अमेरिका ने ईरान के 2 रॉकेट लॉन्चर्स तबाह किए:होर्मुज में करीब एक महीने बाद हमला; ईरान बोला- कई सैनिक और नागरिक मारे गए

अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चर्स को निशाना बनाया। जुलाई के के बाद ईरान पर यह पहला अमेरिकी हमला है। अमेरिकी सेना ने बताया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के जवान होर्मुज स्ट्रेट में रॉकेट और समुद्री बारूदी सुरंगें लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे, तभी अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की। ईरान के सेमी-ऑफिशियल मीडिया ने लारक द्वीप के पास धमाकों की आवाज सुनाई देने की जानकारी दी। ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका ने द्वीप पर ड्रोन से हमला किया। ईरानी सेना ने बताया कि हमले में उनके कई सैनिक और नागरिक मारे गए हैं। कई घायल हैं। ईरान ने हमले का जवाब देने और जिम्मेदार लोगों को सजा देने की चेतावनी दी है। अमेरिकी सेना ने हाल ही में हटाई थीं बारूदी सुरंगें अमेरिकी सेना ने पिछले हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने का काम पूरा किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कहा था कि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में मौजूद सभी सुरंगों को हटा दिया गया या निष्क्रिय कर दिया गया है। ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर कोई जहाज या नाव होर्मुज स्ट्रेट में नई समुद्री सुरंगें बिछाने की कोशिश करेगी, तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा। अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए क्यों अहम? होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच का प्रमुख समुद्री रास्ता है। दुनिया के तेल और गैस कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। संघर्ष से पहले दुनिया में इस्तेमाल होने वाले करीब पांचवें हिस्से के तेल की आवाजाही इसी रास्ते से होती थी। यही वजह है कि होर्मुज में तनाव बढ़ने या जहाजों की आवाजाही रुकने से कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच यहां बढ़ती सैन्य गतिविधि को इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर माना जा रहा है। फरवरी से जारी है अमेरिका-इजराइल और ईरान का युद्ध अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों पर हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। संघर्ष को अब छह महीने से ज्यादा हो चुके हैं और हाल के हफ्तों में स्थिति गतिरोध जैसी बनी हुई है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के अलावा लेबनान में इजराइली हमलों से भी भारी नुकसान हुआ है। इन हमलों में हजारों लोगों की मौत और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। संघर्ष में अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की जानकारी है। होर्मुज को अमेरिका का इलाका बता चुके हैं ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपतिट्रम्प होर्मुज स्ट्रेट को ‘न्यू यूएस टेरिटरी’ यानी नया अमेरिकी इलाका बता चुके हैं। 18 अगस्त को उन्होंने पहली बार होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी। इसके बाद उन्होंने 23 अगस्त को ट्रुथ सोशल पर दोबारा ऐसी तस्वीर शेयर की, जिसमें होर्मुज को अमेरिकी इलाके के तौर पर दिखाया गया। जंग के बाद दो रास्तों में बंटा होर्मुज जंग शुरू होने से पहले होर्मुज को एक ही समुद्री रास्ता माना जाता था। जहाज तय रास्ते से गुजरते थे। उनका रास्ता बंदरगाह, जहाज के समझौते और सुरक्षा को देखकर तय होता था। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद यहां दो अलग रास्तों की बात होने लगी। ईरानी रास्ता: यह होर्मुज के उत्तरी हिस्से में ईरान के तट के पास है। यह लारक और किश्म द्वीपों के करीब से गुजरता है और ईरान के बंदरगाहों और तेल टर्मिनलों तक जाता है। ओमानी रास्ता: यह होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में ओमान के करीब है और ईरान के तट से दूर है। अमेरिका इसी रास्ते से जहाजों को गुजरने पर जोर देता है। अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में चलने वाले कई कॉमर्शियल जहाज भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। ———————– ये खबर भी पढ़ें… ईरान होर्मुज में जहाजों से टोल वसूलेगा, संसद की मंजूरी ईरान की संसद ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल यानी टैक्स या फीस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जिन देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति होगी, उनसे समुद्री सेवाओं के बदले शुल्क लिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

Islamic NATO: भारत के खिलाफ बांग्लादेश की साजिश? सऊदी अरब-पाकिस्तान-तुर्किये के ‘इस्लामिक NATO’ में होगा शामिल

Islamic NATO: बांग्लादेश के दो मंत्रियों ने कहा है कि उनका देश हाल में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच बने रक्षा गठबंधन में शामिल होने के लिए तैयार है। हालांकि, भारत के पड़ोसी देश ने कहा है कि इस संबंध में कोई भी फैसला राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। 7 अगस्त को मक्का में हुए इस समझौते के तहत सामूहिक सुरक्षा और प्रतिरोध का एक ढांचा तैयार किया गया है। ‘इस्लामिक NATO’ कहे जाने वाले इस ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ में प्रावधान है कि इसमें से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

इस बीच खबर है कि फरवरी से ही अमेरिका का मुकाबला कर रहे ईरान को भी सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए इस एग्रीमेंट में शामिल होने का न्योता दिया गया है। पाकिस्तान के SAMAA TV की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी संसद की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘खानेह मिल्लत’ के प्रमुख मेहदी रहीमी ने लेबनान के ‘अल मयादीन’ को बताया कि तेहरान को न्योता मिला है। इसके बाद इस मामले पर विचार किया जा रहा है।

बांग्लादेश ने क्या कहा?

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नवनियुक्त विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा, “बांग्लादेश अपने हितों और वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं व्यापार में बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये से जुड़े किसी आर्थिक या रक्षा ढांचे में शामिल होने की संभावना के प्रति सकारात्मक रुख रखता है।” कबीर ने शुक्रवार को सरकारी न्यूज एजेंसी ‘बीएसएस’ की बांग्ला सेवा को दिए इंटरव्यू में कहा कि सरकार बांग्लादेश फर्स्ट पॉलिसी और संतुलित विदेश नीति पर आगे बढ़ रही है, जिसमें राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

पाकिस्तान के करीब जा रहा ढाका!

कबीर ने कहा कि इसी नीति के तहत ढाका रक्षा समझौते में शामिल होने का फैसला कर सकता है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सामान्य राजनयिक संबंधों के माध्यम से पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को भी मजबूत करेगा जिसे व्यापार और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शुक्रवार को विदेश मामलों के दूसरे राज्य मंत्री के रूप में नियुक्त कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान को सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान ने रियाद आने का निमंत्रण दिया है।

प्रधानमंत्री की इस यात्रा की तारीख गर्मियां खत्म होने के बाद निर्धारित की जा सकती है। विदेश मामलों की एक अन्य राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कबीर की बातों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि रक्षा समझौते में शामिल होने को लेकर बांग्लादेश का रुख उसके राष्ट्रीय हित और वहां के लोगों के हितों से तय होगा।

बांग्लादेशी लोगों के हित सुरक्षित हैं या नहीं?

जब उनसे पूछा गया कि क्या बांग्लादेश इस त्रिपक्षीय ढांचे का हिस्सा बनेगा तो उन्होंने कहा, “हम किसी भी समझौते या बहुपक्षीय संगठन में शामिल होंगे या नहीं, इसका फैसला मुख्य रूप से इस आधार पर होगा कि बांग्लादेश और बांग्लादेशी लोगों के हित सुरक्षित हैं या नहीं।”

दोनों मंत्रियों की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री तारिक रहमान के वित्त एवं योजना सलाहकार प्रोफेसर राशेद अल महमूद तितुमीर के उस बयान के दो दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति को देश की विदेश नीति में ‘बुनियादी बदलाव’ बताया था।

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उन्होंने कहा था कि इस नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बांग्लादेश के संबंधों में राष्ट्रीय हित, संप्रभुता, आपसी सम्मान और क्षेत्रीय सौहार्द को केंद्र में रखा गया है। इसके तहत सभी देशों के साथ रचनात्मक और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा।

Crude Oil Price: ईरान-US में तनाव बढ़ने क्रूड में भारी उछाल, $91 के पार पहुंचा भाव

US-Iran war: मंगलवार को तेल की कीमतें बढ़ गई। मिडिल ईस्ट में चल रहे झगड़े को खत्म करने के लिए किसी समझौते की उम्मीद कम हो गई। ईरान ने ज़्यादा आक्रामक रुख दिखाया और US ने युद्धविराम को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। इन घटनाक्रमों ने एनर्जी सप्लाई में रुकावट की आशंकाओं को बढ़ा दिया।

पिछले सेशन में 30 जुलाई के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 27 सेंट या 0.3% बढ़कर $91.14 प्रति बैरल हो गए। US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 42 सेंट बढ़कर $85.04 प्रति बैरल हो गए, जबकि इससे पहले इसमें 1% से ज़्यादा की बढ़त हुई थी और यह $85.37 तक पहुंच गया था, जो 31 जुलाई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था।

 कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

US प्रेसिडेंट द्वारा बताए गए मेमोरैंडम पर जून में साइन किए गए थे और तकनीकी रूप से, इसकी समय सीमा सोमवार को खत्म हो गई।

हालांकि, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ समेत कई अहम मुद्दों पर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच गहरी असहमति बनी हुई है। ईरान अभी इस अहम समुद्री रास्ते के मैनेजमेंट को लेकर ओमान के साथ बातचीत कर रहा है, जबकि US इस बातचीत में शामिल नहीं है। फॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ओमान ने US के नेतृत्व वाली नाकेबंदी में दखल दिया तो वे ओमान पर बम गिरा देंगे।

US अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि वॉशिंगटन इस झगड़े को खत्म करने की कोई जल्दबाजी में नहीं है, जो अब छठे महीने में प्रवेश कर रहा है। एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने फॉक्स न्यूज़ को बताया कि US ईरान से निपटने के लिए लंबे समय का नज़रिया अपना रहा है, जबकि दूत जेरेड कुशनर ने कहा कि ट्रंप समझौते के लिए धैर्य रखने को तैयार हैं।

इस साल क्रूड ऑयल की कीमतें लगभग 50% बढ़ गई हैं क्योंकि लंबे समय से चल रहे युद्ध ने मिडिल ईस्ट से एनर्जी की सप्लाई में रुकावट पैदा की है। हालांकि, पर्शियन गल्फ के प्रोड्यूसर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ज़रिए तेल भेजने और इंटरनेशनल मार्केट में सप्लाई करने के ज़्यादा असरदार तरीके ढूंढते दिख रहे हैं। सऊदी अरब अब ऐसे कार्गो की पेशकश कर रहा है जो चोकपॉइंट के बाहर से आते हैं, जिससे पता चलता है कि किंगडम तेल एक्सपोर्ट करने के लिए UAE की तरह वैकल्पिक रास्ते खोजने की रणनीति अपना सकता है।

“आज ब्रेंट की कीमतें बढ़कर $89.5 प्रति बैरल हो गईं और WTI $83 के पार पहुंच गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि US-ईरान तनाव कम करने के लिए किसी समझौते की उम्मीदें कम होती जा रही हैं, साथ ही लेबनान में नई लड़ाई और होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर लगातार हमलों के कारण सप्लाई का रिस्क बना हुआ है।

US-ईरान के बीच अंतिम समझौते के लिए तय 60 दिन की समय-सीमा बिना किसी समझौते के खत्म हो गई, और ट्रेजरी सेक्रेटरी बेसेंट द्वारा ईरान पर लगाए जाने वाले अभूतपूर्व प्रतिबंधों की घोषणा – जिनकी उम्मीद इस हफ्ते थी,अभी भी बाकी है। होर्मुज की स्थिति, खत्म हो चुकी समय-सीमा और संभावित प्रतिबंधों को देखते हुए कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की AVP कायनात चेनवाला ने कहा अगर तनाव बढ़ता है या प्रतिबंधों के कारण स्थिति बिगड़ती है तो कच्चे तेल की कीमत $95 तक जा सकती है, जबकि हमलों में कमी आने पर कीमतों में बढ़ोतरी सीमित हो सकती है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Trend: निफ्टी में बेस के पास गिरावट पर खरीदारी की रणनीति करेगी काम, इन दो शेयरों में हो सकती है अच्छी कमाई

Market Trend : हॉर्मुज को लेकर घमासान से कच्चा तेल 88 डॉलर के करीब पहुंच गया है। कच्चे तेल में तेजी के बीच भारतीय बाजार के लिए नरम संकेत हैं। गिफ्ट निफ्टी में गिरावट है। FIIs की कैश में हल्की खरीदारी रही, लेकिन वायदा में बिकवाली देखने को मिली है। वहीं एशिया में भी हल्का दबाव है। शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भी हल्की गिरावट देखने को मिली थी। सोने और चांदी के दाम में तेजी का सिलसिला कायम है। सोना 4400 डॉलर के ऊपर निकल गया है। चांदी भी 66 डॉलर के पार दिख रही है। डॉलर इंडेक्स 100 के नीचे है। वहीं US बॉन्ड यील्ड 4.7 के नीचे टिकी हुई है।

US-ईरान वॉर को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा है कि हॉर्मुज पर US जल्द कब्जा करेगा। अमेरिका की ईरान पर अब तक सबसे बड़े इकोनॉमिक प्रतिबंध की भी धमकी आई है। इधर लेबनान में इजरायल का भीषण हमला हुआ है। नेतन्याहू ने कहा है कि अगर US कहे तो ईरान पर अटैक को तैयार हैं।

सोने और चांदी के दाम में तेजी का सिलसिला कायम है। सोना 4400 डॉलर के ऊपर निकल गया है। चांदी भी 66 डॉलर के पार दिख रही है। डॉलर इंडेक्स 100 के नीचे है। वहीं US बॉन्ड यील्ड 4.7 के नीचे टिकी है।

आज बाजार में क्या हो रणनीति?

सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार का कहना है कि निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24452-24483/24519 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24536-24577 पर है। इसके लिए पहला बेस 24266-24309 पर और बड़ा बेस 24188-24231 पर है। FIIs का नेट शॉर्ट बढ़कर 1.76 लाख पर रहा है। 8700 शॉर्ट्स और जुड़े हैं। 24400-24500-24600 पर भारी कॉल राइटिंग हुई है। 24400-24300-24200 पर पुट राइटिंग हुई है। निफ्टी 10/20 DEMA के आसपास है और 200 DEMA के ऊपर है। 24309-24266 शुरुआती बेस है। 100-50 DEMA (बेस-2) अहम वीकली सपोर्ट है। शुरुआती रेंज 24450-24500 से 24309-24280 है। बेस के पास BUY ON DIPS की रणनीति रखें। ऊपरी रेंज में मुनाफावसूली करें। 24500-24550 बड़ी बाधा है। इसके ऊपर ही ब्रेकआउट संभव है। 24231-24188 (बेस-1) के नीचे गिरावट में बड़ा ब्रेकडाउन संभव है।

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निफ्टी बैंक पर रणनीति

वीरेंद्र कुमार का कहना है कि निफ्टी बैंक के लिए पहला रजिस्टेंस 57810-58033 पर और बड़ा रजिस्टेंस 58188-58267 पर है। इसके लिए पहला बेस 57221-57333 पर और बड़ा बेस 56910-57060 पर है। यह अभी भी रेंज में है। शुक्रवार को रेंज के निचले हिस्से तक फिसला। कच्चे तेल से अभी राहत नहीं है। 57500-58000-58200 पर भारी कॉल राइटिंग हुई है। 57200-56500 के बीच 50/100/200 DEMA है। 57000 पर मेगा पुट राइटिंग हुई है।

अभी भी 58000-58200 से 57400-57200 के बीच रेंज संभव है। निफ्टी बैंक में साइडवेज मूव संभव है। बेस-1 के ऊपर ही पुलबैक की संभावना है। बेस-1 से रजिस्टेंस-1 के बीच रेंज संभव है। बेस-1 के नीचे रिवर्सल की कोशिश न करें। बेस-1 टूटने पर बेस-2 के टूटने का खतरा है,सावधानी जरूरी है।

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं manasjaiswal.com के मानस जायसवाल। इनकी KFINTECH में 924 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ 970 रुपए के टारगेट के लिए और HAVELLS में 1279 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ 1340 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

रिपोर्ट-होर्मुज खोलने पर ईरान से समझौता कर सकता है अमेरिका:बदले में ट्रम्प परमाणु समझौते की मांग छोड़ सकते हैं; सीजफायर की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प होर्मुज खोलने के बदलने परमाणु समझौते की मांग छोड़ सकते हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प चाहते हैं ईरान होर्मुज पूरी तरह खोल दें। इससे ईरान के साथ फिर से सीजफायर का रास्ता भी बन सकता है। ट्रम्प समझौते के बिना पीछे हटने को तैयार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रम्प प्रशासन कई हफ्तों से इसके तैयार कर रहा है। उन्होंने वरिष्ठ सहयोगियों से निजी बातचीत में कहा है कि वे ईरान के साथ नया परमाणु समझौता किए बिना भी पीछे हट सकते हैं। ईरान ने भी होर्मुज खोलने के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें अरबों डॉलर का भुगतान, अमेरिक नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना और इलाके से अमेरिकी सैनिकों की वापसी शामिल है। ईरान ने प्रतिबंध हटाने और उसकी जब्त संपत्तियां लौटाने की मांग भी की है। अमेरिका के लिए चुनौती क्यों बना हुआ है ईरान? 1. 3,000+ बैलिस्टिक मिसाइलें, भूमिगत ‘मिसाइल सिटी’ अमेरिकी खुफिया एजेंसी ODNI के मुताबिक, युद्ध से पहले ईरान के पास 3,000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें थीं, जिनकी मारक क्षमता 2,000 किमी तक है। इन मिसाइलों का बड़ा हिस्सा पहाड़ों के नीचे बने भूमिगत ठिकानों में रखा गया है। यहां मिसाइलें, लॉन्चर और कंट्रोल सेंटर सुरंगों के अंदर होते हैं, इसलिए हवाई हमलों में इन्हें पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं माना जाता। 2. दुनिया के 20% तेल का रास्ता ईरान के पास हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 20% और LNG का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसका उत्तरी तट ईरान के पास है। इसलिए यहां तनाव बढ़ने और हॉर्मुज बंद होने का असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। 3. हजारों ड्रोन का बेड़ा ईरान ने पिछले एक दशक में शाहेद जैसे हजारों ड्रोन विकसित किए हैं। इनका इस्तेमाल लंबी दूरी के हमलों और निगरानी के लिए किया जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध में भी ईरानी ड्रोन के इस्तेमाल ने इसकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर चर्चा में ला दिया। 4. पश्चिम एशिया में सहयोगी सशस्त्र नेटवर्क ईरान के समर्थन वाले समूह हिजबुल्लाह (लेबनान), हूती (यमन) और इराक के कई शिया सशस्त्र गुट पश्चिम एशिया में एक्टिव हैं। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ इन्हें ईरान की फॉरवर्ड डिफेंस स्ट्रटजी का हिस्सा मानते हैं, जिससे वह अपने सीमावर्ती क्षेत्र से बाहर भी दबाव बना सकता है। होर्मुज पर ईरान दावा क्यों करता है? हॉर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इसका उत्तरी किनारा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी किनारा ओमान के पास है। सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई सिर्फ 21 नॉटिकल मील (करीब 39 किलोमीटर) है। शुरुआत में दोनों देशों का समुद्री क्षेत्र सिर्फ 3 नॉटिकल मील तक माना जाता था। लेकिन बाद में समुद्री कानूनों में बदलाव के बाद ईरान ने 1959 में और ओमान ने 1972 में अपने-अपने समुद्री क्षेत्र की सीमा बढ़ाकर 12-12 नॉटिकल मील (करीब 22-22 किलोमीटर) कर दी। इस फैसले के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा पूरी तरह ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्रों में आ गया। हालांकि समुद्री आवाजाही जारी रहे इसके 2-2 नॉटिकल मील का चौड़ा ट्रांजिट लेन बनाया गया। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… नेतन्याहू बोले- जब तक PM हूं फिलिस्तीन देश नहीं बनेगा:गाजा से सेना हटाने से भी इनकार, ट्रम्प का प्लान खारिज किया इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि जब तक मैं प्रधानमंत्री हूं, फिलिस्तीन देश नहीं बनेगा। पूरी खबर पढ़ें…

रिपोर्ट-होर्मुज खोलने पर ईरान से समझौता कर सकता है अमेरिका:बदले में ट्रम्प परमाणु समझौते की मांग छोड़ सकते हैं; सीजफायर की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प होर्मुज खोलने के बदलने परमाणु समझौते की मांग छोड़ सकते हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प चाहते हैं ईरान होर्मुज पूरी तरह खोल दें। इससे ईरान के साथ फिर से सीजफायर का रास्ता भी बन सकता है। ट्रम्प समझौते के बिना पीछे हटने को तैयार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रम्प प्रशासन कई हफ्तों से इसके तैयार कर रहा है। उन्होंने वरिष्ठ सहयोगियों से निजी बातचीत में कहा है कि वे ईरान के साथ नया परमाणु समझौता किए बिना भी पीछे हट सकते हैं। ईरान ने भी होर्मुज खोलने के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें अरबों डॉलर का भुगतान, अमेरिक नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना और इलाके से अमेरिकी सैनिकों की वापसी शामिल है। ईरान ने प्रतिबंध हटाने और उसकी जब्त संपत्तियां लौटाने की मांग भी की है। अमेरिका के लिए चुनौती क्यों बना हुआ है ईरान? 1. 3,000+ बैलिस्टिक मिसाइलें, अंडरग्राउंड ‘मिसाइल सिटी’ अमेरिकी खुफिया एजेंसी ODNI के मुताबिक, युद्ध से पहले ईरान के पास 3,000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें थीं, जिनकी मारक क्षमता 2,000 किमी तक है। इन मिसाइलों का बड़ा हिस्सा पहाड़ों के नीचे बने अंडरग्राउंड ठिकानों में रखा गया है। यहां मिसाइलें, लॉन्चर और कंट्रोल सेंटर सुरंगों के अंदर होते हैं, इसलिए हवाई हमलों में इन्हें पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं माना जाता। 2. दुनिया के 20% तेल का रास्ता ईरान के पास हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 20% और LNG का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसका उत्तरी तट ईरान के पास है। इसलिए यहां तनाव बढ़ने और हॉर्मुज बंद होने का असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। 3. हजारों ड्रोन का बेड़ा ईरान ने पिछले एक दशक में शाहेद जैसे हजारों ड्रोन विकसित किए हैं। इनका इस्तेमाल लंबी दूरी के हमलों और निगरानी के लिए किया जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध में भी ईरानी ड्रोन के इस्तेमाल ने इसकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर चर्चा में ला दिया। 4. पश्चिम एशिया में सहयोगी सशस्त्र नेटवर्क ईरान के समर्थन वाले समूह हिजबुल्लाह (लेबनान), हूती (यमन) और इराक के कई शिया सशस्त्र गुट पश्चिम एशिया में एक्टिव हैं। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ इन्हें ईरान की फॉरवर्ड डिफेंस स्ट्रटजी का हिस्सा मानते हैं, जिससे वह अपने सीमावर्ती क्षेत्र से बाहर भी दबाव बना सकता है। होर्मुज पर ईरान दावा क्यों करता है? हॉर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इसका उत्तरी किनारा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी किनारा ओमान के पास है। सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई सिर्फ 21 नॉटिकल मील (करीब 39 किलोमीटर) है। शुरुआत में दोनों देशों का समुद्री क्षेत्र सिर्फ 3 नॉटिकल मील तक माना जाता था। लेकिन बाद में समुद्री कानूनों में बदलाव के बाद ईरान ने 1959 में और ओमान ने 1972 में अपने-अपने समुद्री क्षेत्र की सीमा बढ़ाकर 12-12 नॉटिकल मील (करीब 22-22 किलोमीटर) कर दी। इस फैसले के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा पूरी तरह ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्रों में आ गया। हालांकि समुद्री आवाजाही जारी रहे इसके 2-2 नॉटिकल मील का चौड़ा ट्रांजिट लेन बनाया गया। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… नेतन्याहू बोले- जब तक PM हूं फिलिस्तीन देश नहीं बनेगा:गाजा से सेना हटाने से भी इनकार, ट्रम्प का प्लान खारिज किया इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि जब तक मैं प्रधानमंत्री हूं, फिलिस्तीन देश नहीं बनेगा। पूरी खबर पढ़ें…

ट्रम्प बोले- ईरान से जंग जल्द खत्म हो सकती है:हूती विद्रोहियों का यमन में मिसाइल और ड्रोन अटैक, 30 सैनिकों की मौत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ जारी जंग जल्द खत्म हो सकती है। उन्होंने कहा कि बातचीत आगे बढ़ रही है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान के साथ संघर्ष अब ज्यादा लंबा चलेगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास हथियारों की कोई कमी नहीं है और जरूरत के मुताबिक नए हथियार लगातार बनाए जा रहे हैं। उधर, यमन की सेना ने बताया कि हूती विद्रोहियों ने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिसमें 30 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। हूती विद्रोहियों ने अदन की खाड़ी में सऊदी तेल टैंकर डेजी पर मिसाइल हमला करने का भी दावा किया है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज डील जल्द संभव: AP की रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता जल्द हो सकता है। ईरान-ओमान के बीच मसौदा अंतिम चरण में है। 2. ट्रम्प बोले- ईरान खुद बातचीत चाहता है: ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान ने खुद बातचीत की पहल की है और दोनों देशों के बीच वार्ता में अच्छी प्रगति हुई है। उनके मुताबिक, समझौता ईरान के लिए सबसे बेहतर विकल्प होगा। 3. होर्मुज और बाब-अल-मंदेब में जहाजों की आवाजाही घटी: समुद्री ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से बुधवार को सिर्फ 2 जहाज गुजरे, जबकि तनाव से पहले यहां रोज 130-140 जहाज गुजरते थे। बाब-अल-मंदेब में भी शिपिंग ट्रैफिक लगातार घट रहा है। 4. होर्मुज में टोल लगा तो दुनिया में महंगाई बढ़ेगी: दुनिया के आठ बड़े शिपिंग संगठनों ने UN और IMO से अपील की है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का टोल या सर्विस शुल्क न लगाया जाए। उनका कहना है कि इससे शिपिंग महंगी होगी और वैश्विक महंगाई बढ़ेगी। 5. लेबनान में 2 इजराइली सैनिकों की मौत: दक्षिणी लेबनान में एक इमारत में धमाके में दो इजराइली सैनिक मारे गए और चार घायल हुए। इसके बाद इजराइल ने कई इलाकों में हवाई हमले किए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

लगातार 10वीं रात अमेरिका ने ईरान पर किया तबाही वाला हमली, इस बीच 17 अमेरिकी सैनिक मारे गए तो ट्रंप ने खाई ये कसम

Iran-US War Update: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब बेहद खतरनाक और बेकाबू मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी सेना ने सोमवार रात लगातार 10वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी हवाई हमले किए। दूसरी ओर इस युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। वीकेंड पर अमेरिकी सैनिकों की हुई मौतों और नुकसान से भड़के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ भयंकर बदले की कसम खाई है।

5 घंटे चला ऑपरेशन: US CENTCOM ने इन ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी मध्य कमान (U।S। Central Command – CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस ताजा कार्रवाई की पुष्टि की है। अमेरिकी सेना के मुताबिक सोमवार रात को ईरान पर किया गया ताजा हमला करीब 5 घंटे तक चला।

अमेरिकी हवाई हमलों ने ईरान के सैन्य कमान केंद्रों, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइटों, समुद्री क्षमताओं और एयर डिफेंस सिस्टम को सीधे तौर पर निशाना बनाया और तबाह कर दिया। वाशिंगटन का कहना है कि इन स्ट्राइक्स का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हमले करने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह से नष्ट और कमजोर करना है।

17 पहुंची मृत अमेरिकी सैनिकों की संख्या, ट्रंप ने दी बड़ी चेतावनी

हाल ही में वीकेंड के दौरान हुए भीषण हमलों के बाद अमेरिकी सेना के हताहतों की संख्या बढ़ गई है। इस युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक मारे गए अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या बढ़कर 17 हो गई है। अमेरिकी सैनिकों के लिए खूनी साबित हुए इस वीकेंड के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान से कड़ा बदला लेने की कसम खाई है। बीते हफ्ते में ट्रंप ने ईरान में हमलों का दायरा बढ़ाने की चेतावनी दी थी। इसमें ईरान के प्रमुख ऊर्जा संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाना शामिल है।

कैसे शुरू हुई यह जंग और दुनिया पर क्या पड़ रहा है असर?

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर एक साथ बड़ा हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें दागी थीं। युद्ध के दौरान ईरान पर हुए अमेरिकी-इजराइली हमलों और लेबनान में हुए इजराइली हमलों में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। इस युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है और अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों व वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारी अनिश्चितता छा गई है।

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अमेरिका ने ईरान में 140 ठिकानों पर हमले किए:ईरान बोला- होर्मुज दर्जनों परमाणु बमों से भी ज्यादा अहम, हर हाल में इसकी हिफाजत करेंगे

अमेरिका ने रविवार को ईरान में 140 ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक सेंटकॉम के मुताबिक हमलों की इस तीसरी कड़ी में ईरान को काफी नुकसान हुआ है। ये हमले किश्म, सीरिक, बंदर अब्बास, जास्क, बुशेहर, खोंदाब, बंदर महशहर, बेहबहान, अंदीमेश्क, देजफुल, अहवाज, अबादान और खुर्रमशहर जैसे इलाकों में किए गए। वहीं, ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के सलाहकार मोहसिन रेजाई ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट ईरान के लिए दर्जनों परमाणु बमों से भी ज्यादा अहम है। ISNA न्यूज एजेंसी के मुताबिक, रेजाई ने कहा कि ईरान होर्मुज की हर हाल में रक्षा करेगा। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स 1. ओमान के पास जहाज पर हमला,1 भारतीय लापता: ‘GFS गैलेक्सी’ जहाज पर हुए हमले में 11 भारतीय सवार थे। 10 को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि एक भारतीय अब भी लापता है। भारत ने हमले की निंदा करते हुए नागरिक जहाजों पर हमले तुरंत रोकने की अपील की। 2. अमेरिका बोला- ईरान के 300 ठिकानों पर हमला किया: अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक अमेरिका ने इस सप्ताह 3 दिनों में ईरान के 300 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। 3. लेबनान पर इजराइल ने फिर हमले किए: इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के नबातियेह जिले के कफर तेबनित कस्बे पर गोलीबारी की। फिलहाल इन हमलों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। 4. कुवैत के सीमा चौकियों को नुकसान: कुवैत की सेना ने रविवार को बताया कि हाल के हमलों में देश के उत्तरी हिस्से में स्थित तीन सीमा चौकियों को नुकसान पहुंचा है। 5. खुजेस्तान में वाटर प्रोजेक्ट पर हमला: ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, दक्षिणी ईरान के महशहर शहर में एक वाटर प्रोजेक्ट पर प्रोजेक्टाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए। मिडिल ईस्ट के हालात से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Ayatollah Khamenei Funeral: जहां हुआ था हमला वहीं ले जाया गया खामेनेई का ताबूत, अंतिम संस्कार में आएंगे 2 करोड़ लोग! भारत से कौन-कौन पहुंचेगा?

Ayatollah Khamenei Funeral Schedule: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ईरानी सरकारी मीडिया इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) के मुताबिक एक अघोषित और औचक कार्यक्रम के तहत शहीद नेता अयातुल्ला खामेनेई के पार्थिव शरीर वाले ताबूत को उसी स्थान पर ले जाया गया जहां 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों के दौरान वे शहीद हुए थे। इस बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ फोन पर बात कर ग्रैंड अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की शहादत पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक यह देश के इतिहास में सबसे बड़ी जनसभाओं में से एक होने जा रही है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का अनुमान है कि इस अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 2 करोड़ तक पहुंच सकती है।

क्या है अंतिम संस्कार का पूरा शेड्यूल?

खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार शनिवार 4 जुलाई से तेहरान में शुरू होकर मंगलवार 9 जुलाई को उनके गृहनगर मशहद में दफनाने के साथ संपन्न होगा। इस पूरे 6 दिन का शेड्यूल कुछ ऐसा है-

शनिवार (4 जुलाई): तेहरान के इमाम खमेनी ग्रैंड प्रेयर ग्राउंड्स में सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक आम जनता के अंतिम दर्शन के लिए खामेनेई का पार्थिव शरीर रखा जाएगा।

रविवार (5 जुलाई): सुबह के समय अंतिम संस्कार की विशेष नमाज अदा की जाएगी। इसके बाद जनाजे का जुलूस निकाला जाएगा।

सोमवार (6 जुलाई): तेहरान की सड़कों से होते हुए एक बड़ा जनाजा जुलूस गुजरेगा।

मंगलवार (7 जुलाई): पवित्र शहर कौम में अंतिम संस्कार के कार्यक्रम आयोजित होंगे।

बुधवार (8 जुलाई): जनाजे के जुलूस और कार्यक्रमों का सिलसिला पड़ोसी देश इराक के पवित्र शहरों नजफ और कर्बला तक पहुंचेगा।

गुरुवार (9 जुलाई): खामेनेई के पार्थिव शरीर को वापस ईरान लाया जाएगा और मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के साथ ही इस 6 दिवसीय राजकीय शोक और विदाई समारोह का समापन होगा।

भारत से कौन-कौन पहुंचेगा ईरान?

अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत से कई आधिकारिक प्रतिनिधि, राजनेता और आध्यात्मिक गुरु ईरान जा रहे हैं। भारत सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा प्रतिनिधित्व करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों नेता 3 जुलाई को ईरान के लिए रवाना हो रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विंग के प्रमुख पवन खेड़ा को भी यक्रमों में शामिल होने का न्यौता भेजा है।

ईरान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इनवाइट किया है। न्यूज एजेंसियों के मुताबिक आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर इस राजकीय अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए तेहरान पहुंच चुके हैं।

लेबनान के अमल मूवमेंट के एक प्रतिनिधिमंडल सहित कई देशों के वीआईपी तेहरान पहुंचने लगे हैं। अमल मूवमेंट ने अंतिम संस्कार से पहले ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालबाफ से मुलाकात की है।

सुरक्षा कारणों से शामिल नहीं होंगे नए सुप्रीम लीडर मोजतबा

ईरान के वर्तमान सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। भारत में उनके प्रतिनिधि अयातुल्ला हाकिम इलाही ने बताया कि इजरायली धमकियों और सर्विलांस (निगरानी) के खतरों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने मोजतबा को सार्वजनिक रूप से कार्यक्रम में शामिल न होने की सलाह दी है, जिसके चलते यह फैसला लिया गया है।

तेहरान में महाजुटान के लिए प्रशासन की भारी तैयारी

आईआरजीसी की तेहरान कमान के कमांडर और अंतिम संस्कार आयोजन समिति के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल हसन हसनजादेह ने बताया कि तेहरान में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष रणनीतियां तैयार की गई हैं। तेहरान की कोई भी एक सड़क इतनी भारी भीड़ को सुरक्षित तरीके से संभालने में सक्षम नहीं है। इसलिए अधिकारियों ने एक सिंगल रूट की जगह पूरी राजधानी में एक विस्तृत कॉरिडोर बनाने का फैसला किया है। समारोह क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।

जहां खामेनेई का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा वहां परिवार के लिए अलग से बैठने की जगह बनाई गई है। मुख्य मंच को ऊंचाई पर बनाया गया है ताकि भीड़ को स्पष्ट रूप से दर्शन हो सकें। कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कुरान पाठकों, धार्मिक कवियों और सांस्कृतिक समूहों की प्रस्तुतियां होंगी। तेहरान की मेट्रो और बस सेवाएं पूरी क्षमता के साथ चलाई जाएंगी। शहर के चारों तरफ ट्रैफिक कंट्रोल जोन और पांच समर्पित सर्विस सेंटर बनाए गए हैं। ये सेंटर लोगों को पीने का पानी, भोजन, चिकित्सा सहायता, स्वच्छता सुविधाएं और प्रार्थना स्थल उपलब्ध कराएंगे।

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