ITR Filing 2026: रिटर्न फाइल करने के बाद रिवाइज कर रहे हजारों टैक्सपेयर, जानिए क्या है इसकी वजह

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने के बाद उसे रिवाइज्ड करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। इसकी वजह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की बढ़ती डेटा निगरानी है। विभाग के पास अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा वित्तीय जानकारी पहुंच रही है। ऐसे में कई लोगों को रिटर्न भरने के बाद पता चलता है कि उनकी कुछ कमाई या लेनदेन रिकॉर्ड में बाद में जुड़ गए हैं। इसके बाद उन्हें रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करनी पड़ती है।

क्यों बढ़ रहे हैं रिवाइज्ड रिटर्न?

इसकी सबसे बड़ी वजह एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) है। AIS एक ऐसा दस्तावेज है, जिसमें आपकी कमाई और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी एक जगह दिखाई देती है। इसमें सैलरी, ब्याज, डिविडेंड, म्यूचुअल फंड और शेयरों के सौदे, प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री, विदेशी धन भेजने और बड़े खर्च जैसी जानकारी शामिल होती है।

समस्या यह है कि AIS एक बार में पूरी तरह तैयार नहीं होता। बैंक, कंपनियां और दूसरी संस्थाएं समय-समय पर डेटा अपडेट करती रहती हैं। ऐसे में जो लोग जल्दी ITR भर देते हैं, उन्हें बाद में AIS में नई एंट्री दिखाई दे सकती है। इसके बाद रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करना जरूरी हो जाता है।

आज इनकम टैक्स डिपार्टमेंट पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़े पैमाने डेटा जुटा रहा है। ऐसे में रिटर्न भरते समय छूटी हुई जानकारी बाद में सामने आ जाती है।

टैक्स रिकॉर्ड्स बदलते रहते हैं

AIS और टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी (TIS) अब स्थिर दस्तावेज नहीं हैं। इनमें रिटर्न दाखिल होने के बाद भी बदलाव हो सकता है। यानी आपने जिस दिन ITR भरी, उसके बाद भी आपके रिकॉर्ड में नई जानकारी जुड़ सकती है। यही वजह है कि कई बार रिटर्न सही भरने के बावजूद बाद में बदलाव की जरूरत पड़ जाती है।

इसके अलावा इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब डेटा एनालिटिक्स और फेसलेस स्क्रूटनी का ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है। सिस्टम अपने आप आंकड़ों का मिलान करता है। अगर कोई अंतर दिखाई देता है, तो उसे आसानी से पकड़ा जा सकता है।

पहले छोटी-मोटी गड़बड़ियां नजरअंदाज हो जाती थीं। अब ऐसा नहीं है। ऐसे में कई टैक्सपेयर नोटिस आने का इंतजार करने के बजाय खुद ही रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करना बेहतर समझते हैं।

AY 2026-27 के लिए डेडलाइन?

  • असेसमेंट ईयर 2026-27 के रिटर्न अभी भी Income Tax Act, 1961 के तहत दाखिल किए जाएंगे। यह बात तब भी लागू रहेगी, जब 1 अप्रैल 2026 से नया Income Tax Act, 2025 लागू हो चुका होगा।
  • मौजूदा नियमों के अनुसार Section 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न 31 दिसंबर 2026 तक दाखिल की जा सकती है। हालांकि असेसमेंट पूरा होने के बाद यह सुविधा नहीं मिलेगी।
  • फाइनेंस बिल 2026 में इस डेडलाइन को बढ़ाकर 31 मार्च 2027 करने का प्रस्ताव रखा गया है। लेकिन दिसंबर 2026 के बाद रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने पर शुल्क देना पड़ सकता है।
  • अगर यह समय सीमा भी निकल जाती है, तो Section 139(8A) के तहत Updated Return दाखिल करने का विकल्प मिलता है। यह सुविधा 48 महीने तक उपलब्ध रहती है। हालांकि इसमें अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है।

पहली बार में सही ITR भरना क्यों जरूरी?

बार-बार रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से बेहतर है कि पहली बार में ही सही रिटर्न भरी जाए। ITR दाखिल करने से पहले AIS, TIS और Form 26AS का मिलान अपने रिकॉर्ड से जरूर करना चाहिए। इसमें Form 16, बैंक स्टेटमेंट, ब्रोकर स्टेटमेंट, ब्याज के सर्टिफिकेट और कैपिटल गेन स्टेटमेंट जैसे दस्तावेज शामिल हैं।

अगर AIS में कोई गलत जानकारी दिखाई देती है, तो ‘Report Incorrect Information’ सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

जिन लोगों की कमाई के कई स्रोत हैं, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए। शेयर बाजार में निवेश करने वाले, म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वाले, विदेशी लेनदेन करने वाले या कैपिटल गेन कमाने वाले लोगों को ITR भरने से पहले सभी दस्तावेजों का मिलान जरूर कर लेना चाहिए।

थोड़ी-सी सावधानी बाद में रिवाइज्ड रिटर्न भरने की जरूरत को कम कर सकती है। साथ ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच या नोटिस का जोखिम भी घट सकता है।

ITR Filing 2026: टैक्सपेयर्स के लिए बड़ा अपडेट! AY 2026-27 के लिए ITR-3 यूटिलिटी लाइव

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Focus: रेलवे से डिफेंस तक… इन 6 कंपनियों को मिले बड़े ऑर्डर, 22 जून को शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: रेलवे, डिफेंस, डेटा सेंटर, पावर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर से जुड़ी कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिले हैं। इनसे कंपनियों की ऑर्डर बुक और रेवेन्यू को सहारा मिलने की उम्मीद है। यही वजह है कि सोमवार के कारोबार में इन शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रह सकती है।

Knowledge Marine

इंजीनियरिंग कंपनी Knowledge Marine & Engineering Works (KMEW) को Inland Waterways Authority of India (IWAI) से 66.11 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। कंपनी 20 यात्रियों की क्षमता वाली 10 हाइब्रिड इलेक्ट्रिक फेरी बनाएगी। ऑर्डर में मैन्युफैक्चरिंग के साथ 5 साल का मेंटेनेंस भी शामिल है। यह KMEW का पहला बाहरी कमर्शियल शिपबिल्डिंग ऑर्डर है। इसके जरिए कंपनी ग्रीन शिपबिल्डिंग सेगमेंट में भी कदम रख रही है।

इस बीच SBI Funds Management ने कंपनी में 1.64% हिस्सेदारी खरीदी है। वहीं प्रमोटर्स ने ब्लॉक डील के जरिए कुछ हिस्सेदारी बेची है। शुक्रवार को कंपनी का शेयर 0.91% की बढ़त के साथ 2,072.90 रुपये पर बंद हुआ।

Power Mech

बिजली कंपनी Power Mech Projects को JSW Thermal Energy से 1,008.90 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। कंपनी पश्चिम बंगाल के सालबोनी में बन रहे 2×800 मेगावाट के थर्मल पावर प्रोजेक्ट में सिविल और स्ट्रक्चरल काम करेगी। इस प्रोजेक्ट को 36 महीने में पूरा करना है।

यह हाल के दिनों में कंपनी को मिला दूसरा बड़ा ऑर्डर है। इससे पहले जून में Adani Infrastructure Management Services से 266 करोड़ रुपये मिला था। अप्रैल में मुंबई मोनोरेल के संचालन-रखरखाव के लिए 296 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला था। शुक्रवार को Power Mech Projects का शेयर NSE पर 1.24% की बढ़त के साथ 2,849 रुपये पर बंद हुआ।

RVNL

सरकारी रेल कंपनी RVNL को एक अन्य सरकारी कंपनी NMDC से 2,977 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। कंपनी आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में 10 मिलियन टन सालाना क्षमता वाला बफर स्टॉकपाइल और ब्लेंडिंग यार्ड बनाएगी। यह प्रोजेक्ट NMDC की लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा। साथ ही लौह अयस्क और दूसरे कच्चे माल की ढुलाई व हैंडलिंग को भी आसान बनाएगा।

प्रोजेक्ट को 42 महीने में पूरा करना है। बफर स्टॉकपाइल और ब्लेंडिंग यार्ड की मदद से स्टॉक का बेहतर मैनेजमेंट किया जा सकता है। इससे ग्राहकों को एक जैसी गुणवत्ता वाला माल उपलब्ध कराने में भी मदद मिलती है। RVNL के शेयरों में शुक्रवार को 1.32% की गिरावट आई थी और ये 244.31 रुपये पर बंद हुए थे।

Kirloskar Oil

इंजन बनाने वाली Kirloskar Oil Engines (KOEL) को HyperNext से भारत में बन रहे एक बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए ऑर्डर मिला है। कंपनी 192 मेगावाट क्षमता के पावर जनरेशन सिस्टम उपलब्ध कराएगी। इसके तहत KOEL के 2500 kVA Optiprime Dual Core सिस्टम की 96 यूनिट लगाई जाएंगी। इनका इस्तेमाल AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और बड़े डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर को बिजली बैकअप देने के लिए होगा।

कंपनी का कहना है कि AI और क्लाउड सेवाओं की बढ़ती मांग के बीच डेटा सेंटरों को मजबूत बैकअप पावर सिस्टम की जरूरत है। शुक्रवार को कंपनी का शेयर 0.83% की बढ़त के साथ 2,000 रुपये पर बंद हुआ।

Bharat Forge

डिफेंस कंपनी Bharat Forge को रक्षा मंत्रालय से 425 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। कंपनी भारतीय नौसेना के कोलकाता-क्लास युद्धपोतों के लिए Gas Turbine Generators (GTGs) की सप्लाई करेगी। ये 1.25 मेगावाट क्षमता वाले सिस्टम जहाजों पर बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल होंगे और मौजूदा कम क्षमता वाले सिस्टम की जगह लेंगे। इस ऑर्डर को अगले 5 साल में पूरा किया जाएगा।

इससे एक दिन पहले Bharat Forge की रक्षा इकाई Kalyani Strategic Systems ने अमेरिकी कंपनी AM General के साथ साझेदारी की थी। दोनों कंपनियां दुनिया भर की सेनाओं के लिए 155mm आर्टिलरी गन प्लेटफॉर्म पेश करेंगी। शुक्रवार को Bharat Forge का शेयर 1.45% की बढ़त के साथ 2,048 रुपये पर बंद हुआ।

Tata Motors CV

टाटा ग्रुप की Tata Motors CV को 3,400 से ज्यादा इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल्स (eCV) के ऑर्डर मिले हैं। इनमें करीब 2,000 छोटे कमर्शियल व्हीकल और पिक-अप, 900 ट्रक और 500 बसें शामिल हैं। इन गाड़ियों का इस्तेमाल ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, FMCG, सीमेंट, स्टील, माइनिंग, एयरपोर्ट ऑपरेशन्स और यात्री परिवहन जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। कंपनी का कहना है कि यह बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को अपनाए जाने का संकेत है।

हाल ही में कंपनी ने पुराने ट्रकों और बसों को बदलने की सरकारी योजना में शामिल होने के लिए MoRTH के साथ समझौता किया है। शुक्रवार को Tata Motors का शेयर 401.95 रुपये पर बंद हुआ।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price: अपने रिकॉर्ड स्तर से 28% टूटा गोल्ड! खत्म हो गई तेजी या फिर लौट सकती है चमक?

Gold Price: 2025 में 65% की जोरदार तेजी के बाद 2026 अब तक सोने के लिए खास नहीं रहा है। साल की पहली छमाही में सोना करीब 4% टूट चुका है। जनवरी 2026 के आखिर में सोने ने 5,602 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था।

लेकिन इसके बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा, बाजार में मुनाफावसूली शुरू हुई और सोने में तेज गिरावट आ गई। जून में इसका भाव करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया। यह रिकॉर्ड स्तर से करीब 28% नीचे था। फिलहाल सोना करीब 4,144 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है।

ईरान-अमेरिका समझौते के बाद क्या बदला?

इस समय बाजार की नजर अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते पर है। होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तेल की कीमतों में नरमी आई है। समझौते की खबर के बाद तेल करीब 15% सस्ता हो चुका है। हालांकि निवेशकों के मन में अब भी सवाल है कि यह समझौता कितने समय तक टिकेगा और क्षेत्र में तनाव सचमुच कम होगा या नहीं।

तेल सस्ता होने पर भी क्यों नहीं बढ़ रहा सोना?

यही सबसे बड़ा सवाल है। आमतौर पर तेल सस्ता होने और तनाव कम होने से सोने को सहारा मिलता है। लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग है। फिलहाल सोने की चाल तेल नहीं, बल्कि अमेरिकी ब्याज दरें तय कर रही हैं।

सोने की कीमत पर एक साथ कई चीजें असर डालती हैं। इनमें महंगाई, ब्याज दरें, डॉलर और वैश्विक घटनाक्रम शामिल हैं। इस समय सबसे ज्यादा असर ब्याज दरों का दिख रहा है।

अमेरिकी फेड बना सबसे बड़ी चुनौती

17 जून को हुई अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के बाद संकेत मिले कि 2026 में कम से कम एक बार और ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने भी साफ किया कि महंगाई को काबू में रखना उनकी प्राथमिकता है। इससे ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ गई है।

ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए अच्छी खबर नहीं मानी जातीं। वजह यह है कि सोना कोई ब्याज नहीं देता। ऐसे में निवेशकों का रुझान दूसरे विकल्पों की तरफ बढ़ सकता है।

डॉलर भी डाल रहा दबाव

2026 में डॉलर इंडेक्स करीब 2.6% मजबूत हुआ है। दूसरी तरफ सोना करीब 4% गिरा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इसका असर मांग पर पड़ता है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है।

एक्सपर्ट्स की गोल्ड पर राय

LKP Securities में वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी & करेंसी रिसर्च एनालिस्ट) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से 2026 में एक बार ब्याज दर बढ़ाने के संकेत मिलने के बाद सोने पर दबाव बढ़ गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और सोने जैसी ऐसी एसेट्स की चमक कुछ कम हुई है, जो कोई ब्याज नहीं देतीं। फेड के सख्त रुख के बाद बुलियन बाजार में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली भी देखने को मिली है।

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि निवेशकों को अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी नजर रखनी चाहिए। बातचीत में किसी भी तरह की प्रगति या रुकावट कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकता है।

क्या खत्म हो गई तेजी?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में महंगाई काबू में आती है और फेड ब्याज दरें घटाने की तरफ बढ़ता है, तो सोने में फिर तेजी लौट सकती है। दूसरी तरफ अगर महंगाई ऊंची बनी रहती है, तब भी सोना निवेशकों के लिए बचाव का एक अहम विकल्प बना रह सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक पिछले कई सालों से लगातार सोना खरीद रहे हैं। उनका भरोसा अभी भी बना हुआ है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने में सही समय पकड़ने की कोशिश करने के बजाय पोर्टफोलियो की 5% से 10% रकम सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं में रखना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है।

Gold Price Today: सोना एक हफ्ते में ₹3000 तक हुआ सस्ता, चांदी ₹10000 लुढ़की

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Tata Motors को 3400 से ज्यादा eCV के ऑर्डर, सोमवार को शेयर भर सकता है फर्राटा

टाटा ग्रुप के कमर्शियल व्हीकल बिजनेस टाटा मोटर्स के शेयरों में सोमवार, 22 जून को अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है। कंपनी को माल ढुलाई, लॉजिस्टिक्स और यात्री परिवहन जैसे क्षेत्रों में 3,400 से ज्यादा इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों (eCV) के ऑर्डर मिले हैं। इस बारे में कंपनी ने शेयर बाजारों को जानकारी दी है। एक्सचेंज फाइलिंग में टाटा मोटर्स ने कहा कि इन ऑर्डर्स में लगभग 2,000 छोटे कमर्शियल व्हीकल्स और पिक-अप्स, 900 ट्रक और 500 बसें शामिल हैं।

इनका इस्तेमाल कई तरह के कामों में होगा, जैसे कि ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, FMCG और FMCD डिस्ट्रीब्यूशन, शहर के अंदर आवाजाही, और साथ ही सीमेंट, स्टील, माइनिंग और एयरपोर्ट ऑपरेशन्स जैसे मुश्किल क्षेत्रों में भी। इसके अलावा, ये वाहन शहर के अंदर और शहरों के बीच यात्री परिवहन के लिए भी इस्तेमाल किए जाएंगे।

टाटा मोटर्स के मुताबिक, इतने बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का इस्तेमाल असल हालात में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी समाधानों पर ग्राहकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है। साथ ही, यह पायलट प्रोग्राम से आगे बढ़कर अलग-अलग तरह के कामों में EV को बड़े पैमाने पर और ऑपरेशनल तौर पर शामिल करने की दिशा में एक अहम बदलाव का संकेत है। टाटा मोटर्स के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 401.95 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 1.48 लाख करोड़ रुपये है। शेयर BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा है।

12 महीनों में eCV पोर्टफोलियो किया काफी मजबूत

कंपनी ने कहा कि पिछले 12 महीनों में उसने अपने इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल पोर्टफोलियो को काफी मजबूत किया है। अलग-अलग तरह के कामों और ऑपरेशंस की स्थितियों के हिसाब से नई पीढ़ी के eCV पेश किए हैं। टाटा मोटर्स की पहले से ही बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक गाड़ियां चल रही हैं। कई शहरों में इसकी 3,800 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें ऑपरेशनल हैं। ये बसें कुल मिलाकर 55 करोड़ किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी हैं। छोटे कमर्शियल व्हीकल्स सेगमेंट की बात करें तो सड़कों पर 17,000 से ज्यादा Tata eSCV चल रहे हैं।

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हाल ही में सरकार के साथ किया है एक समझौता

हाल ही में टाटा मोटर्स ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के साथ समझौता किया है। इसके तहत कंपनी दिल्ली-एनसीआर में पुराने ट्रकों और बसों को नई और कम प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों से बदलने की सरकारी योजना में हिस्सा लेगी। योजना के तहत टाटा मोटर्स पात्र ग्राहकों को नए ट्रक और बस खरीदने पर एक्स-शोरूम कीमत पर 8% तक की छूट देगी। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) पर भी छूट मिलेगी।

योजना में शामिल लोगों को केंद्र सरकार की ओर से कई फायदे मिलेंगे। सरकार 5% ब्याज सब्सिडी देगी। इसके अलावा 5 साल तक हर महीने फ्यूल वाउचर भी दिए जाएंगे। योजना में शामिल राज्य सरकारें मोटर व्हीकल टैक्स में 10 साल तक 100% तक की छूट दे सकती हैं। इसके अलावा पात्र लोगों को व्हीकल रजिस्ट्रेशन फीस भी नहीं देनी होगी। योजना को लागू करने के लिए Ashok Leyland और Switch Mobility ने भी सरकार के साथ समझौता किया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

बाजार की गिरावट में छुपा है अमीरी का सीक्रेट! कब गिरेगा बाजार यह सोचना छोड़ें, SIP के इन 4 सीक्रेट्स से बुढ़ापे में बरसेंगे नोट

The Secret behind SIP Success: शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले हर निवेशक के मन में एक सवाल हमेशा घूमता रहता है ‘क्या मुझे अभी निवेश करना चाहिए या मार्केट के गिरने का इंतजार करना चाहिए?’ यह चिंता जायज भी है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति यह नहीं चाहता कि उसके निवेश करते ही बाजार में गिरावट आ जाए।

लेकिन कड़वा सच यह है कि बड़े-बड़े दिग्गज फंड मैनेजर भी मार्केट की टाइमिंग का सही अंदाजा नहीं लगा पाते। ऐसे में आम निवेशकों के लिए सबसे बेहतरीन और परखा हुआ फॉर्मूला है- सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी। 4 आसान पॉइंट्स में समझिए लॉंग टर्म में वेल्थ क्रिएशन का असली सीक्रेट।

1. मार्केट की टाइमिंग नहीं, टाइम मायने रखता है

ज्यादातर लोग सही एंट्री पॉइंट की तलाश में सालों खराब कर देते हैं। छोटे समय में बाजार उतार-चढ़ाव भरा हो सकता है। लेकिन जब आप अपने निवेश का नजरिया 10, 15 या 20 साल का कर देते हैं, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। लंबे समय में अर्थव्यवस्था बढ़ती है, कंपनियां बड़ी होती हैं और बाजार हर बड़े झटके से उबरकर नया हाई बनाता है। इसलिए बाजार कब ऊपर-नीचे हो रहा है, यह देखने के बजाय यह मायने रखता है कि आप कितने लंबे समय तक टिके रहते हैं।

2. मंदी ही है वो समय, जहां भविष्य का मुनाफा बनता है

जब बाजार ऊपर जाता है, तो हर किसी को अपनी एसआईपी का पोर्टफोलियो देखना अच्छा लगता है। लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब बाजार में बड़ी गिरावट आती है। समझदार निवेशक जानते हैं कि मंदी का समय एसआईपी के लिए ‘सेल’ की तरह होता है।

जब बाजार गिरता है, तो आपकी तय रकम जैसे- ₹5000 महीना में आपको उस म्यूचुअल फंड की ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। और जब बाजार दोबारा रिकवर होता है, तो यही मंदी के समय खरीदी गई ज्यादा यूनिट्स आपके रिटर्न को रॉकेट बना देती हैं।

3. इंसानी इमोशन और डर हो जाते हैं दूर

मार्केट की खबरों, हेडलाइंस और लोगों की बातों को सुनकर निवेशक अक्सर डर में गलत फैसले ले लेते हैं। एसआईपी इस डर को निवेश से पूरी तरह बाहर कर देती है। चूंकि हर महीने एक निश्चित तारीख को आपका पैसा खुद-ब-खुद कट जाता है, इसलिए आपको यह सोचने की जरूरत ही नहीं पड़ती कि आज मार्केट तेज है या मंदा। यह ऊंचे बाजार में कम यूनिट्स और गिरे हुए बाजार में ज्यादा यूनिट्स खरीदकर आपके निवेश की लागत को खुद ही एवरेज कर देता है।

4. निवेशक का अपना बर्ताव ही है उसका सबसे बड़ा दुश्मन

वेल्थ क्रिएशन के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा बाजार का उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि खुद निवेशक का व्यवहार होता है। जब बाजार गिरता है और चारों तरफ नकारात्मक खबरें होती हैं, तो कई लोग घबराकर अपनी एसआईपी रोक देते हैं या घाटे में म्यूचुअल फंड बेच देते हैं। ऐसा करके वे ‘मंहगे में खरीदने और सस्ते में बेचने’ के जाल में फंस जाते हैं। एसआईपी में सफल वही होता है जो बाजार के सबसे खराब दौर में भी बिना डरे अपनी किस्त चालू रखता है।

EPF से पैसा निकालने की ये भूल मत करें, नहीं तो लगेगा तगड़ा फटका; देख लें एक्सपर्ट का ये पूरा कैलकुलेशन

एसआईपी आपको बाजार के उतार-चढ़ाव से नहीं बचा सकती और न ही यह रातों-रात अमीर बनने की गारंटी देती है। लेकिन यह आपको बिना ज्यादा परेशान हुए, हर महीने अनुशासित तरीके से बचत करने की आदत डालती है। निवेश में कामयाबी एक दिन में सही फैसला लेने से नहीं, बल्कि हर महीने सही फैसले को सालों तक दोहराने से मिलती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bonus Share: हर 1 शेयर पर 5 नए शेयर फ्री पाने का मौका, 24 जून रिकॉर्ड डेट; डिविडेंड भी मिलेगा जल्द

ZF कमर्शियल व्हीकल कंट्रोल सिस्टम्स इंडिया लिमिटेड बोनस शेयर देने जा रही है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 24 जून है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में होंगे, वे बोनस शेयर पाने के हकदार होंगे। कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स को उनके पास मौजूद हर 1 शेयर पर 5 नए शेयर बोनस के तौर पर दे रही है।

बोनस इश्यू की घोषणा मई में हुई थी। बोनस शेयरों का अलॉटमेंट 25 जून को किया जाएगा। शेयर की फेस वैल्यू 5 रुपये है। ZF कमर्शियल व्हीकल कंट्रोल सिस्टम्स इंडिया, ऑटो कंपोनेंट और इक्विपमेंट सेक्टर की कंपनी है।

डिविडेंड भी देने वाली है कंपनी

ZF कमर्शियल व्हीकल कंट्रोल सिस्टम्स इंडिया वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 4 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड भी देने वाली है। इस पर 24 जुलाई को कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। उसके बाद पेमेंट 22 अगस्त को या उससे पहले किया जाएगा। डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 10 जुलाई 2026 है।

शेयर 3 महीनों में 18 प्रतिशत मजबूत

ZF Commercial Vehicle Control Systems India का शेयर BSE 500 इंडेक्स का हिस्सा है। कीमत वर्तमान में BSE पर 15764.05 रुपये है। 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 16,592.85 रुपये और एडजस्टेड लो 11,811 रुपये है। शेयर 3 महीनों में लगभग 18 प्रतिशत चढ़ा है। कंपनी में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 60 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। कंपनी का मार्केट कैप 30000 करोड़ रुपये के करीब है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

कंपनी का जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 1,132.80 करोड़ रुपये रहा। इस बीच शुद्ध मुनाफा 141.35 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 4,055.48 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 506.68 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Upcoming IPOs: AGS Health समेत 4 और कंपनियों के IPO कतार में, SEBI ने दिया ग्रीन सिग्नल

कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने 4 और कंपनियों के IPO को मंजूरी दे दी है। ये कंपनियां हैं- एजीएस हेल्थ, पीजीपी ग्लास, श्रेणी शेयर्स और SRIT इंडिया। एजीएस हेल्थ और पीजीपी ग्लास ने मार्च 2026 में सेबी के पास कॉन्फिडेंशियल तरीके से IPO का ड्राफ्ट जमा किया था। कॉन्फिडेंशियल रूट कंपनियों को लिस्टिंग पर अंतिम फैसले पर पहुंचने तक गोपनीयता की सुविधा देता है। अगर जरूरी हो तो वे बाद में बाजार की स्थितियों के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा किए बिना ड्राफ्ट को वापस भी ले सकती हैं।

कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग कंपनियों को सेंसिटिव बिजनेस डिटेल्स या फाइनेंशियल मेट्रिक्स और रिस्क्स को गोपनीय रखने की इजाजत देती है, खासकर कॉम्पिटीटर्स से। दूसरी ओर स्टैंडर्ड DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) फाइलिंग के बाद एक पब्लिक डॉक्युमेंट बन जाता है।

एजीएस हेल्थ 4500 करोड़ रुपये और पीजीपी ग्लास 4,100 करोड़ रुपये का पब्लिक इश्यू लाना चाहती है। इस तरह ये दोनों कंपनियां कुल मिलाकर 8600 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में हैं।

बाकी दोनों कंपनियों का क्या प्लान

ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के अनुसार, स्टॉक ब्रोकिंग फर्म श्रेणी शेयर्स के प्रस्तावित पब्लिक इश्यू में 69 लाख तक नए शेयर जारी होंगे। साथ ही मौजूदा शेयरधारकों की ओर से 82 लाख तक शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। कंपनी नए शेयर जारी कर हासिल होने वाली रकम का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने, कुछ कर्ज चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट कामों के लिए करने की योजना बना रही है।

ड्राफ्ट पेपर के अनुसार, SRIT इंडिया के IPO में 1.68 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी होंगे। ऑफर फॉर सेल नहीं होगा। IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल मौजूदा प्रोडक्ट्स को आधुनिक बनाने और उनके रीडेवलपमेंट, वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने, पहले से न पता अधिग्रहणों (Acquisitions) के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रोथ हासिल करने और सामान्य कॉर्पोरेट कामों के लिए किया जाएगा।

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जियो प्लेटफॉर्म्स ने भी जमा किया IPO ड्राफ्ट

जियो प्लेटफॉर्म्स ने भी अपने पब्लिक इश्यू के लिए ड्राफ्ट सेबी के पास जमा कर दिया है। यह देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू साबित हो सकता है। कंपनी करीब 4 अरब डॉलर (लगभग 37,700 करोड़ रुपये) जुटाने की योजना बना रही है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nestle India दे सकती है स्पेशल डिविडेंड का तोहफा, 3 जुलाई को होगा फाइनल

किटकैट और मैगी जैसे प्रोडक्ट्स की ओनर FMCG कंपनी नेस्ले इंडिया (Nestle India) के शेयरहोल्डर्स के लिए स्पेशल डिविडेंड की घोषणा हो सकती है। इस प्रस्ताव पर कंपनी का बोर्ड 3 जुलाई की मीटिंग में चर्चा करने वाला है। इस बारे में कंपनी ने शेयर बाजारों को जानकारी दी है। कंपनी का कहना है कि स्पेशल डिविडेंड मंजूर होने पर उसका पेमेंट 30 जुलाई को या 30 जुलाई से किया जाएगा। इस डिविडेंड पर 3 जुलाई को ही सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी।

एक्सचेंज फाइलिंग में नेस्ले इंडिया ने कहा कि कंपनी ​वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 5 रुपये प्रति शेयर का फाइनल ​डिविडेंड देने वाली है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 10 जुलाई है। यही तारीख स्पेशल डिविडेंड के लिए भी रिकॉर्ड डेट होगी। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में होंगे, वे डिविडेंड के हकदार होंगे। कंपनी इससे पहले वित्त वर्ष 2026 के लिए 7 रुपये प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड दे चुकी है।

Nestle India का शेयर 3 महीनों में 19 प्रतिशत चढ़ा

नेस्ले इंडिया के शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। BSE पर वर्तमान में शेयर प्राइस 1415.35 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 2.73 लाख करोड़ रुपये के करीब है। शेयर BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा है। 3 महीनों में शेयर की कीमत 19 प्रतिशत मजबूत हुई है। BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 1,498.60 रुपये और एडजस्टेड लो 1,085 रुपये है। कंपनी में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 62.76 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

22 जुलाई को जारी होंगे जून तिमाही के नतीजे

नेस्ले इंडिया ने यह भी जानकारी दी है कि उसका बोर्ड 22 जुलाई को भी एक मीटिंग करने वाला है। इस मीटिंग में अप्रैल-जून 2026 तिमाही के वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 6,747.79 करोड़ रुपये रहा। इस बीच शुद्ध मुनाफा 1,114.11 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वित्त वर्ष 2026 में स्टैंडअलोन रेवेन्यू 23,154.60 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 3,544.60 करोड़ रुपये रहा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IPOs This Week: 22 जून से शुरू हफ्ते में खुलेंगे 8 नए इश्यू, 6 कंपनियां होंगी लिस्ट

22 जून से शुरू हफ्ते में देश में 8 नए IPO खुलने वाले हैं। इनमें से 3 मेनबोर्ड सेगमेंट के हैं। इसके अलावा नए सप्ताह में पहले से खुले 4 IPO में भी पैसे लगाने का मौका रहेगा। इनमें से एक मेनबोर्ड सेगमेंट का है। शेयर बाजार में होने जा रही नई लिस्टिंग्स की बात करें तो नए शुरू हो रहे सप्ताह में 6 कंपनियों के शेयर अपनी शुरुआत करने वाले हैं। ये सभी SME हैं। आइए जानते हैं डिटेल…

नए IPO

Advit Jewels IPO: मेनबोर्ड सेगमेंट में यह इश्यू 23 जून को ओपन होगा। प्राइस बैंड ₹130-₹138 प्रति शेयर है। लॉट साइज 100 शेयर है। कंपनी का इरादा ₹165.16 करोड़ जुटाने का है। 25 जून को इश्यू की क्लोजिंग होने के बाद शेयर NSE और BSE पर 1 जुलाई को लिस्ट हो सकते हैं।

Waterways Leisure Tourism IPO: मेनबोर्ड सेगमेंट में ₹585 करोड़ का इश्यू 23 जून को ओपन होगा और क्लोजिंग 25 जून को होगी। प्राइस बैंड ₹769-₹808 प्रति शेयर है। लॉट साइज 18 शेयर है। कंपनी की लिस्टिंग NSE और BSE पर 1 जुलाई को होने की उम्मीद है।

Shreedhar Spinners IPO: ₹30.68 करोड़ का इश्यू 23 जून को खुलेगा और 25 जून को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹51-₹53 प्रति शेयर है। लॉट साइज 2,000 शेयर है। इश्यू की क्लोजिंग के बाद लिस्टिंग NSE SME पर 1 जुलाई को होने वाली है।

Jivial Industries IPO: यह 23 जून को खुलेगा और 25 जून को बंद होगा। कंपनी ₹31.99 करोड़ जुटाना चाहती है। फाइनल इश्यू प्राइस ₹196 प्रति शेयर और लॉट साइज 600 शेयर है। शेयर BSE SME पर 1 जुलाई को लिस्ट हो सकते हैं।

Dhanwel Hybrid Seeds IPO: यह 24 जून को खुलेगा और 29 जून को बंद होगा। इश्यू साइज ₹26.73 करोड़ है। प्राइस बैंड ₹95-₹99 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,200 शेयर है। कंपनी के शेयर BSE SME पर 2 जुलाई को शुरुआत कर सकते हैं।

CSM Technologies IPO: कंपनी ₹145.78 करोड़ जुटाना चाहती है। इश्यू 24 जून को खुलेगा और 29 जून को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹107-₹113 प्रति शेयर और लॉट साइज 132 शेयर है। लिस्टिंग NSE और BSE पर 2 जुलाई को हो सकती है।

Sri Priyanka Geo Commex IPO: यह ₹94.51 करोड़ का है। ओपनिंग 24 जून को होगी। बोली ₹207-₹212 प्रति शेयर के भाव पर लगा सकते हैं। लॉट साइज 600 शेयर है। 29 जून को इश्यू बंद होने के बाद शेयर NSE SME पर 2 जुलाई को लिस्ट हो सकते हैं।

IC Electricals IPO: यह 25 जून को खुलेगा और 30 जून को बंद होगा। अभी साइज, प्राइस बैंड, लॉट साइज तय नहीं हुआ है। शेयर NSE SME पर 3 जुलाई को शुरुआत कर सकते हैं।

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पहले से खुले IPO

Riyaasat Lifestyle IPO: ₹30.77 करोड़ का इश्यू 18 जून को खुला था और 22 जून को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹102-₹108 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,200 शेयर है। अभी तक यह महज 8 प्रतिशत भरा है। शेयर BSE SME पर 25 जून को लिस्ट हो सकते हैं।

Avience Biomedicals IPO: ₹30.24 करोड़ का इश्यू 22 जून को बंद होगा। 18 जून से अब तक यह 43.79 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। प्राइस बैंड ₹196-₹208 प्रति शेयर है। लॉट साइज 600 शेयर है। कंपनी के शेयर NSE SME पर 25 जून को लिस्ट हो सकते हैं।

Anubhav Plast IPO: यह 19 जून को खुला था और 23 जून को बंद होगा। कंपनी ₹24 करोड़ जुटाना चाहती है। इश्यू अब तक 1.21 गुना भर चुका है। बोली ₹77-₹80 प्रति शेयर के प्राइस बैंड में लगा सकते हैं। लॉट साइज 1,600 शेयर है। कंपनी के BSE SME पर 29 जून को लिस्ट होने की उम्मीद है।

Turtlemint Fintech Solutions IPO: यह इश्यू भी 19 जून को खुला था और 23 जून को बंद होगा। साइज ₹882.67 करोड़ है। प्राइस बैंड ₹144-₹152 प्रति शेयर और लॉट साइज 98 शेयर है। अभी तक यह IPO 46 प्रतिशत सब्सक्राइब हो चुका है। शेयरों की लिस्टिंग NSE और BSE पर 29 जून को हो सकती है।

इन कंपनियों की होगी लिस्टिंग

नए सप्ताह में 24 जून को NSE SME पर Clay Craft की लिस्टिंग होने वाली है। इसी दिन BSE SME पर Diksha Polymers, Leapfrog Engineering और Liotech Industries के शेयर अपनी शुरुआत कर सकते हैं। इसके बाद 25 जून को BSE SME पर Riyaasat Lifestyle के लिस्ट होने की उम्मीद है। इसी दिन NSE SME पर Avience Biomedicals की लिस्टिंग हो सकती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।