पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इमरान समर्थकों का लॉन्ग मार्च अब पेशावर से महज 30 किलोमीटर दूर है। मार्च को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को इमरान समर्थकों को बातचीत का न्योता दिया। शहबाज का यह बयान इसलिए अहम है, क्योंकि सोमवार को ही उनकी सरकार ने इमरान समर्थकों से बातचीत करने से इनकार किया था। हालांकि, इमरान समर्थकों ने शहबाज के बातचीत के प्रस्ताव को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि वे इमरान खान की रिहाई की मांग से पीछे नहीं हटेंगे। इमरान समर्थकों ने 4 अक्टूबर से खैबर पखतूनख्वा से मार्च शुरू किया है। ये लोग करीब 180 किमी की दूरी तय कर इस्लामाबाद पहुंचेंगे। मार्च की तस्वीरें… शहबाज बोले- आर्थिक सुधार को नुकसान पहुंच सकता है शहबाज शरीफ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि लंबे समय तक चलने वाला प्रदर्शन पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पिछले ढाई साल से देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इन कोशिशों को रोकने की कोई भी कोशिश राज्य से दुश्मनी के बराबर होगी। शहबाज ने कहा, हम ऐसा नहीं होने देंगे। कानून अपना काम करेगा। लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है और हम हर हाल में इसे सुनिश्चित करेंगे। मार्च और बढ़ा तो शहबाज की कुर्सी खतरे में आएगी पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग में रहे अविनाश मोहनानी ने कहा कि इमरान समर्थकों का लॉन्ग मार्च खैबर से पंजाब में पहुंचते ही शहबाज सरकार पर दबाव बढ़ाएगा। व्यापक समर्थन मिला तो आर्मी चीफ मुनीर के लिए भी इसे रोकना मुश्किल होगा। इसी वजह से मार्च को रोकने की कोशिश तेज है। इमरान की लोकप्रियता अब भी कायम है और उनकी रिहाई की चाबी मुनीर के पास है। वहीं, सीनियर फैलो और राजनीतिक विश्लेषक सुशांत सरीन के मुताबिक, आसिम मुनीर लॉन्ग मार्च के बहाने शहबाज शरीफ को घेर रहे हैं। सरीन के मुताबिक, मुनीर ने पहले मार्च के रास्ते में खैबर में फ्रंटियर फोर्स तैनात की। इसके बाद मंगलवार को शहबाज से इमरान समर्थकों को बातचीत के लिए बुलाने को कहा। उनका कहना है कि मुनीर शहबाज को कमजोर प्रधानमंत्री के तौर पर पेश करना चाहते हैं, जिससे लोगों का सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़े। पाकिस्तान की राजनीति के इतिहास को देखते हुए शहबाज का सत्ता से जाना तय माना जा रहा है। इमरान 2023 से जेल में बंद, पत्नी-बहनें भी कैद हैं 73 साल के इमरान खान 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। उन पर 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। तीन मामलों में सजा सुनाई गई है। अल कादिर ट्रस्ट केस में 14 साल, दस्तावेज लीक में 10 साल और तोशाखाना केस में 3 साल की सजा है। तोशाखाना केस में इमरान की पत्नी बुशरा भी जेल में है। सितंबर में इमरान की बहन अलीमा, उजमा और नूरीन को भी एहतियातन हिरासत में लिया गया है। 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इमरान को मेडिकल जांच और इलाज के लिए इस्लामाबाद के निजी अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश दिया था। 20 अगस्त की रात उन्हें निजी अस्पताल की बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया। जांच के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया। मार्च इस्लामाबाद से पहले रोकने की तैयारी खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने घोषणा की कि मार्च जारी रहेगा। टैंक, डेरा इस्माइल खान, दक्षिण वजीरिस्तान, उत्तर वजीरिस्तान, बन्नू और लक्की मारवत के समर्थक गांधी चौक से मार्च में शामिल हुए। प्रधानमंत्री शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने राजधानी की ओर जाने वाली सड़कों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए हैं। सरकार से दो दौर की बातचीत, पर सहमति नहीं बनी सरकार और PTI के बीच शुक्रवार और शनिवार को दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन सहमति नहीं बनी। PTI इमरान से तत्काल मुलाकात और उन्हें ऐसे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की, जहां उनके निजी डॉक्टर जांच और इलाज कर सकें। सरकार की ओर से प्रदर्शन रद्द करने की शर्त रखी गई थी। ————————— यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान का ड्रोन हमलों से बचने के लिए सस्ता तरीका:सेना-पुलिस के ठिकानों पर मछली पकड़ने वाला जाल लगा रहे, दावा- इसमें ड्रोन फंसकर फट जाएंगे पाकिस्तान में ड्रोन हमलों से बचने के लिए पुलिस और सेना अब मछली पकड़ने वाले जाल का इस्तेमाल कर रही है। अल जजीरा के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के संवेदनशील इलाकों में पुलिस चौकियों और सुरक्षा ठिकानों के ऊपर कई मीटर की ऊंचाई पर ये जाल लगाए जा रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
NEET PG 2026: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को NEET PG 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ कम करने के फैसले के बारे में रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने बदले हुए क्वालिफाइंग क्राइटेरिया पर अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। साथ ही, शीर्ष अदालत ने अभी किसी तरह का अंतरिम आदेश देने से भी इनकार कर दिया। नीट पीजी 2025-26 कटऑफ मामले की सुनवाई जस्टिस पी नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ कर रही है। यह मामला हरिशरण देवगन एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य से जुड़ा है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए एडवोकेट सत्याम सिंह राजपूत ने नीट पीजी प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट पर समयबद्ध निर्देश देने की मांग की। कोर्ट को बताया गया कि नीट पीजी का रिजल्ट पहले ही जारी हो चुका है और नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने वाला है। ऐसे में कमेटी की रिपोर्ट में और देरी होने से स्थिति जटिल हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए प्रतिवादी पक्ष को दो सप्ताह के भीतर कमेटी की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले को अब दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
याचिका में परसेंटाइल कम करने को दी गई है चुनौती
याचिका में नीट पीजी काउंसलिंग के लिए क्वालिफाइंग परसेंटाइल कम किए जाने को चुनौती दी गई है। याचिका में खास तौर पर आरक्षित वर्ग के कटऑफ को घटाकर आमतौर पर “−40” स्कोर थ्रेशोल्ड के रूप में संदर्भित स्तर तक लाए जाने पर सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि क्वालिफाइंग मानकों में इस तरह की कमी से मेरिट प्रभावित हो सकती है और पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा के मानकों तथा मरीजों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
नीट पीजी 2025 कट-ऑफ कम हुआ: बदले हुए मार्क्स देखें
नीट पीजी 2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ काउंसलिंग के तीसरे राउंड से पहले काफी कम कर दिया गया था। एनबीईएमएस के नोटिफिकेशन के अनुसार, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशों के बाद बदले हुए कट-ऑफ शुरू किए गए थे।
कैटेगरी मूल कट-ऑफ संशोधित कट-ऑफ
जनरल/EWS 276 मार्क्स 103 मार्क्स
जनरल PwBD 255 मार्क्स 90 मार्क्स
SC/ST/OBC 235 मार्क्स -40 मार्क्स
सुप्रीम कोर्ट ने NBEMS से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश का मतलब है कि एनबीईएमएस को नीट पीजी 2025 क्वालिफाइंग कटऑफ को कम करने का आधार बताना होगा। शीर्ष अदालत में दायर याचिका में उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसने बहुत कम या नकारात्मक स्कोर वाले उम्मीदवारों को पोस्टग्रेजुएट मेडिकल काउंसलिंग के लिए योग्य होने की इजाजत दी थी।
Abhijeet Dipke CJP Delhi Protest: देश की राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को बड़ा आंदोलन होने वाला है। इस प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले राजनीतिक हलचलों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
दीपके का दावा है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को लगातार परेशान कर रही है और उन्हें कानूनी नोटिस जारी कर रही है।
‘1500 रुपये की टिकट से क्या दिक्कत?’
अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महाराष्ट्र की चंद्रपुर पुलिस की कार्रवाई पर तीखा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा कहा है कि महाराष्ट्र पुलिस देश की सबसे बेहतरीन पुलिस फोर्स है और दिल्ली पुलिस को उनसे सीखना चाहिए। लेकिन यह बेहद दुखद है कि चंद्रपुर पुलिस ने सीजेपी कार्यकर्ताओं को नोटिस थमाकर जंतर-मंतर आंदोलन में हिस्सा न लेने की हिदायत दी है। पुलिस कार्यकर्ताओं से यह भी पूछ रही है कि उनके दिल्ली सफर का खर्च कौन उठा रहा है और पैसे कहाँ से आए?’
दीपके ने सवाल उठाया कि क्या अब देश का कोई आम नागरिक अपनी जेब से 1,000 या 1,500 रुपये का रेल टिकट खरीदकर राजधानी नहीं जा सकता? उन्होंने कहा कि यात्रा के मामूली खर्चों पर सवाल उठाना और कार्यकर्ताओं को रोकना खुलेआम तानाशाही है।
‘क्या पुलिस ने पहले ही हिंसा का प्लान बना रखा है?’
पुलिस नोटिस में आंदोलन के संभावित रूप से ‘हिंसक’ होने की बात लिखे जाने पर सीजेपी प्रमुख ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘पुलिस को इतने दिन पहले ही कैसे पता चल गया कि आंदोलन हिंसक होने वाला है? क्या पुलिस ने पहले से ही कुछ योजना बना रखी है?’
साथ ही, पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर पोस्ट न करने के निर्देशों पर भी दीपके ने एतराज जताया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों पर चलती है, तो पुलिस इसे हिंसक कैसे मान सकती है?
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की वजह क्या है?
गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी की मुख्य मांगें ये हैं:
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) का इस्तीफा: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का विरोध: केंद्र सरकार की इस योजना पर निशाना साधते हुए दीपके ने आरोप लगाया कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ केवल एक नारा है और इसके पीछे की असली मंशा ‘वन नेशन, वन पॉलिटिकल पार्टी’ (एक देश, एक ही राजनीतिक दल) लागू करना है।
पुलिसिया कार्रवाई और नोटिस के बावजूद सीजेपी का कहना है कि वे दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के फैसले पर कायम हैं।
DA Hike July: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में जल्द ही इजाफा होनी वाला है। जुलाई 2026 की DA संशोधन दर में 3% की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे वर्तमान DA दर बेसिक पे के 60% से बढ़कर 63% हो जाएगी।
यह नया संशोधन 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी माना जाएगा। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इसकी औपचारिक घोषणा और कैबिनेट की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। आज मंगलवार, 6 अक्टूबर को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक भी होने वाली है, वैसे इस बैठक में DA वृद्धि का प्रस्ताव शामिल होगा या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
3% DA Hike की गणित
7वें वेतन आयोग के ढांचे के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के लिए DA संशोधन की गणना औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर की जाती है। जनवरी से जून 2026 तक के CPI-IW आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 से DA दर लगभग 63% बनती है। जून 2026 में CPI-IW सूचकांक 151.9 दर्ज किया गया था, जिसने जुलाई DA गणना के लिए आवश्यक 12 महीनों के चक्र को पूरा कर दिया।
गणना के अनुसार DA लगभग 63.75% बनता है, लेकिन नियमानुसार देय दर राउंड-ऑफ करके 63% रहने की संभावना है। फिलहाल कर्मचारियों को 60% की दर से DA मिल रहा है (जो जनवरी 2026 संशोधन के बाद तय हुआ था)। ऐसे में 3% की बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
3% DA Hike से कितनी बढ़ेगी आपकी मंथली सैलरी?
कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि DA की गणना केवल बेसिक पे पर होती है, न कि कुल टेक-होम सैलरी पर।
नीचे दी गई तालिका से समझें कि बेसिक पे के हिसाब से आपकी सैलरी में कितना इजाफा होगा:

उदाहरण के लिए जिस केंद्रीय कर्मचारी का बेसिक पे ₹50,000 है, उसके वेतन के DA घटक में हर महीने ₹1,500 की बढ़ोतरी होगी। हालांकि, इन-हैंड सैलरी में वास्तविक बढ़ोतरी अन्य भत्तों और कटौतियों (जैसे Provident Fund, Tax आदि) के कारण थोड़ी अलग हो सकती है।
क्या मिलेगा जुलाई 2026 से एरियर?
सरकार चाहे जब भी इस DA Hike का ऐलान करे, यह संशोधन 1 जुलाई 2026 की प्रभाव तिथि से लागू होगा। अगर सरकार की ओर से मंजूरी में देरी होती है और भुगतान अक्टूबर या नवंबर के वेतन में किया जाता है, तो कर्मचारियों को जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने का बकाया एकमुश्त दिया जाएगा। इसका मतलब है कि देरी होने पर कर्मचारियों को उस महीने के बढ़े हुए DA के साथ 3 महीने का एरियर भी मिलेगा।
जनवरी 2027 में होगा अगला DA संशोधन
श्रम ब्यूरो के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में CPI-IW सूचकांक 153.2 और अगस्त 2026 में 154.4 पर पहुंच गया है। हालांकि, ये नए आंकड़े जुलाई 2026 के DA को प्रभावित नहीं करेंगे, बल्कि जनवरी 2027 में होने वाले अगले DA संशोधन का आधार तय करेंगे।
फिलहाल, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें सरकार के आधिकारिक नोटिफिकेशन पर टिकी हैं। जब तक वित्त मंत्रालय या कैबिनेट से आधिकारिक मुहर नहीं लग जाती, तब तक इसे संभावित गणना ही माना जाना चाहिए।
नई दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय, गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस जस्टिस सुनीता अग्रवाल और तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में जज के तौर पर नियुक्त किया गया है। इस संबंध में सोमवार को केंद्र सरकार ने आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया। यह अधिसूचना न्याय विभाग की तरफ से जारी की गई थी।
राष्ट्रपति डॉ द्रौपदी मुर्मू ने भारत के संविधान के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ये नियुक्तियां की हैं। इस कदम से शीर्ष अदालत और मजबूत होगा, जिसकी मंजूर संख्या 38 है। इनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा 28 सितंबर को हुई मीटिंग में पदोन्नति की सिफारिश के कुछ दिनों बाद हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के प्रमुख भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत हैं। उन्होंने कॉलेजियम की बैठक में तीनों की पदोन्नति की सिफारिश की थी।
अभी सुप्रीम कोर्ट में 34 जजों की वर्किंग स्ट्रेंथ है, नए जजों के शपथ लेने के बाद इन नियुक्तियों से इसकी प्रभावी स्ट्रेंथ 37 हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया समेत जजों की मंजूरी वाली संख्या 38 है। सुप्रीम कोर्ट अमेंडमेंट एक्ट, 2026 के बाद हाल ही में मंजूरी वाली संख्या 34 से बढ़ाई गई थी।
नए नियुक्त जजों के बारे में
जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय : जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय जनवरी 2025 से दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे हैं। इससे पहले वे बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं, और जुलाई 2023 में उन्होंने अपना पद संभाला था। जस्टिस उपाध्याय को 2011 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रमोट किया गया था और वे अगस्त 2013 में परमानेंट जज बने थे।
जस्टिस अपरेश कुमार सिंह : जस्टिस अपरेश कुमार सिंह झारखंड, त्रिपुरा और तेलंगाना से बहुत ज्यादा न्यायिक अनुभव लेकर आए हैं। उन्हें जनवरी 2012 में झारखंड हाई कोर्ट का जज प्रमोट किया गया था और जनवरी 2014 में उन्हें परमानेंट जज के तौर पर कन्फर्म किया गया था।
जस्टिस सुनीता अग्रवाल : सुनीता अग्रवाल सुप्रीम कोर्ट में काम करने वाली तीसरी महिला जज होंगी। उन्हें 2011 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में पदोन्नत किया गया था और 2013 में वह परमानेंट जज बन गईं। उन्होंने जुलाई 2023 में गुजरात हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली। जस्टिस अग्रवाल ने बेंच में आने से पहले सिविल साइड में प्रैक्टिस की और 1990 में एडवोकेट के तौर पर एनरोल हुईं।

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर कोई भी एकतरफा अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।
न्यायालय ने साफ किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े अहम फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से एकतरफा लिये जाने के आरोपों पर वह पहले चुनाव आयोग और अन्य प्रतिवादियों का पक्ष सुनेगा। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ सुखबीर सिंह संधू एवं डॉ विवेक जोशी, उपचुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और महानिदेशक (आईटी) सीमा खन्ना को नोटिस जारी किये।
पीठ में मुख्य न्यायाधीश के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना भी शामिल हैं। यह याचिका ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट के बाद दाखिल की गयी है, जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों के 14 बार आपत्तियों के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ने अहम फैसले लिए। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मताधिकार की रक्षा के लिए अंतरिम कदम उठाने को जरूरी बताते हुए श्री ज्ञानेश कुमार को तुरंत निलंबित करने की मांग की।
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उन्होंने सीईसी अधिनियम का हवाला दिया, जिसके तहत चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति से या फिर बहुमत के आधार पर होने चाहिए। पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि वह पहले प्रतिवादियों की राय पर विचार करेगी और यह जांचेगी कि कानून का कोई उल्लंघन हुआ है या नहीं । मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर कानून का उल्लंघन हुआ पाया गया तो संबंधित फैसलों को रद्द किया जा सकता है।
न्यायालय ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिया है। इसके अलावा, वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल एक अन्य याचिका पर भी नोटिस जारी किया गया है, जिसमें कथित एकतरफा फैसलों को रद्द करने और एसआईआर प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गयी है।
Pic Credit : UNI
8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग की बैठकों की श्रृंखला में अगला सबसे बड़ा पड़ाव बेंगलुरु है। आयोग की टीम 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु के दो दिवसीय दौरे पर रहेगी। बैठक में भाग लेने और अपनी मांगें रखने के लिए कर्मचारी संघों, एसोसिएशनों और पेंशनभोगी संगठनों को अधिकारिक पोर्टल के माध्यम से 18 सितंबर तक आवेदन करने का समय दिया गया था। आयोग इस बैठक में प्रतिनिधिमंडलों और हितधारकों के साथ आमने-सामने की विस्तृत चर्चा करने जा रहा है।
किन-किन बड़ी बातों पर होगी चर्चा?
बेंगलुरु बैठक में केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स, रेलवे, रक्षा प्रतिष्ठानों, आयकर और अन्य केंद्रीय विभागों के क्षेत्रीय प्रतिनिधि शामिल होंगे। चर्चा का मुख्य फोकस इन प्रमुख बिंदुओं पर रहेगा:
वेतन और फिटमेंट फैक्टर: नए वेतनमान के तहत बेसिक पे का निर्धारण करने वाले फिटमेंट फैक्टर पर अंतिम सहमति बनाना।
पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स: पेंशनभोगियों की पेंशन संशोधन, कम्यूटेशन अवधि घटाने और फैमिली पेंशन के नियमों को आसान बनाने पर मंथन।
भत्ते: बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते और महंगे शहरों के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल सुविधाओं में बढ़ोतरी पर चर्चा।
वार्षिक वेतन वृद्धि: मौजूदा 3% सालाना वेतन वृद्धि दर की समीक्षा और इसे बढ़ाने की मांग।
कार्य परिस्थितियां व पदोन्नति: कैडर पुनर्गठन और समयबद्ध पदोन्नति से जुड़े स्थानीय मुद्दे।
कर्मचारी यूनियंस की मुख्य मांगें
कर्मचारी यूनियनों और नेशनल काउंसिल-जेसीएम (NC-JCM) की ओर से 8वें वेतन आयोग के समक्ष रखी जा रही प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
1. न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹69,000 करना: कर्मचारी संघों की मांग है कि न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा ₹18,000 से बढ़ाकर ₹69,000 प्रति माह किया जाए।
2. 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग: बेसिक पे के रिवीजन के लिए 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
3. 5-यूनिट फैमिली फॉर्मूला: न्यूनतम वेतन तय करने के लिए कर्मचारी और परिवार के साथ आश्रित माता-पिता को भी शामिल करते हुए ‘5-यूनिट फॉर्मूला’ लागू करने की मांग।
4. वार्षिक इंक्रीमेंट 6% हो: सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग की जा रही है।
5. कम्यूटेड पेंशन रीस्टोरेशन: कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि को 15 साल से घटाकर 11 साल करने का प्रस्ताव।
ये सभी आंकड़े और शर्तें फिलहाल कर्मचारी यूनियनों द्वारा रखी गई मांगें हैं। आयोग की सिफारिशों और सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद ही नई सैलरी और पेंशन की दरें तय होंगी।
पाकिस्तान की सियासत रविवार को गरमा गई। पूर्व पीएम इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थकों ने खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मारवत से इस्लामाबाद की ओर लॉन्ग मार्च शुरू किया। हजारों लोग करीब 275 किमी दूर इस्लामाबाद के लिए निकले। लक्की मारवत से करीब 3 किमी आगे फ्रंटियर फोर्स और इमरान समर्थक आमने-सामने आ गए। दोनों ओर से पथराव हुआ और पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। अफरातफरी के बीच इमरान समर्थकों ने भी जमकर मुकाबला किया। लगभग एक घंटे बाद मार्च फिर से शुरू हो गया। लॉन्ग मार्च की शुरुआत में ही हिंसक झड़पों से खतरे के बीच पीटीआई सांसद शहजाद शहबाज और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने देर शाम बैठक की है। हालांकि बैठक में किए गए फैसलों के बारे में अभी कुछ पता नहीं चला है। इससे पहले शहबाज सरकार ने शनिवार रात को पंजाब सूबे में बड़ा क्रैकडाउन किया। इमरान की पार्टी PTI के कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर धरपकड़ की गई। PTI का दावा है कि उसके लगभग दो हजार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की गई है। वहीं इस्लामाबाद में संसद और हाईवे की सुरक्षा बढ़ाते हुए कई रास्तों को कंटेनर लगाकर बंद कर दिया गया है। इमरान 2023 से जेल में बंद, पत्नी-बहनें भी कैद हैं 73 साल के इमरान खान 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। उन पर लगभग 100 से ज्यादा मामले हैं। तीन मामलाें में उन्हें सजा सुनाई गई है। अल कादिर ट्रस्ट केस में 14 साल, दस्तावेज लीक में 10 साल और तोशाखाना केस में 3 साल की सजा है। तोशाखाना केस में इमरान की पत्नी बुशरा भी जेल में है। जबकि सितंबर में इमरान की बहन अलीमा, उजमा और नूरीन भी ऐतिहाती हिरासत में है। 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इमरान को मेडिकल जांच और इलाज के लिए इस्लामाबाद के निजी अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश दिया था। सरकार ने इसे चुनौती दी। 20 अगस्त की रात उन्हें शिफा इंटरनेशनल अस्पताल की जगह सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया। सरकार ने इसकी वजह सुरक्षा बताई। जांच के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया, जबकि उनके निजी डॉक्टर को जांच में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली। सरकार से दो दौर की बातचीत के बाद भी नहीं बनी सहमति सरकार और PTI के बीच शुक्रवार और शनिवार को दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन सहमति नहीं बनी। PTI इमरान से तत्काल मुलाकात और उन्हें ऐसे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग कर रही थी, जहां उनके निजी डॉक्टर जांच और इलाज कर सकें। इसके अलावा पार्टी ने इमरान की बहनों और गिरफ्तार समर्थकों की रिहाई, बुशरा बीबी की मेडिकल जांच और मामलों की बिना हस्तक्षेप सुनवाई की मांग रखी। सरकार की ओर से प्रदर्शन रद्द करने की शर्त रखी गई थी। खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद पर भी मतभेद पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने कहा कि बातचीत मुख्य रूप से इसलिए विफल हुई क्योंकि खैबर पख्तूनख्वा सरकार केंद्र को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग का भरोसा नहीं दिला सकी। PTI की सरकार वाले इस प्रांत में लंबे समय से आतंकी हिंसा होती रही है। इमरान समर्थक बोले- जान की परवाह नहीं, पीछे नहीं हटेंगे मार्च करक, कोहाट और पेशावर से गुजरेगा, इस्लामाबाद में प्रवेश रोकने की तैयारी खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने रविवार रात घोषणा की कि मार्च जारी रहेगा। टैंक, डेरा इस्माइल खान, दक्षिण वजीरिस्तान, उत्तर वजीरिस्तान, बन्नू और लक्की मारवत के समर्थक गांधी चौक से मार्च में शामिल हुए। काफिला करक, कोहाट और पेशावर होते हुए आगे बढ़ेगा। 6 अक्टूबर को कोहाट, हंगू, कुर्रम और ओरकजई के लोग इसमें शामिल होंगे, जबकि 7 अक्टूबर को पेशावर और 8 अक्टूबर को चरसद्दा व मोहम्मंद के समर्थक जुड़ेंगे। वहीं प्रधानमंत्री शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने राजधानी की ओर जाने वाली सड़कों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए हैं और रास्तों पर शिपिंग कंटेनर लगाए हैं। मार्च और बढ़ा तो शहबाज की कुर्सी खतरे में आएगी पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग में नियुक्त रहे अविनाश मोहनानी ने बताया कि इमरान समर्थकों का लॉन्ग मार्च खैबर से पंजाब में दाखिल होते ही शहबाज सरकार पर दबाव बढ़ाएगा। जाब में व्यापक समर्थन मिला तो आर्मी चीफ मुनीर के लिए भी इसे रोकना मुश्किल होगा। इसलिए मार्च को दबाने की कोशिश तेज है। इमरान की लोकप्रियता अब भी कायम है और उनकी रिहाई की चाबी मुनीर के पास है।
Maatrubhumi Release: सलमान खान की वॉर ड्रामा फिल्म ‘मातृभूमि’ का सफर काफ़ी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। फिल्म का नाम बदला गया, टीजर पर लोगों की प्रतिक्रियाएं, रिलीज कई बार टली और हाल ही में तो यह भी पक्का नहीं था कि यह फिल्म कभी रिलीज होगी या नहीं। लेकिन एक नई रिपोर्ट के मुताबिक़ अब ये सब पुरानी बातें हो चुकी हैं। ‘मातृभूमि’ अगले महीने ही सिनेमाघरों में आ सकती है।
‘मातृभूमि’ को सरकार से NOC मिली
खबर थी कि ‘मातृभूमि’ – जो शुरू में गलवान में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच टकराव पर आधारित थी – या तो रोक दी गई थी या उसमें देरी हो रही थी। वजह…. केंद्र सरकार को यह पक्का नहीं था कि इसमें चीन को कैसे दिखाया जाएगा। अब बॉलीवुड हंगामा ने एक सूत्र के हवाले से कहा है कि I&B मंत्रालय फिल्म के नए वर्जन से ‘संतुष्ट’ है और उसने पिछले हफ्ते ही इसे NOC दे दी है।
बताया जाता है कि रक्षा मंत्रालय की ओर से फिल्म के शुरुआती चीन-विरोधी रुख पर आपत्ति जताए जाने के बाद ‘मातृभूमि’ की कई बार दोबारा शूटिंग (रीशूट) की गई। रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है- “‘मातृभूमि’ का नया वर्जन ओरिजिनल वर्जन की तुलना में काफी बदला हुआ है। इसके अलावा अब इसमें भारत और चीन के रिश्तों को भी सकारात्मक नजरिए से दिखाया गया है।”
‘मातृभूमि’ की रिलीज डेट?
हालांकि ‘मातृभूमि’ के मेकर्स ने अभी तक इस बारे में कोई पुष्टि नहीं की है। लेकिन बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सलमान खान ने रिलीज के लिए एक तारीख सोच रखी है। रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है, “सलमान खान अब 13 नवंबर पर नजरें गड़ाए हुए हैं। उनका मानना है कि दिवाली के बाद का समय – जब लोग जश्न के मूड में होंगे – फिल्म की रिलीज के लिए सही रहेगा।
हालांकि सेंसर की प्रक्रिया अभी बाकी है। मेकर्स जल्द ही फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास जमा करेंगे। अगर CBFC फिल्म को मंजूरी दे देता है और यह प्रक्रिया इसी महीने पूरी हो जाती है, तो सलमान और उनकी टीम शायद 13 नवंबर को ‘मातृभूमि’ को सिनेमाघरों में ले आएगी। इस बारे में अगले 10 दिनों में साफ तस्वीर सामने आ जाएगी।” अगर ऐसा होता है, तो ‘मातृभूमि’ फिल्म नितेश तिवारी की बड़े बजट वाली फिल्म ‘रामायण पार्ट वन’ के रिलीज़ होने के एक हफ्ते बाद सिनेमाघरों में आ सकती है।
‘मातृभूमि’ के बारे में
सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले सलमा खान द्वारा प्रोड्यूस की गई फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है और इसमें चित्रांगदा सिंह भी अहम भूमिका में हैं। इस साल की शुरुआत में नाम बदलने से पहले इस फिल्म का टाइटल ‘बैटल ऑफ गलवान’ था। असल में यह फिल्म भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच 2020 में हुई गलवान घाटी की झड़प पर आधारित थी, लेकिन खबरों के मुताबिक दोबारा शूटिंग के बाद फिल्म से चीन से जुड़े सभी संदर्भ हटा दिए गए।

नई दिल्ली। भले कांग्रेस पार्टी शुक्रवार को हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हुई थी लेकिन जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई की राहुल गांधी ने निंदा की। राहुल ने कहा कि लाठी से लोगों को रोका जा सकता है, सवालों को नहीं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा और कहा कि उनको इस्तीफा देना होगा। राहुल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हजारों नौजवान वोट चोरी के खिलाफ अपने संवैधानिक अधिकार के साथ शांतिपूर्वक सड़कों पर हैं। उनकी मांग साफ है कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और लोकतंत्र बचे।
ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि युवाओं को सड़कों पर पीटा जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘आज गांधी जयंती के दिन हजारों नौजवान वोट चोरी के खिलाफ सड़कों पर हैं। ये लोग शांतिपूर्वक, बिना हिंसा के, अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग साफ है, ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। लोकतंत्र बचाओ और मोदी शाह सरकार का जवाब’? उन्होंने आगे लिखा, ‘लड़के, लड़कियों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है। सैकड़ों हिरासत में हैं। उनका कसूर सिर्फ ये है कि उन्होंने वोट चोरी पर सवाल पूछा’।
राहुल गांधी ने महात्मा गांधी को उनकी जयंती पर याद करते हुए कहा, ‘बापू ने यही सिखाया था कि सच बोलो, शांति से लड़ो और यही सरकार को सबसे ज्यादा डराता है। क्योंकि लाठी से भीड़ रोकी जा सकती है, सवाल नहीं। ज्ञानेश कुमार जाएंगे और जिस सिस्टम ने उन्हें बिठाया है, वो भी जाएगा’।

