Stock in Focus: एक साल में 53% का रिटर्न, अब प्रमोटर ने ब्लॉक डील में बेचे 4 लाख शेयर

Stock in Focus: इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनी Shaily Engineering Plastics की प्रमोटर वनीता नागदा ने 18 जून को ब्लॉक डील के जरिए कंपनी के 4 लाख शेयर बेच दिए।

एक्सचेंज पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह सौदा औसतन ₹2,635.05 प्रति शेयर के भाव पर हुआ। इस हिसाब से डील की कुल वैल्यू करीब ₹105.4 करोड़ रही। फिलहाल यह जानकारी सामने नहीं आई है कि इन शेयरों को किस निवेशक ने खरीदा है।

हाल के महीनों में चर्चा में रही कंपनी

Shaily Engineering Plastics पिछले कुछ महीनों से लगातार निवेशकों की नजर में बनी हुई है। इसकी वजह कंपनी को मिले बड़े ऑर्डर और मजबूत वित्तीय नतीजे हैं।

इस साल कंपनी को एक बड़ी घरेलू फार्मा कंपनी से करीब ₹423 करोड़ का मैन्युफैक्चरिंग और कमर्शियल सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट मिला था। इस समझौते के तहत कंपनी अगले चार साल तक पेन इंजेक्टर की सप्लाई करेगी। यह ऑर्डर कंपनी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे आने वाले वर्षों में कारोबार को सहारा मिल सकता है।

मार्च तिमाही में बढ़ा मुनाफा

मार्च 2026 तिमाही में कंपनी ने मजबूत नतीजे दर्ज किए। Q4 FY26 में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 10.3% बढ़ा। वहीं, नेट प्रॉफिट में 40.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो कारोबार की बेहतर लाभप्रदता को दिखाती है।

हालांकि, तिमाही आधार पर तस्वीर थोड़ी अलग रही। पिछली तिमाही की तुलना में रेवेन्यू में 4% की गिरावट आई। इसके बावजूद नेट प्रॉफिट 7.4% बढ़ने में सफल रहा। मार्च 2026 तिमाही में कंपनी की प्रति शेयर आय (EPS) ₹8.88 रही।

Shaily Engineering के शेयरों का हाल

Shaily Engineering Plastics का शेयर 18 जून को 5.49% की गिरावट के साथ ₹2,725 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 14.87% चढ़ा है। वहीं, एक साल में इसने करीब 53% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 12.54 हजार करोड़ रुपये है।

Shaily Engineering इंजीनियरिंग प्लास्टिक प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी है। यह फार्मा, हेल्थकेयर, ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर गुड्स और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए प्लास्टिक कंपोनेंट्स और डिवाइस तैयार करती है। कंपनी पेन इंजेक्टर, ड्रग डिलीवरी डिवाइस और अन्य हाई-प्रिसिजन प्लास्टिक प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग भी करती है।

टाटा मोटर्स ने सरकार से मिलाया हाथ, पुराने ट्रक-बस बदलने पर मिलेगी खास छूट; शेयरों पर रहेगी नजर

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

टाटा मोटर्स ने सरकार से मिलाया हाथ, पुराने ट्रक-बस बदलने पर मिलेगी खास छूट; शेयरों पर रहेगी नजर

Tata Motors share price: टाटा ग्रुप की ऑटो कंपनी टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल (Tata Motors CV) ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के साथ समझौता किया है। इसके तहत कंपनी दिल्ली-एनसीआर में पुराने ट्रक और बसों को हटाकर नए और कम प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों से बदलने की सरकारी योजना में हिस्सा लेगी।

नए ट्रक और बस खरीदने पर मिलेगी 8% तक छूट

इस योजना के तहत टाटा मोटर्स पात्र ग्राहकों को नए ट्रक और बस खरीदने पर एक्स-शोरूम कीमत पर 8% तक की छूट देगी। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) पर भी छूट मिलेगी। हालांकि, EV पर मिलने वाली छूट उसी कैटेगरी के डीजल या पेट्रोल व्हीकल पर लागू छूट तक सीमित रहेगी।

सरकार भी देगी अतिरिक्त फायदे

योजना में शामिल लोगों को केंद्र सरकार की ओर से कई फायदे मिलेंगे। सरकार 5% ब्याज सब्सिडी देगी। इसके अलावा पांच साल तक हर महीने फ्यूल वाउचर भी दिए जाएंगे।

योजना में शामिल राज्य सरकारें मोटर व्हीकल टैक्स में 10 साल तक 100% तक की छूट दे सकती हैं। इसके अलावा पात्र लोगों को व्हीकल रजिस्ट्रेशन फीस भी नहीं देनी होगी।

इस योजना को लागू करने के लिए Ashok Leyland और Switch Mobility ने भी सरकार के साथ समझौता किया है। ट्रक और बस बाजार में इन दोनों कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 50% है।

क्या है 5,041 करोड़ रुपये की योजना?

केंद्र सरकार ने इसी महीने 5,041 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी थी। इसका मकसद दिल्ली-एनसीआर में चल रहे 2 लाख से ज्यादा पुराने ट्रक और बसों को हटाना है। उनकी जगह BS-VI या इलेक्ट्रिक व्हीकल्स लाए जाएंगे।

योजना के दायरे में 1.9 लाख से ज्यादा ट्रक और करीब 16,000 बसें आएंगी। ये ऐसे व्हीकल्स हैं जो BS-IV या उससे पुराने इमिशन नॉर्म्स पर चलते हैं।

प्रदूषण कम करने पर फोकस

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में होने वाले कुल पार्टिकुलेट प्रदूषण का करीब 40% हिस्सा ट्रांसपोर्ट सेक्टर से आता है। इसमें डीजल और पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया, कार, बस और ट्रक शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि BS-I से BS-IV मानकों वाले पुराने व्हीकल्स, BS-VI व्हीकल्स की तुलना में 67% ज्यादा कार्बन मोनोऑक्साइड और 97% ज्यादा पार्टिकुलेट मैटर छोड़ते हैं। यही वजह है कि पुराने ट्रक और बसों को हटाने पर जोर दिया जा रहा है।

कौन करेगा योजना लागू?

इस योजना को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) और दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश व राजस्थान की राज्य सरकारें मिलकर लागू करेंगी।

Tata Motors CV का शेयर गुरुवार को 1.06% बढ़कर ₹ 407 पर बंद हुआ।

Stocks to Watch: शुक्रवार 19 जून को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stocks to Watch: शुक्रवार 19 जून को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: शेयर बाजार में शुक्रवार 19 जून शुक्रवार कई कंपनियां खबरों के चलते फोकस में रह सकती हैं। कहीं नए CEO की नियुक्ति हुई है, तो कहीं फंड जुटाने और रणनीतिक साझेदारी जैसे फैसले लिए गए हैं। ऐसे में इन शेयरों में कारोबार के दौरान बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

HDFC Bank

प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंकों में शामिल HDFC Bank को RBI से बड़ी मंजूरी मिली है। RBI ने केकी मिस्त्री का अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन के तौर पर कार्यकाल 18 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। साथ ही बैंक ने 5 अगस्त 2026 को 32वीं AGM बुलाने की मंजूरी भी दी है।

IT Stocks

ग्लोबल IT कंपनी Accenture के ताजा नतीजों उम्मीद से कमजोर रहे। कंपनी की कमाई बढ़ी है, लेकिन रेवेन्यू मार्केट की उम्मीद से थोड़ा कम रहा। इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ सकता है। ऐसे में टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसे शेयरों में हलचल दिख सकती है।

Bharat Forge

डिफेंस कंपनी Bharat Forge की सहयोगी Kalyani Strategic Systems ने अमेरिकी डिफेंस कंपनी AM General के साथ साझेदारी की है। दोनों कंपनियां दुनिया भर की सेनाओं के लिए आधुनिक मोबाइल तोप सिस्टम विकसित करेंगी।

Wipro

IT कंपनी Wipro ने यूरोप की रिटेल कंपनी Metro AG का बड़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट पूरा कर लिया है। कंपनी का कहना है कि इससे Metro AG को AI और क्लाउड टेक्नोलॉजी का ज्यादा फायदा मिलेगा।

Quick Heal Technologies

साइबर सिक्योरिटी सॉल्यूशंस देने वाली Quick Heal Technologies ने हरीश कुमार जीएस को नया CEO नियुक्त किया है। उनके पास साइबर सिक्योरिटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है।

Bosch Home Comfort India

वॉटर हीटर और होम कम्फर्ट प्रोडक्ट्स बनाने वाली Bosch Home Comfort India के प्रमोटर ने OFS में ओवर-सब्सक्रिप्शन ऑप्शन का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इसके बाद ऑफर का आकार बढ़ाकर 21.67 लाख शेयर कर दिया गया है। आमतौर पर ऐसा तब होता है जब निवेशकों की तरफ से अच्छी मांग देखने को मिलती है।

Manappuram Finance

गोल्ड लोन कंपनी Manappuram Finance का बोर्ड 23 जून को फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार करेगा। कंपनी कर्ज के जरिए पूंजी जुटाने के विकल्पों पर चर्चा करेगी। इस रकम का इस्तेमाल कारोबार बढ़ाने, ज्यादा लोन देने और अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकता है।

Diamond Power Infrastructure

पावर ट्रांसमिशन कंपनी Diamond Power Infrastructure के बोर्ड ने QIP के जरिए 2,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी दे दी है। कंपनी यह फंड क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) को इक्विटी शेयर जारी करके जुटाएगी।

MSP Steel & Power

स्टील और पावर सेक्टर में काम करने वाली MSP Steel & Power के प्रमोटर ग्रुप ने खुले बाजार से 38.25 लाख शेयर खरीदे हैं। प्रमोटर्स की तरफ से हिस्सेदारी बढ़ाना आमतौर पर कंपनी के भविष्य को लेकर भरोसे का संकेत माना जाता है।

Brigade Enterprises

रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी Brigade Enterprises को चेन्नई में अपने एक बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट को लेकर झटका लगा है। प्रोजेक्ट की एनवायरमेंटल क्लीयरेंस रद्द कर दी गई है। कंपनी इस आदेश के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रही है।

Tata Capital

टाटा ग्रुप की NBFC Tata Capital ने अगले कुछ वर्षों के लिए अपने ग्रोथ टारगेट दोहराए हैं। कंपनी का लक्ष्य AuM और मुनाफे दोनों को मजबूत करना है। मैनेजमेंट का कहना है कि कारोबार में फिलहाल कोई बड़ी कमजोरी नहीं दिख रही। आने वाले समय में गोल्ड लोन, Micro LAP और किफायती होम लोन पर ज्यादा फोकस रहेगा।

Rajratan Global Wire

स्टील वायर बनाने वाली Rajratan Global Wire को ICRA से पॉजिटिव अपडेट मिला है। रेटिंग एजेंसी ने कंपनी की क्रेडिट रेटिंग बरकरार रखी है। यह इस बात का संकेत माना जाता है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति और कर्ज चुकाने की क्षमता को लेकर एजेंसी का भरोसा कायम है।

Vijay Kedia Stock: विजय केडिया की इस लॉजिस्टिक्स कंपनी में एंट्री, एक साल में 350% से ज्यादा चढ़ चुका है स्टॉक

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Vijay Kedia Stock: विजय केडिया की इस लॉजिस्टिक्स कंपनी में एंट्री, एक साल में 350% से ज्यादा चढ़ चुका है स्टॉक

Vijay Kedia Stock: दिग्गज निवेशक विजय केडिया ने SME लॉजिस्टिक्स कंपनी Iware Supplychain Services में 6% हिस्सेदारी खरीदी है। उन्होंने 3% हिस्सेदारी व्यक्तिगत पोर्टफोलियो से और 3% अपनी कंपनी Kedia Securities Pvt Ltd के जरिए ली है। यह निवेश प्रेफरेंशियल इश्यू के तहत हुआ है। इसमें कंपनी ने करीब ₹20 करोड़ जुटाने के लिए ₹254.09 प्रति शेयर के भाव पर नए शेयर जारी किए हैं।

क्या करती है कंपनी?

2018 में बनी Iware Supplychain Services वेयरहाउसिंग, थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन और रेल रेक हैंडलिंग जैसी सेवाएं देती है। कंपनी के पास 7 राज्यों में फैले 11 वेयरहाउस हैं। इनका कुल क्षेत्रफल करीब 8 लाख वर्ग फुट है और मौजूदा मार्केट कैप करीब ₹391 करोड़ है।

ग्रोथ मजबूत, सवाल भी

Iware Supplychain का रेवेन्यू FY21 के ₹19 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹258 करोड़ पहुंच गया। इसी दौरान EBITDA ₹2 करोड़ से ₹29 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹1 करोड़ से ₹15 करोड़ हो गया। पिछले पांच वर्षों में रेवेन्यू, EBITDA और मुनाफे की CAGR क्रमशः 69%, 71% और 72% रही है।

हालांकि, इस ग्रोथ का बड़ा हिस्सा FY26 में आया, जब रेवेन्यू ₹86 करोड़ से बढ़कर ₹258 करोड़ हो गया। यानी तेज ग्रोथ के पीछे एक साल का बड़ा योगदान है।

मार्जिन, कैश फ्लो और कर्ज पर नजर

FY25 में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन करीब 20% था, जो FY26 में घटकर 11% रह गया। वहीं FY26 में ऑपरेटिंग कैश फ्लो निगेटिव रहा। वेयरहाउस और गाड़ियों पर निवेश के कारण फ्री कैश फ्लो भी दबाव में रहा।

कंपनी का कर्ज FY25 के ₹30 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹70 करोड़ हो गया। साथ ही डेटर डेज 60 से बढ़कर 85 हो गए। इससे कैश फ्लो पर असर पड़ सकता है।

निवेशकों के लिए क्या मतलब?

पॉजिटिव पहलू यह है कि FY26 में कंपनी का ROCE 28% और ROE 42% रहा। कंपनी ने पहला डिविडेंड भी घोषित किया है। 18 जून को यह करीब 2% के उछाल के साथ 352 रुपये पर बंद हुआ। मई 2025 में लिस्ट हुआ यह शेयर एक साल में 350% से ज्यादा चढ़ चुका है। इसका 52-वीक का दायरा 90 रुपये से 395 रुपये तक है।

ऐसे में विजय केडिया की एंट्री भरोसे का संकेत जरूर है, लेकिन निवेशकों को ग्रोथ के साथ कैश फ्लो, कर्ज और मार्जिन पर भी नजर रखनी चाहिए।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Defence Stock: भारत फोर्ज की बड़ी डिफेंस डील, अमेरिका की AM General के साथ मिलकर बनाएगी घातक हथियार

Defence Stock: घरेलू डिफेंस भारत फोर्ज की डिफेंस यूनिट Kalyani Strategic Systems Ltd (KSSL) ने अमेरिकी आर्मी के लिए गाड़ियां बनाने वाली कंपनी AM General के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इस समझौते पर फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित Eurosatory डिफेंस एक्सपो के दौरान हस्ताक्षर किए गए।

दोनों कंपनियों का लक्ष्य दुनिया भर की सेनाओं को मोबाइल आर्टिलरी गन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है। फोकस 155mm आर्टिलरी सिस्टम पर रहेगा। इन्हें अलग-अलग इलाकों और हर तरह के मौसम में आसानी से तैनात किया जा सकेगा।

क्या बनाएंगी दोनों कंपनियां?

इस साझेदारी के तहत AM General ने अमेरिकी सेना के Mobile Tactical Cannon (MTC) प्रोग्राम के लिए प्रस्ताव भी जमा किया है।

इस प्रस्ताव में KSSL के Mounted Artillery Gun (MArG) प्लेटफॉर्म पर आधारित 155mm Mobile Tactical Cannon सिस्टम विकसित करने की योजना है। अगर अमेरिकी सेना इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो इसकी डिलीवरी 2027 में शुरू हो सकती है।

MArG सिस्टम की खासियत क्या है?

दोनों कंपनियों के मुताबिक MArG प्लेटफॉर्म में 52-कैलिबर की 155mm तोप लगी है। इसमें रिकॉइल कम करने वाली तकनीक दी गई है। साथ ही ऑटोमेटेड लोड-असिस्ट सिस्टम और ऑल-वेदर फायर कंट्रोल सिस्टम भी मौजूद है।

यह सिस्टम 40 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक स्टैंडर्ड हाई-एक्सप्लोसिव गोले दाग सकता है। इसकी एक और बड़ी खासियत यह है कि यह 20 से ज्यादा प्रोजेक्टाइल और प्रोपेलेंट चार्ज अपने साथ ले जा सकता है।

Bharat Forge ने क्या कहा?

Bharat Forge के वाइस चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कल्याणी ने कहा कि AM General के साथ यह साझेदारी कंपनी की एडवांस्ड आर्टिलरी तकनीक और क्षमताओं पर भरोसे को दिखाती है।

उन्होंने कहा कि कंपनी आधुनिक युद्ध की जरूरतों के मुताबिक तकनीक विकसित करने और युद्ध में परखे गए समाधान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

AM General ने क्या कहा?

AM General के प्रेसिडेंट और CEO जॉन चैडबोर्न ने कहा कि KSSL के साथ यह साझेदारी मित्र देशों और उनके सैनिकों को बेहतर सैन्य क्षमताएं उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम है।

उन्होंने कहा कि कंपनी की पेटेंटेड सॉफ्ट रिकॉइल तकनीक और KSSL के आधुनिक प्लेटफॉर्म का मेल युद्धक्षेत्र में बड़ा फायदा दे सकता है। इससे सेनाओं को नई और अधिक प्रभावी क्षमता मिलेगी।

वैश्विक बाजार पर नजर

दोनों कंपनियों का कहना है कि इस साझेदारी का मकसद MArG प्लेटफॉर्म की वैश्विक पहुंच बढ़ाना है। साथ ही दुनिया भर में मोबाइल आर्टिलरी सिस्टम की बढ़ती मांग को पूरा करना भी इसका लक्ष्य है।

कंपनियों को उम्मीद है कि यह प्लेटफॉर्म मित्र देशों और साझेदार देशों की सेनाओं के बीच अच्छी मांग हासिल कर सकता है।

शेयर का क्या रहा हाल?

Bharat Forge का शेयर 18 जून को NSE पर 0.85% की गिरावट के साथ 2,017.20 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 43.32% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में करीब 55% रिटर्न दिया है। इसका मार्केट कैप 96.67 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

RBI ने एचडीएफसी बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन केकी मिस्त्री का कार्यकाल 18 सितंबर तक बढ़ाया

आरबीआई ने एचडीएफसी बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में केकी मिस्त्री का कार्यकाल तीन महीने बढ़ाने की इजाजत दे दी है। एचडीएफसी बैंक ने 18 जून को यह जानकारी दी। मिस्त्री इस साल 18 सितंबर या तब तक अपने पद पर रहेंगे जब तक बैंक में रेगुलर पार्ट-टाइम चेयरमैन की नियुक्ति नहीं हो जाती। इनमें से जो पहले होगा, वह लागू माना जाएगा।

5 अगस्त को बैंक की एजीएम होगी

मनीकंट्रोल ने पहले खबर दी थी कि अंतरिम चेयरमैन के रूप में केकी मिस्त्री का कार्यकाल 90 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है। एचडीएफसी बैंक ने एक्सचेंजों को बताया था कि उसकी 32वीं एनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) इस साल 5 अगस्त को होगी। बैंक ने कहा था कि डिविडेंड का पेमेंट 6 अगस्त या उसके बाद कर दिया जाएगा।

नए चेयरमैन की तलाश हो रही है

HDFC Bank में नए नॉन-एग्जिक्यूटिव पार्ट-टाइम चेयरमैन की तलाश चल रही है। मनीकंट्रोल ने यह खबर भी दी थी कि आरबीआई ने बैंक को केकी मिस्त्री का कार्यकाल खत्म होने से पहले नए चेयरमैन की तलाश का काम तेज करने को कहा है। मिस्त्री का कार्यकाल 18 जून को खत्म हो रहा है।

चेयरमैन का पद खाली होने से काम पर असर

मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि आरबीआई को उम्मीद है कि नए चेयरमैन की तलाश का काम जून खत्म होने से पहले पूरा हो जाएगा। सूत्रों ने बताया कि आरबीआई का मानना है कि चेयरमैन का पद खाली होने से बैंक से से जुड़े अहम फैसलों में देरी हो सकती है।

आरबीआई बैंक के निरंतर संपर्क में है

केंद्रीय बैंक नए चेयरमैन की तलाश के काम की प्रगति पर नजर रखने के लिए निरंतर एचडीएफसी बैंक के बोर्ड के संपर्क में बना हुआ है। 18 मार्च को मिस्त्री को तब बैंक का पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया था, जब अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि पिछले दो सालों में बैंक में कामकाज के कुछ तरीकों से वह सहमत नहीं हैं।

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शेयर तेजी के साथ बंद 

एचडीएफसी बैंक देश का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है। इसका शेयर 18 जून को 1.49 फीसदी उछाल के साथ 798.55 रुपये पर बंद हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

₹89600 का भारी नुकसान! 30 की बजाय 45 की उम्र में SIP शुरू की तो लगेगा 546% का झटका, यूं डूबेगा ₹5 करोड़ का सपना

Investment Tips: जब बात वेल्थ क्रिएशन यानी अमीर बनने की आती है, तो पर्सनल फाइनेंस का एक सीधा और अचूक नियम काम करता है। आप हर महीने कितनी बड़ी रकम निवेश कर रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा मायने यह रखता है कि आप कितने लंबे समय तक निवेशित रहते हैं।

अक्सर युवा यह सोचकर निवेश टालते रहते हैं कि जब हाथ में बड़ी सैलरी आएगी या जब वे फाइनेंशियली पूरी तरह सेटल हो जाएंगे, तब शुरुआत करेंगे। लेकिन एक्सपर्ट्स कड़े शब्दों में आगाह करते हैं कि शुरुआत में की गई यह छोटी सी देरी भी आपके लॉन्ग-टर्म गोल्स पर बहुत भारी पड़ सकती है। सीधे शब्दों में कहें तो कंपाउंडिंग की ताकत का पूरा फायदा उठाने के लिए आपका जल्द से जल्द शुरुआत करना बेहद जरूरी है।

अगर आपका लक्ष्य 60 साल की उम्र तक ₹5 करोड़ का बड़ा फंड तैयार करना है, तो 30 साल की उम्र और 45 साल की उम्र में निवेश शुरू करने के बीच का अंतर आपको चौंका देगा।

उम्र 30 बनाम 45: रिटर्न पर 546% का आ जाएगा अंतर

अगर आप 60 साल की उम्र में ₹5 करोड़ का फंड चाहते हैं, तो उम्र के हिसाब से आपका गणित कुछ ऐसा होगा:

30 साल की उम्र में शुरुआत: अगर आप 30 साल की उम्र से निवेश शुरू करते हैं, तो आपको हर महीने केवल ₹16400 रुपये की SIP करनी होगी।

45 साल की उम्र में शुरुआत: अगर आप यही फैसला टालते रहते हैं और 45 साल की उम्र में शुरुआत करते हैं, तो उसी ₹5 करोड़ के लक्ष्य के लिए आपको हर महीने ₹1.06 लाख की SIP करनी होगी।

यानी सिर्फ 15 साल की देरी करने की वजह से आपको हर महीने ₹89600 रुपये ज्यादा जेब से निकालने होंगे। यह आपके मंथली कमिटमेंट में सीधे 546 फीसदी यानी करीब 6.5 गुना का बड़ा उछाल है।

30 साल के युवाओं के लिए सही एसेट एलोकेशन स्ट्रेटेजी

एक्सपर्ट्स के अनुसार, 30 साल के निवेशक को रिटर्न के पीछे भागने से पहले अपनी फाइनेंशियल नींव मजबूत करनी चाहिए। इसके लिए तीन कदम जरूरी हैं:

इमरजेंसी फंड: सबसे पहले कम से कम 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाएं।

इंश्योरेंस: पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस जरूर लें।

लॉन्ग टर्म SIP: ये बेसिक्स पूरे होने के बाद ही रिटायरमेंट के लिए लंबी अवधि की SIP शुरू करें।

चूंकि रिटायरमेंट में 30 साल का लंबा वक्त है, इसलिए शुरुआती सालों में इक्विटी को मुख्य ग्रोथ एसेट बनाना चाहिए। वहीं स्थिरता के लिए डेट फंड, प्रोविडेंट फंड (EPF/PPF), एनपीएस और गोल्ड का सहारा लिया जा सकता है। जैसे-जैसे आप रिटायरमेंट के करीब पहुंचें, पोर्टफोलियो को वेल्थ क्रिएशन से शिफ्ट करके कैपिटल प्रोटेक्शन की तरफ ले जाना चाहिए।

रिटायरमेंट गोल्स के लिए इक्विटी क्यों है बेहद जरूरी?

लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट गोल्स के लिए फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स अकेले टैक्स के बाद महंगाई को मात नहीं दे पाते। इसलिए इक्विटी का रोल बहुत अहम हो जाता है। हालांकि, इक्विटी को शॉर्ट-टर्म प्रोडक्ट नहीं समझना चाहिए। 30 साल के निवेशक को हर 6 महीने या 1 साल में इक्विटी के प्रदर्शन को जज नहीं करना चाहिए, बल्कि एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाकर समय-समय पर उसका रिव्यू करना चाहिए।

युवा निवेशक भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां

मार्केट करेक्शन में SIP रोकना: कई युवा मार्केट में गिरावट आते ही डरकर अपनी SIP रोक देते हैं। यह लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग के पूरे मकसद को खत्म कर देता है। मार्केट करेक्शन तो आपको सस्ते में ज्यादा म्यूचुअल फंड यूनिट्स बटोरने का मौका देता है।

लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन: सैलरी बढ़ने के साथ अगर आप अपनी SIP नहीं बढ़ाते, तो आप एक बड़ा मौका खो रहे हैं। इसका आसान समाधान है 10% की एनुअल स्टेप-अप SIP अपनाएं, जिससे हर साल आपकी निवेश राशि अपने आप बढ़ती रहे।

शॉर्ट-टर्म खर्चों के लिए फंड निकालना: लोग गैजेट्स खरीदने, गाड़ी अपग्रेड करने या वेकेशन पर जाने के लिए अपने रिटायरमेंट फंड को बीच में ही निकाल लेते हैं। यह गलती कभी न करें।

‘बाय एंड फॉर्गेट’ की मानसिकता: निवेश करके भूल जाना सही रणनीति नहीं है। एसेट एलोकेशन, टैक्स एफिशिएंसी और परफॉर्मेंस कंसिस्टेंसी के लिए पोर्टफोलियो का पीरियोडिक रिव्यू बेहद जरूरी है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bajaj Auto Buyback: ₹5633 करोड़ का शेयर बायबैक, 19% मिलेगा प्रीमियम; रिकॉर्ड डेट भी हुई तय

Bajaj Auto Buyback: दोपहिया और तिपहिया गाड़ी बनाने वाली Bajaj Auto ने अपने 5,633 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक के लिए 24 जून 2026 को रिकॉर्ड डेट तय कर दी है। रिकॉर्ड डेट वही तारीख होती है, जिसके आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन-से शेयरधारक बायबैक ऑफर में हिस्सा लेने के पात्र होंगे।

कंपनी ने कहा है कि उसकी बायबैक कमेटी ने 24 जून 2026 को रिकॉर्ड डेट के तौर पर मंजूरी दी है। इस तारीख तक जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होंगे, वे बायबैक में हिस्सा ले सकेंगे।

कितने शेयर वापस खरीदेगी कंपनी?

Bajaj Auto के बोर्ड ने 6 मई 2026 को बायबैक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद 18 जून 2026 को शेयरधारकों से भी मंजूरी मिल गई। बायबैक के तहत कंपनी 10 रुपये फेस वैल्यू वाले अधिकतम 46.94 लाख इक्विटी शेयर वापस खरीदेगी। इसके लिए कंपनी ने 12,000 रुपये प्रति शेयर का भाव तय किया है। निवेशकों को भुगतान कैश में किया जाएगा।

कंपनी का कुल बायबैक साइज 5,633 करोड़ रुपये तक होगा। हालांकि, इसमें ब्रोकरेज, टैक्स, फाइलिंग फीस, कानूनी सलाह, पब्लिकेशन और अन्य संबंधित खर्च शामिल नहीं हैं।

Bajaj Auto का बायबैक कैसे होगा?

Bajaj Auto अपने शेयर टेंडर ऑफर रूट के जरिए वापस खरीदेगी। भारत में फिलहाल शेयर बायबैक का यही सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है। टेंडर ऑफर रूट में कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों से पहले से तय कीमत पर शेयर खरीदती है। इस मामले में यह कीमत 12,000 रुपये प्रति शेयर है।

अगर आपके पास रिकॉर्ड डेट तक Bajaj Auto के शेयर हैं और आप पात्र निवेशकों की सूची में शामिल होते हैं, तो आप अपने शेयर कंपनी को बेचने के लिए ऑफर कर सकते हैं।

2024 के बायबैक से क्या अलग है?

Bajaj Auto ने इससे पहले 2024 में भी बायबैक किया था। उस समय कंपनी ने अपने कुल इक्विटी शेयरों का 1.41% हिस्सा 10,000 रुपये प्रति शेयर के भाव पर वापस खरीदा था।

मौजूदा बायबैक भी टेंडर ऑफर रूट के जरिए ही किया जा रहा है। हालांकि, इस बार कंपनी 12,000 रुपये प्रति शेयर का भाव दे रही है, जो पिछले बायबैक प्राइस से ज्यादा है।

कंपनी में किसके पास कितनी हिस्सेदारी?

Bajaj Auto के पास अब करीब 3 लाख रिटेल शेयरधारक हैं। रिटेल निवेशक वे होते हैं जिनकी अधिकृत शेयर पूंजी 2 लाख रुपये तक होती है। दिसंबर 2023 के अंत में कंपनी के पास 1.87 लाख रिटेल निवेशक थे। यानी पिछले ढाई साल में रिटेल निवेशकों की संख्या काफी बढ़ी है। हालांकि, उनकी हिस्सेदारी में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। दिसंबर 2023 में रिटेल निवेशकों के पास 5.43% हिस्सेदारी थी, जो अब बढ़कर 5.62% हो गई है।

मार्च 2026 तिमाही के अंत तक कंपनी के प्रमोटरों के पास 55% हिस्सेदारी थी। वहीं, म्यूचुअल फंड्स का भरोसा भी कंपनी पर बढ़ा है। पिछले दो साल में उनकी हिस्सेदारी 5.32% से बढ़कर 7.17% हो गई है।

शेयर का क्या रहा हाल?

Bajaj Auto का शेयर गुरुवार को मामूली बढ़त के साथ 10,088.50 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी ने बायबैक के लिए 12,000 रुपये प्रति शेयर का भाव तय किया है, जो मौजूदा बाजार कीमत से करीब 1,912 रुपये या लगभग 19% ज्यादा है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP vs PPF: 30 साल तक हर महीने ₹5000 निवेश, किसमें बनेगा ज्यादा फंड? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP vs PPF: अगर लंबी अवधि के निवेश की बात करें, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) सबसे लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हैं। दोनों का इस्तेमाल घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई, शादी, रिटायरमेंट या लंबी अवधि में संपत्ति बनाने जैसे बड़े वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

हालांकि, निवेश का फैसला करते समय सिर्फ रिटर्न नहीं देखना चाहिए। अपनी कमाई, जोखिम लेने की क्षमता और भविष्य के लक्ष्यों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई व्यक्ति 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये निवेश करे तो PPF और SIP में से कौन ज्यादा बड़ा फंड बना सकता है।

PPF में 30 साल तक 5,000 रुपये का निवेश

अगर PPF पर 7.1% सालाना ब्याज दर बनी रहती है और आप 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये निवेश करते हैं, तो मैच्योरिटी पर आपका कुल फंड करीब 61.80 लाख रुपये हो सकता है।

इस दौरान आपका कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा। वहीं, ब्याज के रूप में करीब 43.80 लाख रुपये मिल सकते हैं। यानी निवेश से कहीं ज्यादा रकम सिर्फ ब्याज से जुड़ सकती है। हालांकि, इस कैलकुलेशन में महंगाई का असर शामिल नहीं है।

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SIP में 30 साल तक 5,000 रुपये का निवेश

वहीं, अगर आप 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये की SIP करते हैं और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो आपका कुल फंड करीब 1.41 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। आमतौर पर माना जाता है कि इक्विटी म्यूचुअल फंड 12% रिटर्न देते हैं। लेकिन, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।

इस दौरान आपका कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा। वहीं, करीब 1.23 करोड़ रुपये का फायदा रिटर्न के रूप में मिल सकता है। इस तरह कुल फंड 1.41 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है।

महंगाई को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

निवेश की योजना बनाते समय महंगाई को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। आज के 1 करोड़ रुपये की कीमत 30 साल बाद उतनी नहीं रहेगी। अगर SIP पर 12% रिटर्न मिले और महंगाई दर 6% मान ली जाए, तो 30 साल बाद आपके फंड की वास्तविक कीमत करीब 40.84 लाख रुपये रह जाएगी।

इसमें 18 लाख रुपये का निवेश और लगभग 22.84 लाख रुपये का वास्तविक रिटर्न शामिल होगा। यही वजह है कि निवेश का आकलन करते समय सिर्फ कुल फंड नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक खरीद क्षमता भी देखनी चाहिए।

SIP को क्यों पसंद करते हैं निवेशक?

  • SIP लंबी अवधि में वेल्थ बनाने का आसान तरीका माना जाता है। इसमें आप छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं।
  • म्यूचुअल फंड में SIP छह महीने से लेकर किसी भी अवधि के लिए शुरू की जा सकती है। इसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
  • SIP में ज्यादा रिटर्न की संभावना है। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स ने अच्छे रिटर्न दिए हैं। हालांकि, रिटर्न पूरी तरह बाजार पर निर्भर करता है।
  • SIP निवेश की आदत भी बनती है। बैंक से ऑटो-डेबिट सेट करने के बाद हर महीने तय रकम अपने आप निवेश हो जाती है।
  • SIP में रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का लाभ मिलता है। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान अलग-अलग कीमतों पर यूनिट्स खरीदने से लंबी अवधि में औसत खरीद लागत संतुलित रहती है।

इसके अलावा SIP में Systematic Withdrawal Plan (SWP) की सुविधा भी मिलती है। इसके जरिए निवेशक जरूरत पड़ने पर हर महीने एक तय रकम निकाल सकते हैं। इससे पूरे निवेश को एक साथ तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।

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PPF को क्यों चुनते हैं निवेशक?

  • PPF लंबे समय से सुरक्षित निवेश का पर्याय माना जाता है। यह केंद्र सरकार की गारंटी वाली बचत योजना है। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता।
  • PPF की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुरक्षा है। फिलहाल इस पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। सरकार हर तिमाही ब्याज दर की समीक्षा करती है।
  • टैक्स बचत के लिहाज से भी PPF काफी आकर्षक है। यह EEE कैटेगरी का निवेश है। यानी निवेश की रकम, उस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों टैक्स फ्री होती हैं।
  • पुराने टैक्स रिजीम में PPF में सालाना 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट भी मिलती है।
  • PPF खाते पर लोन की सुविधा भी उपलब्ध है। खाता खुलने के एक साल बाद जमा राशि के आधार पर लोन लिया जा सकता है। आमतौर पर खाते में मौजूद बैलेंस का 25% तक लोन मिलता है।

निकासी के मामले में भी कुछ सुविधाएं हैं। PPF में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। हालांकि, पांच साल बाद कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी की जा सकती है। मैच्योरिटी के बाद खाते को पांच-पांच साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

आखिर किसे चुनना चाहिए?

अगर आपकी पहली प्राथमिकता सुरक्षा है और आप गारंटीड रिटर्न चाहते हैं, तो PPF बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाना है और आप बाजार से जुड़े जोखिम उठा सकते हैं, तो SIP ज्यादा आकर्षक साबित हो सकती है।

यही वजह है कि कई वित्तीय सलाहकार दोनों में संतुलित निवेश की सलाह देते हैं। इससे एक तरफ PPF की सुरक्षा मिलती है, तो दूसरी तरफ SIP के जरिए ज्यादा रिटर्न और वेल्थ क्रिएशन की संभावना भी बनी रहती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।