ITR Filing Deadline: 31 अगस्त की ITR डेडलाइन छूटने पर क्या होगा? फिर कैसे भर सकते हैं रिटर्न, कितना देना पड़ेगा जुर्माना

अगर आपने अभी तक ITR दाखिल नहीं की है, तो आपके पास सिर्फ कुछ दिन बचे हैं। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए कुछ टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है। समय पर रिटर्न दाखिल करने से लेट फीस और बकाया टैक्स पर लगने वाले ब्याज से बच सकते हैं।

अगर 31 अगस्त तक रिटर्न नहीं भर पाए, तो भी मामला खत्म नहीं होगा। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड ITR दाखिल कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए लेट फीस देनी पड़ सकती है। साथ ही, कुछ मामलों में टैक्स लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी छूट सकता है।

31 अगस्त की डेडलाइन उन कुछ टैक्सपेयर्स पर लागू होती है, जिन्हें ITR-3, ITR-4, ITR-5 या ITR-7 दाखिल करना है। इसमें ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय है, लेकिन उनके खातों का टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है।

31 अगस्त की डेडलाइन छूट गई तो क्या होगा?

डेडलाइन निकल जाने का मतलब यह नहीं है कि अब ITR नहीं भर सकते। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, अगर उससे पहले आपका असेसमेंट पूरा हो जाता है, तो उसके बाद रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकता।

देरी से ITR भरने पर लेट फीस भी लगती है। अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख से ज्यादा है, तो ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है। वहीं ₹5 लाख तक की कुल आय वालों के लिए यह फीस ₹1,000 है।

अगर आपका टैक्स भी बकाया है, तो उस पर 1% प्रति महीने या महीने के किसी हिस्से के लिए ब्याज लग सकता है। यह ब्याज इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234A के तहत लगता है।

क्या देर से ITR भरने पर रिफंड मिलेगा?

हां, सिर्फ डेडलाइन चूकने से आपका टैक्स रिफंड खत्म नहीं हो जाता। अगर आपको रिफंड मिलना है, तो आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल करके उसे क्लेम कर सकते हैं।

लेकिन रिटर्न दाखिल करने के बाद उसे वेरिफाई करना जरूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ई-वेरिफिकेशन के लिए 30 दिन का समय दिया है। रिटर्न वेरिफाई होने के बाद ही रिफंड की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

नुकसान को आगे एडजस्ट करने में दिक्कत

डेडलाइन के बाद ITR भरने का एक बड़ा नुकसान हो सकता है। यह लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने से जुड़ा है। मान लीजिए आपको बिजनेस, शेयर बाजार या F&O ट्रेडिंग में नुकसान हुआ है। आप इस नुकसान को आने वाले वर्षों की कमाई से एडजस्ट करके टैक्स बचा सकते हैं। लेकिन अगर आपने ITR समय पर दाखिल नहीं किया, तो कुछ तरह के नुकसान को आगे ले जाने का फायदा नहीं मिल सकता।

यानी सिर्फ लेट फीस का मामला नहीं है। देर से ITR भरने पर भविष्य में टैक्स बचाने का मौका भी जा सकता है।

ITR में गलती हो गई तो क्या करें?

अगर ITR दाखिल करने के बाद आपको कोई गलती दिखती है या कोई जानकारी छूट गई है, तो आप धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आम तौर पर रिवाइज्ड रिटर्न 31 मार्च 2027 तक दाखिल की जा सकती है। हालांकि, अगर उससे पहले असेसमेंट पूरा हो जाता है, तो यह सुविधा खत्म हो सकती है। रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने पर पुरानी रिटर्न की जगह नई रिटर्न मानी जाती है। इसे भी दोबारा वेरिफाई करना पड़ता है।

लेकिन एक बात ध्यान रखें। देर से ITR भरने की वजह से जो टैक्स लाभ पहले ही खो चुके हैं, रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से वे वापस नहीं मिलते। इसमें कुछ तरह के लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी शामिल है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

क्या कोई प्राइवेट कंपनी आपके ITR और EPFO डेटा को एक्सेस कर सकती है? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है

क्या प्राइवेट कंपनियां आपका इनकम टैक्स रिटर्न या प्रोविडेंट फंड रिकॉर्ड एक्सेस कर सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से उन आरोपों की जांच करने को कहा है जिनमें यह कहा गया है कि प्राइवेट वेरिफिकेशन कंपनियां लोगों के एंप्लॉयमेंट और फाइनेंशियल जानकारियां एक्सेस कर रही हैं और उनका व्यावसायिक इस्तेमाल कर रही हैं।

आईटीआर और ईपीएफओ को डेटा को संवेदनशील माना जाता है

सरकार ने एक जनहित याचिका पर यह निर्देश जारी किया है। इस याचिका में कहा गया है कि एक ऐसा कमर्शियल ईकोसिस्टम बना है, जिसमें EPFO/UAN Records और PAN से जुड़े फाइनेंशियल डेटा को प्राइवेट कंपनियां एक्सेस कर रही हैं। ऐसे डेटा को काफी संवेदनशील माना जाता है।

याचिकाकर्ता ने प्राइवेट कंपनियों के डेटा के एक्सेस पर सवाल उठाए हैं

सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि किसी कंपनी को ऐसी जानकारियां गैरकानूनी तरीके से एक्सेस करते नहीं पाया है। उसने यह भी नहीं कहा है कि प्राइवेट कंपनियों के पास लोगों के आईटीआर और ईपीएफओ रिकॉर्ड के इस्तेमाल की आजादी है। लेकिन, इस याचिका से एक बड़ा मसले को लेकर सवाल उठे हैं, जो करोड़ों भारतीयों से जुड़ा है।

डेटा एक्सेस के मसले से जुड़े तीन अहम सवाल सामने आए हैं

इस मसले से जुड़े कई सवाल हैं। पहला, सरकारी एजेंसियों के पास लोगों की जो व्यक्तिगत जानकारियां हैं, उनमें से किन जानकारियों का इस्तेमाल प्राइवेट कंपनियां कर सकती हैं? दूसरा, उनके इस्तेमाल का तरीका क्या होगा? तीसरा, क्या वे व्यक्ति विशेष से उसकी इन जानकारियों के इस्तेमाल की इजाजत लेती हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत जानकारियों के इस्तेमाल पर चिंता जताई है

सुप्रीम कोर्ट ने लोगों की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारियों के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताई है। उसने सरकार से इस मामले की जांच करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने कहा कि सरकार इस समस्या पर लगाम लगाने के तरीके पर विचार कर सकती है। वह इस फील्ड के एक्सपर्ट्स की मदद ले सकती है।

याचिकाकर्ता ने कुछ प्राइवेट सर्विसेज के एडवर्टाइजमेंट पर सवाल उठाए हैं

याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत में उन प्राइवेट सर्विसेज का जिक्र किया है, जो कथित रूप से ‘ईपीएफओ पासबुक एपीआई’, ‘फॉर्म26 एपीआई’ और ‘इनकम टैक्स रिटर्न एपीआई’ जैसे प्रो़क्ट्स का विज्ञापन देती हैं। उन्होंने कहा है कि इससे यह सवाल उठता है कि ऐसी संवेदनशील जानकारियां कैसे हासिल या वेरिफाय की जा रही हैं।

ITR Notice: टाइम पर ITR भर दिया? फिर भी आ सकता है इनकम टैक्स का नोटिस! जानिए बचाव का सही तरीका

Income Tax Notice After Filing ITR: अगर आपने 31 जुलाई या तय समयसीमा के भीतर अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर दिया है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपकी जिम्मेदारी खत्म हो गई। समय पर ITR फाइल करने से सिर्फ डेडलाइन पूरी होती है, लेकिन यह इस बात की गारंटी नहीं है कि आपका रिटर्न पूरी तरह सही और सटीक है।

इनकम टैक्स विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों (AIS/फॉर्म 26AS) और आपके द्वारा दी गई जानकारी में जरा सी भी गड़बड़ी पाई जाने पर आपको इनकम टैक्स का नोटिस आ सकता है।

समय पर ITR भरने के बाद भी क्यों आता है टैक्स नोटिस?

विशेषज्ञों के मुताबिक, टैक्स रिटर्न दाखिल करना पहला कदम है। नोटिस आने के ये कुछ प्रमुख कारण हैं:

  • TDS और टैक्स क्रेडिट मिसमैच: फॉर्म 26AS या AIS में दिख रहा TDS/TCS और रिटर्न में क्लेम किया गया TDS आपस में मेल न खाना।
  • छूटी हुई आय: सेविंग्स अकाउंट का ब्याज, FD का ब्याज, शेयर या म्यूचुअल फंड से मिला डिविडेंड और कैपिटल गेंस को ITR में न दर्शाना।
  • हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन: जमीन-जायदाद की खरीद-बिक्री, क्रेडिट कार्ड का भारी बिल या बड़े कैश डिपॉजिट का ब्योरा रिटर्न से अलग होना।
  • गलत ITR फॉर्म चुनना: अपनी आय के स्रोतों के हिसाब से सही फॉर्म (ITR-1, 2, 3 या 4) की जगह गलत फॉर्म चुनना।
  • गलत डिडक्शन या क्लेम: बिना किसी पक्के सबूत के फर्जी HRA, 80C या अन्य टैक्स छूट का क्लेम करना।

इनकम टैक्स नोटिस के प्रकार

विभाग अलग-अलग कारणों से अलग-अलग धाराओं के तहत नोटिस भेजता है:

सेक्शन 143(1) इंटिमेशन नोटिस: यह रिटर्न प्रोसेस होने के बाद आता है। अगर विभाग को आपकी आय, टैक्स क्रेडिट या डिडक्शन की गणना में कोई गणितीय गलती मिलती है, तो यह इंटिमेशन जारी किया जाता है।

सेक्शन 139(9) डिफेक्टिव रिटर्न: रिटर्न में कोई जानकारी अधूरी रहने या गलत फॉर्म चुनने पर ‘डिफेक्टिव रिटर्न’ का नोटिस मिलता है।

धारा 142(1) इंक्वायरी नोटिस: जब असेसिंग ऑफिसर (AO) को आपके रिटर्न के संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज चाहिए होते हैं।

धारा 143(2) स्क्रूटनी नोटिस: जब आपका रिटर्न विस्तृत जांच के लिए चुना जाता है। इसमें आपको अपने दावों के समर्थन में सबूत देने होते हैं।

धारा 148 – Income Escaped असेसमेंट: जब टैक्स अधिकारी के पास यह मानने की वजह हो कि आपकी कोई आय टैक्स के दायरे से छूट गई है।

धारा 156 – डिमांड नोटिस: अगर जांच के बाद विभाग यह पाता है कि आप पर टैक्स, ब्याज या पेनल्टी की कोई देनदारी बनती है, तो यह नोटिस भेजा जाता है।

नोटीस मिलने पर क्या करें? अपनाएं ये स्टेप्स

अगर आपको इनकम टैक्स विभाग से कोई नोटिस मिलता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ये स्टेप्स को फॉलो करें:

सबसे पहले इनकम टैक्स के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल (incometax.gov.in) पर लॉगिन करें। नोटिस का DIN, असेसमेंट ईयर और PAN नंबर जरूर वेरीफाई करें। नोटिस में उठाए गए मुद्दे की तुलना अपने ITR, Form 26AS, AIS/TIS और बैंक स्टेटमेंट्स से करें।

अगर गलती आपकी तरफ से हुई है, तो तय समय में रिवाइज्ड रिटर्न या अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) दाखिल करें। अगर आपका रिटर्न बिल्कुल सही है, तो पोर्टल पर ही मांगे गए कागजात और सबूत अपलोड करके अपना पक्ष रखें।

नोटिस में दी गई डेडलाइन को कभी नजरअंदाज न करें। क्योंकि नोटिस का जवाब न देने पर भारी पेनल्टी, अतिरिक्त ब्याज या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Income Tax Refund: अभी तक इनकम टैक्स रिफंड नहीं आया? ये 5 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

Income Tax Refund: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद ज्यादातर टैक्सपेयर्स को रिफंड का इंतजार रहता है। कई लोगों के खाते में रिफंड जल्दी आ जाता है। हालांकि, कुछ लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। अगर आपने भी रिटर्न भर दिया है, लेकिन अभी तक रिफंड नहीं मिला, तो इसकी कई वजहें हो सकती हैं। आइए जानते हैं कि रिफंड किन कारणों से अटक सकता है।

1. ITR अभी प्रोसेस नहीं हुआ

रिटर्न फाइल करने के बाद इनकम टैक्स विभाग उसकी जांच करता है। जब तक ITR प्रोसेस नहीं होगा, तब तक रिफंड जारी नहीं किया जाएगा। अगर पोर्टल पर ‘Return Under Processing’ दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि विभाग अभी आपके रिटर्न की जांच कर रहा है।

2. बैंक अकाउंट में दिक्कत

रिफंड सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है। अगर आपका बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट नहीं है, PAN से लिंक नहीं है या बैंक की जानकारी गलत है, तो रिफंड अटक सकता है। इसलिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर बैंक अकाउंट का स्टेटस एक बार जरूर जांच लें।

3. ITR में कोई गलती

अगर रिटर्न में बैंक अकाउंट नंबर, IFSC, आय, TDS या दूसरी जानकारी गलत भर दी गई है, तो रिफंड में देरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में जरूरत पड़ने पर संशोधित रिटर्न (Revised Return) दाखिल करना पड़ सकता है।

4. TDS और AIS में अंतर

अगर आपके ITR में दी गई TDS की जानकारी, Form 26AS या AIS से मेल नहीं खाती, तो इनकम टैक्स विभाग अतिरिक्त जांच कर सकता है। इससे रिफंड आने में ज्यादा समय लग सकता है।

5. रिटर्न जांच के लिए चुना गया

कुछ ITR को विभाग स्क्रूटनी या अतिरिक्त वेरिफिकेशन के लिए चुनता है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने के बाद ही रिफंड जारी किया जाता है। अगर विभाग की तरफ से कोई नोटिस आया है, तो उसका जवाब समय पर देना जरूरी है।

रिफंड का स्टेटस कैसे चेक करें?

  • इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करें।
  • e-File मेन्यू में जाकर Income Tax Returns पर क्लिक करें।
  • View Filed Returns विकल्प चुनें।
  • संबंधित असेसमेंट ईयर (Assessment Year) का ITR चुनें।
  • यहां आपको रिटर्न और रिफंड का मौजूदा स्टेटस दिख जाएगा।
  • अगर रिफंड जारी हो चुका है, तो उसका ट्रांजैक्शन रेफरेंस और भुगतान की जानकारी भी यहीं मिल जाएगी।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

AI की मदद से भरा ITR, फिर आया इनकम टैक्स नोटिस! CA की पोस्ट ने मचाई हलचल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की सोशल मीडिया पोस्ट ने नई चर्चा शुरू कर दी है। पोस्ट में दावा किया गया कि एक व्यक्ति ने AI की मदद से अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल किया, लेकिन बाद में उसे इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस मिल गया।

X यूजर और चार्टर्ड अकाउंटेंट बताए जा रहे @carajendra89 ने इस मामले को शेयर करते हुए लिखा, “AI से ITR फाइल करने के नतीजे आने शुरू हो गए हैं।” हालांकि, इस बातचीत में कितनी सच्चाई है इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

ITR नोटिस मिलने के बाद मांगी टैक्स एक्सपर्ट की मदद

वायरल पोस्ट में एक बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर किया गया था, जिसमें एक व्यक्ति टैक्स नोटिस मिलने के बाद विशेषज्ञ की मदद मांग रहा था। उस मैसेज में लिखा था कि उसने AI की सहायता से अपना ITR दाखिल किया था और अब उसे इनकम टैक्स नोटिस मिला है। वह इस मामले को समझने और समाधान के लिए किसी टैक्स एक्सपर्ट से जुड़ना चाहता था।

इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगा कि क्या टैक्स जैसे महत्वपूर्ण मामलों में पूरी तरह AI पर भरोसा करना सही है?

लोगों ने AI के इस्तेमाल पर दी अलग-अलग राय

पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो गुटों में बंट गए। कुछ लोगों ने कहा कि AI एक उपयोगी टूल है, लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। एक यूजर ने सलाह दी कि लोगों को समझना होगा कि AI का इस्तेमाल कहां करना चाहिए और कहां नहीं। खासकर ITR जैसे वित्तीय मामलों में पूरी तरह AI पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।

कुछ लोगों ने कहा- आसान ITR के लिए AI काफी है

वहीं, कई यूजर्स ने AI का समर्थन भी किया। उनका कहना था कि सामान्य टैक्स मामलों में AI काफी मददगार साबित हो सकता है। एक यूजर ने बताया कि व्यक्तिगत ITR-1 और ITR-2 जैसे रिटर्न उन्होंने AI की मदद से सफलतापूर्वक फाइल किए हैं। उनके मुताबिक, AI की सहायता से न सिर्फ काम आसान हुआ बल्कि टैक्स प्रक्रिया को समझने का मौका भी मिला।

क्या AI भविष्य में CA की जगह ले सकता है?

कुछ लोगों ने इस बहस को भविष्य की टैक्स व्यवस्था से जोड़ दिया। एक यूजर ने कहा कि आने वाले समय में AI कई ऐसे काम कर सकता है, जिन्हें आज टैक्स प्रोफेशनल संभालते हैं। हालांकि, कई लोगों का मानना था कि AI जानकारी देने और प्रक्रिया आसान बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन जटिल टैक्स मामलों में विशेषज्ञ की सलाह अभी भी जरूरी हो सकती है।

CA ने बताया- युवाओं को सावधान रहने की जरूरत

कुछ टैक्स प्रोफेशनल्स का कहना था कि ऐसे मामलों को सामने लाना जरूरी है, ताकि खासकर युवा और टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग सावधानी बरतें। एक यूजर ने कहा कि सिर्फ तकनीक की जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि हर वित्तीय काम बिना विशेषज्ञ सलाह के किया जा सकता है। टैक्स नियमों की बारीकियां समझना भी उतना ही जरूरी है।

एक ही AI से गलती भी सुधारी जा सकती है

वहीं, कुछ लोगों ने यह तर्क भी दिया कि अगर AI की मदद से कोई गलती हुई है तो उसी तकनीक की मदद से उसे ठीक भी किया जा सकता है। एक यूजर ने सुझाव दिया कि AI का इस्तेमाल रिटर्न में सुधार करने और सही तरीके से दोबारा सबमिट करने के लिए किया जा सकता है।

AI बनाम एक्सपर्ट की बहस फिर तेज

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या AI टैक्स जैसे संवेदनशील कामों के लिए पर्याप्त है या फिर विशेषज्ञों की जरूरत बनी रहेगी। जहां एक तरफ लोग AI को समय बचाने वाला और आसान विकल्प मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग वित्तीय मामलों में सावधानी और विशेषज्ञ सलाह को जरूरी बता रहे हैं।

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मां का ITR भरते समय हुई देरी, बेटे को लगा 5,000 रुपये का झटका, वायरल हुआ मामला

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने में हुई थोड़ी सी देरी ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। एक यूजर ने दावा किया कि सिर्फ कुछ घंटों की देरी के कारण मामूली टैक्स राशि पर हजारों रुपये की लेट फीस जुड़ गई। इस मामले ने एक बार फिर टैक्स नियमों, समय पर रिटर्न भरने की जरूरत और आम लोगों से होने वाली छोटी गलतियों पर चर्चा शुरू कर दी है। जहां कुछ लोग इसे नियमों का जरूरी हिस्सा बता रहे हैं, वहीं कई यूजर्स का मानना है कि पहली बार फाइल करने वालों या कुछ घंटे की देरी जैसे मामलों में मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल इस पोस्ट के बाद लोग जुर्माने की व्यवस्था और टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को लेकर अपनी-अपनी राय साझा कर रहे हैं।

पहली बार मां का ITR भर रहा था शख्स

एक्स यूजर @poojaofficial5 ने अपनी पोस्ट में बताया कि एक व्यक्ति पहली बार अपनी मां का इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल भर रहा था। पोस्ट के मुताबिक, वह चाहता था कि रिटर्न में कोई गलती न हो, इसलिए उसने एक जरूरी दस्तावेज मिलने का इंतजार किया। उसका मकसद सही जानकारी के साथ ITR जमा करना था। लेकिन इसी इंतजार के दौरान फाइलिंग की आखिरी तारीख निकल गई।

सिर्फ ढाई घंटे की देरी और लग गया ₹5,000 जुर्माना

पोस्ट में दावा किया गया कि जब वह इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉग इन कर पाया, तब तक डेडलाइन खत्म हुए सिर्फ करीब ढाई घंटे हुए थे। हालांकि, सिस्टम ने देरी के लिए तय लेट फाइलिंग फीस जोड़ दी। इसके बाद जो टैक्स राशि पहले ₹850 थी, वह बढ़कर ₹5,850 हो गई। यूजर ने सवाल उठाया कि जब टैक्स की असली रकम इतनी कम थी और देरी भी कुछ घंटों की थी, तो क्या जुर्माना इतना ज्यादा होना उचित है?

यूजर ने नियमों में मानवीय गलती की जगह देने की बात कही

पोस्ट में कहा गया कि टैक्स नियमों का उद्देश्य लोगों को समय पर रिटर्न भरने के लिए प्रेरित करना है, लेकिन कई बार आम लोगों से छोटी गलतियां हो सकती हैं। यूजर ने लिखा कि पहली बार ITR भरने वालों या कुछ घंटों की देरी जैसे मामलों में कुछ राहत या ग्रेस पीरियड पर विचार किया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय

इस मामले पर इंटरनेट यूजर्स भी दो हिस्सों में बंट गए। कुछ लोगों ने सिस्टम को सख्त बताया और कहा कि छोटी देरी पर इतना बड़ा जुर्माना परेशान करने वाला है। एक यूजर ने लिखा कि टैक्स फाइलिंग के लिए लोगों के पास काफी समय होता है, इसलिए आखिरी समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए। वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि नियम जरूरी हैं, लेकिन ईमानदारी से की गई कोशिश और छोटी मानवीय गलतियों के लिए कुछ गुंजाइश होनी चाहिए।

लोगों ने दी समय से ITR भरने की सलाह

कई यूजर्स ने इस घटना को लेकर लोगों को सलाह दी कि आखिरी तारीख का इंतजार न करें। पहले से दस्तावेज तैयार रखकर समय पर ITR दाखिल करने से ऐसी परेशानियों से बचा जा सकता है। यह मामला एक बार फिर चर्चा में ले आया है कि टैक्स नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन छोटे स्तर की गलतियों और जानबूझकर की गई लापरवाही में अंतर कैसे तय किया जाए।

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Revised ITR Rules: 31 जुलाई से पहले भरा ITR और हो गई गलती? जानें रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने का सही तरीका

How to File Revised ITR: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 खत्म हो चुकी है। कई टैक्सपेयर्स ने आखिरी समय की जल्दबाजी में अपना रिटर्न तो जमा कर दिया, लेकिन बाद में पता चला कि कोई बैंक ब्याज, शेयर बाजार से हुआ मुनाफा या फिर कोई टैक्स सेविंग डिडक्शन जोड़ना छूट गया है।

अगर आपने भी अपने ITR में कोई गलत जानकारी भर दी है या कोई आय छिपा ली है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 139(5) आपको अपनी गलती सुधारने का पूरा मौका देता है। आइए जानते हैं कि धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने के नियम, डेडलाइन और आसान तरीका क्या है।

क्या होता है ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ (सेक्शन 139(5))?

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(5) के तहत अगर किसी टैक्सपेयर को अपना ओरिजिनल ITR सबमिट करने के बाद यह अहसास होता है कि उससे कोई गलत जानकारी चली गई है या कोई ब्योरा दर्ज होने से रह गया है, तो वह एक संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकता है।

कौन कर सकता है फाइल?: जिस भी व्यक्ति ने सेक्शन 139(1) के तहत समय पर (31 जुलाई तक या समय बीतने के बाद बिलेटेड रिटर्न (सेक्शन 139(4)) जमा किया है, वह रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकता है।

कितनी बार कर सकते हैं रिवाइज?: कानूनन आप अपने ITR को एक से अधिक बार भी रिवाइज कर सकते हैं, बशर्ते वह डेडलाइन के भीतर हो।

रिवाइज्ड ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2026 है। अगर इनकम टैक्स विभाग द्वारा आपके रिटर्न का एसेसमेंट (सेक्शन 144) पहले ही पूरा कर लिया जाता है, तो एसेसमेंट पूरा होने के बाद या 31 दिसंबर 2026 जो भी पहले हो तक ही आप इसे रिवाइज कर सकेंगे।

रिवाइज्ड ITR फाइल करते समय ध्यान रखें ये 4 अहम बातें

1- ओरिजिनल ITR का पावती नंबर: रिवाइज्ड रिटर्न भरते समय आपको अपने पुराने ITR का पावती नंबर और फाइल करने की तारीख दर्ज करनी होगी।

2- सही ITR फॉर्म का चयन: आप जिस फॉर्म (ITR-1, ITR-2 आदि) में पहले रिटर्न दाखिल कर चुके हैं, उसी फॉर्म का उपयोग करें, जब तक कि आपकी आय के स्रोतों में बदलाव न हुआ हो।

3- AIS और Form 26AS से मिलान: नई फाइलिंग से पहले अपने Annual Information Statement (AIS) को दोबारा ध्यान से जांचें ताकि इस बार कोई ब्याज, डिविडेंड या कैपिटल गेन छूट न जाए।

4- ई-वेरिफिकेशन अनिवार्य: ओरिजिनल ITR की तरह ही रिवाइज्ड ITR को भी सबमिट करने के बाद 30 दिनों के भीतर e-Verify करना अनिवार्य है। बिना वेरिफिकेशन के आपका रिवाइज्ड रिटर्न अमान्य माना जाएगा।

ई-फाइलिंग पोर्टल पर रिवाइज्ड ITR भरने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

  • स्टेप 1: इनकम टैक्स विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल (eportal.incometax.gov.in) पर जाएं और अपने PAN/Aadhaar तथा पासवर्ड से लॉगिन करें।
  • स्टेप 2: ‘e-File’ टैब में जाएं > ‘Income Tax Returns’ > ‘File Income Tax Return’ पर क्लिक करें।
  • स्टेप 3: Assessment Year 2026-27 चुनें और Filing Type में ‘Revised Return u/s 139(5)’ सिलेक्ट करें।
  • स्टेप 4: स्क्रीन पर मांगे जाने अनुसार अपने ओरिजिनल ITR का Acknowledgement Number और Filing Date दर्ज करें।
  • स्टेप 5: अब फॉर्म में जहाँ भी गलती हुई थी (जैसे आय बढ़ाना, छूटी हुई डिडक्शन जोड़ना या बैंक डिटेल सही करना), उसे ठीक करें।
  • स्टेप 6: टैक्स लायबिलिटी की दोबारा गणना करें और अगर कोई अतिरिक्त टैक्स बनता है, तो उसका भुगतान करें।
  • स्टेप 7: रिटर्न सबमिट करें और तुरंत Aadhaar OTP या नेट बैंकिंग के जरिए इसे e-Verify कर दें।

ITR: 31 जुलाई तक फाइल किए गए करीब 6 करोड़ रिटर्न, इनकम के ट्रेंड में दिखा दिलचस्प बदलाव

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख तक कुल 5.9 लाख रिटर्न फाइल हुए। आईटीआर फॉर्म-1 और आईटीआर फॉर्म-2 से रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई थी। फाइल कुल रिटर्न की संख्या की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 1 अगस्त को दी है।

आईटीआर-3 और ITR-4 फॉर्म वाले टैक्सपेयर्स के लिए अंतिम तारीख 31 अगस्त

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की 31 जुलाई की अंतिम तारीख उन टैक्सपेयर्स के लिए थी, जिनके अकाउंट्स का ऑडिट जरूरी नहीं है। ऐसे टैक्सपेयर्स जिनकी बिजनेस और प्रोफेशनल इनकम है, उनके लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 31 अगस्त है। आईटीआर-1 का इस्तेमाल ऐसे रेजिडेंट इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स करते हैं, जिनकी कुल सालाना इनकम 50 लाख रुपये तक होती है। उनकी इनकम में सैलरी, एक घर से इनकम और 5,000 रुपये तक की एग्रीकल्चर इनकम शामिल हो सकती है।

अब ज्यादातर टैक्सपेयर्स की इनकम का स्रोत सिर्फ सैलरी नहीं

ITR फॉर्म 2 उन टैक्सपेयर्स के लिए है, जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से कोई इनकम नहीं है, लेकिन कैपिटल गेंस से इनकम है। टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म क्लियरटैक्स के डेटा के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में टैक्स फाइलिंग का पैटर्न बदला है। अब ज्यादा टैक्सपेयर्स सैलरी के अलावा इनकम के दूसरे स्रोतों की भी रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

कैपिटल गेंस दिखाने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या भी बढ़ी

इस साल रिटर्न फाइल कर चुके टैक्सपेयर्स में से सिर्फ 42 फीसदी ने सैलरी को इनकम का मुख्य स्रोत दिखाया है। AY2022-23 में यह संख्या 82 फीसदी थी। टैक्सपेयर्स के इनकम में कैपिटल गेंस बड़ा स्रोत के रूप में सामने आया है। कैपिटल गेंस से इनकम वाले टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी इस साल 39 फीसदी पहुंच गई। AY2022-23 में यह सिर्फ 9 फीसदी थी।

बिजनेस इनकम रिपोर्ट करने वाले टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी बढ़कर 26 फीसदी

बिजनेस इनकम रिपोर्ट करने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या भी बढ़कर 26 फीसदी पहुंच गई है। AY2022-23 में यह सिर्फ 4 फीसदी थी। इससे यह संकेत मिलता है कि सेल्फ-एंप्लॉयमेंट वाले लोग अब पहले के मुकाबले ज्यादा रिटर्न फाइल कर रहे हैं। यह ट्रेंड हर उम्र वर्ग के टैक्सपेयर्स में देखने को मिला है। सीनियर सिटीजंस में ऑनलाइन रिटर्न फाइल करे वाले लोगों की संख्या बढ़कर 53 फीसदी हो गई है।

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होम लोन, कार लोन सहित दूसरी जरूरतों की वजह से ज्यादा लोग फाइल कर रहे रिटर्न

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसलिए भी अब पहले के मुकाबले ज्यादा लोग रिटर्न फाइल कर रहे हैं, क्योंकि अब होम लोन, कार लोन, क्रेडिट कार्ड और रेंट एग्रीमेंट बनवाने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न मांगा जा रहा है। अब रिटर्न फाइल करना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं रह गया है। टैक्सपेयर्स इसे गंभीरता से ले रहे हैं। सरकार ने रिटर्न फाइल प्रोसेस को पहले के मुकाबले काफी आसान बना दिया है। इसका फायदा भी मिल रहा है।

Income Tax Return: 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल करने का मौका चूक गए? जानिए अब आपके लिए क्या हैं विकल्प

अगस्त का महीना शुरू हो गया है। रुपये-पैसे से जुड़े कई नियम आज से बदल गए हैं। आज से आईटीआर-1 और आईटीआर-2 फॉर्म से रिटर्न भरने पर पेनाल्टी चुकानी होगी। साथ ही आईटीआर-3 और आईटीआर-4 फॉर्म से रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त को खत्म हो जाएगी। आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर तक फाइल किया जा सकता है

ITR-1 और ITR-2 फॉर्म से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई थी। अगर किसी वजह से आप डेडलाइन तक रिटर्न फाइल करने से चूक गए हैं तो आप इस साल 31 दिसंबर तक रिटर्न फाइल कर सकते हैं। इसके लिए आपको पेनाल्टी चुकानी होगी। साथ ही टैक्स अमाउंट पर इंटरेस्ट देना होगा। ऐसे टैक्सपेयर्स का रिफंड आने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।

बिलेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए पेनाल्टी चुकानी होगी

ऐसे टैक्सपेयर्स जिनकी सालाना इनकम 5 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें बिलेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए 5000 रुपये पेनाल्टी चुकानी होगी। ऐसे टैक्सपेयर्स जिनकी सालाना इनकम 5 लाख रुपये तक है उन्हें 1000 रुपये पेनाल्टी चुकानी होगी। इसके अलावा टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 234ए के तहत बकाया टैक्स पर इंटरेस्ट चुकाना होगा।

ये टैक्सपेयर्स बगैर पेनाल्टी 31 अगस्त तक फाइल कर सकते हैं रिटर्न

ऐसे टैक्सपेयर्स जिनके लिए आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का इस्तेमाल करना जरूरी है और जिन्हें टैक्स ऑडिट की जरूरत नहीं है, उनके लिए रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त है। इस कैटेगरी में सेल्फ-एंप्लॉयड प्रोफेशनल्स, फ्रीलांसर्स, छोटे कारोबारी जैसे टैक्सपेयर्स आते हैं। इसके अलावा ऐसे टैक्सपेयर्स भी इस कैटेगरी में आते हैं, जिन्होंने सेक्शन 44 एडी और 44एडीए के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम को सेलेक्ट किया है।

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इस महीने आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी की भी होगी बैठक

इस महीने आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक होगी। 3 अगस्त को यह बैठक शुरू होगी, जिसके नतीजे 5 अगस्त को आएंगे। अगर इस मीटिंग में आरबीआई इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का ऐलान करता है तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन महंगे हो जाएंगे। साथ ही जिन लोगों ने पहले से लोन लिए हैं, उनकी EMI बढ़ जाएगी। हालांकि, अगस्त की बैठक में आरबीआईआ के रेपो रेट बढ़ाने की उम्मीद कम है। रेपो रेट बढ़ने से बैंक लोन का इंटरेस्ट रेट बढ़ा देते हैं।

क्रेडिट कार्ड से लेकर रसोई गैस, तत्काल टिकट और ITR तक, अगस्त के ये 5 बड़े बदलाव जो जेब पर डालेंगे असर

1 अगस्त 2026 से आम लोगों और कारोबारियों के फाइनेंशियल वर्किंग से जुड़े कई जरूरी नियमों और समय-सीमाओं में बदलाव हो रहा है। टैक्स कम्प्लायंस, बैंकिंग चार्जेज, होम लोन की ईएमआई से लेकर भारतीय रेलवे की तत्काल टिकट बुकिंग और क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड्स तक, अगस्त के इस महीने में 5 बड़े फाइनेंशियल चेंज या वित्तीय मसले आपकी जेब और मासिक बजट को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगे।

1- ITR फाइलिंग की 31 अगस्त की डेडलाइन (बिजनेस और प्रोफेशनल्स के लिए)

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने वाले self-employed प्रोफेशनल्स, फ्रीलांसर्स, छोटे व्यवसायियों और धारा 44AD व 44ADA के तहत प्रिजम्पटिव टैक्स स्कीम का विकल्प चुनने वाले ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए 31 अगस्त 2026 अगली महत्वपूर्ण समय-सीमा है जिन्हें टैक्स ऑडिट की जरूरत नहीं होती (ITR-3 या ITR-4 दाखिल करने वाले)। अगर पात्र टैक्सपेयर्स 31 अगस्त की इस समय-सीमा तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं कर पाते तो धारा 234F के तहत ₹5000 तक का लेट-फाइलिंग शुल्क लग सकता है। बकाया टैक्स देनदारी पर धारा 234A के प्रावधानों के अनुसार नियमानुसार ब्याज भी देना होगा। समय पर कम्प्लायंस पूरा करने और अतिरिक्त पेनल्टी से बचने के लिए समय रहते फाइलिंग पूरी करना जरूरी है।

2- RBI की MPC बैठक पर रहेगी सभी की नजर

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) की महत्वपूर्ण बैठक 3 अगस्त से 5 अगस्त के बीच आयोजित होने जा रही है। इस नीतिगत बैठक के फैसलों की घोषणा 5 अगस्त 2026 को की जाएगी। हालांकि इस ऐलान से तुरंत कोई रेगुलेटरी बदलाव लागू नहीं होता लेकिन मेन पॉलिसी रेट्स और लिक्विडिटी आउटलुक पर आरबीआई का फैसला आने वाले महीनों में होम लोन की ईएमआई, बैंकों की ब्याज दरों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रिटर्न को सीधे प्रभावित कर सकता है।

3- भारतीय रेलवे: तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया में बदलाव

भारतीय रेलवे ने रिजर्वेशन काउंटरों पर होने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने और बुकिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी व सुव्यवस्थित बनाने के लिए 1 अगस्त से तत्काल टिकट बुकिंग के लिए टोकन-आधारित प्रणाली लागू कर दी है।

4- एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड्स और नियमों में कटौती

एक्सिस बैंक अपने प्रीमियम क्रेडिट कार्ड Magnus for Burgundy के फीचर्स और फायदों में 28 अगस्त 2026 से कटौती करने जा रहा है। बैंक ने डायनेमिक करेंसी कन्वर्जन मार्कअप को 1.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दिया है। टोल-संबंधित ट्रांजैक्शंस और गिफ्ट कार्ड की खरीदारी पर मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इसके अलावा प्रायोरिटी पास के माध्यम से मिलने वाले घरेलू एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस की प्रक्रिया में भी संशोधन किया गया है।

5- बैंकिंग सर्विस चार्जेज और SMS फीस में संशोधन

1 अगस्त से कई बैंक अपनी चुनिंदा सेवाओं के शुल्कों में संशोधन लागू कर रहे हैं। उज्जजीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने प्रति मैसेज ₹0.30 का एसएमएस अलर्ट फी लगाने का ऐलान कर दिया है। इसपर मंथली कैप भी होगा। दूसरे बैंकों के ग्राहक भी अपने-अपने बैंकों द्वारा डेबिट कार्ड के एनुअल मेंटेनेंस चार्जेस, ट्रांजैक्शन फीस या अन्य सेवाओं में किए गए संभावित बदलावों की जांच कर लें ताकि अचानक लगने वाले किसी भी अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सके।

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