अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए रिपब्लिकन पार्टी से प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों का नियंत्रण छीन लिया है। बुधवार को लगातार आ रहे चुनावी नतीजों के बीच सामने आए अनुमानों के अनुसार, यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक झटका है।

श्री ट्रंप की ऐतिहासिक रूप से कम होती लोकप्रियता और अर्थव्यवस्था तथा जीवनयापन की बढ़ती लागत को लेकर जनता में असंतोष का फायदा उठाते हुए डेमोक्रेट्स ने देशभर में रिपब्लिकन पार्टी के कब्जे वाली सीनेट की कई सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें परंपरागत रूप से रिपब्लिकन पार्टी के प्रभाव वाले राज्य भी शामिल हैं। इससे अमेरिकी कांग्रेस में शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आया है।

डेमोक्रेट्स की सबसे बड़ी जीत में मिशिगन शामिल है, जहां अब्दुल अल-सईद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराया। मीडिया के चुनावी अनुमानों के अनुसार, एल-सईद अमेरिकी सीनेट के लिए निर्वाचित होने वाले पहले मुस्लिम अमेरिकी बन गए हैं। पेशे से चिकित्सक और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में पूर्व अधिकारी अल-सईद ने डेट्रॉयट में आयोजित चुनावी रैली में भी अपनी जीत की घोषणा की। उन्होंने समर्थकों से कहा आपने ऐसे उम्मीदवार पर भरोसा जताया, जिसके जीतने की संभावना सबसे कम मानी जा रही थी। मिशिगन, मैं आपकी सेवा करने के लिए उत्सुक हूं।

जीत के बाद अपने संबोधन में अल-सईद ने कहा कि दुनिया के सबसे धनी देशों में से एक में अमेरिकियों को बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा मिशिगन, चीजें इतनी मुश्किल नहीं होनी चाहिए। किराने का सामान खरीदने के लिए दूसरा बैग लेना या अपनी गाड़ी में ईंधन भरवाना इतना मुश्किल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा घर खरीदना इतना मुश्किल नहीं होना चाहिए। दुनिया के सबसे धनी और शक्तिशाली देश में डॉक्टर को दिखाना इतना मुश्किल नहीं होना चाहिए।

अमेरिकी विदेश नीति पर होने वाले खर्च पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि करदाताओं को यह सुनिश्चित करने का अधिकार होना चाहिए कि उनका पैसा विदेशों में सैन्य अभियानों के बजाय देश की घरेलू जरूरतों पर खर्च हो। उन्होंने कहा कर चुकाने के बाद लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका पैसा उन पर और उनके बच्चों पर खर्च होगा, न कि किसी दूसरे देश के लोगों और उनके बच्चों पर बम गिराने में।

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चुनावी अनुमानों के अनुसार, डेमोक्रेट्स ने कंसास, आयोवा, मेन, ओहायो, टेक्सास, दक्षिण कैरोलिना और उत्तरी कैरोलिना सहित कई अन्य राज्यों में भी सीनेट की सीटें जीती हैं। कंसास में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एडम हैमिल्टन ने सीनेट सीट पर जीत दर्ज की। यह राज्य में पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि है, जहां करीब एक सदी से किसी डेमोक्रेट उम्मीदवार ने सीनेट चुनाव नहीं जीता था। आयोवा में पूर्व पैरालंपिक खिलाड़ी जोश ट्यूरेक के रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराकर सीनेट सीट जीतने का अनुमान है। यह सीट रिपब्लिकन सीनेटर जोनी अर्न्स्ट के पास थी।

मेन में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ट्रॉय जैक्सन के रिपब्लिकन सांसद सुसान कॉलिन्स को हराने का अनुमान है। सुश्री कॉलिन्स करीब तीन दशक से इस राज्य का सीनेट में प्रतिनिधित्व कर रही थीं। ओहायो में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार शेरॉड ब्राउन के सीनेट सीट फिर से जीतने का अनुमान है, जबकि टेक्सास में जेम्स टालारिको भी अपनी सीट जीतते नजर आ रहे हैं।

दक्षिण कैरोलिना में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एनी एंड्रयूज के रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम को हराने का अनुमान है। वहीं, अलास्का में सीनेट चुनाव का मुकाबला अभी बेहद करीबी बना हुआ है और नतीजे स्पष्ट नहीं हैं। डेमोक्रेट्स की बढ़त पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि चुनाव परिणामों ने अमेरिकी जनता की राजनीतिक नेतृत्व से अपेक्षाओं का स्पष्ट संदेश दिया है।

श्री ओबामा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा आज रात अमेरिकी जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह ऐसी राजनीति चाहती है जो लोगों को बांटने के बजाय उन्हें एकजुट करे और ऐसे नेता चाहती है जो उनकी चुनौतियों का ठोस समाधान पेश करें। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने उन क्षेत्रों में चुनाव लड़ने का जोखिम उठाया, जिन्हें लंबे समय से जीतना मुश्किल माना जाता रहा है। श्री ओबामा ने कहा इस प्रशासन के पास अभी दो साल और हैं। अब हमारा काम पूरी ताकत से जुटना, आगे होने वाले नुकसान को रोकना और भविष्य की नींव तैयार करना है।

इस बीच, रिपब्लिकन उम्मीदवार टॉमी ट्यूबरविले ने अलबामा के गवर्नर पद का चुनाव जीत लिया। उन्होंने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार डग जोन्स को हराया।

डेमोक्रेट्स की इन जीतों से वाशिंगटन के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। इससे ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के शेष समय में कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण रहेगा।

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सेंसेक्स आधा फीसदी उछला, आईटी कंपनियों में बिकवाली

घरेलू शेयर बाजारों में बुधवार को उतार-चढ़ाव के बीच बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स आधा फीसदी की बढ़त में बंद हुआ हालांकि आईटी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली हावी रही।

सेंसेक्स करीब 65 अंक गिरकर 76,853 अंक पर खुला, लेकिन तुरंत हरे निशान में आ गया। दोपहर होते-होते कुछ देर के लिए एक बार फिर यह लाल निशान में गया, लेकिन बाद में 383.55 अंक (0.50 प्रतिशत) की मजबूती के साथ 77,301.40 अंक पर बंद हुआ जो 26 अगस्त के बाद का इसका अधिकतम स्तर है। बीच कारोबार में यह ऊपर 77,396.04 अंक और नीचे 76,604.85 अंक तक गया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक 149.75 अंक यानी 0.63 प्रतिशत ऊपर 23,960.60 अंक पर पहुंच गया। यह गत 01 सितंबर के बाद का इसका उच्चतम स्तर है।

वृहत बाजार में भी सभी सूचकांक ऊपर रहे। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 1.42 फीसदी और स्मॉलकैप-100 सूचकांक दो फीसदी की बढ़त में रहा।

सेक्टर आधारित सूचकांकों में निफ्टी मीडिया सबसे अधिक 5.15 प्रतिशत उछल गया। आईटी की 1.50 प्रतिशत की गिरावट को छोड़कर अन्य सभी सूचकांक हरे निशान में रहे।

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धातु समूह का सूचकांक 2.80 प्रतिशत, रियल्टी 2.85 प्रतिशत और टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद समूह का सूचकांक 2.04 प्रतिशत मजबूत हुआ। एफएमसीजी, ऑटो, तेल एवं गैस, रसायन और सीमेंट सेक्टरों के सूचकांक भी एक से दो प्रतिशत तक चढ़े।

एनएसई में जिन 3,704 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ उनमें से 2,720 के शेयर हरे निशान में और 883 के गिरावट में रहे। अन्य 101 कंपनियों के शेयर अंत में अपरिवर्तित रहे।

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 21 के शेयरों में तेजी रही। बीईएल का शेयर सबसे अधिक 4.56 फीसदी और टाइटन का 4.28 फीसदी चढ़ा। इंडिगो में 2.39 प्रतिशत, बजाज फाइनेंस में 2.38, आईटीसी में 2.32, अडानी पोर्ट्स में 2.30 और बजाज फिनसर्व में 2.09 प्रतिशत की मजबूती रही। टाटा स्टील का शेयर 1.93 प्रतिशत, महिंद्रा एंड महिंद्रा का 1.72, एचडीएफसी बैंक का 1.55, अल्ट्राटेक सीमेंट का 1.03 और भारतीय स्टेट बैंक का 0.95 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। मारुति सुजुकी, पावरग्रिड, ट्रेंट, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एनटीपीसी के शेयर भी हरे निशान में रहे।

टीसीएस ने सबसे अधिक 2.70 प्रतिशत का नुकसान उठाया। एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर 2.23 प्रतिशत, इंफोसिस का 1.65, इटरनल का 1.60 और कोटक महिंद्रा बैंक का 1.08 फीसदी टूट गया। एशियन पेंट्स और टेक महिंद्रा के शेयरों में भी गिरावट रही।

वैश्विक स्तर पर एशिया निक्केई 1.42 प्रतिशत लुढ़क गया। वहीं, चीन का शंघाई कंपोजिट 2.16 प्रतिशत और हांगकांग का हैंग सेंग 1.67 प्रतिशत की बढ़त में रहा। यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार में जर्मनी का डैक्स 1.43 प्रतिशत और ब्रिटेन का एफटीएसई 1.05 प्रतिशत ऊपर था।

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अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के शुरुआती नतीजों में डेमोक्रेट्स ने जीत हासिल कीं

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के शुरुआती नतीजों में डेमोक्रेट्स ने उच्च सदन में तीन शुरुआती जीत हासिल कीं, जिससे पार्टी को एक मज़बूत शुरुआत मिली जबकि रिपब्लिकन अपना बहुमत बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

सीबीएस न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार मध्यावधि चुनाव में 35 सीनेट सीटों पर चुनाव होने हैं। रिपब्लिकन के पास अभी 53-47 का बहुमत है और डेमोक्रेट्स को बहुमत पाने के लिए चार सीटों की जरुरत है।

सीबीएस न्यूज़ के मुताबिक सबसे बड़ी जीत उत्तरी कैरोलिना में मिली जहाँ पूर्व गवर्नर रॉय कूपर (69) ने रिपब्लिकन माइकल व्हाटली को हराया। यह जीत डेमोक्रेट्स के लिए एक बड़ा बदलाव है। रिपब्लिकन सेन थॉम टिलिस ने दोबारा चुनाव न लड़ने का फैसला किया, जिससे सीट खाली हो गई। उत्तर कैरोलिना ने 2008 के बाद से सीनेट में कोई डेमोक्रेट नहीं भेजा है।

कूपर ने गवर्नर के तौर पर दो कार्यकाल पूरे किए और राज्य के इतिहास में सबसे लंबे समय तक अटॉर्नी जनरल रहने वाले हैं। उन्होंने एक आसान संदेश पर चुनाव लड़ा: “चीज़ों की कीमत कम करें। रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के पूर्व चेयरमैन व्हाटली ने पहले कभी कोई पद नहीं संभाला था। वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन और हौसले से इस चुनाव में शामिल हुए थे।

न्यू हैम्पशायर में डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि क्रिस पप्पास (46) ने पूर्व रिपब्लिकन सेनेटर जॉन सुनुनु को हराया। पप्पास 2019 से प्रतिनिधि सभा में काम कर रहे हैं और उन्होंने खुद को राज्य के लिए एक स्वतंत्र आवाज़ के तौर पर पेश किया है। वह सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले खुले तौर पर गे आदमी बनेंगे।

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सुनुनु ने मैनचेस्टर में हार मान ली और समर्थकों से कहा यह हमारी रात नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पप्पास को बधाई देने के लिए फोन किया और मतदाताओं की तारीफ की। अमरीका मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जॉर्जिया डेमोक्रेटिक पार्टी की तीसरी जीत थी, हालांकि विवरण तुरंत उपलब्ध नहीं थे। रिपब्लिकन के पास फ्लोरिडा में एक सीट थी, जहां सेनेटर एश्ले मूडी ने विशेष चुनाव जीता था।

राष्ट्रपति ट्रंप के लिए नतीजे मायने रखते हैं। उच्च सदन और प्रतिनिधि सभा दोनों पर रिपब्लिकन नियंत्रण ने उन्हें अपने कार्यकाल के पहले दो सालों में अपने एजेंडा को आगे बढ़ाने में मदद की है। मंगलवार के नतीजे यह तय करने में मदद करेंगे कि यह जारी रहेगा या नहीं। देश भर में चुनाव खत्म होने पर और नतीजों की उम्मीद है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव के दिन अमेरिका इज़रायल को सालाना लगभग चार अरब की सैन्य मदद खत्म कर देने की घोषणा की। यह कदम अमेरिका-इज़रायल के लंबे समय से चले आ रहे रिश्ते में एक बड़ा बदलाव ला सकता है और यहूदी देश के समर्थन को लेकर अमेरिकी राजनीति में बढ़ते मतभेदों को सामने ला सकता है।

श्री ट्रंप ने चुनाव के दिन फॉक्स न्यूज़ के साथ एक साक्षात्कार में यह घोषणा की। हालांकि उन्होंने इस बारे में बहुत कम जानकारी दी कि मदद कैसे या कब बंद की जाएगी, जिससे इस प्रस्तावित कदम के दायरे और असर पर अनिश्चितता बनी हुई है।

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संसद में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण हुआ तो चलेगी ‘वीटो पावर’

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि संसद पर डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण होने की स्थिति में वह अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अपनी वीटो पावर और कार्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे।

श्री ट्रंप ने मंगलवार को मध्यावधि चुनावों में मतदान समाप्त होने से पहले सीबीएस न्यूज़ को दिए एक फोन साक्षात्कार में कहा, “मेरे पास सबसे बड़ी पावर है, इसे ‘वीटो’ कहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर डेमोक्रेट्स हाउस या सीनेट में बहुमत हासिल करते हैं, तो वे “मिस्टर वीटो” निकनेम का स्वागत करेंगे।

श्री ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि बार-बार वीटो लगाने से डेमोक्रेट्स आखिरकार बातचीत की टेबल पर आएंगे। उन्होंने कहा, “पहले, आप कुछ महीनों के लिए वीटो करते हैं और फिर वे आकर कहते हैं, ‘हमें एक समझौता करना है।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टाें के मुताबिक साक्षात्कार के बाद आए नतीजों से पता चला कि डेमोक्रेट्स ने जॉर्जिया, न्यू हैम्पशायर और नॉर्थ कैरोलिना में तीन शुरुआती जीत हासिल कीं। नॉर्थ कैरोलिना में डेमोक्रेटिक पार्टी ने जीत दर्ज की है। सीनेट की 35 सीटों पर डेमोक्रेट्स को बहुमत पाने के लिए कुल चार सीटें जीतनी होंगी।

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राष्ट्रपति ने इस साल की शुरुआत में शीर्ष अदालत के एक फैसले ट्रंप बनाम स्लॉटर की ओर इशारा किया, जिसमें जजों ने 6-3 से फैसला सुनाया था कि वह संघीय व्यापार आयोग की सदस्य रेबेका स्लॉटर को निकाल सकते हैं। श्री ट्रंप ने कहा कि इस फैसले से उन्हें संघीय एजेंसियों, बोर्ड और आयोग पर पूरा नियंत्रण मिल गया है, भले ही कांग्रेस पर किसी भी पार्टी का नियंत्रण हो।

उन्होंने कहा, “स्लॉटर मामला राष्ट्रपति को इतनी ज़्यादा शक्ति देता है जो पहले कभी नहीं थी। सीबीएस ने दो सूत्रों के हवाले से बताया कि आव्रजन और व्यापार उन क्षेत्रों में से हैं जिन पर विचार किया जा रहा है। एक सूत्र ने कहा कि अगर डेमोक्रेट्स सत्ता में आ भी जाते हैं, तो भी श्री ट्रंप व्यापार , सीमा , संघीय सरकार के प्रबंध , विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर “लगभग सब कुछ करने की शक्ति अपने पास रखेंगे जो वह चाहते हैं”।

श्री ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि 2027 में व्हाइट हाउस का नया बॉलरूम बन जाएगा और वाशिंगटन में प्रस्तावित 250 फुट आकार की आर्च पर काम शुरू हो जाएगा, जिसे कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने आर्च को “सफलता का जश्न” बताया।

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Pia Dandiya Journey: कभी दिल्ली के स्लम में पढ़ाने वाली पिया डांडिया ने फ्लोरिडा से जीत दर्ज कर रचा इतिहास, रिपब्लिकन गढ़ ध्वस्त करने वाली नेता की कहानी जानिए

Pia Dandiya Journey: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल की पिया डांडिया ने फ्लोरिडा से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पारी की शानदार शुरुआत की है। 39 वर्षीय पिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराकर अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जगह बनाई है। उनकी जीत इसलिए भी खास है क्योंकि जिस सीट पर उन्होंने जीत दर्ज की वहां नए परिसीमन के बाद रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक बढ़त मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी। इसके बावजूद पिया ने इस सीट पर डेमोक्रेटिक पार्टी का परचम लहरा दिया।

पिया डांडिया की कहानी किसी सामान्य चुनावी जीत तक सीमित नहीं है। भारत की राजधानी दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाने से शुरू हुआ उनका सफर अमेरिका के प्रतिष्ठित व्हाइट हाउस फेलोशिप प्रोग्राम, शिक्षा विभाग और दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में शामिल ऐपल तक पहुंचा। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काम किया, स्कूल की प्रिंसिपल बनीं, सरकारी नीतियों को बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा रहीं और फिर राजनीति में कदम रखा।

उनकी जिंदगी का यह सफर अब अमेरिकी कांग्रेस तक पहुंच गया है। पिया की जीत भारतीय-अमेरिकी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं कौन हैं पिया डांडिया, उनका भारत से क्या कनेक्शन है और कैसे उन्होंने फ्लोरिडा में रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जा रही सीट पर जीत हासिल की।

कौन हैं पिया डांडिया, भारत से क्या है कनेक्शन?

पिया डांडिया पहली पीढ़ी की भारतीय-अमेरिकी नागरिक हैं। उनका जन्म और पालन-पोषण अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के पाम बीच काउंटी में हुआ। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। भारतीय मूल के परिवार में पली-बढ़ीं पिया ने अपने करियर में शिक्षा, सरकारी नीतियों और तकनीक के क्षेत्र में काम किया है। पिया की पहचान एक शिक्षाविद, नीति विशेषज्ञ और टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम कर चुकी पेशेवर के रूप में रही है। राजनीति में आने से पहले उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनका मानना रहा है कि अच्छी शिक्षा और रोजगार के अवसरों के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की जिंदगी बदली जा सकती है। उनके इसी विचार ने उन्हें अपने करियर के शुरुआती दौर में दिल्ली की उन झुग्गी-बस्तियों तक पहुंचाया, जहां आर्थिक तंगी के कारण बच्चों के सामने पढ़ाई जारी रखना भी बड़ी चुनौती थी।

दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में बच्चों को पढ़ाने से शुरू हुआ सफर

पिया डांडिया के करियर की शुरुआत शिक्षा के क्षेत्र से हुई। हमारे सहयोगी फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अपने शुरुआती करियर में दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले वंचित समुदायों के बच्चों को पढ़ाया। इस अनुभव ने उन्हें करीब से समझने का मौका दिया कि गरीबी और संसाधनों की कमी किस तरह बच्चों की शिक्षा और भविष्य को प्रभावित करती है। दिल्ली में पढ़ाने के दौरान उन्होंने देखा कि प्रतिभा होने के बावजूद कई बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर नहीं मिल पाते। आर्थिक स्थिति, परिवार की परिस्थितियां और शिक्षा के संसाधनों तक सीमित पहुंच उनके आगे बढ़ने में बाधा बनती है।

इस अनुभव ने पिया के करियर और उनकी सोच को प्रभावित किया। वह शिक्षा को सिर्फ स्कूल तक सीमित रखने के बजाय आर्थिक और सामाजिक बदलाव का माध्यम मानने लगीं। इसके बाद वह अमेरिका लौट गईं और वहां मिडिल स्कूल और हाई स्कूल में टीचर के रूप में काम किया। धीरे-धीरे शिक्षा के क्षेत्र में उनकी जिम्मेदारियां बढ़ती गईं। उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ स्कूलों के संचालन और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम किया।

28 साल की उम्र में बनीं हाई स्कूल की प्रिंसिपल

पिया डांडिया के करियर की एक बड़ी उपलब्धि महज 28 साल की उम्र में हाई स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल बनना रही। इतनी कम उम्र में इस जिम्मेदारी तक पहुंचने के कारण वह अमेरिका की सबसे कम उम्र की हाई स्कूल प्रिंसिपलों में शामिल हो गई थीं। उन्होंने जिस स्कूल की स्थापना और नेतृत्व किया, वहां ज्यादातर विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते थे। उनके चुनावी अभियान की वेबसाइट के मुताबिक, स्कूल के 86 फीसदी विद्यार्थी कम आय वाले परिवारों से संबंधित थे। पिया ने स्कूल में ऐसा शैक्षणिक माहौल तैयार करने पर जोर दिया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी कॉलेज में दाखिला लेने और आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

उनके नेतृत्व में स्कूल से पढ़ाई पूरी करने वाले सभी विद्यार्थियों को कॉलेज में दाखिला मिला। यह उपलब्धि उनके चुनाव प्रचार के दौरान भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण के तौर पर पेश की गई। पिया ने अपनी शैक्षणिक यात्रा के अनुभवों को अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं से भी जोड़ा। उनकी चुनावी प्राथमिकताओं में सभी बच्चों के लिए प्री-किंडरगार्टन शिक्षा की सुविधा, सरकारी स्कूलों में निवेश बढ़ाना और युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना शामिल रहा।

‘वाइट हाउस’ में भी किया काम, दोनों पार्टियों की सरकारों के साथ जुड़ा रहा अनुभव

शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के बाद पिया डांडिया ने अमेरिकी सरकार की नीति निर्माण प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें प्रतिष्ठित वाइट हाउस फेलो के रूप में चुना गया था। वाइट हाउस फेलोशिप अमेरिका का एक प्रतिष्ठित कार्यक्रम है, जिसके तहत अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले प्रतिभाशाली पेशेवरों को संघीय सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ काम करने का अवसर मिलता है। पिया ने वाइट हाउस की डोमेस्टिक पॉलिसी काउंसिल और अमेरिकी शिक्षा विभाग में काम किया। खास बात यह रही कि उन्हें डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों पार्टियों के प्रशासन के दौरान काम करने का अनुभव मिला।

इस दौरान उन्होंने शिक्षा और घरेलू नीतियों से जुड़े मुद्दों पर काम किया। स्कूलों की व्यवस्था, बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर और परिवारों की आर्थिक स्थिति जैसे विषय उनके काम के केंद्र में रहे। सरकारी व्यवस्था के भीतर काम करने के इस अनुभव ने उन्हें अमेरिकी प्रशासन और नीतियां बनाने की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर दिया। बाद में राजनीति में उतरने के दौरान भी उन्होंने अपने इस अनुभव को प्रमुखता से सामने रखा।

फिर ऐपल से जुड़ीं, टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी बनाया अनुभव

सरकारी सेवा के बाद पिया ने निजी क्षेत्र का रुख किया और टेक्नोलॉजी कंपनी ऐपल से जुड़ीं। वहां उन्होंने पब्लिक सेक्टर से संबंधित काम किया। उनके काम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शिक्षा और सरकारी सेवाओं में तकनीक के इस्तेमाल को बेहतर बनाना था। उन्होंने स्कूलों में आईपैड के जरिए पढ़ाई को आसान बनाने और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए तकनीकी समाधान विकसित करने जैसे कामों में योगदान दिया।

फ्लोरिडा में कैसे मिली जीत, रिपब्लिकन उम्मीदवार को दी मात?

पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ा था। यहां उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर से था। असकर अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के पूर्व सैनिक और कारोबारी हैं। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी नीतियों का समर्थन करते हुए चुनाव प्रचार किया था। पिया ने इस मुकाबले में 51.9 फीसदी वोट हासिल किए, जबकि असकर को 48.1 फीसदी वोट मिले। फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पिया को 151926 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी असकर को 140933 वोट हासिल हुए। इस जीत के साथ पिया ने फ्लोरिडा के 22वें डिस्ट्रिक्ट को डेमोक्रेटिक पार्टी के खाते में बनाए रखा। उनकी जीत इसलिए भी उल्लेखनीय रही क्योंकि फ्लोरिडा में रिपब्लिकन पार्टी की सरकार ने 2026 के चुनाव से पहले कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट की सीमाओं में बदलाव किया था।

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फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसेंटिस के नेतृत्व में हुए नए परिसीमन के बाद इस सीट का राजनीतिक स्वरूप बदल गया था। नए नक्शे में ऐसे इलाके शामिल किए गए, जहां रिपब्लिकन पार्टी को अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। इस वजह से चुनावी मुकाबले को दक्षिण फ्लोरिडा की सबसे चर्चित और प्रतिस्पर्धी सीटों में गिना जा रहा था। नए परिसीमन के बाद इस सीट पर कोई मौजूदा सांसद उम्मीदवार के रूप में मैदान में नहीं था। पिया ने इस राजनीतिक परिस्थिति का फायदा उठाते हुए चुनाव अभियान चलाया और रिपब्लिकन उम्मीदवार को शिकस्त दी।

US Midterm Elections : डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत, औंधे मुंह गिरे एलन मस्क के टेस्ला और स्पेसएक्स के शेयर

US Midterm Elections : 2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स की स्थिति मजबूत होने के बाद,आफ्टर-ऑवर्स ट्रेडिंग में एलन मस्क की कंपनियों टेस्ला और स्पेसएक्स के शेयरों में 1.8% की गिरावट आई है। इससे निवेशकों के बीच AI रेगुलेशन और संभावित विलय को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के शुरुआती नतीजों से डेमोक्रेट्स की निर्णायक जीत के संकेत मिलने लगे हैं। जिसके बाद रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख समर्थक एलन मस्क की कंपनियों टेस्ला इंक और स्पेस एक्सप्लोरेशन टेक्नोलॉजीज कॉर्प के शेयरों में ‘आफ्टर-आवर्स’ट्रेडिंग के दौरान गिरावट आई।

मंगलवार को मतदान खत्म होने के बाद शुरुआती रुझानों में जॉर्जिया से सीनेटर जॉन ओसॉफ के फिर से जीतने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके बाद, पोस्ट-मार्केट ट्रेडिंग में दोनों कंपनियों के शेयरों में लगभग 1.8% की गिरावट आई। तब से,अलग-अलग शेयरों में ट्रेडिंग तो बंद हो गई है,लेकिन डेमोक्रेट्स की स्थिति और मजबूत हो गई है। ‘डिसीजन डेस्क एचक्यू’ (Decision Desk HQ) का अनुमान है कि डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी हाउस और सीनेट, दोनों पर अपना नियंत्रण बना सकती है।

जिन निवेशकों के पास इन दोनों में से किसी एक या दोनों कंपनियों के शेयर हैं, उनके लिए मध्यावधि चुनावों में ‘ब्लू वेव’ (डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत) एक दोहरा झटका साबित होगी। इससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े कड़े नियमों को लेकर चिंताएं बढ़ेंगी और साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनी तथा रॉकेट, AI और सैटेलाइट सेक्टर की दिग्गज कंपनी के बीच संभावित विलय पर भी सवालिया निशान लग जाएगा।

फर्स्ट न्यूयॉर्क के विक्रम राय का कहना है कि भले ही कांग्रेस अकेले दम पर किसी समझौते को पूरी तरह रोक न सके, लेकिन मजबूत स्थिति वाले डेमोक्रेट्स इसे धीमा जरूर कर सकते हैं।

राय ने पिछले हफ्ते ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “अगर ‘ब्लू स्वीप’ (डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत) होती है, तो इन दोनों शेयरों पर जोखिम (हेडलाइन रिस्क) बढ़ सकता है।

जुलाई के आखिर में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद से टेस्ला के शेयरों में 34% की तेजी आई है। इसके पीछे निवेशकों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोडक्ट्स को लेकर बना उत्साह और स्पेसएक्स के साथ संभावित विलय की संभावना है।

स्पेसएक्स इस साल की शुरुआत में लिस्ट होने के बाद दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल हो गई है। यह अमेरिकी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स के ज़रिए अरबों डॉलर कमाती है। जून में अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के बाद से कंपनी के शेयरों के भाव में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है और इसका मार्केट वैल्यूएशन 1.9 ट्रिलियन डॉलर के आसपास बना हुआ है।

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मिडटर्म चुनावों के करीब आते ही इन कंपनियों के कई विवादित मुद्दे सुर्खियों में आ गए। टेस्ला और स्पेसएक्स, AI की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इनके मेगा मर्जर प्लान को लेकर रेगुलेटरी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। स्टारलिंक सैटेलाइट सर्विस के मिलिट्री वर्जन तक पहुंच, अमेरिका-यूक्रेन और रूस के बीच तनाव का कारण बन गई है।

वोटिंग से पहले ही बाजार पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी थी कि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी का दबदबा मस्क के आचरण की जांच करने की उनकी क्षमता को मजबूत कर सकता है और संभावित समझौते में बाधा डाल सकता है।