Vedanta Oil and Gas के शेयरों में तूफानी तेजी, समूह की दूसरी कंपनियों के स्टॉक्स भी उछले

वेदांता ऑयल एंड गैस के शेयरों में 2 जुलाई को भी तेजी देखने को मिली। बाजार खुलने के कुछ ही देर बाद शेयरों को पंख लग गए। 12 बजे शेयर 8.69 फीसदी के उछाल के साथ 42 रुपये पर चल रहा था। एक हफ्ते में यह शेयर 28 फीसदी से ज्यादा उछला है। 1 जुलाई को भी इस शेयर में जबर्दस्त तेजी आई थी।

Vedanta Iron and Steel में लगा अपर सर्किट 

Vedanta ग्रुप की दूसरी कंपनियों के शेयरों में भी जबर्दस्त तेजी। वेदांता ने अपने बिजनेस का डीमर्जर किया था। इसकी चार कंपनियां 15 जून को स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हुई थी। गुरुवार को सभी कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी। सबसे ज्यादा तेजी Vedanta Iron and Steel में दिखी। 10 फीसदी चढ़ने के बाद इस शेयर में अपर सर्किट लग गया। यह शेयर एक हफ्ते में 31 फीसदी से ज्यादा उछला है।

ग्रुप की दूसरी कंपनियों के शेयरों को भी लगे पंख

2 जुलाई को 12 बजे वेदांता आयरन एंड स्टील का शेयर 10 फीसदी चढ़कर 42.65 रुपये पर चल रहा था। Vedanta Oil and Gas का शेयर 8.76 फीसदी के उछाल के साथ 42.07 रुपये पर चल रहा था। Vedanta Power का शेयर 4.95 फीसदी की तेजी के साथ 46.40 रुपये पर था। Vedanta Aluminium का शेयर 1.36 फीसदी की तेजी के साथ 458.40 रुपये पर चल रहा था।

1 जुलाई को भी इस वजह से आई थी तूफानी तेजी

1 जुलाई को भी इन चारों कंपनियों के शेयरों को पंख लग गए थे। इसकी वजह यह थी कि ये शेयर ट्रेड-टू-ट्रेड सेगमेंट से बाहर आए थे। ये चारों शेयर स्टॉक एक्सचेंजों में 15 जून को लिस्ट हुए थे। पहले 10 कारोबारी दिनों के लिए इन्हें टी2टी सेगमेंट में डाला गया था। T2T सेगमेंट में शामिल शेयरों में हर ट्रांजेक्शन पर डिलीवरी जरूरी होती है। इन शेयरों में इंट्रा-डे बाइंग और सेलिंग की इजाजत नहीं होती है। शेयर की कीमत चढ़ने या उतरने की स्थिति में 5 फीसदी पर ही सर्किट लग जाता है।

वेदांता एल्युमीनियम के शेयरों का 550 रुपये टारगेट प्राइस

बाजार के जानकारों का कहना है कि वेदांता का डीमर्जर सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इससे शेयरों में तेजी दिख रही है। डीमर्जर के बाद वेदांता की लिस्टेड कंपनियों की संख्या 5 हो गई है। वेदांता ग्रुप की कंपनियों को लेकर एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। एमके ग्लोबल ने वेदांता एल्युमीनियम के शेयरों को खरीदने की राय दी है। उसने शेयर के लिए 550 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है।

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वेदांता पावर का बड़ा फ्यूचर प्लान 

ब्रोकरेज फर्म पीएल कैपिटल ने वेदांता पावर के बारे में कहा है कि कंपनी स्थापित क्षमता के लिहाज से भारत के टॉप पांच प्राइवेट बिजली उत्पादक कंपनियों में शामिल है। कंपनी FY33 तक टॉप 3 प्राइवेट बिजली उत्पादक कंपनियों में अपनी जगह बनाना चाहती है। कंपनी कोयला आधारित अपनी क्षमता 4.2GW से बढ़ाकर इस वित्त वर्ष के अंत तक 4.8GW करना चाहती है। 2 जुलाई को शेयर बाजारों में तेजी दिखी। निफ्टी और सेंसेक्स करीब 0.50 फीसदी ऊपर चल रहे थे।

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सेबी ने 144 करोड़ रुपए के पंप एंड डंप मामले का जोमौटो ऑर्डर और फ्लाइट टिकट से किया पर्दाफाश, मुख्य आरोपी पर लगी 10 करोड़ रुपए की पेनाल्टी

SEBI ने 144 करोड़ रुपये के पंप एंड डंप स्कैम के एक बड़े मामले में फाइनल ऑर्डर जारी कर दिया है। सेबी ने सारी रकम जब्त करने के साथ ही आरोपियों पर सख्त एक्शन लिया है। SEBI ने 144 करोड़ रुपए के जिस पंप एंड डंप स्कैम पर फाइनल ऑर्डर निकाला है वह पंप एंड डंप के अब तक के सबसे बड़े मामलों में से एक है। इस पंप एंड डंप में 226 एंटिटीज शामिल हैं। इसके जरिए साल 2017-2020 के बीच 5 शेयरों में खेल हुआ है।

इन पांच शेयरों में पंप एंड डंप का खेल

पंप एंड डंप का यह खेल जिन शेयरों में हुआ है उनमे मौरिया उद्योग (Mauria Udyog), विशाल फैब्रिक्स (Vishal Fabrics), 7NR रिटेल (7NR Retail), GBL इंडस्ट्रीज़ (GBL Industries) और दार्जिलिंग रोपवे (Darjeeling Ropeway) शामिल हैं।

क्या है SEBI का फाइनल ऑर्डर?

SEBI के फाइनल ऑर्डर में कहा गया है कि इन शेयरों में गलत तरीके से कमाए गए 144 करोड़ रुपए जब्त किए जाएंगे। स्कैम के मुख्य आरोपी हनीफ शेख पर 7 साल का बैन लगेगा। हनीफ शेख पर 10 करोड़ रुपये की पेनल्टी भी लगेगी। बाकी आरोपियों पर 4 से 6 साल की रोक लगेगी। इन पर सेबी ने 5 लाख से 2 करोड़ की पेनल्टी लगाई है।

पंप एंड डंप का खेल, SEBI ने कैसे किया खुलासा?

मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने हनीफ शेख को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया है। हनीफ शेख के 4 मोबाइल नंबर्स की जांच दौरान यह खुलासा हुआ है। एयरलाइन बुकिंग और होटल रिजर्वेशन के जरिए हनीफ शेख के खिलाफ सबूत जुटाए गए हैं। स्कैम के खुलासे के लिए फूड डिलीवरी एप और कर्मचारियों के रिकॉर्ड की भी पड़ताल की गई। WhatsApp पर हुई बातचीत और पैसों के लेन-देन से भी सबूत इकट्ठा किए गए। मामले की जांच के लिए डोमेन रजिस्ट्रेशन की हिस्ट्री और बल्क SMS गेटवे को भी खंगाला गया। इससे पता चला कि मौरिया उद्योग (Mauria Udyog) के 62 कर्मचारियों ने शेयर बेचे थे। शेयरों में हेरफेर के जरिए मुनाफा कमाने के लिए कई शेल अकाउंट का इस्तेमाल हुआ।

SEBI ने इस मामले का पर्दाफाश करने के लिए बैंक रिकॉर्ड के अलावा भी कई चीजें देखीं। SEBI ने चार ऐसे मोबाइल नंबरों की जांच की जिनके बारे में शक था कि वे हनीफ शेख के हैं,जबकि शेख का दावा था कि वे नंबर उसके कर्मचारियों के हैं,उसके नहीं। SEBI को इस जांच के दौरान इंडिगो फ़्लाइट के ऐसे रिकॉर्ड मिले जिनसे पता चला कि बुकिंग के लिए आरोपी के अपने फोन नंबर और ईमेल का इस्तेमाल किया गया था। इससे उसका यह दावा गलत साबित हो गया कि नंबर किसी कर्मचारी का था।

होटल बुकिंग के रिकॉर्ड का इस्तेमाल घोटाले से जुड़े लोगों के बीच आपसी संबंध साबित करने के लिए किया गया। ज़ोमैटो फ़ूड डिलीवरी डेटा को यह पक्का करने के लिए क्रॉस-चेक किया गया कि असल में कौन सा फोन नंबर कौन इस्तेमाल कर रहा था। वेबसाइट की ओनरशिप का पता लगाने के लिए SEBI ने गोडैडी (GoDaddy)डोमेन रिकॉर्ड,एडमिन लॉगिन हिस्ट्री और मार्केटिंग एजेंसी के इनवॉइस की जांच की ताकि यह पता चल सके कि प्रोमोशनल वेबसाइट्स को असल में कौन कंट्रोल कर रहा था।

बल्क SMS रिकॉर्ड से पता चला कि सिर्फ़ एक स्टॉक के लिए 2.1 करोड़ से ज्यादा मैसेज भेजे गए। सभी पांच स्टॉक्स के लिए 60,000 से ज्यादा अलग-अलग नंबरों को टारगेट किया गया। जांच से पता चला कि हेरफेर वाले समय के दौरान मौरिया उद्योग के 62 कर्मचारियों और लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स ने शेयर बेचे। शेयर की बढ़ी हुई कीमतों से हुआ मुनाफा कई शेल/कंड्यूट अकाउंट्स (फर्जी या बिचौलिया खातों) के जरिए आगे बढ़ाया गया। इस लेयरिंग (पैसे को कई खातों में घुमाने) का मकसद असली फायदा उठाने वालों की पहचान छिपाना था।

क्या होता है पंप एंड डंप का खेल?

शेयर बाजार में निवेश करने वाले हर व्‍यक्ति को इसकी बारीकियों की जानकारी नहीं होती। इनमें से कई निवेशक एक्‍सपर्ट की सलाह के आधार पर किसी शेयर को खरीदते या बेचते हैं। निवेशकों की इसी कमजोरी का फायदा उठाकर पंप एंड डंप का खेल खेला जाता है। सोशल मीडिया इंफ्लूएंशर्स और यूट्यूबर्स भी ऐसे ही फर्जी ज्ञान का फायदा उठाकर निवेशकों को गुमराह करते हैं। मार्केट गुरु बने ऐसे धोखेबाज किसी कंपनी के शेयर को लेकर हाइप बनाते हैं और निवेशकों से उसमें पैसे लगाने की बात करते है।

इन फर्जी गुरुओं का एक कही मंत्र होता है,निवेशकों से पैसे लगवाकर किसी शेयर की कीमत बढ़वाओ और फिर उसे बेचकर निकल लो। वास्तव में ये फर्जी गुरु पहले से ही ऐसी किसी कंपनी का शेयर खरीद लेते हैं और निवेशकों को उसके बारे में अच्‍छी-अच्‍छी बातें बताकर खूब पैसे लगाने के लिए प्रोत्‍साहित करते हैं। जब निवेशक उस शेयर को खरीदना शुरू करते हैं तो जाहिर है कि मांग बढ़ने से एक्‍सचेंज पर उस शेयर की कीमत में भी बड़ा इजाफा हो जाता है। बस यही तो इनका मकसद है और ये फर्जी गुरु तत्‍काल बढ़ी कीमत पर अपने शेयर बेचकर मुनाफा काट लेते हैं। यानी पहले पंप करके शेयर के भाव बढ़ाओ और फिर उसे डंप कर दो।

 

 

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SBI Funds Management IPO: ₹117000 करोड़ वैल्यूएशन पर नजर, 13 जुलाई वाले हफ्ते में हो सकता है लॉन्च

भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी SBI फंड्स मैनेजमेंट IPO से लगभग 1,17,000 करोड़ रुपये या 12.3 अरब डॉलर की वैल्यूएशन का लक्ष्य लेकर चल रही है। कंपनी इस महीने यानि कि जुलाई के आखिर में शेयर बाजारों में लिस्ट होने की तैयारी कर रही है। मनीकंट्रोल को सूत्रों से पता चला है, “इनवेस्टर रोडशो (मीटिंग) पूरी हो चुके हैं और जांच-पड़ताल के बाद वैल्यूएशन रेंज तय कर ली गई है। योजना यह है कि SBI फंड्स मैनेजमेंट का IPO 13 जुलाई वाले सप्ताह में लॉन्च हो और लिस्टिंग 22 जुलाई तक हो जाए।”

यह भी कहा जा रहा है कि कहा कि SBI फंड्स मैनेजमेंट प्री-IPO राउंड के जरिए पैसे जुटा सकती है।कंपनी के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) को मार्केट रेगुलेटर SEBI ने 12 जून का मंजूरी दी थी। SBI फंड्स मैनेजमेंट ने 19 मार्च, 2026 को SEBI के पास अपना DRHP जमा किया था। IPO पूरी तरह से ऑफर-फॉर-सेल (OFS) होगा। इसमें प्रमोटर और मौजूदा निवेशकों की ओर से 20.37 करोड़ इक्विटी शेयरों को बिक्री के लिए रखा जाएगा। नए शेयर जारी नहीं होंगे। लिहाजा IPO से होने वाली कमाई शेयर बेचने वालों के पास जाएगी।

OFS में प्रमोटर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 12.83 करोड़ शेयर (6.3 प्रतिशत हिस्सेदारी) और पेरिस स्थित अमुंडी इंडिया होल्डिंग 7.53 करोड़ शेयर (3.7 प्रतिशत हिस्सेदारी) बेचेगी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की SBI फंड्स मैनेजमेंट में 61.76 प्रतिशत हिस्सेदारी है। 36.26 प्रतिशत हिस्सेदारी अमुंडी इंडिया होल्डिंग के पास है।

 

Stock Market News: जून तिमाही में रिटेल निवेशकों ने इक्विटी में की जोरदार खरीदारी, बाजार में लगाए 35,328 करोड़ रुपये

Stock Market News: कई महीनों तक किनारा बनाए रहने के बाद,रिटेल निवेशक भारतीय इक्विटी मार्केट में वापस लौट रहे हैं। जून तिमाही में इनकी खरीदारी में तेजी देखने को मिली है। यह लंबे समय तक सावधानी बरतने के बाद निवेशकों की सोच में आए बदलाव का संकेत है। NSE के डेटा के मुताबिक रिटेल निवेशकों ने जून में 14,088 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इसी तरह इनकी तरफ से मई में 3,018 करोड़ रुपये और अप्रैल में 18,222 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे गए। पूरी जून तिमाही की बात करें तो उनकी कुल खरीदारी 35,328 करोड़ रुपये रही। यह दिसंबर 2024 की तिमाही के बाद उनकी सबसे बड़ी तिमाही खरीदारी है। दिसंबर तिमाह में उन्होंने लगभग 56,126 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।

जून तिमाही में विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद रिटेल निवेशकों की तरफ से जमकर खरीदारी हुई।

2025 की शुरुआत से ही रिटेल निवेशक बाजार से दूरी बनाए हुए थे। उन्होंने 2025 में 25,615 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। जबकि 2026 के शुरुआती तीन महीनों में उन्होंने सिर्फ 2,750 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।

SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज में फंडामेंटल रिसर्च के हेड,सौरभ जैन ने कहा कि यह खरीदारी सट्टेबाजी के लिए गिरावट पर की गई खरीदारी नहीं है,बल्कि यह साइड में पड़ी पूंजी का रणनीतिक और मैक्रो-आधारित निवेश है। ब्रॉडर मार्केट के हालात भी इस नजरिए का सपोर्ट करते हैं।

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अप्रैल-जून तिमाही के दौरान,सेंसेक्स और निफ्टी में 6.3 प्रतिशत और 6.9 प्रतिशत की बढ़त हुई,जो पिछले चार तिमाहियों में उनकी सबसे बड़ी तिमाही बढ़त है। इस दौरान मेन इंडेक्स के मुकाबले ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेहतर रहा। इस अवधि में BSE 150 मिडकैप इंडेक्स 16.7 प्रतिशत बढ़ा,जो जून 2024 के बाद की इसकी सबसे बड़ी तिमाही बढ़त रही।

छोटे-मझोले शेयरों में अच्छी खरीदारी

छोटे-मझोले शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इसके चलते BSE 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में 24.5% की बढ़त हुई,जो जून 2020 के बाद से इसका सबसे अच्छा तिमाही प्रदर्शन रहा। BSE 250 माइक्रोकैप इंडेक्स भी 30% उछला,जो मार्च 2025 में इंडेक्स के शुरू होने के बाद से इसकी सबसे बड़ी तिमाही बढ़त है। जून तिमाही के दौरान BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 15% बढ़ा।

जैन ने आगे कहा कि फरवरी के आखिर में शुरू हुई मिडिल-ईस्ट जंग और उसके चलते तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के डर से निवेशकों का भरोसा शुरू में कमजोर हुआ था,लेकिन जून के मध्य में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते ने एक बड़ी राहत का काम किया। इससे ब्रेंट क्रूड की कीमत चार महीने के निचले स्तर $72 पर आ गई और एनर्जी शॉक प्रीमियम का असर भी कम हुआ।

बाजार को मिला पॉलिसी सपोर्ट

उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया और केंद्र सरकार के 5 जून के बड़े पॉलिसी पैकेज से इस जियोपॉलिटिकल तनाव के असर को कम करने में काफी मदद मिली। इस पैकेज में FPI बॉन्ड निवेश पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स और विदहोल्डिंग टैक्स को हटाना,’फुल्ली एक्सेसिबल रूट’का विस्तार करना और लॉन्ग-टर्म FCNR फिक्स्ड डिपॉजिट व NRI इक्विटी निवेश के लिए बेहतर इंसेंटिव देना शामिल है।

उन्होंने आगे कहा कि इस पॉलिसी सपोर्ट ने FII की निकासी को रोका,रुपये को स्थिर किया और मैक्रो रिस्क को कम किया। इससे रिटेल निवेशकों को यह भरोसा मिला कि वे मार्केट में गिरावट(करेक्शन)का इस्तेमाल एंट्री के अच्छे मौकों के तौर पर कर सकते हैं और अपने कैश रिजर्व को व्यवस्थित तरीके से इक्विटी में फिर से लगा सकते हैं।

FIIs रहे नेट सेलर

बाजार जानकारों का कहना है कि इस तिमाही के ज्यादातर हिस्से में FIIs नेट सेलर बने रहे। उनकी बिकवाली मुख्य वजह ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर रहे। इसमें US बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी,कच्चे तेल की ऊंची कीमतें,जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितताएं और ग्लोबल स्तर पर रिस्क-ऑफ का माहौल शामिल है। यह भारत के घरेलू मार्केट के फंडामेंटल्स में किसी खराबी के बजाय ग्लोबल एसेट एलोकेशन में बदलाव को दिखाता है।

विदेशी निवेशकों की निकासी को घरेलू निवेशकों ने किया बेअसर

घरेलू निवेशकों से मिले जबरदस्त सपोर्ट के चलते विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के बावजूद,भारतीय बाजार मजबूत बने रहे। म्यूचुअल फंड SIP के जरिए लगातार निवेश,घरेलू संस्थागत निवेशकों की जोरदार खरीदारी और रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने FII की बिकवाली से बनी सप्लाई को संभाल लिया। इससे बाजार में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई और बाजार का ओवरऑल तेजी वाला ढांचा कायम रहा।

Market Outlook: जुलाई में शेयर बाजार में आएगी तेजी? पिछले 25 साल का रिकॉर्ड दे रहा बड़ा संकेत

हर गिरावट के बाद ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम के साथ बाजार में आई मजबूत रिकवरी

चॉइस ब्रोकिंग में टेक्निकल एनालिस्ट आकाश शाह का कहना है कि भले ही बेंचमार्क इंडेक्स में काफी उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन कई लार्ज-कैप और अच्छे मिड-कैप शेयरों ने अपने लॉन्ग-टर्म सपोर्ट लेवल (जैसे 100 डे और 200 डे मूविंग एवरेज) को बनाए रखा। हर गिरावट के बाद ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम के साथ बाजार में मजबूत रिकवरी आई, जो इस बात का संकेत है कि निवेशक शेयर जमा (accumulate) कर रहे हैं,न कि बड़े पैमाने पर बेच रहे हैं। यह एक ऐसा प्राइस पैटर्न है जिसे आम तौर पर टेक्निकल नज़रिए से अच्छा माना जाता है।

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Market Outlook: जुलाई में शेयर बाजार में आएगी तेजी? पिछले 25 साल का रिकॉर्ड दे रहा बड़ा संकेत

Market Outlook: पिछले करीब तीन महीने से भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में घूम रहा है। कभी हल्की तेजी तो कभी हल्की गिरावट, लेकिन कोई बड़ा मूव देखने को नहीं मिला। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या जुलाई का महीना बाजार के लिए कुछ नया लेकर आएगा?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इतिहास पर नजर डालें तो जुलाई का महीना शेयर बाजार के लिए अक्सर अच्छा साबित हुआ है। वहीं, मौजूदा आर्थिक हालात भी बाजार के पक्ष में नजर आ रहे हैं।

जुलाई का रिकॉर्ड क्या कहता है?

SAMCO Securities के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट जहोल प्रजापति का कहना है कि ऐतिहासिक आंकड़े जुलाई के पक्ष में इशारा करते हैं। उन्होंने कहा, ‘साल 2001 से 2025 के बीच 25 साल में निफ्टी 50 ने जुलाई में 18 बार बढ़त दर्ज की है। यानी करीब 72% बार बाजार हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान औसत रिटर्न 2.19% रहा। दिसंबर और नवंबर के बाद जुलाई निफ्टी के लिए तीसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला महीना रहा है।’

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ पुराने ट्रेंड देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। लेकिन जुलाई में हर साल कुछ ऐसे फैक्टर देखने को मिलते हैं, जो बाजार को सपोर्ट देते हैं। इनमें सामान्य मानसून की शुरुआत, पहली तिमाही (Q1) के नतीजों से जुड़ी उम्मीदें और घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी शामिल हैं।

मौजूदा हालात भी बाजार के लिए अच्छे

जहोल प्रजापति का कहना है कि इस समय कई ऐसे फैक्टर हैं, जो बाजार के लिए राहत की खबर हो सकते हैं।

  • भू-राजनीतिक तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की उम्मीद है।
  • कच्चे तेल की कीमतें घटकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं।
  • इससे कंपनियों की लागत कम हो सकती है और महंगाई पर भी दबाव घट सकता है।
  • साल की शुरुआत में कमजोर पड़ा रुपया अब संभलता दिख रहा है।
  • विदेशी निवेशकों (FPI) की बिकवाली भी पहले के मुकाबले कम हुई है, जिससे बाजार में भरोसा बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि अगर दुनिया में कोई बड़ा नकारात्मक घटनाक्रम नहीं होता है, तो ये सभी बातें भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बना सकती हैं।

चार्ट क्या बता रहे हैं?

SAMCO Securities के डेरिवेटिव्स रिसर्च एनालिस्ट धूपेश धामेजा का कहना है कि 1 जुलाई को निफ्टी ने अच्छी मजबूती दिखाई और बुलिश कैंडल बनाई। इंडेक्स ने 23,850-23,900 के सपोर्ट जोन को बचाए रखा। यही इलाका हालिया ब्रेकआउट एरिया और 50-DEMA के आसपास भी है। हालांकि, 24,000 के ऊपर पहुंचने के बावजूद निफ्टी को 100-DEMA के पास मजबूत रुकावट मिल रही है। यही वजह है कि बाजार अभी भी एक छोटी रेंज में फंसा हुआ है।

उन्होंने बताया कि RSI अब धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है और फिलहाल 55.13 पर है। जब तक RSI 50 से ऊपर रहेगा, तब तक बाजार का रुख पॉजिटिव माना जाएगा। हालांकि, असली तेजी का संकेत तभी मिलेगा, जब निफ्टी मौजूदा रेजिस्टेंस के ऊपर निकल जाएगा। धामेजा ने यह भी कहा कि India VIX 2.63% गिरकर 13.24 पर आ गया है। इसका मतलब है कि बाजार में घबराहट कम हो रही है और निवेशक फिलहाल ज्यादा सहज नजर आ रहे हैं।

क्या 24,200 तक जा सकता है निफ्टी?

LKP Securities के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि 1 जुलाई को भी निफ्टी अपनी हालिया ट्रेडिंग रेंज से बाहर नहीं निकल पाया। पिछले कुछ सत्रों से इंडेक्स 24,000 के आसपास ही घूम रहा है, जिससे साफ है कि बाजार को अभी नई दिशा नहीं मिली है।

हालांकि, उनका मानना है कि शॉर्ट टर्म ट्रेंड अभी भी सकारात्मक है। जब तक निफ्टी 23,800 के ऊपर बना रहता है, तब तक तेजी की उम्मीद कायम रहेगी। उन्होंने कहा कि अगर यह सपोर्ट नहीं टूटता है, तो आने वाले दिनों में निफ्टी धीरे-धीरे 24,200 और उससे ऊपर के स्तर की ओर बढ़ सकता है। 1 जुलाई को निफ्टी 50 में 0.59% की तेजी आई और यह 24,005.85 पर बंद हुआ। वहीं, BSE Sensex 0.58% चढ़कर 76,922.64 के स्तर पर पहुंच गया।

Vedanta Oil & Gas का शेयर 20% भागा, समूह की बाकी तीन कंपनियों के शेयरों को भी लगे पंख

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Advit Jewels Share Price: धमाकेदार लिस्टिंग के बाद लगा लोअर सर्किट, अब खरीदें, बेचें या होल्ड करें? जानिए एक्सपर्ट्स से

Advit Jewels Share Price: ज्वेलरी कंपनी Advit Jewels की बुधवार को तगड़े प्रीमियम पर लिस्टिंग हुई, लेकिन उसके बाद जोरदार मुनाफावसूली भी देखने को मिली। इसमें 5% का लोअर सर्किट लग गया। कंपनी का शेयर BSE पर 138 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 35.5% प्रीमियम के साथ 187 रुपये पर लिस्ट हुआ। वहीं NSE पर इसकी एंट्री 188.90 रुपये पर हुई, जो इश्यू प्राइस से 36.88% ज्यादा थी।

लिस्टिंग के समय कंपनी का मार्केट कैप 814.27 करोड़ रुपये रहा। हालांकि शुरुआती तेजी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। मुनाफावसूली बढ़ने से शेयर 5% गिरकर 179.46 रुपये पर बंद हुआ। Advit Jewels का 165.16 करोड़ रुपये का IPO पिछले हफ्ते बोली के आखिरी दिन 212.63 गुना सब्सक्राइब हुआ था। कंपनी ने IPO का प्राइस बैंड 130 से 138 रुपये प्रति शेयर तय किया था।

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

Swastika Investmart की हेड ऑफ वेल्थ शिवानी न्याती का कहना है कि Advit Jewels की लिस्टिंग मजबूत रही है, क्योंकि कंपनी के फाइनेंशियल नतीजे भी अच्छे रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘कंपनी ने पिछले दो साल में अपना रेवेन्यू लगभग तीन गुना कर लिया है। EBITDA मार्जिन 29-30% के आसपास बना हुआ है। रिटर्न ऑन नेट वर्थ (RoNW) 43.6% रहा है। यही वजह है कि कंपनी का प्रीमियम वैल्यूएशन कुछ हद तक सही माना जा सकता है। हालांकि Advit Jewels अभी छोटी और नई कंपनी है। इसका कारोबार भी कुछ चुनिंदा इलाकों तक सीमित है, इसलिए आने वाले समय में इसके शेयर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।’

निवेशकों के लिए सलाह

शिवानी न्याती का कहना है कि जिन निवेशकों को IPO में शेयर मिले हैं, वे शॉर्ट से मीडियम टर्म के नजरिए से इसे होल्ड कर सकते हैं। वहीं, जिन लोगों ने सिर्फ लिस्टिंग गेन के लिए निवेश किया था, वे चाहें तो थोड़ा या पूरा मुनाफा बुक कर सकते हैं।

नए निवेशकों को फिलहाल जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उनका कहना है कि कम से कम एक-दो तिमाही के नतीजे आने का इंतजार करें, उसके बाद ही इस शेयर में बड़ा निवेश करें। उन्होंने 165 रुपये का क्लोजिंग स्टॉप-लॉस रखने की सलाह भी दी है।

Waterways Leisure की कमजोर

Cordelia Cruises चलाने वाली Waterways Leisure Tourism की लिस्टिंग निवेशकों की उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। शेयर बाजार में आते ही इसमें दबाव देखने को मिला और बाद में भी गिरावट जारी रही।

कंपनी का शेयर BSE पर 690 रुपये पर लिस्ट हुआ, जो 808 रुपये के इश्यू प्राइस से 14.60% कम था। वहीं NSE पर इसकी शुरुआत 681 रुपये पर हुई, यानी यह 15.71% के डिस्काउंट पर लिस्ट हुआ।

कमजोर लिस्टिंग की वजह क्या रही?

शिवानी न्याती का कहना है कि कंपनी की कमजोर लिस्टिंग से साफ है कि निवेशक इसके वैल्यूएशन और कारोबार से जुड़े जोखिमों को लेकर सतर्क हैं।

उन्होंने कहा, ‘हाल के समय में कंपनी का EBITDA मार्जिन घटा है। इसके अलावा इसका कारोबार फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, यात्रियों की संख्या में कमी और दूसरे ऑपरेशनल जोखिमों से भी प्रभावित हो सकता है। करीब 101 गुना प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) वैल्यूएशन पर यह IPO निवेशकों को ज्यादा मार्जिन ऑफ सेफ्टी नहीं देता। हालांकि, सेक्टर के लॉन्ग टर्म के संकेत अच्छे जरूर हैं।’

इस शेयर में क्या करें?

शिवानी का कहना है कि जिन निवेशकों को IPO में शेयर मिले हैं, वे लंबी अवधि के नजरिए से इसे होल्ड कर सकते हैं। वहीं, नए निवेशकों को बेहतर तिमाही नतीजों और आकर्षक कीमत का इंतजार करना चाहिए। फिलहाल इस शेयर पर उनकी राय ‘न्यूट्रल’ है। उन्होंने 640 रुपये का क्लोजिंग स्टॉप-लॉस रखने की सलाह दी है।

Waterways Leisure Tourism का 585 करोड़ रुपये का IPO पिछले हफ्ते बोली के आखिरी दिन 1.46 गुना सब्सक्राइब हुआ था। कंपनी ने IPO का प्राइस बैंड 769 से 808 रुपये प्रति शेयर रखा था।

Vedanta Oil & Gas का शेयर 20% भागा, समूह की बाकी तीन कंपनियों के शेयरों को भी लगे पंख

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Vedanta Oil & Gas का शेयर 20% भागा, समूह की बाकी तीन कंपनियों के शेयरों को भी लगे पंख

वेदांता लिमिटेड के डीमर्जर के बाद बनी चारों कंपनियों के शेयर 1 जुलाई को रॉकेट बन गए। वेदांता एल्युमीनियम, वेदांता आयरन एंड स्टील, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता पावर में से सबसे ज्यादा तेजी वेदांता ऑयल एंड गैस के शेयरों में दिखी। इसकी वजह यह है कि चारों कंपनियों के शेयर बुधवार को ट्रेड-टू-ट्रेड सेगमेंट से बाहर आ गए। ये चारों शेयर स्टॉक एक्सचेंजों में 15 जून को लिस्ट हुए थे। पहले 10 कारोबारी दिनों के लिए इन्हें टी2टी सेगमेंट में डाला गया था।

टी2टी सेगमेंट के शेयरों पर लागू होती हैं ये शर्तें

T2T सेगमेंट में शामिल शेयरों में हर ट्रांजेक्शन पर डिलीवरी जरूरी होती है। इन शेयरों में इंट्रा-डे बाइंग और सेलिंग की इजाजत नहीं होती है। शेयर की कीमत चढ़ने या उतरने की स्थिति में 5 फीसदी पर ही सर्किट लग जाता है। इन चारों शेयरों के 1 जुलाई को टी2टी सेगमेंट से बाहर आने के बात ये बंदिशें खत्म हो गई हैं। इन शेयरों में इंट्रा-डे ट्रेडिंग भी हो सकेगी। इससे इनमें लिक्विडिटी बढ़ेगी। साथ ही कीमतों में उतार-चढ़ाव भी दिखेगा।

वेदांता ऑयल के शेयरों में 20 फीसदी तक उछाल

2:15 बजे Vedanta Oil & Gas का शेयर 19.98 फीसदी चढ़कर 38.68 रुपये पर चल रहा था। वेदांता पावर का शेयर 11.30 फीसदी के उछाल के 45 रुपये पर चल रहा था। वेदांता आयरन का शेयर 9.98 फीसदी की तेजी के साथ 38.78 रुपये पर था। वेदांता एल्युमीनियम का शेयर 2.60 फीसदी चढ़कर 460.10 रुपये पर चल रहा था। शेयर बाजारों में 1 जुलाई को अच्छी तेजी दिखी। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में करीब 0.70 फीसदी की मजबूती थी।

कंपनी विदेशी कंपनियों से कर रही पार्टनरशिप

ब्रोकरेज फर्म पीएल कैपिटल ने वेदांता ऑयल एंड गैस के बारे में कहा है कि कंपनी ने एंड-टू-एंड आउटसोर्सिंग एप्रोच के इस्तेमाल का प्लान बनाया है। इसके लिए वह ग्लोबल लेवल की सीजमिक, सबसर्फेस इवोल्यूशन, ड्रिलिंग और फील्ड डेवलपमेंट के लिए पार्टनरशिप कर रही है। इससे कंपनी को अपनी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे एफिशियंसी बढ़ेगी, जिसका पॉजिटिव असर वॉल्यूम ग्रोथ पर पड़ेगा।

टॉप 3 प्राइवेट कंपनियों में आने का लक्ष्य

ब्रोकरेज फर्म ने वेदांता पावर के बारे में कहा है कि कंपनी स्थापित क्षमता के लिहाज से भारत के टॉप पांच प्राइवेट बिजली उत्पादक कंपनियों में शामिल है। कंपनी FY33 तक टॉप 3 प्राइवेट बिजली उत्पादक कंपनियों में अपनी जगह बनाना चाहती है। कंपनी कोयला आधारित अपनी क्षमता 4.2GW से बढ़ाकर इस वित्त वर्ष के अंत तक 4.8GW करना चाहती है।

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वेदांता ऑयल का भी बड़ा प्लान

ब्रोकरेज फर्म यस सिक्योरिटीज ने वेदांता ऑयल एंड गैस के बारे में कहा कि मैनेजमेंट ने अपनी उत्पादन क्षमता में बड़ी वृद्धि करने के प्लान के बारे में बताया है। कंपनी के प्रमुख फोकस एरिया में राजस्थान नॉर्थ में एएसपी का डेप्लॉयमेंट, राजस्थान साऊथ में डीप गैस डेवलपमेंट और केजी बेसिन में डीपवाटर शामिल हैं। इससे पोर्टफोलियो की लंबी अवधि की ग्रोथ में मदद मिलेगी।

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BlackRock ने कहा-इस वजह से जल्द भारतीय बाजार में लौटेंगे विदेशी निवेशक

विदेशी निवेशक जल्द भारतीय बाजार में लौट सकते हैं। यह अनुमान ब्लैकरॉक इनवेस्टमेंट इंस्टीट्यूट ने जताया है। इंस्टीट्यूट के चीफ एपीएसी एंड मिडिल ईस्ट इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट बेन पॉवेल ने कहा कि एनर्जी की कीमतों में नरमी और जियोपॉलिटिकल स्थितियां बेहतर होने से ग्लोबल इनवेस्टर के ऐलोकेशन में बदलाव आ रहा है। भारत को इसका फायदा मिल सकता है।

जल्द भारत का रुख कर सकते हैं विदेशी निवेश

पॉवेल ने कहा कि आने वाले हफ्तों और महीनों में इंडिया में नया विदेशी निवेश आ सकता है। इसकी वजह यह है कि ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे AI से जुड़े शेयर बाजारों में जबर्दस्त तेजी के बाद ग्लोबल इनवेस्टर्स अपने पोर्टफोलियो की रीबैलेंसिंग कर रहे हैं। आर्टफिशियिल इंटेलिजेंस को लेकर ब्लैकरॉक अभी भी पॉजिटिव है। लेकिन, दूसरी जगह मौके तलाशने में वह वैल्यूएशंस को लेकर वह सेलेक्टिव एप्रोच अपना रही है।

भारत को तीन तरह के दबाव का सामना करना पड़ा

उन्होंने कहा, “हमें लगता है कि आने वाले हफ्तों और महीनों में इंडिया को इसका फायदा मिलेगा।” उनका मानना है कि बीते कुछ महीनों में इंडिया को तीन तरह के दबाव का सामना करना पड़ा है। इनमें पहला हाई वैल्यूएशन है। दूसरा, पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से एनर्जी की कीमतों में उछाल है। तीसरा, यह धारणा है कि इंडियन बाजार एआई में निवेश के लिहाज से प्राइमरी मार्केट नहीं है।

ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में जबर्दस्त तेजी

पॉवेल ने कहा कि एआई का सुपर बूम वास्तविक है। यह आगे बढ़ रहा है। लेकिन, हम निवेश के मामले में सेलेक्टिव और केयरफुल रहना चाहते हैं। इस वजह से हमने इमर्जिंग मार्केट के शेयरों को डाउनग्रेड कर न्यूट्रल रेटिंग दी है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम बेयरिश हैं। हमने अपने पूरे पैसे का निवेश किया है। लेकिन, हमारी स्ट्रेटेजी बदलने की वजह बीते कुछ महीनों में ताइवान और कोरिया के बाजारों में आई जबर्दस्त तेजी है।

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भारत में एआई कंपनियां नहीं होने से निवेश पर पड़ा असर

उन्होंने कहा कि हम यह देख रहे हैं कि क्या हम कुछ पैसा दूसरे बाजारों में लगा सकते हैं। इसका फायदा इंडिया को मिलेगा। अगले कुछ हफ्तों और महीनों में भारत में विदेशी निवेश आ सकता है। भारत से विदेशी निवेशकों के दूरी बनाने की एक बड़ी वजह यहां सीधे एआई से जुड़ी कंपनियों की गैर-मौजूदगी रही है। उधर, ताइवान और दक्षिण कोरिया की एआई और चिप बनाने वाली कंपनियों में निवेशकों को बड़े मौके दिखे हैं।