8th Pay Commission पर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नया अपडेट! इतनी बढ़ जाएगी बेसिक सैलरी और HRA, देखें लेवल 1 से 10 का पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Salary HRA Hike: आठवें वेतन आयोग में सैलरी बढ़ने को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच खूब चर्चा है। हालांकि, इसके एक प्रमुख कंपोनेंट हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर लोगों का उतना ध्यान नहीं जाता, लेकिन सैलरी बढ़ाने में इसका बड़ा योगदान होता है। कोलकाता में स्टेकहोल्डर्स के साथ वेतन आयोग की बैठकों का दौर समाप्त हो चुका है। इन बैठकों में कर्मचारी यूनियनों ने बेसिक सैलरी बढ़ाने के साथ-साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की मौजूदा दरों को बढ़ाने की पुरजोर मांग की है।

चूंकि एचआरए (HRA) सीधे तौर पर बेसिक सैलरी का एक निश्चित प्रतिशत होता है, इसलिए जैसे ही 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बेसिक सैलरी बढ़ेगी, कर्मचारियों का एचआरए भी रॉकेट की तरह बढ़ जाएगा। आइए समझते हैं कि 2.0, 2.1, 2.28 और 2.57 के फिटमेंट फैक्टर पर लेवल 1 से लेकर लेवल 10 तक के कर्मचारियों की सैलरी और एचआरए में कितना बंपर उछाल आ सकता है।

कर्मचारी संगठनों की मांग: 40% तक हो HRA

फिलहाल 7वें वेतन आयोग के नियमों के मुताबिक, शहरों को तीन कैटेगरी X, Y और Z में बांटा गया है। जनवरी 2024 में महंगाई भत्ता (DA) 50% पहुंचने के बाद मौजूदा एचआरए दरें क्रमशः 30% (X शहर), 20% (Y शहर) और 10% (Z शहर) हैं।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बड़े शहरों में मकानों के किराए बहुत ज्यादा बढ़ चुके हैं, इसलिए मौजूदा एचआरए नाकाफी है। संगठनों ने वेतन आयोग के सामने ये मांगें रखी हैं:

NC-JCM, AIDEF और FNPO जैसे कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि एचआरए की तीन स्लैब को बढ़ाकर 40% (X), 35% (Y) और 30% (Z) किया जाए। साथ ही इसे महंगाई भत्ते (DA) की बढ़ोतरी से जोड़ा जाए और पेंशनर्स को भी इसका लाभ मिले।

AINPSEF ने X, Y और Z शहरों के लिए क्रमशः 36%, 24% और 12% एचआरए की मांग की है।

फिटमेंट फैक्टर का खेल: कैसे तय होगा नया HRA?

एचआरए की गणना हमेशा बेसिक पे पर होती है। मान लीजिए अभी दिल्ली (X सिटी) में कार्यरत एक लेवल 1 के कर्मचारी की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है, तो उसे 30% के हिसाब से ₹5,400 एचआरए मिलता है।

अगर 8वां वेतन आयोग न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 2.0 तय करता है, तो बेसिक सैलरी ₹36,000 हो जाएगी और 30% के हिसाब से एचआरए सीधे ₹10,800 हो जाएगा। वहीं अगर फिटमेंट फैक्टर 2.28 या 2.57 तय होता है, तो यह फायदा और ज्यादा बढ़ जाएगा।

HRA कैलकुलेटर: देखें अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर पर अनुमानित गणित

नीचे दिए गए आंकड़ों में मौजूदा एचआरए दरों (X-30%, Y-20%, Z-10%) को आधार मानकर अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर पर लेवल 1 से लेवल 10 तक के कर्मचारियों के नए वेतन और एचआरए का अनुमान लगाया गया है:

 

HRA से सैलरी में दिखेगा बंपर उछाल

अगर सरकार न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 2.28 या 2.57 को मंजूरी देती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। उदाहरण के तौर पर, एक एंट्री-लेवल अफसर (लेवल 10) जो अभी दिल्ली जैसे शहर में रह रहा है, उसका सिर्फ मकान किराया भत्ता (HRA) ही बढ़कर ₹43,250 प्रति माह तक पहुंच सकता है।

Gold Silver Rates Today: दिल्ली में सोना चढ़ा, चांदी एक दिन में 5000 रुपये उछली

Gold Silver Rates Today:  सोने और चांदी की कीमतें में 10 जुलाई को दिल्ली में तेजी रही। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 400 रुपये तक चढ़कर 1,48,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। चांदी में 5000 रुपये की तेजी आई। डॉलर में कमजोरी से बुलियन में ट्रेडर्स ने अच्छी खरीदारी की। इससे पहले डॉलर में मजबूती ने सोने और चांदी पर दबाव बनाया था।

चांदी में तीन दिन की गिरावट पर ब्रेक

चांदी में बीते तीन दिनों से जारी गिरावट पर आज ब्रेक लग गया। यह 5000 रुपये के उछाल के साथ 2,37,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। 9 जुलाई को चांदी 2,32,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी, जबकि सोना 1,48,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

डॉलर इंडक्स में कमजोरी का असर

ट्रेडर्स ने बताया कि डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से सोने और चांदी की कीमतों में रिकवरी आई। डॉलर इंडेक्स लगातार तीसरे दिन कमजोर हुआ। इससे कीमती मेटल्स की चमक बढ़ी। इस हफ्ते की शुरुआत में सोना एक हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया था। इससे ट्रेडर्स ने कम कीमतों पर खरीदारी के मौके का फायदा उठाया।

विदेश में सोने और चांदी में गिरावट 

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि शुक्रवार को गोल्ड में मजबूती दिखी। इसमें गोल्ड इंडेक्स में कमजोरी का हाथ है। हालांकि, इंटरनेशनल मार्केट में सोने में गिरावट दिखी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस हफ्ते सोने में कमजोरी आई। पिछले हफ्ते सोने की कीमतों में मजबूती आई थी।

इस हफ्ते विदेश में सोने की कीमतों में नरमी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 0.43 फीसदी गिरकर 4,106.25 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। सिल्वर भी 1 फीसदी गिरकर 59.94 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज के हेड प्रवीण सिंह ने कहा कि स्पॉट गोल्ड में मजबूती की वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की चल रही कोशिश है।

मार्केट की नजरें इनफ्लेशन डेटा पर

इस बीच मार्केट की नजरें अगले हफ्ते अमेरिका में जारी होने वाले सीपीआई इनफ्लेशन के डेटा पर हैं। अगर इनफ्लेशन हाई बना रहता है तो फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की संभावना बढ़ जाएगी। ऐसे होने पर सोने की कीमतों पर दबाव बन सकता है। अमेरिका और ईरान में फिर से टेंशन बढ़ने से क्रूड में उछाल आया है। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।

Market Outlook : बाजार में लगातार दूसरे दिन दिखी तेजी, जानिए 13 जुलाई को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market Outlook : 10 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,200 के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा। निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त दिखाने वाले शेयरों में जियो फाइनेंशियल,HDFC लाइफ,अदाणी एंटरप्राइजेज,SBI लाइफ इंश्योरेंस और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल रहे। जबकि गिरने वाले शेयरों में डॉ.रेड्डीज़ लैब्स,एटरनल,भारती एयरटेल,नेस्ले और सिप्ला शामिल रहे।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस काफी हद तक पॉजिटिव रहा और सभी बड़े इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। रियल्टी शेयरों ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 3.5 प्रतिशत की बढ़त हुई। इसके बाद निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में 3 प्रतिशत की तेजी आई। जून तिमाही के नतीजों के बाद TCS में बढ़त की वजह से निफ्टी IT इंडेक्स में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

अन्य सेक्टरों में,निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.5 प्रतिशत और निफ्टी बैंक 1.4 प्रतिशत ऊपर चढ़े। जबकि ऑयल एंड गैस,प्राइवेट बैंक,एनर्जी,इंफ्रास्ट्रक्चर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 1 प्रतिशत से 1.3 प्रतिशत के बीच बढ़त हुई। ऑटो इंडेक्स में 0.72 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.59 प्रतिशत और 1.41 प्रतिशत की बढ़त हुई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि थोड़े समय के करेक्शन के बाद,मार्केट में जबरदस्त रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। बैंकों के पॉजिटिव बिजनेस अपडेट,IT सेक्टर के उम्मीद के मुताबिक गाइडेंस और AI से जुड़े मौकों के साथ-साथ ग्लोबल खर्च में बढ़त की उम्मीद ने पहली तिमाही के अर्निंग्स सीजन की अच्छी शुरुआत के लिए माहौल तैयार कर रहे है। उम्मीद से बेहतर Q1 नतीजों का सिलसिला अर्निंग में बढ़ोतरी को लेकर बनी चिंताओं को कम करने में मदद करेगा। इससे मौजूदा तेजी को और सपोर्ट मिल सकता है।

ग्लोबल स्तर पर तेल की कीमतों में नरमी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में रिकवरी ने भारत के प्रति सेंटीमेंट को और बेहतर बनाया है,जिससे FII निवेश में रिकवरी को सपोर्ट मिला है। अहम बात यह है कि FOMC मीटिंग के सख़्त रुख का ग्लोबल मार्केट पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा है,क्योंकि हालिया डेटा से पता चलता है कि महंगाई का दबाव कम होने की संभावना है। साथ ही,US, EU और चीन से आ रहे सुस्त आर्थिक आंकड़ो से संकेत मिल रहा है कि सेंट्रल बैंक आगे चलकर कम सख्त रुख अपना सकते हैं।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?

SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह ने कहा कि निफ्टी गैप-अप के साथ खुला,लेकिन पूरे सेशन के दौरान एक सीमित दायरे में कारोबार करता दिख। कारोबार के अंत में यह 1.02% की बढ़त के साथ 24,207 पर बंद हुआ। इंडेक्स ने स्मॉल अपर विक (wick) वाली एक स्मॉल बॉडी बुलिश कैंडल बनाई,जो इंट्राडे में अनिश्चितता को दिखाती है। इसने सफलतापूर्वक अपना 100-दिन का EMA वापस हासिल कर लिया है और बुधवार को आई 516 अंको की भारी गिरावट का एक बड़ा हिस्सा रिकवर कर लिया है। RSI थोड़ा ऊपर गया है,जो धीरे-धीरे बुलिश मोमेंटम के बढ़ने का संकेत है।

आगे निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 24350-24400 के जोन में है। अगर निफ्टी इस जोन के ऊपर टिकता है तो यह शॉर्ट टर्म में 24550 और उसके बाद 24700 तक बढ़ सकता है। दूसरी ओर निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24050-24000 के जोन में है।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे बाजार की दिशा तय करने में पहली तिमाही के नतीजों की अहम भूमिका होगी। अच्छी अर्निंग, घरेलू निवेशकों की तरफ से हो रहा मजबूत निवेश और अच्छे मॉनसून से बाजार को सहारा मिल रहा है। हालांकि,मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में कोई भी बड़ी बढ़ोतरी बाजार के लिए बड़े जोखिम बने हुए हैं।

बैंक निफ्टी व्यू

सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी भी गैप-अप के साथ खुला और पहले हाफ में एक रेंज में ट्रेड किया। फिर दूसरे हाफ की शुरुआत में ब्रेकआउट दिया और ऊपर बंद हुआ। आखिर में इंडेक्स 1.39% की बढ़त के साथ 58,046 पर बंद हुआ।

बैंक निफ्टी ने सफलतापूर्वक अपना 20-दिन का EMA वापस हासिल कर लिया है,जबकि RSI 60 के लेवल के करीब पहुंच रहा है। इससे पता चलता है कि इस हफ्ते की शुरुआत में दिखे सेलिंग प्रेशर को झेलने के बाद बुल्स ने फिर से कंट्रोल हासिल कर लिया है। इसके अलावा,ADX इंडिकेटर पर DI+ ने DI− को पार कर लिया है,जो बुलिश ट्रेंड को और मजबूत करता है।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 58500-58600 के जोन में है। अगर यह इस जोन के ऊपर टिकता है तो बैंक निफ्टी का पुलबैक 59000 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 59500 तक जा सकता है। नीचे की तरफ,बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 57600-57500 के जोन में है।

 

 

Investment Mantra: जानिए 25% टूटने के बाद क्या अब है सोने में खरीदारी का मौका,अच्छे रिटर्न के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग कितनी है जरूरी

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Rally: सेंसेक्स 846 अंक तक उछला, निफ्टी फिर 24200 के पार; 6 कारणों से लगातार दूसरे दिन तेजी

शेयर बाजार में शुक्रवार, 10 जुलाई को लगातार दूसरे दिन तेजी का आलम है। सेंसेक्स हरे निशान में खुलने के बाद 846 अंक तक चढ़ गया। इसके पीछे IT शेयरों में खरीदारी, कच्चे तेल की कीमत में गिरावट, एशियाई बाजारों की तेजी जैसे कई फैक्टर हैं। सेंसेक्स की ओपनिंग हरे निशान में 77,395.63 पर हुई। फिर यह पिछली क्लोजिंग से 846.26 अंक से ज्यादा चढ़कर 77,588.08 के हाई तक गया। इसी तरह निफ्टी बढ़त के साथ 24,124.70 पर खुला और फिर 263.25 अंक उछलकर 24,226.05 के हाई तक गया।

गुरुवार को सेंसेक्स 238.22 अंक या 0.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,741.82 पर और निफ्टी 80.75 अंक या 0.34 प्रतिशत बढ़कर 23,962.80 पर बंद हुआ था। आइए जानते हैं शुक्रवार की तेजी के अहम कारण…

US-ईरान युद्ध के समाधान की उम्मीद

गुरुवार को एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका, ईरान के साथ मसलों को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है और हालिया तनाव के बावजूद तकनीकी बातचीत जारी है। इस खबर से भू-राजनीतिक मोर्चे पर तनाव बढ़ने की चिंता कम हुई है, जिससे बाजार को सहारा मिला है।

IT शेयरों में खरीदारी

TCS के शेयरों में 3% से ज्यादा की बढ़त के बाद निफ्टी IT इंडेक्स में जबरदस्त तेजी है। यह 3% तक चढ़ गया। TCS के अप्रैल-जून तिमाही के नतीजों और मैनेजमेंट की बातों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। उम्मीद जगी है कि दूसरी तिमाही से मांग में धीरे-धीरे सुधार होगा, जिसके चलते ब्रोकरेज हाउस ने इस स्टॉक पर अपना पॉजिटिव नजरिया बरकरार रखा है।

TCS का जून तिमाही के लिए कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.61% की बढ़ोतरी के साथ ₹13,349 करोड़ रहा। कंपनी ने कहा है कि पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित मांग में मौजूदा तिमाही में सुधार की उम्मीद है।

एशियाई बाजारों की तेजी

एशियाई बाजार बढ़त में हैं। इसका असर भी देश के शेयर बाजार पर है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 4% से ज्यादा चढ़ा है, जापान का निक्केई 225 1.91% बढ़ा है। इसी तरह शंघाई का SSE कंपोजिट 0.76% और हांगकांग का हैंग सेंग 1.73% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। गुरुवार को अमेरिकी बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए थे।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड की कीमत 76.19 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बावजूद, तेल की कीमतों में नरमी है। कच्चे तेल की कम कीमतें भारत के लिए इसलिए अच्छी हैं क्योंकि देश अपनी तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। सस्ते तेल से आयात लागत कम होती है, महंगाई का दबाव घटता है, जिससे बाजार का सेंटीमेंट मजबूत होता है।

रुपये की मजबूती

रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 15 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.32 पर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से घरेलू मुद्रा को बल मिला। रुपया गुरुवार को एक पैसे की बढ़त के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.47 पर बंद हुआ था।

इंडिया VIX में गिरावट

बाजार में अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX, लगभग 6 प्रतिशत तक गिरकर 12.63 पर आ गया। इंडिया VIX में गिरावट का मतलब है कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव की उम्मीदें कम हो रही हैं और निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।

Gold silver Outlook: MCX पर सोने की कीमतें गिरी, क्या अब ये हैं पैसे लगाने का सही समय या करना चाहिए और इंतजार

Gold and silver price today: कमजोर ग्लोबल संकेतों और कमजोर स्पॉट मार्केट डिमांड के बीच शुक्रवार, 10 जुलाई को MCX पर शुरुआती डील में सोने और चांदी के रेट मिले-जुले रहे। MCX गोल्ड अगस्त डिलीवरी सुबह 9:15 बजे 0.27% गिरकर ₹1,44,913 प्रति 10 ग्राम पर थी, जबकि MCX सिल्वर सितंबर कॉन्ट्रैक्ट सुबह 0.08% बढ़कर ₹2,26,555 प्रति किलोग्राम पर थे।

इंटरनेशनल गोल्ड की कीमतों में हर हफ्ते गिरावट आने की उम्मीद है क्योंकि इस बात की चिंता बढ़ रही है कि US-ईरान के बीच नए तनाव से महंगाई बढ़ सकती है और यूएस फेडरल रिजर्व इस साल रेट बढ़ा सकता है।

फेड की जून मीटिंग के हाल ही में जारी मिनट्स में पॉलिसी बनाने वालों की मिडिल ईस्ट विवाद और बढ़ी हुई महंगाई को लेकर चिंता दिखाई दी। रॉयटर्स के मुताबिक, CME के ​​फेडवॉच टूल से पता चलता है कि ट्रेडर्स को सितंबर में रेट बढ़ने की 64% संभावना दिख रही है, जो एक हफ़्ते पहले लगभग 54% थी।

हालांकि सोने को महंगाई से बचाने वाला माना जाता है, लेकिन मॉनेटरी सख्ती के समय इसमें गिरावट आती है क्योंकि यह एक नॉन-यील्डिंग एसेट है। वेस्ट एशिया में एयरस्ट्राइक तेज हो गए हैं, जबकि US ने कहा है कि ईरान के साथ टेक्निकल बातचीत जारी रहेगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, US ने गुरुवार सुबह ईरान को टारगेट करते हुए नए हमले किए और तेहरान ने जवाब में वॉशिंगटन के क्षेत्रीय सहयोगियों को टारगेट किया। जिससे मिडिल ईस्ट में युद्ध खत्म करने में मदद करने वाली अंतरिम डील को खतरा पैदा हो गया।

किन लेवल्स पर मिलेगा मुनाफा

मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह ने कहा कि जब तक सोने की कीमतें ₹1,40,500 से ऊपर बनी रहेगी, तब तक कुल मिलाकर स्ट्रक्चर गिरावट पर खरीदने के नजरिए का  है। सिंह ने कहा, “तुरंत रेजिस्टेंस 21-दिन के EMA के पास ₹1,47,000– ₹1,48,000 के आसपास है, और इस ज़ोन से ऊपर लगातार बढ़त आने वाले सेशन में तेजी को मजबूत कर सकती है।”

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन ने कहा कि आज के सेशन में सोने को $4,110 और $4,074 पर सपोर्ट है, जबकि रेजिस्टेंस $4,165 और $4,200 प्रति ट्रॉय औंस पर है, और चांदी को $59.80 और $58.50 पर सपोर्ट है, जबकि रेजिस्टेंस $61.40 और $63 प्रति ट्रॉय औंस पर है।

जैन के अनुसार, MCX सोने को ₹1,44,400 और ₹1,43,650 पर सपोर्ट है, और रेजिस्टेंस ₹1,46,150 और ₹1,47,000 पर है, जबकि चांदी को ₹2,24,000 और ₹2,21,000 पर सपोर्ट है और रेजिस्टेंस ₹2,29,100 और ₹2,32,000 पर है। जैन ने कहा, “हम वीकेंड से पहले हर बढ़त और U.S. और ईरान शांति समझौते पर अनिश्चितता पर सोने और चांदी की लॉन्ग पोजीशन में प्रॉफिट बुक करने का सुझाव देते हैं।”

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Price Today: आज चांदी की कीमतों में बड़ा उलटफेर! खरीदारी से पहले जानें 10 जुलाई का रेट

Silver Price Today: देशभर में आज 10 जुलाई 2026 को चांदी की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला। राष्ट्रीय स्तर पर 999 शुद्धता वाली चांदी का भाव करीब ₹234.90 से ₹235 प्रति ग्राम और ₹2,34,900 से ₹2,35,000 प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों में आई गिरावट के बाद आज बाजार में कीमतें लगभग स्थिर रहीं। स्पॉट चांदी 0.8% बढ़कर $60.46 प्रति औंस हो गई है।

रिकवरी के बावजूद, मेटल हफ्ते में गिरावट के रास्ते पर बना रहा क्योंकि निवेशक बढ़ती ब्याज दर की उम्मीदों के असर का अंदाजा लगाते रहे। चांदी खरीदने से पहले अपने नजदीकी ज्वेलर या बुलियन डीलर से ताजा रेट की पुष्टि जरूर कर लें, क्योंकि मेकिंग चार्ज और जीएसटी के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।

आज के राष्ट्रीय चांदी के रेट

1 ग्राम: ₹234.90–₹235

10 ग्राम: ₹2,349–₹2,350

100 ग्राम: ₹23,490–₹23,500

1 किलोग्राम: ₹2,34,900–₹2,35,000

बाजार का रुख

बुलियन बाजार के जानकारों के अनुसार, हाल के दिनों में मुनाफावसूली (Profit Booking) और घरेलू बाजार में मांग में नरमी के कारण चांदी की कीमतों में गिरावट आई थी। हालांकि, आज कीमतों में स्थिरता देखने को मिली। ग्लोबल मार्केट के संकेत और एमसीएक्स (MCX) में होने वाली गतिविधियां आगे कीमतों की दिशा तय करेंगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू बाजार में मांग में बदलाव और भारतीय रुपये की मजबूती के कारण चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में हल्की नरमी देखने को मिली है। वहीं, वैश्विक बाजार में सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग से कीमतों को कुछ समर्थन मिला है। थोक बाजार और वायदा कारोबार (MCX) में चांदी की कीमतों पर निवेशकों की लगातार नजर बनी हुई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय संकेतों और घरेलू मांग के आधार पर आगे कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है।

खरीदारों के लिए सलाह

अगर आप चांदी के आभूषण, सिक्के या बार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो खरीदारी से पहले अपने शहर के सर्राफा बाजार या अधिकृत ज्वेलर से ताजा रेट की पुष्टि जरूर कर लें। स्थानीय टैक्स, GST और मेकिंग चार्ज के कारण अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है।

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई सैन्य झड़पों से महंगाई की चिंताएं बढ़ गई हैं। इस बात की आशंका भी बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है, इसलिए सोने की ट्रेडिंग सावधानी के साथ हो रही है।

ये भी पढ़ें- LPG Price Today: घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के ग्राहकों को राहत! जानिए आपके शहर में आज क्या है कीमत

हालांकि, इंटरनेशनल राजनीतिक तनाव आमतौर पर सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन एसेट्स) को बढ़ावा देते हैं। लेकिन सख्त मौद्रिक नीति और मजबूत अमेरिकी डॉलर की संभावनाओं ने सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी को सीमित रखा है।

8th Pay Commission से रेलवे इंजीनियरों ने सैलरी रिवीजन के साथ कर दी ये बड़ी डिमांड, जानें क्या-क्या बदलेगा

8th Pay Commission Railway: 8वें वेतन आयोग के सामने केंद्रीय कर्मचारियों ने अपनी मांगें रख दी हैं। ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित एक अहम बैठक के दौरान रेलवे इंजीनियरों ने वेतन विसंगति, प्रमोशन और करियर ग्रोथ से जुड़ी अपनी कई पुरानी और बड़ी शिकायतें आयोग के सामने उठाई हैं।

‘ऑल इंडिया रेलवे इंजीनियर्स फेडरेशन’ (AIREF) और ‘ईस्ट कोस्ट रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन’ (ECoREA) के प्रतिनिधियों ने ये मांगें 8वें वेतन आयोग के सदस्य सचिव पंकज जैन के सामने पेश कीं। आइए जानते हैं कि रेलवे इंजीनियरों की मुख्य मांगें क्या हैं और इससे उनके करियर पर क्या असर पड़ेगा।

‘5वें वेतन आयोग जैसा ढांचा हो बहाल’- वेतन में सुधार की मांग

AIREF के महासचिव बीपी दास के मुताबिक, रेलवे इंजीनियरों का मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर मौजूदा आर्थिक चुनौतियों और महंगाई से निपटने के लिए नाकाफी है। उन्होंने आरोप लगाया कि छठे वेतन आयोग के लागू होने के बाद से इंजीनियरों के वेतन ढांचे में लगातार गिरावट आई है।

गैर-तकनीकी काडरों को ज्यादा वेतन: रेलवे इंजीनियरों पर बेहद संवेदनशील सुरक्षा और तकनीकी जिम्मेदारियां होती हैं। इसके बावजूद, कई गैर-तकनीकी और गैर-सुरक्षा काडरों को इस समय उनसे ज्यादा वेतन मिल रहा है।

समानता बहाल करने की मांग: फेडरेशन ने मांग की है कि 8वां वेतन आयोग उस वेतन पदानुक्रम को दोबारा बहाल करे जो 5वें वेतन आयोग तक लागू था।

रेलवे इंजीनियरों को मिले ‘ग्रुप-B’ का दर्जा

फेडरेशन की एक और प्रमुख मांग यह है कि रेलवे इंजीनियरों को अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के अधिकारियों की तरह ग्रुप-B का दर्जा दिया जाए।

ग्रुप-B पदों की भारी कमी: रेलवे में इस समय ग्रुप-B पदों का प्रतिनिधित्व बेहद कम है। भारतीय रेलवे में वर्तमान में केवल 0.29% पद ही ग्रुप-B के हैं।

प्रमोशन के मौके बढ़ाने की अपील: AIREF ने मांग की है कि रेलवे में ग्रुप-B पदों की हिस्सेदारी को बढ़ाकर राष्ट्रीय औसत 7.5% के बराबर किया जाए। पद कम होने की वजह से इंजीनियरों के सामने करियर में आगे बढ़ने और प्रमोशन के मौके बेहद सीमित हो जाते हैं। संगठन के सचिव शिवकांत सिंह ने भी इंजीनियरों में बढ़ते ठहराव और मोटिवेशन की कमी का मुद्दा उठाया।

रेलवे कर्मचारियों की मुख्य मांगों पर एक नजर

मुख्य मुद्दा मौजूदा स्थिति AIREF की मांग
वेतन ढांचाकई गैर-तकनीकी काडरों से कम वेतन  5वें वेतन आयोग की तरह समानता बहाल हो
ग्रुप-B पदरेलवे में मात्र 0.29% हिस्सेदारी  राष्ट्रीय औसत के तहत इसे 7.5% किया जाए
करियर ग्रोथप्रमोशन के बेहद सीमित अवसरठहराव को दूर कर प्रमोशन के नए रास्ते खुलें
सर्विस स्टेटसमौजूदा सब-ऑर्डिनेट ढांचाअन्य केंद्रीय मंत्रालयों की तरह ग्रुप-B का दर्जा

देशभर में चल रहा है बैठकों का दौर

8वें वेतन आयोग की यह बैठक 6 और 7 जुलाई को आयोजित की गई थी, जो कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगियों और अन्य हितधारकों के साथ देशव्यापी विचार-विमर्श का हिस्सा थी। आयोग आज यानी 10 जुलाई को कोलकाता में अपना यह परामर्श दौरा पूरा कर रहा है। इससे पहले दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, श्रीनगर और लद्दाख में भी ऐसी बैठकें हो चुकी हैं।

रेलवे के अलावा, देशभर के अन्य कर्मचारी संगठन भी हायर फिटमेंट फैक्टर, भत्तों में सुधार, पेंशन सुधार, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में संशोधन और एमएसीपी (MACP) योजना में सुधार के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं।

आगे क्या होगा?

हालांकि इन बैठकों से तुरंत वेतन में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन यह कर्मचारी संगठनों को अपने दावों के पक्ष में सबूत और जमीनी अनुभव पेश करने का मौका देता है। 3 नवंबर 2025 को गठित किए गए 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर 1.1 करोड़ से अधिक सेवारत केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ने वाला है।

सोने के भाव में आया बड़ा ट्विस्ट! अमेरिका-ईरान तनाव और फेड रेट के फेर में फंसा गोल्ड, आगे की चाल पर एक्सपर्ट्स ने ये कहा

Gold Prices Outlook: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। एक तरफ जहां वैश्विक अनिश्चितता के समय सोने को हमेशा ‘सुरक्षित निवेश’ माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका ने इसकी रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

टाटा म्यूचुअल फंड और Augmont के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी का एक शानदार मौका साबित हो सकती है। आइए समझते हैं कि सोने की कीमतों में गिरावट की असली वजह क्या है और आगे इसकी चाल कैसी रहेगी।

क्यों दबाव में हैं सोने की कीमतें? समझें बड़ी वजहें

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए शांति समझौते (MOU) को ‘खत्म’ घोषित कर दिया, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया। इसके बाद ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले का दावा किया। इन घटनाक्रमों के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 5% से ज्यादा उछल गईं, जिससे ग्लोबल लेवल पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

ब्याज दरों का सोने पर सीधा असर

जब महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा रखने या उन्हें और बढ़ाने की संभावना बढ़ जाती है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक सोने के बजाय बॉन्ड्स जैसे ब्याज देने वाले एसेट्स में पैसा लगाना पसंद करते हैं। यही वजह है कि डॉलर की मजबूती और हाई बॉन्ड यील्ड के कारण सोने की कीमतें फिलहाल दबाव में हैं।

US Fed का अगला कदम रहेगा सबसे बड़ा ट्रिगर

ऑगमोंट की रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी के मुताबिक, अमेरिकी फेड की मीटिंग के मिनट्स से साफ है कि समिति के सदस्य आर्थिक दृष्टिकोण को लेकर बंटे हुए हैं। हालांकि फिलहाल दरों को स्थिर रखने पर सहमति है, लेकिन कुछ सदस्य दरें बढ़ाने के पक्ष में हैं।

CME फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार अब सितंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की 68% संभावना और जनवरी 2027 तक बढ़ोतरी की 87% संभावना मानकर चल रहा है। इन उम्मीदों से डॉलर मजबूत हो रहा है, जो शॉर्ट-टर्म में सोने के लिए नकारात्मक है।

क्या हैं सोने के नए टार्गेट?

डॉ. रेनिशा चैनानी के अनुसार, सोने ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना $4,080 का टार्गेट हासिल कर लिया है। अब आगे की चाल मिडिल ईस्ट के हालातों पर निर्भर करेगी:

तेजी का परिदृश्य: अगर सोना $4,090, भारतीय बाजार में लगभग ₹144000 के ऊपर टिका रहता है, तो यह $4,160 यानी ₹147000 की तरफ बढ़ सकता है।

मंदी का परिदृश्य: अगर कीमतें फिसलकर $4,040 (₹1,43,000) के नीचे आती हैं, तो गिरावट बढ़कर $3,950 (₹1,41,000) के स्तर तक जा सकती है।

भारतीय निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

भारतीय निवेशकों के लिए एक राहत की बात यह है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी घरेलू बाजार में सोने की गिरावट को रोकने में मदद करेगी। रुपया कमजोर होने से आयातित सोना महंगा हो जाता है, जिससे स्थानीय कीमतों को सपोर्ट मिलता है।

टाटा म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव बना रहे, लेकिन लंबी अवधि के लिए सोने का आउटलुक बेहद पॉजिटिव है। फंड हाउस ने सलाह दी है कि ‘निवेशकों को हर गिरावट पर सोना खरीदना चाहिए।’ शॉर्ट-टर्म के उतार-चढ़ाव से पैनिक होने के बजाय, इस करेक्शन को धीरे-धीरे अपने पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने के मौके के रूप में देखना चाहिए।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

8th Pay Commission: क्या सच में ₹18000 से बढ़कर ₹69000 हो जाएगी मिनिमम बेसिक सैलरी? एक्सपर्ट से जानें इस वायरल दावे का पूरा सच

8th Pay Commission Minimum Basic Pay: इन दिनों सरकारी दफ्तरों से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह एक ही चर्चा सबसे है क्या आठवें वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक सैलरी सीधे ₹18,000 से बढ़कर ₹69,000 हो जाएगी? इस दावे को लेकर हर कर्मचारी के मन में उत्सुकता और असमंजस दोनों है।

मार्केट एक्सपर्ट और फाइनेंशियल एनालिस्ट संजय कथूरिया ने इस पूरे गणित का गहराई से विश्लेषण किया है। उनके इस एनालिसिस के आधार पर आइए समझते हैं कि इस वायरल दावे के पीछे की सच्चाई क्या है और असल में आपकी सैलरी कितनी बढ़ सकती है।

समझें सैलरी का गणित: बेसिक पे क्यों है सबसे जरूरी?

हर 10 साल में सरकार महंगाई, आर्थिक बदलावों और रहन-सहन के खर्च को देखते हुए वेतन आयोग का गठन करती है। लेकिन सैलरी का बढ़ना सिर्फ आपके टेक-होम पे यानी हाथ में आने वाले पैसे से नहीं जुड़ा होता, बल्कि इसकी शुरुआत बेसिक पे से होती है।

आपकी ग्रॉस सैलरी का ढांचा कुछ ऐसा होता है:

ग्रॉस सैलरी = बेसिक पे + महंगाई भत्ता (DA) + हाउस रेंट अलाउंस (HRA) + अन्य भत्ते

इसी ग्रॉस सैलरी में से एनपीएस (NPS) और इनकम टैक्स जैसी कटौतियों के बाद आपके बैंक खाते में नेट सैलरी आती है। जब भी नया वेतन आयोग आता है, तो मौजूदा महंगाई भत्ते (DA) को शून्य करके उसे नई बेसिक पे में मर्ज कर दिया जाता है। यही वजह है कि सिर्फ पुरानी और नई बेसिक पे की तुलना करने से अक्सर भ्रामक खबरें बनने लगती हैं। 8वें वेतन आयोग में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

क्या है ‘फिटमेंट फैक्टर’ का पूरा खेल?

सैलरी कितनी बढ़ेगी, यह फिटमेंट फैक्टर तय करता है। यह वह नंबर होता है जिससे मौजूदा बेसिक पे को गुणा करके नई बेसिक पे निकाली जाती है। इसे लेकर संजय कथूरिया, CFA ने दो बड़े पहलू सामने रखे हैं:

पहला पहलू: ₹69,000 की उम्मीद कितनी सच?

कर्मचारी यूनियनों ने 5 सदस्यों वाले परिवार के उपभोग मॉडल के आधार पर 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है। अगर सरकार इस मांग को मान लेती है, तब गणित कुछ ऐसा होगा:

₹18,000 (मौजूदा न्यूनतम बेसिक) × 3.83 = ₹68,940 (लगभग ₹69,000)

यही वो नंबर है जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। लेकिन क्या आर्थिक मोर्चे पर यह व्यावहारिक है?

दूसरा पहलू: आर्थिक हकीकत और असली अनुमान

संजय कथूरिया के मुताबिक, सरकारें सैलरी को अकेले में नहीं बढ़ातीं। उन्हें देश का राजकोषीय घाटा, डिफेंस का खर्च, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वेलफेयर स्कीम्स और केंद्रीय दायित्वों के साथ राज्यों के वित्तीय संतुलन को भी देखना होता है।

इन कड़वी आर्थिक हकीकतों को देखते हुए कई पॉलिसी एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिटमेंट फैक्टर 2.0 से 2.6 के बीच रहना ही सबसे ज्यादा संभावित है। इस आधार पर नई न्यूनतम बेसिक सैलरी का दायरा इस प्रकार हो सकता है:

₹36,000 से ₹47,000 के बीच (अगर सीधे ₹18,000 से गणना की जाए)

अंतिम सिफारिशों और ढांचे के आधार पर यह दायरा ₹40,000 से ₹52,000 के आसपास भी बैठ सकता है।

यानी, हकीकत का यह आंकड़ा हेडलाइंस में चल रहे ₹69,000 के दावे से काफी कम है।

पैसा हाथ में आने में कितना लगेगा समय?

भले ही इन सिफारिशों को जनवरी 2026 से लागू करने की बात कही जा रही हो, लेकिन इतिहास गवाह है कि असल में पैसा जेब तक पहुंचने में लंबा वक्त लगता है। पिछले वेतन आयोगों के ट्रेंड को देखें, तो कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन और उसका पूरा एरियर साल 2027 के आखिर या फिर 2028 की शुरुआत में ही मिलने की उम्मीद है।

Gold ETF News: विदेशी बेच रहे, भारतीय खरीद रहे, इस कारण गोल्ड में निवेश को लेकर दिखा अलग-अलग रुझान

Gold ETF News: भारत में सोने को लेकर कैसा क्रेज है, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि पिछले महीने जून में वैश्विक रुझानों के विपरीत यहां गोल्ड ईटीएफ में $38.8 करोड़ का निवेश आया। इसकी मुख्य वजह तो यही रही कि गोल्ड के भाव को लेकर भारतीय निवेशक पॉजिटिव बने हुए हैं और इसकी कीमतों में गिरावट को उन्होंने निवेश के सुनहरे मौके के तौर पर देखा। वहीं दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर बात करें तो वैश्विक निवेशकों ने जून में भी गोल्ड ईटीएफ में अपनी हिस्सेदारी कम करना जारी रखा और एशिया में तो निकासी की सबसे बड़ी वजह चीन के गोल्ड फंड रहे।

Gold ETF को लेकर भारत में दिखा क्रेज

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक पिछले महीने जून में सबसे अधिक निवेश निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड बीईईएस में आया। इसमें $15.84 करोड़ का निवेश आया। इसके बाद एसबीआई ईटीएफ गोल्ड में $8.12 करोड़ का निवेश आया। इससे पहले मई महीने में $6.1 करोड़ की निकासी हुई थी, क्योंकि सरकार ने इस पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी थी तो घरेलू मार्केट में सोने की बढ़ती कीमतों के बीच निवेशकों ने मुनाफा कमाना शुरू कर दिया था।

वैश्विक बाजारों में फीकी पड़ी गोल्ड ईटीएफ की चमक

भारतीयों के उल्टे वैश्विक निवेशकों ने अपनी गोल्ड ईटीएफ होल्डिंग हल्की की। जून महीने में करीब $890 करोड़ की निकासी हुई और ऐसा ही रुझान लगभग हर जगह दिखा। सबसे अधिक निकासी उत्तरी अमेरिकी में हुई जहां $550 करोड़ निकाले गए। इसके बाद एशिया में $230 करोड़ और यूरोप में $81.8 करोड़ की निकासी दिखी। ग्लोबल गोल्ड ईटीएफ का AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) 13% घटकर $52.6 हजरा करोड़ रह गया, जबकि कुल होल्डिंग्स 74 टन घटकर 4,047 टन रह गईं।

एशिया में सबसे अधिक निकासी चीन के गोल्ड फंडों ने की। इसकी वजह ये रही कि इक्विटी मार्केट में रौनक लौटी और गोल्ड के भाव फिसले तो निवेशकों की रिस्क लेने की क्षमता सुधरी। जापान में भी बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरें बढ़ाई तो जापानी फंडों ने ताबड़तोड़ निकासी की। ब्याज दरें बढ़ाने से स्थानीय निवेशकों के लिए गोल्ड रखने की अपॉर्च्यूनिचटी कॉस्ट बढ़ गई तो इसका क्रेज कम हुआ।

गोल्ड ईटीएफ से यह ताबड़तोड़ निकासी अमेरिकी फेडरल के नए प्रमुख केविन वार्श के सख्त मौद्रिक नीतियों के संकेत पर हुई। ब्याज दरें बढ़ने के संकेतों से रियल यील्ड और डॉलर मजबूत हुए तो गोल्ड जैसे ब्याज नहीं देने वाले एसेट्स का आकर्षण थोड़ा कम हुआ। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई ने महंगाई से जुड़ी चिंताएं बढ़ाई तो गोल्ड ईटीएफ की भी चमक फीकी पड़ी।

Gold Price Outlook: सोना तोड़ेगा सारे रिकार्ड्स! $8,000 तक जाएगा भाव, एक्सपर्ट ने बताया किस लेवल पर थमेगी रफ्तार