महिला एशिया कप में नकवी और कैद ट्रॉफी सीजन 2 दोहराने की पूरी संभावना

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पिछले साल भारत ने पाकिस्तान को एशिया कप फाइनल में 5 वितेट से शिकस्त देकर खिताब अपने नाम किया था लेकिन ट्रॉफी भारत के हिस्से में नहीं आ पाई थी। सेरेमनी में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और एशियाई क्रिकेट परिषद के प्रमुख मोहसिन नकवी को यह ट्रॉफी भारत को सौंपनी थी लेकिन ऐसा हो नहीं पाया क्योंकि भारतीय खिलाड़ियों ने बिगड़े हुए भूराजनैतिक संबंधो के कारण नकवी से ट्रॉफी लेने से मना कर दिया था। इस बात पर नाराज नकवी ट्रॉफी लेकर ही चल दिए थे और आज भी वह ट्रॉफी दुबई के दफ्तर में रखी हुई है। 

ऐसा एक बार फिर हो सकता है क्योंकि भारत को महिला एशिया कप में भी मोहसिन नकवी से ही ट्रॉफी लेनी होगी।नक़वी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख और अपने देश के गृह मंत्री भी हैं। महिला एशिया कप 28 अगस्त से 13 सितंबर तक खेला जाएगा।भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रखा गया है और लीग चरण का उनका मुकाबला पांच सितंबर को होना है। इसके बाद इन दोनों टीम का मुकाबला फाइनल में हो सकता है और ऐसे में पुरस्कार वितरण का मसला फिर से सुर्खियों में आ सकता है।

अब स्वाभाविक सवाल यह उठता है कि अगर हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली भारतीय टीम महिला एशिया कप जीत जाती है और नक़वी पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान मंच पर मौजूद होते हैं तो फिर आगे क्या होगा?
क्या भारतीय महिला टीम भी सूर्यकुमार यादव और उनके साथियों की तरह नक़वी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर देगी? इस मामले में बीसीसीआई का रुख अभी स्पष्ट नहीं है।

बोर्ड का यह स्पष्ट मत है कि दोनों टीमों के बीच किसी प्रकार की औपचारिक बातचीत नहीं होगी, लेकिन वह पुरस्कार वितरण समारोह के लिए इंतजार करने की नीति अपनाएगा।पिछले साल की तरह विवाद से बचने का एक तरीका यह हो सकता है कि नकवी स्वयं ट्रॉफी प्रदान नहीं करें और एशियाई क्रिकेट परिषद के किसी अन्य अधिकारी को यह सम्मान प्रदान करने दें।

भारतीय पुरुष टीम के नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार करने के बाद इसे एसीसी के कार्यालय में रखा गया है। नकवी ने बाद में कहा था कि भारत एसीसी कार्यालय में आकर उनसे ट्रॉफी ले सकता है।इस गतिरोध को समाप्त करने का भी प्रयास किया गया जिसमें बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने आईसीसी की बैठक के दौरान नकवी से मुलाकात की।

सैकिया ने कहा था कि दोनों पक्षों के बीच गतिरोध समाप्त हो गया है लेकिन उस समय भी ट्रॉफी का मुद्दा नहीं सुलझ पाया था। इसके बाद नक़वी ने कहा कि भारत को उनसे ही ट्रॉफी लेनी होगी।फिलहाल सभी का ध्यान टूर्नामेंट पर केंद्रित है लेकिन अगर भारत चैंपियन बनता है तो यह मामला फिर से गर्मा सकता है।

POCO F9 Pro और F9 Ultra की लॉन्च डेट कंफर्म! 16GB RAM और 5x Optical Zoom के साथ होगी एंट्री

POCO के फैंस काफी समय से कंपनी की F9 सीरीज के लॉन्च का इंतजार कर रहे हैं। अब कंपनी ने आखिरकार पुष्टि कर दी है कि वह 1 सितंबर 2026 को POCO F9 सीरीज को दुनियाभर में लॉन्च करेगी। कंपनी ने यह भी बताया है कि वह POCO F9 Pro और POCO F9 Ultra को लॉन्च करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि ये दोनों फोन Redmi K100 सीरीज के रीब्रांडेड वर्जन हो सकते हैं, जिसे अभी सिर्फ चीन में लॉन्च किया गया है। यहां हम आपको आने वाले इन स्मार्टफोन्स के बारे में अब तक मिली सभी जानकारी बता रहे हैं।

Poco F9 सीरीज 1 सितंबर को होगी लॉन्च

Xiaomi के सब-ब्रांड POCO ने कंफर्म किया है कि Poco F9 Pro और Poco F9 Ultra को ग्लोबल मार्केट में 1 सितंबर को रात 8 बजे GMT (भारत में 2 सितंबर को रात 1:30 बजे) लॉन्च किया जाएगा। खास बात यह है कि कई लीक्स में दावा किया गया है कि कंपनी स्टैंडर्ड Poco F9 को लॉन्च नहीं करेगी।

Poco F9 सीरीज के कलर और स्पेसिफिकेशन्स

टीजर के मुताबिक, Poco F9 सीरीज को White और Dark Cherry कलर ऑप्शन में लॉन्च किया जाएगा, जो Redmi K100 सीरीज जैसा ही है। हैंडसेट के पीछे ‘Sound by Bose’ की ब्रांडिंग दिख रही है, जिससे पता चलता है कि इसकी ऑडियो ट्यूनिंग US कंपनी के साथ मिलकर की गई है।

स्पेसिफिकेशन की बात करें तो, Poco F9 Pro में 185Hz रिफ्रेश रेट वाला 6.59-इंच का QHD+ प्लास्टिक OLED डिस्प्ले होने की उम्मीद है। जबकि F9 Ultra में इससे भी बड़ी 6.85-इंच की स्क्रीन हो सकती है, जिसका रिजोल्यूशन 2608 × 1200 पिक्सल होगा।

दोनों फोन में Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट दिया जा सकता है। इनमें 16GB तक RAM और 512GB तक स्टोरेज भी मिल सकता है।

हालांकि, Pro मॉडल के प्रोसेसर को लेकर कुछ अनिश्चितता है। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि Poco F9 Pro में Snapdragon 8 Elite Gen 5 का एक खास वर्जन (binned version) इस्तेमाल हो सकता है, जिसे Snapdragon 8 Elite Gen 5 V कहा जा रहा है। बताया यह भी जा रहा है कि यही चिप चीन में Redmi K100 Pro में भी इस्तेमाल होगी।

कैमरे की बात करें तो, Poco F9 Pro में पीछे की तरफ ट्रिपल कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है। इसमें OIS के साथ 50MP का मेन कैमरा, 8MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 3x ऑप्टिकल जूम व OIS वाला 50MP टेलीफोटो कैमरा दिया जा सकता है।

वहीं, Poco F9 Ultra में ज़्यादा बेहतर ज़ूम सेटअप मिल सकता है। इसमें Pro मॉडल जैसा ही 50MP का प्राइमरी कैमरा होने की उम्मीद है, साथ ही 50MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 5x ऑप्टिकल ज़ूम को सपोर्ट करने वाला एक और 50MP का टेलीफोटो सेंसर भी हो सकता है।

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एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है…

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Gen Z ka perspective

आजकल लोग सोशल मीडिया के आधार पर ही अपनी धारणाएं बनाने लगे हैं। जबकि इस मंच की सच्चाई यह है कि जिसे धर्म का ज़रा भी ज्ञान नहीं है, वह भी ज्ञानी बना बैठा है; और जिसे राजनीति की रत्ती भर समझ नहीं है, वह भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर अपने प्रवचन दे रहा है। जो न तो पत्रकार हैं, न संत, ज्योतिष, न एक्सपर्ट और न ही डॉक्टर—वे भी इन सभी भूमिकाओं का दावा कर रहे हैं। आइए, इसी विषय और नजरिये पर आधारित यह आलेख पढ़ते हैं:-

 

सोशल मीडिया का छद्म ज्ञान और नजरिये का भ्रम

डिजिटल क्रांति के इस दौर में ज्ञान की परिभाषा ही बदल गई है। सोशल मीडिया एक ऐसा विशाल मंच बन चुका है जहाँ हर व्यक्ति के पास अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार तो है, लेकिन उस राय के पीछे सत्यता और प्रमाणिकता का अभाव तेजी से बढ़ रहा है।

आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया हमारी दिनचर्या ही नहीं, बल्कि हमारी सोच और धारणाओं को संचालित करने वाला सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। लेकिन इस आभासी दुनिया की सबसे चिंताजनक सच्चाई यह है कि यहाँ बिना किसी योग्यता या प्रामाणिकता के हर विषय पर ज्ञान बांटा जा रहा है।

 

विशेषज्ञता का ढोंग: आज चिकित्सा से लेकर कानून और अध्यात्म से लेकर राजनीति तक—हर विषय पर आधे-अधूरे ज्ञान के साथ 'विशेषज्ञ' मौजूद हैं। एक 15-सेकंड की रील या 280 अक्षरों का पोस्ट किसी गहन विषय का सत्य नहीं हो सकता।

 

भ्रामक धारणाएं: जब लोग बिना जांचे-परखे इस छद्म ज्ञान को सच मान लेते हैं, तो वे एक संकीर्ण और गलत नजरिये का शिकार हो जाते हैं।

 

सत्य और सूचना में अंतर: सूचना का भंडार होना 'ज्ञान' नहीं है और किसी की निजी राय 'सत्य' नहीं हो सकती। सच तक पहुँचने के लिए गहराई, अध्ययन और निष्पक्षता की आवश्यकता होती है, जो सोशल मीडिया के शोर में अक्सर खो जाती है।

 

सत्य एक विशाल और अनंत आकाश की तरह है, जबकि हमारा 'नजरिया' उस आकाश को देखने वाली एक छोटी सी खिड़की है। जीवन में हम जो कुछ भी देखते, सुनते या महसूस करते हैं, उसे अक्सर 'परम सत्य' मान लेते हैं। लेकिन वास्तव में, वह केवल हमारा एक दृष्टिकोण या नजरिया होता है। किसी एक नजरिये से सच को पूरी तरह जान पाना असंभव है, क्योंकि नजरिया व्यक्ति की मान्यताओं, प्रभाव, अनुभवों और परिस्थितियों की सीमा में बंधा होता है।

 

हाथी और छह अंधे व्यक्तियों की कथा

नजरिये और सत्य के अंतर को समझने के लिए भारत की एक प्राचीन लोककथा सबसे बेहतरीन उदाहरण है। छह दृष्टिहीन व्यक्तियों ने जब पहली बार एक हाथी को छुआ, तो सबने अपने-अपने अनुभव के आधार पर हाथी को परिभाषित किया। जिसने कान पकड़ा, उसने हाथी को सूप (सूपा) बताया; जिसने पैर छुआ, उसने खंभा कहा; जिसने पूंछ पकड़ी, उसने रस्सी बताया।

 

उन छहों व्यक्तियों का अपना-अपना नजरिया सही था, क्योंकि उन्होंने जो महसूस किया, वही कहा। लेकिन क्या उनमें से किसी का भी नजरिया पूरे 'हाथी' के सच को बयान कर सका? बिल्कुल नहीं। सच यह था कि हाथी उन सभी अनुभवों का एक सम्मिलित रूप था। ठीक इसी तरह, जब हम अपने किसी एक विचार या नजरिये को सच मान लेते हैं, तो हम बाकी के पूरे सत्य को नकार रहे होते हैं।

 

नजरिये की सीमाएं

हमारा नजरिया हमारे अतीत के अनुभवों, परवरिश, प्रभाव, धर्म, संस्कृति और उस क्षण की हमारी मानसिक स्थिति से तय होता है। दो लोग एक ही घटना को पूरी तरह से अलग-अलग तरीके से देख सकते हैं:

 

संख्या 6 और 9 का भ्रम: फर्श पर लिखा एक अंक एक तरफ खड़े व्यक्ति को 6 दिखेगा, तो दूसरी तरफ खड़े व्यक्ति को 9। दोनों अपनी जगह सही हैं, लेकिन मूल सच यह है कि वह फर्श पर उकेरी गई एक तटस्थ (neutral) आकृति है।

 

समय और स्थिति का प्रभाव: एक ही परिस्थिति एक व्यक्ति के लिए आपदा हो सकती है और दूसरे के लिए अवसर।

 

सत्य का वास्तविक स्वरूप

सत्य निरपेक्ष और अखंड होता है, जबकि नजरिया सापेक्ष और सीमित होता है। जब हम यह मान लेते हैं कि “केवल मेरा ही नजरिया सच है”, तो वहीं से अहंकार, विवाद और पूर्वाग्रह का जन्म होता है। दुनिया के तमाम वैचारिक मतभेद, युद्ध और पारिवारिक कलह का मूल कारण यही है कि लोग अपने 'नजरिये' को ही 'सत्य' मान बैठने की भूल कर बैठते हैं।

 

अंत में आज के संदर्भ में: दूसरों की रील्स और पोस्ट्स से अपना नजरिया बनाने के बजाय, तथ्यों की जांच करना, मूल किताब को पढ़ना और विवेक का प्रयोग करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है, क्योंकि वर्तमान में सभी राजनीतिक दल जेन जी का नजरिया बदलने में लगे है। 

8.7 करोड़ युवा ‘NEET’ श्रेणी में दर्ज! जानिए क्यों 15 से 29 साल के युवाओं पर नीति आयोग ने जारी किया रेड अलर्ट

8.7 करोड़ युवा 'NEET' श्रेणी में दर्ज! जानिए क्यों 15 से 29 साल के युवाओं पर नीति आयोग ने जारी किया रेड अलर्ट

Indian youth employment crisis

8.7 crore NEET youth India: भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' (जनसांख्यिकीय लाभांश) यानी युवा आबादी मानी जाती है। लेकिन नीति आयोग (NITI Aayog) की हालिया रिपोर्ट ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047’ ने देश के सामने एक कड़वी सच्चाई रखी है। रिपोर्ट के अनुसार, 15 से 29 वर्ष की आयु के लगभग 8.7 करोड़ भारतीय युवा 'NEET' (Not in Education, Employment, or Training) श्रेणी में हैं—यानी वे न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न नौकरी में हैं और न ही किसी प्रकार का कौशल प्रशिक्षण ले रहे हैं।

यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि भारत के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने पर एक गंभीर सवालिया निशान भी खड़ा करता है। ALSO READ: शिक्षा को लेकर क्यों सड़क पर उतरने को मजबूर है Gen-Alfa 8 साल में 84 हजार स्कूल बंद!

नीति आयोग की रिपोर्ट : मुख्य बिंदु और आंकड़े

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के 78वें दौर के आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट में देश के कार्यबल और शिक्षा परिदृश्य को 5 प्रमुख वर्गों में बांटकर विश्लेषित किया गया है:

  1. स्कूली शिक्षा (School Education)
  2. उच्च शिक्षा (Higher/Tertiary Education)
  3. औपचारिक और अनौपचारिक कार्यबल (Formal & Informal Workforce)
  4. NEET युवा (Youth Not in Education, Employment, or Training)
  5. महिलाएं (Women Workforce)

युवा 'NEET' वर्ग में क्यों जा रहे हैं? (प्रमुख कारण)

रिपोर्ट के मुताबिक, युवाओं के इस वर्ग में धकेले जाने के पीछे सबसे बड़ी वजह आर्थिक तंगी और रोजगार योग्य कौशल (Employability Skills) की कमी है:

  • वित्तीय तंगी और महंगाई : निम्न-आय वाले परिवारों के युवा पहले से ही कॉलेज फीस और पढ़ाई के खर्चों के बोझ तले दबे होते हैं। ऐसे में किसी अतिरिक्त सशुल्क (Paid) स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम का खर्च उठाना उनके लिए लगभग असंभव हो जाता है।
  • कम वेतन वाली नौकरियों की मजबूरी : वित्तीय प्रतिबद्धताओं के कारण स्नातक (Graduation) पूरा करते ही कई युवा परिवार की मदद के लिए किसी भी तरह की कम वेतन वाली असंगठित नौकरी करने को मजबूर हो जाते हैं, जबकि लाखों युवा कोई अवसर न मिलने के कारण सीधे 'NEET' वर्ग में चले जाते हैं।
  • स्नातकों में हुनर की कमी : रिपोर्ट में एक चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है कि केवल 8.25% स्नातकों को ही उनकी योग्यता और डिग्री के अनुसार रोजगार मिल पाता है। पारंपरिक शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद व्यावहारिक ज्ञान और उद्योग-आधारित (Industry-relevant) स्किल न होने से युवाओं की एम्प्लॉयबिलिटी बहुत कम रह जाती है।

 

Indian youth employment crisis

  1.  

अब तक के प्रयास और आगे की राह

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत प्रशिक्षित किया जा चुका है। हालांकि, 8.7 करोड़ युवाओं का NEET वर्ग में होना यह दर्शाता है कि कौशल विकास के प्रयासों की गति और गुणवत्ता दोनों को और बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।
जब तक देश की इस विशाल युवा शक्ति को सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण हुनर और रोजगार के बेहतर अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' का पूरा फायदा उठा पाना एक कठिन चुनौती बना रहेगा।

तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, उत्पीड़न मामले में आत्मसमर्पण से छूट की याचिका खारिज

तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, उत्पीड़न मामले में आत्मसमर्पण से छूट की याचिका खारिज

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सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार तरुण तेजपाल की याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में उन्होंने 2013 के उत्पीड़न मामले में आत्मसमर्पण से छूट मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की है। ALSO READ: राम रहीम को फिर मिली 21 दिन की पैरोल, 7 साल में 17वीं बार आया जेल से बाहर

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने तरुण तेजपाल को 2013 के उत्पीड़न मामले में मिली 10 साल की सजा के लिए 2 हफ्ते के अंदर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। तेजपाल ने इस आधार पर आत्मसमर्पण से छूट मांगी थी कि उनकी अपील पहले सर्वोच्च न्यायालय में सूचीबद्ध और सुनवाई के लिए पेश की जानी चाहिए।

 

तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने तर्क दिया कि न्यायालय के पास उचित मामले में आत्मसमर्पण की आवश्यकता को समाप्त करने और आरोपी के आत्मसमर्पण न करने की स्थिति में भी आपराधिक अपील को सूचीबद्ध करने का अधिकार है।
 

क्या है मामला? 

नवंबर 2013 में गोवा के एक होटल में एक कार्यक्रम के दौरान उनकी एक महिला सहकर्मी ने उन पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया था। इस मामले में तहलका के मामले में दोषी ठहराया था। उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। वर्ष 2021 में गोवा की एक सत्र अदालत ने उन्हें इस मामले से बरी कर दिया था। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने उस फैसले को पलट दिया और अगस्त 2026 में उन्हें इस मामले में बलात्कार (रेप) का दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। ALSO READ: मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के भंवर में खाकी, कटनी के बाद इंदौर में पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज

 

कौन हैं तेजपाल?

तेजपाल का जन्म 15 मार्च 1963 को पंजाब के जालंधर शहर में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना में थे, जिसके चलते उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने का मौका मिला। तेजपाल ने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक (ग्रेजुएट) की पढ़ाई की है। तेजपाल की शादी साल 1985 में हुई थी और उनकी पत्नी का नाम गीता बत्रा है। दोनों कॉलेज में साथ थे। उनकी दो बेटियां हैं, एक का नाम टिया और दूसरी का कारा है।

 

56 साल के तरुण तेजपाल भारत के प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक और उपन्यासकार रहे हैं। उनके पास पत्रकारिता का 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। साल 1980 में 'द इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप में नौकरी करते हुए उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की थी। इसके बाद 'इंडिया-2000' नाम की एक मैगजीन में नौकरी करने के लिए वे नई दिल्ली आ गए। वे चर्चित खोजी समाचार पत्रिका 'तहलका' (Tehelka) के सह-संस्थापक और पूर्व प्रधान संपादक रह चुके हैं।

Flipkart पर ₹69,900 वाला iPhone 16 हुआ सस्ता! मिल रहा आधे से भी कम दाम में, जानें कीमत और ऑफर

Flipkart पर Apple के iPhone 16 की कीमत में बड़ी कटौती की गई है, जिससे यह अभी उपलब्ध सबसे आकर्षक प्रीमियम स्मार्टफोन डील्स में से एक बन गया है। हालांकि, यह हैंडसेट डिस्काउंटेड कीमत पर लिस्टेड है, लेकिन खरीदार एलिजिबल बैंक ऑफर और एक्सचेंज डिस्काउंट का फायदा उठाकर इसकी असल कीमत को और कम कर सकते हैं। मौजूदा ऑफर के अनुसार, एलिजिबिलिटी के आधार पर iPhone 16 को ₹34,817 की प्रभावी कीमत पर खरीदा जा सकता है।

Flipkart पर iPhone 16 की डील

iPhone 16 का 128GB वाला मॉडल अभी Flipkart पर 65,900 रुपये में मिल रहा है, जबकि इसकी असली कीमत 69,900 रुपये थी। यानी फोन पर सीधे 4,000 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है।

इसके अलावा, Flipkart Axis Bank के योग्य कार्ड से पेमेंट करने पर 3,833 रुपये तक का इंस्टेंट डिस्काउंट भी मिल रहा है। इस ऑफर के बाद iPhone 16 की प्रभावी कीमत घटकर 62,067 रुपये हो जाती है।

एक्सचेंज ऑफर से कीमत ₹35,000 से भी कम

अगर आप पुराने iPhone को अपग्रेड करके नया iPhone 16 खरीदना चाहते हैं, तो Flipkart के Exchange ऑफर के जरिए काफी बचत कर सकते हैं। मौजूदा ऑफर के मुताबिक, अच्छी कंडीशन वाले Apple iPhone 13 को एक्सचेंज करने पर 27,250 रुपये तक का एक्सचेंज वैल्यू मिल सकता है।

अगर इस अधिकतम एक्सचेंज वैल्यू के साथ Flipkart Axis Bank कार्ड का डिस्काउंट भी जोड़ दिया जाए, तो iPhone 16 की प्रभावी कीमत घटकर सिर्फ 34,817 रुपये रह जाती है।

हालांकि, ध्यान रखें कि आपको मिलने वाली अंतिम एक्सचेंज वैल्यू फोन की कंडीशन, पिकअप के समय होने वाले वेरिफिकेशन और फोन के सभी फीचर्स व एक्सेसरीज के सही तरीके से काम करने पर निर्भर करेगी।

iPhone 16 की कीमत का पूरा हिसाब

  • ओरिजिनल कीमत: 69,900 रुपये
  • Flipkart पर बिक्री कीमत: 65,900 रुपये
  • इंस्टेंट डिस्काउंट: 4,000 रुपये
  • Flipkart Axis Bank डिस्काउंट: 3,833 रुपये तक
  • बैंक ऑफर के बाद कीमत: 62,067 रुपये
  • Apple iPhone 13 की एक्सचेंज वैल्यू: 27,250 रुपये तक
  • एक्सचेंज के बाद प्रभावी कीमत: 34,817 रुपये

क्या आपको इसे खरीदना चाहिए?

iPhone 16 में Apple का लेटेस्ट जनरेशन चिपसेट, बेहतर कैमरे, Dynamic Island और Apple Intelligence का सपोर्ट मिलता है। ऐसे में पुराने iPhone इस्तेमाल कर रहे लोगों के लिए यह एक अच्छा अपग्रेड हो सकता है। अगर आप Flipkart Axis Bank ऑफर के लिए एलिजिबल हैं और आपके पास एक्सचेंज करने के लिए iPhone 13 है, तो यह डील काफी फायदेमंद हो सकती है। इस ऑफर के साथ iPhone 16 की प्रभावी कीमत 34,817 रुपये तक आ सकती है, जो Apple के इस स्टैंडर्ड iPhone के लिए फिलहाल मिलने वाली कम कीमतों में से एक है।

हालांकि, ध्यान रखें कि एक्सचेंज वैल्यू और बैंक डिस्काउंट आपकी एलिजिबिलिटी पर निर्भर करते हैं और बिना किसी पूर्व सूचना के इनमें बदलाव हो सकता है।

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योगी सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, IIT कानपुर, BHU और रुड़की को सौंपी कमान! यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स का यूं होगा ऑडिट

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सड़क, पुल, सीवरेज और जलापूर्ति परियोजनाओं की क्वालिटीकी जांच देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) संस्थानों के एक्सपर्ट्स करेंगे। सरकार ने इसके लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था में IIT कानपुर, IIT-BHU वाराणसी और IIT रुड़की जैसे प्रमुख संस्थान बड़ी परियोजनाओं की टेक्निकल क्वालिटी की निगरानी करेंगे।

इसका मकसद यह है कि निर्माण में किसी भी तरह की तकनीकी कमी, घटिया सामग्री या सुरक्षा से जुड़ी समस्या का पता परियोजना पूरी होने के बाद नहीं। बल्कि निर्माण के दौरान ही चल जाए। थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) में सड़कें, पुल, सीवरेज सिस्टम और पानी की सप्लाई वाले प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक होगी जांच 

एक्सपर्ट्स हर प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक जांच करेंगे। इसमें उसका डिजाइन, बनाने का तरीका, इस्तेमाल होने वाली सामग्री और जरूरी मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, जैसे सभी कारण शामिल होगा। IIT की टीमें निर्माण के अलग-अलग चरणों की भी निगरानी करेंगी ताकि काम पूरा होने के बाद के बजाय शुरुआती दौर में ही किसी भी समस्या का पता लगाया जा सके।

शुरुआत से अंत तक होगी जांच

IIT के विशेषज्ञ केवल तैयार सड़क या पुल की जांच नहीं करेंगे, बल्कि परियोजना के अलग-अलग चरणों की निगरानी करेंगे। इसका उद्देश्य निर्माण पूरा होने के बाद खामियां मिलने के बजाय उन्हें समय रहते पहचानकर ठीक करना है। इसमें मुख्य रूप से-

  • प्रोजेक्ट के डिजाइन की जांच
  • निर्माण में अपनाई जा रही तकनीक
  • इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री की गुणवत्ता
  • निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन
  • निर्माण की सुरक्षा
  • काम की अलग-अलग स्टेज पर गुणवत्ता की जांच शामिल होगी।

IIT कानपुर को 8 डिवीजन की जिम्मेदारी

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी व्यवस्था के तहत IIT कानपुर को उत्तर प्रदेश के 8 डिवीजन में प्रोजेक्ट की क्वालिटी जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कानपुर, लखनऊ, बांदा, प्रयागराज, अयोध्या, आगरा, झांसी और देवीपाटन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तकनीकी जांच IIT कानपुर की टीम करेगी।

IIT-BHU के जिम्मे ये इलाके

IIT-BHU वाराणसी को भी कई महत्वपूर्ण डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी और मिर्जापुर में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। वहीं IIT रुड़की को सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ और अलीगढ़ समेत पांच डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है।

₹100 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट पर खास नजर

नई व्यवस्था के तहत ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रमुख प्रोजेक्ट जांच के दायरे में आएंगे। टेक्निकल एक्सपर्ट निर्माण की क्वालिटी के साथ-साथ इस्तेमाल की जा रही सामग्री और परियोजना की सुरक्षा का भी परीक्षण करेंगे। सरकार का मानना है कि बाहरी और एक्सपर्ट्स संस्थानों से ऑडिट कराने से निर्माण एजेंसियों पर गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही सरकारी पैसे से तैयार होने वाली बड़ी परियोजनाओं की विश्वसनीयता बेहतर होगी।

‘उन्नाव एक्सप्रेसवे’ हादसे के बाद बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब उन्नाव में ग्रीनफील्ड नेशनल एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद ढहने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे। इसके करीब 12 दिन बाद एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के ढहने की खबर ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

अब निर्माण के दौरान ही पकड़ में आएंगी खामियां

नई TPQA व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसी परियोजना के पूरा होने के बाद सामने आने वाली तकनीकी खामियों को निर्माण के दौरान ही पकड़ा जा सकेगा। सरकार की कोशिश है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट केवल समय और बजट के भीतर पूरे न हों। बल्कि उनकी गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। यानी अब यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट पर सिर्फ सरकारी विभागों की नजर नहीं होगी। बल्कि IIT के टेक्निकल एक्सपर्ट भी निर्माण की क्वालिटी का हिसाब रखेंगे।

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Chandra Grahan 2026: 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर लगेगा चंद्र ग्रहण, जानें इसका समय, कहां दिखेगा और इसके बुरे प्रभाव से बचने के उपाय

Chandra Grahan 2026: अगस्त के महीने के साथ ही सावन का महीना भी अब समापन की ओर बढ़ रहा है। यह महीना धार्मिक महत्व के साथ ही खगोलीय कारणों से भी खास रहा है। इस अगस्त में हरियाली अमावस्या के दिन साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगा था। इसके बाद अब सावन माह की पूर्णिमा तिथि एक और खगोलीय घटना की गवाह बनेगी।

सावन की पूर्णिमा 28 अगस्त को होगी और इसी दिन साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण भी होगा। यह एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चांद का ज्यादातर हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में चला जाएगा। यह पूरी घटना लगभग 5 घंटे 38 मिनट तक चलेगी। साल का अंतिम आंशिक चंद्र ग्रहण लगभग 3 घंटे 18 मिनट तक चलेगा।

भारत में चंद्र ग्रहण 2026 शुरू और खत्म होने का समय

साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण दिन में होगा, इसलिए भारत के ज्यादातर लोग इसे नहीं देख पाएंगे, लेकिन इसके खगोलीय समय को इंडियन स्टैंडर्ड टाइम में बदला जा सकता है। 28 अगस्त 2026 को IST के हिसाब से ग्रहण का शेड्यूल इस तरह है:

पेनमब्रल ग्रहण शुरू : 6:53 AM

पार्शियल लूनर एक्लिप्स शुरू : 8:03 AM

मैक्सिमम एक्लिप्स : 9:42 AM

पार्शियल एक्लिप्स खत्म : 11:21 AM

पेनमब्रल एक्लिप्स खत्म : 12:31 PM

चंद्र ग्रहण 2026 कितने समय तक रहेगा?

ग्रहण तब शुरू होता है जब चांद पृथ्वी की पेनमब्रल शैडो के बिल्कुल किनारे पर आता है, और तब खत्म होता है जब चांद उस शैडो से निकलता है, लगभग साढ़े पांच घंटे बाद – ठीक-ठीक कहें तो पांच घंटे और 38 मिनट।

जो हिस्सा ज्यादा दिखाई देता है वह बहुत छोटा है। चांद IST के हिसाब से सुबह 8.03 am पर पृथ्वी की अम्ब्रा में आना शुरू करेगा और 11.21 am पर अम्ब्रा से बाहर निकलेगा। आंशिक “चंद्र ग्रहण” लगभग 3 घंटे और 18 मिनट तक रहेगा। इसका मुख्य हिस्सा सुबह करीब 9:42 बजे IST पर होगा। इस समय, पृथ्वी की अम्ब्रल शैडो चांद की सतह का लगभग 96.2% हिस्सा ढक लेगी।

क्या यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा?

नहीं। 28 अगस्त को होने वाली यह घटना सिर्फ नाम का आंशिक चंद्र ग्रहण है। चंद्रमा के आकार का बहुत बड़ा भाग गहरी छाया में चला जाएगा, इसलिए यह लगभग पूर्ण ग्रहण जैसा लग सकता है।

अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण कहां दिखेगा?

अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण की सबसे अच्छी दृश्यता उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में होगी। एशिया के कुछ पश्चिमी हिस्सों में भी घटना के कुछ हिस्से देखे जा सकते हैं। दृश्यता इस बात पर निर्भर करती है कि ग्रहण के हर चरण पर चंद्रमा स्थानीय क्षितिज से ऊपर है या नहीं।

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ऐतिहासिक रोशनआरा क्लब की लाइफटाइम मेंबरशिप खोलने जा रहा DDA, जानिए कितनी है इसकी फीस और कौन-कैसे कर सकता है अप्लाई

DDA Roshanara Club Lifetime Membership: दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देशों पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ऐतिहासिक डीडीए रोशनआरा क्लब की लाइफटाइम मेंबरशिप खोलने जा रहा है। कुल 750 सीटों के लिए यह मेंबरशिप स्कीम शुरू की जा रही है, जिसके जरिए दिल्लीवासियों को इस ऐतिहासिक क्लब की वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स, फिटनेस और रिक्रिएशनल सुविधाओं का फायदा उठाने का मौका मिलेगा।

अगर आप भी 100 साल से ज्यादा पुराने और भारतीय क्रिकेट के इतिहास से जुड़े इस क्लब का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो जानिए फीस, योग्यता और ऑनलाइन आवेदन की पूरी प्रक्रिया।

मेंबरशिप कैटेगरी और फीस स्ट्रक्चर

डीडीए की ओर से कुल 750 लाइफटाइम मेंबरशिप दो अलग-अलग श्रेणियों में दी जा रही हैं:

नॉन-गवर्नमेंट कैटेगरी: आम नागरिकों और प्राइवेट सेक्टर के लोगों के लिए कुल 400 सीटें रखी गई हैं। इसके लिए मेंबरशिप चार्ज ₹12.50 लाख + GST तय किया गया है।

गवर्नमेंट / पीएसयू कैटेगरी: सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए 350 सीटें रिजर्व हैं। इसकी फीस ₹4 लाख + GST है।

कब से शुरू होंगे आवेदन और कैसे करें अप्लाई?

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 28 अगस्त 2026 की रात 12:00 बजे से शुरू होगी।आवेदक 27 अक्टूबर 2026 (रात 11:59 बजे) तक अपना फॉर्म और फीस जमा कर सकते हैं। इच्छुक लोग केवल डीडीए के आधिकारिक पोर्टल के जरिए ही अप्लाई कर सकते हैं।

आधिकारिक लिंक: [https://online.dda.org.in/golfcourse/RoshanaraClub/RoshanaraClubHome.aspx](https://online.dda.org.in/golfcourse/RoshanaraClub/RoshanaraClubHome.aspx)

क्लब में मिलेंगी कौन-कौन सी स्पोर्ट्स सुविधाएं?

22 एकड़ में फैले हरे-भरे रोशनआरा क्लब में सदस्यों को इन खेलों और फिटनेस गतिविधियों की सुविधा मिलेगी:

आउटडोर व इनडोर गेम्स: मेन क्रिकेट पिच और प्रैक्टिस पिच, टेनिस, स्क्वॉश, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, पिकलबॉल, बिलियर्ड्स और कार्ड रूम।

फिटनेस व स्विमिंग: स्विमिंग पूल, बच्चों के लिए टॉडलर पूल, मल्टी-जिम, फिटनेस सेंटर और योग क्लासेस।

कोचिंग फैसिलिटी: उभरते खिलाड़ियों के लिए योग्य कोचों द्वारा कोचिंग की सुविधा भी दी जाएगी। साथ ही क्रिकेट ग्राउंड को टूर्नामेंट्स और कॉरपोरेट इवेंट्स के लिए भी बुक किया जा सकेगा।

सोशल और क्लब हाउस सुविधाएं

स्पोर्ट्स के अलावा क्लब हाउस में सदस्यों के मनोरंजन और सोशल गैदरिंग के लिए ये सुविधाएं होंगी:

  • लाउंज, रेस्टोरेंट, कैफे और डाइनिंग एरिया
  • बार और बैंक्वेट सुविधाएं
  • किड्स जोन

क्या है रोशनआरा क्लब का इतिहास?

22 एकड़ का ऐतिहासिक परिसर और 100 साल से भी पुराना यह क्लब भारतीय क्रिकेट के शुरुआती इतिहास से जुड़ा हुआ है। इस क्लब को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के जन्मस्थान के रूप में जाना जाता है। डीडीए ने 29 सितंबर 2023 को इस ऐतिहासिक क्लब का आधिकारिक रूप से अधिग्रहण कर लिया था।

DDA रोशनआरा क्लब मेंबरशिप डिटेल्स

कुल उपलब्ध मेंबरशिप: 750

आम नागरिक फीस: ₹12.50 लाख + GST (400 सीटें)

सरकारी कर्मचारी फीस: ₹4.00 लाख + GST (350 सीटें)

रजिस्ट्रेशन शुरू होने की तिथि: 28 अगस्त 2026

रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि: 27 अक्टूबर 2026

क्लब का कुल क्षेत्रफल: 22 एकड़

दिल्ली के उपराज्यपाल के ‘ईज ऑफ लिविंग’ और एक्टिव लाइफस्टाइल को बढ़ावा देने के विजन के तहत यह कदम उठाया गया है। दिल्ली के 18 स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और 3 गोल्फ कोर्स चलाने वाला DDA अब खेल प्रेमियों को देश के सबसे पुराने और ऐतिहासिक क्लबों में से एक का हिस्सा बनने का यह सुनहरा मौका दे रहा है।