बादलों के बीच उड़ने का लेना हो मजा, तो इन 7 पैराग्लाइडिंग स्पॉट्स को जरूर करें एक्सप्लोर!

पैराग्लाइडिंग के लिए दुनिया की इन शानदार जगहों पर उड़ान भरना किसी सपने से कम नहीं है। यहां आसमान से दिखने वाले पहाड़, समुद्र, झीलें और खूबसूरत घाटियां आपको नेचर का एक अनोखा नजारा दिखाती हैं। अगर आप भी एडवेंचर के साथ घूमने और नई जगहों को अलग अंदाज में एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो इन डेस्टिनेशन के बारे में जरूर जानें:

1. गुदौरी, जॉर्जिया

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जॉर्जिया का गुदौरी कॉकस पर्वतों के बीच स्थित एक खूबसूरत पैराग्लाइडिंग डेस्टिनेशन है। यहां उड़ान भरते समय बर्फ से ढके पहाड़ों, हरी घाटियों और प्राकृतिक नजारों का शानदार एक्सपीरियंस मिलता है। पैराग्लाइडिंग के अलावा यहां रूस-जॉर्जिया फ्रेंडशिप मॉन्यूमेंट, काज़बेगी और गेर्गेती ट्रिनिटी चर्च जैसी जगहें घूम सकते हैं। गुदौरी घूमने के लिए 3 से 4 दिन का समय मिलता है। यहां पहुंचने के लिए राजधानी टिब्लिसी से टैक्सी, बस या टूर पैकेज लिया जा सकता है। खाने में जॉर्जियन खाचापुरी, खिंकाली, लोबियो और स्थानीय वाइन जरूर ट्राई करनी चाहिए।

2. माउई, USA

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अमेरिका के हवाई आइलैंड में माउई समुद्र, पहाड़ और ज्वालामुखी लैंडस्केप के कारण पैराग्लाइडिंग के लिए बेहद खास जगह है। यहां पैराग्लाइडिंग करते समय प्रशांत महासागर और खूबसूरत तटीय इलाकों का शानदार नजारा दिखाई देता है। माउई में हालेआकाला नेशनल पार्क, रोड टू हाना, वैलिया बीच और मोलोकिनी क्रेटर जैसी जगहें घूमने लायक हैं। खाने में हवाईयन पोके बाउल, कलुआ पोर्क, ताजा सी-फूड और हवाईयन कॉफी काफी पॉपुलर हैं।इस जगह को अच्छी तरह देखने के लिए 5 से 7 दिन का समय रखें। यहां घूमने के लिए कार किराए पर लेना सबसे माउंटेन रहता है।

3. बीर बिलिंग, भारत

पैराग्लाइडिंग के लिए हिमाचल के बीड़ बिलिंग से बढ़िया नहीं है कोई जगह, यहां के बारे में सबकुछ जानें - Bir Billing Is The Best Paragliding Place Of India At Himachal Pradesh -

हिमाचल प्रदेश का बीर बिलिंग भारत की सबसे फेमस पैराग्लाइडिंग जगहों में से एक है और इसे भारत की पैराग्लाइडिंग राजधानी भी कहा जाता है। यहां धौलाधार मलौण्टाइन रेंज, हरी घाटियां और छोटे गांवों का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। पैराग्लाइडिंग के अलावा यहां बीर मोनेस्ट्री, चोकलिंग मोनेस्ट्री, पालपुंग शेराब्लिंग मठ और बरोट वैली घूम सकते हैं। यहां घूमने के लिए 3 से 5 दिन काफी हैं। दिल्ली या चंडीगढ़ से बस, ट्रेन और टैक्सी के जरिए पहुंचा जा सकता है। यहां तिब्बती मोमोज, थुकपा, हिमाचली धाम, मैगी और स्थानीय चाय जरूर चखें।

4. पोखरा, नेपाल

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नेपाल का पोखरा हिमालय, झीलों और पहाड़ों के खूबसूरत मेल के कारण दुनिया की लोकप्रिय पैराग्लाइडिंग जगहों में शामिल है। यहां सारंगकोट से पैराग्लाइडिंग करते समय अन्नपूर्णा माउंटेन और फेवा झील का शानदार व्यू दिखाई देता है। खाने में नेपाली थाली, मोमो, थुकपा और सेल रोटी काफी फेमस हैं। पोखरा में फेवा झील, डेविस फॉल, वर्ल्ड पीस पैगोडा और इंटरनेशनल माउंटेन म्यूजियम घूम सकते हैं। यहां के लिए 4 से 5 दिन का समय अच्छा रहता है। काठमांडू से बस या फ्लाइट द्वारा पहुंच सकते हैं और शहर में टैक्सी, बाइक या पैदल घूम सकते हैं।

5. शैमोनिक्स, फ्रांस

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फ्रांस का शैमोनिक्स आल्प्स पर्वतों के बीच बसा एक शानदार एडवेंचर डेस्टिनेशन है। यहां पैराग्लाइडिंग करते समय मों ब्लांक पर्वत, ग्लेशियर और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। यहां मों ब्लांक, ऐगुई दु मिदी केबल कार और मेर दे ग्लास ग्लेशियर जैसी जगहें घूम सकते हैं। इस क्षेत्र को देखने के लिए 4 से 6 दिन का समय रखें। जिनेवा से ट्रेन या बस द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। खाने में फ्रेंच चीज, फोंड्यू, रैकलेट, क्रेप्स और फ्रेंच पेस्ट्री का स्वाद जरूर लें।

6. ओलुडेनिज़, तुर्की

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तुर्की का ओलुडेनिज़ समुद्र के ऊपर पैराग्लाइडिंग के लिए दुनिया भर में पॉपुलर है। यहां बाबादाग पर्वत से पैराग्लाइडिंग करते समय नीले समुद्र, सफेद समुद्र तट और खूबसूरत खाड़ी का नजारा देखने को मिलता है। यहां ब्लू लगून, बटरफ्लाई वैली, कयाकॉय गांव और बाबादाग पर्वत घूम सकते हैं। इस जगह को देखने के लिए 3 से 5 दिन ठीक हैं। दलामान एयरपोर्ट से टैक्सी या बस द्वारा पहुंच सकते हैं। यहां तुर्किश कबाब, बकलावा, गोजलेमे, मेजे प्लेटर और तुर्किश चाय काफी पॉपुलर हैं।

7. इंटरलाकेन, स्विट्ज़रलैंड

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स्विट्ज़रलैंड का इंटरलाकेन झीलों और आल्प्स पर्वतों के बीच बसा एक खूबसूरत शहर है। यहां पैराग्लाइडिंग के दौरान बर्फ से ढकी चोटियां, हरी घाटियां और नीली झीलों का शानदार व्यू मिलता है। यहां जुंगफ्राउयोख, लेक थून, लेक ब्रीएंज, हार्डर कुल्म और ग्रिंडेलवाल्ड घूमने लायक जगहें हैं। इंटरलाकेन के लिए 4 से 6 दिन का समय अच्छा रहेगा। स्विट्ज़रलैंड की ट्रेन व्यवस्था से यहां घूमना आसान है। खाने में स्विस फोंड्यू, रैकलेट, रोस्ती और स्विस चॉकलेट जरूर खाएं।

8. क्वीन्सटाउन, न्यूज़ीलैंड

Tandem Paragliding Experience in Interlaken - Klook

 

न्यूज़ीलैंड का क्वीन्सटाउन एडवेंचर लवर के लिए दुनिया की बेहतरीन जगहों में से एक है। यहां पैराग्लाइडिंग के दौरान पहाड़ों, झीलों और खूबसूरत घाटियों का शानदार नजारा दिखाई देता है। यहां लेक वाकाटिपु, बॉब्स पीक, मिलफोर्ड साउंड और ग्लेनॉर्की घूम सकते हैं। यहां खाने में न्यूजीलैंड लैम्ब, मीट पाई, सी-फूड और लोकल हनी काफी पॉपुलर हैं। क्वीन्सटाउन को अच्छे से देखने के लिए 5 से 7 दिन रखें। यहां कार किराए पर लेकर घूमना सबसे अच्छा ऑप्शन है।

9. वैले डे ब्रावो, मेक्सिको

Valle Tours — Cloudsurf Paragliding

मेक्सिको का वैले डे ब्रावो पहाड़ियों, जंगलों और झील से घिरा हुआ खूबसूरत पैराग्लाइडिंग डेस्टिनेशन है। यहां पैराग्लाइडिंग के दौरान झील और हरियाली का शानदार दृश्य देखने को मिलता है। यहां लेक एवांडारो, मॉनार्क बटरफ्लाई रिजर्व और पुराने शहर की गलियां घूम सकते हैं। यहां घूमने के लिए 2 से 4 दिन पर्याप्त हैं। मेक्सिको सिटी से बस या कार द्वारा पहुंचा जा सकता है। आप जब भी यहां जाये खाने में टैकोस, तमालेस, एनचिलाडास और मैक्सिकन कॉफी जरूर ट्राई करें।

10. मिराफ्लोरेस, पेरू

पैराग्लाइडर पायलटों के लिए वैले डे ब्रावो | क्रॉस कंट्री मैगज़ीन

पेरू के लीमा शहर का मिराफ्लोरेस समुद्र किनारे पैराग्लाइडिंग के लिए पॉपुलर है। यहां पहाड़ों की जगह समुद्र के ऊपर उड़ने का अनोखा एक्सपीरियंस मिलता है, जहां प्रशांत महासागर और शहर का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। यहां मालेकॉन बोर्डवॉक, लव पार्क, लार्को म्यूजियम और पार्के केनेडी घूम सकते हैं। इस जगह के लिए 2 से 3 दिन काफी हैं। यहां जाने का जब भी आपको मौका मिले खाने में पेरूवियन सेविचे, लोमो साल्टाडो, एंटीचूकोस और पिस्को सॉर जरूर चखें।

इन सभी पैराग्लाइडिंग डेस्टिनेशन पर रोमांच के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता, लोकल संस्कृति और स्वादिष्ट खाने का एक्सपीरियंस मिलता है। अगर आप पहली बार पैराग्लाइडिंग करना चाहते या फिर एक्सपेरिएंस्ड एडवेंचर लवर हो सभी के लिए जगहें शानदार एक्सपीरियंस देती हैं।

SIP Calculator: ₹500, ₹1,000 या ₹5,000… कितनी रकम से SIP शुरू करें? जानिए आसान फॉर्मूला

SIP Calculator: म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करने वाले ज्यादातर लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है। आखिर SIP की शुरुआत कितने रुपये से करनी चाहिए? ₹500, ₹1,000, ₹5,000 या इससे भी ज्यादा?

इसका कोई एक जवाब नहीं है। सही SIP वही है, जिसे आप हर महीने बिना रुके लंबे समय तक जारी रख सकें। निवेश की दुनिया में बड़ी रकम से शुरुआत करने से ज्यादा जरूरी है नियमित निवेश करना। यही आदत आगे चलकर बड़ी पूंजी बना सकती है।

₹500 की SIP से भी हो सकती है शुरुआत

आज ज्यादातर म्यूचुअल फंड में सिर्फ ₹500 महीने से SIP शुरू की जा सकती है। अगर आप पहली बार निवेश कर रहे हैं या नौकरी की शुरुआत की है, तो छोटी रकम से शुरुआत करना बिल्कुल सही फैसला हो सकता है।

मान लीजिए आपने 25 साल की उम्र में ₹500 महीने की SIP शुरू की। अगर आपको औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है और आप 35 साल तक निवेश जारी रखते हैं, तो आपके पास 32 लाख का फंड तैयार हो जाएगा। इसमें कुल निवेश सिर्फ ₹2.10 लाख का होगा यानी आपको करीब 30 लाख मुनाफा मिलेगा।

₹1,000 या ₹5,000 की SIP में कितना फर्क पड़ता है?

अब मान लीजिए निवेश की अवधि 25 साल है और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है।

मासिक SIPकुल निवेशअनुमानित फंड
₹500₹1.50 लाख₹9.5 लाख
₹1,000₹3 लाख₹19 लाख
₹5,000₹15 लाख₹95 लाख

यही कंपाउंडिंग की ताकत है। जितनी बड़ी SIP और जितना लंबा समय, उतना बड़ा फंड बनने की संभावना।

कंपाउंडिंग आखिर होती क्या है?

मान लीजिए आपने ₹5,000 की SIP शुरू की। पहले साल आपको रिटर्न मिला। अगले साल सिर्फ आपके निवेश पर ही नहीं, बल्कि पहले साल के मुनाफे पर भी रिटर्न मिलने लगता है। इसे ही कंपाउंडिंग कहते हैं।

यानी आपका पैसा खुद भी कमाई करने लगता है। इसलिए निवेश में समय सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।

मार्केट गिर जाए तो क्या SIP बंद कर देनी चाहिए?

यही सबसे बड़ी गलती होती है। जब बाजार गिरता है, तब आपकी SIP से ज्यादा यूनिट खरीदने को मिलती हैं। बाद में बाजार संभलता है, तो यही यूनिट बेहतर रिटर्न दे सकती हैं।

उदाहरण के लिए, पहले महीने NAV ₹100 था। ₹5,000 में 50 यूनिट मिलीं। अगले महीने बाजार गिरा और NAV ₹80 हो गया। अब ₹5,000 में 62.5 यूनिट मिल गईं। यानी बाजार गिरने पर भी आपका निवेश आपके लिए ज्यादा यूनिट खरीद रहा होता है। इसलिए गिरावट हमेशा नुकसान नहीं होती।

सैलरी बढ़े तो SIP भी बढ़ाइए

अगर हर साल आपकी सैलरी बढ़ती है, तो SIP भी बढ़ानी चाहिए। इसे Step-Up SIP कहते हैं। मान लीजिए आपने ₹5,000 महीने की SIP शुरू की। अगर 25 साल तक रकम नहीं बढ़ाई, तो 12% सालाना रिटर्न के हिसाब से फंड करीब ₹95 लाख बन सकता है।

लेकिन अगर हर साल SIP सिर्फ 10% बढ़ाते रहे, तो यही फंड करीब ₹2 करोड़ तक पहुंच सकता है। यानी सिर्फ SIP बढ़ाने की आदत से आपका फंड दोगुना से भी ज्यादा हो सकता है।

कितनी SIP आपके लिए सही है?

इसका आसान नियम है। अगर आपकी मासिक कमाई ₹40,000 है, तो कोशिश करें कि कम से कम 10% यानी ₹4,000 निवेश करें। अगर अभी इतना मुमकिन नहीं है, तो ₹500 या ₹1,000 से शुरुआत करें। सबसे जरूरी बात यह है कि निवेश शुरू हो। बाद में कमाई बढ़ने पर SIP भी बढ़ाते रहें।

निवेश शुरू करने से पहले ये 5 बातें याद रखें

  • जितनी SIP आराम से चला सकें, उतनी ही शुरू करें।
  • कम से कम 10-15 साल का नजरिया रखें।
  • बाजार गिरने पर SIP बंद न करें।
  • हर साल SIP में 10-15% की बढ़ोतरी करें।
  • किसी लक्ष्य के साथ निवेश करें, सिर्फ रिटर्न देखकर नहीं।

SIP vs SSY: सुकन्या समृद्धि और SIP में हर महीने ₹2000 निवेश करें तो किसमें ज्यादा पैसा बनेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

ITR Filing 2026: NPS, PPF या EPF… रिटायरमेंट के लिए कौन-सी स्कीम टैक्स में सबसे ज्यादा फायदा दिलाएगी?

ITR Filing 2026: रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय ज्यादातर लोग NPS, PPF और EPF में से किसी एक या एक से ज्यादा स्कीम में निवेश करते हैं। तीनों का मकसद रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ना है। हालांकि, टैक्स छूट, ब्याज और निकासी के नियम अलग-अलग हैं। साथ ही, यह भी मायने रखता है कि आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है या नया।

NPS में सबसे ज्यादा टैक्स छूट

अगर आप पुराना टैक्स रिजीम चुनते हैं, तो NPS सबसे ज्यादा टैक्स बचाने वाली स्कीम बन सकती है।

NPS Tier-I में निवेश पर Section 80CCD(1) के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है। यह सीमा Section 80C का हिस्सा है। इसके अलावा Section 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 की अतिरिक्त छूट भी मिलती है। यानी NPS के जरिए कुल ₹2 लाख तक टैक्स डिडक्शन का फायदा लिया जा सकता है।

अगर आप नया टैक्स रिजीम चुनते हैं, तो अपनी तरफ से किए गए निवेश पर छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, अगर आपका नियोक्ता NPS में योगदान देता है, तो Section 80CCD(2) के तहत बेसिक सैलरी और DA के 14% तक की रकम पर टैक्स छूट मिल सकती है।

रिटायरमेंट के समय NPS की 60% रकम टैक्स-फ्री निकाली जा सकती है। बाकी 40% से एन्युटी खरीदनी होती है। उस पर मिलने वाली पेंशन आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होती है।

PPF में पूरा टैक्स-फ्री फायदा

PPF को EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी की स्कीम माना जाता है। पुराने टैक्स रिजीम में PPF में निवेश पर Section 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है। इसके अलावा मिलने वाला ब्याज भी टैक्स-फ्री रहता है और मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम पर भी कोई टैक्स नहीं लगता।

अगर आपने नया टैक्स रिजीम चुना है, तो नए निवेश पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, ब्याज और मैच्योरिटी की रकम पहले की तरह टैक्स-फ्री रहेगी।

EPF का फायदा नौकरीपेशा लोगों को

EPF संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है।

पुराने टैक्स रिजीम में कर्मचारी का EPF योगदान Section 80C के तहत टैक्स छूट के दायरे में आता है। तय शर्तें पूरी होने पर ब्याज और निकासी भी टैक्स-फ्री रहती है। हालांकि, अगर समय से पहले पैसा निकाला जाता है, तो कुछ मामलों में टैक्स देना पड़ सकता है।

पुराने और नए टैक्स रिजीम में क्या फर्क?

अगर आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है, तो NPS, PPF और EPF तीनों में टैक्स बचाने का फायदा मिलता है। इनमें भी NPS सबसे आगे है, क्योंकि इसमें ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है।

वहीं, नए टैक्स रिजीम में Section 80C की छूट नहीं मिलती। इसलिए PPF और EPF में निवेश पर टैक्स डिडक्शन का फायदा नहीं मिलेगा। NPS में भी सिर्फ नियोक्ता के योगदान पर ही टैक्स छूट मिलती है।

किसे स्कीम को चुनना बेहतर?

अगर आपका लक्ष्य सबसे ज्यादा टैक्स बचाना है, तो पुराने टैक्स रिजीम में NPS बेहतर विकल्प हो सकता है। अगर आप पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न चाहते हैं, तो PPF मजबूत विकल्प है। वहीं, नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF रिटायरमेंट बचत का अहम हिस्सा बना रहता है।

हालांकि, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेहतर रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए इन तीनों का संतुलित इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में बनाई मजबूत पहचान : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi stated that over past nine years Uttar Pradesh has established strong identity among country's leading economies

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कानून का राज स्थापित होने से निवेश और विकास को मिली नई रफ्तार 

– सपा सरकार पर सीएम का तीखा हमला, बोले- सरकारी खजाने की हुई लूट और विकास रहा अधूरा

– यूपी में तीसरी बार बनेगी एनडीए की सरकार, भाजपा के नेतृत्व में लगेगी हैट्रिक

– उत्तर प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई, सवा तीन करोड़ लोगों को मिला रोजगार

– नौ सालों में दंगा, कर्फ्यू और माफिया संस्कृति से मुक्त हुआ उत्तर प्रदेश

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार ने नौ वर्षों के कार्यों, कानून-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, कृषि, निवेश और बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव लाने में सफल रही है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पहचान, सुरक्षा और विकास के संकट से जूझ रहा था, लेकिन पिछले नौ वर्षों में राज्य ने देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। कहा कि यूपी में पहली बार कोई सरकार तीसरी बार लगातार रिपीट होगी। एनडीए सरकार इस बार यूपी में हैट्रिक लगाएगी। मुख्यमंत्री बुधवार को लखनऊ में 'आज तक' न्यूज चैनल के विशेष कॉन्क्लेव 'पंचायत आज तक उत्तर प्रदेश' को संबोधित कर रहे थे। 
 

सीएम ने कहा कि 9 वर्षों की कार्यपद्धति और रिपोर्ट कार्ड भी जनता के सामने है। जनता जनार्दन फैसला करने को तैयार है। 2003 से 2017 तक सपा और अन्य सरकारों की कार्यपद्धतियां भी सबके सामने है। हम लोगों ने पीएम मोदी जी के विजनरी नेतृत्व में विकसित भारत को आगे बढ़ाने का काम किया।

डबल इंजन सरकार का लाभ हमने लिया है। इसमें यूपी सफल हुआ है। विकसित उत्तर प्रदेश की संकल्पना को केवल डबल इंजन की भाजपा की सरकार ही पूरा कर सकती है। गत वर्ष एक रिकॉर्ड टूटा था, इस बार एक नया टूटने वाला है। यूपी में पहली बार कोई सरकार तीसरी बार लगातार रिपीट करेगी। भाजपा के नेतृत्व में एनडीए सरकार इस बार यूपी में हैट्रिक लगाएगी, इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

 

सपा सरकार में लूटा गया सरकारी खजाना

सीएम ने कहा कि सपा का विकास का मॉडल होता तो यूपी कबका डूब गया होता। सैफई खानदान यूपी को तबाह कर रहा था, उसका नमूना जेपीएनआईसी बिल्डिंग है। सपा ने जेपीएनआईसी को बनाने के लिए 200 करोड़ का डीपीआर बनाया था, लेकिन 800 करोड़ रुपए खर्च हो जाने के बाद भी अधूरा है। आदि गंगा की मान्यता वाली गोमती के रिवर फ्रंट के नाम पर 166 करोड़ रुपए का डीपीआर किया था लेकिन 1400 करोड़ रुपए खर्च हो गए। साथ ही कार्य भी अधूरा है। सपा सरकार में केवल सरकारी खजाना लूटा जा रहा था।

 

सीएम ने कहा कि 2016 दिसंबर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का तत्कालीन मुख्यमंत्री ने शिलान्यास किया। इसके बाद 15,200 करोड़ की लागत तय की गई। सरकार बदलने के बाद मई 2017 में उसकी समीक्षा की तो जमीन ही न होने का पता चला। इसमें बड़ी बेइमानी का पता चला तो टेंडर को रद्द किया गया। दो वर्ष जमीन खरीदने में लगे। 2018 में हमारे पास 90 प्रतिशत जमीन आ गई। इसके बाद 15,200 करोड़ का टेंडर मात्र 11,800 करोड़ रुपए का हो गया। इसी बजट में सपा सरकार से बेहतर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया गया। 

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सीएम ने कहा कि यूपी की एक्साइस पॉलिसी में भी डैकती डाली जाती थी। पहले मात्र 12 हजार करोड़ रुपए की एक्साइस ड्यूटी आती थी। हमारी सरकार के लिए कठिन था, लेकिन पॉलिसी की बदल दी। आज पांच गुना ज्यादा 63,000 करोड़ रुपए एक्साइस ड्यूटी के रूप में सरकार को मिल रहे हैं।

 

विपक्ष ने राम मंदिर के विरोध में अधिवक्ता खड़े किए

सीएम ने कहा कि 2017 से पहले जब यूपी में सुरक्षा नहीं थी तो त्योहार के पहले कर्फ्यू लग जाता था, उपद्रव शुरू हो जाता है। आज हर समुदाय का पर्व व त्योहार शांतिपूर्ण ढ़ंग से पूरा हो रहा है। जिन लोगों ने अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई, वह आस्था की बात कर रहे हैं। साथ ही पवित्र हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाई। देश के उच्चतम न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल कर रहे थे कि भगवान श्रीराम व भगवान श्रीकृष्ण हुए ही नहीं। राम मंदिर के विरोध में अपने अधिवक्ता खड़े किए। जिन लोगों ने देश के खजाने को लूटा और पहचान का संकट खड़ा किया, आज उनको अयोध्या की चोरी दिख रही है लेकिन अपनी डकैती नहीं दिखती। 

 

अयोध्या चढ़ावा मामले में की गई कार्रवाई, हिंदू आस्था पर प्रहार करना न्याय संगत नहीं

सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या की घटना निश्चित ही सभी रामभक्तों को आहत करती है। वह एक इंडिपेंडेंट ट्रस्ट है, जिसमें सरकार को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया। एसआईटी की रिपोर्ट आते ही ट्रस्ट ने कार्रवाई शुरू की, जो लोग चोरी करते हुए पकड़े गए उनकी व सहयोगियों की गिरफ्तारी हुई। नैतिक आधार पर भी दो इस्तीफे हुए, लेकिन उसके नाम पर अयोध्या को, श्रीराम जन्मभूमि को बदनाम करना अथवा हिंदू आस्था पर प्रहार करना, ये न्याय संगत नहीं है।

यूपी में जब यह आस्था के केंद्र देश के लिए मॉडल बन रहे और यूपी पहचान में आगे बढ़ रहा हैं तो सपा को पीड़ा हो सकती है। आस्था के केंद्रों से अर्थव्यवस्था को गति मिली है। इससे फूल बेचने वाले, रिक्शा चलाने वाले, होटल व टैक्सी संचालकों की भी आर्थिक स्थिति सुधरी। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान एक नाविक ने 30 करोड़ रुपए की कमाई की थी, लेकिन ये उनको अच्छा नहीं लगाता है।

 

दोनों युवराजों को चांदी के चम्मच से खाने की आदत

सीएम ने कहा कि समृद्धि केवल दो खानदानों ने अपने नाम पर पेटेंट करा लिया है। ये एक गरीब की पीड़ा को नहीं समझ सकते। दोनों राजकुमारों ने जहां जन्म लिया है, वहां चांदी के चम्मच से खाने की आदत रही है। देर से सोकर उठने की आदत रही है। गर्मी, बरसात की पीड़ा कैसी होती है, इन्हें नहीं पता है। दोनों फीफा कप का आनंद लेने ऑस्ट्रेलिया और टूरिस्ट वीजा पर यूएस की यात्रा पर गए हैं। ये किसके पैसे से विदेश की यात्रा कर रहे हैं। यहां समाज को बांटने का काम करते है, लेकिन जनता सारी करतूतों को जानती है।

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मेरे साथ दिल्ली या गोरखपुर से कोई अलग से टीम नहीं आई

सीएम ने कहा कि मुझे एक लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में काम करने से पहले एक सांसद के रूप में उत्तर प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्र से देश की संसद में प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हुआ था। विभिन्न मुद्दों के लिए जूझता था और संसद में उठाने का प्रयास करता था। कभी-कभी निराशा भी होती थी। लगता था कि बीमारी व भूख से मरना, माफिया के सामने लोगों का नतमस्तक होना, बिजली व सामान्य जनसुविधाओं के लिए लोगों को तरसना, युवाओं के सामने पहचान का संकट, किसानों की आत्महत्या उत्तर प्रदेश की नियति बन गई है। पीड़ा के साथ लगता था कि क्या इन समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता है।

जब पार्टी ने मुझे शासन-सत्ता का संचालन करने का अवसर दिया और अब उसके सकारात्मक परिणाम को देखता हूं। ऐसा नहीं की मेरे साथ दिल्ली या गोरखपुर से कोई अलग से टीम आई हो। मेरे साथ कोई भी व्यक्ति नहीं आया। गोरखपुर से पांच बार से सांसद रहा, वहां से भी एक व्यक्ति नहीं आया। जो टीम लखनऊ में मुझे मिली, उन्हीं के साथ काम करने का प्रयास किया। उसके परिणाम सबके सामने है। 

 

सीएम ने कहा कि यूपी को इन 9 वर्षों में पहचान के संकट से उबारा है। यूपी की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त की है। महिला कर्मचारियों की उपस्थिति तीन गुना बढ़ी है। बीमारू राज्य की श्रेणी में रहने वाला उत्तर प्रदेश 9 वर्षों में देश के टॉप तीन अर्थव्य़वस्था के रूप में स्थापित हुआ है। ऐसे कौन से कारण थे, जो यूपी में नहीं हो सकते थे।

 

2014 के पहले भी थी एक डबल इंजन सरकार 

सीएम ने कहा कि 2014 के पहले भी एक प्रकार की डबल इंजन की सरकार थी। केंद्र में कांग्रेस व यूपीए की सरकार थी और यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। दोनों मिलकर काम कर रहे थे लेकिन जनता में विश्वास नहीं था। इन दोनों की स्थिति एक तरफ कुआं और खाई जैसी थी। आज ये लोग जो उपदेश देते हैं, वह 2014 से पहले अंगीकार किया होता तो हाशिए पर नहीं गए होते।

 

यूपी का नौजवान अपनी पहचान छिपाता था, उसे नौकरी नहीं मिलती थी। उसने आवेदन किया तो योग्यता के बाद भी वो चयनित नहीं होता था। क्योंकि नौकरी पर कुछ चंद जनपदों और लोगों का कब्जा था। 2017 के पहले सुरक्षा की स्थिति बदलहाल थी, बेटी और व्यापारी सुरक्षित नहीं थे। सत्ता के समानांतर माफियाओं की सरकारें चलती थीं। मीडिया, आम आदमी, व्यापारी, बेटी, उद्यमी कोई भी सुरक्षित नहीं था। व्यापारी और आम नागरिक भी घर से निकलता था तो ईश्वर से प्रार्थना करता था कि मुझे शाम को वापस परिवार का मुंह देखने का अवसर मिले।

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माफियाओं के साथ आज भी उन लोगों की सहानुभूति

सीएम ने कहा कि उद्यमी निवेश नहीं करना चाहता था। न सरकार की नीति थी और न नीयत थी। अराजकता चरम पर थी, माफिया के सामने सरकारें नाक रगड़ती हुई दिखाई देती थी। आज भी उनके भाषण सुनते होंगे, वे बोलते हैं कि सत्ता में आ गए तो जांच कराएंगे कि माफिया मारे क्यों जा रहे हैं। आज भी उन लोगों की सहानुभूति उन माफिया और उनके गुर्गों के प्रति है, जो जेल में है या जहन्नुम की यात्रा पर जा चुके हैं। उनकी सहानुभूति आज भी यूपी के नागरिकों के प्रति नहीं दिखती है।

 

23 वर्षों का रिपोर्ट कार्ड जनता के बीच ले जाएं

सीएम ने कहा कि 2003 से 2026 के 23 वर्षों के रिपोर्ट कार्ड को लेकर जनता के बीच लेकर जाइए। पहले पांच साल मुलायम सिंह के, अगले पांच साल मायावती के व अगले पांच वर्ष अखिलेश के और पिछले 9 वर्षों के हमारे कार्यकाल के, जनता से उनकी संतुष्टि के बारे में पूछिए। आपको स्वर्गीय राजीव गांधी का वह वाक्य याद आज जाएगा जिसमें निराश होकर कहा था कि हम 100 रुपए भेजते है, लेकिन नीचे 15 रुपए ही पहुंचता है। आखिर 85 रुपए कौन खा जा रहा था।

ये किसी छात्र-छात्रा की छात्रवृत्ति, युवा की नौकरी, बुर्जुग-निराश्रित महिला की पेंशन, गरीब का अनाज, बहन-बेटी के लिए बनने वाले शौचालय का पैसा था। जिस 85 प्रतिशत पैसे पर पिछली सरकारें डकैती डालने का काम करती थीं। आज डीबीटी के माध्यम से 100 रुपए दिल्ली या लखनऊ से भेजने पर सीधे लाभार्थी के खाते में जाता है। सभी तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंच रहा है। सीएम योगी ने कहा कि संकल्प और इच्छाशक्ति के दम पर देश की सबसे बड़ी आबादी का राज्य दंगा मुक्त, उपद्रव मुक्त, कर्फ्यू मुक्त और अपनी परांपरागत पहचान से युक्त हो सकता है, यह यूपी ने पिछले 9 वर्षों में करके दिखाया है।

 

अब इंसेफेलाइटिस से मौतें नहीं होतीं

सीएम ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में पूर्वी उत्तर प्रदेश में हर वर्ष इसी सीजन में इंसेफेलाइटिस से मौतें होती थीं। हर परिवार सशंकित रहता था कि पता नहीं कौन सा बच्चा इसकी चपेट में आ जाए। हर वर्ष 1200 से 1500 मौतें होती थीं। आज इंसेफेलाइटिस से होनी वाली मौतें शून्य पर पहुंच चुकी हैं। भूख से मौतें अलग से होते थीं, आज उन्हें 100 प्रतिशत सैचुरेट कर चुके हैं। उन्हें जमीन के पट्टे मिले, उनका आवास बना, आयुष्मान कार्ड, रसोई गैस के सिलेंडर और रोजगार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 

 

परंपरागत उद्यम फिर जीवित हुए

सीएम ने कहा कि परंपरागत उद्यम फिर से जीवित हो चुके हैं, जिन्हों कभी यूपी को पहचान दिलाई थी। आजादी के तत्काल बाद 1950 में देश की अर्थव्यवस्था में यूपी का योगदान 14 प्रतिशत था, जो 2017 से पहले घटकर मात्र 7 प्रतिशत के आस-पास रह गया था। यूपी अवनति की ओर था। तब अन्नदाता को पानी, बीज, बिजली नहीं मिलती थी। किसान खेत में जाने से डरता था। वहीं पैदावार फसल का दाम किसानों को नहीं मिलता था, क्योंकि इसका फायदा बिचौलिए उठाते थे। कृषि यूपी का आधार है लेकिन सरकार के स्तर पर कोई प्रोत्साहन नहीं था।

मैन्युफैक्चरिंग पावर जब परंपरागत उद्यम के साथ जुड़ती है, तब अर्थव्यवस्था को तेज करती है। मैन्युफैक्चरिंग के लिए हमारे पास एमएसएमई का बेहतरीन नेटर्वक था लेकिन पिछली सरकारों के इंस्पेक्टर राज ने उसे तबाह कर दिया था। लोग विभागीय उत्पीड़न के शिकार होते थे। उस समय उद्यमी, कारीगर बन गया और किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गया था। ऐसे में यूपी की अर्थव्यवस्था को डूबना ही था।

 

कृषि विकास दर को 18 प्रतिशत तक पहुंचाया

सीएम योगी ने कहा कि 2017 से 2026 के बीच उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है। अमेरिका-ईरान व रूस-यूक्रेन का युद्ध चल रहा है, उर्वरक की कमी स्वाभाविक रूप से हो जानी चाहिए थी, लेकिन यूपी में किसान को फर्टिलाइजर, बीज, कीटनाशक समय पर मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के अंदर 10 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने 24 लाख हेक्टेयर जमीन को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में अप्रूव हुई सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना को यूपी में डबल इंजन की सरकार ने पूरा कराया। उन्होंने बुंदेलखंड की अर्जुन सहायक परियोजना का भी जिक्र किया। बताया कि पहले महोबा के किसानों को प्रति बीघा 5 हजार रुपए मिलता था, आज उन्हीं अन्नदाता किसानों को 50 हजार रुपए मिल रहा है। उन्होंने बाणसागर परियोजना की सफलता की भी चर्चा की।

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बिचौलियों को हटाकर किसानों को दिलाया फायदा

सीएम ने कहा कि यूपी के किसानों को 10 घंटे बिजली खेती के लिए उपलब्ध कराई जा रही है, साथ ही बिजली उनके लिए मुफ्त है। प्रदेश में 16 लाख प्राइवेट ट्यूबवेल हैं, सबकी बिजली मुफ्त कर दी गई है। 2017 में 10 वर्ष का गन्ना मूल्य का भुगतान बाकी था। गन्ना किसानों को अब तक 3.23 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। 300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल गन्ना का दाम किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। सीएम ने कहा कि आज 122 चीनी मिलों का संचालन किया जा रहा है। 105 चीनी मिलें ऐसी हैं, जहां से 4 दिन में गन्ना मूल्य का भुगतान किसानों को हो रहा है।

शेष में प्रयास किया जा रहा है कि वह 15 दिन में गन्ना मूल्य का भुगतान कर दें। आज किसान की किसी भी उपज को बिचौलियों की जगह उन्हीं से सरकार द्वारा खरीदा जा रहा है। अगर बाजार में अच्छा दाम है तो किसान स्वतंत्र रूप से वहां बेच सकता है। अगर बाजार में उचित दाम नहीं मिल रहा है तो एमएसपी में लागत के डेढ़ गुना दाम पर सरकार किसान से खरीदेगी और फिर उसे अपने स्तर पर बाजार तक पहुंचाने का काम करेगी।

आज किसान के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना समेत हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। खेती में जो विकास दर बढ़ी है, उस विकास दर के पीछे डबल इंजन सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का परिणाम देखने को मिल रहा है।

 

सीएम ने कहा कि पहले एमएसएमई दम तोड़ चुका था, कारीगर पलायन कर चुके थे, अब वह फिर से प्रगति कर रहे हैं। देश में सबसे ज्यादा 96 लाख एमएसएमई यूनिट यूपी संचालित कर रहा है। सरकार हर यूनिट को 5 लाख रुपए की सामाजिक बीमा का कवर भी उपलब्ध करा रही है। सवा तीन करोड़ रुपए इसके साथ रोजगार से जुड़ चुके हैं। 

 

सुशासन के लक्ष्य प्राप्ति के लिए कानून का राज जरूरी

सीएम ने कहा कि यूपी जैसे राज्य में सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कानून का राज स्थापित कर दीजिए। सुरक्षा का बेहतरीन माहौल दे दीजिए। अपने आप सुशासन के लक्ष्य प्राप्त होते दिखाई देंगे। यूपी सरकार ने प्रभावी ढ़ग से इसे बढ़ाने का काम किया। आज यह सुनना अच्छा लगता है, जब कहा जाता है कि यूपी के मॉडल को सुरक्षा के मायने में अन्य राज्यों ने स्वीकार किया है। 

 

हर योजना में शीर्ष पर यूपी

सीएम ने कहा कि पहले दिल्ली में सरकारी योजनाओं को लागू करने में टॉप राज्यों की सूची देखता था। यूपी का कहीं पता नहीं होता था, वह बाटम 3 में दिखता था। तब सरकारों की मानसिकता भी ऐसी ही थी। पिछले 12 वर्षों में पीएम मोदी जी के नेतृत्व में 100 से ज्यादा जनकल्याण की स्कीमें निकली हैं। आज हर एक स्कीम में यूपी का नाम टॉप में आता है। यूपी में योजना की सफलता का मतलब है कि वह देश के अंदर सफल हो गई। साथ ही दुनिया के लिए मॉडल बन गई। सीएम ने कहा कि आज गरीब को मकान, शौचालय मिला है। हर गरीब को सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं, जिसके लिए दशकों से लालायित था। अब कोई शिकायत लेकर नहीं आता। 

 

ई-पॉस मशीन से आई पारदर्शिता

सीएम ने कहा कि पूर्वी जनपदों में 2017 से पहले भूख से मौत होती थी। इस सरकार ने ई-पॉश मशीनें लगाईं। आज के दिन 16 करोड़ लोगों को यूपी में मुफ्त राशन दिया जा रहा है। ई-पॉस मशीन से 80 हजार उचित मूल्य की दुकानों को जोड़ा गया है। किसी गांव में उचित मूल्य की दुकान में थोड़ी भी घटतौली होने पर अलर्ट आ जाता है, जिसके बाद टीम फौरन छापा मारकर कार्रवाई करती है।

 

यूपी में बिजली खपत 35 हजार मेगावाट तक पहुंची

सीएम ने कहा कि यूपी के सभी 75 जनपदों में सामान्य रूप से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। 2017 के पहले पीक आवर में कुल बिजली आपूर्ति 15-16 हजार मेगावाट ही होती थी, आज आपूर्ति 33 से 35 हजार मेगावाट हो रही है। ये यूपी की नई स्थिति है।

 

यूपी में 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव

सीएम ने कहा कि यूपी ने 34 से अधिक सेक्टोरल पॉलिसी बनाई गईं हैं, जिससे निवेश बढ़ा है। 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। 15 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और 7.50 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग की तैयारी चल रही है। ये नया यूपी है, जिसके तहत 65 लाख युवाओं को नौकरी दी गई है।

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सीएम ने कहा कि देश के किसी भी राज्य की तुलना में सबसे अच्छी सड़कें यूपी में मिलेंगी। देश के एक्सप्रेसवे में 60 प्रतिशत यूपी का योगदान है। सबसे ज्यादा एयरपोर्ट यूपी में हैं। 2017 से पहले यूपी में केवल दो एयरपोर्ट संचालित थे, आज 17 हैं। इनमें पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं। जिसमें पीएम मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम भी शामिल है। इसके पास 14 हजार एकड़ जमीन है, देश में किसी भी एयरपोर्ट के पास इतनी जमीन नहीं है। नए एयरक्राफ्ट आने पर सभी एयरपोर्ट से हवाई सुविधा और बढ़ेगी। प्रदेश सरकार पांच नए एयरपोर्ट पर भी काम कर रही है। 

 

सीएम योगी ने कहा कि पहले कोई सोचता भी नहीं था कि आजमगढ़ में एयरपोर्ट होगा, लेकिन यह भी संभव हुआ। श्रावस्ती, अलीगढ़, मुरादाबाद, सोनभद्र में कोई एयरपोर्ट की कल्पना नहीं करता था, लेकिन वहां भी सपना पूरा किया गया। दिल्ली से मेरठ के बीच 12 लेन का एक्सप्रेसवे भी बन चुका है और रैपिड रेल भी आ चुकी है। देश की पहली इनलैंड वाटरवे वाराणसी-हल्दिया के बीच संचालित हो रही है। साथ ही यूपी के अंदर सबसे ज्यादा सात सिटी में मेट्रो सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।

Gold Jewellery Price: 10 ग्राम का नेकलेस या 5 ग्राम की अंगूठी खरीदने जा रहे? जानिए कितना बनेगा बिल

Gold Jewellery Price: सोने की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ऐसे में अगर आप शादी, त्योहार या निवेश के लिए ज्वेलरी खरीदने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ गोल्ड का रेट जानना काफी नहीं है। दुकान पर जो बिल बनता है, उसमें सोने की कीमत के साथ मेकिंग चार्ज और GST भी जुड़ता है। यही वजह है कि कई बार ₹1.30 लाख का सोना खरीदने पर बिल ₹1.50 लाख के करीब पहुंच जाता है।

अगर आज आप 10 ग्राम का नेकलेस या 5 ग्राम की अंगूठी बनवाने जाते हैं, तो जेब से कुल कितना पैसा निकल सकता है? आइए आसान हिसाब से समझते हैं।

पहले जानिए आज का रेट

दिल्ली में 15 जुलाई को 24 कैरेट सोने का भाव (Gold Price Today) ₹1,42,940 प्रति 10 ग्राम है। वहीं, 22 कैरेट का ₹1,31,040 प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट का ₹1,07,240 प्रति 10 ग्राम है।

हालांकि, बाजार में बिकने वाले ज्यादातर नेकलेस, अंगूठियां और दूसरी ज्वेलरी 22 कैरेट या 18 कैरेट सोने से बनाई जाती हैं। इसलिए आगे का पूरा हिसाब 22 कैरेट सोने की कीमत के आधार पर समझते हैं।

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10 ग्राम का नेकलेस का खर्च?

मान लीजिए आपने 10 ग्राम का सिंपल नेकलेस पसंद किया। सिर्फ सोने की कीमत ₹1,31,040 होगी। अब इसमें मेकिंग चार्ज जुड़ता है। अगर ज्वेलर 10% मेकिंग चार्ज लेता है, तो यह करीब ₹13,100 बैठेगा। इसके बाद कुल रकम पर 3% GST लगेगा, जो करीब ₹4,300 होगा।

यानी 10 ग्राम का नेकलेस बनवाने पर आपका कुल बिल करीब ₹1.48 लाख बन सकता है। अगर आपने भारी डिजाइन वाला नेकलेस चुना और मेकिंग चार्ज 20% हुआ, तो यही बिल ₹1.60 लाख के आसपास पहुंच सकता है।

5 ग्राम की अंगूठी का बिल?

अब मान लीजिए आप 5 ग्राम की सोने की अंगूठी बनवा रहे हैं। 5 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹65,520 होगी। अगर मेकिंग चार्ज 10% है, तो इसमें करीब ₹6,550 जुड़ जाएंगे। इसके बाद GST जोड़ने पर कुल बिल करीब ₹74,200 तक पहुंच सकता है।

अगर अंगूठी का डिजाइन ज्यादा बारीक या स्टोन वाला है, तो मेकिंग चार्ज बढ़ सकता है। ऐसे में कीमत ₹78,000 से ₹80,000 तक भी जा सकती है।

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आखिर बिल इतना ज्यादा क्यों बनता है?

बहुत से लोगों को लगता है कि दुकान पर वही कीमत देनी होगी, जो अखबार या वेबसाइट पर सोने के भाव में दिखाई जा रही है। लेकिन ऐसा नहीं होता। गोल्ड रेट सिर्फ धातु की कीमत होती है।

ज्वेलरी बनाने की मजदूरी यानी मेकिंग चार्ज अलग से देना पड़ता है। इसके बाद पूरे बिल पर 3% GST भी लगता है। कुछ ज्वेलर्स वेस्टेज चार्ज भी जोड़ते हैं। इसलिए अंतिम बिल हमेशा गोल्ड रेट से ज्यादा होता है।

  • खरीदने से पहले ये सवाल जरूर पूछें
  • मेकिंग चार्ज कितने प्रतिशत है?
  • क्या वेस्टेज अलग से लगेगा?
  • GST किस रकम पर लगेगा?
  • क्या ज्वेलरी BIS हॉलमार्क है?
  • पुराना सोना एक्सचेंज करने पर क्या रेट मिलेगा?

पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड, इमरजेंसी के वक्त किसका इस्तेमाल करें? समझिए पूरा हिसाब

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Home Loan Tips: नया घर खरीदने का है प्लान? होम लोन से जुड़े ये 5 फैसले बचाएंगे आपके लाखों रुपए

Taking A Home Loan: नया घर खरीदना हर किसी के जीवन का सबसे बड़ा सपना और सबसे बड़ा वित्तीय फैसला होता है। होम लोन आमतौर पर किसी भी व्यक्ति की जिंदगी की सबसे बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता होती है, जिसकी ईएमआई (EMI) सालों या दशकों तक साथ चलती है। ऐसे में लोन एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले लिए गए फैसले आपकी जेब पर बहुत बड़ा असर डालते हैं।

अक्सर लोग सिर्फ इस बात पर ध्यान देते हैं कि लोन किसी तरह मंजूर हो जाए, लेकिन यह इस लंबी प्रक्रिया का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है। जून 2026 में भी बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां अलग-अलग ब्याज दरों और शर्तों पर होम लोन दे रही हैं। इसलिए, नया घर लेने से पहले सही प्लानिंग करना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं वे 5 बड़े फैसले, जो आपके लाखों रुपये बचा सकते हैं।

1. सिर्फ ब्याज दर न देखें, कुल खर्च का हिसाब लगाएं

होम लोन लेते समय हर किसी की नजर सबसे पहले ब्याज दर पर जाती है। कम ब्याज दर बेशक आकर्षक लगती है, लेकिन यही सब कुछ नहीं है:

छिपे हुए चार्ज: लोन की कुल लागत केवल ब्याज दर से तय नहीं होती, बल्कि इसमें प्रोसेसिंग फीस, लीगल चार्ज, जरूरी इंश्योरेंस और फोरक्लोजर के नियम भी शामिल होते हैं।

पूरी तस्वीर देखें: कई बार थोड़ा अधिक ब्याज दर वाला लोन भी बेहतर साबित होता है, बशर्ते उसके अन्य एडिशनल चार्ज कम हों। इसलिए हमेशा ‘लोन की कुल लागत’ की तुलना करें।

2. उतनी ही रकम का लोन लें जितनी जरूरत हो, न कि जितनी ऑफर की जा रही हो

अक्सर बैंक आपकी रीपेमेंट क्षमता को देखते हुए आपकी जरूरत से ज्यादा का लोन ऑफर या अप्रूव कर देते हैं। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप पूरा का पूरा लोन ले लें। आप जितना बड़ा लोन लेंगे, आपकी मासिक ईएमआई उतनी ही भारी होगी और आपको लोन अवधि के दौरान उतना ही अधिक ब्याज चुकाना पड़ेगा।

समझदारी इसी में है कि आप अपना डाउन पेमेंट बढ़ा दें या अपने बजट के अनुकूल प्रॉपर्टी चुनें ताकि लोन की राशि को कम से कम रखा जा सके।

3. टैक्स बेनेफिट्स का पूरा फायदा उठाएं

होम लोन लेने का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इसके जरिए आप हर साल टैक्स में अच्छी-खासी बचत कर सकते हैं। इनकम टैक्स एक्ट के नियमों के तहत, योग्य बोरोअर्स होम लोन के मूलधन और चुकाए गए ब्याज दोनों पर टैक्स डिडक्शन का दावा कर सकते हैं।

टैक्स सेविंग का सटीक फायदा इस बात पर निर्भर करता है कि प्रॉपर्टी किस तरह की है, उसका मालिकाना हक किसके पास है और आपने कौन सा टैक्स व्यवस्था चुना है। लोन फाइनल करने से पहले इसे समझने से लॉन्ग टर्म प्लानिंग में मदद मिलती है।

4. जब भी हाथ में अतिरिक्त पैसा हो, पार्ट-प्रीपेमेंट करें

यह जरूरी नहीं है कि अगर आपने 20 साल के लिए होम लोन लिया है, तो आप उसे 20 साल तक ही चलाएं। अधिकांश बैंक और लेंडर्स फ्लोटिंग-रेट लोन पर बिना किसी पेनल्टी के पार्ट-प्रीपेमेंट करने की अनुमति देते हैं।

जब भी आपको सालाना बोनस मिले या किसी अन्य स्रोत से अतिरिक्त आमदनी हो, तो उस लंप-सम राशि को लोन चुकाने में लगा दें। इससे आपका आउटस्टैंडिंग बैलेंस कम होता है और लोन की अवधि के साथ-साथ ब्याज का बोझ उम्मीद से कहीं ज्यादा घट जाता है।

5. अपनी जेब और बजट के हिसाब से लोन की अवधि चुनें

होम लोन की अवधि तय करते समय जल्दबाजी न करें, क्योंकि इसका सीधा संबंध आपके मासिक बजट से होता है। लोन की अवधि जितनी लंबी होगी, आपकी हर महीने की ईएमआई उतनी ही छोटी होगी, लेकिन लोन के पूरे जीवनकाल में आपको कुल ब्याज बहुत अधिक देना पड़ेगा।

लोन की अवधि कम रखने से ईएमआई का बोझ मासिक रूप से बढ़ जाता है, लेकिन आप लोन से जल्दी मुक्त हो जाते हैं और कुल ब्याज का भारी पैसा बचा लेते हैं। अपनी आय और भविष्य के खर्चों को देखते हुए बीच का सही रास्ता चुनें।

Direct vs Regular: एक ही म्यूचुअल फंड स्कीम, फिर भी एक को मिला ₹50 लाख ज्यादा रिटर्न! समझें एक्सपेंस रेशियो का असली खेल

कुल मिलाकर होम लोन कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप हर दो-चार साल में बदलते रहें। एक बार जब कागजी कार्रवाई पूरी हो जाती है, तो चुकाने का एक लंबा सफर शुरू होता है। इसलिए लोन लेने से पहले थोड़ा अतिरिक्त समय देकर तुलना करना और सोच-समझकर फैसला लेना आपकी रीपेमेंट यात्रा को बेहद आसान और सस्ता बना सकता है।

Union Bank of India Q1 results: मुनाफा 30% बढ़कर ₹5,332.30 करोड़ पर पहुंचा, नतीजों के बाद शेयर 3% चढ़ा

Union Bank of India Q1 results: पब्लिक सेक्टर बैंक (PSB) यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया ने बुधवार, 15 जुलाई को बताया कि चालू फ़ाइनेंशियल ईयर (Q1FY27) की अप्रैल-जून तिमाही में उसका स्टैन्डर्डलोन प्रॉफ़िट साल-दर-साल (YoY) 29.6% बढ़कर ₹5,332.30 करोड़ हो गया। पिछले फ़ाइनेंशियल ईयर की इसी तिमाही में लेंडर का प्रॉफ़िट ₹4,115.53 करोड़ था।

यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया Q1FY27 की खास बातें

1. जून तिमाही में बैंक की कुल इनकम साल- दर- साल आधार पर 1.3% बढ़कर ₹31,806.20 करोड़ हो गई। Q1FY26 में, इसकी कुल इनकम ₹31,405.03 करोड़ थी।

2. यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया का ऑपरेटिंग खर्च पिछले साल की इसी तिमाही के ₹6,689.67 करोड़ से 0.80%सालना आधार पर घटकर ₹6,637.66 करोड़ हो गया।

इस तिमाही में ऑपरेटिंग प्रॉफ़िट पिछले फ़ाइनेंशियल ईयर की जून तिमाही के ₹6,908.66 करोड़ से लगभग 16% सालना बढ़कर ₹8,002.58 करोड़ हो गया।

3. टैक्स के अलावा इसके प्रोविज़न और कंटिंजेंसीज़, Q1FY27 में घटकर ₹979.42 करोड़ हो गए, जो पिछले फ़ाइनेंशियल ईयर की इसी तिमाही में ₹1,664.51 करोड़ और Q4FY26 में ₹1,054.98 करोड़ थे।

4. तिमाही के दौरान ग्रॉस एडवांस में सालाना आधार पर 12.50% की बढ़ोतरी हुई, जबकि टोटल डिपॉज़िट में साल- दर साल आधार पर 3.50% की बढ़ोतरी हुई, जून तिमाही के आखिर तक टोटल डिपॉज़िट बेस ₹12,83,366 करोड़ था। बैंक ने कहा कि 30 जून 2026 तक उसका टोटल बिज़नेस ₹23,79,697 करोड़ था।

5. इस साल 30 जून तक ग्रॉस NPA (%) सालाना आधार पर 87 bps घटकर 2.65% और नेट NPA (%) सालाना आधार पर 15 bps घटकर 0.47% हो गया।

6. Q1FY27 के दौरान बैंक का रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) और रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) क्रमशः 1.36% और 17.23% रहा।

7. सालाना आधार पर नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 10.15% और तिमाही आधार पर 6.71% बढ़कर ₹10,037 करोड़ हो गई, जबकि नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) YoY में 4 bps और QoQ में 16 bps बढ़कर 2.80% हो गया।

स्टॉक का परफॉर्मेंस

बुधवार को BSE पर दोपहर 1 बजे के आसपास यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शेयर 3% बढ़कर ₹175 पर ट्रेड कर रहे थे।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

CLAT 2027 Registration: कर लें तैयारी जल्द जारी होगा क्लैट 2027 का नोटिफिकेशन, जानें प्रक्रिया, जरूरी योग्यता और परीक्षा का पैटर्न

CLAT 2027 Registration: कानून के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों के लिए क्लैट परीक्षा क्वालिफाई करना जरूरी होता है। इसके स्कोर के आधार पर उन्हें देशभर के लॉ कॉलेज और यूनिवर्सिटी में स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। इस परीक्षा के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन कंसोर्टियम नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (CNLU) जारी करता है। पिछले साल क्लैट परीक्षा दिसंबर में हुई थी, लेकिन इसके लिए पंजीकरण 01 अगस्त 2025 से शुरू हुए थे। इसलिए पिछले ट्रेंड के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि सीएनएलयू जल्द ही शैक्षिक सत्र 2027-28 के लिए क्लैट का नोटिफिकेशन जारी कर सकता है। इस प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने के इच्छुक परीक्षार्थी आधिकारिक वेबसाइट consortiumofnlus.ac.in पर टेस्ट के लिए रजिस्टर कर सकेंगे।

क्लैट 2027: नोटिफिकेशन कब आएगा?

पिछले साल के ट्रेंड्स को देखते हुए, कैंडिडेट उम्मीद कर सकते हैं कि क्लैट 2027 का नोटिफिकेशन 20 जुलाई, 2026 के आसपास जारी होगा। आवेदन पोर्टल अगस्त में खुल सकता है और अक्टूबर, 2026 तक खुला रहेगा।

क्लैट 2027 के लिए जरूरी योग्यता

क्लैट के जरिए लॉ यूजी प्रोग्राम में प्रवेश लेने वाले उम्मीदवारों को 10+2 या इसके बराबर की परीक्षा कम से कम 45% अंकों के साथ पास करना जरूरी है। वहीं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग (PwD) उम्मीदवारों को इस परीक्षा में शामिल होने के लिए 12वीं कक्षा में 40% अंक होना अनिवार्य है। जबकि, लॉ पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश के इच्छुक उम्मीदवारों का 50% अंक के साथ एलएलबी डिग्री होना अनिवार्य है। SC/ST/PwD वालों को 45% अंक या इसके बराबर ग्रेड लाना होगा।

क्लैट 2027 आवेदन प्रक्रिया

  • क्लैट 2027 के लिए अप्लाई करने के लिए, ऑफिशियल वेबसाइट consortiumofnlus.ac.in पर जाएं।
  • होमपेज पर, “CLAT 2027” लिंक पर क्लिक करें।
  • अपना मोबाइल नंबर और पासवर्ड डालें और संबंधित प्रोग्राम के लिए अप्लाई करें।
  • जरूरी डॉक्यूमेंट्स, डिटेल्स सबमिट करें और आप क्लैट 2027 परीक्षा के लिए सफलतापूर्वक रजिस्टर करें।

क्लैट 2027 परीक्षा पैटर्न

क्लैट यूजी परीक्षा पैटर्न

क्लैट यूजी परीक्षा में उम्मीदवारों की कॉम्प्रिहेंशन और रीजनिंग स्किल्स के साथ-साथ करंट अफेयर्स की जानकारी भी जाची जाती है। क्लैट यूजी दो घंटे की होगी, जिसमें 120 बहुविकल्पीय सवाल होंगे, हर सवाल एक नंबर का होगा। गलत जवाबों के लिए 0.25 नंबर काटे जाएंगे। इसमें इन विषयों से सवाल शामिल होंगे :

  • इंग्लिश लैंग्वेज
  • करंट अफेयर्स, जिसमें जनरल नॉलेज भी शामिल है
  • लीगल रीजनिंग
  • लॉजिकल रीजनिंग
  • क्वांटिटेटिव टेक्नीक्स

क्लैट पीजी परीक्षा पैटर्न

पोस्टग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश के लिए क्लैट परीक्षा में अंडरग्रेजुएट जैसा ही पैटर्न होता है, लेकिन इसमें बहुविकल्पीय सवालों के बजाय ऑब्जेक्टिव-टाइप सवाल होते हैं। इसमें सिर्फ एक सेक्शन होगा, जिसमें अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के जरूरी विषयों और कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ, ज्यूरिस्प्रूडेंस, एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ, कॉन्ट्रैक्ट लॉ, टॉर्ट्स, फैमिली लॉ, क्रिमिनल लॉ, प्रॉपर्टी लॉ, कंपनी लॉ, पब्लिक इंटरनेशनल लॉ, टैक्स लॉ, एनवायर्नमेंटल लॉ, और लेबर और इंडस्ट्रियल लॉ से सवाल होंगे।

CBSE’s 3-language policy: अंतरिम राहत से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सर्वोच्च अदालत ने पूछा, क्या अंग्रेजी को भारतीय भाषा मान लिया गया है?

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल की ताजा कीमतें अपडेट, जानें आपके शहर का रेट

Petrol Diesel Price Today:  हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 15 जुलाई 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट —

नई दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.20 रुपये

मुंबई: पेट्रोल 111.18 रुपये | डीजल 97.83 रुपये

कोलकाता: पेट्रोल 113.47 रुपये | डीजल 99.82 रुपये

चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये | डीजल 99.55 रुपये

गुरुग्राम: पेट्रोल 102.77 रुपये | डीजल 95.44 रुपये

नोएडा: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.56 रुपये

बेंगलुरु: पेट्रोल 110.93 रुपये | डीजल 98.80 रुपये

भुवनेश्वर: पेट्रोल 109.92 रुपये | डीजल 100.92 रुपये

चंडीगढ़: पेट्रोल 98.10 रुपये | डीजल 86.09 रुपये

हैदराबाद: पेट्रोल 115.69 रुपये | डीजल 103.82 रुपये

जयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये | डीजल 97.78 रुपये

लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये | डीजल 95.55 रुपये

पटना: पेट्रोल 113.35 रुपये | डीजल 99.36 रुपये

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल 115.49 रुपये | डीजल 104.40 रुपये

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।