बाजार की गिरावट में छुपा है अमीरी का सीक्रेट! कब गिरेगा बाजार यह सोचना छोड़ें, SIP के इन 4 सीक्रेट्स से बुढ़ापे में बरसेंगे नोट

The Secret behind SIP Success: शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले हर निवेशक के मन में एक सवाल हमेशा घूमता रहता है ‘क्या मुझे अभी निवेश करना चाहिए या मार्केट के गिरने का इंतजार करना चाहिए?’ यह चिंता जायज भी है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति यह नहीं चाहता कि उसके निवेश करते ही बाजार में गिरावट आ जाए।

लेकिन कड़वा सच यह है कि बड़े-बड़े दिग्गज फंड मैनेजर भी मार्केट की टाइमिंग का सही अंदाजा नहीं लगा पाते। ऐसे में आम निवेशकों के लिए सबसे बेहतरीन और परखा हुआ फॉर्मूला है- सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी। 4 आसान पॉइंट्स में समझिए लॉंग टर्म में वेल्थ क्रिएशन का असली सीक्रेट।

1. मार्केट की टाइमिंग नहीं, टाइम मायने रखता है

ज्यादातर लोग सही एंट्री पॉइंट की तलाश में सालों खराब कर देते हैं। छोटे समय में बाजार उतार-चढ़ाव भरा हो सकता है। लेकिन जब आप अपने निवेश का नजरिया 10, 15 या 20 साल का कर देते हैं, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। लंबे समय में अर्थव्यवस्था बढ़ती है, कंपनियां बड़ी होती हैं और बाजार हर बड़े झटके से उबरकर नया हाई बनाता है। इसलिए बाजार कब ऊपर-नीचे हो रहा है, यह देखने के बजाय यह मायने रखता है कि आप कितने लंबे समय तक टिके रहते हैं।

2. मंदी ही है वो समय, जहां भविष्य का मुनाफा बनता है

जब बाजार ऊपर जाता है, तो हर किसी को अपनी एसआईपी का पोर्टफोलियो देखना अच्छा लगता है। लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब बाजार में बड़ी गिरावट आती है। समझदार निवेशक जानते हैं कि मंदी का समय एसआईपी के लिए ‘सेल’ की तरह होता है।

जब बाजार गिरता है, तो आपकी तय रकम जैसे- ₹5000 महीना में आपको उस म्यूचुअल फंड की ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। और जब बाजार दोबारा रिकवर होता है, तो यही मंदी के समय खरीदी गई ज्यादा यूनिट्स आपके रिटर्न को रॉकेट बना देती हैं।

3. इंसानी इमोशन और डर हो जाते हैं दूर

मार्केट की खबरों, हेडलाइंस और लोगों की बातों को सुनकर निवेशक अक्सर डर में गलत फैसले ले लेते हैं। एसआईपी इस डर को निवेश से पूरी तरह बाहर कर देती है। चूंकि हर महीने एक निश्चित तारीख को आपका पैसा खुद-ब-खुद कट जाता है, इसलिए आपको यह सोचने की जरूरत ही नहीं पड़ती कि आज मार्केट तेज है या मंदा। यह ऊंचे बाजार में कम यूनिट्स और गिरे हुए बाजार में ज्यादा यूनिट्स खरीदकर आपके निवेश की लागत को खुद ही एवरेज कर देता है।

4. निवेशक का अपना बर्ताव ही है उसका सबसे बड़ा दुश्मन

वेल्थ क्रिएशन के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा बाजार का उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि खुद निवेशक का व्यवहार होता है। जब बाजार गिरता है और चारों तरफ नकारात्मक खबरें होती हैं, तो कई लोग घबराकर अपनी एसआईपी रोक देते हैं या घाटे में म्यूचुअल फंड बेच देते हैं। ऐसा करके वे ‘मंहगे में खरीदने और सस्ते में बेचने’ के जाल में फंस जाते हैं। एसआईपी में सफल वही होता है जो बाजार के सबसे खराब दौर में भी बिना डरे अपनी किस्त चालू रखता है।

EPF से पैसा निकालने की ये भूल मत करें, नहीं तो लगेगा तगड़ा फटका; देख लें एक्सपर्ट का ये पूरा कैलकुलेशन

एसआईपी आपको बाजार के उतार-चढ़ाव से नहीं बचा सकती और न ही यह रातों-रात अमीर बनने की गारंटी देती है। लेकिन यह आपको बिना ज्यादा परेशान हुए, हर महीने अनुशासित तरीके से बचत करने की आदत डालती है। निवेश में कामयाबी एक दिन में सही फैसला लेने से नहीं, बल्कि हर महीने सही फैसले को सालों तक दोहराने से मिलती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

₹89600 का भारी नुकसान! 30 की बजाय 45 की उम्र में SIP शुरू की तो लगेगा 546% का झटका, यूं डूबेगा ₹5 करोड़ का सपना

Investment Tips: जब बात वेल्थ क्रिएशन यानी अमीर बनने की आती है, तो पर्सनल फाइनेंस का एक सीधा और अचूक नियम काम करता है। आप हर महीने कितनी बड़ी रकम निवेश कर रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा मायने यह रखता है कि आप कितने लंबे समय तक निवेशित रहते हैं।

अक्सर युवा यह सोचकर निवेश टालते रहते हैं कि जब हाथ में बड़ी सैलरी आएगी या जब वे फाइनेंशियली पूरी तरह सेटल हो जाएंगे, तब शुरुआत करेंगे। लेकिन एक्सपर्ट्स कड़े शब्दों में आगाह करते हैं कि शुरुआत में की गई यह छोटी सी देरी भी आपके लॉन्ग-टर्म गोल्स पर बहुत भारी पड़ सकती है। सीधे शब्दों में कहें तो कंपाउंडिंग की ताकत का पूरा फायदा उठाने के लिए आपका जल्द से जल्द शुरुआत करना बेहद जरूरी है।

अगर आपका लक्ष्य 60 साल की उम्र तक ₹5 करोड़ का बड़ा फंड तैयार करना है, तो 30 साल की उम्र और 45 साल की उम्र में निवेश शुरू करने के बीच का अंतर आपको चौंका देगा।

उम्र 30 बनाम 45: रिटर्न पर 546% का आ जाएगा अंतर

अगर आप 60 साल की उम्र में ₹5 करोड़ का फंड चाहते हैं, तो उम्र के हिसाब से आपका गणित कुछ ऐसा होगा:

30 साल की उम्र में शुरुआत: अगर आप 30 साल की उम्र से निवेश शुरू करते हैं, तो आपको हर महीने केवल ₹16400 रुपये की SIP करनी होगी।

45 साल की उम्र में शुरुआत: अगर आप यही फैसला टालते रहते हैं और 45 साल की उम्र में शुरुआत करते हैं, तो उसी ₹5 करोड़ के लक्ष्य के लिए आपको हर महीने ₹1.06 लाख की SIP करनी होगी।

यानी सिर्फ 15 साल की देरी करने की वजह से आपको हर महीने ₹89600 रुपये ज्यादा जेब से निकालने होंगे। यह आपके मंथली कमिटमेंट में सीधे 546 फीसदी यानी करीब 6.5 गुना का बड़ा उछाल है।

30 साल के युवाओं के लिए सही एसेट एलोकेशन स्ट्रेटेजी

एक्सपर्ट्स के अनुसार, 30 साल के निवेशक को रिटर्न के पीछे भागने से पहले अपनी फाइनेंशियल नींव मजबूत करनी चाहिए। इसके लिए तीन कदम जरूरी हैं:

इमरजेंसी फंड: सबसे पहले कम से कम 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाएं।

इंश्योरेंस: पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस जरूर लें।

लॉन्ग टर्म SIP: ये बेसिक्स पूरे होने के बाद ही रिटायरमेंट के लिए लंबी अवधि की SIP शुरू करें।

चूंकि रिटायरमेंट में 30 साल का लंबा वक्त है, इसलिए शुरुआती सालों में इक्विटी को मुख्य ग्रोथ एसेट बनाना चाहिए। वहीं स्थिरता के लिए डेट फंड, प्रोविडेंट फंड (EPF/PPF), एनपीएस और गोल्ड का सहारा लिया जा सकता है। जैसे-जैसे आप रिटायरमेंट के करीब पहुंचें, पोर्टफोलियो को वेल्थ क्रिएशन से शिफ्ट करके कैपिटल प्रोटेक्शन की तरफ ले जाना चाहिए।

रिटायरमेंट गोल्स के लिए इक्विटी क्यों है बेहद जरूरी?

लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट गोल्स के लिए फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स अकेले टैक्स के बाद महंगाई को मात नहीं दे पाते। इसलिए इक्विटी का रोल बहुत अहम हो जाता है। हालांकि, इक्विटी को शॉर्ट-टर्म प्रोडक्ट नहीं समझना चाहिए। 30 साल के निवेशक को हर 6 महीने या 1 साल में इक्विटी के प्रदर्शन को जज नहीं करना चाहिए, बल्कि एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाकर समय-समय पर उसका रिव्यू करना चाहिए।

युवा निवेशक भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां

मार्केट करेक्शन में SIP रोकना: कई युवा मार्केट में गिरावट आते ही डरकर अपनी SIP रोक देते हैं। यह लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग के पूरे मकसद को खत्म कर देता है। मार्केट करेक्शन तो आपको सस्ते में ज्यादा म्यूचुअल फंड यूनिट्स बटोरने का मौका देता है।

लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन: सैलरी बढ़ने के साथ अगर आप अपनी SIP नहीं बढ़ाते, तो आप एक बड़ा मौका खो रहे हैं। इसका आसान समाधान है 10% की एनुअल स्टेप-अप SIP अपनाएं, जिससे हर साल आपकी निवेश राशि अपने आप बढ़ती रहे।

शॉर्ट-टर्म खर्चों के लिए फंड निकालना: लोग गैजेट्स खरीदने, गाड़ी अपग्रेड करने या वेकेशन पर जाने के लिए अपने रिटायरमेंट फंड को बीच में ही निकाल लेते हैं। यह गलती कभी न करें।

‘बाय एंड फॉर्गेट’ की मानसिकता: निवेश करके भूल जाना सही रणनीति नहीं है। एसेट एलोकेशन, टैक्स एफिशिएंसी और परफॉर्मेंस कंसिस्टेंसी के लिए पोर्टफोलियो का पीरियोडिक रिव्यू बेहद जरूरी है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।