The Ocean Cleanup के CEO के ऑफर के बाद बिट्टू तबाही ने की बातचीत, अब बताया क्या है अगला मिशन

मध्य प्रदेश की अजनार नदी को कचरे से निकालकर सुर्खियों में आए 21 साल के सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जाना जाता है, अब अपने अभियान को नई दिशा देने की तैयारी में हैं। एक नदी की सफाई से शुरू हुआ उनका मिशन अब सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। बिट्टू ने देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर सफाई अभियान चलाने का ऐलान किया है।

‘अब सिर्फ अपने घर की नहीं, पूरे देश की सफाई करनी है’

बिट्टू तबाही ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर अपने अगले कदम की जानकारी दी। उन्होंने देशभर के लोगों से पूछा कि वह सबसे पहले किस राज्य में सफाई अभियान शुरू करें। वीडियो में उन्होंने कहा कि जिस तरह लोगों ने उनके अपने इलाके की सफाई के प्रयासों में साथ दिया, उसी समर्थन के साथ अब वह इस मुहिम को दूसरे राज्यों तक ले जाना चाहते हैं। उनका मकसद साफ है सफाई को सिर्फ सोशल मीडिया की चर्चा नहीं, बल्कि देशभर में लोगों की भागीदारी वाला अभियान बनाना।

अजनार नदी से शुरू हुई कहानी ने इंटरनेट पर मचाई हलचल

बिट्टू तबाही उस वक्त चर्चा में आए, जब उन्होंने मध्य प्रदेश की कचरे से भरी अजनार नदी की सफाई का बीड़ा उठाया। कचरे और गंदगी के बीच सफाई करते उनके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। देखते ही देखते उनका काम बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच गया और देशभर से उन्हें समर्थन मिलने लगा। 21 साल की उम्र में बिना किसी बड़े संगठन के सहारे इस तरह की मुहिम शुरू करना ही उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाता है।

अब राज्यों के नाम सुझाएगी जनता

अपने नए वीडियो में बिट्टू ने लोगों से कहा है कि वे कमेंट करके बताएं कि उन्हें सबसे पहले किस राज्य में जाना चाहिए। उनका कहना है कि वह अलग-अलग राज्यों में जाकर सफाई करेंगे, ताकि स्वच्छता का संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके। यानी अब अगली मंजिल का फैसला सिर्फ बिट्टू नहीं, बल्कि उनके सोशल मीडिया फॉलोअर्स भी करेंगे।

विदेश से आया बड़ा ऑफर, ‘The Ocean Cleanup’ ने दिया नौकरी का न्योता

बिट्टू की मुहिम की चर्चा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। उनकी नदी सफाई की कोशिशों ने नीदरलैंड स्थित पर्यावरण संगठन The Ocean Cleanup का भी ध्यान खींचा। संगठन के संस्थापक और CEO Boyan Slat ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बिट्टू के काम की तारीफ करते हुए उन्हें अपने साथ काम करने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने सीधे लिखा,“Come work for us.”यह ऑफर सामने आने के बाद बिट्टू ने The Ocean Cleanup के साथ अपनी वीडियो कॉल की झलक भी इंस्टाग्राम पर शेयर की।

वीडियो कॉल की तस्वीरें भी कीं शेयर

बिट्टू ने The Ocean Cleanup के साथ हुई बातचीत का वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया। उन्होंने इसे संगठन के साथ हुई मीटिंग बताया। इस पोस्ट के बाद उनके फॉलोअर्स में भी उत्सुकता बढ़ गई। कई लोगों ने उन्हें Boyan Slat के ऑफर को स्वीकार करने की सलाह दी।

लोगों ने कहा- ‘ये सिर्फ भारत की बात नहीं, दुनिया की सोचो’

बिट्टू के पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर प्रतिक्रिया दी। किसी ने उन्हें असली हीरो बताया, तो किसी ने उनके काम को लोगों को प्रेरित करने वाला कदम कहा। एक यूजर ने उन्हें सलाह दी कि वह सिर्फ भारत तक सीमित न रहें, बल्कि दुनिया के बारे में सोचें। एक अन्य यूजर ने लिखा कि वह बिना किसी ‘केप’ के असली हीरो हैं।

एक नदी से शुरू हुआ सफर, अब देश की ओर नजर

बिट्टू तबाही की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने किसी बड़े मंच या संसाधनों के इंतजार के बजाय खुद पहल की। अजनार नदी की सफाई से शुरू हुई उनकी कोशिश सोशल मीडिया के जरिए हजारों लोगों तक पहुंची और अब वह इसे देशव्यापी अभियान में बदलना चाहते हैं।

न इंजीनियरिंग की डिग्री, न टेक्निकल बैकग्राउंड, BBA छात्र ने बताया कैसे 2010 में Google में मिली नौकरी

न इंजीनियरिंग की डिग्री, न टेक्निकल बैकग्राउंड, BBA छात्र ने बताया कैसे 2010 में Google में मिली नौकरी

Google में नौकरी का सपना देखने वालों में अक्सर इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के छात्रों का नाम सबसे पहले आता है। लेकिन निखिल दुर्गानी की कहानी इस आम धारणा से बिल्कुल अलग है। उन्होंने न तो इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और न ही कंप्यूटर साइंस की। इसके बावजूद 2010 में BBA के छात्र रहते हुए उन्हें Google में नौकरी मिल गई। करीब 16 साल तक कंपनी में काम करने के बाद 2026 में उन्होंने 35 साल की उम्र में रिटायरमेंट ले लिया।

जब कॉलेज कैंपस में Google को देखकर हैरान रह गए छात्र

निखिल का जन्म और पालन-पोषण भारत में हुआ। पढ़ाई के लिए वह कोलकाता के St. Xavier’s College पहुंचे, जहां उन्होंने BBA में दाखिला लिया। साल 2010 में जब वह ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में थे, तभी उनके कॉलेज में Google कैंपस प्लेसमेंट के लिए पहुंचा। यह देखकर छात्रों को काफी हैरानी हुई। वजह थी कॉलेज का माहौल। वहां ज्यादातर छात्र कॉमर्स, आर्ट्स और जर्नलिज्म जैसे विषयों से जुड़े थे। ऐसे में एक बड़ी टेक कंपनी का कैंपस में आना कई छात्रों के लिए किसी पहेली से कम नहीं था। निखिल ने बाद में बताया कि छात्रों के मन में सवाल था कि आखिर Google उनके कॉलेज में क्यों आई है, जबकि वहां इंजीनियरिंग के छात्र ही नहीं हैं।

तब पहली बार सामने आया Google AdWords का नाम

कैंपस भर्ती के दौरान निखिल और उनके साथियों को पता चला कि Google में सिर्फ सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के लिए ही नौकरियां नहीं होतीं। कंपनी के विज्ञापन कारोबार में ऐसे लोगों की भी जरूरत थी, जिन्हें बिजनेस और ग्राहकों की समझ हो। यहीं निखिल की मुलाकात Google AdWords से हुई। यही प्लेटफॉर्म आगे चलकर Google के बड़े विज्ञापन कारोबार का अहम हिस्सा बना और 2018 में इसका नाम बदलकर Google Ads कर दिया गया। निखिल के लिए यह एक ऐसा मौका था, जिसने उनके करियर की दिशा ही बदल दी।

BBA के बाद सीधे Google, शुरुआत Account Optimizer के तौर पर

2010 में निखिल उन तीन छात्रों में शामिल थे, जिन्हें St. Xavier’s College से Google ने चुना था। तीनों की पहली पोस्टिंग हैदराबाद में हुई। निखिल ने Account Optimizer के तौर पर काम शुरू किया। उनकी जिम्मेदारी विज्ञापनदाताओं की ऑनलाइन विज्ञापन कैंपेन को बेहतर बनाने और उन्हें अच्छे नतीजे दिलाने की थी। यानी जिस छात्र ने कॉलेज में BBA पढ़ते हुए Google के कैंपस में आने पर हैरानी जताई थी, कुछ ही समय बाद वह खुद Google की टीम का हिस्सा बन चुका था।

प्लान था सिर्फ दो साल नौकरी करने का

Google ज्वाइन करते समय निखिल ने नहीं सोचा था कि उनका सफर इतना लंबा होने वाला है। उनकी योजना थी कि कुछ साल नौकरी करेंगे और फिर मास्टर्स की पढ़ाई के लिए आगे बढ़ जाएंगे। लेकिन Google में उन्हें लगातार नई भूमिकाएं और नए अवसर मिलते रहे। इसी वजह से उनका सफर एक नौकरी से बढ़कर लंबा करियर बन गया।

एक रोटेशन प्रोग्राम ने खोले करियर के नए दरवाजे

Google में करीब तीन साल काम करने के बाद निखिल को एक रोटेशन प्रोग्राम में शामिल होने का मौका मिला। इस प्रोग्राम के जरिए कर्मचारी कुछ समय के लिए कंपनी की किसी दूसरी टीम या भूमिका में काम कर सकते थे। इससे उन्हें यह समझने का मौका मिलता था कि वे आगे किस क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। निखिल के लिए यह अनुभव काफी अहम साबित हुआ। उन्होंने कंपनी के भीतर अलग-अलग भूमिकाओं और टीमों को समझा और अपने करियर का दायरा बढ़ाया।

हैदराबाद से अमेरिका तक पहुंचा सफर

Google में करीब साढ़े तीन साल हैदराबाद में काम करने के बाद निखिल को विदेश जाने का अवसर मिला। वह अमेरिका के मिशिगन स्थित Ann Arbor पहुंचे। यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। भारत से बाहर काम करने के अनुभव ने उनके सामने आगे बढ़ने की नई संभावनाएं खोलीं।इसी दौरान उन्हें Google Singapore जाने का मौका मिला।

Singapore गए तो वहीं बस गई जिंदगी

निखिल करीब 12 साल से सिंगापुर में रह रहे हैं। शुरुआत में यह उनके करियर का अगला पड़ाव था, लेकिन धीरे-धीरे सिंगापुर उनकी स्थायी जिंदगी का हिस्सा बन गया। यहीं उन्होंने अपने परिवार के साथ जीवन बसाया और Google में अपना करियर भी आगे बढ़ाया। भारत के एक कॉलेज से शुरू हुआ उनका सफर पहले हैदराबाद, फिर अमेरिका और आखिरकार सिंगापुर तक पहुंच गया।

15 साल से ज्यादा Google में बिताए, फिर 35 की उम्र में रिटायरमेंट

2010 में शुरू हुआ Google का सफर 2026 में खत्म हुआ। निखिल ने कंपनी में 15 साल से ज्यादा समय बिताने के बाद 35 साल की उम्र में रिटायरमेंट ले लिया। उनकी कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि इसकी शुरुआत एक ऐसे मौके से हुई थी, जिसकी उन्होंने शायद उम्मीद भी नहीं की थी। BBA के छात्र निखिल ने जब अपने कॉलेज में Google को देखा था, तब उनके मन में सवाल था “Google यहां क्यों आई है?” लेकिन उसी सवाल का जवाब उनके लिए एक नए करियर के रूप में सामने आया।

आज उनकी कहानी यह बताती है कि किसी कंपनी में करियर बनाने के लिए हमेशा वही डिग्री जरूरी नहीं होती, जिसकी हम कल्पना करते हैं। कभी-कभी आपकी पढ़ाई से ज्यादा मायने रखता है कि आपके सामने आया मौका आपकी काबिलियत से कितना मेल खाता है और आप उस मौके को कितनी दूर तक ले जा पाते हैं।

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Volvo reveals facelifts of XC40, EX40 and EC40

Volvo reveals facelifts of XC40, EX40 and EC40
Volvo EC40, EX40 and XC40

Volvo has updated its entire 40 series range, which includes the XC40, EX40, and EC40. The Swedish carmaker has brought in subtle exterior revisions, new interior decor options, updated tech, and safety enhancements.

  1. New 11.2-inch infotainment with Google Gemini integration.
  2. Level 2 ADAS and a 360-degree camera are optional fitments. 

There’s no confirmation on whether the facelifted EC40 will arrive here, considering it’s the only 40 series SUV sold in India. Volvo has delisted the EX40 from its India website; the XC40 was discontinued in 2023

Volvo 40 Series: What’s new?

The front-end on all models receives revisions for the matrix LED headlamps with ‘Thor’s Hammer’ DRL signatures and a cleaner look for the bumper. There’s also a new grille design for the XC40 that helps set it apart from the EC40 and EX40, which get a blanked-off finish. At the rear, only the XC40 and EX40 sport new LED tail-lamps and a revised tailgate and bumper. The alloy wheels on all models have been restyled, with the XC40 now offering 18- to 20-inch rims. Black Editions are also available, which come with blacked-out exterior elements.

Inside, there’s a larger 11.2-inch infotainment system with Volvo’s latest operating system. There’s also Google Gemini integration onboard, which helps drivers have natural conversations with the in-car assistant. Volvo has also introduced new upholstery and decor options for the interior.

Volvo says that, as standard, all models respond to potential collisions in real time with features like automatic emergency steering and braking. Optional safety features include a Level 2 ADAS suite and a 360-degree camera. The Swedish carmaker says that the XC40, EX40 and EC40 will “improve over time” with OTA updates.

Under the hood, the XC40 is powered by a 2.0-litre turbocharged petrol engine available in two states of tune. Lower-spec versions produce 163hp and 265Nm while higher-spec versions deliver 197hp and 300Nm. Power is sent to the front wheels via a 7-speed DCT. The EC40 and EX40 provide multiple battery choices ranging from 66kWh to 79kWh. Depending on the variant, you either get a rear-mounted motor or a dual-motor setup that enables AWD. The maximum e-motor power output is 442hp and 670 Nm, and WLTP-certified range figures for the EX40 and EC40 are 575km and 584km, respectively. 

80 साल के दादा 60 साल से कर रहे गांव की सफाई | Inspiration | West Bengal | Senior Citizen

80 साल के दादा 60 साल से कर रहे गांव की सफाई  | Inspiration | West Bengal | Senior Citizen

दूषित नदियों, रास्तों और पहाड़ों की शिकायत करने वाले लोग तो आपको जरूर कहीं न कहीं मिल जाएंगे। लेकिन बिना किसी शिकायत के अपने शहर और देश की गलियों को अपना घर समझकर सफाई करने वाले लोग आपको कहाँ मिलेंगे?
एक इंसान की जिंदगी के 70 साल दूसरों के चलने का रास्ता साफ करते हुए गुजर गए।
क्या हम उनके जीवन के इस आखिरी पड़ाव में उनके साथ थोड़ा खड़े नहीं हो सकते?
आप चाहें तो इस बुजुर्ग दंपति की मदद कर सकते हैं—
M- 7908720522
UCO Bank
Jaba Pal
A/C – 22220110049228
IFSC – UCBA0002222

क्या आपके आसपास भी कोई ऐसा व्यक्ति है, जो अपने समुदाय को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है?

उसे #CivicSenseHero के लिए Nominate करें।
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Royal Enfield Himalayan 440 vs 450: Price and specifications compared

Royal Enfield Himalayan 440 vs 450: Price and specifications compared
An image showing the Himalayan 440 in Sela Black colour facing left and the Himalayan 450 in Slate Himalayan Salt colour facing right

Royal Enfield has rejuvenated the Himalayan 411 as the Himalayan 440, with a new 443cc engine. Based on the Scram 440’s core principles, the motorcycle carries over the same looks as the 411 but with the promise of a better riding experience. The Scram 440’s 1.4hp extra power and 2Nm of torque coupled with an additional sixth gear did help it perform well on the highway. We can expect that to be the case with the Himalayan 440 too. But wait, isn’t there a Himalayan 450 with a 452cc engine? At first glance, they do look similar but is that really the case? Let’s see what else you get besides 9cc extra on the bigger brother.

Royal Enfield Himalayan 440 vs 450: Engine and output

Himalayan 450 has more power, torque, and a revvy engine

 

Royal Enfield Himalayan 440

Royal Enfield Himalayan 450

Engine

443cc single-cylinder, air- and oil-cooled

452cc single-cylinder, liquid-cooled

Power

25.4hp at 6,250rpm

40.02hp at 8,000rpm

Torque

34Nm at 4,000rpm

40Nm at 5,500rpm

Transmission

6-speed

6-speed

Power-to-weight ratio

127.64hp/tonne

204.18hp/tonne

Perhaps there are no better examples than these two motorcycles to demonstrate that an engine’s displacement doesn’t reveal the full picture. Like we’d mentioned above, exactly 9cc separates the two but the differences only get bigger from there. The 450 gets the more modern liquid-cooling tech, ensuring that the engine temperature is controlled more effectively; which allows the Himalayan 450 to produce substantially more power from a similar displacement engine. It makes 14.62hp extra power over the 440 and delivers it at a higher rpm compared to it.

A higher revving engine is associated with performance, and the 450 makes it clear that its engine is more suitable for it. Torque is also higher on the 450, albeit a smaller 6Nm difference. Both motorcycles now have six gears so highway tours on neither should be straining, but there’s no doubt which one will have more power left in reserve.

Royal Enfield Himalayan 440 vs 450: Dimensions and weight

Himalayan 450 is lighter, longer, and (slightly) taller

 

Royal Enfield Himalayan 440

Royal Enfield Himalayan 450

Fuel tank

15 litres

17 litres

Ground clearance

220mm

230mm

Seat height

800mm

825mm

Kerb weight

199kg

196kg

Wheelbase

1460mm

1510mm

This may be a surprise for some, but Royal Enfield made sure the newer 450 is better on (almost) all fronts compared to its predecessor, the 411. Since the 440 shares the same dimensions, it has 10mm less ground clearance, 3kg extra kerb weight, and 50mm lesser wheelbase. It is, however, more accessible with a 25mm lower seat height than the 450, but Royal Enfield does offer a lower seat accessory to bring its seat height down to 805mm. Royal Enfield has also upgraded the chassis on the 450 to an advanced, performance-oriented twin-spar frame compared to the 440’s simpler split-cradle frame.

Since a Himalayan is all about the adventure (pun intended), the 450’s two litres larger fuel tank is sure to add at least 60km additional range over the 440. In most situations, this shouldn’t make a massive difference, but it is a marked advantage that the 450 lords over most of its rivals, which now includes the older-younger brother.

Royal Enfield Himalayan 440 vs 450: Tyres, brakes, and suspension

Himalayan 450 gets bigger brakes, tyres, and suspension travel

 

Royal Enfield Himalayan 440

Royal Enfield Himalayan 450

Tyres (F,R)

90/90-21, 120/90-17

90/90-21, 140/80R17

Brakes (F,R)

300mm disc, 240mm disc; dual-channel ABS

320mm disc, 270mm disc; dual-channel ABS

Suspension (F,R)

Telescopic (RSU) fork, linkage monoshock

Telescopic (USD) fork, linkage monoshock

The ‘new advantage’ carries onto this section as well. The 450 gets a larger rear tyre that’s also radially constructed, compared to the 440’s traditional bias-ply constructed rear tyre. The 450 also boasts a larger front disc, although the ratio between the front and rear disc stays similar across both motorcycles. Both also get dual-channel ABS as standard, and both allow you to turn off the rear ABS at will. Lastly, the 450 gets the USD front fork and it’s a larger 43mm diameter unit, compared to the 440’s 41mm. The suspension travel on the rear has been increased by 20mm over the 440 as well, to 200mm. Both motorcycles do let you adjust the rear preload for further personalisation, and both lack the ability to adjust the front fork in any form or fashion.

Royal Enfield Himalayan 440 vs 450: Features

Himalayan 450 gets more features and better quality levels

To no one’s surprise, again, the 450 offers you more features for the extra price you pay for it. You get an assist and slipper clutch, a 4-inch TFT instrument cluster that offers Google Maps mirroring, two ride modes, and ride-by-wire technology. Besides the extras mentioned in the other sections, the 450 also gets the newer rotary switches for ignition and high beam controls, but we wouldn’t consider that to be an upgrade in experience. The 450 does get an upgraded design and quality levels, more in line with 2026. The 440 does get an updated instrument cluster with the tripper pod as standard, enabling Google Maps power turn-by-turn navigation. However, it can’t match the 450 on any of its other features. To be clear, the 440 by no means is a poorly made machine, but it consciously sticks to an older design and feature set, which is unmissable when you see the two side-by-side.

One feature that’s afforded only to the 450, quite literally, are the tubeless spoke rims. The top three variants of it get those rims as standard fitment. Royal Enfield charges Rs 16,000 at the moment for upgrading the wire-spoked rims to cross-spoked, tubeless rims on the lower two variants. On the 440, however, they aren’t offered at all and Royal Enfield didn’t confirm if the 450’s rims can be retrofitted to the 440 either.

Royal Enfield Himalayan 440 vs 450: Price

Himalayan 450’s upgrades come at a significant cost

 

Royal Enfield Himalayan 440

Royal Enfield Himalayan 450

Price (ex-showroom, Chennai)

Rs 2.29 lakh

Rs 3.08-3.40 lakh

This will likely be how you decide which Himalayan to buy, assuming you’re okay with either bike otherwise and that’s of course an advantage to the 440. It starts a full Rs 78,000 lower than the 450 for the single variant with three colours. The 450 has effectively two variants (with or without tubeless spoke rims) in six colours; Royal Enfield does charge different prices for five of those variants so it’s best to pay a visit to the website or your nearest dealer for the specifics.

Even though the 450 offers much more, the 440’s competitive pricing helps it compete with smaller capacity adventure models like the KTM 250 Adventure and the TVS RTX 300. It’s also priced very similarly to the road-biased Scram 440; in fact, the Himalayan 440 costs Rs 3,000 less than the Scram 440’s top variant with alloy wheels.

We’d like to acknowledge that this isn’t a comparison we’d usually do, but these two motorcycles could mislead the uninformed buyer into misjudging the Himalayan 450 and we hope to have helped you see the differences run far deeper than that, just to make sure that you’re getting the right Himalayan for yourself.

Apple Event 2026: iPhone 18 Pro से फोल्डेबल iPhone तक होंगे बड़े ऐलान, जानें और क्या होगा खास

Apple September Event 2026: Apple अपना बड़ा सितंबर इवेंट 9 सितंबर को रात 10:30 बजे (IST) आयोजित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उम्मीद है कि क्यूपर्टिनो की यह टेक कंपनी इस इवेंट में अपनी नई iPhone 18 Pro सीरीज, अपना पहला फोल्डेबल iPhone और नए Apple Watch मॉडल पेश करेगी। बता दें कि टिम कुक के टॉप पद से हटने के बाद, नए Apple CEO जॉन टर्नस के नेतृत्व में यह iPhone का पहला बड़ा लॉन्च होगा।

Apple के इस सितंबर इवेंट में ग्राहकों iPhone 18 Pro और Apple के पहले फोल्डेबल iPhone से लेकर नए Apple Watch और दूसरे प्रोडक्ट्स तक देखने को मिल सकते हैं।

iPhone 18 Pro और Pro Max पर रहेंगी नजरें

इस इवेंट में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max मुख्य आकर्षण हो सकते हैं।

उम्मीद है कि क्यूपर्टिनो की यह टेक कंपनी नए Pro मॉडल के साथ नई पीढ़ी की A20 Pro चिप, बेहतर कैमरा और बेहतर बैटरी लाइफ लाएगी। ऐसी खबरें भी हैं कि iPhone बनाने वाली कंपनी Dynamic Island में बदलाव कर सकती है और iPhone 18 Pro Max में वेरिएबल-अपर्चर वाला मेन कैमरा ला सकती है।

हालांकि, भारतीय खरीदारों के लिए सबसे बड़ा सवाल कीमत का होगा।

लीक के अनुसार, iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये हो सकती है, जबकि Pro Max की कीमत लगभग 1.7 लाख रुपये हो सकती है। ये अनुमानित कीमतें हैं और Apple ने अभी तक इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

सबसे बड़ा सरप्राइज Samsung और Google को टक्कर देने के लिए Apple का फोल्डेबल स्मार्टफोन मार्केट में उतरना हो सकता है। उम्मीद है कि US की यह टेक कंपनी अपना पहला फोल्डेबल iPhone लॉन्च करेगी, जो किताब की तरह खुल सकता है और एक बहुत बड़ी डिस्प्ले दिखा सकता है।

उम्मीद यह भी है कि iPhone Ultra प्रीमियम सेगमेंट को टारगेट करेगा और यह Apple का अब तक का सबसे महंगा iPhone बन सकता है। खबरों के अनुसार, फोल्डेबल iPhone की कीमत $2,000 से ज्यादा हो सकती है। वहीं, भारत में इसकी कीमत 2 लाख रुपये से अधिक पहुंचने की संभावना है।

रेगुलर iPhone 18 के बारे में क्या?

इस साल Apple की iPhone लॉन्च करने की रणनीति में बड़ा बदलाव हो सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple पहले iPhone 18 Pro मॉडल और फोल्डेबल iPhone लॉन्च कर सकता है, जबकि रेगुलर iPhone 18 और iPhone 18e बाद में, शायद 2027 में आ सकते हैं। इसका मतलब है कि जो भारतीय खरीदार सस्ता नया iPhone चाहते हैं, उन्हें इंतजार करना पड़ सकता है।

Apple Watch के नए मॉडल

उम्मीद है कि कंपनी इस इवेंट में Apple Watch के नए मॉडल भी पेश करेगा। चर्चा है कि कंपनी Apple Watch Series 12 और Apple Watch Ultra 4 लॉन्च करेगी, जिनमें हेल्थ, फिटनेस और परफॉर्मेंस पर खास ध्यान दिया जाएगा।

इसके अलावा, iPhone बनाने वाली कंपनी नए AirPods की भी घोषणा कर सकती है, हालांकि जरूरी नहीं कि चर्चा में रहे सभी प्रोडक्ट्स सितंबर वाले इवेंट में पेश किए जाएं।

Apple के दूसरे प्रोडक्ट्स

खबरों के मुताबिक, क्यूपर्टिनो की टेक कंपनी कई और प्रोडक्ट्स पर काम कर रही है, जिनमें नया Apple TV, HomePod mini और OLED iPad mini शामिल हैं। इनमें से कुछ प्रोडक्ट्स की घोषणा सितंबर के इवेंट में हो सकती है, जबकि बाकी प्रोडक्ट्स अक्टूबर या उसके बाद आ सकते हैं।

यह भी पढ़ें: Samsung Galaxy A18 की कीमत और फीचर्स लीक! मिलेगी 5,000mAh बैटरी और 50MP कैमरा

कम किराए के चक्कर में न बढ़ा लें ट्रैवल का खर्च, फ्लाइट बुकिंग में इन गलतियों से बचें!

फ्लाइट से घूमने का प्लान बनाते समय अक्सर लोग सिर्फ एक ही वेबसाइट पर किराया देखकर या जल्दबाजी में टिकट बुक करने की गलती कर बैठते हैं, जिससे ज्यादा खर्चा हो जाता है। केवल टिकट की शुरुआती कम कीमत देखकर तुरंत बुकिंग करना सही फैसला नहीं है, क्योंकि बाद में बैगेज, सीट सिलेक्शन और अन्य छिपे हुए चार्ज (Hidden Charges) जुड़ने से कुल किराया काफी बढ़ जाता है। इसलिए, एक स्मार्ट ट्रैवलर की तरह टिकट बुक करने से पहले हमेशा अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना करें और सभी रूल को ध्यान से पढ़ें, ताकि आपका सफर पूरी तरह से आपके बजट में रहे।

1. नजदीकी एयरपोर्ट का भी लें फायदा

टिकट बुक करते समय सिर्फ अपने सबसे पास या बड़े एयरपोर्ट से ही फ्लाइट ढूंढना जरूरी नहीं है। यदि आपके आसपास कोई दूसरा एयरपोर्ट है, तो वहां से मिलने वाली फ्लाइट की कीमत भी देखें। कई बार दूसरे एयरपोर्ट से उड़ान काफी सस्ती मिल जाती है। लेकिन वहां तक पहुंचने का खर्च भी टिकट की कीमत में जोड़कर ही फैसला करें।

2. टिकट की पूरी कीमत जानें

कई बार टिकट की शुरुआती कीमत बहुत कम दिखाई देती है, लेकिन बुकिंग के लास्ट में बैगेज, सीट चुनने, खाने या दूसरे चार्ज जुड़ जाते हैं। इसलिए सिर्फ शुरुआती किराया देखकर फैसला न करें। पेमेंट करने से पहले देखें कि टिकट की कुल कीमत कितनी है और उसमें क्या-क्या शामिल है।

3. कई जगह देखें टिकट के दाम

कई लोग पहली वेबसाइट पर मिली कीमत देखकर टिकट बुक कर देते हैं। ऐसा करने से पहले अलग-अलग एयरलाइन और फ्लाइट बुकिंग वेबसाइट पर किराया जरूर चेक करें। Google Flights जैसे प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग ऑप्शन की तुलना करने से आपको बेहतर डील मिल सकती है।

4. राउंड ट्रिप से पहले वन-वे भी चेक

हम अक्सर आने-जाने की जर्नी के लिए एक ही राउंड ट्रिप टिकट खोजते हैं। लेकिन हर बार यही सबसे सस्ता ऑप्शन हो, जरूरी नहीं है। अलग-अलग एयरलाइन की दो वन-वे टिकटों की कीमत भी चेक करें। कई बार इससे टोटल एक्सपेंसेस कम हो सकता है। साथ ही फ्लाइट का समय और सामान से जुड़े पॉलिसी भी जरूर देखें।

5. सही समय पर करें बुकिंग

फ्लाइट टिकट बुक करने का सही समय काफी मायने रखता है। कई महीने पहले टिकट लेने पर कभी-कभी किराया ज्यादा होता है। ट्रिप की तारीख बिल्कुल पास आने तक इंतजार करने पर भी टिकट महंगा हो सकता है। इसलिए ट्रैवल का प्लान बनते ही अलग-अलग तारीखों में किराया चेक करते रहें और सही कीमत मिलने पर बुकिंग करें।

6. डेट बदलकर देखें किराया

आपकी ट्रैवल की तारीख फिक्स नहीं है, तो एक-दो दिन आगे-पीछे की तारीख भी जरूर देखें। शुक्रवार, रविवार या छुट्टियों के आसपास फ्लाइट का किराया ज्यादा हो सकता है। ऐसे में मंगलवार या बुधवार जैसे दिनों की उड़ान चेक करने पर कम कीमत का टिकट मिल सकता है।

7. बुकिंग से पहले पढ़ें ये रूल

टिकट बुक करने से पहले यह जरूर देख लें कि डेट बदलने या टिकट कैंसिल करने पर कितना चार्ज लगेगा। बहुत सस्ता टिकट कई बार नॉन-रिफंडेबल होता है या उसमें बदलाव करना महंगा पड़ सकता है। आपके पास एयरलाइन के रिवॉर्ड पॉइंट्स या माइल्स हैं, तो बुकिंग से पहले उन्हें इस्तेमाल करने का ऑप्शन भी जरूर चेक करें।

इस तरह थोड़ी समझदारी और पहले से तैयारी करके आप अपने सफर का बजट बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। क्योंकि फ्लाइट टिकट बुक करना सिर्फ कम किराया देखना नहीं, बल्कि सही ऑप्शन चुनना भी जरूरी है। इसलिए टिकट लेते समय जल्दबाजी करने के बजाय सभी ऑप्शन को देखकर फैसला करें, ताकि जर्नी कम्फर्टेबल भी रहे और ज्यादा खर्च भी न हो।

कम किराए के चक्कर में न बढ़ा लें ट्रैवल का खर्च, फ्लाइट बुकिंग में इन गलतियों से बचें!

फ्लाइट से घूमने का प्लान बनाते समय अक्सर लोग सिर्फ एक ही वेबसाइट पर किराया देखकर या जल्दबाजी में टिकट बुक करने की गलती कर बैठते हैं, जिससे ज्यादा खर्चा हो जाता है। केवल टिकट की शुरुआती कम कीमत देखकर तुरंत बुकिंग करना सही फैसला नहीं है, क्योंकि बाद में बैगेज, सीट सिलेक्शन और अन्य छिपे हुए चार्ज (Hidden Charges) जुड़ने से कुल किराया काफी बढ़ जाता है। इसलिए, एक स्मार्ट ट्रैवलर की तरह टिकट बुक करने से पहले हमेशा अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना करें और सभी रूल को ध्यान से पढ़ें, ताकि आपका सफर पूरी तरह से आपके बजट में रहे।

flight book

1. नजदीकी एयरपोर्ट का भी लें फायदा

टिकट बुक करते समय सिर्फ अपने सबसे पास या बड़े एयरपोर्ट से ही फ्लाइट ढूंढना जरूरी नहीं है। यदि आपके आसपास कोई दूसरा एयरपोर्ट है, तो वहां से मिलने वाली फ्लाइट की कीमत भी देखें। कई बार दूसरे एयरपोर्ट से उड़ान काफी सस्ती मिल जाती है। लेकिन वहां तक पहुंचने का खर्च भी टिकट की कीमत में जोड़कर ही फैसला करें।

2. टिकट की पूरी कीमत जानें

कई बार टिकट की शुरुआती कीमत बहुत कम दिखाई देती है, लेकिन बुकिंग के लास्ट में बैगेज, सीट चुनने, खाने या दूसरे चार्ज जुड़ जाते हैं। इसलिए सिर्फ शुरुआती किराया देखकर फैसला न करें। पेमेंट करने से पहले देखें कि टिकट की कुल कीमत कितनी है और उसमें क्या-क्या शामिल है।

3. कई जगह देखें टिकट के दाम

कई लोग पहली वेबसाइट पर मिली कीमत देखकर टिकट बुक कर देते हैं। ऐसा करने से पहले अलग-अलग एयरलाइन और फ्लाइट बुकिंग वेबसाइट पर किराया जरूर चेक करें। Google Flights जैसे प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग ऑप्शन की तुलना करने से आपको बेहतर डील मिल सकती है।

4. राउंड ट्रिप से पहले वन-वे भी चेक

हम अक्सर आने-जाने की जर्नी के लिए एक ही राउंड ट्रिप टिकट खोजते हैं। लेकिन हर बार यही सबसे सस्ता ऑप्शन हो, जरूरी नहीं है। अलग-अलग एयरलाइन की दो वन-वे टिकटों की कीमत भी चेक करें। कई बार इससे टोटल एक्सपेंसेस कम हो सकता है। साथ ही फ्लाइट का समय और सामान से जुड़े पॉलिसी भी जरूर देखें।

5. सही समय पर करें बुकिंग

फ्लाइट टिकट बुक करने का सही समय काफी मायने रखता है। कई महीने पहले टिकट लेने पर कभी-कभी किराया ज्यादा होता है। ट्रिप की तारीख बिल्कुल पास आने तक इंतजार करने पर भी टिकट महंगा हो सकता है। इसलिए ट्रैवल का प्लान बनते ही अलग-अलग तारीखों में किराया चेक करते रहें और सही कीमत मिलने पर बुकिंग करें।

6. डेट बदलकर देखें किराया

अगर आपकी ट्रैवल की तारीख फिक्स नहीं है, तो एक-दो दिन आगे-पीछे की तारीख भी जरूर देखें। शुक्रवार, रविवार या छुट्टियों के आसपास फ्लाइट का किराया ज्यादा हो सकता है। ऐसे में मंगलवार या बुधवार जैसे दिनों की उड़ान चेक करने पर कम कीमत का टिकट मिल सकता है।

7. बुकिंग से पहले पढ़ें ये रूल

टिकट बुक करने से पहले यह जरूर देख लें कि डेट बदलने या टिकट कैंसिल करने पर कितना चार्ज लगेगा। बहुत सस्ता टिकट कई बार नॉन-रिफंडेबल होता है या उसमें बदलाव करना महंगा पड़ सकता है। आपके पास एयरलाइन के रिवॉर्ड पॉइंट्स या माइल्स हैं, तो बुकिंग से पहले उन्हें इस्तेमाल करने का ऑप्शन भी जरूर चेक करें।

इस तरह थोड़ी समझदारी और पहले से तैयारी करके आप अपने सफर का बजट बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। क्योंकि फ्लाइट टिकट बुक करना सिर्फ कम किराया देखना नहीं, बल्कि सही ऑप्शन चुनना भी जरूरी है। इसलिए टिकट लेते समय जल्दबाजी करने के बजाय सभी ऑप्शन को देखकर फैसला करें, ताकि जर्नी कम्फर्टेबल भी रहे और ज्यादा खर्च भी न हो।

Refurbished Phone खरीदने से पहले ये 8 चीजें जरूर चेक करें, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

Refurbished Phone: भारत और दूसरे ग्लोबल मार्केट में मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों की वजह से स्मार्टफोन महंगे हो रहे हैं, इसलिए ज्यादा खरीदार Refurbished स्मार्टफोन की ओर रुख कर रहे हैं। हमेशा की तरह, Apple और Samsung के पहले इस्तेमाल किए गए डिवाइस की बहुत ज्यादा मांग है। आमतौर पर इन फोन्स को दोबारा बेचने से पहले अच्छी तरह जांच, टेस्ट और जरूरत पड़ने पर रिपेयर किया जाता है। रिफर्बिश्ड फोन खरीदने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप कम कीमत में बेहतर या नया हार्डवेयर वाला फोन ले सकते हैं। यानी नए फोन की पूरी कीमत चुकाने के बजाय, आप हाल ही में लॉन्च हुए किसी मॉडल को कम दाम में खरीद सकते हैं। हालांकि, Refurbished फोन खरीदने में कई जोखिम भी होते हैं। खरीदने से पहले यूजर्स को कई बातों की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए, जैसे कि सेलर की  विश्वसनीयता, डिवाइस के हार्डवेयर फीचर्स, वारंटी वगैरह।

सुरक्षित Refurbished फोन सेलर कैसे चुनें

अपने इस्तेमाल के लिए Refurbished स्मार्टफोन मॉडल चुनने से पहले ही, आपको एक भरोसेमंद सेलर चुनना होगा। क्योंकि सिर्फ एक भरोसेमंद सेलर ही फोन की हालत, उसकी हिस्ट्री, वारंटी और रिटर्न पॉलिसी के बारे में सही जानकारी दे सकता है।

आमतौर पर सबसे बेहतर विकल्प कंपनी से सर्टिफाइड Refurbished फोन खरीदना होता है। Samsung जैसी बड़ी स्मार्टफोन कंपनियां अपने सर्टिफाइड Refurbished फोन कम कीमत पर बेचती हैं। Samsung के Certified Re-Newed प्रोग्राम से यूजर्स Galaxy S25 Ultra और Galaxy S25 जैसे मॉडल कम कीमत पर पा सकते हैं।

ब्रांड्स की तरफ से सीधे बेचे जाने वाले पुराने (pre-owned) फोन्स की इन-हाउस जांच, फंक्शनल टेस्टिंग और सॉफ्टवेयर वैलिडेशन की जाती है। कई ब्रांड्स तो बिक्री के लिए लिस्ट करने से पहले डेटा हटा देते हैं और खराब पार्ट्स को ओरिजिनल स्पेयर पार्ट्स से बदल भी देते हैं। इसके अलावा, आप मैन्युफैक्चरर की वेबसाइट पर जाकर उनके ऑफिशियल रिफर्बिश्ड प्रोग्राम के बारे में पता कर सकते हैं और यह पक्का कर सकते हैं कि डिवाइस के साथ वैलिड वारंटी मिल रही है या नहीं। कुछ कंपनियां Refurbished फोन्स खरीदने वालों को अतिरिक्त फायदे और डिस्काउंट भी देती हैं।

इसके अलावा, कोई ऐसा भरोसेमंद रिटेलर भी चुना जा सकता है जो लंबे समय से रिफर्बिश्ड फोन बेचने का काम कर रहा हो। लेकिन खरीदारी करने से पहले रिटेलर से फोन की कंडीशन, ग्रेड और वारंटी के बारे में पूरी जानकारी जरूर लें। फोन खरीदने के बाद उसका इनवॉइस संभालकर रखना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जा सके। साथ ही फोन खरीदने से पहले रिटेलर की रिटर्न और रिप्लेसमेंट पॉलिसी भी अच्छी तरह पढ़ लें।

जो खरीदार पैसे देने से पहले फोन को अच्छी तरह देखना-परखना चाहते हैं, वे Refurbished फोन बेचने वाले स्टोर पर जा सकते हैं। स्टोर पर जाकर आप हैंडसेट, डिस्प्ले, कैमरा और फोन की कुल हालत की जांच कर सकते हैं। साथ ही, खरीदारों को वारंटी, रिटर्न की अवधि और Refurbished के दौरान इस्तेमाल किए गए पार्ट्स की जांच अच्छे से कर लेनी चाहिए। इसके अलावा, ऐसे सेलर से सावधान रहें जो IMEI नंबर या खरीद का बिल देने से मना करते हैं।

Refurbished फोन खरीदने से पहले क्या-क्या चेक करें

खरीद पूरी करने से पहले, फोन को ध्यान से देखें और उसकी पहचान वेरिफाई करें। डिवाइस पर दिख रहे IMEI नंबर को चेक करें और अगर मुमकिन हो, तो उसे बॉक्स या इनवॉइस पर लिखे IMEI नंबर से मिलाएं। भारत में खरीदार ‘Sanchar Saathi CEIR’ सर्विस के जरिए IMEI स्टेटस चेक कर सकते हैं।

वहीं, iPhone खरीदने वालों को यह पक्का करना चाहिए कि सेलर ने अपने Apple अकाउंट से साइन आउट कर लिया है या नहीं। जबकि Android खरीदने वालों को यह चेक करना चाहिए कि पुराना Google अकाउंट हटा दिया गया है या नहीं।

अब अगर आप iPhone खरीद रहे हैं, तो Settings में जाकर Battery Health जरूर चेक करें। Android फोन में भी Settings के अंदर बैटरी की क्षमता की जानकारी मिलती है, लेकिन अलग-अलग कंपनियों के फोन में यह विकल्प अलग हो सकता है।

Refurbished फोन खरीदने से पहले आप इन चीजों को भी जरूर चेक करें:

  • डिस्प्ले पर स्क्रैच या वर्टिकल लाइन तो नहीं है, यह ध्यान से देखें।
  • कैमरा, स्पीकर और माइक्रोफोन को अच्छी तरह चेक करें।
  • सभी बटन, फिंगरप्रिंट सेंसर या Face ID सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं, यह जांचें।
  • फोन आपके SIM को सपोर्ट करता है या नहीं और आपके लिए जरूरी नेटवर्क बैंड्स को सपोर्ट करता है या नहीं, यह जरूर देखें।
  • सुनिश्चित करें कि फोन को ठीक से रीसेट किया गया है और पिछले मालिक का कोई डेटा उसमें मौजूद नहीं है।
  • फोन खरीदते समय बिल और वारंटी जरूर मांगें।

खरीदार क्लासिफाइड लिस्टिंग और व्यक्तिगत विक्रेताओं पर तभी विचार कर सकते हैं जब वे फोन को खुद देख-परख सकें। पेमेंट करने से पहले, यह पक्का कर लें कि चुना गया फोन अकाउंट-लॉक न हो या उसके खोने या चोरी होने की रिपोर्ट न हो। साथ ही, यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे फोन के लिए पहले से पेमेंट न करें जिसे वे देख-परख नहीं सकते, खासकर तब जब विक्रेता कोई वैध इनवॉइस या मालिकाना हक का सबूत न दे सके।

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Android फोन से गलती से डिलीट हुई फोटो ऐसे करें Recover, जाने स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

Android फोन में ज्यादा फोटो खींचने से फोन की गैलरी जल्दी भर सकती है। ऐसे में जब आप एक साथ कई फोटो चुनकर डिलीट करते हैं, तो कई बार गलती से वह फोटो भी डिलीट हो जाती है जिसे आप सोशल मीडिया पर पोस्ट करना चाहते थे या याद के तौर पर रखना चाहते थे। यूजर्स को ऐसी गलतियों से बचाने के लिए, Android फोन फोटो को तुरंत पूरी तरह से डिलीट नहीं करते हैं। इसके बजाय, डिलीट की गई इमेज फोन के Recycle Bin में चली जाती हैं, ठीक वैसे ही जैसे आपके लैपटॉप के Trash Bin में डिलीट की गई फाइलें जाती हैं। Android फोन में डिलीट की गई फोटो आमतौर पर Recently Deleted फोल्डर में 30 दिनों तक सेव रहती हैं। इसके बाद ये फोटो हमेशा के लिए डिलीट हो जाती हैं। इस दौरान आपके पास जरूरत पड़ने पर सभी या अपनी पसंद की कुछ फोटो को वापस रिकवर करने का पर्याप्त समय होता है।

अगर आप सोच रहे हैं कि Android फोन से गलती से डिलीट हुई फोटो को दोबारा कैसे रिकवर किया जाए, तो आपकी मदद के लिए हमने एक स्टेप-बाय-स्टेप गाइड तैयार की है। इसकी मदद से आप आसानी से अपनी डिलीट हुई फोटो वापस पा सकते हैं।

अपने Android फोन की गैलरी से डिलीट की गई फोटो को कैसे रिकवर करें

  • अगर आपने कोई फोटो 30 दिन से कम समय पहले डिलीट की है, तो उसे रिकवर करने के लिए सबसे पहले अपने Android फोन पर Photos या Gallery ऐप खोलें।
  • इसके बाद, अपने फोन के सभी एल्बम देखने के लिए स्क्रीन के नीचे दिख रहे Albums बटन पर टैप करें।
  • अब, अपने Android फोन के मॉडल के हिसाब से, Recently Deleted फोल्डर खोजने के लिए ऊपर या नीचे स्क्रॉल करें।
  • Recently Deleted फोल्डर पर टैप करके उसे खोलें।
  • एक नई स्क्रीन खुलेगी जिसमें आपकी डिलीट की गई सभी फ़ोटो होंगी। यहाँ, स्क्रीन के ऊपर-दाएँ कोने में दिख रही वर्टिकल डॉटेड लाइन (खड़ी बिंदी वाली लाइन) पर टैप करें।
  • अब, Select पर क्लिक करें और उन खास फोटो पर टैप करें जिन्हें आप रिकवर करना चाहते हैं।
  • इसके अलावा, आप एक बार में सभी फोटो चुनने के लिए Select all पर भी टैप कर सकते हैं।
  • फिर, हाल ही में डिलीट की गई फोटो को रिकवर करने के लिए Restore पर क्लिक करें।
  • रिकवर की गई फोटो आपको उन्हीं फोल्डर में मिलेंगी जहां से वे डिलीट की गई थीं।

Google Photos के जरिए Android पर डिलीट की गई फोटो कैसे रिकवर करें

  • Android फोन यूजर्स Google के Photos ऐप से हाल ही में डिलीट की गई फोटो रिकवर कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले अपने फोन पर Photos ऐप खोलें।
  • अब, स्क्रीन के नीचे दिख रहे ‘Collections’ बटन पर टैप करें।
  • एक नई स्क्रीन खुलेगी। यहां, स्क्रीन के ऊपर दाईं ओर मौजूद ‘Bin’ पर क्लिक करें।
  • इसके बाद, ‘Select’ पर टैप करके उन हाल ही में डिलीट की गई इमेज को चुनें जिन्हें आप रिकवर करना चाहते हैं।
  • ऐसा करने के बाद, आप सिर्फ चुनी हुई इमेज को रिकवर करने के लिए ‘Restore’ पर टैप कर सकते हैं।
  • इसके अलावा, हाल ही में डिलीट की गई सभी फोटो को रिकवर करने के लिए आप स्क्रीन के नीचे बाईं ओर दिख रहे ‘Restore All’ पर क्लिक कर सकते हैं।

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