Happy Dussehra 2026 Wishes: विजयादशमी पर अपनों को भेजें ये 15 बेस्ट बधाई संदेश, कोट्स और WhatsApp स्टेटस

Happy Dussehra 2026 Wishes: असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक महापर्व विजयादशमी (दशहरा) इस साल देश भर में पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के मुताबिक साल 2026 में उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में मुख्य दशहरा पर्व 20 अक्टूबर मंगलवार को मनाया जा रहा है, जबकि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में दुर्गा पूजा की स्थानीय परंपराओं और उदयातिथि के आधार पर 21 अक्टूबर बुधवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। त्योहारों के इस पावन अवसर पर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं भेजकर सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। अगर आप भी अपने परिवार, दोस्तों और प्रियजनों को व्हाट्सएप, फेसबुक या इंस्टाग्राम के जरिए बेहतरीन बधाई संदेश भेजना चाहते हैं तो यहां आपके लिए चुनिंदा शुभकामनाएं, कोट्स और स्टेटस दिए गए हैं।

विजयादशमी 2026: शुभ मुहूर्त और तिथियां

पंचांग के मुताबिक आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। श्रवण नक्षत्र का समय 19 अक्टूबर की दोपहर 3 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर की शाम 6 बजकर 2 मिनट तक रहा। उत्तर भारत में 20 अक्टूबर को अपराह्न काल में दशमी तिथि रहने के कारण मुख्य रूप से इसी दिन दशहरा मनाया जा रहा है, जबकि माता की विदाई परंपरा के अनुसार 21 अक्टूबर को होगी।

अपनों को भेजने के लिए 15 बेस्ट बधाई संदेश और शुभकामनाएं

1 – शुभ विजयादशमी! भगवान राम की कृपा से आपके जीवन में हमेशा अच्छाई की जीत हो और हर चुनौती में आपको सफलता मिले। आपको और आपके परिवार को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं!

2- Happy Dussehra! असत्य पर सत्य की विजय का यह पर्व आपके जीवन में नई रोशनी, सकारात्मकता और अपार खुशियां लेकर आए।

3- मां दुर्गा और भगवान श्री राम के आशीर्वाद से आपके घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो। आप सभी को विजयादशमी की बहुत-बहुत बधाई!

4 – आइए इस दशहरे पर अपने अंदर के अहंकार, क्रोध और बुराइयों का दहन करें और नेकी के मार्ग पर चलने का संकल्प लें। हैप्पी दशहरा 2026!

5- सफलता और समृद्धि की कामना: आपकी मेहनत रंग लाए और आपके जीवन में हर कार्य में सफलता व आर्थिक स्थिरता बनी रहे। आपको और आपके अपनों को दशहरा की शुभकामनाएं।

6- परिवार के लिए संदेश: मां दुर्गा और भगवान राम के आशीर्वाद से हमारा परिवार हमेशा एकजुट, खुशहाल और स्वस्थ रहे। आप सभी को विजयादशमी की मंगलकामनाएं!

7- धैर्य, सत्य और साहस ही मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत हैं। विजयादशमी का यह पवित्र पर्व आपके जीवन में नई शुरुआत लेकर आए।

8 – नया सवेरा, नई शुरुआत: पुरानी चिंताओं को पीछे छोड़कर विश्वास और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ें। आपको दशहरा की ढेरों बधाइयां!

9 – हर चुनौती एक नया अवसर लेकर आती है। भगवान राम आपको हर बाधा से लड़ने का साहस दें। Happy Dussehra 2026!

10 – आपके जीवन का हर अंधकार दूर हो और आपका भविष्य उम्मीदों और उजालों से जगमगा उठे। विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं!

WhatsApp Status के लिए

1 – अधर्म का नाश हो, धर्म की रक्षा हो, हर दिल में श्रीराम का वास हो। आप सभी को दशहरा की शुभकामनाएं!

2 – आपके और आपके परिवार के लिए यह पावन पर्व उत्तम स्वास्थ्य, सौभाग्य और ढेरों खुशियां लेकर आए। शुभ दशहरा!

3- रिश्तों में प्यार बढ़े, आपसी सौहार्द बना रहे और हर तरफ खुशहाली हो। विजयादशमी के इस पावन दिन पर यही कामना है।

4- हर बुराई को हराकार अच्छाई को अपनाने का दिन है दशहरा। आइए मिलकर इस पर्व को धूमधाम से मनाएं। Happy Vijayadashami!

5 – भगवान श्रीराम आपको बुद्धि, बल और पराक्रम प्रदान करें ताकि आप जीवन की हर कठिनाई पर विजय प्राप्त कर सकें। दशहरा की शुभकामनाएं!

प्रेरणादायक कोट्स (Inspirational Quotes for Dussehra)

  • सत्य को अपना मार्ग बनाएं और दयालुता को अपनी ताकत बनाएं।
  • भय जब आपका नियंत्रण छोड़ देता है, तभी वास्तविक साहस की शुरुआत होती है।
  • अहंकार और बुराई पर विजय पाना ही जीवन की सबसे बड़ी जीत है।
  • हर चुनौती इंसान को अंदर से मजबूत और बेहतर बनने का अवसर देती है।
  • आप इन संदेशों और कोट्स को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या मैसेजिंग ऐप्स के जरिए शेयर करके अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ इस पावन पर्व की खुशियां बांट सकते हैं।

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केरल की कार्तियानी अम्मा की कहानी से इंप्रेस आर माधवन ने पोस्ट किया Video, 96 साल की उम्र में लिटरेसी एक्जाम में हासिल किए 100 में 98 नंबर

कभी-कभी किसी की कहानी इतनी प्रेरणादायक होती है कि उनके जाने के लंबे समय बाद भी वो हमें इंस्पायर करती रहती है। ऐसा ही कुछ एक्टर आर माधवन के साथ भी हुआ है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर केरल की कार्तियानी अम्मा की कहानी शेयर की है। कार्तियानी अम्मा ने 96 साल की उम्र में लिटरेसी एग्जाम में 100 में से 98 नंबर लाकर सुर्खियां बटोरी थीं। एक्टर ने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर उनकी उप्लब्धि को सेलिब्रेट करते हुए एक वीडियो रीपोस्ट किया। कार्तियानी अम्मा का 2023 में 101 साल की उम्र में निधन हो गया

उनकी लिटरेसी एग्जाम की कहानी देर से पढ़ाई करने के अपने पक्के इरादे से इंस्पायर करती है। बॉलीवुड एक्टर आर माधवन ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर कार्तियानी अम्मा के शानदार सफर की तारीफ की। उन्होंने साबित किया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। एक्टर ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें बताया गया कि कैसे कार्तियानी अम्मा ने 96 साल की उम्र में लिटरेसी एग्जाम दिया और 100 में से शानदार 98 नंबर हासिल किए।

आर माधवन ने कार्तियानी अम्मा की इंस्पायरिंग कहानी शेयर की

माधवन के शेयर किए गए वीडियो में कार्तियानी अम्मा की अचीवमेंट को इस मैसेज के साथ हाईलाइट किया गया, “96 साल की उम्र में, केरल की कार्तियानी अम्मा ने 98/100 के साथ लिटरेसी एग्जाम में टॉप किया।” यह कहानी 2018 की है, जब कार्तियानी अम्मा ने केरल के अक्षरलक्षम लिटरेसी प्रोग्राम में हिस्सा लिया था।

अपने जीवन का ज्यादातर हिस्सा बिना औपचारिक शिक्षा के बिताने के बावजूद, उन्होंने नब्बे की उम्र में पढ़ना, लिखना और बेसिक मैथ्स सीखने का फैसला किया।

कार्तियानी अम्मा कौन थीं?

1922 में केरल के अलप्पुझा जिले के चेप्पड़ गांव में जन्मी कार्तियानी अम्मा एक ऐसे घर में पली-बढ़ीं जो पैसे की तंगी से जूझ रहा था। अपनी पीढ़ी की कई औरतों की तरह, उन्हें बचपन में स्कूल जाने का मौका नहीं मिला।

इसके बजाय, उन्होंने अपनी जिंदगी का ज्यादातर समय काम करने और अपने छह बच्चों को पालने में बिताया। कहा जाता है कि उन्होंने अपने परिवार का गुजारा करने के लिए घरेलू मदद और सड़क साफ करने वाली के तौर पर काम किया।

पढ़ाई में उनकी दिलचस्पी तब फिर से जागी जब उनकी 60 साल की बेटी ने एक लिटरेसी प्रोग्राम में एडमिशन लिया और सफलतापूर्वक परीक्षा पास की। अपनी बेटी की कामयाबी से प्रेरित होकर, कार्तियानी अम्मा ने खुद भी पढ़ाई करने का फैसला किया। उनके पोते-पोतियों और परपोते-परपोतियों ने उन्हें पढ़ने, लिखने और मैथ्स की प्रैक्टिस करने में मदद की।

96 साल की उम्र में 98 अंक हासिल किए

2018 में, कार्तियानी अम्मा केरल स्टेट लिटरेसी मिशन अथॉरिटी के तहत हुई एक साक्षरता परीक्षा में शामिल हुईं। इस परीक्षा में 40,000 से ज्यादा उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। 96 साल की उम्र में, उन्होंने 100 में से 98 मार्क्स हासिल किए। उन्हें 2019 में कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग के लिए गुडविल एंबेसडर भी बनाया गया और उन्हें मशहूर नारी शक्ति पुरस्कार मिला।

कार्तियानी अम्मा का निधन कब हुआ?

कार्तियानी अम्मा का अक्टूबर 2023 में 101 साल की उम्र में निधन हो गया। हालांकि वह अब जीवित नहीं हैं, लेकिन उनकी कहानी को पक्के इरादे और जिंदगी भर सीखने की मिसाल के तौर पर याद किया जाता है।

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‘सुमो दीदी’ का ट्रेलर जारी, 23 अक्टूबर को होगी रिलीज

हिंदी जी5 ने भारत की पहली पेशेवर महिला सुमो पहलवान हेतल दवे के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सुमो दीदी’ का ट्रेलर जारी कर दिया है। जयंत रोहतगी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में श्रीयम भगनानी मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म 23 अक्टूबर को हिंदी जी5 पर स्ट्रीम होगी।

फिल्म में हेतल दवे के संघर्ष, दृढ़ संकल्प और सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देकर अपनी पहचान बनाने की कहानी दिखाई गई है। फिल्म में चैतन्य शर्मा, अनुभा फतेहपुरिया, नितेश पांडे, राघव धीर और मीनल कपूर भी अहम भूमिकाओं में हैं।

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जियो स्टूडियोज, फ्रेश लाइम फिल्म्स और मॆथ एंटरटेनमेंट नेटवर्क्स के बैनर तले बनी इस फिल्म की शूटिंग जापान, कोलकाता और मुंबई में हुई है। यह फिल्म टोक्यो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और पाम स्प्रिंग्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है।

निर्देशक जयंत रोहतगी ने कहा कि यह फिल्म केवल सुमो पहलवान बनने की कहानी नहीं, बल्कि अपनी पहचान और ताकत पर भरोसा करने तथा सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने की प्रेरणादायक कहानी है। श्रीयम भगनानी ने कहा कि हेतल दवे का किरदार निभाना उनके लिए शारीरिक और भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण अनुभव रहा। वहीं, हेतल दवे ने उम्मीद जताई कि उनकी कहानी लोगों को खुद पर विश्वास करने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी।

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Maharaja Agrasen Jayanti: कौन थे महाराजा अग्रसेन? 5000 साल पहले दी थी ऐसी न्यायनीति, जानकर रह जाएंगे हैरान

Maharaja Agrasen Jayanti: कौन थे महाराजा अग्रसेन? 5000 साल पहले दी थी ऐसी न्यायनीति, जानकर रह जाएंगे हैरान

Who was Maharaja Agrasen, Learn about his principles of justice

Maharaja Agrasen Jayanti 2026: भारत के महान लोकनायक एवं महाराजा अग्रसेन की जयंती 11 अक्टूबर, रविवार 2026 को मनाई जाएगी। हिन्दू पंचांग के अनुसार, उनका जन्म आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को हुआ था। महाराजा अग्रसेन समानता पर आधारित आर्थिक नीति को अपनाने वाले संसार के प्रथम सम्राट थे। महाराजा अग्रसेन को समाजवाद का अग्रदूत भी कहा जाता है। महाराजा अग्रसेन की न्यायनीति प्राचीन भारत के इतिहास में सबसे अनोखी, मानवीय और प्रेरणादायक मानी जाती है। आइए जानते हैं महाराजा अग्रसेन की न्यायनीति और उनके जीवन के बारे में विस्‍तार से…

 

कौन थे महाराजा अग्रसेन?

महाराजा अग्रसेन का जन्म सूर्यवंशी क्षत्रिय राजा वल्लभ सेन के यहां हुआ था जो प्रतापनगर के राजा थे। मान्यता के अनुसार इनका जन्म मर्यादा पुरुषोतम भगवान श्रीराम की 34वीं पीढ़ी में द्वापर के अंतिमकाल और कलियुग के प्रारंभ में आज से 5000 वर्ष पूर्व हुआ था।

 

यह भी कहा जाता है कि उनका जन्म विक्रम संवत प्रारंभ होने के करीब 3130 साल पहले हुआ था। कहते हैं कि महाभारत के युद्ध के समय महाराज अग्रसेन 15 वर्ष के थे। महाराज अग्रसेन ने 108 वर्षों तक राज किया। उनके 18 पुत्र हुए जिनसे 18 गोत्र चले। गोत्रों के नाम गुरुओं के गोत्रों पर रखे गए।

 

‘1 रुपया और 1 ईंट’ का स्वर्णिम सिद्धांत

महाराजा अग्रसेन की न्यायनीति का सबसे बड़ा स्तंभ उनकी सामाजिक सहायता प्रणाली थी। जब भी कोई नया परिवार उनके राज्य (अग्रोहा) में आकर बसता था तो राज्य का प्रत्येक नागरिक उसे 1 रुपया और 1 ईंट भेंट करता था।

इसका उद्देश्‍य यह था कि 1 ईंट से वह व्यक्ति अपने रहने के लिए घर बना लेता था और रुपयों से अपना व्यापार शुरू कर पाता था। इस व्यवस्था से कोई भी व्यक्ति असहाय या गरीब रहकर अपराध (जैसे चोरी या लूट) की ओर प्रवृत्त नहीं होता था। उन्होंने समाज से असमानता मिटाकर अपराध की संभावना को ही समाप्त कर दिया था।

 

अहिंसात्मक एवं सुधारात्मक दंडनीति

महाराजा अग्रसेन शारीरिक हिंसा, मृत्युदंड या कठोर कारावास के घोर विरोधी थे। यदि कोई नागरिक पहली बार कोई अपराध या गलती करता था, तो उसे तुरंत कठोर दंड देने के बजाय सुधरने का अवसर दिया जाता था। दंड ऐसा होता था जिससे अपराधी में पश्चाताप की भावना जागे, न कि प्रतिशोध की।

महाराजा अग्रसेन का न्याय केवल अपराध की सजा देने तक सीमित नहीं था, बल्कि अपराध की जड़ (गरीबी और लाचारी) को समाप्त करने और समाज में समानता स्थापित करने पर केंद्रित था।

 

आर्थिक समानता और स्वाभिमान

महाराजा अग्रसेन ने अपने राज्य में ऐसी व्यवस्था बनाई थी जहां कोई भी व्यक्ति याचक (भिखारी) न बने। उनका मानना था कि किसी को बिना काम किए दान देना उसके स्वाभिमान को चोट पहुंचाता है। इसलिए उन्होंने ऐसी नीति बनाई जिससे हर व्यक्ति को व्यापार या कृषि का साधन मिले और वह स्वाभिमान से अपनी जीविका चला सके।

 

प्रजातांत्रिक एवं लोकतांत्रिक न्याय

महाराजा अग्रसेन ने राजतंत्र में भी लोकतांत्रिक सिद्धांतों को लागू किया। उन्होंने राज्य को 18 प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित किया था और 18 यज्ञों के माध्यम से 18 गोत्रों की स्थापना की। निर्णय अकेले राजा द्वारा नहीं, बल्कि गणराज्य के प्रतिनिधियों और गुरुओं की सलाह व सहमति से निष्पक्ष रूप से लिए जाते थे।

 

राजा और प्रजा के बीच विश्वास

उनकी न्यायनीति इतनी पारदर्शी और लोककल्याणकारी थी कि प्रजा को कभी अदालती चक्करों या शोषण का सामना नहीं करना पड़ता था। राज्य में विश्वास और बंधुत्व का वातावरण था, जिससे अपराध दर न के बराबर थी।

महाराजा अग्रसेन की न्यायनीति केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह कल्याणकारी राज्य और व्यवहारिक समाजवाद का पहला ऐतिहासिक उदाहरण थी, जहां न्याय का अर्थ समाज के हर व्यक्ति को बराबरी का अवसर और सम्मान देना था।

 

पशु हिंसा पर प्रतिबंध

उन्होंने अपने राज्य में यज्ञों में दी जाने वाली बलि और पशु हिंसा पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया था। उनका मानना था कि जीव हत्या अन्याय है।

 

महाराज अग्रसेन के मुख्‍य 3 आदर्श

महाराज अग्रसेन ने एक ओर हिन्दू धर्मग्रंथों में वैश्य वर्ण के लिए निर्देशित कर्मक्षेत्र को स्वीकार किया और दूसरी ओर देशकाल के परिप्रेक्ष्य में नए आदर्श स्थापित किए। उनके जीवन के मूल रूप से 3 आदर्श हैं- लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था, आर्थिक समरूपता एवं सामाजिक समानता।

‘द साइकिल ऑफ लव’ के लंदन प्रीमियर में पहुंचीं एली अवराम

अभिनेत्री एली अवराम हाल ही में ‘द साइकिल ऑफ लव’ के लंदन प्रीमियर में शामिल हुईं। यह डॉक्यूमेंट्री भारतीय कलाकार पीके महानंदिया और स्वीडिश महिला लोट्टा की सच्ची प्रेम कहानी पर आधारित है।

एली ने कहा कि उनके लिए लंदन स्क्रीनिंग महज एक फिल्म समारोह नहीं, बल्कि उस परिवार से अपने पुराने जुड़ाव को महसूस करने का अवसर था। उन्होंने बताया कि वह इस परिवार को कई वर्षों से जानती हैं और उनकी कहानी से गहरा जुड़ाव महसूस करती हैं।

एली ने कहा, “पीके और लोट्टा की कहानी बहुत प्रेरणादायक है और दुनिया को इसे जरूर सुनना चाहिए। यह कहानी आपके दिल में इतनी उम्मीद भर देती है कि आपको प्यार और इंसानियत की ताकत पर विश्वास होने लगता है।

‘द साइकिल ऑफ लव’ पीके महानंदिया के असाधारण जीवन और अपने प्रेम तक पहुंचने के उनके जुनून को दर्शाती है। लोट्टा के भारत से स्वीडन लौटने के बाद पीके ने उनसे दोबारा मिलने का फैसला किया और भारत से स्वीडन तक साइकिल से सफर किया। आज इस दंपति की शादी को 50 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

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न्यूयॉर्क में प्रियंका चोपड़ा द्वारा आयोजित स्क्रीनिंग के बाद लंदन प्रीमियर में शामिल होने को लेकर एली ने कहा, “मैं यहां आकर उनका समर्थन करने और उनकी कहानी से जुड़े इस खूबसूरत संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए बहुत खुश हूं।

एली ने कहा कि यह केवल किसी फिल्म की कल्पना नहीं, बल्कि वास्तविक प्रेम कहानी है। उन्होंने कहा, “उन्होंने सच में भारत से स्वीडन तक साइकिल से सफर किया था। आज उनकी शादी को 50 साल हो चुके हैं। यह पीके के मजबूत इरादे और लोट्टा तक पहुंचने के उनके संकल्प की खूबसूरत मिसाल है।

एली के लिए पीके और लोट्टा से व्यक्तिगत रूप से मिलना भी बेहद भावुक अनुभव रहा। उन्होंने कहा, “आखिरकार उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलना और आज भी उनके बीच उसी तरह का प्यार देखना बहुत भावुक करने वाला था। दुनिया को ऐसी और कहानियों की जरूरत है।

एली का इस कहानी से जुड़ाव कई वर्ष पुराना है। उन्होंने 2017 में उनकी किताब पढ़ी थी। स्वीडन की रहने वाली एली बचपन से ही भारत के प्रति आकर्षित रही हैं और लोट्टा के भारत से जुड़ाव में उन्हें अपने जीवन और सफर की झलक दिखाई देती है।

एली ने कहा, “2017 में जब मैंने उनकी किताब पढ़ी, तो लोट्टा और भारत के साथ उनके जुड़ाव ने मुझे बहुत प्रभावित किया। मैं खुद स्वीडन से हूं और बचपन से ही भारत की ओर आकर्षित रही हूं। इसलिए उनकी कहानी की कई बातें मुझे अपनी जिंदगी और अपने सफर से जुड़ी हुई लगती हैं।

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कब मनाई जाती है गुरु नानक देव की पुण्यतिथि? जानें उनके प्रेरणादायी प्रसंग और अनमोल विचार

कब मनाई जाती है गुरु नानक देव की पुण्यतिथि? जानें उनके प्रेरणादायी प्रसंग और अनमोल विचार

Learn about inspiring episodes and invaluable teachings of Guru Nanak Dev

Guru Nanak Dev Ji Punyatithi 2026: प्रति वर्ष अनुसार सिख धर्म के संस्थापक तथा सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी की पुण्यतिथि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 22 सितंबर को थी, लेकिन साल 2026 में तिथिनुसार उनकी पुण्यतिथि आश्विन कृष्ण दशमी तिथि के दिन भी मनाई जा रही है, जो कि 5 अक्‍टूबर, सोमवार को आ रही है। गुरु नानक देव जी धर्मगुरु, ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि, राष्ट्रप्रेम, एकता और शांति के प्रेरक, महान महापुरुष तथा सिख पंथ के प्रथम गुरु एवं संस्थापक थे। आइए, जानते हैं गुरु नानक देव जी के प्रेरणादायी प्रसंग और अनमोल विचार के बारे में विस्‍तार से… 

 

गुरु नानक देव के प्रमुख उपदेश और सिद्धांत

गुरु नानक देव जी धर्मगुरु, ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि, राष्ट्रप्रेम, एकता और शांति के प्रेरक, महान महापुरुष तथा सिख पंथ के प्रथम गुरु एवं संस्थापक थे। जब समाज में पाखंड, अंधविश्वास व कई असामाजिक कुरीतियां सिर उठाए खड़ी थीं, हर तरफ असमानता, छुआछूत व अराजकता का वातावरण जोरों पर था, ऐसे नाजुक समय में गुरु नानक देव ने आध्यात्मिक चेतना जाग्रत कर समाज को मुख्यधारा में लाने का कार्य किया। 

 

गुरु नानक देव ने की सिख धर्म की स्थापना

गुरु नानक देव ने जहां सिख धर्म की स्थापना की, वही उदारवादी दृष्टिकोण से सभी धर्मों की अच्छाइयों को भी समाहित किया। उन्होंने अपने समय के भारतीय समाज में व्याप्त कुप्रथाओं, अंधविश्वासों, पुरानी रुढ़ियों और पाखंडों को दूर करते हुए प्रेम, सेवा, परिश्रम, परोपकार और भाईचारे की दृढ़ नींव पर सिख धर्म की स्थापना की। उनका मुख्य उपदेश था, ईश्वर एक है, हिन्दू-मुसलमान सभी एक ही ईश्वर की संतान हैं, ईश्वर के लिए सभी समान हैं और उसी ने सबको बनाया है।

 

गुरु नानक देव के अनमोल विचार

गुरु नानक देव जी कहते थे कि हमें हमेशा लोभ का त्याग करना चाहिए और मेहनत से अपना धन कमाकर जीवन जीना चाहिए। हमेशा तनाव मुक्त रहकर हमें अपने कर्म को निरंतर करते रहना चाहिए और हमेशा खुश रहना चाहिए। धन को कभी भी अपने ह्रदय से लगाकर नहीं रखना चाहिए, उसका स्थान हमेशा जेब में ही होना चाहिए। तभी आप लालच और अहंकार से दूर रह पाएंगे। 

 

गुरु नानक देव कहते हैं हर मनुष्य को सबसे पहले खुद की बुराइयों और गलत आदतों पर विजय पाने की कोशिश करनी चाहिए। हर इंसान को हमेशा अच्छे और विनम्र सेवाभाव से अपना जीवन गुजारना चाहिए, क्योंकि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है, अत: मनुष्य को अहंकार नहीं करना चाहिए।

 

गुरु नानक देव ने की 4 लंबी यात्राएं

गुरु नानक देव जी ने सत्य और मानवता के प्रचार के लिए लगभग 24 वर्षों तक चार दिशाओं में हजारों किलोमीटर की पैदल यात्राएं कीं, जिन्हें उदासी कहा जाता है। इन यात्राओं में उनके साथ उनके मुस्लिम साथी और संगीतकार भाई मरदाना (जो रबाब बजाते थे) भी रहते थे।

 

अंतिम समय और करतारपुर साहिब

अपनी यात्राओं के बाद गुरु नानक देव जी ने रावी नदी के तट पर करतारपुर (वर्तमान पाकिस्तान) नगर बसाया और एक किसान के रूप में जीवन व्यतीत किया।

गांधी जयंती 2026: भारत और दुनिया के लिए क्यों खास है यह दिन? जानें इस दिन का विशेष महत्व

गांधी जयंती 2026: भारत और दुनिया के लिए क्यों खास है यह दिन? जानें इस दिन का विशेष महत्व

Why Gandhi Jayanti is significant for India and the world

Gandhi Jayanti 2026: हर साल 2 अक्टूबर को पूरे भारत और दुनियाभर में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है गांधी जयंती। यह दिन भारत के राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (महात्मा गांधी) की जयंती का प्रतीक है। राष्ट्र निर्माण में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के योगदान और उनकी अहिंसावादी विचारधारा के सम्मान में इस दिन को भारत में राष्ट्रीय अवकाश (National Holiday) के रूप में मनाया जाता है। महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। आइए जानते हैं भारत समेत दुनियाभर के लिए क्यों खास है यह दिन और क्‍या है इस दिन का विशेष महत्व…

 

इतिहास और पृष्ठभूमि

अंतरराष्‍ट्रीय अहिंसा दिवस

15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 2 अक्टूबर को ‘अंतरराष्‍ट्रीय अहिंसा दिवस’ (International Day of Non-Violence) के रूप में घोषित किया। तब से यह दिन वैश्विक स्तर पर अहिंसा के संदेश को फैलाने के लिए मनाया जाता है।

 

गांधी जी के मुख्य सिद्धांत

गांधी जी का जीवन और उनके विचार पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत हैं। किसी भी परिस्थिति में हिंसा का सहारा न लेना और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना। सत्य के मार्ग पर अडिग रहकर अन्याय और अत्याचार का विरोध करना।

 

साधारण जीवन व्यतीत करना, स्वदेशी (देश में बनी वस्तुओं) को अपनाना और आत्मनिर्भरता (खादी) को बढ़ावा देना। समाज में समानता लाना और दलितों व वंचितों (जिन्हें वे ‘हरिजन’ कहते थे) के अधिकारों के लिए लड़ना।

 

कैसे मनाई जाती है गांधी जयंती?

नई दिल्ली स्थित गांधी जी की समाधि ‘राजघाट’ पर देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य नेता प्रार्थना सभा में भाग लेते हैं और श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। इस दिन गांधी जी के प्रिय भजन जैसे ‘रघुपति राघव राजा राम’ और ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ का गायन किया जाता है।

 

भारत सरकार गांधी जयंती के अवसर पर विशेष स्वच्छता अभियानों (जैसे ‘स्वच्छ भारत अभियान’) का आयोजन करती है, क्योंकि गांधी जी स्वच्छता को ईश्वर की भक्ति के समान मानते थे। शैक्षणिक संस्थानों में निबंध प्रतियोगिताएं, वाद-विवाद, नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

 

गांधी जयंती का महत्व

गांधी जयंती केवल एक महापुरुष का जन्मदिन मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमें उनके बताए रास्ते (शांति, सत्य, अहिंसा और सौहार्द) पर चलने का संकल्प लेने की याद दिलाता है। आज के दौर में जब दुनिया विभिन्न तरह के तनावों से जूझ रही है, गांधी जी के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।

Viral Post: ‘कभी खाने को थे मोहताज…’ एक फैसले ने बदल दी जिंदगी, अब शख्स बना रहा अपने ‘सपनों का महल’

सोशल मीडिया पर एक युवक के प्रेरणादायक सफर को लेकर किया गया पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में व्यक्ति ने बताया कि 900 रुपये का स्कूल टूर भी न कर पाने वाला एक छात्र आज केंद्र सरकार में नौकरी कर रहा है। व्यक्ति के पुराने क्लासमेट अंकित पांडे ने सोशल मीडिया पर उनकी कहानी शेयर की है। उन्होंने बताया कि कभी उसके परिवार के लिए स्कूल का खर्च उठाना भी काफी मुश्किल था। लेकिन उन्होंने इस मुश्किल हालात के बावजूद पढ़ाई नहीं छोड़ी और एसएससी सीजीएल परीक्षा पास करके अपनी जिंदगी बदल दी। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

नहीं थे स्कूल टूर के लिए पैसे

एक्स पर एक पोस्ट में यूजर अंकित पांडे ने लिखा, “एक समय मेरे स्कूल के क्लासमेट के पास स्कूल टूर के लिए 900 रुपये भी नहीं थे।” उन्होंने आगे बताया, “हम सभी अपने लंच बॉक्स में अलग-अलग तरह का खाना लाते थे, लेकिन वह ज्यादातर अचार और रोटी लाता था। उसके पास पुरानी किताबें थीं, नया बैग भी नहीं था और वह हमेशा क्लास में सबसे शांत रहने वाला लड़का था।” पांडे के मुताबिक, उसके माता-पिता अपने बेटे की पढ़ाई जारी रखने के लिए मजदूरी करते थे।

पिता करते थे मजदूरी

पांडे ने लिखा, “उसके माता-पिता सिर्फ 4,000 रुपये की मासिक स्कूल फीस भरने के लिए मजदूरी करते थे। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने मुश्किल हालात का सामना किया, अपनी पढ़ाई जारी रखी और वो काम किया, जिसे कभी उनके लिए नामुमकिन माना जाता था। आखिरकार, उन्होंने एसएससी सीजीएल परीक्षा पास कर ली। आज वह केंद्र सरकार में नौकरी कर रहे हैं और अपना घर बना रहे हैं।” सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

पांडे ने कहा, “मैंने उसका सफर करीब से देखा है। स्कूल के लंच बॉक्स में अचार-रोटी लाने से लेकर आज अपना घर बनाने तक। जिंदगी ने उसे शुरुआत में बहुत कम दिया, लेकिन उसने आगे बढ़ने के लिए मेहनत करना कभी नहीं छोड़ा। कभी-कभी मेहनत सच में इंसान की पूरी जिंदगी बदल सकती है।”

लोगों ने किया कमेंट

एक यूजर ने कमेंट किया, “बहुत खूबसूरत कहानी है, अंकित। यह दिखाती है कि जब आपकी इच्छाशक्ति बाकी हर चीज से मजबूत होती है, तो आप किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं और जिंदगी में कुछ भी हासिल कर सकते हैं।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “मेहनत सब कुछ बदल सकती है।” वहीं, तीसरे यूजर ने कहा, “ये सफलता की ऐसी कहानी है, जो दिल को छू जाती है। अचार-रोटी से लेकर अपना घर बनाने तक का सफर वाकई खास है।”

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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‘जिंदगी मैराथन है, कोई 100 मीटर की दौड़ नहीं…’, एन चंद्रशेखरन की वो 4 बातें जो हर स्टूडेंट को जाननी चाहिए

N Chandrasekaran: ‘जिंदगी एक मैराथन दौड़ है, कोई 100 मीटर की स्प्रिंट नहीं। असली मकसद दूसरों से आगे निकलना नहीं, बल्कि खुद को हर दिन बेहतर बनाना है।’ यह प्रेरणादायक बात देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने चेन्नई के चेंगलपट्टू स्थित साई यूनिवर्सिटी के छात्रों को संबोधित करते हुए कही।

खुद 18 सालों से रनिंग का शौक रखने वाले चंद्रशेखरन ने खेल और जीवन के अनुभवों को जोड़ते हुए युवाओं को सफलता, AI के असर और जीवन के उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए बेहद खास मंत्र दिए। आइए आपको बताते हैं उनकी इस स्पीच के 4 सबसे बड़े टेकअवे और सबक।

‘उतार-चढ़ाव से मत डरो, आत्मविश्वास को अहंकार न बनने दो’

चंद्रशेखरन ने छात्रों को समझाते हुए कहा कि जिंदगी और खेल दोनों का नियम एक जैसा है। इसमें केवल जीतना मायने नहीं रखता, बल्कि तैयारी में पूरी ताकत झोंकना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘जीवन में उतार और चढ़ाव दोनों आएंगे। बुरे दौर से कभी मत डरो, और जब अच्छा दौर आए तो अपने आत्मविश्वास को कभी अहंकार में मत बदलने दो। इस पूरी यात्रा का आनंद लो।’

AI से नौकरियां जाने का डर? नए मौकों पर रखें नजर

आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और छंटनी की खबरों से डरे हुए युवाओं को उन्होंने ढांढस बंधाया। इस बाबत उन्होंने नकारात्मक खबरों से न घबराने की सलाह दी। एआई की वजह से नौकरियां खत्म होने की खबरें डरा सकती हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी हर दिन नई संभावनाएं पैदा कर रही है।

आने वाले 5 वर्षों में ऐसे नए सेक्टर्स और उद्योग सामने आएंगे, जिनके नाम और शब्दावली का अंदाजा भी आज हमें नहीं है। भारत इस समय बेहद मजबूत आर्थिक स्थिति में है और देश की ग्रोथ पूरी दुनिया के लिए मिसाल बनने वाली है।

‘दबाव झेलना एक विशेषाधिकार है’

कॉलेज खत्म करने के बाद करियर में मिलने वाले तनाव और प्रेशर पर बात करते हुए उन्होंने मशहूर टेनिस खिलाड़ी बिली जीन किंग की बात का जिक्र किया। ‘प्रेशर महसूस करने का अधिकार मिलना अपने आप में एक विशेषाधिकार है। पढ़ाई के बाद व्यावहारिक जीवन में दबाव आपकी जिंदगी का हिस्सा रहेगा, युवाओं को इस दबाव से डरने के बजाय इसका आनंद लेना सीखना चाहिए।’

सोशल मीडिया के दौर में युवाओं को 2 सलाह

लगातार सीखते रहें: कभी भी सीखना बंद न करें।

कंटेंट का सही चुनाव करें: सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करें। आप क्या पढ़ते हैं, क्या देखते हैं और क्या सुनते हैं इसका चुनाव बहुत सोच-समझकर करें।

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चक दे इंडिया, जूनियर पुरुष और महिला टीम बनी एशिया की सरताज

भारतीय जूनियर पुरुष और महिला टीम एशियाई हॉकी की सरताज बन गई जब रविवार को दोनों टीमों ने अपने अपने खिताबी मुकाबले में दक्षिण कोरिया और चीन को मात दे दी।भारतीय पुरुष टीम ने जहां इस खिताब को छठवीं बार अपने नाम किया तो वहीं महिला टीम के लिए यह खिताब तीसरी बार उनकी झोली में गिरा है।

भारत ने रविवार को फाइनल में कोरिया पर 4-1 से जीत से अपना पुरुष जूनियर एशिया कप खिताब बरकरार रखते हुए विश्व कप में जगह पक्की की।भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने रविवार को रोमांचक फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर एएचएफ जूनियर एशिया कप का खिताब बरकरार रखा और जूनियर महिला हॉकी विश्व कप के लिए भी क्वालीफाई किया।

खिताबी मुकाबले को जीतने के बाद हॉकी इंडिया ने सभी खिलाड़ियों के लिए 3 लाख रुपए इनामी राशी की घोषणा की और उनके सपोर्ट स्टाफ के लिए भी इनामी राशि की घोषणा की। पुरुष टीम के मुकाबले की बात करें तो मैच काफी एकतरफा रहा। भारत की ओर से अजीत यादव ने 9वें, अनमोल एक्का ने 13वें प्रभदीप सिंह ने 21वें और आशु मौर्या ने 50वें मिनट में गोल किया। दक्षिण कोरिया के लिए ली मिनयोक ने 54वें मिनट में गोल किया।

महिला टीम बिना एक मैच हारे जीती एशिया कप

भारतीय महिला टीम ने बिना एक मैच हारे एशिया कप पर कब्जा जमाया। टूर्नामेंट के पहले मैच में टीम ने दक्षिण कोरिया को 4-1 से हराया था। इसके बाद जापान और मलेशिया को क्रमश 7-0 और 11-1 से शिकस्त दी थी। लेकिन सबसे सुर्खियां बटोरने वाली जीत पाकिस्तान के खिलाफ आई जब टीम ने 19 गोलों से मैच जीता। हालांकि टीम ने चीन के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ खेला। हालांकि फाइनल में एक गोल से टीम ने मेजबान चीन के खिलाफ गोल दागकर खिताब अपने नाम कर लिया।

PM मोदी और शाह ने दी टीम को बधाई

पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘भारतीय हॉकी के लिए गर्व का क्षण। शानदार और अजेय अभियान के साथ एशिया कप का खिताब बरकरार रखने वाली हमारी जूनियर महिला हॉकी टीम को बधाई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पूरी टीम को मेरी शुभकामनाएं।’’मोदी ने एक अन्य पोस्ट में टीम को बधाई देते हुए कहा, ‘‘बधाई। यह वास्तव में एक शानदार उपलब्धि है।’

शाह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भारतीय हॉकी के ताज में एक और नगीना जुड़ गया! एशिया कप जीतने और पूरे देश को गर्व एवं खुशी का अवसर देने के लिए हमारी जूनियर महिला हॉकी टीम को हार्दिक बधाई।’’शाह ने अन्य पोस्ट में कहा, ‘‘एशिया कप जीतने वाली हमारी जूनियर पुरुष हॉकी टीम के लिए जोरदार तालियां। खेल में अपने जोश और शानदार प्रदर्शन के साथ आपने एक बार फिर भारतीय खेल भावना की असली क्षमता का प्रदर्शन किया है और दूसरों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है।’’