Ather details Konarc durability tests ahead of August 29 launch

Ather details Konarc durability tests ahead of August 29 launch
Outside image of Ather's testing facility, the Juggernaut

As we know, Ather’s first scooter based on the EL platform, Konarc, is gearing up to launch on August 29, at their annual community day. We had learned earlier that the Konarc will get metal body panels and few other details about the platform. Now, Ather has detailed the durability tests they’ve conducted on the Konarc to ensure that it’s built robustly.

  1. Tested at The Juggernaut, Ather’s in-house testing ground
  2. Some of the tests include drop tests, flood simulations, and vibration testing

Robust testing in tough conditions

With a 1 lakh km condensed riding cycle

We’re now aware that Ather is looking to position the Konarc as their first mass market EV and as such, they claim to have tested it far beyond what a normal ride would demand at The Juggernaut, the brand’s in-house testing ground. Posted on the brand’s Instagram page, some of the different tests include drop tests, load testing, shaking, vibrating, compressing one lakh kilometres of riding into an accelerated cycle. To take things up a notch, scenarios like heavy rains, deep water wades, floods were also simulated.

Front right quarter image of the Ather EL01 concept
EL01 concept used for representative purpose

Beyond these admittedly robust testing scenarios, the video also shows the Konarc undergoing typical durability tests for parts like the brakes, suspension, stands, and switches. The video also further substantiates previously known information like the steel chassis, metal body panels, a swingarm mounted motor, a 14-inch front wheel and a 12-inch rear wheel. We should get to know exactly what the Konarc can do on August 29 with more insights and information into the scooter.
 

योगी सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, IIT कानपुर, BHU और रुड़की को सौंपी कमान! यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स का यूं होगा ऑडिट

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सड़क, पुल, सीवरेज और जलापूर्ति परियोजनाओं की क्वालिटीकी जांच देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) संस्थानों के एक्सपर्ट्स करेंगे। सरकार ने इसके लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था में IIT कानपुर, IIT-BHU वाराणसी और IIT रुड़की जैसे प्रमुख संस्थान बड़ी परियोजनाओं की टेक्निकल क्वालिटी की निगरानी करेंगे।

इसका मकसद यह है कि निर्माण में किसी भी तरह की तकनीकी कमी, घटिया सामग्री या सुरक्षा से जुड़ी समस्या का पता परियोजना पूरी होने के बाद नहीं। बल्कि निर्माण के दौरान ही चल जाए। थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) में सड़कें, पुल, सीवरेज सिस्टम और पानी की सप्लाई वाले प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक होगी जांच 

एक्सपर्ट्स हर प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक जांच करेंगे। इसमें उसका डिजाइन, बनाने का तरीका, इस्तेमाल होने वाली सामग्री और जरूरी मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, जैसे सभी कारण शामिल होगा। IIT की टीमें निर्माण के अलग-अलग चरणों की भी निगरानी करेंगी ताकि काम पूरा होने के बाद के बजाय शुरुआती दौर में ही किसी भी समस्या का पता लगाया जा सके।

शुरुआत से अंत तक होगी जांच

IIT के विशेषज्ञ केवल तैयार सड़क या पुल की जांच नहीं करेंगे, बल्कि परियोजना के अलग-अलग चरणों की निगरानी करेंगे। इसका उद्देश्य निर्माण पूरा होने के बाद खामियां मिलने के बजाय उन्हें समय रहते पहचानकर ठीक करना है। इसमें मुख्य रूप से-

  • प्रोजेक्ट के डिजाइन की जांच
  • निर्माण में अपनाई जा रही तकनीक
  • इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री की गुणवत्ता
  • निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन
  • निर्माण की सुरक्षा
  • काम की अलग-अलग स्टेज पर गुणवत्ता की जांच शामिल होगी।

IIT कानपुर को 8 डिवीजन की जिम्मेदारी

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी व्यवस्था के तहत IIT कानपुर को उत्तर प्रदेश के 8 डिवीजन में प्रोजेक्ट की क्वालिटी जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कानपुर, लखनऊ, बांदा, प्रयागराज, अयोध्या, आगरा, झांसी और देवीपाटन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तकनीकी जांच IIT कानपुर की टीम करेगी।

IIT-BHU के जिम्मे ये इलाके

IIT-BHU वाराणसी को भी कई महत्वपूर्ण डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी और मिर्जापुर में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। वहीं IIT रुड़की को सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ और अलीगढ़ समेत पांच डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है।

₹100 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट पर खास नजर

नई व्यवस्था के तहत ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रमुख प्रोजेक्ट जांच के दायरे में आएंगे। टेक्निकल एक्सपर्ट निर्माण की क्वालिटी के साथ-साथ इस्तेमाल की जा रही सामग्री और परियोजना की सुरक्षा का भी परीक्षण करेंगे। सरकार का मानना है कि बाहरी और एक्सपर्ट्स संस्थानों से ऑडिट कराने से निर्माण एजेंसियों पर गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही सरकारी पैसे से तैयार होने वाली बड़ी परियोजनाओं की विश्वसनीयता बेहतर होगी।

‘उन्नाव एक्सप्रेसवे’ हादसे के बाद बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब उन्नाव में ग्रीनफील्ड नेशनल एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद ढहने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे। इसके करीब 12 दिन बाद एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के ढहने की खबर ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

अब निर्माण के दौरान ही पकड़ में आएंगी खामियां

नई TPQA व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसी परियोजना के पूरा होने के बाद सामने आने वाली तकनीकी खामियों को निर्माण के दौरान ही पकड़ा जा सकेगा। सरकार की कोशिश है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट केवल समय और बजट के भीतर पूरे न हों। बल्कि उनकी गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। यानी अब यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट पर सिर्फ सरकारी विभागों की नजर नहीं होगी। बल्कि IIT के टेक्निकल एक्सपर्ट भी निर्माण की क्वालिटी का हिसाब रखेंगे।

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मेरे पास 5 गाय हैं और भी रखने के लिए जगह… सीतापुर की पूनम देवी की ये बात सुनते ही CM योगी ने पशुधन विभाग को दिया ये आदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या कितनी भी व्यस्त क्यों न हो, जनता से सीधे संवाद का सिलसिला जारी रहता है। सोमवार को लखनऊ में अपने सरकारी आवास पर सीएम योगी ने जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों से मुलाकात की। उन्होंने लोगों की समस्याएं और शिकायतें सुनीं और मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों को इनके जल्द और प्रभावी समाधान के निर्देश दिए।

इस दौरान सीतापुर के हरगांव की रहने वाली पूनम देवी भी सीएम योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार में पहुंचीं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलकर गाय पालन के जरिए अपने परिवार को आत्मनिर्भर बनाने की इच्छा जाहिर की। पूनम के पास पहले से ही पांच गायें हैं और उन्होंने और गायें उपलब्ध कराने की मांग की। पूनम ने बताया की उनके पास अन्य गोवंश रखने के लिए पर्याप्त जगह भी हैं।

इस पर मुख्यमंत्री ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (पशुपालन) को निर्देश दिया कि उन्हें बेसहारा गायें उपलब्ध कराई जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि उन्हें ‘मुख्यमंत्री सहभागिता योजना’ का लाभ मिले, ताकि वह गोसेवा के साथ दूथ की बिक्री से परिवार की आय बढ़ा सकें।

श्रावण मास में मुख्यमंत्री से आश्वासन मिलने पर जताया आभार

अपने जनता दर्शन कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोसेवा के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, गोमाता में 33 कोटि देवताओं का वास माना गया है। सीएम योगी ने पूनम से कहा कि मन से गोसेवा करें, क्योंकि श्रद्धा और मन से की गई गोसेवा से जीवन की बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं। पूनम देवी ने भी अपनी इच्छा पूरी करने की दिशा में मुख्यमंत्री की ओर से मिले भरोसे के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखने और मदद का आश्वासन मिलने से उन्हें खुशी हुई है।

दिव्यांग की जमीन पर कब्जे की शिकायत

बता दें कि जनता दर्शन के दौरान अलग-अलग जिलों से पहुंचे लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अपनी समस्याएं रखीं। इसी दौरान एक दिव्यांग व्यक्ति ने अपनी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत मुख्यमंत्री से की। योगी आदित्यनाथ ने उसकी बात गंभीरता से सुनी और संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीड़ित को हर संभव मदद दिलाने और उसकी समस्या का उचित समाधान सुनिश्चित करने को कहा।

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Delhi Rains: दिल्ली-NCR में भारी बारिश से हवाई सेवा प्रभावित! 250 से ज्यादा उड़ानें लेट, 15 फ्लाइट डायवर्ट

Delhi Rains: दिल्ली-NCR में सोमवार (24 अगस्त) को हुई मूसलाधार बारिश का असर सड़क ट्रैफिक के साथ-साथ हवाई सेवाओं पर भी पड़ा। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) पर 250 से ज्यादा उड़ानें देरी से चल रही हैं। जबकि मौसम खराब होने के कारण 15 उड़ानों को दूसरे शहरों की ओर डायवर्ट करना पड़ा। डायवर्ट की गई उड़ानों में तीन इंटरनेशनल फ्लाइट भी शामिल हैं। इनमें से 12 उड़ानों को जयपुर, 2 को चंडीगढ़ और 1 उड़ान को लखनऊ भेजा गया। हालांकि, मौसम में सुधार के साथ दिन आगे बढ़ने पर उड़ान संचालन के सामान्य होने की उम्मीद जताई गई है।

भारी बारिश से दिल्ली में जलभराव और ट्रैफिक जाम

दिल्ली में सोमवार को हुई तेज बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। सड़कों पर पानी भरने से कई जगहों पर यातायात की रफ्तार धीमी रही और लंबे ट्रैफिक जाम की स्थिति देखने को मिली। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। जबकि कुछ अन्य इलाकों के लिए मध्यम बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया।

एयरलाइंस ने यात्रियों को किया अलर्ट

मौसम की स्थिति को देखते हुए कई एयरलाइंस ने यात्रियों को अपनी उड़ान का स्टेटस चेक करने की सलाह दी है। एयरलाइंस ने यह भी चेतावनी दी कि खराब मौसम का असर कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर भी पड़ सकता है। एयर इंडिया (Air India) ने यात्रियों को बताया कि दिल्ली से आने-जाने वाली उड़ानों का संचालन प्रतिकूल मौसम से प्रभावित हो सकता है। इंडिगो (IndiGo) ने कहा कि दिल्ली के ऊपर खराब मौसम के कारण उड़ानों के शेड्यूल पर असर पड़ा है। एयरलाइन ने यात्रियों से धैर्य रखने और उड़ान की स्थिति पर नजर बनाए रखने की अपील की।

स्पाइसजेट (SpiceJet) ने भी यात्रियों को आगाह करते हुए कहा कि दिल्ली में खराब मौसम के कारण सभी आने-जाने वाली उड़ानें और उनसे जुड़ी कनेक्टिंग उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं। यात्रियों से एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जांचने को कहा गया। वहीं, अकासा एयर (Akasa Air) ने कहा कि दिल्ली में गंभीर मौसम की स्थिति के कारण उसके नेटवर्क की कुछ उड़ानें प्रभावित हुई हैं और यात्रियों को हुई असुविधा के लिए उसने खेद जताया।

यात्रियों के लिए जरूरी सलाह

मौसम खराब होने की स्थिति में यात्रियों को एयरपोर्ट निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का ताजा स्टेटस जरूर चेक करने, अतिरिक्त यात्रा समय लेकर चलने और कनेक्टिंग फ्लाइट वाले यात्रियों को एयरलाइन के अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

दक्षिण-पूर्वी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, शाहदरा, मध्य दिल्ली, उत्तर-पूर्वी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली, नई दिल्ली, दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली के कुछ स्थानों पर बादलों की गरज और बिजली की चमक के साथ भारी बारिश हुई। यात्रियों ने सोशल मीडिया पर शहर के कुछ हिस्सों में ट्रैफिक जाम और जलभराव की शिकायत की।

‘रेड’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी

दिल्ली में भारी बारिश के बाद मौसम विभाग ने रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए अगले कुछ घंटों में बादलों की गरज और बिजली की चमक के साथ तेज से मध्यम बारिश और 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलने का पूर्वानुमान जताया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, सुबह 8:30 बजे से 11:30 बजे के बीच दिल्ली में सबसे अधिक 28 मिलीमीटर (मिमी) बारिश छतरपुर में दर्ज की गई। इसके बाद लोधी रोड में 24.6 मिमी और पीतमपुरा में 18.5 मिमी बारिश हुई।

इस दौरान रिज में पांच मिमी, मयूर विहार में 1.5 मिमी, सफदरजंग में एक मिमी और आयानगर में 0.1 मिमी बारिश दर्ज की गई। कई इलाकों में बारिश के साथ तेज हवाएं भी चलीं। न्यू अशोक नगर मेट्रो स्टेशन, बुराड़ी, सीआर पार्क और अलकनंदा के आसपास जलभराव की सूचना मिली। यात्रियों ने भी सोशल मीडिया पर ट्रैफिक जाम और जलभराव वाले मार्गों की जानकारी शेयर की।

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दिल्ली में सोमवार को शहर के प्रमुख मौसम केंद्र सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के सामान्य तापमान से 1.4 डिग्री अधिक है। रिज में सबसे कम न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आईएमडी के अनुसार, अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।

Opinion: Freak accidents are almost always human negligence

Opinion: Freak accidents are almost always human negligence
Opinion: Freak accidents are almost always human negligence

Going by the amount of social media chatter around any NCAP test, you’d think India is one safety-obsessed nation. Awareness is rising, but safety is far from ingrained in our ethos like it is in, say, Japan. We all know the current state of road safety is appalling, but I’m not talking about driving manners or vehicle collisions or crash ratings. Of late, there’s another aspect of road safety that’s really been bothering me; the road itself and everything around it. 

During the rains in Mumbai last month, two girls were electrocuted in a water-logged street. Luckily, timely intervention from a passer-by and medical treatment at a hospital saved them. Last year, an auto-rickshaw driver had his head 

pierced by a falling iron rod from metro construction; thankfully emergency neurosurgery saved him too. Not everyone is so lucky though, if you can even call these accidents lucky. A concrete slab from an under-construction girder bridge fell onto a moving auto-rickshaw and car and resulted in one death and multiple injuries.

You would have read the horrific news of a 25-year-old biker in Delhi who died after his motorcycle plunged into an unbarricaded, 14-foot-deep construction pit dug up and left open. And it’s not just bikes; people have fallen into open manholes, flooded over with water, and lost their lives, and recently a 20-year-old student died after his car plunged into an open drain. Two years ago, a massive illegal billboard blew over and killed 17 people and injured over 75 others during heavy winds in Mumbai. This monsoon season, a tree collapsed onto a school bus and took the life of an 11-year-old child. 

This is the aspect of road safety that has been bothering me recently, not because car crashes and other accidents do not, but because these are all too often termed ‘freak accidents’ or ‘random happenings’. Nonsense! These are not freak incidents, but accidents caused by negligence and unaccountability. So many folks say, ‘oh, his/her time had come’. Again, nonsense. Would you say all those poor kids who died in Africa due to starvation died because their time had come? No. They died because of human action, or inaction. 

So, really, I write this column only to highlight this fact; to remind us all that it isn’t random. As the saying goes, ‘everything happens for a reason’. Here it’s callousness, from those in charge and from us. So, the next time you express outrage over a non-5-star NCAP-rated car, spare some words of outrage for these incidents too.

Tata Motors halts production at Sanand plants due to Gujarat flood

tata motors sanand plant

In a new regulatory filing to stock exchanges, Tata Motors has reported a temporary disruption to operations at its manufacturing plants in Sanand, Gujarat, after heavy monsoon rains and flooding affected the region. Specifically, some areas in Gujarat received between 300mm and 500mm of rain within 24 hours, which led to flooding, widespread road and rail disruptions, and the evacuation of more than 40,000 people across the state.

Production of Tata Nexon, Sierra, Tiago, Tigor briefly paused

In the regulatory filing, Tata Motors revealed that severe flooding disrupted supplier facilities in and around Gujarat as well, further impacting the carmaker’s supply chain. Efforts to restore operations at Tata’s assembly plants and vendor facilities are underway, and the carmaker is working closely with flood-affected suppliers to help them resume production as quickly as possible. If all goes to plan, production at Tata’s Sanand plants is expected to bounce back over the next few days.

Established in 2010 and located 25-30 km from Ahmedabad, the Sanand manufacturing complex houses two Tata Motors passenger vehicle plants. Both Sanand facilities manufacture the Tata Sierra, Nexon, Tiago, and Tigor, so the production pause could prolong waiting periods for these models.

Tata Motors also stated the overall financial impact and extent of damage are still being assessed. However, the carmaker assured that it has adequate insurance coverage for losses arising from natural calamities such as floods.

Lucknow-Kanpur Expressway: उद्घाटन के 13वें दिन ही धंस गया कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे, NHAI ने कही ये बात

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के महज 13 दिन बाद ही इसकी सड़क दो जगहों पर धंस गई है। 13 जुलाई को शुरू हुए इस एक्सप्रेसवे पर करीब 9 मीटर हिस्से में सड़क बैठ गई, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। उन्नाव से लखनऊ जाने वाली लेन में कोरारी के पास सड़क धंसने से गहरे गड्ढे बन गए हैं। लगातार बारिश के कारण इन गड्ढों में पानी भर गया है, जिससे वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा इसी लेन में टोल प्लाजा से करीब एक किलोमीटर पहले भी सड़क का लगभग 8 फीट हिस्सा धंस गया है।

शुरू हुआ मरम्मत का काम

एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कंपनी पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर ने क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। साथ ही, हादसों से बचाव के लिए प्रभावित जगहों पर बैरिकेड्स लगाकर वाहनों को सावधानी से गुजरने की सलाह दी जा रही है।

4200 करोड़ की लागत से बना था एक्सप्रेसवे

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया है। इसे ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन (AIMGC) तकनीक से तैयार किया गया था। दावा किया गया था कि अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत में इस तकनीक से बनने वाला यह पहला एक्सप्रेसवे है। हालांकि, पहली ही मानसूनी बारिश में सड़क पर आई खराबी ने इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 45 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड सेक्शन में किलोमीटर संख्या 64.200 के पास कई मीटर तक सड़क की डामर परत उखड़ गई है। इस क्षतिग्रस्त हिस्से के वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण ग्रीनफील्ड सेक्शन के कई हिस्सों में डामर उखड़ने की शिकायत सामने आई है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

इससे पहले भी एक्सप्रेसवे के किनारों पर कई जगह मिट्टी का कटाव देखने को मिला था। वहीं, अचलगंज के पास अप्रोच रोड का एक हिस्सा भी धंस गया था। कई स्थानों पर मरम्मत के लिए किए गए पैचवर्क की वजह से सड़क पहले जैसी समतल नहीं रह गई है। वाहन चालकों का कहना है कि पुलों और पुलियाओं पर बने एक्सपेंशन जॉइंट्स से गुजरते समय तेज झटके महसूस हो रहे हैं। एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट मैनेजर वी. कुंडू ने बताया कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कुछ जगहों पर सड़क को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि मरम्मत का काम तेजी से किया जा रहा है। उनके मुताबिक, नया एक्सप्रेसवे होने के कारण शुरुआती दौर में इस तरह की छोटी-मोटी दिक्कतें असामान्य नहीं हैं और फिलहाल यातायात सामान्य रूप से जारी है।

वलसाड में 16 घंटे में 1100 मिमी बारिश, भारत के इतिहास की तीसरी सबसे ज्यादा, डूबी हुईं ये कारें दिखा रहीं भयावहता

Valsad Heavy Rain: गुजरात में गुरुवार को जारी मूसलाधार बारिश के कारण कई जिलों में भीषण बाढ़ की स्थिति बन गई है। इसमें वलसाड जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) के मुताबिक वलसाड जिले के उमरगाम में गुरुवार सुबह तक महज 16 घंटे में करीब 1100 मिमी बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक वलसाड जिले के अन्य तालुकाओं में भी इसी अवधि में 600 मिमी से अधिक पानी बरसा है।

देश के इतिहास में 24 घंटे की तीसरी सबसे ज्यादा बारिश

IMD द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वलसाड जिले के उमरगाम में दर्ज यह बारिश देश के इतिहास में 24 घंटे के भीतर दर्ज की गई तीसरी सबसे अधिक बारिश है।

भारत में 24 घंटे की सबसे ज्यादा बारिश के शीर्ष रिकॉर्ड:

  • सोहरा: 16 जून 1995 को 1563.3 मिमी
  • अमीनीदिवी: 6 मई 2004 को 1168.5 मिमी
  • उमरगाम, वलसाड: 23 जुलाई 2026 को 1064 मिमी (करीब 1100 मिमी)
  • वलसाड जिले में लगातार दूसरे दिन यह असाधारण बारिश दर्ज की गई है। इससे ठीक एक दिन पहले, 22 जुलाई 2026 को वलसाड के कपराड़ा में 417 मिमी बारिश हुई थी।

वापी से सामने आया वायरल वीडियो, 50 से अधिक कारें डूबीं

वलसाड जिले के वापी कस्बे से तबाही की एक भयावह तस्वीर और वायरल वीडियो सामने आया है। किसी पास की इमारत की ऊपरी मंजिल से बनाए गए वीडियो में इलाके का भयानक मंजर देखा जा सकता है। एक रिहायशी इलाके के पार्किंग एरिया में पानी भरने से 50 से अधिक कारें लगभग पूरी तरह पानी में डूब गईं। बाढ़ का पानी इतना ज्यादा बढ़ गया कि खड़ी गाड़ियों की खिड़कियों तक पहुंच गया। आसपास की सड़कें और पूरा इलाका जलमग्न दिखाई दिया। यहां नीचे देखिए वो भयानक मंजर-

उफान पर नदियां, हजारों लोग शिफ्ट किए गए

भीषण बारिश की वजह से वलसाड की औरंगा, पार और दमन गंगा नदियां उफान पर आ गईं। इससे कई निचले इलाकों में पानी भर गया। पानी का स्तर तेजी से बढ़ने पर प्रशासन ने हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। एहतियात के तौर पर सूरत शहर के संवेदनशील इलाकों से 2,200 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

5 जिलों में रेड अलर्ट

मौसम विभाग (IMD) ने गुरुवार और शुक्रवार को अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान जताते हुए वलसाड, नवसारी, डांग, सूरत और तापी जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बारिश से प्रभावित जिलों में स्थिति पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन के साथ राहत कार्यों के समन्वय के लिए कई मंत्रियों को तैनात किया है।

Delhi Weather Update: दिल्ली-NCR में भारी बारिश और ठंडी हवाओं से मौसम हुआ सुहावना, कई इलाकों में भरा पानी

Delhi Weather Update: मंगलवार, 7 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में मानसून ने आखिरकार अपना असर दिखाई ही दिया। दोपहर में अचानक से काले बादल छा जाने के कारण मौसम सुहावना हो गया। जिसके बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम समेत एनसीआर के कई इलाकों में ठंडी हवाओं के साथ भारी बारिश देखने को मिली। बता दें कि पिछले कुछ दिनों से उमस भरी गर्मी से परेशान दिल्लीवासियों को इस बारिश ने बड़ी राहत दी है।

वहीं, भारी बारिश से दिल्ली NCR के कई सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई। जिससे लोगों का आना जाना मुश्किल हो गया है, साथ ही वाहनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा है।

ईस्ट ऑफ कैलाश इलाके में गाड़ियों पर गिरा पेड़

तेज हवाओं के बीच दिल्ली के अमर कॉलोनी थाना क्षेत्र के ईस्ट ऑफ कैलाश इलाके में एक बड़ा पेड़ गाड़ियों पर गिर गया है। इस घटना में कम से कम 4-5 गाड़ियों को नुकसान हुआ है। हालांकि, इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन गाड़ियों के मालिकों को बड़ा नुकसान हुआ है।

गुरुग्राम में बारिश से जलभराव

गुरुग्राम में मूसलाधार बारिश ने उमस भरी गर्मी से राहत दी है। यहां के कई इलाकों में बारिश की वजह से पानी भर गया है। जिससे वाहनों की रफ्तार पर असर पड़ा है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिन आंधी-बारिश की वजह से तापमान में गिरावट आ सकती है। जिससे लोगों को गर्मी से राहत रहेगी। बता दें कि पिछले करीब हफ्तेभर से हल्की वर्षा और आसमान में बादल छाए रहने के साथ तेज धूप की वजह से उमस भरी गर्मी का असर बना हुआ है।

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Mumbai Rains Tracker: मुंबई में बरस रही आफत, लोनावाला में 2 दिन में ही महीने भर की बारिश! पवई में 7 फीट का मगरमच्छ भी आया बाहर

Mumbai Rains Update: महाराष्ट्र में मॉनसून की भारी बारिश का कहर लगातार जारी है। सोमवार को हुई मूसलाधार बरसात ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया और राज्य भर में परिवहन व्यवस्था को ठप कर दिया। कई क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। इससे लोगों और यात्रियों के सामने बड़े संकट खड़े हो गए हैं। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार के लिए मुंबई में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और भारी बारिश की चेतावनी दी है। मौसम विभाग के मुताबिक मुंबई में अगले दो से तीन दिनों के भीतर ही पूरे महीने की औसत बारिश होने की संभावना है।

लोनावाला में 2 दिन में 1290 mm बारिश, बना ऐतिहासिक रिकॉर्ड

मौसम विभाग (IMD) के नाउकास्ट के मुताबिक मशहूर हिल स्टेशन लोनावाला में पिछले 48 घंटों में चौंकाने वाली रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। लोनावाला में महज दो दिनों के भीतर ही रिकॉर्ड 1290 मिमी बारिश दर्ज की गई। यहां 5 जुलाई को 670 मिमी और अगले दिन 6 जुलाई को 620 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग का कहना है कि इस हिल स्टेशन ने सिर्फ दो दिनों में लगभग दो महीने के बराबर की बारिश दर्ज की है।

पवई झील के पास रिहायशी इलाके में घुसा 7 फीट का मगरमच्छ

भारी बारिश के बीच मुंबई के पवई झील के पास स्थित मोरारजी नगर में एक दरगाह के पास करीब सात फीट लंबा मगरमच्छ देखा गया। इससे स्थानीय निवासियों में भारी हड़कंप और दहशत मच गई। सूचना मिलने के बाद वन विभाग और एक बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर लिया। पकड़े गए मगरमच्छ की फिलहाल मेडिकल जांच की जा रही है और स्वास्थ्य जांच पूरी होने के बाद उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।

हादसों में गई कई जान, मानखुर्द में गिरी 4 मंजिला इमारत

मुंबई में खराब और भीषण मौसम के कारण कई लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है। मानखुर्द इलाके में एक चार मंजिला इमारत ढह गई। इसके मलबे में दबने से छह लोगों की मौत हो गई। पूरे शहर में पेड़ गिरने से संबंधित 200 से अधिक घटनाएं सामने आईं हैं। इनमें दो लोगों की जान चली गई। अगर पिछले पांच दिनों की बात करें तो मुंबई में काफी भारी बारिश हुई है। पुराने मुंबई के कोलाबा क्षेत्र में पहले ही अपनी मासिक औसत 744.2 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है। सांताक्रूज वेधशाला ने 805.6 मिमी बारिश दर्ज की है। ये जुलाई महीने की कुल औसत बारिश का लगभग 94 प्रतिशत है।

मुंबई एक्सप्रेसवे पर बंद हुआ था ट्रैफिक, अब लिंक रोड बहाल

महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के मुताबिक लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भूस्खलन होने की वजह से सोमवार को पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे और पुराने पुणे-मुंबई हाईवे दोनों पर यातायात को सस्पेंड कर दिया गया था। बाद में सड़कों से मलबे को साफ करने के बाद अधिकारियों ने ‘पुणे-मुंबई कनेक्टिंग लिंक रोड’ पर वाहनों की आवाजाही को दोबारा बहाल कर दिया है। इसके बावजूद मूसलाधार बारिश के चलते मुंबई महानगरीय क्षेत्र (MMR) में भारी जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है।

ठाणे, कल्याण समेत उत्तरी उपनगरों में हाई अलर्ट

मौसम विभाग के ताजा नाउकास्ट के अनुसार, मुंबई महानगरीय क्षेत्र (MMR) के उत्तरी हिस्सों के लिए हाई अलर्ट जारी किया गया है। कांदिवली, बोरीवली, वसई, विरार, ठाणे और कल्याण में तेज हवाओं के साथ अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मुंबई के इन उत्तरी उपनगरों में भारी बौछारें तेज होने के कारण निचले इलाकों में गंभीर जलभराव की आशंका जताई गई है। इससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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