Surya Grahan 2026 August: हरियाली अमावस्या पर लगेगा साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण, करियर, सेहत और संपत्ति को लेकर 4 राशियां रहें सावधान

Surya Grahan 2026 August: सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसे धार्मिक और ज्योतिषीय रूप से भी अहम माना जाता है। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी में लगा था, जबकि दूसरा सूर्य ग्रहण सावन के महीने में हरियाली अमावस्या के दिन लगेगा। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, यह ग्रहण चंद्रमा की राशि कर्क राशि में लगेगा, जिसका नकारात्मक प्रभाव मेष, कर्क, तुला और मकर राशि पर देखने को मिलेगा। खास बात ये है कि साल के दूसरे और अंतिम सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य, चंद्रमा, बुध और गुरु कर्क राशि में होंगे, जिससे चतुर्ग्रही योग का निर्माण होगा।

अंतिम सूर्य ग्रहण 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन आमवस्या तिथि 12 अगस्त को मध्यरात्रि 01:52 बजे से लेकर रात 11:06 बजे तक है। उदया तिथि के अनुसार, श्रावणी अमावस्या 12 अगस्त को होगी। इसी दिन साल का अंतिम सूर्य ग्रहण भी लगेगा। इसका समय रात में 9 बजकर 4 मिनट पर लगेगा। इसका समापन या मोक्ष 13 अगस्त को प्रात: 4 बजकर 25 मिनट पर होगा।

कब से कब तक रहेगा सूतक काल

ज्योतिष गणना के अनुसार, सूर्य ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ समय से 12 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। इस आधार पर सूर्य ग्रहण का सूतक काल सुबह में 09:04 बजे से लगना चाहिए, लेकिन यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। इस वजह इसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा।

सूर्य ग्रहण पर सतर्क रहें 4 राशियां 

सूर्य ग्रहण भारत में नहीं लग रहा है और उसका सूतक काल नहीं मान्य होगा। लेकिन ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण का प्रभाव सभी 12 राशियों पर होगा। यह सूर्य ग्रहण 4 राशिवालों के लिए मुश्किल हो सकता है। सूर्य ग्रहण का अशुभ प्रभाव मेष, कर्क, तुला और मकर राशि के जातकों पर होने की आशंका है। इन राशियों के जातकों को 12 अगस्त से लेकर 12 जनवरी तक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। इन्हें अपनी सेहत, करियर, मान-सम्मान, धन-संपत्ति को लेकर सावधान रहना चाहिए। धन हानि, प्रॉपर्टी विवाद, बीमारी, अपयश, तनाव आदि से आप लोग परेशान हो सकते हैं।

सूर्य ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचने के उपाय

इन चार राशि के लोगों को 12 अगस्त से 6 माह तक भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। हर सोमवार के दिन आप भगवान शिव का जलाभिषेक करें। शिव जी की कृपा से सभी ग्रह, दोष और संकट दूर होंगे।

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Kiara Advani On Toxic: ‘हर एक्टर का ड्रीम होता है…’, बोल्ड सीन्स विवाद के बीच पहली बार ‘टॉक्सिक’ पर बोलीं कियारा आडवाणी

Kiara Advani On Toxic: कियारा आडवाणी इस साल की मोस्ट अवेटेड फिल्मों में से एक ‘टॉक्सिक ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ की रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। यश की मुख्य भूमिका वाली यह एक्शन थ्रिलर फिल्म अगस्त में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

इस बड़ी रिलीज से पहले कियारा ने बताया कि किस बात ने उन्हें इस प्रोजेक्ट के लिए साइन करने के लिए प्रेरित किया। ‘फेमिना’ से बात करते हुए, एक्ट्रेस ने बताया कि वह फिल्म की कई परतों वाली कहानी से तुरंत प्रभावित हो गईं। उन्होंने बताया कि डायरेक्टर गीतू मोहनदास की कहानी सुनाने के अंदाज ने उन पर गहरा असर डाला।

कियारा ने कहा कि एक एक्टर को जिन चीजों की तलाश होता है, वे सब इसमें हैं। वह याद करते हुए कहती हैं कि जब मैंने कहानी सुनी तो मैं काफी शॉक्ड और खुश थी कि यह किरदार कितनी अच्छी तरह से गढ़ा गया था। एक्ट्रेस ने बताया कि इस रोल के लिए जबरदस्त इमोशनल रेंज की जरूरत थी, जिससे उन्हें एक ही किरदार में मजबूती, कमजोरी, पागलपन, संवेदनशीलता और डिटेचमेंट जैसे इमोशन दिखाने का मौका मिला।

एक एक्टर की चाहत वाली हर चीज बताते हुए कियारा ने कहा, “मुझे लगा कि मैं अपने करियर के ऐसे पड़ाव पर पहुंच गई हूं, जहां मुझमें ऐसे किरदार को निभाने का आत्मविश्वास है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया, “मुझे महिलाओं को एक ही तरह के सांचे में ढालना या स्टीरियोटाइप करना पसंद नहीं है। हम उससे कहीं ज्यादा हैं, तो हमारे किरदार ऐसे क्यों नहीं हो सकते?” उन्होंने कहा कि स्क्रीन पर महिलाओं को मजबूत, असल और जटिल किरदारों के तौर पर दिखाया जाना चाहिए।

इसी इंटरव्यू में कियारा ने फिल्म की बड़ी स्टार कास्ट के बारे में भी बात की। उन्होंने अपनी को-स्टार्स नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत की तारीफ की और उनके साथ काम करने के अनुभव को “बेहद फ्रेश” बताया।

उन्होंने कहा, “हर महिला ने फिल्म में अपनी अलग ऊर्जा और पहचान जोड़ी। मुझे लगता है कि दर्शकों को एक ही सिनेमैटिक यूनिवर्स में इतने अलग-अलग महिला किरदारों को देखना पसंद आएगा। सेट पर ऐसे दिन भी थे जब सच में महसूस होता था कि हर कोई कुछ अनोखा बनाने के लिए अपनी लिमिट से आगे बढ़ रहा है। ये वही पल हैं, जो आपको याद दिलाते हैं कि आपको सिनेमा से प्यार क्यों हुआ था।”

यश और गीतू मोहनदास द्वारा लिखित और मोहनदास द्वारा निर्देशित, ‘Toxic A Fairytale for Grown-Ups’ एक एक्शन थ्रिलर फ़िल्म है जो पिता-बेटे की दुश्मनी पर आधारित है। इस मल्टी-लिंगुअल एक्शन थ्रिलर की शूटिंग कन्नड़ और अंग्रेजी में एक साथ की गई है, और इसके डब वर्शन हिंदी, तेलुगु, तमिल, मलयालम और कई अन्य भाषाओं में रिलीज किए जाएंगे।

इसकी टेक्निकल टीम की बात करें तो, नेशनल अवॉर्ड विजेता राजीव रवि सिनेमैटोग्राफर हैं, बैकग्राउंड स्कोर रवि बसरूर ने तैयार किया है और उज्ज्वल कुलकर्णी एडिटर हैं। हॉलीवुड स्टंट डायरेक्टर जेजे पेरी, जो ‘जॉन विक’ फ़्रैंचाइज़ी के लिए जाने जाते हैं, ने नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली जोड़ी अनबारिव और केचा खमफकडी के साथ मिलकर एक्शन सीक्वेंस कोरियोग्राफ किए हैं।

तारीख नोट कर लें! पहले यह फिल्म 19 मार्च, 2026 को रिलीज़ होने वाली थी, फिर इसे 4 जून के लिए बदला गया, और अब ‘Toxic: A Fairytale for Grown-Ups’ दुनिया भर के सिनेमाघरों में 26 अगस्त, 2026 को रिलीज होगी।

दतिया उपचुनाव के नतीजों से तय होगा नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक भविष्य?

दतिया विधानसभा उपचुनाव की वोटिंग के बाद सियासी गलियारों में नतीजों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। 2023 के मुकाबले 9 प्रतिशत कम मतदान के बाद चुनाव नतीजों को लेकर संशय और बढ़ गया है। अगर वोटिंग के परसेंट को देखे तो  पिछले 4 चुनाव में उपचुनाव में सबसे कम है, यानि नरोत्तम मिश्रा के 2008 में दतिया आने के बाद उपचुनाव में सबसे कम मतदान होने को लेकर भी अब भाजपा के अंदरखाने कई सवाल उठ रहे है। पूरे उपचुनाव के दौरान जिस तरह से  नरोत्तम मिश्रा समर्थकों पर पार्टी के लिए काम नहीं करने और वोटिंग के दिन जिस तरह से  नरोत्तम मिश्रा समर्थक नेताओं के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की, उससे एक बात पूरी तरह साफ है कि उपचुनाव के नतीजे  का असर पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी से कही अधिक नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों पर पड़ेगा।  

 

दरअसल दतिया उपचुनाव के नतीजे सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं होंगे, बल्कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। उपचुनाव के नतीजों से नरोत्तम  मिश्रा की  संगठनात्मक ताकत, जनाधार और पार्टी में उनकी भविष्य की भूमिका का भी फैसला करेंगे। 2023 में दतिया विधानसभा सीट हारने के बाद इस बार भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया और आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद जिस तरह से  पहले नरोत्तम  मिश्रा समर्थकों ने दतिया में  बवाल काटा और फिर नरोत्तम मिश्रा मंच पर रोए, उससे उपचुनाव में उनकी भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। नरोत्तम मिश्रा पूरे उपचुनाव के दौरान दावा करते रहे है कि वह पूरी तरह पार्टी के साथ है लेकिन कई  अहम मौकों जैसे बसई में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभा से  उनका गैरहाजिर रहने के भी कई अलग मायने निकाले जारहे है। 

 

दतिया में भाजपा अगर जीतती है?- यदि भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी दतिया उपचुनाव जीतते हैं तो सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह जाएगा कि टिकट न मिलने के बावजूद नरोत्तम मिश्रा ने संगठन को एकजुट रखा। टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों के विरोध और नाराजगी के बावजूद नरोत्तम  मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के साथ खड़े होकर प्रचार किया था। इससे नरोत्तम मिश्रा की भविष्य की राजनीति विशेषकर संगठन में नई भूमिका को लेकर सियासी दरवाजे खुल जाएंगे। भविष्य में उन्हें प्रदेश संगठन, चुनाव प्रबंधन या राष्ट्रीय स्तर पर अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके साथ ही 2028 के विधानसभा चुनाव या 2029 के लोकसभा चुनाव में उनको नई सीट से चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। 

 

दतिया में अगर भाजपा हारती है?- यदि भाजपा यह उपचुनाव हार जाती है तो इसका पूरा ठीकरा नरोत्तम मिश्रा पर फूटना पूरी तरह तय है। चुनाव के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए वह भी उनके खिलाफ जा सकती है।  भाजपा की हार के बाद सवाल सिर्फ उम्मीदवार पर नहीं, बल्कि पूरे स्थानीय नेतृत्व पर उठेंगे। भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह जिसको नरोत्तम मिश्रा का समर्थक माना जाता है, उस पर कार्रवाई पूरी तरह से तय है।  उपचुनाव में भाजपा की हार नरोत्तम मिश्रा की सियासी करियर पर एक ग्रहण का काम करेगी और उनकी पार्टी में पूछ-पऱख कम होगी और उनके सियासी पुर्नवास की राह कठिन हो जाएगी।दतिया उपचुनाव का परिणाम नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक करियर का अंतिम फैसला नहीं होगा, लेकिन यह उनके अगले चरण की दिशा जरूर तय कर सकता है।

 

दरअसल दतिया उपचुनाव भाजपा नेतृत्व के लिए भी एक लिटमस टेस्ट है। यदि नया उम्मीदवार जीतता है तो पार्टी इसे संगठन की जीत बताएगी। वहीं यदि भाजपा हार होती है तो टिकट चयन और स्थानीय रणनीति पर सवाल उठने के साथ दतिया में नए सिरे पार्टी संगठन की जमावट देखने को मिलेगी।

 

 

Investment Tips: 40 के पहले निपटा लें ये 10 काम! बुढ़ापे में नहीं होगी पैसों की तंगी, जानें वेल्थ क्रिएशन का सही फॉर्मूला

Financial Planning Before Age 40: 30 से 40 वर्ष की आयु वित्तीय सुरक्षा और वेल्थ क्रिएशन के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस उम्र में आपके पास करियर की स्थिरता, नियमित आय और रिटायरमेंट से पहले एक लंबा इनवेस्टमेंट होराइजन होता है।

हालांकि, सफल निवेशक बनने का मतलब सिर्फ मार्केट रिटर्न के पीछे भागना नहीं है, बल्कि एक अनुशासित वित्तीय रणनीति बनाना है। यदि आपकी उम्र भी 40 वर्ष से कम है, तो वित्तीय रूप से मजबूत बनने के लिए आपको ये 10 स्मार्ट इनवेस्टमेंट मूव्स जरूर अपनाने चाहिए:

1. सबसे पहले अपने फाइनेंशियल गोल्स तय करें

बिना लक्ष्य के निवेश करना बिना पते की चिट्ठी भेजने जैसा है। निवेश शुरू करने से पहले तय करें कि आप पैसा किसलिए बचा रहे हैं जैसे- बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना, या रिटायरमेंट। जब आपके लक्ष्य स्पष्ट होते हैं, तो बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराकर फैसले लेने के बजाय आप अपने प्लान पर टिके रहते हैं।

2. कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए जल्दी शुरुआत करें

निवेश में समय आपका सबसे बड़ा दोस्त होता है। जितनी जल्दी आप निवेश शुरू करेंगे, आपके पैसे को कंपाउंड (चक्रवृद्धि ब्याज के रूप में बढ़ने) होने का उतना ही अधिक समय मिलेगा। छोटी-छोटी रकम से की गई शुरुआत भी लंबी अवधि में बड़ा कॉर्पस बना सकती है।

3. निवेश से पहले इमरजेंसी फंड बनाएं

एक मजबूत वित्तीय योजना की नींव लिक्विडिटी पर टिकी होती है। किसी भी आपात स्थिति (जैसे- नौकरी छूटना या मेडिकल इमरजेंसी) से निपटने के लिए कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर राशि लिक्विड फंड या सेविंग्स अकाउंट में रखें। इससे आपको अपनी लंबी अवधि के निवेश को असमय बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

4. सिंपल और आसान निवेश विकल्पों से शुरुआत करें

निवेश को बहुत पेचीदा बनाने की जरूरत नहीं है। नए निवेशकों के लिए इंडेक्स फंड्स या डाइवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड्स में SIP के जरिए शुरुआत करना सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है। जैसे-जैसे आपका अनुभव बढ़े, आप अन्य एसेट क्लासेस में कदम रख सकते हैं।

5. SIP के जरिए नियमित और अनुशासित निवेश करें

मार्केट को टाइम करने के चक्कर में पड़ने के बजाय सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) का रास्ता चुनें। SIP के जरिए हर महीने एक तय राशि ऑटोमैटिक निवेश होती रहती है, जिससे रूपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिलता है और बाजार के जोखिम से बचाव होता है।

6. डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो तैयार करें

‘अपने सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखें’ यह नियम निवेश पर पूरी तरह लागू होता है।अपने रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से पोर्टफोलियो को इक्विटी, फिक्स्ड इनकम, सोना और अन्य साधनों में बांटें। डाइवर्सिफिकेशन का मकसद सिर्फ ज्यादा रिटर्न पाना नहीं, बल्कि बाजार की मंदी में नुकसान को कम करना है।

7. बहुत ज्यादा फंड्स या स्ट्रेटेजीज के चक्कर में न पड़ें

बहुत सारे म्यूचुअल फंड्स इकट्ठा कर लेना या बार-बार अपनी इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी बदलना नुकसानदेह हो सकता है। अपने पोर्टफोलियो को सिंपल रखें। सीमित और अच्छे से रिसर्च किए गए फंड्स में लंबे समय तक बने रहना हमेशा बेहतर परिणाम देता है।

8. इनकम बढ़ते ही SIP का अमाउंट बढ़ाएं

जैसे-जैसे करियर में आपकी सैलरी या बिजनेस इनकम बढ़े, अपने निवेश की राशि को भी उसी अनुपात में बढ़ाएं। इसे स्टेप-अप SIP (Step-up SIP) कहते हैं। हर साल 10% से 15% निवेश बढ़ाने से आप अपने वित्तीय लक्ष्यों को समय से काफी पहले हासिल कर सकते हैं।

9. ग्रोथ और स्टेबिलिटी में सही संतुलन बनाएं

लंबी अवधि के वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी जरूरी है, तो पोर्टफोलियो को मजबूती देने के लिए फिक्स्ड इनकम (डेट फंड्स/पीपीएफ) और गोल्ड अनिवार्य हैं। अपनी उम्र, जोखिम सहने की क्षमता और वित्तीय जिम्मेदारियों के अनुसार सही एसेट एलोकेशन तय करें।

10. समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू करें

बदलते समय के साथ आपकी जिम्मेदारियां और आय का स्तर बदलता है। साल में कम से कम एक या दो बार अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूर करें। अगर कोई फंड लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा है या आपका एसेट एलोकेशन बिगड़ गया है, तो उसमें आवश्यक रीबैलेंसिंग करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Vinnie Takair: कौन हैं विनी टकायर? डेनिश सिंगर के साथ लंदन के कैसीनो में आर्यन खान हुए स्पॉट

Vinnie Takair: शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की लंदन में हाल की एक आउटिंग सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। शाहरुख खान, गौरी खान, आर्यन, सुहाना खान और अबराम खान समेत पूरा खान परिवार कुछ समय से लंदन में छुट्टियां मना रहा है। सुहाना और गौरी के साथ शाहरुख खान के हाल ही में देखे जाने के बाद, अब आर्यन खान को देर रात बाहर घूमते हुए देखा गया।

पिछले साल नेटफ्लिक्स की पॉपुलर सीरीज ‘द बार्ड्स ऑफ बॉलीवुड’ से डायरेक्टर के तौर पर डेब्यू करने वाले स्टार किड को एक मिस्टीरियस महिला के साथ देखा गया। लंदन के एक कसीनो से निकलते हुए दोनों के वीडियोज चर्चा का विषय बन गए हैं और लोग उनके डेटिंग की अफवाहों पर बातें कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियोज में आर्यन को उस मिस्टीरियस महिला के साथ देखा जा सकता है, जब वह एक फैन के साथ फोटो खिंचवाने के लिए रुके थे। इंटरनेट पर उस मिस्टीरियस महिला की पहचान करने में ज़्यादा समय नहीं लगा। वह डेनिश सिंगर Vinnie Takair हैं, जो आर्यन के साथ लंदन के एक कसीनो से निकल रही थीं। कसीनो के बाहर अपनी कार का इंतजार करते समय आर्यन और विनी दोनों ने एक जैसे काले कपड़े पहने हुए थे।

दिलचस्प बात यह है कि विनी इंस्टाग्राम पर अपनी लंदन यात्रा की तस्वीरें पोस्ट कर रही हैं। लेकिन उनमें से किसी में भी आर्यन नज़र नहीं आए। फिर भी, उनके ध्यान रखने वाले फ़ॉलोअर्स ने यह देख लिया कि वह और आर्यन इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फ़ॉलो करते हैं। इसके अलावा, ऐसा लगता है कि उनके कुछ कॉमन दोस्त भी हैं, जिससे लोगों को लगता है कि वे एक-दूसरे को कुछ समय से जानते हैं।

इससे पहले, ऐसी अफ़वाहें थीं कि आर्यन ब्राज़ीलियाई मॉडल और एक्ट्रेस लारिसा बोनेसी को डेट कर रहे हैं। लारिसा उनके लक्ज़री स्ट्रीटवियर ब्रांड ‘D’YAVOL X’ के प्रमोशन कैंपेन में भी नज़र आई थीं। उन्होंने मुंबई में आर्यन की डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म के प्रीमियर में भी हिस्सा लिया था।

विनी टकैयर एक डेनिश म्यूज़िक आर्टिस्ट हैं। इंस्टाग्राम पर उनके लगभग 11,000 फ़ॉलोअर्स हैं, जहां वह अपने म्यूज़िक और यात्राओं के बारे में अपडेट शेयर करती रहती हैं। अपनी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल में उन्होंने कोपेनहेगन और मुंबई को अपने दो शहर बताया है। उन्होंने कई बार मुंबई में परफ़ॉर्म किया है और अपने गानों के म्यूज़िक वीडियो भी शेयर किए हैं, जैसे ‘शाइनिंग लाइट्स’, ‘मेबी आई लव यू’ और ‘ट्रो मिग’।

एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने करियर के साथ-साथ, आर्यन एक एंटरप्रेन्योर के तौर पर भी अपने काम को आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि लंदन में अपने परिवार के साथ छुट्टियां बिताने के अलावा, यह युवा फ़िल्ममेकर अपने प्रीमियम ब्रांड ‘D’YAVOL Spirits’ को प्रमोट करने की तैयारी कर रहे हैं। यह एक प्रीमियम अल्कोहल ब्रांड है जिसे उन्होंने अपने पिता शाहरुख़ के साथ मिलकर बनाया है। इसे UK के मार्केट में लॉन्च किया जाएगा।

HAL Recruitment 2026: एचएएल में मैनेजमेंट ट्रेनी के बंपर पदों पर भर्ती का मौका, जानें आवेदन शुल्क, योग्यता सहित अन्य डिटेल

HAL Recruitment 2026: देश के सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा संस्थान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने इंजीनियरिंग डिग्री धारक उम्मीदवारों के लिए शानदार अवसर पेश किया है। एचएएल ने डिजाइन ट्रेनी और मैनेजमेंट ट्रेनी के पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत 120 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार एचएएल की आधिकारिक वेबसाइट halindia.co.in के करियर सेक्शन में ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन 29 जुलाई से शुरू हो चुके हैं। आवेदन के इच्छुक उम्मीदवार 14 अगस्त को दोपहर 2.00 बजे तक अप्लाई कर सकते हैं।

पदों का विवरण

डिजाइन ट्रेनी (60 पद): इसके तहत एचएएल के अनुसंधान एवं विकास (R&D) केंद्रों में नियुक्तियां की जाएंगी। इसमें एयरोनॉटिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉ निक्स, इंस्ट्रूमेंटेमेंटेशन, मैकेनिकल, कंप्यूटर साइंस और मेटलर्जी जैसी इंजीनियरिंग शाखाओं में डिग्री प्राप्त कर चुके अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं।

मैनेजमेंट ट्रेनी (60 पद): यह पद उत्पादन, ओवरहॉल और सर्विस डिवीजनों के लिए हैं। इसमें मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉ निक्स, सिविल, प्रोडक्शन, मेटलर्जी और कंप्यूटर साइंस स्ट्री म के उम्मीदवार पात्र हैं। चयनित उम्मीदवारों को बेंगलुरु, तुमकुरु, हैदराबाद, नासिक, कोरापुट, बैरकपुर, लखनऊ, कानपुर और कोरवा स्थित एचएएल की विभिन्न यूनिट में तैनात किया जाएगा।

शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा

शैक्षणिक योग्यता : संबंधित इंजीनियरिंग ब्रांच में न्यूनतम 70% कुल अंकों के साथ बी.ई. या बी.टेक. की डिग्री होना अनिवार्य है। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग (PwBD) श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अंक 60% निर्धारित किए गए हैं। जो अभ्यर्थी बी.ई./बी.टेक. के अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर में पढ़ाई कर रहे हैं, वे भी आवेदन करने के पात्र हैं, बशर्ते इंटरव्यू के समय तक उनके पास डिग्री का प्रमाण पत्र उपलब्ध हो।

आयु सीमा : 14 अगस्त 2026 के आधार पर अनारक्षित (UR) और ईडब्ल्यूएस (EWS) उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु 28 वर्ष तय की गई है। आरक्षित श्रेणियों (OBC-NCL, SC, ST यों , PwBD) को नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

स्टाइपेंड (सैलरी): ट्रेनिंग अवधि के दौरान चयनित अभ्यर्थियों को 50,000 रुपये का शुरुआती बेसिक पे, वेरिएबल डीए और अन्य भत्ते दिए जाएंगे।

चयन प्रक्रिया : अभ्यर्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन परीक्षा (CBT) और पर्सनल इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। लिखित परीक्षा 5 और 6 सितंबर 2026 को आयोजित की जाना प्रस्तावित है।

आवेदन शुल्क : सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क 500 रुपये है। एससी, एसटी, दिव्यांगजनों और एचएएल नों के आंतरिक कर्मचारियों को आवेदन शुल्क से पूरी तरह छूट दी गई है।

आवेदन कैसे करें?

आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सीधे hal-india.co.in पर जाएं, ‘Careers’ टैब में विज्ञापन संख्या HAL/CHRC-TM/RECT-02/2026 पर क्लिक करें, अपने मोबाइल नंबर व ईमेल से रजिस्ट्रेशन करें और 14 अगस्त दोपहर 2:00 बजे से पहले अपना आवेदन फॉर्म सबमिट करें।

UPSSSC Excise Constable Result 2026 Out: 32891 उम्मीदवार देंगे एक्साइज कांस्टेबल की मेन परीक्षा, आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड करें स्कोर कार्ड

3 करोड़ की नौकरी छोड़ दुनिया घूमने निकल पड़ा शख्स, फिर बना डाली करोड़ों की कंपनी

सोशल मीडिया पर अंडर नीट शेपवियर ब्रांड्स के को-फाउंडर और सीईओ विमर्श राजदान का पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। पोस्ट में विमर्श राजदान ने बताया कि उन्होंने करोड़ों रुपये के पैकेज वाली कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला क्यों लिया। उन्होंने कहा कि, करीब 10 साल तक रोज 18 से 20 घंटे काम करने के बाद उन्हें ऐसा लगा कि अब अपने सपनों पर काम करने का समय आ गया है। इसी सोच की वजह से उन्होंने ऊंची सैलरी वाली नौकरी छोड़कर एंटरप्रेन्योरशिप का रास्ता चुना। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

शेयर किया पोस्ट

विमर्श राजदान ने लिंक्डइन पर शेयर की गई एक पोस्ट में बताया कि जब उन्होंने एक साल का ब्रेक लेकर दुनिया घूमने का फैसला किया था, तब कई लोगों ने उनकी आलोचना की थी। लेकिन उनका कहना है कि यही फैसला उनकी जिंदगी का बड़ा मोड़ साबित हुआ। इस अनुभव ने काम करने के तरीके, नेतृत्व और बिजनेस को लेकर उनकी सोच पूरी तरह बदल दी।

3 करोड़ को नौकरी छोड़ दी

राजदान ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैंने 3 करोड़ रुपये की CTC वाली नौकरी छोड़ दी और एक साल तक पूरी दुनिया घूमने निकल गया।” उन्होंने आगे बताया कि, “पिछले 13 सालों तक मेरी जिंदगी सिर्फ काम के इर्द-गिर्द ही घूमती रही। मैं घर केवल सोने के लिए जाता था। रोज 18 से 20 घंटे काम करना मेरी दिनचर्या बन गई थी और धीरे-धीरे यही मेरे लिए नॉर्मल बात हो गई थी।”

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आखिरकार, राजदान ने अपनी लाइफस्टाइल को पूरी तरह से बदलने का फैसला किया। नई नौकरी शुरू करने की बजाय उन्होंने एक साल का ब्रेक लिया और आइसलैंड, क्रोएशिया व पेरिस जैसे कई देशों की यात्रा की। उनके मुताबिक, ये सफर उनकी जिंदगी का अहम मोड़ साबित हुआ और इसी अनुभव ने उनकी सोच और आगे का रास्ता बदल दिया। राजदान ने माना कि करियर बनाने में कई साल लगाने के बाद करोड़ों रुपये की सैलरी वाली नौकरी छोड़ने के उनके फैसले को ज्यादातर लोग समझ नहीं पाए। उन्होंने लिखा, “लोगों ने कहा कि मैं पागल हो गया हूं। उन्होंने कहा कि तुम अपना मोमेंटम खो रहे हो।”

बस के आगे चट्टान की तरह हो खड़ी हो गईं ACP मोनिका शुक्ला और टल गया हादसा, किसान आंदोलन में दिखा अलग अंदाज

भोपाल में बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के पास किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर (एसीपी) मोनिका शुक्ला ने चलती बस के सामने खड़े होकर उसे आगे बढ़ने से रोक दिया। यह घटना उस समय हुई, जब प्रदर्शन कर रहे कुछ किसान पुलिस द्वारा रोकी गई बस को आगे ले जाने की कोशिश कर रहे थे। घटना के वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारी बस की छत पर चढ़कर नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं, जबकि कुछ लोग पीछे से बस को धक्का दे रहे हैं। जैसे ही बस आगे बढ़ने लगी, एसीपी मोनिका शुक्ला बिना पीछे हटे उसके सामने खड़ी हो गईं। उनके इस कदम से बस रुक गई और बड़ा हादसा टल गया।

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एसीपी मोनिका शुक्ला की बहादुरी की खूब चर्चा हो रही है। कई लोगों ने मुश्किल और जोखिम भरी स्थिति में उनके साहस और तुरंत लिए गए फैसले की सराहना की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक संभावित दुर्घटना टल गई और मौके पर स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।

एसीपी मोनिका शुक्ला कौन हैं?

मोनिका शुक्ला एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं। उन्हें कानून-व्यवस्था संभालने का कई वर्षों का अनुभव है। उन्होंने वर्ष 1994 में पुलिस सेवा में अपने करियर की शुरुआत की थी और 2009 में आईपीएस अधिकारी बनीं। मोनिका शुक्ला अपनी सख्त कार्यशैली और प्रशासनिक अनुभव के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश के कई जिलों में अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा से जुड़ी अधिकारी रही हैं। उनके पति शशिकांत शुक्ला भी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं। अपने लंबे करियर में मोनिका शुक्ला ने एक ऐसी अधिकारी के रूप में पहचान बनाई है, जो कठिन परिस्थितियों में भी तेजी से फैसला लेने और हालात को संभालने के लिए जानी जाती हैं।

पहले भी दिखा चुकी हैं बहादुरी

यह पहली बार नहीं है, जब एसीपी मोनिका शुक्ला अपने साहस और कर्तव्य निभाने के तरीके को लेकर चर्चा में आई हों। करीब एक दशक पहले भोपाल के काजी कैंप इलाके में एक सड़क हादसे के बाद हालात बिगड़ गए थे। उस दौरान गुस्साई भीड़ ने कथित तौर पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, उस समय मोनिका शुक्ला खुद मौके पर पहुंचीं और हालात को शांत करने की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने पुलिस टीम के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित किया और इलाके में कानून-व्यवस्था बहाल कराई।

विरोध प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, किसान संगठन बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय परिसर के पास एकत्र हुए थे। वहां पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक रखा था, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे जाने की कोशिश कर रहे थे। जैसे-जैसे माहौल तनावपूर्ण होता गया, कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को पार करते हुए बस को आगे बढ़ाने की कोशिश की। इसी दौरान एसीपी मोनिका शुक्ला बस के सामने आकर खड़ी हो गईं। उनके इस कदम से बस रुक गई और स्थिति को संभाल लिया गया।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। लोग मोनिका शुक्ला की हिम्मत, सूझबूझ और नेतृत्व की जमकर सराहना कर रहे हैं। इस घटना के बाद एक बार फिर मोनिका शुक्ला की पहचान ऐसी पुलिस अधिकारी के रूप में मजबूत हुई है, जो मुश्किल हालात में भी तुरंत फैसला लेकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।

63 वर्ष की हुई मंदाकिनी

बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री मंदाकिनी आज 63 वर्ष की हो गयीं।मंदाकिनी का जन्म 30 जुलाई 1963 को मेरठ में एक एंग्लो-इंडियन परिवार में हुआ था। उनके पिता जोसफ ब्रिटिश नागरिक थे, जबकि उनकी मां मुस्लिम थीं। मंदाकिनी का बचपन का नाम यास्मीन जोसेफ था। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत वर्ष 1985 में प्रदर्शित बंगाली फिल्म ‘अंतारेर भालोबाशा’ से की थी।

वर्ष 1985 में ही मंदाकिनी ने फिल्म ‘मेरा साथी’ से बॉलीवुड में कदम रखा, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही। इसी वर्ष उनकी फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ प्रदर्शित हुई, जिसने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। राज कपूर निर्मित और निर्देशित इस फिल्म में उनके साथ राजीव कपूर मुख्य भूमिका में नजर आए थे। फिल्म की सफलता ने मंदाकिनी को हिंदी सिनेमा में एक अलग पहचान दिलाई।

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फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिए मंदाकिनी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। हालांकि, इस फिल्म के लिए राज कपूर की पहली पसंद पद्मिनी कोल्हापुरे थीं, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था।

‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद मंदाकिनी ने ‘जाल’, ‘लोहा’, ‘डांस डांस’, ‘जीते हैं शान से’, ‘कमांडो’, ‘तेजाब’ और ‘जंगबाज’ जैसी कई फिल्मों में काम किया। वर्ष 1996 में प्रदर्शित फिल्म ‘जोरदार’ उनकी अंतिम फिल्म साबित हुई।

अपने फिल्मी करियर के दौरान मंदाकिनी का नाम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के साथ भी जोड़ा गया। उन्हें कई बार क्रिकेट मैदान पर दाऊद के साथ देखा गया था, हालांकि मंदाकिनी ने इन चर्चाओं पर कई बार सफाई दी।

वर्ष 1990 में मंदाकिनी ने बौद्ध धर्मगुरु डॉ. कगयुर टी रिंपोचे ठाकुर से विवाह कर लिया। वर्तमान समय में मंदाकिनी फिल्म इंडस्ट्री से दूर हैं और अपने निजी जीवन में व्यस्त हैं।

Pic Credit : ANI

Ajinkya Rahane: लॉर्ड्स से गाबा तक… अजिंक्य रहाणे की वो यादगार पारियां, जिन्हें क्रिकेट फैंस कभी नहीं भूलेंगे

Ajinkya Rahane: अजिंक्य रहाणे ने 12 साल लंबे अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर को अलविदा कह दिया है। भारत के सबसे भरोसेमंद मिडिल ऑर्डर बल्लेबाजों में गिने जाने वाले रहाणे विदेशी जमीन पर शानदार बल्लेबाजी, स्लिप में बेहतरीन फील्डिंग और मुश्किल समय में टीम की जिम्मेदारी संभालने के लिए जाने जाते थे।

रहाणे ने अपने करियर में भारतीय क्रिकेट को कई यादगार पल दिए। उन्होंने 28 साल बाद लॉर्ड्स में भारत को टेस्ट जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। वहीं, एडिलेड टेस्ट में मिली शर्मनाक हार के बाद चोटों से जूझ रही भारतीय टीम की मेलबर्न टेस्ट में कप्तानी करते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की दिलाई, जिसे उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।

रहाणे ने अपने करियर में भारतीय क्रिकेट को कई यादगार पल दिए। उन्होंने लॉर्ड्स में 28 साल बाद भारत की टेस्ट जीत में अहम योगदान दिया। वहीं, एडिलेड टेस्ट में हार के बाद जब टीम मुश्किल दौर से गुजर रही थी, तब मेलबर्न टेस्ट में कप्तानी करते हुए भारत को शानदार जीत दिलाई। जिसे उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।

इसके अलावा, विदेशी दौरों पर लगाए गए उनके शानदार शतक, गॉल टेस्ट में स्लिप में रिकॉर्ड कैच, और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल में खेली गई यादगार पारी भी उनके इंटरनेशनल करियर के सबसे खास पलों में शामिल हैं।

टीम इंडिया के लिए अजिंक्य रहाणे के आंकड़ों पर एक नजर:

हालांकि रहाणे ने भारत के लिए तीनों फ़ॉर्मेट में खेला, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने अपनी सबसे बड़ी छाप छोड़ी। उन्होंने 85 टेस्ट मैचों में 12 शतकों के साथ 5,077 रन बनाए, जिनमें से कई बेहतरीन पारियां मुश्किल विदेशी हालात में खेली गईं। 2013 और 2016 के बीच, उन्होंने न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में शतक लगाकर खुद को भारत के प्रमुख विदेशी दौरे वाले बल्लेबाज के तौर पर स्थापित किया। बाद में उन्होंने विराट कोहली के उप-कप्तान और जरूरत पड़ने पर कप्तान के तौर पर भी भूमिका निभाई।

भारत के लिए अजिंक्य रहाणे के यादगार पल

  1. लॉर्ड्स में शतक (इंग्लैंड के खिलाफ 103 रन, 2014)

साल 2014 में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए टेस्ट मैच में अजिंक्य रहाणे ने अपने करियर की सबसे यादगार पारियों में से एक खेली। मुश्किल पिच पर जब भारतीय टीम 145 रन पर 7 विकेट गंवा चुकी थी, तब रहाणे ने शानदार 103 रन बनाकर टीम को संकट से बाहर निकाला था। भुवनेश्वर कुमार के साथ उनकी साझेदारी ने पहली पारी में भारत का स्कोर 295 तक पहुँचाया और टीम को मुकाबले में बनाए रखा। हालाँकि भारत की दूसरी पारी में रहाणे ‘गोल्डन डक’ (पहली ही गेंद पर आउट) का शिकार हुए, लेकिन उनका शतक बहुत अहम साबित हुआ। इसके बाद इशांत शर्मा ने सात विकेट लिए और भारत को 95 रनों से जीत दिलाई, जिससे इस मशहूर मैदान पर टेस्ट जीत का भारत का 28 साल का इंतजार खत्म हुआ।

  1. MCG में कप्तान का शतक (ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 112 रन, 2020)

2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एडिलेड टेस्ट में भारत सिर्फ 36 रन पर ऑलआउट हो गया था, जिसके बाद टीम को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। इसी बीच विराट कोहली पितृत्व अवकाश पर घर लौट गए और कई खिलाड़ी भी चोट के कारण टीम से बाहर हो गए। ऐसे मुश्किल समय में अजिंक्य रहाणे ने कप्तानी की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में खेले गए दूसरे टेस्ट में रहाणे ने दबाव के बीच 223 गेंदों पर शानदार 112 रन की कप्तानी पारी खेली। उनकी इस पारी और बेहतरीन कप्तानी की बदौलत भारत ने 8 विकेट से जीत हासिल की और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में सीरीज 1-1 से बराबर कर दी।

दौरे के बाकी मैचों में रहाणे की शांत कप्तानी निर्णायक साबित हुई, क्योंकि उन्होंने कई प्रमुख गेंदबाजों के बिना चोटिल टीम का नेतृत्व करते हुए ऑस्ट्रेलिया के गढ़ गाबा में एक यादगार जीत दर्ज की और सीरीज को 2-1 से अपने नाम कर लिया। बता दें कि एडिलेड में शर्मनाक हार के बाद की गई यह शानदार वापसी भारतीय क्रिकेट के इतिहास की सबसे यादगार विदेशी टेस्ट जीतों में गिनी जाती है, जिसमें रहाणे की शांत का नेतृत्व सबे अहम रहा।

  1. मेलबर्न (2014) में शानदार जवाबी हमला करते हुए 147 रन

साल 2014 में मेलबर्न टेस्ट के दौरान ऑस्ट्रेलिया के मजबूत तेज गेंदबाजी आक्रमण का सामना करते हुए, रहाणे ने 171 गेंदों पर शानदार 147 रन बनाए और चौथे विकेट के लिए विराट कोहली के साथ 262 रनों की साझेदारी की। इस साझेदारी ने भारत को फॉलो-ऑन से बचाया और सीरीज के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजी प्रदर्शनों में से एक में कड़े संघर्ष के बाद मैच ड्रॉ कराया।

  1. न्यूजीलैंड के खिलाफ़ करियर का सर्वश्रेष्ठ 188 रन (2016)

साल 2016 में इंदौर टेस्ट में रहाणे ने अपना अब तक का सबसे बड़ा टेस्ट स्कोर 188 रन बनाया। उन्होंने कोहली के साथ चौथे विकेट के लिए 365 रनों की विशाल पार्टनरशिप की, जिसकी बदौलत भारत ने पहली पारी में 5 विकेट पर 557 रन घोषित किए। बता दें कि भारत ने यह मुकाबला 321 रन के बड़े अंतर से जीता था और 3-0 से सीरीज अपने नाम की थी। रहाणे की यह पारी उनके टेस्ट करियर की सबसे बेहतरीन पारियों में गिनी जाती है।

  1. गाले में वर्ल्ड-रिकॉर्ड कैचिंग का प्रदर्शन (2015)

अपनी बैटिंग के अलावा, रहाणे ने स्लिप में भी शानदार खेल दिखाया। गाले में श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने एक मैच में आठ कैच लिए, जो उस समय किसी नॉन-विकेटकीपर द्वारा टेस्ट मैच में लिए गए सबसे ज्यादा कैच थे। इससे उनके बेहतरीन रिफ्लेक्स और सुरक्षित हाथों का पता चला। बाद में 10 साल बाद एडेन मार्करम ने यह रिकॉर्ड तोड़ा, जब उन्होंने नवंबर 2025 में गुवाहाटी में भारत के खिलाफ नौ कैच लिए।

  1. WTC फाइनल में वापसी (ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 89 और 46 रन, 2023)

टेस्ट टीम से लगभग 18 महीने बाहर रहने के बाद, मुंबई के लिए घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन और चेन्नई सुपर किंग्स के साथ IPL में जबरदस्त वापसी के दम पर रहाणे को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए अचानक टीम में वापस बुलाया गया। श्रेयस अय्यर के चोटिल होने के बाद उन्हें प्लेइंग XI में शामिल किया गया और रहाणे ने ‘द ओवल’ पर भारत के सबसे अच्छे बल्लेबाज के तौर पर खेलकर चयनकर्ताओं के भरोसे को सही साबित किया।

जब भारत का स्कोर 71/4 हो गया था, तब उन्होंने पहली पारी में संघर्षपूर्ण 89 रन बनाए और दूसरी पारी में 46 रन जोड़े। साथ ही, इस मैच के दौरान उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 5,000 रन पूरे करने का मील का पत्थर भी हासिल किया। भले ही भारत फाइनल हार गया, लेकिन रहाणे की वापसी वाली पारियों ने सबसे बड़े मंच पर एक भरोसेमंद खिलाड़ी के तौर पर उनकी अहमियत को साबित कर दिया।

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