​’भारतम’ में दिखा अतुल्य भारत का वैभव, गाजियाबाद में शास्त्रीय संगीत और लोक नृत्य की बिखरी छटा

​'भारतम' में दिखा अतुल्य भारत का वैभव, गाजियाबाद में शास्त्रीय संगीत और लोक नृत्य की बिखरी छटा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित हिंदी भवन में 'एमपी फाउंडेशन' के तत्वाधान में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘भारतम’ का आयोजन संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय कला, संगीत, नृत्य एवं संस्कृति की समृद्ध परंपरा को एक मंच पर प्रस्तुत करना और अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुन: देशवासियों के हृदय से रूबरू कराना था।

​कार्यक्रम की प्रमुख झलकियां

​कार्यक्रम का उद्घाटन भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एवं अतिविशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित विष्णुकांत चतुर्वेदी तथा आईटीबीपी के डीआईजी अवनीन्द्र कुमार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार' से सम्मानित डॉ. रिंदाना रहस्या एवं डॉ. अविनाश कुमार ने अपनी सुरीली तानों से शास्त्रीय गायन की अमिट छाप छोड़ी। प्रसिद्ध कलाकार ध्रुव बेदी ने अपनी सितार की मधुर धुनों से पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। ​इसके साथ ही राकेश साईं बाबू के कुशल निर्देशन में भारत की विभिन्न शास्त्रीय नृत्य शैलियों की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं, जिसने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।

​सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश

​इस आयोजन के माध्यम से भारतीय कला व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने का सशक्त संदेश दिया गया। एमपी फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या की गाजियाबाद के कला एवं संस्कृति प्रेमियों तथा गणमान्य नागरिकों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।

 

​एमपी फाउंडेशन की अध्यक्ष नूपुर श्रीवास्तव ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी दर्शकों, मुख्य अतिथियों एवं विशिष्ट अतिथियों का सहृदय आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था आगे भी 'अखंड भारत' की सांस्कृतिक सभ्यता पर आधारित ऐसे भव्य आयोजनों का आयोजन देशभर में समय-समय पर करती रहेगी।

पावर सेक्टर में 2030 के बाद SCADA इंपोर्ट बंद होगा, देश में बनाने की तैयारी; इन स्टॉक्स पर रखें नजर

सरकार ने पावर सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले SCADA सिस्टम का आयात 2030 के बाद बंद करने का फैसला किया है। लक्ष्य 2028-29 तक इसका स्वदेशी विकल्प तैयार करना है। अभी इन सिस्टम में लोकल कंटेंट 20% से भी कम है। सरकार इसे बढ़ाना चाहती है।

आप SCADA को पावर ग्रिड का कंट्रोल सिस्टम समझ सकते हैं। इससे पावर प्लांट, सब-स्टेशन और ग्रिड की रियल टाइम निगरानी होती है। जरूरत पड़ने पर कई इक्विपमेंट को दूर से कंट्रोल भी किया जा सकता है।

स्वदेशीकरण क्यों जरूरी हुआ?

यह पूरा मामला सिर्फ मेक इन इंडिया तक सीमित नहीं है। इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर सिक्योरिटी भी बड़ी वजह है। अभी SCADA के कई अहम सॉफ्टवेयर और कंपोनेंट विदेशों से आते हैं। ऐसे में अपडेट, तकनीकी मदद और साइबर सिक्योरिटी सपोर्ट के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता रहती है।

ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान यह चिंता और बढ़ी। पावर मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मई 2025 में 8-10 दिनों के दौरान भारत के पावर सिस्टम पर करीब 2 लाख साइबर अटैक की कोशिशें हुई थीं। ऐसे में सरकार चाहती है कि देश के पावर ग्रिड को चलाने वाली अहम टेक्नोलॉजी पर भारत का अपना नियंत्रण हो।

2028-29 तक तैयार होगा स्वदेशी सिस्टम

CEA ने SCADA के स्वदेशीकरण के लिए रोडमैप तैयार किया है। इसमें 38 सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और 25 हार्डवेयर कंपोनेंट शामिल हैं।

सरकार National SCADA Mission या एक स्पेशल वर्किंग ग्रुप बनाने पर भी विचार कर रही है। इसमें Power Grid, GRID-India और घरेलू टेक्नोलॉजी कंपनियों को साथ लाया जा सकता है।

किन स्टॉक्स पर नजर रखें?

शेयर बाजार में इस थीम का सबसे सीधा नाम Power Grid है। प्रस्तावित मॉडल में कंपनी का नाम सीधे आया है। उसके पास ग्रिड ऑटोमेशन और SCADA का अनुभव भी है।

इसके अलावा Siemens, Hitachi Energy India, GE Vernova T&D और ABB India जैसी कंपनियां भी ग्रिड ऑटोमेशन और SCADA के कारोबार में हैं। स्वदेशी सिस्टम के विकास और पुराने सिस्टम के अपग्रेड से इन्हें अवसर मिल सकते हैं। TCS जैसी IT कंपनियों के लिए भी सॉफ्टवेयर, साइबर सिक्योरिटी और सिस्टम इंटीग्रेशन का मौका बन सकता है।

कंपनीसंभावित फायदा
Power Grid
SCADA, ग्रिड ऑटोमेशन और इंटीग्रेशन

Siemens
SCADA और एनर्जी मैनेजमेंट

Hitachi Energy India
ग्रिड ऑटोमेशन और SCADA

GE Vernova T&D Indiaट्रांसमिशन और ग्रिड ऑटोमेशन
ABB Indiaपावर ऑटोमेशन और डिजिटल ग्रिड
TCSसॉफ्टवेयर, साइबर सिक्योरिटी और इंटीग्रेशन

निवेशकों के लिए क्या अहम?

अभी इसे सीधे खरीदने का संकेत मानना ठीक नहीं है। असली फायदा तब साफ होगा जब सरकार कंपनियों का चयन करेगी और SCADA के अलग-अलग हिस्सों के लिए ऑर्डर जारी होंगे। फिलहाल Power Grid समेत SCADA, ग्रिड ऑटोमेशन और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी कंपनियों पर नजर रखी जा सकती है।

सीधी बात है। सरकार अब पावर ग्रिड की अहम टेक्नोलॉजी पर विदेशी निर्भरता घटाना चाहती है। Operation Sindoor के दौरान सामने आए साइबर खतरे ने इस जरूरत को और गंभीर बना दिया। इससे आने वाले वर्षों में पावर और टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए बड़ा घरेलू बाजार बन सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

उषा देवी ने किराने की दुकान से बदली अपनी जिंदगी, 130 महिलाओं को भी दिखाई राह

उषा देवी ने किराने की दुकान से बदली अपनी जिंदगी, 130 महिलाओं को भी दिखाई राह

Usha Devi success story: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हजारों महिलाएं आज स्वरोजगार से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। गोरखपुर के चरगांवा ब्लॉक के नाहरपुर गांव की रहने वाली उषा देवी की कहानी भी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है, जिन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि गांव की सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गईं।

पड़ोसी गांव की महिलाओं से मिली प्रेरणा

उषा देवी बताती हैं कि करीब चार वर्ष पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। घर के खर्चों को पूरा करने में कठिनाई होती थी और आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। इसी दौरान उन्हें पड़ोसी गांव की महिलाओं से स्वयं सहायता समूह के बारे में जानकारी मिली। उन महिलाओं ने उषा देवी को समूह से जुड़ने और अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ने के लिए प्रेरित किया। उषा देवी ने इस अवसर को अपने जीवन में बदलाव लाने का माध्यम बनाया और स्वयं सहायता समूह से जुड़ गईं। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, बैंकिंग और स्वरोजगार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, जिसने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम किया।

1.50 लाख रुपए के ऋण से मजबूत हुआ कारोबार

उषा देवी बताती हैं कि जुलाई 2022 में उन्हें स्वयं सहायता समूह के माध्यम से लगभग 1.50 लाख रुपए का ऋण प्राप्त हुआ। यह आर्थिक सहायता उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस राशि की मदद से उन्होंने अपनी किराने की दुकान को और मजबूत किया तथा व्यवसाय को विस्तार दिया। आज उनकी दुकान गांव के लोगों की जरूरतों को पूरा कर रही है और परिवार के लिए नियमित आय का स्रोत बन चुकी है। उषा देवी पिछले चार वर्षों से अपनी दुकान का सफल संचालन कर रही हैं। उनकी मेहनत और लगन ने परिवार की आर्थिक स्थिति को पहले की तुलना में काफी बेहतर बना दिया है।

130 महिलाओं को मिला मंच, गांव में बढ़ रही आत्मनिर्भरता की ताकत

उषा देवी वर्तमान में समूह सखी के रूप में भी कार्य कर रही हैं। उनके नेतृत्व में कुल 9 स्वयं सहायता समूह संचालित हो रहे हैं. इनसे लगभग 130 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न प्रकार के स्वरोजगार कार्य कर रही हैं। कोई बकरी पालन कर रही है, कोई गाय पालन, कोई मुर्गी पालन, तो कोई सिलाई, कढ़ाई और छोटे व्यापार के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही है। स्वयं सहायता समूहों ने गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें समाज में नई पहचान भी दिलाई है।

योगी सरकार की योजनाओं ने बढ़ाया महिलाओं का आत्मविश्वास

उषा देवी का कहना है कि स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाओं ने महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी दिया है। पहले जो महिलाएं घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, वे आज अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनका मानना है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं। स्वयं सहायता समूहों ने गांव की महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया है।

ग्रामीण महिलाओं को नई दिशा दे रहा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। मिशन के तहत महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर बचत, ऋण, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। गोरखपुर की उषा देवी की सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सरकार की योजनाएं जब सही लाभार्थियों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल आर्थिक सहायता नहीं देतीं बल्कि जीवन बदलने का माध्यम बनती हैं। आज उषा देवी न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने साथ सैकड़ों महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ा रही हैं।

बिहार से गुजरात के लिए एक और ट्रेन, 26 अगस्त से दौड़ेगी नई अमृत भारत एक्सप्रेस, जानिए इसका रूट, स्टॉपेज और टाइमिंग

Ahmedabad-Bhagalpur Amrit Bharat Express: भारतीय रेलवे भागलपुर और अहमदाबाद के बीच एक नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन शुरू करने जा रहा है। इससे बिहार और गुजरात के बीच रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। ईस्टर्न रेलवे के मुताबिक, नई ट्रेन से यात्रियों की बढ़ती मांग पूरी होगी और देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा।

ईस्टर्न रेलवे ने कहा, “भागलपुर को ‘भारत की सिल्क सिटी’ के नाम से जाना जाता है और यह बिहार का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। नई ट्रेन से भागलपुर की गुजरात के बड़े औद्योगिक और आर्थिक केंद्र अहमदाबाद से रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी।”

बता दें कि भारतीय रेलवे ने मौजूदा 09447/09448 अहमदाबाद-पटना-अहमदाबाद क्लोन स्पेशल ट्रेन को अब नियमित ट्रेन के तौर पर चलाने का फैसला किया है। इसे 19423/19424 अहमदाबाद-भागलपुर-अहमदाबाद साप्ताहिक अमृत भारत एक्सप्रेस के रूप में चलाया जाएगा।

कल से शुरू होगी बिहार और अहमदाबाद के बीच ट्रेन

इसका परिचालन अहमदाबाद से 26 अगस्त, 2026 से प्रत्येक बुधवार को तथा भागलपुर से 28 अगस्त, 2026 से प्रत्येक शुक्रवार को किया जायेगा।

इस गाड़ी में LSLRD के 2, पेट्रीकार का 1, जनरल सेकेंड क्लास के 11 तथा स्लीपर क्लास के 08 कोचों सहित कुल 22 कोच लगाये जायेंगे।

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस: दूरी और सफर का समय

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस पूरी यात्रा लगभग 36 घंटे 10 मिनट में तय करेगी। इसमें जनरल अनरिजर्व्ड और स्लीपर क्लास के डिब्बे होंगे। ट्रेन 110 से 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी।

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस: रूट, कितनी बार चलेगी और कहां रुकेगी?

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस हफ्ते में एक दिन चलेगी। रास्ते में यह कई प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी। इनमें आनंद, छायापुरी, गोधरा, दाहोद, रतलाम, भवानी मंडी, रामगंज मंडी, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, हिंडौन सिटी, बयाना, ईदगाह आगरा, टूंडला, गोविंदपुरी, सुबेदारगंज, पं. दीन दयाल उपाध्याय, बक्सर, आरा, दानापुर, पटना, बख्तियारपुर, मोकामा, किऊल, अभयपुर, जमालपुर और सुल्तानगंज शामिल हैं।

गाड़ी नंबर 19423 अहमदाबाद-भागलपुर अमृत भारत एक्सप्रेस का शेड्यूल

ट्रेन नंबर 19423 अहमदाबाद-भागलपुर वीकली अमृत भारत एक्सप्रेस 26 अगस्त, 2026 से हर बुधवार शाम 6:30 बजे अहमदाबाद से रवाना होगी और यह गुरूवार को 21.13 बजे डीडीयू, 22.30 बजे बक्सर, 23.15 बजे आरा, 23.50 बजे दानापुर, शुक्रवार को 00.43 बजे पटना स्टेशन, 01.25 बजे बख्तियारपुर, 02.08 बजे मोकामा, 03.30 बजे किउल, 04.01 बजे अभयपुर, 04.30 बजे जमालपुर, 05.13 बजे सुलतानगंज रूकते हुए 06.40 बजे भागलपुर पहुंचेगी।

गाड़ी नंबर 19424 भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस का शेड्यूल

वापसी की दिशा में, ट्रेन नंबर 19424 भागलपुर-अहमदाबाद वीकली अमृत भारत एक्सप्रेस 28 अगस्त, 2026 से हर शुक्रवार शाम 4:45 बजे भागलपुर से रवाना होगी और यह 17.03 बजे सुलतानगंज, 17.48 बजे 18.13 बजे अभयपुर, 19.15 बजे किउल, 19.56 बजे मोकामा, 20.30 बजे बख्तियारपुर, 21.58 बजे पटना स्टेशन 22.21 बजे दानापुर, 22.53 बजे आरा, 23.41 बजे बक्सर, शनिवार को 02.53 बजे डीडीयू सहित अन्य स्टेशनों पर रूकते हुए रविवार को 05.25 बजे अहमदाबाद पहुंचेगी।

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मिशन रोजगार के तहत 3572 युवाओं को नियुक्ति, योगी सरकार के पारदर्शी मॉडल की सराहना

मिशन रोजगार के तहत 3572 युवाओं को नियुक्ति, योगी सरकार के पारदर्शी मॉडल की सराहना

UP Mission Rozgar

UP Mission Rozgar

UP Mission Rozgar: मिशन रोजगार के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को 3572 युवाओं को बड़ी सौगात दी। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से कृषि विभाग में नवचयनित 3446 प्राविधिक सहायकों (ग्रुप-सी) और 126 मंडी सचिवों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। नियुक्ति पत्र पाकर अभ्यर्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। चयनित युवाओं ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्ध तरीके से नियुक्ति पूरी कराने के लिए योगी सरकार की जमकर सराहना की।

सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में बेहतर काम कर रही

अम्बेडकर नगर निवासी साधना देवी का चयन कृषि विभाग में प्राविधिक सहायक पद पर हुआ है और उन्हें अयोध्या जिले में तैनाती मिली है। उन्होंने नियुक्ति वितरण कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में बेहतर काम कर रही है। मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना उनके लिए खुशी और गर्व का क्षण है। 

दो महीने के भीतर नियुक्ति पत्र मिलना सरकार की तेजी और कार्यप्रणाली को दर्शाता 

बस्ती निवासी महिपाल सिंह का चयन कृषि प्राविधिक सहायक पद पर हुआ है और उनकी पोस्टिंग बाराबंकी में हुई है। महिपाल ने वर्तमान सरकार में चयन प्रक्रिया पहले की अपेक्षा अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हुई है। उन्होंने कहा कि 23 जून को परिणाम आने के करीब दो महीने के भीतर नियुक्ति पत्र मिलना सरकार की तेजी और कार्यप्रणाली को दर्शाता है। 

भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में बेहतर प्रयास

रायबरेली निवासी राणा प्रताप सिंह का चयन कृषि प्राविधिक सहायक पद पर हुआ है और उनकी नियुक्ति अमेठी में हुई है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई। वर्तमान सरकार में पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में बेहतर प्रयास हो रहे हैं। मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना उनके लिए गौरव का विषय है।

आरक्षण नियमों का हुआ पूरी तरह पालन

बाराबंकी की महिमा मौर्या का चयन मंडी सचिव पद पर हुआ है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष बताते हुए कहा कि आरक्षण के नियमों का पूरी तरह पालन किया गया। महिमा ने कहा कि सीटों में किसी तरह की हेरफेर नहीं हुई और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर नियमानुसार चयन हुआ। वहीं प्राविधिक सहायक पद पर चयनित ज्ञानवी तिवारी ने योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति की प्रशंसा करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही और महिलाओं को भी बड़ी संख्या में अवसर मिल रहे हैं। निष्पक्ष भर्ती से युवाओं में सरकार के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है।

नई जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएंगी

रामपुर की खुशनुमा का चयन मंडी सचिव ग्रेड-2 पद पर हुआ है। खुशनुमा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का काम हुआ है। नियुक्तियों की पारदर्शिता और महिला सशक्तीकरण के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की। सीएम के संबोधन में कही गई बातों को अपने कार्यक्षेत्र में धरातल पर उतारने का पूरा प्रयास करेंगी और नई जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएंगी।

योगी सरकार की सराहना, युवाओं से मेहनत की अपील

प्राविधिक सहायक (ग्रुप-सी) पद पर चयनित पवनेश कुमार ने योगी सरकार की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को प्राथमिकता दी जा रही है। योग्य युवाओं को बिना भेदभाव अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियुक्ति मिलना उनके लिए गौरव और खुशी का क्षण है। पवनेश ने युवाओं से अपील की कि वे लक्ष्य तय कर पूरी मेहनत और ईमानदारी से तैयारी करें।

 

तनाव के बावजूद यूएस आर्मी का प्लेन रूस में लैंड:इस पर क्या है या कौन सवार अभी रहस्य, मुख्य मिलिट्री बेस से उड़ान भरी थी

अमेरिका और रूस के बीच तनाव के बीच अमेरिकी वायुसेना का एक बड़ा मिलिट्री प्लेन मंगलवार को मॉस्को में उतरा। C-17A ग्लोबमास्टर III की इस लैंडिंग ने इसलिए ध्यान खींचा, क्योंकि रूस की राजधानी में किसी अमेरिकी सैन्य प्लेन का पहुंचना बेहद असामान्य है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इस प्लेन को रूस क्यों भेजा गया? फ्लाइट-ट्रैकिंग मॉनिटर के मुताबिक, प्लेन ने मॉस्को के समय के अनुसार सुबह करीब 8:50 बजे लातविया की राजधानी रीगा से उड़ान भरी और लगभग 74 मिनट बाद मॉस्को पहुंचा। इस उड़ान की एक और खास बात यह रही कि प्लेन रूस के हवाई क्षेत्र से होकर मॉस्को पहुंचा। किसी अमेरिकी सैन्य प्लेन को इस रास्ते से उड़ान भरने के लिए रूसी अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होती है। प्लेन के मिशन पर अब भी सस्पेंस रिकॉर्ड के मुताबिक, यही प्लेन 23 अगस्त को वॉशिंगटन डीसी के पास जॉइंट बेस एंड्रयूज से रीगा पहुंचा था। यह वही अमेरिकी सैन्य अड्डा है जहां राष्ट्रपति के विमानों का बेड़ा रहता है, जिसमें एयर फोर्स वन भी शामिल है। अमेरिका और रूस दोनों ने अब तक यह नहीं बताया कि प्लेन को मॉस्को क्यों भेजा गया था। प्लेन में कौन था और क्या सामान था, इसकी जानकारी भी सामने नहीं आई है। मॉस्को में अमेरिकी सैन्य प्लेन की असामान्य लैंडिंग के बाद प्लेन पर नजर रखने वाले लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच कई कयास लगाए जाने लगे। कुछ लोगों ने इसे कैदियों की अदला-बदली, यूक्रेन युद्ध को लेकर किसी गुप्त बातचीत या अमेरिकी दूतावास से जुड़े काम से जोड़कर देखा। हालांकि, इनमें से किसी भी दावे की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अमेरिकी C-17 को मॉस्को भेजने के पीछे वजह क्या थी? C-17 ग्लोबमास्टर- टैंक से सैनिकों तक ले जाने में सक्षम C-17A ग्लोबमास्टर III अमेरिकी वायुसेना का बहुत बड़ा सामान ढोने वाला सैन्य प्लेन है। इसका इस्तेमाल सैनिकों, सैन्य गाड़ियों और भारी सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए किया जाता है। इस प्लेन को बोइंग ने बनाया है। इसकी लंबाई करीब 174 फीट और दोनों पंखों की चौड़ाई करीब 170 फीट है। यह प्लेन करीब 1,70,900 पाउंड यानी लगभग 77 टन वजन ले जा सकता है। इसमें एक साथ 102 पूरी तरह तैयार पैराट्रूपर्स या करीब 69 टन वजन वाला M1 अब्राम्स टैंक ले जाया जा सकता है। इसकी उड़ने की सामान्य रफ्तार करीब 518 मील प्रति घंटा है। ज्यादा से ज्यादा वजन के साथ यह बिना दोबारा ईंधन लिए करीब 2,760 मील तक उड़ सकता है। हवा में ही ईंधन भरने की सुविधा मिलने पर यह इससे कहीं ज्यादा दूरी तय कर सकता है। इतना बड़ा प्लेन होने के बावजूद C-17 करीब 3,500 फीट लंबी रनवे से भी उड़ान भर सकता है और उतर सकता है। इसकी एक खासियत यह भी है कि यह अपनी ताकत से पीछे की ओर भी चल सकता है। अमेरिकी वायुसेना इसका इस्तेमाल कहां करती है? C-17 का काम सिर्फ सैनिकों और हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना नहीं है। अमेरिकी वायुसेना इसका इस्तेमाल सैनिकों और सामान को पहुंचाने, हवा से सामान गिराने, घायल लोगों को बाहर निकालने और जरूरत के समय मदद पहुंचाने के लिए भी करती है। यह कोई लड़ाकू प्लेन या बम गिराने वाला प्लेन नहीं है। इसका मुख्य काम भारी सामान और सैन्य उपकरणों को जल्दी एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना है। प्लेन में क्या था, अभी पता नहीं मॉस्को जाने वाला यह प्लेन RCH4555 नाम से उड़ रहा था। सार्वजनिक फ्लाइट जानकारी से यह पता चलता है कि प्लेन कहां से चला और किस रास्ते से मॉस्को पहुंचा। लेकिन प्लेन में कौन था और उसके अंदर क्या सामान था, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। यही वजह है कि रूस और अमेरिका के बीच तनाव के इस दौर में इस उड़ान ने इतना ध्यान खींचा है। फिलहाल कैदियों की अदला-बदली, रूस-अमेरिका के बीच किसी खास बातचीत या अमेरिकी दूतावास से जुड़े काम जैसी बातें सिर्फ अंदाजे हैं। इनमें से किसी की भी पुष्टि नहीं हुई है। जब तक अमेरिका या रूस की तरफ से कोई जानकारी नहीं आती, तब तक यह साफ नहीं होगा कि अमेरिकी C-17 प्लेन को अचानक मॉस्को भेजने की असली वजह क्या थी।

योगी सरकार आयुष्मान योजना में दिशानिर्देशों को लेकर सख्त, उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई

योगी सरकार आयुष्मान योजना में दिशानिर्देशों को लेकर सख्त, उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई

Ayushman Bharat Yojana UP: योगी सरकार ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जुड़े सभी अस्पतालों को योजना के नियमों और आपत्तिजनक कार्यप्रणाली विरोधी दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य रूप से करने के सख्त निर्देश दिये हैं ताकि लाभार्थियों को बेहतर और पारदर्शी इलाज मिले। ऐसे में सीएम योगी के निर्देश पर स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) अस्पतालों को लगातार इन नियमों की जानकारी दे रही है। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने बताया कि इसके बाद भी नियमों का उल्लंघ करने, लाभार्थी से अवैध वसूली, बिना इलाज के बिल लगाना, गलत लाभार्थी के नाम पर इलाज दर्ज करना, अनावश्यक इलाज या तय मानकों का पालन नहीं करने पर अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

साचीज की वेबसाइट पर देखें दिशानिर्देश 

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों को आपत्तिजनक कार्यप्रणाली विरोधी दिशानिर्देशों की जानकारी दी जा रही है। योगी सरकार का प्रयास है कि अस्पताल पहले से ही नियमों को समझें और अपने स्तर पर कमियों को दूर करें, ताकि मरीजों को परेशानी न हो और योजना में किसी तरह की गड़बड़ी न हो। उन्होंने बताया कि सभी सूचीबद्ध अस्पताल आपत्तिजनक कार्यप्रणाली संबंधी दिशानिर्देश साचीज की आधिकारिक वेबसाइट https://sachis.in/ पर देख और डाउनलोड कर सकते हैं। विभाग की ओर से अस्पतालों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, बिलिंग कर्मचारियों और प्रशासनिक कर्मचारियों को भी इन नियमों की जानकारी दें।

नियम तोड़ने पर पहली, दूसरी और तीसरी बार अलग कार्रवाई

लाभार्थी से अवैध नकद भुगतान : पहली बार नियम तोड़ने पर राशि का पूर्ण रिफंड तथा अवैध भुगतान की राशि का पांच गुना दंड, दोबारा उल्लंघन पर क्लेम निरस्तीकरण एवं चिकित्सालय का निलंबन तथा तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की जा सकती है।

 

बिना सेवा दिए बिलिंग : पहली बार उल्लंघन पर क्लेम निरस्त करने के साथ क्लेम राशि के पांच गुना तक दंड, दूसरी बार उल्लंघन पर दस गुना तक दंड एवं निलंबन तथा तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान है।

 

अपकोडिंग, अनबंडलिंग एवं अनावश्यक प्रक्रियाएं : पहली बार उल्लंघन पर अतिरिक्त क्लेम राशि के दस गुना तक तथा दूसरी बार उल्लंघन पर बीस गुना तक दंड एवं निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान है।

 

गलत लाभार्थी पहचान : पहली बार उल्लंघन पर पांच गुना तक तथा दूसरी बार उल्लंघन पर दस गुना तक दंड एवं निलंबन की कार्रवाई हो सकती है। तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की जा सकती है।

 

गुणवत्ता एवं सेवा मानकों में कमी : न्यूनतम एम्पैनलमेंट, गुणवत्ता एवं निर्धारित सेवा मानकों में कमी पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्धारित अवधि में सुधार एवं अनुपालन का अवसर दिया जाएगा। निर्धारित अवधि में सुधार न होने पर क्लेम निरस्तीकरण, तीन गुना तक दंड एवं निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी बार उल्लंघन पर संबंधित स्वीकृत क्लेम्स पर पांच गुना तक दंड एवं सत्यापन तक निलंबन तथा तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट एवं संबंधित स्वीकृत क्लेम्स पर पांच गुना तक दंड का प्रावधान है।

चिकित्सालयों के लिए महत्वपूर्ण संदेश 

साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने सभी सूचीबद्ध चिकित्सालयों से आपत्तिजनक कार्यप्रणाली विरोधी दिशानिर्देशों को केवल औपचारिक निर्देश के रूप में न लेते हुए, इसे अपने दैनिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक चिकित्सालय अपने स्तर पर यह सुनिश्चित करें कि चिकित्सकीय, नर्सिंग, बिलिंग एवं प्रशासनिक स्टाफ को योजना के सभी नियमों और दंडात्मक प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी हो।

 

चिकित्सालयों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से अपने क्लेम, उपचार प्रक्रिया, दस्तावेजीकरण एवं लाभार्थी सेवाओं की आंतरिक समीक्षा करें और किसी भी संभावित अनियमितता को समय रहते ठीक करें। लाभार्थी से अवैध राशि लेना, बिना उपचार के क्लेम करना, अनावश्यक उपचार या प्रक्रियाएं करना, गलत लाभार्थी के नाम पर उपचार दर्ज करना अथवा योजना के मानकों का उल्लंघन न केवल योजना के नियमों के विरुद्ध है, बल्कि इसके लिए निर्धारित दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

कृष्णा और सुथार के 3-3 विकेट, सोनल लड़ रहे श्रीलंका को फॉलोऑन से बचाने के लिए

INDvsSL प्रसिद्ध कृष्णा और मानव सुथार के 3-3 विकेट के कारण भारत ने 83.4 ओवरों में श्रीलंका के 265 रनों पर 8 विकेट गंवा दिए हैं। इसके बाद बारिश के कारण मैच को रोकना पड़ा। अंतिम सत्र में श्रीलंका ने काहिरा का विकेट खोया और लाहिरू 8 रन और सोनल दिनूशा 85 रन पर क्रीज पर खड़े हुए हैं। श्रीलंका अभी भारत से 239 रन पीछे है और फॉलोऑन टालने के लिए मेजबान को 39 रन चाहिए।

श्रीलंका ने सुबह दो विकेट पर आठ रन से आगे खेलना शुरू किया और पहले सत्र में 122 रन जोड़े। बारिश के कारण देर से शुरू हुए दूसरे सत्र में उसने 86 रन जोड़े और इस बीच तीन विकेट गंवाए।मानव सुथार की सटीक गेंदबाजी से भारत ने लंच के बाद श्रीलंका को शुरुआती झटका दिया। सुथार की गेंद धनंजय डी सिल्वा के बल्ले का किनारा देकर पहली स्लिप में केएल राहुल के सुरक्षित हाथों में चली गई।

लेकिन श्रीलंका को सबसे बड़ा झटका पासिंदु सूरियाबंडारा (80) के आउट होने से लगा, जिन्होंने धैर्य के साथ बल्लेबाजी की। रविंद्र जडेजा ने उन्हें चकमा देकर बोल्ड किया।इसके दो रन बाद मोहम्मद सिराज ने लेग साइड से डाली गई एक साधारण सी गेंद पर निरोशन डिकवेला को आउट कर दिया। विकेटकीपर ध्रुव जुरेल ने उनका कैच लिया।

पहले सत्र के खेल के दौरान ऋषभ पंत की जगह क्षेत्ररक्षण करने आए सरफराज खान, मोहम्मद सिराज और श्रीलंकाई बल्लेबाजों के बीच हुई जुबानी जंग से यह सत्र और भी रोमांचक हो गया।प्रसिद्ध कृष्णा ने दिन के सातवें ओवर में ही अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे कामिल मिसारा (19) को विकेट के पीछे कैच करा दिया। प्रसिद्ध की तेजी से उठती गेंद को मिसारा नहीं समझ पाए। गेंद उनके बल्ले को चूमकर विकेटकीपर जुरेल के हाथों में चली गई।

लेकिन सूरियाबंडारा और कामिंदु मेंडिस (32) ने भारत को लगभग दो घंटे तक विकेट से महरूम रखा। इन दोनों बल्लेबाजों ने मानव सुथार और अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे सारांश जैन को हावी नहीं होने दिया।ऑफ स्पिनर जैन ने कुछ उछाल और टर्न हासिल किया लेकिन श्रीलंका के बल्लेबाजों को परेशानी में नहीं डाल सके। सूरियाबंडारा और मेंडिस ने चौथे विकेट के लिए 87 रन जोड़े।

इसमें अपना दूसरा टेस्ट खेल रहे सूरियाबंडारा का योगदान महत्वपूर्ण रहा। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज में 76 गेंद पर अपना पहला अर्धशतक पूरा किया।दूसरी ओर, मेंडिस ने मानव सुथार की गेंद पर मिड-विकेट के ऊपर से छक्का लगाकर अपने इरादे स्पष्ट किए। प्रसिद्ध ने लंच से ठीक पहले तेजी से उछाल लेती गेंद पर मेंडिस को मिड विकेट पर खड़े रविंद्र जडेजा के हाथों कैच कराकर यह साझेदारी तोड़ी।

योगी सरकार के निपुण मॉडल को समझने गाजियाबाद पहुंचे 5 देशों के प्रतिनिधि

योगी सरकार के निपुण मॉडल को समझने गाजियाबाद पहुंचे 5 देशों के प्रतिनिधि

Nipun Bharat Mission

Nipun Bharat Mission: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बुनियादी शिक्षा और बच्चों की सीखने की क्षमता  को मजबूत करने के प्रयास अब अंतरराष्ट्रीय पीयर-लर्निंग का विषय बन रहे हैं। निपुण भारत मिशन के अंतर्गत भारत में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) सुधारों को समझने के उद्देश्य से केन्या, ब्राजील, अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका और सेनेगल के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों एवं नागरिक समाज के प्रतिनिधियों का लगभग 70 सदस्यीय दल गाजियाबाद पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने परिषदीय विद्यालयों में कक्षा शिक्षण का प्रत्यक्ष अवलोकन कर निपुण भारत की नीतियों के जमीनी क्रियान्वयन को समझा।

 

23 से 27 अगस्त तक चल रहे सप्ताहभर के पीयर-लर्निंग इमर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिनिधिमंडल को छोटे-छोटे समूहों में विभाजित कर गाजियाबाद के नगर, राजापुर, लोनी और मुरादनगर ब्लॉकों के 11 विद्यालयों का भ्रमण कराया गया। प्रतिनिधियों ने कक्षा-कक्ष में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया देखी तथा विद्यार्थियों, शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, अकादमिक रिसोर्स पर्सन्स (एआरपी) और राज्य संसाधन समूह के अधिकारियों से संवाद किया।

 

गाजियाबाद के परिषदीय विद्यालयों में पांच देशों के प्रतिनिधियों का यह अध्ययन दौरा उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत एफएलएन सुधारों को नीति से कक्षा तक पहुंचाने की प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा सीख का अवसर प्रदान कर रहा है।

यह है उद्देश्य

कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत एफएलएन सुधारों को समझना और अनुभव साझा करना है। गाजियाबाद के विद्यालयों में कक्षा शिक्षण के प्रत्यक्ष अवलोकन और शिक्षा अधिकारियों के साथ तकनीकी संवाद के माध्यम से प्रतिनिधियों ने एफएलएन सुधारों के जमीनी क्रियान्वयन को करीब से समझा।

शिक्षा विभाग के साथ हुई तकनीकी चर्चा

विद्यालयों के दौरे के बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग के साथ विस्तृत तकनीकी चर्चा हुई। इसमें गाजियाबाद के जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और राज्य संसाधन समूह के सदस्य शामिल हुए। चर्चा में पाठ्यक्रम एवं अध्ययन उद्देश्यों, संरचित शिक्षण-अधिगम सामग्री, शिक्षक मार्गदर्शन एवं मेंटरिंग, आकलन और आंकड़ों के उपयोग पर विचार-विमर्श हुआ। साथ ही सुधारों को बड़े स्तर पर लागू करने में मिडिल टीयर की भूमिका पर भी चर्चा की गई।

नीति से कक्षा तक की प्रक्रिया को समझा

विद्यालय भ्रमण के दौरान प्रतिनिधियों ने यह जाना कि निपुण भारत मिशन के अंतर्गत तैयार नीतियों और एफएलएन सुधारों को कक्षा स्तर पर किस तरह लागू किया जा रहा है। विद्यार्थियों और शिक्षकों से सीधे संवाद के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया, अकादमिक सहयोग और बच्चों की सीख से जुड़े अनुभवों को समझा गया।

 

ज्ञात हो कि लाइटहाउस इंडिया इमर्शन कार्यक्रम की मेजबानी सेंट्रल स्क्वेयर फाउंडेशन कर रहा है। यह भारत की एंकर लाइटहाउस संस्था है। कार्यक्रम में सेंट्रो लेमन और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन का सहयोग प्राप्त है तथा ग्लोबल स्कूल फोरम, ऑप्टिमा और गेट्स फाउंडेशन द्वारा इसका वित्तपोषण किया जा रहा है।

नदी में मिली 300 किलो की दैत्याकार मछली, इसकी साइज एक छोटी कार जितनी! इस मादा स्टिंगरे के बारे में जानिए

Giant freshwater stingray: कंबोडिया की मेकांग नदी में लगभग 300 किलोग्राम (661 पाउंड) वजन वाली एक विशाल मीठे पानी की स्टिंगरे मछली देखी गई है, जिससे पता चलता है कि इस नदी की पानी के नीचे की दुनिया कितनी अद्भुत हो सकती है। इस विशाल मादा स्टिंगरे को कंबोडिया के स्टुंग ट्रेन्ग इलाके में मछुआरों ने पकड़ा था।

इसकी लंबाई (पूंछ समेत) लगभग 4 मीटर (13 फ़ीट) थी। इसके डिस्क की चौड़ाई लगभग 2.2 मीटर (7 फीट 2 इंच) थी। इसका आकार लगभग एक छोटी कार जितना था।

कंबोडिया में मिली विशाल मीठे पानी की स्टिंगरे मछली!

इस खोज की सबसे खास बात स्टिंगरे का आकार है। लगभग 300 किलोग्राम वजन वाली यह मछली कई बड़े स्तनधारियों से भी भारी थी। इसका विशाल शरीर एक चौड़ी, चपटी डिस्क पर टिका था। यह एक ऐसा आकार है जो मीठे पानी की स्टिंगरे को नदी की तलहटी में चलने में मदद करता है। यह मीठे पानी की प्रजाति थी, न कि समुद्र में रहने वाली कोई ऐसी रे (ray) मछली जो कुछ समय के लिए नदी में आ गई हो।

क्या मेकांग नदी में ऐसी और भी विशाल मछलियां छिपी हैं?

मेकांग नदी दुनिया के बेहतरीन मीठे पानी वाले नदियों में से एक है। यह कई एशियाई देशों से होकर बहती है और हजारों प्रजातियों का घर है। यहां की कुछ मछलियां आश्चर्यजनक रूप से बड़े आकार की हो सकती हैं। विशाल मीठे पानी की स्टिंगरे (Urogymnus polylepis) भी उन्हीं में से एक है।

यह प्रजाति अपनी जिंदगी का ज्यादातर समय नदी की तलहटी के पास बिताती है, इसलिए इंसानों से इनका सामना बहुत कम ही होता है।

एक विशाल मछली ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह बनाई!

मीठे पानी की विशाल स्टिंगरे मछली ने भी गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपनी जगह बना ली है। अपने असाधारण आकार और वजन के कारण, इस प्रजाति को अब तक दर्ज की गई मीठे पानी की सबसे बड़ी मछली माना जाता है।

यह रिकॉर्ड बताता है कि मीठे पानी में रहने वाली ये विशाल मछलियां कितनी बड़ी हो सकती हैं। साथ ही, इससे मेकांग नदी भी चर्चा में आ गई है। यह दुनिया की उन महत्वपूर्ण जगहों में से एक है, जहां बड़ी मीठे पानी की मछलियां पाई जाती हैं।

क्या ये स्टिंगरे मछलियां विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण हैं?

वैज्ञानिक मीठे पानी की विशाल स्टिंगरे मछलियों में दिलचस्पी रखते हैं, क्योंकि वे नदी की सेहत का संकेत दे सकती हैं। उन्हें जीवित रहने के लिए मीठे पानी वाले बड़े इलाकों की जरूरत होती है। पानी की गुणवत्ता में बदलाव, मछली पकड़ने का दबाव और नदी के विकास से उनकी आबादी को खतरा हो सकता है।

इसके अलावा, मेकांग नदी पर भी पर्यावरण का दबाव बढ़ रहा है। बांधों का निर्माण, रहने की जगहों में बदलाव और जरूरत से ज्यादा मछली पकड़ने की वजह से नदी में कई विशाल मछली प्रजातियों के भविष्य को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं।

एक ऐसा विशाल जीव जिसकी रक्षा जरूरी है

300 किलो की स्टिंगरे सिर्फ वायरल होने वाला कोई जीव नहीं है। यह इस बात की याद दिलाती है कि एशिया की सबसे अहम नदियों में से एक की सतह के नीचे अभी भी क्या-क्या जीव मौजूद हो सकते हैं। वैज्ञानिकों के लिए, इस विशाल मीठे पानी की स्टिंगरे से मिलने वाला हर मौका मेकांग नदी के पर्यावरण और यहां मौजूद अलग-अलग जीवों की स्थिति को समझने में मदद करता है।

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