आखिर क्‍यों CM विजय थलापति ने वापस लिया स्‍टूडेंट को कॉकरोचों से दूर रखने वाला आदेश, क्‍या है वजह?

आखिर क्‍यों CM विजय थलापति ने वापस लिया स्‍टूडेंट को कॉकरोचों से दूर रखने वाला आदेश, क्‍या है वजह?

Vijay Thalapathy

तमिलनाडु सरकार ने छात्रों को कॉकरोच जनता पार्टी और लेफ्ट पार्टियों के प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने वाला आदेश वापस ले लिया है। सरकार की तरफ से जारी इस आदेश में स्कूल और कॉलेज के छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखने के निर्देश दिए गए थे, जिसे कॉकरोच जनता पार्टी ने गैर-संवैधानिक बताते हुए विरोध किया था। अब विजय की सरकार ने बुधवार को अपना ही दिया आदेश वापस ले लिया है।

कॉलेजिएट शिक्षा विभाग ने बुधवार को अपना पिछला निर्देश वापस ले लिया, जिसमें सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के छात्रों और युवाओं को विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों में भाग लेने से रोकने के लिए कार्रवाई करने को कहा गया था।

मंगलवार को जारी एक आदेश में कॉलेज शिक्षा की संयुक्त निदेशक सिंथिया सेल्वी पी ने कहा कि इस मामले में विभाग द्वारा 17 अगस्त, 2026 को जारी पिछला आदेश वापस ले लिया गया है। यह आदेश तमिलनाडु के सभी सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के प्रिंसिपलों को जारी किया गया था।

क्या था आदेश : 17 अगस्त के एक पत्र में, कॉलेज शिक्षा आयुक्त ने सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के प्रिंसिपलों से कहा कि वे स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभागों, पुलिस और ज़िला प्रशासन के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करें कि छात्र-छात्राएं और युवा ऐसे विरोध प्रदर्शनों में शामिल न हों। यह निर्देश 14 अगस्त के एक सरकारी पत्र का ज़िक्र करता है, जिसमें इस मामले पर अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल और मिलकर कार्रवाई करने को कहा गया था। “बेहद ज़रूरी” (Most Urgent) मार्क किए गए इस संदेश में कॉलेजों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे की गई कार्रवाई की जानकारी तुरंत 'डायरेक्टरेट ऑफ़ कॉलेजिएट एजुकेशन' को सौंपें।

सूत्रों के मुताबिक, TVK सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, पुलिस और ज़िला प्रशासन से कहा है कि वे छात्रों की भागीदारी रोकने के लिए मिलकर कार्रवाई करें। यह आदेश राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने के बीच जारी किया गया है और दो राजनीतिक समूहों द्वारा आयोजित विरोध-प्रदर्शनों में छात्रों और युवाओं की भागीदारी को लेकर सरकार की चिंता के बाद आया है।

सीजेपी पर BJP की प्रतिक्रिया : इस आदेश पर BJP नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। BJP नेता विनोज़ पी. सेल्वम ने वामपंथी संगठनों और CJP को “अराजकता फैलाने वाले” (Agents of Chaos) बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इनके नेता छात्रों को गुमराह करते हैं और उन्हें नतीजों का सामना करने के लिए अकेला छोड़कर खुद अपने घरों को लौट जाते हैं। उन्होंने विजय सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे छात्रों को विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होने से बचने और अपने करियर पर ध्यान देने में मदद मिलेगी। उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया कि वह अपनी सहयोगी पार्टी CPI(M) के दबाव में आकर इस नोटिफिकेशन को वापस न ले।

क्यों वापस लिया आदेश : तमिलनाडु सरकार के इस आदेश के सामने आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने इसका विरोध किया था और इस आदेश को “गैर-संवैधानिक” बताया था। पार्टी ने विजय सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की थी। यह पूरा विवाद ऐसे समय शुरू हुआ था, जब तमिलनाडु में NEET को लेकर प्रदर्शन चल रहे हैं। CJP और लेफ्ट से जुड़े छात्र संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में छात्रों को इन प्रदर्शनों से दूर रखने का विजय सरकार का आदेश राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया था और इसी वजह से सरकार ने आदेश वापस ले लिया है।

2027 के चुनाव से पहले BJP को क्यों याद आईं स्मृति ईरानी? समझें पूरा सियासी समीकरण

Smriti Irani: BJP ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को फिर से राष्ट्रीय महासचिव बनाकर उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एक बड़ा चेहरा दे दिया है। पार्टी को उम्मीद है कि उनकी राजनीतिक पकड़, दमदार भाषण शैली और खासतौर पर महिला वोटरों के बीच उनकी लोकप्रियता यूपी में चुनावी अभियान को मजबूती देने में मदद करेगी।

बता दें कि स्मृति ईरानी उन आठ नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश से BJP अध्यक्ष नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है। इससे साफ है कि पार्टी उत्तर प्रदेश को कितनी अहमियत दे रही है। ईरानी और पूर्व बस्ती सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। वहीं, पूर्व धौरहरा सांसद रेखा वर्मा और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। जबकि अमर पाल मौर्य को BJP OBC मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष कुंवर बासित अली को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।

हालांकि, स्मृति ईरानी के लिए यह नई जिम्मेदारी खास तौर पर अहम मानी जा रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा के हाथों हार के बाद से ईरानी के पास पार्टी में कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं थी। अब उत्तर प्रदेश में होने वाले बेहद अहम चुनाव से पहले उन्हें राष्ट्रीय संगठन में वापस लाया गया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि BJP इस चुनाव में महिला वोटरों के साथ-साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में ईरानी की वापसी को पार्टी की चुनावी रणनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक मनोज भद्रा ने कहा,  “ऐसे समय में जब सभी राजनीतिक दल महिला मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, तब भाजपा स्मृति ईरानी की वापसी के माध्यम से एक बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है। वह एक प्रभावशाली वक्ता हैं और कई भाषाओं में भाषण दे सकती हैं। वह विशेष रूप से महिलाओं के बीच लोकप्रिय हैं। विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण, राष्ट्रीय स्तर पर उनकी उपस्थिति से पार्टी महिला मतदाताओं को फिर से लुभाने और उन्हें अपने पाले में एकजुट करने के लिए जोरदार प्रयास करेगी।”

हालांकि, भाजपा के लिए ईरानी की राजनीतिक उपयोगिता केवल महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता तक ही सीमित नहीं है। उनकी आक्रामक शैली और कांग्रेस नेतृत्व से उनकी अच्छी जान-पहचान उन्हें उस राज्य में पार्टी के प्रमुख प्रचारकों में से एक बना सकती है, जहां कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के भाजपा के खिलाफ संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने की उम्मीद है। उनका राजनीतिक कद उन्हें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव दोनों को चुनौती देने में भी सक्षम बनाता है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश ईरानी के लिए एक जाना-पहचाना राजनीतिक क्षेत्र है। उन्होंने पहली बार 2014 में अमेठी से चुनाव लड़ा था, जहां उन्होंने कांग्रेस के गढ़ में राहुल गांधी को चुनौती दी थी। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करना जारी रखा और मतदाताओं से संपर्क बनाए रखा। भाजपा नेता अमेठी में पार्टी का संगठनात्मक आधार मजबूत करने में उनकी निरंतर जमीनी भागीदारी को श्रेय देते हैं।

ईरानी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को हराया था

उनके प्रयासों का फल 2019 के लोकसभा चुनाव में मिला, जब उन्होंने राहुल गांधी को सीधे मुकाबले में हराकर अमेठी पर गांधी परिवार के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को समाप्त कर दिया। इस जीत ने ईरानी को भाजपा के सबसे प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में से एक बना दिया और उन्हें “जायंट किलर” का खिताब दिलाया।

हालांकि, 2024 की हार उनके राजनीतिक करियर में एक झटका साबित हुई। वह अमेठी सीट किशोरी लाल शर्मा से हार गईं। उस हार के बाद, उन्हें अपनी हालिया नियुक्ति तक कोई महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी गई।

अमेठी में भाजपा नेताओं का मानना ​​है कि उनकी वापसी से क्षेत्र में पार्टी के चुनाव प्रचार को नई ऊर्जा मिल सकती है। अमेठी और रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर और मिठाई बांटकर उनकी नियुक्ति का जश्न मनाया। समर्थकों का कहना है कि ‘दीदी’ के नाम से मशहूर ईरानी जल्द ही जमीनी स्तर पर वापसी करेंगी।

भाजपा के अमेठी स्थानीय नेता जनमजय शर्मा ने कहा कि ईरानी ने इस क्षेत्र के लोगों के लिए बहुत कुछ किया है। उन्होंने कहा कि 2014 में राहुल गांधी से हारने के बावजूद, वह नियमित रूप से अमेठी आती रहीं और लोगों के दिलों में उनकी एक खास जगह है।

हालांकि, अमेठी और पड़ोसी रायबरेली में चुनावी समीकरण भाजपा के लिए अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। 2022 के विधानसभा चुनावों में, भाजपा ने अमेठी की चार सीटों में से दो, तिलोई और जगदीशपुर सीटें जीतीं। जबकि सपा ने गौरीगंज और अमेठी की सीटें जीतीं थी। हालांकि, गौरीगंज के विधायक राकेश प्रताप सिंह बाद में भाजपा में शामिल हो गए।

वहीं, रायबरेली में सपा ने 6 विधानसभा सीटों में से चार सीटें – बछरावां, हरचंदपुर, सरेनी और ऊंचाहार – जीतीं, जबकि भाजपा ने रायबरेली और सलोन सीटें जीतीं। हालांकि, ऊंचाहार के विधायक मनोज पांडे बाद में भाजपा में शामिल हो गए और अब योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री हैं।

ईरानी जल्द शुरू कर सकती हैं यूपी का दौरा

भाजपा सूत्रों के अनुसार, ईरानी जल्द ही उत्तर प्रदेश में व्यापक दौरे शुरू कर सकती हैं और विधानसभा चुनावों की तैयारियों को तेज करते हुए विशेष रूप से अमेठी और रायबरेली पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं।

एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “स्मृति ईरानी एक जाना-पहचाना चेहरा हैं, उन्होंने अमेठी से चुनाव जीता है और भाजपा के लिए भीड़ जुटाना आसान है।” उन्होंने आगे कहा, “दूसरा, वह राहुल गांधी का मुकाबला करने के लिए बेहतर स्थिति में होंगी… और इस खींचतान को मीडिया कवरेज मिलेगा, जिससे पार्टी को फायदा होगा।”

‘तुलसी’ से सियासत तक का सफर

बता दें कि ईरानी का राजनीतिक सफर टेलीविजन से शुरू हुआ, जहां लोकप्रिय धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी विरानी के किरदार से वे घर-घर में मशहूर हो गईं। उन्होंने 2003 में भाजपा में प्रवेश किया और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्य किया। बाद में उन्होंने गुजरात और महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद के रूप में कार्य किया और 2014 से 2024 के बीच मोदी सरकार में शिक्षा, वस्त्र, सूचना एवं प्रसारण, महिला एवं बाल विकास और अल्पसंख्यक मामलों सहित कई विभागों का कार्यभार संभाला।

अब 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और ऐसे में स्मृति ईरानी की BJP के राष्ट्रीय संगठन में वापसी पार्टी के लिए काफी अहम मानी जा रही है। उनके पास उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार का अनुभव है और वह पार्टी के लिए एक पहचाना हुआ और आक्रामक चेहरा हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्मृति ईरानी 2019 में अमेठी की ऐतिहासिक जीत से बनी अपनी राजनीतिक पकड़ को पूरे उत्तर प्रदेश में BJP के लिए चुनावी फायदे में बदल पाएंगी? यह देखना दिलचस्प होगा क्योंकि पार्टी राज्य में अगले चुनाव के लिए अपना अभियान शुरू कर रही है।

यह भी पढ़ें: Shehzad Poonawala: ‘मुझे किराया देना है…’ BJP छोड़ने के बाद शहजाद पूनावाला ने बताई इस्तीफे की असली वजह

Mehul Choksi: भारी कैश के साथ मेहुल चोकसी के वकील विजय अग्रवाल लंदन में हिरासत में, भगोड़ा हीरा कारोबारी कब आएगा भारत?

Mehul Choksi Lawyer Detained: लंदन में भारतीय आपराधिक मामलों के चर्चित वकील और भारत के भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी का केस लड़ने वाले विजय अग्रवाल को ब्रिटिश इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अग्रवाल पर ब्रिटेन में इमिग्रेशन और वर्क परमिट से जुड़े नियमों के उल्लंघन का आरोप है। विजय अग्रवाल भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के वकील के तौर पर खास तौर पर चर्चित रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें कथित तौर पर तब हिरासत में लिया गया जब UK इमिग्रेशन अधिकारियों ने लंदन के मेफेयर इलाके में एक प्रॉपर्टी की जांच की। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई मकान मालिक की शिकायत के बाद की गई। इसी जांच के दौरान विजय अग्रवाल को हिरासत में लिया गया। विवेक अग्रवाल ने भारत में कई हाई-प्रोफाइल कॉर्पोरेट क्राइम और फाइनेंशियल फ्रॉड केस संभाले हैं।

बिना जरूरी अनुमति काम करने का आरोप

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ब्रिटिश अधिकारियों को संदेह था कि अग्रवाल ब्रिटेन में आवश्यक वर्क परमिट या अन्य जरूरी इमिग्रेशन परमिशन के बिना पेशेवर गतिविधियां कर रहे थे। इमिग्रेशन अधिकारियों की कार्रवाई के दौरान मेफेयर की इस प्रॉपर्टी में बड़ी मात्रा में कैश भी मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कैश के स्रोत की भी जांच की जा रही है। प्रॉपर्टी की जांच के समय अग्रवाल की फर्म से जुड़े कई जूनियर वकील भी कथित तौर पर वहां मौजूद थे। हालांकि, सामने आई रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हिरासत में लिए जाने के बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने आगे क्या कार्रवाई की।

मेहुल चोकसी के प्रमुख वकील रहे हैं अग्रवाल

विजय अग्रवाल का नाम भारत के सबसे चर्चित वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में से एक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के आरोपी भगोड़े मेहुल चोकसी की कानूनी पैरवी से जुड़ा रहा है। चोकसी भारत में कथित PNB धोखाधड़ी मामले में वांछित है। वह भारत से बाहर रह रहा है। अग्रवाल ने विभिन्न देशों में चल रही कानूनी कार्यवाहियों में चोकसी का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में भी चोकसी की ओर से पैरवी की है। बेल्जियम में चोकसी की गिरफ्तारी के बाद भी अग्रवाल उसके कानूनी बचाव से जुड़े रहे। भारत द्वारा चोकसी को वापस लाने की कोशिशों के खिलाफ भी उन्होंने कानूनी दलीलें पेश की हैं।

प्रत्यर्पण के खिलाफ दिए थे ये तर्क

चोकसी की भारत वापसी से जुड़े मामलों में अग्रवाल की ओर से मानवाधिकार, जेल की परिस्थितियों और चोकसी की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों जैसे मुद्दे उठाए गए थे। इन आधारों पर भारत प्रत्यर्पण का विरोध किया गया। चोकसी पर भारत में करीब 13,000 करोड़ रुपये के PNB घोटाले से जुड़े गंभीर आरोप हैं। वह मामले में वांछित आरोपियों में शामिल है।

कई हाई-प्रोफाइल मामलों में कर चुके हैं पैरवी

विजय अग्रवाल सिर्फ मेहुल चोकसी के मामले के कारण ही चर्चित नहीं हैं। बल्कि उनका कानूनी करियर भारत के कई बड़े कॉरपोरेट क्राइम और वित्तीय धोखाधड़ी मामलों से जुड़ा रहा है। उन्होंने PNB बैंक घोटाले से जुड़े मामलों में बचाव पक्ष की पैरवी की है। इसके अलावा उनका नाम 2G स्पेक्ट्रम मामले से जुड़े कानूनी मामलों में भी सामने आया है।

ये भी पढ़ें- हाफिज सईद ने कश्मीर भेजे थे 10,000 आतंकवादी! पाकिस्तानी मौलवी ने की जेल में बंद आतंकी सरगना की खुलेआम तारीफ

फिलहाल लंदन में उनकी हिरासत से जुड़े आरोपों की जांच ब्रिटिश अधिकारियों की कार्रवाई पर निर्भर है। वर्क परमिट उल्लंघन और बरामद कथित कैश से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि और जांच के नतीजे आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Budh Gochar In Singh 2026: 22 अगस्त को सूर्य की स्वराशि में पहुंचेंगे बुध और बनाएंगे बुधादित्य योग, 6 राशि वालों की बढ़ेगी कमाई

Budh Gochar In Singh 2026: ग्रहों के राजकुमार बुध अपनी राशि बदलने वाले हैं। बुद्धि, बातचीत, व्यापार, शिक्षा और विश्लेषणात्मक सोच के कारक बुध ग्रह 22 अगस्त को ग्रहों के अधिपति सूर्य के घर यानी उनकी स्वराशि सिंह में प्रवेश करेंगे। सूर्य स्वयं भी इसी राशि में गोचर कर रहे हैं। सिंह राशि में बुध और सूर्य का यह संयोग अत्यंत शुभ फलदायी माना जा रहा है, क्योंकि इसस बुधादित्य योग का निर्माण होगा।

बुध का गोचर सूर्य की राशि सिंह में 22 अगस्त को शाम 7 बजकर 33 मिनट पर होगा। बुध सिंह राशि में 7 सितंबर को दोपहर 1 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। सिंह राशि सूर्य के स्वामित्व वाली अग्नि तत्व की राशि है। यह गोचर बातचीत में आत्मविश्वास बढ़ाता है, निर्णय लेने की क्षमता को तेज करता है, रचनात्मक सोच को बेहतर बनाता है और बातचीत में नेतृत्व क्षमता को मज़बूत करता है। यह समय पेशेवरों, उद्यमियों, छात्रों, लेखकों, सार्वजनिक वक्ताओं, मार्केटर्स और मीडिया या रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। सिंह में सूर्य और बुध की युति से 6 राशिवालों को सबसे अधिक फायदा होगा।

सिंह में बुध गोचर का 6 राशियों के लिए शुभ

सिंह राशि : बुध का गोचर सिंह राशि में ही हो रहा है। यह गोचर आपके आत्मविश्वास, बातचीत कौशल और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाएगा। आपके नेतृत्व गुण निखरेंगे, जिससे यह समय करियर में आगे बढ़ने, व्यापार का विस्तार करने और व्यक्तिगत ब्रांडिंग के लिए बहुत अच्छा रहेगा।

मिथुन राशि : मिथुन का स्वामी ग्रह बुध है। इसलिए बुध का यह गोचर आपकी बुद्धि और नेटवर्किंग क्षमताओं को बढ़ाएगा। व्यापारिक बातचीत, मार्केटिंग, लेखन, शिक्षा और बातचीत से जुड़े कार्यों में बेहतरीन परिणाम मिलने की संभावना है। छोटी यात्राएं भी फायदेमंद साबित हो सकती हैं।

कन्या राशि : बुध गोचर से कन्या राशि के लोग सावधानीपूर्वक योजना और रणनीतिक सोच के माध्यम से सकारात्मक परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। छिपे हुए अवसर सामने आ सकते हैं, खासकर पेशेवर मामलों में। आध्यात्मिक शिक्षा और शोध गतिविधियों के लिए भी यह समय अनुकूल है।

तुला राशि : बुध का यह गोचर नेटवर्किंग, टीम वर्क और सामाजिक प्रभाव को बढ़ाता है। पेशेवर संपर्कों के माध्यम से आय के नए अवसर मिल सकते हैं और दीर्घकालिक लक्ष्य पूरे होने शुरू हो सकते हैं। व्यापार मालिकों को मिलकर किए गए प्रयासों से लाभ हो सकता है।

धनु राशि : बुध का गोचर धनु वालों को भी लाभ देने वाला है। बुध उच्च शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय संबंधों, यात्रा, प्रकाशन और कानूनी मामलों को प्रभावित करता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले या विदेश में अवसर तलाशने वाले लोगों को सकारात्मक खबर मिल सकती है।

कुंभ राशि : बुध राशि परिवर्तन की वजह से कुंभ राशि के पेशेवरों और व्यापार मालिकों को मजबूत साझेदारी और बातचीत के बेहतर कौशल से लाभ हो सकता है। बेहतर समझ और बातचीत से वैवाहिक जीवन में भी सुधार होगा। कानूनी समझौतों और अनुबंधों के आपके पक्ष में होने की संभावना अधिक है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Rashifal Today: इन मूलांक वालों को आज मिलेगा आर्थिक लाभ! जानें अपना राशिफल

JSSC-CGL: ‘चाहो तो रिश्ता खत्म कर सकती हो…’ नौकरी जाने के डर से टूट गया शख्स, पत्नी से कही ये बात

झारखंड में JSSC-CGL 2024 परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद करीब 2,000 चयनित उम्मीदवारों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। इन उम्मीदवारों ने सरकारी नौकरी पाने के लिए लंबे समय तक तैयारी की थी। लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद अब उनके चयन और नौकरी के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर छात्रों के कई हफ्तों तक विरोध प्रदर्शन के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई। वहीं पहले से चयनित उम्मीदवारों का कहा कि इस फैसले का असर उन पर पड़ रहा है, जबकि पूरी प्रक्रिया में उनकी कोई गलती नहीं थी। नौकरी जाने की आशंका से कई उम्मीदवार आर्थिक परेशानी के साथ-साथ अपने परिवार और करियर को लेकर भी चिंतित हैं।

अंदर जाने से किया मना

कोडरमा के सरकारी कर्मचारी संदीप यादव के लिए झारखंड सरकार का यह फैसला परेशानी का कारण बन गया है। शादी के बाद शुरू हुई उनकी नई जिंदगी अब नौकरी के भविष्य को लेकर चिंता में बदल गई है। उन्हें डर है कि इस फैसले का असर उनकी नौकरी और आने वाले समय पर पड़ सकता है। रांची के प्रोजेक्ट भवन स्थित विजिलेंस विभाग में काम करने वाले संदीप यादव ने बताया कि, परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद मंगलवार को उन्हें ऑफिस में प्रवेश करने से रोक दिया गया। संदीप ने भर्ती परीक्षा पास करने के बाद यह नौकरी हासिल की थी और रोज सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक ड्यूटी कर रहे थे। अब परीक्षा रद्द होने के बाद उनकी नौकरी पर भी सवाल खड़ा हो गया है।

एग्जाम पास करने के बाद किया जॉइन

NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संदीप यादव ने कहा, “गार्ड ने मेरा ID कार्ड चेक किया और कहा कि मुझे अंदर जाने की इजाजत नहीं है। मैंने पिछले साल एग्जाम पास करने के बाद जॉइन किया था। मुझे किसी की चैरिटी से नौकरी नहीं मिली थी। फिर भी, आज मुझे अंदर जाने की इजाजत नहीं है। सरकार ने भीड़ के दबाव में यह फैसला लिया।” शादी के महज दो महीने बाद ही संदीप यादव के सामने नौकरी को लेकर परेशानी खड़ी हो गई है। नौकरी जाने की आशंका से वह अपने वैवाहिक जीवन को लेकर भी चिंतित हैं।

पत्नी से कही ये बात

उन्होंने पत्नी से यहां तक कह दिया कि अगर नौकरी के संकट की वजह से वह साथ नहीं रहना चाहतीं, तो उन्हें छोड़ सकती हैं। उन्होंनें कहा, “जब मैं घर गया, तो मैंने उनसे कहा, ‘आपने मुझसे शादी इसलिए की क्योंकि मेरे पास नौकरी थी। अब मेरे पास नौकरी नहीं है। अगर आप चाहें, तो यह रिश्ता खत्म कर सकती हैं।’” संदीप उन करीब 2,000 उम्मीदवारों में शामिल हैं, जिनकी नौकरी अब परीक्षा रद्द होने के बाद खतरे में है। उम्मीदवारों का कहना है कि अदालत के पहले के कुछ फैसलों में भर्ती प्रक्रिया को जारी रखने की मंजूरी दी गई थी। अब वे अपनी नौकरी बचाने के लिए प्रदर्शन जारी रखने के साथ कानूनी रास्ता अपनाने की भी तैयारी कर रहे हैं।

2 साल में 513 वीडियो बनाए और खर्च किए 9.76 लाख पर कमाई हुई सिर्फ 1 लाख की! एंफ्लूएंसर ने बताया कंटेंट क्रिएशन का कड़वा सच

सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाकर कमाई करना आज काफी लोगों को पसंद आ रहा है। लेकिन एक कंटेट बनाने के बीच काफी मेहनत और पैसे भी लगते हैं। हाल ही में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की पोस्ट सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। पोस्ट में इन्फ्लुएंसर ने दो साल की कमाई और खर्च की जानकारी दी है। शेयर किए गए पोस्ट के मुताबिक, इन्फ्लुएंसर ने कंटेंट तैयार करने में लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन इसके बदले खास कमाई नहीं हो सकी। इस पूरे खर्च में सबसे ज्यादा पैसा वीडियो एडिटिंग पर खर्च हुआ। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट काफी वायरल हो रहा है।

कंटेंट के लिए खर्च किए 9.76 लाख

नेहा गुप्ता ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है। पोस्ट में शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक, कंटेंट की एडिटिंग पर उन्होंने बड़ी रकम खर्च की। लंबे वीडियो की एडिटिंग में करीब 84 हजार रुपये लगे, जबकि शॉर्ट वीडियो और रील्स के लिए करीब 7.28 लाख रुपये खर्च हुए। इस तरह सिर्फ एडिटिंग का कुल खर्च करीब 8.11 लाख रुपये रहा। गुप्ता ने कंटेंट तैयार करने के लिए जरूरी उपकरणों पर भी करीब 1.65 लाख रुपये खर्च किए। इसमें लगभग 1 लाख रुपये का iPhone भी शामिल है। एडिटिंग और उपकरणों को मिलाकर देखा जाए तो दो साल में उनका कंटेंट बनाने का कुल खर्च करीब 9.76 लाख रुपये पहुंच गया।

अब तक हुई 1 लाख की कमाई

बताया जा रहा कि, गुप्ता ने करीब चार-पांच महीने पहले पेड कोलेबोरेशन शुरू किए थे और अब तक लगभग 1 लाख रुपये की कमाई की है। वहीं, कंटेंट बनाने में उनका खर्च करीब 9.76 लाख रुपये रहा। इस तरह खर्च और कमाई के बीच करीब 8.76 लाख रुपये का अंतर है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद कंटेंट क्रिएटर के तौर पर करियर बनाने की चुनौतियों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। 2 साल के दौरान नेहा ने कुल 513 रील बनाई।

लोगों ने किया कमेंट

एक यूजर ने कहा कि गुप्ता पेड कोलेबोरेशन से कमाई शुरू कर चुकी हैं, इसलिए आगे वह अपना खर्च निकाल सकती हैं। वहीं, दूसरे यूजर ने माना कि ये निवेश भविष्य में फायदेमंद हो सकता है, लेकिन सफलता आसान नहीं है। एक यूजर ने कमेंट किया, “मेरा यकीन करो, यह उतना आसान नहीं है जितना दिखता है।” उन्होंने कहा कि किसी क्रिएटर की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह अपनी स्ट्रैटेजी को कितनी अच्छी तरह लागू करता है।

एक अन्य यूजर ने कहा, “क्रिएटर इकॉनमी बाहर से भले ही ग्लैमरस लगती हो, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि कंटेंट क्रिएशन को एक फायदे वाले बिजनेस में बदलना कितना मुश्किल है।”

सोशल मीडिया पर अक्सर क्रिएटर्स की चमकदार जिंदगी, शानदार वीडियो, ब्रांड डील और बढ़ते फॉलोअर्स ही नजर आते हैं। लेकिन इसके पीछे कंटेंट तैयार करने में होने वाला खर्च दिखाई नहीं देता। कमाई शुरू होने से पहले वीडियो बनाने, एडिटिंग और दूसरे जरूरी सामान पर काफी पैसा खर्च हो सकता है।

सबसे अनुभवी बल्लेबाज के बिना श्रीलंका को पीछा करना होगा 372 रनों का लक्ष्य

INDvsSL श्रीलंका के सबसे अनुभवी बल्लेबाज जिन्होंने टीम को गॉल में साल 2015 में भारत के खिलाफ जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी वह मौजूदा गॉल टेस्ट से बाहर हो चुके हैं। दिनेश चंदीमल ने आज चौथे दिन के चौथे ओवर में राहुल के एक शॉट को रोकने के चक्कर में अपनी गर्दन और कंधे चोटिल कर लिये।

हालांकि श्रीलंका के लिए खबर बहुत बुरी से सिर्फ बुरी है और उनको 10 नहीं बल्कि 11 बल्लेबाजों के साथ खेलना होगा। गर्दन और कंधे की चोट के कारण श्रीलंका टीम को कनकशन सबस्टीट्यूट मिल गया है। उनकी जगह टीम के लिए पसींदू सूर्यबंदारा खेलेंगे जो अभ्यास मैच में भारत के खिलाफ खेले थे।

हालांकि सबसे अनुभवी बल्लेबाज  दिनेश चंदीमल के ना होने से श्रीलंका खुश नहीं होगी भले ही उन्होंने पहली पारी में सिर्फ 15 गेंदों में 4 रन ही क्यों ना बनाए हों। पसींदू सूर्यबंदारा ने अभ्यास मैच में भारत के खिलाफ मिली अच्छी शुरुआत को भुना नहीं पाए थे और दूसरी पारी में फ्लॉप रहे थे। पहली पारी में उन्होंने 35 रन बनाे थे और दूसरी पारी में सिर्फ 4 रन बना पाए थे।उनके आने से श्रीलंका को कोई फायदा भी नहीं हुआ क्योंकि दूसरी पारी में वह बिना खाता खोले मानव सुथार की गेंद पर पगबाधा आउट हो गए।

गौरतलब है कि 36 वर्षीय दिनेश चंदीमल अपने सौंवे टेस्ट खेलने के करीब हैं। अब तक उन्होंने अपने करियर में 92 टेस्ट मैच खेलकर 6500 रन बनाए हैं। उनका औसत 43 का है जिसमने 16 शतक और 36 अर्धशतक शामिल हैं।

350 विकेट और 4 हजार रन टेस्ट ऑलराउंडर के इस विशेष क्लब में शामिल हुए सर जडेजा

Ravindra Jadeja

रविंद्र जड़ेजा ने सोमवार को श्रीलंका के केसरा का विकेट लेकर टेस्ट क्रिकेट में अपना 350 वां शिकार पूरा किया। इसके बाद वह 4 हजार रन बनाने वाले और 350 टेस्ट विकेट लेने वाले टेस्ट क्रिकेट में चौथे ऑलराउंडर बन गए।

इस फहरिस्त में न्यूजीलैंड के स्पिन ऑलराउंडर डेनियल वेट्टोरी है जिन्होंने 362 विकेट लिए हैं और 4531 रन बनाए हैं। वहीं इंग्लैंड के पेस ऑलराउंडर इयान बॉथम है जो 383 विकेट ले चुके हैं और 5200 रन बना चुके हैं। 5248 रन बनाने वाले कपिल देव हैं जिन्होंने 434 विकेट चटकाए हैं।

सफेद गेंद की क्रिकेट से भले ही रविंद्र जड़ेजा दूर हों लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनकी उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता। साल 2012 से शुरु हुआ रविंद्र जड़ेजा का क्रिकेट करियर अब ढलान पर है। 89 मैचों में उन्होंने 38.3 की औसत से 4095 रन बनाए हैं। जिसमें 6 शतक और 28 अर्धशतक लगाए हैं। गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने 25 की औसत से 348 विकेट चटकाए हैं। इस दौरान उन्होंने 17 बार 4 विकेट और 15 बार 5 विकेट चटकाए हैं।टेस्ट क्रिकेट में उनको कितना मौका मिलता है यह देखने वाली बात होगी।

करियर में आगे बढ़ने के लिए बदली नौकरी, लेकिन 30 दिन बाद ही बेरोजगार हुआ टेक प्रोफेशनल

नौकरी बदलने का फैसला अक्सर बेहतर सैलरी, करियर ग्रोथ और नई संभावनाओं की उम्मीद में लिया जाता है। लेकिन एक डेटा इंजीनियर के लिए यही फैसला कुछ ही हफ्तों में परेशानी का कारण बन गया। करीब पांच साल तक एक कंपनी में काम करने के बाद उसने नई कंपनी का रुख किया था। उसे उम्मीद थी कि नया अवसर उसके करियर को आगे बढ़ाएगा, लेकिन नई नौकरी शुरू करने के महज एक महीने बाद ही हालात बदल गए। कंपनी में प्रोजेक्ट और क्लाइंट से जुड़ी स्थिति बदलने के साथ बजट की समस्या सामने आ गई। इसके चलते उसके पास काम करने के लिए कोई प्रोजेक्ट नहीं बचा और उसे इस्तीफा देने के लिए कहा गया।

खास बात यह है कि उसने पुरानी नौकरी किसी खराब प्रदर्शन या विवाद की वजह से नहीं छोड़ी थी। अब अचानक दोबारा नौकरी तलाशने की स्थिति में पहुंचा यह प्रोफेशनल सोच रहा है कि क्या उसे अपनी पुरानी कंपनी से वापस संपर्क करना चाहिए या फिर नए अवसरों की तलाश जारी रखनी चाहिए।

5 साल बाद लिया था नौकरी बदलने का फैसला

डेटा इंजीनियर ने Reddit पर अपनी कहानी शेयर की। उसने बताया कि वह करीब पांच साल से एक कंपनी में डेटा इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम कर रहा था। नौकरी स्थिर थी और उसका प्रदर्शन भी किसी समस्या की वजह नहीं बना था। बेहतर मौके की उम्मीद में उसने कंपनी बदलने का फैसला किया और नई कंपनी जॉइन कर ली। नई कंपनी में सिर्फ एक महीना हुआ था नई नौकरी शुरू किए अभी एक महीना ही हुआ था कि हालात अचानक बदल गए। उसके मुताबिक, प्रोजेक्ट और क्लाइंट से जुड़ी स्थिति बदल गई और कंपनी को बजट की परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके चलते उसके पास कोई प्रोजेक्ट नहीं बचा। बाद में उसे इस्तीफा देने के लिए कहा गया। इतनी जल्दी नौकरी खत्म होने से वह खुद भी हैरान रह गया।

पुरानी नौकरी छोड़ने का अब हो रहा अफसोस?

सबसे मुश्किल बात यह थी कि उसने अपनी पुरानी नौकरी खुद छोड़ी थी। वह कंपनी में करीब पांच साल से था और वहां उसकी नौकरी स्थिर थी। उसका कहना है कि नई कंपनी में जाने का फैसला किसी खराब प्रदर्शन या विवाद की वजह से नहीं था। अब अचानक फिर से नौकरी तलाशने की स्थिति आने के बाद उसके सामने बड़ा सवाल है क्या उसे अपनी पुरानी कंपनी से दोबारा संपर्क करना चाहिए?

‘क्या पुरानी कंपनी में लौटना करियर के लिए खराब होगा?’

टेक प्रोफेशनल ने Reddit पर लोगों से सलाह मांगी कि क्या उसे अपने पुराने नियोक्ता से वापस नौकरी देने की बात करनी चाहिए या पूरी तरह नई कंपनी तलाशनी चाहिए। उसकी चिंता यह भी है कि इंटरव्यू में सिर्फ एक महीने की नई नौकरी को कैसे समझाएगा। साथ ही, उसे डर है कि पुरानी कंपनी में वापस जाने से उसके करियर पर कोई गलत असर तो नहीं पड़ेगा।

लोगों ने कहा- दोनों रास्ते खुले रखो

Reddit पर कई लोगों ने उसे सलाह दी कि सिर्फ एक विकल्प पर निर्भर रहने के बजाय दोनों रास्ते खुले रखे जाएं। कुछ यूजर्स ने कहा कि उसे नई नौकरियों के लिए आवेदन करते रहना चाहिए और साथ ही पुराने सहकर्मियों से संपर्क करने में भी कोई नुकसान नहीं है। एक यूजर ने अपनी कहानी भी शेयर की। उसने बताया कि कोविड के दौरान नई कंपनी में छह महीने काम करने के बाद उसका प्रोजेक्ट बंद हो गया था और छंटनी हो गई थी। इसके बाद वह अपनी पुरानी कंपनी में वापस चला गया।

उसके मुताबिक, पुरानी कंपनी ने उसके पिछले छह महीनों को स्किलिंग के लिए ‘सैबेटिकल’ की तरह दिखाने में भी मदद की। यानी सही रिश्ते और पुराने काम की अच्छी छवि होने पर पुरानी कंपनी में वापसी संभव हो सकती है।

पुरानी कंपनी में वापसी हमेशा गलत फैसला नहीं

इस कहानी से एक बात साफ है कि नौकरी बदलने के बाद आने वाली हर परेशानी कर्मचारी की गलती नहीं होती। कई बार प्रोजेक्ट, क्लाइंट या बजट में अचानक बदलाव का असर सीधे कर्मचारियों पर पड़ता है। ऐसे में पुरानी कंपनी में वापसी मांगना शर्म की बात नहीं है। अगर वहां अच्छे संबंध और मजबूत प्रदर्शन का रिकॉर्ड रहा हो, तो ‘boomerang employee’ के तौर पर लौटना भी एक व्यावहारिक करियर विकल्प हो सकता है।

दुनिया का सबसे ‘बदसूरत’ कुत्ता कौन? लटकी जीभ बनी खासियत, मालिक को मिले 5 लाख रुपये

16 साल की उम्र में CA बनकर रचा इतिहास, ब्रिलियंट स्टूडेंट लक्ष्मणन मय्यप्पन की पूरी सक्सेस जर्नी जानिए

16 साल की उम्र में ज्यादातर युवा अपनी पढ़ाई और भविष्य के करियर को लेकर तैयारी कर रहे होते हैं। उसी उम्र में लक्ष्मणन मय्यप्पन ने इतिहास रच दिया है। दुबई में रहने वाले लक्ष्मणन मय्यप्पन ने महज 16 साल और 141 दिन की उम्र में चार्टर्ड अकाउंटेंट बनकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने लक्ष्मणन मय्यप्पन को ‘दुनिया का सबसे कम उम्र का पुरुष चार्टर्ड अकाउंटेंट’ घोषित किया है। ये उनकी कम उम्र में हासिल की गई बड़ी उपलब्धि है। आइए जानते हैं कौन है लक्ष्मणन मय्यप्पन और कैसे की शुरुआत

चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसी प्रोफेशनल पढ़ाई आमतौर पर स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद की जाती है। लेकिन मय्यप्पन ने 10वीं कक्षा पूरी करने के तुरंत बाद ही अकाउंटिंग की पढ़ाई शुरू कर दी थी। कम उम्र में इस क्षेत्र में कदम रखकर उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह बड़ी कामयाबी हासिल की।

बहुत कम उम्र में शुरू की तैयारी

भारत और दुबई से जुड़े फाइनेंस प्रोफेशनल लक्ष्मणन मय्यप्पन ने बहुत कम उम्र में ACCA की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने 15 साल की उम्र में कोविड-19 महामारी के दौरान इस प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन की ट्रेनिंग ली, जिसे पूरा करने में करीब एक साल लगा। इसके बाद गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें दुनिया के सबसे कम उम्र के पुरुष चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर आधिकारिक मान्यता दी।

मां से मिला प्रेरणा

लॉकडाउन के दौरान लक्ष्मणन मय्यप्पन की अकाउंटिंग में दिलचस्पी बढ़ी। उनकी मां ACCA प्रोफेशनल हैं और उन्होंने ही उन्हें अकाउंटिंग की शुरुआती बातें समझाईं। इसके बाद मय्यप्पन की रुचि फाइनेंस के क्षेत्र में बढ़ती गई। 10वीं कक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने ACCA करने का फैसला लिया और कम उम्र में ही इसकी तैयारी शुरू कर दी। ACCA की पढ़ाई पूरी करने के बाद लक्ष्मणन मय्यप्पन ने फाइनेंस के क्षेत्र में अपनी आगे की पढ़ाई और करियर जारी रखा। वह CFA चार्टर होल्डर भी बन चुके हैं और फिलहाल फाइनेंस में MSc की पढ़ाई कर रहे हैं।

इसके साथ ही वह दुबई की सेंचुरी फाइनेंशियल कंपनी में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं। उनके काम में निवेश से जुड़ी रिसर्च, वित्तीय विश्लेषण और सही फैसले लेने में मदद करना शामिल है।

हमेशा कुछ नया सीखा

लक्ष्मणन मय्यप्पन ने कहा कि उनका लक्ष्य सिर्फ नौकरी करना नहीं था। वह कम उम्र में ज्यादा से ज्यादा प्रोफेशनल पढ़ाई पूरी करना चाहते थे। साथ ही, वह वित्तीय कामकाज को करीब से समझना चाहते थे। उनका मानना है कि ऐसी स्किल्स सीखनी चाहिए, जो लंबे समय तक काम आएं। इसी वजह से उन्होंने हमेशा कुछ नया सीखने और अपनी जिज्ञासा को बनाए रखने पर ध्यान दिया। लक्ष्मणन मय्यप्पन की कहानी से पता चलता है कि, अगर कम उम्र में अपनी रुचि पहचानकर मेहनत की जाए तो बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। आज वह दुबई में पढ़ाई के साथ फाइनेंस रिसर्च और प्रोफेशनल काम भी कर रहे हैं।