IND vs ZIM: लगातार तीन हार के बाद टीम इंडिया में बड़ा बदलाव! सैमसन और अर्शदीप बाहर, इन नए चेहरों की हुई एंट्री

जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाली 3 मैचों की टी20 सीरीज के बीसीसीआई ने टीम इंडिया का ऐलान कर दिया है। जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज की शुरुआत 23 जुलाई से होगी। इस बार टीम में कई नए खिलाड़ियों को मौका मिला है। टीम की कमान श्रेयस अय्यर के हाथों में हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 टीम में संजू सैमसन और अर्शदीप सिंह जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को जगह नहीं दी गई। वहीं युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को जिम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज में मौका मिला है। भारतीय टीम अभी इंग्लैंड दौरे पर हैं।

वहीं इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे मुकाबले में संजू को ड्रॉप किया गया था। संजू की जगह सैमसन को प्लेइंग 11 में शामिल किया गया था। लगातार तीन मैचों से फ्लॉप होने के बाद संजू को प्लेइंग-11 से बाहर बैठना पड़ा। वहीं अब जिम्बाब्वे के खिलाफ भी टीम में शामिल नहीं हैं। वहीं हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड दौर पर भारतीय टीम लगातार तीन मैचों में हार का सामना करना पड़ा है।

इन खिलाड़ियों को मिला मौका

जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टीम में कई नए खिलाड़ियों को मौका मिला है। विदर्भ के स्पिनर हर्ष दुबे को पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है। उन्होंने पिछले महीने अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे में भारत के लिए डेब्यू किया था। वहीं, विदर्भ के ही तेज गेंदबाज यश ठाकुर को भी पहली बार राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है। उन्होंने हाल ही में श्रीलंका में हुई ट्राई सीरीज में इंडिया ए के लिए शानदार प्रदर्शन किया था। इसके अलावा, गुजरात टाइटंस के तेज गेंदबाज अशोक शर्मा को भी पहली बार भारतीय टीम में चुना गया है।

रिंकू सिंह की हुई वापसी

पंजाब किंग्स के विकेटकीपर बल्लेबाज प्रभसिमरन सिंह को भी जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टीम में जगह मिली है। वह इससे पहले 2022 एशियन गेम्स के दौरान भारतीय टीम का हिस्सा रहे थे, लेकिन तब उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला था। भारतीय टीम में रिंकू सिंह और तेज गेंदबाज मयंक यादव की भी वापसी हुई है। केकेआर के बल्लेबाज रिंकू को एक बार फिर मौका मिला है, जबकि मयंक यादव लंबे समय बाद टीम में लौटे हैं। मयंक ने आखिरी बार 2024 में भारत के लिए मैच खेला था और इसके बाद वह चोट के कारण टीम से बाहर रहे। अब चयनकर्ताओं ने उन पर फिर से भरोसा जताते हुए जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम में शामिल किया है।

इन खिलाड़ियों को नहीं मिला जगह

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की ओर से जारी टीम में यह साफ नहीं किया गया कि संजू सैमसन को टीम से बाहर किया गया है या उन्हें आराम दिया गया है। वहीं, इंग्लैंड दौरे पर मौजूद छह अन्य खिलाड़ियों अक्षर पटेल, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, वाशिंगटन सुंदर, प्रसिद्ध कृष्णा और रवि बिश्नोई को भी जिम्बाब्वे दौरे के लिए चुनी गई टीम में जगह नहीं मिली। भारतीय टीम प्रबंधन अक्सर जिम्बाब्वे दौरे का इस्तेमाल युवा खिलाड़ियों को मौका देने के लिए करता रहा है। इस बार भी कई नए चेहरों को टीम में शामिल किया गया है।

जिम्बाब्वे के लिए भारत की पूरी टीम

श्रेयस अय्यर (कप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा (उप-कप्तान), ईशान किशन (विकेट कीपर), शिवम दुबे, सूर्यांश शेडगे, रिंकू सिंह, हर्ष दुबे, वरुण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव, यश ठाकुर, अशोक शर्मा, मयंक यादव, प्रभसिमरन सिंह (विकेट कीपर)

दिल्ली में महिलाओं को 2500 रुपये देने वाली सरकारी स्कीम के लिए आया नया अपडेट, पोर्टल तैयार और अब होगा ये काम

Delhi Mahila Samridhi Yojna: दिल्ली में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की वित्तीय सहायता देने वाली सरकारी योजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार अपनी इस बहुप्रतीक्षित महिला समृद्धि योजना को धरातल पर उतारने से पहले इसका नाम बदलने की तैयारी कर रही है। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अब इस योजना को दिल्ली लक्ष्मी योजना (Delhi Laxmi Yojna) के नए नाम से शुरू किया जा सकता है। सरकार ने इस योजना के सुचारू संचालन के लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल को पूरी तरह से तैयार कर लिया है। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च करने की योजना बनाई जा रही है।

17 लाख महिलाओं को मिलेगा लाभ, सुरक्षा ऐप भी होगा लॉन्च

यह योजना 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी द्वारा किए गए प्रमुख वादों में से एक है। दिल्ली में इस योजना से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की करीब 17 लाख महिलाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता वाला महिला एवं बाल विकास विभाग इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू करेगा। एक सूत्र ने पीटीआई को बताया कि पहले इस योजना की घोषणा 1 जून को होने की उम्मीद थी लेकिन सरकार द्वारा इसका नाम बदलने का निर्णय लेने के कारण इसके लॉन्च को टाल दिया गया था। अब इसका रजिस्ट्रेशन पोर्टल तैयार है और योजना के औपचारिक शुभारंभ के तुरंत बाद इसे चालू कर दिया जाएगा।

बजट में 5100 करोड़ रुपये का आवंटन, प्रमाणन के चलते हुई थी देरी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मार्च में पेश किए गए साल 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 5100 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इससे पिछले वित्तीय वर्ष में भी ऐसा ही बजटीय आवंटन किया गया था लेकिन पात्र लाभार्थियों के सत्यापन के लिए प्रमाणित और सटीक डेटा की कमी के कारण इसे लागू करने में देरी हुई थी।

मुख्यमंत्री ने बार-बार स्पष्ट किया है कि इस योजना को एक ऐसी अचूक प्रणाली स्थापित करने के बाद ही लॉन्च किया जाएगा जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि योजना का लाभ केवल वास्तविक और सही लाभार्थियों तक ही पहुंचे। इस योजना के क्रियान्वयन और देखरेख के लिए पिछले साल मार्च में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। इसमें कई कैबिनेट मंत्री भी शामिल हैं।

कौन होगा पात्र? पात्रता के नियम हुए फाइनल

सूत्रों के अनुसार, योजना के लिए पात्रता के मानदंडों को भी अंतिम रूप दे दिया गया है-

  • दिल्ली का निवासी होना अनिवार्य: सिर्फ वही महिलाएं इस मासिक वित्तीय सहायता के लिए आवेदन करने की पात्र होंगी जिनके पास दिल्ली का प्रामाणिक आधार नंबर होगा।
  • आर्थिक मानदंड: इसके साथ ही आवेदन करने वाली महिला का गरीबी रेखा से नीचे श्रेणी से संबंधित होना अनिवार्य है।
  • पोर्टल के लाइव होते ही इन तय मानकों को पूरा करने वाली महिलाएं हर महीने 2500 रुपये की सहायता राशि के लिए आवेदन कर सकेंगी।

8 साल के एक्सपीरियंस वाले SBI मैनेजर की CTC 35.25 लाख रुपये की पर इसका चौंकाने वाला ब्रेकअप और कैच हुआ वायरल

भारत में सरकारी नौकरी आज भी सुरक्षित करियर और अच्छी सैलरी की वजह से लोगों की पहली पसंद मानी जाती है। खासकर अगर आपकी नौकरी सरकारी बैंक में हो तो अलग ही बात होती है। हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एक स्केल-3 मैनेजर की बताई जा रही सैलरी स्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे इस डाक्युमेंट में सालाना करीब 35.24 लाख रुपये की ग्रॉस सैलरी दिखाई गई है, लेकिन कई लोगों का कहना है कि इसकी पूरी तस्वीर कुछ अलग है। इसे देखने के बाद लोग सरकारी बैंक कर्मचारियों की सैलरी और उससे जुड़ी सुविधाओं को लेकर अलग-अलग राय दे रहे हैं।

यूजर ने पोस्ट किया सैलरी स्लिप

एक्स (X) पर शेयर की गई पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया, “लोग अक्सर कहते हैं कि एसबीआई कर्मचारियों की जिंदगी पूरी तरह से सेटल होती है, लेकिन इस स्केल-3 मैनेजर की सैलरी स्लिप देखने के बाद आपकी सोच बदल सकती है।” पोस्ट करने वाले यूजर ने दावा किया कि, संबंधित कर्मचारी ने करीब आठ साल पहले एसबीआई में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) के रूप में नौकरी शुरू की थी। बाद में पदोन्नति मिलने के बाद वह स्केल-3 मैनेजर बन गया। पोस्ट के साथ शेयर किए गए वित्त वर्ष 2025-26 के फॉर्म-16 के अनुसार, उसकी कुल वार्षिक ग्रॉस सैलरी 35,24,315.88 रुपये बताई गई है।

व्यक्ति ने कही ये बात

पोस्ट शेयर करने वाले व्यक्ति ने ये भी साफ किया कि ग्रॉस सैलरी को कर्मचारी की हर महीने मिलने वाली आय नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस रकम में लीव फेयर कंसेशन (LFC) एनकैशमेंट और लीव एनकैशमेंट शामिल हैं, जो सैलरी के बार-बार मिलने वाले हिस्से के बजाय एक बार या कभी-कभी मिलने वाले फायदे हैं। पोस्ट में आगे लिखा गया, “इसके अलावा, हर महीने आयकर, एनपीएस (NPS), ईपीएफ (EPF), होम लोन की ईएमआई, कार लोन और टू-व्हीलर लोन जैसी कई मदों में कटौती होती है। इसलिए फॉर्म-16 में दिखाई गई ग्रॉस सैलरी और हर महीने बैंक खाते में आने वाली वास्तविक रकम में काफी अंतर हो सकता है।”

सोशल मीडिया पर किया कमेंट

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच नई बहस शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “फॉर्म-16 देखने में भले ही शानदार लगता हो, लेकिन हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी असली स्थिति बताती है। ग्रॉस सैलरी के बड़े आंकड़े हमेशा बैंक कर्मचारियों की वास्तविक कमाई नहीं दिखाते।” दूसरे यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा, “यही सबसे बड़ी बात है। हम अक्सर सिर्फ बड़े आंकड़े देखकर राय बना लेते हैं, जबकि टैक्स, कटौतियां, जिम्मेदारियां और आखिर में हाथ में आने वाली रकम को नजरअंदाज कर देते हैं।”

एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा, “आठ साल की नौकरी के बाद स्केल-3 पर करीब 2 लाख रुपये इन-हैंड सैलरी मिल रही है। मेरे हिसाब से यह काफी अच्छा पैकेज है। इतने ही अनुभव वाले कई क्लास-ए गजेटेड अधिकारियों से भी यह बेहतर माना जा सकता है।”

छत्तीसगढ़ की लोककला को दुनिया तक पहुंचाने वाली आवाज़ | Padma Vibhushan Teejan Bai | RIP Teejan Bai |

उनकी पहली कमाई सिर्फ़ एक बोरी चावल थी, लेकिन कला ऐसी कि आगे चलकर पूरी दुनिया को पंडवानी का दीवाना बना दिया!

पद्म विभूषण तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। लंबे समय से बीमारी से जूझने के बाद उन्होंने AIIMS, रायपुर में 70 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गाँव में जन्मी तीजन बाई ने महाभारत की कहानियां अपने नाना से सुनीं और वहीं से पंडवानी के प्रति उनका प्रेम शुरू हुआ।

महज़ 12 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई। लोगों के दवाब को नज़रअंदाज़ कर उन्होंने पंडवानी गाना नहीं छोड़ा, इसलिए उन्हें समाज से बाहर कर दिया गया। फिर भी, कला उनके लिए सबसे ऊपर रही।

उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, तुर्की, मॉरीशस समेत कई देशों में भारतीय लोककला का परचम लहराया। आज उनकी आवाज़ भले ही खामोश हो गई हो, लेकिन जब-जब पंडवानी की बात होगी, तीजन बाई का नाम सबसे पहले लिया जाएगा।

छत्तीसगढ़ की लोककला को दुनिया तक पहुंचाने वाली आवाज़ | Padma Vibhushan Teejan Bai | RIP Teejan Bai | Chhattisgarh

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New Tractor: महिंद्रा ने भारत में लॉन्च किया नया ट्रैक्टर, इस साल अभी 7 और नए लॉन्च की तैयारी

भारत के टॉप ट्रैक्टर ब्रांड में से एक महिंद्रा ट्रैक्टर्स ने घरेलू कृषि बाजार में अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने सोमवार को अपने बहुउद्देशीय ट्रैक्टर YuvoTech+ 585 DI V1 को देशव्यापी स्तर पर लॉन्च करने की घोषणा की है। इसी के साथ महिंद्रा ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए भारतीय किसानों के लिए एक बड़ा रोडमैप पेश करते हुए 7 नए ट्रैक्टर और 12 नए फीचर्स लॉन्च करने का भी एलान किया है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी के इस बड़े प्लान में महिंद्रा की न्यू ट्रैक्टर रेंज और स्वराज प्रोटेक के नए प्रोडक्ट्स भी शामिल होंगे जो खेती-किसानी को अधिक आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाएंगे।

सफल टेस्टिंग के बाद पूरे भारत में मिला बाजार, मिलेगी 6 साल की वारंटी

महिंद्रा ट्रैक्टर्स ने इस दमदार ट्रैक्टर को चुनिंदा बाजारों में मिली बड़ी सफलता और बेहतरीन प्रतिक्रिया के बाद अब पूरे देश में उतारने का फैसला किया है। महिंद्रा ट्रैक्टर्स के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) हर्ष राय ने लॉन्चिंग के मौके पर कहा कि चुनिंदा बाजारों में सफल शुरुआत के बाद अब हम YuvoTech+ 585 DI V1 को पूरे भारत में लॉन्च कर रहे हैं। हमारे तेजी से बढ़ते हुए YuvoTech प्लेटफॉर्म पर निर्मित यह ट्रैक्टर उन्नत तकनीक, दमदार प्रदर्शन और व्यावहारिक फीचर्स का एक बेहतरीन संयोजन है।

किसानों के भरोसे को दोगुना करने के लिए कंपनी ने इस नए ट्रैक्टर के साथ 6 साल की इंडस्ट्री-लीडिंग वारंटी देने की घोषणा की है। यह ट्रैक्टर देश भर में महिंद्रा के सभी डीलरशिप पर बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा।

जून में महिंद्रा की ट्रैक्टर बिक्री में 12.38% का शानदार उछाल

यह मेगा लॉन्चिंग ऐसे समय में हुई है जब भारतीय ट्रैक्टर सेगमेंट की स्थिति लगातार मजबूत बनी हुई है। हाल ही में जून महीने के आए बिक्री के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण और कृषि बाजारों में ट्रैक्टरों की मांग काफी तेज है। जून महीने में महिंद्रा की ट्रैक्टर बिक्री में सालाना आधार पर (YoY) 12.38% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और कंपनी ने कुल 58177 यूनिट ट्रैक्टर बेचे। इसी सेगमेंट की दूसरी बड़ी कंपनी एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने भी शानदार प्रदर्शन किया। इसकी बिक्री सालाना आधार पर 19.78% बढ़कर 13172 यूनिट तक पहुंच गई।

El Nino की चिंता के बीच सरकारी नीतियां बनेंगी किसानों का ढाल

खेती-किसानी के लिए मौसम और अल नीनो (El Nino) की स्थिति हमेशा एक बड़ी चिंता रहती है। इस पर बात करते हुए महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के प्रेसिडेंट वीजय नाकरा ने बीते दिन कहा था कि हालांकि, अभी El Nino के असर का पूरा आकलन करना जल्दबाजी होगा लेकिन सरकार की मजबूत नीतियां जैसे लगातार खाद सब्सिडी और स्थानीय स्तर पर दी जा रही सहायता किसानों के जोखिम को कम करने में काफी मदद कर सकती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि सरकार के इन सकारात्मक कदमों से खरीफ सीजन पर पड़ने वाले किसी भी विपरीत असर को भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है, जिससे कृषि क्षेत्र की ग्रोथ और ट्रैक्टरों की मांग बाजार में बनी रहेगी।

Mumbai Bullet Train: बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में बड़ी कामयाबी! भारत की सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीन ने मुंबई में शुरू की अंडरग्राउंड टनलिंग

भारत के पहले मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट ने एक और बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। देश के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए इस प्रोजेक्ट के तहत मुंबई में अंडरग्राउंड टनलिंग (भूमिगत सुरंग बनाने) का काम आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। एचटी के मुताबिक 5 जुलाई को देश की सबसे बड़ी रेलवे टनल बोरिंग मशीन (TBM) ने विक्रोली से बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्टेशन की तरफ जमीन को चीरते हुए अपनी यात्रा शुरू कर दी है। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए एक औपचारिक लॉन्च कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

इसकी अध्यक्षता केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव करने वाले थे। मुंबई में मूसलाधार बारिश के चलते जारी किए गए ‘रेड अलर्ट’ के कारण इस औपचारिक कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा लेकिन मशीन ने तय समय पर सुरंग बनाने का अपना काम शुरू कर दिया।

13.6 मीटर व्यास वाली देश की सबसे बड़ी रेलवे TBM

सुरंग बनाने के इस बेहद जटिल काम में 13.6 मीटर व्यास वाली एक विशाल मिक्सशील्ड टीबीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह भारत में किसी भी रेलवे टनलिंग प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अब तक की सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीनों में से एक है। इस महाकाय मशीन का कुल वजन लगभग 3100 टन है और इसकी लंबाई 96 मीटर है। यह मशीन एक 6 किलोमीटर लंबी सिंगल-ट्यूब सुरंग खोदेगी। इसके भीतर से ही बुलेट ट्रेन की अप और डाउन दोनों लाइनें गुजरेंगी। यह टनल बुलेट ट्रेन रूट के मुंबई में बनाए कुल 21 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन का हिस्सा है।

जमीन से 56 मीटर नीचे से हुआ लॉन्च, दो तकनीकों का हो रहा इस्तेमाल

रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक इस 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत खंड में से 16 किलोमीटर का हिस्सा घनसोली के सांवली से लेकर बीकेसी) के बीच का है। इसे टनल बोरिंग मशीनों के जरिए खोदा जा रहा है। बाकी 5 किलोमीटर का हिस्सा न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड तकनीक के जरिए पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इस नई टीबीएम को विक्रोली में जमीन की सतह से 56 मीटर नीचे बनाए गए एक विशाल शाफ्ट से लॉन्च किया गया है। इसने अब बीकेसी की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया है।

क्या है मिक्सशील्ड तकनीक और इसकी खासियतें?

इस प्रोजेक्ट में इस्तेमाल की जा रही मिक्सशील्ड टेक्नोलॉजी को विशेष रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है। यह तकनीक मिश्रित मिट्टी की स्थिति और उन इलाकों में जहां भूजल का दबाव बहुत अधिक होता है, वहां पूरी सुरक्षा के साथ काम करने में सक्षम है। टनलिंग के दौरान जमीन धंसने या जमीन के ऊपर होने वाली हलचल और व्यवधान को यह तकनीक बिल्कुल न्यूनतम रखती है। इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक तरफ सुरंग की खुदाई करती जाती है और साथ ही साथ प्रीकास्ट कंक्रीट लाइनिंग सेगमेंट्स को अपनी जगह पर फिट भी करती जाती है। इससे निर्माण की गति काफी तेज हो जाती है और सुरक्षा के मानक भी बेहतर होते हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और महापे में बना कास्टिंग यार्ड

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इस पूरे प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने के लिए विक्रोली में 56 मीटर गहरा लॉन्च शाफ्ट तैयार किया है। इसके साथ ही वहां स्लरी और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, एक समर्पित पावर सबस्टेशन और अन्य आवश्यक सहायक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया गया है। सुरंग की खुदाई के दौरान आसपास की इमारतों को कोई नुकसान न पहुंचे, इसके लिए बेहद संवेदनशील निगरानी उपकरण लगाए गए हैं। इनमें सेटलमेंट मार्कर्स, टिल्ट मीटर्स, सीस्मोग्राफ और 3D मॉनिटरिंग टारगेट शामिल हैं, जो पल-पल की रिपोर्ट दर्ज कर रहे हैं। सुरंग की दीवारों को मजबूती देने के लिए जरूरी करीब 77000 प्रीकास्ट कंक्रीट सेगमेंट्स का निर्माण करने के लिए महापे में 11.17 हेक्टेयर का एक विशाल कास्टिंग यार्ड स्थापित किया गया है।

क्या है इस टनलिंग प्रोजेक्ट की डेडलाइन?

रेलवे अधिकारियों द्वारा दी गई समयसीमा के अनुसार, इस अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट को दो अलग-अलग चरणों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विक्रोली से बीकेसी साल 2027 की शुरुआत तक और विक्रोली से घनसोली को मार्च 2028 तक पूरा किया जाएगा।

Viral Post: बेंगलुरु में टीचर की सिर्फ 6000 रुपये सैलरी? वायरल पोस्ट पर लोगों ने जताई हैरानी

Viral Post: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट में एक प्राइवेट स्कूल में काम करने वाली टीचर की सैलरी सुनकर हर कोई हैरान है। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में एक यूजर ने बताया की बेंगलुरु के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने वाली टीचर की कथित 6,000 रुपये मासिक सैलरी मिलती है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। व्यक्ति के इस दावे के बाद लोगों के बीच प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों के कम वेतन और बड़े शहरों में लगातार बढ़ रही खर्चों को लेकर बहस शुरू हो गई है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा पोस्ट

सोशल मीडिया एक्स (X) पर मोहम्मद नौसाथ नाम के एक यूजर ने दावा किया कि, उनकी भाभी को बेंगलुरु के एक प्री-स्कूल में टीचर की नौकरी मिली है। उन्होंने बताया कि उन्हें हर महीने केवल 6,000 रुपये वेतन देने की बात कही गई। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मेरी भाभी को अभी-अभी बेंगलुरु के एक प्ले-स्कूल/किंडरगार्टन में टीचर की नौकरी मिली है और उन्हें हर महीने सिर्फ 6,000 रुपये वेतन मिलेगा। एक तरफ स्कूलों की फीस लगातार बढ़ रही है, जबकि दूसरी तरफ शिक्षकों को इतनी कम सैलरी दी जा रही है। आखिर कोई भी व्यक्ति किसी मेट्रो शहर में 6,000 रुपये महीने में कैसे गुजारा कर सकता है?” इसके साथ ही उन्होंने लोगों से इस मुद्दे पर अपनी राय भी मांगी।

लोगों ने किए कमेंट

ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यूजर ने इस पर तरह-तरह के रिएक्श दे रहे हैं। कई यूजर्स ने प्राइवेट स्कूलों में टीचरों को मिलने वाले कम वेतन, काम करने की परिस्थितियों और शिक्षा क्षेत्र में वेतन व्यवस्था को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। कई यूजर्स ने इतनी कम सैलरी पर कर्मचारियों से की जाने वाली उम्मीदों पर सवाल उठाए। एक व्यक्ति ने व्यंग्य करते हुए लिखा कि 6,000 रुपये महीने में पहले किराया, बिजली-पानी के बिल, पढ़ाई और राशन का खर्च निकाल लें, फिर अगर कुछ पैसे बच जाएं तो परिवार के साथ बाहर खाना भी खा सकते हैं।

इन दावों को कुछ लोगों ने किया खारिज

वहीं कई लोगों ने इस दावे पर भरोसा नहीं किया। उनका कहना था कि बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में किसी शिक्षक को सिर्फ 6,000 रुपये महीने की सैलरी मिलना यकीन करना मुश्किल है। एक यूजर ने टिप्पणी की कि दक्षिण भारत के कई इलाकों में निर्माण कार्य करने वाले मजदूर भी इससे कहीं अधिक कमाई कर लेते हैं, इसलिए इस दावे की सच्चाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। एक अन्य यूजर ने इस कथित वेतन की तुलना दूसरे क्षेत्रों में मिलने वाली शुरुआती नौकरियों की सैलरी से की। उनका कहना था कि कई संस्थानों में हेल्पर और सपोर्ट स्टाफ को भी इससे अधिक वेतन मिलता है। ऐसे में एक शिक्षक को सिर्फ 6,000 रुपये महीने मिलने का दावा कई लोगों को अविश्वसनीय लगा।

Satluj Row: दिलजीत दोसांझ के फैंस से हर हाल में फिल्म देखने की लगाई थी गुहार, अब ZEE5 ने एंटी-पायरेसी अपील जारी की

Satluj Row: ZEE5 पर रिलीज होने के सिर्फ दो दिन बाद ही, ‘सतलुज’ फ़िल्म को हटा दिया गया, जिसमें दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालरा का किरदार निभाया है। इसके बाद, एक्टर ने लोगों से फ़िल्म की डाउनलोड की गई कॉपीज को आगे भेजने की अपील की ताकि यह ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंच सके। हालांकि यह फ़िल्म भारत में उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसके पायरेटेड वर्जन अभी भी फैल रहे हैं, और इसी वजह से ZEE5 ने लोगों से इन डाउनलोड की गई फाइलों को आगे भेजना बंद करने की अपील की है।

सोमवार, 6 जुलाई को, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘सतलुज’ की पायरेटेड कॉपीज फैलने के बाद ZEE5 ने एक और बयान जारी किया। अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर OTT प्लेटफ़ॉर्म ने कहा, “हमें उम्मीद है और हम हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। पायरेसी को बढ़ावा न दें। हम ‘सतलुज’ को आप तक वापस पहुँचाने के लिए हर संभव रास्ता तलाशने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

ZEE5 ने एक पोस्टर भी शेयर किया जिसमें यह मैसेज था- “सतलुज को वापस लाने के लिए हम अपनी तरफ से कोशिश कर रहे हैं। प्लीज आप भी अपना योगदान दें, पायरेसी को सपोर्ट न करें।” इस बारे में बात करते हुए कि एक बार कंटेंट रिलीज़ हो जाने के बाद उसे बैन करना या डिलीट करना नामुमकिन है।

एक्टर ने आगे कहा, “तो अब मुझे बहुत राहत महसूस हो रही है कि आखिरकार फिल्म आप तक पहुंच गई है। अब यह आपकी फिल्म है। अब इसे रोका नहीं जा सकता। यह अब लोगों की फिल्म है। आप इसे अब रोक नहीं सकते। मुझे लगता है कि जो लोग ऐसा सोच रहे हैं कि एक बार कोई चीज ऑनलाइन आ जाए तो उसे बस ऐसे ही डिलीट किया जा सकता है, वे या तो मासूम हैं या उन्हें जानकारी नहीं है।”

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दिलजीत ने उन लोगों से, जिन्होंने फिल्म डाउनलोड की है, इसे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए कहा और कहा, “अब आप इसे आपस में शेयर कर सकते हैं। यह आपकी फिल्म है। लेकिन मैं खुश और राहत महसूस कर रहा हूं कि फिल्म आखिरकार दर्शकों तक पहुंच गई। बहुत से लोगों ने इसे पहले ही डाउनलोड कर लिया है। एक बार कोई चीज़ ऑनलाइन आ जाती है, तो वह कभी डिलीट नहीं होती। मैंने राजस्थान का एक वीडियो देखा जिसमें लोग फिल्म देख रहे हैं। मुझे बहुत खुशी हुई। प्लीज इसे अपने दोस्तों और अपने आस-पास के सभी लोगों को दिखाएं।”

हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी और दिलजीत दोसांझ की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘सतलुज’, मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन से प्रेरित है। इस फिल्म का नाम पहले ‘पंजाब ’95’ था और सर्टिफिकेशन से जुड़ी दिक्कतों के कारण यह लगभग चार साल तक रिलीज़ नहीं हो पाई थी। CBFC से मंज़ूरी मिलने के लिए लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार इसका प्रीमियर ZEE5 पर हुआ; दिलजीत ने पहले ही कहा था कि प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ हुआ वर्शन बिना किसी कट-छाँट वाला है। इस फिल्म को RSVP और MacGuffin Pictures ने प्रोड्यूस किया है और इसमें दिलजीत के साथ अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान मुख्य भूमिकाओं में हैं।

कल का मौसम 7 जुलाई: IMD ने इन 20+ राज्यों में भारी बारिश-आंधी का अलर्ट दिया, बिहार से MP तक बवाली मौसम, यहां रेड जोन जैसे हालात

India Weather Update for 7th July: देश के बड़े हिस्से में दक्षिण-पश्चिम मानसून का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 7 जुलाई के लिए देश के 20 से अधिक राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश और भीषण आंधी-तूफान का ऑरेंज और रेड वॉच अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण झारखंड और उससे सटे उत्तरी आंतरिक ओडिशा के ऊपर बना डिप्रेशन 25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ गया है। इससे बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में बवाली मौसम के आसार बन गए हैं।

यह डिप्रेशन अगले 24 घंटों के दौरान झारखंड, उत्तरी छत्तीसगढ़ और उससे सटे पूर्वी उत्तर प्रदेश व पूर्वी मध्य प्रदेश के इलाकों को प्रभावित करेगा। इसके साथ ही दक्षिण गुजरात से उत्तरी केरल तट तक ऑफ-शोर ट्रफ और एक अन्य वेदर सिस्टम (शीयर जोन) भी सक्रिय है, जिसके कारण अगले 3 दिनों तक देश के मध्य हिस्सों में मॉनसून बेहद एक्टिव फेज (सक्रिय चरण) में रहेगा।

रेड जोन जैसे हालात: इन 4 राज्यों में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग ने 7 जुलाई को देश के चार प्रमुख क्षेत्रों के लिए सबसे गंभीर चेतावनी जारी की है। यहां मूसलाधार बारिश से हालात बिगड़ सकते हैं:-

तटीय कर्नाटक

गुजरात राज्य

कोंकण और गोवा

मध्य महाराष्ट्र

इन सभी इलाकों में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यंत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। कोंकण, गोवा, गुजरात और तटीय कर्नाटक में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच यह अलर्ट बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

बिहार से मध्य प्रदेश तक बहुत भारी बारिश

7 जुलाई को मध्य, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में बवाली मौसम का असर दिखेगा। मौसम विभाग ने नीचे दिए गए राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है:-

बिहार और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम: यहां मानसून की मूसलाधार बारिश के साथ बिजली कड़कने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ (महाराष्ट्र): इन क्षेत्रों में डिप्रेशन के असर से बहुत भारी बारिश होगी। साथ ही इन राज्यों में आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने की भी चेतावनी है।

आंतरिक कर्नाटक: तटीय इलाकों के साथ-साथ कर्नाटक के अंदरूनी हिस्सों में भी भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जा रखी है।

हिमाचल प्रदेश और पूर्वी राजस्थान: उत्तर-पश्चिम भारत के इन दोनों पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में भी 7 जुलाई को बहुत भारी बारिश की संभावना है।

अरुणाचल प्रदेश: पूर्वोत्तर के इस राज्य में भी भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा जिससे वज्रपात की भी आशंका है।

येलो अलर्ट: दिल्ली-NCR, यूपी समेत इन राज्यों में भारी बारिश और आंधी का डबल अटैक

मौसम विभाग के मुताबिक देश के कई राज्यों में 7 जुलाई को भारी बारिश के साथ तेज रफ्तार आंधी और बिजली गिरने का डबल अटैक देखने को मिलेगा:-

दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़: राजधानी दिल्ली समेत आसपास के इलाकों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड: पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कुछ जगहों पर भारी बारिश का अलर्ट है। पूरे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और यूपी में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान है।

पंजाब और राजस्थान: पंजाब और पश्चिमी राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। राजस्थान में भी 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अनुमान है।

जम्मू-कश्मीर-लद्दाख: इन पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका है।

झारखंड और ओडिशा: चक्रवातीय सिस्टम के प्रभाव से इन दोनों राज्यों में भारी बारिश के साथ ही 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और बिजली गिरने का अलर्ट रहेगा।

दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत: केरल और माहे, असम और मेघालय, तथा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश और बिजली चमकने के आसार हैं। गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में भी भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी है।

कर्नाटक और तेलंगाना में 60 किमी की रफ्तार से थंडरस्कॉल

मौसम विभाग ने दक्षिण भारत के दो राज्यों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है:-

कर्नाटक और तेलंगाना: इन दोनों राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले भयानक आंधी-तूफान की संभावना है जिसकी रफ्तार बढ़कर 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

मजबूत सतही हवाएं: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, तटीय कर्नाटक, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में मजबूत सतही हवाएं भी चलेंगी।

मछुआरों के लिए चेतावनी: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में उठेगा तूफान

समुद्र में बेहद खराब मौसम और तेज हवाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है:-

उत्तरी कोंकण तट और अरब सागर: उत्तरी कोंकण तट और उससे सटे पूर्व-मध्य व पश्चिम-मध्य अरब सागर में 60-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाएं चल सकती हैं। इनकी रफ्तार 80 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

दक्षिण कोंकण, गोवा तट: यहां 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी जो बढ़कर 70 किमी प्रति घंटे तक जा सकती हैं।

गुजरात, कर्नाटक और केरल तट: दक्षिण गुजरात, कर्नाटक, केरल तटों और लक्षद्वीप क्षेत्र में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाएं (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) दर्ज की जा सकती हैं।

बंगाल की खाड़ी: ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों के साथ-साथ मध्य, उत्तरी और दक्षिणी बंगाल की खाड़ी में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे) की रफ्तार से तूफानी मौसम रहने की आशंका है।

5ःह

मॉनसून की स्थिति

मॉनसून की उत्तरी सीमा (NLM) फिलहाल जामनगर, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनू, हिसार और बठिंडा से होकर गुजर रही है। अगले 3 दिनों के भीतर इसके उत्तर अरब सागर, गुजरात के शेष हिस्सों, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं।

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शानदार-दमदार एक्सप्रेसवे का देश बनता जा रहा भारत और वहीं देखिए कंगाल पाकिस्तान के एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट का ऐसा हाल!

जहां एक तरफ भारत आज आधुनिक और शानदार-दमदार एक्सप्रेसवे का देश बनता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी कंगाली और बदहाली के आंसू रो रहा है। भारत में जहां रिकॉर्ड समय में बड़े-बड़े हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पूरे किए जा रहे हैं वहीं पाकिस्तान के आर्थिक संकट ने उसके सबसे प्रमुख शहरों के विकास को पूरी तरह से ठप कर दिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को अब रावलपिंडी डिवीजन में अपने विकास खर्चों में भारी कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसके चलते लंबे समय से वादे किए गए कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स अधर में लटक गए हैं। इसने वहां के गवर्नेंस और अर्बन प्लानिंग के पैरालिसिस को पूरी तरह उजागर कर दिया है।

रावलपिंडी डिवीजन के बजट में 60 फीसदी की भारी कटौती

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक नए वित्तीय वर्ष में रावलपिंडी डिवीजन में काम करने वाले सभी प्राधिकरणों के विकास आवंटन में भारी कटौती की गई है। इस फंड संकट के कारण छह बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह से रोक दिया गया है। रावलपिंडी, अटॉक, झेलम, चकवाल, तलगंग और मरी को कवर करने वाले वार्षिक जिला विकास कार्यक्रमों के बजट में करीब 60 प्रतिशत की कटौती की गई है। इस बड़ी कटौती के कारण अब नए सार्वजनिक निवेश के लिए कोई गुंजाइश नहीं बची है। फंड की इस भारी किल्लत का मतलब यह है कि 30 जून 2027 से पहले किसी भी बड़े विकास कार्य या प्रोजेक्ट की शुरुआत होने की कोई उम्मीद नहीं है।

अधर में लटका ‘लेह एक्सप्रेसवे’ और मियावाकी फॉरेस्ट

प्रशासनिक अधिकारियों ने इसके साथ ही पूरे डिवीजन में मियावाकी जंगलों के विस्तार पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी है। जिला प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान रावलपिंडी या उसके पड़ोसी जिलों में एक भी ऐसा अर्बन फॉरेस्ट विकसित नहीं किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिन प्रोजेक्ट्स को अनिश्चित काल के लिए रोका गया है उनमें लेह एक्सप्रेसवे और मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल शामिल हैं। ये दोनों ही प्रोजेक्ट्स पूर्व आंतरिक मंत्री शेख रशीद अहमद के राजनीतिक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और अब पूरी तरह से ठप हो चुके हैं।

ये मेगा प्रोजेक्ट्स भी हुए डिले या पूरी तरह से ड्रॉप

फंड की कमी और आर्थिक तंगी की मार केवल एक्सप्रेसवे तक ही सीमित नहीं है बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण नागरिक सुविधाओं वाले प्रोजेक्ट्स पर भी पड़ी है। मरी रोड सिग्नल-फ्री कॉरिडोर प्रोजेक्ट को अब कम से कम दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दिया गया है। रावलपिंडी में बार-बार आने वाली शहरी बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए डिजाइन की गई प्रस्तावित भूमिगत सीवरेज टनल योजना को अब पूरी तरह से छोड़ दिया गया है। रावलपिंडी और इस्लामाबाद के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किए गए गाजी बरोथा वॉटर प्रोजेक्ट को भी बंद कर दिया गया है। इसकी मुख्य वजह यह रही कि इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 17 अरब रुपये से बढ़कर लगभग 110 अरब रुपये तक पहुंच गई। इसे वहन करना कंगाल पाकिस्तान के बस के बाहर था।

अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं का ही सहारा!

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों ने विकास एजेंसियों को साफ तौर पर सूचित कर दिया है कि ये सभी प्रोजेक्ट्स अब केवल एक ही शर्त पर आगे बढ़ सकते हैं। अगर इनके लिए विश्व बैंक या एशियाई विकास बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं से वित्तीय सहायता या लोन सुरक्षित किया जा सके। इसके बिना पाकिस्तान सरकार के पास इन्हें पूरा करने का कोई पैसा नहीं है। रावलपिंडी विकास प्राधिकरण (RDA) के पूर्व अध्यक्ष तारिक मुर्तजा ने इस बदहाली पर बात करते हुए बताया कि लेह एक्सप्रेसवे, सीवरेज टनल और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट को उनके कार्यकाल के दौरान सभी आवश्यक मंजूरियां और फंडिंग मिल चुकी थी। लेकिन देश में हुए सरकार परिवर्तन के बाद इन सभी जनहित के प्रोजेक्ट्स को बंद कर दिया गया।