दलीप ट्रॉफी फाइनल खेलो, इन 3 खिलाड़ियों को मिली कोच गंभीर की हिदायत

सलामी बल्लेबाज केएल राहुल, श्रीलंका सीरीज के नायक देवदत्त पडिक्कल और अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज को चेन्नई में छह सितंबर से शुरू होने वाले दलीप ट्रॉफी फाइनल में पूर्वी क्षेत्र के खिलाफ दक्षिण क्षेत्र की ओर से खेलने के लिए कहा गया है।माना जा रहा है कि दक्षिण क्षेत्र के कप्तान तिलक वर्मा, उभरते हुए स्टार वैभव सूर्यवंशी और विकेटकीपर ईशान किशन (सभी भारत की टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं) का खेलना भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर की मंजूरी पर निर्भर करेगा।

इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले बीसीसीआई के सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, ‘‘राहुल, पडिक्कल और सिराज अभी कोई प्रतिस्पर्धी क्रिकेट नहीं खेल रहे हैं। राष्ट्रीय चयनकर्ता चाहते हैं कि जो भी भारतीय खिलाड़ी उपलब्ध हो, वह दलीप ट्रॉफी फाइनल खेले। इन तीनों ने आखिरी बार 27 अगस्त को मैच खेला था। अब वे 27 सितंबर को वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे मैच खेलेंगे। ’’उन्होंने कहा, ‘‘अब पडिक्कल वनडे टीम का हिस्सा नहीं हैं इसलिए हो सकता है कि वह भारत ए सीरीज खेलें। लेकिन अगर उन्हें दलीप ट्रॉफी के फाइनल में खेलने का मौका मिलता है, तो उन्हें खेलना चाहिए। ’’

पर सूर्यवंशी, किशन और तिलक के मामले में फैसला कोच गंभीर का होगा।सूत्र ने कहा, ‘‘भारतीय टीम नौ या 10 सितंबर को दिल्ली में जुटेगी। अगर मुख्य कोच चाहते हैं कि तीनों टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम के कार्यक्रम के हिसाब से रिपोर्ट करें तो वे नहीं खेल पाएंगे। लेकिन अगर मुख्य कोच चाहते हैं कि वे फाइनल खेलें और 10 सितंबर की देर शाम दिल्ली में रिपोर्ट करें तो वे ऐसा भी कर सकते हैं। 

 बीसीसीआई मयंक यादव, कार्तिक त्यागी और बाएं हाथ के गेंदबाज मोहसिन खान को जापान में होने वाले एशियाई खेलों में नेट गेंदबाज के तौर पर भारतीय टीम की ट्रेनिंग में मदद करने के लिए भेजने की योजना बना रहा है।बीसीसीआई नेट गेंदबाजों को साथ ले जाता रहा है और ये तीनों टी20 में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी हैं।सूत्र ने कहा, ‘‘वे आधिकारिक भारतीय दल का हिस्सा नहीं होंगे और सिर्फ तब तक वहां रहेंगे जब तक भारतीय पुरुष टीम 26 सितंबर को अपना पहला मैच नहीं खेल लेती, बशर्ते बीसीसीआई 20 सितंबर को टीम के दिल्ली से रवाना होने से पहले उनके जापानी वीजा का इंतजाम कर ले। ’’

पीएम मोदी ने मेलोनी को बधाई दी:सबसे लंबे समय तक इटली की प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड, लगातार 1413 दिन से सत्ता में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है। मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में मेलोनी को अपनी मित्र बताते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि इटली के लोगों के उनके नेतृत्व पर भरोसे और विश्वास को दिखाती है। उन्होंने कहा कि मेलोनी की दोस्ती भारत और इटली के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में भी अहम रही है। मोदी ने दोनों देशों के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए आगे भी मिलकर काम करने की उम्मीद जताई। प्रधानमंत्री ने मेलोनी को आने वाले वर्षों में सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं। मेलोनी के लगातार सत्ता में 1,413 दिन पूरे जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने शुक्रवार को लगातार 1,413 दिन सत्ता में रहकर इटली में नया रिकॉर्ड बनाया। 1946 में इटली गणराज्य बनने के बाद यह किसी एक कैबिनेट का सबसे लंबा लगातार कार्यकाल है। मेलोनी ने पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की दूसरी सरकार का रिकॉर्ड तोड़ा है। बर्लुस्कोनी की दूसरी कैबिनेट 2001 से 2005 तक 1,412 दिन सत्ता में रही थी। मेलोनी 22 अक्टूबर 2022 को इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। वे दक्षिणपंथी पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ की प्रमुख भी हैं। इटली में सरकारें औसतन 13 महीने ही चलती हैं इटली में पिछले कई दशकों से सरकारों के बार-बार बदलने और राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास रहा है। 80 साल पहले गणराज्य बनने के बाद से देश में 68 सरकारें बन चुकी हैं। इन सरकारों का औसत कार्यकाल करीब 13 महीने रहा है। ऐसे में मेलोनी की तीन दक्षिणपंथी और कंजरवेटिव पार्टियों वाली गठबंधन सरकार का करीब 4 साल तक टिकना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। मेलोनी की पार्टी जश्न मनाएगी मेलोनी ने अपनी सरकार के लंबे कार्यकाल को बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश किया है। उनकी पार्टी शुक्रवार शाम दक्षिणी शहर बारी में रैली करने वाली है। मेलोनी भी इस रैली में भाषण देंगी। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि मेलोनी सरकार ने लंबे समय तक सत्ता में रहने को ही अपनी उपलब्धि बना लिया है। मोदी ने मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी दी थी मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली के दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट गिफ्ट किया था। मेलोनी ने बाद में इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया और मोदी को गिफ्ट के लिए धन्यवाद दिया था। मोदी और मेलोनी की साथ की तस्वीरों के बाद सोशल मीडिया पर #Melodi काफी लोकप्रिय हुई थी। खबर अपडेट हो रही है…

Hanuman Ansh Director: ‘जिन लोगों ने मेरी मदद नहीं की, वे अब मुझे बधाई दे रहे हैं’, ‘हनुमान अंश’ के डायरेक्टर ने खोली बॉलीवुड की पोल

Hanuman Ansh Director: ‘हनुमान अंश’ एक ऐसी फिल्म साबित हुई है जिसे शुरू में ज़्यादा उम्मीद नहीं थी, लेकिन यह हाल के हफ़्तों की बॉक्स-ऑफ़िस पर सबसे चौंकाने वाली सफल फ़िल्मों में से एक बन गई है। 7 अगस्त को रिलीज़ हुई यह फ़िल्म देश भर में सैकड़ों शो के साथ सिनेमाघरों में शुरू हुई थी। शुरुआत में ‘हनुमान अंश’ के पूरे भारत में 350 से ज़्यादा शो थे। लेकिन दूसरी फ़िल्मों के साथ मुक़ाबले की वजह से सिनेमाघरों में इसकी मौजूदगी काफ़ी कम हो गई।

‘द रौनक पॉडकास्ट’ पर बात करते हुए विशाल ने कहा, “लोगों ने ही इस फ़िल्म को आगे बढ़ाया। जिन सिनेमाघरों में बड़ी फ़िल्में रिलीज़ होने वाली थीं, उन्होंने हमारी फ़िल्म के लिए स्क्रीन की संख्या कम कर दी। हमारे शो की संख्या 250 से घटकर 25 रह गई। अच्छी जगहों पर मौजूद PVR और सिनेपोलिस जैसे मल्टीप्लेक्स हमारे शो चलाने को लेकर हिचकिचा रहे थे।”

शो की संख्या में अचानक आई कमी से विशाल को लगा कि उनका यह पसंदीदा प्रोजेक्ट शायद फ़ेल हो गया है। इसी दौरान, इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट ने उन्हें उम्मीद से ज़्यादा हिम्मत दी। उन्होंने कहा, “इस अनिश्चितता के बीच, मुझे इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट दिखा, जिसे मैं आम तौर पर नज़रअंदाज़ कर देता हूं।

ये वो पोस्ट होते हैं जिन्हें लोग खुद लिखते हैं और महाराज जी के संदेश के तौर पर पेश करते हैं। मन ही मन मुझे लग रहा था कि मेरी फ़िल्म बुरी तरह पिट गई है। हालाँकि, ऐसे समय में उस पोस्ट में लिखा था, ‘अपना काम करो, बाकी मैं संभाल लूँगा।’ इसने पहले हफ़्ते के आखिर में मुझे अजीब तरह से प्रेरित किया।”

सिर्फ़ पारंपरिक प्रमोशन पर निर्भर रहने के बजाय, विशाल ने अपनी टीम के साथ यात्रा करने और दर्शकों से खुद मिलने का फ़ैसला किया। आज़ादी के दिन से पहले वाले शुक्रवार को, वह मुख्य अभिनेता शोबिनव सत्या और संगीतकार ऋषि पाठक के साथ सूरत गए। टीम तब पहुंची जब फ़िल्म की स्क्रीनिंग चल रही थी। दर्शकों से मिले रिस्पॉन्स ने आखिरकार फ़िल्म के प्रति थिएटर मालिक का नज़रिया बदल दिया।

उन्होंने बताया, “हम सूरत के लिए निकले, जहां उन्होंने सिर्फ़ एक शो रखा था। हम तब पहुंचे जब शो चल रहा था। जब उन्होंने हमें देखकर लोगों का रिएक्शन देखा—लोग हमें गले लगा रहे थे और रो रहे थे—तो थिएटर मालिक हैरान रह गए। उस व्यक्ति ने दूसरे थिएटरों को फ़ोन करना शुरू किया और शो की संख्या बढ़ गई। फिर हम वडोदरा और अलीगढ़ जैसी जगहों पर गए और शो की संख्या में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई।”

इसके बाद विशाल और उनकी टीम ने कई जगहों का दौरा किया, थिएटर और मंदिरों में गए और सीधे दर्शकों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि अलीगढ़ में, उस हफ़्ते जोड़े गए पहले शो के सभी टिकट 15 मिनट में ही बिक गए।

इसके बाद फ़िल्म की थिएटर यात्रा ने रफ़्तार पकड़ी; फ़िल्ममेकर से मिली जानकारी के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ अब 75 करोड़ रुपये के आंकड़े के करीब पहुँच रही है। उन्होंने यह भी बताया कि फ़िल्म 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी और अब इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज़ किया जाएगा।

‘हनुमान अंश’ थिएटर में ‘आवारापन 2’ और ‘बंटवारा’ के साथ रिलीज़ हुई थी। फ़िल्म की सफलता के बावजूद, विशाल ने कहा कि जब फ़िल्म संघर्ष कर रही थी, तब उन्हें हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री से वैसी मदद नहीं मिली जैसी उन्हें उम्मीद थी।

उन्होंने कहा, “फ़िल्म के अच्छा प्रदर्शन करने के बाद, कई लोगों ने मुझे बधाई देने के लिए फ़ोन किया। मैं उनके नाम नहीं लेना चाहता। बधाई देने वालों में मधुर भंडारकर भी शामिल थे, जिनसे मैंने कोई मदद नहीं मांगी थी। हालांकि, मैं दूसरों का ज़िक्र नहीं कर रहा हूं क्योंकि मैंने उन लोगों से मदद मांगी थी और उन्होंने मेरी मदद नहीं की। इसलिए, मैं अभी उनके नाम नहीं लेना चाहता, सिर्फ़ इसलिए कि वे मुझे बधाई दे रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “ज़्यादातर लोगों को पता नहीं होता कि क्या चलेगा, फिर भी वे दूसरों को अपनी सलाह देते रहते हैं। इंडस्ट्री उलझन में पड़े लोगों से भरी हुई है। यहां दो तरह के लोग हैं – एक वे जो सच में फ़िल्में बनाना चाहते हैं, और दूसरे वे जिनमें कोई जुनून नहीं है और वे सोचते हैं कि फ़िल्म बनाना एक ऐसी चीज़ है जिसे उन्हें आज़माना चाहिए।”

SBI Scholarship 2026: स्टूडेंट्स को SBI दे रहा ₹15 लाख तक की स्कॉलरशिप! 19 सितंबर तक है मौका, जानें पूरी डिटेल्स

SBI Asha Scholarship 2026-27: अगर आप या आपके घर में कोई स्टूडेंट स्कूल, कॉलेज, IIT, IIM, मेडिकल या विदेश में पढ़ाई कर रहा है और पढ़ाई का खर्च आड़े आ रहा है, तो देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक की यह स्कीम आपके बड़े काम आ सकती है। एसबीआई फाउंडेशन ने ‘एसबीआई प्लेटिनम जुबली आशा स्कॉलरशिप 2026-27’ के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।

क्या है इस स्कीम में?

एसबीआई की इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले मेधावी छात्रों को ₹15,000 से लेकर ₹15 लाख सालाना तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क और ऑनलाइन है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, 2026-27 सत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन की लास्ट डेट बढ़ाकर 19 सितंबर 2026 कर दी गई है।

किस कैटेगरी में मिलेगी कितनी स्कॉलरशिप?

एसबीआई आशा स्कॉलरशिप अलग-अलग शैक्षणिक स्तर के हिसाब से दी जा रही है:

  • कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्र: ₹15,000 सालाना।
  • अंडरग्रेजुएट (UG) छात्र: ₹75,000 तक।
  • पोस्टग्रेजुएट (PG) छात्र: ₹1.5 लाख तक।
  • MBBS (मेडिकल) छात्र: ₹2 लाख तक।
  • IITs (इंजीनियरिंग) छात्र: ₹2 लाख तक।
  • IIMs (MBA/PGDM) छात्र: ₹5 लाख तक।
  • विदेश में पढ़ाई करने वाले : ₹15 लाख तक।

कौन कर सकता है अप्लाई?

स्कॉलरशिप पाने के लिए एसबीआई फाउंडेशन ने कुछ शैक्षणिक और फैमिली इनकम की शर्तें तय की हैं:

कक्षा 9 से 12वीं के लिए: पिछली कक्षा में कम से कम 75% अंक या 7.5 CGPA होना अनिवार्य है। SC/ST छात्रों के लिए न्यूनतम अंक 65% और दिव्यांग छात्रों (PwBD) के लिए 60% तय किए गए हैं। पारिवारिक आय सीमा ₹3 लाख सालाना से अधिक नहीं होनी चाहिए।

ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन (UG/PG): UG छात्रों के लिए पारिवारिक आय सीमा ₹6 लाख सालाना है। कॉलेज/संस्थान NIRF ओवरऑल रैंकिंग की टॉप 300 सूची में या NAAC ‘A’ ग्रेड प्राप्त होना चाहिए।

MBBS: AIIMS या NIRF टॉप 50 मेडिकल कॉलेज में एडमिशन होना चाहिए। साथ ही NEET स्कोरकार्ड अनिवार्य है।

IIT: देश के 23 IITs में से किसी एक में पढ़ाई और वैध JEE Advanced स्कोरकार्ड।

IIM: देश के 22 IIMs में अध्ययनरत छात्र और वैध CAT स्कोरकार्ड (आय सीमा व शैक्षणिक नियम लागू)।

विदेश में उच्च शिक्षा: QS टॉप 200 यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई कर रहे या एडमिशन ऑफर लेटर पाने वाले भारतीय छात्र पात्र हैं। पारिवारिक आय ₹6 लाख सालाना से कम होनी चाहिए। वैध GRE, GMAT, MCAT, LNAT या LSAT स्कोरकार्ड होना अनिवार्य है।

आवेदन कैसे करें और क्या-क्या डॉक्यूमेंट्स चाहिए?

पोर्टल पर जाएं: आधिकारिक SBI Asha Scholarship पोर्टल पर जाकर अपना अकाउंट बनाएं।

कैटेगरी चुनें: अपनी योग्यता के अनुसार सही स्कॉलरशिप कैटेगरी का चयन करें और फॉर्म भरें।

डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें: पिछली शैक्षणिक मार्कशीट, पहचान पत्र (Aadhaar/Govt ID), आय प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक डिटेल्स, एडमिशन/बोनाफाइड सर्टिफिकेट और फीस रसीद, प्रवेश परीक्षा स्कोरकार्ड (JEE/NEET/CAT/GRE/GMAT आदि), कास्ट सर्टिफिकेट या दिव्यांग प्रमाण पत्र (अगर लागू हो)।

ध्यान दें: एक बार फॉर्म सबमिट होने के बाद इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया जा सकेगा। शॉर्टलिस्ट किए गए छात्रों का टेलीफोनिक इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद फाइनल सिलेक्शन होगा।

Asian Games में नीरज की जगह यह भाला फेंक खिलाड़ी करेगा एथलेटिक्स दल की अगुवाई

javelin throw

राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने वाले भाला फेंक के एथलीट यशवीर सिंह को जापान में होने वाले एशियाई खेलों के लिए चोटिल नीरज चोपड़ा की जगह गुरुवार को 77 सदस्यीय भारतीय एथलेटिक्स टीम में शामिल किया गया जबकि लंबी दूरी के धावक अभिषेक पाल को कथित डोपिंग उल्लघंन के लिए नाडा (राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी) से नोटिस जारी किए जाने के बाद टीम से बाहर कर दिया गया।

भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने लुधियाना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों के लिए 77 सदस्यीय ट्रैक एवं फील्ड टीम की घोषणा की। लुधियाना अभी राष्ट्रीय युवा चैंपियनशिप की मेजबानी कर रहा है।

पुरुषों की 110 मीटर बाधा दौड़ के धावक तेजस शिरसे को भी टीम से बाहर कर दिया गया है क्योंकि वह हाल ही में ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान चोटिल हो गए थे।अभिषेक को पिछले महीने नाडा ने नोटिस भेजा था क्योंकि उनके डोपिंग नमूने में महिलाओं की प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाली दवा पाई गई थी।

खेल मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में 73 सदस्यीय एथलेटिक्स टीम की घोषणा की थी जिसमें शिरसे और अभिषेक भी शामिल थे। मंत्रालय ने बुधवार को छह नए खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया।

इन खिलाड़ियों में 200 मीटर की धाविका हरिता भद्रा, 400 मीटर दौड़ में भाग लेने वाली किरण पहल, पोल वॉल्टर सिंधुश्री जी, त्रिकूद की एथलीट आशा इलंगो, चक्का फेंक की खिलाड़ी सान्या यादव और हैमर थ्रोअर प्रवीण कुमार शामिल हैं।

इस तरह से पहले घोषित किए गए 73 खिलाड़ियों में से दो खिलाड़ियों अभिषेक और शिरसे के बाहर होने और बुधवार को छह खिलाड़ियों के जुड़ने से अंतिम संख्या 77 हो गई है।AFI ने आयोजकों से यह भी अनुरोध किया है कि पिछले एशियाई खेलों के दोहरे पदक विजेता अविनाश साबले को 5000 मीटर दौड़ में भाग लेने की अनुमति दी जाए। साबले की पसंदीदा 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में उनकी भागीदारी सुनिश्चित है।

पिछले साल एसीएल सर्जरी कराने के बाद साबले ने इस सत्र में केवल एक ही दौड़ में हिस्सा लिया है। उन्होंने 2023 में हांगझोऊ एशियाई खेलों में 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में स्वर्ण और 5000 मीटर में रजत पदक जीता था।

दस सितंबर को होने वाली प्रतियोगिता में एशियाई खेलों के लिए चुने गए अधिकतर एथलीट भाग लेंगे।गुलवीर सिंह और पारुल चौधरी एशियाई खेलों में तीन-तीन स्पर्धाओं में भाग लेंगे। गुलवीर 10,000 मीटर, 5000 मीटर और 1500 मीटर में जबकि पारुल 3000 मीटर स्टीपलचेज, 5000 मीटर और 1500 मीटर में हिस्सा लेंगी।

एशियाई खेल 2026 के लिए भारतीय एथलेटिक्स टीम इस प्रकार है:-

पुरुषों:-गुरिंदरवीर सिंह (100मी), अनिमेष कुजूर (100 मीटर, 200 मीटर, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), राजेश रमेश (400 मीटर, 4×400 मीटर रिले), विशाल थेनारासु कयालविझी (400 मीटर, 4×400 मीटर रिले), कृष्ण कुमार (800 मी), मोहम्मद अफसल पुलिककलाकथ (800मी), यूनुस शाह (1500 मी), अभिषेक पाल (5000 मी, 10000 मी), गुलवीर सिंह (1500 मीटर, 5000 मीटर, 10000 मीटर)। सावन बरवाल (मैराथन), कार्तिक कारकेरा (मैराथन), तेजस शिरसे (110 मीटर बाधा दौड़), यशस पलाक्ष (400 मीटर बाधा दौड़), संतोष कुमार तमिलारासन (400 मीटर बाधा दौड़), अविनाश साबले (3000 मीटर स्टीपलचेज), प्रणव प्रमोद गुरव (मिश्रित 4×100 मीटर रिले), मोहम्मद अशफाक (4×400 मीटर रिले), धर्मवीर चौधरी (4×400 मीटर रिले), जय कुमार (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), मनु थेक्किनालिल साजी (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), आदर्श राम ज्योति शंकर (ऊंची कूद), सर्वेश कुशारे (ऊंची कूद) , कुलदीप कुमार (पोल वॉल्ट), देव मीना (पोल वॉल्ट), मुरली श्रीशंकर (लंबी कूद), शाहनवाज खान (लंबी कूद), प्रवीण चित्रवेल (ट्रिपल जंप) कार्तिक उन्नीकृष्णन (ट्रिपल जंप), करणवीर सिंह (गोला फेंक), तजिंदरपाल सिंह तूर (गोला फेंक), दमनीत सिंह (हथौड़ा फेंक), नीरज चोपड़ा (भाला फेंक), रोहित यादव (भाला फेंकने का खेल), तौफीक नौशाद (डेकाथलॉन), तेजस्विन शंकर (डेकाथलॉन)

महिला:– प्राची चौधरी (400 मी), गौतमी जयारमन (800 मी), पूजा (800मी, 1500मी), पारुल चौधरी (1500 मीटर, 5000 मीटर, 3000 मीटर स्टीपलचेज़), सीमा (5000 मी, 10000 मी), प्रियंका गोस्वामी (मैराथन रेस वॉक), मंजू रानी (मैराथन रेस वॉक), ज्योति याराजी (100 मीटर बाधा दौड़), नंदिनी कोंगन (100 मीटर बाधा दौड़), उन्नति अयप्पा बोलैंड (200मी), अनु राघवन (400 मीटर बाधा दौड़), विथ्या रामराज (400 मीटर बाधा दौड़), अंकिता ध्यानी (3000 मीटर स्टीपलचेज), तमन्ना (4×100 मीटर रिले, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), नित्या गंधे (4×100 मीटर रिले), सरबानी नंदा (4×100 मीटर रिले), अबिनया राजराजन (4×100 मीटर रिले) स्नेहा सत्यनारायण (4×100 मीटर रिले, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), सुदेशना शिवंकर (4×100 मीटर रिले), रशदीप कौर (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), अनसा बाबू (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले),

Teacher day essay : शिक्षक दिवस पर बच्चो के लिए निबंध

Teacher day essay : शिक्षक दिवस पर बच्चो के लिए निबंध

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प्रस्तावना:

प्रतिवर्ष 5 सितंबर का दिन भारत में 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाता है। यह दिन पूरी तरह से गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा और शिक्षकों के समर्पण को याद करने के लिए है। भारत की संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव से बहुत ऊँचा और पवित्र रहा है। मानव जीवन में शिक्षकों के सही योगदान और महत्व को समझाने के लिए ही इस विशेष दिन को मनाया जाता है।

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माता-पिता और गुरु का स्थान

हमारे जीवन में माता-पिता का स्थान सर्वोपरि है, क्योंकि वे हमें इस दुनिया में लाते हैं और हमारा पालन-पोषण करते हैं। इसीलिए कहा भी जाता है कि बच्चे के जीवन के पहले गुरु उसके माता-पिता ही होते हैं। लेकिन इस दुनिया में जीने का सही तरीका और ज्ञान हमें शिक्षक ही प्रदान करते हैं। शिक्षक ही हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं और जीवन में सफलता की ऊंचाइयों तक पहुँचाते हैं।

 

शिक्षक दिवस: कब और क्यों?

शिक्षक दिवस भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म-दिवस (5 सितंबर 1888) के अवसर पर मनाया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन का शिक्षा और अध्यापन के प्रति गहरा लगाव था। जब उनके शिष्यों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई, तो उन्होंने कहा कि “यदि मेरे जन्मदिन को शिक्षकों के सम्मान के रूप में मनाया जाए, तो मुझे सबसे अधिक गर्व होगा।”

 

वे एक कुशल राजनयिक, महान विचारक और आदर्श शिक्षक थे। इस दिन पूरे देश में भारत सरकार द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जाता है।

 

शिक्षक दिवस पर तैयारियाँ और आयोजन

शिक्षक दिवस पर देश के सभी स्कूल-कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में उत्सव जैसा माहौल रहता है:

सांस्कृतिक कार्यक्रम: छात्र अपने शिक्षकों के सम्मान में नाटक, गीत, नृत्य और भाषण प्रस्तुत करते हैं।

शिक्षकों की भूमिका में छात्र: कई स्कूलों में वरिष्ठ छात्र पूरे दिन शिक्षक बनकर कक्षाएं चलाते हैं और अध्यापन का अनुभव प्राप्त करते हैं।

सम्मान समारोह: छात्र अपने शिक्षकों को धन्यवाद कार्ड, फूल और उपहार देकर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

संकल्प दिवस: शिक्षक भी इस दिन गुरु-शिष्य परंपरा को बनाए रखने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का संकल्प लेते हैं।

 

गुरु-शिष्य संबंध का महत्व

गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति का एक स्वर्णिम हिस्सा है। शिक्षक उस माली के समान होता है जो अलग-अलग प्रकार के पौधों को सींचकर एक सुंदर बगीचा तैयार करता है। वह छात्रों को जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ने की सीख देता है। एक आदर्श गुरु ही शिष्य में नैतिकता और अच्छे चरित्र का निर्माण करता है।

 

वर्तमान परिप्रेक्ष्य और चुनौतियाँ

  • आज के आधुनिक दौर में गुरु-शिष्य परंपरा में कुछ कमियाँ भी देखने को मिल रही हैं:
  • शिक्षा का व्यवसायीकरण होने से गुरु और शिष्य के संबंध में आत्मीयता की कमी आई है।
  • आए दिन मीडिया में शिक्षकों और विद्यार्थियों के एक-दूसरे के प्रति दुर्व्यवहार की खबरें देखने को मिलती हैं, जो हमारी प्राचीन संस्कृति पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
  • डिजिटल युग में मोबाइल और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से छात्रों का ध्यान पढ़ाई और संस्कारों से भटक रहा है।

 

उपसंहार

शिक्षक दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि गुरुओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने और अपनी जिम्मेदारियों को समझने का दिन है।

विद्यार्थियों का यह कर्तव्य है कि वे अपने शिक्षकों का सदैव सम्मान करें और उनके द्वारा दिए गए संस्कारों को जीवन में अपनाएं। वहीं शिक्षकों को भी चाहिए कि वे अपने पद की गरिमा बनाए रखें और विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाकर एक सशक्त समाज और देश के निर्माण में अपना योगदान दें।

 

सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!

स्मृति मंधाना के रिकॉर्ड 124 रन के आधे रन भी नहीं बना पाई हॉंगकॉंग की टीम

Smriti Mandhana

सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना के तेजतर्रार शतक के बाद दीप्ति शर्मा की अगुआई में गेंदबाजों के उम्दा प्रदर्शन से भारत ने महिला एशिया कप टी20 क्रिकेट टूर्नामेंट के ग्रुप ए मैच में बृहस्पतिवार को यहां हांगकांग पर 137 रन की एकतरफा जीत के साथ सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

भारत के 194 रन के कड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए हांगकांग की टीम ऑफ स्पिनर दीप्ति शर्मा (नौ रन पर तीन विकेट), तेज गेंदबाज नंदिनी शर्मा (छह रन पर दो विकेट), लेग लेग स्पिनर प्रेमा रावत (12 रन पर दो विकेट) और बाएं हाथ की स्पिनर श्री चरणी (16 रन पर दो विकेट) की धारदार गेंदबाजी के सामने 16.2 ओवर में सिर्फ 56 रन पर ढेर हो गई।

 हांगकांग ने अपने अंतिम छह विकेट सिर्फ चार रन पर गंवाए।हांगकांग की ओर से कप्तान नताशा माइल्स ने सर्वाधिक 15 रन बनाए। उनके अलावा सिर्फ मरीना लैमप्लो (14) और यास्मिन दसवानी (11) की दोहरे अंक में पहुंच सकी। स्मृति ने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी के दौरान 64 गेंद में 14 चौकों और सात छक्कों से 124 रन की पारी खेलने के अलावा शेफाली वर्मा (28) के साथ पहले विकेट के लिए आठ ओवर में 74 रन जोड़े जिससे भारत ने पांच विकेट पर 193 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया।

हांगकांग की ओर से ऑफ स्पिनर मरीना लैमप्लो सबसे सफल गेंदबाज रहीं जिन्होंने 46 रन देकर दो विकेट चटकाए। रुचिता वेंकटेश और जॉयलीन कौर ने भी एक-एक विकेट चटकाया।भारत अपना अंतिम ग्रुप मैच शनिवार को पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगा।लक्ष्य का पीछा करने उतरे हांगकांग की शुरुआत बेहद धीमी रही और टीम पावर प्ले में मारिको हिल (00) का विकेट गंवाकर 16 रन ही बना सकी। मारिको को नंदिनी शर्मा ने बोल्ड किया।

पावर प्ले के छह ओवर में हांगकांग की ओर से सिर्फ दो बाउंड्री लगी जब यास्मिन ने छठे ओवर में श्री चरणी पर दो चौके मारे।नताशा ने सातवें ओवर में दीप्ति पर अपना पहला चौका जड़ा।दीप्ति ने दसवानी (11) को मिडविकेट पर भारती फुलमाली के हाथों कैच कराया जबकि प्रेमा ने नताशा (15) को विकेटकीपर ऋषा घोष के हाथों कैच कराके हांगकांग का स्कोर 10वें ओवर में तीन विकेट पर 31 रन किया।

लेग स्पिनर प्रेमा ने अपने अगले ओवर में कैरी चान (01) को भी शेफाली के हाथों कैच करा दिया।नंदिनी ने इसके बाद मरयम बिबी (07) को पवेलियन भेजा जिससे हांगकांग की आधी टीम 14वें ओवर में सिर्फ 52 रन तक पवेलियन लौट चुकी थी।श्री चरणी ने मरीना (14) को प्रतिका रावल के हाथों कैच कराके हांगकांग को छठा झटका दिया।

हांगकांग को अंतिम पांच ओवर में जीत के लिए 139 रन की दरकार थी और उसकी टीम इस स्कोर के आसपास भी नहीं पहुंच सकी।दीप्ति शर्मा ने एलिसन सियू (01) और इकरा सहर (00) को चार गेंद के भीतर आउट किया। इसी ओवर में जॉयलीन कौर (01) भी रन आउट हुईं।श्री चरणी ने शहजीन शहजाद (02) को ऋचा के हाथों के स्टंप कराके हांगकांग की पारी का अंत किया।

टॉस हारकर बल्लेबाजी करने उतरे भारत को स्मृति और शेफाली की जोड़ी ने तेज शुरुआत दिलाई। दोनों ने पावर प्ले में 60 रन जोड़कर भारत के बड़े स्कोर का मंच तैयार किया।स्मृति ने पांचवें ओवर में तेज गेंदबाज मरयम बिबी पर तीन चौके मारे जबकि शेफाली ने मरीना लैमप्लो के अगले ओवर में दो चौके और दो छक्के जड़कर अपने तेवर दिखाए।स्मृति ने रुचिता वेंकटेश पर भी लगातार दो चौके मारे लेकिन इसी ओवर की अंतिम गेंद पर मरीना ने लॉन्ग ऑन पर शेफाली का शानदार कैच लपका। उन्होंने 17 गेंद की अपनी पारी में तीन चौके और दो छक्के मारे।

स्मृति ने इकरा सहर की लगातार गेंदों पर छक्के और चौके के साथ 40 गेंद में अर्धशतक पूरा किया और 11वें ओवर में टीम का स्कोर 100 रन के पार पहुंचाया।स्मृति ने कैरी चान पर भी छक्का जड़ा लेकिन प्रतिका रावल (10) ने तेज गेंदबाज जॉयलीन कौर की पहली ही गेंद पर प्वाइंट पर मरयम को कैच थमा दिया।ऑफ स्पिनर मरीना ने इसके बाद अपनी ही गेंद पर ऋचा घोष (11) का शानदार कैच लेकर भारत को तीसरा झटका दिया।

स्मृति ने मरीना पर चौके के साथ 57 गेंद में अपना दूसरा शतक पूरा किया। उन्होंने ऑफ स्पिनर रुचिता पर लगातार तीन छक्कों के साथ अपने करियर के पिछले सर्वश्रेष्ठ स्कोर को पीछे छोड़ा।कप्तान हरमनप्रीत कौर भी सिर्फ 10 रन बनाने के बाद मरीना की गेंद पर डीप स्क्वायर लेग पर जॉयलीन को कैच दे बैठीं।स्मृति भी पारी के अंतिम ओवर में स्ट्राइक पर आने के लिए तेजी से रन लेने की कोशिश में रन आउट हो गईं।

बंगाल में खुलेंगे RSS के 1000 नए स्कूल, शिक्षा विभागों का होगा विलय; जानें बड़ा ऐलान

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक योजना के बारे में जानकारी दी है। इसके तहत अगले एक साल में हर जिले, नगर पालिका और पंचायत में RSS से जुड़ी संस्था विद्या भारती के कम से कम 1,000 स्कूल खोलने का लक्ष्य है। इसके अलावा राज्य के चार शिक्षा विभागों को मिलाकर एक विभाग बनाने की भी बात कही गई है। इस योजना के तहत मदरसा शिक्षा के लिए अलग विभाग नहीं होगा। सीएम ने विद्या भारती की 74वीं वर्षगांठ के मौके पर रामकृष्ण मिशन इंस्टीट्यूट ऑफ कल्चर में आयोजित कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी है। वहीं इस कार्यक्रम में सुवेंदु अधिकारी ने संस्था की भूमिका को लेकर अपनी बात रखी।

सीएम ने इन जगहों पर स्कूलों खोलने की कही बात

उन्होंने विद्या भारती से बच्चों को देश और समाज से जुड़ी शिक्षा देने की दिशा में काम करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों को सचिवालय बुलाकर सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक करने और इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए कहा। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने संस्था से मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना में स्कूलों की संख्या बढ़ाने पर खास ध्यान देने को कहा। उन्होंने इन इलाकों में ज़्यादा एंटी-नेशनल एक्टिविटीज होने का दावा भी किया। अधिकारी ने पिछली टीएमसी सरकार पर शिक्षा का माहौल खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विद्या भारती जैसी संस्थाओं को राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद करनी चाहिए।

टीएमसी पर लगाए ये आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली टीएमसी सरकार के दौरान शिक्षा का माहौल खराब हो गया था। उन्होंने टीएमसी पर लोगों को बांटने के लिए बंगाली पाठ्यक्रम में बदलाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में ‘मां’ की जगह ‘अम्मा’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि पाठ्यक्रम में ईश्वर चंद्र विद्यासागर और स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को भी नजरअंदाज किया गया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी के “एक देश, एक विधान, एक निशान, एक प्रधान” के नारे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यही सोच शिक्षा के क्षेत्र में भी लागू होनी चाहिए।

सीएम ने क्या कहा

सीएम ने कहा कि, “हम ऐसा कोई इंतजाम नहीं होने देंगे जहां हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट सभी यूनिवर्सिटीज को देखेगा, वहीं दूसरा डिपार्टमेंट आलिया यूनिवर्सिटी को देखेगा।” आलिया यूनिवर्सिटी को अभी राज्य का माइनॉरिटी अफेयर्स डिपार्टमेंट मैनेज करता है। सीएम ने आगे कहा,” मैंने बोर्ड टॉपर्स को सम्मानित किया। बाद में, माइनॉरिटी अफेयर्स डिपार्टमेंट ने 27 मुस्लिम स्टूडेंट्स के नामों वाली एक अलग फाइल भेजी। मैंने पूछा क्यों? मैं पहले ही 20 स्टूडेंट्स को सम्मानित कर चुका हूँ, और उनमें मुस्लिम, जैन और बौद्ध शामिल हैं।” पश्चिम बंगाल में फिलहाल विद्या भारती के 313 स्कूल चल रहे हैं, जबकि पूरे देश में यह संस्था 12,000 से ज्यादा स्कूल और 10,000 बाल संस्कार केंद्र संचालित करती है।

Mausam 4 Sep: आज इन राज्यों में मूसलाधार बारिश! MP में ऑरेंज कलर अलर्ट जारी, जानें दिल्ली-यूपी से लेकर दक्षिण भारत तक के मौसम का हाल

नियर टर्म में बाजार में बना रहेगा उतार-चढ़ाव, आज इन दो शेयरों पर रहे नजर, चमका सकते हैं किस्मत

बाजार पर बात करते हुए चॉइस ब्रोकिंग के VP टेक्निकल रिसर्च सचिन गुप्ता ने कहा कि ग्लोबल सेंटीमेंट में सुधार हुआ है क्योंकि कल वॉल स्ट्रीट बढ़त के साथ बंद हुआ और ज़्यादातर एशियाई बाजार भी पॉज़िटिव जोन में हैं। US ट्रेज़री यील्ड में भी कमी आई है। इससे बाजार को सपोर्ट मिल रहा है। हालांकि, ब्रेंट क्रूड $96–97 के आस-पास ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। इसके अलावा अमेरिका–ईरान संघर्ष से जुड़े जियोपॉलिटिकल रिस्क बाज़ार के सेंटीमेंट के लिए एक अहम निगेटिव फ़ैक्टर बने हुए हैं।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार का कहना है कि अच्छी और बुरी खबरें आती-जाती रहती हैं। CMIE की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, FY27 की पहली तिमाही में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में 97% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इसमें FY26 की पहली तिमाही के मुकाबले जबरदस्त बढ़त हुई है। यह कैपेक्स में बड़े बदलाव का संकेत है। लंबे समय के बाद प्राइवेट कैपेक्स में सुधार हो रहा है, जो भविष्य के आर्थिक विकास के लिए अच्छा संकेत है।

हालांकि,कुछ बुरी खबरें भी हैं। सबसे बड़ी बुरी खबर है दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड का बढ़ना। अमेरिका में 10-साल की बॉन्ड यील्ड 4.8% के आसपास बनी हुई है। जापान में 10-साल की यील्ड 3% है,जो पिछले 30 सालों में सबसे ज़्यादा है। UK में 30-साल की यील्ड 6% है। भारत में भी 10-साल की यील्ड 7% के करीब है।

बॉन्ड यील्ड का बढ़ना इक्विटी मार्केट के लिए बुरा है। महंगाई बढ़ने और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की ज़्यादा संभावना के कारण फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट ज़्यादा आकर्षक हो जाएंगे। उभरते बाज़ारों से कैपिटल के बाहर जाने (कैपिटल फ्लाइट) की संभावना भी बनी हुई है। इन वजहों से इक्विटी मार्केट पर दबाव पड़ेगा।

हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में अच्छी खबरों से इन बुरी वजहों का असर कम हो रहा है। GST कलेक्शन,ऑटोमोबाइल बिक्री और क्रेडिट ग्रोथ से जुड़े हालिया आंकड़े (हाई-फ़्रीक्वेंसी डेटा) खास तौर पर अच्छे रहे हैं। अच्छी और बुरी वजहों का यह मिला-जुला असर निकट भविष्य में बाज़ार में उतार-चढ़ाव बनाए रखेगा।

निफ्टी पर रणनीति

सीएनबीसी- आवाज़ के वीरेंद्र कुमार का कहना है कि निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 23971-24029 पर और अगला रेजिस्टेंस 24081-24129/184 पर है। इसके लिए पहला बेस 23866-23789 पर और अगला बेस 23761-23677 पर है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

वीरेंद्र कुमार का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 57478-57631 पर और अगला रेजिस्टेंस 57771-57878/58040 पर है। इसके लिए पहला बेस 57110-56910 पर और अगला बेस 56691-56578 पर है।

Market Trend : बाजार पर तेजड़ियों की पकड़ ढ़ीली, कमजोर बाजार में भी इस कैपिटल मार्केट शेयर में दिख रहा दम

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं www.rajeshsatpute.com के राजेश सातपुते। इनकी OBEROI RLTY के फ्यूचर्स में 1900 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ 1950 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं,SBICARD के फ्यूचर्स में इनकी 650 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ 680 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

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एस्टोनिया के रक्षामंत्री ने इस्तीफा दिया:यूक्रेन को समय पर तोप के गोले नहीं दे पाए; कॉन्ट्रैक्ट में भारतीय कंपनी शामिल, अनुभव नहीं होने का आरोप

एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की वजह यूक्रेन के लिए की गई करीब 768 करोड़ रुपए की एक डील है। सौदे के तहत भारतीय कंपनी से जुड़ी इटली की एक फर्म को गोला-बारूद सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। आरोप है कि कंपनी के पास तोप के गोले बनाने या बेचने का अनुभव नहीं था। इसके बावजूद उसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दिया गया और भारी रकम एडवांस में दी गई। कंपनी के साथ किए गए थे 4 समझौते 2024 में एस्टोनिया के सेंटर फॉर डिफेंस इन्वेस्टमेंट ने तोप के गोलों की खरीद के लिए डेटासेल एसआरएल के साथ चार समझौते किए। यह कंपनी इटली में रजिस्टर्ड है। मार्च 2024 में इसे भारतीय कंपनी नेको डिफेंस म्यूनिशंस ने खरीदा था। पहला कॉन्ट्रैक्ट अगस्त 2024 में हुआ था। इसके तहत करीब 1.5 करोड़ यूरो एडवांस दिए गए। इसके बाद दूसरे और फिर दो अन्य कॉन्ट्रैक्ट किए गए। चारों सौदों में एडवांस भुगतान करीब 7 करोड़ यूरो तक पहुंच गया। नवंबर 2024 तक यूक्रेन पहुंचने थे गोले गोला-बारूद का पहला बैच नवंबर 2024 में यूक्रेन पहुंचना था, लेकिन डेटासेल ने देरी की। बाद में जो सामान पहुंचा, उसे लेकर भी सवाल उठाए गए। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ खेप अधूरी थी और उसमें गोले चलाने के लिए जरूरी हिस्से मौजूद नहीं थे। इनमें फ्यूज, प्रोपेलेंट चार्ज और प्राइमर जैसे हिस्से शामिल बताए गए हैं। इसलिए एस्टोनिया ने कुछ सामान को स्वीकार नहीं किया। कंपनी ने आरोपों को खारिज किया डेटासेल ने एस्टोनिया के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। कंपनी का कहना है कि उसने बड़ी मात्रा में सामान तैयार किया और उसकी सप्लाई के लिए बिल भी दिए। कंपनी ने यह भी कहा कि डिलीवरी में देरी के पीछे अलग-अलग देशों से मंजूरी और जरूरी दस्तावेज मिलने में हुई देरी जैसी वजहें थीं। एस्टोनिया के 768 करोड़ रुपए अटके एस्टोनिया ने इस सौदे में करीब 768 करोड़ रुपए दिए थे। अब वह इस रकम को वापस पाने की कोशिश कर रहा है। अनुबंध को लेकर मामला मध्यस्थता तक पहुंच गया है। अगर पैसा वापस नहीं मिला तो एस्टोनिया पर इस रकम का वित्तीय बोझ पड़ सकता है। यूरोपीय आयोग भी एस्टोनिया के साथ इस मामले पर बातचीत कर रहा है। EU के फंड से आया था पैसा इस सौदे में इस्तेमाल हुआ पैसा यूरोपीय संघ की यूरोपियन पीस फैसिलिटी (EPF) से आया था। यह फंड यूक्रेन को सैन्य सहायता देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। अब सवाल यह है कि अगर एस्टोनिया कंपनी से पैसा वापस नहीं ले पाया तो इस फंड का क्या होगा। यूरोपीय आयोग इस मामले में एस्टोनियाई अधिकारियों के संपर्क में है। मंत्री बोले- हर सौदे की जिम्मेदारी मेरी रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने कहा कि मंत्री खुद हर हथियार खरीद के कॉन्ट्रैक्ट पर बातचीत नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने संबंधित कॉन्ट्रैक्ट व्यक्तिगत रूप से नहीं पढ़े थे। लेकिन उनके मुताबिक, मंत्रालय के काम की राजनीतिक जिम्मेदारी रक्षा मंत्री की होती है। इसी वजह से उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया। जांच में खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल एस्टोनिया के राष्ट्रीय लेखा कार्यालय ने इस सौदे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच का एक बड़ा मुद्दा यह है कि इतने बड़े रक्षा सौदे में ऐसी कंपनी को कैसे चुना गया, जिसके पास तोप के गोले की सप्लाई का पहले का अनुभव नहीं था। यानी विवाद सिर्फ इस बात पर नहीं है कि गोले समय पर पहुंचे या नहीं। सवाल यह भी है कि कंपनी का चयन कैसे हुआ और इतनी बड़ी रकम एडवांस में क्यों दी गई। ————————- यह खबर भी पढ़ें… जयशंकर बोले- तेल खरीद पर रोक से जंग नहीं थमेगी: बातचीत से ही खत्म होगी, भारत यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए मध्यस्थता को तैयार केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन जंग का समाधान इस बात से नहीं निकलेगा कि कोई देश रूसी तेल खरीदता है या नहीं। पूरी खबर पढ़ें…