IPOs This Week: 6 जुलाई से शुरू हफ्ते में खुलेंगे ₹717 करोड़ के 3 नए इश्यू, 10 कंपनियां होंगी लिस्ट

6 जुलाई से शुरू हफ्ते में देश के IPO मार्केट में हलचल बनी रहेगी। इसका कारण है कि 3 नए पब्लिक इश्यू खुलने वाले हैं। इनमें से एक मेनबोर्ड सेगमेंट से है। इसके अलावा नए सप्ताह में पहले से खुले एक IPO में भी पैसे लगाने का मौका रहेगा। लेकिन यह SME है। जहां तक शेयर बाजार में लिस्ट होने वाली नई कंपनियों की बात है तो नए शुरू हो रहे सप्ताह में 10 कंपनियों के शेयर अपनी शुरुआत करने वाले हैं। इनमें से 2 कंपनियां मेनबोर्ड सेगमेंट की हैं। आइए जानते हैं डिटेल…

नए खुल रहे IPO

Kusumgar IPO: मेनबोर्ड सेगमेंट में ₹650 करोड़ का इश्यू 8 जुलाई को खुलेगा और 10 जुलाई को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹398-₹419 प्रति शेयर और लॉट साइज 35 शेयर है। कंपनी की लिस्टिंग NSE और BSE पर 15 जुलाई को हो सकती है।

Devson Catalyst IPO: यह 9 जुलाई को ओपन होगा। इसमें ₹112-₹118 प्रति शेयर के प्राइस बैंड में और 1200 शेयरों के लॉट में 13 जुलाई तक पैसे लगा सकते हैं। कंपनी ₹42.34 करोड़ जुटाना चाहती है। शेयरों की लिस्टिंग BSE SME पर 16 जुलाई को होने की उम्मीद है।

Happy Steels IPO: यह भी 9 जुलाई को खुलेगा और 13 जुलाई को बंद होगा। इश्यू का साइज ₹25 करोड़ है। प्राइस बैंड ₹62-₹66 प्रति शेयर है। लॉट साइज 2,000 शेयर है। कंपनी के शेयर NSE SME पर 16 जुलाई को शुरुआत कर सकते हैं।

पहले से खुले पब्लिक इश्यू

IC Electricals IPO: ₹47.91 करोड़ का इश्यू 3 जुलाई को खुला था। अब तक यह 7.18 गुना भरा है। प्राइस बैंड ₹94-₹99 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,200 शेयर है। 7 जुलाई को इश्यू की क्लोजिंग के बाद शेयरों की लिस्टिंग NSE SME पर 10 जुलाई को हो सकती है।

Parle Products IPO: पारले-जी बनाने वाली कंपनी का आएगा आईपीओ, ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा के वैल्यूएशन पर नजर : सूत्र

लिस्ट होने वाली कंपनियां

नए शुरू हो रहे सप्ताह में 6 जुलाई को मेनबोर्ड सेगमेंट में NSE और BSE पर Aastha Spintex की लिस्टिंग हो सकती है। इसी दिन BSE SME पर Adon Agro Commodities के शेयर लिस्ट होने की उम्मीद है। इसके बाद 7 जुलाई को BSE SME पर Kratikal Tech, Seemax Resources, Atharva Polyplast और Sampark India Logistics के शेयर अपनी शुरुआत कर सकते हैं। NSE SME पर Vinit Mobile और Teja Engineering Industries की लिस्टिंग होने वाली है। 8 जुलाई को NSE और BSE पर Knack Packaging की लिस्टिंग हो सकती है। 10 जुलाई को NSE SME पर IC Electricals के शेयर अपनी शुरुआत कर सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Income Tax Return: अगर आपके फॉर्म 16 में टैक्स जीरो है तो भी न करें ये भूल! इन 4 बड़े फायदों के लिए जरूर फाइल करें ITR

नौकरीपेशा लोगों के बीच अक्सर यह आम धारणा होती है कि अगर उनके फॉर्म 16 में कोई टैक्स नहीं कटा है या फिर कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती है तो उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की कोई जरूरत नहीं है। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक फॉर्म 16 में टैक्स लायबिलिटी निल होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको आईटीआर दाखिल करने से छूट मिल गई है। ऐसा न करना आपको भारी पड़ सकता है।

फॉर्म 16 नहीं है आपकी वित्तीय स्थिति की पूरी तस्वीर

King Stubb & Kasiva, Advocates and Attorneys के पार्टनर आदित्य भट्टाचार्य का कहना है कि एक आम गलतफहमी यह है कि अगर फॉर्म 16 में कोई टीडीएस या देय टैक्स नहीं है तो आईटीआर फाइल करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, फॉर्म 16 सिर्फ इंप्लॉयर द्वारा भुगतान किए गए वेतन और काटे गए टैक्स (अगर कोई है तो) का एक रिकॉर्ड है। यह किसी व्यक्ति की पूरी वित्तीय तस्वीर को नहीं दर्शाता है। आईटीआर फाइल करने की अनिवार्यता इनकम टैक्स एक्ट के प्रावधानों, आपकी कुल आय और वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए वित्तीय लेनदेन पर निर्भर करती है।

इन 4 बड़े फायदों के लिए जरूर फाइल करें ITR

भले ही आपके फॉर्म 16 में टैक्स जीरो दिख रहा हो लेकिन नीचे दी गई स्थितियों और फायदों के लिए आपको आईटीआर जरूर दाखिल करना चाहिए-

1- टैक्स रिफंड का दावा करने के लिए

कई बार ऐसा होता है कि बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज पर टीडीएस काट लेते हैं या फिर नौकरी बदलने की स्थिति में पिछला इंप्लॉयर नौकरी छोड़ने से पहले टैक्स काट लेता है। भले ही वित्तीय वर्ष के अंत में आपकी कुल अंतिम टैक्स देनदारी शून्य ही क्यों न हो, लेकिन इस कटे हुए एक्स्ट्रा टैक्स को वापस पाने का एकमात्र जरिया आईटीआर है। बिना रिटर्न फाइल किए आप रिफंड क्लेम नहीं कर सकते।

2- वित्तीय घाटे को आगे बढ़ाने के लिए

अगर आप शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी से कोई कैपिटल लॉस उठाते हैं तो नियमों के तहत आप इस घाटे को भविष्य के मुनाफे के साथ एडजस्ट कर सकते हैं। यह लाभ आपको तभी मिलेगा जब आप निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना आईटीआर दाखिल करेंगे। डेडलाइन चूकने का मतलब है कि आप इस मूल्यवान टैक्स लाभ को हमेशा के लिए खो देंगे।

3- इन विशेष सरकारी शर्तों/नियमों को पूरा करने के लिए

टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार भले ही आपका अंतिम टैक्स शून्य हो लेकिन अगर आप वित्तीय वर्ष में निम्नलिखित में से किसी भी शर्त के दायरे में आते हैं तो आपके लिए आईटीआर फाइल करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाता है:

  • एक या अधिक सेविंग्स बैंक अकाउंट्स में 50 लाख रुपये से अधिक जमा करना।
  • एक या अधिक करंट अकाउंट्स (चालू खातों) में 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक जमा करना।
  • अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से अधिक खर्च करना।
  • एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल चुकाना।
  • अगर आप भारत के निवासी हैं और विदेशों में संपत्ति रखते हैं, किसी विदेशी संस्था में वित्तीय हित रखते हैं, विदेशी बैंक खाते में हस्ताक्षर करने का अधिकार रखते हैं या विदेशी संपत्तियों के लाभार्थी हैं।
  • वर्ष के दौरान कुल टीडीएस (TDS) या टीसीएस (TCS) 25000 रुपये या उससे अधिक हो (वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 50000 रुपये है)।
  • ऐसे प्रोफेशनल्स जिनकी कुल प्राप्तियां 10 लाख रुपये से अधिक हैं, भले ही उनकी टैक्स योग्य आय बुनियादी छूट सीमा से कम ही क्यों न हो।

4- लोन और वीजा के लिए पुख्ता इनकम प्रूफ

‘दिनेश आर्जव एंड एसोसिएट्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स’ की पार्टनर और एनआरआई टैक्स एक्सपर्ट प्रियल गोयल जैन कहती हैं कि कंप्लायंस के नजरिए से परे आपका आईटीआर चुपचाप आपके लिए दूसरी जगहों पर भी बहुत काम करता है। बैंक और वीजा कार्यालय अक्सर आय के प्रमाण के रूप में इसी दस्तावेज को मांगते हैं। इसलिए रिकॉर्ड में आईटीआर का होना बेहद फायदेमंद है, भले ही तकनीकी रूप से आपके लिए इसे फाइल करना जरूरी न रहा हो।

ऐसे में फॉर्म 16 में जीरो टैक्स देखकर आईटीआर न भरने की धारणा नुकसानदेह हो सकती है। ‘AQUILAW’ की लीड कंसलटेंट (टैक्स) – IDT डिंपल जोगानी के मुताबिक, फाइलिंग की आवश्यकता को नजरअंदाज करने से टैक्सपेयर्स न सिर्फ अपना रिफंड खो सकते हैं बल्कि नुकसान को कैरी फारवर्ड करने का मौका भी गंवा सकते हैं। अगर आयकर विभाग बाद में यह पाता है कि आपके लिए फाइलिंग अनिवार्य थी तो आपको स्पष्टीकरण के लिए नोटिस भी मिल सकता है। मामले के तथ्यों के आधार पर लेट फाइलिंग फीस, ब्याज या अन्य परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने अब ऐसी गलतफहमियों की गुंजाइश को खत्म कर दिया है। इंप्लॉयर, बैंकों, म्यूचुअल फंडों, स्टॉक एक्सचेंजों और अन्य वित्तीय संस्थानों से मिलने वाली जानकारी अब टैक्सपेयर के एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) में दिखाई देती है। इसके जरिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके द्वारा किए गए वित्तीय लेनदेन की तुलना आपके रिटर्न में घोषित आय से आसानी से कर लेता है।

एक्सपर्ट्स की सलाह: सिर्फ फॉर्म 16 पर न रहें निर्भर

जैसे-जैसे टैक्स फाइलिंग का सीजन तेज हो रहा है विशेषज्ञ टैक्सपेयर्स को सलाह देते हैं कि वे ‘जीरो टीडीएस’ को ‘जीरो कंप्लायंस’ समझने की भूल न करें। सिर्फ फॉर्म 16 पर निर्भर रहने की बजाय, व्यक्तियों को अपनी आय के सभी स्रोतों की समीक्षा करनी चाहिए। अपने फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) की जांच करनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे आईटीआर फाइल करने की शर्तों के दायरे में आते हैं या नहीं।

स्टॉक मार्केट में  लगातार तीसरे दिन तेजी, क्या अगले हफ्ते 24600 पार कर जाएगा Nifty?

यह हफ्ता शेयर बाजार के लिए अच्छा रहा। 3 जुलाई को लगातार तीसरे दिन बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स चढ़कर बंद हुए। हालांकि, बैंक निफ्टी और मिडकैप इंडेक्स में कमजोरी दिखी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार का सेंटिमेंट बेहतर हुआ है। सवाल है कि क्या निफ्टी अगले हफ्ते 24,600 का लेवल पार कर जाएगा?

लंबे कंसॉलिडेशन के बाद 24200 के ऊपर ब्रेकआउट

Nifty ने लंबे समय के कंसॉलिडेशन के बाद 24,200 के ऊपर ब्रेकआउट किया है। उधर, India VIX गिरकर करीब 5 महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। मोमेंटम इंडियाकेटर्स में भी शुक्रवार को इम्प्रूवमेंट दिखा। हालांकि, शॉर्ट टर्म में निफ्टी के लिए 24,400 के लेवल पर रेसिस्टेंस है। यह इसका 200-डे EMA भी है। अगर निफ्टी इस रेसिस्टेंस को तोड़ देता है तो इसे 24,600 पर रेसिस्टेंस मिलेगा।

कारोबार के अंतिम घंटों में मुनाफावसूली से कम हुई बढ़त

शुक्रवार को निफ्टी 200 अंक चढ़कर खुला। लेकिन, कारोबार के अंतिम घटों में मुनाफावसूली देखने को मिली। इससे सुबह में 24,376 तक जाने के बावजूद यह 24,300 के लेवल के नीचे आ गया। आखिर में यह 24,271 पर क्लोज हुआ। डेली चार्ट पर इसने बेयरिश कैंडल बनाया है। हालांकि, बुलिश गैप बना हुआ है। तकनीकी रूप से यह रेसिस्टेंस लेवल के ऊपर अपसाइड ब्रेकआउट के लिहाज से स्ट्रेंथ की कमी का संकेत है।

बुल्स की ताकत धीरे-धीरे बढ़ने का संकेत

RSI दोबारा 60 के लेवल को हासिल किया है। बुलिश क्रॉसओवर में यह 60.95 तक पहुंच गया है। यह बुलिश मोमेंटम में धीरे-धीरे इम्प्रूवमेंट का संकेत है। इसके अलावा ADX इंडिकेटर पर DI+ ने DI- को क्रॉस किया है। यह इस बात का संकेत है कि धीरे-धीरे बेयर्स के मुकाबले बुल्स की ताकत बढ़ रही है। MACD हिस्टोग्राम भी मजबूती का संकेत दे रहा है, क्योंकि ग्रीन बार्स बढ़ रहे हैं।

इस हफ्ते निफ्टी में 215 अंक का उछाल

इस हफ्ते निफ्टी 215 अंक यानी 0.89 फीसदी चढ़ा है। पिछले दो हफ्तों में डोजी-लाइक फॉर्मेशन के बाद निफ्टी ने दोनों साइड शैडो के साथ लॉन्ग बुलिश कैंडल बनाया है। यह इस बात का संकेत है कि मार्केट में कंसॉलिडेशन का फेज जल्द खत्म हो सकता है। इसके बाद निफ्टी फिर से अपसाइड मोमेंटम हासिल कर सकात है। ऐसे में अगले हफ्ते 24,600 के टारगेट पर नजरें होंगी। अगला सपोर्ट 24,050 पर है।

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बैंक निफ्टी का प्रदर्शन निफ्टी 50 से कमजोर

बैंक निफ्टी का प्रदर्शन निफ्टी 50 के मुकाबले कमजोर है। शुक्रवार को यह 93 अंक गिरकर 57,938 पर बंद हुआ। हालांकि, यह अपने सभी प्रमुख मूविंग एवरेजेज से ऊपर बना हुआ है। इसका मतलब है कि इसका ओवरऑल स्ट्रक्चर पॉजिटिव है। हालांकि, इसमें आगे कंसॉलिडेशन दिख सकता है। डेली चार्ट पर इसने बेयरिश कैंडल बनाया है। बैंक निफ्टी को 58,400-58,500 के जोन में रेसिस्टेंस का सामना करना पड़ा। इस लेवल को तोड़ने के बाद यह 58,900 तक जा सकता है। गिरावट की स्थिति में इसे 57,500-57,400 के जोन में सपोर्ट मिलेगा।

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Stock Market Rise: लगातार तीसरे दिन हरियाली, सेंसेक्स 262 अंक चढ़ा; निवेशकों की दौलत में ₹94270 करोड़ का इजाफा

शेयर बाजार में शुक्रवार, 3 जुलाई को लगातार तीसरे दिन तेजी रही। आईटी स्टॉक्स में बढ़त और अमेरिका के रोजगार आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने के बीच सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में बंद हुए। सेंसेक्स बढ़त में खुलने के बाद पिछली क्लोजिंग से 655 अंक से ज्यादा चढ़कर 78,157.52 के हाई तक गया। इसी तरह निफ्टी भी बढ़त में खुला और फिर 200 अंक से ज्यादा उछलकर 24,378.15 के हाई तक गया। बाद में सेंसेक्स 261.79 अंकों की तेजी के साथ 77,763.91 पर और निफ्टी 95.15 अंकों की बढ़त के साथ 24,270.85 पर बंद हुआ।

मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप बढ़कर 4,80,19,994.09 करोड़ रुपये हो गया। गुरुवार, 2 जुलाई को मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,79,25,723.825 करोड़ रुपये रहा था। यानि कि एक दिन में 94,270.265 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। गुरुवार को सेंसेक्स 579.48 अंक या 0.75 प्रतिशत बढ़कर 77,502.12 पर बंद हुआ था। निफ्टी 169.85 अंक या 0.71 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,175.70 पर बंद हुआ था।

इन प्रमुख वजहों से तेजी

अमेरिका में नौकरियों का डेटा उम्मीद से कमजोर रहने से फेडरल रिजर्व द्वारा निकट अवधि में बेंचमार्क ब्याज दरें बढ़ाए जाने को लेकर चिंता कम हुई। इससे उभरते बाजारों में जोखिम लेने की इच्छा बढ़ी। इसके अलावा एशियाई बाजारों में तेजी का भी घरेलू बाजार में सेंटिमेंट बे​हतर होने में हाथ रहा। निक्केई-225 में 1.3 प्रतिशत और सेट कंपोजिट में 1.1 प्रतिशत की तेजी है। जकार्ता कंपोजिट 2 प्रतिशत से ज्यादा उछला है। KOSPI 5.4 प्रतिशत चढ़ा है। हेंगसेंग में भी लगभग 1 प्रतिशत की तेजी है। एक वजह यह भी है कि मार्केट के उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाले India VIX में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह दर्शाता है कि बाजार में अनिश्चितता और जोखिम की आशंका कम हुई है, जो आमतौर पर इक्विटी बाजार के लिए अच्छा माना जाता है।

Waterways Leisure Tourism में और 10% तेजी की लहर, लगातार दूसरे दिन अपर सर्किट

रुपये की चाल

रुपया शुक्रवार को 14 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.21 (अस्थायी) पर रहा। डॉलर सूचकांक के पिछले 15 महीनों के उच्च स्तर से नीचे आने से घरेलू मुद्रा को बल मिला। रुपया गुरुवार को 19 पैसे की गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.35 पर बंद हुआ था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold-Silver ETFs : गोल्ड और सिल्वर ETF 3% तक भागे, US में ब्याज दरों को लेकर नरम रुख की उम्मीद ने भरा जोश

Gold-Silver ETFs : शुक्रवार को भारत में गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में 2-3 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है। यह बढ़त ग्लोबल मार्केट में प्रोसियस मेटल्स की कीमतों में आई तेजी के कारण हुई। अमेरिकी लेबर मार्केट के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे हैं। इससे यह उम्मीद मजबूत हुई कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर नरम रुख अपना सकता है।

आज दोपहर के कारोबार में निप्पॉन इंडिया ETF गोल्ड BeES 2.4 प्रतिशत बढ़कर 120.51 रुपये पर पहुंच गया,जबकि ICICI प्रूडेंशियल गोल्ड ETF 2.4 प्रतिशत बढ़कर 124.90 रुपये पर कारोबार करता दिखा। SBI गोल्ड ETF 2.3 प्रतिशत बढ़कर 124.25 रुपये और टाटा गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड 2.3 प्रतिशत बढ़कर 14.14 रुपये पर पहुंच गया।

इंटरनेशनल मार्केट में चांदी की कीमतों में तेज उछाल आने के कारण सिल्वर ETF ने गोल्ड ETF के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। निप्पॉन इंडिया सिल्वर BeES 2.6 प्रतिशत बढ़कर 221.95 रुपये पर,टाटा सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड 2.6 प्रतिशत बढ़कर 22.55 रुपये पर,SBI सिल्वर ETF 2.5 प्रतिशत बढ़कर 227.28 रुपये पर और ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ETF 2.4 प्रतिशत बढ़कर 231.28 रुपये पर पहुंच गया।

 स्पॉट गोल्ड 1% बढ़कर $4,165.29 प्रति औंस पर पहुंचा

ग्लोबल मार्केट में बुलियन की कीमतों में आई तेजी के बाद भारतीय बाजार में यह रैली देखने को मिली है। आज स्पॉट गोल्ड 1% बढ़कर $4,165.29 प्रति औंस पर पहुंच गया,जबकि इससे पहले सेशन में यह 23 जून के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। अगस्त डिलीवरी वाला US गोल्ड फ्यूचर्स 1.3% बढ़कर $4,178.50 पर पहुंच गया है। गोल्ड-सिल्वर अपनी पहली साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहे हैं। इस हफ्ते इनमें लगभग 1.8% की बढ़ोतरी हुई है। US नॉन-फार्म पेरोल्स और प्राइवेट पेरोल्स के आंकड़े उम्मीद से कमज़ोर रहे,जिससे लगातार बनी महंगाई और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की आशंका को लेकर चिंताएं कम हुईं है, इसका फायदा सोने-चांदी को मिल रहा है।

चांदी की कीमतों में भी तेजी जारी

चांदी की कीमतों में भी तेजी जारी है। इसका हाजिर भाव 2.1 प्रतिशत बढ़कर $62.28 प्रति औंस हो गया है। दूसरी कीमती धातुओं की बात करें तो प्लेटिनम की कीमत 2.4 प्रतिशत बढ़कर $1,655.15 पर आ गई है। जबकि पैलेडियम 0.9 प्रतिशत बढ़कर $1,278.89 पर पहुंच गया है। ये तीनों धातुएं एक हफ्तो से ज्यादा समय के अपने उच्चतम स्तर के करीब कारोबार कर रही है।

शेयर बाजार का भी मूड सुधरा

गोल्ड-सिल्वर ETF में बढ़त के साथ ही आज शेयर बाजार का मूड भी अच्छा बना हुआ था। 3 बजे के आसपास सेंसेक्स 287.65 अंक या 0.37 प्रतिशत बढ़कर 77,789.77 पर और निफ्टी 101.95 अंक या 0.42 प्रतिशत बढ़कर 24,277.65 पर दिख रहा था। लगभग 2016 शेयरों में बढ़त दिख रही थी। 1828 शेयरों में गिरावट आई थी और 178 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ था। वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में 3.34 प्रतिशत की गिरावट आई। यह बाजार में उतार-चढ़ाव की उम्मीदों में कमी का संकेत है। इससे तेजड़ियों को राहत मिल सकती है।

 

Gold Silver Rates Today: देश और विदेश में सोने और चांदी को लगे पंख, इन तीन वजहों से आई तेजी

PB Fintech का शेयर बाजार खुलते ही क्रैश, ब्लॉक डील के बाद बढ़ा बिकवाली का दबाव

पीबी फिनटेक का शेयर 3 जुलाई को बाजार खुलते ही क्रैश कर गया। कंपनी के शेयरों में एक बड़ी ब्लॉक डील हुई। कंपनी के 2.3 फीसदी शेयरों की बिक्री करीब 1,741 करोड़ रुपये में हुई। इसके बाद शेयरों पर बड़ा दबाव दिखा। 10 बजे शेयर 7.31 फीसदी गिरकर 1,563.50 रुपये पर चल रहा था। पहले खबर आई थी कि सिंगापुर की सॉवरेन इनवेस्टमेंट फर्म टेमासेक होल्डिंग्स पीबी फिनटेक में अपनी हिस्सेदारी घटाना चाहती है।

इस साल अब तक 14 फीसदी गिर चुका है शेयर 

PB Fintech का शेयर इस साल अब तक करीब 14 फीसदी गिर चुका है। इस दौरान निफ्टी में 7 फीसदी गिरावट आई है। पीबी फिनटेक का मार्केट कैपिटलाइजेशन 72,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। स्टॉक एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, ब्लॉक डील में 1.08 शेयरों का ट्रांजेक्शन प्रति शेयर 1,601 रुपये के रेट पर हुआ है। यह 2 जुलाई को शेयर के 1,682.10 रुपये के क्लोजिंग प्राइस से करीब 4.8 रुपये का डिस्काउंट है।

अभी खरीदार और बेचने वाले की जानकारी उपलब्ध नहीं

स्टॉक एक्सचेंजों पर अभी शेयर खरीदने वाले और बेचने वाले की जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह ट्रांजेक्शन 2 जुलाई को आई खबरों के मुताबिक है। खबरों में कहा गया है था कि टेमासेक होल्डिंग्स अपनी एक सब्सिडियरी के जरिए पीबी फिनेटक के 1.19 करोड़ शेयर बेचना चाहती है। यह पीबी फिनेटक में 2.6 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है। खबरों में प्रति शेयर करीब 1,909 रुपये की कीमत पर ब्लॉक डील होने का अनुमान जताया गया था।

बीते कुछ महीनों में कई बड़े शेयरहोल्डर्स ने बेची हिस्सेदारी

इस ट्रांजेक्शन से पहले टेमासेक होल्डिंग्स की सब्सिडियरी MacRitchie Investments की PB Fintech में 6.47 फीसदी हिस्सेदारी थी। सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया को इस डील का एकलौता प्लेसमेंट एजेंट बताया गया था। बताया गया था कि इस डील के बाद टेमासेक पर अपनी बाकी हिस्सेदारी बेचने के लिए 60 दिन का लॉक-अप लागू होगा। बीते कुछ महीनों में पीबी फिनटेक में कई बड़े शेयरहोल्डर्स ने हिस्सेदारी बेची है।

मई में दहिया और बंसल ने भी बेचे थे कंपनी के शेयर

इस साल मई में पीबी फिनेटक के को-फाउंडर्स यशीश दहिया और आलोक बंसल ने करीब 38 लाख शेयर बेचे थे। यह कंपनी में करीब 0.8 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर था। यह ट्रांजेक्शन 654 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील के जरिए हुआ था। मई में ही चीन की टेक्नलोजी कंपनी Tencent ने पीबी फिनटेक में अपनी बाकी 1.05 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी थी।

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लगातार तीसरे दिन शेयर बाजारों में तेजी

3 जुलाई को शेयर बाजारों में अच्छी तेजी दिखी। 10:20 बजे निफ्टी 0.68 फीसदी यानी 165 अंक चढ़कर 24,342 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.65 फीसदी यानी 506 अंक के उछाल के साथ 78,000 पर था। बैंक निफ्टी में भी 0.23 फीसदी की तेजी दिखी। आज बाजार में अच्छी तेजी का लगातार तीसरा दिन है।

Kusumgar IPO: 8 जुलाई को खुलेगा ₹650 करोड़ का IPO, प्रमोटर OFS के जरिए बेचेंगे हिस्सेदारी

Kusumgar IPO: मुंबई की सिंथेटिक फैब्रिक बनाने वाली कंपनी Kusumgar का 650 करोड़ रुपये का IPO 8 जुलाई को निवेशकों के लिए खुलेगा। जुलाई महीने में खुलने वाला यह दूसरा IPO होगा। इससे पहले Knack Packaging का IPO 3 जुलाई को बंद होगा।

कब खुलेगा IPO और कब होगी लिस्टिंग?

IPO का एंकर बुक 7 जुलाई को खुलेगा। रिटेल इनवेस्टर 8 जुलाई से 10 जुलाई के बीच Kusumgar IPO में पैसे लगा सकेंगे। शेयरों के अलॉटमेंट को 13 जुलाई तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। इसके बाद कंपनी के शेयर 15 जुलाई को शेयर बाजार में लिस्ट हो सकते हैं।

कंपनी को नहीं मिलेगा IPO का पैसा

यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है। यानी इसमें कोई फ्रेश इश्यू नहीं है। इसका मतलब है कि IPO से मिलने वाला पूरा पैसा शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगा। कंपनी के पास इस इश्यू से कोई पैसा नहीं आएगा।

IPO के जरिए कंपनी के प्रमोटर सिद्धार्थ योगेश कुसुमगर, उनकी पत्नी सपना सिद्धार्थ कुसुमगर और Siddharth Yogesh Kusumgar HUF अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। कंपनी के मुताबिक, IPO लाने का मकसद ऑफर फॉर सेल पूरा करना और कंपनी के शेयरों को शेयर बाजार में लिस्ट कराना है।

क्या काम करती है Kusumgar?

Kusumgar इंजीनियर्ड फैब्रिक और उससे जुड़े सॉल्यूशन तैयार करती है। कंपनी पॉलीअमाइड, पॉलिएस्टर फिलामेंट और पॉलीयूरेथेन आधारित फैब्रिक बनाती है। इसके प्रोडक्ट एयरोस्पेस और डिफेंस, इंडस्ट्रियल, ऑटोमोबाइल, आउटडोर और लाइफस्टाइल जैसे कई सेक्टर में इस्तेमाल होते हैं।

कंपनी का कारोबार कैसा है?

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रदर्शन कमजोर रहा। कंपनी का मुनाफा 12.3% घटकर 98.2 करोड़ रुपये रह गया। वहीं, रेवेन्यू 11.2% गिरकर 692 करोड़ रुपये पर आ गया।

हालांकि, इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया था। उस दौरान मुनाफा 32.7% बढ़कर 112 करोड़ रुपये पहुंच गया था। वहीं, रेवेन्यू 66.5% बढ़कर 779 करोड़ रुपये हो गया था। यानी पिछले दो वित्त वर्षों में कंपनी के कारोबार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

कौन संभाल रहा है IPO?

Kusumgar ने अपने पात्र कर्मचारियों के लिए 3.5 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर आरक्षित रखे हैं। इस IPO के बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) Axis Capital, IIFL Capital Services और Motilal Oswal Investment Advisors हैं।

Parle Products IPO: पारले-जी बनाने वाली कंपनी का आएगा आईपीओ, ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा के वैल्यूएशन पर नजर : सूत्र

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

क्या सोना बेचकर शेयर खरीदने का समय आ गया? एक्सपर्ट रोहित श्रीवास्तव ने निफ्टी और बैंक निफ्टी पर कर दी बड़ी भविष्यवाणी

शेयर बाजारों के सेंटीमेंट में पॉजिटिव बदलाव दिख रहा है। बीते करीब दो सालों में शेयर बाजार का रिटर्न अच्छा नहीं रहा है। पहले हाई वैल्यूएशन बड़ा चैलेंज था। इससे विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में बड़ी बिकवाली की। वैल्यूएशन अब घटा है। उधर, मध्यपूर्व में तनाव कम हुआ है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। इसका पाॉजिटिव असर शेयर बाजारों पर दिख रहा है। सीएनबीसी-टीवी18 ने निवेश और शेयर बाजार के आउटुलक के बारे में जानने के लिए इंडियाचार्ट्स के फाउंडर रोहित श्रीवास्तव के साथ बातचीत की।

बाजार नई तेजी के शुरुआती चरण में

श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार कई वैश्विक और भू-राजनीतिक झटकों के बाद अब एक नए अपट्रेंड के शुरुआती चरण में है। बाजार पर अमेरिका-ईरान की लड़ाई, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का असर पहले ही पड़ चुका है। उन्होंने कहा कि टेक्निकल चार्ट्स पर ‘हायर लो’ (Higher Lows) का बनना यह दर्शाता है कि बाजार का सेंटिमेंट बेहतर हो रहा है। बाजारों में इस तेजी के जारी रहने की संभावना है। निफ्टी 24,300 के लेवल को तोड़ने के बाद ऊंचाई का नया रिकॉर्ड बनाएगा। बैंक निफ्टी के भी 63,000 पर पहुंच जाने की उम्मीद है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल स्टॉक्स की तेजी में बड़ी भूमिका

उन्होंने कहा कि मार्केट में अगले चरण की रैली में बैंकिंग और फाइनेंशियल स्टॉक्स का बड़ा योगदान होगा। यह सेक्टर आने वाले समय में स्टार परफॉर्मर बन सकता है। अगर आगे इंटरेस्ट रेट में कमी देखने को मिलती है तो इससे बैंकिंग सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा। रुपये में स्थिरता भी बैंकिंग सेक्टर के लिए पॉजिटिव है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी पर लगाम लगी है। उधर,

रियल एस्टेट, एनर्जी, मेटल्स और पावर सेक्टर्स का आउटलुक पॉजिटिव दिख रहा है। इन सेक्टर्स में लॉन्ग टर्म के लिए अच्छा मोमेंटम दिख रहा है और निवेशकों को गिरावट पर खरीदारी के मौके ढूंढने चाहिए।

सोने की जगह यह शेयरों में निवेश बढ़ाने का समय

श्रीवास्तव ने कहा कि सोने और चांदी में शॉर्ट-टर्म मोमेंटम इंडिकेटर्स ओवरबॉट (overbought) की स्थिति का संकेत दे रहे हैं। इससे निकट अवधि में मुनाफावसूली दिख सकती है। उन्होंने कहा कि यह समय कीमती धातुओं (precious metals) पर फोकस थोड़ा कम कर शेयरों पर बढ़ाने का है। इसकी वजह यह है कि इक्विटी अब एक नए ‘गोल्ड’ के रूप में उभर रहा है। उन्होंने आईटी सेक्टर में कमजोरी जारी रहने का अनुमान जताया। इसका मतलब है कि निवेशकों को लार्जकैप आईटी शेयरों से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर को लेकर भी सतर्क रुख अपनाने की जरूरत है।

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शेयर बाजारों में लगातार दूसरे दिन शानदार तेजी

शेयर बाजार में 2 अप्रैल को लगातार दूसरे दिन अच्छी तेजी दिखी। निफ्टी 0.71 फीसदी यानी 169 अंक चढ़कर 24,175 पर बंद हुआ। सेंसेक्स भी 0.75 फीसदी यानी 579 अंक के उछाल के साथ 77,502 पर क्लोज हुआ। हालांकि, बैंक निफ्टी नाममात्र की कमजोरी के साथ लाल निशान में बंद हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Nifty 50 के 20 साल के रिटर्न महा-कैलकुलेशन: मंदी, क्रैश और महामारी झेलने के बाद भी मिला इतना बंपर रिटर्न, आंकड़े देख चौंक जाएंगे आप

Nifty 50 Long Term Investment Returns: शेयर बाजार के हालिया उतार-चढ़ाव और निफ्टी 50 के पिछले एक साल के -5.56 प्रतिशत के नेगेटिव रिटर्न को देखकर कई निवेशक असमंजस में हैं। वे सोच रहे हैं कि क्या वाकई लंबी अवधि में शेयर बाजार से तगड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है?

इस सवाल का जवाब जानने के लिए फंड्सइंडिया ने साल 2000 से 2025 तक के निफ्टी 50 टोटल रिटर्न इंडेक्स (Nifty 50 TRI) के रोलिंग रिटर्न का एक ऐतिहासिक विश्लेषण किया है। इस डेटा से एक बात बिल्कुल साफ हो गई है कि, आप बाजार में जितने लंबे समय तक टिके रहेंगे, आपका मुनाफा उतना ही पक्का और शानदार होगा। आइए समझते हैं कि 20 साल तक निवेशित इंवेसटेड रहने पर निफ्टी ने कैसा जादुई रिटर्न दिया है।

20 साल तक बाजार में टिके रहने का जादू

अगर आपने निफ्टी 50 में पूरे 20 साल के लिए पैसा लगाया होता, तो रिटर्न के आंकड़े बेहद हैरान करने वाले और राहत देने वाले हैं:

बाजार के बड़े झटके भी रहे बेअसर: इस 20 साल की अवधि में वे निवेशक भी शामिल थे जिन्होंने साल 2000 का डॉट-कॉम क्रैश, 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट और कोविड-19 महामारी जैसी भयंकर गिरावटों को झेला था।

औसत रिटर्न 14% रहा: इतनी बड़ी-बड़ी ऐतिहासिक गिरावटों के बावजूद, 20 साल की अवधि में निफ्टी 50 का औसत सालाना रिटर्न 14 प्रतिशत रहा।

अधिकतम और न्यूनतम रिटर्न: इस दौरान निवेशकों को मिलने वाला सबसे बेहतरीन रिटर्न 16 प्रतिशत और सबसे खराब रिटर्न भी 11 प्रतिशत सालाना रहा।

इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आपने सबसे खराब समय पर भी बाजार में एंट्री ली होती और 20 साल तक टिके रहते, तो भी आपको हर साल कम से कम 11% का रिटर्न आराम से मिलता। यानी सही समय पर एंट्री करने से ज्यादा जरूरी बाजार में टिके रहना है।

शॉर्ट-टर्म बनाम लॉन्ग-टर्म: होल्डिंग पीरियड का बड़ा खेल

शॉर्ट-टर्म में आपकी एंट्री का समय बहुत मायने रखता है। अगर आपने मार्केट क्रैश से ठीक पहले निवेश किया, तो रिटर्न बेहद खराब दिख सकता है और अगर मंदी के ठीक बाद किया, तो रिटर्न बंपर दिखेगा। लेकिन लॉन्ग-टर्म में यह रिस्क खत्म हो जाता है:

1 साल का जोखिम: साल 2000 से 2025 के बीच, अगर किसी ने सिर्फ 1 साल के लिए पैसा लगाया, तो उसे अधिकतम 141 प्रतिशत का मुनाफा या न्यूनतम 65 प्रतिशत का भारी नुकसान तक झेलना पड़ा। यही कारण है कि शॉर्ट-टर्म में दो निवेशकों का अनुभव बिल्कुल अलग हो सकता है।

20 साल का भरोसा: वहीं, जैसे ही निवेश की अवधि बढ़कर 20 साल हुई, सबसे खराब रिटर्न भी सुधरकर 11% पर आ गया और बेस्ट रिटर्न 16% रहा। यानी समय बढ़ने के साथ अच्छे और बुरे रिटर्न का अंतर बहुत छोटा हो जाता है।

एक्सपर्ट व्यू: डिगी-फिनमार्ट प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर चिंतन कामदार का कहना है, ‘शुरुआत और अंत की तारीख देखकर रिटर्न बहुत अलग लग सकते हैं। इसलिए रोलिंग रिटर्न देखना ज्यादा सही तस्वीर दिखाता है। किसी एक समय का रिटर्न लंबी अवधि के निवेश की दिशा तय नहीं कर सकता।’

मार्केट क्रैश में कैसे काम करता है आपका SIP?

आनंद राठी वेल्थ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुभेंदु हरिचंदन के मुताबिक, हालिया परफॉर्मेंस देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। उन्होंने समझाया, ‘बाजार में गिरावट अक्सर निवेशकों के धैर्य की परीक्षा लेती है, लेकिन यही वह समय है जब आपकी एसआईपी सबसे बेहतरीन तरीके से काम करती है।

‘विकास का असली पैमाना पैसा नहीं…’ CEA नागेश्वरन की इस चेतावनी ने मचाई हलचल? जानिए पूरा मामला

वहीं मंदी या रिकवरी के दौरान, ‘रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग’ के जरिए एसआईपी कम कीमतों पर म्यूचुअल फंड के अधिक यूनिट्स इकट्ठा करती है। इससे आपकी खरीद लागत कम हो जाती है और जब बाजार दोबारा ऊपर जाता है, तो आपको बंपर मुनाफा होता है।’

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी सीख

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भविष्य में भी बिल्कुल ऐसा ही रिटर्न मिलेगा, क्योंकि पास्ट परफॉर्मेंस भविष्य की गारंटी नहीं होती। लेकिन ये सीख साफ है कि शॉर्ट-टर्म के -5.56% रिटर्न को देखकर निफ्टी 50 को जज न करें। शार्ट-टर्म में बाजार अनप्रेडिक्टेबल होता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में यह बेहद सुसंगत और भरोसेमंद साबित हुआ है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

इस विदेशी ब्रोकरेज फर्म ने प्राइवेट बैंकों में घटाया निवेश, आईटी शेयरों को पोर्टफोलियो से किया बाहर

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन का भारत के प्राइवेट बैंकों पर भरोसा घटा है। उसने अपने इंडिया मॉडल पोर्टफोलियो से निफ्टी आईटी इंडेक्स को हटा दिया है। उसने कहा है कि बाजार की रफ्तार बढ़ाने वाला कोई फैक्टर नहीं दिख रहा है। जियोपॉलिटिकल टेंशन, इनफ्लेशन और मानसून से जुड़े रिस्क बाजार के लिए बड़े चैलेंज दिख रहे हैं।

शेयरों से कमाई के लिहाज से स्थितियां चुनौतीपूर्ण

Bernstein ने कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई को लेकर टेंशन कम हुआ है। क्रूड ऑयल की कीमतें भी काफी नीचे आ गई हैं। लेकिन, शेयर बाजार से कमाई के लिहाज से स्थितियां मुश्किल दिख रही हैं। कई बड़े सेक्टर बड़ी चुनौतियां का सामना कर रहे हैं। मौके मार्केट में सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों में हैं।

निफ्टी के लिए 26000 को टारगेट को बनाए रखा

बर्नस्टीन ने 1 जुलाई को जारी रिपोर्ट में ये बातें बताई हैं। उसने कहा है, “इंडिया में मार्केट के रिटर्न का आउटलुक अब भी मुश्किल दिख रहा है।” हालांकि, इस साल के अंत तक निफ्टी के 26,000 के टारगेट में उसने बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से निफ्ली करीब 8-9 फीसदी चढ़ सकता है।

पोर्टफोलियो से इन शेयरों को किया बाहर

ब्रोकरेज फर्म ने अपने पोर्टफोलियो में हाल में हुए बदलाव के तहत ICICI Bank, IndusInd Bank और निफ्टी आईटी इंडेक्स के शेयरों को बाहर कर दिया है। हालांकि, उसने Axis Bank और Zydus Life के शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि उसने फाइनेंशियल शेयरों में इस साल की शुरुआत में अपना निवेश घटाया था। इस सेक्टर को लेकर अब भी उसका एप्रोच सेलेक्टिव है।

प्राइवेट बैंकों में पहले जैसी ग्रोथ नहीं दिख रही

बड़े प्राइवेट बैंकों के बारे में बर्नस्टीन ने कहा है कि इनमें पहले की साइकिल जैसी ग्रोथ विजिबिलिटी और गवर्नेंस प्रीमियम नहीं दिख रहा। सरकारी बैंकों से प्रतियोगिता बढ़ रही है और शॉर्ट टर्म में रीरेटिंग की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। उसने कहा है कि उसने इस साल खराब प्रदर्शन की वजह से आईसीआईसीआई बैंक और इंडसइंड को पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया है।

डेटा सेंटर ईकोसिस्टम में दिख रहे मौके

शेयर बाजार के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद बर्नस्टीन के इंडिया पोर्टफोलियो ने इस साल 1.1 फीसदी रिटर्न दिया है। यह इस दौरान निफ्टी के 6.7 फीसदी के निगेटिव रिटर्न से बेहतर है। उसने कहा है कि बाजार की मौजूदा स्थितियों में सीमित मौके दिख रहे हैं। ये मौके डेटा सेंटर ईकोसिस्टम और इमर्जिंग मैन्युफैक्चरिंग थीम में दिख रहे हैं। ये मौके ज्यादातर स्मॉलकैप स्टॉक्स तक सीमित हैं, जिससे मार्केट के कुल रिटर्न पर इनका असर पड़ने की संभावना नहीं है।