बच्चों को वसीयत में देनी चाहिए प्रॉपर्टी या जीवनकाल में कर देना चाहिए गिफ्ट? एक्सपर्ट से जानिए किसमें है ज्यादा फायदा

अपनी जीवनभर की कमाई और संपत्ति को बच्चों के नाम ट्रांसफर करना हर माता-पिता का एक बड़ा फैसला होता है। अक्सर विरासत या वसीयत से जुड़े फैसले माता-पिता के न रहने के बाद ही परिवार में चर्चा का विषय बनते हैं। लेकिन ऐसे में अक्सर प्रॉपर्टी को लेकर इसके दावेदारों, भाई-बहनों में विवाद और मतभेद पैदा होते भी हम देखते हैं। ऐसे में यह सवाल बहुत जरूरी हो जाता है कि क्या बच्चों को संपत्ति वसीयत के जरिए देनी चाहिए या अपने जीवनकाल में ही गिफ्ट (कर देनी चाहिए?

कानूनी और फाइनेंस एक्सपर्ट के मुताबिक अपने जीवनकाल में ही सरप्लस प्रॉपर्टी को गिफ्ट कर देना एक समझदारी भरा विकल्प हो सकता है। इससे माता-पिता अपने जीवनकाल में ही अपने इरादों को स्पष्ट कर सकते हैं, बच्चों की आशंकाओं को दूर कर सकते हैं और किसी भी मतभेद को समय रहते सुलझा सकते हैं।

…लेकिन सबसे पहले अपनी फाइनेंशियल सिक्यॉरिटी सुनिश्चित करें

अपने जीवनकाल में बच्चों को प्रॉपर्टी या धन गिफ्ट करने की योजना बनाते समय वरिष्ठ नागरिकों को सबसे पहले ये बुनियादी बात समझनी चाहिए कि देने से ज्यादा जरूरी उनके लिए ये सवाल है कि वो खुद के लिए कितना बचाकर रखें। एक्सपर्ट्स की साफ राय है कि माता-पिता को सबसे पहले अपना जीवनस्तर बनाए रखने, नियमित खर्चों को पूरा करने,भविष्य के स्वास्थ्य और इलाज संबंधी जरूरतों के लिए पर्याप्त फंड और प्रॉपर्टी अलग रख लेनी चाहिए। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ होने वाले अचानक के खर्चों और इमर्जेंसी के लिए एक बफर रखना बेहद जरूरी है। ऐसा इसलिए ताकि संपत्ति गिफ्ट करने के बाद उन्हें फाइनेंशियली अपने बच्चों पर निर्भर न होना पड़े।

दिल्ली हाई कोर्ट की वकील विनीता सेजवाल का कहना है कि लाइफटाइम गिफ्टिंग प्लान की नींव गिफ्ट देने वाले के अपने वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने पर टिकी होती है। वरिष्ठ नागरिकों को अपने जीवनस्तर को बनाए रखने,नियमित खर्चों को पूरा करने और भविष्य की चिकित्सीय व स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए पर्याप्त धनराशि अलग रखनी चाहिए। साथ ही अप्रत्याशित परिस्थितियों के लिए पर्याप्त रिजर्व भी रखना चाहिए।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके लिए कोई तय मानक फॉर्मूला नहीं हो सकता। यह कैलकुलेशन वरिष्ठ नागरिक की आय, कुल संपत्ति, उनकी देनदारियों और वित्तीय जरूरतों पर निर्भर करती है। सिर्फ वही संपत्ति या धन बच्चों को गिफ्ट करने के लिए माना जाना चाहिए जो इन सभी जरूरतों को पूरा करने के बाद वास्तव में सरप्लस हो।

जीवनकाल में गिफ्ट देने से उत्तराधिकार क्यों आसान हो जाता है?

अपने जीवनकाल में संपत्ति ट्रांसफर करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि माता-पिता अपनी उपस्थिति में ही अपने फैसलों की वजह बता सकते हैं। यह बात तब और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है जब बच्चों को अलग-अलग मूल्य या अलग-अलग प्रकार की संपत्तियां दी जा रही हों।

दिल्ली हाई कोर्ट की वकील गुडीपति गायत्री कश्यप के मुताबिक,’मौत के बाद पूरी संपत्ति को बंटवारे के लिए छोड़ने की तुलना में जीवनकाल में गिफ्ट देना उत्तराधिकार का एक बहुत अधिक प्रभावी तरीका हो सकता है। यह माता-पिता को अपने इरादों को स्पष्ट करने, बच्चों के बीच की चिंताओं को दूर करने और अपनी मौजूदगी में मतभेदों को सुलझाने का मौका देता है।”

अक्सर माता-पिता के निधन के बाद विवाद सिर्फ कानूनी हक तक सीमित नहीं रहते बल्कि इस बात पर भी बहस होती है कि माता-पिता की सेवा किसने ज्यादा की, उन्हें किसने पैसा ज्यादा दिया, या किसी एक बच्चे को ज्यादा तरजीह दी गई या नहीं। इसीलिए ट्रांसपेरेंसी बहुत जरूरी है। अगर माता-पिता असमान रूप से गिफ्ट दे रहे हैं तो उन्हें इसके पीछे के कारणों को स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही यह गिफ्टिंग प्लान वसीयत सहित अन्य व्यापक उत्तराधिकार योजनाओं से मेल खाता होना चाहिए।

कैश, शेयर्स या प्रॉपर्टी: क्या गिफ्ट करना ज्यादा बेहतर?

जीवनकाल में संपत्ति देने के लिए कोई एक एसेट क्लास सबसे बेहतर नहीं कहा जा सकता। यह फैसला लिक्विडिटी की जरूरत, टैक्स के नियमों और इस बात पर निर्भर करता है कि क्या वरिष्ठ नागरिक को खुद उस संपत्ति से आय या व्यक्तिगत उपयोग की जरूरत है या नहीं। कैश ट्रांसफर करने में सबसे आसान है और जिसे मिलता है उसे तुरंत लिक्विडिटी मिल जाती है। लिस्टेड शेयर्स और म्यूचुअल फंड को भी ट्रांसफर करना और इनके डॉक्युमंट्स तैयार करना आसान होता है। प्रॉपर्टी, जमीन और सोना की बात करें तो अगर आपका उद्देश्य ऐसी संपत्तियों को पास ऑन करना है जिनका मूल्य समय के साथ बढ़ता है तो इन्हें चुना जा सकता है।

हालांकि, अचल संपत्ति मामले में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत होती है क्योंकि यह लिक्विड नहीं होती और न ही इसे आसानी से बांटा जा सकता है। इसके अलावा अचल संपत्ति के ट्रांसफर में वैल्युएशन, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन का खर्च आता है।

गांधी लॉ एसोसिएट्स के पार्टनर राहिल पटेल कहते हैं कि वरिष्ठ नागरिकों को अपने जीवनकाल में धन या संपत्ति तभी ट्रांसफर करनी चाहिए जब वे अपने अपेक्षित रहने के खर्चों, स्वास्थ्य सेवा, आपात स्थितियों और दीर्घायु जोखिमों को आराम से पूरा करने के लिए पर्याप्त संपत्तियों को सुरक्षित कर लें। प्राथमिकता वित्तीय स्वतंत्रता होनी चाहिए, न कि संपत्ति देने के बाद बच्चों पर निर्भर हो जाना।

सही कानूनी डॉक्युमेंटेशन है बेहद जरूरी

जीवनकाल में दिए जाने वाले किसी भी गिफ्ट को महज एक अनौपचारिक पारिवारिक समझ नहीं मानना चाहिए। खासकर जब बड़ी संपत्ति शामिल हो, तो उसका सही डॉक्युमेंटेशन होना जरूरी है। राहिल पटेल के अनुसार, अचल संपत्ति (मकान, जमीन आदि) के मामले में एक रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड की जरूरत होती है। इसके लिए राज्य के नियमों के अनुसार स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क देना पड़ सकता है।

दस्तावेजीकरण तब और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है जब बच्चों के बीच संपत्ति का असमान रूप से बांटी जा रही हो। सही लिखापढ़ी न होने पर भविष्य में जबरदस्ती संपत्ति लेने, दबाव डालकर प्रॉपर्टी ट्रांसफर कराने जैसे आरोप लग सकते हैं और मामला विवादित हो सकता है।

जीवनकाल में संपत्ति गिफ्ट करने का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी सारी धन-दौलत बांट दें। इसका सही उद्देश्य यह है कि जब माता-पिता खुद वित्तीय रूप से सुरक्षित हों और अपने इरादों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में सक्षम हों तब वे अपनी सरप्लस प्रॉपर्टी को प्लान बनाकर ट्रांसफर कर दें। जरूरत के हिसाब से फाइनेंशियल रिजर्व, ट्रांसपेरेंसी और सही लीगल डॉक्यूमेंटेशन के साथ किया गया ट्रांसफर अगली पीढ़ी को बिना किसी पारिवारिक कलह के प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने का एक सुरक्षित रास्ता बनाता है।

 

 

टैक्स बचाते-बचाते कहीं आप तो नहीं कर रहे ये 3 बड़ी गलतियां? समझें स्मार्ट सेविंग का गणित

टैक्स बचाते-बचाते कहीं आप तो नहीं कर रहे ये 3 बड़ी गलतियां? समझें स्मार्ट सेविंग का गणित

Smart Financial Planning: अक्सर लोग टैक्स बचाने के लिए ऐसे फाइनेंशियल फैसले ले लेते हैं, जिनका नुकसान उन्हें सालों-साल उठाना पड़ता है। इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख की छूट पाने के चक्कर में ज्यादातर लोग बिना सोचे-समझे ट्रेडिशनल इंश्योरेंस प्लान या गलत जगह पैसा फंसा देते हैं।

अगर आप भी सिर्फ टैक्स की बचत को अपना एकमात्र मकसद मानकर निवेश कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। जानिए वे 3 बड़ी गलतियां जो आपकी वेल्थ को बढ़ाने के बजाय घटा रही हैं।

इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को एक साथ मिलाना

टैक्स बचाने के लिए लोग सबसे पहली गलती यह करते हैं कि वे एंडोमेंट या मनी-बैक पॉलिसी ले लेते हैं। इन पॉलिसियों में मिलने वाला रिटर्न महज 4% से 6% के आसपास होता है, जो महंगाई दर को भी मात नहीं दे पाता।

इसका दूसरा स्मार्ट ऑप्शन ये है कि इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को हमेशा अलग रखें। लाइफ कवर के लिए सिर्फ टर्म इंश्योरेंस लें, जो कम प्रीमियम में भारी-भरकम कवर देता है।

लॉक-इन और रिटर्न का गणित समझे बिना निवेश करना

केवल 80C की लिमिट भरने के लिए टैक्स-सेविंग एफडी (5 साल का लॉक-इन) या ऐसे प्रोडक्ट्स में पैसा लगा देना, जहाँ रिटर्न टैक्स-एडजस्टेड होने के बाद बेहद कम बचता है। इसका कड़वा सच ये है कि बैंक एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है, जिससे आपका असल रिटर्न और कम हो जाता है।

अगर आपकी रिस्क क्षमता इजाजत देती है, तो इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम(ELSS) में निवेश करें। इसमें केवल 3 साल का लॉक-इन होता है और लंबे समय में 12% से 15% तक का संभावित रिटर्न मिल सकता है।

इंश्योरेंस कवर को ही वेल्थ क्रिएटर्स समझ लेना

कई लोग गारंटीड रिटर्न वाली पॉलिसियों में यह सोचकर सालों तक प्रीमियम भरते हैं कि उनका पैसा सुरक्षित है और टैक्स भी बच रहा है। 20-25 साल बाद मिलने वाला ₹20 लाख का फंड महंगाई के कारण आज के ₹5-6 लाख के बराबर भी नहीं होगा। यानी आप सुरक्षित रहकर भी अपनी खरीदारी की ताकत खो रहे हैं।

स्मार्ट सेविंग का आसान गणित

टैक्स बचाने और वेल्थ क्रिएट करने के लिए सही एसेट एलोकेशन बेहद जरूरी है। जहां ट्रेडिशनल इंश्योरेंस प्लान 10 से 20 साल के लंबे लॉक-इन के साथ महज 4% से 6% का औसत रिटर्न देते हैं, वहीं ELSS (टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड) सिर्फ 3 साल के सबसे कम लॉक-इन पीरियड में 12% से 15% तक का शानदार अनुमानित रिटर्न और 80C के तहत छूट देता है। इसके अलावा 15 साल की अवधि वाला PPF 7.1% का पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न देता है, जबकि सबसे स्मार्ट रणनीति यानी ‘टर्म प्लान + इंडेक्स फंड’ का कॉम्बिनेशन टर्म प्लान पर 80C की छूट के साथ-साथ लॉन्ग टर्म में 12%+ का तगड़ा रिटर्न हासिल करने में मदद करता है।

कैसे करें स्मार्ट शुरुआत?

टैक्स बचाना निवेश की प्रक्रिया का एक छोटा सा हिस्सा होना चाहिए, मुख्य लक्ष्य नहीं। सबसे पहले अपनी उम्र और जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस लें। इसके बाद बचे हुए पैसों को ELSS, PPF या NPS जैसे बेहतर रिटर्न देने वाले साधनों में अपनी रिस्क प्रोफाइल के अनुसार बांटें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock To Buy: सिक्योरिटी सर्विलांस प्रोडक्ट बनाने वाली इस कंपनी में 53% की तेजी मुमकिन, इस साल अब तक 125% चढ़ा, क्या है आपके पास

Stock To Buy: CP Plus की पैरेंट कंपनी, आदित्य इन्फोटेक (Aditya Infotech) के शेयर गुरुवार, 20 अगस्त को 4.9% बढ़कर ₹3,464 पर पहुंच गए। स्टॉक में तेजी मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज द्वारा इस स्टॉक पर कवरेज शुरू करने के बाद आई है। मोतीलाल ओसवाल ने आदित्य इन्फोटेक के लिए “Buy” (खरीदने की सलाह) की सलाह दी है और इसके लिए ₹4,200 का प्राइस टारगेट तय किया है, जो बुधवार के क्लोजिंग लेवल से 27% की तेजी दिखाता है।

ब्रोकरेज फर्म ने कंपनी के ‘बुल केस’ (सबसे अच्छे हालात) रन के अनुसार, स्टॉक ₹5,066 तक जा सकता है, जिसका मतलब है कि इसमें 53% तक की बढ़ोतरी की संभावना है।

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि आदित्य इन्फोटेक भारत के वीडियो सर्विलांस मार्केट में होने वाली ग्रोथ का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। इस मार्केट में कंपनी की हिस्सेदारी 44% से ज़्यादा है।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि भारत का सर्विलांस मार्केट फाइनेंशियल ईयर 2025 में ₹106 अरब से बढ़कर फाइनेंशियल ईयर 2030 तक ₹227 अरब से ज़्यादा हो जाएगा। उन्हें यह भी उम्मीद है कि आदित्य इन्फोटेक का रेवेन्यू FY26 और FY28 के बीच 44% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा, जो इंडस्ट्री की अनुमानित 16%-18% ग्रोथ से काफी ज़्यादा है।

मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, स्टैंडर्डाइजेशन टेस्टिंग एंड क्वालिटी सर्टिफिकेशन (STQC) के नियम कॉम्पिटिशन को कम कर सकते हैं और कंपनी को फाइनेंशियल ईयर 2028 तक अपनी मार्केट हिस्सेदारी 58% से ज़्यादा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि कंपनी FY26-FY28 के दौरान रेवेन्यू, EBITDA और टैक्स के बाद प्रॉफिट में क्रमशः 44%, 58% और 64% की ग्रोथ हासिल करेगी। उन्होंने कॉस्ट एफिशिएंसी और मार्जिन बढ़ाने के लिए लेंस, केबल, प्लास्टिक और मेटल कंपोनेंट्स में बैकवर्ड इंटीग्रेशन को भी एक अहम वजह बताया है।

कंपनी ने ₹1,500 करोड़ जुटाने को मंज़ूरी दी

इसके अलावा, कंपनी के बोर्ड ने 19 अगस्त को इक्विटी शेयर जारी करके ₹1,500 करोड़ तक जुटाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी। फंड जुटाने का काम एक या उससे ज़्यादा मंज़ूर तरीकों से किया जा सकता है, जैसे कि पब्लिक इश्यू या क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), या फिर इन तरीकों का मिला-जुला इस्तेमाल।

फंड जुटाने का यह प्रस्ताव शेयरहोल्डर्स और दूसरी रेगुलेटरी मंज़ूरी पर निर्भर है। कंपनी पोस्टल बैलेट के ज़रिए शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी लेगी और उसने इस प्रस्तावित इश्यू से जुड़े मामलों को देखने के लिए एक बोर्ड कमिटी भी बनाई है।

19 अगस्त की एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, कंपनी ने मुंबई में 24 से 26 अगस्त और सिंगापुर में 1 से 3 सितंबर के बीच इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के साथ वन-ऑन-वन ​​और ग्रुप मीटिंग्स भी तय की हैं।

मार्जिन गाइडेंस

जून तिमाही के नतीजों के बाद, आदित्य इन्फोटेक ने FY27 के लिए अपने EBITDA मार्जिन गाइडेंस (14-15%) को फिर से दोहराया है, जबकि Q1FY27 में EBITDA मार्जिन 14.5% था। मैनेजमेंट ने संकेत दिया है कि वे FY27 की पहली छमाही के बाद आउटलुक का फिर से आकलन करेंगे, साथ ही वे तय गाइडेंस से बेहतर परफॉर्मेंस का इंटरनल टारगेट भी बनाए रखेंगे।

शेयर पर एनालिस्ट की राय

IIFL इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ भी आदित्य इन्फोटेक को लेकर पॉजिटिव है। सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्च रेनू बैद पुगलिया का कहना है कि कंपनी ने भारत के IP कैमरा मार्केट में मज़बूत जगह बनाई है। उन्होंने कैमरा वैल्यू चेन के बड़े हिस्से के लोकलाइज़ेशन (स्थानीय स्तर पर उत्पादन) पर ज़ोर दिया और कहा कि कंपनी को घरेलू प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले 18-24 महीने की बढ़त हासिल है, जिसका इस्तेमाल वह एंटरप्राइज़ और सरकारी ग्राहकों के लिए प्रीमियम प्रोडक्ट्स में विस्तार करने के लिए कर रही है।

उन्हें उम्मीद है कि आदित्य इन्फोटेक 40-45% रेवेन्यू CAGR हासिल करेगी, जिसमें मार्जिन 14.5-15% के आसपास रहेगा, जिससे अगले दो सालों में कमाई में 45-50% की बढ़ोतरी होगी। उन्होंने सरकारी सर्टिफिकेशन की नई ज़रूरतों के बाद चीनी कंपनियों के बाहर निकलने को भी कंपनी के ग्रोथ आउटलुक के लिए एक मददगार कारक बताया।

यह स्टॉक “कंसेंसस बाय” (सबकी सहमति से खरीदने लायक) की श्रेणी में है, क्योंकि इस स्टॉक को ट्रैक करने वाले सभी सात एनालिस्ट इसे लेकर बुलिश (तेज़ी की उम्मीद रखने वाले) हैं।

गुरुवार को आदित्य इन्फोटेक के शेयर 4.71% बढ़कर ₹3,459.2 पर ट्रेड कर रहे हैं। इस साल अब तक स्टॉक में 125% की बढ़ोतरी हो चुकी है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

LPG Rate 20 August 2026: आज आपके शहर में कितने रुपये का मिल रहा LPG सिलेंडर? बुक करने से पहले चेक कर लें 14.2 और 19 किलो गैस के ताजा रेट

LPG price today: अगर आप आज यानी 20 अगस्त को LPG सिलेंडर बुक करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर में लागू कीमत जरूर जांच लें। आज घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। देश के तमाम शहरों में घरेलू 14 किलो और कमर्शियल 19 किलो सिलेंडर के दाम अलग हैं। त्योहारों और रोजमर्रा की जरूरतों के बीच LPG सिलेंडर घर के बजट का अहम हिस्सा है। ऐसे में सिलेंडर बुक करने से पहले आज का रेट जानना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

हर महीने की पहली तारीख को देश की सरकारी तेल कंपनियां एलपीजी सिलेंडरों के नए रेट जारी करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये को ध्यान में रखते हुए यह समीक्षा की जाती है। इस महीने भी जैसे ही कंपनियों ने दरें अपडेट कीं, घरेलू और व्यावसायिक दोनों उपभोक्ताओं की निगाहें अपने शहर के नए रेट पर टिक गईं।

स्थानीय टैक्स और वैट (VAT) अलग-अलग राज्यों में अलग होने के कारण हर शहर की कीमतों में मामूली अंतर होता है। कमर्शियल सिलेंडरों के दामों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर होटल, रेस्तरां और छोटे कारोबारियों पर पड़ता है, जिससे बाहर खाना-पीना महंगा या सस्ता होता है। वहीं, घरेलू सिलेंडर की कीमतें सीधे तौर पर आम आदमी की रसोई के बजट को प्रभावित करती हैं।

क्या आप अपने किसी विशिष्ट शहर के एलपीजी रेट या पिछले महीनों का प्राइस ट्रेंड जानना चाहते हैं?

14 किलो घरेलू LPG सिलेंडर के शहरवार दाम

शहर                                                                                                  घरेलू सिलेंडर की कीमत

दिल्ली                                                                                                            ₹942.00

कोलकाता                                                                                                      ₹968.00

मुंबई                                                                                                              ₹941.50

चेन्नई                                                                                                              ₹957.50

गुरुग्राम                                                                                                          ₹950.50

नोएडा                                                                                                             ₹939.50

बेंगलुरु                                                                                                             ₹944.50

भुवनेश्वर                                                                                                            ₹968.00

चंडीगढ़                                                                                                               ₹951.50

हैदराबाद                                                                                                            ₹994.00

जयपुर ₹                                                                                                              945.50

लखनऊ                                                                                                               ₹979.50

पटना                                                                                                                   ₹1,031.50

तिरुवनंतपुरम                                                                                                     ₹951.00

इन शहरों में दिए गए रेट 14 किलो के घरेलू LPG सिलेंडर के हैं। लेटेस्ट लिस्ट के मुताबिक, इन कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है।

कमर्शियल LPG सिलेंडर के आज के रेट

19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है। शहरवार कीमतें इस प्रकार हैं:-

शहर                                                                                                  कमर्शियल सिलेंडर की कीमत

दिल्ली                                                                                                 ₹2,738.00

कोलकाता                                                                                             ₹2,872.50

मुंबई                                                                                                     ₹2,691.50

चेन्नई                                                                                                    ₹2,906.00

गुरुग्राम                                                                                                ₹2,755.00

नोएडा                                                                                                   ₹2,738.00

बेंगलुरु                                                                                                  ₹2,821.00

भुवनेश्वर                                                                                                  ₹2,908.00

चंडीगढ़                                                                                                  ₹2,760.00

हैदराबाद                                                                                               ₹2,985.00

जयपुर                                                                                                     ₹2,765.50

लखनऊ                                                                                                   ₹2,860.50

पटना                                                                                                         ₹3,018.00

सिलेंडर लेते समय इन बातों का रखें ध्यान

LPG सिलेंडर खरीदते या डिलीवरी लेते समय सिर्फ कीमत देखना ही पर्याप्त नहीं है। सुरक्षा सील जरूर जांचें। अगर सील टूटी हुई है तो सिलेंडर स्वीकार न करें। इसके अलावा सिलेंडर का वजन भी जांचना चाहिए। उपभोक्ताओं को सिलेंडर पर दर्ज एक्सपायरी या टेस्टिंग डेट भी देखनी चाहिए।

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LPG सिलेंडर की निर्धारित जांच अवधि होती है, इसलिए इसकी जानकारी रखना सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अगर सिलेंडर से गैस लीक हो रही हो, उसमें किसी तरह की खराबी दिखाई दे या सील टूटी हुई हो, तो उसे लेने से बचें। LPG ज्वलनशील गैस है। एक लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।

Petrol Diesel Rate Today: सुबह 6 बजे जारी हुए नए रेट, जानें आपके शहर में पेट्रोल-डीजल की कीमत

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 20 आगस्त 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

मेरे पिता ने प्रॉपर्टी मुझे गिफ्ट में दी थी, क्या बहनें इसमें हिस्सा मांग सकती हैं?

प्रॉपर्टी के ओनरशिप के मामले काफी जटिल होते हैं। अगर प्रॉपर्टी विरासत में मिली है तो मामला और पेचीदा हो जाता है। एक व्यक्ति ने मनीकंट्रोल से पिता से गिफ्ट में मिली प्रॉपर्टी पर बहनों के मालिकाना हक से जुड़ा एक सवाल पूछा है। गाजियाबाद के रहने वाले मुकेश साहनी ने बताया है कि 2024 में निधन से पहले उनके पिता ने अपनी कुछ पुश्तैनी प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड के जरिए उन्हें उपहार में दे दी थी। उनका सवाल है कि क्या उनकी बहनें इस प्रॉपर्टी में हिस्सा मांग सकती हैं?

मनीकंट्रोल ने इस सवाल का जवाब मशहूर टैक्स एक्सपर्ट और सीए बलवंत जैन से पूछा। उन्होंने कहा कि हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 के प्रावधानों के तहत अगर 17 जून, 1956 के बाद किसी हिंदू व्यक्ति को प्रॉपर्टी विरासत में मिली है तो वह सिर्फ उस व्यक्ति की प्रॉपर्टी होगी। हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 17 जून, 1956 को लागू हुआ था।

उन्होंने कहा कि वह व्यक्ति इस प्रॉपर्टी के साथ जो चाहे वह कर सकता है। किसी हिंदू व्यक्ति को मिली ऐसी प्रॉपर्टी स्वत: (automatically) हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) की प्रॉपर्टी नहीं हो जाती है। लेकिन, अगर कोई पुश्तैनी प्रॉपर्टी इस तारीख (17 जून, 1956) से पहले विरासत में मिली है तो वह एचयूएफ की प्रॉपर्टी हो जाती है, जिस पर दूसरे सदस्यों का भी हक बनता है।

जैन ने कहा कि चूंकि मुकेश साहनी के मामले में पिता से उन्हें कब प्रॉपर्टी मिली थी, यह नहीं बताया गया है, जिससे उनके सवाल का जवाब उन्हें प्रॉपर्टी मिलने की तारीख पर निर्भर करेगा। अगर उन्हें पिता से प्रॉपर्टी 17 जून, 1956 के बाद गिफ्ट में मिली है तो फिर इस पर सिर्फ उनका हक होगा। अगर पिता से प्रॉपर्टी इस तारीख से पहले मिली है तो फिर गिफ्ट में मिली इस प्रॉपर्टी पर सिर्फ उनका हक नहीं होगा। इस पर उनकी बहनों का भी बराबर हक होगा।

हिंदू सक्सेशन एक्ट में संसोधन के बाद बेटियां भी एचयूएफ के कोपार्सनर (coparceners) बन गई हैं। इसका मतलब है कि बेटियां भी एचयूएफ के सदस्य के रूप में प्रॉपर्टी की सहभागी बन गई हैं। यह संसोधन 9 सितंबर, 2005 से लागू हुआ था। इस हिसाब से मुकेश की बहनें एचयूएफ प्रॉपर्टीज में अपना हिस्सा मांग सकती हैं। वे प्रॉपर्टी में हिस्सा के लिए कोर्ट में केस फाइल कर सकती हैं।

Solar Panel Cost: अब सोलर पैनल लगवाना महंगा होगा! ICRA ने कहा- 20% तक बढ़ सकती है लागत

Solar Panel Cost: देश में बड़े सोलर प्रोजेक्ट लगाना आने वाले महीनों में महंगा पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA का कहना है कि अगले 6 से 8 महीनों में इनकी लागत करीब 20% तक बढ़ सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह चीन की जगह घरेलू सोलर सेल का इस्तेमाल है। वहीं पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम जैसी धातुएं भी महंगी हो गई हैं।

ICRA के मुताबिक, सरकार के नए नियमों के बाद डेवलपर्स को अब घरेलू सोलर सेल खरीदने पड़ रहे हैं। ये आयातित सेल के मुकाबले काफी महंगे हैं। इसका असर सीधे मॉड्यूल और पूरे प्रोजेक्ट की लागत पर पड़ रहा है।

घरेलू सोलर सेल क्यों बढ़ा रहे हैं खर्च?

ICRA का कहना है कि घरेलू सोलर सेल की कीमत आयातित सेल से 6-7 सेंट प्रति वॉट यानी करीब 5-6 रुपये प्रति वॉट ज्यादा है।

एजेंसी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट गिरीशकुमार कदम के मुताबिक, घरेलू सेल से बने मॉड्यूल की लैंडेड कॉस्ट करीब 22.5 सेंट प्रति वॉट (करीब 19 रुपये) है। वहीं आयातित सेल वाले मॉड्यूल की लागत करीब 16 सेंट प्रति वॉट (करीब 13.5 रुपये) पड़ती है। उनका कहना है कि अगले कुछ महीनों में दिखने वाली लागत बढ़ोतरी का सबसे बड़ा हिस्सा इसी बदलाव से आएगा।

सरकार के नए नियम का क्या असर है?

सरकार ने 1 जून 2026 से नया नियम लागू किया है। इसके तहत सोलर प्रोजेक्ट्स में अब सिर्फ ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) में शामिल कंपनियों के घरेलू सोलर सेल ही इस्तेमाल किए जाएंगे।

हालांकि कुछ ओपन एक्सेस और नेट मीटरिंग प्रोजेक्ट्स को 31 दिसंबर 2026 तक की राहत दी गई है।

पश्चिम एशिया का असर भी दिख रहा

ICRA का कहना है कि सिर्फ घरेलू सेल ही वजह नहीं हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसकी वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं। इससे प्रोजेक्ट की कुल लागत और बढ़ सकती है।

फिर भी सेक्टर पर भरोसा कायम

लागत बढ़ने के बावजूद ICRA ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर ‘Stable’ आउटलुक बरकरार रखा है।

एजेंसी का अनुमान है कि बड़े हाइड्रो समेत रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी भारत के बिजली उत्पादन में 2024-25 के 22% से बढ़कर 2029-30 तक 35% से ज्यादा हो सकती है। 30 जून 2026 तक देश में 150 गीगावॉट से ज्यादा रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन थे।

चुनौतियां अभी भी बाकी हैं

ICRA का कहना है कि जमीन अधिग्रहण, ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमी, PPA और PSA साइन होने में देरी, महंगे उपकरण और सप्लाई चेन की दिक्कतें अब भी बनी हुई हैं। बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती है।

इसके बावजूद FY26 में रिन्यूएबल सेक्टर में 72 रेटिंग अपग्रेड और 21 डाउनग्रेड हुए। वहीं FY27 की पहली तिमाही में 4 अपग्रेड हुए और कोई डाउनग्रेड नहीं हुआ।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Mutual Funds: सोने ने दिया 9% रिटर्न, फिर भी निवेशकों ने इन फंड्स में लगाए ₹1.40 लाख करोड़

Mutual Funds: जुलाई 2026 में सोने ने करीब 9% का रिटर्न दिया। इसके बावजूद भारतीय निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा मनी मार्केट फंड्स पर जताया। Vallum Capital की अगस्त 2026 की Monthly Macro Grid Chartbook के मुताबिक, जुलाई में इन फंड्स में 1.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया। दिलचस्प बात यह है कि जून में इसी कैटेगरी से 65,530 करोड़ रुपये निकल गए थे।

सिर्फ मनी मार्केट फंड ही नहीं, फिक्स्ड इनकम फंड्स में भी वापसी देखने को मिली। जुलाई में इनमें 5,947 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि जून में 53,006 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। दूसरी तरफ, सोने की कीमत बढ़ने के बावजूद प्रेशियस मेटल फंड्स में निवेश घटकर 4,084 करोड़ रुपये रह गया, जो जून में 8,680 करोड़ रुपये था।

SIP में लगातार बढ़ रहा निवेश

सुरक्षित निवेश की तरफ झुकाव का मतलब यह नहीं था कि निवेशकों ने शेयर बाजार से दूरी बना ली। Franklin Templeton India की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में SIP योगदान 12% बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं SIP खातों की संख्या भी 12.5% बढ़कर 10.63 करोड़ हो गई।

हालांकि, औसत मासिक SIP योगदान में मामूली गिरावट आई। यह 3,012 रुपये से घटकर 3,007 रुपये रह गया।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने बनाया नया रिकॉर्ड

जुलाई में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर रिकॉर्ड 85.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इस दौरान इक्विटी फंड्स का AUM 15.3% बढ़कर 38.40 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं पैसिव फंड्स का AUM सालाना आधार पर 24% से ज्यादा बढ़ा।

सबसे ज्यादा पैसा कहां गया?

इक्विटी फंड्स के भीतर भी निवेशकों की पसंद साफ नजर आई। स्मॉलकैप फंड्स में जुलाई के दौरान 7,768 करोड़ रुपये आए, जबकि मिडकैप फंड्स में 6,192 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। Vallum Capital के मुताबिक, जुलाई में माइक्रोकैप शेयर 4.6% और स्मॉलकैप शेयर 2.8% चढ़े।

निवेशकों ने क्यों सुरक्षित विकल्प चुने?

डेटा बताता है कि जुलाई में निवेशकों ने सिर्फ सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली एसेट क्लास का पीछा नहीं किया। एक तरफ SIP और इक्विटी में निवेश जारी रहा, तो दूसरी तरफ बड़ी रकम मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम फंड्स में गई। इससे साफ है कि निवेशक बेहतर रिटर्न के साथ-साथ लिक्विडिटी और कम जोखिम वाले विकल्पों को भी प्राथमिकता दे रहे थे।

Vallum Capital का कहना है कि जुलाई में सोने की तेजी की बड़ी वजह अमेरिका की उम्मीद से कमजोर जॉब्स रिपोर्ट रही। इससे फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद कुछ कमजोर पड़ी। साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने भी सोने की कीमतों को सहारा दिया।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

IDL टोकन के लिए $1 अरब तक का इंश्योरेंस कवर की तैयारी, Infinity DAO का दावा

AI से जुड़े DeFi प्लेटफॉर्म Infinity DAO ने अपने IDL टोकन और पूरे इकोसिस्टम के लिए करीब 1 अरब डॉलर का इंश्योरेंस कवर लाने की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी का कहना है कि अगर यह बीमा कार्यक्रम मंजूर होकर लागू हो जाता है, तो यह डिजिटल एसेट सेक्टर में रिस्क मैनेजमेंट और संस्थागत भरोसे के लिहाज से बड़ा कदम हो सकता है।

कंपनी के मुताबिक, इस बीमा व्यवस्था की पॉलिसी, अंडरराइटिंग शर्तें और कवरेज लिमिट ब्रिटेन के एक एक्सपर्ट्स क्रिप्टो इंश्योरेंस सिंडिकेट के साथ तैयार की जा रही हैं। फिलहाल यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

किन जोखिमों को मिलेगा कवर?

Infinity DAO के मुताबिक प्रस्तावित बीमा योजना पांच बड़े जोखिमों को कवर करेगी। इसमें खास परिस्थितियों में IDL टोकन डिफॉल्ट प्रोटेक्शन, प्लेटफॉर्म या इकोसिस्टम में बीमित डिफॉल्ट की स्थिति में सुरक्षा, साइबर अपराध और डिजिटल एसेट चोरी से बचाव शामिल है।

इसके अलावा डायरेक्टर्स एंड ऑफिसर्स (D&O) से जुड़े कानूनी दावों का कवर और यूजर्स, स्टेकहोल्डर्स व प्लेटफॉर्म के मैनेजमेंट स्ट्रक्चर के लिए अतिरिक्त सुरक्षा देने की भी योजना है।

Polygon पर चलता है IDL टोकन

IDL, Infinity DAO का यूटिलिटी टोकन है, जो Polygon ब्लॉकचेन पर काम करता है। कंपनी का कहना है कि उसका सिस्टम ड्यूल-टोकन स्ट्रक्चर और AI आधारित इकोनॉमिक मॉडल पर बना है। इसका मकसद टोकन इमिशन, लिक्विडिटी और सिस्टम की लंबी अवधि की स्थिरता को संभालना है।

कंपनी के प्रोटोकॉल वर्जन 1.2 में Quantum Emission Matrix, Flux Liquidity Shield, Velocity Recycle Core, HyperGuard Lock और Infinity Sustainability Protocol जैसे मॉड्यूल शामिल हैं। कंपनी का दावा है कि ये सिस्टम लिक्विडिटी मैनेजमेंट, स्टेकिंग और रिवॉर्ड मैकेनिज्म को बेहतर तरीके से संभालने में मदद करते हैं।

क्रिप्टो में इंश्योरेंस क्यों अहम है?

क्रिप्टो बाजार में निवेशकों के सामने साइबर अटैक, ऑपरेशनल गड़बड़ी और डिजिटल एसेट चोरी जैसे जोखिम बने रहते हैं। ऐसे में थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कुछ तय परिस्थितियों में इन जोखिमों को कम करने का काम कर सकता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ऐसा बीमा टोकन की कीमत गिरने या निवेश पर रिटर्न की गारंटी नहीं देता। कवरेज सिर्फ पॉलिसी में तय शर्तों के दायरे तक ही सीमित होता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।