शेयर बाजार में 4 अगस्त यानी आज एक बार फिर इनवेस्टर्स तब हैरान रह गए, जब निफ्टी 200 अंक ऊपर था, लेकिन सेंसेक्स लाल निशान में चल रहा था। आम तौर पर ऐसा नहीं होता है। सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा एक जैसी रहती है। लेकिन, आज बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांकों की अलग-अलग दिशा देखकर इनवेस्टर हैरान रह गए। सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ?
3 अगस्त को क्लोजिंग ऑक्शन सेशन का पहला दिन था
इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमें एक दिन पीछे जाना होगा। 3 अगस्त को Sensex और Nifty के क्लोजिंग प्राइस में काफी मिसमैच देखने को मिला था। इसकी वजह क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) है, जिसकी शुरुआत सोमवार को हुई। 3 अगस्त को कंटिन्यूअस ट्रेडिंग (Continuous Trading) बंद होने पर निफ्टी 0.08 फीसदी चढ़कर 24,589 पर बंद हुआ। लेकिन, क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बाद निफ्टी 1.6 फीसदी (390.70) चढ़कर 24,774.30 प्वाइंट्स पर बंद हुआ।
3 अगस्त को निफ्टी के दोनों क्लोजिंग लेवल में काफी फर्क था
इसका मतलब है कि निफ्टी के Continuous Trading के बाद के लेवल और CAS के बाद के लेवल के बीच करीब 200 प्वाइंट्स का अंतर था। लेकिन, Sensex के मामले में ऐसा नहीं था। 3 अगस्त को Sensex 3:15 बजे 78,677.13 पर बंद हुआ था। फिर CAS के बाद यह 78,639.03 पर बंद हुआ। दोनों के बीच फर्क मामूली रहा।
निफ्टी के क्लोजिंग लेवल में फर्क CAS शुरू होने के बाद आया
4 अगस्त को Nifty 50 प्वाइंट्स गिरा, जबकि 3 अगस्त को यह चढ़कर बंद हुआ था। 3 अगस्त को यह 1.6 फीसदी और 0.7 फीसदी चढ़कर बंद हुआ था। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स वाले स्टॉक्स के लिए नई व्यवस्था (CAS) शुरू होने के बाद ऐसा हुआ। वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में इक्विटी स्ट्रेटेजी के डायरेक्टर क्रांति बाथिनी ने कहा, “3 अगस्त को निफ्टी में अंत में आई तेजी की वजह नई व्यवस्था की शुरुआत थी। यह 4 अगस्त की सुबह सामान्य हो गया।”
ट्रेडिंग की नई व्यवस्था शुरू होने पर कीमतों में फर्क आता है
उन्होंने यह भी कहा कि जब ट्रेडिंग की नई व्यवस्था (Mechanism) शुरू होती है तो कीमतों में इस तरह का फर्क होना सामान्य है। NSE का मानना है कि Closing Actions Session (CAS) में ट्रे़डर्स का पार्टिसिपेशन आगे बढ़ेगा। 3 अगस्त को नई व्यवस्था (CAS) के पहले सेशन में करीब 515 ट्रेडर्स ने पार्टिसिपेट किया। 56,773 यूनिक क्लाइंट्स के लिए ऑर्डर प्लेस किए गए। 3 अगस्त नई व्यवस्था का पहला दिन था, उस हिसाब से पार्टिसिपेशन अच्छा था।
3:15 और 3:30 के बीच कंटिन्यूअस ऑर्डर मैचिंग नहीं हुआ
NSE ने कहा है कि 3 अगस्त को 3:15 और 3:30 के बीच कंटिन्यूअस ऑर्डर मैचिंग नहीं हुआ, जिससे इंडेक्स (Nifty) की वैल्यू स्थिर रही, क्योंकि यह ट्रेडेड वैल्यू पर आधारित थी। हालांकि, इंडिकेटिव वैल्यूज एक्सचेंज की वेबसाइट पर डिस्प्ले हुआ। यह 3:15 और 3:30 के दौरान कंटिन्यूअसली कैलकुलेटेड प्राइसेज इक्विलिबेरियम पर आधारित था।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन 3:28 से 3:30 के बीच चलता है
नए नियम के मुताबिक, कैश सेगमेंट के शेयरों के लिए कंटिन्यूअल ट्रेडिंग सेशन 3:15 पर खत्म हो जाता है। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन 3:28 से 3:30 के बीच चलता है। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में प्राइस बैंड स्टॉक के रेफरेंस प्राइस से 3 फीसदी ऊपर या नीचे हो सकता है। NSE ने कहा है, “दोनों एक्सचेंजों (NSE और BSE) के CAS के लिए अलग ऑर्डर बुक्स है, जो कंटिन्यूअस ट्रेडिंग सेशन जैसा है। इसलिए हर स्टॉक का प्राइस भी अलग है।”
CAS में एलिजिबल शेयरों में कंटिन्यूअल ट्रेडिंग 3:15 पर बंद हो जाती है
NSE ने कहा है कि चूंकि इंडेक्स का कैलकुलेशन इंडिविजुअल स्टॉक्स के आधार पर होता है, जिससे इंडेक्स की वैल्यू भी अलग हो सकती है। CAS के तहत एलिजिबल शेयरों में कंटिन्यूअल ट्रेडिंग 3:15 पर बंद हो जाती है। इसके बाद मार्केट 20 मिनट के ऑक्शन में चला जाता है, जिसके आधार पर ऑफिशियल क्लोजिंग होती है। ऑक्शन प्राइस वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के 3 फीसदी ऊपर या नीचे के आधार पर तय होता है। नई व्यवस्था में क्लोजिंग से पहले उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।


