कनाडा का अमेरिकी सामान पर 8 सितंबर से जवाबी टैरिफ:ट्रम्प ने 50% टैरिफ का ऐलान किया था, दोनों देशों के बीच तीन दिन की बातचीत फेल

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने शनिवार को कहा कि कनाडा 8 सितंबर से अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाएगा। यह फैसला अमेरिका की ओर से कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर के उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद लिया गया है। दोनों देशों के बीच आखिरी दौर की बातचीत भी शुक्रवार को बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। कनाडा का जवाबी टैरिफ स्टील, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, पल्प एंड पेपर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अमेरिकी सामान पर लगेगा। किन-किन उत्पादों पर कितना टैरिफ लगेगा, इसकी पूरी जानकारी आने वाले दिनों में जारी की जाएगी। दोनों देशों के बीच 3 दिन चली बातचीत बेनतीजा रही अमेरिका और कनाडा के बीच 3 दिन तक चली ट्रेड डील की बातचीत नाकाम रही। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार आधी रात से कनाडा के 20 अरब डॉलर (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया। यह टैरिफ कनाडा के अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान का करीब 5% है। अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों ने वॉशिंगटन डीसी में तीन दिन की बातचीत की थी, लेकिन व्यापार समझौता फाइनल नहीं हो सका। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उतना ही जवाब देगा। अमेरिका बोला- अच्छा ऑफर दिया था, उन्होंने मौका गंवाया दोनो देशों के बीच ट्रेड डील नहीं हो पाने के बाद अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि कनाडा ने अमेरिका के साथ पार्टनशिप का बहुत अच्छा मौका गंवा दिया है। USTR के मुताबिक, उन्होंने कनाडा को किसी भी बड़े एक्सपोर्टर के मुकाबले सबसे अच्छा ऑफर दिया था। लेकिन कनाडा की नई मांगों और पहले किए गए वादों से पीछे हटने की वजह से यह डील नहीं हो पाई। USTR ने आगे कहा कि अगर यह डील होती तो इससे एयरोस्पेस में सप्लाई चेन कोऑर्डिनेशन, गलत ट्रेड प्रैक्टिस से निपटने के लिए जरूरी कदम, खनिजों पर सहयोग, और US-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) बातचीत की घोषणा जैसे नतीजे सामने आते। अमेरिका ने कनाडा पर इतना ज्यादा टैरिफ क्यों लगाया? अमेरिका का कहना है कि कनाडा की कुछ व्यापार नीतियां अमेरिकी कंपनियों के लिए नुकसानदेह हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इनमें ऑटोमोबाइल, डेयरी प्रोडक्ट्स, शराब और लकड़ी का कारोबार प्रमुख हैं। अमेरिका ने पहले नए टैरिफ 20 अगस्त से लगाने का ऐलान किया था। हालांकि, डेडलाइन से ठीक पहले दोनों देशों ने बातचीत शुरू करने का फैसला किया। इसके बाद ट्रम्प ने टैरिफ लागू करने की समयसीमा 3 दिन बढ़ा दी, ताकि समझौते की कोशिश की जा सके। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कई मुद्दों पर सहमति बन गई थी, लेकिन कुछ अहम मामलों में दोनों देश एक-दूसरे की शर्तों पर सहमत नहीं हो सके। 1. अमेरिकी कारों के साथ भेदभाव का आरोप अमेरिका लंबे समय से शिकायत करता रहा है कि कनाडा की ट्रेड पॉलिसी अमेरिकी कार कंपनियों को कनाडा के बाजार में बराबर मौका नहीं देती। अमेरिका चाहता है कि उसकी कारों और दूसरे सामान के लिए कनाडा का बाजार ज्यादा खुले। कनाडा ने बदले में अमेरिका से स्टील, एल्युमिनियम, कारों और लकड़ी पर लगाए गए टैरिफ में राहत मांगी थी। लेकिन अमेरिका इन टैरिफ को हटाने पर तैयार नहीं हुआ। 2. कनाडा का अपने डेयरी मार्केट को प्रोटेक्शन कनाडा अपने डेयरी बाजार को विदेशी कंपनियों और सस्ते डेयरी प्रोडक्ट्स से बचाने के लिए लंबे समय से कई नियम लागू करता रहा है। अमेरिका चाहता है कि उसके दूध, पनीर और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स को कनाडा के बाजार में ज्यादा आसानी से बेचने का मौका मिले। लेकिन कनाडा अपने डेयरी सेक्टर को लेकर ज्यादा रियायत देने के लिए तैयार नहीं हुआ। इस मुद्दे पर भी दोनों देशों के बीच मतभेद बने रहे। 3. अमेरिकी शराब की बिक्री पर प्रतिबंध कनाडा के कुछ हिस्सों में अमेरिकी शराब की बिक्री को लेकर भी पाबंदियां लगाई गई हैं। अमेरिका इसे अपने सामान के साथ भेदभाव के तौर पर देखता है। अमेरिका चाहता है कि उसकी शराब को कनाडा के बाजार में ज्यादा आसानी से बेचने की इजाजत मिले। इसके अलावा दोनों देशों के बीच कनाडा की सॉफ्टवुड लंबर यानी लकड़ी को लेकर भी लंबे समय से विवाद है। अमेरिका कनाडा से आने वाली लकड़ी पर कई तरह के व्यापारिक प्रतिबंध और शुल्क लगाता रहा है। ————— यह खबर भी पढ़ें… भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास:रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर कार्रवाई; 86 सांसदों ने पक्ष में वोट किया, 11 विरोध में अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। पूरी खबर पढ़ें…

यमुना के बाढ़ क्षेत्र को पर्यावरणीय क्षति पहुंचाने के सभी आरोपों से आर्ट ऑफ लिविंग मुक्त, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

यमुना के बाढ़ क्षेत्र को पर्यावरणीय क्षति पहुंचाने के सभी आरोपों से आर्ट ऑफ लिविंग मुक्त, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

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नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय के एक महत्त्वपूर्ण एवं निर्णायक निर्णय के साथ आर्ट ऑफ लिविंग के प्रतिष्ठित 2016 वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल को लेकर लगभग एक दशक से चले आ रहे मीडिया ट्रायल और निराधार आरोपों का पटाक्षेप हो गया है। न्यायालय ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के पूर्व निर्णय को निरस्त करते हुए उससे संबंधित सभी परिणामी अंतरिम कार्रवाइयों को भी समाप्त कर दिया है।

निर्णय का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पक्ष यह है कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से माना कि अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों से यह सिद्ध होता है कि आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल से यमुना के बाढ़ क्षेत्र को किसी प्रकार की पर्यावरणीय क्षति नहीं हुई थी।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा जमा की गई 5 करोड़ की राशि उसे पूर्णतः वापस की जानी चाहिए। इस राशि को अनुचित रूप से ‘जुर्माना’ के रूप में प्रचारित किया गया था, जिसका उद्देश्य संस्था की प्रतिष्ठा को धूमिल करना था।

2016 का वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल एक ऐतिहासिक वैश्विक आयोजन था, जिसमें 155 से अधिक देशों की सहभागिता रही और लगभग 35 लाख लोग प्रत्यक्ष रूप से इसमें सम्मिलित हुए। इस विराट आयोजन की अध्यक्षता भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सी. लाहोटी ने की थी। संयुक्त राष्ट्र के छठे महासचिव दिवंगत डॉ. बुतरस बुतरस-घाली भी इस आयोजन के सह-अध्यक्ष बनने वाले थे, किंतु दुर्भाग्यवश आयोजन से एक माह पूर्व ही उनका निधन हो गया।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के पश्चात आर्ट ऑफ लिविंग के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा: “निहित स्वार्थों से प्रेरित कुछ लोगों द्वारा उस संस्था पर निराधार आरोप लगाने का यह दुर्भाग्यपूर्ण और हास्यास्पद प्रयास अब पूरी तरह उजागर हो गया है, जो स्वयं लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के संवर्धन के लिए समर्पित भाव से कार्य करती आ रही है।”

कॉकरोच मैन अभिजीत दिपके के खिलाफ FIR, बिना इजाजत के सरकारी स्कूल में घुसने और धमकाने का आरोप

कॉकरोच मैन अभिजीत दिपके के खिलाफ FIR, बिना इजाजत के सरकारी स्कूल में घुसने और धमकाने का आरोप

abhijeet dipke at jantar mantar

कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) बनाकर और फिर जंतर-मंतर पर आंदोलन कर के चर्चा में आए अभिजीत दिपके के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। दीपके पर सरकारी स्कूल में बिना अनुमति के घुसने, सरकारी काम में बाधा डालने और धमकाने का आरोप लगा है। इसके बाद उन पर यह एफआईआर दर्ज हुई है। यह एफआईआर लातूर पुलिस ने दर्ज की है।

क्‍यों हुई एफआईआर : सरकारी स्‍कूल में बिना अनुमति के घुसने, काम में बाधा डालने और शिक्षकों को धमकाने के आरोप में महाराष्ट्र के लातूर जिले की पुलिस ने कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दिपके और अन्य लोगों के खिलाफ कथित यह एफआईआर दर्ज की गई है।

किसने दर्ज करवाई शिकायत : यह एफआईआर जिला परिषद उर्दू स्कूल की 53 वर्षीय शिक्षिका सैयद शमशादबानो खैरात अली की शिकायत पर औसा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है।  दिपके CJP के चल रहे ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत मध्य महाराष्ट्र के लातूर जिले के स्कूलों का दौरा कर वहां की समस्याओं को सामने ला रहे हैं।

शिकायत के अनुसार, कथित घटना मुंबई से 500 किलोमीटर से अधिक दूर औसा के पास जावली स्थित जिला परिषद उर्दू स्कूल में हुई। आरोप है कि दिपके और उनके सहयोगी बिना अनुमति स्कूल में घुस गए, छात्रों के बीच बैठ गए और उनसे कई सवाल पूछे। इससे पढ़ाई और सरकारी काम में बाधा पहुंची।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि CJP नेता ने इस दौरान की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की और उसे सोशल मीडिया पर शेयर किया. शिकायत के मुताबिक, दिपके ने यह दावा कर स्कूल को बदनाम किया कि उनके दौरे के दौरान दूसरे स्कूल के छात्रों को लाकर कक्षाओं में बैठाया गया था। उन पर शिक्षकों को निलंबित करवाने की धमकी देने का भी आरोप है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 132, 329(3), 351(2) और 356(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है।

Rahul Gandhi: ‘आप किसी की नहीं, खुद की हैं’, महिलाओं की पहचान और आजादी पर बोले राहुल गांधी

Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि महिलाएं भारत की सबसे बड़ी ताकत और संपत्ति हैं। उन्होंने तर्क दिया कि महिलाओं को केवल पुरुषों के साथ उनके रिश्तों के आधार पर परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए या उन्हें पारंपरिक पारिवारिक भूमिकाओं तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

गांधी ने कहा कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में “अधिक संवेदनशील, अधिक सौम्य, अधिक दयालु और अधिक दूरदर्शी” होती हैं और उन्होंने महिलाओं की व्यक्तिगत आकांक्षाओं, अनुभवों और महत्वाकांक्षाओं को देश की एक बड़ी ताकत बताया।

गांधी ने कहा, “भारत की सबसे बड़ी ताकत क्या है? मैं इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट हूं। भारत की सबसे बड़ी ताकत देश की 70 करोड़ महिलाओं की अनूठी यात्राएं, अनूठी कल्पनाएं और अनूठे सपने हैं जिन्हें वे जी रही हैं।”

उन्होंने कहा कि महिलाओं को पुरुषों के साथ अपने रिश्तों से मिली पहचान से परे अपनी पहचान बनाने में सक्षम होना चाहिए, साथ ही उन्होंने यह भी माना कि बेटी, पत्नी या मां होना अपने आप में कोई समस्या नहीं है।

गांधी ने कहा, “जब भी मैं पुरुषों से बात करता हूं, तो पाता हूं कि महिलाओं को अक्सर सिर्फ तीन श्रेणियों में रखा जाता है: बेटी, पत्नी या मां।”

उन्होंने आगे कहा, “इनमें से किसी भी पहचान में कोई बुराई नहीं है। लेकिन ये आपकी एकमात्र पहचान नहीं हो सकतीं।”

रिश्तों से आगे महिलाओं की अपनी पहचान जरूरी: राहुल गांधी

गांधी ने कहा कि महिलाएं प्रोफेशनल, खिलाड़ी, लीडर, क्रिएटर और उद्यमी भी होती हैं, लेकिन अक्सर उनकी पहचान को पुरुषों के साथ उनके रिश्तों तक ही सीमित कर दिया जाता है।

उन्होंने आगे तर्क दिया कि परिवार से जुड़ी ये तीन आम पहचानें ही महिलाओं को किसी पुरुष के साथ उनके रिश्ते के जरिए परिभाषित करती हैं। यानी एक महिला को उसकी अपनी पहचान रखने वाले एक व्यक्ति के बजाय बेटी, पत्नी या मां के रूप में देखा जाता है।

कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर शेयर की राहुल गांधी की बातें

कांग्रेस ने भी ‘CONTROL’ (नियंत्रण) थीम के तहत X पर गांधी की ये बातें साझा कीं और महिलाओं से पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि समाज उन पर नियंत्रण करने की कोशिश करता है।

राहुल गांधी ने कहा, “किसी को नियंत्रित करने के चार तरीके होते हैं- 1. हिंसा, 2. अपमान, 3. समय और 4. कंट्रोल।”

उन्होंने कहा कि महिलाओं को नियंत्रित करने की इस कोशिश को अक्सर उनकी सुरक्षा और भलाई की चिंता के नाम पर सही ठहराया जाता है।

राहुल गांधी ने कहा, “इस दबाव को चिंता का नाम दे दिया जाता है। कहा जाता है- ‘हमें आपकी बहुत चिंता है, इसलिए हमें आपको नियंत्रित करने की जरूरत है।’”

कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में महिलाओं की आवाजाही, फैसले लेने की आजादी, आर्थिक स्थिति और अवसरों तक पहुंच से जुड़े कुछ आंकड़े भी शेयर किए।

पोस्ट के मुताबिक, 60% महिलाएं अकेले घर से बाहर नहीं जा सकतीं, जबकि 45% महिलाएं शादी या घर की जिम्मेदारियों के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं। पोस्ट में यह भी कहा गया कि सिर्फ 8% महिलाओं के पास जमीन का मालिकाना हक है।

राहुल गांधी ने गिनाए महिलाओं के खिलाफ हिंसा के तीन रूप

गांधी ने हिंसा के उन तीन रूपों के बारे में भी बात की जो महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकते हैं – शारीरिक हिंसा, “मौके से जुड़ी हिंसा” (opportunity violence) और “आर्थिक हिंसा”।

शारीरिक हिंसा के तहत, कांग्रेस ने हर साल 4.5 लाख बेटियों के भ्रूण हत्या का शिकार होने, 80% महिलाओं के उत्पीड़न, 29% महिलाओं के खिलाफ शारीरिक हिंसा और 6% महिलाओं के साथ बलात्कार का जिक्र किया।

“मौके से जुड़ी हिंसा” के बारे में पोस्ट में कहा गया है कि सुरक्षा के नाम पर 50% महिलाओं को शिक्षा या नौकरी से वंचित कर दिया जाता है।

“आर्थिक हिंसा” के तहत, कांग्रेस ने महिलाओं के लिए सुरक्षित यात्रा के नाम पर हर साल 17,500 रुपये के अतिरिक्त खर्च का जिक्र किया।

राहुल गांधी ने मनुस्मृति का जिक्र किया

इसके बाद गांधी ने महिलाओं की आजादी पर अपनी बात रखते हुए मनुस्मृति का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मनुस्मृति में लिखा है कि महिला को कभी भी आजाद नहीं होना चाहिए।”

अपनी मूल बातों में, गांधी ने मनुस्मृति के एक अंश का भी हवाला दिया: “बचपन में, महिला अपने पिता के अधीन होती है। जवानी में, वह अपने पति के अधीन होती है। पति की मृत्यु के बाद, वह अपने बेटों के अधीन होती है। महिला को कभी भी आजाद नहीं होना चाहिए।”

गांधी ने कहा, “यह मनुस्मृति का सीधा उद्धरण है, और ये शब्द शर्मनाक हैं, क्योंकि ये शब्द कभी भी नहीं कहे जाने चाहिए थे।”

इसके विपरीत, उन्होंने अपनी सोच रखते हुए कहा कि महिलाओं को स्वतंत्र होना चाहिए, अपने हक के लिए आवाज उठानी चाहिए और अपनी क्षमता पर भरोसा रखना चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा, “मेरा मानना है कि इस देश की सबसे बड़ी ताकत यही है कि हमारी महिलाएं स्वतंत्र हों, अपने लिए खड़ी हों और खुद पर भरोसा रखें।”

राहुल गांधी ने साफ किया कि महिलाओं की आजादी का मतलब यह नहीं है कि उनके परिवार से रिश्ते नहीं हो सकते। उनका कहना था कि ये रिश्ते किसी महिला की पहचान तय नहीं करने चाहिए और न ही इसका मतलब यह होना चाहिए कि वह किसी दूसरे व्यक्ति की संपत्ति है।

उन्होंने कहा, “आपके पिता, भाई, पति या बेटे के साथ रिश्ते हो सकते हैं, लेकिन आप उनकी नहीं हैं। आप खुद की हैं।”

राहुल गांधी ने कहा कि महिलाएं अपने पिता, भाई, पति और बेटों के साथ रिश्ते निभाते हुए भी अपनी अलग पहचान बनाए रख सकती हैं और अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले खुद ले सकती हैं।

महिलाओं को अपने फैसलों की आजादी

अपने संबोधन में राहुल गांधी ने महिला सशक्तिकरण को सिर्फ राजनीतिक प्रतिनिधित्व या पारिवारिक पहचान तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने महिलाओं की आने-जाने की आजादी, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक अधिकार, सुरक्षा और अपनी पसंद से फैसले लेने की स्वतंत्रता को भी उतना ही जरूरी बताया।

उनकी बातों में सामाजिक नियंत्रण और सुरक्षा की भाषा के बीच संबंध भी दिखाया गया। कांग्रेस की पोस्ट में कहा गया कि महिलाओं को हिंसा, अनादर, समय की पाबंदी और नियंत्रण के जरिए सीमित किया जाता है, जबकि ऐसी पाबंदियों को उनकी सुरक्षा की चिंता के तौर पर पेश किया जा सकता है।

गांधी ने महिलाओं को पुरुषों की तुलना में “अधिक संवेदनशील, अधिक सौम्य, अधिक दयालु और अधिक दूरदर्शी” बताया और साथ ही यह भी कहा कि महिलाएं भारत की ताकत के सबसे महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी 70 करोड़ महिलाओं की “अनोखी यात्राएं”, “अनोखी कल्पनाएं” और “अनोखे सपने” देश की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। साथ ही, उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे पारिवारिक रिश्तों या सामाजिक अपेक्षाओं को अपनी पहचान का एकमात्र आधार न बनने दें।

पुणे में राहुल गांधी के भाषण का मुख्य संदेश यह था कि महिलाएं बेटी, पत्नी और मां बने रहने के साथ-साथ प्रोफेशनल, खिलाड़ी, लीडर, क्रिएटर और उद्यमी भी हो सकती हैं – और राहुल गांधी के शब्दों में, आखिरकार “खुद की अपनी” हो सकती हैं।

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ओडिशा के पास चीनी क्रू वाला जहाज डूबा:24 लोग सवार थे; इंडियन कोस्ट गार्ड-नेवी ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया

ओडिशा के पारादीप तट से करीब 240 समुद्री मील दूर बंगाल की खाड़ी में शनिवार को MV Ocean Winner नाम का एक मालवाहक जहाज डूब गया। पनामा के झंडे वाले इस जहाज पर 24 क्रू सदस्य सवार थे। पीटीआई के मुताबिक, इनमें ज्यादातर चीनी नागरिक थे। जहाज ओडिशा से लौह अयस्क लेकर सिंगापुर जा रहा था। यह शुक्रवार को ओडिशा तट से रवाना हुआ था। जहाज के डूबने की वजह अभी पता नहीं चल पाई है। इंडियन कोस्ट गार्ड और नेवी का रेस्क्यू ऑपरेशन हादसे की जानकारी मिलते ही इंडियन कोस्ट गार्ड और इंडियन नेवी ने क्रू सदस्यों की तलाश और बचाव अभियान शुरू कर दिया। आसपास मौजूद दूसरे जहाजों को भी अलर्ट किया गया है और रेस्क्यू में मदद करने को कहा गया है। हादसे के समय बंगाल की खाड़ी में मौसम भी पूरी तरह सामान्य नहीं था। मौसम विभाग ने उत्तर बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना जताई थी। इससे समुद्र में मौसम खराब हो सकता है। हालांकि, जहाज इसी वजह से डूबा, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… 21 भारतीयों वाले जहाज पर ईरानी हमले का VIDEO: होर्मुज में IRGC बोट्स ने फायरिंग की होर्मुज स्ट्रेट में 21 भारतीय नाविकों वाले एक कंटेनर जहाज पर ईरानी नौकाओं ने फायरिंग की थी। यह घटना 22 अप्रैल को हुई थी। भारतीय नाविकों के संगठन (FSUI) ने अब इस घटना का वीडियो जारी किया है। पूरी खबर पढ़ें…

‘अमेरिका बदल गया है…’, ट्रंप के टैरिफ से कनाडा नाराज, अब 8 सितंबर से अमेरिका पर लगाएगा जवाबी टैरिफ

US-Canada Trade War: अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर यानी व्यापार विवाद और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच आखिरी समय में हुई बातचीत से कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर (लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये) के सामान पर 50% टैरिफ लगा दिया है। वहीं, जवाब में कनाडा ने भी 8 सितंबर से अमेरिका के खिलाफ इसी तरह के कदम उठाने की घोषणा की है।

बता दें कि अमेरिका के नए टैरिफ का असर कनाडा से अमेरिका को होने वाले सालाना निर्यात के लगभग 5% हिस्से पर पड़ेगा और इसमें हॉकी के सामान, डेयरी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सामान सहित कई तरह के उत्पाद शामिल हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि ओटावा ने बातचीत के दौरान कई रियायतें दीं, लेकिन वॉशिंगटन की उन मांगों को ठुकरा दिया जिन्हें उन्होंने जरूरत से ज्यादा बताया।

उन्होंने X पर लिखा, “एक साल से ज्यादा समय से, कनाडा ने अमेरिका के साथ एक नई और व्यापक व्यापार डील पर बातचीत करने के लिए पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम किया है। हमने व्यावहारिक, धैर्यवान और लगातार प्रयास करने वाला रवैया अपनाया है। हमारा मकसद हमेशा कनाडाई लोगों के लिए सबसे अच्छी डील हासिल करना रहा है, न कि किसी भी कीमत पर या किसी भी समय-सीमा में डील करना। कल देर शाम मैंने अपने वार्ताकारों को ओटावा लौटने का निर्देश दिया। हम अमेरिका के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर सकते और न ही हम उनकी मांगी गई चीजें देंगे।”

कनाडा डॉलर-के-बदले-डॉलर के हिसाब से टैरिफ लगाकर जवाब देगा

कार्नी ने कहा कि अमेरिका के टैरिफ लागू होने के बाद कनाडा भी जवाबी टैरिफ लगाएगा। इन उपायों में स्टील, डेयरी, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, पल्प और पेपर, और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर शामिल हो सकते हैं।

कार्नी ने कहा, “आने वाले दिनों में हम इन नए टैरिफ उपायों की जानकारी जारी करेंगे, जो लेबर डे के बाद आने वाले मंगलवार से लागू होंगे।”

कनाडा ने बातचीत के दौरान यह प्रस्ताव भी दिया था कि अगर वॉशिंगटन अपने टैरिफ में काफी कमी करता है, तो वह अमेरिकी स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल पर लगे अपने बाकी जवाबी टैरिफ हटा लेगा। ओटावा ने यह भी संकेत दिया था कि प्रांत अमेरिकी शराब उत्पादों को अपने बाजार में वापस आने की इजाजत दे सकते हैं।

हालांकि, कार्नी ने कहा कि अमेरिका के अंतिम प्रस्ताव कनाडा की स्वीकार करने की क्षमता से कहीं अधिक थे।

अमेरिका का दावा- कनाडा ने बेहतर डील ठुकराई

अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने वॉशिंगटन के रुख का बचाव करते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने कनाडा के लिए अहम उत्पादों – जैसे स्टील, ऑटोमोबाइल और लकड़ी – पर रियायतें देने की पेशकश की थी।

ग्रीर ने कहा, “हम ऐसे कदम उठा रहे हैं जो कनाडा की जवाबी कार्रवाई का जवाब देंगे।”

उन्होंने तर्क दिया कि कनाडा को बेहतर शर्तें ऑफर की गई थीं, लेकिन उसने उन्हें स्वीकार नहीं किया।

आखिरी समय की मांगों की वजह से बातचीत टूट गई

कार्नी के मुताबिक, अमेरिका की आखिरी मांगों में ऐसी शर्तें शामिल थीं जिनसे कनाडा में बनी गाड़ियों पर टैरिफ में मिलने वाली छूट कम हो जाती, दूसरे देशों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट करने की कनाडा की क्षमता सीमित हो जाती और भाषा, संस्कृति व संप्रभुता से जुड़ी सुरक्षा पर असर पड़ता।

कार्नी ने इन मांगों को “अस्वीकार्य” बताया और कहा कि कनाडा अब अमेरिका के साथ पहले जैसे रिश्तों की स्थिति में वापस नहीं जाएगा।

बातचीत टूटने की यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब कुछ दिन पहले ही दोनों देशों के अधिकारियों ने उम्मीद जताई थी कि वे किसी समझौते पर पहुंचने के करीब हैं।

USMCA के भविष्य पर सवाल

बढ़ते विवाद ने यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) के भविष्य पर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह नॉर्थ अमेरिकन ट्रेड पैक्ट इन तीनों देशों के बीच होने वाले व्यापार के एक बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है।

अमेरिका पहले ही मैक्सिको के साथ इस समझौते में बदलाव को लेकर बातचीत शुरू कर चुका है, लेकिन कनाडा के साथ अभी तक औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है।

अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता यह विवाद लंबे समय से सहयोगी रहे इन दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़ा बदलाव दिखाता है। पिछले साल अमेरिका और कनाडा के बीच लगभग 880 अरब डॉलर का सामान और सेवाएं एक्सचेंज की गईं, जिससे वे व्यापार के लिए एक-दूसरे पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गए हैं।

पुराने सहयोगी देशों के रिश्तों में बढ़ा तनाव

टैरिफ को लेकर यह ताजा विवाद वॉशिंगटन और ओटावा के बीच महीनों से बढ़ते तनाव के बाद शुरू हुआ है। ट्रंप ने अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बार-बार टैरिफ लगाने पर जोर दिया है और कनाडा के अमेरिका का 51वां राज्य बनने के बारे में विवादित बातें भी कही हैं।

कार्नी ने दोनों देशों के रिश्तों में आ रहे बदलाव को स्वीकार करते हुए कहा कि कनाडा ने यह समझ लिया है कि “अमेरिका बदल गया है” और दोनों देश “अपने पुराने रिश्तों की स्थिति में वापस नहीं लौटेंगे।”

बता दें कि कनाडा अपने सामान का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अमेरिका को निर्यात करता है, इसलिए यह विवाद कनाडाई कारोबारियों और कर्मचारियों के लिए बहुत अहम है।

ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने कार्नी के जवाब का समर्थन किया है। उन्होंने “टैरिफ के बदले टैरिफ और डॉलर के बदले डॉलर” के आधार पर जवाबी कार्रवाई करने की बात कही और कहा कि “सभी विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।”

ट्रंप ने नए टैरिफ के लिए 1930 के ट्रेड लॉ का इस्तेमाल किया

ये नए टैरिफ US टैरिफ एक्ट, 1930 की धारा 338 पर आधारित हैं। इस नियम के तहत US राष्ट्रपति उन देशों से होने वाले इंपोर्ट पर 50% तक टैरिफ लगा सकते हैं, जिन्होंने अमेरिकी कारोबारों के साथ भेदभाव किया हो।

यह नियम ‘महामंदी’ (Great Depression) के दौर का है और पहले कभी भी इस तरह से टैरिफ लगाने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया गया है।

इन नए कदमों से वह ट्रेड विवाद और गहरा हो गया है, जिसने दुनिया के सबसे करीबी आर्थिक और राजनीतिक रिश्तों में से एक पर पहले ही तनाव पैदा कर दिया है। फिलहाल आगे कोई बातचीत तय नहीं है, इसलिए दोनों देश अब टैरिफ विवाद के अगले दौर की तैयारी कर रहे हैं।

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15 साल बाद भारतीय महिला युगल ने जीता विश्व चैंपियनशिप में ब्रॉंज

Treesa Jolly Gayatri Gopichand

भारतीय बैडमिंटन फ़ैन्स का दिल जीतने वाले एक ऐतिहासिक सफ़र में, बिना सीडिंग वाली ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी ने 2026 बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल के साथ अपना शानदार सफ़र खत्म किया। शनिवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी एरिना में खेले गए सेमीफ़ाइनल में उन्हें चीन की वर्ल्ड नंबर 1 और टॉप सीडेड जोड़ी लियू शेंग शू और टैन निंग से हार का सामना करना पड़ा।

भारतीय जोड़ी ने ज़बरदस्त टक्कर दी और पहला गेम 21-18 से जीता, लेकिन चीन की टॉप सीडेड जोड़ी ने वापसी करते हुए अगले दो गेम 21-13, 21-8 से जीत लिए। हार के बावजूद, ट्रीसा और गायत्री ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में महिला डबल्स मेडल के लिए भारत के 15 साल के इंतज़ार को खत्म किया; इससे पहले 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था।

इस ऐतिहासिक सफ़र की शुरुआत क्वार्टरफ़ाइनल में एक शानदार जीत के साथ हुई, जहाँ भारतीय जोड़ी ने चीन की चौथी सीडेड जोड़ी जिया यी फ़ान और झांग शू शियान को तीन गेम के रोमांचक मुक़ाबले में हराकर मेडल पक्का किया। भारतीय जोड़ी पहला गेम 16-21 से हार गई थी, लेकिन फिर ज़बरदस्त वापसी करते हुए दूसरा गेम 21-15 से जीता। उन्होंने इसी लय को निर्णायक गेम में भी बनाए रखा और 21-13 की शानदार जीत के साथ मैच अपने नाम किया।

भारतीय जोड़ी ने अपने सफ़र की शुरुआत राउंड ऑफ़ 64 में स्पेन की पाउला लोपेज़ और लूसिया रोड्रिग्ज़ पर 21-9, 21-13 से शानदार जीत के साथ की थी। इसके बाद उन्होंने राउंड ऑफ़ 32 में अमेरिका की 16वीं सीड वाली जोड़ी लॉरेन लैम और एलिसन ली को 21-15, 21-12 से हराकर शानदार जीत हासिल की। राउंड ऑफ़ 16 में, उन्होंने जापान की सातवीं सीड वाली जोड़ी रिन इवानागा और की नाकानिशी को 21-16, 21-12 से हराकर चौंका दिया और 2015 के बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वार्टर फ़ाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला डबल्स जोड़ी बन गईं।

इससे पहले शुक्रवार को भारत की मेडल संख्या और बढ़ सकती थी, लेकिन सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की पुरुष डबल्स जोड़ी भी चीन की तीसरी सीड वाली जोड़ी लियांग वेइकेन्ग और वांग चांग के ख़िलाफ़ क्वार्टर फ़ाइनल मुक़ाबला हार गई, जिससे उनका सफ़र बिना किसी मेडल के ख़त्म हो गया। इस हार का मतलब था कि इस साल की वर्ल्ड चैंपियनशिप में डबल्स इवेंट्स से भारत के लिए सिर्फ़ ट्रीसा और गायत्री का ब्रॉन्ज़ मेडल ही हासिल हुआ, जबकि सिंगल्स स्टार पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन, उन्नति हुड्डा और आयुष शेट्टी भी टूर्नामेंट में पहले ही बाहर हो चुके थे।

ईरान से जंग हार चुका है अमेरिका, दुनिया भी यह मान चुकी है, किसके बयान से फिर सुलग उठा मिडिल ईस्‍ट?

ईरान से जंग हार चुका है अमेरिका, दुनिया भी यह मान चुकी है, किसके बयान से फिर सुलग उठा मिडिल ईस्‍ट?

Donald Trump

मिडिल ईस्‍ट में तनाव खत्‍म होने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ अमेरिका बार-बार ईरान को सबक सिखाने की बात कर रहा है तो वहीं, दूसरी तरफ ईरान का दावा है कि दुनिया अब मान चुकी है कि अमेरिका यह जंग हार चुका है। इस बयानबाजी से मिडिल ईस्‍ट में एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है।

बता दें कि अमेरिका ईरान के पर सबसे बड़ा आर्थिक शिकंजा कसने की तैयारी में है, जबकि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का दावा है कि अमेरिका के साथ इस जंग में ईरान जीत चुका है। उन्‍होंने कहा कि यही नहीं, पूरी दुनिया भी अब इस सच्चाई को स्वीकार कर चुकी है।

दूसरी ओर, सीरिया और इजरायल के बीच दशकों से विवाद का कारण बने 'गोलान हाइट्स' को लेकर अमेरिका के अपने ही राजदूत का एक बयान आ गया है, जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुराने फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ईरान की जीत दुनिया पर दुनिया की मुहर : ईरानी सरकारी मीडिया (IRNA) की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि अब अमेरिका के साथ जारी टकराव को खत्म हो जाना चाहिए, क्योंकि दुनिया यह मान चुकी है कि इस युद्ध में ईरान की जीत हुई है। पेजेश्कियन ने यह भी कहा कि पूरी दुनिया हमारी जीत पर अपनी सहमति दे चुकी है और इस वक्त अमेरिका पूरी दुनिया में नफरत का पात्र बन चुका है। ईरान का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब वाशिंगटन से ट्रंप प्रशासन ईरान पर चौतरफा 'आर्थिक हमला' करने की रणनीति बना रहा है।

कैसे आर्थिक तौर पर ईरान को तोड़ने की कोशिश में अमेरिका: वहीं दूसरी तरफ डोनाल्‍ड ट्रंप ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने की तैयारी कर रहा है। इस मुहिम को 'इकोनॉमिक डी-डे' का नाम दिया जा रहा है। इसका मकसद ईरान को आर्थिक तौर से पूरी तरह अलग-थलग करना है। ट्रंप का सीधा फरमान है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह रोक लगाए और तेल व प्राकृतिक गैस के टैंकरों की आवाजाही के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह सुरक्षित और बहाल करे।

टॉम बैरक के बयान से मचा बवाल : ईरान के साथ जारी इस तनाव के बीच तुर्किये में अमेरिकी राजदूत और सीरिया के विशेष दूत टॉम बैरक के एक इंटरव्यू ने वाशिंगटन के विदेश नीति को असहज कर दिया है। टॉम बैरक ने कहा कि इजरायल आज भी संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रस्तावों का उल्लंघन करते हुए गोलान हाइट्स पर 'अवैध रूप से कब्जा' जमाए हुए है। गौरतलब है कि इजरायल ने 1967 के युद्ध में सीरिया से गोलान हाइट्स को छीना था और 1981 में इसे अपना हिस्सा घोषित कर दिया था। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) आज भी इसे सीरिया का ही अधिकृत इलाका मानता है। बता दें कि मार्च 2019 में ट्रंप ने दशकों पुरानी अमेरिकी नीति को बदलते हुए गोलान हाइट्स पर इजरायल के अधिकार को आधिकारिक मान्यता दी थी।

गूगल पर एक स्टार रिव्यू देने से भड़क गई कंपनी, महिला पर ठोक दिया केस

अमेरिका ने एक कंपनी ने महिला के ऊपर इसलिए केस कर दिया क्योंकि उसने गूगल पर कंपनी को केवल एक स्टार रेटिंग दी थी। कंपनी मानहानि का मुकदमा दर्ज करवाते हुए महिला से 25,000 डॉलर हर्जाना देने की मांग की है।

Honda Activa 125 vs TVS Jupiter 125: कीमत, माइलेज और फीचर्स में कौन है बेस्ट?

Honda Activa 125 vs TVS Jupiter 125: भारत के 125cc स्कूटर सेगमेंट में Honda Activa 125 और TVS Jupiter 125 सबसे ज्यादा तुलना किए जाने वाले दो नाम हैं, लेकिन कीमत और फ्यूल एफिशिएंसी के मामले में दोनों का तरीका काफी अलग है। जो खरीदार इन दोनों के बीच फैसला कर रहे हैं, उनके लिए यह बात अहम है क्योंकि Jupiter 125 की शुरुआती कीमत काफी कम है और कागजों पर इसका माइलेज भी बेहतर बताया गया है, जबकि Activa 125 ज्यादा भरोसेमंद स्मार्ट-की सिस्टम पर आधारित है। आइए जानते हैं कि कीमत, माइलेज और फीचर्स के मामले में ये दोनों असल में कैसे एक-दूसरे से अलग हैं।

Honda Activa 125 vs TVS Jupiter 125: कीमत और माइलेज

Honda Activa 125 की कीमत दिल्ली में DLX वेरिएंट के लिए 91,178 रुपये से शुरू होती है और इसके टॉप मॉडल H-Smart की कीमत 95,622 रुपये (एक्स-शोरूम) है। वहीं, TVS Jupiter 125 की शुरुआती कीमत काफी कम है। इसका Drum Alloy वेरिएंट 81,700 रुपये से शुरू होता है, जबकि इसके टॉप SmartXonnect वेरिएंट की कीमत 89,935 रुपये (एक्स-शोरूम) है। ये कीमतें TVS की आधिकारिक प्राइसिंग के मुताबिक हैं।

माइलेज की बात करें तो, Activa 125 के सभी वेरिएंट्स के लिए ARAI-क्लेम्ड माइलेज 47 kmpl है, जबकि Jupiter 125 का क्लेम्ड माइलेज 50 kmpl से 57.27 kmpl के बीच बताया गया है।

दोनों स्कूटर में लगभग एक ही साइज के इंजन का इस्तेमाल किया गया है – Activa में 123.92cc और Jupiter में 124.8cc का इंजन है, और दोनों का टॉर्क आउटपुट भी लगभग एक जैसा (10.5 Nm) है।

Honda Activa 125 vs TVS Jupiter 125: तुलना करने लायक फीचर्स

Activa के टॉप वेरिएंट में H-Smart टेक्नोलॉजी वाली Honda Smart Key मिलती है, जिससे राइडर अपनी जेब से चाबी निकाले बिना ही स्कूटर को अनलॉक कर सकते हैं, सीट खोल सकते हैं और स्टार्ट कर सकते हैं। साथ ही, इसमें TFT डिस्प्ले और ब्लूटूथ नेविगेशन व कॉल अलर्ट के लिए Honda RoadSync भी दिया गया है।

इसके जवाब में Jupiter 125 में सेगमेंट का पहला ‘ऑल-इन-वन लॉक’ दिया गया है, जो एक ही मैकेनिज्म से फ्यूल कैप, सीट, हैंडलबार लॉक और इग्निशन को ऑपरेट करता है। साथ ही, इसमें असल ड्राइविंग में बेहतर माइलेज के लिए TVS IntelliGo ऑटो स्टार्ट-स्टॉप टेक्नोलॉजी भी मिलती है।

दोनों स्कूटर में फ्रंट डिस्क ब्रेक का ऑप्शन, ट्यूबलेस टायर, USB चार्जिंग पोर्ट और टेलीस्कोपिक फ्रंट सस्पेंशन मिलता है, यानी राइड का अनुभव लगभग एक जैसा ही है। मुख्य अंतर मैकेनिकल हार्डवेयर के बजाय सुविधा देने वाले फीचर्स में है।

अब अगर आपकी प्राथमिकता कम कीमत और बेहतर माइलेज है, तो TVS Jupiter 125 आपके लिए ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आप Honda की स्मार्ट-की जैसी सुविधाएं और लंबे समय से मौजूद सर्विस नेटवर्क चाहते हैं, तो Activa 125 की ज्यादा कीमत भी आपको सही लग सकती है।

कुल मिलाकर, दोनों स्कूटर के इंजन और मैकेनिकल सेटअप में ज्यादा बड़ा अंतर नहीं है। इसलिए खरीदारी का फैसला इस बात पर ज्यादा निर्भर करता है कि रोजाना इस्तेमाल में आपके लिए कौन से फीचर्स ज्यादा जरूरी हैं।

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