Market Outlook: बाजार लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ हुआ बंद, जानिए 24 जुलाई को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 23 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 22,900 के नीचे चला गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 363.66 अंक या 0.47 प्रतिशत गिरकर 76,391.39 पर और निफ्टी 126.65 अंक या 0.53 प्रतिशत गिरकर 23,869.60 पर बंद हुआ। लगभग 1569 शेयरों में बढ़त हुई,2479 शेयरों में गिरावट आई और 155 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में अदाणी एंटरप्राइजेज,श्रीराम फाइनेंस,नेस्ले इंडिया,अदाणी पोर्ट्स और बजाज फाइनेंस शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में बजाज ऑटो,एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस,एमएंडएम,टीसीएस और आयशर मोटर्स शामिल रहे।

सेक्टर के हिसाब से प्रदर्शन काफी हद तक कमजोर रहा और केवल कुछ ही इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। गिरावट वाले सेक्टर में निफ्टी रियल्टी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.8% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी ऑयल एंड गैस,इंफ्रास्ट्रक्चर,पीएसयू बैंक और निफ्टी एनर्जी में 1-1% की गिरावट दर्ज की गई। अन्य पिछड़ने वाले सेक्टर में निफ्टी मेटल (-0.7%),निफ्टी फार्मा (-0.4%),निफ्टी एफएमसीजी (-0.4%) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.4%) शामिल रहे।

निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने अच्छा प्रदर्शन किया और इसमें 0.7% की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी मीडिया में 0.22% की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1-1 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में और दिक्कत की चिंताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच रही हैं। ऐसे में महंगाई के जोखिम और कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव की आशंका के कारण निवेशकों का उत्साह कमजोर पड़ रहा है।

हाल के मैक्रो-इकोनॉमिक संकेत बताते हैं कि लंबे समय से चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। इसका संकेत थोक महंगाई और बिजनेस एक्टिविटी में आई सुस्ती से मिलता है।

एनर्जी की ऊंची कीमतों के चलते ग्लोबल ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका और मजबूत हुई है। इससे उभरते बाजारों में जोखिम लेने इच्छा कमजोर हुई है। आज सभी सेक्टर में बिकवाली का दबाव देखा गया। हालांकि,मजबूत तिमाही नतीजों के दम पर ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। इससे पता चलता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद,निवेशक उन कंपनियों को पसंद कर रहे हैं जिनकी कमाई में लगातार बढ़ोतरी हो रही है,मांग के रुझान अच्छे हैं और भविष्य के प्रदर्शन को लेकर बेहतर संभावनाएं दिख रही हैं।

इक्विरस वेल्थ के MD और बिजनेस हेड अंकुर पुंज का कहना है कि बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है। अमेरिका और यूरोप से मिले कमजोर संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण निवेशक इक्विटी मार्केट में लंबे समय के लिए निवेश करने से घबरा रहे हैं। रुपये समेत प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती निवेशकों को सुरक्षित डॉलर एसेट्स की ओर खींच रही है। हालांकि बाजार’ओवरसोल्ड’जोन में दिख रहा है,फिर भी निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए और चुनिंदा शेयरों पर फोकस करना चाहिए।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि डेली चार्ट पर निफ्टी ने अपवर्ड कंसोलिडेशन के लेवल को तोड़ दिया है। इससे पता चलता है कि मार्केट में मंदी का रुझान बढ़ रहा है। इसके अलावा,इंडेक्स अहम शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से भी नीचे आ गया है। RSI इंडिकेटर ‘बेयरिश क्रॉसओवर’की स्थिति में है और नीचे की ओर जा रहा है।

मार्केट का सेंटीमेंट नेगेटिव दिख रहा है और आने वाले समय में भी मार्केट में कमजोरी बनी रह सकती है। निचे की तरफ निफ्टी 23,600 या उससे भी नीचे जा सकता है। वहीं, ऊपर की तरफ अगले कुछ दिनों तक 24,000 का लेवल रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर सकता है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 23 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 22 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,000 के नीचे बंद हुआ। ट्रेडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 715.06 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 76,755.05 पर और निफ्टी 191.45 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। लगभग 1443 शेयरों में बढ़त हुई, 2616 शेयरों में गिरावट आई और 170 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, जियो फाइनेंशियल, इंफोसिस, एसबीआई और डॉ. रेड्डीज़ लैब्स शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में बजाज ऑटो, नेस्ले, टाटा कंज्यूमर, पावर ग्रिड कॉर्प और ओएनजीसी शामिल रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस ज्यादातर नेगेटिव रहा। निफ्टी FMCG सबसे ज्यादा बढ़ने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 0.65% की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी ऑटो में 0.18% की बढ़त हुई। गिरावट वाले सेक्टर में, निफ्टी मीडिया सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा, जिसमें 2.68% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी रियल्टी (-2.6%), निफ्टी PSU बैंक (-1.8%), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-1.4%), निफ्टी IT (-1.5%), निफ्टी बैंक (-1.2%), निफ्टी फार्मा (-1.3%), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.86%), निफ्टी इंफ्रा (-0.85%), निफ्टी ऑयल एंड गैस (-0.6%), निफ्टी मेटल (-0.48%) और निफ्टी एनर्जी (-0.3%) रहे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि आज भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। US-ईरान के बीच जारी तनाव और अहम ग्लोबल शिपिंग रूट पर हूथी गुट की वजह से आई दिक्कतो ने तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंता बढ़ा दी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं और रुपया कमजोर हुआ। घरेलू महंगाई को लेकर फिर से बढ़ती चिंताओं के कारण बाजार में जोखिम लेने से बचने का माहौल हावी रहा। इसने उम्मीद से बेहतर बिजनेस अपडेट और Q1 के अच्छे नतीजों के असर को कम कर दिया।

रियल एस्टेट, बैंकिंग और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे ब्याज दरों पर निर्भर सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट आई। फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट पर US के प्रस्तावित टैरिफ को लेकर फिर से बनी अनिश्चितता के बीच फार्मा शेयरों पर भी दबाव रहा।

सावधानी भरे माहौल के बावजूद, FMCG और ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। सेक्टर की बड़ी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से इन्हें सहारा मिला, जो यह दिखाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भी निवेशक उन कंपनियों को पसंद कर रहे हैं जिनकी कमाई में मज़बूत ग्रोथ दिख रही है।

निफ्टी व्यू

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट-HNI ​​एंड डेरिवेटिव्स रियांक अरोड़ा का कहना है कि आज के सेशन में भारतीय इक्विटी मार्केट में हर तरफ गिरावट नजर आई। लगातार बिकवाली के दबाव और निवेशकों के सतर्क रवैये के बीच बेंचमार्क इंडेक्स काफी नीचे बंद हुए। अहम सेक्टरों में कमजोरी और प्रॉफिट बुकिंग ने इंडेक्स को नीचे धकेल दिया, जिससे बाजार में रिस्क-ऑफ (जोखिम से बचने का) मूड दिखा।

निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79% गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। यह 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया, जो शॉर्ट-टर्म कमजोरी का संकेत है। अब इसके लिए 23,950–23,900 के आसपास तत्काल सपोर्ट है। उसके बाद 23,800 के पास अगला मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ, 24,100–24,200 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। पॉजिटिव मोमेंटम वापस पाने के लिए लगातार इन स्तरों से ऊपर बने रहना जरूरी होगा।

BSE सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92% गिरकर 76,755.05 पर बंद हुआ। इंडेक्स में हर तरफ बिकवाली हुई और यह दिन के निचले स्तर के पास बंद हुआ। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 76,600–76,400 के आसपास है, जबकि रेजिस्टेंस 77,000–77,300 के पास दिख रहा है। रेजिस्टेंस जोन से ऊपर एक मजबूत चाल बुलिश सेंटीमेंट को बहाल करने में मदद कर सकती है।

आज की गिरावट की वजह हर तरफ से हुई प्रॉफिट बुकिंग और बाजार का सतर्क रवैया रहा। हालांकि शॉर्ट-टर्म मोमेंटम कमजोर हुआ है, लेकिन जब तक अहम सपोर्ट लेवल बचे हुए हैं, मीडियम-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे चुनिंदा शेयरों पर ध्यान दें, आक्रामक लॉन्ग पोजीशन लेने से बचें और सख्त रिस्क मैनेजमेंट के साथ मजबूत सपोर्ट जोन के पास गिरावट पर खरीदारी का तरीका अपनाएं।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें फिर से भारतीय इक्विटी मार्ट के लिए परेशानी का कारण बन गई हैं। जहां कच्चा तेल 50EMA के ऊपर बना हुआ है, वहीं निफ्टी 50EMA के नीचे जाने की कगार पर है। ऐसा लगता है कि निफ्टी और कच्चा तेल फिर से एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चल रहे हैं।

निफ्टी के डेली चार्ट पर कंसोलिडेशन का दौर नीचे की ओर टूटता हुआ दिख रहा है। RSI में बेयरिश क्रॉसओवर है, जो निकट भविष्य में कमजोर मोमेंटम का संकेत दे रहा है। अगर निफ्टी 23900 के नीचे गिरता है तो गिरावट 23700/23600 तक बढ़ सकती है। शॉर्ट टर्म में ऊपरी स्तर 24100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा है।

कोटक सिक्योरिटीज में हेड ऑफ इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान ने कहा कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई। निफ्टी 191 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में 715 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो रियल्टी और मीडिया इंडेक्स में 2.5 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई, जबकि बाजार का मूड खराब होने के बावजूद कुछ चुनिंदा FMCG और ऑटो शेयरों में तेजी दिखी। तकनीकी तौर पर निफ्टी 20-डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज) या 24,100 के सपोर्ट जोन से नीचे आ गया है और इस गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। डेली चार्ट पर एक लॉन्ग ‘बेयरिश कैंडल’ बनी है, जो मौजूदा स्तरों से और गिरावट का संकेत देती है।

श्रीकांत चौहान मानना ​​है कि जब तक निफ्टी 24,100 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक गिरावट का दौर जारी रहने की संभावना है। यह गिरावट 50-डे SMA या 23,850 के स्तर तक जारी रह सकती है। इसके बाद और गिरावट हो सकती है, जिससे इंडेक्स 23,750-23,700 के स्तर तक जा सकता है। दूसरी ओर, 24,100 के स्तर के ऊपर जाने पर बाजार का मूड बदल सकता है। इस स्तर के ऊपर, बाजार में 24,200-24,250 तक की रिकवरी हो सकती है। इंट्राडे मार्केट की स्थिति अनिश्चित और उतार-चढ़ाव वाली है। इसलिए, डे ट्रेडर्स के लिए लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

बैंक निफ्टी व्यू

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी जो पिछले आठ ट्रेडिंग सेशन से 58,597–57,287 की रेंज में बना हुआ था, उसमें भी आज एक बड़ा ब्रेकडाउन देखने को मिला। इंडेक्स ने एक बड़ी बेयरिश कैंडल बनाई और 8 जुलाई के बाद पहली बार अपने 20-डे EMA के नीचे बंद हुआ। गिरती हुई MACD लाइन और बढ़ते हुए रेड हिस्टोग्राम बार नीचे की ओर बढ़ते मोमेंटम का संकेत दे रहे हैं।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56700-56600 जोन में है। अगर यह लगातार इस जोन के नीचे बना रहता है, तो बैंक निफ्टी में और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 56300 और फिर 56000 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57500-57600 जोन में है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : 21 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स की शुरुआत कमजोर रहने की संभावना है। क्योंकि शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी करीब 24,141 के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा है। करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

20 जुलाई को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क गिरावट के साथ बंद हुए। जून तिमाही के नतीजों के बाद प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली और मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच कमजोर ग्लोबल संकेतों ने बाजार का मूड खराब कर दिया। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 442.93 अंक या 0.57 प्रतिशत गिरकर 77,708.52 पर और निफ्टी 95.80 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 24,238.50 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी लगभग 24,141 के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा था,जो घरेलू इक्विटी मार्केट में कमजोर शुरुआत का संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाज़ारों में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। गिफ्ट निफ्टी 0.42 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। वहीं, जापान के निक्केई में 2.28 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है। स्ट्रेट टाइम्स भी 0.53 फीसदी की तेजी दिखा रहा है। हैंग सेंग में 0.39 फीसदी की कमजोरी नजर आ रही है। वहीं, ताइवानी बाजार में 3.04 फीसदी की तेजी दिख रही है। कोस्पी करीब 3.73 फीसदी भाग गया है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.34 फीसदी की तेजी नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

सोमवार को वॉल स्ट्रीट के तीनों प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 307.16 अंक या 0.59% गिरकर 51,839.26 पर आ गया, S&P 500 में 14.41 अंक या 0.19% की गिरावट हुई और यह 7,443.28 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट 12.17 अंक या 0.05% गिरकर 25,508.07 पर बंद हुआ।

डॉलर इंडेक्स

मंगलवार को अमेरिकी डॉलर एक हफ्ते के उच्चतम स्तर के आस-पास आ गया है। बाजार मध्य पूर्व से मिल रहे विरोधाभासी संकेतों के बीच उलझन में है। एक तरफ इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो रही हैं,तो दूसरी तरफ़ युद्धविराम की उम्मीदों से कुछ राहत भी मिल रही है। फिलहाल US डॉलर इंडेक्स 100.96 पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

10-साल और 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड में बहुत कम बदलाव हुआ है और यह क्रमशः 4.58% और 4.20% पर दिख रहे हैं।

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसी में मिला-जुला कारोबार हो रहा है। मलेशियन रिंगित सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली करेंसी है, जिसमें 0.108% की बढ़त हुई है। इसके बाद चीनी रेनमिनबी में 0.087% की बढ़ोतरी हुई है। सिंगापुर डॉलर में 0.023% की मामूली बढ़त दिख रही है। जबकि फिलीपीन पेसो में 0.006% की मामूली बढ़त के साथ लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ है। जापानी येन में भी कोई बदलाव नहीं हुआ।

दूसरी ओर दक्षिण कोरियाई वॉन सबसे कमजोर करेंसी है। इसमें 0.264% की गिरावट आई है। इसके बाद इंडोनेशियाई रुपिया का नंबर रहा, जो 0.15% गिरा है। ताइवान डॉलर में 0.081% की गिरावट आई है,जबकि थाई बहत 0.056% कमजोर हुआ है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

20 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1,121 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1,312 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

 

 

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दक्षिण कोरिया का जलवा, अमेरिका से जापान तक ट्रेडर्स की वॉचलिस्ट में, पहली बार देख रहे Kospi का चार्ट

Korea effect on US-Japan: यूके, अमेरिका और जापान के फंड मैनेजर्स अब ट्रेडिंग शुरू होने से पहले दक्षिण कोरिया के शेयर मार्केट पर एक नजर डाल रहे हैं। एक समय था कि दक्षिण कोरिया का बाजार लंदन, न्यूयॉर्क और टोक्यो के फंड मैनेजर्स के लिए बहुत अहम नहीं था लेकिन अब $4 लाख करोड़ का इक्विटी मार्केट एआई स्टॉक्स की चाल तय कर रहा है। दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) के शेयरों में उतार-चढ़़ाव अब दुनिया भर की चिप कंपनियों के शेयरों पर असर डाल रही है। खास बात ये है कि एसके हीनिक्स (SK Hynix) की अमेरिका में हाल ही लिस्टिंग हुई जिससे कोरिया का असर अमेरिका तक पहुंच गया और अब कोरिया की सेंटीमेंट-आधारित ट्रेडिंग अब चौबीसों घंटे ग्लोबल एआई स्टॉक्स की चाल तय कर रही है।

दक्षिण कोरिया की वॉचलिस्ट में एंट्री

निवेश के तौर-तरीके बदल रहे हैं। जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट के एशिया मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट ने अपनी 14 साल की नौकरी में पहली बार कंपनी की ग्लोबल टीम के सामने कोरिया पर एक प्रेजेंटेशन दिया। जापानी ट्रेडर् दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स को अपनी वॉच लिस्ट में शामिल कर रहे हैं। पाइनब्रिज इन्वेस्टमेंट्स के लंदन-स्थित पोर्टफोलियो मैनेजर हनी रेढा (Hani Redha) का कहना है कि अब सभी कोरियाई निवेशक हैं। हनी का कहना है कि उनके दिन की शुरुआत अब कोरियाई बाजार में एआई ट्रेडिंग को देखने से होती है। जब कोरियाई बाजार बंद हो जाता है तो उनका ध्यान अमेरिकी मार्केट में एसके हीनिक्स के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स और कोरिया से जुड़े ईटीएफ (ETFs) पर चला जाता है। हनी के मुताबिक यह लगभग 24 घंटे नजर रखने जैसा है।

वैश्विक बाजारों पर गहरा असर

कोरियाई मार्केट का अमेरिका में असर पिछले हफ्ते साफ तौर पर दिखा। एआई की मांग को लेकर संदेहों पर कोस्पी में करीब 9% की गिरावट आई तो इसकी आंच अमेरिकी मार्केट तक फैल गई। एसके हीनिक्स के अमेरिकी लिस्टेड स्टॉक्स में 9.3% की फिसलन आई जिससे दूसरी बड़ी चिप कंपनियों के शेयर भी धड़ाम हो गए। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक कोरिया और अमेरिका के बीच गहरे संबंध अब आंकड़ों में भी दिखाई देने लगे हैं। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण कोरिया के मार्केट इंडेक्स कोस्पी और अमेरिकी मार्केट के इंडेक्स नास्डाक 100 के बीच 60-दिनों का कोरिलेशन बढ़कर 0.46 पर पहुंच गया जोकि दो साल में सबसे अधिक है और पांच साल के औसत 0.16 से करीब तीन गुना अधिक है।

कोरियाई स्टॉक्स का असर मार्केट की गिरावट में और दिखता है। ब्लूमबर्ग के डेटा के अनुसार 7 जुलाई को कोरियाई बाजार में कमजोरी के दौरान कोस्पी के प्रति नैस्डैक 100 इंडेक्स की संवेदनशीलता साल 1990 के बाद से सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई। इसी तरह MSCI वर्ल्ड इंडेक्स के लिए भी यह पैमाना इस महीने की शुरुआत में चार साल के हाई लेवल पर पहुंच गया।

न्यूयॉर्क में टाइग्रेस फाइनेंशियल पार्टनर्स के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर इवान फीनसेथ का कहना है कि कोरिया असल में नैस्डैक और एसओएक्स जैसे ही उतार-चढ़ाव वाले इकोसिस्टम का हिस्सा बन गया है। उनका कहना है कि एसके हीनिक्स, सैमसंग और कोस्पी अब अमेरिकी एआई और चिप से जुड़े रिस्क के लिए प्री-मार्केट इंडिकेटर का काम कर रहे हैं।

कोस्पी और जापान के निक्केई 225 के बीच भी कोरिलेशन यानी संबंध तेजी से बढ़ा है। इसी वजह से ऑर्टस एडवाइजर्स के जापान इक्विटी स्ट्रैटेजी हेड एंड्रयू जैक्सन ने इस साल की शुरुआत में बारीकी से नजर रखने के लिए कोस्पी का चार्ट शामिल किया। उन्होंने यह काम 20 साल से अधिक समय में पहली बार किया है। एचएसबीसी होल्डिंग्स में एशिया पैसिफिक के इक्विटी स्ट्रैटेजी हेड हेराल्ड वैन डेर लिंडे का कहना है कि आजकल सभी मीटिंग में कोरिया पर चर्चा होती है। जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट में एशिया पैसिफिक के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट ताई हुई का भी कहना है कि इस साल से पहले अपनी ग्लोबल टीम के सामने उन्होंने कोरिया के बारे में कोई प्रेजेंटेशन नहीं दिया था।”

बना रहेगा कोरिया का वैश्विक मार्केट पर असर?

अब सवाल उठता है कि क्या दक्षिण कोरिया अब वैश्विक मार्केट के लिए अहम इंडिकेटर बना रहेगा। इसे लेकर यूबीएस सुमी ट्रस्ट वेल्थ मैनेजमेंट में जापान इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट चिसा कोबायाशी (Chisa Kobayashi) का कहना है कि जब तक एआई रैली जारी है, दक्षिण कोरियाई मार्केट अहम बना रहेगा। हालांकि उनका कहना है कि मार्केट में लेवरेज से जुड़े उतार-चढ़ाव और कम मेच्योर मार्केट की वजह से ट्रेडिंग मुश्किल हो जाती है क्योंकि यह फंडामेंटल्स से उल्टी दिशा में आगे बढ़ सकता है।

SBI Funds Listing Gain: IPO को ताबड़तोड़ बोली, अब लिस्टिंग का इंतजार, पहले दिन इतने मुनाफे की गुंजाइश 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Saatvik Green Energy Share Price: गिरते बाजार में 5% दौड़ा शेयर, लगा सकता है आगे 45% की और छलांग, मोतीलाल ओसवाल बुलिश

Saatvik Green Energy Share Price: सोलार मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी सात्विक ग्रीन एनर्जी (Saatvik Green Energy) के शेयर मंगलवार , 14 जुलाई को 5 फीसदी की छलांग लगाते नजर आए। शेयर में यह तेजी घरेलू इक्विटी मार्केट में तेज गिरावट के बीच देखने को मिली। सुबह 11.33 बजे के आसपास जहां शेयर 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी दिखा रहा था वहीं निफ्टी 50 इंडेक्स 75 अंक गिरकर 24150 के नीचे ट्रेड कर रहा था।

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने स्टॉक पर Buy रेटिंग के साथ कवरेज शुरु की है और शेयर पर 565 रुपये प्रति शेयर का टारगेट दिया है, जो मौजूदा लेवल से 26 फीसदी की बढ़त दिखाता है। वहीं  अपने बुल केस के लिए, मोतीलाल ओसवाल ने फाइनेंशियल ईयर 2028 तक ₹652 का प्राइस टारगेट रखा है, जिसका मतलब है कि स्टॉक के पिछले क्लोजिंग लेवल से 45% की संभावित बढ़त हो सकती है।

ब्रोकरेज ने कहा कि सात्विक ग्रीन भारत की सोलर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में तेज़ी से हो रही ग्रोथ से फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है, जिसे इसकी चल रही कैपेसिटी बढ़ाने और बैकवर्ड इंटीग्रेशन योजनाओं से सपोर्ट मिला है।

FY26 के आखिर तक, कंपनी के पास 4.8 GW की सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी थी। यह सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग में भी एंट्री करते हुए 4 GW की मॉड्यूल कैपेसिटी और जोड़ रही है।

मोतीलाल ओसवाल को उम्मीद है कि कंपनी की मॉड्यूल बनाने की कैपेसिटी FY27 तक बढ़कर 8.8 GW हो जाएगी, जबकि सेल बनाने की कैपेसिटी FY27 में 2.4 GW और FY28 में 6 GW तक पहुंचने का अनुमान है।

कंपनी FY29 तक 6 GW की प्रस्तावित कैपेसिटी के साथ इंगोट और वेफर सेगमेंट में भी एंट्री करने की योजना बना रही है, जिससे उसकी बैकवर्ड इंटीग्रेशन स्ट्रैटेजी और मजबूत होगी।

ब्रोकरेज को अगले दो सालों में अच्छी कमाई की उम्मीद है। इसका अनुमान है कि FY26 और FY28 के बीच रेवेन्यू, EBITDA और एडजस्टेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (APAT) क्रमशः 38%, 55% और 44% की कंपाउंड सालाना दर से बढ़ेंगे।

यह ग्रोथ ज़्यादा मॉड्यूल बिक्री से होने की उम्मीद है, जिसके FY26 में 3.1 GW से बढ़कर FY27 में 3.8 GW और FY28 में 4.9 GW होने का अनुमान है। डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (DCR) मॉड्यूल का बड़ा हिस्सा, जो FY28 तक बिक्री का लगभग 56% होने की उम्मीद है, से भी रियलाइज़ेशन में सुधार होने की संभावना है।

मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि सात्विक ग्रीन ने FY25 और FY26 दोनों में 84% का इंडस्ट्री-लीडिंग कैपेसिटी यूटिलाइज़ेशन फैक्टर (CUF) बनाए रखा है, जो नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी को तेज़ी से बढ़ाने की इसकी क्षमता को दिखाता है।

वैल्यूएशन के आधार पर ब्रोकरेज ने कहा कि स्टॉक FY28 के अनुमानित EV/EBITDA के 6.9 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जबकि वारी एनर्जीज़ के लिए यह 9.2 गुना और प्रीमियर एनर्जीज़ के लिए 10.4 गुना है।

हालांकि मोतीलाल ओसवाल सात्विक ग्रीन को इसके छोटे स्केल, सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग में ऑपरेटिंग ट्रैक रिकॉर्ड की कमी और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग पर ज़्यादा निर्भरता के कारण FY28 के EV/EBITDA मल्टीपल के 8 गुना कम पर वैल्यू देता है, लेकिन उसका मानना ​​है कि मौजूदा वैल्यूएशन एक आकर्षक इन्वेस्टमेंट का मौका देता है।

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Stock Market Today: Bull या Bear बाजार पर आज किसकी होगी पकड़, जानें Gift Nifty से क्या मिल रहा संकेत

Stock Market Today: हफ्ते के पहले दिन सोमवार 13 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स-निफ्टी के गिरावट के साथ खुलने की संभावना है। GIFT निफ्टी लगभग 208.50 पॉइंट्स की गिरावट के साथ 24,024 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है जो बड़े गैप -डाउन के संकेत दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से मिलिट्री तनाव बढ़ने से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं और ग्लोबल मार्केट में रिस्क लेने की क्षमता कम हो गई है।

गिफ्ट निफ्टी लाइव चार्ट क्या संकेत देता है?

गिफ्ट निफ्टी सुबह करीब 8.20 बजे 24,024 पर ट्रेड कर रहा था, जो 210.50 पॉइंट्स या 0.88 प्रतिशत नीचे था, जिससे संकेत मिलता है कि निफ्टी 50 शुक्रवार के 24,206.90 के बंद होने से काफी नीचे खुल सकता है। यह कमज़ोर संकेत तब आया है जब पिछले हफ़्ते भारतीय इक्विटीज मजबूती के साथ बंद हुए थे। सेंसेक्स 827.6 पॉइंट्स या 1.08 प्रतिशत बढ़कर 77,569.4 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 244.1 पॉइंट्स या 1.02 प्रतिशत चढ़कर 24,206.9 पर पहुंच गया।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि भारतीय इक्विटी मार्केट सावधानी से खुलने की उम्मीद है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच नए मिलिट्री हमलों के बाद जियोपॉलिटिकल टेंशन फिर से बढ़ गई है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और फाइनेंशियल मार्केट में रिस्क से बचने की सोच बढ़ गई है। इस बढ़ोतरी से कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी से उछाल आया है, जिससे कुल मिलाकर इन्वेस्टर सेंटिमेंट पर असर पड़ा है। गिफ्ट निफ्टी अभी 24,100 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो शुक्रवार के निफ्टी क्लोजिंग 24,206.90 से नीचे है, जो घरेलू इक्विटी के लिए गैप-डाउन शुरुआत का संकेत देता है।

निफ्टी के लिए क्या लेवल होंगे अहम

आज निफ्टी 50 के आउटलुक पर बात करते हुए, रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, अजीत मिश्रा ने कहा कि निफ्टी 50 ने 23,800 सपोर्ट ज़ोन को बचाने के बाद तेजी से वापसी की है और एक बार फिर 24150 के आसपास 100 DEMA मार्क को वापस पा लिया है, जो निचले लेवल पर खरीदारी में नई दिलचस्पी का संकेत देता है। 24,150 जोन से ऊपर लगातार मूव करने से 24,400–24,600 रीजन की ओर बढ़ने का रास्ता बन सकता है। नीचे की तरफ, 24,000 मार्क से तुरंत सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, इसके बाद 23,800 ज़ोन मिलेगा।

58,200–58,300 के ऊपर बैंक निफ्टी देगा मजबूती

आज बैंक निफ्टी के आउटलुक पर, एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का मानना ​​है कि 58,000 के साइकोलॉजिकल लेवल को वापस पाने के बाद बैंक निफ्टी एक कंस्ट्रक्टिव टेक्निकल स्ट्रक्चर दिखाना जारी रखेगा। टेक्निकल नजरिए से, 58,200–58,300 ज़ोन अभी भी तुरंत रेजिस्टेंस बना हुआ है। इस रीजन से ऊपर लगातार मूव करने से बुलिश मोमेंटम मजबूत होगा और रिकवरी 58,600–58,700 ज़ोन की ओर बढ़ सकती है, इसके बाद 59,000 का साइकोलॉजिकल मार्क मिलेगा।

नीचे की तरफ, 58,000 लेवल से तुरंत सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, इसके बाद 57,800–57,700 जोन मिलेगा। मौजूदा रिकवरी स्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए इन लेवल से ऊपर बने रहना जरूरी होगा। हालांकि, 57,700 से नीचे एक बड़ा ब्रेक प्रॉफिट बुकिंग को ट्रिगर कर सकता है और इंडेक्स को 57,500–57,300 सपोर्ट रीजन की ओर खींच सकता है।

मिडिल ईस्ट में तनाव फिर से बढ़ने से क्रूड ऑयल में उछाल

वीकेंड में यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच नए दुश्मनी के बाद इन्वेस्टर्स का सेंटिमेंट तेज़ी से सतर्क हो गया, जिससे पिछले महीने हुए नाजुक शांति समझौते को खतरा पैदा हो गया। ईरान ने कहा कि उसने US सेना के साथ भारी मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया है, जिससे दुनिया के सबसे ज़रूरी ऑयल शिपिंग रूट्स में से एक में संभावित रुकावटों को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिसके ज़रिए ग्लोबल पेट्रोलियम का लगभग पांचवां हिस्सा…

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4 परसेंट से ज़्यादा बढ़कर लगभग $79 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड $74 प्रति बैरल से ऊपर चढ़ गया, जिससे महंगाई और ग्लोबल इंटरेस्ट-रेट आउटलुक को लेकर चिंताएँ फिर से बढ़ गईं।

रिस्क लेने की क्षमता कम होने से एशियाई मार्केट में गिरावट

सोमवार को एशियाई इक्विटी में गिरावट आई क्योंकि क्रूड की कीमतों में उछाल और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के नए दौर ने इन्वेस्टर्स को रिस्क एसेट्स में अपना एक्सपोजर कम करने के लिए मजबूर किया। जापान का निक्केई 1.6 परसेंट गिरा, जबकि जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.9 परसेंट गिरा।

US इक्विटी फ्यूचर्स भी कमजोर हुए, S&P 500 फ्यूचर्स 0.4 परसेंट और नैस्डैक फ्यूचर्स 0.9 परसेंट नीचे गिरे। यूरोपियन फ्यूचर्स ने नरम ओपनिंग का संकेत दिया, जिसमें यूरो स्टॉक्स 50 और DAX फ्यूचर्स दोनों 0.6 परसेंट नीचे थे।

 

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Gold ETF News: विदेशी बेच रहे, भारतीय खरीद रहे, इस कारण गोल्ड में निवेश को लेकर दिखा अलग-अलग रुझान

Gold ETF News: भारत में सोने को लेकर कैसा क्रेज है, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि पिछले महीने जून में वैश्विक रुझानों के विपरीत यहां गोल्ड ईटीएफ में $38.8 करोड़ का निवेश आया। इसकी मुख्य वजह तो यही रही कि गोल्ड के भाव को लेकर भारतीय निवेशक पॉजिटिव बने हुए हैं और इसकी कीमतों में गिरावट को उन्होंने निवेश के सुनहरे मौके के तौर पर देखा। वहीं दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर बात करें तो वैश्विक निवेशकों ने जून में भी गोल्ड ईटीएफ में अपनी हिस्सेदारी कम करना जारी रखा और एशिया में तो निकासी की सबसे बड़ी वजह चीन के गोल्ड फंड रहे।

Gold ETF को लेकर भारत में दिखा क्रेज

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक पिछले महीने जून में सबसे अधिक निवेश निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड बीईईएस में आया। इसमें $15.84 करोड़ का निवेश आया। इसके बाद एसबीआई ईटीएफ गोल्ड में $8.12 करोड़ का निवेश आया। इससे पहले मई महीने में $6.1 करोड़ की निकासी हुई थी, क्योंकि सरकार ने इस पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी थी तो घरेलू मार्केट में सोने की बढ़ती कीमतों के बीच निवेशकों ने मुनाफा कमाना शुरू कर दिया था।

वैश्विक बाजारों में फीकी पड़ी गोल्ड ईटीएफ की चमक

भारतीयों के उल्टे वैश्विक निवेशकों ने अपनी गोल्ड ईटीएफ होल्डिंग हल्की की। जून महीने में करीब $890 करोड़ की निकासी हुई और ऐसा ही रुझान लगभग हर जगह दिखा। सबसे अधिक निकासी उत्तरी अमेरिकी में हुई जहां $550 करोड़ निकाले गए। इसके बाद एशिया में $230 करोड़ और यूरोप में $81.8 करोड़ की निकासी दिखी। ग्लोबल गोल्ड ईटीएफ का AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) 13% घटकर $52.6 हजरा करोड़ रह गया, जबकि कुल होल्डिंग्स 74 टन घटकर 4,047 टन रह गईं।

एशिया में सबसे अधिक निकासी चीन के गोल्ड फंडों ने की। इसकी वजह ये रही कि इक्विटी मार्केट में रौनक लौटी और गोल्ड के भाव फिसले तो निवेशकों की रिस्क लेने की क्षमता सुधरी। जापान में भी बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरें बढ़ाई तो जापानी फंडों ने ताबड़तोड़ निकासी की। ब्याज दरें बढ़ाने से स्थानीय निवेशकों के लिए गोल्ड रखने की अपॉर्च्यूनिचटी कॉस्ट बढ़ गई तो इसका क्रेज कम हुआ।

गोल्ड ईटीएफ से यह ताबड़तोड़ निकासी अमेरिकी फेडरल के नए प्रमुख केविन वार्श के सख्त मौद्रिक नीतियों के संकेत पर हुई। ब्याज दरें बढ़ने के संकेतों से रियल यील्ड और डॉलर मजबूत हुए तो गोल्ड जैसे ब्याज नहीं देने वाले एसेट्स का आकर्षण थोड़ा कम हुआ। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई ने महंगाई से जुड़ी चिंताएं बढ़ाई तो गोल्ड ईटीएफ की भी चमक फीकी पड़ी।

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Bank Nifty View : ट्रंप के बयान ने मचाई अफरातफरी, बैंक निफ्टी 2% से ज्यादा टूटा, जानिए इंडेक्स पर क्या है मार्केट दिग्गजों की राय

Bank Nifty View : बुधवार दोपहर को बैंकिंग शेयरों में जबरदस्त बिकवाली आई। इसके चलते बैंक निफ्टी 2 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया। ईरान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए बयानों के बाद बाजार का मूड खराब हो गया, जिससे इक्विटी मार्केट में रिस्क-ऑफ बिकवाली (जोखिम से बचने के लिए बिकवाली) शुरू हो गई। फिलहाल, निफ्टी बैंक इंडेक्स 2.10 प्रतिशत गिरकर 56,977 के आसपास आ गया है जो 57,000 के स्तर से काफी नीचे है। निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में 2.30 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 2.08 प्रतिशत गिरा है। पूरे मार्केट पर भी भारी दबाव दिख रहा है। सेंसेक्स 1,514.13 अंक या 1.94 प्रतिशत गिरकर 76,666.59 पर और निफ्टी 462.40 अंक या 1.90 प्रतिशत गिरकर 23,936.30 पर आ गया है। वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में 25 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई है, जो मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ने का संकेत है।

ट्रंप के यह कहने के बाद कि उन्हें लगता है कि ईरान के साथ युद्धविराम खत्म हो गया है, बिकवाली (selloff) और तेज़ हो गई। ट्रंप के इस बयान से भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट पर इसके संभावित असर को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं।

बैंकिंग शेयरों में बड़े पैमाने पर बिकवाली आई है। यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिल रही है। इसके शेयर लगभग 3.4 प्रतिशत गिरे हैं। इसके बाद बैंक ऑफ़ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में भी 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। ICICI बैंक, केनरा बैंक, IDFC फर्स्ट बैंक, यस बैंक, HDFC बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, इंडसइंड बैंक, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक और एक्सिस बैंक के शेयरों में भी गिरावट के साथ कारोबार हो रहा। इनमें 1 से 2 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल रही है।

बैंक निफ्टी टेक्निकल व्यू

बुधवार को आई इस भारी गिरावट के बावजूद, एनालिस्ट बैंक निफ्टी के बड़े टेक्निकल स्ट्रक्चर को अभी भी पॉजिटिव मान रहे हैं। एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि इंडेक्स अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ है और 58,600-58,700 का जोन अभी भी अहम रेजिस्टेंस एरिया बना हुआ है। अगर यह इंडेक्स लगातार इस रेंज से ऊपर बना रहता है, तो इसके लिए 59,000 के लेवल तक जाने का रास्ता खुल सकता है।

दूसरी ओर एनालिस्ट 57,800-57,500 के दायरे को निकट भविष्य के लिए एक अहम सपोर्ट जोन मान रहे हैं। बजाज ब्रोकिंग ने 57,000-56,800 के दायरे को एक अहम डिमांड एरिया बताया है, जहां पिछले तीन हफ्तों में खरीदारी देखी गई है। उनका कहना है कि अगर यह सपोर्ट जोन बना रहता है, तो मौजूदा कंसोलिडेशन को अच्छे बैंकिंग शेयरों को धीरे-धीरे जमा करने के मौके के तौर पर देखा जाना चाहिए।

Trading Strategy : अभी फिलहाल कोई नया ट्रेड नहीं है, पश्चिम एशिया में होने वाले एक्शन पर बनी रहे नजर

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Stock Market News: जून तिमाही में रिटेल निवेशकों ने इक्विटी में की जोरदार खरीदारी, बाजार में लगाए 35,328 करोड़ रुपये

Stock Market News: कई महीनों तक किनारा बनाए रहने के बाद,रिटेल निवेशक भारतीय इक्विटी मार्केट में वापस लौट रहे हैं। जून तिमाही में इनकी खरीदारी में तेजी देखने को मिली है। यह लंबे समय तक सावधानी बरतने के बाद निवेशकों की सोच में आए बदलाव का संकेत है। NSE के डेटा के मुताबिक रिटेल निवेशकों ने जून में 14,088 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इसी तरह इनकी तरफ से मई में 3,018 करोड़ रुपये और अप्रैल में 18,222 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे गए। पूरी जून तिमाही की बात करें तो उनकी कुल खरीदारी 35,328 करोड़ रुपये रही। यह दिसंबर 2024 की तिमाही के बाद उनकी सबसे बड़ी तिमाही खरीदारी है। दिसंबर तिमाह में उन्होंने लगभग 56,126 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।

जून तिमाही में विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद रिटेल निवेशकों की तरफ से जमकर खरीदारी हुई।

2025 की शुरुआत से ही रिटेल निवेशक बाजार से दूरी बनाए हुए थे। उन्होंने 2025 में 25,615 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। जबकि 2026 के शुरुआती तीन महीनों में उन्होंने सिर्फ 2,750 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।

SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज में फंडामेंटल रिसर्च के हेड,सौरभ जैन ने कहा कि यह खरीदारी सट्टेबाजी के लिए गिरावट पर की गई खरीदारी नहीं है,बल्कि यह साइड में पड़ी पूंजी का रणनीतिक और मैक्रो-आधारित निवेश है। ब्रॉडर मार्केट के हालात भी इस नजरिए का सपोर्ट करते हैं।

buying

अप्रैल-जून तिमाही के दौरान,सेंसेक्स और निफ्टी में 6.3 प्रतिशत और 6.9 प्रतिशत की बढ़त हुई,जो पिछले चार तिमाहियों में उनकी सबसे बड़ी तिमाही बढ़त है। इस दौरान मेन इंडेक्स के मुकाबले ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेहतर रहा। इस अवधि में BSE 150 मिडकैप इंडेक्स 16.7 प्रतिशत बढ़ा,जो जून 2024 के बाद की इसकी सबसे बड़ी तिमाही बढ़त रही।

छोटे-मझोले शेयरों में अच्छी खरीदारी

छोटे-मझोले शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इसके चलते BSE 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में 24.5% की बढ़त हुई,जो जून 2020 के बाद से इसका सबसे अच्छा तिमाही प्रदर्शन रहा। BSE 250 माइक्रोकैप इंडेक्स भी 30% उछला,जो मार्च 2025 में इंडेक्स के शुरू होने के बाद से इसकी सबसे बड़ी तिमाही बढ़त है। जून तिमाही के दौरान BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 15% बढ़ा।

जैन ने आगे कहा कि फरवरी के आखिर में शुरू हुई मिडिल-ईस्ट जंग और उसके चलते तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के डर से निवेशकों का भरोसा शुरू में कमजोर हुआ था,लेकिन जून के मध्य में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते ने एक बड़ी राहत का काम किया। इससे ब्रेंट क्रूड की कीमत चार महीने के निचले स्तर $72 पर आ गई और एनर्जी शॉक प्रीमियम का असर भी कम हुआ।

बाजार को मिला पॉलिसी सपोर्ट

उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया और केंद्र सरकार के 5 जून के बड़े पॉलिसी पैकेज से इस जियोपॉलिटिकल तनाव के असर को कम करने में काफी मदद मिली। इस पैकेज में FPI बॉन्ड निवेश पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स और विदहोल्डिंग टैक्स को हटाना,’फुल्ली एक्सेसिबल रूट’का विस्तार करना और लॉन्ग-टर्म FCNR फिक्स्ड डिपॉजिट व NRI इक्विटी निवेश के लिए बेहतर इंसेंटिव देना शामिल है।

उन्होंने आगे कहा कि इस पॉलिसी सपोर्ट ने FII की निकासी को रोका,रुपये को स्थिर किया और मैक्रो रिस्क को कम किया। इससे रिटेल निवेशकों को यह भरोसा मिला कि वे मार्केट में गिरावट(करेक्शन)का इस्तेमाल एंट्री के अच्छे मौकों के तौर पर कर सकते हैं और अपने कैश रिजर्व को व्यवस्थित तरीके से इक्विटी में फिर से लगा सकते हैं।

FIIs रहे नेट सेलर

बाजार जानकारों का कहना है कि इस तिमाही के ज्यादातर हिस्से में FIIs नेट सेलर बने रहे। उनकी बिकवाली मुख्य वजह ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर रहे। इसमें US बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी,कच्चे तेल की ऊंची कीमतें,जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितताएं और ग्लोबल स्तर पर रिस्क-ऑफ का माहौल शामिल है। यह भारत के घरेलू मार्केट के फंडामेंटल्स में किसी खराबी के बजाय ग्लोबल एसेट एलोकेशन में बदलाव को दिखाता है।

विदेशी निवेशकों की निकासी को घरेलू निवेशकों ने किया बेअसर

घरेलू निवेशकों से मिले जबरदस्त सपोर्ट के चलते विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के बावजूद,भारतीय बाजार मजबूत बने रहे। म्यूचुअल फंड SIP के जरिए लगातार निवेश,घरेलू संस्थागत निवेशकों की जोरदार खरीदारी और रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने FII की बिकवाली से बनी सप्लाई को संभाल लिया। इससे बाजार में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई और बाजार का ओवरऑल तेजी वाला ढांचा कायम रहा।

Market Outlook: जुलाई में शेयर बाजार में आएगी तेजी? पिछले 25 साल का रिकॉर्ड दे रहा बड़ा संकेत

हर गिरावट के बाद ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम के साथ बाजार में आई मजबूत रिकवरी

चॉइस ब्रोकिंग में टेक्निकल एनालिस्ट आकाश शाह का कहना है कि भले ही बेंचमार्क इंडेक्स में काफी उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन कई लार्ज-कैप और अच्छे मिड-कैप शेयरों ने अपने लॉन्ग-टर्म सपोर्ट लेवल (जैसे 100 डे और 200 डे मूविंग एवरेज) को बनाए रखा। हर गिरावट के बाद ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम के साथ बाजार में मजबूत रिकवरी आई, जो इस बात का संकेत है कि निवेशक शेयर जमा (accumulate) कर रहे हैं,न कि बड़े पैमाने पर बेच रहे हैं। यह एक ऐसा प्राइस पैटर्न है जिसे आम तौर पर टेक्निकल नज़रिए से अच्छा माना जाता है।

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SIP ने संभाल लिया भारतीय मार्केट, दो वजहों से शेयरों में आया ताबड़तोड़ निवेश, लेकिन जेपीमॉर्गन ने जारी किया यह अलर्ट

टैक्स और पॉलिसी में कई बदलाव ने भारतीय स्टॉक मार्केट में निवेश को अधिक आकर्षक बना दिया है। यह दावा जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट में किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो वर्षों में शेयर बाजार से सुस्त रिटर्न के बावजूद इन बदलावों के चलते घरेलू शेयर मार्केट में निवेश की रफ्तार यानी इनफ्लो के लगातार मजबूत बने रहने की संभावना है। जेपीमॉर्गन के मुताबिक लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स, डेट म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर टैक्स में हालिया बदलावों ने रिस्क-रिवॉर्ड रेश्यो को ऐसा बना दिया कि इक्विटी में निवेश अधिक आकर्षक हो गया।

पॉलिसी और टैक्स से इक्विटी मार्केट को मिल रहा सपोर्ट

जेपी मॉर्गन ने अपनी इक्विटी स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में कहा कि पॉलिसी और टैक्स से इक्विटी मार्केट को सपोर्ट मिल रहा है। इक्विटी पर 12.5% ​​LTCG टैक्स लगता है, और इंडेक्सेशन हटाने, इंश्योरेंस पॉलिसी से मिलने वाले पैसे पर टैक्स और डेट म्यूचुअल फंड के लिए स्लैब-रेट टैक्स से इक्विटी की चमक बढ़ी। ब्रोकरेज फर्म का मानना ​​है कि इन स्ट्रक्चरल बदलाव और SIP के जरिए खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से इक्विटी मार्केट में घरेलू निवेश लगातार मजबूत बना रहेगा।

जेपीमॉर्गन का कहना है कि वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में अपना निवेश कम किया लेकिन फिर भी घरेलू निवेशक डटे रहे। इस दौरान बेंचमार्क इंडेक्स ने भले ही बहुत ज्यादा रिटर्न नहीं दिया, लेकिन रिटेल निवेशकों ने एसआईपी के जरिए निवेश जारी रखा। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इससे बाजार में लॉन्ग टर्म बदलाव का संकेत मिल रहा है।

SIP से मिला सपोर्ट लेकिन इस बात को लेकर किया अलर्ट

जेपीमॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में एसआईपी के बढ़ते महत्व पर जोर दिया, जो इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश आने का मुख्य जरिया बन गए हैं। जेपीमॉर्गन के मुताबिक हर महीने एसआईपी में निवेश का लगातार बढ़ना दिखाता है कि घरों की बचत का अधिकतर हिस्सा अब फाइनेंशियल एसेट्स में जा रहा है और आने वाले वर्षों में भी इस रुझान के बने रहने की उम्मीद है। हालांकि जेपीमॉर्गन ने चेतावनी दी है कि अगर लंबे समय तक एसआईपी में मासिक निवेश ₹25 हजार करोड़ से कम रहता है, तो निवेशकों के नजरिए पर दबाव पड़ सकता है।

एक और रिस्क रेगुलेटरी बदलावों से जुड़ा है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इन बदलावों से डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग वॉल्यूम में 20% से अधिक की गिरावट आ सकती है और इसका असर मार्केट की एक्टिविटीज पर पड़ सकता है।

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