Samudra Manthan: समुद्र में एक कुआं खोदने पर ₹650 करोड़ क्यों खर्च कर रही है सरकार?

Samudra Manthan scheme: देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस के आयात पर भारत की बढ़ती निर्भरता को घटाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले हफ्ते ₹84,084 करोड़ की समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना (Samudra Manthan National Offshore Exploration Scheme) को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत सरकार उच्च जोखिम वाले गहरे और अत्यधिक गहरे समुद्री तेल व गैस की खोज का खर्च सीधे बजट से उठाएगी।

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि सरकार समुद्र में एक गहरे या अत्यधिक गहरे पानी के एक्सप्लोरेशन वेल (कुएं) की ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹650 करोड़ (जो भी कम हो) का खर्च उठाएगी। अधिकारियों के मुताबिक अगले पांच वर्षों में ऐसे 60 कुओं की ड्रिलिंग के लिए सरकारी सहायता बढ़ाई जाएगी।

सरकार क्यों उठा रही है जोखिम? दुनिया का पहला अनोखा कदम

सरकारी अधिकारियों ने इस पहल को एक अभूतपूर्व कदम बताया है जिसमें सरकार सीधे तौर पर बजटीय सहायता के माध्यम से एक्सप्लोरेशन रिस्क को अपने ऊपर ले रही है। पीटीआई से बातचीत में एक अधिकारी ने बताया कि शायद दुनिया में यह पहली बार है जब कोई सरकार सीधे अपने बजट से जोखिम वाले एक्सप्लोरेशन का खर्च उठा रही है। अगले पांच वर्षों में कुल 60 गहरे पानी और अत्यधिक गहरे पानी के एक्सप्लोरेशन कुओं को बजट से वित्तीय सहायता दी जाएगी।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी कंपनियां ऐसे जोखिम भरे एक्सप्लोरेशन से बचती रही हैं। इसका मुख्य कारण यह था कि अगर ड्रिलिंग के दौरान कॉमर्शियली रियलिस्टिक तेल या गैस के भंडार नहीं मिलते हैं, तो पूरा निवेश डूब जाता है। एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि कंपनियां सिर्फ डेवलपमेंट ड्रिलिंग यानी पहले से खोजे गए भंडारों से उत्पादन बढ़ाने पर ही पैसा खर्च कर रही थीं। नए संसाधनों की खोज के लिए सबसे महत्वपूर्ण रिस्क एक्सप्लोरेशन में न के बराबर पैसा लगाया जा रहा था। इस लिहाज से समुद्र मंथन एक गेम-चेंजिंग योजना है।

₹84084 करोड़ का पूरा बजट ब्रेकअप

इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए आवंटित कुल ₹84,084 करोड़ के बजट को अलग-अलग चरणों के हिसाब से बांटा गया है। डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाटर ड्रिलिंग के लिए अगले पांच वर्षों में गहरे समुद्र में ड्रिलिंग के लिए ₹43200 करोड़ निर्धारित किए गए हैं। समुद्री भूकंपीय डेटा के लिए ₹28534 करोड़ आवंटित किए गए हैं। Subsea पाइपलाइनों और तटवर्ती तेल व गैस प्रसंस्करण सुविधाओं के विकास के लिए ₹10000 करोड़ दिए जाएंगे। तेल व गैस विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के विकास के लिए ₹2000 करोड़ रखे गए हैं।

कैसे काम करेगा कॉमन हब इंफ्रास्ट्रक्चर (CHI) मॉडल?

सिर्फ ड्रिलिंग में ही नहीं बल्कि सरकार सबसी पाइपलाइनोंऔर तटीय तेल व गैस प्राप्त करने Qj प्रसंस्करण करने वाली सुविधाओं जैसे कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी आंशिक फंडिंग देगी। इसके लिए कॉमन हब इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल तैयार किया गया है। इसके तहत एक से अधिक ऑपरेटर्स साझा संपत्तियों का उपयोग करके अपने खोजे गए भंडारों का व्यावसायिक उपयोग कर सकेंगे। इससे विकास लागत घटेगी, परियोजनाओं की व्यावहारिकता में सुधार होगा और छोटी खोजों से भी तेजी से व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया जा सकेगा।

कौन सी कंपनियां होंगी पात्र और क्या होगा फायदा?

ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम (OALP) के पिछले दौरों में ब्लॉक हासिल करने वाली कंपनियों के साथ-साथ चल रहे बोली दौर में ब्लॉक हासिल करने वाली फर्में भी इस योजना के तहत पात्र होंगी। वे प्रत्येक गहरे या अत्यधिक गहरे पानी के कुएं की ड्रिलिंग के लिए सरकार से ₹650 करोड़ तक की सहायता प्राप्त कर सकेंगी। इस योजना से भारत के अपतटीय एक्सप्लोरेशन सेक्टर में वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के आकर्षित होने की भी उम्मीद है।

इंडस्ट्री इसके असर के बारे में टिप्पणी करते हुए इक्रा लिमिटेड (ICRA Ltd) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ ने पीटीआई को बताया कि यह कार्यक्रम ऑफशोर एक्सप्लोरेशन की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक को दूर करता है। इसके अलावा यह योजना गहरे और अत्यधिक गहरे पानी के कुओं की ड्रिलिंग के लिए सहायता प्रदान करती है, जहां घरेलू अपस्ट्रीम क्षेत्र के पास सीमित अनुभव व तकनीकी विशेषज्ञता है और इनका दोहन अत्यधिक पूंजी-गहन और जोखिम भरा है। इस योजना का लक्ष्य 10-15 मिलियन टन तेल समकक्ष का अतिरिक्त वार्षिक उत्पादन जोड़ना है जो तेल और गैस के आयात पर निर्भरता को 3 से 5 प्रतिशत तक कम कर देगा।

कच्चे तेल पर 88% तक पहुंची भारत की निर्भरता

यह योजना ऐसे समय में आई है जब पिछले एक दशक में भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता 77 प्रतिशत से बढ़कर 88 प्रतिशत हो गई है। इसके साथ ही देश अपनी कुल प्राकृतिक गैस आवश्यकता का लगभग आधा हिस्सा अब भी आयात करता है। अधिकारियों का मानना है कि भारतीय समुद्री क्षेत्र के भीतर अनछुए हाइड्रोकार्बन भंडारों का पता लगाकर घरेलू अपतटीय एक्सप्लोरेशन का विस्तार करने से देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। हालांकि अधिकारियों ने स्वीकार किया कि गहरे समुद्र में एक्सप्लोरेशन एक दीर्घकालिक निवेश है और जरूरी नहीं कि हर कुएं से व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक खोज ही निकले। इसके बावजूद सरकार द्वारा एक्सप्लोरेशन के जोखिम को सीधे फंड करने का फैसला भारत की तेल और गैस एक्सप्लोरेशन स्ट्रैटिजी में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव है।

8वें वेतन आयोग का बड़ा गणित, क्या DA मर्जर से कर्मचारियों की सैलरी में आएगा डबल उछाल? ये है पूरा कैलकुलेशन

8th Central Pay Commission updates: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वां केंद्रीय वेतन आयोग इस समय सबसे बड़ा और चर्चा का विषय बना हुआ है। कर्मचारी संगठनों की मांगों और वित्तीय विश्लेषण के मुताबिक अगर 8वें वेतन आयोग में महंगाई भत्ते (DA) का बेसिक वेतन में विलय और वार्षिक इंक्रीमेंट दर में बढ़ोतरी की मांग स्वीकार कर ली जाती है तो नियमित वेतन वृद्धि और DA संशोधनों के संयुक्त प्रभाव से केंद्रीय कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी अगले 7 वर्षों के भीतर लगभग दोगुनी हो सकती है।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को आधिकारिक तौर पर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही लगभग 55 लाख से अधिक कार्यरत कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनभोगियों (जिसमें सेवानिवृत्त रक्षा कर्मी भी शामिल हैं) के वेतन, पेंशन, भत्तों, सेवा शर्तों और अन्य लाभों की समीक्षा व सिफारिश के लिए नियम एवं शर्तें जारी की गई थीं।

क्षेत्रीय परामर्श जारी: दिल्ली, चेन्नई और पुडुचेरी में होंगी आगामी बैठकें

अभी 8वां वेतन आयोग विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपना क्षेत्रीय परामर्श आयोजित कर रहा है। इसके तहत आगामी बैठकों का कार्यक्रम इस प्रकार तय किया गया है:

दिल्ली: 7 और 10 अगस्त 2026

चेन्नई: 7 और 8 सितंबर 2026 (अपॉइंटमेंट की अंतिम तिथि: 18 अगस्त 2026)

पुडुचेरी: 9 सितंबर 2026 (अपॉइंटमेंट की अंतिम तिथि: 18 अगस्त 2026)

पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित है आयोग

8वें वेतन आयोग की संरचना और नेतृत्व की बात करें तो इसकी कमान पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस के हाथों में है। इसकी अध्यक्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई हैं। सदस्य-सचिव पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज जैन और सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष हैं जो प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य भी हैं। यह आयोग लगभग 50 लाख से 55 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 65 लाख से 69 लाख पेंशनभोगियों के जीवन को प्रभावित करने वाले बदलावों की सिफारिश करेगा।

कर्मचारी यूनियनों (NC-JCM) की प्रमुख मांगें

कर्मचारी प्रतिनिधि निकायों में सबसे बड़े संगठनों में से एक नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने आयोग कई मांगें रखी हैं। इसमें न्यूनतम बेसिक पे को बढ़ाकर ₹69000 करने की मांग है। इसके अलावा मौजूदा 7वें वेतन आयोग के तहत मिलने वाले 3% वार्षिक इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 6% करने का सुझाव है। दूसरे संगठनों की मांगों में DA को समय-समय पर बेसिक सैलरी में मर्ज करना शामिल है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 8वें वेतन आयोग में अगर DA मर्जर और 6% इंक्रीमेंट लागू होता है, तो चक्रवृद्धि प्रभाव से सैलरी में भारी उछाल आएगा। जब महंगाई भत्ता 50% से ऊपर चला जाता है, तो इसे मूल वेतन में शामिल करने की मांग बढ़ जाती है। जैसे ही DA का बेसिक पे में विलय होता है, कर्मचारी की बेसिक सैलरी बढ़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप बेसिक पे पर निर्भर अन्य सभी भत्ते (जैसे HRA, TA आदि) भी स्वतः बढ़ जाते हैं।

अभी सरकारी कर्मचारियों को 3% का सालाना इंक्रीमेंट मिलता है। अगर इसे बढ़ाकर 6% किया जाता है और साथ ही नियमित आधार पर DA को बेसिक पे में जोड़ा जाता है, तो वेतन वृद्धि की दर बहुत तेज हो जाएगी। उच्च वार्षिक वेतन वृद्धि और DA मर्जर का यह संयुक्त प्रभाव चक्रवृद्धि की तरह काम करेगा, जिससे 7 साल के भीतर ग्रॉस सैलरी दोगुनी हो सकती है।

फिटमेंट फैक्टर की भूमिका सबसे ज्यादा

नए वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सबसे निर्णायक भूमिका निभाएगा। अगर पिछला इतिहास दोहराते हुए नया फिटमेंट फैक्टर तय किया जाता है तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में शुरुआती स्तर पर ही बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। वैसे एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि 7 साल में सैलरी दोगुनी होने का गणित एक प्रोजेक्शन है। वास्तविक वेतन वृद्धि कितनी होगी, यह 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों और उसके बाद केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली अंतिम मंजूरी पर ही निर्भर करेगा।

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रूफटॉप सोलर ऊर्जा : देश में लखनऊ का पहला स्थान, शीर्ष 100 में उत्तर प्रदेश के 17 जनपद

Lucknow Rooftop Solar: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक ओर उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत रूफटॉप सोलर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने के अभियान में प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के शीर्ष 100 जनपदों की सूची में अपने 17 जनपदों को शामिल कराया है। यह उपलब्धि न केवल प्रदेश में सौर ऊर्जा के तेजी से बढ़ते विस्तार को दर्शाती है, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उत्तर प्रदेश की मजबूत प्रगति का भी प्रमाण है।

 

इस दौरान यूपी नेडा डायरेक्टर रविन्दर सिंह ने बताया कि इस सूची में राजधानी लखनऊ में 1,24,167 रूफटॉप सोलर संयंत्रों के स्थापना के साथ-साथ देश का नंबर-1 जनपद बनने का गौरव बरकरार रखा है। लखनऊ में बड़ी संख्या में घरों,  द्वारा रूफटॉप सोलर अपनाए जाने से यह उपलब्धि संभव हुई है। वहीं, वाराणसी ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए देश में 10वां स्थान प्राप्त किया है। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में सौर ऊर्जा को लेकर चल रहे अभियान का सकारात्मक असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसके अलावा कानपुर नगर 14वें स्थान पर पहुंचकर प्रदेश के औद्योगिक शहरों में हरित ऊर्जा अपनाने की दिशा में नई मिसाल पेश कर रहा है।

17 जनपद देश के शीर्ष 100 जिलों में शामिल

प्रदेश के 17 जनपदों का देश के शीर्ष 100 जिलों में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर को लेकर जागरूकता, सरकारी प्रोत्साहन और योजनाओं का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, विशेषकर प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना, के प्रभावी क्रियान्वयन से लाखों उपभोक्ता सौर ऊर्जा से जुड़ रहे हैं। रूफटॉप सोलर संयंत्रों के विस्तार से लोगों को बिजली बिल में उल्लेखनीय बचत हो रही है, साथ ही अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजकर आर्थिक लाभ प्राप्त करने का अवसर भी मिल रहा है। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है।

जनजागरूकता अभियान

उत्तर प्रदेश लगातार देश में रूफटॉप सोलर स्थापना की रफ्तार बढ़ा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा जनजागरूकता अभियान, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाना, समयबद्ध स्वीकृति, डिस्कॉम और संबंधित एजेंसियों के बेहतर समन्वय तथा सब्सिडी वितरण की प्रभावी व्यवस्था ने इस अभियान को नई गति दी है। जिस गति से उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित हो रहे हैं, उससे आने वाले समय में प्रदेश देश के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। देश के शीर्ष 100 जनपदों में 17 जिलों की मौजूदगी और लखनऊ का लगातार नंबर-1 स्थान, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उत्तर प्रदेश हरित ऊर्जा क्रांति का नेतृत्व कर रहा है।

राष्ट्रीय रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के प्रमुख जनपद

रैंक जनपद संयंत्र स्थापना
1  लखनऊ  1,24,167
10  वाराणसी  48,829
14  कानपुर नगर  43,289
24  बरेली  28,315
29  आगरा  26,375
37  प्रयागराज  23,773
51  झांसी  18,354
56  रायबरेली  17,532
70  गोरखपुर  14,498
73  सहारनपुर  13,821
75  मुजफ्फरनगर  13,464
78  मेरठ  13,137
79  बाराबंकी  13,126
81  अलीगढ़  12,925
86  शाहजहांपुर  12,158
88  सीतापुर  12,008
90  उन्नाव  11,779

 

छात्रों को दया नहीं, पीएम मोदी की माफी चाहिए… पेपर लीक मुद्दे पर राहुल गांधी का PM पर तीखा हमला

Rahul Gandhi attacks PM Modi: देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के मुद्दों को लेकर विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म

Rahul Gandhi attacks PM Modi: देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के मुद्दों को लेकर विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक और तीखी पोस्ट साझा करते हुए कहा कि देश के लाखों मेहनती छात्रों को प्रधानमंत्री की किसी 'क्षमा' या दया की जरूरत नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री को खुद देश के छात्रों और उनके परिवारों से माफी मांगनी चाहिए।

 

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल के समय में देश की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक प्रकरणों को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है और कई परिवार इस अव्यवस्था के कारण पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।

क्या कहा राहुल गांधी ने?

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कहा कि अपने बच्चों को खोने वाले माता-पिता के आंसू, उनका बिलखना – इससे बड़ा कोई दुःख नहीं होता। ये एक ग़म उनके साथ हमेशा जिंदा रहेगा और साथ ही रह जाते हैं इस टूटी और भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के बारे में कई सवाल। पेपर लीक, रद्द परीक्षाएं। सालों की तैयारी एक पल में बर्बाद – हमारे छात्रों को उस सिस्टम में ईमानदारी से मेहनत करने के लिए कहा जाता है जो खुद बेईमान है। और उसके बाद भी प्रधानमंत्री की ये हिम्मत है कि वो छात्रों को माफ़ करने की बात करते हैं। ALSO READ: 'Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते': FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

 

क्या वो एक भी शोकाकुल परिवार से मिले जिन्होंने अपने बच्चे को खोया है या उन लोगों से जिनकी जमा पूंजी, ज़िंदगी, वक्त और सपने सब पेपर लीक से छीन लिए गए? जवाब है नहीं! भारत के छात्रों को प्रधानमंत्री की क्षमा की ज़रूरत नहीं – मोदी जी को उनसे माफ़ी मांगनी चाहिए। ALSO READ: अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में उन लाचार माता-पिता के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं, जिन्होंने पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से उपजे मानसिक तनाव के कारण अपने बच्चों को खो दिया है। राहुल ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक नाकामी नहीं है, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और उनके संघर्ष के साथ खिलवाड़ है। इसमे कोई संदेह नहीं कि देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

UPSC CMS 2026 Exam Pattern: मेडिकल अफसर बनने के लिए यूपीएससी की परीक्षा कल, परीक्षा से पहले समझ लें मार्किंग स्कीम

UPSC CMS 2026 Exam Pattern: मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद सरकारी नौकरी की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यूपीएससी सीएमएस परीक्षा का आयोजन किया जाता है। यह परीक्षा कंबाइंड मेडिकल सर्विसेज (CMS) की है, जिसे संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) आयोजित करता है। इस साल यह परीक्षा कल यानी 02 अगस्त 2026 को पहले से निर्धारित परीक्षा केंद्रों में होगी। इसमें अंतिम रूप से सफल उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के हॉस्पिटल में सीधे क्लास-1 मेडिकल ऑफिसर के तौर पर नियुक्त किया जाता है। इससे रेलवे, एमसीडी और केंद्र सरकार के विभिन्न स्वास्थ्य विभागों में नौकरी का अवसर मिलता है।

यूपीएससी सीएमएस 2026 परीक्षा परीक्षा 2 चरणों में होती है। कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा (500 अंक) और पर्सनालिटी टेस्ट/इंटरव्यू (100 अंक) के होते हैं। इसकी लिखित परीक्षा में 2 पेपर होते हैं जो एक ही दिन आयोजित किए जाते हैं और दोनों की अवधि 2-2 घंटे होती है। फाइनल मेरिट लिस्ट लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के कुल 600 अंकों के आधार पर तैयार की जाती है। यूपीएससी सीएमएस 2026 परीक्षा देने जाने से पहले परीक्षार्थियों को परीक्षा का मार्किें पैटर्न और परीक्षा पैटर्न समझ लेना चाहिए, ताकि उन्हें बाद में किसी तरह की दिक्कत न हो।

यूपीएससी सीएमएस परीक्षा पैटर्न और मार्किंग स्कीम

पेपर-1 (250 अंक) में कुल 120 ऑब्जेक्टिव (MCQ) प्रश्न होते हैं, जिनमें 96 सवाल जनरल मेडिसिन और 24 सवाल पीडियाट्रिक्स (बाल रोग) से पूछे जाते हैं।

पेपर-2 (250 अंक) में भी 120 प्रश्न होते हैं। इन्हें सर्जरी, गायनिकोलॉजी एंड ऑब्स्टेट्रिक्स और कम्युनिटी मेडिसिन/PSM में बराबर-बराबर (40-40 सवाल) बांटा गया है।

मार्किंग स्कीम : परीक्षार्थियों को हर गलत जवाब पर एक-तिहाई (1/3rd या 0.33) अंक की निगेटिव मार्किंग का सामना करना होगा। वहीं, बिना हल किए छोड़ दिए गए सवालों पर कोई पेनल्टी नहीं लगती।

यूपीएससी सीएमएस परीक्षा आखिरी दिन की तैयारी

यूपीएससी सीएमएस परीक्षा परीक्षा से एक दिन पहले अब कोई भी नया टॉपिक पढ़ने या समझने का वक्त नहीं है। इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि

नया कुछ न पढ़ें : आखिरी समय में कोई भी नई थ्योरी या टॉपिक पढ़ने की गलती न करें। इससे कन्फ्यूजन बढ़ेगा।

क्विक रिवीजन : आपने जो शॉर्ट नोट्स या फॉर्मूले बनाए हैं, बस उन्हें ही सरसरी नजर से देखें।

पूरी नींद लें : रात को कम से कम 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें, जिससे एग्जाम हॉल में दिमाग तेजी से काम करे।

परीक्षा केंद्र के लिए जरूरी गाइडलाइंस

  • यूपीएससी सीएमएस परीक्षा हॉल में की गई एक छोटी सी गलती भी करियर पर भारी पड़ सकती है। इसलिए परीक्षा केंद्र के सभी नियम-कायदे समझना जरूरी है :
  • अपने e-Admit Card का प्रिंटआउट और एक ओरिजिनल फोटो आईडी (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस) साथ रखना न भूलें।
  • गेट बंद होने के तय समय से कम से कम 30 से 45 मिनट पहले सेंटर पहुंचें। देर से पहुंचने पर किसी भी हाल में एंट्री नहीं मिलेगी।
  • मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाना सख्त मना है।
  • यूपीएससी सीएमएस परीक्षा में निगेटिव मार्किंग होती है। इसलिए जिन सवालों पर भरोसा हो, उन्हें पहले करें। तुक्का मारने से बचें, गलत जवाब से नंबर कट सकते हैं। टाइम मैनेजमेंट का ध्यान रखें, हर सेक्शन को तय समय में पूरा करें।

IBPS Clerk Recruitment 2026: आईबीपीएस क्लर्क भर्ती आज से शुरू, 11 बैंकों में 11,000 से ज्यादा पदों में लगेगी नौकरी

CM हेमंत सोरेन का PM मोदी को पत्र, कहा- मांग के अनुरूप नहीं मिल रही छात्रवृत्ति राशि

Jharkhand CM hemant soren

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य के प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रों को केंद्र सरकार से मांग के अनुसार छात्रवृत्ति राशि न मिलने पर गंभीर चिंता जताई है। सोरेन ने बताया कि केंद्रीय सहायता में कमी के कारण राज्य के लाखों ओबीसी (OBC) और एसटी (ST) वर्ग के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

 

ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति में बड़ी कटौती

मुख्यमंत्री ने पत्र में उल्लेख किया कि केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत राज्य को मिलने वाली राशि आवश्यकता की तुलना में काफी कम है। इससे बड़ी संख्या में पात्र विद्यार्थियों को समय पर राशि का भुगतान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से छात्रवृत्ति मद में केंद्रांश बढ़ाने का अनुरोध किया है।

 

हेमंत सोरेन ने पत्र में एसटी वर्ग के छात्रों के साथ हो रही विषमता की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि प्री-मैट्रिक स्तर पर छात्रवृत्ति दरों में अंतर है। जहां अन्य वर्गों के लिए यह राशि क्रमश: 3500 रुपए और 4000 रुपए है, वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए यह दर घटकर 3000 रुपए प्रति छात्र रखी गई है।

 

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा एसटी विद्यार्थियों की प्री और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए राज्य को कोई राशि जारी नहीं की गई। वित्तीय वर्ष 2024-25 में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत मिली 200 करोड़ रुपए की राशि वास्तव में 2022-23 की बकाया राशि थी। वित्तीय वर्ष 2023-24 में केंद्रांश का केवल 42% हिस्सा पहली किस्त के रूप में मिला था। इसके बाद का 58% बकाया तथा 2024-25 व 2025-26 की पूरी राशि राज्य को अप्राप्त है।

 

अल्पसंख्यकों के लिए दोबारा योजना शुरू करने की मांग

मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यकों के लिए छात्रवृत्ति योजना को पुन: आरंभ करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में अल्पसंख्यक आबादी 23.29% है, लेकिन भारत सरकार द्वारा वर्ष 2021-22 के बाद से इस वर्ग के लिए छात्रवृत्ति राशि विमुक्त नहीं की जा रही है।

ISRO Recruitment 2026: अंतरिक्ष विभाग और इसरो ने 746 पदों पर भर्ती शुरू, 92 साइंटिस्ट/इंजीनियर और 410 एप्रेंटिस के पद भी भरे जाएंगे

ISRO Recruitment 2026: अंतरिक्ष विभाग (DoS) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) ने हाल के वर्षों में अपनी सबसे बड़ी भर्ती प्रक्रिया के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। अंतरिक्ष विभाग और इसरो ने 746 अलग-अलग पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इनमें से कम से कम 43 बैकलॉग पद हैं। इसरो में नौकरी से जुड़ी सभी डिटेल्स ऑफिशियल वेबसाइट isro.gov.in/careers पर चेक कर सकते हैं।

आवेदन ऑनलाइन मोड में करना होगा। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इसरो के ऑफिशियल रिक्रूटमेंट पोर्टल पर 17 अगस्त 2026 तक फॉर्म भर सकते हैं। इन पदों पर भर्ती के लिए इसरो ने 27 जुलाई से 29 जुलाई के बीच तीन नोटिफिकेशन जारी किए थे। इसके तहत 336 रेगुलर और 410 अप्रेंटिसशिप पद शामिल हैं। इसरो की इस भर्ती प्रक्रिया के तहत वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से लेकर प्रशासनिक स्टाफ और अप्रेंटिस तक के पद पर भर्तियां की जाएंगी। इसमें 92 पद साइंटिस्ट और इंजीनियर के भी हैं। इसरो साइंटिस्ट की सैलरी पे-मैट्रिक्स लेवल-10 के हिसाब से होती है।

किन पदों पर कितनी वैकेंसी?

इसरो के भर्ती अभियान को अलग-अलग श्रेणी में बांटा गया है, जिससे हर वर्ग और योग्यता वाले अभ्यर्थियों को मौका मिल सके: इस ताजा भर्ती प्रक्रिया का सबसे बड़ा हिस्सा इसरो सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड (ICRB) के जरिए 244 लेवल-4 प्रशासनिक पदों पर भर्ती का है। इनमें 113 सहायक, 81 कनिष्ठ निजी सहायक, 22 अपर डिविजन क्लर्क, 10 आशुलिपिक, स्वायत्त संस्थानों के लिए 17 सहायक और एक स्वायत्त संस्थान के लिए एक कनिष्ठ निजी सहायक शामिल हैं।

इस भर्ती में वेतन मैट्रिक्स के लेवल-10 में 92 वैज्ञानिक/इंजीनियर ‘एससी’ पद भी शामिल हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स में सबसे ज्यादा 34 पद खाली हैं। इसके बाद मैकेनिकल (26), कंप्यूटर साइंस (13), सिविल (10), इलेक्ट्रिकल (4), प्रशीतन और एयर-कंडीशनिंग (2), आर्किटेक्चर (2) और अहमदाबाद के भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) में एक सिविल इंजीनियर का पद हैं।

परमानेंट भर्ती के साथ, URSC, बेंगलुरु ने 2026-27 के लिए 410 अप्रेंटिसशिप पोस्ट की घोषणा की है। इनमें 220 ग्रेजुएट अप्रेंटिस, 120 टेक्नीशियन अप्रेंटिस और 70 डिप्लोमा इन कमर्शियल प्रैक्टिस अप्रेंटिस शामिल हैं।

ग्रेजुएट अप्रेंटिसशिप में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (83 पोस्ट) सबसे ज़्यादा हैं, इसके बाद मैकेनिकल (50), कंप्यूटर साइंस (40), केमिकल (15), इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट (10), एयरोनॉटिकल (10), एयरोस्पेस (10) और ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग (2) हैं। टेक्नीशियन अप्रेंटिसशिप में 38 इलेक्ट्रॉनिक्स, 30 कंप्यूटर साइंस, 30 मैकेनिकल, 10 इलेक्ट्रिकल, 5 सिविल, 5 इंस्ट्रूमेंटेशन और 2 ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग पोस्ट शामिल हैं।

अप्रेंटिस और साइंटिस्ट वेतन

इसरो अप्रेंटिस एक्ट, 1961 के तहत कानूनी जरूरतों को पूरा करने और नए स्नाताकों को प्रशिक्षित करने के लिए अप्रेंटिस भर्ती करता है। सभी उम्मीदवारों को मासिक स्टाइपेंड मिलता है, जो 10,900 रुपये से 12,300 रुपये है। वहीं, साइंटिस्ट/’SC’ के पद पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों का शुरुआती बेसिक पे 56,100 रुपये प्रति माह होगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार के नियमानुसार डीए, एचआरए और मेडिकल जैसी अन्य तमाम सुविधाएं भी मिलेंगी।

इसरो में नौकरी के लिए जरूरी योग्यता

साइंटिस्ट और इंजीनियर के पदों पर भर्ती के लिए संबंधित ट्रेड में बीई या बीटेक की डिग्री होनी चाहिए, जिसमें कम से कम 65% अंक होने जरूरी हैं। इस बार साइंटिस्ट पदों के लिए GATE (2025 या 2026) स्कोर के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी। इसके बाद शॉर्टलिस्ट किए गए युवाओं को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। अंतिम चयन में 50% वेटेज गेट स्कोर का और 50% वेटेज इंटरव्यू का रहेगा। वहीं प्रशासनिक और अप्रेंटिस पदों के लिए अलग-अलग लिखित परीक्षा या मेरिट के आधार पर चयन किया जाएगा।

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दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल: दिल्ली में बनेगा प्रॉपर्टी आधार कार्ड! जानिए क्या है ये और कैसे करेगा काम

Delhi Land Record Bill 2026: दिल्ली में प्रॉपर्टी और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। दिल्ली सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल, 2026 के तहत दिल्ली की हर संपत्ति को एक खास डिजिटल पहचान दी जाएगी। इसे प्रॉपर्टी आधार कार्ड कहा जा रहा है। इस नए कानून को पारित कराने के लिए दिल्ली विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा। इसके बाद पूरी दिल्ली में वैज्ञानिक सर्वे शुरू होगा। इसके माध्यम से हर गांव के घर, जमीन के टुकड़े से लेकर शहरों के फ्लैट्स और कमर्शियल बिल्डिंग्स तक का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

क्या है नया बिल और कैसे होगा सर्वे?

इस कानून के तहत दिल्ली के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को मिलाकर पूरी दिल्ली का वैज्ञानिक सर्वे अनिवार्य किया जाएगा। जमीन और प्रॉपर्टी की सीमाओं मैपिंग ड्रोन से सर्वे करके की जाएगी। इसमें सर्वे ऑफ इंडिया की भी मदद ली जाएगी। अभी अलग-अलग सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों के पास जो रिकॉर्ड्स हैं उन्हें एक ही सिंगल प्लेटफॉर्म पर लेकर आया जाएगा।

बहुमंजिला इमारतों में हर फ्लोर के लिए एक अलग डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, ताकि इसमें इंडिविजुअल यूनिट्स भी शामिल की जा सकें। सरकार को उम्मीद है कि इस पूरी व्यवस्था से प्रॉपर्टी से जुड़े विवादों में कमी आएगी और अदालतों व राजस्व अधिकारियों का बोझ घटेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस पहल की तुलना लोगों के आधार कार्ड से करते हुए कहा कि दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल, 2026 के माध्यम से दिल्ली की हर संपत्ति को अब एक सुरक्षित और प्रामाणिक डिजिटल पहचान मिलेगी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के तहत 30 ग्रामीण गांवों में सफल क्रियान्वयन के अनुभवों के आधार पर इसे पूरी दिल्ली में लागू किया जाएगा। फिलहाल यह विधेयक मंत्रियों के समूह की समीक्षा के बाद मंजूरी की प्रक्रिया से गुजर रहा है और सरकार इसे आगे बढ़ाने के लिए एक विशेष विधानसभा सत्र आयोजित करने की योजना बना रही है।

लाल डोरा क्षेत्रों के लिए क्यों अहम है यह कदम?

लाल डोरा क्षेत्र वे ग्रामीण आवासीय क्षेत्र हैं जिन्हें राजस्व रिकॉर्ड में लाल स्याही से मार्क किया जाता है। इनका इस्तेमाल खेती और गैर खेती दोनों ही उद्देश्यों के लिए होता है और यहां कंस्ट्रक्शन पर कुछ पाबंदियां होती हैं। सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक लाल डोरा क्षेत्रों में लंबे समय से व्यवस्थित और प्रामाणिक संपत्ति रिकॉर्ड का अभाव रहा है। स्वामित्त्व पहल का उद्देश्य इन क्षेत्रों के निवासियों को पहली बार औपचारिक और सत्यापन योग्य दस्तावेज प्रदान करके दशकों पुराने इस अंतर को दूर करना है।

कैसे काम करेगा स्मार्ट प्रॉपर्टी आधार कार्ड?

स्वामित्व योजना के तहत जारी होने वाला यह कार्ड PVC फॉर्मेट में होगा। इसे UIDAI मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इस कार्ड में कई जानकारियां दर्ज की जाएंगी। कार्ड पर एक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन नंबर (PID), जारी करने की तारीख, गांव व जिले का विवरण, कब्जाधारक व परिवार की जानकारी, जमीन का क्षेत्रफल और एक ‘भू-आधार नंबर’ मौजूद होगा। कार्ड पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करने पर संपत्ति का पूरा डिजिटल स्केच, सीमाओं का विवरण, आसपास की संपत्तियों के PID, खसरा नंबर और कानूनी रूप से मान्य सर्टिफिकेट ऑफ ऑक्यूपेंसी लिंक रहेगा।

वैसे सरकार ने अभी यह जानकारी नहीं दी है कि ये प्रॉपर्टी कार्ड स्वयं मालिकाना हक के प्रमाण के रूप में काम करेगा या मौजूदा दस्तावेजों से जुड़े एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन रिकॉर्ड के रूप में। स्वामित्व सत्यापन, त्रुटियों के सुधार और विवादित प्रविष्टियों से संबंधित नियम विधानसभा में बिल पास होने के बाद तय किए जाएंगे।

पायलट प्रोजेक्ट: अब तक कितना हुआ काम?

दिल्ली के 48 ग्रामीण गांवों में से 30 गांवों को इस प्रोजेक्ट के पायलट फेज में शामिल किया गया है। इन गांवों में सर्वे और पहचान का काम पूरा हो चुका है।संबंधित दस्तावेजों को संकलित करते हुए प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा रहे हैं। अब तक 12232 संपत्तियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। इनमें से 8423 (लगभग 69 प्रतिशत) संपत्तियां पूरी तरह विवाद-मुक्त पाई गई हैं। दक्षिण और उत्तर-पश्चिम जिलों में सर्वे की गई सभी संपत्तियों के मामलों का शत-प्रतिशत समाधान हो चुका है। इन रिकॉर्ड्स को अंततः दिल्ली ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन इंफॉर्मेशन सिस्टम (DORIS) के साथ रियल-टाइम में इंटिग्रेट किया जाएगा। इन 30 गांवों के अनुभवों के आधार पर पायलट फेज पूरा होते ही इस प्रोजेक्ट का विस्तार पूरी दिल्ली की आवासीय, व्यावसायिक और अन्य श्रेणियों की संपत्तियों पर किया जाएगा।

दिल्लीवासियों को क्या होगा फायदा?

व्यवस्थित रिकॉर्ड न होने की वजह से दिल्लीवासियों को दशकों से मालिकाना हक साबित करने, संपत्ति के लेन-देन, विरासत, बैंक लोन प्राप्त करने, नक्शा पास कराने और अदालती विवादों को सुलझाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। प्रामाणिक डिजिटल रिकॉर्ड बनने से सीमा विवाद खत्म होंगे और नागरिकों को संपत्ति के हस्तांतरण, बैंक ऋण लेने, उत्तराधिकार और मकान का नक्शा पास कराने में काफी आसानी, पारदर्शिता और भरोसा मिलेगा।

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यात्री परिवहन विजन समिट 2026: सीएम डॉ. मोहन बदलने जा रहे पब्लिक ट्रांसपोर्ट की दिशा, कई एक्सपर्ट एक साथ करेंगे मंथन, जानें क्या-क्या होगा समिट में?

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पब्लिक ट्रांसपोर्ट की दिशा बदलने जा रहे हैं। यह दिशा एक ओर जहां आम लोगों की जिंदगी बेहतर करेगी, वहीं सरकारी सिस्टम को भी लाभ पहुंचाएगी। दरअसल, 11-12 सितंबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 'यात्री परिवहन विजन समिट-2026' का आयोजन होगा। यह समिट मध्यप्रदेश से सार्वजनिक परिवहन के नए भविष्य का निर्माण करेगी। इस समिट में कई विशेषज्ञ परिवहन संबंधित विषयों पर मंथन करेंगे। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समिट का औपचारिक उद्घाटन करेंगे और मध्य प्रदेश यात्री मोबिलिटी विजन 2030 पर संबोधन देंगे। वे मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना और यात्री परिवहन को सुदृढ़ करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका पर विचार रखेंगे। इसके साथ-साथ सीएम डॉ. मोहन उद्योग जगत के प्रतिनिधियों-निवेशकों और नीति-निर्माताओं के साथ संवाद करेंगे। इस दौरान वे  शिखर सम्मेलन स्मारिका-ज्ञान प्रकाशन का विमोचन भी करेंगे।

 

रणनीतिक साझेदारियों से परिवर्तन की बदलेगी दिशा-बता दें, यह समिट वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, नीति-निर्माताओं, शहरी परिवहन विशेषज्ञों, परिवहन प्राधिकरणों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, ओईएम, वित्तीय संस्थानों और उद्योग जगत के अग्रणी नेताओं को एक मंच पर लाएगी। यह समिट नवाचार, डिजिटल तकनीकों और रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन में परिवर्तन को नई दिशा देगी। गौरतलब है कि 'यात्री परिवहन विजन समिट 2026' भारत का प्रमुख राष्ट्रीय मंच है। यह मंच स्मार्ट-सुरक्षित-सतत और डिजिटल सार्वजनिक परिवहन के नए युग को गति देने के लिए समर्पित है। यह मंच इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, AI-संचालित फ्लीट प्रबंधन, डिजिटल टिकटिंग, एकीकृत मोबिलिटी समाधान और पीपीपी आधारित नवाचारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श और सहयोग का अवसर देगा।

 

'यात्री परिवहन विजन समिट-2026' के पहले दिन उद्घाटन सत्र, मुख्य वक्तव्य, उच्चस्तरीय पैनल चर्चाएं, उद्योग प्रदर्शनी, नेटवर्किंग सत्र तथा ज्ञान-साझाकरण संबंधी संवाद आयोजित किए जाएंगे। इनमें नीति, नवाचार, निवेश और यात्री परिवहन के भविष्य पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जबकि, दूसरे दिन प्रतिनिधियों के लिए उज्जैन सांस्कृतिक-विरासत भ्रमण आयोजित किया जाएगा। इसमें श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाकाल दर्शन शामिल होगा। इसके माध्यम से मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के साथ-साथ राज्य की पर्यटन क्षमता को बढ़ावा दिया जाएगा।

 

समिट में इन विषयों पर होगी चर्चा

– एमपी मोबिलिटी विजन 2030: बस संचालन एवं इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम्स (ITMS) में सार्वजनिक-निजी भागीदारी

– भविष्य के लिए तैयार परिवहन अधोसंरचना: पीपीपी के माध्यम से निवेश के अवसरों को बढ़ावा देना

– डेटा आधारित निर्णय: इंट्रासिटी एवं इंटरसिटी बस मार्गों और संचालन की योजना (AI आधारित एनालिटिक्स सहित)

– वित्तीय रूप से टिकाऊ सार्वजनिक बस संचालन के निर्माण की रणनीतियां

– सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में जनसुरक्षा, विश्वसनीयता एवं सुविधा

– हरित मोबिलिटी: स्वच्छ ईंधन एवं भविष्य के लिए तैयार गाड़ियों का काफिला

– एकीकृत टिकटिंग एवं स्वचालित किराया संग्रहण के माध्यम से निर्बाध यात्राओं को सक्षम बनाना

– यात्री परिवहन में रोजगार एवं उद्यमिता के सृजन के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उठाना

 

इन पर मिल सकते हैं अपेक्षित सकारात्मक परिणाम

– मध्यप्रदेश यात्री मोबिलिटी विजन 2030 के लिए तैयार हो सकता है सकता है रोडमैप

– यात्री परिवहन में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) पहलों में आ सकती है तेजी

– डिजिटल रूपांतरण एवं डेटा-आधारित मोबिलिटी गवर्नेंस को मिल सकता है बढ़ावा

– सतत एवं हरित मोबिलिटी समाधानों में निवेश को मिल सकता है प्रोत्साहन

– वित्तीय स्थिरता एवं गैर-किराया राजस्व सृजन के लिए नवाचारी मॉडलों की हो सकती है पहचान

– सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत एवं प्रौद्योगिकी भागीदारों के बीच बेहतर हो सकता है सहयोग

– केंद्र सरकार की योजनाओं एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी से रोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों का हो सकता है सृजन

PM-KISAN 24th Installment: कब आएगी पीएम किसान की अगली किस्त? इन 3 जरूरी कामों के बिना अटक सकते हैं ₹2000

PM Kisan Next Installment Update: केंद्र सरकार की सबसे लोकप्रिय और महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को लेकर किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके खातों में अगली यानी 24वीं किस्त के ₹2,000 कब ट्रांसफर किए जाएंगे।

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस योजना को वर्ष 2030-31 तक विस्तार दिए जाने के बाद अब अगली किस्तों को लेकर स्थिति और भी लगभग स्पष्ट हो गई है। आइए जानते हैं कि अगली किस्त का पैसा आपके बैंक खाते में किस महीने आ सकता है और किन किसानों का पैसा अटक सकता है।

कब आ सकती है PM-KISAN की 24वीं किस्त?

पीएम किसान योजना के नियमानुसार, किसानों को हर साल ₹6,000 की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों (₹2,000-₹2,000) में दी जाती है। यह पैसा हर 4 महीने के अंतराल पर सीधे DBT के जरिए खातों में भेजा जाता है। सालाना किस्तों का चक्र:

  • पहली किस्त: अप्रैल से जुलाई के बीच
  • दूसरी किस्त: अगस्त से नवंबर के बीच
  • तीसरी किस्त: दिसंबर से मार्च के बीच

23वीं किस्त का पैसा जारी किए जाने के बाद, अब योजना के नियमित चक्र के अनुसार पीएम किसान योजना की अगली यानी 24वीं किस्त नवंबर-दिसंबर 2026 के बीच देश के करोड़ों पात्र किसानों के खातों में ट्रांसफर की जा सकती है।

इन 3 जरूरी कामों के बिना अटक सकती है अगली किस्त

अगर आप चाहते हैं कि अगली किस्त का पैसा बिना किसी रुकावट के सीधे आपके बैंक खाते में पहुंचे, तो पोर्टल पर जाकर ये 3 काम तुरंत पूरे कर लें:

ई-केवाईसी प्रक्रिया: जिन किसानों की e-KYC पूरी नहीं हुई है, उन्हें अगली किस्त का लाभ नहीं मिलेगा। इसे आप पीएम किसान पोर्टल (pmkisan.gov.in) पर जाकर आधार OTP या नजदीकी CSC सेंटर से बायोमेट्रिक के जरिए पूरा कर सकते हैं।

लैंड सीडिंग: आपकी खेती की जमीन का सरकारी पोर्टल पर डिजिटल सत्यापन होना अनिवार्य है। यदि स्टेटस में ‘Land Seeding – No’ दिख रहा है, तो अपने तहसील या कृषि अधिकारी से संपर्क करें।

डीबीटी और आधार-बैंक लिंक: आपका बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए और उसमें DBT का ऑप्शन एक्टिव होना अनिवार्य है।

पोर्टल पर ऐसे चेक करें अपना बेनेफिशियरी स्टेटस

  • अगर आप चेक करना चाहते हैं कि आपको अगली किस्त मिलेगी या नहीं:
  • सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं।
  • होमपेज पर ‘Farmers Corner’ सेक्शन में जाएं और ‘Know Your Status’ पर क्लिक करें।
  • अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा दर्ज करके ‘Get Data’ पर क्लिक करें।
  • स्क्रीन पर आपकी ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग और बैंक आधार लिंकिंग का स्टेटस दिख जाएगा। यदि सभी के आगे ‘YES’ लिखा है, तो आपकी अगली किस्त सुरक्षित है।