Stock Market Fall: निफ्टी 24570 से नीचे, सेंसेक्स 503 अंक तक फिसला; बाजार 6 कारणों से लाल

शेयर बाजार में शुक्रवार, 7 अगस्त को गिरावट है। इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में तेजी रही थी। शुक्रवार को सेंसेक्स लाल निशान में 78,516.08 पर खुला। फिर पिछली क्लोजिंग से करीब 503 अंक तक टूटकर 78,451.99 के लो तक गया। इसी तरह निफ्टी भी गिरावट के साथ 24,538.90 पर खुला और फिर ​पिछली क्लोजिंग से 107 अंक तक टूटकर 24,529.20 के लो तक गया। गुरुवार को सेंसेक्स 373.76 अंक या 0.48 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,954.76 पर बंद हुआ था। निफ्टी 11.35 अंक या 0.05 प्रतिशत बढ़कर 24,636 पर बंद हुआ था। आइए जानते हैं Stock Market में शुक्रवार को लौटी गिरावट के अहम कारण डिटेल में…

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी

ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेजी है। यह 1.3% चढ़कर 83.8 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही है। कच्चे तेल की महंगाई भारत के लिए एक नेगेटिव फैक्टर है क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की कुल जरूरत का ज्यादातर हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। तेल की बढ़ती कीमतें आयात की लागत बढ़ा सकती हैं, जिससे व्यापार घाटा बढ़ सकता है। साथ ही देश के अंदर महंगाई भी बढ़ सकती है।

वित्तीय शेयरों में गिरावट

शुक्रवार को फाइनेंशियल स्टॉक्स ​दबाव में हैं। बजाज फाइनेंस का शेयर 4.3 प्रतिशत तक लुढ़का। इसकी पेरेंट कंपनी बजाज फिनसर्व में भी 3.6 प्रतिशत की गिरावट दिखी। निफ्टी बैंक 0.3 प्रतिशत नीचे है, जबकि फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में 0.7 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स और PSU बैंक इंडेक्स में भी गिरावट आई।

FII की बिकवाली

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने गुरुवार को 17.86 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है।

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वैश्विक बाजारों की चाल

एशियाई बाजारों में गिरावट और तेजी का मिलाजुला रुख है। दक्षिण कोरिया का KOSPI और जापान का Nikkei 225 इंडेक्स लाल निशान में है। वहीं हेंग सेंग, जकार्ता कंपोजिट, शंघाई कंपोजिट में तेजी है। गुरुवार को अमेरिकी बाजार गिरावट के साथ बंद हुए थे।

रुपये में गिरावट

शुक्रवार को रुपया शुरुआती कारोबार में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 6 पैसे गिरकर 95.28 प्रति डॉलर पर आ गया। डॉलर सूचकांक में मामूली बढ़त और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच रुपया गुरुवार को 14 पैसे कमजोर होकर 95.22 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

India VIX में बढ़ोतरी

मार्केट में अस्थिरता का पैमाना India VIX 3 प्रतिशत बढ़कर 12.46 पर पहुंच गया। यह निवेशकों के बीच बढ़ती अनिश्चितता का संकेत देता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

 

Gift Nifty Indicator: क्रूड में उछाल और वेस्ट एशिया को लेकर बढ़ा कंफ्यूजन क्या बाजार पर दिखाएगा असर, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा संकेत

Gift Nifty Indicator: शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स के सुस्त शुरुआत करने की संभावना है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, Wall Street में रात भर हुई गिरावट और US के अहम जॉब्स डेटा से पहले एशियाई बाजारों में सावधानी के माहौल के बीच GIFT Nifty आज सुबह गिरा। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर फिर से बनी अनिश्चितता के कारण जियोपॉलिटिकल जोखिम बने हुए हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी से कुछ सहारा मिल सकता है।

सुबह करीब 8 बजे GIFT Nifty 24,647 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले सेशन की क्लोजिंग से 101 अंक या 0.41 फीसदी नीचे था। हालांकि, यह गुरुवार को Nifty 50 की 24,636 की क्लोजिंग से थोड़ा ऊपर बना रहा, जिससे घरेलू बेंचमार्क के लिए फ्लैट से नेगेटिव शुरुआत का संकेत मिलता है।

गुरुवार को उतार-चढ़ाव भरे सेशन के बाद भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 373.76 अंक या 0.48 फीसदी बढ़कर 78,954.76 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 11.35 अंक या 0.05 फीसदी बढ़कर 24,636 पर बंद हुआ। PSU बैंकों में खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया, जबकि मेटल, मीडिया और रियल्टी शेयरों में कमजोरी ने बढ़त को सीमित कर दिया।

US जॉब्स डेटा से पहले एशियाई बाजार सर्तक

शुक्रवार को एशियाई शेयरों में सावधानी के साथ कारोबार हुआ क्योंकि निवेशक US के रोजगार डेटा का इंतजार कर रहे थे, जो अगले महीने फेडरल रिजर्व के ब्याज दर के फैसले पर उम्मीदों को प्रभावित कर सकता है। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स फ्लैट रहा और इसमें साप्ताहिक आधार पर 0.4 फीसदी की गिरावट की ओर बढ़ रहा था। जापान का Nikkei 225 0.9 फीसदी गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का Kospi 0.5 फीसदी नीचे आया। हालांकि, चीन के CSI 300 में 0.2 फीसदी की बढ़त हुई।

US इक्विटी फ्यूचर्स भी सुस्त रहे। Nasdaq फ्यूचर्स फ्लैट रहे और S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 फीसदी नीचे रहे। गुरुवार को US शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए क्योंकि निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली की, साथ ही वे कॉर्पोरेट नतीजों और US-ईरान संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों से जुड़े घटनाक्रमों का आकलन कर रहे थे। डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.85 फीसदी गिरा, S&P 500 में 0.18 फीसदी की गिरावट आई और नैस्डैक कम्पोजिट 0.06 फीसदी नीचे आया।

यह गिरावट हफ्ते की मजबूत शुरुआत के बाद आई है, जिसमें डाऊ और S&P 500 रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। इसकी वजह मजबूत अर्निंग्स सीज़न और मिडिल ईस्ट में चल रहे टकराव के संभावित डिप्लोमैटिक समाधान को लेकर उम्मीद थी।

क्रूड में उछाल

शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हुई क्योंकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से शिपिंग को लेकर अनिश्चितता फिर से सामने आ गई। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.2 प्रतिशत बढ़कर $83.48 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.1 प्रतिशत बढ़कर $78.84 हो गया। यह बढ़ोतरी गुरुवार को $3 प्रति बैरल से ज़्यादा की बढ़त के बाद हुई।

नई चिंताएं तब सामने आईं जब ईरान ने ओमान के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में दुश्मन माने जाने वाले जहाज़ों पर पाबंदियां लगाने और प्रस्तावित नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाज़ों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा।

निफ्टी-बैंक निफ्टी के लिए क्या है अहम लेवल

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि मिडिल ईस्ट में संभावित डिप्लोमैटिक सफलता को लेकर उम्मीदें किसी औपचारिक समझौते के न होने से कमज़ोर पड़ गई हैं, जिससे बाज़ार जियोपॉलिटिकल खबरों के प्रति संवेदनशील हो गए हैं। उन्होंने एशियाई इक्विटी में कमज़ोरी की ओर भी इशारा किया, जिसमें जापान और दक्षिण कोरिया ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी, जो ग्लोबल निवेशकों के बीच लगातार सावधानी का संकेत है।

पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी का व्यापक टेक्निकल स्ट्रक्चर सकारात्मक बना हुआ है। 24,700 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है, और अगर यह स्तर लगातार टूटता है तो 24,800-25,000 की ओर मोमेंटम मज़बूत हो सकता है। नीचे की तरफ, 24,600 तत्काल सपोर्ट है, उसके बाद 24,500 है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Asian Stock Market: वॉल स्ट्रीट की थमी तेजी, एशियन मार्केट धड़ाम, निक्केई करीब 2% और कोस्पी 4% टूटा

Asian Stock Market: एशियन मार्केट में 6 अगस्त को गिरावट आई है। आज आई यह गिरावट वॉल स्ट्रीट में हाल ही में टेक्नोलॉजी सेक्टर की वजह से आई तेजी की रफ्तार के धीमी पड़ने के कारण रही है। इस बिकवाली का सबसे ज़्यादा असर दक्षिण कोरिया पर पड़ा, जहां कोस्पी (Kospi) 4.69% गिर गया। जापान का निक्केई (Nikkei) 1.88% नीचे आया। जबकि टोपिक्स (Topix) में मामूली 0.22% की गिरावट हुई। व्यापक MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.2% फिसला और हैंग सेंग फ्यूचर्स 0.9% नीचे रहा, जिससे संकेत मिलता है कि सावधानी का माहौल पूरे क्षेत्र में फैल रहा था, न कि सिर्फ़ किसी एक बाज़ार तक सीमित था।

वॉल स्ट्रीट

वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स में मिला-जुला कारोबार हुआ। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज के रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद होने के बाद निवेशक अब कंपनियों की अगली तिमाही की कमाई (कॉर्पोरेट अर्निंग्स) पर ध्यान दे रहे हैं।

डॉव जोन्स फ्यूचर्स में 92 अंक या 0.2% की बढ़त हुई, जबकि S&P 500 फ्यूचर्स में 0.2% की तेजी आई। वहीं, नैस्डैक 100 फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

पिछले सेशन में, डॉव 263.24 अंक या 0.49% चढ़कर रिकॉर्ड क्लोजिंग ऊंचाई पर पहुंचा और लगातार पांचवें सेशन में बढ़त बनाए रखी। इसके विपरीत, S&P 500 में 0.17% की गिरावट आई, जिससे चार दिन की तेजी का सिलसिला थम गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 0.83% गिरा।

शानदार कमाई के बावजूद SpaceX के शेयरों में 14% की गिरावट आई, क्योंकि निवेशक गुरुवार को लगभग 101 अरब डॉलर के स्टॉक के ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होने की तैयारी कर रहे थे। चिप से जुड़ी कंपनियों के लिए निराशाजनक माहौल के बीच, डेटा-स्टोरेज फर्म Sandisk और Western Digital के शेयरों में उनके नतीजे आने के बाद ‘आफ्टर-आवर्स’ ट्रेडिंग में क्रमशः 7.5% और 11% की गिरावट आई।

कच्चे तेल की कीमतें

गुरुवार को तेल की कीमतों में नरमी आई क्योंकि निवेशक यह आकलन कर रहे थे कि क्या ईरान-ओमान के बीच चल रही बातचीत से अमेरिका-ईरान शांति समझौता हो सकता है। इससे पांच महीने से चल रहा संघर्ष खत्म हो सकता है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुल सकता है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 37 सेंट या 0.5% गिरकर 79.08 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 53 सेंट या 0.7% गिरकर 74.69 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। पिछले सेशन में, ब्रेंट में मामूली बढ़त हुई थी, जबकि WTI मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ था।

अमेरिका-ईरान युद्ध

बुधवार को रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और ओमान के बीच एक प्रस्तावित समझौते पर बातचीत हो रही है। इसका मकसद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करना है। इस समझौते के तहत, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाजों पर तेहरान का अधिकार हो सकता है। अगर यह समझौता फाइनल हो जाता है, तो यह ईरान को अब तक मिली सबसे बड़ी रियायतों में से एक होगी।

अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए जल्द ही कोई समझौता हो सकता है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का लगातार यही कहना है कि वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य (जो वैश्विक ऊर्जा शिपिंग का एक प्रमुख मार्ग है) तक पहुंच पर ईरान का नियंत्रण स्वीकार नहीं करेगा।

इस बीच, पांच सूत्रों के अनुसार, ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसके क्षेत्र पर कोई नया सैन्य हमला करता है, तो वह पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर जवाबी हमले करेगा। यह चेतावनी तेहरान की उस रणनीति को दर्शाती है जिसके तहत वह वाशिंगटन के क्षेत्रीय सहयोगियों के हितों को खतरे में डालकर सैन्य कार्रवाई की संभावित कीमत बढ़ाना चाहता है।

आज सोने की कीमत

गुरुवार को लगातार चौथे सत्र में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई और यह सात हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इसकी वजह कमजोर अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में कमी थी, साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की उम्मीदों से भी इसे समर्थन मिला।

स्पॉट गोल्ड 1% बढ़कर $4,285.69 प्रति औंस हो गया, जो 18 जून के बाद का उच्चतम स्तर है। इससे पिछले सत्र में भी इस कीमती धातु ने फरवरी के बाद से एक दिन में सबसे बड़ी बढ़त दर्ज की थी।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Risks of MTF: ₹12000 करोड़ की सीख, दक्षिण कोरिया में हाहाकार के पांच सबक

Risks of MTF: मान लीजिए कि स्टॉक मार्केट में MTF (मार्जिन ट्रे़डिंग फैसिलिटी) चुनने वाले हर 30 में से एक को एक ही हफ्ते में मैसेज आए, ‘मार्जिन काल, फंड डालिए, नहीं तो हम बेच देंगे’, तो क्या होगा, हड़कंप मच जाएगा न। वैसे यह कल्पना नहीं रह गई और पिछले महीने जुलाई में दक्षिण कोरिया में ऐसा ही हुआ। अब सवाल ये है कि क्या भारत में भी ऐसा कुछ हो सकता है। सैमको सिक्योरिटीज के सीईओ और फाउंडर जिमीत मोदी का मानना है कि रिस्क तो बढ़ा है। उनका कहना है कि एनालिसिस में गलती हुई तो मार्केट माफ कर सकता है लेकिन अत्यधिक लेवरेज की गलती शायद माफ न हो। उनका कहना है कि दक्षिण कोरिया के निवेशकों ने यह सबक सीखने के लिए सिर्फ चार हफ्ते में करीब ₹12,000 करोड़ गंवा दिए और भारतीय निवेशकों के पास अभी भी यह मौका है कि वे बिना नुकसान उठाए इस अनुभव से सीख लें।

क्या है मामला

शुरुआत में सब शानदार चल रहा था। चिप से जुड़े स्टॉक में तेजी के चलते दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) इंडेक्स उछलकर जून में रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। साथ ही कोरिया का एमटीएफ यानी मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी का लोन बुक रिकॉर्ड 38.6 ट्रिलियन वान (KRW) यानी ₹2.56 लाख करोड़ पर पहुंच गया जोकि एक साल में करीब डबल हो गया। खास बात ये है कि इस उधार लिए गए पैसे का बड़ा हिस्सा सिर्फ दो शेयरों, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हाइनिक्स (SK Hynix), में लगाया गया था जिनका कोस्पी इंडेक्स में आधे से अधिक हिस्सा है।

फिर बाजार ने गोता लगाया और गिरावट इतनी तेज रही कि कोस्पी जून महीने के रिकॉर्ड हाई से करीब 40% टूट गया। इसके बाद करीब 12 लाख रिटेल अकाउंट्स को मार्जिन कॉल मिले और इनमें से 3.20 लाख-3.60 लाख निवेशकों के शेयर जबरन बेच दिए गए। जबरन बिकवाली से शेयरों की कीमतें और नीचे आईं, जिससे और अधिक निवेशकों को मार्जिन कॉल मिले। इससे खुदरा निवेशकों को करीब 2.15 ट्रिलियन वान (KRW) यानी करीब ₹12 हजार करोड़ की दौलत सिर्फ एक महीने में खत्म हो गई। सबसे अधिक नुकसान 20 से 30 साल की उम्र के निवेशकों को हुआ, जिनकी हिस्सेदारी इस पूरे नुकसान में 62% रही।

भारत के लिए क्या है चेतावनी

भारतीय मार्केट में एमटीएफ बुक FY23 में लगभग ₹25,000 करोड़ से बढ़कर अब ₹1.44 लाख करोड़ से अधिक हो गया है यानी तीन साल में लगभग छह गुना बढ़ोतरी। इस पर सेबी की नजर तो है और सेबी ने एमटीएफ पर एक्सपोजर लिमिट और रिस्क से जुड़े नियम का प्रस्ताव पेश किया है, जिन्होंने हमें कोरिया जैसी बुरी स्थितियों से पहले ही बचा लिया है। हालांकि ध्यान दें कि रेगुलेशन सिर्फ नियम बनाता है, सही फैसला लेने की समझ नहीं देता और वह जिम्मेदारी निवेशकों की खुद की है। यहां ऐसे ही कुछ रिस्क के बारे में बताया जा रहा है, जिन पर ध्यान देना चाहिए-

कम लिक्विडिटी वाले शेयरों के लिए भी लेवरेज: ब्रोकर करीब 1,500 शेयरों पर एमटीएफ की फैसिलिटी दे रहे हैं। फिलहाल इंडस्ट्री के एमटीएफ बुक का एक बड़ा हिस्सा एफएंडओ सेगमेंट से बाहर के ऐसे स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों में है जो लगातार लोअर सर्किट में जा सकते हैं, जिससे अचानक मुश्किल आने पर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचता। कोरिया के निवेशकों के शेयर कम से कम किसी कीमत पर तो बिके थे, लोअर सर्किट पर तो शेयर बिकेगा भी नहीं।

नया सिस्टम: एटीएफ का चलन सिर्फ 3-4 साल में तेजी से बढ़ा है। कोरोना महामारी के बाद अभी यहां कोस्पी जैसी स्थिति आई नहीं है जिसका मतलब है कि ₹1.44 लाख करोड़ के लेवरेज ने असली आंधी का सामना नहीं किया है।

युवाओं की अधिक संख्या: एटीएफ का इस्तेमाल कोरियाई मार्केट की तरह अधिकतर युवा ही कर रहे हैं जिन्होंने अधिकतर सिर्फ चढ़ता हुआ मार्केट ही देखा है।

पांच बातों का रखें ख्याल

लेवरेज लोन है, स्ट्रैटेजी नहीं: शेयर परफॉर्म करे या नहीं, सालाना 10-15% की दर से ब्याज देना पड़ता है। 50% मार्जिन पर खरीदे गए स्टॉक से फंडिंग कॉस्ट निकालने के लिए ही सालाना 5% से ज़्यादा रिटर्न मिलना ज़रूरी है। उधार के पैसे से कोई खराब निवेश नहीं बन जाता, बल्कि और खराब हो जाता है।

कुछ ही स्टॉक्स में न लें लवरेज: दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी गलती केवल लीवरेज लेना नहीं था, बल्कि सिर्फ दो शेयरों में भारी निवेश करना था। अगर आपके भी एमटीएफ वाले अधिकतर निवेश सिर्फ दो-तीन स्टॉक्स में हैं, जिनमें बाकी लोग भी पैसे डाल रहे हैं तो गिरावट आने पर सभी लोग एक साथ बेचने की कोशिश करेंगे और ऐसी स्थिति में नुकसान अधिक तेजी से बढ़ सकता है।

मार्जिन कॉल आ सकती है खराब समय में: अच्छी कंपनी में भी एमटीएफ निवेश से घाटा हो सकता है। इसकी वजह ये है कि मार्जिन कॉल हमेशा सबसे खराब समय में आती है। लोअर सर्किट में ब्रोकर को भी खरीदार नहीं मिलेगा और मार्केट अगर अनुमान से अधिक समय तक नीचे आया और गिरवी रखा पैसा यानी कोलैटरल उतने समय के लिए पर्याप्त न हो तो दिक्कत हो सकती है।

अधिकतम मुनाफा नहीं, बल्कि लंबे समय तक टिके रहने की योजना: हर मार्केट में कभी न कभी 25% से 30% की गिरावट आती ही है। दक्षिण कोरिया में यह गिरावट सिर्फ चार सप्ताह में आ गई। ऐसे में एमटीएफ का इस्तेमाल से पहले खुद से एक प्रश्न पूछे कि क्या अगर अगले महीने मेरा शेयर 30% गिर जाए, तो क्या मैं बिना किसी अन्य निवेश को बेचे इस स्थिति से निकल सकता हूं? अगर इसका जवाब ना में है तो आपका निवेश बहुत बड़ा है।

खुद से जरूर पूछें एक सवाल: अगर आप किसी शेयर को बिना उधार लिए हुए पैसे के साथ लॉन्ग टर्म तक नहीं रख सकते, तो इसे उधार लेकर भी नहीं खरीदना चाहिए क्योंकि लेवरेज सिर्फ उस भरोसे को बढ़ाना चाहिए जो आपके पास पहले से है। यह उस भरोसे की जगह नहीं ले सकता जो आपके पास है ही नहीं।

Market Outlook: मिडकैप और स्मॉलकैप ने तोड़ा दो हफ्ते की गिरावट का सिलसिला, Nifty के लिए ये है सपोर्ट-रेजिस्टेंस

Voda Idea को मिला ₹26.8 करोड़ का नोटिस, अब 3 अगस्त को रहेगी शेयरों पर नजर

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

US Fed ने नहीं बदली ब्याज दरें, क्या होगा इसका भारतीय बाजार पर असर और गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहा है संकेत

Gift Nifty Indicator: गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty के मामूली गिरावट के साथ खुलने की संभावना है। Wall Street में रात भर हुई भारी बिकवाली के बाद GIFT Nifty सुस्त शुरुआत का संकेत दे रहा है। AI से जुड़े खर्च को लेकर बनी चिंताएं और US Federal Reserve के पॉलिसी फैसले के बाद अनिश्चितता ने पॉजिटिव इंस्टीट्यूशनल फ्लो और बुधवार की घरेलू बाजार की जोरदार रैली के असर को कम कर दिया है।

सुबह करीब 8:00 बजे GIFT Nifty 88 अंक या 0.36 फीसदी गिरकर 24,215 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे संकेत मिलता है कि Nifty 50 बुधवार के 24,250.20 के क्लोजिंग लेवल से नीचे खुल सकता है। यह कमजोर संकेत बुधवार को भारतीय शेयरों में जोरदार रिकवरी के बाद आया है। Sensex 888.68 अंक या 1.16 फीसदी बढ़कर 77,654.60 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 264.85 अंक या 1.10 फीसदी बढ़कर 24,250.20 पर बंद हुआ।

US फेड मीटिंग का नतीजा

उम्मीद के मुताबिक, US फेडरल रिज़र्व ने चेयर केविन वॉर्श की अगुवाई में गुरुवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। यह लगातार पांचवीं पॉलिसी मीटिंग थी जिसमें सेंट्रल बैंक ने दरों को स्थिर रखने का फ़ैसला किया, क्योंकि अधिकारी मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव करने से पहले महंगाई के आउटलुक और व्यापक आर्थिक स्थितियों का आकलन कर रहे थे।

यह घोषणा फेडरल रिज़र्व की दो दिन की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) मीटिंग खत्म होने के बाद की गई।फेड ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50%-3.75% पर बनाए रखा। इसने महंगाई, बेरोज़गारी और कुल आर्थिक विकास के अपने अनुमानों को भी जून की पॉलिसी मीटिंग में पेश किए गए अनुमानों के मुकाबले काफ़ी हद तक जस का तस रखा।

एशियाई बाजारों में तेजी

Federal Reserve द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने के बाद गुरुवार को एशियाई शेयरों मेंबढ़त के साथ कारोबार हुआ। वहीं, ग्लोबल टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी बिकवाली के बाद निवेशक AI से जुड़े खर्च के आउटलुक का आकलन करते रहे। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 1 फीसदी से अधिक की बढ़त हुई, जबकि जापान के Nikkei में लगभग 2 फीसदी की तेजी आई। दक्षिण कोरिया के Kospi में हफ्ते की शुरुआत में भारी नुकसान के बाद 4 फीसदी की रिकवरी हुई, हालांकि यह साप्ताहिक आधार पर बड़ी गिरावट की ओर बढ़ रहा था। Nasdaq फ्यूचर्स में 1.2 फीसदी की बढ़त हुई, जबकि यूरोपियन फ्यूचर्स ने हल्की पॉजिटिव शुरुआत का संकेत दिया।

गुरुवार की रिकवरी के बावजूद, भारी AI निवेश पर रिटर्न को लेकर चिंताओं के बीच सेमीकंडक्टर शेयरों में भारी गिरावट के बाद निवेशक सतर्क बने रहे।

बुधवार को US शेयर बाजार में भारी गिरावट के साथ कारोबार खत्म हुआ, क्योंकि Federal Reserve ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया और टेक्नोलॉजी शेयरों में हालिया गिरावट जारी रही। फेड ने ब्याज दरों को 3.50-3.75 प्रतिशत की रेंज में ही बनाए रखा, जो उम्मीदों के मुताबिक था, हालांकि तीन पॉलिसीमेकर्स ने दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के पक्ष में असहमति जताई।

माइक्रोसॉफ्ट और मेटा प्लेटफॉर्म्स के नतीजों से पहले निवेशकों द्वारा AI-से जुड़े शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम करने के कारण डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 2.19 प्रतिशत, S&P 500 1.52 प्रतिशत और नैस्डैक कम्पोजिट 1.74 प्रतिशत गिर गए।

क्रूड में नरमी

पिछले सेशन में तेजी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई, क्योंकि तनाव बढ़ने के बावजूद मध्य पूर्व से टैंकरों का आवागमन जारी रहा। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.42 प्रतिशत गिरकर 89.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.66 प्रतिशत गिरकर 83.90 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। यह गिरावट ईरान संघर्ष के दौरान आई सबसे बड़ी तेजी के बाद हुई है; बुधवार को ब्रेंट में लगभग 8 प्रतिशत और WTI में 6.5 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई थी।

हालांकि तेल की कीमतों में नरमी आई, लेकिन US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए बयानों और क्षेत्र में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण जियोपॉलिटिकल तनाव बना हुआ है।

क्या होगा इसका भारतीय बाजार पर असर

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने के फैसले से निकट भविष्य की एक बड़ी अनिश्चितता खत्म हो गई है, लेकिन पॉलिसीमेकर्स के बीच बंटे हुए वोट से संकेत मिलता है कि भविष्य की पॉलिसी का रास्ता डेटा पर निर्भर करेगा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और मध्य पूर्व में फिर से बढ़ा जियोपॉलिटिकल तनाव भी भारतीय बाजारों के लिए मुख्य जोखिम बने हुए हैं, जबकि FII और DII की खरीदारी से सपोर्ट मिल रहा है।

पोनमुडी ने कहा कि 24,200 के स्तर को फिर से हासिल करने के बाद निफ्टी में सकारात्मक रुख बना हुआ है। 24,300-24,400 का ज़ोन तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है, और इसके ऊपर निर्णायक रूप से जाने पर 24,500-24,600 की ओर बढ़ने का रास्ता खुल सकता है। नीचे की ओर, 24,150-24,000 मुख्य सपोर्ट ज़ोन है, जबकि 24,000 के नीचे जाने पर 23,900-23,800 के स्तर की ओर प्रॉफिट-बुकिंग शुरू हो सकती है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा कमजोर शुरुआत के संकेत, फोकस में NBCC, MTAR Tech, Eicher Motors

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Sell-off in chip stocks : चिप शेयरों में उधार लेकर की गई खरीदारी दक्षिण कोरिया पर पड़ रही भारी, जानिए भारत के लिए है कितना बड़ा खतरा

Sell-off in chip stocks : अमेरिका में चिप शेयरों में बिकवाली दक्षिण कोरिया पर भारी पड़ रही है। कॉस्पी में आज करीब 11% की भारी गिरावट दिख रही है। इस बिकवाली का एक बड़ा कारण कोस्पी में बढ़ती मार्जिन पोजिशन भी है। जब बाजार में बिकवाली बढ़ती है तो मार्जिन ट्रिगर होते हैं और ब्रोकर्स सौदे काट देते हैं। मार्जिन ट्रेडिंग की समस्या सिर्फ कोस्पी की नहीं,पूरी दुनिया में है। अमेरिका,चीन के साथ साथ भारत में भी मार्जिन पोजिशन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। ये भारत और दुनिया भर के बाजारों के लिए कितनी बड़ी चुनौती है,इस पर खास चर्चा के लिए हमारे साथ हैं स्टॉकएज (Stockedge) के को-फाउंडर विवेक बजाज। लेकिन इसके पहले जान लेते हैं कि दुनिया के बड़े बाजारों में क्या है मार्जिन पोजिशन (लेवरेज पोजिशन) की स्थिति।

रिकॉर्ड स्तर पर लेवरेज पोजिशन

अमेरिका में लेवरेज पोजिशन 1.53 लाख करोड़ डॉलर पर है। वहीं, चीन में यह 3 लाख करोड़ यूआन, दक्षिण कोरिया में 39 अरब डॉलर और भारत में 1.38 लाख करोड़ रुपए पर है। भारत में MTF पोजिशन की बात करें तो यह FY23 में 0.25 लाख करोड़ रुपए,FY24 में 0.47 लाख करोड़ रुपए, FY 25 में 0.72 लाख करोड़ रुपए। सितंबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपए, दिसंबर 2025 में 1.16 लाख करोड़ रुपए और जुलाई 2026 में 1.38 लाख करोड़ रुपए थी।

मार्केट कैप में MTF पोजिशन का हिस्सा

मार्केट कैप में MTF पोजिशन के हिस्से की बात करें तो चीन में यह कुल मार्केट कैप का 2.4%, अमेरिका में कुल मार्केट कैप का 2%, दक्षिण कोरिया में कुल मार्केट कैप का 0.8% और भारत में कुल मार्केट कैप का 0.34% है।

कोस्पी की गिरावट का लेवरेज कनेक्शन

27 मई को कोरिया में सिंगल स्टॉक लेवरेज ETF लॉन्च किया गया। इस ETF में सिर्फ सैमसंग और SK Hynix शामिल हैं। AI चिप रैली में रिटेल ने अंधाधुंध पैसा लगाया। इसमें कुछ ही हफ्तों में 9.48 अरब डॉलर की खरीदारी हुई। इस ETF के 92 फीसदी होल्डर रिटेल निवेशक हैं। मई के अंत तक रिटेल मार्जिन लोन 39 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

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कोस्पी: मार्जिन कॉल और फोर्स सेलिंग

कोस्पी में सैमसंग और SK Hynix की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा है। सैमसंग और SK Hynix में सबसे ज्यादा लेवरेज पोजिशन है। चिप शेयरों में बिकवाली से सैमसंग और SK Hynix में तेज बिकवाली आई। एक महीने में सैमसंग 38% और SK Hynix 42% टूट गया। तेज बिकवाली से ब्रोकर्स ने मार्जिन पोजिशन काटी।

मार्जिन ट्रेडिंग भारत के लिए चुनौती?

भारत में भी मार्जिन ट्रेडिंग या MTF तेजी से बढ़ रही है। 27 जुलाई को MTF 1.38 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। हालांकि कुल मार्केट कैप में MTF का हिस्सा 0.34% ही है।

एक्सपर्ट की राय

स्टॉकएज (Stockedge) के को-फाउंडर विवेक बजाज ने कहा कि सालों से मार्जिन ट्रेडिंग चलती आ रही है। यह अमेरिका की उपज है। अमेरिकी लीवरेज पसंद करते है। वे हर तरह के इंस्ट्रूमेंट में लीवरेज क्रिएट करते हैं। वहां पर भी यह काफी बड़ा होता जा रहा है। टिपिकली जब भी किसी एसेट में बबल बनता है तो वह पूरे बाजार में बबल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए जैसे 2008 में रियल एस्टेट बबल बना उसमें रियल एस्टेट लीवरेज बाजार में बबल बनने का कारण बना। जब बबल फटता है तो जहां भी लीवरेज होता है वहां असर पड़ता है।

हम सभी जानते हैं कि इस समय दुनिया में एआई ड्रिवेन बबल बन चुका है। लेकिन ये कब फटेगा हमें नहीं पता है। इस नजरिए से कोस्पी इस समय बहुत बड़ा केस स्टडी बन गया है। कोरियन मार्केट अपने हाई से 33 फीसदी टूट चुका है। लेकिन लीवरेज बबल फटने पर इसमें और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

विवेक बजाज ने आगे कहा कि भारत में मार्जिन ट्रेडिंग या MTF 2000 शेयरों में हैं। वहीं, कोरिया में सिर्फ 20 शेयरों में भारत से कई गुना बड़ा लीवरेज्ड पोजीशन है। भारत में फ्री फ्लोट बेसिस पर MTF पोजीशन मार्केट कैप का 0.74 फीसदी है। ऐसे में भारत में मार्जिन ट्रेंडिंग का बड़ा रिस्क नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि कोरिया का बाजार एक ट्रिगर का काम करेगा। अगर वहां,लीवरेज्ड शेयरों में गिरावट आती है तो इसका असर भारत सहित पूरे ग्लोबल मार्केट पर देखने को मिलेगा। ऐसे में जहां भी लीवरेज ज्यादा होगा वहां दबाव दिखेगा।

MTF क्या है?

मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी ‘आज खरीदें,बाद में भुगतान करें’के मॉडल की तरह काम करता है। इसमें निवेशकों को ट्रेडिंग के लिए जरूरी पैसों का कुछ हिस्सा ही चुकाना पड़ता है और बाकी पैसा ब्रोकर लोन की तरह देता है। जैसे कि मान लें कि 100 रुपये के भाव वाले 1 हजार शेयरों की ट्रेडिंग करनी है तो 1 लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी। अब या तो आप पूरे एक लाख रुपये अपने पास से लगाएं या 30 फीसदी यानी 30 हजार रुपये खुद का लगाएं और बाकी 70 फीसदी यानी 70 हजार रुपये ब्रोकर से लोन के रूप में मिल जाएगा।

मार्जिन ट्रेडिंग का फायदा ट्रेडर्स और ब्रोकर्स दोनों को मिलता है। ट्रेडर्स ज्यादा पैसा लगाने के लिए लोन ले सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमाने की कोशिश कर सकते हैं, वहीं ब्रोकर्स दिए गए लोन पर ब्याज कमाते हैं।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Kospi Crashed: दो स्टॉक्स ने 10% तोड़ दिया कोस्पी, 20 मिनट थम गई ट्रे़डिंग, तीन वजहों से दक्षिण कोरियाई मार्केट में हाहाकार

Kospi Crashed: चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में वैश्विक बिकवाली ने दक्षिण कोरियाई बाजार में कोहराम मचा दिया। टेक स्टॉक्स पर दबाव में दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी (Kospi) इंडेक्स 724.37 प्वाइंट्स यानी 10.73% टूटकर 6,031.38 पर आ गया जिसके कारण 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग भी थम गई। निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली ने सिर्फ दक्षिण कोरियाई बाजार को ही नहीं बल्कि जापान की चिप हैवी निक्केई 225 और ताइवान के Taiex को भी 4% से अधिक तोड़ दिया।

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वैल्यूएशन से जुड़ी चिंताएं

एआई पर खर्च लगातार बना रहेगा या नहीं, इसे लेकर चिंता ने वैश्विक चिप कंपनियों के शेयरों पर दबाव डाला और बिकवाली की आंधी चलने लगी। दिग्गज चिप कंपनी एनवीडिया कॉर्प (Nvidia Corp) के $75 हजार करोड़ के एआई इंफ्रा डील के बाद भी शेयरों में गिरावट ने चिंता बढ़ाई जिसने बिकवाली तेज की। यूनियन बैंकेयर प्रिवी के एमडी Vey-Sern Ling का कहना है कि एआई से जुड़े शेयरों को लेकर लालच अब डर में बदल गया है और किसी भी खबर के असर को देखने की बजाय उसे शेयर बेचने के लिए इस्तेमाल कर रहे।

चीन से तगड़ा कॉम्पटीशन

निवेशक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या एआई निवेश की जबरदस्त लहर और कंपनियों की ऊंची वैल्यूएशन लंबे समय तक बनी रह सकती है, खासकर इसलिए क्योंकि चीन की कंपनियां उम्मीद से अधिक रफ्तार से टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। एएसएमएल होल्डिंग एनवी के शेयरों में जून महीने की शुरुआत के बाद से सबसे बड़ी गिरावट आई। इसमें यह गिरावट एक रिपोर्ट के बाद आई जिसमें ये है कि चीन की सरकारी कंपनी ने कुछ खास चिप बनाने वाली मशीनों का बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू कर दिया है, जिससे डच कंपनी की बिक्री पर असर पड़ सकता है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक के मुताबिक शंघाई की एक कंपनी ने इमर्शन डीप अल्ट्रावायलेट (DUV) लिथोग्राफी टूल्स बनाना शुरू कर दिया है। इसने दुनिया भर की चिप कंपनियों के शेयरों को तोड़ दिया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में चैंगजिन मेमोरी टेक्नोलॉजीज (ChangXin Memory Technologies- CXMT) की मार्केट में धांसू एंट् ने मार्केट सेंटीमेंट को और कमजोर किया है।

बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली

दक्षिण कोरिया की बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में बिकवाली दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क इंडेक्स को तोड़ दिया। मेमोरी-चिप बनाने वाली कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) के शेयर धड़ाम हो गए। इसमें से एसके हीनिक्स के शेयरों में न्यूयॉर्क में इसके ADR (अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स) के टूटकर शुरुआती यूएस ऑफरिंग प्राइस से नीचे रिकॉर्ड निचले स्तर पर आने के चलते 10% की गिरावट आई। वहीं सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर 9.15% फिसल गए। इन दोनों की कोस्पी में हिस्सेदारी आधे से अधिक है, जिससे इस सेक्टर की बिकवाली की आंच पूरे मार्केट पर और भी अधिक दिखा।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gift Nifty Indicator: ग्लोबल बाजार में मचा कोहराम क्या दिखाएगा भारतीय बाजार पर अपना असर, जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहे है आज संकेत

Gift Nifty Indicator: ग्लोबल मार्केट के कमजोर संकेतों को देखते हुए, मंगलवार, 28 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 के लाल निशान में खुलने की संभावना है। सुबह 8.35 बजे गिफ्ट निफ्टी 23,970.50 के स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा है जो निफ्टी फ्यूचर्स की पिछली क्लोजिंग से 71.50 अंक नीचे है।

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने लगातार पांच दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा और बेंचमार्क निफ्टी 50 इंडेक्स 23,900 के स्तर के ऊपर बंद हुआ। सेंसेक्स 776.01 अंक या 1.02% की बढ़त के साथ 76,835.78 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 228.50 अंक या 0.96% की बढ़त के साथ 23,995.95 पर बंद हुआ।

क्रूड में नरमी

मंगलवार, 28 जुलाई को कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट जारी रही। यह गिरावट तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान मध्य पूर्व के संघर्ष को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं।

पिछले सत्र में 7% से ज़्यादा गिरने के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $82 प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड में तीन महीने से ज़्यादा समय में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह $88 प्रति बैरल के करीब बंद हुआ।

एशियाई बाजारों में गिरावट

एशियाई बाजारों में गिरावट देखने को मिली। US में चिप कंपनियों में बिकवाली के चलते कोरिया का बाजार 8 फीसदी के लोअर सर्किट पर फिसल गया। निक्केई 4.40 फीसदी टूटा है। अमेरिकी बाजार भी ऊपरी स्तरों से फिसले है। बेंचमार्क कोस्पी (Kospi) 8.70 फीसदी गिरा। जबकि स्मॉल-कैप कोस्डैक (Kosdaq) में 3.63% की गिरावट आई। जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 4.21% गिरा और व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स में 0.63% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 शुरुआती कारोबार में 0.38% नीचे आ गया।

निफ्टी- बैंक निफ्टी के लिए कौन से लेवल हैं अहम

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि शुक्रवार को कमजोर ग्लोबल संकेतों की वजह से आई भारी गिरावट के बाद सोमवार को निफ्टी 50 में जोरदार रिकवरी हुई और यह 228 अंक ऊपर बंद हुआ। उन्होंने बताया कि इंडेक्स ने डेली चार्ट पर गैप-अप ओपनिंग के साथ एक लंबी बुलिश कैंडल बनाई, और ओपनिंग गैप भरा नहीं गया—जो एक अच्छा टेक्निकल संकेत है।

शेट्टी के अनुसार, 23,600 के सपोर्ट ज़ोन से वापसी (जो 15 जून के अपसाइड गैप और एक ऊपर की ओर बढ़ती ट्रेंडलाइन से मेल खाता है)ने इंडेक्स को तुरंत 24,000–24,100 के रेजिस्टेंस लेवल को तोड़ने की स्थिति में ला दिया है। अगले कुछ सेशन में 24,100 के ऊपर लगातार बने रहने से 24,500 की ओर बढ़ने का रास्ता खुल सकता है, जबकि 23,800 तुरंत सपोर्ट लेवल बना हुआ है।

SBI सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी एक तय दायरे में ट्रेड कर रहा है, जिससे पता चलता है कि इसमें कोई मजबूत दिशात्मक मोमेंटम नहीं है। उन्होंने बताया कि एक अहम रेजिस्टेंस ज़ोन के पास ‘डोजी’ (Doji) कैंडलस्टिक का बनना बुल्स और बेयर्स के बीच चल रही खींचतान को दिखाता है।

शाह के अनुसार, 57,500–57,600 का ज़ोन तुरंत रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। 57,600 के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट से नई खरीदारी शुरू हो सकती है और इंडेक्स के जल्द ही 58,200 के लेवल तक पहुंचने का रास्ता बन सकता है।

नीचे की तरफ, शाह को उम्मीद है कि 56,700–56,600 का 100-दिन का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) ज़ोन मजबूत सपोर्ट देगा। इस दायरे के ऊपर बने रहने से व्यापक टेक्निकल स्ट्रक्चर बरकरार रहेगा, जबकि इसके टूटने से फिर से बिकवाली का दबाव बन सकता है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Global Market Today: ग्लोबल बाजार में कोहराम, चिप शेयरों में बिकवाली से कोस्पी 8% टूटा, निक्केई 4% से ज्यादा लुढ़का

Global Market Today: एशियाई बाजारों में 28 जुलाई को गिरावट देखने को मिली। US में चिप कंपनियों में बिकवाली के चलते कोरिया का बाजार 8 फीसदी के लोअर सर्किट पर फिसल गया। निक्केई 4.40 फीसदी टूटा है। अमेरिकी बाजार भी ऊपरी स्तरों से फिसले है। बेंचमार्क कोस्पी (Kospi) 8.70 फीसदी गिरा। जबकि स्मॉल-कैप कोस्डैक (Kosdaq) में 3.63% की गिरावट आई। जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 4.21% गिरा और व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स में 0.63% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 शुरुआती कारोबार में 0.38% नीचे आ गया।

वॉल स्ट्रीट

सोमवार को वॉल स्ट्रीट मिला-जुला बंद हुआ क्योंकि निवेशक इस हफ़्ते के आखिर में बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के तिमाही नतीजों से पहले सतर्क रहे। बाज़ार के प्रतिभागियों ने तेल की बढ़ी हुई कीमतों पर भी कड़ी नज़र रखी, क्योंकि चिंता थी कि लगातार महंगाई का दबाव फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों पर सख्त रुख बनाए रखने के लिए मजबूर कर सकता है।

S&P 500 मामूली रूप से 0.02% बढ़कर 7,413.18 पर बंद हुआ, जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.51% बढ़कर 52,210.08 पर बंद हुआ। वहीं, नैस्डैक 0.18% गिरकर 24,932.08 पर बंद हुआ।

टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न, मेटा और एप्पल इस हफ़्ते अपने तिमाही नतीजे घोषित करने वाले हैं। निवेशक यह भी आकलन कर रहे हैं कि क्या पिछले कुछ वर्षों में बाज़ारों को आगे बढ़ाने वाली AI-संचालित तेज़ी अब अपनी रफ़्तार खो रही है।

अमेरिकी चिप शेयरों में बिकवाली

कई नकारात्मक घटनाक्रमों के बीच सोमवार को चिप शेयरों में लगातार तीसरे सत्र में गिरावट जारी रही। Nvidia और AMD के शेयरों में 5-5% की गिरावट आई, जबकि Seagate के शेयर कंपनी की तिमाही नतीजों की घोषणा से पहले 4% गिर गए।

इस बीच, SK Hynix के US-लिस्टेड शेयरों (ADRs) में रातों-रात 7.5% की गिरावट आई और वे अपने $149 के IPO प्राइस से नीचे बंद हुए। Micron और Western Digital के शेयर भी क्रमशः 2% और 4% गिरकर बंद हुए।

US-ईरान युद्ध

Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, Axios की एक खबर में बताया गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीति को एक और मौका देने के लिए ईरान पर सैन्य हमले टालने का फैसला किया है। इस कदम के बावजूद, यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्षों के बीच कोई ठोस बातचीत हुई है या नहीं।

साथ ही, खबर है कि ईरान और ओमान के अधिकारी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से शिपिंग बहाल करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। यह फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्ग है। सामान्य समय में, इस जलमार्ग से दुनिया की दैनिक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।

क्रूड में नरमी

मंगलवार, 28 जुलाई को कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट जारी रही। यह गिरावट तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान मध्य पूर्व के संघर्ष को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं।

पिछले सत्र में 7% से ज़्यादा गिरने के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $82 प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड में तीन महीने से ज़्यादा समय में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह $88 प्रति बैरल के करीब बंद हुआ।

आज सोने की कीमत

सोने की कीमतें ऊंची बनी रहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद कि वाशिंगटन और ईरान संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत कर रहे हैं, युद्ध से महंगाई बढ़ने और ब्याज दरें बढ़ने की आशंकाएं कम हुईं।

सोमवार को 0.6% की बढ़त के बाद, शुरुआती कारोबार में यह कीमती धातु $4,075 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी। जून के आखिर से सोना $4,000 प्रति औंस के स्तर के करीब बना हुआ है। इसे ‘बार्गेन बाइंग’ (कम कीमत पर खरीदारी) का सहारा मिला है, जिससे यह ट्रेडर्स द्वारा बारीकी से देखे जाने वाले अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बना हुआ है।

हालांकि, पांच महीने पहले संघर्ष शुरू होने के बाद से सोने की कीमतों में 20% से अधिक की गिरावट आई है। इससे उस कई साल की तेजी का अंत हो गया है, जिसने जनवरी के आखिर में कीमतों को लगभग $5,600 प्रति औंस के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा दिया था।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।