दावा-स्विट्जरलैंड में पाकिस्तानी आर्मी चीफ को मारने का प्लान था:पीस डील में शामिल होने गए थे, PAK की धमकी के बाद फैसला बदलना पड़ा

इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने स्विट्जरलैंड में ईरान शांति वार्ता के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और उनके डेलिगेशन की हत्या की साजिश रची थी। यह दावा ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने एक पॉडकास्ट में किया है। पत्रकार के दावे के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने धमकी दी जिसके बाद इजराइल को अपना प्लान बदलना पड़ा। यह दावा उस समय से जुड़ा है जब पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में मौजूद थे। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया के संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ था। दावा- पाकिस्तान ने इजराइल को धमकी भरा मैसेज भेजा पॉडकास्ट के दौरान पॉलिटिकल कमेंटेटर मारियो नॉफल के पॉडकास्ट में एस्कोबार ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को बेहद विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर मोसाद हमला करने की तैयारी कर रहा है। एस्कोबार ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में इजराइल को जगह नहीं मिली, इसलिए वह इस प्रक्रिया से खुश नहीं था। उनका यह भी कहना है कि लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियान ने शांति समझौते की राह और मुश्किल बना दी। एस्कोबार ने आगे कहा इस साजिश की जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तान ने इजराइल को चेतावनी भी भेजी थी। उनके मुताबिक यह मैसेज शायद ओमान के जरिए पहुंचाया गया था। इसमें पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि अगर पाकिस्तानी डेलिगेशन को कुछ हुआ तो इजराइल को नक्शे से मिटा दिया जाएगा। हालांकि यह दावा सामने आते ही पाकिस्तान की ओर से इसे खारिज कर दिया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने साजिश से इनकार किया एआरवाई न्यूज के चेयरमैन कमरान खान ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह आरोप पूरी तरह बकवास और निरर्थक है। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असिम मुनीर का पूरा स्विट्जरलैंड दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार और बिना किसी परेशानी के पूरा हुआ। अधिकारी के मुताबिक दौरे के दौरान किसी भी समय कोई सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। न स्विट्जरलैंड की सुरक्षा एजेंसियों ने और न ही अमेरिकी सुरक्षा टीमों ने किसी संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि लूसर्न में प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की सुरक्षा व्यवस्था पूरे समय सामान्य और पूरी तरह सक्रिय रही। किसी तरह की हत्या की साजिश या सुरक्षा खतरे की कोई जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने इसे काल्पनिक कहानी बताया। पाकिस्तान आज भी इजराइल को देश नहीं मानता इजराइल और पाकिस्तान लंबे समय से एक-दूसरे को विरोधी मानते रहे हैं। दोनों देशों के बीच कोई रणनीतिक साझेदारी नहीं है। पाकिस्तान आज भी इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने क्षेत्रीय युद्धविराम प्रयासों पर चर्चा के दौरान इजराइल की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने इजराइल को बुराई और मानवता के लिए अभिशाप बताया था। साथ ही उस पर लेबनान में नरसंहार करने का आरोप लगाया था। पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न इस्लामी देश है। वहीं, इजराइल को भी परमाणु शक्ति माना जाता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इन बयानों पर इजराइली अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए सवाल उठाया था कि जब पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं, तो क्या इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म डी करंट के अनुसार, कई पत्रकारों ने इस कहानी को निराधार और तथ्यों से रहित बताया।

‘मैं एक प्रॉब्लम सॉल्वर हूं, जल्द ‘बीबी’ का मामला भी…’, लेबनान पर हमले को लेकर PM नेतन्याहू के दो टूक जवाब पर अब ट्रंप की आई प्रतिक्रिया

अमेरिकी और ईरान के बीच हुए समझौते पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई। नेतन्याहू ने साफ-साफ कहा था कि शांति समझौते हो ना हो मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दूंगा। अब ने

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‘मैं एक प्रॉब्लम सॉल्वर हूं, जल्द ‘बीबी’ का मामला भी…’, लेबनान पर हमले को लेकर PM नेतन्याहू के दो टूक जवाब पर अब ट्रंप की आई प्रतिक्रिया

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Crude Oil price: बिकवाली के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, होर्मुज स्ट्रेट में फ्लो में प्रगति का इंतजार, ब्रेंट $78 प्रति बैरल पर

Crude Oil price: पिछले सेशन में तेज़ गिरावट के बाद मंगलवार को तेल की कीमतों में उछाल आया, जिसे US-ईरान के बीच चल रही शांति बातचीत को लेकर उम्मीद की वजह से सपोर्ट मिला। मार्केट पार्टिसिपेंट्स होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल का फ्लो फिर से शुरू होने की संभावना से जुड़े डेवलपमेंट पर भी नज़र रखे हुए थे।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 24 सेंट या 0.38% बढ़कर $78.15 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 33 सेंट या 0.46% बढ़कर $74.19 प्रति बैरल हो गया।

सोमवार को तेल की कीमतों में 3% से ज़्यादा की गिरावट आई, जब अमेरिका ने शांति बातचीत के शुरुआती दौर के बाद ईरान को 60 दिन के लिए बैन से छूट दी। इस गिरावट को उन रिपोर्टों से और बल मिला, जिनमें बड़े समझौते के तहत लेबनान में लड़ाई रुकने का संकेत दिया गया था।

आज कच्चे तेल की कीमतों में क्या तेजी है?

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, US और ईरानी अधिकारियों ने फरवरी के आखिर में शुरू हुए संघर्ष को खत्म करने के लिए एक लंबे समय का समझौता करने के मकसद से बातचीत के शुरुआती दौर में अच्छी प्रगति की सूचना दी। हालांकि, मतभेद बने हुए हैं, वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने कहा कि ईरान देश में न्यूक्लियर इंस्पेक्टरों को आने देने के लिए मान गया है—एक दावा जिसे तेहरान ने खारिज कर दिया है।

इस छूट से लगभग सभी खरीदार, जिसमें US रिफाइनर भी शामिल हैं, ईरानी कच्चा तेल खरीद सकते हैं और उसका पेमेंट कर सकते हैं, हालांकि कुछ संभावित जोखिमों के कारण सावधान रह सकते हैं। इस बीच, हाल के हफ्तों में फारस की खाड़ी से तेल की सप्लाई बढ़ी है, क्योंकि कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने एक्सपोर्ट बनाए रखने के दूसरे तरीके ढूंढ लिए हैं। ईरान ने पिछले हफ्ते 30 मिलियन बैरल से ज़्यादा तेल भी भेजा है।

सोमवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान हथियारों के इंस्पेक्शन की इजाज़त देगा, जिसका मकसद यह पक्का करना है कि जिसे उन्होंने “न्यूक्लियर ईमानदारी” कहा है।

इस बीच, शिप-ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि लगभग 2 मिलियन बैरल तेल ले जा रहे दो कच्चे तेल के टैंकर सोमवार को होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुज़रे, जो रास्ते की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच रविवार को कम मूवमेंट के बाद समुद्री ट्रैफिक में सुधार का संकेत है।

एक अलग डेवलपमेंट में, US डिपार्टमेंट ऑफ़ एनर्जी के सोमवार को जारी डेटा से पता चला कि स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व में कच्चे तेल का स्टॉक पिछले हफ़्ते घटकर 331.2 मिलियन बैरल रह गया, जो जून 1983 के बाद सबसे कम लेवल है, क्योंकि US-ईरान लड़ाई के बाद सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

होर्मुज खुला, लेकिन सिर्फ 60 दिन फ्री रहेगा:अमेरिका ₹28 लाख करोड़ देगा, बदले में ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा; समझौते के 14 पॉइंट की पूरी डिटेल

अमेरिका और ईरान ने जंग खत्म करने के समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया। इस डील से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को रिपोर्टरों के साथ हुई एक कॉन्फ्रेंस कॉल में 14 पॉइंट्स वाली डील की पूरी जानकारी दी है। 800 शब्दों वाले डेढ़ पन्ने के इस दस्तावेज में होर्मुज को सिर्फ 60 दिनों के लिए मुफ्त खोले जाने की बात कही गई है। डील में ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का भरोसा दिया है, जबकि ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपए) के फंड की योजना पर भी सहमति बनी है। अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी। समझौते के मसौदे में शामिल 14 पॉइंट्स की पूरी डिटेल (क्रम बदल सकते हैं) पॉइंट-1: होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोला जाएगा ईरान ने वादा किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोल देगा। यह व्यवस्था 60 दिनों तक लागू रहेगी। इस दौरान जहाजों से एक्स्ट्रा टैक्स नहीं लिया जाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस समझौते की सबसे अहम लाइन है- सिर्फ 60 दिनों तक बिना किसी फीस के। इसका मतलब है कि 60 दिन पूरे होने के बाद ईरान जहाजों पर शुल्क या फीस लगा सकता है। युद्ध से पहले ईरान आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय जहाजों से इस तरह का पैसा नहीं लेता था। अब टैक्स लगाने से वैश्विक समुद्री व्यापार की लागत बढ़ सकती है। पॉइंट-2: ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा समझौते में ईरान ने एक बार फिर भरोसा दिया है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा। दस्तावेज में कहा गया है कि ईरान के पास पहले से मौजूद संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) के भंडार का क्या किया जाएगा, इस पर दोनों देश मिलकर फैसला करेंगे। इसके लिए एक अलग व्यवस्था बनाई जाएगी, जिस पर आगे की बातचीत में सहमति बनेगी। फिलहाल न्यूनतम सहमति यह है कि इस संवर्धित सामग्री को ईरान के भीतर ही इस तरह बदला जाएगा कि उससे परमाणु हथियार बनाना संभव न रहे। यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में होगी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह समझौते का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पहली बार सीधे ईरान के परमाणु कार्यक्रम की बात की गई है। यही मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और युद्ध की सबसे बड़ी वजह रहा है। हालांकि इस पॉइंट में सबसे विवादित मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। दस्तावेज में ईरान ने फिर से कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। ईरान ने 1970 में परमाणु अप्रसार संधि में शामिल होने के समय भी यही वादा किया था। बाद में 2015 के परमाणु समझौते में भी उसने यही कहा था कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। समझौते में ईरान से कहा गया है कि वह अपने पास मौजूद लगभग 11 टन संवर्धित परमाणु सामग्री को कम घनत्व वाला बनाए। इसे डाउन-ब्लेंडिंग कहा जाता है। इसका मतलब है कि यूरेनियम को इतना पतला कर दिया जाए कि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में न हो सके। इन 11 टन सामग्री में करीब 440 किलो ऐसा यूरेनियम भी शामिल है, जिसे 60% तक एनरिच्ड किया जा चुका है। यह स्तर परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी स्तर के काफी करीब माना जाता है। लेकिन समझौते में यह नहीं कहा गया है कि ईरान को यह सामग्री देश से बाहर भेजनी होगी। ईरान लंबे समय से अपने यूरेनियम भंडार को विदेश भेजने का विरोध करता रहा है। हालांकि, 2015 के परमाणु समझौते में ईरान ने अपने उस समय के लगभग 97 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को रूस भेज दिया था। यही कारण है कि अभी कई बड़े सवाल अनसुलझे हैं। जैसे… पॉइंट-3: ईरान को ₹28 लाख करोड़ का हर्जाना अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर, यानी 28 लाख करोड़ रुपए की योजना तैयार करने का वादा किया है। हालांकि, यह पैसा तुरंत नहीं दिया जाएगा। पहले अमेरिका और ईरान को 60 दिनों में अंतिम समझौते पर पहुंचना होगा। इससे ही तय होगा कि 300 अरब डॉलर का फंड कैसे बनाया जाएगा, पैसा कहां से आएगा और उसे किस तरह खर्च किया जाएगा। राष्ट्रपति ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि इस फंड में अमेरिका सीधे पैसा नहीं लगाएगा। हालांकि, उन्होंने यह संभावना जरूर खुली छोड़ी कि खाड़ी देश, जैसे सऊदी अरब, कतर और UAE इस फंड के लिए पैसा उपलब्ध करा सकते हैं। पॉइंट-4: ईरानी तेल के निर्यात पर छूट समझौते के बाद अमेरिका ईरानी तेल के निर्यात पर राहत देना शुरू कर देगा। इसके लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय जरूरी छूट और मंजूरियां जारी करेगा, ताकि ईरान अपना तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच सके। यह राहत सिर्फ तेल बेचने तक सीमित नहीं होगी। इसमें बैंकिंग लेन-देन, बीमा, जहाजरानी, माल ढुलाई और अन्य वित्तीय सेवाओं से जुड़ी बाधाओं को भी कम किया जाएगा, जो ईरान के तेल निर्यात में रुकावट बनती रही हैं। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक समझौते का यह हिस्सा ईरान के खिलाफ सख्त रुख रखने वाले नेताओं और विशेषज्ञों के बीच सबसे ज्यादा चिंता का कारण बना हुआ है। उनका मानना है कि तेल निर्यात पर लगी रोक अमेरिका का सबसे प्रभावी दबाव का साधन थी। इसी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना हुआ था। पॉइंट-5: ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटेंगे अमेरिका ने ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को एक-एक करके खत्म करने का वादा किया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देकर उसे अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त शर्तें मानने के लिए तैयार करना चाहता है। माना जा रहा है कि प्रतिबंधों में छूट ही वह सबसे बड़ा फायदा है, जो अमेरिका ईरान को समझौते के बदले दे सकता है। यही व्यवस्था 2015 के परमाणु समझौते में भी अपनाई गई थी। उस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कई प्रतिबंध स्वीकार किए थे और बदले में उसे आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिली थी। हालांकि उस समझौते में लगी पाबंदियों की अवधि अधिकतम 15 साल थी। लेकिन ट्रम्प का कहना है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमेशा के लिए प्रतिबंध चाहते हैं। पॉइंट-6: ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियां रिलीज होंगी समझौते के तहत अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों को छोड़ देगा। हालांकि, यह पैसा कब और कैसे जारी होगा, यह दोनों देश बातचीत से तय करेंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इसका मतलब यह हो सकता है कि अंतिम समझौता होने का इंतजार किए बिना ही ईरान के लिए अरबों डॉलर की रकम जारी होना शुरू हो जाए। अनुमान है कि यह राशि 24 अरब डॉलर या उससे भी अधिक हो सकती है। पॉइंट-7: अमेरिका समुद्री नाकेबंदी हटाएगा ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिन के भीतर पूरी तरह खत्म करेगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक नाकेबंद हटने से ईरान फिर से अपने बंदरगाहों से तेल और अन्य सामान खरीद-बेच सकेगा। यह ईरान के लिए बहुत बड़ी और तत्काल राहत होगी, क्योंकि उसके ज्यादातर निर्यात चीन को जाते हैं। जैसे ही निर्यात दोबारा शुरू होगा, ईरान के पास विदेशी मुद्रा आनी शुरू हो जाएगी। पॉइंट-8: एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे अमेरिका-ईरान एक-दूसरे की आजादी, सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। घरेलू मामलों में दखल नहीं देंगे। समझौते का यह हिस्सा ईरान के सरकार विरोधी गुटों को पसंद नहीं आ सकता। इन्हें उम्मीद थी कि अमेरिका भविष्य में भी ईरान में राजनीतिक बदलाव या लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों का खुलकर समर्थन करेगा। दरअसल, इसी साल ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा था कि उनकी मदद की जाएगी। लेकिन नए समझौते के मुताबिक माना जा रहा है कि ईरान के अंदरूनी मुद्दों को लेकर अमेरिका का रुख पहले की तुलना में नरम हुआ है। पॉइंट-9: लेबनान समेत सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म होगा अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों के बीच सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद की जाएगी। इसमें लेबनान भी शामिल है। अमेरिका के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि ट्रम्प को चिंता थी कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई पीस डील को कमजोर कर सकती है। पहला पॉइंट इजराइल के खिलाफ माना जा रहा है। इजराइल पहले ही कह चुका है कि वह अमेरिका-ईरान बातचीत में लेबनान को लेकर हुई किसी भी सहमति को नहीं मानेगा। पॉइंट-10: दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं करेंगे समझौते में कहा गया है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेंगे। इसका मतलब है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को अभी जिस स्तर पर चला रहा है, उससे आगे नहीं बढ़ाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अंतिम समझौते तक दोनों पक्ष कोई नया दबाव न बनाएं। ईरान परमाणु कार्यक्रम नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका नए प्रतिबंध या अतिरिक्त सैन्य तैनाती नहीं करेगा। पॉइंट-11: दोनों देश मिलकर निगरानी व्यवस्था बनाएंगे अमेरिका और ईरान मिलकर एक विशेष निगरानी व्यवस्था बनाएंगे, जो यह देखेगी कि MoU की सभी शर्तों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं। यह सिस्टम इस बात की जांच करेगा कि: न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका यह तय करना चाहता है कि ईरान के हर वादे की स्वतंत्र रूप से जांच और पुष्टि की जा सके। यानी केवल ईरान के वादे करना पर्याप्त नहीं होगा। पॉइंट-12: तुरंत सभी मुद्दों पर बातचीत शुरू नहीं होगी दोनों देशों को समझौते के कुछ अहम बिंदुओं को लागू करना होगा। इनमें युद्धविराम बनाए रखना, होर्मुज को खोलना, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, तेल निर्यात पर राहत देना और ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों तक पहुंच बहाल करना जैसे कदम शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इससे पता चलता है कि आगे सबसे बड़ा और सबसे अहम विषय ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही होगा। परमाणु गतिविधियों की सीमा क्या होगी, एनरिच्ड यूरेनियम का क्या होगा, मॉनीटरिंग कैसे होगी और प्रतिबंध किस तरह हटाए जाएंगे, जैसे सवाल अभी पूरी तरह तय नहीं हुए हैं। पॉइंट-13: 60 दिनों में अंतिम समझौते का टारगेट अमेरिका-ईरान ने अधिकतम 60 दिनों में समझौता लागू करने का टारगेट रखा है। हालांकि, दोनों देश सहमति से इसे आगे भी बढ़ा सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि इतने कम समय में अंतिम समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा। खासकर इसलिए क्योंकि ईरान के साथ पहले हुई परमाणु बातचीत में कई साल लग चुके हैं। हालांकि, ट्रम्प सरकार ने जानबूझकर यह समय सीमा तय की है। अगर तय समय में यह समझौता हो जाता है, तो अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति ट्रम्प को फायदा हो सकता है। पॉइंट-14: अंतिम समझौते को UNSC मंजूरी देगी जब अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो जाएगा, तो उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी। इसका मतलब है कि अंतिम समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच का राजनीतिक समझौता नहीं रहेगा, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता भी मिल जाएगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे समझौते को मजबूती मिलेगी, जैसा कि पिछले वर्ष गाजा से जुड़े समझौते के मामले में हुआ था, जिसे भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का समर्थन मिला था। हालांकि कई एक्सपर्ट्स को शक है कि यह चरण वास्तव में आएगा भी या नहीं। —————————————- अमेरिका- ईरान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म, ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन:ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने डिजिटल दस्तखत किए, पेरिस के वर्साय पैलेस में समझौता अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। पूरी खबर पढ़ें

अमेरिका-ईरान जंग खत्म, दोनों प्रेसिडेंट ने दस्तखत किए:ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन; पाकिस्तानी PM शहबाज ने इस्लामाबाद समझौता बताया

अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े MoU पर साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। डील पर दस्तखत करने के बाद ट्रम्प वर्साय पैलेस से बाहर आए। इस दौरान किसी रिपोर्टर ने उनसे पीस डील को लेकर पूछा, तो उन्होंने चिल्लाते हुए कहा, ‘डील साइन हो गई है।’ ट्रम्प के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी ईरान से इलेक्ट्रॉनिक दस्तखत किए। समझौते का ऐलान भारतीय समय के मुताबिक गुरुवार सुबह 5:30 बजे किया गया। यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। इस समझौते के तहत ईरान और लेबनान में मिलिट्री एक्शन खत्म किया जाएगा। होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म की जाएगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी गुरुवार को इस समझौते पर मध्यस्थ के तौर पर दस्तखत किए। उन्होंने X पर पोस्ट कर इसे ‘इस्लामाबाद समझौता’ बताया। पीस डील से जुड़ी 5 फोटोज… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

ट्रम्प बोले- ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका:हमने टारगेट से ज्यादा हासिल किया, 60 दिन में समझौता नहीं हुआ तो फिर बम बरसाएंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने इस युद्ध में अपने तय लक्ष्यों से भी ज्यादा हासिल किया है। फ्रांस में G7 समिट से इतर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने कहा कि ईरान का नेतृत्व अब पहले जैसा नहीं रहेगा और वह आगे अलग तरीके से व्यवहार करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता तो युद्ध जारी रख सकता था, लेकिन आर्थिक तबाही से बचने के लिए शांति का रास्ता चुना। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर अगले 60 दिनों में अंतिम समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरान पर बमबारी शुरू कर देगा। उन्होंने कहा, “हम कभी नहीं चाहेंगे कि ईरान के पास परमाणु हथियार हो। जरूरत पड़ी तो दोबारा हमला करेंगे।” पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही का भरोसा: ईरान और ओमान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया। 2. ट्रम्प बोले- हिजबुल्लाह से सीरिया निपट सकता है: डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अगर इजराइल हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई में आम लोगों की मौत नहीं रोक पा रहा है, तो सीरिया यह जिम्मेदारी संभाल सकता है। 3. लेबनान में जंग खत्म करने की मांग: ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि सिर्फ ईरान में संघर्ष रुकना काफी नहीं है। उन्होंने मांग की कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म हो और इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे हटे। 4. अमेरिका-ईरान बातचीत पर चीन की चेतावनी: चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि मौजूदा सहमति अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दूसरा चरण पहले से ज्यादा मुश्किल होगा और स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों को लगातार प्रयास करने होंगे। 5. कुछ दिनों में पूरा ईरान समझौता सार्वजनिक होगा: ट्रम्प ने कहा कि वह अगले कुछ दिनों में अमेरिका-ईरान समझौते का पूरा दस्तावेज सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समझौते को शब्द-दर-शब्द पढ़कर भी सुनाएंगे, ताकि उसकी सही जानकारी सामने आ सके। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…