LIVE: भारत पर फिर खतरा, लगेगा 100 प्रतिशत टैरिफ, बिल पर मुहर, देशभर में बारिश, चारधाम यात्रा पर रोक

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अमेरिका की सीनेट ने एक ऐसे बिल पर चर्चा की मंजूरी दे दी है जिसका भारत पर बड़ा असर हो सकता है। अमेरिकी संसद के इस उच्च सदन ने मंगलवार, 28 जुलाई को रूस की तेल और गैस बेचने से होने वाली कमाई को निशाना बनाने वाले बड़े प्रतिबंध (सैंक्शन) वाले बिल को आगे बढ़ा दिया। बिल पास करने की ओर पहला कदम उठा लिया गया है। अगर अब यह बिल निचले सदन से भी पास हो जाता है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह पावर मिल जाएगा कि वह रूस से तेल खरीदने वाले भारत जैसे देशों पर 100 प्रतिशत का टैरिफ लगा सकते हैं। जब सीनेट में इस बिल पर वोटिंग हो रही थी तब यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोडिमिर जेलेंस्की सीनेट गैलरी से देख रहे थे। रूस से जंग के बीच जेलेंस्की वॉशिंगटन पहुंचे थे, उन्होंने ट्रंप से मुलाकात की है और रूस के खिलाफ और सख्त कदम उठाने की मांग की है।

बारिश का कहर, तीर्थयात्रा पर रोक : इसके असर को देखते हुए IMD ने अगले 4-5 दिनों में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य से ज्यादा और अगले 5-6 दिनों में पूर्वी भारत में भारी बारिश की चेतावनी दी है। गुजरात में भारी बारिश और बाढ़ से देश की सबसे बड़ी ऑटो कंपनियों में से एक टाटा मोटर्स भी प्रभावित है। कंपनी के साणंद प्लांट और आसपास मौजूद कई सप्लायर की यूनिट पानी भरने के कारण बंद करानी पड़ीं। इधर, उत्तराखंड में लैंडस्लाइड से तीर्थयात्रा के रास्ते बंद हो गए। खराब मौसम के चलते चारधाम यात्रा 2 दिनों के लिए रोक दी गई है। चंपावत, बागेश्वर और टिहरी में क्लास 1 से 12वीं तक के सभी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं।

भारत ने श्रीलंका के खिलाफ 2 टेस्ट मैचों के लिए 4 स्पिनरों से युक्त घोषित की टीम

INDvsSL भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने सुबह तड़के श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरु हो रहे 2 टेस्ट मैचों के दौरे के लिए टीम की घोषणा कर दी। टीम में 4 स्पिनरों को जगह दी है और शीर्ष तेज गेंदबाजी क्रम अनुभवी है। हालांकि जसप्रीत बुमराह की फिटनेस पर संशय है। टीम में कुलदीप यादव, रविंद्र जड़ेजा, अफगानिस्तान के खिलाफ ड्रीम डेब्यू करने वाले मानव सुथार और इस सीरीज में डेब्यू करने वाले स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को मौका मिला है।

BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) के सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि टीम में कुछ छोटे-मोटे बदलावों को छोड़कर, ज़्यादा बदलाव नहीं है; यह टीम वैसी ही हैजैसी जून में शुभमन गिल की कप्तानी में अफगानिस्तान के खिलाफ खेली थी। चयन मीटिंग में मुख्य ध्यान  इस बात पर होगा कि क्या जसप्रीत बुमराह अंतिम ग्यारह में जगह बना पाएंगे या नहीं।

एक खुशखबरी यह सुनाई दे रही है कि रविंद्र जड़ेजा लाल गेंद की क्रिकेट में टीम की योजनाओं में है।टेस्ट क्रिकेट में उनकी उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता। साल 2012 से शुरु हुआ रविंद्र जड़ेजा का क्रिकेट करियर अब ढलान पर है। 89 मैचों में उन्होंने 38.3 की औसत से 4095 रन बनाए हैं। जिसमें 6 शतक और 28 अर्धशतक लगाए हैं। गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने 25 की औसत से 348 विकेट चटकाए हैं। इस दौरान उन्होंने 17 बार 4 विकेट और 15 बार 5 विकेट चटकाए हैं।

वहीं चोट से जूझ रहे कुछ खिलाड़ियों को दौरे से आराम दिया गया है। वॉशिंगटन सुंदर को टीम में शामिल नहीं किया गया है।श्रीलंका में स्पिन के मुफीद पिचों पर उनका ना रहना सही संकेत नहीं है।वहीं तेज गेंदबाज हर्षित राणा भी फिट नहीं है। उनके ना रहने से टीम शायद उतनी चिंतित ना हो। नीतीश कुमार रेड्डी, जो जून में न्यू चंडीगढ़ टेस्ट के लिए टीम का हिस्सा थे, पिछले महीने लगी क्वाड्रिसेप्स की चोट के कारण बेंगलुरु के Centre of Excellence में rehabilitation से गुज़र रहे हैं और इस दौरे के लिए नहीं चुने गए।

भारतीय टीम इस प्रकार है: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), साई सुदर्शन, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर),रविंद्र जडेजा , कुलदीप यादव, मानव सुथार, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन।

चोटिल भारतीय टेस्ट टीम, किन खिलाड़ियों को बोर्ड भेजेगा श्रीलंका दौरे पर

श्रीलंका के खिलाफ होने वाली 2 मैचों की टेस्ट सीरीज़ के लिए टीम का चयन जब चयनकर्ता करने बैठेंगे तो बड़ा सवाल यह होगा कि चोटिल खिलाड़ियों की लंबी फहरिस्त की जगह किसको शामिल किया जाए।मीडिया सूत्रों से आर रही खबरों के मुताबिक वॉशिंगटन सुंदर की फिटनेस पर सस्पेंस बरकरार है। श्रीलंका में स्पिन के मुफीद पिचों पर उनका ना रहना सही संकेत नहीं है।

वहीं तेज गेंदबाज हर्षित राणा भी फिट नहीं है। उनके ना रहने से टीम शायद उतनी चिंतित ना हो लेकिन जसप्रीत बुमराह की फिटनेस भी ठीक नहीं है जो घुटने की चोट के कारण अंतिम वनडे से बाहर बैठे थे।भारत 15 से 27 अगस्त के बीच गाले और कोलंबो में दो टेस्ट मैच खेलेगा और घोषणा मंगलवार को संभावित है।

BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) के सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि टीम में कुछ छोटे-मोटे बदलावों को छोड़कर, ज़्यादा बदलाव होने की संभावना नहीं है; यह टीम वैसी ही होगी जैसी जून में शुभमन गिल की कप्तानी में अफगानिस्तान के खिलाफ खेली थी। चयन मीटिंग में मुख्य ध्यान  इस बात पर होगा कि क्या जसप्रीत बुमराह को सीरीज़ के लिए चुना जाएगा या नहीं।

हालांकि उनके चुने जाने की संभावना है, और साथ ही मोहम्मद सिराज के भी, जिन्होंने बुमराह की गैर-मौजूदगी में अफगानिस्तान के खिलाफ गेंदबाजी की कमान संभाली थी, लेकिन सबसे अहम बात यह है कि क्या चयनकर्ता पिछले रणजी सीज़न में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले आकिब नबी को टीम में मौका देंगे या नहीं।

इस बीच, खबर है कि नीतीश कुमार रेड्डी, जो जून में न्यू चंडीगढ़ टेस्ट के लिए टीम का हिस्सा थे, पिछले महीने लगी क्वाड्रिसेप्स की चोट के कारण बेंगलुरु के Centre of Excellence में rehabilitation से गुज़र रहे हैं और उनके चुने जाने की संभावना कम है। भारतीय टीम में शामिल कुछ चुनिंदा सभी प्रारुप के खिलाड़ियों में से एक, रेड्डी ने बेंगलुरु में गेंदबाजी शुरू कर दी है।

लेकिन सूत्रों का कहना है कि पांच दिन के मैचों के लिए उन पर विचार करना अभी जल्दबाजी होगी। हालांकि, उम्मीद है कि वह सितंबर में होने वाले कई सफेद गेंद मैचों के लिए तैयार हो जाएंगे। रेड्डी ने आखिरी बार जून में चेन्नई में अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे और आखिरी वनडे मैच में भारत के लिए खेला था।

वहीं एक खुशखबरी यह सुनाई दे रही है कि रविंद्र जड़ेजा लाल गेंद की क्रिकेट में टीम की योजनाओं में है।टेस्ट क्रिकेट में उनकी उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता। साल 2012 से शुरु हुआ रविंद्र जड़ेजा का क्रिकेट करियर अब ढलान पर है। 89 मैचों में उन्होंने 38.3 की औसत से 4095 रन बनाए हैं। जिसमें 6 शतक और 28 अर्धशतक लगाए हैं। गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने 25 की औसत से 348 विकेट चटकाए हैं। इस दौरान उन्होंने 17 बार 4 विकेट और 15 बार 5 विकेट चटकाए हैं।

सिएटल फूड फेस्टिवल में फायरिंग:2 की मौत, बच्चे समेत 5 घायल; पुलिस ने इलाका खाली कराया

अमेरिका के सिएटल में रविवार शाम एक फूड फेस्टिवल के दौरान फायरिंग में 2 लोगों की मौत हो गई। बच्चे समेत 5 लोग घायल हुए हैं। घटना सिएटल के स्पेस नीडल के पास आयोजित ‘बाइट ऑफ सिएटल’ फेस्टिवल के आखिरी घंटों में हुई। सिएटल फायर डिपार्टमेंट की प्रवक्ता ग्रेस नुनेज ने इसकी जानकारी दी। फायरिंग शाम करीब 6 बजे हुई। पुलिस ने इलाके की जांच शुरू कर दी और लोगों से शहर के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित घटनास्थल के पास नहीं जाने की अपील की। अभी यह साफ नहीं है कि इस मामले में किसी को हिरासत में लिया गया है या नहीं। 5 घायलों को अस्पताल ले जाया गया सिएटल फायर डिपार्टमेंट की प्रवक्ता ग्रेस नुनेज के मुताबिक, फायरिंग में मारे गए दोनों लोगों की मौत मौके पर ही हो गई। 5 घायलों को हार्बरव्यू मेडिकल सेंटर ले जाया गया। घायलों में 56 साल की महिला की हालत गंभीर है। 2 साल का बच्चा, 23 साल का युवक और 39 साल की महिला की हालत स्थिर बताई गई है। वहीं 40 साल की एक महिला को मामूली चोटें आई हैं। फायरिंग के बाद बड़ी संख्या में पुलिस और इमरजेंसी टीमें मौके पर पहुंचीं। उन्होंने सिएटल सेंटर इवेंट्स कैंपस के आसपास का इलाका खाली कराना शुरू किया। अधिकारियों ने अभी यह नहीं बताया है कि फेस्टिवल के किस हिस्से में फायरिंग हुई। इस आयोजन में खुले और इनडोर, दोनों तरह के क्षेत्र शामिल थे। गवर्नर बोले- स्टेट पेट्रोल SWAT टीम मदद के लिए तैनात वॉशिंगटन के गवर्नर बॉब फर्ग्यूसन ने कहा कि उन्हें घटना को लेकर लगातार जानकारी दी जा रही है। स्थानीय पुलिस की मदद के लिए स्टेट पेट्रोल SWAT अधिकारियों को भी तैनात किया गया है। फर्ग्यूसन ने एक बयान में कहा, “मेरी संवेदनाएं पीड़ितों के परिवारों और उन सभी लोगों के साथ हैं, जो लोगों को सुरक्षित रखने के लिए काम कर रहे हैं।” खाने का सामान लेकर लौटे थे लोग, तभी गोलियां चलीं फेस्टिवल में मौजूद फेथ एडिया हंटर ने बताया कि वह और उनके दोस्त क्रेप बेचने वाले एक स्टॉल से खाना लेकर लौटे ही थे तभी फायरिंग शुरू हो गई। उन्हें एहसास हुआ कि शूटर उनके पास ही था। हंटर ने कहा, “जब यह शुरू हुआ, तब हम उसके ठीक पास थे। इसलिए हम भागे और भीड़ के साथ इमारत के अंदर चले गए।” उन्होंने बताया कि वह और कुछ अन्य लोग पास के सिएटल चिल्ड्रन्स म्यूजियम में जाकर छिप गए। फायरिंग के बाद मची अफरा-तफरी में कई फूड वेंडर अपने स्टॉल छोड़कर बाहर की ओर भाग गए। कई घंटे बाद भी कुछ वेंडर पुलिस की घेराबंदी के बाहर खड़े रहे और इंतजार करते रहे कि उन्हें अपने टेंट, खाना और खाना बनाने का सामान लेने के लिए वापस जाने की अनुमति कब मिलेगी। वेंडर ने कहा- पहले पटाखे जैसी आवाज सुनाई दी फेस्टिवल में वेंडर रॉबर्टो रामिरेज ने बताया कि उन्हें पहले पटाखे जैसी आवाज सुनाई दी। इसके बाद लोगों ने चिल्लाना शुरू कर दिया कि गोली चलाने वाला मौजूद है और लोग घबराकर भागने लगे। रामिरेज ने कहा, “अचानक सब कुछ खाली हो गया। लोग बहुत डरे हुए थे।” उन्होंने बताया कि शुरुआती अफरा-तफरी के बाद भी कुछ नए लोग फेस्टिवल में पहुंचते रहे। उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी। पुलिस ने इन लोगों को भी वहां से जाने के लिए कहा। फेस्टिवल में मौजूद एस्टन वाकोनाबो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ फोटो बूथ की लाइन में खड़े थे। तभी किसी ने उन्हें पीछे से धक्का दिया। उन्होंने मुड़कर देखा तो लोगों की भीड़ तेजी से भाग रही थी। वाकोनाबो ने बताया, “लोग छिप रहे थे, एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे और जमीन पर गिर रहे थे। बच्चों की स्ट्रोलर भी गिर रही थीं। तभी मैंने गोलियों की आवाज सुनी।” उन्होंने कहा, “जब मैंने पॉप-पॉप-पॉप की आवाज सुनी, तभी मुझे समझ आया कि गोली चलाने वाला कोई व्यक्ति है।” वाकोनाबो ने अपनी गर्लफ्रेंड को सुरक्षित जगह पहुंचाने के बाद दोबारा घटनास्थल की ओर जाने की बात कही। उनके मुताबिक, वहां उन्होंने कई घायलों को जमीन पर पड़े देखा और उनकी तस्वीरें भी लीं। सीएटल की कांग्रेसवुमन प्रमिला जयपाल ने ‘बेवजह की हिंसा’ की निंदा की
सीएटल का प्रतिनिधित्व करने वाली कांग्रेसवुमन प्रमिला जयपाल ने सीएटल सेंटर में हुई फायरिंग के बाद इसे ‘बेवजह की हिंसा’ बताते हुए निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमारी संवेदनाएं इस बेवजह की हिंसा से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं।” जयपाल ने बताया कि वह सीएटल की मेयर केटी विल्सन और गवर्नर बॉब फर्ग्यूसन के संपर्क में हैं। स्थिति की जानकारी जुटाने के लिए सरकार के अलग-अलग स्तरों के बीच समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सक्रिय जांच जारी रहने तक वे इलाके से दूर रहें। 1982 से हो रहा है फूड फेस्टिवल ‘बाइट ऑफ सिएटल’ फूड फेस्टिवल की शुरुआत 1982 में हुई थी। फेस्टिवल की वेबसाइट के मुताबिक, 3 दिन चलने वाले इस आयोजन में खाने-पीने की चीजों के साथ अलग-अलग तरह के कार्यक्रम होते हैं और करीब 3.5 लाख लोग इसमें शामिल होते हैं।

Market outlook : लाल निशान में बंद हुआ बाजार, जानिए 27 जुलाई को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market outlook :24 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स कमजोरी के साथ बंद हुए और निफ्टी 23,800 के नीचे चला गया। मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स 331.62 अंक या 0.43 प्रतिशत गिरकर 76,059.77 पर और निफ्टी 102.15 अंक या 0.43 प्रतिशत गिरकर 23,767.45 पर बंद हुआ। लगभग 2050 शेयरों में बढ़त हुई,1961 शेयरों में गिरावट आई और 196 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस,एटरनल, M&M, श्रीराम फाइनेंस और भारती एयरटेल शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में HCL टेक्नोलॉजीज,विप्रो,सिप्ला,ITC और HDFC लाइफ शामिल रहे।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस मिली-जुली रही। निफ्टी मीडिया सबसे ज्यादा बढ़त वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.8% की तेजी आई। इसके बाद निफ्टी IT (0.8% ऊपर),निफ्टी PSU बैंक (0.5% ऊपर)और निफ्टी बैंक (0.18% ऊपर)रहे।

दूसरी ओर निफ्टी ऑटो सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.10% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी मेटल (0.55% नीचे),निफ्टी एनर्जी (0.57% नीचे),निफ्टी रियल्टी (0.55% नीचे),निफ्टी ऑयल एंड गैस (0.46% नीचे),निफ्टी फार्मा (0.4% नीचे) और निफ्टी इंफ्रा (0.4% नीचे) रहे।

ब्रॉडर मार्केट भी अपने इंट्राडे निचले स्तरों से सुधरे। निफ्टी मिडकैप 100 बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुआ,जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर ने कहा कि आने वाले समय में मार्केट का सेंटीमेंट खराब रह सकता है। तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहने से मेन मैक्रो-इकोनॉमिक इंडिकेटर्स और ग्रोथ पर बुरा असर पड़ सकता है। क्रूड ऑयल की कीमतें संकट के समय के अपने पीक से काफी नीचे होने के बावजूद US 10-ईयर बॉन्ड यील्ड 52-हफ्ते के हाई पर पहुंच गए हैं। यह बॉन्ड मार्केट की उन चिंताओं को दिखाता है जो एनर्जी से जुड़ी महंगाई के जोखिम,मजबूत लेबर मार्केट की स्थिति और फेड के लगातार सख़्त रुख (hawkish stance) से जुड़ी हैं।

इन वजहों से सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। इंपोर्ट पर वॉशिंगटन के नए टैरिफ ने एक्सपोर्ट पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। टेक्नोलॉजी इंटेसिव मार्केट पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है,क्योंकि ग्रोथ पर ऊंची दरों का दबाव है और निवेशक दूसरे उभरते हुए मार्केट की ओर रुख करके जोखिम कम करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अच्छे वैल्यूएशन और क्रेडिट ग्रोथ की उम्मीदों के चलते बैंक निफ्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा।

निफ्टी का आउटलुक

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह का कहना है कि आगे निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 23650-23600 के जोन में दिख रहा है। अगर निफ्टी इस जोन के नीचे टिकता है,तो इसमें और गिरावट आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 23450 और फिर 23300 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ,निफ्टी के लिए तकाल रेजिस्टेंस 23950-24000 के जोन में है,जो 50-दिन के EMA के साथ मेल खाता है।

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बैंक निफ्टी का आउटलुक

सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी में भी निफ्टी जैसी ही शुरुआती कमजोरी दिखी। यह निचले स्तर पर खुला और नीचे की ओर गया,लेकिन फिर इंट्राडे के निचले स्तरों से तेज रिकवरी हुई जिससे नुकसान की भरपाई हो गई। इस रिकवरी की वजह से डेली चार्ट पर एक बड़ी बुलिश कैंडल बनी और इंडेक्स ने अपना 200-डे का EMA फिर से हासिल कर लिया,जो ट्रेडर्स के लिए एक अहम लॉन्ग-टर्म सपोर्ट लेवल है।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57100-57200 जोन में है। अगर यह इस जोन के ऊपर टिकता है तो बैंक निफ्टी अपनी रिकवरी को 57600 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 58000 तक बढ़ा सकता है। नीचे की तरफ,बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56300-56200 जोन में है।

 

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साइन होते ही अटक गई अमेरिका-सऊदी की न्यूक्लियर डील:ट्रम्प ने 24 घंटे में नई शर्त जोड़ी, बोले- इजराइल से रिश्ते सामान्य करे सऊदी

अमेरिका और सऊदी अरब के बीच करीब दो दशक से अटके परमाणु समझौते पर बुधवार को हस्ताक्षर हुए, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही यह डील अटक गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौते में नई शर्त जोड़ दी है। उन्होंने कहा कि डील तभी आगे बढ़ेगी, जब सऊदी अरब अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होकर इजराइल से राजनयिक रिश्ते सामान्य करेगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) की अनुमति नहीं मिलेगी। बिना बताए डील की घोषणा से ट्रम्प नाराज वॉशिंगटन में हुए हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट शामिल हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प इस बात से नाराज थे कि राइट ने उनकी मंजूरी के बिना समझौते की घोषणा कर दी। इसके बाद फॉक्स न्यूज और वॉल स्ट्रीट जर्नल में हुई आलोचना से उनकी नाराजगी और बढ़ गई। रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस ने ऊर्जा विभाग से समझौते की घोषणा टालने को कहा था, लेकिन विभाग ने हस्ताक्षर समारोह भी किया और मीडिया में इसकी जानकारी भी दी। हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि अब्राहम अकॉर्ड्स की शर्त शुरू से ही ट्रम्प की नीति का हिस्सा थी। वहीं ऊर्जा विभाग ने किसी भी मतभेद से इनकार किया। ट्रम्प की नई शर्त ने सऊदी को भी चौंकाया CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प की घोषणा से सऊदी अरब भी हैरान रह गया। समझौते के मसौदे में कुछ शर्तें पूरी होने पर सऊदी अरब को अपनी जमीन पर यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिलने की बात थी, लेकिन ट्रम्प ने इसे सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया। दोनों देशों ने करीब दो दशक पहले परमाणु ऊर्जा सहयोग की पहल की थी। पिछले साल अक्टूबर में प्रारंभिक सहमति बनी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध और कांग्रेस की संभावित आपत्तियों के कारण समझौता महीनों तक अटका रहा। पिछले सप्ताह ऊर्जा विभाग को लगा कि ट्रम्प की मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद इसकी घोषणा कर दी गई। परमाणु एक्सपर्ट्स ने यूरेनियम संवर्धन की अनुमति और IAEA के अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल की गैरमौजूदगी पर चिंता जताई। वहीं समर्थकों का तर्क था कि अगर अमेरिका पीछे हटता है तो चीन या रूस सऊदी अरब में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत कर सकते हैं। आखिर अब्राहम अकॉर्ड्स है क्या, जिसे लेकर डील अटक गई? दरअसल, अब्राहम अकॉर्ड्स 2020 में अमेरिका की पहल पर हुआ ऐसा समझौता है, जिसके तहत कुछ अरब देशों ने पहली बार इजराइल के साथ अपने रिश्ते सामान्य किए। यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान इसके तहत इजराइल से जुड़ चुके हैं। अब अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब भी इसी समझौते का हिस्सा बने। ट्रम्प का मानना है कि अगर सऊदी इजराइल से रिश्ते सामान्य करता है, तो पश्चिम एशिया में अमेरिका का रणनीतिक गठजोड़ और मजबूत होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाइडेन प्रशासन भी सऊदी परमाणु समझौते को इजराइल से रिश्ते सामान्य करने से जोड़कर आगे बढ़ा रहा था। हालांकि 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले और गाजा युद्ध के बाद यह प्रक्रिया रुक गई। सऊदी का कहना है कि फिलिस्तीन के लिए अलग राज्य का रास्ता साफ हुए बिना वह इजराइल से आधिकारिक रिश्ते नहीं बनाएगा। यही वजह है कि अब न्यूक्लियर डील भी इस शर्त पर अटक गई है। ट्रम्प ने यूरेनियम एनरिचमेंट पर इनकार क्यों किया परमाणु बिजलीघर चलाने के लिए यूरेनियम को एक खास स्तर तक एनरिच (संवर्धित) किया जाता है। लेकिन यही तकनीक अगर बहुत अधिक स्तर तक पहुंच जाए, तो उसी यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में भी किया जा सकता है। इसलिए यूरेनियम एनरिचमेंट को दुनिया की सबसे संवेदनशील परमाणु तकनीकों में माना जाता है। यही वजह है कि अमेरिका आमतौर पर किसी भी देश को अपनी जमीन पर यूरेनियम एनरिचमेंट की अनुमति देने से बचता है। उसे आशंका रहती है कि भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल सैन्य कार्यक्रम के लिए भी हो सकता है। सऊदी अरब को लेकर भी यही चिंता है, इसलिए ट्रम्प ने साफ कर दिया कि न्यूक्लियर डील होगी, लेकिन यूरेनियम एनरिचमेंट की इजाजत नहीं मिलेगी। ——————— अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौते से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ईरान जंग के बीच अमेरिका का सऊदी से परमाणु समझौता:इजराइल के विरोध के बावजूद ट्रम्प की मंजूरी; एक्सपर्ट बोले- परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ेगा सऊदी अरब ने बुधवार को अमेरिका के साथ एक अहम परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके तहत अमेरिका, सऊदी अरब को असैन्य (बिजली बनाने के लिए) परमाणु तकनीक देगा। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध और तनाव का माहौल है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

‘जहाज पर हमला किया तो पुल या पावर प्लांट उड़ा देंगे’, ईरान को ट्रंप की कड़ी चेतावनी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को धमकी दी कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी जहाज पर हमला करता है, तो अमेरिका हर बार ईरान के किसी पुल या पावर प्लांट को निशाना बनाएगा। इसमें राजधानी तेहरान में मौजूद ठिकाने भी शामिल हो सकते हैं।

ट्रंप ने यह धमकी अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट के जरिए दी। इससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है, जो पहले से ही संघर्ष विराम टूटने और हाल ही में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा हुआ था। बता दें कि ट्रंप को बुधवार को ही इन सैनिकों के शव मिलने वाले थे।

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा था, “अब से, जब भी ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला करेगा, तो अमेरिका उसके एक पुल या पावर प्लांट पर बम गिराकर उसे नष्ट कर देगा।”

ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि इन लक्ष्यों में “तेहरान शहर के पास या उसके अंदर मौजूद ठिकाने” भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी ईरान के बिजली संयंत्रों, पानी की सुविधाओं और दूसरे बुनियादी ढांचों पर हमला करने की धमकी दे चुके हैं। जानकारों ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं।

इससे पहले बुधवार को, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका के साथ समझौता करने को लेकर “गंभीर” नहीं है, साथ ही उन्होंने दोहराया कि वॉशिंगटन मध्य पूर्व में “कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध” है।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने लगातार 11वीं रात ईरानी ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित और खुला करने की कोशिश कर रहा है। यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और युद्ध के दौरान ईरान के लिए दबाव बनाने का एक बड़ा साधन बन गया है।

CENTCOM ने बताया कि उसने मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, ड्रोन स्टोर करने की जगहों और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए।

फिलीपींस में आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक में बोलते हुए, रुबियो ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक मुख्य विवाद यह है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में ट्रैफिक को नियंत्रित करने का “अधिकार मांगता है”, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसे यह अधिकार नहीं है।

रुबियो ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर हम मध्य पूर्व में एक ऐसी मिसाल कायम करते हैं, जहां कोई राष्ट्र किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर नियंत्रण करने, शुल्क वसूलने और भुगतान न करने पर आपके जहाजों को उड़ाने का फैसला कर सकता है, तो हमने एक बहुत ही खतरनाक मिसाल कायम कर दी है, जो दुनिया के अन्य हिस्सों में, इस क्षेत्र सहित, दोहराई जाएगी।”

रुबियो ने अप्रत्यक्ष रूप से चीन की ओर इशारा करते हुए कहा कि “दुनिया के सभी क्षेत्रों में से, यह वह क्षेत्र है जहां मुझे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व के बारे में सिखाने की आवश्यकता नहीं है।”

बाद में दिन में दिए गए अलग-अलग बयानों में, रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत करने को तैयार है।

उन्होंने कहा, “अमेरिका कूटनीतिक समझौते तक पहुंचना चाहता है। अगर ईरान के साथ ऐसा कोई समझौता संभव हो, जिसमें वह कहे कि हम अब आतंकवाद को समर्थन नहीं देंगे और परमाणु हथियार या उसे बनाने के लिए जरूरी चीजों को आगे नहीं बढ़ाएंगे, तो अमेरिका इसके लिए तैयार है।”

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि “फिलहाल वे डील करने को लेकर गंभीर नहीं लगते।” उन्होंने आगे कहा कि तेहरान ने पिछले महीने हुए समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) में कुछ वादे किए थे, “और दो हफ्ते के अंदर ही उन्हें तोड़ दिया।”

अमेरिकी नौसेना ने पहले भी साउथ चाइना सी में विवादित द्वीपों के आस-पास “फ्रीडम ऑफ नेविगेशन” (आजादी से आवाजाही) ऑपरेशन चलाए हैं। इन द्वीपों पर चीन के साथ-साथ कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के भी दावे हैं, जबकि चीन अपनी “नाइन-डैश लाइन” के जरिए लगभग पूरे समुद्र पर अपना अधिकार बताता है।

यह सब ‘परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ के 2016 के उस फैसले के बावजूद हो रहा है, जिसमें कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चीन के दावों का कोई आधार नहीं है। हालांकि, चीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया है।

तेल की कीमतों में उछाल

बुधवार सुबह कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (सितंबर डिलीवरी) 3.7% बढ़कर 94.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स (सितंबर डिलीवरी) में 3.5% की तेजी आई और यह 87.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

बता दें कि अमेरिका और ईरान ने 17 जून को एक अंतरिम समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें सैन्य अभियानों को रोकने, होर्मुज को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों सहित एक स्थायी समझौते पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय करने की बात कही गई थी। लेकिन इस दस्तावेज में होर्मुज के भविष्य के प्रबंधन का मुद्दा अनसुलझा ही रह गया।

ईरान ने इस बात का मतलब यह भी निकाला कि होर्मुज (स्ट्रेट) से गुजरने वाले ट्रैफिक को मैनेज करने में तेहरान की भूमिका है और शुरुआती 60 दिनों के बाद समुद्री सेवाओं के लिए शुल्क भी लिया जा सकता है, लेकिन अमेरिका का कहना था कि यह जलमार्ग बिना किसी अनिवार्य ईरानी शुल्क या प्रतिबंध के खुला रहना चाहिए।

ईरान और ओमान – जिनकी सीमाएं भी होर्मुज जलडमरूमध्य से लगती हैं – ने 23 जून को एक संयुक्त बयान में कहा कि “होर्मुज से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं में जलडमरूमध्य के दोनों तटीय देशों की संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।”

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Share Market Crash: खास वजहों से IT-Pharma Sector में बिकवाली की आंधी, 500 प्वाइंट्स टूट गया Sensex

Share Market Crash: अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आंच में घरेलू बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स और निफ्टी फिसल गए। फार्मा सेक्टर में जेनेरिक्स दवाईयों पर अमेरिकी टैरिफ और एआई से जुड़े शेयरों में तेजी के चलते भारतीय आईटी स्टॉक्स पर दबाव में सेंसेक्स 500 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी 50 भी फिसलकर 24000 के एकदम करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का दबाव दिख रहा है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब आधे फीसदी तक की गिरावट है।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:34 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 564.77 प्वाइंट्स यानी 0.73% की गिरावट के साथ 76,905.34 और निफ्टी (Nifty) 158.00 प्वाइंट्स यानी 0.65% की फिसलन के साथ 24,029.70 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 581.61 प्वाइंट्स टूटकर 76,888.50 और निफ्टी 168.30 प्वाइंट्स गिरकर 24,019.40 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

US-Iran War

अमेरिका ने ईरान पर लगातार 11वीं रात हवाई हमले किए। इन हमलों में मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, एयरक्राफ्ट हैंगर और ड्रोन स्टोरेज साइट्स को निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम होने के फिलहाल कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। इसने मार्केट में सेंटिमेंट कमजोर किया है।

आईटी-फार्मा सेक्टर में तेज बिकवाली

मार्केट पर आज सबसे अधिक दबाव फार्मा सेक्टर ने बनाया है। ट्रंप ने अपनी पॉलिसी में जेनेरिक्स दवाईयों को भी शामिल किया तो इस सेक्टर की कंपनियों को झटका लगा और निफ्टी फार्मा 1% से अधिक फिसल गया। इसके अलावा एआई से जुड़े स्टॉक्स में तेजी के चलते भारतीय मार्केट में आईटी कंपनियों पर दबाव पड़ा और निफ्टी आईटी 1% से अधिक टूट गया। इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर में भी बिकवाली का तेज दबाव है और सरकारी और प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे-आधे फीसदी से अधिक की गिरावट है।

India VIX में उछाल

मार्केट की घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में गिरावट ने मार्केट पर दबाव बनाया। फिलहाल यह 3.25% की गिरावट के साथ 13.01 पर है। इसके अधिक होने का मतलब वोलैटिलिटी अधिक होने की आशंका है तो कम होने का मतलब वोलैटिलिटी कम होने की संभावना है।

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US-Iran War: अब आर-पार के मूड में ट्रंप! अमेरिका ने ईरान के मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर पर की बमबारी, होर्मुज में बढ़ा तनाव

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पहले हार अब इंजरी से जूझ रही है टीम इंडिया…वर्ल्ड कप 2027 के लिए कितना तैयार भारत?

इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज हारने के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने कहा कि टीम में खिलाड़ियों का बार-बार चोटिल होना चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि 2027 वनडे वर्ल्ड कप को देखते हुए सभी खिलाड़ियों को अपनी फिटनेस पर ज्यादा ध्यान देना होगा। 2027 वनडे वर्ल्ड कप शुरू होने में अब दो साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में खिलाड़ियों की लगातार बढ़ रही चोटें टीम की लंबी तैयारी के लिए चिंता का विषय हैं। 2027 वनडे वर्ल्ड कप साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में खेला जाएगा।

गिल के मुताबिक, इंग्लैंड दौरे पर कई खिलाड़ी चोट की वजह से बाहर हो गए, जिससे टीम का कॉम्बिनेशन बार-बार बदलना पड़ा और इसका असर प्रदर्शन पर भी पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर भारत को बड़े टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करना है तो खिलाड़ियों का पूरी तरह फिट रहना बहुत जरूरी है।

ये खिलाड़ी हुए थे बाहर

भारत की मुश्किलें वनडे सीरीज शुरू होने से पहले ही बढ़ गई थीं। टीम के अहम ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या और नीतीश कुमार रेड्डी चोट की वजह से पूरी सीरीज से बाहर हो गए। इसके बाद टी20 सीरीज के दौरान हर्षित राणा भी हैमस्ट्रिंग की समस्या का शिकार हो गए, जिसके कारण वह वनडे मुकाबलों में नहीं खेल सके। वहीं सीरीज के दौरान भी भारतीय टीम की चोटों की समस्या कम नहीं हुई। दूसरे मुकाबले में वॉशिंगटन सुंदर हैमस्ट्रिंग की परेशानी से जूझते नजर आए, जबकि उसी मैच में जसप्रीत बुमराह भी चोटिल हो गए। इसकी वजह से बुमराह तीसरे और आखिरी वनडे में नहीं खेल सके।

इंग्लैंड सीरीज में चोट की वजह से बाहर हुए कई खिलाड़ी

इंग्लैंड के खिलाफ मैच के बाद जब शुभमन गिल से लगातार बढ़ रही चोटों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने माना कि यह टीम के लिए चिंता की बात है और इस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। शुभमन गिल ने आगे कहा, “अगर आप हमारी पहली घोषित टीम को देखें, तो उसमें शामिल कम से कम पांच खिलाड़ी इस मैच में नहीं खेल पाए। जब एक खिलाड़ी चोटिल होता है, तो आपको टीम का कॉम्बिनेशन बदलना पड़ता है। अगर दो खिलाड़ी बाहर हो जाएं, तो फिर एक अलग संयोजन बनाना पड़ता है। लेकिन मेरा मानना है कि हर मैच के बाद किसी न किसी खिलाड़ी के उपलब्ध नहीं होने से टीम कहीं न कहीं अपनी कुछ अहम ताकत खो देती है।”

दो-तीन मैचों की सीरीज भी नहीं खेला पा रहे

2027 वनडे वर्ल्ड कप शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। उन्होंने बताया कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में फाइनल तक पहुंचने वाली टीम को 11 मैच तक खेलने पड़ सकते हैं। ऐसे में मजबूत बेंच स्ट्रेंथ के साथ-साथ खिलाड़ियों का पूरी तरह फिट रहना बेहद जरूरी होगा। उन्होंने कहा, “अगर हम वर्ल्ड कप को ध्यान में रखें, तो वहां हमें लगातार 11 मैच खेलने होंगे। लेकिन यहां खिलाड़ी दो-तीन मैचों की सीरीज भी पूरी नहीं खेल पा रहे हैं। कहीं न कहीं यह हमारे लिए चिंता की बात है कि खिलाड़ी लगातार उपलब्ध नहीं रह पा रहे हैं।”

फिटनेस में सुधार काफी जरूरी

गिल ने कहा, “खिलाड़ी एक या दो मैच खेलते हैं और फिर अगर किसी को हल्की-सी भी दिक्कत हो जाती है, तो हमें मजबूरी में टीम का कॉम्बिनेशन बदलना पड़ता है। ऐसे में योजना बनाना आसान नहीं होता। कई बार सुबह पता चलता है कि किसी खिलाड़ी को हल्की चोट या परेशानी है, तब फैसला करना मुश्किल हो जाता है कि उसे खिलाया जाए या नहीं। अगर कोई खिलाड़ी सिर्फ 80 प्रतिशत फिट है और आप पांच गेंदबाजों के साथ उतर रहे हैं, तो जोखिम बढ़ जाता है। मुझे लगता है कि एक टीम के तौर पर हमें अपनी फिटनेस और इस पूरे पहलू में सुधार करने की जरूरत है।”

US Iran War News: क्या ईरान ने अमेरिका के सामने किया सरेंडर? ट्रंप के मंत्री ने तेहरान से बातचीत के दिए संकेत

US Iran War News: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को कई माध्यमों से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि ईरान बातचीत करना चाहता है। हालांकि, ईरानी नेतृत्व के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद भी बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। CNN से बातचीत में रुबियो ने कहा, “हमें कई चैनलों के जरिए ईरान की ओर से बातचीत की इच्छा के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन वहां की सत्ता और नेतृत्व के भीतर इस मुद्दे को लेकर विभाजन भी बढ़ रहा है।”

सैन्य कार्रवाई के बीच कूटनीति के संकेत

रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच लगातार सैन्य हमले जारी हैं। अमेरिका का कहना है कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर हमलों के लिए किया जा रहा है।

इससे पहले भी रुबियो ने आरोप लगाया था कि ईरान क्षेत्रीय संघर्ष में हॉर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर रहा है। उन्होंने अन्य देशों से भी वैश्विक समुद्री व्यापार और जहाजरानी की सुरक्षा के लिए अधिक सहयोग देने की अपील की।

दुनिया के देशों से सहयोग की अपील

फिलीपींस रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि अमेरिका समुद्री रूट्स की सुरक्षा के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा। लेकिन अन्य देशों को भी उपकरण, संसाधन और आर्थिक सहयोग देकर इस जिम्मेदारी में भागीदारी करनी चाहिए।

लगातार नौवीं रात अमेरिकी हमले

ईरान पर अमेरिकी हमलों का सिलसिला लगातार नौवीं रात भी जारी रहा। ईरानी मीडिया के मुताबिक, देश के दक्षिणी तटीय इलाकों में कई धमाके हुए। इसके अलावा मौजूदा अभियान के दौरान पहली बार उत्तर-पश्चिमी शहर तबरीज (Tabriz) में भी विस्फोटों की खबर सामने आई है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सैन्य अभियान का दायरा अब और बढ़ाया जा रहा है।

ट्रंप बोले- फिर किया जोरदार हमला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताजा हमलों के बाद कहा कि यह कार्रवाई उन तीन महान देशभक्तों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। ‘फीफा क्लब विश्व कप’ फाइनल से वॉशिंगटन लौटने के बाद ट्रंप ने कहा, “हमने आज रात फिर उन पर बहुत जोरदार हमला किया।”

बातचीत का रास्ता अब भी खुला

हालांकि, सैन्य संघर्ष लगातार तेज हो रहा है, लेकिन मार्को रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका अब भी कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, सैन्य कार्रवाई और बातचीत दोनों प्रक्रियाएं एक साथ चल सकती हैं, और यदि ईरान वार्ता के लिए आगे आता है तो अमेरिका उस विकल्प पर भी विचार करने को तैयार है।

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