तीनों ने ओढ़ रखी थी ‘WESTERN RAILWAY’ की चादर, बाजार में दिखे तो VIDEO हुआ वायरल, लोगों ने जमकर लिए मजे

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने रेलवे की संपत्ति को लेकर लोगों का ध्यान खींच लिया है। वीडियो में तीन लोग बाजार में सफेद चादर को शॉल की तरह ओढ़े नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि चादर पर साफ-साफ “WESTERN RAILWAY” लिखा दिखाई दे रहा है। इसी वजह से वीडियो देखते ही लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि रेलवे की पहचान वाली ये चादरें आखिर बाजार तक कैसे पहुंचीं। वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए दावा किया गया कि ये चादरें रेलवे से चोरी की गई थीं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

वायरल क्लिप के बाद लोगों ने रेलवे की संपत्ति के इस्तेमाल, यात्रियों की जिम्मेदारी और सार्वजनिक सामान की सुरक्षा को लेकर बहस शुरू कर दी। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि रेलवे में बेडशीट, कंबल और अन्य लिनेन के गायब होने की समस्या पहले भी सामने आती रही है।

कैमरा घूमते ही दिखी रेलवे की पहचान

वीडियो को X पर @GemsOfRailway नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। फुटेज में तीनों लोग एक दुकान के बाहर नजर आते हैं और उनके शरीर पर सफेद रेलवे लिनेन लिपटा हुआ दिखाई देता है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति दावा करता सुनाई देता है कि इन लोगों ने Western Railway की चादरें चुराई हैं और अब उन्हें ओढ़कर बाजार में घूम रहे हैं। हालांकि, वीडियो में सिर्फ चादर पर रेलवे की मार्किंग दिखाई देती है; इन लोगों ने वास्तव में चादर चोरी की थी या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि पोस्ट से नहीं होती।

‘रेलवे की चादर’ बनी सोशल मीडिया की चर्चा

वीडियो के साथ किए गए पोस्ट में दावा किया गया कि चादरें Western Railway की ट्रेन से चोरी की गई थीं। इसी दावे के बाद लोगों का ध्यान रेलवे में लिनेन की कथित चोरी की समस्या की ओर भी गया। पोस्ट में RTI के आधार पर जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच AC कोचों से बेडरोल आइटम गायब होने के आंकड़ों का भी जिक्र किया गया।

करोड़ों रुपये के लिनेन का नुकसान?

पोस्ट में साझा आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में अलग-अलग रेलवे डिवीजनों से 1.27 करोड़ से ज्यादा बेडरोल आइटम चोरी होने की बात कही गई है। इनमें करीब 46.54 लाख फेस टॉवल, 41.13 लाख बेडशीट, 23.59 लाख पिलो कवर, 12.95 लाख कंबल और 2.76 लाख तकिए शामिल बताए गए हैं। दावे के मुताबिक, इन सामानों की कुल कीमत ₹104.51 करोड़ से ज्यादा बताई गई है। ये आंकड़े पोस्ट में RTI डेटा के हवाले से दिए गए हैं।

लोगों ने कहा- ‘रेलवे को फैशन ब्रांड बना दिया’

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने अपने अंदाज में प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कुछ लोगों ने इसे रेलवे की संपत्ति के प्रति लापरवाही बताया, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में कहा कि चादर को ऐसे पहना गया है जैसे वह किसी फैशन ब्रांड का हिस्सा हो। एक यूजर ने मजाक करते हुए लिखा कि लोग “WESTERN RAILWAY” को ऐसे पहन रहे हैं जैसे कोई फैशन लेबल हो। वहीं कई अन्य लोगों ने नागरिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक संपत्ति के सम्मान का मुद्दा उठाया।

असली सवाल सिर्फ चादर का नहीं

इस वायरल वीडियो ने एक दिलचस्प सवाल जरूर खड़ा किया है अगर सार्वजनिक संपत्ति लोगों के निजी इस्तेमाल में पहुंच रही है, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है? रेलवे में यात्रियों को दी जाने वाली चादरें और दूसरे लिनेन सार्वजनिक सुविधा का हिस्सा हैं। इनके गायब होने से सीधे तौर पर रेलवे के खर्च और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। फिलहाल वायरल वीडियो में दिख रहे लोगों और चादरों को लेकर लगाए गए चोरी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में वीडियो को लेकर सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाओं को दावे और आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, जब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से इसकी पुष्टि न हो।

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Govinda: गोविंदा ने सुनीता आहूजा के साथ तलाक और दूसरी शादी की अफवाहें फैलाने वालों को दी चेतावनी, 100 करोड़ करेंगे मानहानि का केस

Govinda: बॉलीवुड एक्टर और पूर्व सांसद गोविंदा ने अपनी पर्सनल और फैमिली लाइफ के बारे में झूठे, मानहानि करने वाले और बिना पुष्टि किए गए दावों को फैलाने के खिलाफ कानूनी चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के साथ उनके रिश्ते और हाल ही में एक्टर कोमल रानी स्वर्णकार के साथ उनके संबंधों को लेकर चल रही अटकलों के बीच आई है। उनके कानूनी नोटिस में कहा गया है कि ऐसा कंटेंट फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है और उनसे ₹100 करोड़ तक का हर्जाना मांगा जा सकता है।

जारी किए गए नोटिस के बारे में जानकारी

गोविंदा की तरफ से जारी नोटिस में मीडिया संगठनों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को ऐसे कंटेंट बनाने, पब्लिश करने, अपलोड करने, ब्रॉडकास्ट करने या शेयर करने से आगाह किया गया है, जो झूठी, मानहानि करने वाली, दुर्भावनापूर्ण, मनगढ़ंत या बिना पुष्टि की गई हो। इसमें तस्वीरों, वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, मॉर्फ्ड इमेज, डीपफेक और AI से बने या हेरफेर किए गए अन्य कंटेंट के प्रसार पर भी विशेष रूप से चिंता जताई गई है।

नोटिस के अनुसार, गोविंदा ने किसी को भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या अन्य डिजिटल तकनीकों के जरिए उनकी आवाज, तस्वीरों, पहचान, शक्ल-सूरत या उनकी निजी और पारिवारिक जीवन से जुड़ी सामग्री को बनाने, बदलने या व्यावसायिक रूप से उपयोग करने के लिए अधिकृत नहीं किया है।

यह कानूनी चेतावनी कोमल रानी स्वर्णकार के साथ गोविंदा की कोर्ट मैरिज के बारे में सोशल मीडिया पर हाल ही में किए गए दावों के बीच आई है। इससे पहले गोविंदा और सुनीता के बीच तलाक की खबरों ने भी सुर्खियां बटोरी थीं, जिन्हें बाद में गलत बताया गया था। खबरों के मुताबिक, नोटिस में कहा गया है कि गोविंदा का मानना ​​है कि कुछ अफवाहें उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और उन्हें मानसिक और सामाजिक परेशानी में डालने की जानबूझकर की गई कोशिश का हिस्सा हो सकती हैं।

गोविंदा की टीम द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, एक्टर मानहानि, निजता के उल्लंघन, पहचान के दुरुपयोग और साइबर अपराध से संबंधित कानूनों के तहत दीवानी और आपराधिक उपाय अपना सकते हैं। नोटिस में भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों का ज़िक्र किया गया है। इसमें यह भी चेतावनी दी गई है कि आगे की कानूनी कार्यवाही में दोषी पाए जाने वालों की संपत्ति और वित्तीय खातों के संबंध में अदालती आदेशों की मांग के साथ-साथ कानून के तहत उपलब्ध अन्य उपाय भी शामिल हो सकते हैं।

गोविंदा की पर्सनल लाइफ में हालिया घटनाक्रम

हाल के हफ़्तों में गोविंदा की पर्सनल लाइफ़ लोगों की नज़र में रही है। एक्टर को हाल ही में एयरपोर्ट पर अपनी कथित गर्लफ्रेंड कोमल रानी स्वर्णकार के साथ देखा गया था। उन्हें साथ देखे जाने के बाद, सुनीता ने गोविंदा को कोमल का “शुगर डैडी” कहा और उनके सार्वजनिक रूप से साथ दिखने पर सवाल उठाए। बाद में गोविंदा ने एक वीडियो शेयर किया जिसमें उन्होंने सुनीता से ऐसे बयान न देने को कहा, जिनसे उनके मुताबिक फ़िल्म इंडस्ट्री में उनकी प्रतिष्ठा, करियर और रुतबे को नुकसान पहुंच सकता था।

19 अगस्त को सुनीता को उनके बेटे यशवर्धन आहूजा के साथ बांद्रा फैमिली कोर्ट से निकलते हुए देखा गया। इसके बाद गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने पुष्टि की कि सुनीता ने अपनी तलाक की अर्जी वापस ले ली है, जो लगभग दो साल से लंबित थी।

बाद में राखी सावंत के साथ फोन पर बातचीत के दौरान सुनीता ने दावा किया कि उन्होंने अर्जी इसलिए वापस ली क्योंकि गोविंदा कोमल से शादी करने की योजना बना रहे थे। तब से गोविंदा के मैनेजर ने इस दावे को खारिज कर दिया है और कहा है कि दूसरी शादी की कोई योजना नहीं थी।

उद्योगपति गौतम अडानी ने कर्नाटक CM डीके शिवकुमार से की मुलाकात, टनल रोड प्रोजेक्ट में Adani Group बनी है सबसे बड़ी दावेदार

Gautam Adani meets DK Shivakumar: अडानी ग्रुप के चेयरमैन और दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी ने रविवार 23 अगस्त को राजधानी बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की। शिवकुमार के सदाशिवनगर स्थित आवास पर यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) बेंगलुरु के 16.75 किलोमीटर लंबे टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L1) बनकर उभरी है।

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और अडानी ग्रुप की ओर से इस मुलाकात को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सामने आए वीडियो में शिवकुमार को गौतम अडानी को विदा करते हुए देखा गया। सूत्रों के मुताबिक, अडानी आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर की यात्रा के बाद एयरपोर्ट जाते समय मुख्यमंत्री के आवास पहुंचे थे।

टनल रोड प्रोजेक्ट से जुड़ी है मुलाकात?

गौतम अडानी और सीएम डीके शिवकुमार की मुलाकात का समय इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दिसंबर 2025 में अडानी एंटरप्राइजेज ने सेंट्रल सिल्क बोर्ड से हेब्बाल तक प्रस्तावित 16.75 किलोमीटर टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाई थी। बेंगलुरु स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (B-SMILE) की ओर से दिसंबर 2025 में खोली गई फाइनेंशियल बिड्स से पता चलता है कि AEL ने दोनों पैकेजों में L1 रही थी यानी सबसे कम बोली लगाई थी।

राज्य सरकार ने पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 17,698 करोड़ रुपये रखी थी। वहीं, अडानी एंटरप्राइजेज ने करीब 22,267 करोड़ रुपये की बोली लगाई। यानी कंपनी की बोली सरकारी अनुमान से लगभग 4,600 करोड़ रुपये ज्यादा है। सूत्रों ने बताया कि प्रोजेक्ट को पूरा करने वाली स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) B-SMILE ने 29 मई को राज्य सरकार को फाइल भेजी थी। उसी दिन राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार किया था।

अभी नहीं मिला है ठेका

हालांकि, अडानी एंटरप्राइजेज के सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनने के बावजूद अभी तक उसे आधिकारिक तौर पर प्रोजेक्ट का ठेका नहीं दिया गया है। सूत्रों ने हमारे सहयोगी ‘मनीकंट्रोल’ को बताया कि इस प्रोजेक्ट को लागू करने वाली विशेष उद्देश्य कंपनी (SPV) B-SMILE ने 29 मई को संबंधित फाइल राज्य सरकार को भेजी थी। अधिकारियों के मुताबिक, अडानी की बोली परियोजना के स्वीकृत अनुमान से निर्धारित सीमा से अधिक होने के कारण अब कैबिनेट की मंजूरी जरूरी हो गई है।

शिवकुमार के लिए अहम है ये प्रोजेक्ट

बेंगलुरु का यह टनल रोड प्रोजेक्ट डीके शिवकुमार की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में शामिल माना जाता है। बेंगलुरु विकास मंत्री रहते हुए भी उन्होंने इस प्रोजेक्ट का लगातार समर्थन किया था। हालांकि, प्रोजेक्ट को लेकर नागरिक संगठनों और शहरी परिवहन विशेषज्ञों की ओर से विरोध भी सामने आया है। आलोचकों ने इसकी लागत, ट्रैफिक पर प्रभाव और बेंगलुरु की परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।

30 साल तक निजी कंपनी को मिलेगा संचालन अधिकार

प्रस्तावित टनल रोड को संशोधित Build, Own, Operate and Transfer (BOOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाना है। इस मॉडल के तहत कर्नाटक सरकार प्रोजेक्ट को आर्थिक रूप से मुमकिन बनाने के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग (Viability Gap Funding)’ देगी। सरकार प्रोजेक्ट की लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा उठाएगी। जबकि प्राइवेट कंपनी लगभग 30 साल की अवधि में कंसेशन व्यवस्था के जरिए अपना निवेश वसूल करेगी।

अडानी ग्रुप की कर्नाटक में मौजूदगी

अडानी ग्रुप की कर्नाटक में पहले से ही मजूत बिजनेस मौजूदगी है। ग्रुप की कंपनियों ने राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी, सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग और फ़ूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर में निवेश किया है। इसके अलावा, अडानी ग्रुप उडुपी थर्मल पावर प्लांट और मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन भी करता है।

राहुल गांधी के बयानों से बढ़ी नजर

अडानी की शिवकुमार से मुलाकात राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार अडानी ग्रुप को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। सरकार पर उद्योग समूह को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते रहे हैं। राहुल गांधी कई अडानी से जुड़े प्रोजेक्टों, जिनमें ग्रेट निकोबार परियोजना भी शामिल है, लेकिन आपत्ति जता चुके हैं। हालांकि, केंद्र सरकार और अडानी ग्रुप दोनों ने इन आरोपों को खारिज किया है।

ऐसे में अडानी की मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात और बेंगलुरु टनल रोड प्रोजेक्ट में उनकी कंपनी के L1 bidder बनने का घटनाक्रम अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर खासा ध्यान खींच रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक में टनल रोड प्रोजेक्ट पर कोई चर्चा हुई या नहीं।

गुजरात में जैन मंदिर पहुंचे थे अडानी

इस मुलाकात से पहले गौतम अडानी गुजरात के गांधीनगर जिले स्थित प्रसिद्ध महुडी जैन तीर्थ पहुंचे थे। उनके साथ उनकी पत्नी प्रीति अडानी, बड़े बेटे करण अडानी और बहू परिधि अडानी भी थीं। अडानी ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।

अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी यात्रा की जानकारी शेयर करते हुए कहा था कि उन्हें महुडी जैन तीर्थ के दर्शन का सौभाग्य मिला। उन्होंने जैन धर्म के अहिंसा, आत्म-अनुशासन और करुणा के संदेश का उल्लेख करते हुए सभी के शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब जैन समुदाय पर्युषण महापर्व की तैयारियों में जुटा है। इस वर्ष पर्युषण महापर्व 8 सितंबर से शुरू होगा।

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20 साल में एग्जिक्यूटिव ट्रेनी से DGM तक का सफर! गेल की तरक्की ने कैसे लंबे समय तक टिके एंप्लॉयी की जिंदगी बदली और मिला अवॉर्ड

आज के दौर में बेहतर सैलरी, जल्दी प्रमोशन और नई चुनौतियों के लिए नौकरी बदलना काफी सामान्य हो गया है। कई प्रोफेशनल्स मानते हैं कि हर कुछ साल में कंपनी बदलने से करियर तेजी से आगे बढ़ता है। लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। अगर कोई कंपनी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हो और वहां कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां, सीखने के अवसर और आगे बढ़ने के मौके मिलते रहें, तो लंबे समय तक उसी संगठन के साथ बने रहना भी समझदारी भरा फैसला हो सकता है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी कंपनी के बिजनेस और कामकाज को गहराई से समझने के साथ-साथ धीरे-धीरे बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार होता है।

समय के साथ अनुभव, नेटवर्क और संगठन का भरोसा भी मजबूत होता है। GAIL में 20 साल पूरे करने वाले राकेश शाही का करियर इसी पहलू की एक दिलचस्प मिसाल पेश करता है, जहां लंबें समय तक काम करना लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों और पेशेवर विकास के साथ आगे बढ़ा।

वायरल पोस्ट

GAIL (India) Limited में 20 साल पूरे करने वाले राकेश शाही की LinkedIn पोस्ट इसी पहलू को सामने लाती है। जून 2026 में अपने दो दशक पूरे होने पर उन्होंने Executive Trainee से Deputy General Manager तक के सफर को याद किया। उनकी कहानी बताती है कि सही माहौल मिलने पर कंपनी की ग्रोथ के साथ कर्मचारी का करियर भी लगातार आगे बढ़ सकता है।

एक कंपनी में लंबे समय तक काम करने के फायदे

लंबे समय तक एक ही कंपनी में काम करने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि कर्मचारी संगठन के कामकाज और बिजनेस को गहराई से समझने लगता है। समय के साथ उसे ज्यादा जिम्मेदारियां और बड़े प्रोजेक्ट संभालने का मौका मिल सकता है।

राकेश शाही ने अपने करियर के दौरान Project Management, Gas Marketing, Business Development, Pipeline Infrastructure, Policy, Regulation और Compliance जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया। इससे उनकी विशेषज्ञता सिर्फ एक भूमिका तक सीमित नहीं रही।

प्रमोशन के साथ बढ़ती जिम्मेदारी

अगर कंपनी अपने कर्मचारियों की क्षमता को पहचानती है, तो लंबा कार्यकाल Leadership Roles तक पहुंचने का रास्ता भी खोल सकता है। Executive Trainee से DGM तक का सफर इसका उदाहरण है।

हालांकि सिर्फ लंबे समय तक कंपनी में बने रहना प्रमोशन की गारंटी नहीं है। असली फायदा तब होता है, जब संगठन performance को महत्व देता हो और कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां लेने के अवसर देता हो।

Deputation और नए अनुभव का फायदा

राकेश शाही के करियर में PNGRB में deputation भी एक अहम पड़ाव रहा। वहां उन्हें regulatory framework, authorisation, consumer affairs और natural gas sector से जुड़े विषयों पर काम करने का मौका मिला। ऐसे अवसर कर्मचारी के अनुभव को व्यापक बनाते हैं। बड़ी कंपनियों में लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को अलग-अलग विभागों, प्रोजेक्ट्स और संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिल सकता है।

कब कंपनी के साथ बने रहना चाहिए?

हर कर्मचारी के लिए यह सवाल अहम है कि उसे मौजूदा कंपनी में बने रहना चाहिए या नई नौकरी तलाशनी चाहिए। अगर आपको नए प्रोजेक्ट्स और जिम्मेदारियां मिल रही हैं, नई स्किल्स सीखने का मौका है और आपके प्रदर्शन के आधार पर प्रमोशन या अप्रेजल हो रहा है, तो कंपनी में बने रहना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा कंपनी का बिजनेस मजबूत होना, सीनियर्स का सपोर्ट मिलना और अच्छा वर्क कल्चर भी महत्वपूर्ण संकेत हैं।

कब समझें कि नौकरी बदलने का समय आ गया है?

दूसरी तरफ, अगर कई सालों से आपका काम एक जैसा है और सीखने के मौके खत्म हो चुके हैं, तो बदलाव के बारे में सोचना चाहिए। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद प्रमोशन या उचित अप्रेजल न मिलना भी संकेत हो सकता है। अगर कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है, भविष्य की संभावनाएं कमजोर हैं या वर्क कल्चर लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है, तो दूसरे अवसर तलाशना बेहतर हो सकता है।

लंबा करियर तभी फायदेमंद जब ग्रोथ जारी रहे

राकेश शाही की कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि लंबे समय तक एक कंपनी में रहना तभी फायदेमंद है, जब आपकी ग्रोथ भी साथ-साथ हो रही हो। सिर्फ वर्षों की संख्या बढ़ाना करियर की सफलता नहीं है। अगर कंपनी आगे बढ़ रही है, आपको सीखने और जिम्मेदारी लेने के अवसर मिल रहे हैं और आपकी मेहनत को पहचान मिल रही है, तो बार-बार नौकरी बदलने के बजाय उसी संगठन के साथ आगे बढ़ना एक मजबूत करियर रणनीति हो सकती है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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FPI ने भारतीय शेयरों में बढ़ाई खरीद, अगस्त में अब तक लगाए ₹23544 करोड़

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अगस्त में भारतीय शेयर बाजार में अपनी खरीद तेज कर दी है। कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों, रुपये की स्थिरता और बाजार की बेहतर संभावनाओं से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। FPI ने अगस्त में अब तक भारतीय शेयर बाजार में 23,544 करोड़ रुपये डाले हैं। इससे पहले जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। जुलाई से पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी।

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, FPI ने जून में 49,340 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये, अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मार्च में रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। फरवरी में उन्होंने भारतीय शेयरों में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

हाल की खरीदारी के बावजूद विदेशी निवेशकों की ओर से साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजारों में सेलिंग का आंकड़ा करीब 2,30,000 करोड़ रुपये रहा है। साल 2025 में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये की सेलिंग की थी।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी. के. विजयकुमार का कहना है कि FPI की भारतीय बाजार में वापसी के पीछे कई कारण हैं। इनमें कंपनी के जून तिमाही के बेहतर नतीजे, रुपये की स्थिरता और व्यापक बाजार में कंपनियों की ग्रोथ की अच्छी संभावनाएं प्रमुख हैं। विदेशी निवेशक आकर्षक वैल्यूएशंस वाले बड़े बैंकिंग और आईटी शेयरों में तगड़ी खरीद नहीं कर रहे हैं। इसके बजाय वे हाई वैल्यूएशंस के बावजूद चुनिंदा मझोली कंपनियों के शेयरों में पैसे लगा रहे हैं।

Genus Power Stock Outlook: 33% तक उछलेगा शेयर! एमके ग्लोबल को उम्मीद, खरीद की सलाह

बाजार की आगे की दिशा के लिए निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव पर रहेगी। विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी ऋण या बॉन्ड बाजार में भी दिखाई दी है। अगस्त में अब तक उन्होंने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत ऋण बाजार में 852 करोड़ रुपये का निवेश किया है। वहीं जनरल रूट के जरिए 995 करोड़ रुपये निकाले हैं।

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Genus Power Stock Outlook: 33% तक उछलेगा शेयर! एमके ग्लोबल को उम्मीद, खरीद की सलाह

जीनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड के शेयरों में आगे 33 प्रतिशत तक का उछाल देखने को मिल सकता है। ऐसी उम्मीद एमके ग्लोबल फाइनेंशियल की ओर से दिए गए टारगेट प्राइस से मिली है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 450 रुपये प्रति शेयर तय किया है। यह शेयर के बीएसई पर मौजूदा भाव 337.30 रुपये से 33 प्रतिशत ज्यादा है।

ब्रोकरेज ने अपने नोट में कहा कि भारत सरकार ने घरेलू PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए एक प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है, जो 1 सितंबर 2026 से लागू हो रही है। यह योजना एक्टिव PNG कनेक्शंस को तेजी से बढ़ाने के लिए डिजाइन की गई है। एमके ग्लोबल का अनुमान है कि FY26-34 के दौरान स्मार्ट गैस मीटर बनाने वालों के लिए कुल मिलाकर 350-400 अरब रुपये का अवसर होगा। इस बदलाव के प्रमुख लाभार्थी जीनस पावर, स्मार्ट मीटर्स टेक्नोलॉजीस (SMTPL) और पोलारिस होने की संभावना है।

ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि अपनी फुली इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और एग्जीक्यूशन क्षमताओं का फायदा उठाते हुए, जीनस ने पहले ही स्मार्ट इलेक्ट्रिसिटी मीटरिंग सेगमेंट में एक मजबूत लीडरशिप पोजिशन हासिल कर ली है। स्मार्ट गैस मीटर को अपनाने में धीरे-धीरे तेजी आने की उम्मीद है। ऐसे में जीनस स्मार्ट गैस मीटरिंग के उभरते हुए मौके का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। वर्तमान में देश भर में 1.74 करोड़ घरेलू PNG कनेक्शन मौजूद हैं।

Genus Power का शेयर 5 साल में 445 प्रतिशत चढ़ा

कंपनी का मार्केट कैप 10200 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वेल्यू 1 रुपये है। शेयर 2 सप्ताह में 10 प्रतिशत बढ़ा है। 6 महीनों में कीमत करीब 30 प्रतिशत उछली है। 5 साल में शेयर 445 प्रतिशत की मजबूती देख चुका है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 364.44 रुपये और एडजस्टेड लो 210.49 रुपये है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

अप्रैल-जून 2026 ​तिमाही में जीनस पावर का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 1,364.88 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 162.82 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 5.35 करोड़ रुपये दर्ज की गई। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान स्टैंडअलोन रेवेन्यू 4,737.48 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 604.96 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 19.90 करोड़ रुपये रही।

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NTPC Green की सब्सिडरी को बड़ी सफलता, बिजली सप्लाई की बड़ी डील पर भागेगा शेयर! 24 अगस्त को रहेगी नजर

NTPC Green Energy Share Price: एनटीपीसी के एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी की पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडरी एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी को बड़ी सफलता मिली है। कंपनी ने 22 अगस्त को इसके बारे में एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी। इसे सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) की 6000 MWh की एश्योर्ड पीक वार टेंडर में 500 मेगावाट की कॉन्ट्रैक्टेड कैपेसिटी मिली है। इसके लिए प्रति किलोवाट घंटा का टैरिफ ₹6 तय किया गया है। ऐसे में जब सोमवार 24 अगस्त को मार्केट खुलेगा तो शेयरों पर इसका असर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 21 अगस्त को बीएसई पर यह 0.57% की गिरावट के साथ ₹91.33 पर बंद हुआ था।

इसके शेयर 27 नवंबर 2024 को मार्केट में लिस्ट हुए थे और आईपीओ निवेशकों को यह ₹108 के भाव पर जारी हुआ था। एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी के शेयर 4 दिसंबर 2024 को ₹155.30 के रिकॉर्ड हाई लेवल और 2 फरवरी 2026 को ₹84.08 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर थे।

किस नीलामी में मिली सफलता

एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक टेंडर के लिए ई-रिवर्स ऑक्शन शुक्रवार 21 अगस्त को हुआ। यह टेंडर इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) से जुड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़ा है। इसमें सेबी ने हाई डिमांड वाले टाइम में 4 घंटे के लिए 1500 मेगावाट के हिसाब से से 6 हजार मेगावाट बिजली की व्यवस्था करने का टेंडर निकाला यानी कि ऐसी कंपनियां चुनने के लिए टेंडर निकाला गया जो बिजली की हाई डिमांड वाले समय में चार घंटे तक हर घंटे के हिसाब से 1500 मेगावाट बिजली की सप्लाई कर सकें। इसमें से 500 मेगावाट की सप्लाई के लिए बोली एनटीपीसी ग्रीन की सब्सिडरी ने जीत ली है और इसके तहत यह सेकी को प्रति यूनिट ₹6 के हिसाब से बिजली सप्लाई करेगी।

कैसी है NTPC Green Energy की सेहत

एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। जून 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा शानदार रेवेन्यू के दम पर 38.3% बढ़कर ₹304.84 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 62.7% बढ़कर ₹1,106.86 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर भी कंपनी के लिए जून तिमाही अच्छी रही। जून तिमाही में सालाना आधार पर कंरनी का ईबीआईटीडीए 63.8% बढ़कर ₹988.7 करोड़ और EBITDA मार्जिन 88.7% से 89.3% पर पहुंचा।

इसके अलावा बोर्ड ने रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के डेवलपमेंट के लिए एक पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी या स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) बनाने को मंजूरी दी है। सभी मंजूरी मिलने के बाद कंपनी का मानना है कि यह एसपीवी कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर के ग्राहकों के लिए कैप्टिव या ग्रुप कैप्टिव स्ट्रक्चरिंग के तहत बाद में हिस्सेदारी कम करने में मदद करेगा। बोर्ड ने एनटीपीसी ग्रीन और न्यू एंड रिन्यूएबल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ आंध्र प्रदेश लिमिटेड की आधी-आधी हिस्सेदारी वाले ज्वाइंट वेंचर एपी एनजीईएल हैरिट अमृति लिमिटेड (AP NGEL Harit Amrit Ltd) में ₹28.78 लाख तक निवेश करने की मंजूरी भी दी। इस निवेश के बाद ज्वाइंट वेंचर में एनटीपीसी ग्रीन की हिस्सेदारी बढ़कर 51% हो जाएगी।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rakesh Jhunjhunwala: सिर्फ ₹3 के शेयर ने राकेश झुनझुनवाला को बना दिया अरबपति! जानें ‘बिग बुल’ के उस सबसे बड़े मास्टर स्ट्रोक के बारे

Rakesh Jhunjhunwala Inspirational Journey: जब 1985 में 25 साल का एक नौजवान हाथ में महज 5 हजार रुपये लेकर शेयर बाजार के दंगल में उतरा, तो दलालों ने उसे सिर्फ एक ‘मुंगेरीलाल’ समझा था। पिता की सख्त हिदायत थी कि, ‘एक भी रुपया उधार मत लेना!’ लेकिन उस लड़के की आंखों में दलाल स्ट्रीट को फतह करने का जुनून था। फिर शुरू हुआ सही दांव, सटीक टाइमिंग और लोहे जैसे धैर्य का वो खेल, जिसने उस मामूली लड़के को भारत का ‘बिग बुल’ बना दिया।

₹5,000 से ₹40,000 करोड़ का विशाल साम्राज्य खड़ा करने वाले राकेश झुनझुनवाला की यह कहानी सिर्फ शेयर बाजार का गणित नहीं, बल्कि भारत के इतिहास का सबसे रोमांचक और प्रेरणादायक सफर है। आइए जानते हैं उस एक ‘मास्टर स्ट्रोक’ के बारे में जिसने रातों-रात उनकी किस्मत बदल दी।

शुरुआती जीवन और शेयर बाजार में पहला कदम

राकेश झुनझुनवाला का जन्म 5 जुलाई 1960 को हुआ था। उनके पिता इनकम टैक्स ऑफिसर थे, जो अक्सर अपने दोस्तों के साथ शेयर बाजार की बातें किया करते थे। वहीं से युवा राकेश के मन में बाजार को लेकर उत्सुकता जागी।

पिता की सलाह पर उन्होंने पहले अपनी पढ़ाई पूरी की और वर्ष 1985 में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बने। जब उन्होंने शेयर बाजार में उतरने की इच्छा जताई, तो उनके पिता ने अनुमति तो दी लेकिन दो सख्त शर्तें रखीं। पिता या दोस्तों से पैसा उधार नहीं लेना है, और किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। राकेश झुनझुनवाला ने 1985 में अपनी बचत के ₹5000 के साथ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में कदम रखा। उस समय सेंसेक्स महज 150 अंकों के आसपास था।

टाटा टी ने दिया पहला बड़ा ब्रेकआउट

राकेश झुनझुनवाला को अपनी पहली बड़ी सफलता 1986 में मिली, जब उन्होंने टाटा टी के शेयरों पर बड़ा दांव लगाया। उन्होंने ₹43 के भाव पर टाटा टी के 5000 शेयर खरीदे। महज 3 महीने के भीतर ही उस शेयर की कीमत ₹43 से बढ़कर ₹143 हो गई।

इस एक सौदे से उन्हें करीब ₹5 लाख का बड़ा मुनाफा हुआ। 1986 से 1989 के बीच उन्होंने कई सही दांव लगाकर लगभग ₹20-25 लाख का मुनाफा कमाया, जिसने उन्हें बाजार में बड़ी पूंजी के साथ खेलने का मौका दिया।

वो एक शेयर जिसने बना दिया अरबपति

अगर किसी एक शेयर ने उनकी जिंदगी बदली, तो वो था टाटा ग्रुप का टाइटन कंपनी।उन्होंने वर्ष 2002-03 के दौरान टाइटन के लगभग 6 करोड़ शेयर औसतन ₹3 प्रति शेयर के बेहद सस्ते भाव पर खरीदे। बाजार में तमाम उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने टाइटन में अपनी हिस्सेदारी को सालों-साल बनाए रखा। आगे चलकर टाइटन का शेयर हजारों रुपये के स्तर पर पहुंच गया। अकेले टाइटन के शेयर से ही उनकी नेटवर्थ में ₹10,000 करोड़ से ज्यादा का इजाफा हुआ।

इसके अलावा सिल्सा लैब (Sesa Goa), लुपिन, क्रिसिल और स्टार हेल्थ जैसे शेयरों में उनके शुरुआती निवेश ने उन्हें भारतीय बाजार का सबसे सफल रिटेल निवेशक बना दिया। अपने जीवन के आखिरी दौर में उन्होंने भारत की नई एयरलाइन अकासा एयर में भी बड़ा निवेश किया।

राकेश झुनझुनवाला की सफलता के 4 सबसे बड़े मंत्र

1. लंबी अवधि का धैर्य: वे ट्रेडिंग से ज्यादा लंबी अवधि के वैल्यू इन्वेस्टिंग पर भरोसा करते थे। उनका मानना था कि अगर कंपनी का फंडामेंटल मजबूत है, तो समय के साथ शेयर बढ़ेगा ही।

2. भारत की ग्रोथ पर पक्का भरोसा: वे हमेशा कहते थे कि भारत की अर्थव्यवस्था पर दांव लगाओ। वे भारतीय बाजार को लेकर हमेशा बेहद बुलिश रहते थे।

3. गलतियों से सीखना: झुनझुनवाला का मानना था कि बाजार में गलतियां होना स्वाभाविक है, लेकिन अपनी गलती को जल्दी स्वीकार करना और घाटे को काटना ही असली समझदारी है।

4. जब सब डरें, तब निवेश करें: 1992 के हर्षद मेहता घोटाले या 2008 की वैश्विक मंदी उन्होंने हर बड़े संकट और मंदी को एक बेहतरीन खरीदारी के मौके के रूप में देखा।

निवेशकों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहेंगे ‘बिग बुल’

14 अगस्त 2022 को 62 वर्ष की उम्र में भले ही भारत के ‘बिग बुल’ ने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी छोड़ी हुई विरासत आज भी दलाल स्ट्रीट की हर धड़कन में जिंदा है। ₹5000 की मामूली पूंजी से शुरू होकर देश की सबसे बड़ी एविएशन कंपनी और बहुचर्चित इन्वेस्टमेंट फर्म्स में विशाल हिस्सेदारी बनाने का उनका यह सफर सिर्फ एक निवेशक की कामयाबी नहीं, बल्कि हर आम इंसान के बड़े सपने देखने और उन्हें सच करने की सबसे बड़ी मिसाल है। राकेश झुनझुनवाला भले आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनका एक-एक सबक आज भी करोड़ों निवेशकों को बाजार के तूफानों से टकराने और अपनी किस्मत खुद लिखने का हौसला देता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Vs Share Market: 1 साल में सोना चमका, पर लंबे समय में कौन बनाएगा ज्यादा अमीर? समझें 20 साल का पूरा गणित

Gold Vs Equity Investment Comparison: बीते एक साल में सोने ने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। एक तरफ जहां पिछले 1 साल में सोने ने करीब 35.3 फीसदी का बंपर रिटर्न दिया है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय शेयर बाजार का बेंचमार्क इंडेक्स Nifty 50 TRI लगभग 5.4 फीसदी टूटा है।

हालिया रिटर्न को देखकर पहली नजर में गोल्ड ही असली विजेता नजर आता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या 10, 15 या 20 साल के लंबे समय में भी सोना शेयर बाजार को पछाड़ सकता है? फाइनेंशियल रिसर्च फर्म FundsIndia की अगस्त 2026 की ‘वेल्थ कन्वर्सेशंस’ रिपोर्ट के आंकड़े कुछ अलग ही कहानी बयां करते हैं।

लंबे समय में कौन आगे? 10, 15 और 20 साल का आंकड़ा

फंड्सइंडिया ने जनवरी 2000 से लेकर अब तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। शॉर्ट टर्म में सोने का प्रदर्शन शेयर बाजार से बेहतर दिख सकता है, लेकिन जैसे-जैसे निवेश का समय बढ़ता है, बाजी शेयर बाजार के हाथ में चली जाती है।

निवेश की अवधि Nifty 50 TRI के मुकाबले सोने का औसत प्रदर्शन
1 साल की अवधि -65% (न्यूनतम) से +79% (अधिकतम) तक उतार-चढ़ाव
10 साल की अवधि10 साल की अवधि सोना औसतन 2% प्रति वर्ष पीछे रहा
15 साल की अवधिसोना औसतन 2% प्रति वर्ष पीछे रहा
20 साल की अवधि सोना औसतन 2% प्रति वर्ष पीछे रहा

वर्षों के आंकड़ों से साफ है कि 10, 15 और 20 साल के क्षितिज पर शेयर बाजार ने औसतन सोने के मुकाबले 2 फीसदी सालाना ज्यादा रिटर्न दिया है। भले ही 2% का अंतर छोटा लगे, लेकिन जब 15-20 सालों में कंपाउंडिंग का असर पड़ता है, तो बड़ा वेल्थ गैप बन जाता है।

क्या शेयर बाजार, सोने से बेहतर विकल्प है?

जरूरी नहीं, क्योंकि दोनों ही एसेट क्लास का पोर्टफोलियो में अलग-अलग रोल होता है:

इक्विटी (शेयर बाजार): इसका मुख्य काम लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन है।

सोना: यह पोर्टफोलियो को सुरक्षा और डाइवर्सिफिकेशन देता है। जब शेयर बाजार संकट या मंदी के दौर से गुजरता है, तब सोना तेजी से चमकता है।

फंड्सइंडिया की सीनियर मैनेजर जिराल मेहता का कहना है, ‘अलग-अलग एसेट क्लास का लीडरशिप रोल बदलता रहता है। कोई भी एक एसेट क्लास हर साल टॉप पर नहीं रह सकता।’

निवेशकों के लिए क्या है सबक?

केवल पिछले 1 साल के 35% रिटर्न को देखकर शेयर बाजार छोड़कर सारा पैसा सोने में लगाना गलत रणनीति हो सकती है। इतिहास गवाह है कि लंबी अवधि (10 से 20 साल) में शेयर बाजार ने सोने से ज्यादा संपत्ति बनाकर दी है। इसीलिए पोर्टफोलियो बैलेंस रखें। किसी एक में दांव लगाने के बजाय, लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों के लिए इक्विटी और पोर्टफोलियो की स्थिरता के लिए गोल्ड का सही मिश्रण बनाएं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ट्रम्प ने होर्मुज को फिर अमेरिकी इलाका बताया:ईरान बोला- दावा हकीकत से दूर, रेजाई ने अमेरिका पर बातचीत और वादे तोड़ने का आरोप लगाया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिर एक तस्वीर शेयर की, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘अमेरिकी इलाका’ बताया गया है। ईरान ने इस दावे को हकीकत से दूर बताया है। ट्रम्प ने पहली बार यही तस्वीर 18 अगस्त को शेयर की थी। इससे पहले 14 अगस्त को लॉन्ग आइलैंड की पुलिस अकादमी में उन्होंने कहा था, “बहुत जल्द मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका का इलाका घोषित करूंगा।” यह बयान ऐसे समय आया है, जब संघर्ष छह महीने पूरे होने के करीब है। ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ “अभूतपूर्व आर्थिक युद्ध और अलगाव” का नया अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। अमेरिका ने आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई इस अभियान को “इकोनॉमिक डी-डे” नाम दिया गया है। इसका मकसद ईरान के बचे हुए आर्थिक सहारे पूरी तरह खत्म करना है। अमेरिका ने अपनी रणनीति सीधे सैन्य संघर्ष से हटाकर ईरान पर आर्थिक दबाव और उसे अलग-थलग करने की ओर कर दी है। ईरान के सुरक्षा अधिकारी बोले- कूटनीतिक तरीके में बदलाव जरूरी ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने कहा कि अमेरिका के वादों से पीछे हटने के बाद ईरान के कूटनीतिक व्यवहार में सुधार जरूरी है। ईरान के राष्ट्रीय टीवी पर प्रसारित इंटरव्यू में उन्होंने अमेरिका के साथ ईरान के कूटनीतिक व्यवहार में बदलाव की जरूरत बताई। रेजाई ने कहा, “पूरी दुनिया ईरान को एक नए नजरिए से देख रही है।” उन्होंने कहा, “कई बातचीत और अमेरिका की ओर से वादा तोड़े जाने के बाद, दुनिया के साथ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के कूटनीतिक व्यवहार में सुधार होना चाहिए।” रेजाई ने आगे कहा, “युद्ध के तरीके में निश्चित रूप से बदलाव आएगा। अमेरिकियों ने बातचीत, कूटनीति और अपने हस्ताक्षर के साथ विश्वासघात किया है।” पेजेश्कियन बोले- मजबूत स्थिति में युद्ध खत्म करना सही इस्लामिक एसोसिएशन ऑफ ईरानियन मेडिकल कम्युनिटी की 31वीं आम सभा में पेजेश्कियन ने समझौता ज्ञापन (MoU) को “सम्मानजनक और मूल्यवान” बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में एकता के जरिए हुआ था। इसमें शामिल सभी लोगों ने मजबूती से इसका समर्थन किया था। पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान के मजबूत और ताकतवर रहते हुए युद्ध खत्म करना सही रास्ता था। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया ने ईरान की जीत को पहचाना है। उनके मुताबिक, नियमों का उल्लंघन कर स्कूलों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे पर हमला करने के कारण दुनिया अमेरिका को “नफरत के लायक” मानती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान कभी आक्रामकता के सामने झुकेगा। पेजेश्कियन ने कहा, “हम कभी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। हम अपनी आखिरी सांस तक खड़े रहेंगे और करारा जवाब देंगे।”