पुणे मंजे प्रेम, ‘छात्रों की गूंज’ में बोले राहुल गांधी, कहा, लड़कियां आजाद हों, हजारों लड़कियों ने राहुल के लिए बनाया दिल

पुणे मंजे प्रेम, ‘छात्रों की गूंज’ में बोले राहुल गांधी, कहा, लड़कियां आजाद हों, हजारों लड़कियों ने राहुल के लिए बनाया दिल

Rahul Gandhi

राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित किया। यहां उन्‍हें सुनने के लिए हजारों की संख्‍या में छात्राएं जमा हुईं। इस आयोजन में राहुल गांधी ने कहा कि देश की लड़कियों का आजाद होना जरूरी है। पिता, पति और बेटे से आपका रिश्ता है, लेकिन आपकी पहचान उनसे नहीं है। आपको अपने लिए आजाद होना चाहिए।

उन्‍होंने सिर्फ 8% महिलाओं के पास खुद की प्रॉपर्टी है। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति कहती है कि लड़की पिता, पति, बच्चों की संपत्ति है। यह शर्मनाक है। महिलाओं को किसी पर आश्रित नहीं होना हैं। आयोजन के दौरान छात्राओं ने राहुल के लिए हाथों से दिल का साइन बनाकर दिखाया और राहुल राहुल के नारे लगाए।

तीन तरह से महिलाओं की हत्‍या : राहुल गांधी ने कहा कि ‘महिलाओं के खिलाफ आज 3 तरह से हिंसा होती हैं। पहली- पैदा होते ही हत्या, दूसरी- शारीरिक अत्याचार, तीसरी- आर्थिक बंदिशें।’ इस कार्यक्रम में सिर्फ छात्राओं को ही बुलाया गया था। इस दौरान इन्होंने राहुल-राहुल के नारे लगाए और राहुल के लिए हाथों से दिल का साइन बनाकर दिखाया।

लड़कों के लिए गाली अलाऊ क्‍यों : राहुल गांधी ने इस बीच पितृसत्‍ता का मुद्दा भी उठाया। उन्‍होंने कहा कि दिल्‍ली के जंतर मंतर में गालियां लड़कों ने भी दी और लड़कियों ने भी दी। लेकिन सवाल सिर्फ लड़कियों पर उठाया गया। कहा कि लड़कियां गाली दे तो शोभा नहीं देता। राहुल ने मोदी, योगी, भागवत के बयानों के क्लिप दिखाए। जिसके टाइटल में लिखा था- मनुस्मृति इज बैक…। राहुल ने कहा- जंतर मंतर में गालियां लड़कों ने भी दी और लड़कियों ने भी दी। लेकिन लड़की गाली दे शोभा नहीं देता। पीएम कहते हैं कि ये कल्चरल शॉक है कि लड़कियों ने गाली दी। लड़के गाली दें तो उनके लिए अलाऊ है।

बी प्राउड एंड फाइट फोर योर सेल्फ : राहुल ने मराठी में कहा-पुणे मंजे प्रेम। कुछ लड़कियों को राहुल ने मंच पर बुलाया। बता दें कि आयोजन में 15 हजार से ज्यादा लड़कियां मौजूद थीं। खट्‌टर जी कहते हें कि रेप महिला के कारण होता है। ये एक माइंड सेट है। लड़की की एक जगह है, उसे पिंजरे में बंद होना चाहिए। लड़कों को फुल फ्रीडम होनी चाहिए। वे चाहें गाली दें काम करें घूमें फिरें। हमें ऐसा हिंदुस्तान नहीं चाहिए। आपके दिल में जो डर है उसे जल्द से जल्द मिटा देना है। आप इस देश की नींव हो भविष्य हो.. आपको पितृसत्ता डराती है, दबाती है, कंट्रोल करती है, तो इसे मिलकर खत्म करना है। मैं आपसे ये कहना चाहता हूं कि बी लाउड, बी प्राउड, एंड फाइट फोर योर सेल्फ।

पितृसत्ता पर प्रहार : कुल मिलाकर राहुल गांधी ने पितृसत्ता पर प्रहार किया और महिलाओं व लड़कियों के अधिकारों की बात की। बराबरी की बात की। उन्‍होंने लड़कों और लड़कियों के बीच इस खाई को भरने और भेदभाव खत्‍म करने की बात की। लड़कियों की आजादी की बात की और उनसे उनके विचारों को जाना समझा। कई लड़कियों ने खुलकर राहुल के सामने अपने विचार व्‍यक्‍त किए।

Compaq की धमाकेदार वापसी! लॉन्च किया 11,000mAh बैटरी वाला QTab Ultra लॉन्च, जानें कीमत

कभी PC की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाने वाला Compaq अब करीब दो दशक बाद नए अंदाज में वापसी कर रहा है। साल 2002 में HP के अधिग्रहण के बाद लगभग गायब हो चुका यह ब्रांड अब इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस मार्केट में अपनी दूसरी पारी शुरू करने की तैयारी में है। इस बार Compaq की नजर एंट्री-लेवल Android डिवाइसेस पर है और कंपनी ने इसी कड़ी में Compaq QTab Ultra 12.6 Android Tablet लॉन्च किया है।

Compaq QTab Ultra की खूबियां

लेटेस्ट Compaq QTab Ultra में 12.6 इंच की InCell AMOLED डिस्प्ले दी गई है। इसका रेजोल्यूशन 1600 x 2560 पिक्सल है। बड़ी स्क्रीन की वजह से इस टैबलेट पर वीडियो देखने और गेमिंग का मजा तो लिया ही जा सकता है, साथ ही यह पढ़ाई, ड्रॉइंग और ऑफिस के काम के लिए भी काफी उपयोगी हो सकता है।

कॉम्पैक का यह टैब Android 15 पर रन करता है, जो 5GHz Wi-Fi, Bluetooth 5.0, GPS और USB-C सपोर्ट के साथ आता है। इस टैब को कंपनी ने 11,000mAh की बैटरी के साथ लॉन्च किया है, जो 500 घंटे तक स्टेंडबाय टाइम का बैकअप ऑफर करता है। यह टैब 18W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है।

इसके अलावा, इस टैब में स्टायलस पेन और प्रोटेक्टिव केस भी मिलेगा। साथ ही इसमें एक्सटर्नल कीबोर्ड का भी सपोर्ट दिया गया है। यह टैब 12GB RAM और 512 GB की इंटरनल स्टोरेज के साथ आता है। टैब में microSD कार्ड का स्लॉट भी दिया गया है, जो 2TB तक स्टोरेज सपोर्ट करता है।

Compaq QTab Ultra की कीमत

कीमत की बात करें तो, Compaq QTab Ultra 12.6 को फिलहाल मैक्सिको में MXN 8,499 (करीब 48,000 रुपये) की कीमत पर लॉन्च किया गया है। कंपनी टैबलेट के साथ प्रोटेक्टिव केस, स्टायलस, पावर अडैप्टर और चार्जिंग केबल भी दे रही है। हालांकि, अभी Compaq ने दूसरे देशों के बाजार में इस टैबलेट की लॉन्चिंग को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है।

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राम की बडी बहन माता शांता की राखी अयोध्या से राष्ट्रपति, पीएम और सीएम को भेजी

राम की बडी बहन माता शांता की राखी अयोध्या से राष्ट्रपति, पीएम और सीएम को भेजी

Ayodhya Rakhi Mata Shanta: अयोध्या में भगवान श्रीराम की बड़ी बहन माता शांता की ओर से श्रृंगी ऋषि सेवा संस्थान के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित देश के कई विशिष्ट दिग्गजों को विशेष राखियां भेजी गई हैं। इन राखियों को केले के तने, रेशमी धागे और भागलपुर की कला का उपयोग करके तैयार किया गया है।                                

राखी की मुख्य विशेषताएं

  • विशिष्ट जनों को प्रेषित : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथसिंह, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ को यह रक्षा सूत्र भेजा गया है।
  • वैदिक मंत्रोच्चार: साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने इन सभी राखियों को वैदिक मंत्रों के साथ अभिमंत्रित किया है।
  • खास सामग्री : इस बार की राखियां मुख्य रूप से केले के तने के धागे, रेशम, मखाने और भागलपुरी पेंटिंग की कला का उपयोग करके बनाई गई हैं, जिन्हें मधुबनी की अंजलि सिंह के सहयोग से तैयार किया गया है।
  • भगवान राम को अर्पण : देश के प्रमुख नेताओं और गणमान्य लोगों तक रक्षा सूत्र पहुंचाने के बाद, माता शांता की ओर से भेजी गई यह पावन राखी अयोध्या में भगवान श्रीरामलला को भी अर्पित की गईं। 

क्या है धार्मिक मान्यता?

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता शांता राजा दशरथ की पुत्री और भगवान श्रीराम की बड़ी बहन थीं, जिनका विवाह श्रृंगी ऋषि के साथ हुआ था। इसी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का निर्वाह करते हुए हर साल रक्षाबंधन के अवसर पर माता शांता के धाम/आश्रम की तरफ से यह रक्षा सूत्र भेजने की परंपरा निभाई जाती है। 

 

श्रृंगी ऋषि सेवा संस्थान के अध्यक्ष सुभाष सिंह ने बताया कि साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने पूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इन विशेष राखियों को अभिमंत्रित किया है। प्राचीन परंपरा और भ्रातृ-स्नेह को जीवंत रखने के लिए संस्थान हर वर्ष यह रक्षा सूत्र भेजता है।

गैंगस्टर गोल्डी बराड़ बोला- हरदीप निज्जर को मैंने मरवाया:मेरे भाइयों को मरवाने वाले इसकी कोठी में रहते थे; पहले भारतीय एजेंसियों पर आरोप लगे थे

गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने दावा किया है कि कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या उसी ने करवाई थी। इससे जुड़ा एक ऑडियो सामने आया है। इसमें गोल्डी बराड़ आतंकी परमजीत सिंह उर्फ पम्मा से कह रहा है कि निज्जर को इसलिए टारगेट किया गया, क्योंकि उसके भाई की हत्या के बाद सुक्खा दुनेके और अर्श डाला जैसे लोग निज्जर की कोठी में रहते रहे थे। ऑडियो में वह कह रहा है कि जिन कोठियों में बैठकर मेरे भाइयों को मरवाया गया, वे उन्हीं लोगों की थीं। इसी वजह से मेरा खून खौलता था। मैं उसे छोड़ नहीं सकता था। गुरु घर की इज्जत के कारण अंदर गोली नहीं चलाई गई। अगर अंदर गोली चलानी होती या बदतमीजी करनी होती तो अर्श डाला को भी मार दिया जाता। गोल्डी बराड़ ने कथित ऑडियो में कहा कि गुरु घर की इज्जत के लिए सब्र रखा और गेट के बाहर आने तक इंतजार किया। उसे लगा था कि अर्श डाला भी गाड़ी में साथ है। उसने इसे अपनी गलती बताते हुए कहा कि अगर उस समय अर्श डाला को भी मार दिया होता तो उसे बार-बार सफाई देने की जरूरत नहीं पड़ती। गौरतलब है कि निज्जर की हत्या 18 जून 2023 को कनाडा के सरे में कर दी गई थी। हमलावरों ने गुरुद्वारा के बाहर निकलते ही घेरकर 50 राउंड फायरिंग की थी, जिसमें से 34 गोलियां निज्जर को लगीं थी। कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर की हत्या के पीछे भारत सरकार के एजेंटों का हाथ होने के आरोप लगाए थे। हालांकि, भारत सरकार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए ‘बेतुका और राजनीति से प्रेरित’ बताया था। ऑडियो में गोल्डी बराड़ ने आतंकी परमजीत से ये बातें कही… निज्जर का मर्डर कैसे हुआ था, जानिए **************** ये खबर भी पढ़ें: खालिस्तानी हरदीप निज्जर की हत्या का पूरा VIDEO: गुरुद्वारा पार्किंग से बाहर निकलते ही 6 आरोपियों ने घेरा, 2 शूटरों ने चलाईं 50 गोलियां कनाडा में खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का एक नया CCTV सामने आया है। जिसमें हथियारबंद लोग निज्जर को गोलियां मारते दिख रहे हैं। कनाडा की न्यूज एजेंसी CBC की रिपोर्ट के मुताबिक इसे ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक वीडियो की निजी तौर पर कई सोर्स से पुष्टि की गई है। (पढ़ें पूरी खबर)

भोपाल में रहवासी क्षेत्र में कमर्शियल एक्टिविटी पर निगम की सीलिंग कार्यवाही पर उठे सवाल, टॉर्च जला कर सड़क पर किया प्रदर्शन

भोपाल में रहवासी क्षेत्र में कमर्शियल एक्टिविटी पर निगम की सीलिंग कार्यवाही पर उठे सवाल, टॉर्च जला कर सड़क पर किया प्रदर्शन

राजधानी भोपाल में रहवासी क्षेत्रों में कर्मिशयल एक्टिविटी के विरोध में सर्वोच्च न्यायलय के निर्देश के बाद भी कोई कार्यवाही नही होने के विरोध में रहवासियों टॉर्च लाइट मार्च निकाल कर अपना विरोध दर्ज कराया। भरत नगर त्रिलंगा क्षेत्र में संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के आव्हान पर भोपाल की अनेको आवासीय कॉलोनी के निवासियों ने एकत्रित हो कर नगर निगम की पक्षपातपूर्ण सीलिंग कार्यवाही के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए टौर्च लाइट मार्च निकला।

रहवासियों ने आरोप लगाया की जब सर्वोच्च न्यायलय द्वारा आदेश दिया है की आवासीय भूउपयोग पर हो अवैध संस्थानों पर सीलिंग की कार्यवाही सुनिश्चित की जाये तो नगर निगम आब तक सिर्फ सर्वे और नोटिस का ढोंग क्यों रच रही है।

 

रहवासियों ने सवाल उठाया की जब नगर निगम एक बार सर्वे करवा चूका है जिसमे हजारो की संख्या में अवैध निर्माण पाया गया है जिसकी जानकारी न्यायलय को दी जा चुकी है तो उस पर कार्यवाही करने की बजाये दूसरी बार सर्वे करवा कर समय क्यों ख़राब किया जा रहा है क्या निगम इन रसूखदार भूमाफियाओ को बचाना चाहता है|

 

संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से जल्द मास्टर प्लान लागु करने की मांग की, जिसमे रहवासी क्षेत्रो में व्यवसाई गतिविधियों पर पुर्णतः प्रतिबंध हो। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने कहा कि टॉर्च लाइट मार्च केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि भोपाल के नागरिकों की जागरूकता और अपने शहर भोपाल को भूमाफियाओ से बचाने का संकल्प है। आवासीय क्षेत्रों को अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माणों से बचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है परन्तु जिला प्रशासन मूक दर्शक बना बेठा है जिसके चलते भूमाफिया भोपाल की खूबसूरती पर प्रहार कर रहा है।

समिति ने आरोप लगाया कि पहले ही बड़ा तालाब छोटा तालाब और कलियासौत डेम ,केरवा ,चंदनपुरा,गोरा बिसनखेड़ा क्षेत्र अतिक्रमण से ग्रसित है। अब रहवासी क्षेत्रो को ख़त्म करने की प्लानिग है जिसको रहवासी सफल नहीं होने देंगे जिन्होंने एक जुट हो कर प्रशासन से अवैध गतिविधिया हटाने की मांग की और चेतवानी दी की अगर सर्वोच्च न्यायलय के आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो हम न्यायलय में अवमानना याचिका दायर करने के लिए बाध्य होंगे| 

 

समिति ने प्रशासन और नगर निगम से मांग की कि आवासीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और अवैध भू-उपयोग के खिलाफ बिना भेदभाव प्रभावी कार्रवाई की जाए तथा आवासीय कॉलोनियों के मूल स्वरूप को संरक्षित किया जाए।

 

 

Putrada Ekadashi 2026: कल किया जाएगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें साल में 2 बार क्यों किया जाता है पुत्रदा एकादशी व्रत

Putrada Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत संतान की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छी सेहत के लिए किया जाता है। पूरे साल में आने वाली सभी एकादशी व्रतों में यह अकेला उपवास है, जो साल में दो बार किया जाता है। एक बार श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और फिर पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नि:संतान दंपति इस व्रत को संतान प्राप्ति की कामना से कर सकते हैं। इस एकादशी में भगवान विष्णु की बाल रूप में या श्री कृष्ण की पूजा जाती है।

पुत्रदा एकादशी 2026 में कब?

साल में दो बार पौष और सावन माह में पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। दोनों ही व्रत संतान प्राप्ति या संतान की सुख-शांति के उद्देश्य से रखा जाता है। इस साल श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को श्रावण पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। कई हिस्सों में इसे पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे पापों का नाश करने वाली और पुण्य प्रदान करने वाली एकादशी बताया जाता है। श्रावण मास में इस एकादशी का महत्व इसलिए भी और बढ़ जाता है क्योंकि इस महीने में भगवान शिव की भी पूजा होती है। ऐसे में भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को खास लाभ मिलता है।

साल में 2 बार पुत्रदा एकादशी क्यों?

साल में दो बार पुत्रदा एकादशी व्रत होने का मुख्य कारण यह है कि, विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में दोनों ही खास तिथियों का फल संतान प्राप्ति और संतान की सुरक्षा के लिए बताया गया है। दोनों ही एकादशियों का उद्देश्य और फल की समानता होने के कारण ही दोनों को पुत्रदा एकादशी (संतान प्रदान करने वाली) कहा जाता है।

दोनों एकादशियों का अलग-अलग महत्व

श्रावण एकादशी : यह विशेष रूप से संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और संकटों से रक्षा के लिए रखी जाती है।

पौष एकादशी : यह मुख्य रूप से योग्य, ज्ञानी और तेजस्वी संतान की प्राप्ति तथा उसकी उन्नति के लिए मानी जाती है।

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बांग्लादेश में 2 साल में 457 फैक्ट्रियां बंद:2026 में 62 हजार नौकरियां गईं, गैस संकट से 800 कंपनियों के बंद होने का खतरा

बांग्लादेश के उद्योगों पर संकट गहराता जा रहा है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो साल में देश के 7 प्रमुख औद्योगिक इलाकों में 457 औद्योगिक इकाइयां स्थायी रूप से बंद हो चुकी हैं। इनमें 108 गारमेंट उद्योग से जुड़ी यूनिट्स शामिल हैं। फैक्ट्रियां बंद होने का सीधा असर रोजगार पर पड़ा है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच 95 फैक्ट्रियां बंद हुईं और 61,881 लोगों की सीधी नौकरी चली गई। बंद फैक्ट्रियों का संकट सिर्फ कपड़ा उद्योग तक सीमित नहीं पिछले दो साल में बंद हुई 457 फैक्ट्रियों में कपड़ा और गारमेंट से जुड़ी फैक्ट्रियों के साथ दूसरे उद्योगों की इकाइयां भी शामिल हैं। इनमें 287 इकाइयां अन्य मैन्युफैक्चरिंग कारोबार से जुड़ी थीं। यानी बांग्लादेश में उद्योगों की मुश्किल किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है। बढ़ती लागत और ऊर्जा संकट का असर अलग-अलग तरह के कारखानों पर पड़ रहा है। गैस की कमी ने संकट और बढ़ाया सबसे बड़ी परेशानी ऊर्जा की कमी को लेकर है। अगस्त की शुरुआत में गाजीपुर में गैस का दबाव इतना कम हो गया कि 700 से 800 फैक्ट्रियों में काम रोकना पड़ा या कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजना पड़ा। गैस की कमी से बॉयलर और दूसरी मशीनें पूरी क्षमता से नहीं चल पातीं। इससे उत्पादन घटता है और फैक्ट्रियों के लिए विदेशी खरीदारों के ऑर्डर समय पर पूरा करना मुश्किल हो जाता है। दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं विदेशी खरीदार गैस की कमी से अभी जो फैक्ट्रियां बंद हैं, उनके लिए ज्यादा दिन तक काम रोकना मुश्किल हो सकता है। फैक्ट्री बंद होने के बाद भी कर्मचारियों की तनख्वाह, बैंक का कर्ज और बाकी खर्च देने पड़ते हैं। गैस की जगह डीजल या एलपीजी से काम चलाने पर खर्च और बढ़ जाता है। ऐसे में अगर संकट लंबा चला तो कई फैक्ट्रियों के लिए दोबारा काम शुरू करना मुश्किल हो सकता है। ऊर्जा संकट का असर सिर्फ फैक्ट्रियों में कामकाज पर नहीं पड़ रहा है। इससे बांग्लादेश के लिए विदेशी कंपनियों से कारोबार हासिल करना भी मुश्किल हो रहा है। अगर फैक्ट्रियां समय पर ऑर्डर पूरा नहीं कर पाईं तो विदेशी खरीदार दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं। इससे बांग्लादेश की फैक्ट्रियों की कमाई घटेगी और कर्मचारियों की तनख्वाह, कर्ज और बाकी खर्च संभालना और मुश्किल हो जाएगा। गैस नहीं मिली तो कपड़ा उद्योग पर और संकट बांग्लादेश के निर्यात कारोबार में कपड़ा और तैयार कपड़ों का बड़ा हिस्सा है। इनके लिए धागा बनाने, कपड़े की रंगाई और दूसरे शुरुआती काम करने वाली फैक्ट्रियां जरूरी हैं। अगर इन्हें पर्याप्त गैस नहीं मिली तो आगे तैयार कपड़े बनाने वाली फैक्ट्रियों का काम भी प्रभावित होगा। इसी वजह से उद्योग संगठनों ने इन इकाइयों को गैस सप्लाई में प्राथमिकता देने की मांग की है। उद्योग संगठनों ने सरकार से यह भी कहा है कि फैक्ट्रियों को रोजाना गैस की उपलब्धता और दबाव की जानकारी दी जाए, ताकि वे उसी हिसाब से उत्पादन की तैयारी कर सकें। इसके अलावा गैस संकट से परेशान छोटी और मझोली फैक्ट्रियों को बैंक कर्ज चुकाने में कुछ समय की राहत देने और मजदूरों से जुड़े विवाद जल्द सुलझाने की मांग की गई है। आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि गैस और बिजली का संकट कब तक बना रहता है। अभी कई फैक्ट्रियां कम क्षमता पर चल रही हैं। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे और विदेशी ऑर्डर भी कमजोर रहे, तो आर्थिक दबाव झेल रही कई और फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं। इसका असर सिर्फ रोजगार पर नहीं पड़ेगा। स्थानीय कारोबार और बांग्लादेश की निर्यात कमाई भी प्रभावित हो सकती है।

कौन हैं माया ट्यूडर, CM रेवंत रेड्डी से मुलाकात पर क्‍यों भड़की BJP, क्या भारत विरोधी हैं ट्यूडर?

कौन हैं माया ट्यूडर, CM रेवंत रेड्डी से मुलाकात पर क्‍यों भड़की BJP, क्या भारत विरोधी हैं ट्यूडर?

Maya Tudor

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का यूरोप दौरा विवादों में है। वो भी एक मुलाकात की वजह से। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब सरकार ने उन्‍हें अमेरिका जाने की अनुमति नहीं दी थी। अब यूरोप के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम को लेकर भी भाजपा उन पर भड़क उठी है। इस मुलाकात को लेकर कंट्रोवर्सी शुरू हो गई है।

एंटी इंडिया है माया ट्यूडर : यूनिवर्सिटी में कार्यक्रम के दौरान रेड्डी ने ‘ब्लावत्निक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट’ के फैकल्टी सदस्यों के साथ मुलाकात की। खास बात है कि इसमें राजनीति और पब्लिक पॉलिस पढ़ाने वाली प्रोफेसर माया ट्यूडर भी शामिल थीं। इनकी तस्वीरें सामने आने पर भारत में हंगामा हो गया है। भाजपा ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को घेरना शुरू कर दिया और माया ट्यूडर को ‘एंटी-इंडिया’ बताया है।

क्‍या कहा भाजपा सांसद ने : इस मुलाकात पर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री की यूरोप यात्रा के दौरान की तस्वीरें सामने आने के बाद भाजपा सांसद अरविंद धर्मपुरी ने उन्हें निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि ट्यूडर अपने भारत विरोधी रवैये के लिए जानी जाती है। ऐसे में रेवंत रेड्डी की उनसे मिलना गलत है। उन्‍होंने पूछा कि आखिर इस मुलाकात का क्‍या मतलब है।


भाजपा सांसद ने शेयर की तस्वीर : सोशल मीडिया साइट एक्स पर धर्मपुरी ने लिखा, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ब्लावत्निक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट की प्रोफेसर माया ट्यूडर से मिलिए, जिन्होंने कई भारत-विरोधी लेख लिखे हैं, जिनमें 'भारत का लोकतंत्र क्यों मर रहा है' (Why India’s Democracy Is Dying) भी शामिल है। रेवंत रेड्डी, जो इत्तेफाक से मुख्यमंत्री बने हैं, आज उनसे मिल रहे हैं। इससे पता चलता है कि उनमें जरा भी शर्म नहीं बची है और वे भारत-विरोधी ताकतों के साथ मिल गए हैं।

लेख लिखा था, 'भारत का लोकतंत्र क्यों मर रहा है : बता दें, माया ट्यूडर ने वर्ष 2023 में जर्नल ऑफ डेमोक्रेसी में एक लेख लिखा था। इसका शीर्षक 'भारत का लोकतंत्र क्यों मर रहा है। (Why India’s Democracy Is Dying)' इस लेख की काफी आलोचना की गई थी। इसमें माया ने प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के कार्यकाल के दौरान भारत में लोकतांत्रिक ढांचे का विश्लेषण किया था।

कौन हैं माया ट्यूडर : ऑक्सफोर्ड के ब्लावत्निक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में पॉलिटिक्स और पब्लिक पॉलिसी की प्रोफेसर माया ट्यूडर अपने क्षेत्र का एक जाना माना नाम हैं। उनकी रिसर्च लोकतांत्रिक और असरदार सरकारों के बनने की प्रक्रिया पर केंद्रित है, जिसमें दक्षिण एशिया पर खास ध्यान दिया गया है। वह लगातार दक्षिण एशिया के देशों के ऊपर रिसर्च करती रहती हैं। उन्होंने इसी मुद्दे पर 2013 में एक किताब 'द प्रॉमिस ऑफ पावर: द ओरिजिन्स ऑफ डेमोक्रेसी इन इंडिया एंड ऑटोक्रसी इन पाकिस्तान' लिखी थी। इसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच में आजादी के बाद लोकतंत्र की स्थापना का विश्लेषण किया था। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ब्लावटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में राजनीति और लोक नीति की प्रोफेसर हैं। वह सेंट हिल्डा कॉलेज में फेलो भी हैं और राष्ट्रवाद तथा लोकतंत्र के राजनीतिक विश्लेषण से जुड़े अपने शोध व लेखन कार्यों के लिए जानी जाती हैं। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'वैराइटीज ऑफ नेशनलिज्म' (2023) है, जिसे उन्होंने हैरिस मायलोनास के साथ मिलकर लिखा है।

क्या भारत विरोधी हैं ट्यूडर : माया ट्यूडर लगातार दक्षिण एशियाई देशों के लोकतांत्रिक व्यवस्था पर रिसर्च करती रही हैं। वह अलग-अलग देशों में राष्ट्रवाद और राजनीतिक व्यवस्थाओं पर अध्ययन करती हैं। उन्होंने पाकिस्तान के आर्मी रूल और भारत में सत्ता परिवर्तन को विस्तार से वर्णित किया है। उनके काम में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में तानाशाही, लोकतंत्र और राष्ट्रवाद पर किए गए अध्ययन भी शामिल हैं। उनके ऑक्सफोर्ड प्रोफाइल में राष्ट्रवाद, तानाशाही और लोकतंत्र और हर देश को (एक मजबूत और समावेशी) राष्ट्रवाद की जरूरत क्यों है जैसे विषयों पर रिसर्च का जिक्र है। हालांकि, वह इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार की आलोचना करती हुई नजर आती हैं। इसलिए वह इस समय भारतीय जनता पार्टी के सांसद के निशाने पर हैं।

Shashi Tharoor: ‘जाति-वर्ग से ऊपर उठे कांग्रेस’, शशि थरूर ने CJP के आंदोलन से पार्टी को सीख लेने को कहा

Shashi Tharoor: कांग्रेस लीडरशिप जब OBC तक पहुंचने और जाति-आधारित प्रतिनिधित्व पर अपना ध्यान बढ़ा रही है, तब तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि पार्टी को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से सीख लेनी चाहिए और जाति-वर्ग से ऊपर उठना चाहिए।

News 18 के साथ एक इंटरव्यू में थरूर ने कहा, “मैं कुछ समय से यह बात कह रहा हूं कि हमें जाति, धर्म, पंथ, आदिवासी या किसी खास ग्रुप जैसे सीमित हितों से ऊपर उठने की जरूरत है। और इसके साथ ही, हमें उस क्षेत्र पर भी बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है जिसे हम नजरअंदाज करते रहे हैं – यानी आम भारतीयों, मिडिल क्लास भारतीयों, शहरी भारतीयों और प्रोफेशनल्स से उन मुद्दों पर बात करना जो जाति और धर्म से परे सभी भारतीयों को प्रभावित करते हैं।”

उन्होंने कहा, “चाहे परीक्षाओं का मुद्दा हो, जो हर किसी को प्रभावित करता है, महंगाई और बढ़ती कीमतें हों या शहरों की खराब होती नागरिक सुविधाएं, इन समस्याओं का सामना हर कोई रोज करता है। राहुल गांधी ने सही कहा है कि मिडिल क्लास के लिए शिक्षा अब महंगी होती जा रही है। हमें ऐसे मुद्दों को भी उठाना होगा, जो हर व्यक्ति को प्रभावित करते हैं, चाहे उसका धर्म या जाति कुछ भी हो।”

CJP के विरोध प्रदर्शनों पर थरूर ने News 18 से कहा, “CJP ने जंतर-मंतर पर क्या किया? उन्होंने एक ऐसा मुद्दा उठाया जिसका जाति, धर्म, भाषा, राज्य या पंथ से कोई लेना-देना नहीं था। और यही वजह है कि उन्हें हर तरफ से समर्थन मिला। सभी राजनीतिक पार्टियों को यही सीखने की जरूरत है। मेरा मानना ​​है – और यह मेरी निजी राय है, मैं किसी पार्टी की तरफ से या किसी पार्टी के खिलाफ नहीं बोल रहा – कि यह एक ऐसा सबक है जिसे हम सीख सकते हैं।”

CJI सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद अभिजीत दिपके ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का एक व्यंग्यात्मक आंदोलन शुरू किया था। इस पार्टी ने NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की, जिससे देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए और आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

जब थरूर से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि कांग्रेस को आधिकारिक तौर पर CJP के विरोध प्रदर्शन में शामिल होना चाहिए था, तो उन्होंने कहा, “मैंने वकालत की थी कि हमें इसमें शामिल होना चाहिए। CJP के विरोध प्रदर्शन और सोनम वांगचुक के अनशन ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था।”

थरूर ने News18 से कहा, “मुझे बताया गया था कि कांग्रेस के इसमें शामिल नहीं होने की वजह एक बेहद आपत्तिजनक पत्र था, जिसे CJP के नेतृत्व ने कांग्रेस पार्टी को लिखा था। उस पत्र में कुछ ऐसी बातें कही गई थीं, जिन्हें कांग्रेस ने अपमानजनक माना। इसलिए पार्टी ने खुद को इस प्रदर्शन से अलग रखना बेहतर समझा।”

उन्होंने आगे कहा, “आप इसे समझ सकते हैं, क्योंकि हर संस्था अपने हितों को ध्यान में रखती है। अगर कांग्रेस को लगा कि CJP एक संस्था के तौर पर उसके खिलाफ है या उसके प्रति उसका रवैया विरोधी है, तो कांग्रेस अपना नाम उनके आंदोलन के साथ क्यों जोड़ेगी? शायद यही इसकी वजह थी।”

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अन्नदाता के लिए छेड़ा नया अभियान, सीएम डॉ. मोहन बोले- किसान अपनी फार्मर आईडी जरूर बनवाएं

अन्नदाता के लिए छेड़ा नया अभियान, सीएम डॉ. मोहन बोले- किसान अपनी फार्मर आईडी जरूर बनवाएं

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 22 अगस्त को नई दिल्ली से बरलाम कृषि महोत्सव में वर्चुअली शामिल हुए। महोत्सव का आयोजन शिवपुरी जिले की कृषि उपज मंडी पिपरसमा में किया गया था। इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फार्मर आईडी बनवाने का अभियान शुरू किया गया है। किसानों को अब न कहीं भटकना होगा और न ही लंबी लाइनों में लगना होगा। शासकीय दल खुद किसानों के पास जाकर उनकी फार्मर आईडी बनवाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपील की, कि सभी किसान फार्मर आईडी जरूर बनवाएं। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब खाद के लिए किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। पैसे की कमी हमारे किसी भी किसान भाई के आड़े न आए, इसके लिए हमारी सरकार ने शून्य प्रतिशत ब्याज पर अग्रिम खाद उपलब्ध कराने का संवदेनशील निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि हम किसान के माथे पर चिंता की एक भी लकीर नहीं आने देंगे। शिवपुरी जिले के किसानों की मेहनत से यहां की मूंगफली का डंका पूरे देश में बज रहा है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे सिर्फ पारम्परिक फसलों तक ही सीमित न रहें, बागवानी, डेयरी फार्मिंग, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे आमदनी वाले क्षेत्रों को भी अपनाएं। सरकार हमेशा किसानों के साथ है। हम सब मिलकर शिवपुरी जिले को कृषि का सिरमौर बनाएंगे।

 

ऋण चुकाने की समय सीमा खत्म

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिव की नगरी शिवपुरी जिले में केन-बेतवा-पार्वती-सिंध-महुआ नदियों, एक तरह से जैसे पंचामृत आपके खेतों को मिल रहा है। उन्होंने शहीद तात्या टोपे के बलिदान को भी याद करते हुए कहा कि बलराम जयंती महोत्सव वास्तव में किसानों के स्वाभिमान का एक अद्भुत पर्व है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए सरकार द्वारा कई कल्याणकारी योजना चलाई जा रही हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में मुनाफा मिले। किसानों को जो 31 मार्च तक ऋण की राशि जमा करनी होती थी, अब उससे निजात मिलेगी। अब वह 1 वर्ष के भीतर कभी भी यह लोन चुका सकता है। इसके लिए अब 31 मार्च की समय-सीमा समाप्त कर दी गई है।

 

अधिक प्रभावी है ई-किसान प्रणाली

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ई-विकास प्रणाली को और अधिक प्रभावी, सहज, सरल एवं किसान हितैषी बनाया गया है। ई-विकास 2.0 से किसानों को अपनी आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक प्राप्त करने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि ई-विकास 2.0 में किसान अपनी इच्छानुसार कोई भी एक उर्वरक बिना किसी अनिवार्य संयोजन के खरीद सकेगा। अब किसान खेती-किसानी के अलावा अन्य माध्यमों से भी मुनाफा कमा रहे हैं। होमस्टे की अवधारणा भी धीरे-धीरे  बढ़ रही है। इससे किसानों को लाभ मिलेगा। यहां माधव टाइगर रिजर्व भी है, जहां टाइगर छोड़े थे। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। हम हमारे सभी किसानों की समृद्धि के लिए लगातार काम कर रहे हैं। 

 

राखी का शगुन मिलने से खुश हैं बहनें

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि इसी क्रम में अगले साल जो किसान चना या गन्ने की फसल लगाएंगे, उन्हें इन फसलों के लिए पूरे समय दिन में बिजली दी जाएगी। रात की बिजली का संकट खत्म होगा। इससे सिंचाई के लिए किसानों को रातभर जागने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि किसानों को रात में कई बार करंट लग जाता था, सांप काट लेता था, कई परेशानियां होती थीं, वह सारी कठिनाइयां अब खत्म हो जाएंगी। उन्होंने जिले के सभी किसानों विशेषकर लाड़ली बहनों को आगामी रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लाड़ली बहना योजना की राशि रक्षाबंधन त्यौहार से पूर्व सभी के खातों में भेजी गई है, जिससे हमारी बहनें खुशी-खुशी त्यौहार मना सकें। उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को प्रतिवर्ष 12000 रुपए दिए जा रहे हैं, जिससे वह खाद-बीज जैसी जरूरतों को समय से पूरा कर सकें।