LPG Price Today: गैस सिलेंडर के ग्राहकों को बड़ी राहत! बुकिंग से पहले जानें आपके शहर में क्या है नया रेट

LPG Price Today 15 July 2026: अगर आप आज यानी 15 जुलाई को घरेलू एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर बुक कराने की योजना बना रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर जान लें। सरकारी तेल कंपनियों ने 15 जुलाई 2026 के लिए एलपीजी सिलेंडर की कीमतें जारी कर दी हैं। आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं किया गया है।

वहीं, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 1 जुलाई से पहले ही ₹183.50 की कटौती लागू की जा चुकी है, जिसका फायदा होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को मिल रहा है। भले ही आज की कीमतें स्थिर हैं। लेकिन व्यावसायिक उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं (जैसे होटल और रेस्तरां) को 1 जुलाई 2026 से प्रभावी ₹183.50 की बड़ी कटौती का सीधा लाभ मिल रहा है।

घरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) के ताजा रेट

दिल्ली- ₹942

नोएडा- ₹939.50

मुंबई- ₹941.50

कोलकाता- ₹968

पटना- ₹1,031.50

लखनऊ- ₹979.50

चेन्नई- ₹957.50

चंडीगढ़- ₹951.50

जयपुर- ₹945.50

हरियाणा- ₹943.50

असम- ₹991

कमर्शियल LPG सिलेंडर (19 किलोग्राम) के ताजा रेट

दिल्ली- ₹2,930

नोएडा- ₹2,930

मुंबई- ₹2,885.50

कोलकाता- ₹3,081.50

पटना- ₹3,227

लखनऊ- ₹3,052.50

चेन्नई- ₹3,106

चंडीगढ़- ₹2,954.50

जयपुर- ₹2,957.50

हरियाणा- ₹2,932

असम- ₹3,173.50

1 जुलाई को मिली थी राहत

घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में भले ही आज कोई बदलाव नहीं हुआ हो, लेकिन 1 जुलाई 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की गई थी। इससे होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत में कमी आई है।

कब बदलती हैं LPG की कीमतें?

सरकारी तेल कंपनियां आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। नई कीमतें तय करते समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, परिवहन लागत और अन्य परिचालन खर्चों को ध्यान में रखा जाता है।

अपने शहर का ताजा रेट कैसे देखें?

उपभोक्ता इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जाकर अपने शहर की एलपीजी कीमत देख सकते हैं। सिलेंडर बुकिंग के समय भी अपडेटेड कीमत दिखाई जाती है।

क्या अगले महीने बदल सकते हैं दाम?

फिलहाल, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें स्थिर हैं। हालांकि, अगले महीने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की स्थिति, डॉलर-रुपया रेट और सरकार की नीति की समीक्षा के बाद कीमतों में बढ़ोतरी या कटौती की घोषणा की जा सकती है। हाल ही में 1 जुलाई 2026 को तेल कंपनियों ने व्यावसायिक (Commercial) सिलेंडरों में ₹183.50 की बड़ी कटौती की थी, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी देखी गई थी।

यदि वैश्विक बाजार में यह राहत जारी रहती है, तो अगले महीने भी कीमतों में गिरावट या स्थिरता देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोबारा तनाव या सप्लाई की कमी होती है, तो मामूली बढ़ोतरी से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

US-Iran War News: होर्मुज को लेकर ट्रंप का बड़ा ऐलान! ईरानी जहाजों पर पूरी नाकाबंदी, शुल्क लगाने की धमकी से पीछे हटे

US-Iran War News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ईरान और खाड़ी क्षेत्र को लेकर कई बड़े ऐलान किए हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान को छोड़कर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी देशों के लिए खुला रहेगा। जबकि ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी नाकाबंदी लागू की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। जबकि 10 अन्य घायल हो गए। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार सुबह ईरान दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया और इन हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के दौरान ‘ए अल बहियाह’ और ‘एमटी मोम्बासा’ नाम के दो पोत पर हुए हमलों को लेकर बेहद चिंतित है।

टैरिफ वाले बयान से पीछे हटे

डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले माल पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की अपनी योजना से एक दिन बाद ही पीछे हटते हुए कहा कि इसके बजाय पश्चिम एशियाई देश अमेरिका के साथ निवेश और व्यापार समझौते करेंगे।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा. “पश्चिम एशिया के नेताओं के साथ अत्यंत सकारात्मक बातचीत के आधार पर मैंने 20 प्रतिशत अमेरिकी प्रतिपूर्ति शुल्क को उन व्यापार और निवेश समझौतों से बदलने का फैसला किया है। उन्हें विभिन्न खाड़ी देश अमेरिका में करेंगे।”

राष्ट्रपति ने कहा कि ये निवेश बहुत बड़े पैमाने पर होंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये उन नई प्रतिबद्धताओं से अलग होंगे या नहीं, जिनकी घोषणा ट्रंप ने पिछले साल पश्चिम एशिया यात्रा के बाद की थी।

ईरान का हिंसक दौर अब खत्म होगा?

ट्रंप ने दुनिया को भरोसा दिलाते हुए संकल्प लिया है कि अमेरिका, ईरान को कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने दावा किया है कि इन कड़े कदमों के बाद अब क्षेत्र में ईरान का हिंसक और आक्रामक दौर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

होर्मुज में हमले में एक भारतीय की मौत

भारत ने कमर्शियल पोत ‘एमटी अल बहिया’ और ‘एमटी मोम्बासा’ पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। उन पर कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। भारत ने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता लाने के लिए हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत व कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपनी अपील दोहराई।

संयुक्त अरब अमीरात के दो तेल टैंकरों पर हमले अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुए। ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद शुरू हुए संघर्ष में पश्चिम एशिया में 14 भारतीयों की मौत हो चुकी है।

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विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीय नागरिक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भारतीय मिशन हालात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। साथ ही प्रभावित भारतीय नाविकों को हर संभव मदद दिलाने के लिए खाड़ी देश के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं।

Viral News: पोते को संभालने की बजाय बॉयफ्रेंड से मिलने गई सास! गुस्साई बहू ने तोड़ दीं 4 पसलियां

Viral News: पूर्वी चीन (Eastern China) से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भारत के पड़ोसी देश में एक महिला ने अपनी बुजुर्ग सास पर इसलिए हमला कर दिया क्योंकि सास ने पोते-पोतियों की देखभाल करने के बजाय अपने बॉयफ्रेंड के साथ बाहर घूमने चली गई। इस हिंसक हमले में बुजुर्ग महिला की चार पसलियां टूट गईं। इस घटना ने सोशल मीडिया पर भारी गुस्सा पैदा कर दिया है। इस मामले ने पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना झेजियांग प्रांत के जियाक्सिंग शहर की है। इसे हाल ही में झेजियांग टेलीविजन द्वारा रिपोर्ट किया गया है। मामला तब और विवादित हो गया जब बेटे ने भी अपनी मां का साथ देने के बजाय पत्नी का समर्थन कर दिया। उसने कहा कि उसकी मां इसकी हकदार थी। इस घटना ने चीन में दादा-दादी की जिम्मेदारियों और बुजुर्गों के निजी जीवन को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

अलग शहरों में रहते थे पति-पत्नी: पीड़ित बुजुर्ग महिला का उपनाम ‘शेन’ है। वह अपने बेटे ‘जियाओ’ के दो बच्चों की देखभाल करती थीं। जबकि बेटा और बहू दोनों अलग-अलग शहरों में काम करते थे।

पति की मौत के बाद बदली जगह: पति के निधन के बाद, शेन अपना गृहनगर छोड़कर जियाक्सिंग में अपनी एक बेटी के साथ रहने आ गई थीं। विवाद तब शुरू हुआ जब एक बच्चे ने घर में लगे सर्विलांस कैमरे (CCTV) के जरिए अपनी मां को बताया कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है। उसकी दादी उसका तापमान (फीवर) भी नहीं नाप रही हैं। यह सुनकर मां घबरा गई और तुरंत हाई-स्पीड ट्रेन पकड़कर जियाक्सिंग पहुंची और सास से भिड़ गई।

‘बच्चों को संभालने से अच्छा तो मैं मर जाऊं…’

बहू के आरोपों पर सास शेन ने बाद में सफाई देते हुए कहा, “बच्चे को संभालना बहुत मुश्किल हो रहा था। उस वक्त उनके खुद के दांत में बहुत तेज दर्द था। जब बहू ने उन्हें अस्पताल ले जाने की बात कही, तो शेन ने मना कर दिया और कहा कि वह अपने बॉयफ्रेंड से मिलने जाना चाहती हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि बच्चों की देखभाल करने से बेहतर है कि मैं मर जाऊं।”

इसी बात पर दोनों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि बहू ने बुजुर्ग शेन पर हमला कर दिया। इससे उनके चेहरे पर गंभीर चोटें आईं और उनकी चार पसलियां फ्रैक्चर हो गईं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बच्चों की देखभाल को लेकर शेन पर बहू द्वारा हमला किए जाने की यह पहली घटना नहीं थी।

बेटे का चौंकाने वाला बयान

इस पूरे मामले ने तब और भी भयानक मोड़ ले लिया जब पीड़ित महिला के सगे बेटे (जियाओ) ने सार्वजनिक रूप से अपनी पत्नी का बचाव किया। बेटे ने अपनी ही मां को अनैतिक करार दिया। उसने कहा कि वह इस पिटाई के ही लायक थी, क्योंकि उसने अपने पोते-पोतियों को छोड़कर अपने अफेयर पर ध्यान देना चुना।

आर्थिक मदद की मांग: बेटे ने दलील दी है कि उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में उसकी मां को या तो बच्चों को पालने में मदद करनी चाहिए या फिर उसे पैसे (फाइनेंशियल सपोर्ट) देने चाहिए।

बेटियों ने किया मां का समर्थन

दूसरी तरफ, शेन की बेटियों ने अपने भाई और भाभी की इस हरकत का कड़ा विरोध किया है। बेटियों का कहना है कि उनकी मां ने सालों तक बेहद कम सैलरी पर एक सफाई कर्मचारी के रूप में काम किया है। इसलिए जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें एक साथी के साथ खुश रहने और अपनी जिंदगी जीने का पूरा हक है।

सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा

चीनी सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है। इस पर काफी बहस हो रही है। लोगों का कहना है कि दादा-दादी या नाना-नानी की यह कानूनी या नैतिक जिम्मेदारी नहीं है कि वे जबरन बच्चों की देखभाल करें। यूजर्स ने बुजुर्ग महिला के साथ हुई इस हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा की है।

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Siddharth Saxena: कौन हैं सिद्धार्थ सक्सेना? जिन्होंने 26 साल की उम्र में एक दिन में कमाए 76.99 करोड़ रुपये!

Who is Siddharth Saxena: इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इन दिनों एक भारतीय टेक एंटरप्रेन्योर की कहानी तेजी से वायरल हो रही है। इस शख्स का नाम है सिद्धार्थ सक्सेना। इन्होंने हाल ही में खुलासा किया है कि उन्होंने महज 26 साल की उम्र में एक ही दिन में 8 मिलियन डॉलर (करीब 76.99 करोड़ रुपये) की कमाई की थी। कंटेंट क्रिएटर विराज अला के साथ हुए एक स्ट्रीट इंटरव्यू में सिद्धार्थ ने भारत के एक छोटे से शहर से अमेरिका में मल्टी-मिलियन डॉलर की कंपनियां खड़ी करने तक के अपने इस शानदार सफर के बारे में खुलकर बात की है। आइए जानते हैं कि कौन हैं सिद्धार्थ सक्सेना और उन्होंने यह मुकाम कैसे हासिल किया।

IIT कानपुर से की पढ़ाई, बोले- हार्वर्ड से 20 गुना मुश्किल है एडमिशन

विराज अला को दिए इंटरव्यू में सिद्धार्थ सक्सेना ने अपनी पढ़ाई और करियर के बारे में कई दिलचस्प बातें साझा कीं। सिद्धार्थ ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर साइंस में बी. टेक की डिग्री हासिल की है। वह साल 2019 में आईआईटी कानपुर से ग्रेजुएट हुए थे। इंटरव्यू के दौरान सिद्धार्थ ने दावा किया कि आईआईटी कानपुर के कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में दाखिला पाना अमेरिका की प्रसिद्ध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलने से 20 गुना ज्यादा कठिन है।

एक दिन में ₹76.99 करोड़ की कमाई का सच

जब इंटरव्यूअर विराज अला ने सिद्धार्थ से पूछा कि उन्होंने एक साल में अधिकतम कितनी कमाई की है, तो सिद्धार्थ ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि उन्होंने एक ही दिन में 8 मिलियन डॉलर (लगभग 76.99 करोड़ रुपये) कमाए हैं। इस पर जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब यह है कि वह रातों-रात करोड़पति बन गए, तो उन्होंने कहा कि हां, कुछ ऐसा ही कह सकते हैं। उन्होंने महज 26 साल की उम्र में यह मुकाम हासिल कर लिया था। सिद्धार्थ ने बताया कि जब वह 16 साल के थे तब उन्होंने अपने भविष्य में इस तरह की सफलता की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की थी।

कैसा रहा है सिद्धार्थ का करियर और बिजनेस?

आईआईटी कानपुर से 2019 में पास आउट होने के बाद सिद्धार्थ ने मशीन लर्निंग इंजीनियर के रूप में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ काम किया। उनके करियर के सफर में Envestnet, Yodlee, Wadhwani AI जैसी कंपनियों और एल्टो यूनिवर्सिटी, जूमियो कॉर्पोरेशन जैसे संस्थान रहे।

Merlin और Thine के को-फाउंडर

नौकरी के बाद सिद्धार्थ ने एंटरप्रेन्योरशिप की राह चुनी। साल 2022 में सिद्धार्थ ने अपने आईआईटी कानपुर के बैचमेट्स प्रत्यूष राय और शीर्षेंदु सरकार के साथ मिलकर Merlin नाम की एक एआई-पावर्ड क्रोम एक्सटेंशन कंपनी की सह-स्थापना की। रिपोर्ट्स के मुताबिक आज इस कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 50 मिलियन डॉलर (करीब 418 करोड़ रुपये से अधिक) है। इसके अलावा सिद्धार्थ एक दूसरे स्टार्टअप Thine के भी को-फाउंडर हैं।

स्टार्टअप्स को लेकर क्या है उनकी सोच?

स्टार्टअप और बिजनेस को लेकर सिद्धार्थ का मानना है कि भारत में सीमित संसाधनों की वजह से बहुत से लोग स्कार्सिटी माइंडसेट (कमी की सोच/सुरक्षित चलने की मानसिकता) के साथ बड़े होते हैं। उनका कहना है कि सफल उद्यमी बनने के लिए इस मानसिकता को बदलकर अबंडेंस माइंडसेट (प्रचुरता की सोच) अपनाना बेहद जरूरी है, जहां लोग खुलकर जोखिम लेने और नए अवसरों की तलाश करने के लिए तैयार रहें।

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सिद्धार्थ ने दोनों देशों के वर्क-कल्चर की तुलना करते हुए कहा कि अमेरिका में लोग अक्सर काम को इसलिए चुनते हैं क्योंकि वे उसे पसंद करते हैं जबकि भारत में कई बार लोग मजबूरी या जरूरत की वजह से काम करते हैं।

E20 Petrol: एथेनॉल वाले पेट्रोल से इंजन खराब होता है या नहीं? IIT कानपुर की रिसर्च ने दिया बड़ा जवाब

E20 Petrol Row: देश भर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल (E20) के रोलआउट को लेकर वाहन मालिकों के मन में कई तरह की चिंताएं और सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एथेनॉल वाले पेट्रोल से गाड़ी का इंजन खराब हो जाता है? इस मामले पर चल रही तमाम बहसों और आशंकाओं के बीच देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर के रिसर्चर ने एक बड़ा और राहत देने वाला दावा किया है।

संस्थान के शोधकर्ताओं का कहना है कि उनकी स्टडी में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के माइलेज में कोई खास गिरावट नहीं पाई गई है। इस बात के भी कोई सबूत नहीं मिले हैं कि E20 फ्यूल मौजूदा या पुरानी गाड़ियों के इंजन को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाता है।

माइलेज पर क्या होता है असर? IIT कानपुर की रिसर्च

आपको बता दें कि हाल ही में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में माइलेज 5 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि इसके फायदे इस मामूली नुकसान से कहीं अधिक हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस पर आईआईटी कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के इंजन रिसर्च लेबोरेटरी के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट ध्रुव राज कराना ने बताया है कि आईआईटी कानपुर में की गई रिसर्च के मुताबित E20 फ्यूल के इस्तेमाल से माइलेज में होने वाली कमी वास्तव में 5 प्रतिशत से भी कम है।

ध्रुव राज कराना ने स्पष्ट किया कि माइलेज में आने वाली 5 प्रतिशत तक की यह कमी फ्यूल के अलावा दूसरी वजहों से भी हो सकती है। अगर सामान्य या शुद्ध पेट्रोल के साथ भी लगातार दो बार बैक टू बैक टेस्ट किए जाएं तब भी इस तरह के परिणाम आ सकते हैं।

माइलेज कम होने की असली वजह: IIT की स्टडी के मुताबिक माइलेज में होने वाला कोई भी बदलाव फ्यूल से ज्यादा ड्राइवर की ड्राइविंग के तरीके, सड़क की स्थिति और गाड़ी के मेंटनेंस पर निर्भर करता है।

क्या सच में खराब होता है इंजन?

प्रोजेक्ट साइंटिस्ट ध्रुव राज कराना ने बताया कि काफी डिटेल्ड और एक्सटेंसिव टेस्टिंग से यह साबित हुआ है कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से इंजन को कोई नुकसान, जंग या अन्य तकनीकी समस्याएं नहीं होती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियां खराब हो रही हैं।

कराना ने इन दावों को वैज्ञानिक रूप से निराधार बताया और गाड़ी चलाने वालों को सलाह दी कि वे इंटरनेट पर बिना किसी वेरिफिकेशन के साझा की जाने वाली पोस्ट पर भरोसा करने के बजाय अपनी गाड़ी के मैनुफैक्चरर के मैनुअल और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन करें।

E85 फ्यूल का भी हो चुका है सफल परीक्षण

आईआईटी कानपुर की यह रिसर्च प्रोफेसर अविनाश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में चल रही है। वो इस इंजन रिसर्च लेबोरेटरी के प्रमुख हैं। उनकी टीम लंबे समय से एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल पर व्यापक शोध कर रही है। टीम ने E85 फ्यूल (जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल होता है) का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। हालांकि ध्रुव राज कराना ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने उच्च स्तर के मिश्रण के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए इंजनों और उनके अनुकूल ईंधन प्रणालियों की जरूरत होती है।

मंत्रालय ने कहा- ‘यह अधिक स्वच्छ और बेहतर फ्यूल है’

एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम को लेकर हो रही आलोचनाओं का जवाब देने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हाल ही में एक विस्तृत Q&A डॉक्युमेंट जारी किया था। मंत्रालय के मुताबिक E20 पेट्रोल, E10 या शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छ, उच्च गुणवत्ता वाला और अधिक कुशल ईंधन है। सरकार ने इसे देश में लागू करने से पहले वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षण किए हैं, वाहन निर्माताओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया है और देश के भीतर एथेनॉल के उत्पादन को बढ़ाया है। इससे कार्बन उत्सर्जन काफी कम होता है, जो पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद है।

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भारी बारिश की रेड वॉर्निंग 15 जुलाई: बिहार संग इन 14 राज्यों में भयानक बारिश का अलर्ट, चक्रवाती सिस्टम एक्टिव होने से आंधी-तूफान का भी खतरा

IMD Red alert for heavy rain on July 15: देश के कई हिस्सों में मानसून रौद्र रूप धारण कर चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 15 जुलाई के लिए देश के कई राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का रेड और ऑरेंज वॉनिंग जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण और कई दूसरे वेदर सिस्टम्स की वजह से बिहार, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों समेत कुल 14 से अधिक राज्यों में मूसलाधार बारिश, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने का गंभीर खतरा बना हुआ है। आइए जानते हैं 15 जुलाई को लेकर मौसम विभाग का विस्तृत पूर्वानुमान और इसके पीछे काम कर रहे एक्टिव चक्रवाती सिस्टम।

एक्टिव वेदर सिस्टम: बंगाल की खाड़ी में बनेगा कम दबाव का क्षेत्र

मौसम विभाग के मुताबिक इस समय देश में कई मजबूत चक्रवाती सिस्टम और ट्रफ लाइन एक्टिव हैं। समुद्र तल पर मानसून ट्रफ वर्तमान में जम्मू, देहरादून, बाराबंकी, पटना, बांकुरा, कैनिंग से होते हुए दक्षिण-पूर्व दिशा में पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर गुजर रही है। उत्तर बंगाल की खाड़ी और उससे सटे दक्षिण बांग्लादेश के ऊपर समुद्र तल से 7.6 किमी की ऊंचाई तक विस्तृत एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जो ऊंचाई के साथ दक्षिण-पश्चिम की ओर झुका हुआ है। इसके असर से अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश तटों पर एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।

उत्तरी गुजरात और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर समुद्र तल से 5.8 किमी ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू के ऊपर समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और उसके पड़ोस में भी 5.8 किमी की ऊंचाई पर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है।

ओडिशा में अत्यंत भारी बारिश और बिहार में ‘वेरी हैवी’ रेन का अलर्ट

ओडिशा (रेड वॉर्निंग): मौसम विभाग ने 15 जुलाई को ओडिशा के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश होने की प्रबल आशंका जताई है।

वहीं बिहार के अलग-अलग हिस्सों में 15 जुलाई को भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। इसके साथ ही राज्य में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं, आंधी और बिजली चमकने का भी अलर्ट जारी किया गया है।

इन 12 राज्यों में होगी भारी बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक 15 जुलाई को देश के नीचे दिए गए राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने की पूरी संभावना है:-

उत्तराखंड

पश्चिम बंगाल और सिक्किम

झारखंड

छत्तीसगढ़

अरुणाचल प्रदेश

असम और मेघालय

नागालैंड

मणिपुर

मिजोरम

त्रिपुरा

आंधी-तूफान, बिजली चमकने और तेज हवाओं की चेतावनी

चक्रवाती सिस्टम एक्टिव होने के कारण देश के कई राज्यों में तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गांगेय पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख और झारखंड में अलग-अलग जगहों पर बिजली चमकने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं (झोंकों) के साथ आंधी चलने की संभावना है।

आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल और माहे तथा तेलंगाना में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं का अलर्ट है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और माहे और तेलंगाना में अलग-अलग जगहों पर तेज सतही हवाएं भी चलेंगी।

अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, छत्तीसगढ़, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के साथ उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका है।

इन राज्यों में सताएगी हीट वेव और उमस भरा मौसम

एक तरफ जहां कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट है, वहीं कुछ राज्यों में गर्मी और उमस का प्रकोप भी बना रहेगा। तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में अलग-अलग जगहों पर लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, तटीय कर्नाटक, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, तेलंगाना और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराईकल में मौसम काफी गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है।

समुद्र में मौसम का हाल: मछुआरों के लिए चेतावनी

पश्चिम-मध्य अरब सागर के अधिकांश हिस्सों, उससे सटे उत्तर-पश्चिम अरब सागर, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों और सोमालिया व ओमान तटों के साथ-साथ 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाएं (जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं) चलने की संभावना है।

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दक्षिण श्रीलंका और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। ओडिशा, गांगेय पश्चिम बंगाल के तटों के पास और अंडमान सागर में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) से चलने वाली तूफानी हवाओं के साथ प्रतिकूल मौसम रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है।

Iran-US War Update: होर्मुज स्ट्रेट में टैंकर पर हमले में भारतीय नाविक की मौत! भारत सरकार का बड़ा एक्शन, ईरानी राजनयिक तलब

Iran-US War Update: भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों की मंगलवार (14 जुलाई) को कड़ी निंदा की। इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार सुबह ईरान दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया और इन हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के दौरान ‘एमटी अल बहियाह’ और ‘एमटी मोम्बासा’ नाम के दो पोत पर हुए हमलों को लेकर बेहद चिंतित है।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “दोनों जहाजों के कुल 46 चालक दल के सदस्यों में से 30 भारतीय नाविक थे। ‘एमटी अल बहियाह’ पर सवार 12 भारतीयों में से एक की मृत्यु हो गई है और एक अन्य घायल हो गया है।” मंत्रालय के अनुसार, “एमटी मोम्बासा पर सवार 18 भारतीयों में से नौ घायल हुए हैं जिनमें से दो के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है।”

मंत्रालय ने कहा कि भारत इन हमलों और नाविकों को निशाना बनाने वाली हिंसा की घटनाओं तथा होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से मुक्त एवं सुरक्षित आवाजाही में बाधा डालने वाले कृत्यों की कड़ी निंदा करता है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम पश्चिम एशियाई क्षेत्र में हमलों के फिर से शुरू होने और तनाव बढ़ने पर अपनी गहरी चिंता भी दोहराते हैं। साथ ही शांति के हित में हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत एवं कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील करते हैं।”

मृतक के परिवार के प्रति जताई संवेदना

विदेश मंत्रालय ने मृतक भारतीय नाविक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है। साथ ही घायल भारतीयों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की गई।

ईरान के राजनयिक को किया तलब

घटना के बाद भारत सरकार ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप मिशन प्रमुख (Deputy Chief of Mission) को विदेश मंत्रालय में तलब किया। इस दौरान भारत ने इन हमलों पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। साथ ही स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट्स पर चल रहे कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ऐसे सभी हिंसक हमलों की कड़ी निंदा करता है, जो नाविकों की जान को खतरे में डालते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट्स पर सुरक्षित एवं निर्बाध आवाजाही को बाधित करते हैं।

UAE में भारतीय मिशन लगातार संपर्क में है

विदेश मंत्रालय ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में हैं। सरकार प्रभावित भारतीय नाविकों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर जताई चिंता

भारत ने पश्चिम एशिया में फिर से बढ़ती हिंसा और सैन्य तनाव पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से तत्काल हिंसा रोकने और बातचीत तथा कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील की। मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद ही सबसे प्रभावी समाधान है।

कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना गंभीर खतरा

भारत ने अपने बयान में दोहराया कि कमर्शियल जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। सरकार ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।

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इस रूट्स पर होने वाले हमले न केवल नाविकों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल भारत सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। घायल भारतीयों को सुरक्षित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ इस मामले को राजनयिक स्तर पर भी मजबूती से उठा रही है।

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में 2 महीने में 18 महिलाओं की मौत से हड़कंप! डिलीवरी के बाद मौतों के मामलों ने खड़े किए बड़े सवाल, क्या बोली सरकार?

Deaths of pregnant women in Rajasthan: राजस्थान में पिछले दो महीनों के दौरान सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मई 2026 से अब तक राज्य के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में कम से कम 18 महिलाओं की डिलीवरी या सी-सेक्शन (सिजेरियन) के बाद मौत हो चुकी है। इनमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि जुलाई की शुरुआत में केवल छह दिनों के भीतर ही 9 महिलाओं की जान चली गई।

मामले केवल मौतों तक सीमित नहीं हैं। प्रसव के बाद गंभीर रूप से बीमार हुई 7 अन्य महिलाओं की किडनी फेल होने के कारण डायलिसिस करनी पड़ रही है। इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि यह अलग-अलग घटनाएं नहीं। बल्कि प्रसव के बाद होने वाली गंभीर जटिलताओं का एक बड़ा पैटर्न हो सकता है।

सिर्फ 6 दिन में 9 मौत?

‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मई के बाद से भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर और अन्य सहित कम से कम पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में माताओं की 18 मौतों की खबर आई है। इनमें से नौ मौतें जुलाई की शुरुआत में सिर्फ छह दिनों में हुईं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ये मौतें भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर समेत कम से कम पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में हुई हैं। सभी मामलों में महिलाओं की मौत डिलीवरी या ऑपरेशन के बाद हुई, जिससे पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

पहले मातृ मृत्यु दर में सुधार, अब फिर चिंता

राजस्थान ने हाल के वर्षों में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Ratio) कम करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। साल 2017-19 के दौरान प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर 141 माताओं की मौत होती थी, जो 2018-20 में घटकर 113 रह गई। इस सुधार के कारण राजस्थान को मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश की सफलता की मिसाल माना गया था। लेकिन अब बेहद कम समय में एक साथ सामने आए इन मामलों ने एक्सपर्ट को भी चिंता में डाल दिया है कि आखिर अचानक ऐसी स्थिति क्यों बनी।

परिवारों ने लगाए गंभीर आरोप

मृतक महिलाओं के परिजनों का कहना है कि वे खुशहाल प्रसव की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन उनकी बेटियां, बहुएं और पत्नियां कभी घर वापस नहीं लौट सकीं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें इलाज से जुड़े पूरे मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए। यह भी स्पष्ट नहीं बताया कि आखिर मौत कैसे हुई। कई परिवारों ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और पूरी पारदर्शिता की मांग की है।

रिश्तेदारों का दावा है कि कई महिलाएं भर्ती होने के समय सामान्य स्थिति में थीं, लेकिन सामान्य प्रसव या सी-सेक्शन के कुछ समय बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्ट-पार्टम हेमरेज), संक्रमण (सेप्सिस) या किडनी फेल होने जैसी गंभीर समस्याएं हुईं। कई महिलाओं की जिला अस्पतालों में मौत हो गई। जबकि कुछ को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

इलाज में लापरवाही के आरोप

परिवारों ने अस्पतालों पर इलाज में देरी, मरीजों की पर्याप्त निगरानी न होने और एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमी जैसे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई उप-जिला अस्पतालों में एनेस्थेटिस्ट, फिजिशियन और आईसीयू सुविधाओं की भारी कमी है। परिजनों के मुताबिक कई बार मदद की गुहार लगाने के बावजूद समय पर डॉक्टर नहीं पहुंचे। कुछ अस्पतालों में एक ही डॉक्टर कई गंभीर मरीजों को संभाल रहा था, जबकि सीमित संसाधनों के बीच नर्सिंग स्टाफ मरीजों का इलाज करने की कोशिश कर रहा था।

सरकार ने क्या कहा?

राजस्थान सरकार ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए भीलवाड़ा और बांसवाड़ा सहित प्रभावित जिलों में विशेषज्ञ टीमों को जांच के लिए भेजा है। स्वास्थ्य विभाग ने कई जांच समितियां गठित की हैं और लगातार समीक्षा बैठकें भी की जा रही हैं। हालांकि, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इन मौतों को फिलहाल रहस्य बताया है। उनका कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मई से अब तक इतनी बड़ी संख्या में माताओं की मौत आखिर क्यों हुई। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब तक किसी जांच समिति ने इन सभी मामलों के पीछे कोई एक स्पष्ट कारण नहीं बताया है।

शुरुआती जांच में क्या सामने आया?

स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक रिपोर्टों में कई संभावित कारणों का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण (सेप्सिस), दवाओं के संभावित दुष्प्रभाव, गंभीर एनीमिया और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी जैसी स्थितियां शामिल हैं। हालांकि, अब तक जांच एजेंसियां ऐसा कोई साझा कारण नहीं खोज पाई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इतने कम समय में अलग-अलग जिलों में एक जैसी घटनाएं क्यों सामने आईं।

एक्सपर्ट की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मामलों की जल्द और निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इससे सरकारी अस्पतालों में प्रसव सेवाओं पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि हर मामले की मेडिकल ऑडिट कर यह पता लगाना जरूरी है कि कहीं इलाज में लापरवाही, संसाधनों की कमी या किसी अन्य प्रणालीगत समस्या के कारण तो ये मौतें नहीं हुईं। फिलहाल, राजस्थान में माताओं की लगातार हो रही मौतों का कारण अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। जांच जारी है और पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर इन मौतों के पीछे असली वजह क्या है।

मामलों को लेकर सरकार गंभीर

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सोमवार को कहा कि प्रसूताओं की मृत्यु की हालिया घटनाओं को लेकर राज्य सरकार संवेदनशील और गंभीर है। स्वास्थ्य भवन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए खींवसर ने कहा कि इन सभी मामलों में मरीज विभिन्न स्थानों से रेफर होकर सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए थे। खींवसर ने कहा कि राज्य में मातृ मृत्यु के मामलों में लगातार कमी आई है।

पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा, “2023-24 में मातृ मृत्यु के 1,094 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2024-25 में घटकर 986 और 2025-26 में 824 रह गए। इस प्रकार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मातृ मृत्यु के मामलों में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है।” उन्होंने कम समय में प्रसूताओं की लगातार हुई मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक घटना को गंभीरता से ले रही है। मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 2011 में जोधपुर में तीन दिन के भीतर 18 प्रसूताओं की मृत्यु हुई थी, जिनका कारण एक जैसा था। इसी प्रकार 2011-12 में जयपुर में भी आठ प्रसूताओं की क्रमिक मृत्यु हुई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान मामलों में ऐसा नहीं है। प्रत्येक मामले में मृत्यु के कारण अलग-अलग थे। बैठक के दौरान खींवसर ने ऑनलाइन माध्यम से बांसवाड़ा और भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के डॉक्टरों से मृत्यु के मामलों की विस्तृत जानकारी ली।

SBI Funds Management IPO: खुल गया ₹9813 करोड़ का इश्यू, ग्रे मार्केट में गिरी सेहत, निवेश से पहले जान लें ये 10 अहम बातें

SBI Funds Management IPO: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का ₹9813 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए आज खुल चुका है। पहले यह आईपीओ ₹11,693 करोड़ का था लेकिन प्री-आईपीओ राउंड में 30 बड़े निवेशकों से ₹1880 करोड़ जुटाने के बाद यह आईपीओ अब ₹9813 करोड़ है। यहां इस आईपीओ से जुड़ी 10 अहम बातें बताई जा रही है, जिसे जान लें और फिर आईपीओ में निवेश से जुड़ा फैसला लें।

1. प्राइस बैंड और लॉट साइज

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के ₹9813 करोड़ के आईपीओ में ₹545-₹574 के प्राइस बैंड और 26 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट और एसबीआई के एंप्लॉयीज को हर शेयर ₹54 के डिस्काउंट पर मिलेगा। एसबीआई के शेयरहोल्डर्स के लिए कोई छूट नहीं है।

2. अहम डेट्स

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ आज 14 जुलाई को खुला है और 16 जुलाई को बंद होगा। आईपीओ के तहत शेयरों का अलॉटमेंट 17 जुलाई को फाइनल होगा। फिर बीएसई और एनएसई पर 21 जुलाई को एंट्री होगी।

3. एंकर बुक

आईपीओ खुलने से पहले कंपनी ने 129 एंकर निवेशकों से ₹2663 करोड़ जुटाए। इसके तहत ब्लैकरॉक, अबूधाबी इंवेस्टमेंट अथॉरिटी, मॉर्गन स्टैनले, गोल्डमैन सैक्स, सिटीग्रुप और गवर्नमेंट ऑफ सिंगापुर समेत अन्य एंकर निवेशकों को ₹574 के भाव पर 17.09 करोड़ शेयर जारी हुए हैं। इसमें से ₹991 करोड़ के 1.72 करोड़ शेयर एचडीएफसी एएमसी, एक्सिस म्यूचुअल फंड, टाटा म्यूचुअल फंड और मोतीलाल ओसवाल एएमसी समेत 23 घरेलू म्यूचुअल फंड्स को 70 स्कीम्स के जरिए जारी हुए हैं।

4. ग्रे मार्केट में स्थिति यानी GMP

ग्रे मार्केट में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों की स्थिति कमजोर हुई है और आईपीओ खुलने से पहले इसकी जीएमपी ₹110 तक चली गई थी। हालांकि अब यह आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से ₹93 यानी 16.20% की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल के आधार पर ही निवेश का फैसला लेना चाहिए।

5. आईपीओ में कितने शेयर होंगे जारी

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ के तहत कोई नया शेयर नहीं जारी होगा बल्कि ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत ₹1 की फेस वैल्यू वाले 17,09,56,631 शेयरों की बिक्री हो रही है। इसमें से 12,83,34,397 शेयर एसबीआई और 7,53,74,842 शेयर एमुंडी इंडिया होल्डिंग बेच रहा है।

6. रजिस्ट्रार

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ का रजिस्ट्रार केफिन टेक है यानी कि शेयरों का अलॉटमेंट फाइनल होने के बाद इसकी साइट पर जारी अलॉटमेंट स्टेटस देख सकेंगे कि कितने शेयर मिले। इसके अलावा बीएसई की साइट पर भी स्टेटस देख सकेंगे।

7. कैसे होगा आईपीओ के पैसों का इस्तेमाल?

चूंकि यह इश्यू पीरी तरह से ऑफर फॉर सेल का है तो आईपीओ का पैसा कंपनी को नहीं मिलेगा बल्कि शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स एसबीआई और एमुंडी इंडिया को मिलेगा।

8. कंपनी के बारे में?

AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) के हिसाब से देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट एसबीआई म्यूचुअल फंड को मैनेज करती है। यह एसबीआई और एमुंडी का ज्वाइंट वेंचर है। यह इक्विटी फंड्स, डेट फंड्स, हाइब्रिड फंड्स, ईटीएफ और PMS (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज) जैसे निवेश प्रोडक्ट्स ऑफर करती है। 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक यह र्16.32 लाख करोड़ के एसेट्स मैनेज कर रही है जोकि म्यूचुअल फंड्स को कुल एयूएम का करीब 15.5% है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के हिसाब से इंडिविजुअल और इंस्टीट्यूशनल मिलाकर इसके 1.60 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। इसके पोर्टफोलियो में 126 म्यूचुअल फंड स्कीम्स हैं।

9. कैसी है कारोबारी सेहत?

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 21% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹3,067.38 करोड़ और टोटल इनकम भी इस दौरान 20% के सीएजीआर से उछलकर ₹4,976.11 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में ₹326.73 करोड़ पड़े थे।

10. क्या है ब्रोकरेजेज का रुझान

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ पर ब्रोकरेजेज का रुझान पॉजिटिव है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में लीडरशिप पोजिशन, एसबीआई के दमदार डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के सपोर्ट, मजबूत प्रॉफिटेबिलिटी और हाई ऑपरेटिंग मार्जिन के चलते ब्रोकरेजेज इसे लेकर बुलिश हैं। स्वास्तिक इंवेस्टमार्ट ने इसे सब्सक्राइब रेटिंग दी है तो अरिहंत कैपिटल ने भी लॉन्ग टर्म के लिए इसे सब्सक्राइब करने की सलाह दी है।

अनलिस्टेड मार्केट में निवेश आपकी पॉकेट पर पड़ सकता है भारी

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48 घंटे से भी कम समय में क्रेडिट होने वाला है आपके PF खाते में इंट्रेस्ट! जानिए कैसे कैलकुलेट होता है ब्याज, 5 लाख पीएफ पर कितनी होगी कमाई?

EPF Interest 2026: अगर आप भी बार-बार अपनी ईपीएफ (EPF) पासबुक रिफ्रेश कर रहे हैं तो आपका इंतजार अब लगभग खत्म होने वाला है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) वित्त वर्ष 2025-26 के लिए करीब 34 करोड़ खातों में 15 जुलाई तक ब्याज की रकम क्रेडिट करने जा रहा है। पिछले वर्षों में जहां ब्याज अक्टूबर-नवंबर के समय क्रेडिट होता था। वहीं इस साल यह काफी पहले किया जा रहा है।

इस बार कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि इंट्रेस्ट के मद में क्रेडिट होने वाली है। EPFO के नए सेंट्रलाइज्ड आईटी सिस्टम (CITES) के माध्यम से बड़े पैमाने पर किया जाने वाला पहला ब्याज भुगतान है।

पिछले महीने वित्त मंत्रालय द्वारा मंजूर की गई ब्याज दर लगातार तीसरे साल भी 8.25 प्रतिशत पर बरकरार है। आइए जानते हैं कि आपके पीएफ बैलेंस के हिसाब से इस 8.25% ब्याज का रुपयों में क्या गणित बैठता है और इसका कैलकुलेशन कैसे किया जाता है।

₹5 लाख से ₹1 करोड़ के बैलेंस पर कितनी होगी कमाई?

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इंट्रेस्ट का कैलकुलेशन 31 मार्च 2026 तक के कुल फंड के आधार पर की जाती है। ये इंट्रेस्ट 15 जुलाई तक आपके पासबुक में दिखने लगेगी। साधारण गणित के हिसाब से आपके पीएफ बैलेंस पर मिलने वाला इंट्रेस्ट कुछ ऐसा बनता है:-

₹5 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹41250 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹541250 हो जाएगा।

₹10 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹82500 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹1082500 हो जाएगा।

₹50 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹412500 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹5412500 हो जाएगा।

₹1 करोड़ के पीएफ बैलेंस पर: ₹825000 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹10825000 हो जाएगा।

इंट्रेस्ट क्रेडिट होने से पहले अपने ईपीएफओ मेंबर पोर्टल या उमंग (UMANG) ऐप पर जाकर तुरंत चेक कर लें कि आपकी केवाईसी डिटेल्स अपडेटेड हैं या नहीं। केवाईसी डिटेल्स का पुराना या आउटडेटेड होना ही सबसे आम कारण है जिसकी वजह से ब्याज क्रेडिट और क्लेम अटक जाते हैं।

कैसे होता है EPF ब्याज का कैलकुलेशन? जानिए नियम

ईपीएफ (EPF) में ब्याज की गणना मंथली आधार पर की जाती है। लेकिन यह रकम वित्तीय वर्ष के अंत में साल में एक बार आपके खाते में जमा होती है। इसका कैलकुलेशन कुछ इस तरह से किया जाता है-

मंथली क्लोजिंग बैलेंस: ईपीएफओ हर महीने के अंत में आपके खाते के बैलेंस को आधार बनाता है। पिछले वित्त वर्ष के क्लोजिंग बैलेंस पर पूरे साल का ब्याज मिलता है।

मासिक दर: वार्षिक ब्याज दर को 12 से भाग दिया जाता है, जैसे- 8.25% ÷ 12 = 0.6875% प्रति माह

नया योगदान: महीने के दौरान जमा हुई नई राशि को उस महीने के ब्याज में नहीं गिना जाता बल्कि उसे अगले महीने के ओपनिंग बैलेंस में शामिल किया जाता है। साल के दौरान जमा होने वाले नए पीएफ योगदान पर ब्याज, जमा होने के अगले महीने की पहली तारीख से 31 मार्च तक मिलता है।

पैसा निकालने पर नियम: अगर आपने साल के बीच में पीएफ का पैसा निकाला है तो निकाली गई रकम पर ब्याज केवल निकासी वाले महीने से ठीक पहले तक ही मिलता है। उसके बाद उस हिस्से पर ब्याज नहीं मिलता।

राउंड ऑफ और टोटल: सभी 12 महीनों के ब्याज को जोड़कर वित्तीय वर्ष के अंत में खाते में क्रेडिट किया जाता है। आखिरी में EPFO कुल ब्याज की रकम को नजदीकी पूरे रुपये में राउंड ऑफ कर देता है।

इस बार नए CITES सिस्टम की वजह से न सिर्फ ब्याज काफी जल्दी मिल रहा है। बल्कि आगे चलकर क्लेम, अकाउंट ट्रांसफर और दूसरी EPFO सेवाएं भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज और आसान हो जाएंगी।

मेंबर पासबुक पोर्टल पर कैसे चेक करें अपना बैलेंस? स्टेप बाई स्टेप तरीका

अगर आप यह चेक करना चाहते हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 का 8.25% ब्याज आपके खाते में क्रेडिट हुआ है या नहीं तो सुनिश्चित करें कि आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक्टिवेट हो। इसके बाद इन स्टेप्स को फॉलो करें:-

स्टेप 1: सबसे पहले EPFO मेंबर पासबुक पोर्टल पर जाएं।

स्टेप 2: अपने UAN, पासवर्ड और कैप्चा कोड का उपयोग करके लॉग इन करें।

स्टेप 3: आपके आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी (OTP) को दर्ज करके अपनी पहचान सत्यापित करें।

स्टेप 4: इसके बाद ‘View Passbook’ के विकल्प को चुनें। यहां आप अपना लेटेस्ट ईपीएफ बैलेंस देख सकते हैं और यह भी चेक कर सकते हैं कि FY26 का ब्याज क्रेडिट हुआ है या नहीं।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।)

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