जालंधर से रूस गए एक युवक ने ट्रैवल एजेंट की ठगी का पर्दाफाश कर आपबीती सुनाई है। युवक ने दिल्ली एयरपोर्ट से मॉस्को पहुंचने तक के 5 वीडियो में अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए कहा- कोई भी एजेंट के चक्कर में फंसकर रूस मत आना। हमें यहां जंगल में छोड़ दिया है। अब समझ नहीं आ रहा है कि कहां जाएं? एजेंट ने जो वादे किए, वे हकीकत में बहुत बुरे निकले। युवक ने वीडियो में बताया कि उसका नाम आकाशदीप है। वह जालंधर के रामनगर का रहने वाला है। 15 जून 2026 को वह दिल्ली से फ्लाइट पकड़कर मॉस्को पहुंचा था। उसे जालंधर के ही एजेंट पवन कुमार ने यहां भेजा। उसने कहा था कि मॉस्को में फल तोड़ने का काम है। इसके मोटे पैसे मिलेंगे। रहने को AC कमरे और बढ़िया खाना मिलेगा। युवक का आरोप है कि एजेंट का आदमी उसे जंगल के बीच बने कबाड़खाने जैसे घर में छोड़ गया है। उसके साथ हरियाणा और राजस्थान के भी युवक हैं। बाथरूम जैसे एक कमरे में 10 लोग सो रहे हैं। उसने कहा कि किसी एजेंट पर भरोसा मत करो। ये युवकों को झांसा देकर रूसी सेना में भर्ती करवा रहे हैं। जानिए, युवक ने वीडियोज में अपना क्या एक्सपीरिएंस बताया युवक ने रहने की जगह के ये PHOTOS दिखाए यहां देखिए, युवक के बनाए पांचों वीडियो 1. दिल्ली से मॉस्को की फ्लाइट में वीडियो बनाया 2. जंगल में फंसने का हाल बताया 3. रास्ते में जहां रुके, उस जगह को दिखाया 4. कबाड़ जैसी जगह में रुके, माहौल और टॉयलेट दिखाया 5. छोटा सा कमरा दिखाया, जिसमें सभी युवक ठहरे हैं ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… महिला डॉक्टर ने शादीशुदा होकर खुद को बताया सिंगल:जालंधर में पासपोर्ट बनाया, गुपचुप कनाडा भागी, पति बोला- गहने-कैश भी ले गई जालंधर की एक महिला डॉक्टर (डेंटिस्ट) ने शादीशुदा होने के बावजूद पासपोर्ट दफ्तर में खुद को अविवाहित बताकर नया पासपोर्ट बनवा लिया और कनाडा चली गई। पति का आरोप है कि पत्नी घर से नकदी और गहने लेकर गई और सरकारी दस्तावेजों में गलत जानकारी देकर पासपोर्ट हासिल किया। पढ़ें पूरी खबर…
Chabahar Port Challenge: ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट में भारत का बड़ा निवेश अब तक की सबसे कठिन और जटिल परीक्षा के दौर से गुजर रहा है। अमेरिका द्वारा दी गई प्रतिबंध छूट की अवधि समाप्त होने, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सैन्य संघर्ष, जटिल कूटनीति के बीच भारत अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को बचाने और अफगानिस्तान व मध्य एशिया तक अपनी पहुंच बनाए रखने के लिए सभी संभव विकल्पों का आकलन कर रहा है।
इस बीच भारत ईरान के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को संसाधन उपलब्ध कराने और उसके संचालन के लिए 10 साल के समझौते के तहत अपनी 120 मिलियन डॉलर (लगभग 12 करोड़ डॉलर) की मदद का वादा भी पूरा कर चुका है। हालांकि, अप्रैल में अमेरिकी प्रतिबंध छूट की मियाद खत्म होने के बाद से इस प्रोजेक्ट के संचालन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
संसद में सरकार का बयान और भारत के सामने धर्मसंकट
भारत सरकार ने 31 जुलाई को लोकसभा में एक लिखित जानकारी में बताया कि चाबहार परियोजना के लिए अमेरिका द्वारा दी गई सशर्त प्रतिबंध छूट 26 अप्रैल को ही खत्म हो चुकी है। केंद्र सरकार ने कहा कि वह इसके प्रभावों और जटिलताओं से निपटने के लिए इससे जुड़े स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार संपर्क में है और बातचीत जारी है।
सरकार का यह बयान भारत के सामने मौजूद बड़े रणनीतिक धर्मसंकट की ओर भी इशारा है। भारत का मुख्य उद्देश्य एक तरफ अपने सबसे महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट की रक्षा करना है, तो दूसरी तरफ भारतीय संस्थाओं और कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम से पूरी तरह सुरक्षित रखना भी है। चाबहार भारत के लिए सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट नहीं है बल्कि यह पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया के बाजारों में सीधे प्रवेश करने की दीर्घकालिक रणनीति का मेन आधार भी है।
120 मिलियन डॉलर का निवेश और भारत की परिचालन भूमिका
भारत सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल चाबहार फ्री जोन (IPGCFZ) के माध्यम से इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड वर्ष 2018 से इस बंदरगाह का संचालन कर रही है। मई 2024 में ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के साथ 10 साल का एक लंबा कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया था। इसके तहत भारत ने टर्मिनल के ऑपरेशन और उपकरण लगाने के लिए 120 मिलियन डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई थी।
सरकार ने अब आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि अगस्त 2025 तक अंतिम किस्त सहित पूरी 120 मिलियन डॉलर की राशि ईरान को ट्रांसफर की जा चुकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत अमेरिकी प्रतिबंधों के इस कड़े दौर में भी चाबहार पर अपना ऑपरेशनल कंट्रोल और रणनीतिक प्रभाव बनाए रख पाएगा या नहीं।
भारत के लिए क्यों बेहद खास और रणनीतिक है चाबहार पोर्ट?
ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित चाबहार पोर्ट भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजनाओं में एक अनूठा स्थान रखता है। ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान ने भारत को अफगानिस्तान तक जाने के लिए जमीनी रास्ता देने से हमेशा इनकार किया है। चाबहार ने भारत को इस भौगोलिक और राजनीतिक बाधा से बाहर निकलने का सीधा समुद्री और जमीनी विकल्प दिया है।
चाबहार पोर्ट, पाकिस्तान में चीन द्वारा विकसित किए जा रहे ग्वादर पोर्ट से महज 72 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ग्वादर पोर्ट चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का प्रमुख हिस्सा है। ऐसे में चाबहार में भारत की मौजूदगी इस पूरे क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए बेहद जरूरी रणनीतिक काउंटर-वेट है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारतीय संचालन शुरू होने के बाद से चाबहार के रास्ते भारत से अफगानिस्तान को 25 लाख टन से अधिक गेहूं और 2000 टन दालें मानवीय सहायता के रूप में भेजी गई हैं। इसके अलावा इस बंदरगाह ने अब तक 90000 TEU से अधिक कंटेनर ट्रैफिक और 84 लाख मीट्रिक टन से अधिक बल्क और जनरल कार्गो को संभाला है।
चाबहार पोर्ट अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे से भी जुड़ा है, जो भारत को ईरान, कैस्पियन क्षेत्र, रूस और यूरोप से जोड़ने वाला एक बहु-स्तरीय नेटवर्क है। पूर्व भारतीय राजदूत फुंचोक स्टोबदान के मुताबिक INSTC और चाबहार पोर्ट रूस और यूरेशिया के साथ भारतीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक-दूसरे के पूरक होंगे।
अमेरिकी प्रतिबंधों की समयसीमा और कानूनी अड़चनें
चाबहार परियोजना के सामने सबसे बड़ी और तात्कालिक अड़चन अमेरिका का रुख है। इससे पहले अमेरिका ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास में चाबहार की भूमिका को स्वीकार करते हुए भारत को प्रतिबंधों से विशेष छूट दी थी। इस छूट को सितंबर 2025 में रद्द कर दिया गया था और भारत को अपने संचालन को व्यवस्थित करने के लिए एक सशर्त समय दिया गया था, जो अंततः 26 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गया।
भारत के लिए समय बहुत जटिल रहा क्योंकि ईरान के साथ 10 साल का मुख्य अनुबंध मई 2024 में हुआ था और 120 मिलियन डॉलर का पूरा भुगतान भी कर दिया गया था। अब भारत अमेरिका के साथ अपने संबंधों को मजबूत रखने और चाबहार में अपने निवेश व प्रभाव को बचाने के बीच का रास्ता खोज रहा है।
क्या हैं भारत के पास आगे के विकल्प?
सूत्रों और रिपोर्टों के मुताबिक भारत और ईरान इस बंदरगाह के प्रबंधन के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रहे हैं। एक विकल्प पर चर्चा चल रही है कि जब तक अमेरिकी प्रतिबंधों की स्थितियां बदल नहीं जातीं, तब तक ईरानी पोर्ट अथॉरिटी के साथ मिलकर एक अस्थायी व्यवस्था बनाई जाए ताकि भारत के हितों और निवेश की रक्षा की जा सके। चुनौती यह है कि यह अस्थायी व्यवस्था भारत की दीर्घकालिक परिचालन भूमिका को हमेशा के लिए कमजोर न करे।
भारत का पूरी तरह पीछे हटना रणनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है, क्योंकि भारत के कदम पीछे खींचते ही चीन या दूसरी क्षेत्रीय शक्तियां यहां अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर सकती हैं। हालांकि, इसके व्यावसायिक संचालन के लिए सिर्फ भारत की मौजूदगी ही काफी नहीं है बल्कि इसके लिए बेहतर सड़क एवं रेल कनेक्टिविटी, नियमित जहाजों की आवाजाही और कार्गो की भारी मात्रा की आवश्यकता है।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, ईरान के इर्द-गिर्द बढ़ता तनाव और अमेरिका-ईरान संबंधों की अनिश्चितता ने इस प्रोजेक्ट के जोखिम को काफी बढ़ा दिया है। इसके बावजूद, भारत सरकार ने संकेत दिया है कि वह इस प्रोजेक्ट से पीछे नहीं हट रही है। भारत की रणनीति धैर्यपूर्ण कूटनीति की है। इसके तहत तेहरान के साथ कूटनीतिक रास्ते खुले रखे जाएंगे और प्रतिबंधों के जोखिम से बचते हुए अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखा जाएगा।
Market Insight : बाजार की चाल पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि वीकेंड पर उम्मीद के मुताबिक ट्रंप फिर पीछे हटे। TACO ट्रेड अब सबसे आसान ट्रेड बन चुका है। जिस वीकेंड TACO नहीं होगा,उस सोमवार दिक्कत होगी। बता दें कि TACO ट्रेड का अर्थ है कि टैरिफ की घोषणा के बाद शेयरों की कीमत गिरने पर उन्हें सस्ते में खरीदना और फिर टैरिफ में देरी या कमी होने और बाजार के फिर से पटरी पर आने के बाद उन्हें मुनाफे पर बेचना।
अनुज सिंघल ने आगे कहा कि गुरुवार दोपहर को हमने IT में मुनाफावसूली का नजरिया लिया था। शुक्रवार दोपहर को न्यूट्रल रहने की सलाह थी। अब यहां से सबसे बड़ा फैक्टर होगा बैंक निफ्टी। आज बैंक निफ्टी में अच्छा गैपअप हुआ है। उसके बाद देखना होगा HDFC बैंक कैसे रिएक्ट करेगा। शुक्रवार को HDFC बैंक दिन के निचले स्तर पर बंद हुआ था। बैंक निफ्टी की बस दिक्कत यही है,क्योंकि यह सबसे बड़ा शेयर है। निफ्टी IT 200 DMA के करीब जाकर ठंडा पड़ा है और अब कच्चे तेल का नीचे आना और रुपये का मजबूत होना एल्गो निगेटिव है। ऐसे में शायद यहां से IT बेचें, बैंक फिर खरीदें ट्रेड वापस शुरू होगा।
बाजार: अच्छे संकेतों की भरमार
आज बाजार के पास चलने के लिए लगभग सब कुछ है। सबसे बड़ा पॉजिटिव है कच्चे तेल का नीचे आना। कच्चा तेल हमने $89 पर छोड़ा था,आज हम $84 के भी नीचे हैं। सऊदी अरब,रूस और पांच दूसरे सदस्य सितंबर उत्पादन बढ़ाएंगे। 1.88 लाख बैरल रोजाना उत्पादन बढ़ाया जाएगा। उत्पादन बढ़ाने का फैसला 2023 में हुई कटौती को खत्म करेगा।
GST का डाटा काफी मजबूत है। GST कलेक्शन 14 महीने की ऊंचाई पर है। जुलाई में GST कलेक्शन 15.4% बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपए रहा है। 14 महीनों का सबसे तेज GST ग्रोथ दर्ज किया गया है। FY27 में दूसरी बार GST कलेक्शन 2 लाख करोड़ रुपए के पार रहा है। ऑटो बिक्री भी उम्मीद के मुताबिक शानदार रही है। FIIs ने काफी समय बाद लगातार खरीदारी की है।
एक बार फिर TACO से थके लोग?
ईरान पर नए हमले फिलहाल टाले गए हैं। तेहरान और वेस्ट एशिया के देशों ने जानकारी दी है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दोबारा खोलने पर समझौते की कोशिश चल रही है। तेजी से समझौता होने की उम्मीद में ट्रंप ने हमला रद्द किया है।
ऑटो कंपनियों के लिए शानदार रहा जुलाई
ऑटो कंपनियों के लिए जुलाई का महीना शानदार रहा है। सभी सेगमेंट में डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई है। इस साल का जुलाई इतिहास में सबसे बेहतरीन रहा है। मारुति सुजुकी ने अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया है। एंट्री-लेवल सेगमेंट में लगातार दूसरे महीने 90% बढ़ोतरी दर्ज की गई है। Hyundai ने 100 महीनों में सबसे ज्यादा मंथली एक्सपोर्ट दर्ज किया है। टाटा मोटर्स (PV) की बिक्री 59% बढ़ी है। M&M ने पैसेंजर व्हीकल,ट्रैक्टर और 3-व्हीलर सभी सेगमेंट में दमदार प्रदर्शन किया है। रॉयल एनफील्ड की घरेलू बिक्री मजबूत रही है।
2 व्हीलर पॉकेट अभी भी सबसे मजबूत है। हीरो मोटो,बजाज ऑटो,TVS मोटर और आयशर मोटर्स सभी में ब्रेकआउट है। पैसेंजर व्हीकल स्पेस में सबसे मजबूत Hyundai है। मारुति यहां से भी शायद Hyundai से कमजोर प्रदर्शन करेगी। मारुति की बिक्री अच्छी है लेकिन नतीजों में मार्जिन पर दबाव है और मार्जिन पर दबाव आगे भी धीरे-धीरे ही कम होगा।
3 फैक्टर्स जो मूड बिगाड़ सकते हैं
मारुति और मुथूट के नतीजे थोड़े फीके हैं। US बॉन्ड यील्ड इस बार 4.7% की रेखा पार कर गई है। निफ्टी का PCR अब 1.39 पर काफी ओवरबॉट है।
बाजार: अब क्या हो रणनीति?
शुक्रवार को निफ्टी के ब्रेकआउट का कन्फर्मेशन मिला है। सिर्फ वीकेंड था,इसीलिए हमने मुनाफावसूली का नजरिया लिया था। अब 24,350 निफ्टी के लिए सपोर्ट का काम करेगा। अब लॉन्ग पोजिशन लें तो 24,350 का स्टॉप होगा। सब ठीक रहा तो अब निफ्टी 24,750-24,800 यानी 200 DMA टेस्ट करेगा। सबसे दिलचस्प डाटा है 3 बड़े इंडेक्स और 200 DMA। निफ्टी और 200 DMA। निफ्टी बैंक और 200 DMA। निफ्टी IT और 200 DMA। यहां से वापस अब घरेलू अर्थव्यवस्था पर फोकस करें। इस हफ्ते RBI की मॉनिटरी पॉलिसी भी आनी है। उसके पहले ऑटो, बैंक, NBFCs, रियल एस्टेट चल सकते हैं। IT में अब मुनाफावसूली करें,सिर्फ मजबूत शेयरों में रहें। वीकेंड में परसिस्टेंट ने फिर बढ़िया तिमाही दिखाई। लेकिन शेयर पहले ही काफी चल चुका है,अब नीचे मिले तभी लें। परसिस्टेंट पर हमने 4300 में कॉन्ट्रा का नजरिया लिया था और सिर्फ CNBC-आवाज़ ने शॉर्ट करने से मना किया था। अब यहां से IT में वापस सिर्फ चुनिंदा शेयरों पर फोकस करेंगे।
निफ्टी पर रणनीति
निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24,550-24,650 (ऑप्शंस जोन) पर और बड़ा रजिस्टेंस 24,750-24,800 (200 DMA) पर है। सबसे अहम सपोर्ट 24,350-24,400 (न्यूट्रल जोन)पर है। खरीदारी का सबसे अच्छा जोन 24,350-24,500 है। इसके लिए SL 24,300 पर होना चाहिए। 24,550-24,600 के रिजेक्शन पर बिकवाली करें। इसके लिए SL 24,650 पर रखें।
बैंक निफ्टी पर रणनीति
बैंक निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 57,450-57,500 (200 DMA)पर और बड़ा रजिस्टेंस 57,800-58,000 पर है। इसके लिए पहला सपोर्ट 57,200-57,300 पर और बड़ा सपोर्ट 56,800-57,000 पर है।
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रूस के ताजा मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका और यूरोपीय देशों से तुरंत पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के इंटरसेप्टर मिसाइल भेजने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ये मिसाइलें लोगों की जान बचाने के लिए हैं, इसलिए इन्हें गोदामों में रखने के बजाय यूक्रेन भेजा जाना चाहिए। रूस ने शनिवार रात कीव समेत कई शहरों पर बड़े पैमाने पर हमला किया था। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक हमले में 9 लोगों की मौत हुई, जबकि करीब 40 लोग घायल हुए हैं। जेलेंस्की बोले- पैट्रियट नहीं, इसलिए सिर्फ एक मिसाइल रोक पाए जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि रूस ने रातभर में 35 मिसाइलें, जिनमें 27 बैलिस्टिक मिसाइलें थीं, और करीब 185-190 ड्रोन दागे। इनमें से यूक्रेन केवल एक बैलिस्टिक मिसाइल को ही रोक सका, क्योंकि पैट्रियट सिस्टम के लिए इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार लगभग खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा, “अमेरिका और यूरोप जानते हैं कि हमें क्या चाहिए। अब केवल राजनीतिक फैसला लेने की जरूरत है। बैलिस्टिक रोधी मिसाइलें लोगों की रक्षा करें, गोदामों में न पड़ी रहें। हर दिन की देरी रूस को हमारे लोगों की जान लेने का एक और मौका देती है।” जेलेंस्की बोले- रूस नई रणनीति अपना रहा, नए प्रतिबंध लगाएं जेलेंस्की ने दावा किया कि रूस अब जेट इंजन से लैस शाहेद ड्रोन का अधिक इस्तेमाल कर रहा है और युद्ध लंबा खिंचने का फायदा उठाकर नई हमलावर रणनीतियां विकसित कर रहा है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों से रूस के मिसाइल, लॉन्चर और हथियार उद्योग से जुड़े लोगों और कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाने की भी अपील की। साथ ही कहा कि रूस के तेल शोधन और ईंधन क्षेत्र को मिलने वाली मदद रोकना भी जरूरी है, ताकि उसकी युद्ध क्षमता कमजोर हो सके। रूस बोला- सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि हमले में कीव स्थित यूक्रेन के सैन्य-औद्योगिक प्रतिष्ठानों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निशाना बनाया गया। वहीं यूक्रेन का कहना है कि हमले में रिहायशी इलाके और नागरिक भी प्रभावित हुए। जेलेंस्की ने रक्षा मंत्री रुस्तम उमेरोव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अमेरिका के साथ होने वाली आगामी कूटनीतिक बातचीत की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यूक्रेन को हथियारों और वायु रक्षा प्रणाली को लेकर सहयोगी देशों से ठोस समर्थन मिलेगा। पैट्रियट मिसाइल सिस्टम क्या है पैट्रियट अमेरिका का अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और लड़ाकू विमानों को हवा में ही मार गिराने के लिए बनाया गया है। इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह बेहद कम समय में आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को भी इंटरसेप्ट कर सकता है। इसी वजह से रूस के लगातार बढ़ते मिसाइल हमलों के बीच यह यूक्रेन की सबसे अहम सुरक्षा ढाल माना जाता है। पैट्रियट सिस्टम में लॉन्चर, रडार, कमांड सेंटर और इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल होती हैं। रडार पहले लक्ष्य की पहचान करता है, फिर कमांड सेंटर खतरे का आकलन कर इंटरसेप्टर मिसाइल दागता है, जो हवा में ही दुश्मन की मिसाइल को नष्ट कर देती है।
मास्को के एक रेस्टोरेंट में हुए धमाके में कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई है। इस घटना में 15 लोग घायल हुए हैं। रूसी सरकारी मीडिया ने शनिवार को यह जानकारी दी। घटना मास्को के कुद्रिन्सकाया स्क्वायर इलाके की है। धमाके के बाद फॉरेंसिक एक्सपर्ट और इमरजेंसी सर्विस के लोग पहुंच गए और रेस्क्यू शुरू किया। धमाके के बाद इलाके की घेराबंदी कर दी गई। जांच कर रही एंटी टेरेरिस्ट कमेटी का दावा है कि यह धमाका बम ब्लास्ट था। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ट्रेडर्स अब पैसे देकर पहले देख सकेंगे ट्रम्प के पोस्ट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सोशल मीडिया कंपनी ट्रुथ सोशल ने वॉल स्ट्रीट के हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के लिए ट्रुथ एपीआई नाम की पेड सर्विस शुरू की है। इसके तहत कस्टमर मंथली फीस देकर ट्रम्प और दूसरे अकाउंट्स के पोस्ट तक तेज तकनीकी पहुंच हासिल कर सकेंगे, ताकि वे बाजार में तेजी से ट्रेड कर सकें। आलोचकों का कहना है कि ट्रम्प के टैरिफ, युद्ध, ब्याज दर और दूसरे नीतिगत फैसलों से शेयर, बॉन्ड और मुद्रा बाजार प्रभावित होते हैं, ऐसे में यह व्यवस्था इनसाइडर ट्रेडिंग और सार्वजनिक पद के निजी लाभ के लिए इस्तेमाल जैसे गंभीर सवाल खड़े करती है। वहीं ट्रम्प मीडिया का कहना है कि पोस्ट सभी के लिए एक ही समय पर जारी किए जाएंगे और सर्विस में कोई अनुचित लाभ नहीं है।
रूस की राजधानी मॉस्को में शनिवार को एक रेस्टोरेंट में प्राइवेट कार्यक्रम के दौरान जोरदार धमाका हुआ। नेशनल एंटी-टेररिज्म कमेटी ने सरकारी समाचार एजेंसी RIA नोवोस्ती को बताया कि यह धमाका घर पर बने बम में हुआ। जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में धमाका करने वाली महिला संदिग्ध भी शामिल थी। हादसे में घायलों की संख्या 15 से बढ़कर 21 हो गई है। कमेटी ने बताया कि एक अनजान महिला कुद्रिन्स्काया स्क्वायर पर बने ‘बाल्जी रॉसी’ रेस्टोरेंट में घुसने की कोशिश कर रही थी। उसके पास एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) था। यह डिवाइस समय से पहले रेस्टोरेंट के बाहर ही फट गया, जिससे उसे रोकने वाले सुरक्षा गार्ड और रेस्टोरेंट के एक ग्राहक की मौत हो गई। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ट्रेडर्स अब पैसे देकर पहले देख सकेंगे ट्रम्प के पोस्ट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सोशल मीडिया कंपनी ट्रुथ सोशल ने वॉल स्ट्रीट के हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के लिए ट्रुथ एपीआई नाम की पेड सर्विस शुरू की है। इसके तहत कस्टमर मंथली फीस देकर ट्रम्प और दूसरे अकाउंट्स के पोस्ट तक तेज तकनीकी पहुंच हासिल कर सकेंगे, ताकि वे बाजार में तेजी से ट्रेड कर सकें। आलोचकों का कहना है कि ट्रम्प के टैरिफ, युद्ध, ब्याज दर और दूसरे नीतिगत फैसलों से शेयर, बॉन्ड और मुद्रा बाजार प्रभावित होते हैं, ऐसे में यह व्यवस्था इनसाइडर ट्रेडिंग और सार्वजनिक पद के निजी लाभ के लिए इस्तेमाल जैसे गंभीर सवाल खड़े करती है। वहीं ट्रम्प मीडिया का कहना है कि पोस्ट सभी के लिए एक ही समय पर जारी किए जाएंगे और सर्विस में कोई अनुचित लाभ नहीं है।

UP International Trade Show 2026: उत्तर प्रदेश को वैश्विक व्यापार, विनिर्माण और निर्यात के अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) का चौथा संस्करण आगामी 25 से 29 सितम्बर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को आयोजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए इसे उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, नवाचार, उत्पादों और निर्यात सामर्थ्य को विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो ने पिछले तीन संस्करणों में प्रदेश के उत्पादों, उद्यमों और उद्योगों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनाया है। अब यह आयोजन केवल एक व्यापार प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' और 'मेक फॉर द वर्ल्ड' के विजन को आगे बढ़ाने वाला वैश्विक मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश यानी 'अनलिमिटेड पोटेंशियल' का प्रदेश है और यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो इस सामर्थ्य को अनुभव करने का सबसे प्रभावी मंच है। उन्होंने निर्देश दिए कि देश और विदेश में इस आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक निवेशक, खरीदार और आगंतुक इसमें सहभागी बनें।
ट्रेड शो की थीम 'यूपी फॉर ग्लोबल ग्रोथ
बैठक में बताया गया कि इस वर्ष ट्रेड शो की थीम 'यूपी फॉर ग्लोबल ग्रोथ: इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग एंड एक्सपोर्ट्स' रखी गई है। आयोजन में 2400 से अधिक प्रदर्शकों, 1.50 लाख से अधिक पंजीकृत बी2बी खरीदारों, 4.50 लाख से अधिक बी2सी आगंतुकों तथा 85 देशों से 550 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की सहभागिता का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही 4000 से अधिक एमओयू, ₹3200 करोड़ से अधिक प्रस्तावित एमओयू मूल्य और ₹13,500 करोड़ से अधिक बिजनेस इंक्वायरी होने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर, ओमान, ऑस्ट्रिया, ब्राजील, थाईलैंड, जापान, इंडोनेशिया और रूस सहित अन्य देशों के साथ भी सक्रिय संवाद स्थापित कर उनकी अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि इस बार ओडीओपी, ओडीओसी, एमएसएमई, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी, रक्षा एवं एयरोस्पेस, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, पर्यटन एवं फिल्म, अक्षय ऊर्जा, ऑटो एवं इलेक्ट्रिक वाहन, फार्मा एवं स्वास्थ्य, कौशल विकास, नागरिक उड्डयन, वित्तीय सेवाएं, स्टार्टअप, लॉजिस्टिक्स, फूड प्रोसेसिंग, हस्तशिल्प, खादी, वस्त्र, चमड़ा, फर्नीचर तथा अन्य प्रमुख क्षेत्रों का व्यापक प्रदर्शन किया जाएगा, जिससे उत्तर प्रदेश की विविध औद्योगिक एवं आर्थिक क्षमता एक ही मंच पर प्रदर्शित होगी।
नॉलेज सेशन को उपयोगी बनाया जाए
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नॉलेज सेशन को उद्योग जगत, निवेशकों और उद्यमियों के लिए उपयोगी बनाया जाए। इन सत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं साइबर अपराध, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, बैंकिंग एवं वित्त, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, नई श्रम संहिताएं, खाद्य प्रसंस्करण नीति, सड़क सुरक्षा, ई-कॉमर्स, वैश्विक मुक्त व्यापार समझौते, एमएसएमई तथा अन्य समकालीन विषयों पर विशेषज्ञ चर्चा आयोजित की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि व्यापारिक गतिविधियों के साथ उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी इस आयोजन की पहचान बने। इसके लिए सभी दिनों में शास्त्रीय संगीत, कथक, लोकनृत्य, लोकगायन, भजन, ग़ज़ल तथा अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आकर्षक आयोजन किया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले अतिथि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता का भी अनुभव कर सकें।
विदेशों में भारतीय मिशनों के साथ समन्वय
बैठक में यह भी बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को जोड़ने के लिए विदेशों में भारतीय मिशनों के साथ व्यापक समन्वय किया गया है। विभिन्न देशों के खरीदारों से लगातार संपर्क स्थापित किया जा रहा है तथा बायर-सेलर बैठकों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के उद्यमियों और निर्यातकों को नए वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने ट्रेड शो के दौरान उद्यमी मित्रों की तैनाती सुनिश्चित करने तथा स्थानीय विश्वविद्यालयों एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों और युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि आगंतुकों, खरीदारों और उद्यमियों को बेहतर सुविधा एवं सहयोग उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक में वर्चुअल माध्यम से जुड़े पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्ध नगर ने कार्यक्रम के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन, पार्किंग, वीआईपी आवागमन, सुरक्षा व्यवस्था तथा आमजन की सुविधा के लिए की जा रही तैयारियों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। वहीं ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने आयोजन स्थल पर विकसित की जा रही आधारभूत सुविधाओं एवं अन्य व्यवस्थाओं की प्रगति से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान आगंतुकों की सुविधा के लिए ईवी बसों का संचालन भी सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो केवल व्यापारिक आयोजन नहीं, बल्कि विकसित उत्तर प्रदेश और एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध तैयारियां सुनिश्चित की जाएं, ताकि यह आयोजन उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रगति, निवेश अनुकूल वातावरण और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का प्रभावी परिचायक बनकर उभरे।
औद्योगिक क्षेत्र विकास योजना की प्रगति की समीक्षा
मुख्यमंत्री ने बैठक में सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र विकास योजना की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्हें बताया गया कि प्रदेश को कौशल विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास का राष्ट्रीय केंद्र बनाने के उद्देश्य से तैयार की जा रही इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 27 मई को अभिरुचि आमंत्रण (ईओआई) जारी किया गया था, जिसमें बीवीजी समूह, टीसीएस और हीरानंदानी समूह ने रुचि दिखाई है।
अधिकारियों की टीम टाटा आईआईएस केंद्रों का अध्ययन कर चुकी है, जबकि टीसीएस ने योजना के तकनीकी भागीदार के रूप में सहयोग देने पर सहमति व्यक्त की है। अब तक 19 जनपदों में लगभग 1320 एकड़ भूमि चिन्हित की जा चुकी है तथा प्रथम चरण में एमएसएमई, यूपीसीडा, जीएनआईडीए, यीडा, यूपीईडा, बीडा और गीडा के माध्यम से 17 केंद्र विकसित किए जाएंगे। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत नौ क्षेत्रीय हब एंड स्पोक मॉडल विकसित करते हुए प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण तथा 80 प्रतिशत प्रशिक्षित युवाओं के प्लेसमेंट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करते हुए समयबद्ध ढंग से कार्य आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

दक्षिण-पश्चिमी जापान के ग्रामीण इलाकों में शक्तिशाली भूकंप के दो दिन बाद भी जनजीवन सामान्य नहीं हो सका है। भूकंप के कारण एक शॉपिंग मॉल में विस्फोट हुआ, एक कारखाने की चिमनी गिर गई और कई मकान ढह गए और अब तक कम से कम 23 लोगों की मौत हो चुकी है।
बचाव दल जापान के दक्षिणी मुख्य द्वीप क्यूशू के कुमामोतो क्षेत्र में लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं, जहां मंगलवार को रिक्टर पैमाने पर 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। समय के साथ मलबे में फंसे जीवित लोगों के मिलने की उम्मीद लगातार कम होती जा रही है।
कुमामोतो प्रांतीय सरकार के अनुसार, अब भी लापता लोगों की संख्या स्पष्ट नहीं है। भूकंप में कम से कम 63 लोग घायल हुए हैं, जिनमें पांच की हालत गंभीर है।
मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा कि पुलिस के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, मृतकों की संख्या 28 है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इनमें कुछ ऐसे मामले भी शामिल हैं जिनकी जांच जारी है और संभव है की ये भूकंप से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित नहीं हो।
जीवित बचे लोगों ने बताया कि वे घर लौटने के बाद मलबे में दबे अपने परिजनों को निकालने के लिए हरसंभव प्रयास करते रहे। कई लोग घायल भी हुए, जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।
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हजारों लोगों ने एक और रात राहत शिविरों में बिताई। ये शिविर स्कूलों के व्यायामशालाओं और अन्य बड़े भवनों में स्थापित किए गए हैं। कई घरों में अब भी बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। लोग लगातार आ रहे झटकों के डर से घर लौटने से बच रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, करीब 23,000 घरों की बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की जा सकी है और 400 के आसपास राहत शिविरों में 10,000 से अधिक लोग रह रहे हैं। शिविरों में लोगों को गर्मी से राहत देने के लिए अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था की जा रही है ताकि वातानुकूलन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
भीषण गर्मी के कारण लोगों के बीमार पड़ने की आशंका भी बढ़ गई है। पर्यावरण मंत्रालय ने कुमामोतो क्षेत्र में भीषण गर्मी की चेतावनी जारी की है। बृहस्पतिवार को वहां तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है।
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हिकावा कस्बे में कई लोग अब भी पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कुछ लोग उद्यानों और पार्किंग स्थल में अपने वाहनों में ही रह रहे हैं।
नगर कार्यालय के बाहर अधिकारियों ने लोगों को बोतलबंद पानी और पैकेटबंद चावल वितरित किए, जबकि जापान के जमीनी आत्मरक्षा बल के जवान ट्रॉली के जरिए पेयजल उपलब्ध करा रहे हैं।
हिकावा के 66 वर्षीय निवासी योशिआकी नाकाशिमा ने बताया कि वह अपने पालतू कुत्ते के साथ पानी लेने आए हैं और राहत शिविर में रहने के बजाय अपनी कार में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार आ रहे झटकों के कारण उन्हें अपने घर में सोने से भी डर लग रहा है।
Pic Credit : ANI
PoK Unrest: अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार (29 जुलाई) को अमेरिका के एक प्रमुख अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की खबर की हेडलाइन को भ्रामक और गलत करार देते हुए कहा कि ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ जैसी कोई चीज नहीं है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में प्रकाशित खबर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी हिंसक झड़पों पर आधारित थी। भारतीय दूतावास ने कहा, “न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर का शीर्षक गलत और गुमराह करने वाला है। कोई पाकिस्तानी कश्मीर नहीं है, सिर्फ पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर है।”
दूतावास ने कहा कि केंद्र-शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा से भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्सा रहे हैं, हैं और रहेंगे। भारतीय दूतावास ने कहा, “पाकिस्तान ने इन केंद्र-शासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। अब वह कब्जे वाले इलाकों के लोगों के खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल कर रहा है।”
स्थानीय अधिकारियों और स्वतंत्र एजेंसियों के हवाले से प्रकाशित खबर में ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने कहा कि जून में शुरू हुई हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 30 लोग मारे गए हैं। कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का संयुक्त मंच ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पीओके की तथाकथित विधानसभा की 12 विवादित सीट को लेकर लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रही है।
जेएएसी का आरोप है कि सत्ता प्रतिष्ठान इन सीटों का इस्तेमाल अपनी पसंद के व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनवाने के लिए करता है। भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी व्यापक जन प्रदर्शन पाकिस्तान के आर्थिक शोषण, वहां के लोगों को मौलिक अधिकारों से वंचित किए जाने और उसके प्रशासनिक दमन का प्रत्यक्ष परिणाम हैं।
पाकिस्तानी सेना की बर्बर कार्रवाई
पिछले दो दिनों में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बर कार्रवाई में 30 से अधिक नागरिक मारे गए और 33 से अधिक घायल हो गए। पीओके में स्थानीय निकाय चुनाव के बीच जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) इन प्रदर्शनों की अगुवाई कर रही है।
पीओके में पिछले महीने से महंगाई, प्रशासनिक उदासीनता, राजनीतिक भेदभाव और अल्पसंख्यकों पर कथित अत्याचार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। भारत ने मंगलवार को पीओके में कराए जा रहे स्थानीय निकाय चुनाव को पाकिस्तान की ओर से अपने अवैध कब्जे पर पर्दा डालने और क्षेत्र में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनों को छिपाने की कोशिश बताया था।
सूत्रों ने बताया कि रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक जेएएसी के ‘लॉन्ग मार्च’ के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर जानलेवा बल प्रयोग किया। स कार्रवाई में 30 से अधिक नागरिकों की मौत हो गई और 33 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हो गए। उन्होंने बताया कि मरने वालों में उस्मान नजीर भी शामिल है, जो जेएएसी की केंद्रीय समिति के सदस्य उमर नजीर का भाई था।
Misleading and incorrect headline by @nytimes. There is no Pakistani Kashmir, only Pakistan occupied Kashmir.
The Union Territories of Jammu & Kashmir and Ladakh, have been, are and will always remain an integral and inalienable part of India. Pakistan has illegally occupied…
— India in USA (@IndianEmbassyUS) July 29, 2026
US-Iran War Update: जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरानी मिसाइल हमले के एक दिन बाद अमेरिका ने गुरुवार (30 जुलाई) तड़के ईरान के कई ठिकानों पर एयरस्ट्राइक शुरू कर दिए। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद की गई। उन्होंने कहा था कि ईरान को बहुत कड़ा जवाब दिया जाएगा। अमेरिका की न्यूज वेबसाइट Axios ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिकी सेना ने गुरुवार सुबह ईरान में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए।
इसके कुछ ही देर बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन हमलों की पुष्टि की। CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई मंगलवार को जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए ईरानी मिसाइल हमलों के जवाब में की गई है। अमेरिकी सेना ने इसे मध्य-पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों के खिलाफ सशक्त और निर्णायक प्रतिक्रिया बताया।
ट्रंप ने ईरान को दी घमकी
इससे पहले बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘व्हाइट हाउस’ के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था कि अब जवाब देने की बारी अमेरिका की है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने मिसाइल लॉन्च को गलती बताया है। अमेरिका से जवाबी कार्रवाई नहीं करने का अनुरोध किया है।
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “अब हमारी बारी है। हम उन पर बहुत जोरदार हमला करेंगे। उन्हें पता है कि यह आने वाला है।” पिछले शुक्रवार से अमेरिका ने ईरान पर हमलों में पांच दिन का विराम लिया था। इससे पहले लगातार 13 रातों तक ईरानी ठिकानों पर अमेरिकी हमले किए गए थे।
ईरान में कई जगह धमाकों की खबर
अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरानी सरकारी मीडिया ने देश के कई हिस्सों में विस्फोट होने की जानकारी दी। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार, बुशेहर प्रांत में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। यह वही इलाका है जहां ईरान का एकमात्र परमाणु प्लांट स्थित है। इसके अलावा दक्षिणी क्षेत्रों से भी विस्फोटों की खबरें सामने आईं। ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी ने भी अमेरिकी हमलों के बाद देश के कई हिस्सों में विस्फोट होने की जानकारी दी।
बाद में IRIB ने बताया कि खुजेस्तान प्रांत के अबादान क्षेत्र में भी अमेरिकी बलों ने हमला किया। इसके अलावा होर्मोज़गान प्रांत के बंदर अब्बास और अबू मूसा, किश तथा क़ेश्म द्वीपों पर भी विस्फोटों की सूचना मिली। वहीं, ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सीरिक शहर पर किसी हमले की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से हालात पर करीबी नजर रखी जा रही है।
इराक में अमेरिका एवं सऊदी के हमले में 20 लोगों की मौत, 32 घायल
इस बीच, इराक में अमेरिका और सऊदी अरब के जॉइंट हवाई हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और 32 अन्य घायल हो गए। इन हमलों में ईरान से जुड़े लॉजिस्टिक्स और हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस घटना के बाद बगदाद में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई गई है। दूसरी ओर, तेहरान ने जॉर्डन में मौजूद अमरीकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमले करने का दावा किया है।
इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस (PMF) ने टेलीग्राम पर एक बयान जारी कर पुष्टि की कि अमेरिका और सऊदी अरब के हमलों में कम से कम 20 जवान शहीद हुए हैं और 32 घायल हैं। समूह के अनुसार, ये हमले बगदाद, वासित, निनवे, बसरा, किरकुक, कर्बला और दियाला समेत सात प्रांतों में स्थित उनके सैन्य ठिकानों पर हुए। इससे उनके मुख्यालयों, वाहनों और हथियारों को भारी नुकसान पहुंचा है।
पीएमएफ का कहना है कि राहत कार्य जारी होने के कारण मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है। इससे पहले पीएमएफ की 30वीं ब्रिगेड ने बताया कि स्थानीय समयानुसार तड़के करीब 3:20 बजे उत्तरी इराक के निनवे प्रांत में सात हमले किए गए, जिनमें 10 लोगों की मौत हुई और छह अन्य घायल हो गए।
इराक में हड़कंप
इराक के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, हमलों की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री अली फलीह अल-जैदी ने बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी मंत्रिस्तरीय परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई। अमेरिकी और सऊदी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान समर्थित लड़ाकों द्वारा अमेरिकी सैनिकों और सऊदी ऑयल प्लांटों पर किए गए लगातार हमलों के जवाब में की गई है।
एक बयान में यह भी बताया गया कि इस साल फरवरी से अप्रैल के बीच ईरान समर्थित गुटों ने अमरीकी ठिकानों पर 600 से अधिक बार हमला करने की कोशिश की थी। बयान में आगाह किया गया कि आगे की सैन्य कार्रवाई से बचने के लिए आईआरजीसी और उसके सहयोगी समूह तुरंत हमले रोक दें। पीएमएफ के कई बड़े गुटों के रिश्ते ईरान की आईआरजीसी के साथ बेहद मजबूत हैं और वे उसके क्षेत्रीय नेटवर्क का हिस्सा हैं।
ये समूह मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना और उसके सहयोगियों पर लगातार हमले करते रहे हैं। इन हवाई हमलों के कुछ ही घंटे बाद ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की घोषणा कर दी गई। आईआरजीसी की एयरोस्पेस फ़ोर्स ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी एयर बेस और सेंटकॉम मुख्यालय पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है।
बुधवार तड़के जारी बयान में आईआरजीसी ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सेना के आक्रामक रुख का करारा जवाब है। आईआरजीसी ने कहा कि उसके जांबाज सैनिकों ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को मिसाइलों से निशाना बनाया है। जब तक ईरान के खिलाफ अमेरिका की धमकियां और गैर-कानूनी गतिविधियां बंद नहीं होंगी, तब तक उनका यह प्रतिरोध जारी रहेगा।

