पतये नमः` और `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः` मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें।
  • गुरु पूर्णिमा पर किसी मंदिर या जरूरतमंद को पीले रंग की वस्तुएं दान करें। जैसे— चने की दाल, हल्दी, पीला अनाज, केसर, पीली मिठाइयां या पीले वस्त्र। इससे गुरु ग्रह मजबूत होते हैं।
  • यदि कुंडली में गुरु अत्यधिक कमजोर है, तो इस दिन (और उसके बाद हर गुरुवार को) नहाने के पानी में एक चुटकी हल्दी मिलाकर स्नान करें। स्नान के पश्चात पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • गुरु पूर्णिमा के दिन शिवलिंग पर चने की दाल के 108 साबुत दाने “ॐ नमः शिवाय” बोलते हुए एक-एक करके अर्पित करें। इससे भगवान शिव के साथ-साथ विष्णु जी की भी असीम कृपा मिलती है।

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नौकरी 10 साल से पहले छोड़ने पर आपके EPS का क्या होगा? जानिए ईपीएफओ का नियम क्या है

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोग ईपीएफओ की स्कीम ईपीएफ और ईपीएस के तहत आते हैं। ईपीएफ का मतलब एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड (ईपीएफ) है, जबकि ईपीएस का मतलब एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (ईपीएस) है। ईपीएफ में जमा पैसा रिटायरमेंट के बाद एंप्लॉयीज को मिल जाता है। ईपीएस में जमा पैसे से एंप्लॉयीज को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन मिलती है। शर्त यह है कि नौकरी कम से कम 10 पूरी होने के बाद ही एंप्लॉयीज पेंशन का हकदार होता है। सवाल है कि नौकरी 10 साल पूरी नहीं हुई है तो क्या होगा?

EPS 2026 में पेंशन के लिए शर्त

एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (EPS) 2026 ने ईपीएस 1995 की जगह ले ली है। नई स्कीम में भी यह कहा गया है कि कोई एंप्लॉयीज पेंशन का हकदार तभी होगा, जब उसकी नौकरी कम से कम 10 साल पुरानी होगी। ईपीएस 1995 में भी यह शर्त थी। इस शर्त को पूरी करने वाले एंप्लॉयीज रिटायरमेंट के बाद पेंशन के हकदार होंगे।

10 साल से पहले नौकरी छोड़ने पर विकल्प

एंप्लॉयी की नौकरी अगर 10 साल पुरानी नहीं है तो ईपीएस में जमा उसके पैसे के लिए दो विकल्प हैं। वह इस पैसे को विड्रॉ यानी निकाल सकता है या स्कीम सर्टिफिकेट हासिल कर सकता है। अगर एंप्लॉयी की उम्र रिटायरमेंट की उम्र से कम है तभी वह इन दोनों विकल्पों में से किसी एक का इस्तेमाल कर सकता है।

नौकरी छोड़ने के 36 महीने बाद ही विड्रॉल की इजाजत

ईपीएस 2026 में विड्रॉल के नियम में बदलाव किया गया है। नए नियम के मुताबिक, अगर कोई एप्लॉयी रिटायरमेंट की उम्र से पहले नौकरी छोड़ देता है वह ईपीएस अकाउंट में अंतिम बार जमा कंट्रिब्यूशन के 36 महीने बाद ही अपना पैसा निकालने का हकदार होगा। दूसरा, रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंचने पर वह इस पैसे को निकाल सकता है। इन दोनों में से जो पहले होगा वह लागू होगा।

एंप्लॉयी के पास स्कीम सर्टिफिकेट का भी विकल्प

नियम में कहा गया है, “रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंचने से पहले अगर एंप्लॉयी नौकरी छोड़ता है और उसकी सर्विस 10 साल पूरी नहीं हुई है तो ईपीएस अकाउंट में अंतिम कंट्रिब्यूशन की तारीख से 36 महीने बाद ही विड्रॉल बेनेफिट का इस्तेमाल कर सकता है।” दूसरा विकल्प स्कीम सर्टिफिकेट का है। इसमें एंप्लॉयी के दूसरी नौकरी ज्वाइन करने पर पिछली नौकरी का सर्विस पीरियड कैरी-फॉरवर्ड हो जाता है।

विड्रॉल अमाउंट के कैलकुलेशन का फॉर्मूला

EPS 2026 के शिड्यूल II के मुताबिक, विड्रॉल की स्थिति में एंप्लॉयी को मिलने वाले पैसे का कैलकुलेशन एलिजिबल सर्विस की महीनों की संख्या पर निर्भर करता है। एग्जिट के वक्त पेंशनएबल सैलरी को उस फैक्टर से गुणा किया जाता है जिसके बारे में सर्विस के पीरियड के हिसाब से शिड्यूल में बताया गया है। इसे हम एक उदाहरण की मदद से आसानी से समझ सकते हैं।

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उदाहरण से ऐसे समझ सकते हैं

मान लीजिए कोई व्यक्ति 36 महीने नौकरी करने के बाद इस्तीफा दे देता है। उसकी पेंशनएबल सैलरी 15,000 है तो विड्राल बेनेफिट के कैलकुलेशन के लिए पेंशनएबल सैलरी को शिड्यूल में बताए गए फैक्टर से गुणा करना होगा।

Gold Silver Price Today: सोना ₹800 उछला, ₹1.47 लाख के पार पहुंचा दाम; चांदी सपाट रही

Gold Silver Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंगलवार को सोने की कीमत ₹800 बढ़कर ₹1,47,700 प्रति 10 ग्राम पहुंच गई। मजबूत घरेलू मांग और वैश्विक बाजार में तेजी की वजह से सोने में यह उछाल देखने को मिला। इससे पहले सोमवार को सोना ₹1,46,900 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

वहीं, चांदी की कीमत ₹2,21,500 प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। कारोबारियों के मुताबिक हालिया गिरावट के बाद चांदी में खरीदारी सीमित रही। वहीं, सोने में लगातार अच्छी मांग बनी हुई है।

सोने की कीमत क्यों बढ़ी?

HDFC Securities के कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरू होने की उम्मीद से भू-राजनीतिक तनाव कुछ कम हुआ है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई और निवेशकों का रुझान फिर से सोने की ओर बढ़ा।

उन्होंने कहा कि चीन में मजबूत फिजिकल डिमांड और दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी भी सोने की कीमतों को सहारा दे रही है।

ग्लोबल मार्केट में भी तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 1.25% बढ़कर 4,057.89 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 4,082 डॉलर प्रति औंस के इंट्राडे हाई तक भी गया।

Kotak Securities की कमोडिटी रिसर्च की कायनात चैनवाला ने कहा कि पिछले हफ्ते 4,000 डॉलर से नीचे फिसलने के बाद सोने ने अब फिर से तेजी पकड़ ली है।

चांदी ने भी दिखाई मजबूती

वैश्विक बाजार में स्पॉट सिल्वर 4% से ज्यादा बढ़कर 58.80 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई।

Mirae Asset ShareKhan के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह का कहना है कि अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। वहीं, चीन की ओर से टेक सेक्टर को समर्थन देने के लिए किए जा रहे बड़े निवेश से इंडस्ट्रियल मेटल्स, खासकर चांदी, को भी मजबूती मिली है।

MCX गोल्ड पर एक्सपर्ट की राय

LKP Securities के वीपी (रिसर्च- कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी ने कहा कि हालिया गिरावट के बाद सोने में फिर से मजबूत रिकवरी देखने को मिली है। MCX पर सोना करीब ₹1,500 यानी 1% चढ़कर ₹1,42,800 के आसपास पहुंच गया। वहीं, COMEX Gold भी 4,070 डॉलर प्रति औंस के करीब कारोबार कर रहा है और 4,000 डॉलर के अहम स्तर से ऊपर बना हुआ है।

उनके मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव की वजह से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग फिर बढ़ी है। इसी का फायदा सोने को मिल रहा है। हाल की गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव भी काफी हद तक कम हो गया है।

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और फेडरल रिजर्व के सतर्क रुख के बावजूद भू-राजनीतिक अनिश्चितता निवेशकों को फिर से सोने की ओर खींच रही है। उनका अनुमान है कि अगले कुछ कारोबारी सत्रों में MCX Gold ₹1,41,000 से ₹1,45,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर सकता है।

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जापान में दूर के रिश्तेदारों को गोद लेंगे सम्राट:सिंहासन के सिर्फ 3 उत्तराधिकारी बचे तो बदला नियम, महिला को राजा बनने का अधिकार नहीं

जापान की संसद ने 17 जुलाई को शाही परिवार के उत्तराधिकार से जुड़े कानून में बड़ा बदलाव किया। नए कानून के तहत अब शाही परिवार 15 साल या उससे अधिक उम्र के दूर के पुरुष रिश्तेदारों को गोद लेकर दोबारा शाही परिवार में शामिल कर सकेगा। इसके अलावा, अब शाही परिवार की महिलाएं किसी आम नागरिक से शादी करने के बाद भी अपना शाही दर्जा और आधिकारिक जिम्मेदारियां नहीं खोएंगी। हालांकि, सबसे अहम नियम नहीं बदला गया। जापान में अब भी सिर्फ पुरुष ही सम्राट बन सकते हैं। यानी सम्राट नारुहितो की इकलौती बेटी राजकुमारी आइको भविष्य में भी सिंहासन की उत्तराधिकारी नहीं बन सकेंगी। शाही परिवार में नियम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी जापान का शाही परिवार दुनिया का सबसे पुराना लगातार चला आ रहा राजवंश माना जाता है, लेकिन आज वह उत्तराधिकार के गंभीर संकट से जूझ रहा है। मौजूदा सम्राट की सिर्फ एक बेटी है। वह उत्तराधिकारी नहीं बन सकती, क्योंकि कानून सिर्फ पुरुषों को ही सिंहासन का अधिकार देता है।

शाही परिवार में सिंहासन के सिर्फ 3 उत्तराधिकारी हैं। उत्तराधिकार की कतार में पहले नंबर पर सम्राट के छोटे भाई प्रिंस फुमिहितो, दूसरे नंबर पर उनके 19 वर्षीय बेटे प्रिंस हिसाहितो और तीसरे नंबर पर 90 वर्षीय प्रिंस हिताची हैं। अगर भविष्य में पुरुष उत्तराधिकारी नहीं बढ़े, तो शाही परिवार के सामने उत्तराधिकार का संकट और गहरा सकता है। सरकार के सामने दो ही रास्ते थे- सरकार ने दूसरा रास्ता क्यों चुना जापान में महिला को सम्राट बनाने का मुद्दा कई वर्षों से चर्चा में है। जनमत सर्वेक्षणों में अधिकांश जापानी नागरिक महिला सम्राट के पक्ष में रहे हैं। 2024 में क्योडो न्यूज के सर्वे में 90% जापानी नागरिकों ने महिला सम्राट का समर्थन किया था। लेकिन सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के परंपरावादी नेता इसका विरोध करते रहे हैं। इन नेताओं का तर्क है कि जापान का शाही परिवार करीब 2,000 वर्षों से पुरुष वंश के आधार पर चला आ रहा है। उनके अनुसार, अगर किसी महिला को सम्राट बनाया गया और उसके बच्चे भविष्य में सिंहासन पर बैठे, तो शाही परिवार की पितृवंश परंपरा टूट जाएगी। उनका मानना है कि यही परंपरा जापान की राजशाही की पहचान है और इसे नहीं बदला जाना चाहिए। इसी वजह से सरकार ने महिला सम्राट या महिलाओं की संतान को उत्तराधिकारी बनाने का कानून बदलने के बजाय दूसरा रास्ता चुना।

11 पूर्व शाही शाखाएं क्या हैं, जिनके बच्चे गोद लिए जाएंगे

सम्राट को उत्तराधिकारी चुनने के लिए गोद लेने का अधिकार मिला है। लेकिन वे किसी भी बच्चे को गोद नहीं ले सकते। वे केवल 11 पूर्व शाही शाखाओं के वंशज के पुरुषों को ही गोद ले सकेंगे। दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध से पहले जापान के शाही परिवार में सिर्फ मुख्य राजपरिवार ही नहीं था, बल्कि उससे जुड़ी 11 अलग-अलग शाही शाखाएं भी थीं। इन शाखाओं के सदस्य भी सम्राट के पुरुष वंशज थे और जरूरत पड़ने पर सिंहासन के उत्तराधिकारी बन सकते थे। साल 1947 में, दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी कब्जे वाली प्रशासनिक व्यवस्था और जापानी सरकार ने शाही परिवार का आकार छोटा करने का फैसला किया। इसके तहत इन 11 शाखाओं के 51 सदस्यों से शाही दर्जा वापस ले लिया गया। वे आम नागरिक बन गए और उनके परिवारों का शाही परिवार से कानूनी रिश्ता खत्म हो गया। नियम बदलने के बाद शाही परिवार में पुरुष सदस्यों की संख्या लगातार घटती गई। दूसरी ओर, शाही परिवार की महिलाएं जब आम नागरिकों से शादी करती थीं, तो कानून के मुताबिक उन्हें भी शाही परिवार छोड़ना पड़ता था। इससे शाही परिवार छोटा होता चला गया और उत्तराधिकार का संकट गहराने लगा। इसी वजह से जापानी सरकार ने करीब 79 साल बाद नियमों में बदलाव किया है। अब इन 11 पूर्व शाही शाखाओं के 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुष वंशजों को कानूनी प्रक्रिया के जरिए गोद लेकर फिर से शाही परिवार में शामिल किया जा सकेगा। महिलाओं का आम नागरिक से शादी करने पर शाही दर्जा नहीं छिनेगा नए कानून के तहत अब शाही परिवार की महिला सदस्य अगर किसी आम नागरिक से शादी करती हैं, तब भी वे अपना शाही दर्जा और आधिकारिक जिम्मेदारियां नहीं खोएंगी। यह पहले के नियम से बिल्कुल अलग है। पुराने कानून के तहत आम नागरिक से शादी करने वाली महिला को शाही परिवार छोड़ना पड़ता था। नए कानून के पीछे सबसे बड़ा कारण राजकुमारी माको का मामला माना जा रहा है। सम्राट नारुहितो की भतीजी माको ने 2021 में अपने कॉलेज के साथी केई कोमुरो से शादी की थी। दोनों की मुलाकात 2013 में टोक्यो की इंटरनेशनल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी में हुई थी। दोनों ने गुपचुप सगाई कर ली थी, जिसके बाद पूरे जापान में इस रिश्ते को लेकर काफी विवाद हुआ। अक्टूबर 2021 में दोनों की शादी बेहद सादगी से हुई। परंपरा के मुताबिक होने वाला जुलूस और भव्य समारोह भी नहीं हुआ। शादी के बाद कानून के तहत माको को अपना शाही दर्जा छोड़ना पड़ा और वे अपने पति के साथ न्यूयॉर्क चली गईं, जहां उनके पति वकील हैं। माको ने शाही परिवार छोड़ने पर मिलने वाली करीब 10 लाख पाउंड (करीब 11 करोड़ रुपए) की सरकारी राशि भी लेने से इनकार कर दिया था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद ऐसा करने वाली वे शाही परिवार की पहली सदस्य थीं। जापान की सम्राट बन चुकी हैं 8 महिलाएं जापान के इतिहास में अब तक 8 महिलाएं सम्राट (महारानी) बन चुकी हैं। हालांकि, इनमें से कोई भी अपने बच्चों को उत्तराधिकारी नहीं बना सकी। वे केवल तब सिंहासन पर बैठीं, जब कोई उपयुक्त पुरुष उत्तराधिकारी उपलब्ध नहीं था या वह बहुत छोटा था। इसलिए उन्हें अक्सर अस्थायी शासक माना गया और बाद में सत्ता फिर किसी पुरुष उत्तराधिकारी को सौंप दी गई। जापान की आखिरी महिला शासक महारानी गोसाकुरामाची थीं। उन्होंने 1762 से 1770 तक शासन किया। उनके बाद से पिछले 250 से अधिक साल में जापान में कोई महिला सम्राट नहीं बनी। फिर महिलाओं के लिए रास्ता क्यों बंद हो गया? पहले जापान में कानून में यह साफ नहीं लिखा था कि केवल पुरुष ही सम्राट बन सकते हैं। 19वीं सदी के आखिर में जापान ने खुद को एक आधुनिक राष्ट्र बनाने की शुरुआत की। जापान पश्चिमी देशों की तरह आधुनिक सेना, प्रशासन और कानूनी व्यवस्था विकसित करना चाहता था। इसी प्रक्रिया में 1889 में मेइजी संविधान लागू किया गया, जिसने जापान में संवैधानिक राजतंत्र की नींव रखी और सम्राट की शक्तियों तथा शाही परिवार से जुड़े नियम तय किए। इसमें यह व्यवस्था की गई कि सिंहासन पर केवल पुरुष वंशज ही बैठेंगे। दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1947 में नया शाही परिवार कानून बनाया गया। इसमें भी पुरुष उत्तराधिकार की व्यवस्था को बरकरार रखा गया। यही कानून आज भी लागू है। इसलिए आज भी जापान में महिला सम्राट बनने या महिला की संतान के उत्तराधिकारी बनने की अनुमति नहीं है।

Q1 Results: घाटे से मुनाफे में लौटी स्टेनलेस स्टील कंपनी, शेयरों पर रहेगी नजर

Welspun Specialty Q1 Results: Welspun Group की कंपनी Welspun Specialty Solutions ने जून तिमाही में घाटे से मुनाफे में वापसी की है। यह स्पेशल स्टेनलेस स्टील और अलॉय स्टील बनाने वाली कंपनी है। हालांकि कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले थोड़ा घटा, लेकिन ऑपरेटिंग प्रदर्शन में बड़ा सुधार देखने को मिला।

घाटे से मुनाफे में वापसी

अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी ने ₹5.16 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹0.75 करोड़ का घाटा हुआ था।

कंपनी ने बताया कि पिछले साल की पहली तिमाही में ₹5.78 करोड़ का एकमुश्त फाइनेंस कॉस्ट भी शामिल था। यह खर्च प्रेफरेंस शेयरों के रिडेम्प्शन की वजह से आया था।

रेवेन्यू घटा, लेकिन कमाई सुधरी

जून तिमाही में Welspun Specialty का रेवेन्यू 3.8% घटकर ₹194 करोड़ रह गया। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹201 करोड़ था।

हालांकि, ऑपरेटिंग प्रदर्शन काफी मजबूत रहा। कंपनी का EBITDA दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹10.54 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹4.38 करोड़ था।

मार्जिन में बड़ा सुधार

बेहतर ऑपरेटिंग प्रदर्शन की वजह से EBITDA मार्जिन 2.2% से बढ़कर 5.4% हो गया। यानी बिक्री थोड़ी कम रही, लेकिन कंपनी की कमाई की क्षमता में अच्छा सुधार देखने को मिला।

किन सेक्टरों को सप्लाई करती है कंपनी?

Welspun Specialty Solutions गुजरात के झगड़िया में स्टेनलेस स्टील प्रोडक्ट्स बनाती है। कंपनी के प्रोडक्ट पावर, एनर्जी, पेट्रोकेमिकल, डिफेंस, ऑयल एंड गैस, स्पेस और न्यूक्लियर पावर जैसे अहम सेक्टरों में इस्तेमाल होते हैं।

शेयर का हाल

Welspun Specialty Solutions का शेयर मंगलवार को 3.02% बढ़कर ₹54.50 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक ने 47.10% का रिटर्न दिया है।

कंपनी का बिजनेस क्या है

Welspun Specialty Solutions, Welspun Group की मेटल कंपनी है। यह स्पेशल स्टेनलेस स्टील और अलॉय स्टील प्रोडक्ट्स बनाती है। कंपनी के प्रोडक्ट पावर, ऑयल एंड गैस, पेट्रोकेमिकल, डिफेंस, न्यूक्लियर एनर्जी, स्पेस और हेवी इंजीनियरिंग जैसे सेक्टरों में इस्तेमाल होते हैं।

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Top 10 Scooters : TVS iQube, Bajaj Chetak और Ather Rizta की रिकॉर्ड बढ़त, Honda Activa का दबदबा कायम

electic scooters

भारतीय स्कूटर बाजार में जून 2026 के दौरान शानदार तेजी देखने को मिली। इस महीने देश के टॉप-10 सबसे ज्यादा बिकने वाले स्कूटरों की कुल 6,36,315 यूनिट्स बिकीं, जो जून 2025 की 4,60,440 यूनिट्स की तुलना में 38% अधिक हैं। हालांकि बिक्री के मामले में Honda Activa ने एक बार फिर पहला स्थान बरकरार रखा, लेकिन इलेक्ट्रिक स्कूटरों की तेजी ने बाजार में नया मुकाबला खड़ा कर दिया है।

एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक आने वाले एक-दो वर्षों में इलेक्ट्रिक स्कूटर पारंपरिक पेट्रोल स्कूटरों को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। फिलहाल पेट्रोल स्कूटर भारतीय बाजार में सबसे ज्यादा बिक रहे हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक स्कूटरों की वृद्धि दर कहीं अधिक तेज है। 

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Honda Activa रही नंबर-1

Honda Activa की जून 2026 में 2,18,932 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो पिछले साल की तुलना में 19% अधिक है। टॉप-10 स्कूटरों की कुल बिक्री में अकेले Activa की हिस्सेदारी एक-तिहाई से ज्यादा रही। विशेषज्ञों के अनुसार Activa की लोकप्रियता के पीछे इसकी भरोसेमंद परफॉर्मेंस, बेहतर माइलेज, मजबूत रीसेल वैल्यू और Honda का व्यापक सर्विस नेटवर्क प्रमुख कारण हैं।

TVS Jupiter दूसरे नंबर पर

TVS Jupiter ने 1,36,805 यूनिट्स की बिक्री के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। इसकी बिक्री में सालाना आधार पर 27% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं Suzuki Access ने 63,121 यूनिट्स बेचकर तीसरा स्थान हासिल किया और इसकी बिक्री में 22 प्रतिशत की वृद्धि रही।

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इलेक्ट्रिक स्कूटरों की शानदार छलांग

 

जून 2026 में सबसे बड़ी बढ़त TVS iQube ने दर्ज की। इसकी बिक्री 47,331 यूनिट्स रही, जो पिछले साल के मुकाबले 232 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा Bajaj Chetak की 40,376 यूनिट्स बिकीं और इसने 126 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक नए मॉडल, बेहतर बैटरी तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति बढ़ते भरोसे से इन स्कूटरों की मांग लगातार बढ़ रही है।

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अन्य प्रमुख स्कूटरों का प्रदर्शन

TVS Ntorq – 37,762 यूनिट्स (65 प्रतिशत वृद्धि)

Ather Rizta – 24,742 यूनिट्स (97 प्रतिशत वृद्धि)

Yamaha Ray – 22,782 यूनिट्स (60 प्रतिशत वृद्धि)

Suzuki Burgman Street – 22,454 यूनिट्स (43 प्रतिशत वृद्धि)

Hero Destini 125 – 22,010 यूनिट्स (9 प्रतिशत वृद्धि) 

Market Outlook : लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुए इक्विटी इंडेक्स, जानिए 22 जुलाई को कैसी रह सकती है इनकी चाल

Market Outlook : 21 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,200 के नीचे रहा। कारोबारी सेशन के अंत में सेंसेक्स 238.41 अंक या 0.31 प्रतिशत गिरकर 77,470.11 पर और निफ्टी 50.80 अंक या 0.21 प्रतिशत गिरकर 24,187.70 पर बंद हुआ। लगभग 2087 शेयरों में बढ़त हुई,1942 शेयरों में गिरावट आई और 180 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी पर गिरने वाले प्रमुख शेयरों में HDFC बैंक,TCS,रिलायंस इंडस्ट्रीज,SBI और डॉ.रेड्डीज़ लैब्स शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में श्रीराम फाइनेंस,बजाज फिनसर्व,HCL टेक्नोलॉजीज,आयशर मोटर्स और अल्ट्राटेक सीमेंट शामिल रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.3% और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.5% ऊपर बंद हुआ।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो FMCG,IT,ऑयल एंड गैस और PSU बैंक में 0.3-0.8% की गिरावट आई। जबकि ऑटो,मेटल और रियल्टी सेक्टर में 0.6-1% की बढ़त हुई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद,मज़बूत कॉर्पोरेट नतीजों की उम्मीद और मांग-आधारित बिजनेस अपडेट्स के कारण मिडकैप्स अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि लार्ज-कैप्स की तुलना में इस सेगमेंट का महंगा वैल्यूएशन सावधानी बरतने का संकेत देता है,लेकिन उम्मीद है कि इनकी बिजनेस की स्थिति कम से कम वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही तक अच्छी बनी रहेगी।

हालांकि,इस तेजी को बनाए रखने के लिए इनपुट कॉस्ट में हो रही बढ़ोतरी का थमना जरूरी है, क्योंकि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में मांग में बढ़ोतरी सुस्त पड़ सकती है।

फिलहाल,ब्रॉडर मार्केट में मिला-जुला कारोबार हो रहा जो भू-राजनीतिक जोखिमों और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच कम होते निवेश के कारण लार्ज-कैप्स के कमजोर प्रदर्शन को दिखाता है।

निफ्टी व्यू

SBI सिक्योरिटीज के हेड-टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि लगातार दूसरे ट्रेडिंग सेशन में बेंचमार्क निफ्टी इंडेक्स 127 अंकों की सीमित रेंज में ही घूमता रहा। यह 10 जुलाई,2026 के बाद से इसकी सबसे छोटी डेली ट्रेडिंग रेंज रही। डेली चार्ट पर,इंडेक्स ने दोनों तरफ शैडो वाली एक छोटी बॉडी वाली कैंडल बनाई,जो मौजूदा लेवल पर अनिश्चितता और किसी स्पष्ट दिशा की कमी को दिखाती है।

आगे निफ्टी के लिए 24270-24300 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस बना रहेगा। अगर यह लगातार इस रेजिस्टेंस बैंड के ऊपर बना रहता है तो शॉर्ट टर्म में मौजूदा पुलबैक 24450 के लेवल तक बढ़ सकता है। नीचे की तरफ,24100-24050 के जोन में स्थित 20-डे EMA एरिया तत्काल सपोर्ट का काम करेगा।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे बाजार के एक दायरे में रहने और कुछ खास शेयरों पर फोकस्ड रहने की संभावना है। पहली तिमाही के नतीजे और मिडिल ईस्ट में हो रही गतिविधियां बाजार के सेंटीमेंट पर असर दिखाएंगी। जबकि कच्चे तेल की कीमतें एक अहम उतार-चढ़ाव वाला फैक्टर बनी रहेंगी।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के हेड ऑफ रिसर्च,वेल्थ मैनेजमेंट,सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव,ब्रेंट क्रूड में तेजी,रुपए की कमजोरी, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच घरेलू इक्विटी बाजार के एक दायरे में ही रहने की उम्मीद है। हालांकि,पहली तिमाही के नतीजों के चलते कुछ खास शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है,लेकिन निवेशकों का मूड वेस्ट एशिया में हो रही घटनाओं और कच्चे तेल की चाल से प्रभावित होता रहेगा।

ग्लोब कैपिटल मार्केट में AVP-रिसर्च,विपिन कुमार का कहना है कि जुलाई में अब तक निफ्टी 24,530–23,800 के सीमित दायरे में ही घूमता रहा है। इस रेंज के अंदर,इंडेक्स अपने 50 डे EMA (24,000) और 200 डे EMA (24,430) के बीच बना हुआ है।

उनका मानना ​​है कि अगर यह 24,430 के ऊपर जाता है,तो यह जुलाई की कंसोलिडेशन रेंज के ऊपरी छोर (24,530–24,600 जोन) तक पहुंच सकता है। वहीं,अगर यह 24,000 से नीचे गिरता है,तो यह वापस 23,800 के लेवल पर आ सकता है। 23,800–24,600 के ऊपर की टिकाऊ बढ़त के लिए एक मजबूत ब्रेक की जरूरत है।

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बैंक निफ्टी व्यू

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी में रेजिस्टेंस जोन के पास बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे इंडेक्स 57,300–58,500 की बड़ी कंसोलिडेशन रेंज में बना रहा। इंडेक्स अपने मीडियम और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है,जो बताता है कि बड़ा ट्रेंड पॉजिटिव है। हालांकि,आगे और खरीदारी न होने से शॉर्ट-टर्म में अनिश्चितता का संकेत मिलता है।

बैंक निफ्टी के लिए इमीडिएट सपोर्ट 57,500–57,300 जोन में है,जबकि रेजिस्टेंस 58,500 के आसपास दिख रहा है। RSI न्यूट्रल जोन के पास फ्लैट बना हुआ है,जो मोमेंटम में कमजोरी दिखाता है। जब तक कोई निर्णायक ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन नहीं होता, ट्रेडर्स को सपोर्ट के पास गिरावट पर खरीदारी और रेजिस्टेंस के पास प्रॉफिट बुक करने की रणनीति अपनानी चाहिए।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।