Weather Update: दिल्ली-NCR में अगले 48 घंटे भारी! IMD का अलर्ट, इन राज्यों में मूसलाधार बारिश और आंधी-तूफान का खतरा

Weather Update Today: देशभर में मानसून एक बार फिर जोर पकड़ चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों के लिए कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और उससे सटे मध्य प्रदेश पर बने कम दबाव के क्षेत्र, सक्रिय मानसून ट्रफ और चक्रवाती परिसंचरण के कारण उत्तर, पश्चिम, मध्य और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर तेज रहेगा। सबसे ज्यादा असर गुजरात में देखने को मिलेगा, जहां कई इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

गुजरात में मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। जबकि राजस्थान, दिल्ली-NCR, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश, ओडिशा, असम, मेघालय और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश हो सकती है।

IMD के अनुसार दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और मध्य प्रदेश के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र, सक्रिय मानसून ट्रफ और चक्रवाती परिसंचरण अगले कुछ दिनों तक देश के उत्तर, पश्चिम, मध्य और पूर्वोत्तर हिस्सों में बारिश की गतिविधियों को तेज बनाए रखेंगे। मौसम विभाग ने विशेष रूप से गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली-NCR, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में सतर्क रहने की सलाह दी है।

गुजरात में हाई अलर्ट

IMD के अनुसार, गुजरात में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान भारी से बहुत भारी और कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। कई जिलों में जलभराव, स्थानीय बाढ़ और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। अगले दो से तीन दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, गुजरात को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

दिल्ली-NCR में अब तेज होगी बारिश

दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद में कल यानी 27 जुलाई हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक हो सकती है। मौसम विभाग का कहना है कि 27 जुलाई से बारिश की तीव्रता बढ़ेगी और कुछ स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। आसमान में बादल छाए रहेंगे और उमस बनी रहेगी।

राजस्थान के पूर्वी जिलों में भारी बारिश की आशंका

पूर्वी राजस्थान के जयपुर सहित कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है। कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश के साथ बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है।

मध्य प्रदेश में दो दिन तक होगी तेज बारिश

मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अगले दो दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। कई स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश होने की आशंका है।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भूस्खलन का खतरा

दोनों पहाड़ी राज्यों में अगले कई दिनों तक भारी बारिश का अनुमान है। 27 जुलाई से कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। IMD ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

पंजाब, हरियाणा और दिल्ली

पंजाब और हरियाणा में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक, 27 जुलाई से कई इलाकों में भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

बिहार और पश्चिम बंगाल

बिहार के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है। वहीं, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में गरज-चमक, तेज हवाओं और मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान है।

ओडिशा

राज्य के कई जिलों में अगले दो दिनों तक भारी बारिश हो सकती है। गरज-चमक और तेज हवाओं की भी आशंका जताई गई है।

असम, मेघालय और पूर्वोत्तर

असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले कई दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। कई स्थानों पर बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने का भी अलर्ट जारी किया गया है।

मुंबई, कोंकण और गोवा

मुंबई, कोंकण और गोवा में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। IMD फोरकास्ट के मुताबिक, निचले इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका है।

दक्षिण भारत

तेलंगाना: भारी बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज सतही हवाओं के चलने की आशंका है।

कर्नाटक: आंतरिक कर्नाटक में गरज-चमक के साथ बारिश होगी। जबकि तटीय कर्नाटक में भारी बारिश का अनुमान है।

तमिलनाडु: हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं।

IMD की लोगों को सलाह

मौसम विभाग ने भारी बारिश वाले इलाकों में लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, निचले क्षेत्रों से दूर रहने, बिजली गिरने के दौरान खुले स्थानों में नहीं जाने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।

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Anti-Paper Leak Bill: ₹50 लाख का जुर्माना और 10 साल की जेल… पेपर लीक रोकने वाले नए बिल में क्या-क्या है?

Anti-Paper Leak Bill: दो साल पुराने ‘क्वेश्चन पेपर लीक’ विरोधी कानून में बदलाव करने वाला एक बिल सोमवार (27 जुलाई) को लोकसभा में पेश किया जाएगा। इस बिल में आरोपियों पर तेजी से मुकदमा चलाने के लिए हर राज्य में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और सजा को और सख़्त करने का प्रस्ताव है। ‘पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ के अनुसार, क्वेश्चन पेपर लीक मामलों की जांच दो महीने के अंदर पूरी होनी चाहिए।

बिल पेश करने से पहले सदस्यों को दी गई कॉपी के अनुसार, क्वेश्चन पेपर लीक करने या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को कम से कम पांच साल और ज्यादा से ज्यादा 10 साल की जेल हो सकती है। साथ ही ₹50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लग सकता है। ऑर्गनाइज्ड क्राइम (संगठित अपराध) के लिए बिल में कम से कम 7 साल की सजा और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कानून को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देने पर जोर दिया। इसे जल्द से जल्द संसद में पेश करने का निर्देश दिया। उम्मीद है कि यह बिल सोमवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा।

मौजूदा कानून में क्या है?

मौजूदा कानून में व्यक्तिगत रूप से शामिल लोगों के लिए तीन से पांच साल की जेल का प्रावधान है। जबकि संगठित धोखाधड़ी और क्वेश्चन पेपर लीक में शामिल लोगों को पांच से 10 साल की जेल और कम से कम ₹1 करोड़ का जुर्माना हो सकता है। इस बिल को सोमवार को लोकसभा में पेश करने, उस पर विचार करने और उसे पास कराने के लिए लिस्ट किया गया है। आम तौर पर किसी बिल को एक ही दिन पेश करने और पास कराने के लिए लिस्ट नहीं किया जाता है।

सरकार ने घोषणा की है कि वह प्रस्तावित कानून ला रही है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब हाल के दिनों में NEET क्वेश्चन पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया था। हालांकि, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब जंतर-मंतर पर उनका प्रदर्शन समाप्त हो गया है।

एक हफ्ते नहीं चल पाया संसद

NEET मुद्दे पर विपक्षी दलों के विरोध के कारण संसद के मानसून सत्र के पहले हफ्ते की कार्यवाही में बाधा आई थी। नए बिल पर विपक्ष का रुख़ अभी साफ़ नहीं है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वह आम सहमति के आधार पर आगे बढ़ेंगे।

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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा अन्य माँगें मान लिए जाने के बाद CJP ने शनिवार को अपना 36 दिन लंबा विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया। इस बिल में 15 गैर-कानूनी कामों को शामिल किया गया है। इनमें क्वेश्चन पेपर लीक करना, OMR शीट के साथ छेड़छाड़ करना, फर्जी वेबसाइट बनाना और फर्जी एडमिट कार्ड जारी करना शामिल है।

Dharmendra Pradhan Resigns: किसी विवाद के कारण इस्तीफा देने वाले मोदी सरकार के दूसरे मंत्री हैं धर्मेंद्र प्रधान, पहले कौन थे?

Dharmendra Pradhan Resigns: दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देशभर में NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा समकालीन भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक दुर्लभ घटना है। साल 2014 से नरेंद्र मोदी सरकार के लगातार तीन कार्यकाल और 12 से अधिक वर्षों के दौरान सार्वजनिक विवादों के कारण मंत्रियों के इस्तीफे की घटनाएं बहुत कम हुई हैं। असल में प्रधान मोदी सरकार में किसी बड़े विवाद के बीच इस्तीफा देने वाले केवल दूसरे केंद्रीय मंत्री हैं। इससे पहले विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर थे, जिन्होंने विवाद के बाद इस्तीफा दिया था।

सार्वजनिक विवाद के केंद्र में रहते हुए किसी केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे का एकमात्र पिछला उदाहरण 17 अक्टूबर 2018 का है। वरिष्ठ पत्रकार से राजनेता बने एम.जे. अकबर ने विदेश मंत्रालय से इस्तीफा दिया था। अकबर ने #MeToo आंदोलन के दौरान लगे कथित आरोपों के बीच अपने पद से इस्तीफा दिया था।

वर्ष 2018 में कई महिला पत्रकारों ने एम.जे. अकबर पर उनके पत्रकारिता के दौर से जुड़े आरोप लगाए थे। बढ़ते विवाद के बीच उन्होंने मंत्री पद छोड़ते हुए कहा था कि वह व्यक्तिगत क्षमता में कानूनी लड़ाई लड़ना चाहते हैं, ताकि सरकारी कामकाज प्रभावित न हो।

हालांकि, शिरोमणि अकाली दल (SAD) की नेता हरसिमरत कौर बादल ने 2020 में तीन विवादास्पद कृषि कानूनों का विरोध करते हुए नरेंद्र मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दिया था। लेकिन वे उस विवाद का मुख्य केंद्र नहीं थीं। उनका इस्तीफा तीन कृषि कानूनों के विरोध में था। वह खुद किसी व्यक्तिगत विवाद के केंद्र में नहीं थीं।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की चर्चा क्यों?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों और अभिभावकों के विरोध के बाद शिक्षा मंत्रालय पर लगातार दबाव बना। ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सरकार की जवाबदेही और परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि सरकार का उद्देश्य छात्रों की चिंताओं को कम करना, परीक्षा प्रणाली पर विश्वास बहाल करना और संसद के मानसून सत्र के दौरान महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाना है।

2014 में स्थापित मौजूदा शासन मॉडल के तहत कैबिनेट की स्थिरता और संरचनात्मक निरंतरता मुख्य स्तंभ रहे हैं। हालांकि समय-समय पर कैबिनेट में फेरबदल या प्रशासनिक बदलावों के दौरान कई मंत्रियों ने मंत्रिपरिषद छोड़ी है। लेकिन बाहरी राजनीतिक दबाव या सार्वजनिक विवादों के कारण इस्तीफे की घटनाएं अपवाद ही रही हैं।

प्रशासनिक मतभेदों या पॉलिसी से जुड़ी चुनौतियों के ज्यादातर मामलों में सरकार ने तुरंत राजनीतिक इस्तीफ़े के बजाय ढांचे में बड़े बदलाव, विभागीय जांच या एजेंसी से जांच कराने को प्राथमिकता दी है। यह तरीका जल्दबाज़ी में राजनीतिक रियायतें देने के बजाय पॉलिसी को जारी रखने और संस्थागत स्थिरता को अहमियत देता है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे की वजह?

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसलिए खास है क्योंकि यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर छात्रों के जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन का सीधा जवाब है। आम राजनीतिक विवादों के उलट, NEET-UG विवाद ने देश भर के लाखों युवा उम्मीदवारों और उनके परिवारों पर सीधा असर डाला।

सरकार ने दो मुख्य मकसद हासिल करने की कोशिश की!

युवाओं की चिंता कम करना: छात्रों को यह संकेत देना कि सरकार जवाबदेह है और जनता को परीक्षा की निष्पक्षता के बारे में भरोसा दिलाना।

संसद का कामकाज सुचारू बनाना: विपक्षी दलों के साथ टकराव के एक बड़े मुद्दे को खत्म करना ताकि मानसून सत्र के दौरान जरूरी कानूनों को आसानी से पास कराया जा सके।

जवाबदेही के लिए एक रणनीतिक तरीका

2018 में एम.जे. अकबर और धर्मेंद्र प्रधान दोनों का हटना मंत्रियों की जवाबदेही तय करने के एक सोचे-समझे तरीके को दिखाता है। दोनों ही मामलों में बड़े नेताओं के इस्तीफे का इस्तेमाल रणनीतिक कदम के तौर पर किया गया ताकि संस्थागत गतिरोध को दूर किया जा सके। साथ ही जनता के तनाव को कम किया जा सके और प्रशासन अपने मुख्य गवर्नेंस एजेंडे पर आगे बढ़ सके।

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LPG Cylinder Price Today: एलपीजी गैस को लेकर आया बड़ा अपडेट! घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की नई कीमत जारी, जानिए पूरी लिस्ट

LPG Cylinder Price Today: घरेलू रसोई गैस (LPG) उपभोक्ताओं के लिए राहत और कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। 26 जुलाई 2026 को 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जबकि इस महीने की शुरुआत में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 तक की कटौती की गई थी। इससे होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों को सीधा फायदा मिल रहा है।

दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹942 पर स्थिर बनी हुई है। वहीं, 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर अब ₹2,930 में मिल रहा है। ये पिछले महीने 3,113.50 रुपये में मिल रहा था। पिछले 12 महीनों में घरेलू सिलेंडर की कीमत में कुल ₹89 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जबकि मार्च 2026 में एक बार में ₹60 की सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई थी। दूसरी ओर, कमर्शियल सिलेंडर में मई 2026 में रिकॉर्ड ₹993 की बढ़ोतरी हुई थी। लेकिन जुलाई में इसमें ₹183.50 की राहत दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू LPG की कीमतों को स्थिर रखकर आम उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की गई है। जबकि कमर्शियल सिलेंडर के दाम घटने से खाद्य एवं आतिथ्य उद्योग की लागत में कमी आएगी। यदि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बड़ी उथल-पुथल नहीं होती है, तो अगले कुछ समय तक घरेलू LPG की कीमतों में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है।

कीमतों में अब कब होगा बदलाव?

भारत में LPG सिलेंडर की कीमतों में आमतौर पर हर महीने की 1 तारीख को बदलाव किया जाता है। सरकारी तेल कंपनियां (IOC, BPCL और HPCL) अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों, कच्चे तेल के भाव, डॉलर-रुपये की कीमत और अन्य लागतों की समीक्षा के बाद नई दरें जारी करती हैं।

हालांकि, हर महीने कीमत बदलना जरूरी नहीं होता। कई बार लगातार कई महीनों तक घरेलू LPG सिलेंडर के दाम स्थिर रहते हैं। जबकि कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ज्यादा बार बदलाव देखने को मिलता है। हाल ही में 1 जुलाई 2026 को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत ₹183.50 घटाई गई थी। जबकि 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया।

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भारत में एलपीजी सिलेंडरों की कीमतें राज्य और स्थानीय टैक्स (VAT) के कारण अलग-अलग शहरों में भिन्न होती हैं। तेल कंपनियां (OMCs) अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दामों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य के आधार पर हर महीने एलपीजी सिलेंडर की दरें संशोधित करती हैं। प्रमुख शहरों में रसोई गैस (14.2 किग्रा घरेलू सिलेंडर) और कमर्शियल गैस (19 किग्रा सिलेंडर) के आज के नवीनतम रेट इस प्रकार हैं:-

देश के प्रमुख शहरों में LPG के ताजा रेट (14.2 किग्रा/19 किग्रा)

घरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किलोग्राम)

नई दिल्ली: ₹942.00

मुंबई: ₹941.50

कोलकाता: ₹968.00

चेन्नई: ₹957.50

लखनऊ: ₹979.50

पटना: ₹1,031.50

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (19 किलोग्राम)

नई दिल्ली: ₹2,930.00

मुंबई: ₹2,885.50

कोलकाता: ₹3,081.50

चेन्नई: ₹3,106.00

लखनऊ: ₹3,052.50

पटना: ₹3,227.00

‘अभी खाली नहीं होगा जंतर-मंतर…’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान

पेपर लीक मामले और राजधानी दिल्ली में जारी छात्रों के प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक की जिम्मेदारी मैंने पहले दिन ही ले ली थी। इससे पहले CJP की अगुवाई में छात्र उनके इस्तीफे की मांग को लेकर एक महीने से भी अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे थे। वहीं धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का पहला रिएक्शन सामने आया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि, ” यह लोकतंत्र है। उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन हमारी दो और मांगें हैं। हम ऐसे ही नहीं मानेंगे। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। लेकिन जिन बच्चों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा मिलना चाहिए। उन्हें यह मिलना चाहिए। उन सभी परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा। और दूसरी बात, 20 तारीख को जिन पुलिस वालों ने गुंडागर्दी की, उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।”

इससे पहले सोशल मीडिया पर अपने लंबे पोस्ट पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “पहले ही दिन से मैंने इस पर जिम्मेदारी ली। इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प रहा कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे। हम किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होंगे।”

बता दें कि, CJP की अगुवाई में छात्र उनके इस्तीफे की मांग को लेकर एक महीने से भी अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली के साथ ही देश के कई राज्यों में छात्रों के प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही थी। वहीं NEET पेपर लीक को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी।

Sotefin IPO Listing: ढहते मार्केट में अपर सर्किट, ₹187 के शेयरों ने लिस्टिंग पर मचाया धमाल

Sotefin IPO Listing: ऑटोमेटेड कार पार्किंग सिस्टम कंपनी सोटेफिन भारत के शेयरों की आज BSE SME प्लेटफॉर्म पर प्रीमियम एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 3 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹187 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹205.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 9.63% का लिस्टिंग गेन (Krystal Integrated Services Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर यह ₹215.25 (Sotefin Share Price) के अपर सर्किट पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 15.11% मुनाफे में हैं।

Sotefin Bharat IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

सोटेफिन भारत का ₹90 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 16-20 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 3.99 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 2.82 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 6.05 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.78 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 48 लाख नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹20.13 करोड़ कोलकाता में एक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने, ₹8.17 करोड़ प्रस्तावित नए ऑफिस प्रेमिसेज की जरूरतों, ₹40.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Sotefin के बारे में

सोफेटिन भारत मैकेनाइज्ड और ऑटोमेटेड पार्किस सॉल्यूशंस ऑफर करती है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में फुल्ली ऑटोमेटेड रोबोटिक पार्किंग सिस्टम, पजल पार्किंग सिस्टम, टावर पार्किंग सिस्टम और स्टैक पार्किंग सिस्टम हैं। कंपनी O&M (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) और आफ्टर सेल्स सर्विसेज भी ऑफर करती है। मार्च 2026 तक कंपनी 55 प्रोजेक्ट्स पूरे कर चुकी थी और फिलहाल देश कई कई शहरों के साथ-साथ अमेरिका और दुबई में 30 से अधिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान इसका शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 66% की अधिक रफ्तार से बढ़कर ₹17.37 करोड़ और टोटल इनकम 44% से अधिक तेजी से बढ़कर ₹118.23 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹24.01 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹70.57 करोड़ पड़े थे।

Lohia Corp IPO: 27 एंकर इनवेस्टर्स से जुटाए ₹492 करोड़

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

खराब मौसम की चेतावनी: अगले 7 दिनों में 22 राज्यों में भारी बारिश और 17 में आंधी-तूफान का अलर्ट! इन 6 जगहों पर हालात बिगड़ने का खतरा

Weekly Weather Forecast: देश भर में सक्रिय मानसून अपना विकराल रूप दिखा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 22 जुलाई को ताजा और विस्तृत वेदर बुलेटिन जारी करते हुए अगले 7 दिनों के लिए बड़े पैमाने पर चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में अगले 3 से 4 दिनों तक एक्टिव मानसून की स्थिति बनी रहेगी। IMD ने देश के 22 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, 17 राज्यों में तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली का अलर्ट जारी किया है। देश के 6 खास इलाकों में मूसलाधार से अत्यंत भारी बारिश की वजह से हालात बिगड़ने की आशंका भी खड़ी हो सकती है।

आइए जानते हैं कि पिछले 24 घंटों में कहां-कहां मूसलाधार आफत बरसी और अगले 7 दिनों तक आपके राज्य में मौसम का क्या मिजाज रहने वाला है।

इन 6 जगहों पर अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने अत्यधिक मूसलाधार बारिश के चलते देश के 6 प्रमुख अंचलों और राज्यों में अलर्ट जारी किया है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 22 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की संभावना है। दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश में भीषण बारिश का अलर्ट है। दक्षिण-पूर्व राजस्थान, कोंकण और गोवा के अलग-अलग इलाकों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश की आशंका है। मध्य महाराष्ट्र में 22 और 23 जुलाई को लगातार दो दिनों तक अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी है। इसी तरह गुजरात क्षेत्र में 22 जुलाई से 24 जुलाई तक मूसलाधार से अत्यंत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।

बीते 24 घंटों में कहां कितनी हुई बारिश?

22 जुलाई की सुबह तक पिछले 24 घंटों के दौरान दक्षिण गुजरात क्षेत्र में 30 सेमी से भी अधिक की रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई। मध्य महाराष्ट्र, ओडिशा और तटीय कर्नाटक में अत्यंत भारी बारिश (21 सेमी या अधिक) हुई। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कोंकण व गोवा और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में बहुत भारी बारिश (12 से 20 सेमी) दर्ज की गई। इसी तरह झारखंड, उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, विदर्भ और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश (7 से 11 सेमी) देखने को मिली है।

उत्तर-पश्चिम भारत: जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और पंजाब-हरियाणा का हाल

जम्मू-कश्मीर-लद्दाख: 22 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश होगी। इसके बाद 23 से 28 जुलाई के दौरान भारी बारिश और 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।

पूर्वी राजस्थान: 22 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश होगी। 22 से 26 जुलाई के दौरान बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।

पश्चिमी राजस्थान: 22 जुलाई को 40-50 किमी/घंटा (झोंके 60 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से आंधी और 22 से 26 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट है।

पंजाब: 22 जुलाई और 27-28 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी। जबकि 23 व 25 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है।

हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली: 22 जुलाई को भारी बारिश होगी और 27 व 28 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश: 26 से 28 जुलाई के दौरान भारी बारिश की संभावना है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश: 27 और 28 जुलाई को भारी बारिश दर्ज की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: हिमाचल में 22 जुलाई को बहुत भारी और 23 से 28 जुलाई तक भारी बारिश होगी। उत्तराखंड में 22 से 28 जुलाई तक लगातार भारी बारिश और बिजली कड़कने का अलर्ट है।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ

दक्षिण-पश्चिम व पश्चिम मध्य प्रदेश में 22 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश होगी जबकि 23 जुलाई को बहुत भारी और 24-25 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 22 और 23 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है, जिसके बाद 24-25 जुलाई को भारी बारिश होगी। पूरे क्षेत्र में 30-40 किमी/घंटा की गति से हवाएं चलेंगी। छत्तीसगढ़ में 22 और 23 जुलाई को भारी बारिश और 22 से 26 जुलाई तक आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी है। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में 22 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी और 23 जुलाई को भी भारी बारिश जारी रहेगी।

पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड, ओडिशा और बंगाल में 60 किमी/घंटा की हवाएं

झारखंड में 22 से 26 जुलाई के दौरान 40 से 50 किमी/घंटा (झोंके 60 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से तेज आंधी और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। ओडिशा में 22 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी। इसके बाद 23 से 28 जुलाई तक लगातार भारी बारिश जारी रहेगी।

बिहार में 22 से 24 जुलाई और 27-28 जुलाई के दौरान भारी बारिश के साथ 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। 22 से 24 जुलाई के दौरान गांगेय पश्चिम बंगाल में और 26 से 28 जुलाई तक उप-हिमालयी बंगाल में भारी बारिश का अनुमान है। अंडमान व निकोबार में 22 से 28 जुलाई तक तेज हवाएं चलेंगी।

पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय और नार्थ-ईस्ट में मूसलाधार आफत

असम और मेघालय में 22 जुलाई को बहुत भारी बारिश दर्ज की जाएगी। इसके बाद 23 से 28 जुलाई तक भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। अरुणाचल प्रदेश में22 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी और 23 से 28 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 22 और 23 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी, जबकि 24 से 28 जुलाई के दौरान भारी वर्षा का पूर्वानुमान है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: तटीय कर्नाटक और केरल में तेज सतही हवाएं

हालांकि अगले 7 दिनों तक दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश अंदरूनी मैदानी इलाकों में बारिश की गतिविधि थोड़ी कम रहेगी, फिर भी तटीय इलाकों में असर दिखेगा। तटीय कर्नाटक में 22 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी। 23 जुलाई और 26 से 28 जुलाई तक भारी बारिश और तेज सतही हवाएं चलेंगी।

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22 और 23 जुलाई को केरल एवं माहे में भारी बारिश और तेज हवाएं चलेंगी जिसके बाद 24 से 28 जुलाई तक व्यापक वर्षा होगी। 22 और 23 जुलाई को तेलंगाना, उत्तरी व दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश होगी। 22 से 28 जुलाई के दौरान तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में तेज सतही हवाएं चलेंगी। तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराइकल और रायलसीमा में 22 से 26 जुलाई के दौरान 40 से 50 किमी/घंटा (झोंके 60 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से तेज आंधी-तूफान चलने की चेतावनी दी गई है।

DDA फ्लैट में अब बिना अनुमति क्या-क्या बदल सकते हैं? जानिए रिनोवेशन के नए नियम

DDA renovation norms: राजधानी दिल्ली में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के फ्लैट मालिकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। DDA ने अपने फ्लैट्स में मरम्मत और रिनोवेशन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए कई तरह के संशोधनों को मंजूरी प्रक्रिया से मुक्त कर दिया है। इसी महीने से लागू हुई इस नई नीति के तहत अब फ्लैट मालिक बालकनी की रेलिंग/पैरापेट बढ़ाने, घर के अंदर की गैर-लोड-बेयरिंग दीवार हटाने, दरवाजे शिफ्ट करने, लॉफ्ट बनाने, वाटरप्रूफिंग के साथ फ्लोरिंग बदलने और पीवीसी पानी की टंकी लगाने जैसे काम बिना DDA या नगर निगम की पूर्व अनुमति के करा सकेंगे।

अब बिना अनुमति के कर सकेंगे ये बदलाव

DDA अधिकारियों के मुताबिक संशोधित नीति के तहत ऐसे बदलावों को Condonable यानी स्वीकार्य कैटेगरी में रखा गया है। इनके लिए पहले से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।

बालकनी और सुरक्षा: बेहतर सुरक्षा के लिए बालकनी के पैरापेट (रेलिंग) की ऊंचाई को ग्रिल या ग्लेजिंग लगाकर 5 फीट तक बढ़ाया जा सकता है।

बाउंड्री वॉल: वेंटिलेशन को बनाए रखते हुए फ्रंट और रियर आंगन की दीवारों को वायर फेंसिंग यानी जाली के जरिए 7 फीट तक ऊंचा किया जा सकता है।

दरवाजे बदलना या शिफ्ट करना: फ्रंट या रियर आंगन में नए दरवाजे लगाए जा सकते हैं या मौजूदा दरवाजों की जगह बदली जा सकती है, बशर्ते इससे आम रास्ता बाधित न हो।

दीवारें हटाना: रहने के लिए बड़ी जगह बनाने के उद्देश्य से घर के अंदर की गैर-लोड-बेयरिंग इंटरनल पार्टिशन वॉल (लगभग 4.5 इंच मोटी दीवार) को बिना अनुमति के हटाया जा सकता है।

इंटीरियर और यूटिलिटी अपग्रेड: इसके तहत सामान रखने के लिए लॉफ्ट बनाना, वाटरप्रूफिंग ट्रीटमेंट के साथ फ्लोरिंग (फर्श) बदलना और ग्राउंड फ्लोर या गैरेज लेवल पर अतिरिक्त पीवीसी (PVC) पानी की टंकियां लगाना शामिल है। इनके लिए अब पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं है।

DDA ने क्यों बदले 2007 से चले आ रहे नियम?

DDA अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली की कई हाउसिंग सोसायटी दशकों पहले बनी थीं। तब परिवारों की जरूरतें आज से अलग थीं। समय के साथ इनमें रहने वाले लोगों को स्टोरेज, वेंटिलेशन या स्पेस का सही इस्तेमाल करने के लिए मामूली बदलाव करने पड़ते थे लेकिन छोटे-छोटे काम के लिए भी मंजूरी लेने में लंबा समय लगता था और शिकायतें बढ़ती थीं।

एक वरिष्ठ DDA अधिकारी ने बताया कि DDA फ्लैटों में बदलाव और रिनोवेशन को नियंत्रित करने वाली नीति में लगभग दो दशकों से कोई बदलाव नहीं हुआ था। 2007 के बाद यह पहला मौका है जब प्राधिकरण ने नीति में संशोधन किया है ताकि स्ट्रक्चरल सेफ्टी को नुकसान पहुंचाए बिना घर मालिकों को सहूलियत दी जा सके।

उन्होंने कहा कि इस नई नीति का मकसद अस्पष्टता को खत्म करना है ताकि DDA का प्रवर्तन दल रूटीन होम इम्प्रूवमेंट की बजाय अवैध कब्जों और असुरक्षित निर्माण पर कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित कर सके।

किन बदलावों के लिए अभी भी अनिवार्य होगी मंजूरी?

DDA ने साफ किया है कि इस नीति का मतलब अनियंत्रित या अवैध निर्माण की छूट नहीं है। नीचे दिए गए बड़े और स्ट्रक्चरल बदलावों के लिए औपचारिक अनुमति और प्रमाणन अनिवार्य रहेगा-

स्ट्रक्चरल बदलाव: फ्लैट के मुख्य ढांचे, एक्सटेंशन (विस्तार), बालकनी/छत को पूरी तरह ढकने या स्ट्रक्चरल सेफ्टी को प्रभावित करने वाले किसी भी काम के लिए DDA की मंजूरी लेनी होगी।

किचन और बाथरूम: रसोई या शौचालय में किया जाने वाला ऐसा बदलाव जो इमारत के ढांचे को प्रभावित करता हो।

ऐसे प्रस्तावों के लिए रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट और स्ट्रक्चरल इंजीनियर से प्रमाण पत्र, निर्धारित शुल्क और कई मामलों में प्रभावित पड़ोसियों की सहमति जमा करनी होगी। कॉमन एरिया (साझा रास्तों) पर अवैध कब्जा करना, अतिरिक्त मंजिलें बनाना या लोड-बेयरिंग दीवारों से छेड़छाड़ करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और ऐसा करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली के प्रॉपर्टी मार्केट पर क्या पड़ेगा असर?

रियल एस्टेट विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि DDA के इस फैसले से दिल्ली के पुराने आवासीय क्षेत्रों के फ्लैट मालिकों और संभावित खरीदारों को सबसे बड़ा फायदा होगा। द्वारका, वसंत कुंज, रोहिणी, पीतमपुरा, मयूर विहार और जनकपुरी जैसे प्रमुख इलाकों में स्थित पुराने DDA फ्लैटों की रीसेल वैल्यू और मांग में सुधार देखने को मिल सकता है। पहले खरीदार कानूनी मंजूरी के झंझट के कारण पुराने फ्लैट खरीदने से कतराते थे लेकिन अब वे कानूनी रूप से अपने हिसाब से फ्लैट को आधुनिक बना सकेंगे।

रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म राइज इंफ्रावेंचर्स लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट मोहित गावरी ने बताया कि, ‘पहले DDA फ्लैटों में हर छोटे बदलाव के लिए मंजूरी की जरूरत होती थी जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते थे और खरीदार हिचकिचाते थे। ये नए नियम उस अड़चन को दूर करते हैं और DDA घरों को बाजार में अधिक बिक्री योग्य बनाते हैं। स्थापित DDA कॉलोनियों में जहां नई हाउसिंग सप्लाई सीमित है, यह फ्लेक्सिबिलिटी बेहतर रीसेल डिमांड और अच्छी कीमतें दिलाने में मदद करेगी।’

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नियमों में ढील मिलने के बाद विशेषज्ञों को उम्मीद है कि फ्लैट मालिकों द्वारा रेनोवेशन कराने से आर्किटेक्ट्स, ठेकेदारों, इंटीरियर डिजाइनरों और रिनोवेशन कंपनियों के काम और गतिविधियों में तेजी आएगी।

Heavy Rain की चेतावनी: आज इन 3 राज्यों के लिए IMD की रेड कलर वॉर्निंग! दिल्ली-यूपी से बिहार तक 19 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश

India Heavy Rain Alert Today: देश भर में मानसून प्रचंड रूप धारण कर चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज 22 जुलाई के लिए नया और विशेष वेदर बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग ने पश्चिम भारत के 3 प्रमुख क्षेत्रों (गुजरात क्षेत्र, कोंकण व गोवा और मध्य महाराष्ट्र) के लिए रेड कलर वॉर्निंग जारी करते हुए मूसलाधार से अत्यंत भारी बारिश की सख्त चेतावनी दी है। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, मध्य प्रदेश और ओडिशा समेत देश के 19 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

आइए जानते हैं कि मौसम विभाग के ताजा विश्लेषण और पूर्वानुमान के अनुसार आज आपके राज्य में मौसम का क्या मिजाज रहने वाला है:-

इन 3 राज्यों/क्षेत्रों के लिए IMD की रेड कलर वॉर्निंग

मौसम विभाग ने आज 22 जुलाई को नीचे दिए गए 3 क्षेत्रों के अलग-अलग इलाकों में मूसलाधार से अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। गुजरात क्षेत्र के मैदानी और उत्तरी भागों में बेहद तेज और मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है। तटीय गोवा और कोंकण क्षेत्र में मूसलाधार से अत्यंत भारी बारिश का खतरा बना हुआ है। महाराष्ट्र के मध्यवर्ती इलाकों और घाट क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यंत भारी बारिश की आशंका है।

इन 8 राज्यों में बहुत भारी बारिश की ऑरेंज कलर वॉनिंग

देश के 8 राज्यों में आज मूसलाधार से बहुत भारी बारिश दर्ज किए जाने की संभावना है। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट है। राजस्थान के पूर्वी हिस्से में बहुत भारी बारिश हो सकती है। पहाड़ी राज्य हिमाचल में मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी गई है। जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के पूरे पर्वतीय अंचल में बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। इसी के साथ पूरे मध्य प्रदेश में मानसूनी बादल जमकर बरसेंगे। पूर्वी तटीय राज्य ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। पंजाब के अलग-अलग इलाकों में तेज बारिश होगी। महाराष्ट्र के विदर्भ अंचल में मूसलाधार बारिश दर्ज की जाएगी।

दिल्ली-यूपी और बिहार समेत इन 11 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने देश के 11 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है:-

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड: यूपी और देवभूमि उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में तेज बारिश होगी।

हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली: राजधानी दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में आज दिन भर बादल छाए रहेंगे और भारी बारिश दर्ज की जाएगी।

बिहार और गांगेय पश्चिम बंगाल: दोनों राज्यों में कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।

पश्चिमी राजस्थान: राजस्थान के पश्चिमी अंचलों में भारी वर्षा की संभावना है।

मराठवाड़ा: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में भारी बारिश का अलर्ट है।

तेलंगाना: दक्षिणी राज्य तेलंगाना में कई जगहों पर भारी बारिश होगी।

पूर्वांचल और पूर्वोत्तर राज्य: असम और मेघालय के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश का अनुमान है।

40-50 kmph की रफ्तार से चलेगी आंधी और थंडरस्टॉर्म अलर्ट

बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में तेज तूफानी हवाएं और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। आंध्र प्रदेश, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने का अलर्ट है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, बिहार, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में आंधी-तूफान के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी।

असम व मेघालय, छत्तीसगढ़, गुजरात क्षेत्र, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा, उत्तराखंड, विदर्भ और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में आकाशीय बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है। आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना के अलग-अलग इलाकों में दिन भर तेज सतही हवाएं चलेंगी।

मौसम वैज्ञानिक विश्लेषण

IMD के मुताबिक देश भर में कई प्रमुख मौसमी प्रणालियां सक्रिय हैं:-

मानसून ट्रफ: समुद्र तल पर मानसून की ट्रफ लाइन जैसलमेर, अजमेर, गुना, सतना, डाल्टनगंज, दीघा से होते हुए उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक गुजर रही है।

ईस्ट-वेस्ट शीयर जोन: 22°N अक्षांश के साथ समुद्र तल से 3।1 किमी से 7।6 किमी की ऊंचाई के बीच शीयर जोन बना हुआ है, जो ऊंचाई के साथ दक्षिण-पश्चिम की ओर झुका है।

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस: उत्तर पाकिस्तान और उससे सटे उत्तरी पंजाब के ऊपर 3।1 किमी की ऊंचाई पर एक पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती परिसंचरण के रूप में सक्रिय है, जिसकी ट्रफ रेखा 70°E देशांतर के साथ 30°N अक्षांश के उत्तर में बनी हुई है।

उत्तर असम पर सिस्टम: उत्तरी असम और आसपास के क्षेत्र में 0।9 किमी की ऊंचाई पर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है।

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Alpine Texworld IPO Listing: लिस्ट होते ही लोअर सर्किट, फ्लैट एंट्री के बाद शेयर धड़ाम

Alpine Texworld IPO Listing: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के साथ-साथ मार्केट में अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का भी आईपाओ लॉन्च हुआ था। एक तरफ एसबीआई फंड्स के आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और इसे 41 गुना से अधिक बोली मिली थी तो दूसरी तरफ अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के आईपीओ को ओवरऑल 1.40 गुना बोली मिली थी। अब दोनों के शेयर आज लिस्ट हुए हैं। एसबीआई फंड्स के शेयर तो 6% से अधिक प्रीमियम पर लिस्ट हुए तो अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के शेयर एकदम फ्लैट।

अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के शेयर आईपीओ के तहत ₹105 के भाव पर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹105.00 और NSE पर ₹105.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला। आईपीओ निवेशकों को और झटका तब लगा, जब शेयर फिसल गए। टूटकर BSE पर यह ₹99.75 (Alpine Texworld Share Price) के लोअर सर्किट पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 5% घाटे में हैं।

Alpine Texworld IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का ₹126 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 14-16 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का सुस्त रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 1.40 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.09 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 1.09 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.54 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 1,20,24,000 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹32.08 करोड़ प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने के लिए एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में नई वीविंग यूनिट लगाने, ₹52.20 करोड़ कर्ज हल्का करने और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Alpine Texworld के बारे में

अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड कपड़ों की डाईंग और प्रोसेसिंग के बिजनेस में है। इसके पास दो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। इसकी सालाना इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 6 हजार टन के कॉटन और ब्लेंडेड यार्न की है। इसके पास 112 हाई-स्पीड लूम हैं जो डेनिम, सूटिंग शर्टिंग, और RFD (रेडी-फॉर-डाईंग) फैब्रिक बनाते हैं। कंपनी को फिलहाल फोकस ग्रीन एनर्जी पर है और रिन्यूएबल एनर्जी सेगमेंट पर भी ध्यान दे रही है। अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के वित्तीय सेहत की बात करें तो पिछले वित्त वर्ष 2026 में इसका शुद्ध 151.68% बढ़कर ₹21.72 करोड़ और टोटल इनकम 47.34% उछलकर ₹350.18 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी पर ₹177.60 करोड़ का कर्ज था तो रिजर्व और सरप्लस में ₹46.32 करोड़ पड़े थे।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।