निलेश शाह ने दी घरों में रखे सोना और कैश के इस्तेमाल की सलाह, कहा-इससे बदल जाएगी निवेश की तस्वीर

कोटक एएमसी के एमडी और सीईओ निलेश शाह ने सेबी को एक खास सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि परिवारों को सेविंग्स का पैसा फाइनेंशियल एसेट्स में लगाने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इसके लिए सेबी को नए प्रोडक्ट स्ट्रक्चर पर विचार करना चाहिए। इनमें गोल्ड लिंक्ड प्रोडक्ट, चेक राइटिंग फैसिलिटी वाले मनी मार्केट फंड्स और रीट्स के लिए डेडिकेटेड म्यूचुअल फंड हो सकते हैं।

बड़ी संख्या में लोग घरों में सोना और कैश रखते हैं

शाह ने FICCI के 23वें एनुअल मार्केट्स कॉन्फ्रेंस में इनवेस्टमेंट के बारे में कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग गोल्ड और कैश में पैसा रखते हैं। फाइनेंशियल इंडस्ट्री को ऐसे प्रोडक्ट्स लाने की जरूरत है, जिनमें लोग सेविंग्स का अपना पैसा लगा सकें।

शाह ने सेबी के होल-टाइम मेंबर के सवाल के दिए जवाब

कोटक एएमसी के प्रमुख ने सेबी के होल-टाइम मेंबर अमरजीत सिंह के उस सवाल का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने पूछा था कि क्या मौजूदा नियम म्यूचुअल फंड्स को घरेलू सेविंग्स को अट्रैक्ट करने की पूरी छूट नहीं देते और क्या इंडियन मार्केट में प्रोडक्ट स्ट्रक्चर्स मौजूद नहीं हैं।

2005 में गोल्ड-लिंक्ड प्रोडक्ट शुरू करने पर हुआ था विचार

शाह ने एक प्रोडक्ट के बारे में बताया, जिसका प्रस्ताव 2005 में आया था। इस प्रोडक्ट में रिटेल इनवेस्टर के 100 रुपये के निवेश को गोल्ड-लिंक्ड ऑप्शन और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में बांटने का प्रस्ताव था। उन्होंने कहा, “हम रिटेल इनवेस्टर से 100 रुपये लेते और 7 रुपये गोल्ड ऑप्शन में लगाते। बाकी गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में इनवेस्ट करते।”

रेगुलेशन से जुड़ी चिंता की वजह से बाजार में नहीं आ सका प्रोडक्ट

उन्होंने कहा, “हम ऐसे प्रोडक्ट पर विचार कर रहे थे, जिसमें गोल्ड की कीमतें गिरने पर निवेशकों का पैसा नहीं डूबता। लेकिन, गोल्ड की कीमतें बढ़ने पर उन्हें फायदा होता। इसके अलावा उन्हें अपने पैसे पर सुरक्षा मिलती। इतना ही नहीं, उन्हें कुछ रिटर्न भी मिलता।” लेकिन, रेगुलेटर से जुड़ी चिंता की वजह से यह प्रोडक्ट नहीं आ सका।

चेक-राइटिंग फैसिलिटी वाले मनी मार्केट प्रोडक्ट पर भी होना चाहिए विचार

शाह ने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट पर हम फिर से विचार कर सकते है, क्योंकि अब देश के फाइनेंशियल मार्केट्स और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क विकसित हो चुके हैं। उन्होंने एक मनी मार्केट फंड का भी प्रस्ताव दिया, जिसमें चेक-राइटिंग फैसिलिटी शामिल हो सकती है।

दुनियाभर में चेक-इन फैसिलिटी वाले मनी मार्केट फंड का होता है इस्तेमाल

उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट में बैंक अकाउंट जैसी लिक्विडिटी मिलेगी। साथ ही उतना रिटर्न मिलेगा जितना शॉर्ट टर्म मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश पर मिलता है। उन्होंने कहा, “दुनियाभर में इनवेस्टर्स चेक-इन फैसिलिटी वाले मनी मार्केट फंड में निवेश करते हैं और उसका इस्तेमाल पेमेंट के लिए करते हैं।”

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सिर्फ REITs में निवेश करना वाला फंड शुरू करने की सलाह

शाह ने कहा, “सेबी ने रिटेल इनवेस्टर्स को REIT में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के लिए काफी कोशिश की है। हमने रिटेल REIT में निवेश की इजाजत दी। क्या हम अब ऐसा फंड बना सकते हैं, जो सिर्फ रिटेल REIT में निवेश करेगा?” उन्होंने यह माना कि REIT की पर्याप्त लिस्टिंग, ट्रेड़िंग और सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी के बाद यह प्रोडक्ट अट्रैक्टिव बन सकता है।

Samsung Galaxy S26 Ultra पर बंपर ऑफर, मिल रहा ₹37,000 से ज्यादा का डिस्काउंट, जानें कीमत

Samsung Galaxy S26 Ultra: Samsung Galaxy S26 Ultra को Amazon पर ₹87,400 की प्रभावी कीमत में खरीदा जा सकता है। इसमें फोन की कीमत के साथ एक्सचेंज वैल्यू और अधिकतम मिलने वाला कैशबैक शामिल है। फिलहाल Galaxy S26 Ultra Amazon पर ₹1,24,999 में लिस्टेड है, जबकि इसकी लिस्टेड MRP ₹1,69,999 है।

हालांकि, ₹87,400 की प्रभावी कीमत तभी आपको मिल पाएगी, जब आपको एक्सचेंज पर बताई गई पूरी वैल्यू मिले और आप अधिकतम कैशबैक ऑफर के लिए पात्र हों।

Samsung Galaxy S26 Ultra: एक्सचेंज ऑफर

Amazon पर Samsung Galaxy S26 Ultra खरीदते समय Apple iPhone 16 (8GB+128GB) को एक्सचेंज करने पर ₹31,350 तक की एक्सचेंज वैल्यू मिल रही है। यह वैल्यू Amazon के एक्सचेंज पेज पर दिखाई गई खास कंडीशन और कॉन्फिगरेशन वाले फोन के लिए है।

हालांकि, यह एक्सचेंज वैल्यू तभी मिलेगी जब पुराना फोन बताई गई कंडीशन में हो। डिलीवरी के समय फोन की जांच और वेरिफिकेशन किया जाएगा, जिसके बाद एक्सचेंज की फाइनल वैल्यू तय होगी।

चुने गए एक्सचेंज ऑफर के लिए गणना इस प्रकार है:

ऑफररकम
Galaxy S26 Ultra की कीमत₹1,24,999
iPhone 16 की एक्सचेंज वैल्यू₹31,350
एक्सचेंज के बाद कीमत₹93,649
अधिकतम कैशबैक₹6,249 तक
प्रभावी कीमत₹87,400

Amazon यह भी बताता है कि अगर डिलीवरी के समय पुराना फोन बताई गई कंडीशन के मुताबिक नहीं मिलता है, तो भी कुछ मामलों में ग्राहक आंशिक एक्सचेंज डिस्काउंट का फायदा ले सकते हैं। इसके लिए उन्हें बची हुई रकम डिलीवरी एजेंट को देनी होगी।

वहीं, अगर पुराना फोन वेरिफिकेशन में पूरी तरह फेल हो जाता है, तो तय शर्तों के तहत ग्राहक कैश या कार्ड से एक्सचेंज डिस्काउंट की रकम चुकाकर नया फोन अपने पास रख सकते हैं।

6,249 रुपये तक का कैशबैक

Galaxy S26 Ultra की लिस्टिंग पर ₹6,249 तक का कैशबैक भी दिया जा रहा है। यह कैशबैक Amazon Pay Balance के रूप में मिलेगा और इसके लिए चुनिंदा क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करना होगा। हालांकि, आपको मिलने वाला कैशबैक कितना होगा, यह आपके कार्ड और ऑफर की लागू शर्तों पर निर्भर करेगा।

प्रोडक्ट पेज पर नो-कॉस्ट EMI और बैंक डिस्काउंट जैसे कुछ अन्य ऑफर्स भी दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इन ऑफर्स को ₹87,400 की प्रभावी कीमत में अपने आप शामिल नहीं किया जा सकता, क्योंकि इनका लाभ तभी मिलेगा जब आपका पेमेंट संबंधित ऑफर की शर्तों के तहत योग्य होगा।

Samsung Galaxy S26 Ultra: स्पेसिफिकेशन्स

यह ऑफर Galaxy S26 Ultra के 12GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट के लिए है। इस फोन में 200MP कैमरा, 5,000mAh की बैटरी और Snapdragon 8 Elite Gen 5 Galaxy प्रोसेसर दिया गया है।

Samsung ने इसमें बिल्ट-इन प्राइवेसी डिस्प्ले, Androi 16, One UI 8.5 और AI-पावर्ड फीचर्स जैसे नाउ Now Nudge, Finder, Photo Assist और Creative Studio भी शामिल किए हैं।

यह फोन 60W तक की चार्जिंग और 25W तक की वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करता है।

क्या-क्या Galaxy S26 Ultra की यह डील खरीदने लायक है?

₹1,24,999 की कीमत पर Galaxy S26 Ultra अभी भी एक प्रीमियम स्मार्टफोन है। हालांकि, अगर आपके पास पहले से iPhone 16 है, तो एक्सचेंज ऑफर आपकी शुरुआती लागत को काफी कम कर सकता है। अगर iPhone 16 पर ₹31,350 की पूरी एक्सचेंज वैल्यू और ₹6,249 का अधिकतम कैशबैक मिलता है, तो Galaxy S26 Ultra की प्रभावी कीमत ₹87,400 रह जाती है।

हालांकि, अंतिम बचत एक्सचेंज किए गए फोन की स्थिति और वेरिफिकेशन के साथ-साथ कैशबैक ऑफर की पात्रता पर निर्भर करेगी।

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Behari Lal Engineering Share: कुछ ही घंटों में निवेशकों का पैसा करीब दोगुना, क्या आप निवेश का मौका चूक गए?

Behari Lal Engineering Share: बिहारी लाल इंजीनियरिंग के शेयरों ने 19 अगस्त को कमाल कर दिया। कुछ ही घंटों में इस शेयर ने निवेशकों का पैसा करीब दोगुना कर दिया। एनएसई पर कंपनी का शेयर 1:20 बजे 84 फीसदी से ज्यादा उछाल के साथ 526 रुपये पर पहुंच गया। कंपनी का शेयर 19 अगस्त को शेयर बाजारों में लिस्ट हुआ। कंपनी ने निवेशकों को प्रति शेयर 285 रुपये के भाव पर शेयर इश्यू किए थे।

कंपनी ने 285 रुपये पर इश्यू किए थे शेयर

19 अगस्त की सुबह Behari Lal Engineering के शेयर इश्यू प्राइस के मुकाबले 63 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुए। कंपनी ने इश्यू में शेयर का प्राइस बैंड 271-285 रुपये तय किया था। इस इश्यू को निवेशकों का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला था। यह इश्यू 108 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था।

ग्रे मार्केट प्रीमियम से ज्यादा पर शेयरों की लिस्टिंग

बिहारी लाल इंजीनियरिंग एक इंटिग्रेटेड आयरन और स्टील मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है। लिस्टिंग के बाद कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन 2,193.81 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी का आईपीओ 302 करोड़ रुपये का था। खास बात यह है कि शेयर की लिस्टिंग अनऑफिशियल मार्केट में शेयर पर चल रहे ग्रे मार्केट प्रीमियम के मुकाबले काफी ज्यादा प्राइस पर हुआ।

एनएसई और बीएसई दोनों में लिस्ट हुए शेयर 

यह आईपीओ 12-14 अगस्त के बीच खुला था। इस इश्यू में कंपनी ने निवेशकों को नए शेयर इश्यू किए थे। ऑफर फॉर सेल के जरिए भी शेयरों की बिक्री हुई थी। कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई दोनों ही स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हुए। इस कंपनी की शुरुआत 1995 में हुई थी।

निवेशक कुछ मुनाफावसली कर सकते हैं

स्वस्तिका इनवेस्टमार्ट में वेल्थ की हेड शिवानी नयाती ने कहा कि जिन निवेशकों को बिहारी लाल इंजीनियरिंग के आईपीओ में शेयर एलॉट हुए हैं, वे कुछ मुनाफावसूली कर सकते हैं। ऐसे निवेशक जो लंबी अवधि के लिए शेयर होल्ड करना चाहते हैं वे 380 रुपये का स्टॉपलॉस लगाकर ऐसा कर सकते हैं।

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शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद रॉकेट बने शेयर 

बिहारी लाल इंजीनियरिंग का शेयर लिंस्टिंग के बाद तब रॉकेट बन गया, जब बाजार पर दबाव था। बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार छठे दिन गिरावट देखने को मिली। निफ्टी 0.48 फीसदी यानी 114 अंक गिरकर 24,040 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.50 फीसदी यानी 382 अंक की गिरावट के साथ 76,852 पर चल रहा था।

Pramodini IPO Listing: ₹118 के शेयर ₹120 पर लिस्ट, लगातार मजबूत हो रही प्रमोदिनी की सेहत

Pramodini IPO Listing: डाइग्नॉस्टिक सर्विसेज देने वाली प्रमोदिनी मेडिकेयर के शेयरों की आज NSE SME पर प्रीमियम एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 3 गुना से अधिक बोली मिली थी। इसके आईपीओ के तहत ₹118 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज NSE SME पर इसकी ₹120.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 1.69% का लिस्टिंग गेन (Pramodini Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में फीकी हो गई जब शेयर टूट गए। टूटकर यह ₹119.05 (Pramodini Share Price)  पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 0.89% मुनाफे में हैं।

Pramodini IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

प्रमोदिनी मेडिकेयर का ₹69 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 12-14 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 3.87 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 3.66 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 4.96 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.49 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹63 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले 5,00,400 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹45.15 करोड़ मौजूदा और प्रस्तावित डाइग्नॉस्टिक सेंटर्स के लिए मेडिकल इक्विपमेंट्स की खरीदारी और बाकी पैसे अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Pramodini Medicare के बारे में

प्रमोदिनी मेडिकेयर डाइग्नॉस्टिक सर्विसेज मुहैया कराती है। यह टियर1, टियर 2 और टियर 3 शहरों में सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों, PSU, मेडिकल कॉलेजों और प्राइवेट डाइग्नॉस्टिक सेंटर्स को सर्विसेज देती है। इसके सर्विस पोर्टफोलियो में एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्सरे, कलर डॉप्लर के साथ अल्ट्रासाउंट, मैमोग्राफी, डेक्सा स्कैन और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी जैसी रेडियोलॉजी सर्विस; हेमेटोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, इम्यूनोलॉजी, पैथोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जैसे क्लिनिकल लेबोरेटरी सर्विस; और पीईटी-सीटी, SPECT और न्यूक्लियर थेरेपी जैसी न्यूक्लियर मेडिसिन सर्विस हैं। कंपनी विजयवाड़ा से 24×7 टेली-रेडियोलॉजी यूनिट और उसी जगह पर एक प्रोसेसिंग लेबोरेटरी भी चलाती है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 56% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹17.38 करोड़ और टोटल इनकम 33% के सीएजीआर से ₹63.38 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹17.85 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹36.46 करोड़ पड़े थे।

Behari Lal IPO Listing: 118 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद 63% लिस्टिंग गेन, ₹285 के शेयरों का बड़ा धमाल

Shiprocket IPO Listing: ₹97 का शेयर ₹131 पर लिस्ट, आईपीओ को मिली थी 102 गुना बोली

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Shiprocket IPO Listing: ₹97 का शेयर ₹131 पर लिस्ट, आईपीओ को मिली थी 102 गुना बोली

Shiprocket IPO Listing: ई-कॉमर्स एनेबलमेंट कंपनी शिपरॉकेट के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को भी निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 102 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹97 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹129.50 और NSE पर ₹131.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 11% का लिस्टिंग गेन (Krystal Integrated Services Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर BSE पर यह ₹135.08 (Shiprocket Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 39.26% मुनाफे में हैं। एंप्लॉयीज अधिक फायदे में हैं क्योंकि उन्हें हर शेयर ₹9 के डिस्काउंट पर मिला है।

Shiprocket IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

शिपरॉकेट का ₹1,617 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 12-14 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 102.28 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 125.20 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 92.58 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 48.38 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 58.85 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹885 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले 7,54,62,363 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹365.60 करोड़ उभरते हुए और कोर बिजनेस के शिपरॉकेट प्लेटफॉर्म्स की ग्रोथ में निवेश, ₹205.80 करोड़ मार्केटिंग, ₹159.80 करोड़ टेक इंफ्रा और कैपेबिलिटीज में निवेश, ₹210.00 करोड़ कर्ज हल्का करने, और बाकी पैसे इनऑर्गेनिक ग्रोथ और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Shiprocket के बारे में

शिपरॉकेट एक भारतीय ई-कॉमर्स एनेबलमेंट कंपनी है जो कंपनियों को टेक सॉल्यूशंस देती है। यह MSMEs (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज), D2C (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) ब्रांड्स और बड़े रिटेलर्स को उनके ऑनलाइन और ऑफलाइन बिजनेस को मैनेज करने और बढ़ाने में मदद करती है। रेडशियर रिपोर्ट (Redseer Report) के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में रेवेन्यू के हिसाब से यह देश की सबसे न्यू-एज एंड-टू-एंड ई-कॉमर्स एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म थी।

कंपनी ने शुरुआत में एक शिपिंग प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करना शुरू किया था। इसकी मुख्य सर्विसेज में घरेलू शिपिंग और शिपिंग सॉफ्टवेयर शामिल हैं, जो इंस्टेंट पिकअप, ऑर्डर ट्रैकिंग, सुरक्षित डिलीवरी, वजन की जांच और फास्ट COD (कैश-ऑन-डिलीवरी) पेमेंट सेटलमेंट जैसी सर्विसेज देती है। समय के साथ इसका कारोबार बढ़ता गया और यह कार्गो और फुलफिलमेंट सर्विसेज, क्रॉस-बॉर्डर शिपिंग सॉल्यूशंस, एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग सॉल्यूशंस, और मर्चेंट सॉल्यूशंस देती है। वित्त वर्ष 2026 में इसने 146 देशों में क्लाइंट्स को सर्विसेज दी। शिपरॉकेट को मुख्य रूप से यूजेज-बेस्ड प्राइसिंग मॉडल से रेवेन्यू मिलता है जिसमें मर्चेंट्स इस आधार पर पेमेंट करते हैं कि वे प्लेटफॉर्म का कितना इस्तेमाल करते हैं, जैसे कि शिपमेंट की संख्या, ट्रांज़ैक्शन या प्रोसेस किए गए ऑर्डर की वैल्यू।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है लेकिन कंपनी तीन वित्त वर्षों से लगातार घाटे में बनी हुई है। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी ₹595.18 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ था जोकि वित्त वर्। 2025 में घटकर ₹74.45 करोड़ और वित्त वर्ष 2026 में ₹79.25 करोड़ पर आ गया। इस दौरान कंपनी की टोटल इनकम सालाना करीब 24% की रफ्तार यानी सीएजीआर से ₹2,077.42 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹242.01 करोड़ का टोटल कर्ज था।

Behari Lal IPO Listing: 118 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद 63% लिस्टिंग गेन, ₹285 के शेयरों का बड़ा धमाल

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tempsens Instruments IPO: खुलने से पहले ही हिट हुआ यह आईपीओ, ग्रे मार्केट में 56% प्रीमियम! निवेशकों में मची होड़, चेक करें डिटेल्स

Tempsens Instruments IPO GMP & Details: प्राइमरी मार्केट में इस हफ्ते खूब एक्शन है। निवेशकों के लिए इस वीक 7 आईपीओ में पैसे लगाने का मौका खुल रहा है। राजस्थान बेस्ड थर्मल इंजीनियरिंग कंपनी टेम्पसेंस इंस्ट्रूमेंट्स भी अपना नया आईपीओ लेकर आ रही है। यह आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 20 अगस्त को खुलेगा और 24 अगस्त को बंद होगा।

ग्रे मार्केट में इस आईपीओ को लेकर जबरदस्त माहौल देखने को मिल रहा है। आईपीओ खुलने से पहले ही इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम 50% के पार निकल चुका है, जो मजबूत लिस्टिंग गेन की ओर इशारा कर रहा है। जानिए इस आईपीओ की सभी जरूरी डिटेल्स।

आईपीओ का साइज, प्राइस बैंड और लॉट साइज

इश्यू साइज: कंपनी इस आईपीओ के जरिए कुल ₹650 करोड़ जुटाने जा रही है।

फ्रेश इश्यू vs OFS: आईपीओ में ₹95 करोड़ का फ्रेश इश्यू (नए शेयर) शामिल है, जबकि ₹555 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसमें 1.85 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे जाएंगे।

प्राइस बैंड: शेयर का प्राइस बैंड ₹285 से ₹300 प्रति शेयर तय किया गया है।

लॉट साइज: कम से कम 50 शेयरों का एक लॉट है। ऊपरी प्राइस बैंड (₹300) पर रिटेल निवेशकों को 1 लॉट के लिए न्यूनतम ₹15,000 का निवेश करना होगा। रिटेल निवेशक अधिकतम 13 लॉट (650 शेयर) के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिसकी लागत ₹1,95,000 होगी।

अहम तारीखें

  • एंकर इन्वेस्टर्स बिडिंग: 19 अगस्त 2026
  • आईपीओ ओपनिंग डेट: 20 अगस्त 2026
  • आईपीओ क्लोजिंग डेट: 24 अगस्त 2026
  • अलॉटमेंट डेट (अनुमानित): 25 अगस्त 2026
  • लिस्टिंग की तारीख (BSE/NSE): 28 अगस्त 2026

कंपनी पैसे का क्या करेगी?

फ्रेश इश्यू से मिलने वाले ₹95 करोड़ में से ₹18.1 करोड़ का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक हीटिंग और केबल सॉल्यूशंस बिजनेस के कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) के लिए होगा, ₹55 करोड़ का उपयोग कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा, और बाकी रकम कॉरपोरेट जरूरतों में लगेगी।

कंपनी का बिजनेस और फाइनेंशियल ट्रैक रिकॉर्ड

1990 में शुरू हुई टेम्पसेंस इंस्ट्रूमेंट्स तापमान मापने वाले सेंसर, इलेक्ट्रिक हीटिंग और स्पेशल केबल सॉल्यूशंस बनाती है। तापमान सेंसर सेगमेंट में कंपनी का मार्केट शेयर 10.5% और नॉन-कॉन्टेक्ट टेम्परेचर सेंसर सेगमेंट में 21.3% है। दुनियाभर में कंपनी के पास 15 मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी हैं (10 उदयपुर में और 5 विदेशों में)।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी का नेट प्रॉफिट 11.2% बढ़कर ₹67.3 करोड़ रहा (जो पिछले साल ₹60.6 करोड़ था)। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 17.5% बढ़कर ₹444.9 करोड़ पर पहुंच गया।

Tempsens Instruments IPO: कितना चल रहा है GMP?

ग्रे मार्केट गतिविधियों पर नजर रखने वाले प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, टेम्पसेंस इंस्ट्रूमेंट्स का जीएमपी काफी तगड़ा रिस्पांस दे रहा है। Investorgain के अनुसार, कंपनी के शेयर का GMP ₹168 चल रहा है, जो इसके ऊपरी प्राइस बैंड (₹300) के हिसाब से करीब 56% लिस्टिंग गेन का संकेत देता है। वहीं, IPO Watch पर इसका जीएमपी करीब 51.33% दर्ज किया गया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tempsens Instruments IPO: खुलने से पहले 56% पर पहुंचा GMP, 20 अगस्त से लगा सकेंगे पैसा

Tempsens Instruments IPO: थर्मल इंजीनियरिंग और स्पेशलाइज्ड केबल बनाने वाली कंपनी Tempsens Instruments का IPO 20 अगस्त को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। इश्यू खुलने से पहले ही ग्रे मार्केट में इसे लेकर जबरदस्त उत्साह दिख रहा है। Investorgain के मुताबिक, कंपनी का GMP ₹168 पहुंच गया है। यानी अपर प्राइस बैंड के मुकाबले करीब 56% प्रीमियम का संकेत मिल रहा है। वहीं IPO Watch ने करीब 51.33% GMP बताया है।

कंपनी इस IPO के जरिए ₹650 करोड़ जुटाना चाहती है। एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अगस्त को खुलेगी, जबकि रिटेल निवेशक 20 से 24 अगस्त तक आवेदन कर सकेंगे। कंपनी के शेयर 28 अगस्त को BSE और NSE पर लिस्ट होने की संभावना है।

IPO की जरूरी बातें

इश्यू साइज₹650 करोड़
प्राइस बैंड
₹285-300 प्रति शेयर

एंकर बिडिंग19 अगस्त
सब्सक्रिप्शन20 से 24 अगस्त
संभावित लिस्टिंग
28 अगस्त (BSE और NSE)

₹468 पर हो सकती है लिस्टिंग

Tempsens ने IPO का प्राइस बैंड ₹285 से ₹300 प्रति शेयर तय किया है। अगर मौजूदा ₹168 का GMP बना रहता है, तो शेयर की संभावित लिस्टिंग करीब ₹468 पर हो सकती है।

इस हिसाब से प्रति शेयर करीब ₹168 का संभावित फायदा बनता है। हालांकि, यह सिर्फ ग्रे मार्केट का संकेत है। असली लिस्टिंग प्राइस बाजार के सेंटीमेंट और मांग पर तय होगा।

जुटाए गए पैसे का कहां होगा इस्तेमाल?

Tempsens IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अपने कारोबार के विस्तार में करेगी। इसमें इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और स्पेशलाइज्ड केबल बिजनेस में पूंजीगत निवेश शामिल है। इसके अलावा कंपनी कुछ कर्ज भी चुकाएगी और बाकी रकम सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों में खर्च करेगी।

Tempsens क्या करती है?

1990 में शुरू हुई Tempsens Instruments थर्मल इंजीनियरिंग और स्पेशलाइज्ड केबल बनाने वाली कंपनी है। कंपनी इंडस्ट्री के लिए कस्टमाइज्ड टेम्परेचर सेंसर, इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और स्पेशलाइज्ड केबल तैयार करती है।

इसके पोर्टफोलियो में कॉन्टैक्ट और नॉन-कॉन्टैक्ट दोनों तरह के टेम्परेचर सेंसर शामिल हैं। कंपनी अलग-अलग औद्योगिक सेक्टर के लिए जरूरत के हिसाब से सॉल्यूशंस भी देती है।

Shiprocket IPO: अलॉटमेंट जारी, 19 अगस्त को हो सकती है लिस्टिंग; GMP दे रहा तगड़े मुनाफे का संकेत

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Shiprocket IPO: अलॉटमेंट जारी, 19 अगस्त को हो सकती है लिस्टिंग; GMP दे रहा तगड़े मुनाफे का संकेत

Shiprocket IPO: टेमासेक के निवेश वाली ई-कॉमर्स एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म शिपरॉकेट के आईपीओ का अलॉटमेंट जारी हो चुका है। जिन निवेशकों ने इस बुक-बिल्डिंग इश्यू में आवेदन किया था, वे अब अपना अलॉटमेंट स्टेटस ऑनलाइन चेक कर सकते हैं। अब निवेशकों की नजर 19 अगस्त 2026 को संभावित लिस्टिंग पर है। इस बीच ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) भी मजबूत लिस्टिंग गेन का संकेत दे रहा है।

GMP क्या संकेत दे रहा है?

Investorgain के मुताबिक, Shiprocket IPO का लेटेस्ट GMP ₹38 है। कंपनी के शेयर ग्रे मार्केट में इश्यू प्राइस के मुकाबले 39.18% के प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं।

कंपनी के IPO का अपर प्राइस बैंड ₹97 प्रति शेयर था। ऐसे में मौजूदा GMP के आधार पर शिपरॉकेट की लिस्टिंग करीब ₹135 पर होने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, GMP केवल ग्रे मार्केट का अंदाजा होता है। असल लिस्टिंग मार्केट की मांग, सेंटीमेंट और ओपनिंग बिड्स पर निर्भर करेगी।

कितना मुनाफा हो सकता है?

Shiprocket IPO का लॉट साइज 154 शेयर था। अपर प्राइस बैंड ₹97 होने के कारण एक लॉट के लिए निवेशकों को ₹14,938 लगाने पड़े।

अगर ₹38 GMP और 39.18% संभावित प्रीमियम के आधार पर शेयर ₹135 पर लिस्ट होता है, तो प्रति शेयर ₹38 का फायदा हो सकता है। ऐसे में आपके निवेश की रकम अच्छी खासी बढ़ सकती है।

  • 1 लॉट (154 शेयर) का संभावित मुनाफा: ₹5,852
  • 5 लॉट (770 शेयर) का संभावित मुनाफा: ₹29,260

यानी एक लॉट की ₹14,938 की शुरुआती निवेश रकम बढ़कर करीब ₹20,790 हो सकती है, जो करीब 39.18% के संभावित रिटर्न के बराबर है। हालांकि वास्तविक मुनाफा लिस्टिंग प्राइस पर निर्भर करेगा।

एक्सपर्ट्स की क्या राय है?

SBI Securities का शिपरॉकेट IPO पर पॉजिटिव रेटिंग दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि कर्ज घटने से बैलेंस शीट मजबूत होगी। साथ ही, ब्याज खर्च कम होने से मुनाफे में सुधार आ सकता है। वहीं Swastika Financial ने ‘न्यूट्रल’ रेटिंग दी है। उसका कहना है कि यह IPO 2-3 साल के नजरिए वाले हाई-रिस्क निवेशकों के लिए ज्यादा सही है।

Ventura Securities के मुताबिक, कंपनी की नेटवर्थ ₹1,524.29 करोड़ है। FY26 में ऑपरेशन से ₹52.64 करोड़ का पॉजिटिव कैश फ्लो रहा। हालांकि, थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स पार्टनर्स पर अधिक निर्भरता और कोर बिजनेस से ज्यादा रेवेन्यू आना इसके प्रमुख जोखिम हैं।

शिपरॉकेट का वैल्यूएशन कैसा है

Geojit Investments ने भी IPO पर पॉजिटिव राय दी है। ब्रोकरेज का कहना है कि ₹97 के अपर प्राइस बैंड पर कंपनी का वैल्यूएशन FY26 के आधार पर करीब 3.6 गुना EV/Sales है। यह इसकी लिस्टेड प्रतिस्पर्धियों की तुलना में आकर्षक माना जा सकता है।

ब्रोकरेज का मानना है कि Shiprocket का मर्चेंट बेस बढ़ रहा है। टेक्नोलॉजी आधारित प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स बाजार में मजबूत स्थिति है। ये चीज इसे मध्यम से लंबी अवधि के निवेशकों के लिए दिलचस्प बनाती है।

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Tata Group News: एन चंद्रशेखरन ने आखिर टाटा संस के चेयरमैन पद से क्यों दिया इस्तीफा? जानिए टाटा समूह के अंदर की पूरी कहानी

Tata Group News: एन चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफे के ऐलान ने चौंका दिया था। उन्होंने 12 अगस्त को यह ऐलान किया था। तब से उनके इस्तीफे की वजहों को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चा सुनने को मिली है। लेकिन, सच यह है कि उनके इस्तीफे के पीछे कोई एक वजह नहीं थी। सूत्रों ने मनीकंट्रोल को बताया कि तीसरी बार टाटा संस के चेयरमैन पद पर उनकी नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। इसका असर समूह से जुड़े ब़ड़े फैसलों पर पड़ रहा था।

गवर्नेंस और कैपिटल ऐलोकेशन को लेकर चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद था। इसके अलावा होल्डिंग कंपनी यानी टाटा संस के कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर को लेकर भी बहस लगातार बढ़ रही थी। ये सभी मसले अगस्त के दूसरे हफ्ते में ऐसे लेवल पर पहुंच गए, जिसके बाद चंद्रशेखरन ने इस्तीफा देने का फैसला ले लिया।

चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को अपने बयान में कई बातें कही थीं। उन्होंने जुलाई 2025 टाटा ट्रस्ट्स के उस प्रस्ताव का भी जिक्र किया था, जिसमें उन्हें तीसरी बार टाटा संस का चैयरमैन पांच साल के लिए नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी। लेकिन, फरवरी 2026 में टाटा संस के बोर्ड की बैठक में एक डायरेक्टर ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। फरवरी से लेकर अब तक यह मसला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।

जुलाई 2025 के प्रस्ताव में एक दूसरी अहम बात भी शामिल थी। इसमें चंद्रशेखरन को टाटा संस को अनलिस्टेड बनाए रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश करने को कहा गया था। बाद में यह मसला बड़ा बन गया। स्ट्रक्चर के लिहाज से टाटा संस के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। इसका काफी असर चंद्रशेखरन पर पड़ा। सूत्रों ने बताया कि खासकर इस सवाल का जवाब नहीं था कि क्या आखिर में टाटा संस को खुद को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराना होगा।

मनीकंट्रोल ने खबर दी थी कि 26 मई को बोर्ड की बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन को टाटा संस की लिस्टिंग के बारे में अपनी पोजीशन बताने को कहा था। सूत्रों ने बताया कि इस बारे में चंद्रशेखरन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। टाटा संस की लिस्टिंग का मसला काफी अहम है। लिस्टिंग के बाद टाटा संस के लिए नियम और शर्तें काफी बदल जाएंगी। खासकर टाटा ट्रस्ट्स को मिले विशेष अधिकार खत्म हो जाएंगे।

टाटा ट्रस्ट्स अभी टाटा संस से जुड़े सभी बड़े फैसले लेता है। यहां तक कि टाटा संस के बोर्ड में डायरेक्टर्स की नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नॉमिनी का एप्रूवल जरूरी है। टाटा संस के शेयर बाजार में लिस्ट होते ही टाटा ट्रस्ट्स के ये अधिकार खत्म हो जाएंगे। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है।

RBI ने टाटा संस को अपर लेयर वाली NBC की कैटेगरी में रखा है। इस कैटेगरी के एनबीएफसी को सख्त रेगुलेशंस का पालन करना पड़ता है। हालांकि, आरबीआई ने 6 अगस्त को कहा था कि टाटा संस का एनबीएफसी की अपर लेयर कैटेगरी में बने रहने में उसके डीरजिस्ट्रेशन के अप्लिकेशन के नतीजों का कोई हाथ नहीं है। अभी इस अप्लिकेशन पर विचार जारी है।

टाइम्स ऑफ इंडियान ने 17 अगस्त को खबर दी कि चंद्रशेखरन और नोएल टाटा दोनों ने सरकार को अलग-अलग अपनी पोजीशन के बारे में बताया। इस मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, टाटा समूह के भविष्य को लेकर स्पष्ट दिशा का अभाव था। टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के बारे में फैसला होना है। बतौर चेयरमैन चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को खत्म हो रहा है।

18 अगस्त को 2 बजे टीसीएस का शेयर 1.25 फीसदी गिरकर 2,284 रुपये पर चल रहा था। टाइटन का शेयर 0.38 फीसदी गिरकर 5049 रुपये पर चल रहा था। टाटा मोटर्स सीवी का शेयर 0.68 फीसदी गिरकर 467 रुपये पर चल रहा था।