Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद नियमित कमाई चाहिए? जानिए आपके लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट

Retirement Planning: रिटायरमेंट प्लानिंग अब सिर्फ बचत तक सीमित नहीं रह गई है। बढ़ती उम्र, महंगाई और इलाज का खर्च देखते हुए समय रहते बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना जरूरी हो गया है। नौकरीपेशा लोगों को EPF का फायदा मिलता है। लेकिन इसके अलावा भी कई सरकारी और मार्केट से जुड़ी स्कीम हैं, जो रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का सहारा बन सकती हैं।

NPS (National Pension System)

NPS सरकार की रिटायरमेंट स्कीम है। इसे PFRDA रेगुलेट करता है। इसमें नौकरीपेशा और स्वरोजगार करने वाले, दोनों निवेश कर सकते हैं।

इसमें पैसा इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी बॉन्ड और दूसरे एसेट्स में लगाया जाता है। रिटायरमेंट पर कुछ रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी होती है, जिससे हर महीने पेंशन मिलती है। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है।

EPF (Employees’ Provident Fund)

EPF संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सबसे लोकप्रिय रिटायरमेंट स्कीम है। हर महीने कर्मचारी और कंपनी, दोनों बेसिक सैलरी और DA का तय हिस्सा जमा करते हैं।

इस पर EPFO हर साल ब्याज तय करता है। फिलहाल ब्याज दर 8.25% सालाना है। रिटायरमेंट पर पूरा फंड निकाला जा सकता है। वहीं, इलाज, घर खरीदने या पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी भी की जा सकती है।

PPF (Public Provident Fund)

PPF सरकार समर्थित लंबी अवधि की बचत योजना है। इसकी मैच्योरिटी 15 साल की होती है, जिसे 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है।

इसकी ब्याज दर सरकार तय करती है। रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है। यह लंबी अवधि में सुरक्षित रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प माना जाता है।

APY (Atal Pension Yojana)

अटल पेंशन योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, पात्रता पूरी करने वाले दूसरे लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

इसमें कामकाजी उम्र के दौरान नियमित निवेश करना होता है। तय उम्र के बाद हर महीने गारंटीड पेंशन मिलती है। पेंशन की रकम आपके योगदान और चुने गए विकल्प पर निर्भर करती है।

SCSS (Senior Citizens’ Savings Scheme)

SCSS खास तौर पर रिटायर हो चुके लोगों के लिए है। इसमें बैंक और पोस्ट ऑफिस के जरिए निवेश किया जा सकता है।

सरकार समय-समय पर इसकी ब्याज दर तय करती है। ब्याज नियमित अंतराल पर मिलता है, इसलिए रिटायरमेंट के बाद नियमित आय चाहने वालों के बीच यह काफी लोकप्रिय है।

म्यूचुअल फंड

सरकारी योजनाओं के अलावा म्यूचुअल फंड भी रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प हो सकते हैं। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, इनमें बाजार का जोखिम भी रहता है।

SIP के जरिए हर महीने निवेश करने से लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है। रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर कई निवेशक डेट फंड जैसे स्थिर विकल्पों का रुख करते हैं। इनमें जोखिम कम होता है।

कौन-सी स्कीम चुनें?

हर व्यक्ति के लिए एक ही रिटायरमेंट प्लान सही नहीं हो सकता। सही विकल्प आपकी उम्र, आय, नौकरी, जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट के लक्ष्य पर निर्भर करता है फाइनेंशयल एडवाइजर आमतौर पर सिर्फ एक स्कीम पर निर्भर रहने से बचने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक- आपको अलग अलग स्कीमों में निवेश करना चाहिए, ताकि जोखिम कम रहे।

उदाहरण के लिए, नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF आधार बन सकता है। वहीं NPS, PPF और म्यूचुअल फंड अतिरिक्त रिटायरमेंट फंड बनाने में मदद कर सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद SCSS जैसी स्कीम नियमित कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Retail Inflation: महंगाई का झटका! जून में बढ़कर 4.38% पहुंची, RBI के लक्ष्य से ऊपर निकली

Retail Inflation: जून महीने में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई। मई में यह 3.93% थी। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों और ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ने से महंगाई में फिर तेजी आई है। यह पिछले 6 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है और RBI के 4% के लक्ष्य से भी ऊपर निकल गई है।

खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाई महंगाई

जून में महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दाम रहे। फूड इंफ्लेशन मई के 4.78% से बढ़कर जून में 5.32% हो गई। चूंकि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में खाने-पीने की चीजों का हिस्सा सबसे ज्यादा होता है, इसलिए इनके दाम बढ़ने का असर सीधे कुल महंगाई पर पड़ा।

होटल और रेस्तरां में खाने-पीने की सेवाएं भी 6.94% महंगी हुईं। वहीं, निजी गाड़ी चलाने का खर्च 7.35% और माल ढुलाई सेवाओं की लागत 7.70% बढ़ गई। इससे साफ है कि ईंधन और लॉजिस्टिक्स का खर्च भी बढ़ा है।

गहनों की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

‘अन्य व्यक्तिगत सामान’ श्रेणी सबसे ज्यादा महंगी रही। इसमें सोने-चांदी और गहने शामिल हैं। इस श्रेणी में महंगाई दर 50.17% रही। हालांकि, मई में यह 56.35% थी, यानी बढ़ोतरी की रफ्तार पहले के मुकाबले थोड़ी कम हुई है।

कुछ चीजों के दाम घटे भी

हर चीज महंगी नहीं हुई। जून में कुछ टिकाऊ सामानों की कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई। गाड़ियों की खरीद पर महंगाई दर -4.59% रही। वहीं मनोरंजन से जुड़े टिकाऊ सामान और घर-बगीचे में इस्तेमाल होने वाले कुछ उपकरण भी सस्ते हुए। सरकार का कहना है कि GST में पहले की गई कटौती का असर इन प्रोडक्ट्स की कीमतों पर दिखा।

गांवों में ज्यादा बढ़ी महंगाई

महंगाई का असर ग्रामीण इलाकों में ज्यादा देखने को मिला। जून में ग्रामीण महंगाई 4.74% रही, जो मई में 4.25% थी। वहीं शहरी महंगाई 3.53% से बढ़कर 3.92% हो गई। इससे पता चलता है कि खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों का असर गांवों में ज्यादा पड़ा।

इस साल के पहले पांच महीनों में महंगाई लगातार कम हो रही थी, लेकिन जून में इसमें फिर तेजी आ गई। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतें ही महंगाई की दिशा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

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L&T Finance Share Price: Q1 में मुनाफा बढ़ने से शेयर 3% चढ़ा, अब खरीदें, बेचें या करें होल्ड?

L&T Finance Share Price:  L&T फाइनेंस लिमिटेड के शेयर सोमवार, 13 जुलाई को 3.8% तक बढ़ गए। यह तब हुआ जब लेंडर ने जून तिमाही के लिए अपना अब तक का सबसे ज़्यादा तिमाही कंसोलिडेटेड प्रॉफिट बताया। इसमें मजबूत रिटेल लोन ग्रोथ, अच्छे डिस्बर्समेंट और एसेट क्वालिटी में सुधार की मदद मिली, जिससे नोमुरा को अपनी कमाई का अनुमान बढ़ाना पड़ा।

L&T के शेयर आज NSE पर ₹321.25 पर खुले, जो शुक्रवार को पिछले बंद के बराबर है। 13 जुलाई को स्टॉक ने ₹333.50 प्रति शेयर का इंट्राडे हाई छुआ।

कैसे रहे Q1 नतीजे

L&T फाइनेंस ने 30 जून, 2026 (Q1 FY27) को खत्म हुई तिमाही के लिए कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफ़िट में साल-दर-साल (YoY) 28.7% की बढ़ोतरी दर्ज की, जो पिछले साल इसी समय में ₹701.10 करोड़ था। तिमाही के दौरान कंपनी का ऑपरेशन से कुल रेवेन्यू YoY 22.4% बढ़कर ₹5,212.92 करोड़ हो गया, जबकि टैक्स से पहले प्रॉफ़िट (PBT) 31.1% बढ़कर ₹943.22 करोड़ हो गया।

इसकी कंसोलिडेटेड लोन बुक सालाना आधार पर 27% बढ़कर 30 जून, 2026 तक ₹1,29,634 करोड़ हो गई, जो एक साल पहले ₹1,02,314 करोड़ थी। रिटेल लोन बुक ₹99,816 करोड़ से 28% बढ़कर ₹1,27,535 करोड़ हो गई, जो ग्रामीण और शहरी बाज़ारों में ग्रोथ और हाई-यील्ड लोन प्रोडक्ट्स पर लगातार फोकस की वजह से हुई।

L&T फाइनेंस ने तिमाही के दौरान एसेट क्वालिटी में सुधार की भी रिपोर्ट दी। ग्रॉस स्टेज 3 (GS3) एसेट्स 30 जून, 2026 तक घटकर 2.86% हो गए, जो एक साल पहले 3.31% थे, जबकि नेट स्टेज 3 (NS3) एसेट्स 0.99% से सुधरकर 0.90% हो गए, जो कंपनी के लोन पोर्टफोलियो और ओवरऑल एसेट क्वालिटी में लगातार मज़बूती दिखाता है।

LTF के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, सुदीप्ता रॉय ने कहा, “Q1FY27 एक और तिमाही थी जहाँ हम जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं, महंगाई के दबाव और बढ़ी हुई उधारी लागतों वाले बदलते मैक्रोइकोनॉमिक माहौल के बीच डिसिप्लिन्ड एग्ज़िक्यूशन पर फोकस करते रहे। इन बाहरी फैक्टर्स के बावजूद, हमारी डायवर्सिफाइड रिटेल फ्रैंचाइज़ी ने लगातार मज़बूती दिखाई, जिससे हमारे लक्ष्य 31 स्ट्रेटेजिक प्लान के लक्ष्यों के मुताबिक मज़बूत बिज़नेस मोमेंटम और हेल्दी बुक ग्रोथ मिली।”

खरीदें, बेचें या रहे बने, जानें एक्सपर्ट की राय

ब्रोकरेज फर्म JM फाइनेंशियल ने L&T फाइनेंस स्टॉक के लिए अपनी ‘ऐड’ रेटिंग बनाए रखी है, जिसका टारगेट प्राइस ₹305 है, और कहा है कि कंपनी ने उम्मीद से ज़्यादा मज़बूत नॉन-इंटरेस्ट इनकम की रिपोर्ट दी है, जिससे PPOP (35% YoY/10% QoQ) में 4% की बढ़त हुई है, जबकि रिपोर्टेड NIM+फीस 10.47% (फ्लैट QoQ) पर स्टेबल है, जो मैनेजमेंट गाइडेंस 10–10.5% के मुताबिक है।

उसने कहा, “रिटेल स्टेज-2/-3 में 13bps/5bps QoQ की गिरावट, क्रेडिट कॉस्ट में नरमी के साथ 2.55% (-6bps QoQ) और स्टेज-3 ECL कवरेज में 200bps की बढ़ोतरी के साथ एसेट क्वालिटी में सुधार जारी रहा।”

इस बीच, ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि LTF की 1QFY27 की कमाई मोटे तौर पर सही रही, जिसे मजबूत डिस्बर्समेंट से सपोर्ट मिला, जिससे रिटेल लोन ग्रोथ अच्छी हुई। एसेट क्वालिटी मोटे तौर पर स्थिर रही, जिससे क्रेडिट कॉस्ट में क्रमिक रूप से कमी आई। अनिश्चित जियोपॉलिटिकल माहौल और तिमाही के दौरान ऊंचे बॉन्ड यील्ड के बावजूद, CoF और NIMs + फीस काफी हद तक स्थिर रहे।

नोमुरा

नोमुरा ने ₹370 के टारगेट प्राइस के साथ स्टॉक पर अपनी ‘buy’ रेटिंग बनाए रखी, और कहा कि पहली तिमाही का प्रॉफिट उसके अनुमान से 8% ज़्यादा रहा। टारगेट प्राइस का मतलब है कि स्टॉक के मौजूदा ट्रेडिंग लेवल में 13% की बढ़त हुई है।

ब्रोकरेज ने कहा कि एसेट क्वालिटी के ट्रेंड अच्छे थे, खासकर टू-व्हीलर फाइनेंसिंग बिज़नेस में, जहां AI वाले अंडरराइटिंग इंजन ने परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने में मदद की है। इसने FY27-FY29 के कमाई के अनुमानों में 2-10% की बढ़ोतरी की, जबकि मानसून और प्रस्तावित इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन सुधारों को मुख्य रिस्क बताया।

जेपी मॉर्गन

जेपी मॉर्गन ने ₹320 के टारगेट प्राइस के साथ अपनी ‘न्यूट्रल’ रेटिंग बनाए रखी, और कहा कि प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट और नेट प्रॉफिट उसके अनुमान से लगभग 4% ज़्यादा थे। स्टॉक अभी जेपी मॉर्गन के टारगेट लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा है।ब्रोकरेज ने कहा कि उम्मीद से ज़्यादा मज़बूत फीस इनकम और कम ऑपरेटिंग खर्च ने थोड़े कमज़ोर नेट इंटरेस्ट मार्जिन की भरपाई कर दी, जिसका श्रेय उसने जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के बीच कंपनी के ज़्यादा लिक्विडिटी बफर बनाए रखने को दिया।

जेपी मॉर्गन ने यह भी बताया कि ग्रॉस स्टेज-2 और स्टेज-3 एसेट्स में एक के बाद एक सुधार हुआ है, हालांकि उसे उम्मीद है कि इन्वेस्टर्स मानसून सीज़न में एसेट क्वालिटी ट्रेंड्स पर करीब से नज़र रखेंगे। ब्रोकरेज ने आगे कहा कि स्टॉक की हालिया रैली, जिसमें पिछले महीने 23% का फ़ायदा हुआ, ने वैल्यूएशन बढ़ा दिया है और आगे री-रेटिंग को रोक सकता है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Today: Bull या Bear बाजार पर आज किसकी होगी पकड़, जानें Gift Nifty से क्या मिल रहा संकेत

Stock Market Today: हफ्ते के पहले दिन सोमवार 13 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स-निफ्टी के गिरावट के साथ खुलने की संभावना है। GIFT निफ्टी लगभग 208.50 पॉइंट्स की गिरावट के साथ 24,024 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है जो बड़े गैप -डाउन के संकेत दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से मिलिट्री तनाव बढ़ने से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं और ग्लोबल मार्केट में रिस्क लेने की क्षमता कम हो गई है।

गिफ्ट निफ्टी लाइव चार्ट क्या संकेत देता है?

गिफ्ट निफ्टी सुबह करीब 8.20 बजे 24,024 पर ट्रेड कर रहा था, जो 210.50 पॉइंट्स या 0.88 प्रतिशत नीचे था, जिससे संकेत मिलता है कि निफ्टी 50 शुक्रवार के 24,206.90 के बंद होने से काफी नीचे खुल सकता है। यह कमज़ोर संकेत तब आया है जब पिछले हफ़्ते भारतीय इक्विटीज मजबूती के साथ बंद हुए थे। सेंसेक्स 827.6 पॉइंट्स या 1.08 प्रतिशत बढ़कर 77,569.4 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 244.1 पॉइंट्स या 1.02 प्रतिशत चढ़कर 24,206.9 पर पहुंच गया।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि भारतीय इक्विटी मार्केट सावधानी से खुलने की उम्मीद है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच नए मिलिट्री हमलों के बाद जियोपॉलिटिकल टेंशन फिर से बढ़ गई है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और फाइनेंशियल मार्केट में रिस्क से बचने की सोच बढ़ गई है। इस बढ़ोतरी से कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी से उछाल आया है, जिससे कुल मिलाकर इन्वेस्टर सेंटिमेंट पर असर पड़ा है। गिफ्ट निफ्टी अभी 24,100 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो शुक्रवार के निफ्टी क्लोजिंग 24,206.90 से नीचे है, जो घरेलू इक्विटी के लिए गैप-डाउन शुरुआत का संकेत देता है।

निफ्टी के लिए क्या लेवल होंगे अहम

आज निफ्टी 50 के आउटलुक पर बात करते हुए, रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, अजीत मिश्रा ने कहा कि निफ्टी 50 ने 23,800 सपोर्ट ज़ोन को बचाने के बाद तेजी से वापसी की है और एक बार फिर 24150 के आसपास 100 DEMA मार्क को वापस पा लिया है, जो निचले लेवल पर खरीदारी में नई दिलचस्पी का संकेत देता है। 24,150 जोन से ऊपर लगातार मूव करने से 24,400–24,600 रीजन की ओर बढ़ने का रास्ता बन सकता है। नीचे की तरफ, 24,000 मार्क से तुरंत सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, इसके बाद 23,800 ज़ोन मिलेगा।

58,200–58,300 के ऊपर बैंक निफ्टी देगा मजबूती

आज बैंक निफ्टी के आउटलुक पर, एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का मानना ​​है कि 58,000 के साइकोलॉजिकल लेवल को वापस पाने के बाद बैंक निफ्टी एक कंस्ट्रक्टिव टेक्निकल स्ट्रक्चर दिखाना जारी रखेगा। टेक्निकल नजरिए से, 58,200–58,300 ज़ोन अभी भी तुरंत रेजिस्टेंस बना हुआ है। इस रीजन से ऊपर लगातार मूव करने से बुलिश मोमेंटम मजबूत होगा और रिकवरी 58,600–58,700 ज़ोन की ओर बढ़ सकती है, इसके बाद 59,000 का साइकोलॉजिकल मार्क मिलेगा।

नीचे की तरफ, 58,000 लेवल से तुरंत सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, इसके बाद 57,800–57,700 जोन मिलेगा। मौजूदा रिकवरी स्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए इन लेवल से ऊपर बने रहना जरूरी होगा। हालांकि, 57,700 से नीचे एक बड़ा ब्रेक प्रॉफिट बुकिंग को ट्रिगर कर सकता है और इंडेक्स को 57,500–57,300 सपोर्ट रीजन की ओर खींच सकता है।

मिडिल ईस्ट में तनाव फिर से बढ़ने से क्रूड ऑयल में उछाल

वीकेंड में यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच नए दुश्मनी के बाद इन्वेस्टर्स का सेंटिमेंट तेज़ी से सतर्क हो गया, जिससे पिछले महीने हुए नाजुक शांति समझौते को खतरा पैदा हो गया। ईरान ने कहा कि उसने US सेना के साथ भारी मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया है, जिससे दुनिया के सबसे ज़रूरी ऑयल शिपिंग रूट्स में से एक में संभावित रुकावटों को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिसके ज़रिए ग्लोबल पेट्रोलियम का लगभग पांचवां हिस्सा…

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4 परसेंट से ज़्यादा बढ़कर लगभग $79 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड $74 प्रति बैरल से ऊपर चढ़ गया, जिससे महंगाई और ग्लोबल इंटरेस्ट-रेट आउटलुक को लेकर चिंताएँ फिर से बढ़ गईं।

रिस्क लेने की क्षमता कम होने से एशियाई मार्केट में गिरावट

सोमवार को एशियाई इक्विटी में गिरावट आई क्योंकि क्रूड की कीमतों में उछाल और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के नए दौर ने इन्वेस्टर्स को रिस्क एसेट्स में अपना एक्सपोजर कम करने के लिए मजबूर किया। जापान का निक्केई 1.6 परसेंट गिरा, जबकि जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.9 परसेंट गिरा।

US इक्विटी फ्यूचर्स भी कमजोर हुए, S&P 500 फ्यूचर्स 0.4 परसेंट और नैस्डैक फ्यूचर्स 0.9 परसेंट नीचे गिरे। यूरोपियन फ्यूचर्स ने नरम ओपनिंग का संकेत दिया, जिसमें यूरो स्टॉक्स 50 और DAX फ्यूचर्स दोनों 0.6 परसेंट नीचे थे।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : 13 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स की शुरुआत खराब रहने की संभावना है। शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी 0.79 फीसदी कमजोरी के साथ 24,045 के आसपास ट्रेड कर रह है। यह एक निगेटिव संकेत है। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

10 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में लगातार दूसरे दिन भी रिकवरी जारी रही। अलग-अलग सेक्टर में हुई जबरदस्त खरीदारी के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी,दोनों में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों के बीच बाजार मजबूती के साथ खुला और पूरे सेशन के दौरान बढ़त बनाए रखी। निफ्टी 50 ने इंट्राडे में 24,228.45 का हाई लेवल छुआ। इस तेज़ी में IT शेयरों का अहम योगदान रहा। वहीं,रियल्टी,मेटल और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ने सेंटीमेंट को और मजबूत किया। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 827.57 अंक या 1.08 प्रतिशत बढ़कर 77,569.39 पर और निफ्टी 244.10 अंक या 1.02 प्रतिशत बढ़कर 24,206.90 पर बंद हुआ।

ब्रेंट क्रूड 4% बढ़कर $79 प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट में टेंशन से ब्रेंट क्रूड 4% बढ़कर $79 प्रति बैरल के पार चला गया है। डॉलर इंडेक्स भी 101 के ऊपर है। इधर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से सोना $4,100 के नीचे फिसल गया है।

LTM के उम्मीद से बेहतर नतीजे, L&T फाइनेंस का मुनाफा 28% बढ़ा

LTM ने पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की constant currency यानी CC रेवेन्यू ग्रोथ 0.3% रही है। कंपनी के मुनाफे में 9% से ज्यादा की बढ़त रही है। वहीं मार्जिन में भी सुधार दिखा है। ऑर्डर बुक भी मजबूत रही है। दूसरी ओर L&T Finance की प्रॉफिट और ब्याज से होने वाली कमाई यानी NII 28% से ज्यादा बढ़ी है। रिटेल लोन बुक गाइडेंस से कहीं बेहतर रही है।

डीमार्ट: Q1 मुनाफे में 11.3% का उछाल

पहली तिमाही में एवेन्यू सुपरमाट्स के नतीजे अनुमान के मुताबिक रहे हैं। कंपनी के मुनाफे में 11 परसेंट और रेवेन्यू में 15 परसेंट की ग्रोथ रही है। हालांकि मार्जिन बिल्कुल फ्लैट रहे हैं। मेट्रो शहरों के स्टोर्स की ग्रोथ में दबाव दिखा है।

आज आएंगे HCL TECH के नतीजे

निफ्टी में आज HCL TECH के नतीजे आएंगे। इसकी कॉन्सटेंट करेंसी में 1.1 परसेंट और डॉलर आय में 1.3% गिरावट का अनुमान है। हालांकि मार्जिन 30 Bps बढ़ने की उम्मीद है।

SBI फंड्स मैनेजमेंट का IPO का साइज घटा

SBI फंड्स मैनेजमेंट के IPO का साइज घटा है। इश्यू का साइज 11700 करोड़ रुपए से घटकर 9813 करोड़ रुपए हुआ है। इधर दिग्गजों को प्री-IPO स्टेक बेचकर SBI ने 1655 करोड़ रुपए जुटाए हैं। SBI के OFS का हिस्सा घटकर 6.30% से 4.89% पर आ गया है।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07:50 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 195 अंक यानी 0.80 फीसदी की गिरावट के साथ 24,040.50 के आसपास कारोबार कर रहा था। ये सेंसेक्स-निफ्टी के लिए निगेटिव संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में मिलाजुला कारोबार देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई में 1.20 फीसदी की कमजोरी देखने को मिल रही है। स्ट्रेट टाइम्स भी 0.20 फीसदी की गिरावट दिखा रहा है। हैंग सेंग में 0.85 फीसदी की तेजी दिख रही है। ताइवान के बाजार में भी 0.82 फीसदी की बढ़त नजर आ रही है। वहीं, कोस्पी करीब 4.75 फीसदी नीचे है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.71 फीसदी की कमजोरी नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

शुक्रवार को S&P 500 में 0.42% की बढ़त हुई और यह 7,575.39 के लेवल पर बंद हुआ। यह 2 जून को बने रिकॉर्ड हाई क्लोज़ से अभी भी 0.45% नीचे है। Nasdaq भी 0.29% की बढ़त के साथ यह 26,281.61 के लेवल पर पहुंच गया। जबकि डाओ जोन्स में 0.29% की बढ़त हुई और यह 52,637.01 के स्तर पर बंद हुआ।

डॉलर इंडेक्स

मिडिल ईस्ट में फिर से शुरू हुए टकराव से महंगाई का डर बढ़ गया और सेंट्रल बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना भी बढ़ गई है। जिसके चलते डॉलर अपनी ज़्यादातर प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ है। फिलहाल US डॉलर इंडेक्स 101.17 पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10-साल और 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड में 2 बेसिस पॉइंट से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जिससे ये क्रमशः 4.58% और 4.23% पर पहुंच गए हैं।

एशियन करेंसी

सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई मुद्राओं में मिला-जुला कारोबार हुआ,रीजनल बाजारों में सतर्कता का माहौल दिखा। इंडोनेशियाई रुपया सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुद्रा है। जिसमें 0.35% की बढ़त हुई। इसके बाद चीनी रेनमिनबी (+0.22%) और ताइवान डॉलर (+0.19%) का स्थान रहा। दूसरी तरफ,साउथ कोरियन वॉन इस इलाके की सबसे कमजोर करेंसी है,जिसमें 0.34% की गिरावट आई,जबकि जापानी येन 0.25% फिसला है जिससे पता चलता है कि नॉर्थ एशिया की मुख्य करेंसी के मुकाबले डॉलर में हल्की मज़बूती आई है। थाई बात(-0.21%),सिंगापुर डॉलर (-0.17%),मलेशियन रिंगिट (-0.17%) और फिलीपीन पेसो (-0.16%) भी नीचे ट्रेड कर रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

10 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs)ने बिकवाली के एक दिन बाद ₹2,603 ​​करोड़ के शेयर खरीदे और वे नेट खरीदार बन गए। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी लगातार तीसरे सेशन में खरीदारी जारी रखी और ₹2,019 करोड़ का निवेश किया।

SIP Calculator: ₹1000 की SIP से हर महीने ₹1 लाख की कमाई! जानिए कैसे काम करता है ये फॉर्मूला

SIP Calculator: रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित कमाई कौन नहीं चाहता? अच्छी बात यह है कि इसके लिए बहुत बड़ी सैलरी होना जरूरी नहीं है। अगर आप कम उम्र में छोटी SIP शुरू करें, हर साल उसे थोड़ा बढ़ाते रहें और लंबे समय तक निवेश जारी रखें, तो रिटायरमेंट तक बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। इसके बाद उसी फंड से Systematic Withdrawal Plan (SWP) के जरिए हर महीने इनकम ली जा सकती है।

₹1 करोड़ का फंड कैसे बन सकता है?

अब मान लीजिए आपने 28 साल की उम्र में हर महीने ₹1,000 की SIP शुरू की। हर साल SIP में 10% की बढ़ोतरी करते रहे और 60 साल की उम्र तक निवेश जारी रखा। अगर इस दौरान औसतन 12% सालाना रिटर्न मिला, तो रिटायरमेंट तक अच्छा-खासा फंड तैयार हो सकता है। ऐसे में आपके निवेश की तस्वीर कुछ ऐसी दिखेगी।

  • निवेश की अवधि: 32 साल
  • कुल निवेश: ₹24.13 लाख
  • अनुमानित फंड: ₹1.05 करोड़
  • कुल मुनाफा: ₹80.98 लाख

यानी आपने अपनी जेब से करीब ₹24 लाख लगाए, लेकिन कंपाउंडिंग की ताकत से फंड ₹1 करोड़ से ज्यादा हो गया।

Personal Loan 3 (1)

हर साल SIP बढ़ाना क्यों जरूरी है?

इस रणनीति की सबसे बड़ी ताकत SIP स्टेप-अप है। नौकरी में ज्यादातर लोगों की सैलरी हर साल बढ़ती है। अगर उसी हिसाब से SIP भी बढ़ा दें, तो ज्यादा दबाव भी नहीं पड़ता और निवेश तेजी से बढ़ता रहता है।

अगर SIP की रकम पूरे 32 साल तक ₹1,000 ही रहे, तो ₹1 करोड़ का फंड बनाना काफी मुश्किल हो जाएगा। इसलिए हर साल थोड़ा-थोड़ा निवेश बढ़ाना लंबी अवधि में बड़ा फर्क पैदा करता है।

हर महीने ₹1 लाख कैसे मिलेगा?

रिटायरमेंट के बाद पूरा पैसा एक साथ निकालने की जरूरत नहीं होती। यहीं SWP काम आता है। इसमें आप अपने म्यूचुअल फंड से हर महीने तय रकम निकालते रहते हैं। बाकी पैसा फंड में ही लगा रहता है और उस पर रिटर्न भी मिलता रहता है।

SIP 1

मान लीजिए रिटायरमेंट के बाद आपके पास ₹1.5 करोड़ का फंड है। इसे किसी डेट या कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड में निवेश किया गया है। अगर इस पर 6% सालाना रिटर्न मिलता है और आप हर महीने ₹1 लाख निकालते हैं, तो करीब 12 साल तक नियमित इनकम मिल सकती है। इसका हिसाब कुछ ऐसा है।

  • शुरुआती निवेश: ₹1.5 करोड़
  • हर महीने निकासी: ₹1 लाख
  • निकासी की अवधि: 12 साल
  • कुल निकासी: ₹1.44 करोड़
  • निकासी के दौरान अनुमानित कमाई: ₹43.13 लाख

यानी पैसा भी मिलता रहेगा और फंड भी एकदम से खत्म नहीं होगा।

निवेश से पहले ये बातें याद रखें

आपको ध्यान रखना चाहिए कि 12% और 6% का रिटर्न तय नहीं होता। बाजार के हिसाब से रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है। रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर अपने निवेश का रिव्यू जरूर करें। साथ ही महंगाई को भी ध्यान में रखें, क्योंकि आज ₹1 लाख की जो कीमत है, आने वाले वर्षों में वह उतनी नहीं रहेगी।

अगर आप समय पर निवेश शुरू करें, हर साल SIP बढ़ाते रहें और रिटायरमेंट के बाद सही तरीके से SWP का इस्तेमाल करें, तो यही रणनीति आपको रिटायरमेंट के बाद भी नियमित इनकम देने में मदद कर सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Video: 1 लाख रुपये कमाने वाले लोग हो जाएं अलर्ट, जानिए क्यों बताई गई यह इनकम खतरनाक

हर महीने 1 लाख रुपये की सैलरी पाना कई लोगों के लिए आर्थिक सफलता का संकेत माना जाता है। ये आय स्तर एक आरामदायक जीवन जीने, जरूरी खर्च पूरे करने और कुछ इच्छाओं को पूरा करने की क्षमता देता है। लेकिन अब इसी कमाई को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। साल 2026 में एक सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर ने दावा किया है कि 1 लाख रुपये प्रति माह की सैलरी कई लोगों के लिए एक तरह का ‘कम्फर्ट ट्रैप’ बन सकती है।

उनके अनुसार, समस्या कमाई की रकम में नहीं बल्कि उस संतुष्टि में है, जो व्यक्ति को बड़े लक्ष्य तय करने से रोक सकती है। इस विचार ने सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा छेड़ दी है, जहां कुछ लोग इससे सहमत हैं तो कुछ इसे वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से अलग मान रहे हैं।

कंटेंट क्रिएटर ने बताया ‘सबसे खतरनाक सैलरी’

इंस्टाग्राम पर पर्सनल फाइनेंस और माइंडसेट से जुड़े वीडियो बनाने वाली निधि कुशवाहा ने कहा कि 1 लाख रुपये प्रति माह की सैलरी कम होना इसकी समस्या नहीं है, बल्कि इसकी सबसे बड़ी चुनौती इसका आरामदायक होना है। उनका कहना है कि इतनी आय कई लोगों को इतना संतुष्ट कर सकती है कि व बड़े सपने देखने और आगे बढ़ने की कोशिश कम कर दें।

आराम कब बन जाता है करियर की रुकावट?

निधि के मुताबिक, 1 लाख रुपये की मासिक कमाई से लोग किराया, रोजमर्रा के खर्च, वीकेंड आउटिंग और साल में एक-दो ट्रिप जैसी चीजें आसानी से मैनेज कर लेते हैं। यही सुविधा कई बार लोगों को अपनी सीमाओं से बाहर निकलने और नए जोखिम लेने से रोक सकती है। उनका मानना है कि जब इंसान को लगता है कि जिंदगी पूरी तरह सेट हो गई है, तो आगे बढ़ने की भूख धीरे-धीरे कम हो सकती है।

‘ज्यादा कमाने की चाह’ खत्म होने का खतरा

निधि ने अपने वीडियो में कहा कि असली खतरा कम आय में नहीं बल्कि उस स्थिति में है, जहां व्यक्ति आरामदायक जीवन में इतना खुश हो जाए कि नए लक्ष्य बनाना छोड़ दे। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि सिर्फ आरामदायक कमाई पर रुकने के बजाय लगातार सीखने, निवेश करने और नए अवसर तलाशने पर ध्यान देना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने इस पर अलग-अलग राय रखी। कुछ यूजर्स ने माना कि ज्यादा आराम इंसान को आगे बढ़ने से रोक सकता है। वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या जीवन में सफलता का पैमाना हमेशा ज्यादा पैसा कमाना ही होना चाहिए।

एक यूजर ने पूछा कि अगर 10 लाख रुपये महीने की सैलरी हो तो क्या वह भी खतरनाक होगी? वहीं कुछ लोगों ने महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि आज के समय में 1 लाख रुपये की कमाई उतनी बड़ी नहीं रही जितनी पहले मानी जाती थी।

असली सवाल

इस बहस का कोई तय जवाब नहीं है कि कौन-सी सैलरी इंसान को रोक देती है। कुछ लोगों के लिए 1 लाख रुपये की आय आर्थिक स्थिरता हो सकती है, जबकि दूसरों के लिए ये सिर्फ एक पड़ाव।

विशेषज्ञों का मानना है कि आय चाहे जितनी हो, सही बचत, निवेश और नए लक्ष्य बनाते रहना जरूरी है, ताकि आराम विकास की राह में बाधा न बने।

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Gold Price Outlook: सोना अभी खरीदे या थोड़ा और रुकें? एक्सपर्ट्स ने बताया दिवाली तक का ये टारगेट

Gold Price Diwali Target Outlook: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता और महंगाई का डर एक बार फिर बढ़ गया है। इस तनाव के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की चमक एक बार फिर बढ़ गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4,000 प्रति औंस के करीब पहुंच गया है, वहीं घरेलू बाजार में सोने की कीमतें फिलहाल ₹1.40 लाख से ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच बनी हुई हैं। ऐसे में निवेशक और आम खरीदार असमंजस में हैं कि अभी सोना खरीदना चाहिए या नहीं। आइए समझते हैं कि दिवाली तक सोने की चाल कैसी रह सकती है।

क्या सोने की कीमतों में आएगी बड़ी गिरावट?

बाजार के जानकारों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने की कीमतों में किसी बड़ी या भारी गिरावट की उम्मीद बहुत कम है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोना मौजूदा स्तरों पर अपना एक मजबूत आधार बना चुका है। अगर यहां से कीमतों में कोई गिरावट आती भी है, तो वह महज 5% तक ही सीमित रहने की संभावना है। घरेलू बाजार में सोने को ₹1.35 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बेहद मजबूत सपोर्ट पर है। इसलिए ग्राहकों को बहुत ज्यादा दाम गिरने की उम्मीद में अपनी खरीदारी को टालना नहीं चाहिए।

क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें?

सोने की मौजूदा तेजी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं:

भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते विवाद ने निवेशकों को शेयर बाजार जैसी जोखिम भरी जगहों से निकालकर सोने की तरफ आकर्षित किया है।

कच्चा तेल और महंगाई: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर में महंगाई की चिंता को दोबारा हवा दे दी है, जिससे हेजिंग के लिए सोने की मांग बढ़ी है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व: अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित कर रही है।

दिवाली तक कहां पहुंच सकता है सोना?

दिवाली पर सोने के भाव को लेकर विश्लेषकों ने दो तरह की संभावनाएं जताई हैं:

पहली स्थिति: अगर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और स्थितियां सामान्य होती हैं, तो घरेलू बाजार में सोने की कीमतें छलांग लगाते हुए ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर तक जा सकती हैं।

दूसरी स्थिति: अगर तनाव और अनिश्चितता का माहौल आगे भी बरकरार रहता है, तो सोने के दाम ₹1.35 लाख से ₹1.45 लाख के सीमित दायरे में ही बने रहेंगे।

ग्लोबल टारगेट: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने को $3,800 पर मजबूत सपोर्ट है, जबकि लंबी अवधि के लिए $5,100 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ज्वैलरी मार्केट में लौटी रौनक, खरीदारी का अच्छा मौका

सोने की कीमतों में आई हालिया मामूली गिरावट ने ज्वैलरी बाजार में ग्राहकों की डिमांड को फिर से जिंदा कर दिया है। जब कीमतें अपने रिकॉर्ड हाई पर थीं, तब बिक्री में भारी गिरावट देखी गई थी, लेकिन अब इसमें सुधार हो रहा है। अगस्त और सितंबर से शुरू होने वाले आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए सर्राफा कारोबारियों को उम्मीद है कि इस साल दिवाली पर सोने की मांग पिछले साल के मुकाबले बेहतर या उसके बराबर रह सकती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trip To London: पाउंड को रुपए में गिनेंगे तो चाय भी नहीं पी सकेंगे

Trip To London

Trip To London: जब भी पर्यटन के लिए विदेश जाएं तो भारतीय रुपए में मूल्य आंकना मुसीबत खड़ी करेगा। वजह साफ है कि विश्व की अधिकांश लेन-देन की मुद्रा का मूल्य रुपए से कई गुना ज्यादा है। प्रमुख तौर पर डॉलर 95 रुपए का, पाउंड 130 रुपए का, यूरो 111 का, कुवैती दीनार सबसे महंगा 310 का और दुबई का दिरहम 26 रुपए का। इसलिए ब्रिटेन में चाय जब 450 रुपए की आती है तो हम लोग एक खाली गिलास मांगकर कट मार लेते हैं।

 

लंदन चूंकि विश्व के पहले पांच महंगे शहर में है तो आपका बजट तो गड़बड़ाएगा ही। सर्वाधिक महंगा सिंगापुर है। इसलिए पहले से मानसिक और आर्थिक तैयारी जरूरी है। वहां यदि आपका कोई परिजन है तो पहले चर्चा कर तय कर लें कि कौन-सी खाद्य सामग्री ले जाना है और कौन-सी वहां से खरीदना है। विशेष तौर पर दाल, सब्जी, राजमा, पोहे, उपमा, चाय का रेडी टू इट वाला सामान साथ लिया जा सकता है। यदि एकाध हफ्ता रुकना है तो 15 किलो की एक अटैची में खाने का सामान रखना समझदारी होगी। यदि बजट की चिंता नहीं है तो कोई बात नहीं। मैं आपको मोटे पर लगने वाली सामग्री की लंदन की दरें बता देता हूं, जो मई 2026 में वहां थीं।

ये मध्यम बजट की दरें हैं

रेस्टारेंट में एक व्यक्ति का खाना 2,500 का, दो का करीब 10 हजार का। याने 20 से 80 पाउंड तक। कैपेचिनो कॉफी 530 रुपए की, मसाला डोसा 1300 रुपए का, छोले-भटूरे 1500 रुपए के, पानी की बोतल 80 से 200 तक की, दूध 182 रुपए लीटर, ब्रेड 212 की, जो हमें 40 में मिल जाती है। चावल एक किलो 235 का, 12 अंडे 500 के। इसी तरह से मोबाइल का 10 जीबी डाटा 1755 रुपए का, जो यहां 400 में मिलता है। ब्रॉडबैंड 4,000 का जो यहां 775 में मिलता है। पेट्रोल-डीजल 150-170 रुपए लीटर है।

 

सब्जियों के भाव सुनकर दहशत में आ सकते हैं। खीरा 3 नग 130 रुपए के, गाजर करीब 600 रुपए किलो, पत्ता गोभी एक नग 90 रुपए की, नींबू 120 रुपए का। केले 155 के एक किलो (जिसमें 6-7 आएंगे), आलू 165 रुपए किलो, प्याज 150 रुपए किलो। भाव का यह अंतर रुपए और पाउंड के मूल्य में फर्क का नतीजा तो है ही, वहां महंगाई का स्तर भी ऊंचा है।

एक विश्लेषण के अनुसार यदि इंदौर व लंदन का तुलनात्मक अध्ययन करें तो लंदन की बजाय इंदौर में जीवन स्तर 79.6 प्रतिशत सस्ता है। मकान, दुकान, ऑफिस का किराया 94.3 प्रतिशत सस्ता है। इंदौर में रेस्टारेंट 84.4 प्रतिशत, किराना 71.3 प्रतिशत सस्ता है। हमारी क्रय शक्ति लंदन वालों की बजाय 50.6 प्रतिशत अधिक है। यदि इंदौर में रहने के लिए 1011 पाउंड (एक लाख 30 हजार 460 रुपए) चाहिए तो लंदन वाले को 6900 पाउंड (8 लाख 90 हजार 100 रुपए) चाहिए। स्वाभाविक रूप से प्रॉपर्टी भी मंहगी है। मध्यमवर्गीय इलाके में 2 बेडरूम का फ्लैट औसत सवा चार करोड़ रुपए से पौने सात करोड़ रुपए का आएगा। याने 4 लाख से साढ़े 6 लाख पाउंड में। इतनी रकम में इंदौर में शानदार 3-4 हजार वर्गफीट का बंगला मिल जाएगा। 

 

इसे एक दूसरे तरीके से भी समझ सकते हैं। लंदन में औसत प्रति व्यक्ति मासिक खर्च 1500 पाउंड याने 18 हजार पाउंड वार्षिक (23 लाख 32 हजार रुपए है) होता है। इंदौर में औसत खर्च 15 हजार से 25 हजार रुपए याने अधिकतम 3 लाख रुपए वार्षिक होता है। इस तरह लंदन हमसे करीब 8 गुना अधिक महंगा है। यह विश्लेषण ग्लोबल वेल्थ एंड लाइफस्टाइल का है, जो बताता है कि सिंगापुर व लंदन काफी महंगे शहर हैं। लंदन में जहां 4 व्यक्तियों के रुकने लायक जो अपार्टमेंट औसत 20-25 हजार रुपए रोज वाले मिलेंगे, वे एडिनबरा (स्कॉटलैंड) में 35 हजार रुपए रोज के रहेंगे। यहां अपेक्षाकृत सीमित सुविधा व अत्यधिक पर्यटकों की वजह से मंहगाई अधिक है, क्योंकि यह लंदन से प्राकृतिक रूप से अधिक खूबसूरत है।

अपार्टमेंट में रूम सर्विस या रोजाना सफाई जैसी कोई सुविधा नहीं होती। वहां हफ्ते में तय दिन सफाई के लिये कोई आएगा। अपार्टमेंट व कमरे के लॉक डिजिटल होते हैं, जो आपको बुकिंग होने पर बता दिए जाएंगे। एडिनबरा में तो मेन गेट के बाहर एक बॉक्स होता है, जिसका नंबर आपको दे देंगे। वह सही हुआ तो बॉक्स खोलकर कमरे की चाबी मिल जाएगी। यदि कुछ गड़बड़ हो तो पचते रहो, कोई मदद नहीं मिलेगी, क्योंकि कोई सुरक्षा गार्ड नहीं होता।

 

ब्रिटेन व यूरोप में भी ज्यादातर मकानों के दरवाजे-खिड़कियां कांच के होते हैं, जिनमें सरियों की ग्रिल नहीं होती। इसका आशय यही है कि वहां ग्रिल उखाड़कर या दरवाजे तोड़कर चोरियां नहीं होतीं। ऐसा भी नहीं है कि चोरियां नहीं होतीं। लंदन के व्यस्त इलाकों में विशेष तौर पर आई फोन की लूट काफी होती हैं। ये काम ई-बाइक गिरोह व नकाबपोश करते हैं, जो राह चलते उन लोगों के फोन उड़ा लेते हैं, जो बात करते हुए चलते हैं।

 

2024-25 में एक लाख 6 हजार आई फोन चोरी हुए थे। ये फोन चीन में बेच दिए जाते हैं। वहां इन्हें नए सिरे से असेंबल कर विश्व बाजार में फिर बेच देते हैं। यह करीब एक हजार करोड़ रुपए का चोरी के आई फोन का कारोबार है। अधिकांश फोन हांगकांग व चीन भेज दिए जाते हैं, जहां रि-सेट, रि-प्रोग्रामिंग कर फिर से बेच दिए हैं। (क्रमश:) -लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।