पहले डॉल्फिन को साइकिल से बांधा, फिर बनाने लगा रील! वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर मचा दिया बवाल

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वीडियो में एक शख्स कथित तौर पर गंगा नदी की डॉल्फिन को साइकिल से बांधकर उसके साथ रील बनाता नजर आ रहा है। फुटेज सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई यूजर्स ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए वन्यजीवों के साथ इस तरह के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। दावा किया जा रहा है कि मामला बिहार का है और वीडियो में दिख रहा व्यक्ति डॉल्फिन के साथ रील बना रहा था। घटना से जुड़े एक अन्य वीडियो को लेकर डॉल्फिन के मृत होने की बात भी कही जा रही है।

हालांकि, वायरल वीडियो और उससे जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच करने और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पहले जिंदा नजर आई डॉल्फिन

वायरल पोस्ट में दो वीडियो का जिक्र है। पहले फुटेज में डॉल्फिन जिंदा दिखाई देती है और कथित तौर पर उसे साइकिल से बांधा गया है। इसके बाद सामने आए दूसरे वीडियो में वही जानवर मृत नजर आने का दावा किया गया है। इस दौरान शख्स के उसके साथ रील बनाने की बात कही जा रही है।

तेल निकालने के लिए पकड़ने का भी दावा

सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया है कि यह घटना बिहार की है और इसमें नेटालाल कुमार नाम के एक व्यक्ति का कथित तौर पर शामिल होना बताया जा रहा है। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि डॉल्फिन को कथित रूप से उसका तेल निकालने के लिए पकड़ा गया था और बाद में घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला गया।

‘रील के लिए लुप्तप्राय जीव को क्यों बनाया कंटेंट?’

वीडियो सामने आने के बाद यूजर्स ने सवाल उठाया कि सोशल मीडिया पर कुछ सेकेंड की लोकप्रियता के लिए किसी दुर्लभ वन्यजीव के साथ इस तरह का व्यवहार कैसे किया जा सकता है। कई लोगों ने बिहार पुलिस और वन विभाग से मामले की जांच कर दोष साबित होने पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

गंगा डॉल्फिन को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

गंगा नदी की डॉल्फिन एक लुप्तप्राय प्रजाति है और इसके संरक्षण को लेकर लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि दुनिया में इनकी संख्या करीब 5,000 ही रह गई है। ऐसे में एक डॉल्फिन की कथित मौत ने संरक्षण को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।

यूजर्स ने पुलिस और वन विभाग को किया टैग

मामले को लेकर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने बिहार पुलिस, पर्यावरण मंत्रालय और वन्यजीव संरक्षण संगठनों को टैग किया। एक यूजर ने मांग की कि अगर किसी व्यक्ति ने जानबूझकर संरक्षित जीव को नुकसान पहुंचाया है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

कानूनी कार्रवाई की उठी मांग

कुछ यूजर्स ने दावा किया कि भारत में गंगा डॉल्फिन को कानूनी संरक्षण प्राप्त है और इसे नुकसान पहुंचाने पर जेल व जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, वायरल वीडियो से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है। इसलिए घटना की वास्तविक परिस्थितियों और जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

Kriti Sanon Raksha Bandhan Ad Row: रक्षाबंधन के ऐड पर मचा बवाल! तो ज्वेलरी ब्रांड GIVA ने हटाया विज्ञापन, कृति सेनन के बचाव में उतरे राहुल गांधी

Silver Outlook: अगस्त में 20% उछली चांदी, क्या अब खरीदारी करें, होल्ड रखें या मुनाफा वसूलें? एक्सपर्ट्स से समझिए

Silver Price Outlook: अगस्त 2026 में चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। कॉमेक्स पर शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी उछलकर $69.71 प्रति औंस पर पहुंच गई, जो 16 जून 2026 के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आई इस मजबूती के असर से भारतीय वायदा बाजार (MCX) पर भी सितंबर कॉन्ट्रैक्ट की चांदी मंगलवार (25 अगस्त) को ₹2,44,328 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी।

इस महीने अब तक चांदी निवेशकों को करीब 20% का शानदार रिटर्न दे चुकी है। इस बड़ी तेजी के बाद अब हर निवेशक के मन में सवाल है कि क्या इस भाव पर नई खरीदारी करनी चाहिए, मौजूदा पोर्टफोलियो को होल्ड रखना चाहिए या फिर प्रॉफिट बुक कर लेना चाहिए?

चांदी में इस बड़ी तेजी के ये है 4 मुख्य कारण

Bonanza के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के अनुसार, चांदी में यह तेजी केवल सट्टेबाजी नहीं बल्कि ठोस मैक्रो-इकोनॉमिक कारणों पर टिकी है:

1. अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में कटौती की संभावना से डॉलर कमजोर हुआ है। बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों (जैसे सोना-चांदी) को रखने की अपॉर्च्युनिटी कॉस्ट कम होने से निवेशक चांदी की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

2. सोने की तेजी का सपोर्ट: अमेरिका के बढ़ते राजकोषीय घाटे और ट्रेजरी लिक्विडिटी की चिंताओं के कारण सोने में तेजी बनी हुई है। इसका सीधा फायदा चांदी को भी मिल रहा है।

3. मजबूत औद्योगिक मांग: सोने से इतर, चांदी का बड़ा हिस्सा उद्योगों में इस्तेमाल होता है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और हाई-टेक सेक्टर्स से आती भारी मांग इसे मजबूत सपोर्ट दे रही है।

4. सप्लाई की तंगी और ETF इनफ्लो: फिजिकल सिल्वर की कम उपलब्धता और ETF खरीदारी ने इस रैली को और तेज कर दिया है। इसी वजह से चांदी सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी से रिएक्ट करती है।

इन्वेस्टर्स के लिए रणनीति: Buy, Hold या Sell?

वीटी मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रेटजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल और बोनान्ज़ा के निरपेंद्र यादव के अनुसार, चांदी सोने की तुलना में अधिक वोलाटाइल होती है। इसलिए निवेशकों को ये तरीके अपनाने चाहिए:

मौजूदा निवेशक (Hold): अगर आपके पास पहले से चांदी या सिल्वर ETF मौजूद है, तो इसे होल्ड रखें। एक डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो के लिहाज से चांदी को बनाए रखना समझदारी होगी।

नए निवेशक: एक महीने में 20% चढ़ने के बाद एकमुश्त पैसा लगाने से बचें। हर उछाल के बाद तीखा करेक्शन आ सकता है। नए निवेशकों को ‘बाय ऑन डिप्स’ यानी गिरावट पर खरीदारी या SIP के तहत स्टैगर्ड बाइंग का रास्ता चुनना चाहिए।

कब बेचें: जब तक आपका इन्वेस्टमेंट गोल पूरा न हो जाए या पोर्टफोलियो में चांदी का एलोकेशन जरूरत से ज्यादा न बढ़ गया हो, तब तक घबराकर बिकवाली न करें।

सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पर रखें नजर

एनालिस्ट्स के मुताबिक, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी $70 प्रति औंस का स्तर पार करके टिक जाती है, तो यह तेजी और आगे जाएगी। अगर यह स्तर टूटता है तो मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।

बाजार रेजिस्टेंस सपोर्ट
Comex (ग्लोबल)$69 – $70 / औंस$68 / औंस
MCX (भारत)₹2,55,000 / किग्रा₹2,35,000 – ₹2,38,000 / किग्रा

वैसे एक्सपर्ट्स का ये सुझाव है कि जनवरी के रिकॉर्ड स्तरों के बाद चांदी में बड़ी गिरावट आई थी। इसलिए वर्तमान तेजी एक ‘रिकवरी/कैच-अप रैली’ भी हो सकती है। नए निवेशक जल्दबाजी में दांव लगाने के बजाय कीमतों के थोड़ा स्थिर होने या गिरावट आने का इंतजार करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट लॉन्च कॉम्प्लेक्स बनाएंगे मस्क:ये मैनहट्टन शहर से 8 गुना बड़ी जमीन पर बनेगा, हर साल हजारों स्टारशिप रॉकेट लॉन्च होंगे

इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अमेरिका के दक्षिणी लुइसियाना में दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट लॉन्च कॉम्प्लेक्स बना रही है। इस प्रोजेक्ट पर कंपनी 100 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹9.50 लाख करोड़ का निवेश करेगी। ‘स्टारबेस, लुइसियाना’ स्पेसएक्स का दूसरा ‘स्टारबेस’ कैंपस होगा। यह नया स्पेसपोर्ट लुइसियाना के पिकान आइलैंड पर 1.25 लाख एकड़ में फैला होगा, जो कि न्यूयॉर्क के मैनहट्टन शहर से भी आठ गुना बड़ा है। यहां से स्पेसएक्स के नेक्स्ट-जनरेशन रॉकेट ‘स्टारशिप’ और AI बेस्ड सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। कंस्ट्रक्शन साल 2029 से शुरू होने की उम्मीद है। 3,000 नई नौकरियां मिलेंगी, औसत सैलरी ₹88 लाख सालाना होगी लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री ने इसे राज्य की इकोनॉमी के लिए बड़ा कदम बताया है। लैंड्री के मुताबिक, इस स्पेसपोर्ट से क्षेत्र में कम से कम 3 हजार से ज्यादा डायरेक्ट नौकरियां पैदा होंगी। यहां काम करने वाले कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी 92,600 डॉलर यानी करीब 88 लाख रुपए होगी, जो वर्मिलियन पैरिश की मौजूदा औसत इनकम से लगभग दोगुनी है। गवर्नर ने कहा, “यह प्रोजेक्ट रोजगार, समुदायों के लिए प्रगति और हमारे तटीय इलाकों के लिए सुरक्षा लेकर आएगा।” ‘सेल्फ-सस्टेनिंग’ होगा कैंपस, खुद बनाएगा ईंधन और बिजली स्पेसएक्स की प्रेसिडेंट ग्विन शॉटवेल ने बताया कि यह कैंपस पूरी तरह ‘सेल्फ-सस्टेनिंग’ होगा। खुद का ईंधन और बिजली: कॉम्प्लेक्स के भीतर ही रॉकेट प्रोपेलेंट के लिए मीथेन गैस का उत्पादन होगा और इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन फैसिलिटी लगाई जाएगी। शिपिंग और ट्रांसपोर्ट: स्टारशिप रॉकेट्स को लाने-ले जाने के लिए डीप-वॉटर शिपिंग पोर्ट और व्हीकल प्रोसेसिंग यूनिट्स बनाई जाएंगी। एक डेडिकेटेड एयरपोर्ट भी बनाया जा सकता है। शॉटवेल ने कहा कि इस फैसिलिटी का लक्ष्य हर साल स्टारशिप के हजारों उड़ानों को सपोर्ट करना है, हालांकि यह इंजीनियरिंग और रेग्युलेटरी अप्रूवल पर निर्भर करेगा। रॉकेट मैन्युफैक्चरिंग नहीं सिर्फ लॉन्चिंग होगी यह लुइसियाना कैंपस स्पेसएक्स के टेक्सास स्थित ‘स्टारबेस’ से काफी अलग होगा। टेक्सास में रॉकेट्स का निर्माण और असेंबली की जाती है, जबकि लुइसियाना फैसिलिटी में रॉकेट की मैन्युफैक्चरिंग नहीं होगी। इसका मुख्य फोकस केवल हाई-फ्रीक्वेंसी यानी तेज गति से लॉन्चिंग पर रहेगा। पिकान आइलैंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां से रॉकेट्स को सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में आसानी से भेजा जा सकता है। यह ऑर्बिट सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है। लुइसियाना स्पेसपोर्ट के जरिए मस्क दो बड़े लक्ष्य… नॉलेज पार्ट: क्या होता है ‘सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट’? यह पृथ्वी का एक ऐसा ऑर्बिटहै जिसमें सैटेलाइट हमेशा सूर्य के एक ही कोण के साथ यात्रा करती है। यानी सैटेलाइट जिस जगह से भी गुजरती है, वहां हमेशा धूप होती है। सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स और अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स के लिए यह ऑर्बिट सबसे बेस्ट मानी जाती है।

दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट लॉन्च कॉम्प्लेक्स बनाएंगे मस्क:ये मैनहट्टन से 8 गुना बड़ी जमीन पर बनेगा, हर साल हजारों स्टारशिप रॉकेट लॉन्च होंगे

इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अमेरिका के दक्षिणी लुइसियाना में दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट लॉन्च कॉम्प्लेक्स बना रही है। इस प्रोजेक्ट पर कंपनी 100 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹9.50 लाख करोड़ का निवेश करेगी। ‘स्टारबेस, लुइसियाना’ स्पेसएक्स का दूसरा ‘स्टारबेस’ कैंपस होगा। यह नया स्पेसपोर्ट लुइसियाना के पिकान आइलैंड पर 1.25 लाख एकड़ में फैला होगा, जो कि न्यूयॉर्क के मैनहट्टन शहर से भी आठ गुना बड़ा है। यहां से स्पेसएक्स के नेक्स्ट-जनरेशन रॉकेट ‘स्टारशिप’ और AI बेस्ड सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। कंस्ट्रक्शन साल 2029 से शुरू होने की उम्मीद है। 3,000 नई नौकरियां मिलेंगी, औसत सैलरी ₹88 लाख सालाना होगी लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री ने इसे राज्य की इकोनॉमी के लिए बड़ा कदम बताया है। लैंड्री के मुताबिक, इस स्पेसपोर्ट से क्षेत्र में कम से कम 3 हजार से ज्यादा डायरेक्ट नौकरियां पैदा होंगी। यहां काम करने वाले कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी 92,600 डॉलर यानी करीब 88 लाख रुपए होगी, जो वर्मिलियन पैरिश की मौजूदा औसत इनकम से लगभग दोगुनी है। गवर्नर ने कहा, “यह प्रोजेक्ट रोजगार, समुदायों के लिए प्रगति और हमारे तटीय इलाकों के लिए सुरक्षा लेकर आएगा।” ‘सेल्फ-सस्टेनिंग’ होगा कैंपस, खुद बनाएगा ईंधन और बिजली स्पेसएक्स की प्रेसिडेंट ग्विन शॉटवेल ने बताया कि यह कैंपस पूरी तरह ‘सेल्फ-सस्टेनिंग’ होगा। खुद का ईंधन और बिजली: कॉम्प्लेक्स के भीतर ही रॉकेट प्रोपेलेंट के लिए मीथेन गैस का उत्पादन होगा और इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन फैसिलिटी लगाई जाएगी। शिपिंग और ट्रांसपोर्ट: स्टारशिप रॉकेट्स को लाने-ले जाने के लिए डीप-वॉटर शिपिंग पोर्ट और व्हीकल प्रोसेसिंग यूनिट्स बनाई जाएंगी। एक डेडिकेटेड एयरपोर्ट भी बनाया जा सकता है। शॉटवेल ने कहा कि इस फैसिलिटी का लक्ष्य हर साल स्टारशिप के हजारों उड़ानों को सपोर्ट करना है, हालांकि यह इंजीनियरिंग और रेग्युलेटरी अप्रूवल पर निर्भर करेगा। रॉकेट मैन्युफैक्चरिंग नहीं सिर्फ लॉन्चिंग होगी यह लुइसियाना कैंपस स्पेसएक्स के टेक्सास स्थित ‘स्टारबेस’ से काफी अलग होगा। टेक्सास में रॉकेट्स का निर्माण और असेंबली की जाती है, जबकि लुइसियाना फैसिलिटी में रॉकेट की मैन्युफैक्चरिंग नहीं होगी। इसका मुख्य फोकस केवल हाई-फ्रीक्वेंसी यानी तेज गति से लॉन्चिंग पर रहेगा। पिकान आइलैंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां से रॉकेट्स को सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में आसानी से भेजा जा सकता है। यह ऑर्बिट सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है। लुइसियाना स्पेसपोर्ट के जरिए मस्क दो बड़े लक्ष्य… नॉलेज पार्ट: क्या होता है ‘सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट’? यह पृथ्वी का एक ऐसा ऑर्बिटहै जिसमें सैटेलाइट हमेशा सूर्य के एक ही कोण के साथ यात्रा करती है। यानी सैटेलाइट जिस जगह से भी गुजरती है, वहां हमेशा धूप होती है। सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स और अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स के लिए यह ऑर्बिट सबसे बेस्ट मानी जाती है।

Gift Nifty Indicator: क्रूड में नरमी क्या भारतीय बाजार पर दिखाएगी अपना असर, इंडेक्स में आज किन लेवल पर दें ध्यान

Gift Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के तेजी के साथ खुलने की उम्मीद है। GIFT निफ्टी गैप-अप शुरुआत का संकेत दे रहा है, कच्चे तेल की गिरती कीमतें, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में कमी और वॉल स्ट्रीट में रात भर हुई बढ़त ने ग्लोबल माहौल को बेहतर बनाया है। ज़्यादातर एशियाई बाजारों में तेजी और घरेलू स्तर पर इंस्टीट्यूशनल बाइंग से और सपोर्ट मिल सकता है। लेकिन निवेशक Nvidia की तिमाही नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं, इसलिए वे सतर्क रह सकते हैं।

सुबह 8.10 बजे GIFT निफ्टी 75.00 अंक या 0.31 फीसदी बढ़कर 24,555 पर ट्रेड कर रहा था। घरेलू इक्विटीज़ पॉज़िटिव मोमेंटम के साथ सेशन की शुरुआत कर रही हैं, क्योंकि मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के दिन आखिरी घंटे में हुई खरीदारी से बेंचमार्क इंडेक्स को रिकवर करने में मदद मिली थी। मंगलवार को सेंसेक्स 286.98 अंक या 0.37 प्रतिशत बढ़कर 77,656.09 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 115.50 अंक या 0.48 प्रतिशत बढ़कर 24,334.55 पर बंद हुआ।

एशियाई बाजारों में ज़्यादातर तेजी

बुधवार को एशियाई इक्विटीज़ में ज़्यादातर तेज़ी देखी गई, जिसे टेक्नोलॉजी स्टॉक्स और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में कमी से सपोर्ट मिला। MSCI के एशिया-पैसिफिक इक्विटीज़ गेज में 0.3 प्रतिशत की बढ़त हुई। हांगकांग का हैंग सेंग 1 प्रतिशत बढ़ा, जबकि शंघाई कंपोजिट में 0.4 प्रतिशत की बढ़त हुई। जापान का टोपिक्स और ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 भी मामूली रूप से ऊपर थे, हालांकि निक्केई 225 फ्यूचर्स में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

बुधवार को भारतीय इक्विटीज़ के लिए कच्चे तेल की कीमतों में और तेज़ गिरावट सबसे अच्छे संकेतों में से एक है, जबकि अमेरिकी टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में रिकवरी और बॉन्ड यील्ड में कमी ने भी ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट को बेहतर बनाने में मदद की है। शुरुआती एशियाई कारोबार में तेल की कीमतों में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई, जो पिछले सेशन की भारी गिरावट को और बढ़ा रही है। ईरान ने कहा है कि उसने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ बातचीत फिर से शुरू कर दी है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2 प्रतिशत गिरकर $86.80 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.8 प्रतिशत गिरकर $80.87 प्रति बैरल पर आ गया। मंगलवार को दोनों बेंचमार्क में 3 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई थी।

टेक शेयरों में रिकवरी और बॉन्ड यील्ड में कमी से वॉल स्ट्रीट में बढ़त

मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाज़ार बढ़त के साथ बंद हुए। Nvidia के नतीजों से पहले टेक्नोलॉजी शेयरों में रिकवरी देखी गई, जबकि हाल ही में बॉन्ड मार्केट में बिकवाली के बाद कच्चे तेल और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से निवेशकों को कुछ राहत मिली। Nasdaq Composite 0.66 प्रतिशत बढ़कर 26,151.30 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 में 0.32 प्रतिशत की बढ़त हुई और यह 7,677.24 पर बंद हुआ। Dow Jones Industrial Average 0.30 प्रतिशत बढ़कर 53,577.40 पर पहुंच गया।

बॉन्ड यील्ड में कमी ग्लोबल इक्विटी के लिए एक और सकारात्मक संकेत है। इससे पहले, कर्ज लेने की लागत में बढ़ोतरी ने वैल्यूएशन पर दबाव डाला था और उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह को लेकर चिंताएं पैदा की थीं।

FII और DII की खरीदारी

मंगलवार को इंस्टीट्यूशनल फ्लो (संस्थागत निवेश प्रवाह) सकारात्मक रहा, जिसमें विदेशी और घरेलू दोनों तरह के निवेशक नेट बायर (शुद्ध खरीदार) के तौर पर उभरे। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार दूसरे सत्र में भी खरीदारी जारी रखी और 1,593 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भी नेट बायर रहे और उन्होंने भारतीय शेयरों में 230 करोड़ रुपये का निवेश किया। विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी घरेलू इक्विटी के लिए एक उत्साहजनक संकेत है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि बुधवार को भारतीय इक्विटी मार्केट में तेज़ी के साथ शुरुआत होने की उम्मीद है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी से रिस्क एसेट्स के लिए माहौल बेहतर हुआ है। ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में नरमी और वॉल स्ट्रीट में रात भर आई रिकवरी से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। बेहतर माहौल को देखते हुए, GIFT निफ्टी फ्यूचर्स शुरुआती कारोबार में 24,500 के स्तर से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि निफ्टी की पिछली क्लोजिंग 24,334 थी; इससे घरेलू इक्विटी में गैप-अप ओपनिंग का संकेत मिलता है।

बजाज ब्रोकिंग ने कहा कि अगर निफ्टी 24,360 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो यह 24,550-24,700 के स्तर तक जा सकता है, जबकि शॉर्ट-टर्म सपोर्ट 24,000-23,800 के आसपास दिख रहा है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा पॉजिटिव शुरुआत के संकेत, क्रूड में नरमी 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Honda ADV160 Flex-Fuel स्कूटर और Rebel 300 बाइक लॉन्च, ₹5,000 में बुकिंग शुरू, अक्टूबर से मिलेगी डिलीवरी

Honda Motorcycle & Scooter India (HMSI) ने ADV160 और Rebel 300 की कीमतों का ऐलान कर दिया है। Honda ADV160 की कीमत 1.70 लाख रुपये (एक्स-शोरूम, बेंगलुरु) रखी गई है। इसे Honda के RedWing और BigWing डीलरशिप नेटवर्क के जरिए बेचा जाएगा। वहीं, Rebel 300 को दो वेरिएंट में पेश किया गया है। इसके स्टैंडर्ड वेरिएंट की कीमत 2.22 लाख रुपये और E-Clutch वेरिएंट की कीमत 2.62 लाख रुपये है। दोनों कीमतें बेंगलुरु की एक्स-शोरूम कीमतें हैं।

बता दें कि इन दोनों मॉडलों की लॉन्चिंग के साथ Honda ने भारत में अपने प्रीमियम मोटरसाइकिल पोर्टफोलियो को और मजबूत किया है।

Honda ADV160 और Rebel 300 की बुकिंग शुरू

Honda ADV160 और Rebel 300 दोनों की बुकिंग शुरू हो गई है। ग्राहक 5,000 रुपये देकर इन दोनों मॉडलों को बुक कर सकते हैं। बुकिंग HMSI की वेबसाइट और कंपनी की अधिकृत RedWing और BigWing डीलरशिप पर की जा सकती है। बता दें कि इन दोनों मॉडलों की डिलीवरी अक्टूबर 2026 के मध्य से शुरू होगी। वहीं, इनकी लॉन्चिंग के साथ Honda ने भारत में अपने 10 नए प्रोडक्ट लॉन्च करने की रणनीति की शुरुआत भी कर दी है।

कंपनी का लक्ष्य देश के अलग-अलग प्रीमियम मोटरसाइकिल सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करना है।

Honda Rebel 300 की खास बातें

Honda Rebel 300 के साथ Honda भारत में किफायती क्रूजर मोटरसाइकिल सेगमेंट में कदम रख रही है। बॉबर-स्टाइल डिज़ाइन, पूरी तरह से ब्लैक लुक और आरामदायक राइडिंग पोज़िशन वाली यह मोटरसाइकिल उन राइडर्स के लिए है जो आराम से राइडिंग का अनुभव चाहते हैं और अपनी अलग पहचान बनाना पसंद करते हैं। Rebel 300 में 286cc का लिक्विड-कूल्ड सिंगल-सिलेंडर इंजन है और यह स्टैंडर्ड और E-क्लच, दोनों वेरिएंट में उपलब्ध होगी।

फीचर्स की बात करें तो, इस क्रूजर में LED प्रोजेक्टर हेडलैंप, होंडा रोडसिंक कनेक्टिविटी और टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन वाला TFT इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है। साथ ही, इसमें डुअल-चैनल ABS के साथ दोनों पहियों पर डिस्क ब्रेक भी दिए गए हैं। भारत में बनी Rebel 300 Honda के प्रीमियम मोटरसाइकिल पोर्टफोलियो को बढ़ाती है और साथ ही ब्रांड के दुनिया भर में मशहूर क्रूजर मॉडल को घरेलू बाजार में लाती है।

Honda Rebel 300 की कीमत और मुकाबला

Honda Rebel 300 का मुकाबला भारत में Royal Enfield की 350cc क्रूजर बाइक्स से होगा। इनमें Meteor 350 और Goan Classic 350 प्रमुख हैं। Rebel 300 की शुरुआती कीमत 2.22 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है। यह कीमत Meteor 350 के 1.99 लाख रुपये से 2.24 लाख रुपये के प्राइस रेंज के करीब है। वहीं, इसका मुकाबला Goan Classic 350 से भी होगा, जिसकी कीमत 2.20 लाख रुपये से 2.28 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच है।

Honda Rebel 300 को अलग पहचान दिलाने के लिए कंपनी ने इसमें बॉबर से प्रेरित डिजाइन, लिक्विड-कूल्ड इंजन और ऑप्शनल E-Clutch टेक्नोलॉजी दी है।

Honda ADV160 की खास बातें

Honda ADV160 भारत का पहला फ्लेक्स-फ्यूल स्कूटर बन गया है। Honda की FlexTech टेक्नोलॉजी की वजह से यह E85 तक के फ्यूल मिक्सचर पर चल सकता है। एडवेंचर-फोकस्ड मैक्सी-स्कूटर के तौर पर, इसमें मजबूत स्टाइलिंग के साथ रोजाना इस्तेमाल की सुविधा भी मिलती है। इसमें 156.9-cc का लिक्विड-कूल्ड इंजन, सीट के नीचे 27-लीटर स्टोरेज, Honda RoadSync और टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन वाला TFT इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, Honda Selectable Torque Control (HSTC) और सिंगल-चैनल ABS के साथ दोनों तरफ डिस्क ब्रेक जैसे फीचर्स दिए गए हैं।

Honda ADV160 की कीमत और मुकाबला

Honda का कहना है कि ADV160 कंपनी की मल्टी-पाथवे मोबिलिटी स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा है। इसके जरिए कंपनी प्रीमियम स्कूटर सेगमेंट में ग्राहकों को एक नई और भविष्य के लिए तैयार टेक्नोलॉजी वाला विकल्प देना चाहती है।

भारत में Honda ADV160 का मुकाबला Hero Xoom 160 और Yamaha Aerox 155 से होगा। इसकी कीमत 1.70 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है, जो दोनों प्रतिद्वंद्वी स्कूटरों से ज्यादा है।

वहीं, Hero Xoom 160 की कीमत 1.37 लाख रुपये से 1.43 लाख रुपये के बीच है। दूसरी ओर, Yamaha Aerox 155 की शुरुआती कीमत 1.45 लाख रुपये से 1.48 लाख रुपये तक जाती है। सभी कीमतें एक्स-शोरूम हैं।

यह भी पढ़ें: TVS iQube का नया अवतार लॉन्च! 1.40 लाख में मिलेगा 145km रेंज, ज्यादा स्टोरेज और Type-C पोर्ट

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर भाई-बहन को दें ये 5 शानदार स्मार्टफोन, कीमत 25 हजार से भी कम

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार बस आने ही वाला है। ऐसे में अगर आप अपने भाई या बहन के लिए कोई अच्छा गिफ्ट खरीदने की सोच रहे हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। हमने आपके लिए 25,000 रुपये से कम कीमत में मिलने वाले कुछ बेहतरीन स्मार्टफोन्स की लिस्ट तैयार की है। जिन्हें आप Amazon और Flipkart से खरीदकर अपने भाई या बहन को तोहफे में दे सकते हैं।

iQOO Z11 Lite (6GB RAM + 256GB स्टोरेज)

यह स्मार्टफोन 42,499 रुपये की जगह 24,999 रुपये में खरीदा जा सकता है। इसमें 6.74 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले है और यह Android 16 पर बेस्ड OriginOS 6 पर चलता है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें ऑक्टा-कोर MediaTek Dimensity 6300 5G प्रोसेसर दिया गया है। फोटोग्राफी की बात करें तो, iQOO Z11 Lite में डुअल रियर कैमरा सेटअप है। जिसमें 50MP का प्राइमरी सेंसर और 0.08MP का सेकेंडरी लेंस शामिल है। वहीं सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसमें 5MP का फ्रंट कैमरा मिलता है।

iQOO Z11 Lite

Vivo T5 Lite 5G (6GB RAM + 256GB स्टोरेज)

Vivo T5 Lite 5G के 6GB RAM + 256GB स्टोरेज की कीमत 24,999 रुपये है। इस स्मार्टफोन में 6.74 इंच की LCD स्क्रीन दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट, 1,200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है। परफॉर्मेंस के लिए फोन में MediaTek Dimensity 6300 5G चिपसेट दिया गया है। सॉफ्टवेयर की बात करें तो यह फोन Android 16 पर आधारित OriginOS 6 पर चलता है।

Vivo T5 Lite 5G

Poco M8 5G (6GB RAM + 128GB स्टोरेज)

Poco के यह स्मास्टफोन 29,999 रुपये की जगह 24,999 रुपये में मिल रहा है। इस स्मार्टफोन में 6.77-इंच का Flow AMOLED डिस्प्ले है, जिसका रिजॉल्यूशन FHD+ है, रिफ्रेश रेट 120Hz है और पीक ब्राइटनेस 3,200 निट्स तक है। इसमें Qualcomm Snapdragon 6 Gen 3 प्रोसेसर लगा है। फोटोग्राफी के लिए, स्मार्टफोन में 50MP का प्राइमरी रियर कैमरा और 2MP का डेप्थ सेंसर है, साथ ही 20MP का फ्रंट कैमरा भी दिया गया है।

Poco M8 5G (6GB RAM + 128GB स्टोरेज)

Realme NARZO 100x 5G (6GB RAM + 128GB स्टोरेज)

Realme NARZO 100x 5G के 6GB RAM + 128GB स्टोरेज की कीमत 22,999 रुपये है। इसमें 6.8-इंच का HD+ LCD पैनल है, जिसका रिफ्रेश रेट 144Hz तक है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें ऑक्टा-कोर MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर दिया गया है। कैमरे की बात करें तो फोन के पीछे 50MP का प्राइमरी कैमरा मिलता है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसमें 8MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है।

Realme NARZO 100x 5G

OnePlus N6 (4GB RAM + 128GB स्टोरेज)

OnePlus N6

OnePlus N6 के इस वेरिएंट की कीमत अभी 24,999 रुपये है। इस स्मार्टफोन में 6.75-इंच की HD LCD स्क्रीन है, जो 120Hz तक के रिफ्रेश रेट और 1,200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करती है। इसमें ऑक्टा-कोर MediaTek Dimensity 6360 Apex चिपसेट दिया गया है। कैमरे की बात करें तो, इस हैंडसेट में 50MP का सिंगल प्राइमरी कैमरा सेंसर और सेल्फी के लिए 8MP का फ्रंट कैमरा है।

यह भी पढ़ें: Fire-Boltt के दो 5G स्मार्टफोन भारत में लॉन्च, 6000mAh बैटरी और 120Hz डिस्प्ले से हैं लैस, जानें कीमत

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने में तूफानी तेजी जारी, चांदी ₹3500 रुपये फिसली

दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने में तूफानी तेजी जारी है। 25 अगस्त को सोने में लगातार चौथे सत्र तेजी रही। यह 2,700 रुपये चढ़कर 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। हालांकि, चांदी में तेजी पर तीन दिन बाद ब्रेक लग गया। दिल्ली में चांदी की कीमतों में गिरावट आई। इसकी वजह प्रॉफिट-बुकिंग बताई जा रही है।

चांदी में तीन सत्रों से जारी तेजी पर लगा ब्रेक

चांदी की कीमतें मंगलवार को 3,500 रुपये गिरकर 2,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुईं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों में गिरावट आई। स्पॉट गोल्ड 0.31 फीसदी गिरकर 4,636 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर 1.48 फीसदी गिरकर 67.89 डॉलर प्रति औंस पर था।

डॉलर में मजबूती से विदेश में गिरा सोना 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें तीन महीने की ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद प्रॉफिट बुकिंग और डॉलर में मजबूती से उसमें गिरावट आई। अमेरिकी सरकार के बॉन्ड बायबैक प्रोग्राम के ऐलान के बाद डॉलर में कमजोरी दिखी थी। यह तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया था। लेकिन, मंगलवार को इसमें तेजी लौट आई। डॉलर में मजबूती पर दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है।

सितंबर में अमेरिका में इंटरेस्ट बढ़ने की उम्मीद कम

अमेरिका में फेडरल रिजर्व के अगले महीने इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की संभावना घटी है। टेडर्स को अगले महीने अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की सिर्फ 40 फीसदी संभावना लग रही है। 60 फीसदी संभावना यह है कि फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। इंटरेस्ट रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं होने से सोने को सपोर्ट मिलेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक घटती है, जबकि इंटरेस्ट रेट घटने के माहौल में बढ़ती है।

यह भी पढ़ें: Gold Outlook: सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4600 डॉलर के पार, तेजी जारी रहेगी या आएगी बड़ी गिरावट?

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने से सोने को मिल रहा सपोर्ट

इस साल जनवरी के आखिर में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद उनमें तेज गिरावट आई। 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद बुलियन पर दबाव बढ़ गया। अब फिर से सोने और चांदी में तेजी दिख रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने में तेजी में अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव का हाथ है।

US Stocks में निवेश का सबसे सुनहरा मौका! पराग पारिख ने 90% घटाई एंट्री फीस, जानिए अब कितने में खरीद पाएंगे Apple-Google के शेयर!

US Stock Market: भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए अमेरिकी शेयर बाजार में निवेश करना अब काफी आसान और किफायती हो गया है। पराग पारिख की GIFT City स्थित इकाई ‘PPFAS GIFT’ ने अपने दो प्रमुख इंटरनेशनल फंड्स में न्यूनतम निवेश सीमा को $5000 से घटाकर सिर्फ $500 कर दिया है।

यानी अब एंट्री टिकट में सीधे 90% की कटौती कर दी गई है, जिससे आम निवेशक भी कम रकम के साथ S&P 500 और Nasdaq 100 जैसे दिग्गजों में पैसा लगा सकेंगे।

₹4.79 लाख नहीं, अब सिर्फ ₹48000 से करें शुरुआत

रुपए और डॉलर के मौजूदा एक्सचेंज रेट (लगभग ₹95.74 प्रति डॉलर) के हिसाब से इस कटौती का सीधा गणित ये है कि, पहले $5000 की न्यूनतम सीमा के कारण निवेशकों को कम से कम ₹4.79 लाख की भारी-भरकम राशि की जरूरत होती थी।अब $500 की नई सीमा लागू होने के बाद आप मात्र ₹48000 से यूएस मार्केट में अपना पोर्टफोलियो शुरू कर सकते हैं।

PPFAS GIFT ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इस कदम का मकसद छोटे निवेशकों के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग के दरवाजे खोलना है।

किन दो फंड्स में घटा न्यूनतम निवेश?

यह बदलाव PPFAS Alternate Asset Managers IFSC द्वारा GIFT City से ऑफर किए जाने वाले दो आउटबाउंड पैसिव फंड्स पर लागू हुआ है:

Parag Parikh IFSC S&P 500 Fund of Fund: यह फंड अमेरिका की 500 सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनियों के इंडेक्स (S&P 500) को ट्रैक करने वाले एक्यूपुलेटिंग ETFs और UCITS में निवेश करता है। यह अमेरिकी लार्ज-कैप मार्केट में ब्रॉड एक्सपोजर देता है।

Parag Parikh IFSC Nasdaq 100 Fund of Fund: यह फंड Nasdaq 100 इंडेक्स में पैसिव निवेश की सुविधा देता है। इसमें अमेरिका की टॉप 100 गैर-वित्तीय कंपनियां शामिल हैं, जिनमें टेक्नोलॉजी और टेक-ओरिएंटेड ग्रोथ कंपनियों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है।

आम निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

जो निवेशक अपने कुल पोर्टफोलियो का 5% या 10% हिस्सा ही अमेरिकी बाजार में लगाना चाहते थे, उनके लिए ₹4.8 लाख एकमुश्त लगाना काफी मुश्किल था।

अब केवल ₹48000 में निवेशक अपने पोर्टफोलियो को ग्लोबल डाइवर्सिफाई कर सकते हैं। GIFT City के जरिए इन फंड्स में निवेश करने पर भारतीय निवासियों को अलग से किसी विदेशी ब्रोकरेज अकाउंट खोलने का झंझट नहीं रहता।

GIFT City के जरिए कैसे काम करता है निवेश?

गुजरात स्थित GIFT City भारत का पहला इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) है। यहां वित्तीय सेवाएं भारतीय रुपए के बजाय विदेशी मुद्रा (यूएस डॉलर) में ऑफर की जाती हैं। निवासी भारतीय नागरिक लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम(LRS) नियमों के तहत अपनी गाढ़ी कमाई को डॉलर बेस करेंसी वाले इन दोनों फंड्स में पार्क कर सकते हैं।

कम एंट्री टिकट का मतलब जोखिम कम होना नहीं!

न्यूनतम निवेश घटने से फंड में एंट्री आसान हुई है, लेकिन इससे जुड़ा मार्केट रिस्क कम नहीं हुआ है। निवेशकों का रिटर्न अमेरिकी शेयर बाजार के प्रदर्शन के साथ-साथ डॉलर के मुकाबले रुपए की चाल पर निर्भर करेगा। S&P 500 इंडेक्स स्थिर और ब्रॉड मार्केट एक्सपोजर देता है, जबकि Nasdaq 100 इंडेक्स ज्यादा टेक-फोकस्ड होने के कारण ज्यादा वोलेटाइल हो सकता है।

अगर आप अपने निवेश को एपल, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल या एनवीडिया जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियों में लगाना चाहते थे, तो GIFT City के रास्ते PPFAS का यह फैसला आपके एंट्री बैरियर को 90% तक खत्म कर देता है। हालांकि, किसी भी इंटरनेशनल फंड में दांव लगाने से पहले अपनी रिस्क कैपेसिटी और करेंसी रिस्क का आकलन जरूर कर लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Outlook: सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4600 डॉलर के पार, लेकिन क्या यह तेजी जारी रहेगी?

Gold Outlook: गोल्ड की कीमत 4,600 डॉलर के पार हो गई है। मई के बाद पहली बार सोने का भाव इस लेवल पर पहुंचा है। इसमें अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव का बड़ा हाथ है। अनुमान है कि लंबी अवधि में कर्ज की कॉस्ट कम करने के लिए अमेरिकी सरकार बॉन्ड बाजार में हस्तक्षेप बढ़ा सकती है। इसका असर सोने की कीमतों पर दिखा है।

25 अगस्त यानी मंगलवार को स्पॉट 4,668 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। भारतीय समय के मुताबिक, 4:15 बजे सोने का भाव 4,637 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। पिछले हफ्ते अमेरिकी सरकार ने बॉन्ड यील्ड को बढ़ने से रोकने के लिए बड़ा एलान किया था। उसने कहा था कि सरकार लंबी अवधि के ज्यादा बॉन्ड बायबैक करेगी।

सरकार के इस कदम का मतलब है कि वह लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड को नियंत्रण में रखेगी। इससे इनवेस्टर्स के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या बॉन्ड मार्केट हाई यील्ड के साथ पूरी तरह से एडजस्ट नहीं होगा और इस एडजस्टमेंट का कुछ असर आखिर में डॉलर पर पड़ेगा? चूंकि गोल्ड के लिए सरकार या करेंसी से जुड़ा कोई रिस्क नहीं है, जिससे आखिर में इससे फायदा होगा।

सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 24 अगस्त को अमेरिकी बाजार के ओपन होने के 20 मिनट के अंदर एक इनवेस्टर ने ऑप्शंस में एक बड़ा सौदा (Trade) किया। इसमें एसपीडीआर गोल्ड शेयर्स ईटीएफ या जीएलडी के 1,16,000 कॉन्ट्रैक्ट्स शामिल थे। ट्रेडर ने 18 सितंबर के 420 डॉलर के कॉल के करीब 1,16,000 कॉन्ट्रैक्ट्स बेचे। इससे 20.2 करोड़ डॉलर का प्रीमियम कलेक्ट हुआ। उसने इस पैसा का इस्तेमाल 430 डॉलर के कॉल के उतने ही कॉन्ट्रैक्ट्स खरीदने के लिए किया।

इस ट्रांजेक्शन में 5.8 करोड़ डॉलर का नेट क्रेडिट बना। यह दरअसल GLD के शॉर्ट टर्म आउटलुक पर आधारित एक बेयरिश कॉल स्प्रेड था। इसमें ट्रेडर ने 420 डॉलर का कॉल बेचा, जो ट्रेड एग्जिक्यूट होने के समय पहले से मार्केट में थे। इससे इफेक्टिव ब्रेक इवन करीब 425 डॉलर आता है।

इस बड़े पोजीशन से जो संकेत निकलता है उसका मतलब यह नहीं है कि सोना पक्के तौर पर क्रैश की तरफ बढ़ रहा है। इसका मतलब यह है कि लगातार तेजी के बाद ट्रेडर को जीएलडी में गिरावट आने का अनुमान है या कम से कम सितंबर एक्सपायरी तक इसके करीब 425 डॉलर के नीचे जाने का अनुमान है। सीएनबीसी ने अपनी रिपोर्ट में यह मतलब निकाला है।

बाजार तब कंट्रेरियन दांव ऐसे वक्त लगा रहा है, जब गोल्ड में तेजी दिख रही है। गोल्ड में तेजी के लिए अनुकूल स्थिति अभी खत्म नहीं हुई है। बॉन्ड बाजार में जो उथल-पुथल दिख रही है, उससे यील्ड को काबू में रखने और डॉलर पर दबाव के बगैर अपने कर्ज को संभालने की अमेरिकी सरकार की क्षमता पर नए सवाल उठे हैं। इससे एक बार फिर सुरक्षित निवेश के गोल्ड में दिलचस्पी बढ़ी है।

कई एनालिस्ट्स का मानना है कि गोल्ड में आई हालिया तेजी का संबंध डिबेसमेंट ट्रेड (debasement trade) की वापसी से है। इसका मतलब है कि डॉलर से जुड़ी चिंता के चलते गोल्ड को सपोर्ट मिलता रहेगा। लेकिन, इसमें एक बाधा है। इंटरेस्ट रेट्स ज्यादा होने पर सोने जैसा नॉन-यील्डिंग एसेट रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है। इसका मतलब है कि छोटी अवधि में सोने के आउटलुक के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल है।