Taapsee Pannu Birthday: तापसी पन्नू के 7 ऐसे दमदार किरदार, जिन्होंने एक्ट्रेस के करियर में लगाए चार चांद

Taapsee Pannu Birthday: जब कंटेंट-आधारित सिनेमा आज की तरह इंडस्ट्री का सबसे बड़ा ट्रेंड नहीं बना था, तब भी तापसी पन्नू अपनी फिल्मों का चुनाव ऐसी कहानियों के आधार पर कर रही थीं जो अलग सोच रखती थीं। उन्होंने आसान फॉर्मूले वाली फिल्मों के बजाय ऐसी स्क्रिप्ट्स चुनीं जो समाज से जुड़े सवाल उठाती थीं और मजबूत महिला किरदारों को कहानी के केंद्र में रखती थीं। उनके जन्मदिन पर आइए याद करें वे सात फिल्में, जिन्होंने साबित किया कि अच्छी कहानियां हमेशा ट्रेंड से आगे होती हैं।

1. पिंक (2016): सहमति को कहानी का सबसे बड़ा मुद्दा बनाया

उस समय कोर्टरूम ड्रामा फिल्मों में ज्यादातर पुरुष किरदार मुख्य भूमिका में होते थे, लेकिन पिंक ने तीन आम महिलाओं को कहानी के केंद्र में रखा। तापसी ने मीनल के किरदार को बहुत सादगी और मजबूती के साथ निभाया। यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक फिल्मों में गिनी जाती है।

2. नाम शबाना (2017): जब महिला एक्शन हीरोइन अभी आम बात नहीं थी

महिला-प्रधान एक्शन फिल्मों का दौर शुरू होने से पहले ही तापसी ने नाम शबाना जैसी फिल्म की। उन्होंने साबित किया कि एक एक्शन थ्रिलर को भी एक महिला अपने दम पर आगे बढ़ा सकती है। फिल्म में ताकत, समझदारी और भावनात्मक गहराई, तीनों नजर आए।

3. बदला (2019): जब उन्होंने बड़े मसाले के बजाय मजबूत कहानी चुनी

जब मनोवैज्ञानिक थ्रिलर फिल्मों को सुरक्षित व्यावसायिक विकल्प नहीं माना जाता था, तब तापसी ने बदला जैसी फिल्म चुनी। यह फिल्म पूरी तरह कहानी और अभिनय पर टिकी थी, और उनके प्रदर्शन ने दर्शकों को आखिर तक बांधे रखा।

4. थप्पड़ (2020): एक थप्पड़ को पूरे देश की बहस बना दिया

कई लोगों को लगा कि सिर्फ एक थप्पड़ पर बनी फिल्म दर्शकों को पसंद नहीं आएगी, लेकिन थप्पड़ ने सबको गलत साबित कर दिया। तापसी के शांत और सच्चे अभिनय ने सम्मान, बराबरी और आत्मसम्मान जैसे मुद्दों पर देशभर में चर्चा शुरू कर दी।

5. रश्मि रॉकेट (2021): एक अनदेखे मुद्दे को मुख्यधारा तक पहुंचाया

रश्मि रॉकेट में तापसी ने खेलों में होने वाले जेंडर टेस्टिंग जैसे कम चर्चित विषय पर काम किया। कड़ी शारीरिक तैयारी और भावनात्मक अभिनय के साथ उन्होंने एक ऐसे मुद्दे को लोगों तक पहुंचाया जिस पर पहले बहुत कम बात होती थी।

6. हसीन दिलरुबा (2021): एक ऐसी नायिका जो पूरी तरह परफेक्ट नहीं थी

जब फिल्मों में महिला किरदारों से अक्सर आदर्श होने की उम्मीद की जाती थी, तब तापसी ने रानी जैसा किरदार निभाया। वह भावुक, जिद्दी, अप्रत्याशित और पूरी तरह इंसानी थी। फिल्म की सफलता ने दिखाया कि दर्शक ऐसे जटिल महिला किरदारों को भी पसंद करते हैं।

7. सांड की आंख (2019): उम्र और समाज की सीमाओं को चुनौती देने वाली कहानी

सांड की आंख में तापसी ने भारत की सबसे उम्रदराज निशानेबाजों में से एक, प्रकाशी तोमर का किरदार निभाया। यह फिल्म हिम्मत, मेहनत और जीवन के किसी भी पड़ाव पर सपने पूरे करने की प्रेरणा देने वाली कहानी थी। इसने दिखाया कि असाधारण कहानियां कहीं से भी आ सकती हैं।

सिनेमा के ट्रेंड बदलते रहते हैं, लेकिन अच्छी कहानियों का असर लंबे समय तक रहता है। तापसी पन्नू का करियर इसी बात का सबूत है। जब कंटेंट-आधारित फिल्में आज की तरह आम नहीं थीं, तब भी उन्होंने ऐसी स्क्रिप्ट्स चुनीं जिनमें गहराई थी, मजबूत किरदार थे और समाज से जुड़ी बात थी। अब जब गांधारी के साथ वह एक और अलग और चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाने जा रही हैं, तापसी एक बार फिर साबित करती हैं कि ट्रेंड के पीछे चलने से नहीं, बल्कि नया रास्ता बनाने से पहचान बनती है।

मेरे पापा मुझे बहुत सपोर्ट करते थे… गोल्ड जीतकर फूट-फूटकर रोईं अस्मिता डे और ऐसी इमोशनल बात कही कि आंखें हो जाएंगी नम

जुडोका अस्मिता डे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने की खबर सबसे पहले उसी इंसान को बताना चाहती थीं, जिसे वे अब कभी नहीं बता सकती थीं। उनके पिता, जो साइकिल ठीक करके महीने में मुश्किल से 300 रुपये कमाते थे और त्रिपुरा के एक छोटे से गाँव में मिट्टी के घर में परिवार का गुजारा करते थे, सात महीने पहले ब्रेन स्ट्रोक से गुजर गए थे।

शुक्रवार को, जब 23 साल की अस्मिता महिलाओं के 48kg कैटेगरी में कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय जुडोका बनीं, तो उन्हें लगा कि यह मेडल जितना उनका है, उतना ही उनके पिता का भी है। अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद आंसू रोकते हुए अस्मिता ने कहा, “जब मेरे पिता गुजर गए, तो मुझे लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है क्योंकि वही मेरा साथ देते थे।”

कुछ पल के लिए, जश्न के बीच उन पिता की यादें ताजा हो गईं जिन्होंने उनके सपने को तब से संजोया था जब वह भारत का सपना भी नहीं बना था। उन्होंने कहा, “मैं त्रिपुरा के एक बहुत छोटे से गांव से हूं। वहां लोग इतने बड़े सपने नहीं देखते। लेकिन पापा ने हमेशा मेरा साथ दिया।”

पैसे की हमेशा तंगी रहती थी। उनके पिता गुजारे के लिए साइकिल ठीक करते थे और दिन में लगभग 300 रुपये कमाते थे, जिससे बस घर का खर्च चल पाता था। परिवार एक साधारण से मिट्टी के घर में रहता था, लेकिन उन्होंने कभी भी आर्थिक तंगी को अपनी बेटी के पसंदीदा खेल में रुकावट नहीं बनने दिया।

जब घुटने की चोट से उनका करियर खतरे में पड़ गया, तो पिता उन्हें इलाज के लिए दिल्ली ले गए, दवाइयां खरीदीं और अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव कोशिश की ताकि वे दोबारा मैट पर लौट सकें। उन्होंने याद करते हुए कहा- वह मुझे इलाज के लिए दिल्ली लाए और दवाइयां खरीदीं।

पिछले साल दिसंबर में उनकी अचानक मौत से अस्मिता बुरी तरह टूट गई थीं। जो इंसान उनका सबसे बड़ा सपोर्टर और हमेशा हिम्मत बंधाने वाला था, वह अब नहीं रहा था और उन्हें लगा कि उनके साथ ही सबसे बड़े मंच पर मुकाबला करने का उनका सपना भी खत्म हो गया।

लेकिन जब अस्मिता इस दुख से उबरने की कोशिश कर रही थीं, तब उनकी मां ने चुपचाप अपने पति की जगह ले ली। अंतिम संस्कार के सिर्फ 10 दिन बाद ही उन्होंने अपनी बेटी से ट्रेनिंग पर लौटने के लिए कहा। उन्होंने अस्मिता से कहा, “अगर मैं तुम्हें आज रोकती हूं, तो तुम्हारे पिता को लगेगा कि मैं तुम्हारे सपने तोड़ रही हूं।”

अस्मिता ने अपना सामान बांधा और भोपाल में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया सेंटर लौट गईं। कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले वह बहुत घबराई हुई थीं और कई रातें सो नहीं पाई थीं। उन्होंने बताया कि मैंने इसके लिए बहुत मेहनत की है। इस मेडल से पहले, मैं भारत में सो नहीं पाती थी। मैं मुकाबलों के बारे में सोचकर जागती रहती थी। भले ही मेरा शरीर थका होता था, फिर भी मुझे नींद नहीं आती थी। मैं बेचैन महसूस करती थी और फिर सुबह 5:30 बजे ट्रेनिंग के लिए उठ जाती थी।” ग्लासगो पहुंचने के बाद भी घबराहट बनी रही।

“जब मैं यहां पहुंची, तो मुझे बहुत घबराहट हो रही थी कि क्या होगा। मैं बस यही सोचती रहती थी कि मुझे सबको हराना है और जीतना है।” यह पक्का इरादा ट्रेनिंग हॉल से आगे भी बना रहा। छोटी-छोटी खुशियां भी उस लक्ष्य की याद दिलाती थीं जिसे वह हासिल करना चाहती थीं।

उनके भाई की लाई हुई उनकी पसंदीदा मिठाई, ‘लौंग लत्ता’, घर पर फ्रिज में वैसी ही रखी रही। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं उसे फ्रिज में देखती थी और कई बार तो उसे खाने ही वाली थी, लेकिन फिर खुद को रोक लेती थी।” शुक्रवार को, हर त्याग का फल मिल गया। गोल्ड मेडल ने भारतीय जूडो के रिकॉर्ड बुक में नया इतिहास रच दिया।

66 लाख रुपये की नौकरी छोड़ने वाली महिला ने खोला राज, बताया क्यों कम वेतन वाली नौकरी लगी बेहतर

कई लोग बेहतर करियर, बड़ी सैलरी और ऊंचे पद को सफलता की पहचान मानते हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की ग्रेस मैक्लेलैंड ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। 66 लाख रुपये सालाना कमाने वाली इस महिला ने तनाव और लगातार दबाव से परेशान होकर अपनी हाई-प्रोफाइल नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने कम वेतन वाली रिसेप्शनिस्ट और ऑफिस मैनेजर की नौकरी चुनी। ग्रेस का कहना है कि कम पैसे के बावजूद इस फैसले ने उन्हें वह चीजें वापस दीं, जो उनकी पुरानी नौकरी उनसे छीन रही थी समय, ऊर्जा और मानसिक शांति। उनकी कहानी बताती है कि कभी-कभी करियर में आगे बढ़ने से ज्यादा जरूरी खुद की खुशहाली और संतुलित जिंदगी होती है।

40% कम सैलरी, लेकिन मिली सुकून भरी जिंदगी सिडनी की रहने वाली ग्रेस ने कई साल तक बड़े पदों पर काम किया। मगर लगातार तनाव, चिंता और काम के दबाव ने उन्हें इस कदर प्रभावित किया कि उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बदलने का फैसला किया। नई नौकरी में उनकी कमाई 40% कम हो गई, लेकिन बदले में उन्हें समय, ऊर्जा और मानसिक शांति मिली।

छोटे पद से शुरू किया सफर, मेहनत से बनीं मैनेजर

ग्रेस ने अपने करियर की शुरुआत एक रिटेल कंपनी में सेल्स एसोसिएट के तौर पर की थी। करीब पांच साल तक मेहनत करने के बाद उन्हें कई प्रमोशन मिले और वह कंपनी के बड़े स्टोर की मैनेजर बन गईं। यह पद उनके लिए बड़ी उपलब्धि था, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारियां और दबाव भी कई गुना बढ़ गए।

सफलता मिली, लेकिन खुद को खोने लगीं

ग्रेस ने बताया कि स्टोर मैनेजर बनने के बाद वह खुद को साबित करने के दबाव में रहने लगी थीं। लंबे काम के घंटे, रोजाना लंबा सफर और लगातार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद ने उनकी जिंदगी मुश्किल बना दी। उन्होंने कहा कि काम इतना थका देने वाला हो गया था कि ऑफिस के बाद उनके पास किसी और चीज के लिए ऊर्जा ही नहीं बचती थी।

66 लाख की नौकरी भी नहीं दे पाई खुशी

तनाव बढ़ने के बाद ग्रेस ने नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्हें लग रहा था कि शायद किसी नए माहौल में चीजें बेहतर होंगी। उन्हें लग्जरी रिटेल कंपनी में करीब 1 लाख ऑस्ट्रेलियन डॉलर (लगभग 66 लाख रुपये) की नौकरी मिली, जिसमें बोनस और विदेश यात्रा जैसे फायदे भी थे।

लेकिन अच्छी सैलरी के बावजूद उन्हें अंदर से खालीपन महसूस होता रहा। उन्हें लगा कि वह सिर्फ काम कर रही हैं, लेकिन उस काम से जुड़ाव महसूस नहीं कर पा रही हैं।

फिर चुना आसान रास्ता, बदली सफलता की परिभाषा

दूसरी बार नौकरी छोड़ने के बाद ग्रेस ने तय किया कि अब वह ऐसा काम करेंगी जिसमें जिंदगी के लिए भी समय बचे। करीब एक महीने का ब्रेक लेने के बाद उन्होंने घर के पास एक जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव रोल के लिए आवेदन किया। जुलाई 2024 में उन्होंने रिसेप्शनिस्ट और ऑफिस मैनेजर के रूप में नई शुरुआत की।

कम पैसे में ज्यादा खुशी मिली

आज ग्रेस ऑफिस के रोजमर्रा के काम संभालती हैं और टीम को सपोर्ट करती हैं। हालांकि उनकी कमाई पहले से काफी कम है, लेकिन वह इस फैसले को अपनी जिंदगी का सही कदम मानती हैं। उनके मुताबिक यह नौकरी उनके लिए एक “रीसेट बटन” की तरह साबित हुई, जहां वह खुद को दोबारा समझ सकीं और आगे की दिशा तय कर सकीं।

अब लोग उनकी जिंदगी से सीख ले रहे हैं

ग्रेस का कहना है कि अब जब लोग उनसे उनके काम के बारे में पूछते हैं तो उन्हें रिसेप्शनिस्ट बताने में कोई झिझक नहीं होती। बल्कि कई लोग उनकी शांत और संतुलित जिंदगी से प्रभावित होते हैं। काम के अलावा मिले समय में उन्होंने अपने पुराने शौक भी वापस शुरू किए। वह अब क्रोशे बनाती हैं और सोशल मीडिया के जरिए इससे कमाई भी कर रही हैं।

Surya Grahan 2026 August: हरियाली अमावस्या पर लगेगा साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण, करियर, सेहत और संपत्ति को लेकर 4 राशियां रहें सावधान

Surya Grahan 2026 August: सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसे धार्मिक और ज्योतिषीय रूप से भी अहम माना जाता है। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी में लगा था, जबकि दूसरा सूर्य ग्रहण सावन के महीने में हरियाली अमावस्या के दिन लगेगा। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, यह ग्रहण चंद्रमा की राशि कर्क राशि में लगेगा, जिसका नकारात्मक प्रभाव मेष, कर्क, तुला और मकर राशि पर देखने को मिलेगा। खास बात ये है कि साल के दूसरे और अंतिम सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य, चंद्रमा, बुध और गुरु कर्क राशि में होंगे, जिससे चतुर्ग्रही योग का निर्माण होगा।

अंतिम सूर्य ग्रहण 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन आमवस्या तिथि 12 अगस्त को मध्यरात्रि 01:52 बजे से लेकर रात 11:06 बजे तक है। उदया तिथि के अनुसार, श्रावणी अमावस्या 12 अगस्त को होगी। इसी दिन साल का अंतिम सूर्य ग्रहण भी लगेगा। इसका समय रात में 9 बजकर 4 मिनट पर लगेगा। इसका समापन या मोक्ष 13 अगस्त को प्रात: 4 बजकर 25 मिनट पर होगा।

कब से कब तक रहेगा सूतक काल

ज्योतिष गणना के अनुसार, सूर्य ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ समय से 12 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। इस आधार पर सूर्य ग्रहण का सूतक काल सुबह में 09:04 बजे से लगना चाहिए, लेकिन यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। इस वजह इसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा।

सूर्य ग्रहण पर सतर्क रहें 4 राशियां 

सूर्य ग्रहण भारत में नहीं लग रहा है और उसका सूतक काल नहीं मान्य होगा। लेकिन ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण का प्रभाव सभी 12 राशियों पर होगा। यह सूर्य ग्रहण 4 राशिवालों के लिए मुश्किल हो सकता है। सूर्य ग्रहण का अशुभ प्रभाव मेष, कर्क, तुला और मकर राशि के जातकों पर होने की आशंका है। इन राशियों के जातकों को 12 अगस्त से लेकर 12 जनवरी तक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। इन्हें अपनी सेहत, करियर, मान-सम्मान, धन-संपत्ति को लेकर सावधान रहना चाहिए। धन हानि, प्रॉपर्टी विवाद, बीमारी, अपयश, तनाव आदि से आप लोग परेशान हो सकते हैं।

सूर्य ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचने के उपाय

इन चार राशि के लोगों को 12 अगस्त से 6 माह तक भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। हर सोमवार के दिन आप भगवान शिव का जलाभिषेक करें। शिव जी की कृपा से सभी ग्रह, दोष और संकट दूर होंगे।

Sawan 2026 Rahu Gochar: मंगल के धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करने वाला है राहु, 4 राशियों के जीवन में होगा धमाल और चमकेगी किस्मत

Kiara Advani On Toxic: ‘हर एक्टर का ड्रीम होता है…’, बोल्ड सीन्स विवाद के बीच पहली बार ‘टॉक्सिक’ पर बोलीं कियारा आडवाणी

Kiara Advani On Toxic: कियारा आडवाणी इस साल की मोस्ट अवेटेड फिल्मों में से एक ‘टॉक्सिक ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ की रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। यश की मुख्य भूमिका वाली यह एक्शन थ्रिलर फिल्म अगस्त में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

इस बड़ी रिलीज से पहले कियारा ने बताया कि किस बात ने उन्हें इस प्रोजेक्ट के लिए साइन करने के लिए प्रेरित किया। ‘फेमिना’ से बात करते हुए, एक्ट्रेस ने बताया कि वह फिल्म की कई परतों वाली कहानी से तुरंत प्रभावित हो गईं। उन्होंने बताया कि डायरेक्टर गीतू मोहनदास की कहानी सुनाने के अंदाज ने उन पर गहरा असर डाला।

कियारा ने कहा कि एक एक्टर को जिन चीजों की तलाश होता है, वे सब इसमें हैं। वह याद करते हुए कहती हैं कि जब मैंने कहानी सुनी तो मैं काफी शॉक्ड और खुश थी कि यह किरदार कितनी अच्छी तरह से गढ़ा गया था। एक्ट्रेस ने बताया कि इस रोल के लिए जबरदस्त इमोशनल रेंज की जरूरत थी, जिससे उन्हें एक ही किरदार में मजबूती, कमजोरी, पागलपन, संवेदनशीलता और डिटेचमेंट जैसे इमोशन दिखाने का मौका मिला।

एक एक्टर की चाहत वाली हर चीज बताते हुए कियारा ने कहा, “मुझे लगा कि मैं अपने करियर के ऐसे पड़ाव पर पहुंच गई हूं, जहां मुझमें ऐसे किरदार को निभाने का आत्मविश्वास है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया, “मुझे महिलाओं को एक ही तरह के सांचे में ढालना या स्टीरियोटाइप करना पसंद नहीं है। हम उससे कहीं ज्यादा हैं, तो हमारे किरदार ऐसे क्यों नहीं हो सकते?” उन्होंने कहा कि स्क्रीन पर महिलाओं को मजबूत, असल और जटिल किरदारों के तौर पर दिखाया जाना चाहिए।

इसी इंटरव्यू में कियारा ने फिल्म की बड़ी स्टार कास्ट के बारे में भी बात की। उन्होंने अपनी को-स्टार्स नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत की तारीफ की और उनके साथ काम करने के अनुभव को “बेहद फ्रेश” बताया।

उन्होंने कहा, “हर महिला ने फिल्म में अपनी अलग ऊर्जा और पहचान जोड़ी। मुझे लगता है कि दर्शकों को एक ही सिनेमैटिक यूनिवर्स में इतने अलग-अलग महिला किरदारों को देखना पसंद आएगा। सेट पर ऐसे दिन भी थे जब सच में महसूस होता था कि हर कोई कुछ अनोखा बनाने के लिए अपनी लिमिट से आगे बढ़ रहा है। ये वही पल हैं, जो आपको याद दिलाते हैं कि आपको सिनेमा से प्यार क्यों हुआ था।”

यश और गीतू मोहनदास द्वारा लिखित और मोहनदास द्वारा निर्देशित, ‘Toxic A Fairytale for Grown-Ups’ एक एक्शन थ्रिलर फ़िल्म है जो पिता-बेटे की दुश्मनी पर आधारित है। इस मल्टी-लिंगुअल एक्शन थ्रिलर की शूटिंग कन्नड़ और अंग्रेजी में एक साथ की गई है, और इसके डब वर्शन हिंदी, तेलुगु, तमिल, मलयालम और कई अन्य भाषाओं में रिलीज किए जाएंगे।

इसकी टेक्निकल टीम की बात करें तो, नेशनल अवॉर्ड विजेता राजीव रवि सिनेमैटोग्राफर हैं, बैकग्राउंड स्कोर रवि बसरूर ने तैयार किया है और उज्ज्वल कुलकर्णी एडिटर हैं। हॉलीवुड स्टंट डायरेक्टर जेजे पेरी, जो ‘जॉन विक’ फ़्रैंचाइज़ी के लिए जाने जाते हैं, ने नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली जोड़ी अनबारिव और केचा खमफकडी के साथ मिलकर एक्शन सीक्वेंस कोरियोग्राफ किए हैं।

तारीख नोट कर लें! पहले यह फिल्म 19 मार्च, 2026 को रिलीज़ होने वाली थी, फिर इसे 4 जून के लिए बदला गया, और अब ‘Toxic: A Fairytale for Grown-Ups’ दुनिया भर के सिनेमाघरों में 26 अगस्त, 2026 को रिलीज होगी।

दतिया उपचुनाव के नतीजों से तय होगा नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक भविष्य?

दतिया विधानसभा उपचुनाव की वोटिंग के बाद सियासी गलियारों में नतीजों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। 2023 के मुकाबले 9 प्रतिशत कम मतदान के बाद चुनाव नतीजों को लेकर संशय और बढ़ गया है। अगर वोटिंग के परसेंट को देखे तो  पिछले 4 चुनाव में उपचुनाव में सबसे कम है, यानि नरोत्तम मिश्रा के 2008 में दतिया आने के बाद उपचुनाव में सबसे कम मतदान होने को लेकर भी अब भाजपा के अंदरखाने कई सवाल उठ रहे है। पूरे उपचुनाव के दौरान जिस तरह से  नरोत्तम मिश्रा समर्थकों पर पार्टी के लिए काम नहीं करने और वोटिंग के दिन जिस तरह से  नरोत्तम मिश्रा समर्थक नेताओं के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की, उससे एक बात पूरी तरह साफ है कि उपचुनाव के नतीजे  का असर पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी से कही अधिक नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों पर पड़ेगा।  

 

दरअसल दतिया उपचुनाव के नतीजे सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं होंगे, बल्कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। उपचुनाव के नतीजों से नरोत्तम  मिश्रा की  संगठनात्मक ताकत, जनाधार और पार्टी में उनकी भविष्य की भूमिका का भी फैसला करेंगे। 2023 में दतिया विधानसभा सीट हारने के बाद इस बार भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया और आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद जिस तरह से  पहले नरोत्तम  मिश्रा समर्थकों ने दतिया में  बवाल काटा और फिर नरोत्तम मिश्रा मंच पर रोए, उससे उपचुनाव में उनकी भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। नरोत्तम मिश्रा पूरे उपचुनाव के दौरान दावा करते रहे है कि वह पूरी तरह पार्टी के साथ है लेकिन कई  अहम मौकों जैसे बसई में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभा से  उनका गैरहाजिर रहने के भी कई अलग मायने निकाले जारहे है। 

 

दतिया में भाजपा अगर जीतती है?- यदि भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी दतिया उपचुनाव जीतते हैं तो सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह जाएगा कि टिकट न मिलने के बावजूद नरोत्तम मिश्रा ने संगठन को एकजुट रखा। टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों के विरोध और नाराजगी के बावजूद नरोत्तम  मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के साथ खड़े होकर प्रचार किया था। इससे नरोत्तम मिश्रा की भविष्य की राजनीति विशेषकर संगठन में नई भूमिका को लेकर सियासी दरवाजे खुल जाएंगे। भविष्य में उन्हें प्रदेश संगठन, चुनाव प्रबंधन या राष्ट्रीय स्तर पर अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके साथ ही 2028 के विधानसभा चुनाव या 2029 के लोकसभा चुनाव में उनको नई सीट से चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। 

 

दतिया में अगर भाजपा हारती है?- यदि भाजपा यह उपचुनाव हार जाती है तो इसका पूरा ठीकरा नरोत्तम मिश्रा पर फूटना पूरी तरह तय है। चुनाव के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए वह भी उनके खिलाफ जा सकती है।  भाजपा की हार के बाद सवाल सिर्फ उम्मीदवार पर नहीं, बल्कि पूरे स्थानीय नेतृत्व पर उठेंगे। भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह जिसको नरोत्तम मिश्रा का समर्थक माना जाता है, उस पर कार्रवाई पूरी तरह से तय है।  उपचुनाव में भाजपा की हार नरोत्तम मिश्रा की सियासी करियर पर एक ग्रहण का काम करेगी और उनकी पार्टी में पूछ-पऱख कम होगी और उनके सियासी पुर्नवास की राह कठिन हो जाएगी।दतिया उपचुनाव का परिणाम नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक करियर का अंतिम फैसला नहीं होगा, लेकिन यह उनके अगले चरण की दिशा जरूर तय कर सकता है।

 

दरअसल दतिया उपचुनाव भाजपा नेतृत्व के लिए भी एक लिटमस टेस्ट है। यदि नया उम्मीदवार जीतता है तो पार्टी इसे संगठन की जीत बताएगी। वहीं यदि भाजपा हार होती है तो टिकट चयन और स्थानीय रणनीति पर सवाल उठने के साथ दतिया में नए सिरे पार्टी संगठन की जमावट देखने को मिलेगी।

 

 

Investment Tips: 40 के पहले निपटा लें ये 10 काम! बुढ़ापे में नहीं होगी पैसों की तंगी, जानें वेल्थ क्रिएशन का सही फॉर्मूला

Financial Planning Before Age 40: 30 से 40 वर्ष की आयु वित्तीय सुरक्षा और वेल्थ क्रिएशन के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस उम्र में आपके पास करियर की स्थिरता, नियमित आय और रिटायरमेंट से पहले एक लंबा इनवेस्टमेंट होराइजन होता है।

हालांकि, सफल निवेशक बनने का मतलब सिर्फ मार्केट रिटर्न के पीछे भागना नहीं है, बल्कि एक अनुशासित वित्तीय रणनीति बनाना है। यदि आपकी उम्र भी 40 वर्ष से कम है, तो वित्तीय रूप से मजबूत बनने के लिए आपको ये 10 स्मार्ट इनवेस्टमेंट मूव्स जरूर अपनाने चाहिए:

1. सबसे पहले अपने फाइनेंशियल गोल्स तय करें

बिना लक्ष्य के निवेश करना बिना पते की चिट्ठी भेजने जैसा है। निवेश शुरू करने से पहले तय करें कि आप पैसा किसलिए बचा रहे हैं जैसे- बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना, या रिटायरमेंट। जब आपके लक्ष्य स्पष्ट होते हैं, तो बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराकर फैसले लेने के बजाय आप अपने प्लान पर टिके रहते हैं।

2. कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए जल्दी शुरुआत करें

निवेश में समय आपका सबसे बड़ा दोस्त होता है। जितनी जल्दी आप निवेश शुरू करेंगे, आपके पैसे को कंपाउंड (चक्रवृद्धि ब्याज के रूप में बढ़ने) होने का उतना ही अधिक समय मिलेगा। छोटी-छोटी रकम से की गई शुरुआत भी लंबी अवधि में बड़ा कॉर्पस बना सकती है।

3. निवेश से पहले इमरजेंसी फंड बनाएं

एक मजबूत वित्तीय योजना की नींव लिक्विडिटी पर टिकी होती है। किसी भी आपात स्थिति (जैसे- नौकरी छूटना या मेडिकल इमरजेंसी) से निपटने के लिए कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर राशि लिक्विड फंड या सेविंग्स अकाउंट में रखें। इससे आपको अपनी लंबी अवधि के निवेश को असमय बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

4. सिंपल और आसान निवेश विकल्पों से शुरुआत करें

निवेश को बहुत पेचीदा बनाने की जरूरत नहीं है। नए निवेशकों के लिए इंडेक्स फंड्स या डाइवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड्स में SIP के जरिए शुरुआत करना सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है। जैसे-जैसे आपका अनुभव बढ़े, आप अन्य एसेट क्लासेस में कदम रख सकते हैं।

5. SIP के जरिए नियमित और अनुशासित निवेश करें

मार्केट को टाइम करने के चक्कर में पड़ने के बजाय सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) का रास्ता चुनें। SIP के जरिए हर महीने एक तय राशि ऑटोमैटिक निवेश होती रहती है, जिससे रूपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिलता है और बाजार के जोखिम से बचाव होता है।

6. डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो तैयार करें

‘अपने सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखें’ यह नियम निवेश पर पूरी तरह लागू होता है।अपने रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से पोर्टफोलियो को इक्विटी, फिक्स्ड इनकम, सोना और अन्य साधनों में बांटें। डाइवर्सिफिकेशन का मकसद सिर्फ ज्यादा रिटर्न पाना नहीं, बल्कि बाजार की मंदी में नुकसान को कम करना है।

7. बहुत ज्यादा फंड्स या स्ट्रेटेजीज के चक्कर में न पड़ें

बहुत सारे म्यूचुअल फंड्स इकट्ठा कर लेना या बार-बार अपनी इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी बदलना नुकसानदेह हो सकता है। अपने पोर्टफोलियो को सिंपल रखें। सीमित और अच्छे से रिसर्च किए गए फंड्स में लंबे समय तक बने रहना हमेशा बेहतर परिणाम देता है।

8. इनकम बढ़ते ही SIP का अमाउंट बढ़ाएं

जैसे-जैसे करियर में आपकी सैलरी या बिजनेस इनकम बढ़े, अपने निवेश की राशि को भी उसी अनुपात में बढ़ाएं। इसे स्टेप-अप SIP (Step-up SIP) कहते हैं। हर साल 10% से 15% निवेश बढ़ाने से आप अपने वित्तीय लक्ष्यों को समय से काफी पहले हासिल कर सकते हैं।

9. ग्रोथ और स्टेबिलिटी में सही संतुलन बनाएं

लंबी अवधि के वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी जरूरी है, तो पोर्टफोलियो को मजबूती देने के लिए फिक्स्ड इनकम (डेट फंड्स/पीपीएफ) और गोल्ड अनिवार्य हैं। अपनी उम्र, जोखिम सहने की क्षमता और वित्तीय जिम्मेदारियों के अनुसार सही एसेट एलोकेशन तय करें।

10. समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू करें

बदलते समय के साथ आपकी जिम्मेदारियां और आय का स्तर बदलता है। साल में कम से कम एक या दो बार अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूर करें। अगर कोई फंड लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा है या आपका एसेट एलोकेशन बिगड़ गया है, तो उसमें आवश्यक रीबैलेंसिंग करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Vinnie Takair: कौन हैं विनी टकायर? डेनिश सिंगर के साथ लंदन के कैसीनो में आर्यन खान हुए स्पॉट

Vinnie Takair: शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की लंदन में हाल की एक आउटिंग सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। शाहरुख खान, गौरी खान, आर्यन, सुहाना खान और अबराम खान समेत पूरा खान परिवार कुछ समय से लंदन में छुट्टियां मना रहा है। सुहाना और गौरी के साथ शाहरुख खान के हाल ही में देखे जाने के बाद, अब आर्यन खान को देर रात बाहर घूमते हुए देखा गया।

पिछले साल नेटफ्लिक्स की पॉपुलर सीरीज ‘द बार्ड्स ऑफ बॉलीवुड’ से डायरेक्टर के तौर पर डेब्यू करने वाले स्टार किड को एक मिस्टीरियस महिला के साथ देखा गया। लंदन के एक कसीनो से निकलते हुए दोनों के वीडियोज चर्चा का विषय बन गए हैं और लोग उनके डेटिंग की अफवाहों पर बातें कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियोज में आर्यन को उस मिस्टीरियस महिला के साथ देखा जा सकता है, जब वह एक फैन के साथ फोटो खिंचवाने के लिए रुके थे। इंटरनेट पर उस मिस्टीरियस महिला की पहचान करने में ज़्यादा समय नहीं लगा। वह डेनिश सिंगर Vinnie Takair हैं, जो आर्यन के साथ लंदन के एक कसीनो से निकल रही थीं। कसीनो के बाहर अपनी कार का इंतजार करते समय आर्यन और विनी दोनों ने एक जैसे काले कपड़े पहने हुए थे।

दिलचस्प बात यह है कि विनी इंस्टाग्राम पर अपनी लंदन यात्रा की तस्वीरें पोस्ट कर रही हैं। लेकिन उनमें से किसी में भी आर्यन नज़र नहीं आए। फिर भी, उनके ध्यान रखने वाले फ़ॉलोअर्स ने यह देख लिया कि वह और आर्यन इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फ़ॉलो करते हैं। इसके अलावा, ऐसा लगता है कि उनके कुछ कॉमन दोस्त भी हैं, जिससे लोगों को लगता है कि वे एक-दूसरे को कुछ समय से जानते हैं।

इससे पहले, ऐसी अफ़वाहें थीं कि आर्यन ब्राज़ीलियाई मॉडल और एक्ट्रेस लारिसा बोनेसी को डेट कर रहे हैं। लारिसा उनके लक्ज़री स्ट्रीटवियर ब्रांड ‘D’YAVOL X’ के प्रमोशन कैंपेन में भी नज़र आई थीं। उन्होंने मुंबई में आर्यन की डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म के प्रीमियर में भी हिस्सा लिया था।

विनी टकैयर एक डेनिश म्यूज़िक आर्टिस्ट हैं। इंस्टाग्राम पर उनके लगभग 11,000 फ़ॉलोअर्स हैं, जहां वह अपने म्यूज़िक और यात्राओं के बारे में अपडेट शेयर करती रहती हैं। अपनी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल में उन्होंने कोपेनहेगन और मुंबई को अपने दो शहर बताया है। उन्होंने कई बार मुंबई में परफ़ॉर्म किया है और अपने गानों के म्यूज़िक वीडियो भी शेयर किए हैं, जैसे ‘शाइनिंग लाइट्स’, ‘मेबी आई लव यू’ और ‘ट्रो मिग’।

एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने करियर के साथ-साथ, आर्यन एक एंटरप्रेन्योर के तौर पर भी अपने काम को आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि लंदन में अपने परिवार के साथ छुट्टियां बिताने के अलावा, यह युवा फ़िल्ममेकर अपने प्रीमियम ब्रांड ‘D’YAVOL Spirits’ को प्रमोट करने की तैयारी कर रहे हैं। यह एक प्रीमियम अल्कोहल ब्रांड है जिसे उन्होंने अपने पिता शाहरुख़ के साथ मिलकर बनाया है। इसे UK के मार्केट में लॉन्च किया जाएगा।

HAL Recruitment 2026: एचएएल में मैनेजमेंट ट्रेनी के बंपर पदों पर भर्ती का मौका, जानें आवेदन शुल्क, योग्यता सहित अन्य डिटेल

HAL Recruitment 2026: देश के सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा संस्थान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने इंजीनियरिंग डिग्री धारक उम्मीदवारों के लिए शानदार अवसर पेश किया है। एचएएल ने डिजाइन ट्रेनी और मैनेजमेंट ट्रेनी के पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत 120 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार एचएएल की आधिकारिक वेबसाइट halindia.co.in के करियर सेक्शन में ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन 29 जुलाई से शुरू हो चुके हैं। आवेदन के इच्छुक उम्मीदवार 14 अगस्त को दोपहर 2.00 बजे तक अप्लाई कर सकते हैं।

पदों का विवरण

डिजाइन ट्रेनी (60 पद): इसके तहत एचएएल के अनुसंधान एवं विकास (R&D) केंद्रों में नियुक्तियां की जाएंगी। इसमें एयरोनॉटिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉ निक्स, इंस्ट्रूमेंटेमेंटेशन, मैकेनिकल, कंप्यूटर साइंस और मेटलर्जी जैसी इंजीनियरिंग शाखाओं में डिग्री प्राप्त कर चुके अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं।

मैनेजमेंट ट्रेनी (60 पद): यह पद उत्पादन, ओवरहॉल और सर्विस डिवीजनों के लिए हैं। इसमें मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉ निक्स, सिविल, प्रोडक्शन, मेटलर्जी और कंप्यूटर साइंस स्ट्री म के उम्मीदवार पात्र हैं। चयनित उम्मीदवारों को बेंगलुरु, तुमकुरु, हैदराबाद, नासिक, कोरापुट, बैरकपुर, लखनऊ, कानपुर और कोरवा स्थित एचएएल की विभिन्न यूनिट में तैनात किया जाएगा।

शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा

शैक्षणिक योग्यता : संबंधित इंजीनियरिंग ब्रांच में न्यूनतम 70% कुल अंकों के साथ बी.ई. या बी.टेक. की डिग्री होना अनिवार्य है। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग (PwBD) श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अंक 60% निर्धारित किए गए हैं। जो अभ्यर्थी बी.ई./बी.टेक. के अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर में पढ़ाई कर रहे हैं, वे भी आवेदन करने के पात्र हैं, बशर्ते इंटरव्यू के समय तक उनके पास डिग्री का प्रमाण पत्र उपलब्ध हो।

आयु सीमा : 14 अगस्त 2026 के आधार पर अनारक्षित (UR) और ईडब्ल्यूएस (EWS) उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु 28 वर्ष तय की गई है। आरक्षित श्रेणियों (OBC-NCL, SC, ST यों , PwBD) को नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

स्टाइपेंड (सैलरी): ट्रेनिंग अवधि के दौरान चयनित अभ्यर्थियों को 50,000 रुपये का शुरुआती बेसिक पे, वेरिएबल डीए और अन्य भत्ते दिए जाएंगे।

चयन प्रक्रिया : अभ्यर्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन परीक्षा (CBT) और पर्सनल इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। लिखित परीक्षा 5 और 6 सितंबर 2026 को आयोजित की जाना प्रस्तावित है।

आवेदन शुल्क : सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क 500 रुपये है। एससी, एसटी, दिव्यांगजनों और एचएएल नों के आंतरिक कर्मचारियों को आवेदन शुल्क से पूरी तरह छूट दी गई है।

आवेदन कैसे करें?

आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सीधे hal-india.co.in पर जाएं, ‘Careers’ टैब में विज्ञापन संख्या HAL/CHRC-TM/RECT-02/2026 पर क्लिक करें, अपने मोबाइल नंबर व ईमेल से रजिस्ट्रेशन करें और 14 अगस्त दोपहर 2:00 बजे से पहले अपना आवेदन फॉर्म सबमिट करें।

UPSSSC Excise Constable Result 2026 Out: 32891 उम्मीदवार देंगे एक्साइज कांस्टेबल की मेन परीक्षा, आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड करें स्कोर कार्ड

3 करोड़ की नौकरी छोड़ दुनिया घूमने निकल पड़ा शख्स, फिर बना डाली करोड़ों की कंपनी

सोशल मीडिया पर अंडर नीट शेपवियर ब्रांड्स के को-फाउंडर और सीईओ विमर्श राजदान का पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। पोस्ट में विमर्श राजदान ने बताया कि उन्होंने करोड़ों रुपये के पैकेज वाली कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला क्यों लिया। उन्होंने कहा कि, करीब 10 साल तक रोज 18 से 20 घंटे काम करने के बाद उन्हें ऐसा लगा कि अब अपने सपनों पर काम करने का समय आ गया है। इसी सोच की वजह से उन्होंने ऊंची सैलरी वाली नौकरी छोड़कर एंटरप्रेन्योरशिप का रास्ता चुना। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

शेयर किया पोस्ट

विमर्श राजदान ने लिंक्डइन पर शेयर की गई एक पोस्ट में बताया कि जब उन्होंने एक साल का ब्रेक लेकर दुनिया घूमने का फैसला किया था, तब कई लोगों ने उनकी आलोचना की थी। लेकिन उनका कहना है कि यही फैसला उनकी जिंदगी का बड़ा मोड़ साबित हुआ। इस अनुभव ने काम करने के तरीके, नेतृत्व और बिजनेस को लेकर उनकी सोच पूरी तरह बदल दी।

3 करोड़ को नौकरी छोड़ दी

राजदान ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैंने 3 करोड़ रुपये की CTC वाली नौकरी छोड़ दी और एक साल तक पूरी दुनिया घूमने निकल गया।” उन्होंने आगे बताया कि, “पिछले 13 सालों तक मेरी जिंदगी सिर्फ काम के इर्द-गिर्द ही घूमती रही। मैं घर केवल सोने के लिए जाता था। रोज 18 से 20 घंटे काम करना मेरी दिनचर्या बन गई थी और धीरे-धीरे यही मेरे लिए नॉर्मल बात हो गई थी।”

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आखिरकार, राजदान ने अपनी लाइफस्टाइल को पूरी तरह से बदलने का फैसला किया। नई नौकरी शुरू करने की बजाय उन्होंने एक साल का ब्रेक लिया और आइसलैंड, क्रोएशिया व पेरिस जैसे कई देशों की यात्रा की। उनके मुताबिक, ये सफर उनकी जिंदगी का अहम मोड़ साबित हुआ और इसी अनुभव ने उनकी सोच और आगे का रास्ता बदल दिया। राजदान ने माना कि करियर बनाने में कई साल लगाने के बाद करोड़ों रुपये की सैलरी वाली नौकरी छोड़ने के उनके फैसले को ज्यादातर लोग समझ नहीं पाए। उन्होंने लिखा, “लोगों ने कहा कि मैं पागल हो गया हूं। उन्होंने कहा कि तुम अपना मोमेंटम खो रहे हो।”